स्टेपल यार्न की पूर्व-तैयारी: जिनिंग, ब्लोरूम, कार्डिंग, ड्रॉइंग व कॉम्बिंग

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर में XE9 वस्त्र अभियांत्रिकी एवं तंतु विज्ञान (जिसके नौ वैकल्पिक खंडों में से परीक्षार्थी कोई दो चुनता है) के खंड XE9.2, “यार्न निर्माण, यार्न संरचना व गुण”, के पहले भाग का उत्तर देता है: “जिनिंग के सिद्धांत; ओपनिंग, क्लीनिंग व ब्लेंडिंग के सिद्धांत; आधुनिक ब्लोरूम मशीनों के कार्य-सिद्धांत; कार्डिंग के मूल सिद्धांत; पारंपरिक बनाम आधुनिक कार्डिंग मशीन; कार्ड सेटिंग; कार्ड क्लोदिंग; कार्ड स्लिवर में आवर्ती द्रव्यमान-विचरण; कार्ड ऑटोलेवलर; रोलर ड्रॉइंग के सिद्धांत; ड्राफ्टिंग प्रणालियों में रोलर व्यवस्थाएँ; ड्रॉन स्लिवर में आवर्ती द्रव्यमान-विचरण; ड्रॉफ्रेम ऑटोलेवलर; सूती कॉम्बिंग के सिद्धांत; कॉम्बिंग चक्र व क्रियाविधियाँ; कॉम्बिंग मशीन में हाल के विकास।” यह सिखाता है कि बिनौले सहित कपास कैसे साफ़, समानांतर व एकसमान स्लिवर बनती है। संख्यात्मक प्रश्न जिनिंग आउट-टर्न, सफ़ाई-दक्षता, ड्राफ्ट व डबलिंग, कार्ड व कॉम्ब का उत्पादन, आवर्ती दोष की तरंगदैर्ध्य तथा ऑटोलेवलर का विलंब हैं।

1. जिनिंग: रुई को बिनौले से अलग करना

जिनिंग कातने योग्य तंतु (लिंट) को बिनौले से अलग करती है। मापदंड जिनिंग आउट-टर्न (GOT) = लिंट का द्रव्यमान ÷ बीज-कपास का द्रव्यमान × 100 है। यदि 100 kg बीज-कपास से 34 kg लिंट मिले तो GOT = 34 % है; शेष बिनौला, कचरा व नमी की हानि है। दो सिद्धांत प्रयुक्त होते हैं।

जिनसिद्धांतउपयुक्त
सॉ जिनबीज-कपास का रोल पसलियों (ribs) से सटा रहता है; सॉ के दाँत तंतुओं को पकड़कर बिनौले से संकरे अंतराल से खींच ले जाते हैं, बिनौला पार नहीं हो पाताछोटा व मध्यम स्टेपल; उच्च उत्पादन
रोलर जिनघूमता चमड़े या संयुक्त पदार्थ का रोलर तंतुओं को पकड़ता है; स्थिर चाकू बिनौले को रोकता है और आगे-पीछे चलने वाला चाकू उसे झाड़ देता हैलंबा व अति-लंबा स्टेपल; तंतु पर नरम

सॉ जिन तेज़ है पर अधिक तंतु काटती व उलझाती है (अधिक छोटे तंतु व नेप); रोलर जिन धीमी पर नरम है। अत्यधिक सूखा या अत्यधिक गीला बीज-कपास GOT व तंतु-गुणवत्ता दोनों बिगाड़ता है, और कई मिलें जिन के बाद लिंट क्लीनर लगाती हैं।

2. ओपनिंग, क्लीनिंग व ब्लेंडिंग के सिद्धांत

ओपनिंग बड़े दबे गुच्छों को छोटे गुच्छों में बाँटती है; क्लीनिंग उनमें से कचरा (पत्ती, बीज-आवरण, धूल) हटाती है; ब्लेंडिंग गाँठों को मिलाती है ताकि उत्पाद एकसमान रहे। तीनों जुड़े हैं: कचरा गुच्छों के भीतर फँसा रहता है, इसलिए क्लीनिंग उतनी ही हो सकती है जितनी ओपनिंग हुई हो। बीटर हवा में चलते या पकड़े गए गुच्छे पर प्रहार करता है; गुच्छा ग्रिड बार से टकराता है, भारी कचरा अंतरालों से गिर जाता है और तंतु आगे चले जाते हैं। धूल को सक्शन से खींचा जाता है। सफ़ाई-दक्षता की परिभाषा है

सफ़ाई-दक्षता (%) = (फ़ीड में कचरा % − निर्गम में कचरा %) ÷ (फ़ीड में कचरा %) × 100।

  • बीटर की चाल व प्रकार: पिन या स्पाइक बीटर नरमी से खोलता है; ब्लेड बीटर अधिक सफ़ाई करता है पर अधिक क्षति भी। अधिक चाल व कसी सेटिंग से सफ़ाई बढ़ती है और तंतु-टूटन व नेप भी बढ़ते हैं।
  • ब्लेंडिंग कई गाँठों से एक साथ तंतु उठाकर (बेल प्लकिंग) तथा हॉपर या मल्टी-मिक्सर में परतें बनाकर की जाती है ताकि तंतु-गुणों का औसत मिले। मिश्रण-अनुपात द्रव्यमान से लिया जाता है।
⚠️ जाल
किसी मशीन की सफ़ाई-दक्षता उसके द्वारा निकाले गए अपशिष्ट की मात्रा नहीं है: जो मशीन बहुत अच्छा तंतु फेंक दे उसका अपशिष्ट % अधिक पर चयनशीलता कम होती है। मिलें लाइन को सफ़ाई-दक्षता, तंतु-हानि व जुड़े नेप तीनों से परखती हैं।

3. आधुनिक ब्लोरूम मशीनें

आधुनिक ब्लोरूम वायवीय नलिकाओं से जुड़ी मशीनों की शृंखला है, जिसमें पहले नरम और बाद में प्रबल क्रिया होती है ताकि प्रबलतम बीटर तक पहुँचने से पहले गुच्छे छोटे हो चुके हों।

एक विशिष्ट आधुनिक लाइन
चरणकार्य
स्वचालित बेल ओपनर (प्लकर)चलता शीर्ष कई गाँठों से गुच्छों की पतली परतें उठाता है; गाँठ-स्तर की ब्लेंडिंग देता है
धातु व भारी-पदार्थ अवरोधकचुंबक व संसूचक कार्ड क्लोदिंग को आवारा धातु से बचाते हैं
मिक्सर या ब्लेंडरदीर्घकालिक मिश्रण तथा चरणों के बीच बफ़र
प्री-क्लीनर व फ़ाइन ओपनरएक या अधिक चरणों में बीटर व ग्रिड से सफ़ाई; भारी कचरे व धूल का निष्कासन
बाह्य-पदार्थ संसूचक या विभाजकरंगीन या बहुलक संदूषण का प्रकाशीय/संवेदी पता लगाना और वायु-झोंके से निकालना
कार्डों को चूट फ़ीडहर कार्ड के फ़ीड चूट में गुच्छे पहुँचाता है; स्तंभ का घनत्व कार्ड फ़ीड तय करता है और लेवलिंग संभव करता है

विकासों में लाइन में कम मशीनें (छोटी लाइन से कम नेप), कचरे की मात्रा के अनुसार अपशिष्ट-निष्कासन का स्वचालित नियंत्रण, सफ़ाई-तीव्रता का निर्धारण तथा लैप की जगह सीधा चूट फ़ीड शामिल हैं।

4. कार्डिंग: क्रिया, मशीन, सेटिंग व क्लोदिंग

कार्डिंग गुच्छों को अलग-अलग तंतुओं में खोलती है, शेष कचरा, छोटे तंतु व नेप हटाती है, तंतुओं को आंशिक समानांतर करती है और सतत स्लिवर देती है। कार्डिंग क्रिया वहाँ होती है जहाँ दो तारों-वाली सतहें भिन्न चालों से, नुकीलों के आमने-सामने (point-against-point) चलती हैं: तंतु धीमी सतह पर टिके रहते हैं और तेज़ सतह उन्हें कंघी करती है। स्ट्रिपिंग क्रिया तब होती है जब नुकीले एक ही दिशा में झुके हों और तेज़ सतह धीमी से तंतु उठा ले; सिलिंडर इसी प्रकार टेकर-इन को स्ट्रिप करता है। धीमा डॉफ़र तेज़ सिलिंडर से तंतु पतले वेब के रूप में लेता है, जो संघनित होकर स्लिवर बनता है।

पारंपरिक कार्ड रोलर-एंड-क्लीयरर या रिवॉल्विंग-फ़्लैट कार्ड होता है जिसमें फ़ीड लैप व कम उत्पादन होता है। आधुनिक कार्ड में चूट फ़ीड, अतिरिक्त प्री-कार्डिंग व पोस्ट-कार्डिंग खंड (स्थिर फ़्लैट व कार्डिंग अवयव), अधिक चौड़ा व तेज़ सिलिंडर, ऊँची डॉफ़र चाल तथा ऑटोलेवलिंग होती है; समान या बेहतर स्लिवर-गुणवत्ता पर उत्पादन कई गुना होता है। फ़्लैट (धीमी गति से चलती क्लोदित पट्टियों की शृंखला) सिलिंडर के सामने अधिकांश कार्डिंग करते हैं और छोटे तंतु, कचरे व नेप वाली फ़्लैट-स्ट्रिप बाहर ले जाते हैं।

  • कार्ड सेटिंग सतहों के बीच की दूरी है, जो फ़ीलर गेज से तय होती है: फ़ीड प्लेट–टेकर-इन, टेकर-इन–सिलिंडर, सिलिंडर–फ़्लैट, सिलिंडर–डॉफ़र। सेटिंग केवल मिलीमीटर के अंश जितनी होती हैं और हर जोड़ी सतहों के लिए अलग होती हैं। सिलिंडर–फ़्लैट की कसी सेटिंग से कार्डिंग-तीव्रता व नेप-निष्कासन बढ़ता है, पर अधिक तंतु कटते हैं और तार जल्दी घिसता है।
  • कार्ड क्लोदिंग कार्यशील सतहों पर लगा तार है। लचीली क्लोदिंग कपड़े की आधार-परत में जड़ा सॉ-टूथ या सुई-तार है (फ़्लैट, और पुराने कार्डों में सिलिंडर व डॉफ़र); धात्विक क्लोदिंग रोलर पर लिपटी सतत सॉ-टूथ पट्टी है (टेकर-इन, तथा आधुनिक कार्डों में सिलिंडर व डॉफ़र)। मुख्य प्राचल: दाँत का कोण (अधिक नुकीला, आक्रामक दाँत तंतु को दृढ़ता से पकड़ता है पर स्ट्रिपिंग कम होती है), प्रति इकाई क्षेत्रफल बिंदु-संख्या (महीन तंतुओं के लिए सघन व महीना तार), दाँत की गहराई व ऊँचाई। दाँत तेज़ व सलामत होने चाहिए, इसलिए क्लोदिंग की ग्राइंडिंग की जाती है।
🧠 याद की सीढ़ी
इसे सीढ़ी की तरह याद रखें: टेकर-इन से सिलिंडर और फ़्लैट तक हर चरण में महीना तार व अधिक बिंदु-घनत्व मिलता है, इसलिए तंतु क्रमशः खुलता है और झटका नहीं खाता।

5. कार्ड स्लिवर: आवर्ती विचरण, ऑटोलेवलर व उत्पादन

आवर्ती द्रव्यमान-विचरण एक निश्चित लंबाई पर दोहराता है। यांत्रिक स्रोत (उत्केंद्र या मुड़ा रोलर, घिसा गियर) प्रति परिक्रमण एक दोष देता है। d व्यास का दोषपूर्ण रोलर एक परिक्रमण में πd लंबाई का पदार्थ देता है। यदि उस रोलर से निर्गम तक पदार्थ पर और ड्राफ्ट D लगे तो निर्गत स्लिवर में तरंगदैर्ध्य है

λ = π d × D। उदाहरण: 28 mm व्यास का रोलर, जिसके बाद ड्राफ्ट 6 हो, λ = π × 28 × 6 ≈ 528 mm देता है। स्पेक्ट्रोग्राम में उस तरंगदैर्ध्य पर शिखर उसी रोलर की ओर संकेत करता है; किसी रोलर से नहीं, तंतु-लंबाई से तय तरंगदैर्ध्य पर चौड़ी पहाड़ी ड्राफ्टिंग तरंग है, जो तैरते तंतुओं से बनती है।

कार्ड ऑटोलेवलर ड्राफ्ट बदलकर स्लिवर का द्रव्यमान सुधारता है। ओपन-लूप प्रणाली में द्रव्यमान फ़ीड पर मापा जाता है (जैसे चूट स्तंभ का घनत्व या फ़ीड की मोटाई) और फ़ीड-रोलर की चाल उस विलंब के बाद बदली जाती है जो मापन-बिंदु से सुधार-बिंदु की दूरी ÷ पदार्थ की चाल के बराबर है; यह अपनी त्रुटियाँ नहीं देख पाती। क्लोज़्ड-लूप प्रणाली में द्रव्यमान निर्गम पर मापकर पुनर्निवेशित किया जाता है; यह अपना विचलन सुधारती है पर बन चुके पदार्थ पर काम करती है। कार्ड लेवलर लंबी व मध्यम तरंगदैर्ध्य सुधारते हैं, छोटी नहीं। उत्पादन: kg/h = निर्गम चाल (m/min) × स्लिवर tex × 60 ÷ 10⁶ × दक्षता; 120 m/min, 4800 tex व 90 % दक्षता पर यह 31.1 kg/h है। ड्राफ्ट = फ़ीड tex ÷ निर्गम tex, अपशिष्ट की उपेक्षा सहित।

⚠️ जाल
तरंगदैर्ध्य सूत्र में दोषपूर्ण रोलर से निर्गम तक का ड्राफ्ट लिया जाता है, मशीन का कुल ड्राफ्ट नहीं। अग्र निर्गम रोलर के अपने दोष के बाद कोई ड्राफ्ट नहीं होता, अतः λ = πd।

6. रोलर ड्रॉइंग व ड्रॉफ्रेम

रोलर ड्राफ्टिंग डोरी को उन रोलर-युग्मों से गुज़ारकर पतला करती है जिनकी सतह-चालें क्रम से बढ़ती हैं। ड्राफ्ट = V_अग्र ÷ V_पश्च = (फ़ीड tex) ÷ (निर्गत tex), हानि रहित स्थिति में। ड्रॉइंग मशीन में प्रायः मुख्य ड्राफ्ट से पहले ब्रेक ड्राफ्ट (छोटा, तंतु तैयार करने हेतु) बनाया जाता है। कई स्लिवर साथ दी जाती हैं (डबलिंग, n), अतः निर्गत tex = n × फ़ीड tex ÷ ड्राफ्ट। डबलिंग अनियमितता का औसत निकालती है: स्वतंत्र यादृच्छिक त्रुटियों के लिए डबल स्लिवर का CV √n गुना घटता है। 3600 tex की 6 स्लिवर, ड्राफ्ट 7.5 पर, 6 × 3600 ÷ 7.5 = 2880 tex देती हैं।

जिन तंतुओं को कोई रोलर-युग्म नहीं पकड़ता वे तैरते तंतु (floating fibres) हैं; वे अनियमित चलते हैं और ड्राफ्टिंग तरंगें बनाते हैं, इसलिए रोलर सेटिंग (निप से निप) मुख्य क्षेत्र के सबसे लंबे तंतु से थोड़ी अधिक रखी जाती है और इतनी छोटी रखी जाती है कि छोटे तंतु भी नियंत्रित रहें। प्रेशर बार, एप्रन या पिन क्षेत्र के भीतर नियंत्रण बढ़ाते हैं। प्रचलित व्यवस्थाओं में ड्रॉफ्रेम में भारित प्रेशर बार सहित थ्री-ओवर-थ्री व फ़ोर-ओवर-थ्री ड्राफ्टिंग तथा रोविंग व रिंग फ़्रेम में डबल-एप्रन ड्राफ्टिंग आती हैं। ड्रॉन स्लिवर में आवर्ती विचरण के वही दो स्रोत हैं जो कार्ड में: यांत्रिक (λ = πd × D) तथा ड्राफ्टिंग तरंगें।

ड्रॉफ्रेम ऑटोलेवलर निवेशी स्लिवर का द्रव्यमान (प्रायः खाँचेदार स्कैनिंग रोलरों की जोड़ी से) मापता है, नियंत्रक सुधार निकालता है और सर्वो मोटर उसी क्षण मुख्य-ड्राफ्ट की चाल बदलती है जब मापा गया पदार्थ ड्राफ्ट-क्षेत्र में पहुँचे। समय-विलंब = दूरी ÷ फ़ीड चाल है: मापन 0.30 m आगे हो और स्लिवर की चाल 15 m/min हो तो विलंब 0.30 ÷ 15 = 0.02 min = 1.2 s है। यह फ़ीड की छोटी, मध्यम व दीर्घकालिक त्रुटियाँ सुधारता है; कुछ मशीनों में निर्गम पर क्लोज़्ड-लूप मापन भी जोड़ा जाता है।

7. सूती कॉम्बिंग

कॉम्बिंग छोटे तंतु (निर्धारित लंबाई से कम), नेप व महीन कचरा हटाती है और तंतुओं को सीधा करती है, जिससे नॉयल बाहर निकलता है: नॉयल % = नॉयल द्रव्यमान ÷ फ़ीड द्रव्यमान × 100। इससे लंबे स्टेपल की कपास से महीन, मज़बूत, अधिक एकसमान व साफ़ यार्न मिलता है, पर तंतु-हानि व कुछ अतिरिक्त मशीनों (स्लिवर-लैप, रिबन-लैप व कॉम्बर) की कीमत पर। हर निप में चक्र के चार मुख्य चरण हैं।

  • फ़ीडिंग: लैप प्रति निप थोड़ी लंबाई (कुछ मिलीमीटर) आगे निपरों तक दी जाती है।
  • निपिंग व कॉम्बिंग: निपर तंतु-झालर पर बंद होते हैं और घूमते सिलिंडर का सूई-युक्त अर्ध-लैप खंड बाहर निकली झालर को कंघी करता है, जिससे छोटे तंतु व नेप निकल जाते हैं।
  • डिटैचिंग व पीसिंग: निपर खुलते हैं, डिटैचिंग रोलर उल्टे घूमकर पहले की कंघी हुई वेब लौटाते हैं जो नई झालर पर चढ़ती है, फिर सीधे घूमकर झालर को खींच लेते हैं; खिंचते समय तंतुओं के पिछले सिरे टॉप कॉम्ब से कंघी होते हैं।
  • नॉयल निष्कासन: कंघी से निकला अपशिष्ट ब्रश से सिलिंडर से साफ़ होकर वायु द्वारा हटाया जाता है।

प्रति घंटा उत्पादन = निप/min × प्रति निप फ़ीड × लैप tex × हेड × (1 − नॉयल अंश) × 60। 8 हेड, 400 निप/min, प्रति निप 5 mm फ़ीड, 70 ktex (70 g/m) लैप व 16 % नॉयल के लिए: प्रति हेड प्रति मिनट फ़ीड हुई लैप = 400 × 0.005 m × 70 g/m = 140 g, अतः 8 हेड के लिए 1120 g/min, कंघी हुई स्लिवर 940.8 g/min, यानी 100 % दक्षता पर 56.4 kg/h। हाल के विकास हैं सर्वो ड्राइव सहित अधिक निप-दर, हल्के गतिमान द्रव्यमान, स्वचालित लैप-बदलाव व पीसिंग, तथा नॉयल-सेटिंग का व्यक्तिगत समायोजन।

🎯 क्यों
नॉयल % बढ़ाने से औसत तंतु-लंबाई बढ़ती और छोटे तंतुओं की मात्रा घटती है, अतः यार्न मज़बूत व अधिक एकसमान बनता है; पर नॉयल का हर अतिरिक्त अंक खरीदा गया तंतु फेंकना है, इसलिए नॉयल बनने वाली काउंट व गुणवत्ता के अनुसार तय होता है।

मुख्य बिंदु

  • GOT = लिंट ÷ बीज-कपास × 100; रोलर जिन लंबे स्टेपल पर नरम है, सॉ जिन तेज़ है और अधिक तंतु काटती है।
  • क्लीनिंग ओपनिंग के पीछे चलती है; सफ़ाई-दक्षता = (आने वाला कचरा − जाने वाला कचरा) ÷ आने वाला कचरा × 100, और प्रबल बीटिंग नेप जोड़ती व तंतु तोड़ती है।
  • कार्डिंग क्रिया सिलिंडर व फ़्लैट के बीच point-against-point है; सेटिंग व तार फ़्लैट की ओर महीन होते हैं; आवर्ती दोष की तरंगदैर्ध्य λ = πd × (दोषपूर्ण रोलर के बाद का ड्राफ्ट)।
  • ओपन-लूप लेवलर निवेश मापकर दूरी ÷ चाल के विलंब से कार्य करते हैं; क्लोज़्ड-लूप लेवलर निर्गम मापकर अपना विचलन सुधारते हैं।
  • ड्राफ्ट = V_अग्र ÷ V_पश्च; निर्गत tex = n × फ़ीड tex ÷ ड्राफ्ट; n स्वतंत्र स्लिवरों की डबलिंग से CV √n गुना घटता है; तैरते तंतु ड्राफ्टिंग तरंगें बनाते हैं।
  • कॉम्बिंग फ़ीडिंग, निपिंग व कॉम्बिंग, डिटैचिंग व पीसिंग तथा नॉयल-निष्कासन से छोटे तंतु, नेप व कचरा हटाती है; उत्पादन = निप/min × फ़ीड × लैप tex × हेड × (1 − नॉयल)।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. कौन-सी जिन उस लंबे स्टेपल कपास के लिए पसंद की जाती है जिसे नरमी से संभालना है, और क्यों?

    1. सॉ जिन, क्योंकि उसके दाँत अत्यंत ऊँची दर से तंतुओं को पसलियों से खींचते हैं; इसीलिए वह सबसे महीन लंबे स्टेपल की जिन है
    2. रोलर जिन, क्योंकि वह किसी भी जिन से अधिकतम जिनिंग आउट-टर्न देती है, जिनिंग की जा रही कपास की किस्म कोई भी हो
    3. सॉ जिन, क्योंकि आरी जैसी क्रिया तंतु को सीधा व लंबा करती है; जिससे सबसे लंबी व एकसमान रुई मिलती है
    4. रोलर जिन, क्योंकि रोलर तंतु को पकड़ता है और चाकू बिनौला उतार देता है, जिससे तंतु को कम क्षति होती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — रोलर जिन, क्योंकि रोलर तंतु को पकड़ता है और चाकू बिनौला उतार देता है, जिससे तंतु को कम क्षति होती है

    रोलर जिन तंतु को नरमी से सँभालती है और लंबे व अति-लंबे स्टेपल के लिए प्रयुक्त होती है, यद्यपि धीमी है। सॉ जिन तेज़ है पर अधिक तंतु काटती व उलझाती है, इसलिए छोटे व मध्यम स्टेपल के लिए उपयुक्त है; वह तंतु को लंबा नहीं करती। आउट-टर्न मुख्यतः कपास की किस्म पर निर्भर है, जिन के प्रकार के सर्वाधिक होने पर नहीं।
  2. बड़े, कसकर दबे गुच्छों से ब्लोरूम कचरा कुशलता से क्यों नहीं हटा पाता?

    1. नलिकाओं की वायुधारा कचरे व गुच्छों को समान चाल से ले जाती है, इसलिए कचरा तंतु से कभी अलग नहीं होता
    2. बड़े गुच्छे कचरे से भारी होते हैं और इसलिए उसके साथ ग्रिड बार से गिर जाते हैं, और ये गुच्छे कचरे से भारी होते हैं
    3. कचरा गुच्छे के भीतर फँसा रहता है, इसलिए गुच्छा खुलने के बाद ही वह ग्रिड बार के सामने आ पाता है
    4. बीटर केवल उन्हीं गुच्छों पर कार्य कर सकते हैं जिनमें पहले से कचरा न हो क्योंकि ओपनिंग ब्लोरूम शुरू होने से पहले पूरी हो चुकी होती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — कचरा गुच्छे के भीतर फँसा रहता है, इसलिए गुच्छा खुलने के बाद ही वह ग्रिड बार के सामने आ पाता है

    अशुद्धियाँ गुच्छों में धँसी होती हैं; क्लीनिंग के लिए पहले ओपनिंग चाहिए, इसीलिए ओपनिंग क्रमिक होती है। भार वाला विकल्प भ्रामक है: बड़े गुच्छे ग्रिड पर रुकते हैं, उसके पार नहीं गिरते।
  3. दो तार-आच्छादित सतहों की किस व्यवस्था में कार्डिंग क्रिया होती है?

    1. नुकीले एक ही दिशा में झुके हैं और तेज़ सतह धीमी सतह से तंतु उठा लेती है, इसलिए दोनों सतहों के नुकीले कभी आमने-सामने नहीं आते
    2. एक चिकना रोलर तंतुओं को तार-आच्छादित सतह पर दबाता है, जिससे तंतु केवल उनके बीच चपटा हो जाता है
    3. सतहें ठीक समान चाल से चलती हैं और नुकीलों में कोई आपेक्षिक गति नहीं होती, इसलिए तंतु बिना किसी कंघी-क्रिया के घूमते रहते हैं
    4. नुकीले आमने-सामने हैं, सतहें भिन्न चालों से चलती हैं और तंतु एक पर टिके रहकर दूसरी से कंघी होते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — नुकीले आमने-सामने हैं, सतहें भिन्न चालों से चलती हैं और तंतु एक पर टिके रहकर दूसरी से कंघी होते हैं

    कार्डिंग भिन्न चालों वाली point-against-point व्यवस्था है, जैसी सिलिंडर व फ़्लैट के बीच होती है। पहले विकल्प में वर्णित एक-दिशा वाली व्यवस्था स्ट्रिपिंग क्रिया है।
  4. कार्ड की सिलिंडर–फ़्लैट सेटिंग चौड़ी से कसी की जाती है, बाक़ी सब वही। सबसे संभावित परिणाम कौन-सा है?

    1. कार्डिंग अधिक तीव्र होती है और नेप-निष्कासन सुधरता है, पर तंतु-टूटन व तार का घिसाव अधिक होता है
    2. कम नेप निकलते हैं और तंतु की कार्डिंग कम तीव्र होती है और फ़्लैट अधिक तंतु को छोटे अपशिष्ट के रूप में निकालते हैं
    3. डॉफ़र की चाल गेज के अनुपात में बढ़ानी पड़ती है जिससे अतिरिक्त तंतु-टूटन संभव नहीं रहती
    4. फ़्लैट-स्ट्रिप हल्की हो जाती है क्योंकि कम तंतु फ़्लैट तक पहुँचते हैं और तार पहले से धीरे घिसता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — कार्डिंग अधिक तीव्र होती है और नेप-निष्कासन सुधरता है, पर तंतु-टूटन व तार का घिसाव अधिक होता है

    कसा अंतराल फ़्लैट को तंतु-झालर पर अधिक कार्य कराता है, अतः कार्डिंग-तीव्रता व नेप-निष्कासन बढ़ते हैं, तंतु-कटाई व घिसाव की कीमत पर। चौड़ी सेटिंग से पहले विकल्प वाली कम तीव्र कार्डिंग होती है।
  5. कार्ड के लिए कौन-सा क्लोदिंग नियम सही है?

    1. मोटे तंतु को प्रति इकाई क्षेत्रफल अधिक बिंदुओं वाली सघन क्लोदिंग चाहिए
    2. महीन तंतु को प्रति इकाई क्षेत्रफल अधिक बिंदुओं वाली महीन क्लोदिंग चाहिए
    3. दाँतों को घिसने (ग्राइंड) की आवश्यकता नहीं क्योंकि भोथरा तार तंतु को अधिक नरमी से ले जाता है
    4. धात्विक क्लोदिंग हर कार्ड के केवल फ़्लैट तक सीमित है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — महीन तंतु को प्रति इकाई क्षेत्रफल अधिक बिंदुओं वाली महीन क्लोदिंग चाहिए

    महीन तंतुओं को पकड़ने व बिना कुचले खोलने के लिए महीना, सघन तार चाहिए। तेज़ दाँत आवश्यक हैं, इसलिए क्लोदिंग ग्राइंड होती है; फ़्लैट पर सामान्यतः लचीली क्लोदिंग होती है, जबकि टेकर-इन व आधुनिक कार्डों में सिलिंडर व डॉफ़र पर धात्विक।
  6. ओपन-लूप ऑटोलेवलर को क्लोज़्ड-लूप से क्या अलग करता है?

    1. ओपन-लूप प्रकार निर्गत स्लिवर मापता है और इसलिए अपने यांत्रिक विचलन को सुधारता है और सामग्री के ड्राफ्ट-बिंदु पर पहुँचने से पहले त्रुटि सुधार देता है
    2. क्लोज़्ड-लूप प्रकार निवेश मापता है और सुधार से पहले समय-विलंब की प्रतीक्षा करनी पड़ती है क्योंकि निर्गम बन जाने के बाद उसे मापा नहीं जा सकता
    3. ओपन-लूप प्रकार निवेश मापता है और मापे गए पदार्थ के लिए सुधार का समय साधता है, पर अपनी त्रुटियाँ नहीं पकड़ सकता
    4. दोनों प्रकार एक ही बिंदु पर मापते हैं; केवल एक्चुएटर भिन्न है और दोनों में विलंब सदा शून्य रहता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — ओपन-लूप प्रकार निवेश मापता है और मापे गए पदार्थ के लिए सुधार का समय साधता है, पर अपनी त्रुटियाँ नहीं पकड़ सकता

    ओपन लूप सुधार-बिंदु से पहले मापता है और इसलिए समयबद्ध विलंब चाहिए; निर्गम की जाँच नहीं होती, इसलिए उसकी अपनी त्रुटियाँ अनदेखी रहती हैं। क्लोज़्ड लूप निर्गम मापकर पुनर्निवेश करता है, अतः अपना विचलन पकड़ता है पर बन चुके पदार्थ को सुधारता है।
  7. ड्राफ्टिंग क्षेत्र में रोलर अंतराल सबसे लंबे तंतुओं की लंबाई से कम रखने का मुख्य प्रभाव क्या है, अन्य बातें समान?

    1. तंतु एक साथ दोनों रोलर-युग्मों में दबते हैं, इसलिए टूटते हैं या रोलर फिसलते हैं, जिससे ड्राफ्टिंग बिगड़ती है
    2. सभी तंतु तैरते तंतु बन जाते हैं और ड्राफ्टिंग तरंगें समाप्त हो जाती हैं क्योंकि अंतराल ठीक तंतु की लंबाई के बराबर होता है
    3. ड्राफ्ट अंतराल के अनुपात में घट जाता है क्योंकि कुल ड्राफ्ट सदा अंतराल के साथ घटता है
    4. केवल छोटे तंतु डोरी से निकल जाते हैं जबकि शेष सारा तंतु रुका रहता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — तंतु एक साथ दोनों रोलर-युग्मों में दबते हैं, इसलिए टूटते हैं या रोलर फिसलते हैं, जिससे ड्राफ्टिंग बिगड़ती है

    अंतराल से लंबा तंतु दोनों सिरों पर पकड़ में आता है, एक युग्म उसे पीछे रोकता है और दूसरा आगे खींचता है, इसलिए वह टूटता या फिसलता है। तैरते तंतु विपरीत समस्या हैं और अंतराल अधिक चौड़ा होने पर होते हैं।
  8. कॉम्बिंग में नॉयल प्रतिशत बढ़ाने का कंघी हुई स्लिवर पर सामान्यतः क्या संयुक्त प्रभाव पड़ता है?

    1. औसत तंतु-लंबाई घटती है और छोटे तंतुओं की मात्रा बढ़ती है
    2. नेप बढ़ते हैं क्योंकि अधिक तंतु कंघी होता है
    3. औसत लंबाई व छोटे तंतुओं की मात्रा दोनों स्थिर रहती हैं, केवल लैप tex बदलता है
    4. औसत तंतु-लंबाई बढ़ती है और छोटे तंतुओं की मात्रा घटती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — औसत तंतु-लंबाई बढ़ती है और छोटे तंतुओं की मात्रा घटती है

    नॉयल में छोटे तंतु व नेप अधिक होते हैं, अतः अधिक नॉयल निकालने से औसत लंबाई बढ़ती और छोटे तंतु घटते हैं, जिससे अधिक लागत पर मज़बूत, अधिक एकसमान यार्न मिलता है। अधिक कॉम्बिंग से नेप घटते हैं, बढ़ते नहीं।
  9. एक ड्रॉफ्रेम ऑटोलेवलर स्लिवर को उस बिंदु से 0.30 m पहले मापता है जहाँ मुख्य-ड्राफ्ट की चाल बदली जाती है। उस खंड में स्लिवर 15 m/min से चलती है। मापे गए मोटे स्थान पर ही असर करने के लिए चाल-परिवर्तन कितने समय बाद लागू होना चाहिए?

    1. 0.2 s
    2. 1.2 s
    3. 12 s
    4. 0.45 s
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 1.2 s

    विलंब = दूरी ÷ चाल = 0.30 m ÷ (15 m/min) = 0.02 min = 1.2 s। 15 m/min की जगह 15 m/s लेने पर 0.02 s मिलता है, ; मिनट को सेकंड में न बदलने या दस के गुणक की चूक से अन्य गलत मान आते हैं।
  10. ginning, opening, cleaning व blending के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. जिनिंग आउट-टर्न लिंट के द्रव्यमान को बीज-कपास के द्रव्यमान से भाग देकर प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है
    2. ग्रिड बार भारी कचरे को गिरने देते हैं जबकि गुच्छे आगे चले जाते हैं
    3. अधिक प्रबल बीटिंग हमेशा यार्न-गुणवत्ता सुधारती है, क्योंकि वह केवल कचरा हटाती है
    4. एक साथ कई गाँठों से तंतु उठाने पर गाँठ-से-गाँठ ब्लेंडिंग मिलती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — जिनिंग आउट-टर्न लिंट के द्रव्यमान को बीज-कपास के द्रव्यमान से भाग देकर प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है; B — ग्रिड बार भारी कचरे को गिरने देते हैं जबकि गुच्छे आगे चले जाते हैं; D — एक साथ कई गाँठों से तंतु उठाने पर गाँठ-से-गाँठ ब्लेंडिंग मिलती है

    आउट-टर्न, ग्रिड बार व बहु-गाँठ प्लकिंग वाले कथन सही हैं। प्रबल बीटिंग तंतु भी तोड़ती है, नेप बनाती है और छोटे तंतु जोड़ती है, इसलिए यह कथन गलत है कि वह सदा गुणवत्ता सुधारती है।
  11. आवर्ती द्रव्यमान-विचरण व ड्राफ्टिंग के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. उत्केंद्र रोलर का दोष उस तरंगदैर्ध्य पर दोहराता है जो उसकी परिधि व उसके बाद के ड्राफ्ट के समानुपाती है
    2. तैरते तंतु ड्राफ्टिंग तरंगें बनाते हैं जिनकी तरंगदैर्ध्य रोलर की परिधि से नहीं, तंतु-लंबाई से संबंधित होती है
    3. चार स्वतंत्र यादृच्छिक स्लिवरों की डबलिंग से CV अपरिवर्तित रहता है
    4. अग्र निर्गम रोलर का अपना दोष मशीन के कुल ड्राफ्ट से खिंच जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — उत्केंद्र रोलर का दोष उस तरंगदैर्ध्य पर दोहराता है जो उसकी परिधि व उसके बाद के ड्राफ्ट के समानुपाती है; B — तैरते तंतु ड्राफ्टिंग तरंगें बनाते हैं जिनकी तरंगदैर्ध्य रोलर की परिधि से नहीं, तंतु-लंबाई से संबंधित होती है

    यांत्रिक दोष λ = πd × D देते हैं और ड्राफ्टिंग तरंगें तंतु-लंबाई का अनुसरण करती हैं। n स्वतंत्र स्लिवरों की डबलिंग CV को √n गुना घटाती है, अतः चार स्लिवर उसे आधा करती हैं। अग्र निर्गम रोलर के बाद कोई ड्राफ्ट नहीं, इसलिए उसका दोष πd पर ही रहता है।
  12. सूती कॉम्बिंग चक्र में कौन-से कथन सही हैं?

    1. निपर झालर को पकड़े रहते हैं जबकि सूइयों का अर्ध-लैप उसे कंघी करता है
    2. डिटैचिंग में झालर खिंचते समय टॉप कॉम्ब तंतुओं के पिछले सिरे कंघी करता है
    3. नॉयल मुख्यतः सबसे लंबे तंतुओं का होता है, जिन्हें निपर रोक लेते हैं
    4. डिटैचिंग रोलर केवल आगे घूमते हैं, कभी उलटते नहीं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — निपर झालर को पकड़े रहते हैं जबकि सूइयों का अर्ध-लैप उसे कंघी करता है; B — डिटैचिंग में झालर खिंचते समय टॉप कॉम्ब तंतुओं के पिछले सिरे कंघी करता है

    कॉम्बिंग निपरों द्वारा पकड़ी झालर पर होती है और टॉप कॉम्ब डिटैचिंग में पिछले सिरों का उपचार करता है। नॉयल छोटे तंतुओं व नेपों का बना होता है, और पीसिंग हेतु वेब लौटाने के लिए डिटैचिंग रोलर उलटते हैं।
  13. एक कार्ड 120 m/min पर स्लिवर देता है। स्लिवर 4800 tex (g/km) है। कार्ड की चालन-दक्षता 90 % लें। उत्पादन ____ kg/h है (उत्तर एक दशमलव स्थान तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 31.1

    प्रति घंटा निर्गत लंबाई = 120 × 60 = 7200 m = 7.2 km। द्रव्यमान = 7.2 km × 4800 g/km = 34 560 g = 34.56 kg (100 % पर)। 90 % पर: 34.56 × 0.9 = 31.104, अतः 31.1 kg/h।
  14. एक ड्रॉफ्रेम को 3600 tex की छह स्लिवरें दी जाती हैं और कुल ड्राफ्ट 7.5 है। अपशिष्ट की उपेक्षा करने पर निर्गत स्लिवर ____ tex है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 2880

    निर्गत tex = n × फ़ीड tex ÷ ड्राफ्ट = 6 × 3600 ÷ 7.5 = 21 600 ÷ 7.5 = 2880 tex। डबलिंग भूल जाना (3600 ÷ 7.5 = 480) आम चूक है।
  15. एक ड्राफ्टिंग प्रणाली के पश्च रोलर का व्यास 28 mm है और उसकी मुड़ी जर्नल प्रति परिक्रमण एक आवर्ती दोष बनाती है। इस रोलर व निर्गम के बीच कुल ड्राफ्ट 6 है। निर्गत डोरी में दोष की तरंगदैर्ध्य ____ mm है (निकटतम पूर्णांक; π = 3.1416 लें)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 528

    प्रति परिक्रमण निर्गत पदार्थ = π × 28 = 87.96 mm। ड्राफ्ट 6 के बाद यह 87.96 × 6 = 527.8 mm तक खिंच जाता है, यानी 528 mm।
  16. एक कॉम्बर में 8 हेड हैं और वह 400 निप प्रति मिनट चलता है। हर निप 70 ktex (70 g प्रति मीटर) की लैप का 5 mm फ़ीड करता है। नॉयल फ़ीड द्रव्यमान का 16 % है। 100 % दक्षता पर कंघी हुई स्लिवर का उत्पादन ____ kg/h है (उत्तर एक दशमलव स्थान तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 56.4

    प्रति हेड प्रति मिनट फ़ीड लैप = 400 × 0.005 m = 2 m, यानी 2 × 70 = 140 g। आठ हेड: 1120 g/min। कंघी स्लिवर = 1120 × 0.84 = 940.8 g/min = 56 448 g/h = 56.4 kg/h।
  17. एक ब्लोरूम चरण में फ़ीड में 4.0 % कचरा है और निर्गत पदार्थ में 2.5 %। सफ़ाई-दक्षता (%) = (फ़ीड में कचरा % − निर्गम में कचरा %) ÷ फ़ीड में कचरा % × 100 लेकर सफ़ाई-दक्षता ____ % है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 37.5

    (4.0 − 2.5) ÷ 4.0 × 100 = 1.5 ÷ 4.0 × 100 = 37.5 %। निर्गम के कचरे से भाग देने पर 60 % आता है, जो आम चूक है।