अधिकार, उपभोक्ता संरक्षण और आंतरिक सुरक्षा

यह अध्याय पुलिस भर्ती परीक्षाओं (कांस्टेबल व उप-निरीक्षक के सामान्य ज्ञान व सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र) के नागरिक-शास्त्र, उपभोक्ता-जागरूकता, मानवाधिकार और आंतरिक सुरक्षा संबंधी मदों का उत्तर देता है। इसमें उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 (छह उपभोक्ता अधिकार, तीन-स्तरीय आयोग व उनकी 2021 की धन-सीमाएँ, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण), सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (कौन उत्तर देता है, कितने दिनों में, अपील कौन सुनता है), मानवाधिकार व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, तथा आंतरिक सुरक्षा (पुलिस पर नियंत्रण किसका, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण और मुख्य आतंक-विरोधी कानून) पढ़ाए गए हैं। कानून संशोधित होते और सीमाएँ बदलती हैं, इसलिए हर परिवर्तनशील आँकड़े पर तिथि दी है; हर कानून व संस्था का उद्देश्य स्थायी है। RTI अधिनियम और NHRC नागरिक-शास्त्र अध्यायों में भी आते हैं; यहाँ तीव्र स्मरण के लिए पढ़ाए गए हैं।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 और उपभोक्ता अधिकार

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 का स्थान लिया। यह 20 जुलाई 2020 से लागू हुआ; केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण बनाने वाले प्रावधान 24 जुलाई 2020 से प्रभावी हुए। उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो प्रतिफल देकर वस्तु खरीदता या सेवा किराये पर लेता/उपयोग करता है, पुनर्विक्रय या वाणिज्यिक प्रयोजन के लिए नहीं। अधिनियम ऑनलाइन और टेलीशॉपिंग बिक्री को भी शामिल करता है। भारत 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाता है, जिस दिन 1986 के अधिनियम को स्वीकृति मिली थी।

अधिनियम छह उपभोक्ता अधिकार गिनाता है: जीवन व संपत्ति के लिए हानिकारक वस्तुओं व सेवाओं से संरक्षण (सुरक्षा); गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता, मानक व मूल्य की जानकारी (सूचना); प्रतिस्पर्धी मूल्य पर वस्तुओं-सेवाओं की विविधता तक पहुँच (चयन); सुने जाने और हितों पर उचित विचार का आश्वासन (सुनवाई); अनुचित या प्रतिबंधक व्यापार-प्रथाओं तथा शोषण के विरुद्ध निवारण माँगना (निवारण); और उपभोक्ता जागरूकता।

🧠 छह अधिकार: सु-सू-च-सु-नि-जा
सुरक्षा, सूचना, चयन, सुनवाई, निवारण, जागरूकता। "BIS" या "एगमार्क" जैसा चिह्न सूचना और सुरक्षा के अधिकार में मदद करता है; दोषपूर्ण वस्तु का दावा निवारण का विषय है।

आयोग और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण

विवाद तीन-स्तरीय अर्ध-न्यायिक व्यवस्था में जाते हैं: जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (राष्ट्रीय आयोग)। सीमा प्रतिफल के रूप में दी गई वस्तु या सेवा के मूल्य से तय होती है। अधिनियम में सीमाएँ 1 करोड़ व 10 करोड़ रुपये थीं, पर उपभोक्ता संरक्षण (जिला आयोग, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग का क्षेत्राधिकार) नियम, 2021 ने, जो 30 दिसंबर 2021 को अधिसूचित हुए, इन्हें संशोधित किया। इन नियमों के अनुसार (2021 की अधिसूचना-रिपोर्टों से जाँचा; बाद के परिवर्तन देखकर ही भरोसा करें): जिला 50 लाख तक, राज्य 50 लाख से अधिक व 2 करोड़ तक, राष्ट्रीय 2 करोड़ से अधिक। अपील ऊपर की ओर जाती है: जिला से राज्य, राज्य से राष्ट्रीय और राष्ट्रीय आयोग से सर्वोच्च न्यायालय।

हल उदाहरण (2021 के नियमों की सीमाएँ)। 1.2 करोड़ रुपये में खरीदे फ़्लैट की शिकायत राज्य आयोग में जाएगी, क्योंकि 1.2 करोड़ 50 लाख से ऊपर और 2 करोड़ से नीचे है। 30 लाख के वापसी-दावे की सुनवाई जिला आयोग में होगी। 3 करोड़ मूल्य का विवाद राष्ट्रीय आयोग में जाएगा।

अधिनियम ने केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) भी बनाया, जो उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा समग्र वर्ग के रूप में करने वाला नियामक है। वह अधिकारों के उल्लंघन व अनुचित व्यापार-प्रथाओं की जाँच, असुरक्षित वस्तुओं की वापसी (रिकॉल) का आदेश, धन-वापसी का आदेश, तथा झूठे या भ्रामक विज्ञापनों और उनका समर्थन करने वालों पर कार्रवाई कर सकता है। इसमें उत्पाद दायित्व (दोषपूर्ण उत्पाद या त्रुटिपूर्ण सेवा से हानि पर निर्माता, विक्रेता और सेवा-प्रदाता को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है) भी जोड़ा गया और मध्यस्थता उपलब्ध कराई गई।

⚠️ वर्ग बनाम व्यक्ति
आयोग किसी व्यक्ति की शिकायत सुनकर राहत देते हैं। CCPA नियामक है जो उपभोक्ताओं के वर्ग के लिए कार्य करता है और आयोगों का स्थान नहीं लेता। दोषपूर्ण फ़ोन की सामान्य शिकायत के लिए CCPA न चुनें।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

RTI अधिनियम 2005 नागरिकों को लोक प्राधिकरणों के पास की सूचना का अधिकार देता है। यह 15 जून 2005 को अधिनियमित हुआ और इसके मुख्य प्रावधान 12 अक्तूबर 2005 से लागू हुए। हर लोक प्राधिकरण एक लोक सूचना अधिकारी (PIO) नामित करता है; आवेदक थोड़ा शुल्क देता है और कारण बताना आवश्यक नहीं। PIO को 30 दिनों में उत्तर देना होता है, और किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी सूचना हो तो 48 घंटों में।

  • प्रथम अपील: उसी लोक प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी को, निर्णय या समय-सीमा से 30 दिनों के भीतर।
  • द्वितीय अपील: केंद्रीय सूचना आयोग (केंद्रीय निकाय) या राज्य सूचना आयोग (राज्य निकाय) को, 90 दिनों के भीतर।
  • छूटें (धारा 8) उदाहरणार्थ संप्रभुता व सुरक्षा तथा न्यायालय द्वारा रोकी गई सूचना की रक्षा करती हैं। धारा 24 द्वितीय अनुसूची के खुफ़िया व सुरक्षा संगठनों को बाहर रखती है, भ्रष्टाचार व मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों को छोड़कर।
⚠️ 30 और 48, 30 और 90
30 दिन सामान्य उत्तर-अवधि है; 48 घंटे केवल जीवन-स्वतंत्रता के मामलों में। प्रथम अपील की अवधि 30 दिन, द्वितीय अपील की 90 दिन। 2019 में RTI अधिनियम सूचना आयुक्तों के कार्यकाल व सेवा-शर्तों पर संशोधित हुआ।

मानवाधिकार और NHRC

मानवाधिकार हर व्यक्ति के मूल अधिकार हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसंबर 1948 को मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा अपनाई, इसीलिए 10 दिसंबर मानवाधिकार दिवस है। घोषणा संधि नहीं है; 1966 के दो बाध्यकारी अभिसमय (नागरिक व राजनीतिक अधिकार; आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक अधिकार) बाद में आए। भारत में यही विचार मौलिक अधिकारों (भाग III) और नीति-निदेशक तत्वों (भाग IV) में दिखते हैं।

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), राज्य मानवाधिकार आयोग और ज़िलों में मानवाधिकार न्यायालय बनाए। NHRC किसी शिकायत पर या स्वतः संज्ञान से मानवाधिकार-उल्लंघन, या किसी लोक सेवक द्वारा उसे रोकने में लापरवाही की जाँच करता है और जेलों का दौरा कर सकता है। उसके निष्कर्ष सिफ़ारिशें होते हैं; वह दंड नहीं दे सकता। 2019 के संशोधन ने अध्यक्ष-पात्रता बढ़ाई: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश।

🎯 केवल सिफ़ारिशें क्यों?
दंड देना न्यायालयों का काम है। NHRC जाँच व परामर्श निकाय है: वह सरकार को मुआवज़ा, अभियोजन या अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफ़ारिश करता है; इसलिए "NHRC ने अधिकारी को दंडित किया" जैसा प्रश्न जाल है।

पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल

संविधान में लोक व्यवस्था और पुलिस राज्य सूची के विषय हैं, इसलिए हर राज्य अपनी पुलिस चलाता है। केंद्र, गृह मंत्रालय के माध्यम से, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से राज्यों की सहायता करता है; मंत्रालय इन्हें सात बल गिनाता है। ये सीमा-रक्षा, प्रतिष्ठानों की सुरक्षा या आंतरिक सुरक्षा का कार्य करते हैं और सेना से अलग हैं, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन है।

सात CAPF और उनका मुख्य कार्य
बलमुख्य कार्य
सीमा सुरक्षा बल (BSF)पाकिस्तान व बांग्लादेश सीमा की रक्षा
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)चीन सीमा की रक्षा
सशस्त्र सीमा बल (SSB)नेपाल व भूटान सीमा की रक्षा
असम राइफल्स (AR)म्यांमार सीमा की रक्षा व पूर्वोत्तर में कार्य
केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF)आंतरिक सुरक्षा, उग्रवाद-रोधी, कानून-व्यवस्था
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)हवाई अड्डे, मेट्रो, बंदरगाह व औद्योगिक स्थल
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG)आतंक-रोधी प्रहार बल, 1984 में गठित
🧠 सीमाएँ एक क्रम में
पश्चिम से पूर्व: BSF (पाकिस्तान), ITBP (चीन), SSB (नेपाल, भूटान), असम राइफल्स (म्यांमार), फिर BSF (बांग्लादेश)। ITBP 1962 में और BSF 1965 में गठित हुए।

NIA, UAPA और आंतरिक सुरक्षा के खतरे

सार्वजनिक सामग्री में बताए मुख्य आंतरिक सुरक्षा खतरे हैं आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद, जो 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ), पूर्वोत्तर के कुछ भागों व जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद, तथा संगठित अपराध और साइबर अपराध। खुफ़िया ब्यूरो (IB) आंतरिक गुप्तचर-सूचना एकत्र करता है और गृह मंत्रालय के अधीन है; R&AW बाहरी गुप्तचरी देखती है और मंत्रिमंडल सचिवालय को रिपोर्ट करती है।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) केंद्रीय आतंकवाद-रोधी जाँच एजेंसी है, जो राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम, 2008 से बनी; संसद ने इसे नवंबर 2008 के मुंबई हमलों के बाद पारित किया। वह राज्यों की सीमाओं के पार अनुसूचित अपराधों की जाँच करता है और मुकदमे विशेष न्यायालयों में चलते हैं। 2019 के संशोधन ने इसकी सूची में मानव-तस्करी, जाली मुद्रा, प्रतिबंधित हथियार और साइबर-आतंकवाद जैसे अपराध जोड़े।

विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) मुख्य आतंक-विरोधी कानून है। यह केंद्र को किसी संघ को विधिविरुद्ध या आतंकवादी संगठन घोषित करने देता है, और 2019 के संशोधन के बाद व्यक्तियों को भी आतंकवादी नामित करने देता है, केवल संगठनों को नहीं।

⚠️ NIA, NSG, IB
NIA आतंकी मामलों की जाँच करता है (2008 का अधिनियम); NSG आतंकी घटनाओं पर प्रहार करता है (1984 में गठित); IB गुप्तचर-सूचना एकत्र करता है। तीनों केंद्र सरकार के अधीन हैं; कोई राज्य पुलिस की जगह नहीं लेता, जिसका विषय लोक व्यवस्था है।

मुख्य बिंदु

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 ने 1986 के अधिनियम का स्थान लिया; 20 जुलाई 2020 से लागू, CCPA 24 जुलाई 2020 से। छह अधिकार: सुरक्षा, सूचना, चयन, सुनवाई, निवारण, जागरूकता।
  • तीन स्तर: जिला, राज्य, राष्ट्रीय आयोग; 2021 के नियमों के अनुसार 50 लाख तक, 50 लाख से 2 करोड़, 2 करोड़ से अधिक। CCPA वर्ग-नियामक है: रिकॉल और भ्रामक विज्ञापन।
  • RTI अधिनियम 2005 (12 अक्तूबर 2005 से लागू): PIO 30 दिनों में (जीवन या स्वतंत्रता में 48 घंटे) उत्तर देता है; प्रथम अपील प्राधिकरण में, द्वितीय अपील सूचना आयोग को।
  • UDHR 10 दिसंबर 1948 को अपनाई गई (मानवाधिकार दिवस)। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 ने NHRC बनाया, जो सिफ़ारिश करता है, दंड नहीं देता।
  • पुलिस व लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं; गृह मंत्रालय के सात CAPF हैं BSF, ITBP, SSB, असम राइफल्स, CRPF, CISF और NSG।
  • NIA आतंकवाद की जाँच करता है (2008 का अधिनियम); UAPA 1967 आतंक-विरोधी कानून है, 2019 से व्यक्ति भी नामित हो सकते हैं।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 ने किस पूर्व कानून का स्थान लिया?

    1. आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955
    2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986
    3. माल विक्रय अधिनियम, 1930
    4. प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986

    2019 के अधिनियम ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को निरस्त कर उसका स्थान लिया। माल विक्रय अधिनियम 1930 बिक्री-संविदाओं को नियंत्रित करता है और अब भी लागू है, इसलिए वह आकर्षक पर गलत विकल्प है।
  2. निम्न में से कौन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 में गिनाए छह उपभोक्ता अधिकारों में नहीं है?

    1. उपभोक्ता जागरूकता का अधिकार
    2. वस्तुओं की गुणवत्ता, शुद्धता व मूल्य की जानकारी का अधिकार
    3. उचित मंचों पर सुने जाने और हितों पर विचार का अधिकार
    4. हर खरीद के सात दिन के भीतर धन-वापसी माँगने का अधिकार
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — हर खरीद के सात दिन के भीतर धन-वापसी माँगने का अधिकार

    छह अधिकार हैं सुरक्षा, सूचना, चयन, सुनवाई, निवारण और जागरूकता। हर खरीद पर सात दिन की धन-वापसी का अधिकार इनमें नहीं है, हालाँकि वह विक्रेता की अपनी नीति हो सकती है।
  3. उपभोक्ता संरक्षण नियम, 2021 (अधिसूचना 30 दिसंबर 2021) के अनुसार 1.5 करोड़ रुपये के प्रतिफल वाली सेवाओं की शिकायत किस मंच में जाती है?

    1. राज्य आयोग
    2. जिला आयोग
    3. राष्ट्रीय आयोग
    4. सीधे सर्वोच्च न्यायालय
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — राज्य आयोग

    1.5 करोड़ 50 लाख से ऊपर और 2 करोड़ से अधिक नहीं है, अतः क्षेत्राधिकार राज्य आयोग का है। नियमों में जिला आयोग की सीमा 50 लाख है, इसलिए वह बहुत कम है; राष्ट्रीय आयोग 2 करोड़ से ऊपर शुरू होता है, इसलिए वह बहुत अधिक है।
  4. 2021 के नियमों के अनुसार किसी खरीदार का 40 लाख में खरीदी वस्तुओं पर 60 लाख रुपये की हानि का दावा है। चूँकि क्षेत्राधिकार चुकाए गए प्रतिफल से तय होता है, शिकायत कहाँ दर्ज होगी?

    1. CCPA, क्योंकि खरीदार द्वारा हानि का दावा किया जा रहा है
    2. राज्य आयोग, क्योंकि दावा की गई हानि 50 लाख की सीमा से अधिक है
    3. जिला आयोग, क्योंकि चुकाया गया प्रतिफल 40 लाख है
    4. राष्ट्रीय आयोग, क्योंकि 60 लाख बहुत बड़ी धनराशि है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — जिला आयोग, क्योंकि चुकाया गया प्रतिफल 40 लाख है

    सीमा चुकाए गए वस्तु या सेवा के मूल्य पर आधारित है, जो 40 लाख है और जिला आयोग की 50 लाख सीमा के भीतर है। दावा की गई हानि मंच तय नहीं करती, और CCPA व्यक्तिगत शिकायतें नहीं सुनता।
  5. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) किस तिथि से प्रभावी हुआ?

    1. 15 मार्च 2021
    2. 24 जुलाई 2020
    3. 20 जुलाई 2020
    4. 24 दिसंबर 2019
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 24 जुलाई 2020

    CCPA के प्रावधान 24 जुलाई 2020 से प्रभावी हुए, यानी अधिनियम के 20 जुलाई 2020 को शुरू होने के चार दिन बाद। वह पहले वाली तिथि आकर्षक गलत उत्तर है।
  6. RTI अधिनियम 2005 के अंतर्गत लोक सूचना अधिकारी को सामान्यतः अनुरोध का उत्तर कितने दिनों में देना होता है?

    1. 90 दिन
    2. 15 दिन
    3. 45 दिन
    4. 30 दिन
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 30 दिन

    सामान्य उत्तर-अवधि 30 दिन है। 90 दिन का आँकड़ा द्वितीय अपील की अवधि का है, प्रथम उत्तर का नहीं।
  7. कथन। P: RTI अधिनियम में किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़े अनुरोध का उत्तर 48 घंटे में देना होता है। Q: प्रथम अपील केंद्रीय सूचना आयोग को होती है। R: अधिनियम के मुख्य प्रावधान 12 अक्तूबर 2005 को लागू हुए। कौन-से सही हैं?

    1. केवल Q और R
    2. P, Q और R
    3. केवल P और R
    4. केवल P और Q
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — केवल P और R

    P और R सही हैं। Q गलत है क्योंकि प्रथम अपील उसी लोक प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी को जाती है; सूचना आयोग द्वितीय अपील सुनता है।
  8. एक अनुरोध 5वें दिन अस्वीकृत होता है। आवेदक अस्वीकृति के 20वें दिन प्रथम अपील करता है और अपीलीय प्राधिकारी 50वें दिन उसे खारिज करता है। अधिनियम की अवधि के अनुसार प्रथम अपील के निर्णय से कितनी अवधि के भीतर द्वितीय अपील की जा सकती है?

    1. उस निर्णय के 90 दिन के भीतर
    2. पहले अनुरोध के 120 दिन के भीतर
    3. उस निर्णय के 30 दिन के भीतर
    4. उस निर्णय के 48 घंटे के भीतर
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — उस निर्णय के 90 दिन के भीतर

    सूचना आयोग को द्वितीय अपील प्रथम अपील के निर्णय के 90 दिन के भीतर होती है। 30 दिन की अवधि प्रथम अपील पर लागू है, और अन्य आँकड़ों का अधिनियम में आधार नहीं।
  9. मानवाधिकार दिवस प्रत्येक वर्ष किस तिथि को मनाया जाता है?

    1. 24 अक्तूबर
    2. 26 जनवरी
    3. 15 मार्च
    4. 10 दिसंबर
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 10 दिसंबर

    10 दिसंबर 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा को अपनाने की स्मृति है। 24 अक्तूबर संयुक्त राष्ट्र दिवस है, जो आम भ्रम है।
  10. किस कानून ने भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग स्थापित किया?

    1. संविधान (बयालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1976
    2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
    3. मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
    4. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993

    NHRC मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत वैधानिक निकाय है। यह संशोधन से बना संवैधानिक निकाय नहीं है, इसलिए 1976 के संशोधन वाला विकल्प गलत है।
  11. कथन। P: NHRC स्वतः संज्ञान लेकर मानवाधिकार-उल्लंघन की जाँच कर सकता है। Q: NHRC किसी दोषी लोक सेवक को सीधे कारावास की सज़ा दे सकता है। R: 2019 का संशोधन भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के साथ सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को भी अध्यक्ष बनने देता है। कौन-से सही हैं?

    1. केवल P और Q
    2. केवल P और R
    3. केवल Q और R
    4. P, Q और R
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — केवल P और R

    P और R सही हैं। Q गलत है क्योंकि NHRC केवल सिफ़ारिश करता है; सज़ा देना न्यायालयों का काम है। Q वाला हर विकल्प गलत है।
  12. पुलिस और लोक व्यवस्था संविधान की सातवीं अनुसूची की किस सूची के विषय हैं?

    1. राज्य सूची
    2. समवर्ती सूची
    3. अवशिष्ट सूची
    4. संघ सूची
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — राज्य सूची

    लोक व्यवस्था और पुलिस राज्य सूची में हैं। संघ सूची में केंद्र के अपने बल और रक्षा हैं, यह ओवरलैप उसे आकर्षक गलत उत्तर बनाता है।
  13. भारत-चीन सीमा की रक्षा का दायित्व किस केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल का है?

    1. सीमा सुरक्षा बल
    2. सशस्त्र सीमा बल
    3. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस
    4. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — भारत-तिब्बत सीमा पुलिस

    ITBP चीन सीमा की रक्षा करता है। सशस्त्र सीमा बल नेपाल व भूटान की और BSF पाकिस्तान व बांग्लादेश की सीमा की रक्षा करता है।
  14. मिलान कीजिए। P: CISF; Q: SSB; R: NSG; S: असम राइफल्स। इनसे:
    (i) नेपाल व भूटान सीमा;
    (ii) हवाई अड्डे व मेट्रो नेटवर्क;
    (iii) म्यांमार सीमा व पूर्वोत्तर;
    (iv) 1984 में गठित आतंक-रोधी प्रहार बल।

    1. P-i, Q-ii, R-iv और S-iii
    2. P-ii, Q-iii, R-iv और S-i
    3. P-iv, Q-i, R-ii और S-iii
    4. P-ii, Q-i, R-iv और S-iii
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — P-ii, Q-i, R-iv और S-iii

    CISF हवाई अड्डे व मेट्रो, SSB नेपाल-भूटान सीमा, NSG 1984 का आतंक-रोधी बल, और असम राइफल्स म्यांमार सीमा संभालते हैं। जो जोड़ा CISF को नेपाल-भूटान सीमा देता है वह CISF और SSB को आपस में बदल देता है।
  15. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण किस घटना के बाद पारित अधिनियम से बना?

    1. दिसंबर 2001 का संसद पर हमला
    2. नवंबर 2008 के मुंबई हमले
    3. 1993 के मुंबई श्रृंखलाबद्ध बम धमाके
    4. 2016 का उरी हमला
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — नवंबर 2008 के मुंबई हमले

    राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम, 2008 नवंबर 2008 के मुंबई हमलों के बाद आया। 2001 के संसद हमले के बाद उस समय का एक अन्य आतंक-विरोधी कानून आया, जो आकर्षक गलत चुनाव है।
  16. कौन-सा मुख्य केंद्रीय आतंक-विरोधी कानून है, जो 2019 के संशोधन के बाद केंद्र को व्यक्तियों को आतंकवादी नामित करने देता है?

    1. विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967
    2. मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 व उसका 2019 संशोधन
    3. सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
    4. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम, 2008, 2019 के संशोधन सहित
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967

    UAPA 1967 नामित करने वाला कानून है। NIA अधिनियम 2008 जाँच एजेंसी बनाता है और स्वयं आतंकवादी नामित नहीं करता, यद्यपि वह भी 2019 में संशोधित हुआ।
  17. संस्था और कार्य का कौन-सा जोड़ा सही है?

    1. NSG, गृह मंत्रालय हेतु आंतरिक गुप्तचर-सूचना एकत्र करना
    2. IB, पूरे भारत में आतंकी घटनाओं पर प्रहार बल
    3. NIA, अनुसूचित आतंकी अपराधों की जाँच
    4. R&AW, गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — NIA, अनुसूचित आतंकी अपराधों की जाँच

    NIA अपने 2008 के अधिनियम के अंतर्गत अनुसूचित अपराधों की जाँच करता है। NSG प्रहार बल और IB आंतरिक गुप्तचर निकाय है, इसलिए वे दोनों उलटे हैं; R&AW मंत्रिमंडल सचिवालय को रिपोर्ट करती है, गृह मंत्रालय को नहीं।