झारखंड की जनजातियाँ, समाज और पर्व
2. जनजातियाँ, जिले और विशिष्ट तथ्य
| जनजाति (जनसंख्या) | मुख्य जिले (जनजाति का अंश) | विशिष्ट तथ्य |
|---|---|---|
| संथाल (27.55 लाख) | दुमका 17%, पूर्वी सिंहभूम 12%, पाकुड़ 12% | संथाली, ओल चिकी लिपि; मरांग बुरू; सोहराय व बाहा; 1855 का संथाल हूल |
| उरांव (17.17 लाख) | रांची 31%, गुमला 26%, लोहरदगा 12% | कुड़ुख (द्रविड़); धर्मेश; धुमकुड़िया युवागृह; पड़हा परिषद; 1914 से ताना भगत आंदोलन |
| मुंडा (12.29 लाख) | खूँटी 27%, रांची 24%, सिमडेगा 12% | मुंडारी; सिंगबोंगा; कोल्हान की मुंडा-मानकी व्यवस्था; बिरसा मुंडा (1875–1900) |
| हो (9.28 लाख) | पश्चिमी सिंहभूम 83%, सरायकेला-खरसावाँ 10% | हो भाषा, वारंग चिति लिपि (लको बोदरा); सिंगबोंगा के लिए मागे पर्व |
| खरवार (2.49 लाख) | गढ़वा 37%, लातेहार 29%, पलामू 19% | पलामू पट्टी में केंद्रित; 2022 की प्रविष्टि 16 में पहला नाम |
| भूमिज (2.09 लाख) | पूर्वी सिंहभूम 60%, सरायकेला-खरसावाँ 32% | स्थायी कृषक; उनके लिए सरहुल “हादी बोंगा” है |
| खड़िया (1.96 लाख) | सिमडेगा 55%, गुमला 33% | जनगणना-पंक्ति में ढेलकी, दूध व पहाड़ी खड़िया भी; खड़िया मुंडा-शाखा की भाषा |
| चेरो (95,575) | पलामू 65%, लातेहार 24% | पलामू पर शासन; पलामू के किले मेदिनी राय (1658–74) से जुड़े |
| कोल (53,584) | देवघर 33%, गिरिडीह 23%, दुमका 11% | 2003 में ST सूची में जुड़ी (प्रविष्टि 32) |
3. आजीविका के प्रकार और ग्राम-संस्थाएँ
मानवशास्त्री एल. पी. विद्यार्थी का वर्गीकरण, जिसका उल्लेख राज्य सरकार के पोर्टल पर है, जनजातियों को आजीविका से बाँटता है। आखेटक-संग्राहक में बिरहोर, कोरवा और पहाड़ी खड़िया; झूम कृषक में सौरिया पहाड़िया; सरल शिल्पी में महली, लोहरा, करमाली व चिक बड़ाइक; तथा स्थायी कृषक में संथाल, मुंडा, उरांव, हो व भूमिज हैं। भाषाएँ तीन परिवारों की हैं: ऑस्ट्रो-एशियाई (संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया), द्रविड़ (कुड़ुख) और इंडो-आर्य (सदान भाषाएँ)।
उरांवों में पड़हा गाँव-समूह की परिषद है और धुमकुड़िया युवागृह। मुंडाओं में गाँव का प्रधान मुंडा, पुजारी पाहन, और 15 से 20 गाँवों का प्रधान मानकी होता है। संथालों में गाँव-परिषद का प्रधान माँझी है, और विवाह की बातचीत जोग माँझी सँभालता है।
4. विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG)
PVTG अनुसूचित जनजातियों के भीतर सबसे पिछड़े समूह हैं: पूर्व-कृषि तकनीक, स्थिर या घटती जनसंख्या, बहुत कम साक्षरता और निर्वाह अर्थव्यवस्था। जनजातीय कार्य मंत्रालय की राज्यवार सूची (लोकसभा अतारांकित प्रश्न 2283, 2 दिसंबर 2019) में “बिहार (झारखंड सहित)” के लिए नौ PVTG हैं, जिनमें से जनगणना 2011 की जनजाति-सारणी आठ अलग गिनती है। इन आठ की कुल जनसंख्या 2,92,359 (गणना से) है, जो राज्य की ST का लगभग 3.38% है।
- असुर (22,459): परंपरागत लौह-गलाने वाले; गुमला, लोहरदगा, लातेहार।
- बिरहोर (10,726): “जंगल के लोग”; घुमंतू उथलू व बसे जंघी; चतरा, हजारीबाग।
- बिरजिया (6,276): असुर-परिवार का एक वर्ग, पृथक ST के रूप में अधिसूचित; लातेहार।
- कोरवा (35,606): आखेटक-संग्राहक; गढ़वा, पलामू।
- माल पहाड़िया (1,35,797): आठों में सबसे बड़ा; दुमका, पाकुड़, साहिबगंज।
- परहिया (25,585): आठों में सबसे कम साक्षरता (लगभग 33%, गणना से); पलामू, लातेहार, गढ़वा।
- सौरिया पहाड़िया (46,222): झूम कृषक; साहिबगंज, गोड्डा, पाकुड़।
- सावर (9,688): 84% पूर्वी सिंहभूम में।
- पहाड़ी खड़िया: जनगणना में खड़िया की पंक्ति के भीतर गिनी गई, इसी से आठ की पुरानी गिनती है।
5. सदान समुदाय और सरना धर्म
सदान छोटानागपुर पठार के इंडो-आर्य भाषी, गैर-जनजातीय समुदाय हैं; नागपुरी में इस शब्द का अर्थ “बसे हुए लोग” है। इनकी भाषाएँ नागपुरी, खोरठा, कुरमाली और पंचपरगनिया हैं; झूमर, करम और जितिया इनके सांस्कृतिक चिह्न हैं। सरना धर्म साल-वन (सरना स्थल) केंद्रित प्रकृति-पूजा है, जिसका पुजारी गाँव का पाहन है। उच्च देवता जनजाति के अनुसार भिन्न हैं: मरांग बुरू (संथाल), धर्मेश (उरांव) और सिंगबोंगा (मुंडा व हो)।
जनगणना 2011 में हिंदू 67.83%, मुस्लिम 14.53%, ईसाई 4.30% थे, और “अन्य धर्म व मत”, जिनमें अधिकांश सरना हैं, 12.84% (लगभग 42.36 लाख लोग)।
6. पर्व और नृत्य का पंचांग
| मास | पर्व (समुदाय) | नृत्य या गीत | प्रमुख विशेषता |
|---|---|---|---|
| चैत्र (मार्च–अप्रैल) | सरहुल (उरांव, मुंडा, हो, संथाल, भूमिज) | खद्दी (सरहुल नृत्य का उरांव नाम) | साल-पुष्प की पूजा; नववर्ष; हल नहीं; पाहन जल-घड़े से अगले वर्ष की वर्षा बताता है |
| चैत्र (चैत्र पर्व) | छऊ (सरायकेला शैली) | छऊ नृत्य, पुरुष नर्तक; यूनेस्को 2010 | मुखौटा नृत्य; सरायकेला व पुरुलिया शैलियों में मुखौटे |
| वसंत–ग्रीष्म | भगता पर्व (जनजातीय लोग, तमाड़ क्षेत्र) | शाम को छऊ | भक्त खंभे पर कुंडों से झूलते हैं; बुढ़ा बाबा की पूजा |
| भाद्रपद (अगस्त–सितंबर) | करमा (मुंडा, उरांव, भूमिज, हो, खड़िया, सदान) | करमा नृत्य; महिलाएँ सिरिंग गाती हैं | नाच-स्थल पर करम की डाल; शक्ति व यौवन के देवता; जावा अंकुर |
| आश्विन (सितंबर–अक्टूबर) | जितिया (माताएँ) | कोई नहीं; उपवास व गीत | कृष्ण पक्ष के 7 से 9 दिन संतान के लिए उपवास |
| कार्तिक (अक्टूबर–नवंबर) | सोहराय (संथाल व कृषक) | सोहराय भित्ति-चित्र व धुनें | छोटानागपुर के अधिकांश भाग में कार्तिक अमावस्या (दीपावली) के आसपास का पशु-पर्व; संथाल परगना के संथाल इसे जनवरी में मनाते हैं; पशु धोए व मालाएँ पहनाई जाती हैं |
| पौष (दिसंबर–जनवरी) | टुसू (कुँवारी कन्याएँ) | टुसू गीत | पौष का अंतिम दिन; रंगीन कागज़ का ढाँचा पहाड़ी नदी को |
| माघ (जनवरी–फरवरी) | मागे पर्व (हो) | कोई नहीं | सिंगबोंगा का सम्मान; कृषि-चक्र का अंत |
| फाल्गुन (फरवरी–मार्च) | फगुआ (होली) | फगुआ गीत व नृत्य; मांदर, ढोल, बाँसुरी | छतों पर साल के फूल |
| कोई भी मौसम | झूमर, डोमकच, पाइका (सदान, नागपुरी) | झूमर: फसल व पर्व; डोमकच: विवाह; पाइका: युद्ध-नृत्य, तलवार व ढाल | पाइका में नगाड़ा, ढाक व शहनाई |
7. क्षेत्रीय भाषाओं के लेखक और उनकी कृतियाँ
प्रश्नपत्र II के राजपत्र-पाठ्यक्रम में हर झारखंडी भाषा के लेखकों की सूची है। नीचे की तालिका में वही लेखक हैं जिनकी कृतियाँ यहाँ सत्यापित हैं; जिन नामों की कृति सत्यापित नहीं, उन्हें केवल नाम के रूप में याद करें।
| भाषा | लेखक (तिथियाँ) | प्रमुख कृति या भूमिका |
|---|---|---|
| संथाली | माँझी रामदास टुडू “रेसका” (लगभग 1854–1951) | खेरवाल बोंगसो धरम पुथी (1894), संथाल अनुष्ठानों पर |
| संथाली | पंडित रघुनाथ मुर्मू (1905–1982) | ओल चिकी लिपि के रचयिता; हरह सेरेंग (1936), इसमें पहली पुस्तक; नाटक बिदु-चंदन (1942) |
| संथाली | साधु रामचंद्र मुर्मू (1897–1954) | मुज-डांधे लिपि (1920 के दशक का आरंभ); जन्म झारग्राम, पश्चिम बंगाल में, झारखंड में नहीं |
| मुंडारी | डॉ. रामदयाल मुंडा (1939–2011) | मुंडारी व्याकरण (1979); आदि धर्म (अंग्रेज़ी, 2000) |
| हो | लको बोदरा (1919–1986) | वारंग चिति लिपि के रचयिता, रेलवे लिपिक रहते हुए |
| खड़िया | प्यारा केरकेट्टा | “बर्था का विवाह”, खड़िया में लिखी कहानी; हिंदी अनुवाद रोज़ केरकेट्टा |
| खड़िया | रोज़ केरकेट्टा (1940–2025) | खड़िया लोककथा अध्ययन; सिंकोए सुलोलो (खड़िया कहानियाँ); प्रेमचंद कहानी का खड़िया रूप |
| कुड़ुख | फ्रांसिस्का कुजूर (जन्म 1959) | कुड़ुख कहानियाँ उधिया रा पिंजरा ता मैना; कुड़ुख व हिंदी में लेखन |
| नागपुरी | रघुनाथ शाह (नागवंशी राजा) | ज्ञात प्रथम नागपुरी कवि; कृष्ण-भक्ति काव्य |
| नागपुरी | गिरधारी राम गोंझू | महाबली राधे कर बलिदान; अखरा निंदाये गेलक |
| नागपुरी | प्रफुल्ल कुमार राय | सोन झइर (कहानी-संग्रह) |
8. विरासत और दर्शनीय स्थल
पाठ्यक्रम प्राकृतिक, पुरातात्त्विक, ऐतिहासिक, धार्मिक और आधुनिक स्थलों को माँगता है। नीचे वे स्थल हैं जो सबसे अधिक उल्लिखित होते हैं। हर स्थल उसके जिले और उसकी पहचान के एक तथ्य के साथ पढ़ाया गया है।
| स्थल (जिला) | प्रकार | पहचान का तथ्य |
|---|---|---|
| पारसनाथ (गिरिडीह) | धार्मिक, प्राकृतिक | 1,365 मी., राज्य का सर्वोच्च शिखर; जैन सम्मेद शिखर; संथाल इसे मरांग बुरू कहते हैं |
| मलूटी (दुमका) | पुरातात्त्विक, धार्मिक | मूल 108 में से 72 शेष टेराकोटा मंदिर; बंगाल शैली |
| नवरतनगढ़ (गुमला) | ऐतिहासिक | नागवंशी राजधानी; किला 1636–39 में दुर्जन शाह द्वारा |
| इटखोरी (चतरा) | बौद्ध व हिंदू | बौद्ध अवशेष; भद्रकाली मंदिर, जहाँ तारा भी |
| रजरप्पा (रामगढ़) | धार्मिक | छिन्नमस्ता मंदिर; दामोदर–भैरवी (भेरा) संगम पर |
| बैद्यनाथ (देवघर) | धार्मिक | बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक; 22 मंदिरों का परिसर |
| हुंडरू जलप्रपात (रांची) | प्राकृतिक | सुवर्णरेखा पर, लगभग 98 मी. ऊँचा |
| नेतरहाट (लातेहार) | पहाड़ी स्थल | “छोटानागपुर की रानी”, रांची से 145 किमी |
| जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) | आधुनिक, औद्योगिक | टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी 1907; 1919 में संस्थापक के नाम पर |
मुख्य बिंदु
- जनगणना 2011: 32 जनजातियों में 86,45,042 ST (26.21%)। 2022 के अधिनियम के बाद आदेश में 33 प्रविष्टियाँ हैं (पुरान जुड़ी); कवर और कोल 2003 में आए।
- संथाल, उरांव, मुंडा और हो लगभग 77% ST हैं; हर एक को जिले से जोड़ें: हो पश्चिमी सिंहभूम में, मुंडा खूँटी व रांची में, उरांव रांची व गुमला में, संथाल संथाल परगना में।
- मंत्रालय की 2019 की सूची में बिहार सहित झारखंड के नौ PVTG हैं; जनगणना 2011 आठ अलग गिनती है, क्योंकि पहाड़ी खड़िया खड़िया की पंक्ति में हैं।
- देवता व भाषाएँ: मरांग बुरू (संथाल), धर्मेश (उरांव), सिंगबोंगा (मुंडा, हो)। उरांव द्रविड़ कुड़ुख बोलते हैं; संथाल, मुंडा, हो व खड़िया ऑस्ट्रो-एशियाई भाषाएँ बोलते हैं।
- सरहुल (चैत्र) से पर्व-वर्ष आरंभ होता है; फिर करमा (भाद्रपद), जितिया (आश्विन), सोहराय (कार्तिक), टुसू (पौष) और मागे (माघ)। जानी शिकार लगभग बारह वर्ष में एक बार आता है।
- ओल चिकी संथाली की है (रघुनाथ मुर्मू); वारंग चिति हो की है (लको बोदरा); मुज-डांधे संथाली की है (साधु रामचंद्र मुर्मू)। हर लिपि को उसकी भाषा और रचयिता के साथ याद करें।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
जनगणना 2011 के अनुसार झारखंड में अनुसूचित जनजाति के कितने लोग थे और राज्य की जनसंख्या में उनका हिस्सा कितना था?
उत्तर देखें
उत्तर: A — लगभग 86.45 लाख, लगभग 26.21 प्रतिशत
जनगणना 2011 में 86,45,042 ST गिने गए, जो 3,29,88,134 का 26.21% है। 70.87 लाख और 26.3 प्रतिशत का युग्म 2001 की गणना का है, जिसे प्रत्याशी प्रायः मिला देते हैं। अन्य दोनों युग्म किसी जनगणना से नहीं मिलते।संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 के संशोधित रूप के अंतर्गत झारखंड की अनुसूचित जनजातियों के बारे में ये कथन देखें। P. जनगणना 2011 की जनजाति-सारणी में 32 जनजातियाँ दर्ज हैं। Q. 2022 के अधिनियम द्वारा पुरान को प्रविष्टि 33 के रूप में जोड़ा गया। R. 2003 में कवर और कोल को प्रविष्टि 31 और 32 के रूप में जोड़ा गया। S. 2022 के अधिनियम ने भोगता को अनुसूचित जनजातियों की सूची से हटाया। इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: C — केवल P, Q और R
P, Q और R सही हैं। S गलत है: 2022 के अधिनियम ने भोगता को अनुसूचित जातियों से हटाकर ST की प्रविष्टि 16 में रखा, अतः ST सूची से नहीं हटाया। जो लोग अनुसूचित जाति वाले परिवर्तन को ST परिवर्तन समझते हैं, उनके लिए S सही लगता है।जनगणना 2011 में हो जनजाति की जनसंख्या का सबसे बड़ा अंश किस जिले में था?
उत्तर देखें
उत्तर: D — पश्चिमी सिंहभूम
पश्चिमी सिंहभूम में हो जनजाति की जनसंख्या का 83% है (9.28 लाख में से 7.74 लाख)। सरायकेला-खरसावाँ 10% के साथ आसानी से भ्रमित करने वाला दूसरा स्थान है, जबकि गुमला और खूँटी में हो जनसंख्या बहुत कम है।नीचे हर समूह को उस जनगणना 2011 जिले से जोड़ा गया है जहाँ उसकी जनसंख्या का सबसे बड़ा अंश है: बिरहोर, कोरवा, माल पहाड़िया और सावर। कौन-सा जोड़ों का समूह पूर्णतः सही है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — बिरहोर–चतरा; कोरवा–गढ़वा; माल पहाड़िया–दुमका; सावर–पूर्वी सिंहभूम
बिरहोर चतरा में 22% और हजारीबाग में 19%; कोरवा गढ़वा में 71%; माल पहाड़िया दुमका में 29% और पाकुड़ में 28%; सावर पूर्वी सिंहभूम में 84% हैं। हर गलत समूह में कम से कम एक जोड़ा ऐसे जिले से बदला गया है जहाँ उसका अंश बहुत कम है।जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 2019 के लोकसभा उत्तर में बिहार (झारखंड सहित) के लिए जो नौ PVTG सूचीबद्ध किए, उनमें कौन-सा नहीं है?
उत्तर देखें
उत्तर: C — खरवार
खरवार झारखंड की अनुसूचित जनजाति है (लगभग 2.49 लाख), पर PVTG नहीं। बिरजिया, परहिया और सावर नौ समूहों की सूची में हैं, इसलिए ये तीनों यहाँ गलत उत्तर हैं।जनगणना 2011 की जनजाति-सारणी में अलग गिने गए आठ PVTG समूहों (असुर, बिरहोर, बिरजिया, कोरवा, माल पहाड़िया, परहिया, सौरिया पहाड़िया और सावर) की कुल जनसंख्या 2,92,359 है। राज्य की अनुसूचित जनजाति जनसंख्या 86,45,042 थी। ये आठ समूह ST जनसंख्या का कितना अंश हैं?
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उत्तर: C — लगभग 3.38 प्रतिशत
2,92,359 को 86,45,042 से भाग देने पर 3.38% आता है। 0.89% तब आता है जब राज्य की कुल जनसंख्या (3,29,88,134) से भाग दिया जाए, न कि ST जनसंख्या से; यही सामान्य भूल है। 33.8% उसी उत्तर में दशमलव खिसकाने से बनता है।हिंदू पंचांग के किस मास में सरहुल मनाया जाता है, जो वसंत का पर्व है और साल-वृक्ष की पूजा से जुड़ा है?
उत्तर देखें
उत्तर: A — चैत्र
सरहुल चैत्र मास में मनाया जाता है, जो शुक्ल पक्ष की तृतीया से आरंभ होता है और नववर्ष का चिह्न है। भाद्रपद करमा का मास है, कार्तिक सोहराय का और पौष टुसू का।झारखंड के पर्वों के बारे में ये कथन देखें। P. करमा भाद्रपद में मनाया जाता है और नाच-स्थल पर करम वृक्ष की डाल गाड़ी जाती है। Q. सोहराय छोटानागपुर के अधिकांश भाग में कार्तिक अमावस्या (दीपावली) के आसपास मनाया जाने वाला पशु-पर्व है। R. टुसू चैत्र में विवाहित महिलाएँ मनाती हैं। S. मागे पर्व, जिसे हो मनाते हैं, सिंगबोंगा का सम्मान करता है। इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: D — केवल P, Q और S
P, Q और S सही हैं। R गलत है: टुसू पौष का कुँवारी कन्याओं का पर्व है, चैत्र का विवाहित महिलाओं का नहीं। जो टुसू को फसल-पर्व मानकर मास और समूह भूल जाते हैं, वे R में फँसते हैं।जितिया, वह उपवास जिसे माताएँ संतान के कल्याण हेतु रखती हैं, किस मास और पक्ष में मनाया जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: D — आश्विन, कृष्ण पक्ष, सप्तमी से नवमी
जितिया आश्विन में कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तिथि को पड़ता है। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की एकादशी करमा की तिथि है, यही भ्रम में डालने वाला विकल्प है।जनगणना 2011 में झारखंड के धार्मिक अंश थे: हिंदू 67.83%, मुस्लिम 14.53%, ईसाई 4.30%, और अन्य धर्म व मत 12.84%। अन्य धर्म व मत का अंश ईसाई अंश का लगभग कितना गुना है?
उत्तर देखें
उत्तर: C — लगभग 3 गुना
12.84 को 4.30 से भाग देने पर लगभग 2.99 आता है, अतः अन्य धर्म व मत का समूह ईसाई अंश का लगभग तीन गुना है। छह गुना विकल्प अनुपात को दोगुना करने से आता है, और 1.5 व दस गुना विकल्प 2.99 के पास नहीं हैं।जनगणना 2011 में आठ PVTG समूह अलग गिने गए। झारखंड के कुछ पुराने राज्य-स्रोत नौ के बजाय आठ PVTG समूह क्यों बताते हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: B — जनगणना में पहाड़ी खड़िया खड़िया की पंक्ति में गिनी गई
जनगणना की जनजाति-सारणी में सावर, बिरहोर, बिरजिया, असुर और कोरवा की अलग पंक्तियाँ हैं, इसलिए शेष तीन स्पष्टीकरण सही नहीं। पहाड़ी खड़िया की अपनी पंक्ति नहीं है और वह खड़िया की पंक्ति में मिला दी गई है, जिससे संख्या आठ रह जाती है।सरना धर्म में सरना स्थल की पूजा कराने वाले ग्राम-पुजारी के लिए कौन-सा शब्द प्रयुक्त होता है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — पाहन
पाहन वह ग्राम-पुजारी है जो सरना स्थल पर बलि देता है। माँझी संथालों का ग्राम-प्रधान है, पड़हा उरांवों की गाँव-समूह परिषद है, और जोग माँझी विवाह की बातचीत सँभालता है।पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओल चिकी लिपि किस भाषा के लिए बनाई?
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उत्तर: D — संथाली
ओल चिकी संथाली की लिपि है। मुंडारी की अपनी बानी हिसिर है, हो की वारंग चिति और कुड़ुख की तोलोंग सिकी, इसलिए अन्य तीन भाषाएँ लिपि-मिलान में भ्रम देती हैं।ये कथन देखें। P. लको बोदरा ने हो भाषा के लिए वारंग चिति लिपि बनाई। Q. रघुनाथ मुर्मू ने मुंडारी भाषा के लिए ओल चिकी लिपि बनाई। R. रामदयाल मुंडा ने मुंडारी व्याकरण लिखा, जो 1979 में प्रकाशित हुआ। S. साधु रामचंद्र मुर्मू ने ओल चिकी लिपि बनाई। कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: A — केवल P और R
P और R सही हैं। Q गलत है क्योंकि ओल चिकी संथाली के लिए है, मुंडारी के लिए नहीं। S गलत है क्योंकि साधु रामचंद्र मुर्मू ने मुज-डांधे बनाई, जबकि ओल चिकी रघुनाथ मुर्मू की है।सिमडेगा की लेखिका रोज़ केरकेट्टा, जिनका निधन अप्रैल 2025 में हुआ, किस भाषा में लिखने के लिए सर्वाधिक जानी जाती हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: B — खड़िया
रोज़ केरकेट्टा ने खड़िया में लिखा: खड़िया लोककथा अध्ययन, खड़िया कहानी-संग्रह सिंकोए सुलोलो, तथा प्रेमचंद की एक कहानी का खड़िया रूप। कुड़ुख उरांवों की भाषा है, खड़िया समुदाय की नहीं।जनगणना 2011 की जनसंख्या और उनके सबसे बड़े जिले: संथाल कुल 27,54,723, दुमका में 4,81,809; उरांव कुल 17,16,618, रांची में 5,30,287; मुंडा कुल 12,29,221, खूँटी में 3,25,958; हो कुल 9,28,289, पश्चिमी सिंहभूम में 7,73,930। कौन-सी जनजाति अपनी एकमात्र सबसे बड़ी जिला-जनसंख्या में अपनी कुल जनसंख्या का सबसे बड़ा अंश रखती है?
उत्तर देखें
उत्तर: C — हो
जिला-अंश हैं: संथाल 17%, उरांव 31%, मुंडा 27% और हो 83%। संथाल कुल मिलाकर सबसे बड़ी जनजाति है, जो लुभावना उत्तर है, पर उसके सबसे बड़े जिले में चारों में सबसे छोटा अंश है।इन घटनाओं को उनके घटित होने के क्रम में रखें:
P. सिदो-कान्हू के नेतृत्व में संथाल हूल;
Q. जतरा भगत के नेतृत्व में ताना भगत आंदोलन का आरंभ;
R. सरना कोड माँगने वाला झारखंड विधानसभा का प्रस्ताव;
S. पुरान को अनुसूचित जनजाति सूची में जोड़ने वाला अधिनियम। कौन-सा क्रम सही है?उत्तर देखें
उत्तर: A — P, Q, R, S
हूल 1855 में हुआ, ताना भगत आंदोलन 1914 में आरंभ हुआ, विधानसभा प्रस्ताव 11 नवंबर 2020 को आया, और पुरान अधिनियम को 8 अप्रैल 2022 को स्वीकृति मिली। चारों में पुरान अधिनियम सबसे नया है।दुमका के निकट कौन-सा स्थल है जहाँ मूल 108 में से 72 टेराकोटा मंदिर बचे हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: B — मलूटी (दुमका)
दुमका के निकट मलूटी में मूल 108 में से 72 टेराकोटा मंदिर बचे हैं, जो बंगाल शैली में बने हैं। नवरतनगढ़ गुमला का नागवंशी किला है, इटखोरी चतरा का बौद्ध स्थल और रजरप्पा रामगढ़ का छिन्नमस्ता मंदिर।