झारखंड की अर्थव्यवस्था, जनांकिकी एवं नियोजन
2. 1947 के बाद का आर्थिक इतिहास: समृद्ध भूमि, गरीब लोग
आज के झारखंड की पट्टी 1947 में ही भारत का औद्योगिक केंद्र थी, क्योंकि टाटा ने जमशेदपुर में इस्पात बनाया था। स्वतंत्रता के बाद की योजनाबद्ध विकास-प्रक्रिया ने कोयला, बिजली, उर्वरक, मशीनरी व इस्पात में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उपक्रम जोड़े। तालिका वे तिथियाँ देती है जिन पर आयोग के प्रश्न टिकते हैं।
| वर्ष | घटना | महत्त्व |
|---|---|---|
| 1907 से 1919 | टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी पंजीकृत (1907); साकची में पहला इस्पात (1912); साकची का नाम 2 जनवरी 1919 को जमशेदपुर रखा गया | पट्टी का निजी क्षेत्र का आधार |
| 1948 | दामोदर घाटी निगम का गठन (7 जुलाई 1948) | बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई व बिजली; केंद्र, बिहार व पश्चिम बंगाल भागीदार |
| 1951 | सिंदरी उर्वरक कारखाने में उत्पादन आरंभ (31 अक्टूबर 1951) | अमोनियम सल्फेट; बाद में बंद, फिर संयुक्त उद्यम द्वारा पुनर्जीवित (1 मार्च 2024 को राष्ट्र को समर्पित) |
| 1952 से 1993 | भाड़ा समानीकरण नीति लागू | खनिज-क्षेत्र में स्थित होने का लागत-लाभ समाप्त कर दिया |
| 1958 | भारी इंजीनियरी निगम (HEC) राँची में निगमित (31 दिसंबर 1958) | इस्पात व खनन के लिए मशीनरी |
| 1972 | बोकारो इस्पात संयंत्र की पहली धमन भट्ठी चालू (2 अक्टूबर 1972) | सोवियत सहायता से सार्वजनिक क्षेत्र का इस्पात; बाद में SAIL का अंग |
| 1972 व 1973 | कोकिंग कोयला खानें राष्ट्रीयकृत (1 मई 1972); अन्य कोयला खानें (1 मई 1973) | सार्वजनिक स्वामित्व में कोयला; कोल इंडिया 1975 में गठित |
| 2000 | झारखंड का गठन (15 नवंबर 2000) | खनिज रॉयल्टी व विस्थापन राज्य के प्रश्न बने |
खनिज संपदा स्थानीय समृद्धि क्यों नहीं बनी? मुख्य परीक्षा के उत्तरों में तीन कारण बार-बार आते हैं। पहला, भाड़ा समानीकरण: संघ ने कोयले व इस्पात का सुपुर्दगी-मूल्य सर्वत्र समान करने का व्यय उठाया, अतः खानों के पास कारखाना लगाने का कोई लाभ नहीं रहा; प्रसंस्करण उद्योग बंदरगाहों व बाज़ारों की ओर चले गए और खनिज राज्यों के पास केवल खनन बचा। दूसरा, स्वामित्व व रॉयल्टी: खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के अंतर्गत खनिज रॉयल्टी की दरें संघ तय करता है, और राज्य को आगे के मूल्य-वर्धन के बजाय केवल रॉयल्टी मिलती है। तीसरा, एन्क्लेव उद्योग: पूँजी-प्रधान इस्पात व कोलियरी नगरों ने कुशल प्रवासियों को खींचा, जबकि जनजातीय व कृषक परिवारों ने खानों, बाँधों व संयंत्रों के लिए भूमि खोई और अनुपात में रोज़गार नहीं पाया (विस्थापन की चर्चा अध्याय 6 में)।
3. जनगणना 2011: राज्य की जनांकिकीय रूपरेखा
| संकेतक | जनगणना 2001 | जनगणना 2011 |
|---|---|---|
| जनसंख्या | 26,945,829 | 32,988,134 |
| दशकीय वृद्धि, 2001 से 2011 | - | 22.4 प्रतिशत (परिकलित) |
| घनत्व (व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) | 338 | 414 |
| लिंगानुपात (प्रति 1,000 पुरुष महिलाएँ) | 941 | 948 |
| साक्षरता दर (प्रतिशत) | 53.56 | 66.41 |
| पुरुष साक्षरता (प्रतिशत) | 67.30 | 76.84 |
| महिला साक्षरता (प्रतिशत) | 38.87 | 55.42 |
| नगरीय जनसंख्या (प्रतिशत) | - | 24.05 |
| अनुसूचित जनजाति अंश (प्रतिशत) | 26.3 | 26.2 |
| अनुसूचित जाति अंश (प्रतिशत) | - | 12.08 |
तालिका को कहानी की तरह पढ़ें। दशक में जनसंख्या लगभग 22.4 प्रतिशत बढ़ी, जो भारत के 17.7 प्रतिशत से तेज़ है, और घनत्व (414) राष्ट्रीय 382 से ऊपर रहा। 948 का लिंगानुपात भारत के 943 से अधिक है और 941 से बढ़ा है। साक्षरता लगभग 13 अंक बढ़कर 66.41 प्रतिशत हुई, पर भारत के 74.04 प्रतिशत से नीचे है; लाभ महिलाओं (लगभग 16.5 अंक) में पुरुषों (लगभग 9.5 अंक) से अधिक रहा, अतः लैंगिक अंतर लगभग 28 से घटकर लगभग 21 अंक रह गया। लगभग तीन-चौथाई लोग (75.95 प्रतिशत) ग्रामीण थे। अनुसूचित जनजातियाँ 26.2 प्रतिशत थीं, जो 2001 के 26.3 प्रतिशत से लगभग अपरिवर्तित है।
कार्यबल लोगों के रूप में अर्थव्यवस्था की संरचना दिखाता है (जनगणना 2011 की जिला तालिकाएँ, राज्य के लिए जोड़कर)। श्रमिक जनसंख्या के लगभग 39.7 प्रतिशत थे: पुरुषों में 49.8 प्रतिशत, पर महिलाओं में 29.1 प्रतिशत। लगभग आधे श्रमिक (47.9 प्रतिशत) सीमांत श्रमिक थे, अर्थात् वर्ष में 183 दिन से कम काम करने वाले, जो मौसमी, असुरक्षित काम का संकेत है। मुख्य श्रमिकों में 29.4 प्रतिशत कृषक, 18.2 प्रतिशत खेतिहर मज़दूर, 3.7 प्रतिशत गृह-उद्योग श्रमिक तथा 48.8 प्रतिशत अन्य श्रमिक थे।
4. जिला-वार जनगणना 2011: अपेक्षित तालिका
जनगणना 2011 में 24 जिले गिने गए (2000 में गठन के समय 18)। तालिका उन्हें जनसंख्या के घटते क्रम में देती है; लिंगानुपात, साक्षरता (7 वर्ष व उससे अधिक आयु के व्यक्ति) तथा अनुसूचित जनजाति अंश जनगणना के प्राथमिक जनगणना सार से निकाले गए हैं। घनत्व पूर्णांकित व अनुमानित है: प्रकाशित जिला-घनत्व में कुछ प्रतिशत का अंतर रहता है क्योंकि जिलों के क्षेत्रफल के आँकड़े प्रकाशनों में भिन्न हैं, अतः घनत्व का उपयोग केवल चरम मामलों के लिए करें।
| जिला | जनसंख्या | घनत्व (लगभग) | लिंगानुपात | साक्षरता (%) | ST अंश (%) |
|---|---|---|---|---|---|
| राँची | 2,914,253 | 572 | 949 | 76.06 | 35.76 |
| धनबाद | 2,684,487 | लगभग 1,300 | 909 | 74.52 | 8.68 |
| गिरिडीह | 2,445,474 | 493 | 944 | 63.14 | 9.74 |
| पूर्वी सिंहभूम | 2,293,919 | 644 | 949 | 75.49 | 28.51 |
| बोकारो | 2,062,330 | 715 | 922 | 72.01 | 12.40 |
| पलामू | 1,939,869 | 442 | 928 | 63.63 | 9.34 |
| हज़ारीबाग | 1,734,495 | 488 | 947 | 69.75 | 7.02 |
| पश्चिमी सिंहभूम | 1,502,338 | 208 | 1,005 | 58.63 | 67.31 |
| देवघर | 1,492,073 | 602 | 925 | 64.85 | 12.13 |
| गढ़वा | 1,322,784 | 323 | 935 | 60.33 | 15.56 |
| दुमका | 1,321,442 | 351 | 977 | 61.02 | 43.22 |
| गोड्डा | 1,313,551 | 580 | 938 | 56.40 | 21.26 |
| साहिबगंज | 1,150,567 | 558 | 952 | 52.04 | 26.80 |
| सरायकेला-खरसावाँ | 1,065,056 | 401 | 956 | 67.70 | 35.18 |
| चतरा | 1,042,886 | 280 | 953 | 60.18 | 4.37 |
| गुमला | 1,025,213 | 191 | 993 | 65.73 | 68.94 |
| रामगढ़ | 949,443 | 708 | 921 | 73.17 | 21.19 |
| पाकुड़ | 900,422 | 497 | 989 | 48.82 | 42.10 |
| जामताड़ा | 791,042 | 437 | 954 | 64.59 | 30.40 |
| लातेहार | 726,978 | 169 | 967 | 59.51 | 45.54 |
| कोडरमा | 716,259 | 282 | 950 | 66.84 | 0.96 |
| सिमडेगा | 599,578 | 159 | 997 | 67.99 | 70.78 |
| खूँटी | 531,885 | 210 | 997 | 63.86 | 73.25 |
| लोहरदगा | 461,790 | 307 | 985 | 67.61 | 56.89 |
चार प्रतिरूप अधिकांश प्रश्नों का आधार हैं। आकार: राँची सबसे अधिक और लोहरदगा सबसे कम आबादी वाला है; धनबाद सबसे घना है (1,000 प्रति वर्ग किमी से अधिक), जबकि सिमडेगा व लातेहार सबसे विरल हैं। लिंग: पश्चिमी सिंहभूम (1,005) एकमात्र जिला है जहाँ महिलाएँ पुरुषों से अधिक हैं, और सिमडेगा, खूँटी, गुमला, पाकुड़ व लोहरदगा के जनजातीय जिले उसके निकट हैं; कोयला-औद्योगिक जिले सबसे नीचे हैं, धनबाद (909) सबसे नीचे। साक्षरता: राँची (76.06), पूर्वी सिंहभूम (75.49) व धनबाद (74.52) आगे हैं, जबकि संथाल परगना के पाकुड़ (48.82) व साहिबगंज (52.04) पीछे। जनजातियाँ: खूँटी (73.25), सिमडेगा, गुमला व पश्चिमी सिंहभूम में जनजातीय बहुलता है, लोहरदगा (56.89) में कम; कोडरमा (0.96) व चतरा (4.37) में लगभग नहीं के बराबर।
5. गरीबी, भूख, स्वास्थ्य व शिक्षा
गरीबी को दो प्रकार से मापा गया है। तेंदुलकर पद्धति (दिसंबर 2009 की विशेषज्ञ समूह रिपोर्ट) उपभोग-व्यय रेखा का उपयोग करती है। योजना आयोग के 2011-12 के अंतिम आकलन (जुलाई 2013 में जारी) में झारखंड की गरीबी दर 36.96 प्रतिशत (ग्रामीण 40.84, नगरीय 24.83) थी, जबकि भारत में 21.9 प्रतिशत; राज्य की गरीबी रेखाएँ प्रति व्यक्ति प्रति माह 748 रुपये (ग्रामीण) व 974 रुपये (नगरीय) थीं। तब से आधिकारिक अनुश्रवक नीति आयोग का राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन-स्तर के 12 संकेतकों पर परिवारों को आँकता है। उसके आधार-वर्ष (NFHS-4, 2015-16) में झारखंड लगभग 42 प्रतिशत पर था, बिहार के बाद दूसरे स्थान पर; 2023 की समीक्षा (NFHS-5, 2019-21) में लगभग 29 प्रतिशत, जो बड़ी गिरावट है पर देश में अब भी ऊँचे राज्यों में है।
पोषण व स्वास्थ्य भी कम आधार से सुधार की वही कहानी कहते हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार बच्चों में बौनापन लगभग 45 प्रतिशत (NFHS-4, 2015-16) से घटकर लगभग 40 प्रतिशत (NFHS-5, 2019-21) और दुर्बलता लगभग 29 से लगभग 22 प्रतिशत हुई, फिर भी NFHS-5 में 6 से 59 माह के लगभग दो-तिहाई बच्चे रक्ताल्प थे। बोझ जनजातीय व भूमिहीन परिवारों पर सबसे अधिक है, इसीलिए नीतिगत साधन हैं सार्वजनिक वितरण प्रणाली व राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, आँगनवाड़ी (ICDS) पोषण, विद्यालयी भोजन व स्वास्थ्य मिशन की सेवाएँ। बेरोज़गारी को आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण से, उसके दौर व वर्ष सहित उद्धृत करना उचित है, क्योंकि सीमांत व मौसमी काम का ऊँचा अंश होने से शीर्ष दर अल्प-रोज़गार को कम दिखाती है।
6. नियोजन, उप-योजनाएँ व सार्वजनिक वित्त
योजना आयोग पंचवर्षीय योजनाओं का संचालन करता था। 10वीं योजना (2002 से 2007) झारखंड के राज्य के रूप में पहली पूर्ण योजना-अवधि थी, फिर 11वीं (2007 से 2012) और 12वीं (2012 से 2017); राज्य के परिव्यय में राज्य संसाधन, केंद्रीय सहायता व उधारी मिली होती थी, और बल सड़क, बिजली, सिंचाई, विद्यालय व जनजातीय क्षेत्रों पर था। योजना आयोग का स्थान 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग ने लिया, और पंचवर्षीय योजनाएँ 12वीं योजना के साथ मार्च 2017 में समाप्त हुईं।
क्योंकि 2011 की जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियाँ एक-चौथाई से अधिक और अनुसूचित जातियाँ लगभग 12 प्रतिशत थीं, योजना निधियाँ उनके लिए निर्धारित की जाती हैं। जनजातीय उप-योजना की रणनीति 1974-75 में, पाँचवीं योजना में, अपनाई गई, और अनुसूचित जाति उप-योजना (विशेष घटक योजना) उसी सिद्धांत पर चलती है: परिव्यय का कम से कम जनसंख्या के अनुपात में अंश। नीति आयोग के 2017 के दिशानिर्देश इस विचार को अनुसूचित जनजाति (DAPST) व अनुसूचित जाति (DAPSC) विकास कार्य योजनाओं के रूप में आगे ले जाते हैं।
सार्वजनिक वित्त के तीन स्रोत हैं: राज्य का अपना राजस्व (SGST, राज्य उत्पाद शुल्क, स्टाम्प व पंजीकरण, खनिज रॉयल्टी व गैर-कर प्राप्तियाँ), अनुच्छेद 270 व 280 के अंतर्गत वित्त आयोग द्वारा तय केंद्रीय करों में हिस्सा, तथा अनुदान व केंद्र-प्रायोजित योजनाएँ। खनिज राज्य का अपना राजस्व रॉयल्टी व जिला खनिज फ़ाउंडेशन से बढ़ता है, पर वह केंद्रीय अंतरणों पर काफ़ी निर्भर है। संख्याएँ रटे बिना बजट या आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ने के लिए नीचे के चरण अपनाएँ।
- वर्ष, सर्वेक्षण या बजट दस्तावेज़ तथा यह तय करें कि आँकड़े वास्तविक, संशोधित या बजट अनुमान हैं।
- कोई वृद्धि दर उद्धृत करने से पहले वर्तमान बनाम स्थिर कीमतें और आधार वर्ष देखें।
- GSVA के क्षेत्रकीय अंश और कार्यबल अंश की तुलना कर उत्पादकता का अंतर खोजें।
- बजट में GSDP के अनुपात में राजकोषीय घाटा व राजस्व घाटा, पूँजीगत परिव्यय का अंश तथा वेतन, पेंशन व ब्याज पर प्रतिबद्ध व्यय देखें।
- परीक्षा से पहले ताज़ा करें: नवीनतम GSDP व वृद्धि, प्रति-व्यक्ति आय, क्षेत्रकीय अंश व राजकोषीय अनुपात, प्रत्येक की तिथि सहित।
मुख्य बिंदु
- झारखंड 15 नवंबर 2000 को बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के अंतर्गत बिहार के 18 जिलों से बना; इसकी अर्थव्यवस्था खनिज-आधारित है, जिसमें खनन के कारण उद्योग बड़ा, सेवाएँ 2025-26 के सर्वेक्षण में सबसे बड़ा क्षेत्रक (उद्योग के निकट), और कृषि उत्पादन में छोटी पर कार्यबल में बड़ी है।
- खनिज संपदा स्थानीय समृद्धि नहीं बनी क्योंकि भाड़ा समानीकरण (1952 से 1993), संघ-निर्धारित रॉयल्टी व पूँजी-प्रधान एन्क्लेव उद्योग थे; मुख्य तिथियाँ DVC 1948, सिंदरी 1951, HEC 1958, बोकारो 1972 तथा कोयला राष्ट्रीयकरण 1972 व 1973 हैं।
- जनगणना 2011: जनसंख्या 32,988,134, लिंगानुपात 948, घनत्व 414, साक्षरता 66.41 प्रतिशत (महिलाएँ 55.42), नगरीय 24.05 प्रतिशत, अनुसूचित जनजातियाँ 26.2 प्रतिशत; 2001 से साक्षरता का लैंगिक अंतर लगभग 28 से घटकर लगभग 21 अंक रह गया।
- जनगणना 2011 के जिला चरम: राँची सबसे बड़ा, धनबाद सबसे घना, पश्चिमी सिंहभूम एकमात्र जिला जहाँ लिंगानुपात 1,000 से अधिक, राँची सर्वाधिक साक्षर, पाकुड़ सबसे कम साक्षर, खूँटी में सर्वाधिक जनजातीय अंश, कोडरमा में सबसे कम।
- गरीबी: तेंदुलकर रेखा पर 2011-12 में 36.96 प्रतिशत; नीति आयोग के बहुआयामी सूचकांक पर लगभग 42 प्रतिशत (2015-16) से घटकर लगभग 29 प्रतिशत (2019-21); दोनों श्रृंखलाएँ कभी जोड़ी न जाएँ।
- नियोजन: 10वीं योजना (2002 से 2007) राज्य की पहली पूर्ण योजना थी; नीति आयोग ने 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग का स्थान लिया; जनजातीय उप-योजना (1974-75) DAPST व DAPSC के रूप में जारी है। प्रत्येक आर्थिक आँकड़े पर तिथि अंकित करें और वर्तमान बनाम स्थिर कीमतों की जाँच करें।
अभ्यास प्रश्न (17)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
जनगणना 2011 के अनुसार झारखंड के किस जिले की जनसंख्या सबसे अधिक थी?
उत्तर देखें
उत्तर: A — राँची
जनगणना 2011 में राँची की जनसंख्या 2,914,253 थी, जो धनबाद (2,684,487) व गिरिडीह (2,445,474) से अधिक है। धनबाद भ्रामक उत्तर है क्योंकि वह सबसे घना जिला है, पर घनत्व व कुल जनसंख्या अलग माप हैं।जनगणना 2011 में निम्नलिखित में से किस जिले में महिलाएँ पुरुषों से अधिक थीं, अर्थात् लिंगानुपात 1,000 से ऊपर था?
उत्तर देखें
उत्तर: B — पश्चिमी सिंहभूम
पश्चिमी सिंहभूम में प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,005 महिलाएँ थीं, जो 1,000 से ऊपर का एकमात्र जिला है। सिमडेगा (997) निकट है पर 1,000 से कम रहता है, इसलिए वही भ्रामक विकल्प है, जबकि पूर्वी सिंहभूम (949) व सरायकेला-खरसावाँ (956) काफ़ी नीचे हैं।जनगणना 2011 में जिले की अपनी जनसंख्या के अनुपात के रूप में किस जिले में अनुसूचित जनजातियों का अनुपात सबसे अधिक था?
उत्तर देखें
उत्तर: C — खूँटी
खूँटी में अनुसूचित जनजातियाँ लगभग 73.3 प्रतिशत थीं, जो सिमडेगा (70.8), गुमला (68.9) और पश्चिमी सिंहभूम (67.3) से अधिक है। चारों जनजातीय-बहुल जिले हैं, अतः उत्तर सटीक क्रम पर टिका है, लोकप्रिय छवि में “सबसे जनजातीय” जिले पर नहीं।2001 व 2011 की जनगणनाओं में झारखंड के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
P: लिंगानुपात 2001 के 941 से बढ़कर 2011 में 948 हो गया।
Q: 2011 में जनसंख्या घनत्व भारत के घनत्व (382) से कम था।
R: 2011 में अनुसूचित जनजाति अंश 2001 से कुछ कम था।
S: 2011 में महिला साक्षरता 60 प्रतिशत से अधिक थी।
कौन-से कथन सही हैं?उत्तर देखें
उत्तर: D — केवल P व R
P सही है (941 से 948) और R सही है (26.3 से 26.2 प्रतिशत)। Q गलत है: झारखंड का घनत्व 414 है, जो भारत के 382 से अधिक है। S गलत है: महिला साक्षरता 55.42 प्रतिशत थी, 60 से कम।प्रत्येक जनगणना 2011 विशेषता को उसके झारखंड जिले से सुमेलित कीजिए।
P: सबसे कम साक्षरता दर
Q: सबसे अधिक साक्षरता दर
R: सबसे अधिक अनुसूचित जनजाति अंश
S: सबसे कम अनुसूचित जनजाति अंश
(i) कोडरमा
(ii) खूँटी
(iii) पाकुड़
(iv) राँचीउत्तर देखें
उत्तर: A — युग्म: P-iii, Q-iv, R-ii, S-i
पाकुड़ में साक्षरता सबसे कम (48.82 प्रतिशत), राँची में सबसे अधिक (76.06), खूँटी में अनुसूचित जनजाति अंश सबसे अधिक (73.25) और कोडरमा में सबसे कम (0.96) था। दोनों साक्षरता वाले या दोनों जनजातीय-अंश वाले जिलों की अदला-बदली गलत युग्म देती है।जनगणना 2011 में झारखंड के एक जिले में लिंगानुपात 1,005, साक्षरता दर लगभग 58.6 प्रतिशत, और अनुसूचित जनजाति अंश लगभग 67 प्रतिशत दर्ज हुआ। वह कौन-सा जिला है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — पश्चिमी सिंहभूम
केवल पश्चिमी सिंहभूम (1,005; 58.63 प्रतिशत; 67.31 प्रतिशत) तीनों आँकड़ों में फ़िट बैठता है। सिमडेगा में साक्षरता (67.99) व जनजातीय अंश (70.78) अधिक और लिंगानुपात 997 है, तथा गुमला का लिंगानुपात 993 है, अतः अकेला लिंगानुपात ही उन्हें बाहर कर देता है।जनगणना में “सीमांत श्रमिक” वह व्यक्ति है जिसने:
उत्तर देखें
उत्तर: C — पिछले वर्ष में 183 दिन (छह माह) से कम काम किया
सीमांत श्रमिक वह है जिसने पिछले वर्ष में 183 दिन (छह माह) से कम काम किया; 183 दिन या अधिक काम करने वाला मुख्य श्रमिक होता है। झारखंड में 2011 में लगभग 48 प्रतिशत श्रमिक सीमांत थे, जो मौसमी, असुरक्षित काम दिखाता है। मज़दूरी व भू-स्वामित्व वाले विकल्प परिभाषा का भाग नहीं हैं।निम्नलिखित में से किसकी स्थापना 1947 से 1975 के बीच छोटानागपुर-संथाल परगना पट्टी में नहीं हुई?
उत्तर देखें
उत्तर: D — साकची में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (1907 में पंजीकृत)
टाटा कंपनी 1907 में पंजीकृत हुई, स्वतंत्रता से बहुत पहले, इसलिए वही 1947 से 1975 की अवधि में स्थापित नहीं हुई। दामोदर घाटी निगम, सिंदरी व भारी इंजीनियरी निगम तीनों स्वतंत्रता के बाद के योजनाबद्ध चरण के हैं।कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए।
P: भाड़ा समानीकरण नीति लागू हुई
Q: भारी इंजीनियरी निगम राँची में निगमित हुआ
R: दामोदर घाटी निगम का गठन हुआ
S: बोकारो इस्पात संयंत्र की पहली धमन भट्ठी चालू हुईउत्तर देखें
उत्तर: A — R, P, Q, S
क्रम है R (DVC, 1948), P (भाड़ा समानीकरण, 1952), Q (भारी इंजीनियरी निगम, 1958) और S (बोकारो धमन भट्ठी, 1972)। निगम को भाड़ा नीति से पहले, या बोकारो को निगम से पहले रखना सामान्य भूलें हैं।भाड़ा समानीकरण नीति (1952 से 1993) ने बिहार के उस भाग जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को, जो बाद में झारखंड बना, किस कारण हानि पहुँचाई?
उत्तर देखें
उत्तर: B — इसने कोयले व इस्पात का सुपुर्दगी-मूल्य समान कर दिया, जिससे खानों के पास कारखाना लगाने का लागत-लाभ जाता रहा
देश भर में कोयले व इस्पात का सुपुर्दगी-मूल्य समान करके नीति ने कारखानों को बाज़ारों व बंदरगाहों के पास लगने दिया, अतः खनिज राज्यों का संसाधन पर बैठे होने का लाभ जाता रहा। यह परिवहन-मूल्य की नीति थी, निर्यात शुल्क, निवेश-प्रतिबंध या रॉयल्टी नियम नहीं।तेंदुलकर पद्धति से 2011-12 के लिए योजना आयोग के जुलाई 2013 के आकलन के अनुसार झारखंड का संयुक्त (ग्रामीण व नगरीय) गरीबी अनुपात किसके सबसे निकट था?
उत्तर देखें
उत्तर: C — 37 प्रतिशत
आकलन 36.96 प्रतिशत था (ग्रामीण 40.84, नगरीय 24.83), अतः 37 प्रतिशत सबसे निकट है। लगभग 22 प्रतिशत उसी वर्ष का राष्ट्रीय अनुपात (21.9 प्रतिशत) है और वही भ्रामक विकल्प है।नीति आयोग की राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी आधार-रिपोर्ट (NFHS-4, 2015-16 पर आधारित) में बहुआयामी रूप से गरीब लोगों का सर्वाधिक और दूसरा सर्वाधिक अनुपात किन दो राज्यों में था?
उत्तर देखें
उत्तर: D — बिहार सर्वाधिक, झारखंड दूसरा
आधार-रिपोर्ट में बिहार लगभग 52 प्रतिशत (51.91) और झारखंड लगभग 42 प्रतिशत (42.16) पर था, अर्थात् बिहार सर्वाधिक और झारखंड दूसरे स्थान पर। पहले दो को उलटना क्रम को गलत पढ़ना है; अन्य विकल्प ऐसे राज्य या क्रम बताते हैं जिन्हें आधार-रिपोर्ट सहारा नहीं देती।नियोजन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
P: जनजातीय उप-योजना की रणनीति 1974-75 में पाँचवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अपनाई गई।
Q: नीति आयोग ने 1 जनवरी 2015 से योजना आयोग का स्थान लिया।
R: 11वीं योजना (2007 से 2012) झारखंड की राज्य के रूप में पहली पूर्ण योजना-अवधि थी।
S: नीति आयोग के 2017 के दिशानिर्देश उप-योजना के विचार को DAPST व DAPSC के रूप में आगे ले जाते हैं।
कौन-से कथन सही हैं?उत्तर देखें
उत्तर: A — केवल P, Q व S
P, Q और S सही हैं। R गलत है: नवंबर 2000 में गठन के बाद की पहली पूर्ण योजना-अवधि 10वीं योजना (2002 से 2007) थी, 11वीं नहीं। R वाले या Q को छोड़ने वाले विकल्प इन्हीं बिंदुओं पर विफल होते हैं।नीचे दिए आँकड़ों से निकालिए कि जनगणना 2001 और जनगणना 2011 के बीच झारखंड में पुरुष व महिला साक्षरता का अंतर कितने प्रतिशत अंक घटा।
जनगणना 2001: पुरुष 67.30 प्रतिशत, महिला 38.87 प्रतिशत।
जनगणना 2011: पुरुष 76.84 प्रतिशत, महिला 55.42 प्रतिशत।उत्तर देखें
उत्तर: B — लगभग 7.0 अंक
2001 में अंतर 67.30 − 38.87 = 28.43 अंक और 2011 में 76.84 − 55.42 = 21.42 अंक था, अतः यह लगभग 7.0 अंक घटा। 16.5 अंक केवल महिला साक्षरता की वृद्धि और 9.5 केवल पुरुष साक्षरता की वृद्धि है; 21.4 स्वयं 2011 का अंतर है।एक खनिज-समृद्ध राज्य तेज़ वास्तविक GSDP वृद्धि दर्ज करता है, फिर भी उसकी प्रति-व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफ़ी नीचे रहती है। झारखंड की संरचना के अनुसार कौन-सा स्पष्टीकरण सर्वाधिक उपयुक्त है?
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उत्तर: C — अधिकांश उत्पादन पूँजी-प्रधान खानों व संयंत्रों से आता है जो कम स्थानीय लोगों को रोज़गार देते हैं, जबकि कई श्रमिक कम उत्पादकता की खेती व सीमांत काम में बने रहते हैं
प्रति-व्यक्ति NSDP कुल राज्य उत्पादन को जनसंख्या से भाग देने पर बनती है। जब उच्च-मूल्य उत्पादन पूँजी-प्रधान खानों व संयंत्रों से आता है और लगभग आधे मुख्य श्रमिक खेती या खेतिहर मज़दूरी पर निर्भर तथा कई सीमांत श्रमिक हैं, तब औसत नीचा रहता है। 2001 से 2011 में जनसंख्या लगभग 22 प्रतिशत बढ़ी, और अन्य विकल्प इस माप के बारे में असत्य कथन हैं।राज्य आय के मापों में से कौन-सा संबंध सही है?
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उत्तर: D — NSDP, GSDP में से मूल्यह्रास घटाने पर मिलता है
NSDP, GSDP में से स्थिर पूँजी का उपभोग (मूल्यह्रास) घटाने पर मिलता है। GSDP = GSVA + उत्पाद कर − उत्पाद सब्सिडी है, अतः वह विकल्प जो GSVA में से उत्पाद कर घटाता है, चिह्न उलट देता है। स्थिर कीमतें मुद्रास्फीति हटाती हैं, और प्रति-व्यक्ति NSDP जनसंख्या से भाग देने पर बनती है, गुणा करने पर नहीं।जनगणना 2011 में प्रति 1,000 पुरुषों पर 990 से अधिक महिलाओं वाला लिंगानुपात किस जिला-युग्म में दोनों का था?
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उत्तर: A — पश्चिमी सिंहभूम व सिमडेगा
पश्चिमी सिंहभूम (1,005) व सिमडेगा (997) दोनों 990 से ऊपर हैं। पाकुड़ (989) एक अंक से और लोहरदगा (985) पाँच अंक से चूकता है, दुमका (977) व सरायकेला-खरसावाँ (956) कम हैं, और राँची (949) व पूर्वी सिंहभूम (949) और भी कम।