गुणों का मापन: तनन परीक्षण, कठोरता, विद्युत अभिगमन तथा ऊष्मीय विश्लेषण

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर के वैकल्पिक खंड XE2 पदार्थ विज्ञान के खंड XE2.4 के शेष अनुच्छेदों का उत्तर देता है: “Tensile test: engineering and true stress-strain curves, parameters, such as, yield stress, ultimate tensile stress, elongation, area under the curve; Hardness: Brinell, Rockwell and Vickers. Electrical conductivity, carrier mobility and concentrations. Thermal analysis techniques: thermogravimetry and calorimetry.” इसमें engineering व true वक्र कैसे बनते और परस्पर बदले जाते हैं, उनसे पढ़े जाने वाले प्राचल, क्षेत्रफल के रूप में resilience व toughness, तीन कठोरता परीक्षण, four-point probe तथा Hall मापन, और thermogravimetry व calorimetry वक्र क्या दिखाते हैं, पढ़ाए गए हैं। संख्यात्मक प्रश्न हैं: true प्रतिबल व विकृति, necking विकृति, resilience, Brinell संख्या, four-point-probe प्रतिरोधकता, Hall गतिशीलता व वाहक घनत्व, और thermogravimetric द्रव्यमान संतुलन।

तनन परीक्षण और engineering प्रतिबल-विकृति वक्र

मूल अनुप्रस्थ-काट A₀ और गेज लंबाई L₀ वाले मानक नमूने को धीमी स्थिर दर से खींचा जाता है और भार F तथा विस्तार ΔL दर्ज होते हैं। Engineering प्रतिबल σ = F/A₀ और engineering विकृति e = ΔL/L₀ है; दोनों मूल विमाओं का उपयोग करते हैं। आरंभिक सीधी रेखा की ढाल E (Young का मापांक) है। वक्रता आनुपातिक या प्रत्यास्थ सीमा पर शुरू होती है; जिन धातुओं में तीक्ष्ण yield बिंदु नहीं होता उनके लिए yield प्रतिबल 0.2 % offset विधि से परिभाषित है: e = 0.002 से E ढाल की रेखा खींचें और जहाँ वह वक्र को काटे वहाँ का प्रतिबल पढ़ें।

Engineering वक्र से पढ़े जाने वाले प्राचल
प्राचलपरिभाषाटिप्पणी
Yield प्रतिबल σ_y0.2 % offset सुघट्य विकृति पर प्रतिबलसार्थक सुघट्य प्रवाह का आरंभ
चरम तनन प्रतिबल (UTS)F_max/A₀, वक्र का अधिकतमतन्य धातु में यहीं से necking शुरू
प्रतिशत दीर्घन(L_f − L₀)/L₀ × 100, टूटे टुकड़ों पर मापाप्रत्यास्थ भाग लौट चुका; गेज लंबाई पर निर्भर
प्रतिशत क्षेत्रफल-ह्रास(A₀ − A_f)/A₀ × 100तन्यता का माप जो गेज लंबाई से बँधा नहीं
⚠️ जाल: yield बिंदु, UTS और विभंग प्रतिबल
UTS engineering वक्र का सर्वोच्च बिंदु है, वह प्रतिबल नहीं जिस पर नमूना टूटता है। तन्य धातु में विभंग पर engineering प्रतिबल UTS से कम होता है, क्योंकि necking के दौरान भार घटता है जबकि भाग में अब भी A₀ ही लिया जाता है। किसी भी सुघट्य बिंदु से भार हटाने पर वक्र प्रत्यास्थ ढाल के समानांतर रेखा पर चलता है, इसलिए स्थायी विकृति उस रेखा का विकृति-अक्ष पर अंतःखंड है।

True प्रतिबल व true विकृति तथा necking

True प्रतिबल भार को तात्क्षणिक क्षेत्रफल से भाग देता है, σ_t = F/A, और true विकृति वृद्धियों को जोड़ती है, ε_t = ∫dL/L = ln(L/L₀)। जब तक गेज में विरूपण एकसमान हो, सुघट्य प्रवाह आयतन संरक्षित रखता है, A L = A₀ L₀। तब A = A₀/(1 + e) और σ_t = σ(1 + e), ε_t = ln(1 + e)। ये रूपांतरण केवल UTS तक मान्य हैं; necking शुरू होने के बाद विकृति गर्दन में केंद्रित हो जाती है और गेज-लंबाई अनुपात उसे नहीं बताता (तब गर्दन का क्षेत्रफल मापना होता है, ε_t = ln(A₀/A))।

🧠 हल किया उदाहरण
e = 0.15 पर engineering प्रतिबल 400 MPa है। σ_t = 400 × 1.15 = 460 MPa और ε_t = ln 1.15 = 0.140। चूँकि ln(1 + e) < e, तनन में true विकृति सदा engineering विकृति से कम और true प्रतिबल अधिक होता है। जाँच: 0.140 < 0.15 और 460 > 400।

सुघट्य परिसर में अनेक धातुएँ σ_t = K ε_t^n मानती हैं, जहाँ n विकृति-दृढ़ीकरण घातांक है। भार F = σ_t A है। Necking तब शुरू होती है जब विकृति-दृढ़ीकरण की वृद्धि क्षेत्रफल की हानि की पूर्ति नहीं कर पाती, dF = 0, अर्थात dσ_t/dε_t = σ_t (Considère मानदंड)। घात-नियम के लिए इससे necking पर ε_t = n मिलता है, अर्थात engineering विकृति में e = eⁿ − 1। UTS के बाद engineering प्रतिबल इसलिए गिरता है कि भार गिरता है, फिर भी true प्रतिबल बढ़ता रहता है: यह गिरावट ज्यामितीय है, सामर्थ्य की हानि नहीं।

⚠️ जाल: विकृतियाँ और योज्यता
True विकृतियाँ जुड़ती हैं: 100 mm से 110 mm और फिर 121 mm तक खींचने पर ln 1.1 + ln 1.1 = ln 1.21। Engineering विकृतियाँ नहीं जुड़तीं: 10 % के बाद 10 % कुल 21 % है, 20 % नहीं। संपीडन में ε_t ऋणात्मक होती है और e < 0 के साथ ln(1 + e) फिर भी सही है।

वक्र के नीचे का क्षेत्रफल: resilience व toughness

प्रतिबल-विकृति वक्र के नीचे का क्षेत्रफल प्रति इकाई आयतन अवशोषित ऊर्जा है (Pa × 1 = J/m³)। Yield तक, σ = Ee के साथ, वह त्रिभुज है: resilience का मापांक U_r = ½ σ_y e_y = σ_y²/2E, जो भार हटाने पर लौटने वाली ऊर्जा है। विभंग तक का क्षेत्रफल toughness (तनन toughness) है, इकाई आयतन को तोड़ने की ऊर्जा। तन्य धातु के लिए यह लगभग σ_y और UTS के औसत गुणा विभंग तक की विकृति है; भंगुर पदार्थ में वक्र छोटी विकृति पर समाप्त हो जाता है, इसलिए क्षेत्रफल छोटा होता है।

🧠 हल किया उदाहरण
एक इस्पात का σ_y = 300 MPa और E = 200 GPa है। U_r = (300 × 10⁶)²/(2 × 200 × 10⁹) = 9 × 10¹⁶/(4 × 10¹¹) = 2.25 × 10⁵ J/m³ = 225 kJ/m³। जाँच: σ_y²/2E की इकाई Pa²/Pa = Pa = J/m³। σ_y दोगुना करने पर U_r चौगुना; E दोगुना करने पर आधा, इसीलिए उच्च-yield, निम्न-मापांक पदार्थ (स्प्रिंग मिश्रधातु) सर्वाधिक प्रत्यास्थ ऊर्जा संचित करता है।
⚠️ जाल: सामर्थ्य toughness नहीं है
कठोर, सशक्त पर भंगुर पदार्थ के वक्र के नीचे का क्षेत्रफल नरम, तन्य पदार्थ से कम हो सकता है। ऊँचाई नहीं, क्षेत्रफल की तुलना करें। साथ ही engineering और true वक्र के नीचे के क्षेत्रफल भिन्न हैं; प्रश्न में true राशियाँ न दी हों तो toughness engineering वाली ही मानी जाती है।

कठोरता: Brinell, Rockwell तथा Vickers

कठोरता स्थायी अंतःस्थापन के प्रति प्रतिरोध है। Brinell में D व्यास की कठोर गेंद को भार P से दबाया जाता है (इस्पात के लिए प्रायः D = 10 mm और P = 3000 kgf) और वृत्ताकार छाप का व्यास d मापा जाता है: HB = 2P/[πD(D − √(D² − d²))] kgf/mm² में, यानी भार को टोपी के वक्र क्षेत्रफल से भाग देना। वैध परीक्षण में d, 0.25D और 0.5D के बीच रहना चाहिए। Rockwell गहराई पर आधारित है: लघु भार (10 kgf) इंडेंटर को बैठाता है, मुख्य भार लगाकर हटाया जाता है और स्थायी अतिरिक्त गहराई h को संख्या में बदला जाता है, HR = N − h/0.002 mm, जहाँ हीरा-शंकु पैमानों के लिए N = 100 और गेंद पैमानों के लिए 130; गहरी छाप का अर्थ नरम नमूना और कम संख्या। Vickers में आधार-वर्गाकार हीरे का पिरामिड लगता है, जिसकी सम्मुख फलकों के बीच 136° का कोण है, और छाप का औसत विकर्ण d मापा जाता है: HV = 2F sin 68°/d² = 1.854 F/d² (F kgf में, d mm में)।

तीनों कठोरता परीक्षण
परीक्षणइंडेंटर व भारक्या मापा जाता हैटिप्पणी
Brinell HB10 mm गेंद, 500 से 3000 kgfछाप का व्यासबड़ी छाप, मोटी संरचना का औसत; अति कठोर इस्पात के लिए नहीं
Rockwell C (HRC)हीरा-शंकु 120°, 10 kgf लघु, 150 kgf मुख्यगहराई-वृद्धितेज़, सीधा पाठ्यांक; कठोरित इस्पात; Rockwell B में 1/16 in गेंद व 100 kgf
Vickers HVहीरा पिरामिड 136°, भार ग्राम (सूक्ष्म-कठोरता) से लगभग 100 kgf तकऔसत विकर्णसदृश छापें, इसलिए HV भार से लगभग स्वतंत्र; नरम से कठोर तक एक पैमाना
🧠 हल किया उदाहरण व सहसंबंध
10 mm गेंद 3000 kgf के अंतर्गत d = 3.0 mm की छाप छोड़ती है। √(100 − 9) = 9.539, D − 9.539 = 0.461 mm, πD × 0.461 = 14.47 mm², HB = 6000/14.47 = 415 kgf/mm²। अनेक इस्पातों के लिए MPa में तनन सामर्थ्य लगभग 3.45 × HB होती है, और तन्य धातु में अंतःस्थापन दाब लगभग प्रवाह प्रतिबल का तीन गुना होता है; ये मोटे नियम हैं, यथार्थ नहीं, और प्रश्न में सीमांकित हों तभी लागू होते हैं।

विद्युत चालकता और four-point probe

चालकता σ = 1/ρ है, जहाँ एकसमान छड़ के लिए ρ = RA/L। अर्धचालक में σ = e(nμ_e + pμ_h): वाहक घनत्व n, p और गतिशीलताएँ μ = v_d/E, यानी प्रति इकाई क्षेत्र अपवाह वेग (m²/V s)। Two-probe मापन में संपर्क और तार के प्रतिरोध नमूने के प्रतिरोध में जुड़ जाते हैं, जो अर्धचालक या कम-प्रतिरोध धातु में हावी हो सकते हैं। Four-point probe इन्हें हटाता है: बाहरी दो probe ज्ञात धारा I प्रवाहित करते हैं, और भीतरी दो, जो लगभग धारा न लेने वाले उच्च-प्रतिबाधा वोल्टमीटर से जुड़े हैं, वोल्टता V पढ़ते हैं; वोल्टता संपर्कों से धारा नहीं बहती, इसलिए उनके संपर्क-वोल्टता पतन अंतर्गत नहीं आते।

समान अंतराल s वाले चार संरेख probe के लिए: जब नमूना सभी दिशाओं में s से बहुत बड़ा हो (अर्ध-अनंत), ρ = 2π s V/I। जब मोटाई t, s से बहुत छोटी और पार्श्व विस्तार s से बहुत बड़ा हो ऐसी पतली शीट पर, ρ = (π/ln 2) t V/I = 4.532 t V/I, और शीट प्रतिरोध R_s = ρ/t = 4.532 V/I (ओम प्रति वर्ग) है। वास्तविक नमूनों के लिए परिमित-आकार व किनारा संशोधन लगाए जाते हैं।

🧠 हल किया उदाहरण
0.25 mm मोटे silicon wafer पर probe I = 2.0 mA पर V = 5.0 mV पढ़ता है (पतली-शीट स्थिति)। ρ = 4.532 × (0.25 × 10⁻³ m) × (5.0 × 10⁻³/2.0 × 10⁻³) = 4.532 × 2.5 × 10⁻⁴ × 2.5 = 2.83 × 10⁻³ Ω m = 0.283 Ω cm। इकाई जाँच: m × (V/A) = m × Ω = Ω m। पतली-शीट और ठोस के सूत्र भिन्न हैं; पतली फ़िल्म पर 2πsV/I लगाने से ρ अधिक आँका जाता है क्योंकि धारा फ़िल्म तक सीमित रहती है।

Hall मापन: वाहक प्रकार, सांद्रता व गतिशीलता

किसी पट्टिका में धारा I प्रवाहित करें और धारा के लंबवत चुंबकीय क्षेत्र B लगाएँ। Lorentz बल वाहकों को बगल में धकेलता है जब तक अनुप्रस्थ विद्युत क्षेत्र उसे संतुलित न कर दे, जिससे चौड़ाई के आर-पार Hall वोल्टता बनती है। घनत्व n और आवेश q वाले एक ही प्रकार के वाहक के लिए, t को B के अनुदिश मापी गई मोटाई मानकर, V_H = I B/(n q t)। Hall गुणांक R_H = V_H t/(I B) = 1/(n q): यह इलेक्ट्रॉनों के लिए ऋणात्मक और होलों के लिए धनात्मक है, इसलिए इसका चिह्न वाहक प्रकार और परिमाण घनत्व देता है, n = 1/(e|R_H|)।

प्रतिरोधकता मापन (जैसे four-point probe से) के साथ मिलाकर Hall गतिशीलता μ_H = |R_H| σ = |R_H|/ρ मिलती है, क्योंकि σ = n e μ। मिश्रित चालन में R_H = (pμ_h² − nμ_e²)/[e(pμ_h + nμ_e)²]; शुद्ध अर्धचालक में n = p, इसलिए चिह्न उस पर निर्भर करता है जिसकी गतिशीलता अधिक हो (प्रायः इलेक्ट्रॉन)।

🧠 हल किया उदाहरण
t = 0.20 mm मोटी पट्टिका B = 0.50 T क्षेत्र में I = 1.0 mA वहन करती है और |V_H| = 2.5 mV दिखाती है। e = 1.602 × 10⁻¹⁹ C लें। n = IB/(e t V_H) = (1.0 × 10⁻³ × 0.50)/(1.602 × 10⁻¹⁹ × 2.0 × 10⁻⁴ × 2.5 × 10⁻³) = 5.0 × 10⁻⁴/8.01 × 10⁻²⁶ = 6.24 × 10²¹ m⁻³। धातु का n लगभग 10²⁸ m⁻³ होता है, इसलिए उसका V_H लाखों गुना छोटा होगा; इसीलिए Hall परीक्षण अर्धचालकों या पतली फ़िल्मों पर होते हैं।
⚠️ जाल: t कौन-सी विमा है
V_H = IB/(nqt) में मोटाई t वह विमा है जो B के समांतर है, वह चौड़ाई नहीं जिसके आर-पार V_H मापी जाती है। चौड़ाई लेने से ग़लत कटाव होता है और n ग़लत आता है। साथ ही, चिह्न एकल-वाहक परिणाम है; मिश्रित नमूने में किसी भी चिह्न का छोटा R_H कम वाहक नहीं दर्शाता।

ऊष्मीय विश्लेषण: thermogravimetry तथा calorimetry

Thermogravimetric analysis (TGA) नियंत्रित वातावरण में स्थिर तापन दर पर नमूने के द्रव्यमान को ताप (या समय) के सापेक्ष दर्ज करता है। नीचे की सीढ़ी द्रव्यमान-ह्रास है (निर्जलीकरण, अपघटन, वाष्पन); ऊपर की वृद्धि द्रव्यमान-वृद्धि है (वायु में ऑक्सीकरण)। अवकलज वक्र (DTG) सबसे तेज़ ह्रास के ताप पर शिखर बनाता है। जिस संक्रमण में द्रव्यमान न बदले, जैसे अक्रिय गैस में शुद्ध धातु का गलन, वह TGA में नहीं दिखता। सीढ़ी की ऊँचाई को स्टॉइकियोमेट्री से संघटन में बदला जाता है।

Calorimetry से यहाँ तात्पर्य differential scanning calorimetry (DSC) है: नमूने और संदर्भ को एक ही ताप-कार्यक्रम पर रखने के लिए चाहिए ऊष्मा-प्रवाह ताप के सापेक्ष दर्ज होता है। शिखर का क्षेत्रफल संक्रमण के एंथैल्पी परिवर्तन ΔH के समानुपाती है: ऊष्माशोषी शिखर (गलन, वाष्पन, वियोजन) और ऊष्माक्षेपी शिखर (क्रिस्टलन, क्योरिंग, ऑक्सीकरण) विपरीत दिशाओं में होते हैं, और कौन-सी दिशा ऊपर आलेखित है यह यंत्र पर निर्भर है, इसलिए अक्ष का लेबल निर्णायक है। काँच संक्रमण (glass transition) आधार-रेखा में सीढ़ी के रूप में दिखता है क्योंकि ऊष्माधारिता बदलती है, गुप्त ऊष्मा और शिखर नहीं होते। ऊष्माधारिता आधार-रेखा के विस्थापन से मिलती है, C_p = (ऊष्मा-प्रवाह)/(m × तापन दर)। Differential thermal analysis (DTA) सहोदर विधि है जो नमूने और संदर्भ के तापांतर को दर्ज करती है।

🧠 हल किया उदाहरण
कैल्शियम कार्बोनेट अक्रिय गैस में CaCO₃ → CaO + CO₂ के रूप में अपघटित होता है। परमाणु द्रव्यमान Ca = 40, C = 12, O = 16 लेने पर CaCO₃ और CaO के मोलर द्रव्यमान 100 व 56 g/mol हैं। 10.0 mg नमूना 10.0 × 56/100 = 5.6 mg अवशेष छोड़ता है, यानी 44 % ह्रास। जाँच: ह्रास CO₂ अंश 44/100 के बराबर है।

मुख्य बिंदु

  • Engineering σ = F/A₀, e = ΔL/L₀; yield 0.2 % offset से; UTS = F_max/A₀; दीर्घन व क्षेत्रफल-ह्रास तन्यता मापते हैं।
  • True: σ_t = σ(1+e), ε_t = ln(1+e), केवल UTS तक मान्य; σ_t = Kε_t^n के लिए necking ε_t = n पर शुरू; true विकृतियाँ जुड़ती हैं, engineering नहीं।
  • वक्र के नीचे का क्षेत्रफल प्रति इकाई आयतन ऊर्जा है: yield तक resilience σ_y²/2E, विभंग तक toughness; सशक्त का अर्थ tough नहीं।
  • HB = 2P/[πD(D − √(D²−d²))]; Rockwell गहराई पढ़ता है (HR = N − h/0.002 mm); HV = 1.854F/d², F kgf में और d mm में।
  • Four-point probe संपर्क प्रतिरोध हटाता है: ρ = 2πsV/I (ठोस) और ρ = 4.532 tV/I (पतली शीट)।
  • Hall: n = IB/(e t V_H), R_H का चिह्न वाहक प्रकार देता है, μ_H = |R_H|/ρ; TGA द्रव्यमान और DSC ऊष्मा-प्रवाह देखता है तथा Tg को आधार-रेखा की सीढ़ी के रूप में दिखाता है।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. तन्य धातु के तनन परीक्षण में चरम तनन प्रतिबल (UTS) है

    1. वह engineering प्रतिबल जिस पर नमूना अंततः टूटता है
    2. अधिकतम भार को मूल अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल से भाग देने पर प्राप्त मान
    3. वह प्रतिबल जिस पर पहली सुघट्य विकृति प्रकट होती है
    4. विभंग के क्षण पर true प्रतिबल
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — अधिकतम भार को मूल अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल से भाग देने पर प्राप्त मान

    UTS = F_max/A₀ है, engineering वक्र का उच्चतम बिंदु, जो necking के आरंभ पर आता है। विभंग बाद में कम engineering प्रतिबल पर होता है क्योंकि necking के दौरान भार गिरता है। पहली सुघट्य विकृति प्रत्यास्थ या yield सीमा बताती है, और विभंग पर true प्रतिबल भिन्न, अधिक राशि है।
  2. एक धातु में तीक्ष्ण yield बिंदु नहीं है। उसका yield प्रतिबल परंपरा से कैसे ज्ञात किया जाता है?

    1. नमूना टूटने के क्षण पर दर्ज engineering प्रतिबल को yield बिंदु मानकर
    2. engineering प्रतिबल-विकृति वक्र के उच्चतम बिंदु का प्रतिबल लेकर
    3. UTS के 0.2 % के बराबर प्रतिबल पर क्षैतिज रेखा खींचकर और उसका प्रतिच्छेदन पढ़कर
    4. 0.002 विकृति से प्रत्यास्थ ढाल के समानांतर रेखा खींचकर और जहाँ वह वक्र से मिले वहाँ पढ़कर
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 0.002 विकृति से प्रत्यास्थ ढाल के समानांतर रेखा खींचकर और जहाँ वह वक्र से मिले वहाँ पढ़कर

    0.2 % offset विधि में e = 0.002 से E ढाल की रेखा खींची जाती है; वक्र से उसका प्रतिच्छेदन offset yield प्रतिबल है, जो भार हटाने पर 0.2 % स्थायी विकृति छोड़ता है। विभंग और UTS भिन्न बिंदु हैं, और 0.2 % विकृति पर लागू होता है, UTS के अंश पर नहीं।
  3. तन्य धातु में UTS के बाद engineering प्रतिबल गिरता है, फिर भी true प्रतिबल बढ़ता रहता है। सही व्याख्या है कि

    1. गर्दन का क्षेत्रफल दृढ़ीकरण से प्रतिबल बढ़ने की तुलना में तेज़ घटने पर भार गिरता है, और engineering प्रतिबल मूल क्षेत्रफल से भाग देता है
    2. UTS के बाद आंतरिक क्षति से धातु नरम हो जाती है, इसलिए आगे की विकृति के साथ उसका true प्रवाह प्रतिबल वास्तव में घटता है
    3. true प्रतिबल मूल क्षेत्रफल और भार से गणित होता है, और भार विकृति के साथ बढ़ता रहता है
    4. गर्दन में आयतन संरक्षित नहीं रहता, इसलिए भार घटने पर भी अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल वास्तव में बढ़ता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — गर्दन का क्षेत्रफल दृढ़ीकरण से प्रतिबल बढ़ने की तुलना में तेज़ घटने पर भार गिरता है, और engineering प्रतिबल मूल क्षेत्रफल से भाग देता है

    गर्दन में true प्रतिबल F/A अब भी बढ़ता है क्योंकि विकृति-दृढ़ीकरण जारी रहता है, पर अस्थिरता मानदंड dF = 0 बीत चुका है, इसलिए A के तेज़ घटने से भार F गिरता है। Engineering प्रतिबल F/A₀ भार के साथ चलता है और इसलिए गिरता है। नरम होना कारण नहीं है, true प्रतिबल तात्क्षणिक (मूल नहीं) क्षेत्रफल लेता है, और सुघट्य प्रवाह आयतन संरक्षित रखता है।
  4. एक तन्य धातु सुघट्य परिसर में σ_t = K ε_t^n मानती है, n = 0.25 के साथ। Necking आरंभ की शर्त से UTS पर engineering विकृति लगभग है

    1. 0.250
    2. 0.125
    3. 0.284
    4. 0.500
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — 0.284

    Necking true विकृति ε_t = n = 0.25 पर शुरू होती है। बदलने पर e = exp(ε_t) − 1 = e^0.25 − 1 = 0.284। मान 0.250 true विकृति है जिसे engineering विकृति समझ लिया गया; चूँकि ln(1 + e) < e, engineering विकृति true विकृति से बड़ी होती है।
  5. Rockwell C कठोरता परीक्षण का कौन-सा वर्णन सही है?

    1. 3000 kgf से दबाई गई 10 mm कठोरित इस्पात गेंद, जिसकी छाप का व्यास बाद में मापा जाता है
    2. 10 kgf लघु व 150 kgf मुख्य भार के अंतर्गत हीरा-शंकु, जिसकी स्थायी गहराई संख्या में बदली जाती है
    3. आधार-वर्गाकार हीरा पिरामिड जिसका औसत विकर्ण कुछ ग्राम भार के अंतर्गत मापा जाता है
    4. 100 kgf के अंतर्गत कठोरित गेंद, जहाँ संख्या भार को टोपी क्षेत्रफल से भाग देने के बराबर है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 10 kgf लघु व 150 kgf मुख्य भार के अंतर्गत हीरा-शंकु, जिसकी स्थायी गहराई संख्या में बदली जाती है

    Rockwell C में 120° शंकु-कोण वाला हीरा-शंकु, 10 kgf लघु भार और 150 kgf मुख्य भार लगता है, और संख्या अतिरिक्त गहराई से आती है, HR = 100 − h/0.002 mm। छाप-व्यास वाली गेंद Brinell की, विकर्ण वाला पिरामिड Vickers का है, और भार/टोपी क्षेत्रफल Brinell की परिभाषा है।
  6. Vickers परीक्षण में HV = 1.854 F/d², F kgf में और d mm में। 30 kgf भार 0.40 mm औसत विकर्ण की छाप छोड़ता है। Vickers कठोरता लगभग है

    1. 139
    2. 696
    3. 348
    4. 87
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — 348

    HV = 1.854 × 30/(0.40)² = 55.62/0.16 = 347.6, लगभग 348। मान 139 d² के बजाय d से भाग देने पर आता है; 87 d² = 0.64 लेने पर; 696 परिणाम को दोगुना करने पर।
  7. एक अर्धचालक छड़ के सिरों पर कई ओम का संपर्क प्रतिरोध है, जो छड़ के अपने प्रतिरोध से बहुत अधिक है। फिर भी four-point probe सही प्रतिरोधकता क्यों देता है?

    1. यह छड़ में बहुत अधिक धारा प्रवाहित करता है, जिससे संपर्क प्रतिरोध नमूने की तुलना में नगण्य हो जाता है
    2. यह धारावाही बाहरी संपर्कों पर वोल्टता मापकर पतन घटा देता है
    3. यह प्रत्यावर्ती धारा प्रयोग करता है, जिसमें व्यवहार में धातु-अर्धचालक संपर्क का प्रतिरोध होता ही नहीं
    4. वोल्टता दो भीतरी संपर्कों के बीच उच्च-प्रतिबाधा मीटर से पढ़ी जाती है, इसलिए उनसे लगभग धारा नहीं बहती और संपर्क पतन नहीं आता
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — वोल्टता दो भीतरी संपर्कों के बीच उच्च-प्रतिबाधा मीटर से पढ़ी जाती है, इसलिए उनसे लगभग धारा नहीं बहती और संपर्क पतन नहीं आता

    धारा बाहरी probe से आती-जाती है, इसलिए उनका संपर्क प्रतिरोध केवल यह तय करता है कि स्रोत को कितनी वोल्टता देनी है, मापी गई V को नहीं। भीतरी probe बहुत उच्च निवेश-प्रतिबाधा वाले वोल्टमीटर से जुड़ते हैं, इसलिए उनसे बहने वाली धारा और उनके संपर्कों का पतन नगण्य है। बड़ी धारा संपर्क प्रतिरोध नहीं हटाती, और विधि कुछ घटाती नहीं।
  8. शुद्ध अर्धचालक (n = p) के लिए, जिसमें μ_e = 3μ_h है, R_H = (pμ_h² − nμ_e²)/[e(pμ_h + nμ_e)²] लीजिए। Hall गुणांक है

    1. ऋणात्मक, क्योंकि अधिक गतिशील इलेक्ट्रॉन Hall वोल्टता पर हावी हैं
    2. शून्य, क्योंकि इलेक्ट्रॉनों व होलों की समान संख्या एक-दूसरे को काट देती है
    3. धनात्मक, क्योंकि होल धनावेशित होते हैं
    4. अपरिभाषित, क्योंकि n = p होने पर हर शून्य हो जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — ऋणात्मक, क्योंकि अधिक गतिशील इलेक्ट्रॉन Hall वोल्टता पर हावी हैं

    n = p के साथ अंश n(μ_h² − μ_e²) = n μ_h²(1 − 9) < 0 है, अतः R_H ऋणात्मक है; हर e n²(μ_h + μ_e)² धनात्मक व परिमित है। R_H तभी शून्य होता जब μ_e = μ_h हो। समान घनत्व Hall प्रभाव को नहीं काटते क्योंकि भारण गतिशीलता के वर्ग से होता है, संख्या से नहीं।
  9. एक अनाकार बहुलक के DSC तापन स्कैन में आधार-रेखा का सीढ़ीनुमा खिसकाव दिखता है, कोई शिखर नहीं। यह लक्षण सबसे उचित रूप से किससे संबद्ध है?

    1. छोटे क्रिस्टलाइटों का गलन, जो गुप्त ऊष्मा अवशोषित कर चौड़ा गड्ढा बनाता है
    2. काँच संक्रमण, जहाँ गुप्त ऊष्मा बिना ऊष्माधारिता बदलती है
    3. बहुलक शृंखला के ऊष्मीय अपघटन से द्रव्यमान-ह्रास
    4. क्रिस्टलन, जो ऊष्माक्षेपी शिखर के रूप में गुप्त ऊष्मा मुक्त करता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — काँच संक्रमण, जहाँ गुप्त ऊष्मा बिना ऊष्माधारिता बदलती है

    काँच संक्रमण में ऊष्माधारिता बदलती है पर गुप्त ऊष्मा नहीं होती, इसलिए DSC शिखर नहीं, आधार-रेखा की सीढ़ी दिखाता है। गलन व क्रिस्टलन ऐसे ऊष्माशोषी व ऊष्माक्षेपी शिखर देते हैं जिनके क्षेत्रफल ΔH के समानुपाती होते हैं। द्रव्यमान-ह्रास TGA देखता है, DSC नहीं।
  10. तनन में धातु की छड़ के एकसमान सुघट्य विरूपण पर विचार कीजिए, necking से पहले। कौन-से कथन सही हैं?

    1. P: True विकृति ln(1 + e) है, जहाँ e engineering विकृति है।
    2. Q: संबंध σ_t = σ(1 + e) विभंग तक, गर्दन सहित, मान्य रहता है।
    3. R: दो क्रमिक 10 % engineering विकृतियाँ मिलकर कुल 20 % engineering विकृति देती हैं।
    4. S: दो क्रमिक 0.10 की true विकृतियाँ मिलकर कुल 0.20 true विकृति देती हैं।
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P: True विकृति ln(1 + e) है, जहाँ e engineering विकृति है।; D — S: दो क्रमिक 0.10 की true विकृतियाँ मिलकर कुल 0.20 true विकृति देती हैं।

    P, dε_t = dL/L से सही है। S इसलिए सही है कि true विकृतियाँ जुड़ती हैं (ln योज्य है)। Q ग़लत है: संबंध A = A₀/(1 + e) पर टिका है जिसके लिए एकसमान विरूपण चाहिए, और गर्दन बनते ही यह टूट जाता है। R ग़लत है: 1.1 × 1.1 = 1.21, अतः कुल engineering विकृति 21 % है।
  11. कठोरता परीक्षण के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. P: Brinell कठोरता कठोर गेंद से बनी छाप के व्यास से मिलती है।
    2. Q: Rockwell कठोरता मुख्य भार से उत्पन्न स्थायी अंतःस्थापन गहराई-वृद्धि (लघु भार के अधीन मापी गई) से, बिना प्रकाशीय मापन के, पढ़ी जाती है।
    3. R: उच्च HRC संख्या का अर्थ नरम पदार्थ है क्योंकि छाप गहरी होती है।
    4. S: Vickers सूत्र HV = 1.854 F/d² में d पिरामिड अंतःस्थापन की गहराई है।
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P: Brinell कठोरता कठोर गेंद से बनी छाप के व्यास से मिलती है।; B — Q: Rockwell कठोरता मुख्य भार से उत्पन्न स्थायी अंतःस्थापन गहराई-वृद्धि (लघु भार के अधीन मापी गई) से, बिना प्रकाशीय मापन के, पढ़ी जाती है।

    P और Q, Brinell व Rockwell का सही वर्णन करते हैं। R उलटा है: HR = N − h/0.002 mm, इसलिए गहरी छाप कम संख्या देती है और उच्च HRC कठोर पदार्थ दर्शाता है। S में d छाप का औसत विकर्ण है, गहराई नहीं।
  12. ऊष्मीय विश्लेषण के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. P: Thermogravimetry ताप या समय के साथ नमूने के द्रव्यमान में परिवर्तन दर्ज करती है।
    2. Q: DSC शिखर का क्षेत्रफल संक्रमण के एंथैल्पी परिवर्तन के समानुपाती है।
    3. R: DSC द्रव्यमान-ह्रास सीधे पहचानता है क्योंकि वह पैन को तौलता है।
    4. S: अक्रिय गैस में शुद्ध धातु का गलन TGA वक्र में सीढ़ी के रूप में दिखता है।
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P: Thermogravimetry ताप या समय के साथ नमूने के द्रव्यमान में परिवर्तन दर्ज करती है।; B — Q: DSC शिखर का क्षेत्रफल संक्रमण के एंथैल्पी परिवर्तन के समानुपाती है।

    P, TGA की परिभाषा और Q, calorimetric संबंध है। R ग़लत है: DSC ऊष्मा-प्रवाह दर्ज करता है, द्रव्यमान नहीं। S ग़लत है: अक्रिय वातावरण में गलन से द्रव्यमान नहीं बदलता (और क्वथनांक से बहुत नीचे वाष्प-हानि नगण्य है), इसलिए TGA वक्र समतल रहता है।
  13. एक तनन परीक्षण में necking शुरू होने से पहले 0.25 engineering विकृति पर engineering प्रतिबल 320 MPa है। एकसमान विरूपण और स्थिर आयतन मानकर true प्रतिबल MPa में ज्ञात कीजिए। उत्तर पूर्णांक में दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 400

    σ_t = σ(1 + e) = 320 × 1.25 = 400 MPa। जाँच: A = A₀/1.25, अतः वही भार छोटे क्षेत्रफल पर लगता है और true प्रतिबल 25 % अधिक है।
  14. एक इस्पात का yield प्रतिबल 250 MPa और Young का मापांक 200 GPa है। उसके वक्र का प्रत्यास्थ भाग रैखिक मानकर resilience का मापांक kJ/m³ में ज्ञात कीजिए। उत्तर दो दशमलव स्थान तक दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 156.25

    U_r = σ_y²/2E = (250e6)²/(2 × 200e9) = 6.25e16/4e11 = 1.5625e5 J/m³ = 156.25 kJ/m³। जाँच: ½ × 250e6 × (250e6/200e9) = ½ × 250e6 × 1.25e-3 = 1.5625e5 J/m³।
  15. एक Brinell परीक्षण में 10 mm गेंद पर 3000 kgf भार लगता है और 4.0 mm व्यास की छाप बनती है। HB = 2P/[πD(D − √(D² − d²))] kgf/mm² में प्रयोग कीजिए। Brinell कठोरता संख्या पूर्णांक में ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 229

    √(D² − d²) = √(100 − 16) = 9.165 mm; D − 9.165 = 0.835 mm; πD × 0.835 = 26.23 mm²; HB = 6000/26.23 = 228.8, अर्थात 229। Python जाँच: 2·3000/(π·10·(10 − √84)) = 228.77।
  16. 0.50 mm मोटी पतली silicon चकती, जिसका पार्श्व विस्तार probe अंतराल की तुलना में बहुत बड़ा है, संरेख four-point probe से मापी जाती है। धारा 4.0 mA और भीतरी probe के बीच वोल्टता 8.0 mV है। पतली शीट के लिए ρ = (π/ln 2) t V/I प्रयोग कीजिए। प्रतिरोधकता Ω cm में तीन दशमलव स्थान तक ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.453

    V/I = 8.0 mV/4.0 mA = 2.0 Ω। π/ln 2 = 4.532। ρ = 4.532 × 0.50 × 10⁻³ m × 2.0 Ω = 4.532 × 10⁻³ Ω m = 0.4532 Ω cm (1 Ω m = 100 Ω cm)। Python जाँच 0.45324 देती है।
  17. t = 0.10 mm (क्षेत्र के अनुदिश मापी) मोटी n-प्रकार की पट्टिका B = 0.40 T चुंबकीय क्षेत्र में I = 2.0 mA वहन करती है। Hall वोल्टता 4.0 mV और प्रतिरोधकता 2.0 × 10⁻³ Ω m है। एकल वाहक प्रकार के लिए R_H = V_H t/(IB) और μ_H = |R_H|/ρ लीजिए। Hall गतिशीलता m²/(V s) में दो दशमलव स्थान तक ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.25

    R_H = V_H t/(IB) = (4.0e-3 × 1.0e-4)/(2.0e-3 × 0.40) = 4.0e-7/8.0e-4 = 5.0e-4 m³/C। μ_H = 5.0e-4/2.0e-3 = 0.25 m²/(V s), अर्थात 2500 cm²/(V s)। Python जाँच: 0.25।