औद्योगीकरण, नगरीकरण और वैश्वीकरण
श्रम और जीवन-स्तर
कारखाने का काम लंबा, शोरभरा और जोखिम-भरा था। मज़दूरी कम थी, दिन में 12 से 16 घंटे आम थे, और स्त्रियों व बच्चों को सस्ते होने से रखा जाता था। मज़दूरों को यह भी डर था कि मशीनें रोज़गार छीन लेंगी; 1811-17 में लडाइट आंदोलनकारियों ने विरोध में मशीनें तोड़ीं। मज़दूरी व्यापार के साथ चढ़ती-उतरती थी, और मंदी में बेरोज़गारी आती थी।
सुधार क़ानून के रास्ते आया। 1833 के फ़ैक्टरी अधिनियम ने नौ वर्ष से कम के बच्चों को सूती मिलों में रखना वर्जित किया, बड़े बच्चों के घंटे सीमित किए, और कारखाना निरीक्षक नियुक्त किए। 1847 के फ़ैक्टरी अधिनियम, यानी दस घंटे अधिनियम, ने सूती मिलों में स्त्रियों व युवा श्रमिकों का कार्य-दिवस दस घंटे तक सीमित किया। मज़दूरों ने ट्रेड यूनियनें भी बनाईं और मताधिकार माँगा।
हल किया उदाहरण। यदि किसी मिल मज़दूर का दिन 15 घंटे से घटकर 10 घंटे हो, तो कटौती 15 में से 5 घंटे है, यानी 5/15 × 100 = 33.3 प्रतिशत, 50 प्रतिशत नहीं (वह 10 में से 5 होता)।
नगरीकरण और नगर-जीवन
कारखानों ने प्रवासियों को नगरों की ओर खींचा, अतः नगर अपनी सेवाओं से तेज़ बढ़े। मैनचेस्टर और लंदन जैसे औद्योगिक नगरों में भीड़-भरी बस्तियाँ, गंदा पानी और रोग, विशेषकर हैज़ा, थे। सुधार आए: 1848 का जन-स्वास्थ्य अधिनियम, सीवर, और 1863 में लंदन में विश्व की पहली भूमिगत रेलवे। सदी के अंत में एबेनेज़र हावर्ड ने 1898 में प्रकाशित पुस्तक में उद्यान-नगर (गार्डन सिटी) का प्रस्ताव रखा, जो घर, कार्य और हरित स्थान का नियोजित नगर था; लेचवर्थ (1903) इंग्लैंड में बना ऐसा पहला नगर था। नगरों ने नया मनोरंजन भी दिया: म्यूज़िक हॉल, फ़ुटबॉल और बाद में सिनेमा।
बंबई भारतीय उदाहरण है। वह कपास-निर्यात का मुख्य बंदरगाह, फिर सूती मिलों का केंद्र, प्रथम रेलों का पश्चिमी छोर, और चाल में रहने वाले प्रवासियों का नगर था। समुद्र से भूमि पाटी गई, और बंबई सुधार न्यास (1898) ने घनी बस्तियाँ हटाने का प्रयास किया। कलकत्ता जूट और व्यापार के आसपास बढ़ा, मद्रास और दिल्ली अधिक धीरे।
भारत में औद्योगीकरण
ब्रिटिश शासन में भारतीय हाथ-कतैयों व बुनकरों ने बाज़ार खोए: सस्ता मैनचेस्टर कपड़ा कम शुल्क पर भारत में आया और कच्ची कपास बाहर गई। आधुनिक उद्योग उन्नीसवीं सदी में आया। पहली रेलवे बंबई से ठाणे के बीच 16 अप्रैल 1853 को चली। बंबई की पहली सफल सूती मिल 1854 में एक भारतीय, कावसजी नानाभाई डावर, ने लगाई। कलकत्ता (हुगली तट) जूट में बढ़ा, अधिकतर ब्रिटिश पूँजी से। असम में प्रवासी श्रमिकों से चलने वाले चाय बागान थे। टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना 1907 में दोराबजी टाटा के नेतृत्व में टाटा परिवार की फ़र्म ने की, जो जमशेदजी टाटा (मृत्यु 1904) की योजना को पूरा करती थी; इसका नगर जमशेदपुर है।
1881 का भारतीय फ़ैक्टरी अधिनियम कारखाने के कार्य पर पहला क़ानून था, मुख्यतः बाल श्रम और सुरक्षा के लिए। प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) ने जूट, कपड़ा व इस्पात जैसे भारतीय माल की माँग बढ़ाई और उद्योग को बल दिया, तथा स्वदेशी आंदोलन (1905 से) ने भारतीय स्वामित्व वाली मिलों को प्रोत्साहित किया।
| केंद्र | उद्योग |
|---|---|
| बंबई | सूती वस्त्र |
| कलकत्ता (हुगली) | जूट |
| जमशेदपुर | लोहा व इस्पात |
| असम | चाय बागान |
वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण
महाद्वीपों के बीच व्यापार पुराना है (रेशम मार्ग), पर उन्नीसवीं सदी ने विश्व-बाज़ार बनाया। भोजन और श्रम चले: ब्रिटेन ने 1846 में अनाज क़ानून (कॉर्न लॉज़) हटाए, तो अमेरिका आदि से सस्ता अनाज आया और भूस्वामी घाटे में रहे; आयरलैंड के आलू अकाल (1845 से) ने प्रवास बढ़ाया; और भारतीय व चीनी गिरमिटिया मज़दूर विदेशी बागानों में गए। प्रौद्योगिकी (रेल, भाप-जहाज़, तार) ने लागत घटाई। उपनिवेश कच्चा माल देते और निर्मित माल ख़रीदते थे।
प्रथम विश्व युद्ध ने व्यापार-संबंध तोड़े, और महामंदी 1929 में अमेरिका में वॉल स्ट्रीट के धराशायी होने से शुरू हुई। सभी जगह कीमतें व आय गिरीं। भारत में कृषि-उपज की कीमतें टूट गईं जबकि किसानों पर लगान व ऋण ज्यों के त्यों रहे, इसलिए ग्रामीण संकट गहरा हुआ और निर्यात घटा।
युद्धोत्तर व्यवस्था: IMF, विश्व बैंक, GATT और WTO
दूसरी महामंदी रोकने के लिए मित्र राष्ट्र जुलाई 1944 में ब्रेटन वुड्स (अमेरिका) में मिले। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को विनिमय दरें स्थिर रखनी थीं और भुगतान-संकट वाले देशों की सहायता करनी थी; विश्व बैंक (तब पुनर्निर्माण व विकास का अंतरराष्ट्रीय बैंक) को पुनर्निर्माण व विकास का वित्त देना था। ये ब्रेटन वुड्स के जुड़वाँ हैं। GATT (शुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता, 1947) ने वार्ता-चक्रों से शुल्क घटाए; उरुग्वे चक्र के बाद उसका उत्तराधिकारी विश्व व्यापार संगठन (WTO) 1 जनवरी 1995 को बना, जिसका मुख्यालय जिनेवा है। भारत GATT और WTO दोनों का संस्थापक सदस्य है।
1945 के बाद उपनिवेशमुक्त देश तीसरी दुनिया कहलाए, और धनी देश व बड़ी कंपनियाँ (बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ) व्यापार व निवेश की अगुआ रहीं। अनेक देश बीसवीं सदी के अंत तक संरक्षित रहे, जब और देशों ने अपने बाज़ार खोले।
1991: भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ता है
1991 की शृंखला कारण-परिणाम का पाठ है। कारण: भुगतान-संतुलन संकट। भारी राजकोषीय घाटे, खाड़ी युद्ध से तेल की कीमतों के झटके और विश्वास की हानि से विदेशी मुद्रा-भंडार केवल कुछ सप्ताह के आयात के लिए बचा, और भारत ने डॉलर जुटाने के लिए विदेश में सोना गिरवी रखा। प्रतिक्रिया: रुपये का 1 व 3 जुलाई 1991 को दो चरणों में अवमूल्यन हुआ, और 24 जुलाई 1991 की नई औद्योगिक नीति ने अधिकांश उद्योगों में औद्योगिक लाइसेंसिंग समाप्त की और विदेशी निवेश का द्वार खोला। पी. वी. नरसिंह राव की सरकार ने, मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाकर, यह परिवर्तन किया। इसके तीन सूत्र LPG हैं: उदारीकरण (कम लाइसेंस व नियंत्रण), निजीकरण (सार्वजनिक क्षेत्र की छोटी भूमिका, विनिवेश) और वैश्वीकरण (व्यापार व निवेश से विश्व से जुड़ाव)।
हल किया उदाहरण (उदाहरणार्थ)। मान लें दर 20 रुपये से 24 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर हो जाती है, यानी रुपये का अवमूल्यन। 2,400 रुपये मूल्य का निर्यात विदेशी ख़रीदार को पहले 2,400/20 = 120 डॉलर और बाद में 2,400/24 = 100 डॉलर पड़ता है, अतः निर्यात सस्ते हो जाते हैं; 100 डॉलर का आयात पहले 2,000 रुपये और बाद में 2,400 रुपये का पड़ता है, अतः आयात महँगे हो जाते हैं।
बाद के क़दम: भारत 1 जनवरी 1995 को WTO का संस्थापक सदस्य बना, और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 ने अधिक कठोर FERA, 1973 का स्थान लिया। संरचना स्थिर है; 1991 के बाद का कोई भी व्यापार, वृद्धि या भंडार का आँकड़ा हर वर्ष बदलता है, अतः उसे वर्ष के साथ ही सीखें।
मुख्य बिंदु
- ब्रिटेन 1760 के दशक से अग्रणी रहा: कोयला, लोहा, पूँजी, बाड़ाबंदी और आविष्कार (हारग्रीव्ज़, आर्कराइट, वाट, कार्टराइट); सूती वस्त्र और रेलवे ने वृद्धि चलाई।
- कारखानों ने लंबे घंटे और बाल श्रम दिए; 1833 के फ़ैक्टरी अधिनियम व 1847 के दस घंटे अधिनियम ने नियमन शुरू किया, मज़दूरों के विरोध व जनमत की सहायता से।
- नगर सेवाओं से तेज़ बढ़े: हैज़ा, भीड़, फिर सीवर, भूमिगत रेल (1863), उद्यान-नगर (हावर्ड, 1898); बंबई मिलों व चालों वाला भारतीय स्वरूप दिखाता है।
- भारतीय कालक्रम: रेलवे 1853, बंबई सूती मिल 1854, फ़ैक्टरी अधिनियम 1881, स्वदेशी 1905, टाटा स्टील 1907; केंद्र बंबई सूती, कलकत्ता जूट, जमशेदपुर इस्पात।
- विश्व अर्थव्यवस्था: अनाज क़ानून 1846 में हटे, महामंदी 1929 से, ब्रेटन वुड्स जुलाई 1944 (IMF व विश्व बैंक), GATT 1947, WTO 1 जनवरी 1995।
- 1991 की शृंखला: भुगतान संकट, अवमूल्यन (1 व 3 जुलाई), नई औद्योगिक नीति (24 जुलाई), फिर LPG; बाद के आँकड़े बदलते हैं, अतः उन्हें तिथि दें।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
आविष्कार का उसके आविष्कारक से मिलान कीजिए। P. स्पिनिंग जेनी; Q. वाटर फ़्रेम; R. पावर लूम; S. उन्नत भाप इंजन (1769 पेटेंट)। आविष्कारक:
1. जेम्स वाट;
2. एडमंड कार्टराइट;
3. रिचर्ड आर्कराइट;
4. जेम्स हारग्रीव्ज़।उत्तर देखें
उत्तर: A — P-4, Q-3, R-2, S-1
हारग्रीव्ज़ ने जेनी, आर्कराइट ने वाटर फ़्रेम, कार्टराइट ने पावर लूम बनाया और वाट ने भाप इंजन सुधारा। सबसे आम अदला-बदली जेनी और वाटर फ़्रेम में हारग्रीव्ज़ व आर्कराइट की होती है, और वाट व कार्टराइट भी बदले जाते हैं।ब्रिटेन में आरंभिक औद्योगिक क्रांति का अग्रणी क्षेत्र कौन-सा उद्योग था?
उत्तर देखें
उत्तर: A — सूती वस्त्र
जेनी, वाटर फ़्रेम और पावर लूम वाली कपास की कताई-बुनाई ने वृद्धि का नेतृत्व किया, और रेलवे व लोहा पीछे आए। मोटर कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और तेल शोधन बीसवीं सदी के उद्योग हैं और आरंभिक अग्रणी नहीं हो सकते।ब्रिटेन में साझा भूमि की बाड़ाबंदी ने कारखानों की वृद्धि में कैसे सहायता की?
उत्तर देखें
उत्तर: A — उन्होंने छोटे किसानों को ज़मीन से हटाकर नगरों में धकेला, जहाँ वे मज़दूरी करने लगे
बाड़ाबंदी ने साझा भूमि को घेरकर बड़े खेत बनाए, जिससे अनेक छोटे किसान भूमिहीन हुए, वे नगरों में गए और कारखानों को श्रम दिया। हर किसान की आय बढ़ने का दावा ग़लत है क्योंकि बाड़ाबंदी ने हर किसान की आय नहीं बढ़ाई, बड़े-छोटे किसान का अंतर बढ़ाया।ब्रिटेन के 1833 के फ़ैक्टरी अधिनियम का कौन-सा प्रावधान था?
उत्तर देखें
उत्तर: A — नौ वर्ष से कम के बच्चों का सूती मिलों में काम वर्जित हुआ
1833 के अधिनियम ने नौ वर्ष से कम के बच्चों को सूती मिलों से रोका, बड़े बच्चों के घंटे सीमित किए और निरीक्षक नियुक्त किए। दस घंटे का दिन 1847 का अधिनियम है, जो सूती मिलों की स्त्रियों व युवा श्रमिकों पर लागू था, इसलिए वही भ्रामक ग़लत विकल्प है।औद्योगिक ब्रिटेन में श्रम पर इन कथनों पर विचार कीजिए। P. लडाइट आंदोलनकारियों ने 1811-17 में विरोध में मशीनें तोड़ीं। Q. 1847 के फ़ैक्टरी अधिनियम ने सूती मिलों में स्त्रियों व युवा श्रमिकों का दिन दस घंटे तक सीमित किया। R. 1833 के फ़ैक्टरी अधिनियम ने कारखाना निरीक्षक नियुक्त किए। S. 1833 के अधिनियम ने वयस्क पुरुषों के समस्त रात्रि-कार्य पर रोक लगाई। कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: D — P, Q और R केवल
P, Q और R सही हैं। S ग़लत है क्योंकि 1833 का अधिनियम बच्चों व युवाओं के रात्रि-कार्य पर रोक लगाता था, वयस्क पुरुषों पर नहीं। केवल Q और R वाला विकल्प अधूरा है, क्योंकि 1811-17 के लडाइट विद्रोह भी सत्य हैं।आरंभिक औद्योगिक यूरोप की पुटिंग-आउट प्रणाली में, घर पर कातने-बुनने वाले किसान परिवारों को कच्चा माल कौन देता था?
उत्तर देखें
उत्तर: A — नगर के व्यापारी
नगर के व्यापारी गाँव के परिवारों को ऊन या कपास देते और कपड़ा ले जाते थे। गिल्ड भ्रामक उत्तर हैं क्योंकि वे नगर के शिल्प नियंत्रित करते थे, पर व्यापारी गिल्ड की पाबंदियों से बचने के लिए ही देहात की ओर मुड़े।सही क्रम में लगाइए, सबसे पहले वाली पहले:
P. टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना;
Q. बंबई से ठाणे की पहली रेलवे;
R. बंबई की पहली सफल सूती मिल;
S. भारतीय फ़ैक्टरी अधिनियम।उत्तर देखें
उत्तर: B — Q, R, S, P
रेलवे 1853 में, सूती मिल 1854 में, फ़ैक्टरी अधिनियम 1881 में और टाटा स्टील 1907 में आई। R, Q क्रम भ्रामक है क्योंकि मिलें पुराना उद्योग लगती हैं, पर रेलवे (1853) मिल (1854) से एक वर्ष पहले आई।केंद्र का उसके उद्योग से मिलान कीजिए। P. बंबई; Q. कलकत्ता (हुगली); R. जमशेदपुर; S. असम। उद्योग:
1. चाय बागान;
2. सूती वस्त्र;
3. जूट;
4. लोहा व इस्पात।उत्तर देखें
उत्तर: C — P-2, Q-3, R-4, S-1
बंबई सूती वस्त्रों का नगर था, कलकत्ता का हुगली तट जूट पट्टी था, जमशेदपुर टाटा का इस्पात नगर है और असम चाय उगाता था। सबसे आम भूल बंबई व कलकत्ता में सूती और जूट की अदला-बदली है।1898 में प्रकाशित पुस्तक में उद्यान-नगर, यानी घर, कार्य और हरित स्थान वाले नियोजित नगर, का विचार किसने रखा?
उत्तर देखें
उत्तर: B — एबेनेज़र हावर्ड
एबेनेज़र हावर्ड ने उद्यान-नगर का विचार रखा, और लेचवर्थ (1903) इंग्लैंड में बना ऐसा पहला नगर था। डिकेन्स ने उपन्यासों में औद्योगिक दुर्दशा बताई, और बेज़ालजेट लंदन के सीवरों के लिए जाने जाते हैं, अतः किसी ने नियोजित नगर का प्रस्ताव नहीं रखा।1863 में विश्व की पहली भूमिगत यात्री रेलवे किस नगर में खुली?
उत्तर देखें
उत्तर: D — लंदन
पहली भूमिगत यात्री रेलवे 1863 में लंदन में खुली, ताकि सड़कों की भीड़ घटे। मैनचेस्टर बड़ा औद्योगिक नगर होने से भ्रामक है, पर पहली भूमिगत रेलवे वहाँ नहीं बनी।1846 में ब्रिटेन द्वारा अनाज क़ानून (कॉर्न लॉज़) हटाने का क्या प्रभाव हुआ?
उत्तर देखें
उत्तर: A — सस्ते अनाज का बड़ी मात्रा में आयात हुआ और ब्रिटिश भूस्वामियों को हानि हुई
अनाज क़ानूनों ने अनाज के आयात पर रोक लगा रखी थी; 1846 में उन्हें हटाने से अमेरिका आदि का सस्ता अनाज आया, जिससे खाद्य कीमतें घटीं और भूस्वामियों को हानि हुई। कीमतें बढ़ने का दावा वास्तविकता का उलटा है।1929 में शुरू हुई महामंदी ने भारतीय किसानों को विशेष रूप से बुरी तरह क्यों आहत किया?
उत्तर देखें
उत्तर: A — कृषि-उपज की कीमतें तेज़ी से गिरीं, पर उन्हें चुकाना पड़ने वाला लगान व ऋण मुद्रा में ज्यों का त्यों रहा
कृषि कीमतें गिरने से किसान को उसी मुद्रा-भुगतान (लगान व ऋण) के लिए अधिक उपज बेचनी पड़ी, इसलिए संकट बढ़ा। कृषि कीमतें बढ़ने का दावा वास्तविकता का उलटा है, और लगान समाप्त नहीं हुआ था।जुलाई 1944 के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन से कौन-सी दो संस्थाएँ उभरीं?
उत्तर देखें
उत्तर: A — IMF और विश्व बैंक
ब्रेटन वुड्स ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक बनाए। WTO भ्रामक है पर वह 1 जनवरी 1995 का है और GATT का स्थान लेता है, जो 1947 में तय हुआ था और ब्रेटन वुड्स की संस्थाओं में नहीं है।1995, जब विश्व व्यापार संगठन ने GATT का स्थान लिया, वर्ष 1947 (जब GATT तय हुआ) से कितने वर्ष बाद है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — 48 वर्ष
1995 में से 1947 घटाने पर 48 वर्ष मिलते हैं, जो 1947 के GATT से WTO तक का समय है। 50 वर्ष वह गोल संख्या है जो बहुतों को याद रहती है, पर प्रश्न वर्षों का ठीक अंतर पूछता है।1990-95 की भारतीय सुधार-कथा की घटनाओं की सही क्रमसूची कौन-सी है, सबसे पहले वाली पहले?
P. खाड़ी युद्ध से तेल-कीमतों का झटका भुगतान-संतुलन पर दबाव डालता है;
Q. जुलाई 1991 में रुपये का दो चरणों में अवमूल्यन;
R. 24 जुलाई 1991 की नई औद्योगिक नीति अधिकांश लाइसेंसिंग समाप्त करती है;
S. भारत WTO का संस्थापक सदस्य बनता है।उत्तर देखें
उत्तर: D — P, Q, R, S
पहले तेल-झटका और भुगतान पर दबाव आया, फिर 1 व 3 जुलाई का अवमूल्यन हुआ, उसके बाद 24 जुलाई की नई औद्योगिक नीति आई, और जनवरी 1995 में WTO सदस्यता मिली। R को Q से पहले रखने वाला क्रम भ्रामक है क्योंकि नीति अधिक याद रहती है, पर अवमूल्यन जुलाई के आरंभ में हुआ।मान लें विनिमय दर 20 रुपये से 24 रुपये प्रति डॉलर हो जाती है। भारत में 2,400 रुपये मूल्य का एक भारतीय उत्पाद विदेश में अपने रुपया-मूल्य को डॉलर में बदलकर बेचा जाता है। बदलाव के बाद उसकी डॉलर-कीमत क्या है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — $ 100
बदलाव के बाद कीमत 2,400 को 24 से भाग देने पर 100 डॉलर है। 120 डॉलर बदलाव से पहले की कीमत (2,400/20) है, और जो नई दर भूल जाते हैं उनके लिए वही भ्रामक उत्तर है।कानून द्वारा किसी मिल मज़दूर का दिन 15 घंटे से घटाकर 10 घंटे कर दिया जाता है। मूल दिन के कितने प्रतिशत के बराबर घंटे घटाए गए?
उत्तर देखें
उत्तर: C — 33.3 %
कटौती मूल 15 घंटों में से 5 घंटे है, अतः 5/15 × 100 = 33.3 प्रतिशत। 50 प्रतिशत का आँकड़ा मूल दिन के बजाय नए 10 घंटे के दिन से भाग देने पर आता है।LPG के घटक का कार्य से मिलान कीजिए। P. उदारीकरण; Q. निजीकरण; R. वैश्वीकरण। कार्य:
1. विनिवेश और सार्वजनिक क्षेत्र की छोटी भूमिका;
2. व्यापार व निवेश से विश्व के साथ एकीकरण;
3. उद्योग पर कम लाइसेंस व नियंत्रण।उत्तर देखें
उत्तर: A — P-3, Q-1, R-2
उदारीकरण ने लाइसेंस व नियंत्रण हटाए, निजीकरण ने विनिवेश से सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका घटाई, और वैश्वीकरण ने भारत को विश्व व्यापार व निवेश से जोड़ा। निजीकरण और उदारीकरण वह जोड़ी है जिसकी प्रायः अदला-बदली होती है।