रोविंग, रिंग स्पिनिंग, डबलिंग व आधुनिक कताई प्रणालियाँ

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर में XE9 वस्त्र अभियांत्रिकी एवं तंतु विज्ञान के खंड XE9.2, “यार्न निर्माण, यार्न संरचना व गुण”, के मध्य भाग का उत्तर देता है: “रोविंग निर्माण में ड्राफ्टिंग, ट्विस्टिंग व बॉबिन बिल्डिंग के सिद्धांत; रोविंग मशीन में आधुनिक विकास; रिंग स्पिनिंग में ड्राफ्टिंग, ट्विस्टिंग व कॉप बिल्डिंग के सिद्धांत; एंड ब्रेकेज के कारण; रिंग स्पिनिंग मशीन में आधुनिक विकास; रिंग डबलर व टू-फ़ॉर-वन ट्विस्टर के कार्य-सिद्धांत; एकल यार्न ट्विस्ट व फ़ोल्डेड यार्न ट्विस्ट का संबंध; कॉम्पैक्ट, रोटर, एयर-जेट, एयर-वोर्टेक्स, फ़्रिक्शन, कोर, रैप व ट्विस्टलेस स्पिनिंग प्रक्रियाओं के सिद्धांत।” यह सिखाता है कि स्लिवर कैसे पतली होकर ऐंठित हो पैकेज बनती है, ट्विस्ट कैसे गिना जाता है, और नई प्रक्रियाएँ ट्विस्ट कैसे डालती या तंतु कैसे बाँधती हैं। संख्यात्मक प्रश्न प्रति मीटर ट्विस्ट, ट्विस्ट मल्टीप्लायर व टर्न प्रति इंच, स्पिंडल चाल से निर्गम चाल, फ़ोल्डेड यार्न ट्विस्ट, टू-फ़ॉर-वन स्पिंडल चाल तथा रोटर-स्पिनिंग ट्विस्ट हैं।

1. रोविंग निर्माण: ड्राफ्टिंग, ट्विस्टिंग व बॉबिन बिल्डिंग

रिंग फ़्रेम भारी ड्रॉफ्रेम स्लिवर सीधे नहीं ले सकता, क्योंकि उसका ड्राफ्ट सीमित है, अतः रोविंग फ़्रेम (स्पीड फ़्रेम) स्लिवर को कुछ गुना ड्राफ्ट से पतला करता है और इतना ही ट्विस्ट डालता है कि रोविंग बिना झूठे ड्राफ्ट के लपेटी-खोली जा सके। स्लिवर डबल-एप्रन ड्राफ्टिंग प्रणाली से गुज़रकर घूमते फ़्लायर तक जाती है, जो ट्विस्ट डालता और रोविंग को बॉबिन पर लपेटता है।

  • ट्विस्ट: प्रति फ़्लायर परिक्रमण एक टर्न, अतः टर्न प्रति मीटर = फ़्लायर rpm ÷ अग्र रोलर की निर्गम चाल (m/min)। 1000 rpm व 20 m/min पर रोविंग में 50 turns/m होते हैं। रोविंग का ट्विस्ट कम रखा जाता है, क्योंकि अधिक ट्विस्ट से रिंग फ़्रेम में ड्राफ्टिंग कठिन होती है।
  • वाइंडिंग: बॉबिन फ़्लायर से तेज़ घूमता है (बॉबिन लीड) और चालों का अंतर रोविंग लपेटता है। वाइंडिंग rpm = निर्गम चाल ÷ (π × पैकेज का वर्तमान व्यास), अतः परतें चढ़ने पर बॉबिन की चाल चरणबद्ध घटनी चाहिए; पुराने फ़्रेम इसके लिए कोन-ड्रम व डिफ़रेंशियल लेते हैं, आधुनिक सर्वो ड्राइव।
  • बॉबिन बिल्डिंग: हर परत के बाद बॉबिन रेल उठती व पलटती है, प्रत्येक परत में ट्रैवर्स घटता है जिससे सिरे ढलवाँ बनते हैं, और प्रति परत उठान रोविंग व्यास (कुंडली-पिच) से तय होता है, जबकि बॉबिन बढ़ने पर रेल की उठान-चाल घटती जाती है।

आधुनिक विकास हैं स्पिंडल व बॉबिन पर पृथक सर्वो ड्राइव (कोन-ड्रम नहीं), स्वचालित डॉफ़िंग व रिंग फ़्रेम तक बॉबिन-परिवहन, रोविंग-तनाव का इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण, तथा अधिक चाल हेतु हल्के टॉप-आर्म फ़्लायर।

2. रिंग स्पिनिंग: ड्राफ्टिंग, ट्विस्टिंग व कॉप बिल्डिंग

रोविंग डबल-एप्रन प्रणाली में (ब्रेक ड्राफ्ट के बाद मुख्य ड्राफ्ट) कई गुना (उच्च ड्राफ्ट से) खिंचती है, और अग्र रोलरों से निकली डोरी स्पिंडल व ट्रैवलर से ऐंठित होकर बॉबिन पर लिपटती है। यार्न अग्र रोलर से लैपेट गाइड, ट्रैवलर (रिंग पर चलती छोटी क्लिप) के चारों ओर होकर ट्यूब पर पहुँचता है; यार्न ट्रैवलर को घसीटता है, इसलिए ट्रैवलर की चाल स्पिंडल से थोड़ी पीछे रहती है। ट्रैवलर का यार्न-अक्ष के परितः प्रत्येक चक्कर एक टर्न ट्विस्ट डालता है, और स्पिंडल व ट्रैवलर की चालों का अंतर वाइंडिंग चाल है।

ट्विस्ट (टर्न प्रति मीटर) = ट्रैवलर चाल ÷ निर्गम चाल। 15 000 rpm के स्पिंडल व 4 % पीछे रहते ट्रैवलर (14 400 rpm) के साथ 800 turns/m ट्विस्ट के लिए निर्गम चाल 14 400 ÷ 800 = 18 m/min चाहिए। ट्विस्ट को TPI = α_e × √Ne (α_e अंग्रेज़ी ट्विस्ट मल्टीप्लायर है) या tex प्रणाली में टर्न/cm = TM ÷ √tex के रूप में लिखा जाता है, जहाँ TM टर्न/cm × √tex में ट्विस्ट मल्टीप्लायर है। चूँकि Ne = 590.5 ÷ tex, TM = 9.57 α_e। 25 Ne व α_e = 4.2 के लिए TPI = 4.2 × 5 = 21।

कॉप बिल्डिंग: रिंग रेल कैम या सर्वो पथ पर ऊपर-नीचे चलती है ताकि यार्न वाइंडिंग व बाइंडिंग कुंडलियों की शंक्वाकार परतों में बिछे, और चेज़ क्रमशः आगे बढ़े। कॉप नीचे से ऊपर ढलवाँ कंधे सहित बनता है, जिससे दृढ़, स्थिर पैकेज मिलता है जिसकी परतें खुलते समय नहीं उधड़तीं। यार्न-तनाव कॉप की स्थिति व बिल्डिंग के साथ चक्रीय रूप से बदलता है।

⚠️ जाल
स्पिंडल rpm ÷ निर्गम चाल केवल नाममात्र ट्विस्ट है। वास्तव में डाला गया ट्विस्ट ट्रैवलर rpm ÷ निर्गम चाल है, जो कुछ प्रतिशत कम होता है। उत्तर देने से पहले देखें कि प्रश्न कौन-सी परिपाटी ले रहा है।

3. एंड ब्रेकेज व आधुनिक रिंग फ़्रेम

एंड ब्रेक तब होता है जब अग्र रोलर व ट्रैवलर के बीच यार्न का तनाव सबसे कमज़ोर स्थान की सामर्थ्य से अधिक हो जाए। अतः ब्रेक तनाव व यार्न के पतले, कमज़ोर स्थानों दोनों से जुड़े हैं, और प्रति 100 स्पिंडल-घंटे गिने जाते हैं। तनाव स्पिंडल चाल, ट्रैवलर भार, रिंग व ट्रैवलर की दशा, बैलून के आकार तथा यार्न-काउंट से प्रभावित होता है।

समूहकारणों के उदाहरण
कच्चा माल व तैयारीछोटे तंतु, नेप, कम तंतु-सामर्थ्य; असमान या गलत ऐंठी रोविंग; ड्राफ्टिंग तरंगें
मशीनघिसी रिंग या ट्रैवलर, गलत ट्रैवलर भार, असंरेखित स्पिंडल या गाइड, घिसे एप्रन, कंपन, ऊँची स्पिंडल चाल
वातावरणबहुत कम आर्द्रता से फ़्लाई व स्थैतिक आवेश; बहुत अधिक आर्द्रता से रोलरों पर लैपिंग
संचालनपीसिंग दोष, ड्राफ्टिंग क्षेत्र में फ़्लाई, ढीली ट्यूब, खराब डॉफ़िंग

आधुनिक रिंग फ़्रेम में अधिक लंबी मशीनें, स्पिंडल की व्यक्तिगत निगरानी व यार्न-ब्रेक के सेंसर, सर्वो-चालित रिंग-रेल व रोलर गतियाँ, सक्शन आधारित न्यूमाफ़िल व स्वचालित पीसिंग युक्तियाँ, कॉम्पैक्ट अटैचमेंट तथा पूरे पैकेजों को वाइंडर तक ले जाने वाली स्वचालित डॉफ़िंग होती है।

4. डबलिंग, टू-फ़ॉर-वन ट्विस्टिंग व फ़ोल्डेड-यार्न ट्विस्ट

डबलिंग (प्लाइंग, फ़ोल्डिंग) दो या अधिक एकल यार्नों को एक साथ ऐंठकर अधिक मज़बूत, एकसमान, संतुलित यार्न बनाती है। रिंग डबलर रिंग फ़्रेम जैसा कार्य करता है: समानांतर लिपटे पैकेजों से यार्न रोलरों से होकर रिंग-ट्रैवलर पैकेज तक जाता है, अतः ट्विस्ट प्रति मीटर = ट्रैवलर चाल ÷ निर्गम चाल। टू-फ़ॉर-वन ट्विस्टर एकल यार्न पैकेज को खोखले स्पिंडल के भीतर रखता है; यार्न स्पिंडल-अक्ष से ऊपर उठता है, शीर्ष पर निकलकर पैकेज के चारों ओर बैलून बनाता है। यार्न अक्षीय पथ में एक बार व बैलून में एक बार ऐंठता है, अतः प्रति स्पिंडल परिक्रमण दो टर्न: ट्विस्ट प्रति मीटर = 2 N ÷ V। समान स्पिंडल चाल पर समान ट्विस्ट के लिए वह रिंग डबलर से दोगुनी प्रति-परिक्रमण लंबाई देता है, अतः उत्पादन लगभग दोगुना है। 25 m/min पर 600 turns/m फ़ोल्ड-ट्विस्ट के लिए N = 600 × 25 ÷ 2 = 7500 rpm चाहिए।

एकल व फ़ोल्डेड ट्विस्ट। मान लें एकल यार्न का ट्विस्ट T_s (टर्न/m) एक दिशा (Z) में है और फ़ोल्ड-ट्विस्ट T_f विपरीत दिशा (S) में है, T_f प्रति मीटर फ़ोल्डेड यार्न पर नापा गया और फ़ोल्डिंग में लंबाई-परिवर्तन उपेक्षित। प्रत्येक एकल यार्न अपने अक्ष पर T_f टर्न से लिपटता है, अतः उसका शेष ट्विस्ट T_s − T_f रह जाता है। यदि फ़ोल्ड-ट्विस्ट उसी दिशा में हो तो एकल ट्विस्ट बढ़कर T_s + T_f हो जाता है। T_s = 600 Z व T_f = 400 S के साथ एकल यार्न में 200 Z बचता है। जब फ़ोल्ड-ट्विस्ट व एकल-ट्विस्ट के बलाघूर्ण संतुलित हों तो यार्न बलाघूर्ण-संतुलित होता है और ऐंठता नहीं; एकल ट्विस्ट से काफ़ी कम फ़ोल्ड-ट्विस्ट यार्न को जीवंत (torque-active) छोड़ता है। फ़ोल्डेड रैखिक घनत्व: 20 tex के n एकल नाममात्र 20 × n tex देते हैं, जिसे R 40 tex (20 tex × 2) लिखा जाता है; Ne में 1/Ne = Σ(1/Ne_i), अतः 2/40s का अर्थ 20 Ne है।

5. कॉम्पैक्ट व रोटर स्पिनिंग

कॉम्पैक्ट (संघनित) स्पिनिंग मुख्य ड्राफ्ट के बाद एक संघनन-क्षेत्र जोड़ती है। ड्राफ्टिंग रोलरों से निकला चपटा तंतु-फ़ीता ट्विस्ट डालने से पहले खाँचेदार या छिद्रित सक्शन ड्रम या लैटिस एप्रन (वायुगतिकीय या यांत्रिक संघनन) पर संकरा किया जाता है। अग्र रोलर निप पर बनने वाला स्पिनिंग ट्राइएंगल छोटा हो जाता है, अतः कम किनारे के तंतु ट्विस्ट से बाहर रह जाते हैं, और समान काउंट के पारंपरिक रिंग यार्न की तुलना में यार्न में रोएँ कम, सामर्थ्य व दीर्घन अधिक तथा एंड ब्रेक कम होते हैं। रिंग-स्पिनिंग ज्यामिति व ट्विस्टिंग अपरिवर्तित रहती हैं।

रोटर (ओपन-एंड) स्पिनिंग डोरी की निरंतरता तोड़ देती है। स्लिवर ओपनिंग रोलर को दी जाती है जो उसे एकल तंतुओं में कंघी करता है; वायुधारा उन्हें ट्रांसपोर्ट ट्यूब से तेज़ घूमते रोटर की भीतरी दीवार तक ले जाती है, जहाँ वे खाँचे में सरककर तंतुओं का वलय बनाते हैं। यार्न को खाँचे से नेवल के रास्ते खींचा जाता है और रोटर घूमने के साथ ऐंठता है, प्रति रोटर परिक्रमण एक टर्न, अतः ट्विस्ट (टर्न/m) = रोटर rpm ÷ टेक-अप चाल, ट्विस्ट-हानि न मानते हुए। 90 000 rpm व 900 turns/m पर टेक-अप 100 m/min होता है। रोटर का खाँचा तंतुओं की कई परतें दोहराता (डबल करता) है, जिससे यार्न एकसमान होता है, जबकि कचरा व धूल ओपनिंग-रोलर क्षेत्र में गिर जाते हैं। यार्न सीधे क्रॉस-वाउंड पैकेज पर लिपटता है और रोविंग व री-वाइंडिंग चरण समाप्त हो जाते हैं, पर यार्न की महीनता सीमित है (मोटी से मध्यम काउंट) और उसमें रैपर या बेल्ट तंतु होते हैं।

6. एयर-जेट व एयर-वोर्टेक्स स्पिनिंग

दोनों प्रक्रियाएँ पैकेज घुमाए बिना ड्रॉन स्लिवर से यार्न बनाती हैं। एयर-जेट स्पिनिंग में ड्रॉन फ़ीता विपरीत दिशाओं में चक्रित वायु वाली दो नोज़लों से गुज़रता है। पहली जेट किनारे के तंतुओं को खोलकर लिपटाती है; दूसरी, प्रबल जेट डोरी को ऐंठती है; दूसरी जेट के बाद डोरी के खुलने पर कुछ किनारे के तंतु लिपटे रह जाते हैं। यार्न फ़ैसिएटेड होता है: लगभग समानांतर तंतुओं का क्रोड, जिसे रैपर तंतु बाँधते हैं। एयर-वोर्टेक्स स्पिनिंग में एकल नोज़ल खोखले स्पिंडल के प्रवेश पर भँवर बनाती है: ड्रॉन फ़ीता वायु द्वारा स्पिंडल में खिंचता है, तंतुओं के अग्र सिरे भीतर जाकर क्रोड बनते हैं, और पिछले सिरे भँवर से खुलकर क्रोड के चारों ओर लिपट जाते हैं। इसमें भी क्रोड व रैपर तंतु होते हैं, और लिपटाव अधिक रिंग-जैसा, अधिक नियमित होता है।

निर्गम चालें रिंग स्पिनिंग से कई गुना हैं, रोविंग नहीं चाहिए, यार्न में रोएँ कम होते हैं; कीमत यह कि सामर्थ्य रिंग यार्न से कम है (क्रोड में ट्विस्ट कम है), और स्पर्श अधिक कड़ा व भारी होता है। दोनों स्टेपल मिश्रणों व पॉलिएस्टर-प्रधान कपास मिश्रणों के उपयुक्त हैं, और रैपर बनने के लिए अच्छी तंतु-लंबाई व एकरूपता चाहिए।

⚠️ जाल
एयर-जेट व एयर-वोर्टेक्स यार्न में ट्विस्ट किसी पैकेज या रोटर के परिक्रमण से नहीं, भँवर से बनता है और फिर अंशतः लुप्त हो जाता है, अतः ‘टर्न प्रति मीटर’ संरचना का वर्णन नहीं करते। सामर्थ्य लगभग अनऐंठे क्रोड को बाँधने वाले रैपर तंतुओं से आती है।

7. फ़्रिक्शन, कोर, रैप व ट्विस्टलेस स्पिनिंग

फ़्रिक्शन स्पिनिंग: खुले तंतु एक ही दिशा में घूमते दो छिद्रित ड्रमों के बीच की फाँक में दिए जाते हैं; सक्शन उन्हें वहाँ थामता है जबकि ड्रम उनके बीच डोरी को लुढ़काकर ऐंठते हैं। फिसलन न मानने पर डोरी की सतह-चाल ड्रम की सतह-चाल के बराबर होती है, अतः डोरी V_ड्रम ÷ (π d) से घूमती है और टर्न प्रति मीटर में ट्विस्ट आदर्श स्थिति में (D ÷ d) × N_ड्रम ÷ V_निर्गम है (D ड्रम व्यास, d डोरी व्यास, N_ड्रम ड्रम rpm)। बहुत ऊँची ट्विस्ट-निवेशन दर से ऊँची निर्गम चाल मिलती है, मोटी काउंट के साथ, और क्रोड (फ़िलामेंट या स्लिवर) दिए जाने पर कोर-शीथ संरचना बनती है (क्रोड फ़्रिक्शन-ऐंठे स्टेपल तंतु से ढका)।

  • कोर स्पिनिंग: रिंग फ़्रेम के अग्र रोलरों के निप पर सतत फ़िलामेंट (जैसे पॉलिएस्टर या खिंचा इलास्टेन) दिया जाता है और स्टेपल आवरण उसके चारों ओर ऐंठता है। उत्पाद में क्रोड की सामर्थ्य या प्रत्यास्थता व आवरण का स्पर्श मिलता है, जैसे सिलाई धागे व स्ट्रेच कपड़ों में।
  • रैप (खोखला-स्पिंडल) स्पिनिंग: ड्रॉन, अनऐंठी डोरी उस खोखले स्पिंडल से गुज़रती है जिस पर फ़िलामेंट या यार्न पैकेज है; स्पिंडल फ़िलामेंट को डोरी पर लपेटता है, अतः रैप प्रति मीटर = स्पिंडल rpm ÷ निर्गम चाल (6000 rpm व 30 m/min पर 200 रैप/m)। क्रोड समानांतर रहता है और केवल रैप उसे थामता है।
  • ट्विस्ट-लेस स्पिनिंग: तंतु-डोरी को ऐंठने की जगह चिपकाने वाले पदार्थ (जल-विलेय बंधक), निम्न-गलनांक तंतुओं के पिघलने या उलझाव से बाँधा जाता है। यह तेज़ चाल से बनता है पर सामर्थ्य बंधन पर निर्भर है, जो नमी व ऊष्मा से बदलता है।
प्रक्रियाट्विस्ट या बंधन की क्रियाविधि
रिंग, कॉम्पैक्टट्रैवलर से वास्तविक ट्विस्ट; प्रति ट्रैवलर चक्कर एक टर्न
रोटररोटर घूर्णन से वास्तविक ट्विस्ट; ओपन-एंड
एयर-जेट, एयर-वोर्टेक्सरैपर तंतु लगभग समानांतर क्रोड को बाँधते हैं
फ़्रिक्शनदो लुढ़कते ड्रमों से ट्विस्ट; कोर-शीथ संभव
रैप, कोरअनऐंठे क्रोड पर फ़िलामेंट रैप; या स्टेपल आवरण सहित फ़िलामेंट क्रोड

मुख्य बिंदु

  • रोविंग ट्विस्ट = फ़्लायर rpm ÷ निर्गम चाल; वाइंडिंग चाल का अंतर बॉबिन rpm − फ़्लायर rpm है, और पैकेज बढ़ने पर बॉबिन की चाल घटती है।
  • रिंग ट्विस्ट = ट्रैवलर rpm ÷ निर्गम चाल, और TPI = α_e × √Ne, TM = 9.57 α_e; वाइंडिंग = स्पिंडल − ट्रैवलर चाल।
  • एंड ब्रेक तब होते हैं जब तनाव सबसे कमज़ोर स्थान की सामर्थ्य से अधिक हो; चाल, ट्रैवलर, तैयारी-दोष व आर्द्रता सब असर डालते हैं।
  • टू-फ़ॉर-वन ट्विस्टर प्रति स्पिंडल परिक्रमण दो टर्न देता है (ट्विस्ट = 2N ÷ V); फ़ोल्ड-ट्विस्ट एकल के विपरीत हो तो एकल यार्न में T_s − T_f बचता है।
  • कॉम्पैक्ट स्पिनिंग स्पिनिंग ट्राइएंगल घटाकर रोएँ कम करती है; रोटर स्पिनिंग रोटर घूर्णन से ऐंठती है, ट्विस्ट = रोटर rpm ÷ टेक-अप चाल।
  • एयर-जेट व एयर-वोर्टेक्स यार्न फ़ैसिएटेड हैं; फ़्रिक्शन यार्न कोर-शीथ हैं; रैप यार्न में समानांतर क्रोड पर रैपर चाहिए; ट्विस्ट-लेस यार्न बंधित हैं।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. रोविंग को केवल थोड़ा ट्विस्ट क्यों दिया जाता है?

    1. ताकि वाइंडिंग व हैंडलिंग हेतु पर्याप्त संसंजन मिले और रिंग फ़्रेम पर डोरी का ड्राफ्ट आसान रहे
    2. ताकि रोविंग को अंतिम सामर्थ्य मिले और रिंग फ़्रेम पर ड्राफ्टिंग छोड़ी जा सके; वहाँ केवल अंतिम ट्विस्ट डालना शेष रहता है
    3. क्योंकि अधिक ट्विस्ट से बॉबिन फ़्लायर से धीमा चलने लगेगा; जिससे बॉबिन रोविंग को लपेट ही नहीं पाएगा
    4. क्योंकि फ़्लायर निर्गम रोलर से तेज़ नहीं घूम सकता; इसलिए रोविंग फ़्रेम पर अधिक ट्विस्ट कभी नहीं डाला जा सकता
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — ताकि वाइंडिंग व हैंडलिंग हेतु पर्याप्त संसंजन मिले और रिंग फ़्रेम पर डोरी का ड्राफ्ट आसान रहे

    रोविंग को इतना ही ट्विस्ट चाहिए कि वह बिना झूठे ड्राफ्ट के लिपटे-खुले, फिर भी रिंग फ़्रेम उसका ड्राफ्ट कर सके, जिसे अधिक ट्विस्ट रोकता। रोविंग अंतिम यार्न नहीं है और बाद में उसका भारी ड्राफ्ट होता है।
  2. बॉबिन के फ़्लायर से आगे रहने वाले रोविंग फ़्रेम में, निश्चित निर्गम चाल पर, पैकेज व्यास बढ़ने के साथ बॉबिन की चाल का क्या होना चाहिए?

    1. उसे बढ़ना चाहिए, ताकि रोविंग तनाव में रहे
    2. उसे घटना चाहिए, क्योंकि व्यास बढ़ने पर वाइंडिंग rpm घटता है
    3. वह स्थिर रहनी चाहिए, क्योंकि ट्विस्ट केवल फ़्लायर पर निर्भर है
    4. वह फ़्लायर चाल के बराबर होनी चाहिए, ताकि कोई वाइंडिंग न हो
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — उसे घटना चाहिए, क्योंकि व्यास बढ़ने पर वाइंडिंग rpm घटता है

    वाइंडिंग rpm = निर्गम चाल ÷ (π × पैकेज व्यास), और बॉबिन चाल = फ़्लायर चाल + वाइंडिंग rpm। बड़े व्यास को प्रति मिनट कम वाइंडिंग परिक्रमण चाहिए, अतः बॉबिन चाल घटती है। बॉबिन व फ़्लायर चाल बराबर होने का अर्थ वाइंडिंग बिल्कुल न होना है।
  3. रिंग स्पिनिंग में यार्न को ट्यूब पर लपेटने का कार्य किससे होता है?

    1. ट्रैवलर का स्पिंडल से तेज़ घूमना यार्न को रिंग पर घसीटकर
    2. रिंग के चारों ओर लैपेट गाइड का घूमना और इसलिए यार्न को ट्यूब तक पहुँचाती है
    3. स्पिंडल चाल व ट्रैवलर चाल का अंतर
    4. अग्र रोलर का स्पिंडल से तेज़ घूमना और इसलिए यार्न को ट्यूब पर खींचता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — स्पिंडल चाल व ट्रैवलर चाल का अंतर

    ट्रैवलर यार्न द्वारा घसीटा जाता है और स्पिंडल से पीछे रहता है; चालों का अंतर प्रति मिनट वाइंडिंग परिक्रमणों के बराबर है। ट्रैवलर कभी स्पिंडल से आगे नहीं होता, और लैपेट गाइड रिंग के चारों ओर नहीं घूमती।
  4. अन्य बातें समान रहने पर, रिंग फ़्रेम पर स्पिंडल चाल बढ़ाने का एंड-ब्रेकेज दर पर सामान्य प्रभाव और मुख्य कारण क्या है?

    1. वह घटती है, क्योंकि यार्न तेज़ लिपटता है और भार में कम समय रहता है और इसलिए यार्न का तनाव घटता है
    2. वह घटती है, क्योंकि ट्रैवलर तेज़ चलने पर कम घिसता है जबकि यार्न-तनाव भी कम होता है
    3. वह अपरिवर्तित रहती है, क्योंकि ट्विस्ट केवल रोविंग पर निर्भर है और इसलिए तनाव में कोई परिवर्तन नहीं हो सकता
    4. वह बढ़ती है, क्योंकि बैलून व ट्रैवलर के तनाव बढ़ते हैं और अधिक कमज़ोर स्थान टूटते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — वह बढ़ती है, क्योंकि बैलून व ट्रैवलर के तनाव बढ़ते हैं और अधिक कमज़ोर स्थान टूटते हैं

    अधिक चाल यार्न-पथ में तनाव बढ़ाती है (हवा व ट्रैवलर से अधिक खिंचाव), अतः अधिक कमज़ोर स्थान अपनी सामर्थ्य से बढ़ जाते हैं और ब्रेक बढ़ते हैं। ऊँची चाल पर कम ब्रेक के लिए यार्न अधिक मज़बूत चाहिए, तेज़ वाइंडिंग नहीं।
  5. एक रिंग डबलर व एक टू-फ़ॉर-वन ट्विस्टर समान स्पिंडल चाल N पर चलते हैं (रिंग डबलर की ट्रैवलर चाल N के बराबर लें)। दोनों को समान फ़ोल्डेड-यार्न ट्विस्ट डालना है। टू-फ़ॉर-वन ट्विस्टर की निर्गम चाल रिंग डबलर की तुलना में कैसी होगी?

    1. आधी, क्योंकि वह प्रति परिक्रमण आधे टर्न डालता है
    2. समान, क्योंकि दोनों की स्पिंडल चाल समान है
    3. चार गुना, क्योंकि ट्विस्ट टर्नों की संख्या के वर्ग पर निर्भर है
    4. दोगुनी, क्योंकि वह प्रति स्पिंडल परिक्रमण दो टर्न डालता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — दोगुनी, क्योंकि वह प्रति स्पिंडल परिक्रमण दो टर्न डालता है

    ट्विस्ट = प्रति मिनट टर्न ÷ निर्गम चाल। रिंग डबलर N टर्न प्रति मिनट और टू-फ़ॉर-वन ट्विस्टर 2N देता है, अतः समान ट्विस्ट के लिए टू-फ़ॉर-वन की निर्गम चाल दोगुनी होती है। ट्विस्ट टर्नों के वर्ग के समानुपाती नहीं है।
  6. Z ट्विस्ट वाले एकल यार्न S फ़ोल्ड-ट्विस्ट से फ़ोल्ड किए जाते हैं, और फ़ोल्डिंग में लंबाई नहीं बदलती। प्रत्येक एकल यार्न के ट्विस्ट का क्या होता है?

    1. वह फ़ोल्ड-ट्विस्ट जितना बढ़ता है
    2. वह अपरिवर्तित रहता है, क्योंकि ट्विस्ट तंतुओं का गुण है
    3. वह फ़ोल्ड-ट्विस्ट जितना घटता है, अतः कुछ ट्विस्ट हट जाता है
    4. वह दोगुना हो जाता है, क्योंकि दो एकल यार्न हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — वह फ़ोल्ड-ट्विस्ट जितना घटता है, अतः कुछ ट्विस्ट हट जाता है

    विपरीत दिशा का फ़ोल्ड-ट्विस्ट एकल यार्नों को T_f टर्न प्रति मीटर खोल देता है, T_s − T_f बचता है। जोड़ तब होता है जब फ़ोल्ड-ट्विस्ट एकल ट्विस्ट की ही दिशा में हो।
  7. समान काउंट के पारंपरिक रिंग यार्न की तुलना में कॉम्पैक्ट रिंग यार्न में रोएँ कम होने का मुख्य कारण क्या है?

    1. संघनन-क्षेत्र फ़ीते को संकरा करता है, अतः स्पिनिंग ट्राइएंगल बहुत छोटा हो जाता है और कम किनारे के तंतु बाहर रहते हैं
    2. अग्र रोलरों के बाद ट्विस्ट हटा दिया जाता है, और डोरी फिर खाली ट्यूब पर लपेटी जाती है, जिससे रोएँ खड़े नहीं हो पाते
    3. कताई से पहले तंतु छोटे काट दिए जाते हैं, जिससे सतह पर बिना लिपटाव की अनऐंठी डोरी बचती है
    4. यार्न खोखले स्पिंडल में फ़िलामेंट से लपेटा जाता है, और फ़िलामेंट सतह के तंतुओं को ढक देता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — संघनन-क्षेत्र फ़ीते को संकरा करता है, अतः स्पिनिंग ट्राइएंगल बहुत छोटा हो जाता है और कम किनारे के तंतु बाहर रहते हैं

    संघनन ट्विस्ट से पहले फ़ीते को संकरा करता है, इसलिए छोटा ट्राइएंगल बनता है और किनारों पर कम तंतु अनपकड़े रहते हैं। ट्विस्ट ठीक रिंग स्पिनिंग की तरह डाला जाता है; इसमें रैप या कटाई नहीं है।
  8. रोटर स्पिनिंग की अच्छी अल्पकालिक एकसमानता मुख्यतः किस विशेषता से स्पष्ट होती है?

    1. तंतु एप्रन सहित लंबी रोलर प्रणाली से ड्राफ्ट होते हैं और संहत वाइंडिंग तक पहुँचाए जाते हैं
    2. यार्न फ़िलामेंट से लपेटा जाता है, जिससे उसकी सामर्थ्य किसी भी स्टेपल यार्न से अधिक हो जाती है
    3. स्लिवर को एकल तंतुओं में कंघी करके रोटर के खाँचे में उनकी कई परतें बिछाई जाती हैं (डबलिंग)
    4. ट्विस्ट दो लुढ़कते ड्रमों से डाला जाता है, और ड्रम स्लिवर को एकल तंतुओं में भी ड्राफ्ट करते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — स्लिवर को एकल तंतुओं में कंघी करके रोटर के खाँचे में उनकी कई परतें बिछाई जाती हैं (डबलिंग)

    खाँचे में एकत्र व कई बार डबल हुए एकल तंतु अनियमितता का औसत निकाल देते हैं। लंबी रोलर ड्राफ्टिंग रिंग स्पिनिंग की विशेषता है, और फ़िलामेंट रैप व लुढ़कते ड्रम अन्य प्रक्रियाओं के हैं।
  9. एयर-जेट कते यार्न पर कौन-सा वर्णन ठीक बैठता है?

    1. एकसमान ऐंठी संरचना जिसमें हर तंतु हेलिक्स में है
    2. लगभग समानांतर तंतुओं का क्रोड, जिसे रैपर तंतु बाँधते हैं
    3. सतत फ़िलामेंट क्रोड जिस पर फ़्रिक्शन से स्टेपल तंतु चढ़ा हो
    4. तंतु केवल जल-विलेय चिपकाने वाले पदार्थ से जुड़े हों
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — लगभग समानांतर तंतुओं का क्रोड, जिसे रैपर तंतु बाँधते हैं

    एयर-जेट यार्न फ़ैसिएटेड होता है: भँवर किनारे के तंतुओं को लगभग अनऐंठे क्रोड पर लपेटता है। पूर्णतः हेलिकल संरचना रिंग यार्न की है, फ़िलामेंट-आवृत स्टेपल कोर या फ़्रिक्शन यार्न है, और चिपकाने वाले पदार्थ से बंधन ट्विस्ट-लेस स्पिनिंग है।
  10. निम्नलिखित में से कौन-से कारक रिंग स्पिनिंग में एंड ब्रेकेज के मान्य योगदानकर्ता हैं?

    1. असमान रोविंग, जो यार्न में पतले स्थान छोड़ती है
    2. घिसा या गलत चुना ट्रैवलर, जो तनाव बदलता है
    3. शुष्क या बहुत आर्द्र दशाओं में ड्राफ्टिंग रोलरों पर फ़्लाई व लैपिंग
    4. पूर्णतः एकसमान यार्न जिसकी सामर्थ्य हर जगह तनाव से अधिक है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — असमान रोविंग, जो यार्न में पतले स्थान छोड़ती है; B — घिसा या गलत चुना ट्रैवलर, जो तनाव बदलता है; C — शुष्क या बहुत आर्द्र दशाओं में ड्राफ्टिंग रोलरों पर फ़्लाई व लैपिंग

    पतले स्थान, घिसा या गलत ट्रैवलर तथा फ़्लाई या लैपिंग सामर्थ्य घटाते या तनाव बढ़ाते हैं, इसलिए ब्रेक कराते हैं। जो यार्न हर जगह शिखर तनाव से अधिक मज़बूत हो वह नहीं टूटता।
  11. अपारंपरिक स्पिनिंग प्रणालियों के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. रोटर स्पिनिंग ओपन-एंड प्रक्रिया है जिसमें तंतु खाँचे में एकत्र होते हैं और यार्न रोटर घूर्णन से ऐंठता है
    2. कोर-स्पन यार्न में फ़िलामेंट क्रोड पर स्टेपल आवरण होता है
    3. रैप स्पिनिंग में खोखले स्पिंडल से अनऐंठे क्रोड पर फ़िलामेंट लपेटा जाता है
    4. एयर-जेट स्पिनिंग में ट्विस्ट डालने के लिए घूमता पैकेज चाहिए
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — रोटर स्पिनिंग ओपन-एंड प्रक्रिया है जिसमें तंतु खाँचे में एकत्र होते हैं और यार्न रोटर घूर्णन से ऐंठता है; B — कोर-स्पन यार्न में फ़िलामेंट क्रोड पर स्टेपल आवरण होता है; C — रैप स्पिनिंग में खोखले स्पिंडल से अनऐंठे क्रोड पर फ़िलामेंट लपेटा जाता है

    रोटर, कोर-स्पन व रैप वाले वर्णन मानक हैं। एयर-जेट स्पिनिंग वायु-भँवर प्रयोग करती है और घूमता पैकेज नहीं चाहिए।
  12. एक एकल यार्न में 600 turns/m Z ट्विस्ट है और उसे 400 turns/m फ़ोल्ड-ट्विस्ट (प्रति मीटर फ़ोल्डेड यार्न, फ़ोल्डिंग में लंबाई-परिवर्तन उपेक्षित) से फ़ोल्ड किया जाता है। कौन-से कथन सही हैं?

    1. S फ़ोल्ड-ट्विस्ट के साथ प्रत्येक एकल में 200 turns/m Z ट्विस्ट बचता है
    2. Z फ़ोल्ड-ट्विस्ट के साथ प्रत्येक एकल में 1000 turns/m होता है
    3. S फ़ोल्ड-ट्विस्ट के साथ प्रत्येक एकल में 1000 turns/m Z ट्विस्ट होता है
    4. Z फ़ोल्ड-ट्विस्ट के साथ प्रत्येक एकल में 200 turns/m बचता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — S फ़ोल्ड-ट्विस्ट के साथ प्रत्येक एकल में 200 turns/m Z ट्विस्ट बचता है; B — Z फ़ोल्ड-ट्विस्ट के साथ प्रत्येक एकल में 1000 turns/m होता है

    एकल ट्विस्ट के विपरीत फ़ोल्ड-ट्विस्ट घटाता है (600 − 400 = 200) और उसी दिशा का जोड़ता है (600 + 400 = 1000)। इन दोनों स्थितियों को उलटने वाले कथन गलत हैं।
  13. एक रिंग-फ़्रेम स्पिंडल 15 000 rpm पर चलता है और ट्रैवलर स्पिंडल की चाल के 4 % से पीछे रहता है। 800 turns प्रति मीटर ट्विस्ट चाहिए, ट्विस्ट = ट्रैवलर rpm ÷ निर्गम चाल लेकर। अग्र रोलर की निर्गम चाल ____ m/min होनी चाहिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 18

    ट्रैवलर चाल = 15 000 × 0.96 = 14 400 rpm। निर्गम चाल = 14 400 ÷ 800 = 18 m/min। स्पिंडल चाल लेने पर 18.75 आता है, जो लैग की उपेक्षा है।
  14. 25 Ne का यार्न अंग्रेज़ी ट्विस्ट मल्टीप्लायर α_e = 4.2 से काता जाता है, जो TPI = α_e × √Ne से परिभाषित है। ट्विस्ट ____ टर्न प्रति इंच है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 21

    √25 = 5, अतः TPI = 4.2 × 5 = 21 टर्न प्रति इंच।
  15. Z-ट्विस्ट वाले एकल यार्न में 600 turns/m हैं। उसे S दिशा में 400 turns प्रति मीटर फ़ोल्डेड यार्न के फ़ोल्ड-ट्विस्ट से फ़ोल्ड किया जाता है। फ़ोल्डिंग में लंबाई-परिवर्तन की उपेक्षा करने पर प्रत्येक एकल यार्न में शेष Z ट्विस्ट ____ turns/m है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 200

    विपरीत दिशा का फ़ोल्ड-ट्विस्ट प्रत्येक एकल से T_f घटाता है: 600 − 400 = 200 turns/m Z ट्विस्ट शेष। दोनों का जोड़ (1000) उसी दिशा के फ़ोल्ड-ट्विस्ट का उत्तर है।
  16. एक टू-फ़ॉर-वन ट्विस्टर को 600 turns प्रति मीटर फ़ोल्ड-ट्विस्ट डालना है जबकि यार्न 25 m/min से लिया जा रहा है। प्रति स्पिंडल परिक्रमण दो टर्न व कोई हानि न मानकर आवश्यक स्पिंडल चाल ____ rpm है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 7500

    ट्विस्ट = 2N ÷ V, अतः N = ट्विस्ट × V ÷ 2 = 600 × 25 ÷ 2 = 7500 rpm। रिंग डबलर को समान ट्विस्ट व चाल के लिए 15 000 rpm चाहिए।
  17. एक रोटर-स्पिनिंग इकाई में ट्विस्ट (टर्न प्रति मीटर) रोटर rpm को टेक-अप चाल (m/min) से भाग देने पर मिलता है (ट्विस्ट-हानि नहीं)। रोटर 90 000 rpm पर चलता है और यार्न को 900 turns प्रति मीटर चाहिए। टेक-अप चाल ____ m/min है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 100

    टेक-अप चाल = रोटर rpm ÷ ट्विस्ट = 90 000 ÷ 900 = 100 m/min।