यार्न संरचना व गुण: ज्यामिति, ट्विस्ट, सामर्थ्य व अनियमितता

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर में XE9 वस्त्र अभियांत्रिकी एवं तंतु विज्ञान के खंड XE9.2, “यार्न निर्माण, यार्न संरचना व गुण”, के अंतिम भाग का उत्तर देता है: “यार्न में तंतु ज्यामिति, तंतु विन्यास व तंतु अभिविन्यास का प्रभाव; यार्न का तंतु संकुलन घनत्व; यार्न व्यास; यार्न ट्विस्ट व उसका यार्न सामर्थ्य से संबंध; यार्नों में तंतुओं की हेलिकल व्यवस्था; यार्न संकुचन; यार्न में तंतु प्रवासन; यार्न में प्रतिबल-विकृति संबंध; यार्न की द्रव्यमान अनियमितता; रिंग, कॉम्पैक्ट, रोटर, एयर-जेट व फ़्रिक्शन कते यार्नों में संरचना-गुण संबंध।” यह सिखाता है कि यार्न में तंतुओं की व्यवस्था उसका घनत्व, व्यास, सामर्थ्य, दीर्घनीयता व एकसमानता कैसे तय करती है। संख्यात्मक प्रश्न अनुप्रस्थ काट में तंतुओं की संख्या व सीमांत अनियमितता, संकुलन-अंश, यार्न व्यास, पृष्ठीय हेलिक्स कोण, सामर्थ्य-उपयोग तथा ट्विस्ट संकुचन व रैखिक घनत्व पर उसका प्रभाव हैं।

1. तंतु ज्यामिति, विन्यास व अभिविन्यास

तंतु ज्यामिति (लंबाई, महीनता, अनुप्रस्थ काट, क्रिंप, सतह-घर्षण, बंकन व मरोड़ दृढ़ता) तय करती है कि यार्न क्या बन सकता है। लंबे तंतु घर्षण से अधिक लंबाई पर थमे रहते हैं, इसलिए कम फिसलते हैं और दिए गए ट्विस्ट पर मज़बूत यार्न देते हैं। महीन तंतु काट में अधिक तंतु रखते हैं: n = यार्न tex ÷ तंतु tex, अतः 0.15 tex तंतुओं के 20 tex यार्न की काट में 133 तंतु हैं। अधिक तंतुओं से यार्न अधिक एकसमान होता है और महीनी काउंट संभव होती है; मोटे तंतु सबसे महीन कात सकने वाली काउंट को सीमित करते हैं, क्योंकि यार्न को जुड़े रहने के लिए तंतुओं की न्यूनतम संख्या चाहिए। तंतु की दृढ़ता मायने रखती है क्योंकि कठोर तंतु हेलिक्स के अनुरूप मुड़ने का प्रतिरोध करता है।

विन्यास यार्न में तंतु का आकार है: सीधा, अग्र या पश्च सिरे पर हुकित, तह हुआ, छल्लेदार या मुड़ा। हुक या तह प्रभावी लंबाई घटाती है, अतः 30 mm लंबाई का आधा तह तंतु 15 mm तंतु जैसा भार वहन करता है। कार्डिंग में अनेक हुक रह जाते हैं, और हर ड्रॉइंग व कॉम्बिंग पास तंतुओं को सीधा व समानांतर करता है, जिससे उत्पाद का अभिविन्यास सुधरता है। अभिविन्यास तंतु व यार्न-अक्ष के बीच का कोण θ है। θ पर तंतु प्रति इकाई यार्न-लंबाई में 1/cos θ यार्न-लंबाई घेरता है और अपने बल का केवल cos θ भाग अक्ष के अनुदिश वहन करता है, अतः अभिविन्यास गुणांक (cos θ का औसत) तंतु के उपयोग का माप है; खराब अभिविन्यास का अर्थ हर फिसलन-तल पर कम उपयोगी-लंबाई तंतुओं का पुल बनाना भी है।

2. संकुलन घनत्व व यार्न व्यास

संकुलन अंश φ यार्न के आयतन का वह भाग है जो तंतु-पदार्थ है। प्रति मीटर यार्न, तंतु आयतन = tex ÷ ρ (mm³, जहाँ tex mg/m में व ρ g/cm³ में है, जो mg/mm³ के बराबर है), और यार्न का आयतन (π d²/4) × 1000 mm³ है, अतः

φ = tex ÷ [ρ × (π d²/4) × 1000], d mm में, tex g/km में, ρ g/cm³ में। अतः d = 0.03568 × √[tex ÷ (ρ φ)] mm। उदाहरण 1: 20 tex, d = 0.18 mm, ρ = 1.50 से φ = 20 ÷ 38.17 = 0.52। उदाहरण 2: 30 tex पॉलिएस्टर (ρ = 1.38) जिसका φ = 0.60 हो, उसका d = 0.03568 × √(30 ÷ 0.828) = 0.215 mm। स्थिर φ पर व्यास √tex के अनुपात में व 1/√ρ के अनुपात में चलता है।

  • वृत्ताकार छड़ें स्थान पूरा नहीं भर सकतीं: समान वृत्तों की सघनतम षट्कोणीय व्यवस्था में φ = π ÷ (2√3) = 0.9069 है, और वास्तविक यार्न रिक्तियों, क्रिंप, रोओं व अनियमित काट के कारण इससे बहुत नीचे रहते हैं।
  • ट्विस्ट φ बढ़ाता है पहले (यार्न भिंचता है) और फिर स्थिर हो जाता है, अतः स्थिर tex पर व्यास घटता और स्थिर होता है। रोटर व फ़्रिक्शन यार्न रिंग यार्नों से कम संकुलित होते हैं; कॉम्पैक्ट यार्न साधारण रिंग यार्न से अधिक संकुलित होते हैं।
⚠️ जाल
सूत्र में व्यास बिना रोओं वाले समतुल्य वृत्ताकार यार्न का है। मापा हुआ प्रकाशीय व्यास बड़ा होता है क्योंकि उसमें निकले हुए तंतु आते हैं, और वह बहुत कम φ देगा।

3. हेलिकल मॉडल, ट्विस्ट व सामर्थ्य

आदर्श हेलिकल मॉडल में हर तंतु समाक्षीय बेलन पर हेलिक्स के रूप में पड़ा है। त्रिज्या r पर प्रति इकाई लंबाई T टर्न के लिए एक टर्न अक्ष के अनुदिश 1/T आगे बढ़ता और 2πr घूमता है, अतः tan θ = 2π r T। हेलिक्स कोण अक्ष पर शून्य और सतह पर अधिकतम है, जहाँ tan α = π d T। d = 0.17 mm व T = 800 turns/m = 0.8 turns/mm के लिए tan α = π × 0.17 × 0.8 = 0.427, अतः α = 23°। ऊपर के d व T = TM ÷ √tex (प्रति cm) रखने पर tan α = 0.01121 × TM ÷ √(ρ φ), जहाँ TM tex-प्रणाली का ट्विस्ट मल्टीप्लायर (turns/cm × √tex) है: पृष्ठीय कोण TM पर निर्भर है, काउंट पर नहीं।

सामर्थ्य। n तंतुओं के लिए, प्रत्येक का भंजन बल F व रैखिक घनत्व t, सभी हेलिक्स कोण θ पर और बिना फिसले साथ टूटते हुए: यार्न बल = n F cos θ व यार्न tex = n t ÷ cos θ, अतः यार्न टेनेसिटी = (F ÷ t) cos² θ। θ = 30° पर टेनेसिटी तंतु की टेनेसिटी की cos² 30° = 0.75 होती है। वास्तविक यार्नों में इस तिर्यकता, छोटे तंतुओं की फिसलन, भार के असमान बँटवारे व अनियमितता के कारण सामर्थ्य-उपयोग गुणांक 1 से कम होता है।

ट्विस्ट व सामर्थ्य। बहुत कम ट्विस्ट पर तंतु मुश्किल से बँधे होते हैं, अतः यार्न तंतु-फिसलन से टूटता है। अधिक ट्विस्ट पार्श्व दाब व तंतुओं को पकड़ने वाला घर्षण बढ़ाता है, अतः सामर्थ्य बढ़ती है। क्रांतिक (इष्टतम) ट्विस्ट के बाद तिर्यकता cos² θ व बाहरी तंतुओं पर असमान प्रतिबल हावी होते हैं, अतः सामर्थ्य घटती है, और यार्न तंतु-टूटन से विफल होता है। इष्टतम ट्विस्ट लंबे व खुरदरे तंतुओं के लिए कम और छोटे या चिकने तंतुओं के लिए अधिक होता है। टूटने पर दीर्घन ट्विस्ट के साथ एक सीमा तक बढ़ता है, पर यार्न कड़ा व कम फूला हो जाता है।

4. यार्न संकुचन व तंतु प्रवासन

ट्विस्ट संकुचन ऐंठने पर डोरी का छोटा होना है: C = (L₀ − L) ÷ L₀ × 100, जहाँ L₀ अनऐंठी व L ऐंठी लंबाई है। यार्न-लंबाई L के लिए सतह के हेलिक्स पर तंतु का पथ L ÷ cos α है, अतः सतही तंतु का संकुचन 1 − cos α है, और संकुचन ट्विस्ट के साथ बढ़ता है। चूँकि उतना ही द्रव्यमान अब कम लंबाई में है, यार्न का रैखिक घनत्व बढ़ता है: tex_यार्न = tex_डोरी ÷ (1 − C)। 4 % सिकुड़ने वाली नाममात्र 20 tex की डोरी 20 ÷ 0.96 = 20.83 tex हो जाती है। ड्रॉन डोरी की ट्विस्टिंग व यार्नों की फ़ोल्डिंग दोनों संकुचन देती हैं, इसीलिए प्राप्त काउंट परिकलित काउंट से कुछ भिन्न होती है।

तंतु प्रवासन यार्न की लंबाई के अनुदिश तंतु का क्रोड व सतह के बीच आना-जाना है। रिंग स्पिनिंग में यह स्पिनिंग ट्राइएंगल में होता है: फ़ीते के किनारे के तंतु लंबा पथ तय करते हैं और बीच वालों से अधिक तनाव लेते हैं, अतः भीतर खिंच जाते हैं, जबकि कम तनाव वाले तंतु बारी से बाहर आ जाते हैं। तब तंतु बदलती त्रिज्या के हेलिक्स का अनुसरण करता है और उसके सिरे कुछ स्थानों पर यार्न में बँध जाते हैं। प्रवासन के बिना हर तंतु निश्चित त्रिज्या पर रहता, सिरे सतह पर ढीले पड़े रहते और यार्न स्वतंत्र परतों का गुच्छा होता जिसमें संसंजन कम होता; प्रवासन से तंतु आपस में गुँथते हैं, अतः सामर्थ्य, संसंजन व रोओं की बँधाई सुधरती है। प्रवासन ट्रेसर (रंगे) तंतुओं से मापा जाता है, माध्य तंतु-स्थिति व त्रिज्य विचलन के आयाम के रूप में। खाँचे में तंतुओं के वलय से बने रोटर यार्न में कम नियमित प्रवासन होता है और सतह पर रैपर तंतु होते हैं।

5. यार्न का प्रतिबल-विकृति व्यवहार

स्टेपल यार्न के तनन वक्र के तीन क्षेत्र हैं: प्रारंभिक, लगभग रैखिक प्रत्यास्थ क्षेत्र, फिर यील्ड क्षेत्र जिसमें तंतु फिसलते और संरचना पुनर्व्यवस्थित होती है तथा ढाल घटती है, और अंत में टूटन तक का क्षेत्र। ऐंठे यार्न तंतुओं से अधिक खिंचते हैं और उनका प्रारंभिक मापांक कम होता है, दो कारणों से।

  • ज्यामिति: निश्चित त्रिज्या के हेलिक्स के लिए यार्न विकृति ε_y तंतु को केवल ε_f = ε_y cos² θ खींचती है, क्योंकि यार्न के खिंचने पर तंतु थोड़ा खुल जाता है। 25° पर तंतु पर यार्न-विकृति का 0.82 गुना विकृति आती है (cos² 25° = 0.82)।
  • संरचना व तंतु: तंतुओं के बीच फिसलन, प्रवासन तथा तंतु का अपना प्रतिबल-विकृति वक्र (जैसे कुछ संश्लिष्ट तंतुओं का यील्ड व उच्च दीर्घनीयता) ज्यामितीय प्रभाव में जुड़ते हैं। अधिक ट्विस्ट (बड़ा हेलिक्स कोण) प्रारंभिक मापांक घटाता और टूटने पर दीर्घन एक सीमा तक बढ़ाता है।

यार्न की सामर्थ्य दुर्बलतम कड़ी का भी गुण है: लंबा यार्न अपने सबसे कमज़ोर स्थान पर टूटता है, अतः परीक्षण-गेज लंबाई बढ़ाने पर औसत भंजन बल घटता और उसका बिखराव कम होता है। भिन्न गेज लंबाइयों पर मापी सामर्थ्य की तुलना नहीं हो सकती, और पतले स्थानों वाला यार्न छोटी व लंबी गेज के बीच सामर्थ्य में बड़ी गिरावट दिखाएगा।

6. द्रव्यमान अनियमितता

अनियमितता को छोटी कट-लंबाई पर प्रति इकाई लंबाई द्रव्यमान के CV % = (मानक विचलन ÷ माध्य) × 100 या U % = (माध्य विचलन ÷ माध्य) × 100 के रूप में मापा जाता है। प्रसामान्य वितरण में U = 0.8 CV (माध्य विचलन = 0.798 σ), अतः U = 10 % वाले यार्न का CV = 12.5 % है। समान तंतुओं की पूर्णतः यादृच्छिक व्यवस्था की एक निम्न सीमा होती है, सीमांत अनियमितता:

CV_lim (%) = 100 ÷ √n, जहाँ n काट में तंतुओं की औसत संख्या है; यदि तंतुओं के रैखिक घनत्व में विचरण-गुणांक CV_t (भिन्न के रूप में) हो तो CV_lim = (100 ÷ √n) × √(1 + CV_t²)। 0.125 tex तंतुओं से बने 25 tex यार्न में n = 200 व CV_lim = 7.07 %। अनियमितता सूचकांक I = CV_वास्तविक ÷ CV_lim; वास्तविक यार्नों में I एक से ऊपर रहता है, और I दर्शाता है कि तंतु-संख्या के अलावा प्रक्रिया कितना जोड़ती है। स्वतंत्र स्रोत प्रसरण के रूप में जुड़ते हैं: CV_कुल² = CV₁² + CV₂², अतः 12 % CV वाले, 8 % सीमा के यार्न में ड्राफ्टिंग, तैयारी व मशीन-दोषों से अतिरिक्त 8.94 % है। n स्वतंत्र स्लिवरों की डबलिंग CV को √n गुना घटाती है, और महीनी काउंट में n घटने से CV_lim बढ़ती है।

⚠️ जाल
CV_lim = 100 ÷ √n आदर्श स्थिति की है, जिसमें तंतु-आकार में विचरण नहीं है, और यह एक सीमा है, लक्ष्य नहीं: कोई वास्तविक यार्न इससे बेहतर नहीं होता। I का एक से कम आना व्यवहार में लगभग कभी नहीं होता और प्रायः बताता है कि आँकड़े या n गलत हैं।

7. रिंग, कॉम्पैक्ट, रोटर, एयर-जेट व फ़्रिक्शन यार्नों के संरचना-गुण संबंध

तालिका समान तंतु व काउंट के लिए विशिष्ट संरचनाओं और उनसे उत्पन्न गुणों की तुलना करती है। ये प्रवृत्तियाँ हैं, नियम नहीं, और तंतु, काउंट व मशीन-सेटिंग के साथ बदलती हैं।

यार्नसंरचनाविशिष्ट परिणाम
रिंगनियमित प्रवासन सहित हेलिक्स में तंतु, अच्छा अभिविन्यासउच्च सामर्थ्य, अच्छा दीर्घन, अधिक रोएँ
कॉम्पैक्टकिनारे के तंतु पकड़े हुए रिंग संरचना, सघन संकुलनअधिक सामर्थ्य व दीर्घन, कम रोएँ, छोटा व्यास
रोटरतंतु कम अभिविन्यस्त व कम विस्तारित, सतह पर रैपर (बेल्ट) तंतु; कम नियमित प्रवासनरिंग से कम सामर्थ्य, बेहतर एकसमानता, अधिक फूला, कम रोएँ, कड़ा
एयर-जेटलगभग समानांतर, अनऐंठा क्रोड व रैपर तंतुकम रोएँ, कम सामर्थ्य, दृढ़, कड़ा स्पर्श
फ़्रिक्शनढीला संकुलित, प्रायः कोर-शीथ; कमज़ोर अभिविन्यासमोटा, फूला, कम सामर्थ्य, उच्च उत्पादन

तर्क यांत्रिक है: सामर्थ्य तब सबसे अधिक होती है जब तंतु समानांतर हों और पार्श्व दाब से पूरी लंबाई पर भली-भाँति पकड़े हों (हेलिकल यार्न), और तब घटती है जब तंतु खराब अभिविन्यस्त, हुकित या केवल कुछ रैपर टर्नों से थमे हों। रोएँ तब घटते हैं जब किनारे के तंतु पकड़े (कॉम्पैक्ट) या लपेटे (एयर-जेट) जाएँ।

मुख्य बिंदु

  • काट में तंतु n = यार्न tex ÷ तंतु tex; तंतु की लंबाई, महीनता, हुक व अभिविन्यास (औसत cos θ) तय करते हैं कि तंतु-सामर्थ्य का कितना उपयोग होता है।
  • φ = tex ÷ [ρ (π d²/4) × 1000] व d = 0.03568 √(tex ÷ ρφ) mm; समान वृत्तों की अधिकतम षट्कोणीय संकुलन 0.9069 है।
  • हेलिकल मॉडल में tan θ = 2π r T व सतह पर tan α = π d T, जो TM पर निर्भर है, काउंट पर नहीं; आदर्श टेनेसिटी = तंतु टेनेसिटी × cos² θ।
  • जब फिसलन हावी हो तब सामर्थ्य ट्विस्ट के साथ बढ़ती है और क्रांतिक ट्विस्ट के बाद तिर्यकता हावी होने पर घटती है; संकुचन C रैखिक घनत्व को tex ÷ (1 − C) कर देता है।
  • स्पिनिंग ट्राइएंगल में तनाव-अंतर से प्रवासन तंतु-सिरे बाँधता है; यार्न विकृति से तंतु-विकृति ε_y cos² θ होती है, और परीक्षण-लंबाई बढ़ने पर सामर्थ्य घटती है (दुर्बलतम कड़ी)।
  • CV_lim = 100 ÷ √n, U = 0.8 CV, I = CV ÷ CV_lim एक से ऊपर, स्वतंत्र प्रसरण जुड़ते हैं, और n स्लिवरों की डबलिंग CV को √n से भाग देती है; यार्न का प्रकार अभिविन्यास, संकुलन, सामर्थ्य व रोएँ तय करता है।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. तंतु की कौन-सी विशेषताएँ दिए गए काउंट व ट्विस्ट के स्टेपल यार्न की सामर्थ्य सामान्यतः बढ़ाती हैं?

    1. मोटे, अधिक क्रिंप वाले तंतु, जो काट में संख्या घटाते हैं; जिससे भार बाँटने वाले तंतु कम हो जाते हैं
    2. अनेक हुक वाले छोटे तंतु, जो यार्न-अक्ष के आर-पार पड़े हों; और ये बहुत कम भार पर फिसलकर निकल जाते हैं
    3. लंबे, सीधे, भली-भाँति अभिविन्यस्त तंतु, पर्याप्त सामर्थ्य सहित
    4. बहुत भिन्न लंबाई के तंतु, ताकि सभी फिसलन-तल भिन्न हों; जिससे भार उनमें बराबर बँट जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — लंबे, सीधे, भली-भाँति अभिविन्यस्त तंतु, पर्याप्त सामर्थ्य सहित

    लंबे, सीधे, समानांतर तंतु अधिक लंबाई पर पकड़े जाते हैं और अक्ष के अनुदिश भार वहन करते हैं, अतः तंतु-सामर्थ्य का बेहतर उपयोग होता है। हुक, आड़े पड़े तंतु व अधिक मोटे तंतु उलटा करते हैं।
  2. स्थिर यार्न tex पर, ट्विस्ट कम से मध्यम स्तर तक बढ़ाने पर यार्न व्यास व संकुलन अंश का सामान्यतः क्या होता है?

    1. व्यास घटता और संकुलन अंश बढ़ता है, क्योंकि ट्विस्ट तंतुओं को पास-पास भींचता है
    2. व्यास बढ़ता और संकुलन अंश घटता है, क्योंकि यार्न भीतर से खुलता है; क्योंकि तंतु एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं
    3. दोनों अपरिवर्तित रहते हैं, क्योंकि व्यास केवल tex पर निर्भर है और सेक्शन में तंतुओं की व्यवस्था पर नहीं
    4. व्यास व संकुलन अंश दोनों बढ़ते हैं, क्योंकि तंतु जुड़ते हैं यद्यपि स्थिर tex पर यार्न में कोई नया तंतु नहीं आता
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — व्यास घटता और संकुलन अंश बढ़ता है, क्योंकि ट्विस्ट तंतुओं को पास-पास भींचता है

    ट्विस्ट तंतुओं को बाँधकर संहत करता है, अतः φ बढ़ता है और, tex व घनत्व स्थिर होने से, d = 0.03568 √(tex ÷ ρφ) घटता है, जब तक संरचना पूर्णतः संकुलित न हो जाए और परिवर्तन स्थिर हो जाए। व्यास केवल tex का फलन नहीं है।
  3. बहुत कम ट्विस्ट पर काते यार्न के टूटने में सामान्यतः कौन-सी विफलता-विधि हावी रहती है?

    1. सभी तंतुओं का एक ही क्षण में टूटना, क्योंकि भार उन सबमें पूर्णतः बँटता है
    2. घर्षण से तंतुओं का पिघलना उन बिंदुओं पर जहाँ वे एक-दूसरे को काटते हैं
    3. तंतुओं की स्वयं मरोड़ विफलता, क्योंकि मरोड़ तंतुओं के भीतर सबसे अधिक होती है
    4. तंतुओं का एक-दूसरे पर फिसलना, क्योंकि पार्श्व दाब कम है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — तंतुओं का एक-दूसरे पर फिसलना, क्योंकि पार्श्व दाब कम है

    कम ट्विस्ट पर तंतुओं के बीच पकड़ कमज़ोर होती है और वे खिसककर बाहर आ जाते हैं। क्रांतिक ट्विस्ट के बाद अधिक ट्विस्ट पर तंतु-टूटन हावी होती है।
  4. अन्य बातें समान रहने पर, कौन-सा परिवर्तन उस ट्विस्ट को घटाता है जिस पर यार्न सामर्थ्य अधिकतम होती है?

    1. समान महीनता के छोटे तंतु प्रयोग करना, जो अधिक आसानी से जुड़े रहते हैं
    2. लंबे तंतु प्रयोग करना, जो अधिक लंबाई पर थमे रहते हैं
    3. अधिक चिकने, फिसलने वाले तंतु प्रयोग करना, जो एक-दूसरे को बेहतर पकड़ते हैं
    4. केवल महीनी काउंट प्रयोग करना, तंतुओं की लंबाई कुछ भी हो
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — लंबे तंतु प्रयोग करना, जो अधिक लंबाई पर थमे रहते हैं

    लंबे तंतु अधिक लंबाई पर पकड़े जाते हैं और फिसलन से बचने के लिए कम ट्विस्ट चाहिए, अतः इष्टतम कम होता है। छोटे या चिकने तंतुओं को फिसलन से बचने के लिए अधिक ट्विस्ट चाहिए।
  5. समान तंतु से, समान संकुलन अंश व घनत्व के साथ भिन्न काउंट के दो यार्न बनते हैं, और दोनों एक ही tex-प्रणाली ट्विस्ट मल्टीप्लायर TM (turns/cm × √tex) से काते जाते हैं। उनके पृष्ठीय हेलिक्स कोणों की तुलना कैसी होगी?

    1. महीने यार्न का कोण बड़ा है, क्योंकि उसमें प्रति cm अधिक टर्न हैं, क्योंकि उसका व्यास छोटा है और ट्विस्ट वही
    2. मोटे यार्न का कोण बड़ा है, क्योंकि उसका व्यास बड़ा है, क्योंकि सेक्शन में तंतुओं की संख्या वही है
    3. वे बराबर हैं, क्योंकि tan α = 0.01121 TM ÷ √(ρφ) में काउंट नहीं है
    4. वे काउंटों के वर्गमूलों के अनुपात से भिन्न हैं और उनके व्यासों के अनुपात से भी
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — वे बराबर हैं, क्योंकि tan α = 0.01121 TM ÷ √(ρφ) में काउंट नहीं है

    tan α = π d T। मोटे यार्न का d बड़ा है, पर उसके प्रति cm टर्न उसी अनुपात में कम हैं (T = TM ÷ √tex और d ∝ √tex), अतः गुणनफल वही रहता है। इसीलिए काउंटों में ट्विस्ट की तुलना के लिए TM प्रयोग होता है।
  6. रिंग-कते यार्न में तंतु प्रवासन का मुख्य लाभ क्या है?

    1. यार्न हर बिंदु पर पतला हो जाता है, क्योंकि हेलिक्स तब अक्ष के अधिक निकट होता है
    2. तंतु यार्न-अक्ष के अनुदिश तनाव वहन करना बंद कर देते हैं, क्योंकि ट्विस्ट उन पर से तनाव हटा देता है
    3. ट्विस्ट संकुचन शून्य हो जाता है, क्योंकि तंतु अब छोटे नहीं हो सकते
    4. तंतु क्रोड व सतह के बीच आते-जाते हैं, अतः उनके सिरे पकड़े जाते हैं और संसंजन सुधरता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — तंतु क्रोड व सतह के बीच आते-जाते हैं, अतः उनके सिरे पकड़े जाते हैं और संसंजन सुधरता है

    प्रवासन प्रत्येक तंतु को बदलती त्रिज्या के हेलिक्स पर चलाता है, अतः कोई तंतु-सिरा पूरी लंबाई सतह पर मुक्त नहीं रहता, और सामर्थ्य व रोओं की बँधाई सुधरती है। यह तंतुओं से तनाव नहीं हटाता और संकुचन समाप्त नहीं करता।
  7. अधिक ऐंठा यार्न समान तंतु के हल्के ऐंठे यार्न से सामान्यतः कम प्रारंभिक मापांक क्यों दिखाता है?

    1. क्योंकि बड़ा हेलिक्स कोण तंतु पर यार्न से कम विकृति डालता और उसके बल को अक्ष से तिरछा करता है
    2. क्योंकि अधिक ऐंठे यार्न में तंतु छोटे होते हैं, इसलिए वे कम भार पर फिसल जाते हैं
    3. क्योंकि अधिक ऐंठे यार्न में तंतु अधिक मज़बूत होते हैं, और इसलिए समान भार पर कम खिंचते हैं
    4. क्योंकि यार्न का व्यास छोटा होता है, इसलिए कम तंतु दीर्घन वहन करते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — क्योंकि बड़ा हेलिक्स कोण तंतु पर यार्न से कम विकृति डालता और उसके बल को अक्ष से तिरछा करता है

    θ कोण के हेलिक्स में तंतु पर केवल ε_y cos² θ विकृति आती है और वह अपना बल अक्ष के अनुदिश cos θ गुणक से देता है, अतः बड़ा θ प्रारंभिक कठोरता घटाता है। ट्विस्ट से तंतु न छोटे होते हैं न मज़बूत।
  8. यार्न के लिए अनियमितता सूचकांक (वास्तविक CV ÷ सीमांत CV) का 1.6 होना क्या दर्शाता है?

    1. यार्न यादृच्छिक सीमा से 1.6 गुना अधिक नियमित है, क्योंकि प्रक्रिया तंतु-विचरण हटा देती है
    2. यार्न पूर्णतः यादृच्छिक तंतु-व्यवस्था से कम एकसमान है, क्योंकि प्रक्रिया अनियमितता जोड़ती है
    3. यार्न की काट में तंतुओं की संख्या 1.6 गुना है और सीमांत अनियमितता भी अधिक
    4. तंतु रैखिक घनत्व का CV 1.6 % है, जिसका यार्न की अपनी अनियमितता से संबंध नहीं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — यार्न पूर्णतः यादृच्छिक तंतु-व्यवस्था से कम एकसमान है, क्योंकि प्रक्रिया अनियमितता जोड़ती है

    I = CV_वास्तविक ÷ CV_lim, अतः 1.6 का अर्थ है कि वास्तविक CV आदर्श यादृच्छिक सीमा से 60 % ऊपर है, जो ड्राफ्टिंग तरंगों, तैयारी-दोषों व मशीन-दोषों के कारण है। यादृच्छिक तंतुओं के लिए 1 से कम मान भौतिक रूप से असंभव होगा।
  9. एक यार्न में हर तंतु अक्ष से समान 30° हेलिक्स कोण पर है, सभी तंतुओं का भंजन बल व रैखिक घनत्व समान है, वे साथ टूटते हैं और फिसलते नहीं। यार्न टेनेसिटी व तंतु टेनेसिटी का अनुपात है

    1. 0.87
    2. 0.58
    3. 0.50
    4. 0.75
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 0.75

    यार्न बल = n F cos θ व यार्न tex = n t ÷ cos θ, अतः टेनेसिटी अनुपात cos² 30° = 0.75। 0.87 केवल cos 30° है, जो भूल जाता है कि प्रति मीटर यार्न में तिरछे तंतुओं की अतिरिक्त लंबाई द्रव्यमान जोड़ती है।
  10. टेक्स T, तंतु घनत्व ρ व संकुलन अंश φ के वृत्ताकार यार्न के व्यास व संकुलन अंश के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. स्थिर φ व ρ पर व्यास √T के समानुपाती है
    2. स्थिर T व φ पर अधिक घने तंतु से छोटा व्यास मिलता है
    3. संकुलन अंश यार्न व्यास व तंतु व्यास का अनुपात है
    4. वास्तविक यार्न का संकुलन अंश वृत्ताकार तंतुओं के षट्कोणीय सघन-संकुलन मान से अधिक हो सकता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — स्थिर φ व ρ पर व्यास √T के समानुपाती है; B — स्थिर T व φ पर अधिक घने तंतु से छोटा व्यास मिलता है

    d = 0.03568 √(T ÷ ρφ) से d, √T और 1/√ρ के अनुसार चलता है। φ आयतन-अंश है, व्यासों का अनुपात नहीं, और रिक्तियों, क्रिंप व रोओं के कारण वास्तविक यार्नों में वह 0.9069 से बहुत नीचे रहता है।
  11. ट्विस्ट, संकुचन व प्रवासन के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. ट्विस्ट बढ़ाने पर ट्विस्ट संकुचन बढ़ता है
    2. लंबाई के अनुदिश प्रवासन तंतु-सिरों को यार्न में बाँधता है
    3. तंतु का हेलिक्स कोण यार्न-अक्ष पर सबसे अधिक होता है
    4. डोरी ऐंठने पर यार्न का रैखिक घनत्व घटता है
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    उत्तर: A — ट्विस्ट बढ़ाने पर ट्विस्ट संकुचन बढ़ता है; B — लंबाई के अनुदिश प्रवासन तंतु-सिरों को यार्न में बाँधता है

    संकुचन ट्विस्ट के साथ बढ़ता है और यार्न tex को बढ़ाता है, घटाता नहीं। प्रवासन तंतुओं को बाँधता है। हेलिकल मॉडल में कोण अक्ष पर शून्य और सतह पर अधिकतम है।
  12. समान तंतु व काउंट के लिए यार्न संरचना व गुणों के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. कॉम्पैक्ट रिंग यार्न में सामान्यतः पारंपरिक रिंग यार्न से कम रोएँ होते हैं
    2. रोटर यार्न की सतह पर रैपर तंतु होते हैं, और उसके तंतु सामान्यतः रिंग यार्न से कम अभिविन्यस्त होते हैं
    3. एयर-जेट यार्न में उसी हेलिक्स कोण पर ऐंठे तंतुओं का क्रोड होता है जो रिंग यार्न का है
    4. फ़्रिक्शन यार्न में सभी कते यार्नों में सघनतम संकुलन व सर्वोत्तम अभिविन्यास होता है
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    उत्तर: A — कॉम्पैक्ट रिंग यार्न में सामान्यतः पारंपरिक रिंग यार्न से कम रोएँ होते हैं; B — रोटर यार्न की सतह पर रैपर तंतु होते हैं, और उसके तंतु सामान्यतः रिंग यार्न से कम अभिविन्यस्त होते हैं

    कॉम्पैक्ट स्पिनिंग किनारे के तंतुओं को पकड़ती है, जिससे रोएँ घटते हैं; रोटर यार्नों में बेल्ट तंतु व कमज़ोर अभिविन्यास होता है। एयर-जेट क्रोड लगभग समानांतर व अनऐंठा होता है, और फ़्रिक्शन यार्न ढीले संकुलित व खराब अभिविन्यस्त होते हैं।
  13. 25 tex का यार्न 0.125 tex के एकसमान रैखिक घनत्व वाले तंतुओं से काता गया है। तंतुओं की यादृच्छिक व्यवस्था के लिए CV_lim = 100 ÷ √n, जहाँ n अनुप्रस्थ काट में तंतुओं की संख्या है। सीमांत अनियमितता ____ % है (दो दशमलव स्थान तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 7.07

    n = 25 ÷ 0.125 = 200। CV_lim = 100 ÷ √200 = 100 ÷ 14.142 = 7.07 %।
  14. 20 tex के यार्न का व्यास 0.18 mm और तंतु घनत्व 1.50 g/cm³ है। φ = tex ÷ [ρ × (π d²/4) × 1000] से, d mm में, tex g/km में व ρ g/cm³ में लेकर, संकुलन अंश ____ है (दो दशमलव स्थान तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 0.52

    π d²/4 = π × 0.0324 ÷ 4 = 0.02545 mm²। ρ = 1.50 व 1000 से गुणा करने पर 38.17 मिलता है। φ = 20 ÷ 38.17 = 0.524, यानी 0.52।
  15. 30 tex के पॉलिएस्टर यार्न (तंतु घनत्व 1.38 g/cm³) का संकुलन अंश 0.60 है। d = √[4 × tex ÷ (π ρ φ × 1000)] mm से, tex g/km में व ρ g/cm³ में लेकर, यार्न का व्यास ____ माइक्रोमीटर है (निकटतम पूर्णांक)।

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    उत्तर: 215

    ρ φ = 1.38 × 0.60 = 0.828। 4 × 30 = 120; π × 0.828 × 1000 = 2601.2। d² = 120 ÷ 2601.2 = 0.04613 mm², अतः d = 0.2148 mm = 215 माइक्रोमीटर।
  16. आदर्श हेलिकल मॉडल में यार्न की सतह पर हेलिक्स कोण α, tan α = π d T का पालन करता है, जहाँ d यार्न व्यास और T उसी लंबाई-इकाई में प्रति इकाई लंबाई टर्न हैं। 0.17 mm व्यास के यार्न में 800 टर्न प्रति मीटर हैं। पृष्ठीय हेलिक्स कोण ____ डिग्री है (निकटतम पूर्णांक)।

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    उत्तर: 23

    T = 800 turns/m = 0.8 turns/mm। tan α = π × 0.17 × 0.8 = 0.4273, अतः α = arctan 0.4273 = 23.1°, यानी 23 डिग्री।
  17. 20 tex नाममात्र रैखिक घनत्व की ड्रॉन डोरी ऐंठकर यार्न बनने पर 4 % छोटी हो जाती है (ऐंठने के बाद की लंबाई पहले की 0.96 है)। द्रव्यमान अपरिवर्तित है। यार्न का रैखिक घनत्व ____ tex है (दो दशमलव स्थान तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 20.83

    वही द्रव्यमान अब 0.96 लंबाई में है, अतः tex = 20 ÷ 0.96 = 20.83। 0.96 से गुणा करना (19.2) आम चूक है।