नियंत्रण, समन्वय और जनन
पौधों में समन्वय: हॉर्मोन और अनुवर्तन
पौधों में तंत्रिकाएँ नहीं होतीं; वे पादप हॉर्मोनों और कोशिकाओं में जल की मात्रा के परिवर्तन से समन्वय करते हैं। अनुवर्तन उद्दीपन के प्रति दिशात्मक वृद्धि है: प्रकाशानुवर्तन (प्रकाश की ओर: प्ररोह झुकते हैं), गुरुत्वानुवर्तन (गुरुत्व की ओर: जड़ें नीचे, प्ररोह ऊपर), जलानुवर्तन (जल की ओर: जड़ें), रसायनानुवर्तन (परागनलिका का बीजांड की ओर बढ़ना) और स्पर्शानुवर्तन (स्पर्श: प्रतानें आधार पर लिपटती हैं)। प्ररोह धनात्मक प्रकाशानुवर्ती व ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती होते हैं, जड़ें इसके विपरीत।
| हॉर्मोन | कहाँ / क्या करता है |
|---|---|
| ऑक्सिन | प्ररोह शीर्ष पर बनता है; कोशिकाओं को लंबा करता है; छाया वाले भाग में अधिक दीर्घन से प्ररोह प्रकाश की ओर झुकता है |
| जिबरेलिन | तने की वृद्धि में सहायक |
| साइटोकाइनिन | कोशिका विभाजन बढ़ाते हैं; फलों व बीजों में प्रचुर |
| एब्सिसिक अम्ल | वृद्धि रोकता है; मुरझाने व पत्तियों के गिरने का कारण |
संवेदी पौधा छुईमुई स्पर्श पर बिना वृद्धि के पत्तियाँ मोड़ लेता है: कोशिकाओं से जल बाहर जाने पर उनका आकार बदलता है, अतः यह गति अनुवर्तन नहीं है। ऑक्सिन, जिबरेलिन व साइटोकाइनिन वृद्धि बढ़ाते हैं; एब्सिसिक अम्ल रोकता है।
जंतुओं में हॉर्मोन
हॉर्मोन नलिकाहीन अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा बने रासायनिक संदेशवाहक हैं जिन्हें रुधिर लक्ष्य अंगों तक पहुँचाता है। इनकी मात्रा पुनर्भरण (फ़ीडबैक) से नियंत्रित होती है: जैसे रुधिर शर्करा बढ़ने पर अग्न्याशय अधिक इंसुलिन स्रावित करता है और घटने पर स्राव कम हो जाता है।
| ग्रंथि | हॉर्मोन | कार्य / कमी का प्रभाव |
|---|---|---|
| पीयूष | वृद्धि हॉर्मोन | वृद्धि नियंत्रित करता है; कमी से बौनापन; इसे मास्टर ग्रंथि कहते हैं |
| थायरॉइड | थायरॉक्सिन | कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व वसा का उपापचय नियंत्रित करता है; आयोडीन चाहिए, कमी से गलगंड |
| अग्न्याशय | इंसुलिन | रुधिर शर्करा घटाता है; कमी से मधुमेह |
| अधिवृक्क (वृक्कों के ऊपर) | एड्रीनलीन | आपातकाल में “लड़ो या भागो”: हृदय-गति व श्वास तेज़, पेशियों को अधिक रुधिर |
| वृषण | टेस्टोस्टेरोन | यौवनारंभ पर पुरुष लक्षण |
| अंडाशय | एस्ट्रोजन | यौवनारंभ पर स्त्री लक्षण |
अलैंगिक जनन
जनन से नए जीव बनते हैं और DNA की प्रतिकृति से जाति की निरंतरता रहती है; प्रतिकृतियाँ लगभग समान होती हैं, केवल अल्प विविधता के साथ। अलैंगिक जनन में एक जनक बिना युग्मकों के संतति बनाता है, अतः संतति लगभग क्लोन होती है।
विविधता इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि लगभग समरूप क्लोनों की समष्टि पर्यावरण के एक परिवर्तन से नष्ट हो सकती है, जबकि DNA प्रतिकृति से आए छोटे अंतर और लैंगिक जनन का बड़ा मिश्रण कुछ जीवों को जीवित रहने का अवसर देता है। यह विचार आनुवंशिकता वाले अध्याय में आगे बढ़ाया गया है।
| विधि | कार्यविधि | उदाहरण |
|---|---|---|
| द्विखंडन | कोशिका दो में बँटती है | अमीबा |
| बहुखंडन | एक साथ कई संतति कोशिकाएँ | प्लाज़्मोडियम |
| खंडन | शरीर टुकड़ों में टूटकर बढ़ता है | स्पाइरोगाइरा |
| पुनरुद्भवन | कटे भाग पूर्ण जीव बनते हैं | हाइड्रा, प्लैनेरिया |
| मुकुलन | मुकुल उभरकर अलग होता है | हाइड्रा, यीस्ट |
| बीजाणु निर्माण | बीजाणुधानी के बीजाणु अंकुरित होते हैं | राइज़ोपस |
| कायिक प्रवर्धन | जड़, तने या पत्ती से नया पौधा | ब्रायोफिलम पत्ती; आलू; गुलाब की कलम |
कायिक प्रवर्धन की कलम, दाब कलम व रोपण विधियों (चमेली, गुलाब, केला, संतरा) से नया पौधा जल्दी फूल-फल देता है, जनक के गुण रखता है, और बीज न बनाने वाले पौधे उगाने का यही उपाय है। ऊतक संवर्धन में कुछ कोशिकाओं से पोषक माध्यम में नए पौधे उगाए जाते हैं।
पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन
पुष्प जनन अंग है। इसके भाग हैं बाह्यदल, दल, नर पुंकेसर (पराग बनाने वाला परागकोश, पुतंतु) और मादा स्त्रीकेसर (वर्तिकाग्र, वर्तिका, बीजांडों सहित अंडाशय)। उभयलिंगी पुष्प में दोनों होते हैं (गुड़हल, सरसों); एकलिंगी में एक ही (पपीता, तरबूज़)।
परागण परागकोश से वर्तिकाग्र पर पराग का स्थानांतरण है: स्वपरागण उसी पुष्प या पौधे में, परपरागण भिन्न पौधों के पुष्पों के बीच वायु, जल या जंतुओं द्वारा। वर्तिकाग्र पर पराग से परागनलिका वर्तिका में होकर बीजांड तक बढ़ती है, जहाँ नर युग्मक अंड से मिलता है: निषेचन से युग्मनज बनता है, जो विभाजित होकर भ्रूण बनाता है। इसके बाद बीजांड बीज बनता है, अंडाशय फल बनता है, और दल आदि मुरझा जाते हैं। बीज अंकुरित होकर नवोद्भिद बनता है।
मानव जनन
पुरुषों में वृषण (वृषणकोष में, जो उन्हें शरीर से ठंडा रखता है, जैसा शुक्राणु-निर्माण के लिए चाहिए) शुक्राणु व टेस्टोस्टेरोन बनाते हैं; शुक्राणु शुक्रवाहिका से जाकर प्रोस्टेट व शुक्राशय के स्रावों से मिलकर वीर्य बनाते हैं और मूत्रमार्ग से बाहर निकलते हैं। स्त्रियों में अंडाशय अंड व हॉर्मोन एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन बनाते हैं; अंड अंडवाहिनी में जाता है, जहाँ निषेचन होता है; युग्मनज विभाजित होता है और बना भ्रूण गर्भाशय में आरोपित होता है, जिसकी भित्ति मोटी व रुधिर-समृद्ध होती है। अपरा (प्लेसेंटा) गर्भाशय-भित्ति में धँसा तश्तरीनुमा ऊतक है जो भ्रूण को पोषण व ऑक्सीजन देता और अपशिष्ट हटाता है। गर्भकाल लगभग नौ माह है।
यौवनारंभ पर टेस्टोस्टेरोन व एस्ट्रोजन के प्रभाव से गौण लैंगिक लक्षण आते हैं। ऋतुस्राव चक्र लगभग मासिक होता है: एक अंडाशय अंड मुक्त करता है और गर्भाशय की भित्ति मोटी होती है; अंड निषेचित न हो तो भित्ति टूटकर रुधिर व श्लेष्मा के रूप में निकलती है, यह ऋतुस्राव है।
| विधि | प्रकार | टिप्पणी |
|---|---|---|
| कंडोम | रोध | यौन संचारित संक्रमणों का जोखिम भी घटाता है |
| मुख से ली जाने वाली गोलियाँ | हॉर्मोनल | हॉर्मोन संतुलन बदलते हैं, अतः अंड मुक्त नहीं होता |
| कॉपर-टी (IUD) | गर्भाशय में स्थापित | आरोपण रोकती है |
| शुक्रवाहिका-उच्छेदन / नलिका-बंधन | शल्य | शुक्रवाहिका / अंडवाहिनी अवरुद्ध करते हैं |
प्रजनन स्वास्थ्य में यह जानकारी भी शामिल है कि शिशु का लिंग पिता के गुणसूत्रों से तय होता है (आनुवंशिकता अध्याय देखें), और यौवनारंभ व गर्भावस्था में संतुलित आहार, स्वच्छता व चिकित्सकीय सलाह माँ और शिशु का स्वास्थ्य सुरक्षित रखती है।
सूजाक व उपदंश (जीवाणुजनित) तथा मस्से व HIV-AIDS (विषाणुजनित) जैसे रोग यौन संपर्क से फैलते हैं; रोध विधियाँ सुरक्षा देती हैं, सारणी की अन्य विधियाँ नहीं।
मुख्य बिंदु
- तंत्रिका तंत्र तीव्र है: न्यूरॉन = द्रुमिका, कोशिका-काय, अक्षतंतु; प्रतिवर्ती चाप है ग्राही, संवेदी न्यूरॉन, मेरुरज्जु, प्रेरक न्यूरॉन, प्रभावी अंग।
- मस्तिष्क: प्रमस्तिष्क सोचता है, अनुमस्तिष्क संतुलन रखता है, मेडुला वमन व रक्तदाब जैसी अनैच्छिक क्रियाएँ नियंत्रित करता है।
- पादप हॉर्मोन: ऑक्सिन व जिबरेलिन वृद्धि बढ़ाते हैं, साइटोकाइनिन विभाजन, एब्सिसिक अम्ल वृद्धि रोकता है; अनुवर्तन दिशात्मक वृद्धि है।
- थायरॉक्सिन को आयोडीन चाहिए (गलगंड), इंसुलिन रुधिर शर्करा घटाता है (मधुमेह), एड्रीनलीन आपातकाल की तैयारी कराता है, वृद्धि हॉर्मोन पीयूष से आता है।
- अलैंगिक विधियाँ: द्विखंडन (अमीबा), बहुखंडन (प्लाज़्मोडियम), मुकुलन (हाइड्रा, यीस्ट), बीजाणु (राइज़ोपस), पुनरुद्भवन (प्लैनेरिया), कायिक प्रवर्धन।
- पुष्प में बीजांड बीज व अंडाशय फल बनता है; मनुष्य में निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण गर्भाशय में आरोपित होकर अपरा से पोषण पाता है।
अभ्यास प्रश्न (17)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
न्यूरॉन का कौन-सा भाग तंत्रिका आवेग को कोशिका-काय से दूर ले जाता है?
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उत्तर: C — अक्षतंतु
लंबा अक्षतंतु आवेग को कोशिका-काय से दूर अपने सिरे तक ले जाता है। द्रुमिकाएँ आवेग ग्रहण कर कोशिका-काय तक लाती हैं, इसीलिए वे सामान्य गलत विकल्प हैं। सिनैप्स केवल दो न्यूरॉनों के बीच का अंतराल है और केंद्रक कोशिका-काय के भीतर होता है।प्रतिवर्ती चाप की अवस्थाओं को सही क्रम में लगाइए। P: संवेदी न्यूरॉन। Q: प्रेरक न्यूरॉन। R: मेरुरज्जु में सहायक न्यूरॉन। S: प्रभावी पेशी। ग्राही सबसे पहले आता है।
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उत्तर: A — P, R, Q, S
ग्राही का संकेत संवेदी न्यूरॉन से मेरुरज्जु के सहायक न्यूरॉन तक, फिर प्रेरक न्यूरॉन से प्रभावी अंग तक जाता है: P, R, Q, S। क्रम P, Q, R, S में प्रेरक न्यूरॉन को सहायक से पहले रख दिया गया है, जबकि पेशी को निर्देश देने से पहले मेरुरज्जु को संकेत संसाधित करना होता है।मानव मस्तिष्क का कौन-सा भाग मुख्यतः शरीर की मुद्रा व संतुलन बनाए रखता है?
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उत्तर: D — अनुमस्तिष्क
पश्चमस्तिष्क का अनुमस्तिष्क मुद्रा व संतुलन बनाए रखता है और ऐच्छिक गतियों को परिशुद्ध बनाता है। प्रमस्तिष्क सोचने व ऐच्छिक क्रिया के लिए है, जबकि मेडुला रक्तदाब व वमन जैसी अनैच्छिक क्रियाएँ नियंत्रित करता है।सिर की चोट के बाद एक व्यक्ति चलते समय लड़खड़ाता है और उँगली से नाक को सहजता से नहीं छू पाता, पर सामान्य रूप से बोलता, तर्क करता, श्वास लेता है और उसकी हृदय-धड़कन स्थिर है। सबसे संभावित क्षति किस भाग में है?
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उत्तर: B — अनुमस्तिष्क, जो संतुलन व परिशुद्धता नियंत्रित करता है
संतुलन की कमी व अनाड़ी, अपरिशुद्ध गति के साथ सामान्य वाणी, तर्क, श्वास व धड़कन अनुमस्तिष्क की ओर संकेत करते हैं। मेडुला की क्षति से श्वास व धड़कन बिगड़ती, प्रमस्तिष्क की क्षति से तर्क व वाणी प्रभावित होती, और मेरुरज्जु की क्षति से केवल अनाड़ीपन नहीं बल्कि कमज़ोरी या संवेदना-ह्रास होता।पौधे का कौन-सा हॉर्मोन, प्ररोह शीर्ष के छायादार भाग में एकत्र होकर वहाँ की कोशिकाओं को अधिक लंबा करता है जिससे प्ररोह प्रकाश की ओर झुकता है?
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उत्तर: A — ऑक्सिन
ऑक्सिन प्ररोह शीर्ष पर बनता है और छायादार ओर जाकर कोशिका-दीर्घन बढ़ाता है। साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन बढ़ाता है और एब्सिसिक अम्ल वृद्धि रोकता है। थायरॉक्सिन जंतु हॉर्मोन है, पादप हॉर्मोन नहीं।किस हॉर्मोन के संश्लेषण के लिए आयोडीन चाहिए, जिससे आहार में आयोडीन की कमी से गलगंड हो सकता है?
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उत्तर: C — थायरॉक्सिन
थायरॉइड ग्रंथि का थायरॉक्सिन आयोडीन युक्त है और इसकी कमी से गलगंड होता है। अग्न्याशय का इंसुलिन रुधिर शर्करा व मधुमेह से जुड़ा है, और अन्य दोनों हॉर्मोनों को आयोडीन नहीं चाहिए।कौन-सा ग्रंथि व हॉर्मोन का युग्म सही सुमेलित नहीं है?
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उत्तर: B — थायरॉइड: इंसुलिन
इंसुलिन अग्न्याशय से आता है, थायरॉइड से नहीं, जो थायरॉक्सिन बनाता है। इसलिए थायरॉइड–इंसुलिन युग्म असंगत है। पीयूष वृद्धि हॉर्मोन, अधिवृक्क एड्रीनलीन और अग्न्याशय इंसुलिन बनाते ही हैं।इन कथनों को देखिए। P: इंसुलिन की कमी से मधुमेह होता है। Q: एड्रीनलीन हृदय-धड़कन को धीमा करता है। R: बचपन में वृद्धि हॉर्मोन की कमी से बौनापन होता है। S: थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व वसा का उपापचय नियंत्रित करता है। कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: C — केवल P, R और S
P, R और S सही हैं। Q गलत है क्योंकि एड्रीनलीन आपातकाल में हृदय-धड़कन व श्वास को तेज़ करता है। केवल P और R वाला विकल्प अधूरा है, क्योंकि S भी सही कथन है।तेज़ आवाज़ से अचानक डरे व्यक्ति की हृदय-धड़कन तेज़ हो जाती है, श्वास बढ़ जाती है और कंकाल-पेशियों को अधिक रुधिर भेजा जाता है। इसके लिए मुख्यतः उत्तरदायी हॉर्मोन कौन-सी ग्रंथि छोड़ती है?
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उत्तर: D — अधिवृक्क ग्रंथि, एड्रीनलीन छोड़ती है
अधिवृक्क ग्रंथियों का एड्रीनलीन शरीर को “लड़ो या भागो” के लिए तैयार करता है: तेज़ धड़कन व श्वास तथा पेशियों को अधिक रुधिर। थायरॉक्सिन उपापचय को दीर्घकाल में नियंत्रित करता है, तात्कालिक संकट में नहीं, और इंसुलिन व वृद्धि हॉर्मोन का ऐसा प्रभाव नहीं।कौन-सा जीव अपनी अलैंगिक जनन विधि से सही युग्मित है?
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उत्तर: A — हाइड्रा: मुकुलन
हाइड्रा में मुकुल बनते हैं जो छोटे हाइड्रा बनकर अलग हो जाते हैं। अमीबा द्विखंडन और प्लाज़्मोडियम बहुखंडन से जनन करते हैं, इसलिए विकल्पों में ये दोनों विधियाँ आपस में बदली हैं, और राइज़ोपस बीजाणुओं से जनन करता है।एक संवर्धन में 2 अमीबा से शुरुआत होती है। प्रत्येक कोशिका हर घंटे द्विखंडन से एक बार विभाजित होती है और कोई कोशिका नहीं मरती। 3 घंटे बाद कितने अमीबा होंगे?
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उत्तर: B — 16
संख्या हर घंटे दोगुनी होती है: 2 × 2³ = 16। मान 8 केवल 2³ है, जिसमें शुरू की दो कोशिकाएँ भुला दी गई हैं, और 12 दोगुना करने के बजाय तीन बार 2 जोड़ने से आता है।पुष्पी पादप में निषेचन के बाद बीजांड और अंडाशय क्रमशः किसमें विकसित होते हैं?
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उत्तर: D — बीज और फल
बीजांड बीज बनता है और अंडाशय फल बनता है। जिस विकल्प में फल पहले आया है वह दोनों को उलट देता है। युग्मनज बीजांड के भीतर निषेचन से बनी कोशिका है, बीजांड का अंतिम उत्पाद नहीं।इन कथनों को देखिए। P: परागण और निषेचन एक ही घटना हैं। Q: परागनलिका वर्तिका में बढ़कर नर युग्मक को बीजांड तक ले जाती है। R: गुड़हल के पुष्प उभयलिंगी होते हैं। S: अंडाशय फल में विकसित होता है। कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — केवल Q, R और S
Q, R और S तीनों सही हैं। P गलत है: परागण वर्तिकाग्र पर पराग का पहुँचना है, जबकि निषेचन बाद में बीजांड में युग्मकों का संलयन है। केवल Q और S वाला विकल्प R को छोड़ देता है जो सही है, क्योंकि गुड़हल में पुंकेसर व स्त्रीकेसर दोनों होते हैं।मानव स्त्री में निषेचन सामान्यतः कहाँ होता है और भ्रूण बाद में कहाँ आरोपित होता है?
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उत्तर: C — निषेचन अंडवाहिनी में, आरोपण गर्भाशय में
अंड अंडवाहिनी में शुक्राणु से मिलता है और युग्मनज विभाजित होते हुए गर्भाशय पहुँचता है, जिसकी मोटी, रुधिर-समृद्ध भित्ति भ्रूण को ग्रहण करती है। गर्भाशय निषेचन का स्थान नहीं है, जो सबसे आम भ्रम है, और अंडाशय केवल अंड बनाता है।मानव जनन व गर्भनिरोध के बारे में कौन-सा कथन सही नहीं है?
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उत्तर: D — मुख से ली जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियाँ अंडवाहिनी को भौतिक रूप से अवरुद्ध कर काम करती हैं
मुख से ली जाने वाली गोलियाँ हॉर्मोन संतुलन बदलती हैं जिससे अंड मुक्त नहीं होता; वे अंडवाहिनी को अवरुद्ध नहीं करतीं, यह नलिका-बंधन करता है। शेष तीनों कथन सही हैं: ठंडे वृषण, कॉपर-टी द्वारा आरोपण-निरोध, और शुक्रवाहिका-उच्छेदन से शुक्रवाहिका का अवरोध।इनमें से कौन-सी विधि गर्भधारण रोकने के साथ यौन संचारित संक्रमणों से भी सुरक्षा देती है?
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उत्तर: B — कंडोम, एक रोध विधि
कंडोम शारीरिक द्रवों के संपर्क को भौतिक रूप से रोकता है, इसलिए गर्भधारण के साथ संक्रमण का जोखिम भी घटाता है। कॉपर-टी, नलिका-बंधन और हॉर्मोनल गोलियाँ गर्भ रोकती हैं पर संक्रमण से असुरक्षित छोड़ देती हैं।ऋतुस्राव चक्र में, यदि अंड निषेचित न हो तो गर्भाशय की मोटी भित्ति का क्या होता है?
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उत्तर: A — वह टूटकर रुधिर व श्लेष्मा के रूप में शरीर से बाहर निकल जाती है
निषेचन न होने पर भ्रूण के लिए तैयार भित्ति की आवश्यकता नहीं रहती, वह टूटकर ऋतुस्राव के रूप में निकल जाती है। अपरा केवल तब बनती है जब भ्रूण आरोपित हो, इसलिए यहाँ वह संभव परिणाम नहीं है।