🧬 जीवविज्ञान (वनस्पति व प्राणी)राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA)

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33 अध्याय, पाठ्यक्रम क्रम में, हिंदी व अंग्रेज़ी में।

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  • 33अध्याय
  • 264क्विज़ प्रश्न
  • EN + हिंहर अध्याय दोनों भाषाओं में

पाठ्यक्रम

NEET जीवविज्ञान (वनस्पति व प्राणी) के अध्याय

जिस क्रम में पढ़ना चाहिए।

🧬 33 अध्याय, क्रम सेनिःशुल्क अध्याय33 अध्याय
  1. जीव जगत — जीवित क्या माना जाता है, तथा वर्गिकीय पदानुक्रमनिःशुल्क
  2. जैव वर्गीकरण — पाँच जगत, तथा वे वस्तुएँ जो किसी में नहीं बैठतीं
  3. पादप जगत — शैवाल से आवृतबीजी, तथा स्थल की विजय
  4. प्राणी जगत — वर्गीकरण का आधार तथा क्रम में संघ
  5. पुष्पी पादपों की आकारिकी — मूल, स्तंभ, पर्ण, पुष्प, फल व बीज
  6. पुष्पी पादपों का शरीर — ऊतक, ऊतक तंत्र व द्वितीयक वृद्धि
  7. प्राणियों में संरचनात्मक संगठन — चार ऊतक प्रकार तथा मेंढक
  8. कोशिका — जीवन की इकाई: प्रोकैरियोट, कोशिकांग व झिल्ली
  9. जैव-अणु — ऐमीनो अम्ल से एंज़ाइम बलगतिकी तक
  10. कोशिका चक्र व कोशिका विभाजन — समसूत्री, अर्धसूत्री व वे कहाँ भिन्न हैं
  11. उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण — Z-योजना, कैल्विन चक्र व C₄ लाभ
  12. पादपों में श्वसन — ग्लाइकोलिसिस, TCA चक्र व ATP लेखा
  13. पादप वृद्धि व परिवर्धन — वृद्धि वक्र, पाँच हार्मोन, दीप्तिकालिता
  14. पाचन व अवशोषण — आहार नाल, एंज़ाइम व प्रत्येक पोषक कहाँ अवशोषित होता है
  15. श्वसन व गैसों का विनिमय — क्रियाविधि, फुफ्फुस आयतन व रुधिर O₂ व CO₂ कैसे ले जाता है
  16. शारीरिक द्रव व परिसंचरण — रुधिर, हृदय, हृद् चक्र व ECG
  17. उत्सर्जी उत्पाद व उनका निष्कासन — वृक्काणु, मूत्र निर्माण व उसका नियमन
  18. गमन व संचलन — सर्पी तंतु सिद्धांत, कंकाल व संधियाँ
  19. तंत्रिकीय नियंत्रण व समन्वय — तंत्रिकाकोशिका, तंत्रिका आवेग व सिनैप्स
  20. रासायनिक समन्वय व एकीकरण — अंतःस्रावी ग्रंथियाँ, उनके हार्मोन व विकार
  21. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन — पुष्प, द्वि-निषेचन व बीज
  22. मानव जनन — युग्मकजनन, ऋतुस्राव चक्र व परिवर्धन
  23. जनन स्वास्थ्य — गर्भनिरोध, यौन संचरित संक्रमण व सहायित जनन
  24. वंशागति व विविधता के सिद्धांत — मेंडल, अनुपात व मानव आनुवंशिक विकार
  25. वंशागति का आणविक आधार — DNA, केंद्रीय सिद्धांत व जीन अभिव्यक्ति
  26. विकास — जीवन की उत्पत्ति, प्रमाण, डार्विनवाद व हार्डी–वाइनबर्ग सिद्धांत
  27. मानव स्वास्थ्य व रोग — रोगजनक, प्रतिरक्षा तंत्र व प्रतिरक्षा
  28. मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव — किण्वन, वाहितमल उपचार व जैव-नियंत्रण
  29. जैव-प्रौद्योगिकी — सिद्धांत व प्रक्रम: उपकरण, क्लोनिंग संवाहक व rDNA
  30. जैव-प्रौद्योगिकी व उसके अनुप्रयोग — GM फसलें, जीन चिकित्सा व जैव-सुरक्षा
  31. जीव व समष्टि — अनुकूलन, समष्टि वृद्धि व अंतरक्रियाएँ
  32. पारितंत्र — ऊर्जा प्रवाह, पारिस्थितिक पिरामिड व पोषक चक्रण
  33. जैव-विविधता व संरक्षण — पैटर्न, हानि व हम इसे कैसे बचाते

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अध्याय से: जीव जगत — जीवित क्या माना जाता है, तथा वर्गिकीय पदानुक्रम

गुणों का कौन-सा युग्म जीवों का वास्तविक परिभाषक माना जाता है?

उत्तर और कारण देखें

उत्तर: A.

उपापचय का किसी भी दिशा में अपवाद नहीं है — प्रत्येक जीवित कोशिका में वह है और किसी अजीवित वस्तु में नहीं — तथा चेतना, अर्थात् पर्यावरण को भाँपने व अनुक्रिया देने की क्षमता, सर्व-समावेशी है। वृद्धि व जनन दोनों असफल होते हैं: क्रिस्टल बाह्य संचय से बढ़ते हैं, और खच्चर, श्रमिक मधुमक्खियाँ व बंध्य जीव जनन बिना जीवित हैं।

मूल्य

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आधिकारिक स्रोत

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