संरचना एवं संघटन: X-ray विवर्तन, स्पेक्ट्रमिकी, सूक्ष्मदर्शिकी तथा EDS

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर का है। यह XE2 पदार्थ विज्ञान के खंड XE2.4 के पहले अनुच्छेद का उत्तर देता है, जो उन वैकल्पिक खंडों में से एक है जिनमें से परीक्षा में दो चुनने होते हैं: “X-ray diffraction: Bragg’s Law, structure factor, indexing of cubic diffraction patterns; spectroscopic techniques: UV-Vis, IR and Raman; band-gap measurement; Microscopy (optical, scanning and transmission electron microscopy): wavelength range, resolution, depth of field; Composition analysis using energy dispersive spectroscopy.” इसमें Bragg का नियम, SC, BCC व FCC जालकों के structure factor और क्रमबद्ध अनुपस्थितियाँ (systematic absences), sin²θ अनुपातों से indexing, UV-Vis, IR व Raman क्या जाँचते हैं और उनके चयन नियम, Tauc plot, तथा optical, scanning व transmission electron microscope की तरंगदैर्घ्य, विभेदन और क्षेत्र-गहराई (depth of field) और EDS पढ़ाए गए हैं। संख्यात्मक प्रश्न हैं: Bragg कोण व d-spacing, indexing अनुपात, जालक स्थिरांक, इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्घ्य, Abbe विभेदन और अवशोषण-किनारे से band gap।

Bragg का नियम और विवर्तन पैटर्न से क्या मिलता है

क्रिस्टल के d दूरी वाले तलों को आंशिक परावर्तक दर्पण मानें। आसन्न तलों से परावर्तित दो किरणों का पथांतर 2d sinθ होता है, जहाँ θ किरण-पुंज और तलों के बीच का glancing कोण है। पथांतर तरंगदैर्घ्य का पूर्ण गुणज हो तो वे प्रबलित होती हैं: nλ = 2d sinθ (Bragg का नियम)। चूँकि sinθ ≤ 1, परावर्तन तभी संभव है जब λ ≤ 2d/n हो। इसीलिए X-ray (λ लगभग 0.05 से 0.25 nm, परमाणु-दूरियों के बराबर) क्रिस्टल से विवर्तित होती है, दृश्य प्रकाश नहीं। संसूचक आपतित दिशा से 2θ पर रखा जाता है, इसलिए पैटर्न तीव्रता बनाम 2θ के रूप में दर्ज होते हैं।

a जालक स्थिरांक वाले घनीय क्रिस्टल में (hkl) तलों की दूरी d = a/√(h² + k² + l²) होती है। दोनों को मिलाने पर sin²θ = (λ²/4a²)(h² + k² + l²)। अतः शिखरों की स्थितियाँ जालक प्रकार और a तय करती हैं; तीव्रताएँ इस पर निर्भर हैं कि कौन-से परमाणु कहाँ हैं (structure factor); और चौड़ाइयाँ क्रिस्टलाइट आकार व विकृति की सूचना देती हैं, जिनकी गणना इस खंड में अपेक्षित नहीं है।

🧠 हल किया उदाहरण
एक घनीय धातु में a = 0.405 nm है। λ = 0.154 nm (प्रथम कोटि) के लिए (111) परावर्तन का 2θ ज्ञात कीजिए। d₁₁₁ = 0.405/√3 = 0.2338 nm। sinθ = λ/2d = 0.154/(2 × 0.2338) = 0.3293, अतः θ = 19.23° और 2θ = 38.45°। जाँच: उत्तर 180° से कम और sinθ 1 से कम होना चाहिए; λ बड़ी करने पर θ बढ़ेगा और अंततः परावर्तन वर्जित हो जाएगा।
⚠️ जाल: θ बनाम 2θ
यंत्र और प्रश्न प्रायः 2θ देते हैं, पर Bragg के नियम में θ आता है। sine लेने से पहले शिखर-स्थिति को आधा करें। साथ ही, (100) का द्वितीय-कोटि परावर्तन वही है जो (200) का प्रथम-कोटि: n = 2 वाला nλ = 2d sinθ, λ = 2(d/2) sinθ के बराबर है।

Structure factor, क्रमबद्ध अनुपस्थितियाँ और घनीय पैटर्न का indexing

Structure factor इकाई कोष्ठिका के प्रत्येक परमाणु j (भिन्नात्मक निर्देशांक uⱼ, vⱼ, wⱼ, परमाणु प्रकीर्णन गुणांक fⱼ) से प्रकीर्णित तरंगों को जोड़ता है: F(hkl) = Σ fⱼ exp[2πi(huⱼ + kvⱼ + lwⱼ)]। तीव्रता |F|² के समानुपाती होती है। यदि F = 0 हो तो Bragg का नियम संतुष्ट होने पर भी परावर्तन अनुपस्थित रहता है, क्योंकि कोष्ठिका के भीतर के परमाणुओं की तरंगें कट जाती हैं। एक ही प्रकार के परमाणु वाले Bravais जालक के लिए नियम केवल जालक-बिंदुओं से मिल जाते हैं:

घनीय जालकों के लिए चयन नियम (प्रति जालक-बिंदु एक परमाणु)
जालकआधार बिंदुF ≠ 0 जबप्रथम रेखाएँ (h²+k²+l²)
SC(0,0,0)सभी hkl1, 2, 3, 4, 5, 6, 8
BCC(0,0,0), (½,½,½)h + k + l सम2, 4, 6, 8, 10, 12
FCC(0,0,0), (½,½,0), (½,0,½), (0,½,½)h, k, l सभी विषम या सभी सम (अमिश्रित)3, 4, 8, 11, 12, 16

BCC के लिए F = f[1 + eiπ(h+k+l)], जो h + k + l सम होने पर 2f और विषम होने पर 0 है। FCC के लिए F = f[1 + eiπ(h+k) + eiπ(h+l) + eiπ(k+l)], जो अमिश्रित सूचकांकों पर 4f और मिश्रित पर 0 है। Diamond cubic संरचना (FCC और ¼,¼,¼ से विस्थापित दूसरा FCC) में केवल अमिश्रित hkl बचते हैं और सभी-सम वाले वे परावर्तन भी हट जाते हैं जिनमें h + k + l = 4n ± 2 हो; अतः इसकी प्रथम रेखाएँ 3, 8, 11, 16 हैं। NaCl जैसे यौगिक (FCC जालक, दो-आयन आधार) में अमिश्रित hkl बचते हैं; सभी-सम रेखाओं में F = 4(f₁ + f₂) और सभी-विषम में F = 4(f₁ − f₂) होता है, इसलिए दोनों आयन लगभग समान प्रकीर्णन करें तो विषम रेखाएँ क्षीण होती हैं।

पाउडर पैटर्न का indexing। प्रत्येक शिखर 2θ को sin²θ में बदलें, सभी मानों को सबसे छोटे से भाग दें, और अनुमत N = h² + k² + l² अनुक्रमों से मिलाएँ। SC देता है 1:2:3:4:5:6:8; BCC में अनुमत N (2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, 16) को 2 से भाग देने पर 1:2:3:4:5:6:7:8; FCC देता है 3:4:8:11:12, अर्थात 1:1.33:2.67:3.67:4। पहला अनुपात 1.33 आए तो FCC; और 7 का न होना (N = 7 तीन वर्गों का योग नहीं बन सकता) उच्च कोण पर SC को BCC से अलग करता है। जालक पहचानने के बाद किसी भी रेखा से a = λ√N/(2 sinθ)।

⚠️ जाल: BCC बनाम SC अनुपात
BCC और SC दोनों 1:2:3:4:5:6 से शुरू होते हैं, इसलिए छह रेखाओं का पैटर्न उन्हें अलग नहीं कर सकता। सातवीं रेखा अलग करती है: BCC में वह है (N = 14, अनुपात 7) जबकि SC में नहीं, क्योंकि 7 तीन वर्गों का योग नहीं है। निर्णय से पहले FCC (प्रथम अनुपात 1.33) और diamond (दूसरी रेखा पहली की 2.67 गुनी) अवश्य जाँचें।

UV-Vis, IR तथा Raman स्पेक्ट्रमिकी

स्पेक्ट्रमिकी मापती है कि पदार्थ प्रकाश से ऊर्जा का आदान-प्रदान कैसे करता है। UV-Vis (लगभग 200 से 800 nm) इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण जाँचता है: अर्धचालकों में संयोजी से चालन बैंड, आयनों व ऑक्साइडों में d–d तथा आवेश-स्थानांतरण संक्रमण, कार्बनिक पदार्थों में π→π*। अवरक्त (IR) अवशोषण (मध्य-IR 4000 से 400 cm⁻¹, अर्थात 2.5 से 25 µm) आणविक व जालक कंपन जाँचता है। Raman प्रकीर्णन में एकवर्णी (प्रायः दृश्य) लेज़र लगता है; प्रकीर्णित प्रकाश का एक छोटा भाग एक कंपन क्वांटम खो देता है (Stokes) या पा लेता है (anti-Stokes), और Raman shift (cm⁻¹ में, लेज़र रेखा से मापा) कंपन-तरंगसंख्या के बराबर होता है।

तीनों तकनीकों की तुलना
तकनीकप्रक्रियाचयन नियमसामान्य उपयोग
UV-Visअवशोषण या परावर्तन, इलेक्ट्रॉनिकअनुमत इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण; प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष अंतरालBand gap, रंग, सांद्रता
IRअवशोषण, कंपनिककंपन में द्विध्रुव आघूर्ण बदलना चाहिएक्रियात्मक समूह, आबंध
Ramanअप्रत्यास्थ प्रकीर्णन, कंपनिककंपन में ध्रुवणीयता बदलनी चाहिएप्रावस्थाएँ, दोष, कार्बन रूप, विकृति

जिस अणु में सममिति-केंद्र हो उसके लिए पारस्परिक अपवर्जन नियम लागू होता है: जो कंपन IR सक्रिय है वह Raman निष्क्रिय है और इसके विपरीत। रैखिक CO₂ में सममित तनन द्विध्रुव को शून्य रखता है पर ध्रुवणीयता बदलता है, इसलिए वह केवल Raman सक्रिय है; असममित तनन और बंकन द्विध्रुव बदलते हैं, इसलिए केवल IR सक्रिय हैं। कमरे के ताप पर Stokes रेखाएँ anti-Stokes रेखाओं से प्रबल होती हैं क्योंकि उत्तेजित कंपन स्तर में जनसंख्या कम होती है (Boltzmann गुणक)। Raman shift लेज़र तरंगदैर्घ्य पर निर्भर नहीं करता; प्रकीर्णित प्रकाश की निरपेक्ष तरंगदैर्घ्य करती है।

अवशोषण से band gap का मापन: Tauc plot

फ़ोटॉन का अंतराल के पार अवशोषण तभी होता है जब hν ≥ E_g हो, इसलिए अवशोषण गुणांक α अवशोषण-किनारे पर तेज़ी से बढ़ता है। त्वरित अनुमान E_g = hc/(e λ_edge) है; सुविधाजनक इकाइयों में E_g (eV) ≈ 1240/λ_edge (nm)। फ़िल्म में α, मापे गए अवशोषण A और मोटाई t से α = 2.303 A/t द्वारा मिलता है; पाउडर में विसरित परावर्तन R को Kubelka–Munk फलन F(R) = (1 − R)²/(2R) में बदला जाता है, जो α का स्थान लेता है।

Tauc संबंध है (αhν)1/r = A(hν − E_g), जहाँ अनुमत प्रत्यक्ष संक्रमण के लिए r = ½ और अनुमत अप्रत्यक्ष संक्रमण के लिए r = 2। प्रत्यक्ष-अंतराल पदार्थ के लिए (αhν)² बनाम hν, और अप्रत्यक्ष के लिए (αhν)1/2 आलेखित करें; सीधे भाग को hν अक्ष तक बढ़ाएँ और अंतःखंड पर E_g पढ़ें। ग़लत घात लेने पर आलेख वक्र आता है और अंतःखंड ग़लत।

🧠 हल किया उदाहरण
एक फ़िल्म का अवशोषण-किनारा 500 nm पर है। h = 6.626 × 10⁻³⁴ J s, c = 3.00 × 10⁸ m/s, e = 1.602 × 10⁻¹⁹ C लेकर: E = hc/λ = (6.626 × 10⁻³⁴ × 3.00 × 10⁸)/(500 × 10⁻⁹) = 3.976 × 10⁻¹⁹ J = 2.48 eV। शॉर्टकट 1240/500 = 2.48 eV देता है, वही। जाँच: दृश्य फ़ोटॉन (400 से 700 nm) 1.8 से 3.1 eV वहन करते हैं; जो पदार्थ केवल 500 nm से नीचे अवशोषित करे वह पीला-नारंगी दिखता है।
⚠️ जाल: किनारा बनाम पूँछ
दोष और अशुद्धि अवस्थाएँ अंतराल के नीचे ढलवाँ अवशोषण-पूँछ (Urbach tail) बनाती हैं। Band gap सीधे Tauc क्षेत्र का अंतःखंड है, वह तरंगदैर्घ्य नहीं जहाँ अवशोषण का पहला अंश दिखे। r = ½ से ख़राब Tauc फ़िट देने वाला प्रत्यक्ष-अंतराल पदार्थ वास्तव में अप्रत्यक्ष हो सकता है: दोनों घात आज़माएँ।

Optical, scanning तथा transmission electron microscopy

विभेदन वह न्यूनतम दूरी है जिस पर दो बिंदु अलग दिखते हैं। Abbe सीमा d = 0.61 λ/(n sinα) = 0.61 λ/NA है, जहाँ NA अभिदृश्यक का संख्यात्मक द्वारक है। दृश्य प्रकाश (400 से 700 nm) और NA लगभग 1.4 (oil immersion) के लिए सीमा लगभग 0.2 µm है। छोटी λ और बड़ा NA दोनों सहायक हैं। क्षेत्र-गहराई (depth of field), यानी फ़ोकस में रहने वाली ऊँचाइयों का परिसर, NA बढ़ने पर घटती है, optical microscope में लगभग 1/NA² की तरह, इसलिए खुरदरी सतहों के उच्च-आवर्धन optical चित्र केवल पतली परत में फ़ोकस में रहते हैं।

इलेक्ट्रॉन की de Broglie तरंगदैर्घ्य λ = h/p होती है। V से त्वरित होने पर eV = p²/2m, अतः λ = h/√(2m e V), या V वोल्ट में 1.226/√V nm (आपेक्षिकता की उपेक्षा करके)। उच्च वोल्टता पर आपेक्षिकीय संशोधन मायने रखता है: λ = h/√[2meV(1 + eV/2mc²)]। आपेक्षिकीय संशोधन के साथ सामान्य मान 10 kV पर 12.2 pm (संशोधन के बिना 12.3 pm), 100 kV पर 3.70 pm और 200 kV पर 2.51 pm हैं, दृश्य प्रकाश से लगभग 10⁵ गुना छोटे। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शियों को लेंस विपथन सीमित करते हैं, λ नहीं, इसलिए NA बहुत छोटा रखा जाता है (अर्धकोण लगभग 10⁻² rad), फिर भी विभेदन नैनोमीटर या उससे बेहतर पहुँचता है।

तीन सूक्ष्मदर्शियों की तुलना
विशेषताOpticalSEMTEM
प्रोबदृश्य प्रकाश, 400 से 700 nmफ़ोकस्ड इलेक्ट्रॉन पुंज, लगभग 1 से 30 kV, सतह पर स्कैनइलेक्ट्रॉन पुंज, सामान्यतः 100 से 300 kV, नमूने के आर-पार
संकेतपरावर्तित या पारगमित प्रकाशद्वितीयक इलेक्ट्रॉन (सतह-आकृति), पश्च-प्रकीर्णित इलेक्ट्रॉन (परमाणु-क्रमांक कंट्रास्ट), X-rayपारगमित व विवर्तित इलेक्ट्रॉन: चित्र और विवर्तन पैटर्न
विभेदनलगभग 0.2 µmनैनोमीटर पैमाना, सामान्यतः 1 से 10 nmउप-नैनोमीटर; परमाण्विक पंक्तियाँ विभेदित
क्षेत्र-गहराईसबसे कमअधिक (पुंज अभिसरण संकीर्ण)पतला नमूना, बाधा नहीं
नमूनापॉलिश व etch किया हुआठोस; चालक या लेपित; निर्वातइलेक्ट्रॉन-पारदर्शी पतली पन्नी, लगभग 100 nm से कम

ऊर्जा-परिक्षेपी स्पेक्ट्रमिकी (EDS) से संघटन विश्लेषण

SEM या TEM का इलेक्ट्रॉन पुंज जब किसी आंतरिक कोश का इलेक्ट्रॉन निकालता है, तो बाहरी इलेक्ट्रॉन नीचे गिरता है और परमाणु एक अभिलक्षणिक X-ray उत्सर्जित करता है जिसकी ऊर्जा दोनों कोशों की ऊर्जाओं के अंतर के बराबर होती है। यह ऊर्जा परमाणु क्रमांक Z से तय होती है (Moseley: √ν, Z के साथ रैखिक बढ़ता है), इसलिए वह तत्व का नाम बताती है; उस ऊर्जा पर गिनतियों की संख्या मात्रा मापती है। ऊर्जा-परिक्षेपी संसूचक (सिलिकॉन-आधारित अर्धचालक संसूचक) प्रत्येक फ़ोटॉन दर्ज कर उसे ऊर्जा से छाँटता है, जिससे पूरा स्पेक्ट्रम एक साथ मिलता है, ऊर्जा-विभेदन लगभग 130 eV। तरंगदैर्घ्य-परिक्षेपी स्पेक्ट्रोमीटर (क्रिस्टल से Bragg विवर्तन) कहीं बेहतर विभेदन देते हैं पर धीमे स्कैन करते हैं।

  • गुणात्मक: शिखर तत्व व रेखा (Kα, Kβ, Lα) से चिह्नित। रेखाएँ संसूचक-विभेदन के भीतर हों तो अतिव्यापन होता है, जैसे भिन्न तत्वों की पड़ोसी L और K रेखाएँ।
  • मात्रात्मक: शिखर तीव्रताएँ आव्यूह संशोधनों (परमाणु क्रमांक, अवशोषण, प्रतिदीप्ति) के साथ भार या परमाणु प्रतिशत में बदली जाती हैं; समतल, पॉलिश नमूनों और भारी तत्वों के लिए सटीकता सर्वोत्तम।
  • सीमाएँ: हाइड्रोजन और हीलियम अभिलक्षणिक X-ray नहीं देते; सबसे हल्के संसूच्य तत्व (Li से O) ठीक से नहीं मापे जाते क्योंकि उनके कम-ऊर्जा फ़ोटॉन नमूने व संसूचक-खिड़की में अवशोषित हो जाते हैं; SEM में विश्लेषित आयतन माइक्रोमीटर पैमाने का अन्योन्यक्रिया आयतन होता है, इसलिए स्थानिक विभेदन चित्र-विभेदन से बहुत ख़राब है।
🎯 EDS, XRD से भिन्न क्यों है
XRD दीर्घ-परास क्रम से प्रावस्थाएँ (कौन-सी क्रिस्टल संरचना) पहचानता है; EDS संरचना की परवाह किए बिना तत्व पहचानता है। एक ही यौगिक के दो बहुरूप अलग XRD पैटर्न देते हैं पर EDS स्पेक्ट्रम एक-से।

मुख्य बिंदु

  • Bragg का नियम nλ = 2d sinθ, घनीय क्रिस्टल में d = a/√(h²+k²+l²); संसूचक कोण 2θ होता है, इसलिए नियम में लगाने से पहले इसे आधा करें।
  • अनुमत परावर्तन: SC सभी; BCC h+k+l सम; FCC h, k, l अमिश्रित। पाउडर sin²θ अनुपात: BCC 1:2:3:4:5:6:7:8, FCC 3:4:8:11:12:16, diamond 3:8:11:16।
  • IR के लिए द्विध्रुव-परिवर्तन, Raman के लिए ध्रुवणीयता-परिवर्तन चाहिए; सममिति-केंद्र वाले अणु पारस्परिक अपवर्जन मानते हैं; Raman shift लेज़र तरंगदैर्घ्य से स्वतंत्र है।
  • Band gap: E_g (eV) ≈ 1240/λ_edge (nm); Tauc plot में प्रत्यक्ष संक्रमण के लिए (αhν)² और अप्रत्यक्ष के लिए (αhν)1/2, hν अक्ष पर अंतःखंड।
  • विभेदन d = 0.61λ/NA; इलेक्ट्रॉन λ = 1.226/√V nm (अनापेक्षिकीय); SEM की क्षेत्र-गहराई सबसे अधिक है, TEM को पतली पन्नी चाहिए और वह उप-नैनोमीटर विभेदन देता है।
  • EDS अभिलक्षणिक X-ray ऊर्जा से तत्व पहचानता और गिनतियों से मात्रा मापता है; H व He अदृश्य हैं और हल्के तत्व ठीक से नहीं मापे जाते।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. Bragg के नियम nλ = 2d sinθ में राशि 2d sinθ भौतिक रूप से क्या दर्शाती है?

    1. स्रोत और संसूचक के बीच की दूरी
    2. क्रिस्टल के भीतर विवर्तित पुंज की तरंगदैर्घ्य
    3. दो आसन्न तलों में से निचले तल से परावर्तित किरण द्वारा तय किया गया अतिरिक्त पथ
    4. इकाई कोष्ठिका की कोर का पुंज-दिशा पर प्रक्षेप
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — दो आसन्न तलों में से निचले तल से परावर्तित किरण द्वारा तय किया गया अतिरिक्त पथ

    d दूरी वाले आसन्न तलों से glancing कोण θ पर परावर्तित दो किरणों का पथांतर 2d sinθ होता है। रचनात्मक व्यतिकरण के लिए यह तरंगदैर्घ्य का पूर्ण गुणज n होना चाहिए। तरंगदैर्घ्य स्वयं विकिरण का गुण है, इस पथ का नहीं।
  2. धातुओं में क्रिस्टल तलों की दूरी लगभग 0.1 से 0.3 nm होती है। इन्हें विवर्तन से जाँचने के लिए दृश्य प्रकाश के बजाय X-ray क्यों प्रयुक्त होती है?

    1. इसकी तरंगदैर्घ्य अंतरतलीय दूरी की कोटि की है, जिससे λ ≤ 2d पूरी हो सकती है
    2. यही एकमात्र विकिरण है जो धातु में कई सेंटीमीटर गहराई तक भेद सकता है
    3. इसमें विद्युत आवेश होता है जो जालक तलों से विक्षेपित होता है
    4. इसके फ़ोटॉनों की ऊर्जा दृश्य फ़ोटॉनों से कम होती है, इसलिए जालक को क्षति नहीं पहुँचती
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — इसकी तरंगदैर्घ्य अंतरतलीय दूरी की कोटि की है, जिससे λ ≤ 2d पूरी हो सकती है

    Bragg के नियम में sinθ = nλ/2d ≤ 1 चाहिए, अतः λ, 2d से अधिक नहीं हो सकती। दृश्य तरंगदैर्घ्य (400 से 700 nm) 2d से हज़ारों गुना बड़ी हैं, इसलिए कोई Bragg परावर्तन नहीं बनता। लगभग 0.05 से 0.25 nm की X-ray शर्त पूरी करती हैं। धातुओं में X-ray का भेदन केवल माइक्रोमीटर से दस-बीस माइक्रोमीटर होता है, X-ray अनावेशित होती है और उसके फ़ोटॉन दृश्य फ़ोटॉनों से कहीं अधिक ऊर्जावान हैं, इसलिए अन्य कारण ग़लत हैं।
  3. एकपरमाण्विक BCC क्रिस्टल के लिए, जिसमें परंपरागत कोष्ठिका के प्रत्येक जालक-बिंदु पर एक परमाणु है, निम्न में से कौन-सा तल कोई प्रथम-कोटि परावर्तन नहीं देता?

    1. (110)
    2. (200)
    3. (211)
    4. (100)
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — (100)

    BCC के लिए structure factor f[1 + eiπ(h+k+l)] है, जो h + k + l विषम होने पर शून्य हो जाता है। (100) का योग 1 है, अतः F = 0। तल (110), (200) और (211) के योग 2, 2 और 4 हैं और ये सभी F = 2f के साथ परावर्तन देते हैं। BCC क्रिस्टल का (100) परावर्तन केवल आधी दूरी वाले तलों की (200) रेखा के रूप में दिखता है।
  4. एक घनीय पाउडर पैटर्न की पहली चार रेखाएँ sin²θ = 0.0450, 0.0600, 0.1200 और 0.1650 पर हैं। कौन-सा जालक मेल खाता है?

    1. Body-centred cubic, क्योंकि अनुपात 1 : 2 : 3 : 4 के निकट हैं
    2. Face-centred cubic, क्योंकि अनुपात 3 : 4 : 8 : 11 हैं
    3. Diamond cubic, क्योंकि अनुपात 3 : 8 : 11 : 16 हैं
    4. Simple cubic, क्योंकि प्रत्येक रेखा अनुमत है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — Face-centred cubic, क्योंकि अनुपात 3 : 4 : 8 : 11 हैं

    0.0150 से भाग देने पर 3, 4, 8 और 11 मिलते हैं, जो FCC के अनुमत N = h² + k² + l² मान हैं: (111), (200), (220), (311)। Diamond cubic में 3, 8, 11 तो हैं पर 4 पर रेखा नहीं ((200) विलुप्त है) और आगे 16 आता है। BCC देता 2, 4, 6, 8 तथा SC देता 1, 2, 3, 4; कोई भी अनुपात 1 : 1.33 : 2.67 : 3.67 से मेल नहीं खाता।
  5. KCl की संरचना rock-salt है (FCC जालक, आधार में K⁺ और Cl⁻), फिर भी उसका पाउडर पैटर्न वास्तविक जालक स्थिरांक के आधे वाले simple cubic जैसा दिखता है। इसका कारण क्या है?

    1. K⁺ और Cl⁻ समइलेक्ट्रॉनिक हैं और उनके प्रकीर्णन गुणांक लगभग बराबर हैं, इसलिए सभी-विषम सूचकांक वाली रेखाएँ, जिनका F = 4(f₁ − f₂) है, लगभग लुप्त हो जाती हैं
    2. सभी-सम रेखाओं में F = 4(f₁ − f₂) होता है, जो समान आयनों के लिए कट जाता है
    3. KCl वास्तव में कमरे के ताप पर simple cubic जालक में क्रिस्टलित होता है
    4. आयनिक क्रिस्टल के भीतर X-ray तरंगदैर्घ्य स्वतः आधी हो जाती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — K⁺ और Cl⁻ समइलेक्ट्रॉनिक हैं और उनके प्रकीर्णन गुणांक लगभग बराबर हैं, इसलिए सभी-विषम सूचकांक वाली रेखाएँ, जिनका F = 4(f₁ − f₂) है, लगभग लुप्त हो जाती हैं

    Rock-salt संरचना में अमिश्रित hkl बचते हैं; सभी-सम रेखाओं में F = 4(f₁ + f₂) और सभी-विषम में F = 4(f₁ − f₂) होता है। K⁺ और Cl⁻ दोनों में 18 इलेक्ट्रॉन हैं, अतः f₁ ≈ f₂ और सभी-विषम रेखाएँ लगभग विलुप्त हो जाती हैं। बची हुई सभी-सम रेखाएँ a/2 दूरी वाले simple cubic जालक की तरह index होती हैं। सभी-सम में F योग है, अंतर नहीं, इसलिए वह नहीं कटता।
  6. कंपनिक स्पेक्ट्रमिकी के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. P: कोई कंपन तभी IR सक्रिय है जब वह अणु का द्विध्रुव आघूर्ण बदले।
    2. Q: कोई कंपन तभी Raman सक्रिय है जब वह अणु की ध्रुवणीयता बदले।
    3. R: रैखिक CO₂ का सममित तनन IR सक्रिय है।
    4. S: किसी दिए गए बैंड का cm⁻¹ में Raman shift लेज़र तरंगदैर्घ्य बदलने पर बदल जाता है।
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P: कोई कंपन तभी IR सक्रिय है जब वह अणु का द्विध्रुव आघूर्ण बदले।; B — Q: कोई कंपन तभी Raman सक्रिय है जब वह अणु की ध्रुवणीयता बदले।

    P और Q दोनों चयन नियम हैं। CO₂ का सममित तनन पूरे समय द्विध्रुव को शून्य रखता है, अतः R ग़लत है (वह Raman सक्रिय है)। Raman shift लेज़र और प्रकीर्णित फ़ोटॉन की ऊर्जा का अंतर, अर्थात कंपन क्वांटम, है और लेज़र पर निर्भर नहीं करता, इसलिए S ग़लत है; केवल प्रकीर्णित रेखा की निरपेक्ष तरंगदैर्घ्य खिसकती है।
  7. एक पतली फ़िल्म का अनुमत प्रत्यक्ष band gap ज्ञात है। उसके UV-Vis अवशोषण आँकड़ों से band gap देने वाला कौन-सा आलेख शून्य तक बढ़ाया जाता है? (α अवशोषण गुणांक, hν फ़ोटॉन ऊर्जा।)

    1. (αhν)1/2 बनाम hν
    2. α बनाम λ
    3. (αhν)² बनाम hν
    4. ln α बनाम 1/hν
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — (αhν)² बनाम hν

    Tauc संबंध (αhν)1/r = A(hν − E_g) में अनुमत प्रत्यक्ष संक्रमण के लिए r = ½ है, इसलिए किनारे से ऊपर (αhν)², hν में रैखिक होता है और hν अक्ष पर उसका अंतःखंड E_g है। (αhν)1/2 आलेख की घात ½ अप्रत्यक्ष संक्रमण (r = 2) की है। α बनाम λ केवल किनारे की स्थिति देता है, रैखिक बहिर्वेशन नहीं।
  8. रैखिक, सममिति-केंद्र वाले CO₂ अणु के मूल कंपनों के बारे में कौन-सा कथन सही है?

    1. सममित तनन IR सक्रिय है क्योंकि दोनों C=O आबंधों की लंबाई बदलती है
    2. सममित तनन Raman सक्रिय और IR निष्क्रिय है; असममित तनन IR सक्रिय और Raman निष्क्रिय है
    3. असममित तनन IR और Raman दोनों स्पेक्ट्रा में सक्रिय है
    4. तीनों मूल कंपन दोनों तकनीकों में सक्रिय हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — सममित तनन Raman सक्रिय और IR निष्क्रिय है; असममित तनन IR सक्रिय और Raman निष्क्रिय है

    जिस अणु में प्रतिलोमन-केंद्र हो, उसके केंद्र के सापेक्ष सममित कंपन ध्रुवणीयता बदलते हैं पर द्विध्रुव नहीं (केवल Raman), और प्रतिसममित कंपन द्विध्रुव बदलते हैं पर ध्रुवणीयता नहीं (केवल IR): पारस्परिक अपवर्जन। सममित तनन में आबंध-लंबाइयाँ बदलती हैं, पर दोनों से बने द्विध्रुव-परिवर्तन कट जाते हैं, इसलिए कुल द्विध्रुव शून्य रहता है।
  9. सूक्ष्मदर्शियों के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. P: तुलनीय आवर्धन पर scanning electron microscope की क्षेत्र-गहराई optical microscope से बहुत अधिक होती है।
    2. Q: Transmission electron microscope को इलेक्ट्रॉन-पारदर्शी नमूना चाहिए, सामान्यतः एक माइक्रोमीटर से बहुत कम मोटा।
    3. R: त्वरण वोल्टता बढ़ाने से इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्घ्य बढ़ती है।
    4. S: Electron microscope का विभेदन उसके इलेक्ट्रॉन की de Broglie तरंगदैर्घ्य (पिकोमीटर) के बराबर होता है।
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P: तुलनीय आवर्धन पर scanning electron microscope की क्षेत्र-गहराई optical microscope से बहुत अधिक होती है।; B — Q: Transmission electron microscope को इलेक्ट्रॉन-पारदर्शी नमूना चाहिए, सामान्यतः एक माइक्रोमीटर से बहुत कम मोटा।

    SEM बहुत संकीर्ण अभिसरण कोण पर काम करता है, जिससे क्षेत्र-गहराई अधिक होती है, अतः P सही है। TEM का पुंज नमूने के आर-पार जाना चाहिए, इसलिए Q सही है। तरंगदैर्घ्य h/√(2meV) है और V बढ़ने पर घटती है, अतः R ग़लत है। लेंस विपथन, न कि तरंगदैर्घ्य, इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का विभेदन नैनोमीटर या उप-नैनोमीटर तक सीमित करते हैं, जो पिकोमीटर तरंगदैर्घ्य से कहीं ऊपर है, इसलिए S ग़लत है।
  10. परंपरागत कोष्ठिका के प्रत्येक जालक-बिंदु पर एक परमाणु वाले एकपरमाण्विक घनीय क्रिस्टलों में कौन-से परावर्तन अनुमत हैं?

    1. P: BCC में (200)
    2. Q: FCC में (200)
    3. R: FCC में (110)
    4. S: simple cubic में (100)
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P: BCC में (200); B — Q: FCC में (200); D — S: simple cubic में (100)

    (200) में h + k + l = 2, सम है, इसलिए BCC इसे अनुमति देता है; इसके सूचकांक (2, 0, 0) सभी सम हैं, इसलिए FCC भी अनुमति देता है; simple cubic हर hkl की अनुमति देता है। (110) में सूचकांक (1, 1, 0) मिश्रित समता के हैं, इसलिए FCC इसे वर्जित करता है; इसीलिए (110) BCC की प्रबल प्रथम रेखा है पर FCC में अनुपस्थित।
  11. इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से जुड़ी ऊर्जा-परिक्षेपी स्पेक्ट्रमिकी में कौन-सी राशि उपस्थित तत्व की पहचान कराती है?

    1. जालक तलों से इलेक्ट्रॉन पुंज के विवर्तित होने का कोण
    2. उस बिंदु पर द्वितीयक इलेक्ट्रॉन चित्र की चमक
    3. नमूने के बाद पारगमित पुंज की चौड़ाई
    4. उत्सर्जित अभिलक्षणिक X-ray फ़ोटॉनों की ऊर्जा
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — उत्सर्जित अभिलक्षणिक X-ray फ़ोटॉनों की ऊर्जा

    आंतरिक कोश की रिक्ति को बाहरी इलेक्ट्रॉन भरे तो ऐसा X-ray फ़ोटॉन निकलता है जिसकी ऊर्जा कोश-ऊर्जाओं का अंतर होती है और परमाणु क्रमांक पर निर्भर करती है, इसलिए फ़ोटॉन ऊर्जा तत्व का नाम बताती है। विवर्तन कोण क्रिस्टल संरचना देते हैं, और चित्र की चमक सतह-आकृति या औसत परमाणु क्रमांक दर्शाती है, किसी विशिष्ट तत्व को नहीं।
  12. EDS प्रयोग में निम्न में से कौन-सा तत्व कोई अभिलक्षणिक X-ray रेखा उत्सर्जित नहीं कर सकता, क्योंकि उसका एकमात्र इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद रिक्ति भरने को कोई इलेक्ट्रॉन नहीं बचता?

    1. कार्बन
    2. कॉपर
    3. हाइड्रोजन
    4. ऐलुमिनियम
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — हाइड्रोजन

    हाइड्रोजन में एक ही 1s इलेक्ट्रॉन है; पुंज उसे निकाल दे तो रिक्ति में गिरने को कुछ नहीं बचता, इसलिए कोई अभिलक्षणिक X-ray उत्सर्जित नहीं होती (हीलियम में भी बाह्य-कोश संक्रमण नहीं है)। कार्बन, ऐलुमिनियम और कॉपर में बाहरी इलेक्ट्रॉन हैं जो K या L रिक्तियाँ भरते हैं, यद्यपि कार्बन की कम-ऊर्जा रेखा मापना कठिन है।
  13. एक घनीय क्रिस्टल का जालक स्थिरांक a = 0.405 nm है। λ = 0.154 nm की X-ray के लिए प्रथम-कोटि (200) परावर्तन का विवर्तन कोण 2θ (डिग्री में) ज्ञात कीजिए। उत्तर एक दशमलव स्थान तक दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 44.7

    d₂₀₀ = a/√4 = 0.405/2 = 0.2025 nm। sinθ = λ/2d = 0.154/(2 × 0.2025) = 0.3802, अतः θ = 22.35° और 2θ = 44.7°। Python जाँच: 2·asin(0.154/0.405) = 44.698°।
  14. एक पाउडर पैटर्न FCC धातु से आया ज्ञात है। उसकी पहली (न्यूनतम कोण वाली) रेखा का sin²θ = 0.0600 है। पाँचवीं रेखा का sin²θ ज्ञात कीजिए। उत्तर दो दशमलव स्थान तक दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.24

    FCC रेखाओं के N = 3, 4, 8, 11, 12, … हैं, जो (111), (200), (220), (311), (222) के हैं। पाँचवीं रेखा (222) है, N = 12। sin²θ ∝ N, अतः sin²θ = 0.0600 × 12/3 = 0.2400। एक लुभावनी भूल N = 5 (पाँचवाँ पूर्णांक) लेना या (110) जैसे वर्जित मिश्रित सूचकांक गिन लेना है।
  15. एक scanning electron microscope में इलेक्ट्रॉन विरामावस्था से 10 kV द्वारा त्वरित किए जाते हैं। आपेक्षिकीय प्रभावों की उपेक्षा करके उनकी de Broglie तरंगदैर्घ्य पिकोमीटर में ज्ञात कीजिए। h = 6.626 × 10⁻³⁴ J s, m = 9.109 × 10⁻³¹ kg, e = 1.602 × 10⁻¹⁹ C लीजिए। उत्तर एक दशमलव स्थान तक दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 12.3

    λ = h/√(2meV)। 2meV = 2 × 9.109e-31 × 1.602e-19 × 1e4 = 2.9186e-45। वर्गमूल = 5.4024e-23। λ = 6.626e-34/5.4024e-23 = 1.2265e-11 m = 12.3 pm। जाँच: 1.226/√10000 nm = 0.01226 nm।
  16. एक optical microscope 550 nm तरंगदैर्घ्य के प्रकाश और संख्यात्मक द्वारक 1.40 वाले oil-immersion अभिदृश्यक का उपयोग करता है। Abbe मानदंड d = 0.61 λ/NA से न्यूनतम विभेद्य दूरी नैनोमीटर में ज्ञात कीजिए। उत्तर पूर्णांक में दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 240

    d = 0.61 × 550/1.40 = 335.5/1.40 = 239.6 nm, जो 240 nm के निकट है, लगभग 0.24 µm, सामान्य optical सीमा। तरंगदैर्घ्य को मीटर में बिना बदले लेने से केवल इकाई बदलती है, अनुपात नहीं।
  17. एक अर्धचालक फ़िल्म का अवशोषण-किनारा 400 nm पर है। E = hc/λ से, h = 6.626 × 10⁻³⁴ J s, c = 3.00 × 10⁸ m/s और 1 eV = 1.602 × 10⁻¹⁹ J लेकर, उसका band gap eV में आकलित कीजिए। उत्तर दो दशमलव स्थान तक दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 3.10

    E = (6.626e-34 × 3.00e8)/(400e-9) = 1.9878e-25/4.00e-7 = 4.970e-19 J। 1.602e-19 J/eV से भाग देने पर 3.102 eV, अर्थात 3.10 eV। शॉर्टकट: 1240/400 = 3.10 eV, संगत।