आनुवंशिकता
मेंडल और एकल संकर क्रॉस
ग्रेगर मेंडल ने उद्यान मटर (Pisum sativum) पर कार्य किया क्योंकि उसमें सरलता से दिखने वाले विपरीत लक्षण (लंबा या बौना, गोल या झुर्रीदार बीज, पीला या हरा बीज), छोटा जीवन-चक्र, और ऐसे पुष्प होते हैं जो स्वपरागण करते हैं पर हाथ से परपरागण भी कराए जा सकते हैं। मेंडल ने प्रत्येक क्रॉस की संतति गिनी, यही उनके कार्य की शक्ति थी।
एकल संकर क्रॉस में विपरीत लक्षणों का एक जोड़ा देखा जाता है। शुद्ध लंबे पौधे (TT) का शुद्ध बौने पौधे (tt) से क्रॉस कराने पर F1 पीढ़ी के सभी पौधे लंबे (Tt) होते हैं; बौना लक्षण लुप्त-सा दिखता है। F1 के स्वपरागण से F2 में लंबे व बौने पौधे 3 : 1 अनुपात में आते हैं। अतः F1 में दिखने वाला लक्षण प्रभावी (T) है, छिपा लक्षण अप्रभावी (t) है, और वह लुप्त नहीं होता, F2 में पुनः प्रकट होता है।
| F1 युग्मक | T | t |
|---|---|---|
| T | TT (लंबा) | Tt (लंबा) |
| t | Tt (लंबा) | tt (बौना) |
वर्ग से: लक्षणप्ररूप अनुपात (दिखावट) 3 लंबे : 1 बौना; जीनप्ररूप अनुपात (जीन-संरचना) 1 TT : 2 Tt : 1 tt। TT व tt समयुग्मजी हैं, Tt विषमयुग्मजी है; जीन के दोनों रूप (T व t) युग्मविकल्पी (एलील) हैं। हल उदाहरण: 1,600 F2 पौधों में लंबे = ¾ × 1,600 = 1,200 और बौने = ¼ × 1,600 = 400। लंबे पौधे का बौने (tt) से परीक्षण क्रॉस उसका जीनप्ररूप बताता है: Tt × tt से लंबे : बौने 1 : 1 मिलते हैं, जबकि TT × tt से सब लंबे।
एक और बात: F2 के लंबे पौधों में केवल 3 में से 1 शुद्ध (TT) और 3 में से 2 Tt हैं, क्योंकि लंबा वर्ग 1 TT + 2 Tt है; अतः यादृच्छिक चुने लंबे F2 पौधे के TT होने की प्रायिकता 1/3 है, इसीलिए F2 लंबे पौधों के स्वपरागण से फिर बौने पौधे निकल सकते हैं।
क्रॉस को शीघ्रता से पढ़ना
मेंडल का विचार हर अनुपात समझाता है: प्रत्येक पौधे में जीन के दो युग्मविकल्पी होते हैं, पर युग्मक में उनमें से केवल एक संयोगवश आता है, और संतति को प्रत्येक जनक से एक युग्मविकल्पी मिलता है। जीन प्रोटीन बनाकर कार्य करता है, अतः पौधा इसलिए लंबा है कि उसका जीन वृद्धि हॉर्मोन के लिए दक्ष एंज़ाइम बनाता है, जबकि अप्रभावी युग्मविकल्पी कम दक्ष एंज़ाइम बनाता है। परीक्षा में एक पंक्ति के उत्तर के लिए नीचे की सारणी का प्रयोग करें और याद रखें कि अप्रभावी लक्षण तभी दिखता है जब दोनों युग्मविकल्पी अप्रभावी हों।
| क्रॉस | संतति जीनप्ररूप | संतति लक्षणप्ररूप |
|---|---|---|
| TT × tt | सब Tt | सब लंबे |
| Tt × Tt | 1 TT : 2 Tt : 1 tt | 3 लंबे : 1 बौना |
| Tt × tt | 1 Tt : 1 tt | 1 लंबा : 1 बौना |
| TT × Tt | 1 TT : 1 Tt | सब लंबे |
| tt × tt | सब tt | सब बौने |
द्विसंकर क्रॉस और स्वतंत्र वंशागति
द्विसंकर क्रॉस में लक्षणों के दो जोड़ों को साथ देखा जाता है। शुद्ध गोल पीले बीज वाले पौधे (RRYY) का शुद्ध झुर्रीदार हरे बीज वाले पौधे (rryy) से क्रॉस कराएँ: सभी F1 पौधे गोल व पीले (RrYy) होते हैं, अतः गोल (R) व पीला (Y) प्रभावी हैं। F1 के स्वपरागण से F2 में चार प्रकार 9 : 3 : 3 : 1 अनुपात में मिलते हैं।
| F2 बीज का प्रकार | भिन्न | 1,600 में से |
|---|---|---|
| गोल पीला | 9/16 | 900 |
| गोल हरा (नया) | 3/16 | 300 |
| झुर्रीदार पीला (नया) | 3/16 | 300 |
| झुर्रीदार हरा | 1/16 | 100 |
दोनों जनक-प्ररूप (गोल पीला, झुर्रीदार हरा) आते हैं, पर दो नए संयोजन भी आते हैं, गोल हरा व झुर्रीदार पीला। इससे पता चलता है कि लक्षण एक-दूसरे से स्वतंत्र वंशागत होते हैं: प्रत्येक जोड़ा दूसरे की परवाह किए बिना युग्मकों में पृथक् होता है। प्रत्येक लक्षण अकेले 3 : 1 अनुपात दिखाता है (गोल 12 : झुर्रीदार 4; पीला 12 : हरा 4)।
लिंग निर्धारण
मानव के 23 जोड़े गुणसूत्रों में 22 समान जोड़े (अलिंगसूत्र) हैं। 23वाँ जोड़ा लिंग गुणसूत्रों का है: स्त्री में XX, पुरुष में XY। प्रत्येक अंड में एक X होता है। शुक्राणु में X या Y होता है, बराबर संख्या में। इसलिए शिशु का लिंग पिता का शुक्राणु तय करता है: X शुक्राणु के निषेचन से XX, यानी बालिका; Y शुक्राणु से XY, यानी बालक। प्रत्येक जन्म पर बालक या बालिका की संभावना 1/2 है और प्रत्येक जन्म पिछले जन्मों से स्वतंत्र है।
| अंड ↓ / शुक्राणु → | X | Y |
|---|---|---|
| X (अंड) | XX (बालिका) | XY (बालक) |
हल उदाहरण: एक दंपती की तीन बेटियाँ हैं। अगली संतान के बालिका होने की प्रायिकता अब भी 1/2 है, क्योंकि हर बार शुक्राणु X या Y समान संभावना से होता है। अगली दोनों संतानों के बालिकाएँ होने की प्रायिकता 1/2 × 1/2 = 1/4 है। कुछ जंतुओं में लिंग अन्य कारकों से तय होता है: कुछ सरीसृपों (कछुओं) में अंडों के सेने के समय का ताप, और घोंघे में लिंग बदल सकता है।
विकास: कम प्राथमिकता का विषय
- प्राकृतिक वरण (डार्विन): जीवित रहने में सहायक विविधताएँ चुनी जाती हैं और समष्टि पीढ़ियों में धीरे बदलती है। भौगोलिक अलगाव व आनुवंशिक विचलन (जीन-आवृत्ति में संयोगवश परिवर्तन) नई जातियों (जाति-उद्भवन) को जन्म देते हैं।
- समजात अंगों की मूल संरचना समान होती है पर कार्य भिन्न हो सकते हैं (मनुष्य व मेंढक का अग्रपाद); समरूप अंग समान कार्य करते हैं पर उत्पत्ति भिन्न होती है (कीट व पक्षी का पंख)।
- जीवाश्म पूर्व जीवों के संरक्षित अवशेष हैं; गहरी परत पुरानी होती है और आयु समस्थानिकों के अनुपात से भी ज्ञात की जाती है। आर्कियोप्टेरिक्स, जिसमें पंख व सरीसृप जैसे दाँत थे, सरीसृपों व पक्षियों को जोड़ता है।
पूछे जाने की संभावना केवल मूल परिभाषाओं की है। इस अध्याय के संख्यात्मक व अनुपात संबंधी प्रश्नों के लिए एकल व द्विसंकर अनुपात और बालक या बालिका की 1/2 संभावना ही मूल बातें हैं।
मुख्य बिंदु
- जीन गुणसूत्रों पर लक्षण वहन करते हैं; मनुष्य में 23 जोड़े (22 अलिंगसूत्र + 1 लिंग जोड़ा) होते हैं; अर्जित लक्षण वंशागत नहीं होते।
- एकल संकर TT × tt: F1 सब Tt (लंबे); F2 में लक्षणप्ररूप 3 : 1 और जीनप्ररूप 1 : 2 : 1; 1,600 पौधों में 1,200 लंबे व 400 बौने।
- परीक्षण क्रॉस Tt × tt से 1 : 1 मिलता है, जो बताता है कि लंबा जनक विषमयुग्मजी है; TT × tt से सब लंबे।
- द्विसंकर RRYY × rryy से F2 में 9 : 3 : 3 : 1 मिलता है, नए संयोजनों (गोल हरा, झुर्रीदार पीला) सहित: लक्षण स्वतंत्र वंशागत होते हैं।
- मनुष्य में स्त्री XX व पुरुष XY; पिता का शुक्राणु (X या Y) शिशु का लिंग तय करता है, प्रत्येक जन्म पर संभावना 1/2।
- अब कक्षा 10 का अध्याय केवल आनुवंशिकता का है, इसलिए विकास कम प्राथमिकता का है: प्राकृतिक वरण, समजात व समरूप अंग और जीवाश्म संक्षेप में जानें।
अभ्यास प्रश्न (17)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
मानव की सामान्य कायिक कोशिका में गुणसूत्रों के कितने जोड़े होते हैं?
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उत्तर: B — 23
मानव की कायिक कोशिका में 23 जोड़े, अर्थात् 46 गुणसूत्र होते हैं: 22 जोड़े अलिंगसूत्र और एक जोड़ा लिंग गुणसूत्र। 46 कुल गुणसूत्रों की संख्या है, जोड़ों की नहीं, जो सामान्य चूक है।निम्नलिखित में से कौन-सा अर्जित लक्षण है जो बच्चों को नहीं मिलेगा?
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उत्तर: C — वर्षों के भार-प्रशिक्षण से बनी बड़ी पेशियाँ
व्यायाम से बनी पेशियाँ केवल कायिक कोशिकाओं को बदलती हैं, युग्मकों के DNA को नहीं, इसलिए वे वंशागत नहीं होतीं। आँखों का रंग, कर्णपालि का आकार और रक्त समूह जीनों से नियंत्रित हैं और वंशागत होते हैं।जब शुद्ध लंबे (TT) और शुद्ध बौने (tt) मटर के पौधों का क्रॉस कराया जाता है तो सभी F1 पौधे लंबे होते हैं। इससे क्या सिद्ध होता है?
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उत्तर: A — लंबापन प्रभावी है; बौना लक्षण लुप्त नहीं होता
F1 में दिखने वाला लक्षण प्रभावी होता है, इसलिए लंबापन प्रभावी है। F1 पौधे Tt हैं और उनमें t युग्मविकल्पी बना रहता है, जो F2 में बौने पौधों के रूप में पुनः प्रकट होता है। बौने जीन के नष्ट होने की धारणा भ्रामक है, पर वह अगली पीढ़ी में लौट आता है।TT × tt क्रॉस के F1 पौधों का स्वपरागण कराने पर 1,600 F2 पौधे मिलते हैं। कितने बौने पौधों की अपेक्षा है?
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उत्तर: D — 400
F2 अनुपात 3 लंबे : 1 बौना है, अतः बौने पौधे ¼ × 1,600 = 400 होंगे। 1,200 लंबे पौधों (¾) की संख्या है, और 800 1 : 1 अनुपात से आता है जो परीक्षण क्रॉस का है।एक विषमयुग्मजी लंबे मटर पौधे (Tt) का बौने पौधे (tt) से क्रॉस कराया जाता है। संतति का कौन-सा भाग बौना होने की अपेक्षा है?
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उत्तर: A — एक-आधा
पहले जनक से युग्मक T या t और दूसरे से केवल t बनते हैं, जिससे Tt व tt बराबर संख्या में मिलते हैं, अतः आधे बौने होते हैं। एक-चौथाई Tt × Tt क्रॉस का मान है, जो भिन्न क्रॉस है और लंबे व बौने 3 : 1 देता है।शुद्ध TT और शुद्ध tt जनकों के एकल संकर क्रॉस की F2 पीढ़ी में जीनप्ररूप अनुपात क्या है?
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उत्तर: B — 1 : 2 : 1
पनेट वर्ग से 1 TT : 2 Tt : 1 tt मिलता है, यही जीनप्ररूप अनुपात है। 3 : 1 उसी क्रॉस का लक्षणप्ररूप अनुपात (लंबे : बौने) है, जो सामान्य भ्रम है, और 9 : 3 : 3 : 1 द्विसंकर क्रॉस का है।शुद्ध गोल पीले (RRYY) और शुद्ध झुर्रीदार हरे (rryy) मटर पौधों का क्रॉस कराकर F1 का स्वपरागण करने पर 1,600 F2 पौधे मिलते हैं। कितने झुर्रीदार पीले पौधों की अपेक्षा है?
उत्तर देखें
उत्तर: C — 300
झुर्रीदार पीला 3/16 वाले दो वर्गों में से एक है: 3/16 × 1,600 = 300। 900 गोल पीले वर्ग (9/16) की और 100 झुर्रीदार हरे (1/16) की संख्या है, जो 9 : 3 : 3 : 1 अनुपात के अन्य वर्ग हैं।RRYY × rryy क्रॉस की F2 में कौन-से बीज-प्रकार ऐसे नए संयोजन हैं जो किसी भी जनक में नहीं थे?
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उत्तर: D — गोल हरा और झुर्रीदार पीला
जनक गोल पीला और झुर्रीदार हरा थे, अतः नए संयोजन गोल हरा और झुर्रीदार पीला हैं। इनका प्रकट होना दर्शाता है कि बीज का आकार और रंग स्वतंत्र वंशागत होते हैं। गोल पीला व झुर्रीदार हरा वाला जोड़ा जनक-प्ररूपों का है, जो नए नहीं हैं।इन कथनों को देखिए। P: Tt जीनप्ररूप वाला पौधा विषमयुग्मजी है और लंबा दिखता है। Q: शुद्ध जनकों के क्रॉस की F1 पीढ़ी में अप्रभावी लक्षण प्रकट होता है। R: TT और Tt पौधों का लक्षणप्ररूप समान होता है। S: जीनप्ररूप का अर्थ पौधे की दृश्य दिखावट है। कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — केवल P और R
P और R सही हैं: Tt विषमयुग्मजी है और T प्रभावी होने से TT जैसा ही दिखता है। Q गलत है क्योंकि अप्रभावी लक्षण F1 में छिपा रहता है और F2 में ही प्रकट होता है। S गलत है क्योंकि दृश्य दिखावट लक्षणप्ररूप है, जबकि जीनप्ररूप जीन-संरचना है।एक लंबे मटर पौधे का बौने पौधे से क्रॉस कराने पर 52 लंबी और 48 बौनी संतति मिलती है। लंबे जनक का जीनप्ररूप क्या है?
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उत्तर: B — Tt, क्योंकि बौनी संतति को प्रत्येक जनक से t चाहिए
बौना जनक tt है और केवल t देता है, इसलिए प्रत्येक बौनी (tt) संतति को t लंबे जनक से मिला होगा, अतः वह Tt है। TT जनक से सभी संतति लंबी होती, और लगभग 1 : 1 अनुपात Tt × tt की पुष्टि करता है।मनुष्य में शिशु का लिंग किस जनक का युग्मक निर्धारित करता है?
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उत्तर: C — पिता का शुक्राणु, जिसमें X या Y होता है
प्रत्येक अंड में एक X होता है, पर शुक्राणु में X या Y होता है, इसलिए शुक्राणु निर्धारण करता है: X से बालिका (XX) और Y से बालक (XY)। माता के अंड में Y कभी नहीं होता, और उसमें एक X होता है, दो नहीं।सामान्य मानव पुरुष में लिंग गुणसूत्रों का संयोजन क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: D — XY
पुरुष में एक X और एक Y होता है, और स्त्री में दो X गुणसूत्र। YY मनुष्य में नहीं होता और XO सामान्य पुरुष संयोजन नहीं है।एक दंपती का एक पुत्र पहले से है। यह मानते हुए कि प्रत्येक शिशु के बालक या बालिका होने की संभावना समान है, उनकी अगली दोनों संतानों के बालिकाएँ होने की प्रायिकता क्या है?
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उत्तर: B — 1/4
प्रत्येक जन्म स्वतंत्र है और पहले से जन्मे पुत्र का कोई प्रभाव नहीं: 1/2 × 1/2 = 1/4। 1/8 गलती से मौजूदा पुत्र को तीसरी घटना गिन लेता है, और 1/2 एक शिशु की संभावना है।मनुष्य में लिंग निर्धारण के बारे में कौन-सा कथन सही नहीं है?
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उत्तर: A — माता के अंड में Y गुणसूत्र हो सकता है
अंड में सदैव X होता है, Y कभी नहीं, इसलिए अंड में Y वाला कथन गलत है। बालिका XX है और उसे प्रत्येक जनक से एक X मिलता है, और बालक को Y केवल पिता से मिलता है, क्योंकि केवल शुक्राणु ही उसे वहन करते हैं।कौन-सी जनन विधि संतति में सबसे अधिक विविधता उत्पन्न करती है?
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उत्तर: C — लैंगिक जनन, जो दो जनकों के जीनों को मिलाता है
लैंगिक जनन दो जनकों के जीन मिलाकर नए संयोजन देता है। विखंडन, मुकुलन और कलम एक ही जनक की प्रतिकृति बनाते हैं, अतः संतति लगभग समान होती है, केवल DNA-प्रतिकृति की छोटी त्रुटियों के साथ।कीट का पंख और पक्षी का पंख समान कार्य करते हैं पर उनकी उत्पत्ति भिन्न है। ऐसे अंग कहलाते हैं:
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उत्तर: C — समरूप अंग
समान कार्य पर भिन्न उत्पत्ति वाले अंग समरूप कहलाते हैं। समजात अंगों की मूल संरचना व उत्पत्ति समान होती है भले कार्य भिन्न हो, जैसे मनुष्य व मेंढक के अग्रपाद।चट्टान की अविचलित परतों में जीवाश्मों के बारे में कौन-सा कथन सही है?
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उत्तर: A — गहरी परतों में मिले जीवाश्म सामान्यतः अधिक पुराने होते हैं
अविचलित परतों में गहरी परतें पहले बनी होती हैं, अतः गहरे मिले जीवाश्म पुराने होते हैं। आयु जीवाश्म-पदार्थ में समस्थानिकों के अनुपात से भी ज्ञात की जा सकती है, इसलिए जीवाश्मों की आयु न ज्ञात होने का दावा गलत है।