सामान्य बीमा और विनियामक

यह अध्याय आपको बीमा कंपनियों की भर्ती परीक्षाओं के बीमा एवं वित्तीय बाज़ार जागरूकता खंड (लगभग 30 प्रश्नों का स्नातक-स्तरीय वस्तुनिष्ठ खंड, जिसमें ऋणात्मक अंकन नहीं या केवल एक-चौथाई होता है) तथा बैंक व बीमा परीक्षाओं के सामान्य जागरूकता खंडों में आने वाले बीमा प्रश्नों के लिए तैयार करता है। संबंधित निकाय विषय-सूची प्रकाशित नहीं करते, इसलिए यहाँ का दायरा हमारा अपना है: स्थिर और बार-बार पूछा जाने वाला मूल भाग। इसमें सिखाया गया है कि सामान्य (गैर-जीवन) बीमा क्या कवर करता है और जीवन बीमा से कैसे भिन्न है; 1972 का राष्ट्रीयकरण और चार सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियाँ; मोटर व स्वास्थ्य बीमा और उनके कार्यकारी पद; अग्नि, समुद्री, फ़सल, व्यक्तिगत दुर्घटना व दायित्व बीमा; GIC Re और कृषि बीमा कंपनी; IRDAI और विधिक ढाँचा; तथा सरकार से जुड़ी योजनाएँ PMJJBY, PMSBY, PMFBY और आयुष्मान भारत PM-JAY। परिवर्तनशील आँकड़ों के साथ उनके स्रोत की तिथि दी गई है। स्नातकोत्तर गहराई के लिए तथा मुद्रा व बैंकिंग अध्यायों में बीमा पर दिए संक्षिप्त अंश के लिए उन अध्यायों को देखें; यह अध्याय परीक्षा-स्तर पर रहता है।

सामान्य बीमा और 1972 का राष्ट्रीयकरण

सामान्य बीमा (गैर-जीवन बीमा भी कहा जाता है) संपत्ति, वाहन, स्वास्थ्य, दायित्व, माल और फ़सलों को कवर करता है। तीन आदतें इसे जीवन बीमा से अलग करती हैं। अनुबंध प्रायः एक वर्ष का होता है और नवीकृत किया जाता है। यह क्षतिपूर्ति का अनुबंध है: बीमाकर्ता बीमित राशि तक वास्तविक हानि की ही भरपाई करता है, उससे अधिक नहीं; इसलिए हानि के समय बीमा-योग्य हित, अंशदान, प्रतिस्थापन और औसत खंड के सिद्धांत लागू होते हैं। और बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 64VB के अनुसार बीमाकर्ता सामान्यतः तब तक जोखिम नहीं लेता जब तक प्रीमियम अग्रिम प्राप्त न हो जाए। व्यक्तिगत दुर्घटना और निश्चित-लाभ स्वास्थ्य बीमा क्षतिपूर्ति के अपवाद हैं, क्योंकि वे तय राशि देते हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र का गठन कैसे हुआ। जीवन बीमा का 1956 में LIC में राष्ट्रीयकरण हुआ। सामान्य बीमा का राष्ट्रीयकरण साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (GIBNA) से हुआ, जो 1 जनवरी 1973 से प्रभावी हुआ। GIC Re के अपने इतिहास के अनुसार सरकार ने 55 भारतीय बीमाकर्ताओं के शेयर और 52 के उपक्रम, कुल 107, अपने हाथ में लिए और उन्हें मिलाकर चार कंपनियों में समूहित किया गया। भारतीय साधारण बीमा निगम (GIC) 22 नवंबर 1972 को इन चारों की होल्डिंग कंपनी के रूप में निगमित हुआ। IRDA अधिनियम, 1999 से बाज़ार फिर खुला। नवंबर 2000 में GIC को भारतीय पुनर्बीमाकर्ता (Indian Reinsurer) पुनः अधिसूचित किया गया और 21 मार्च 2003 से वह होल्डिंग कंपनी नहीं रहा: चारों बीमाकर्ता और GIC भारत सरकार के स्वामित्व वाली अलग कंपनियाँ बन गए।

1972 के पुनर्गठन में समूहित चार कंपनियाँ
कंपनीमुख्यालय (जनरल इंश्योरेंस काउंसिल सूची, 2020-21)
नेशनल इंश्योरेंसकोलकाता
न्यू इंडिया एश्योरेंसमुंबई
ओरिएंटल इंश्योरेंसनई दिल्ली
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंसचेन्नई
🧠 याद रखने की युक्ति
मुख्यालयों की याद के लिए: नेशनल, न्यू इंडिया, ओरिएंटल, यूनाइटेड इंडिया के क्रम में को-मु-दि-चे: कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई।
⚠️ परीक्षा का जाल
दोनों राष्ट्रीयकरण प्रायः आपस में बदल दिए जाते हैं। 1956 = जीवन = LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956); 1972 = सामान्य = GIC और चार सहायक कंपनियाँ (GIBNA, 1972, प्रभावी 1 जनवरी 1973)। संख्या 245 1956 के जीवन बीमा विलय की है, 107 सामान्य बीमा की।

मोटर और स्वास्थ्य बीमा

मोटर बीमा। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर प्रयुक्त प्रत्येक मोटर वाहन का तृतीय-पक्ष दायित्व (दूसरों की मृत्यु या चोट तथा उनकी संपत्ति की क्षति) के विरुद्ध बीमा होना अनिवार्य है। यही एकमात्र अनिवार्य मोटर कवर है। केवल दायित्व (Act-only) पॉलिसी यही देती है। पैकेज (व्यापक) पॉलिसी में बीमित के अपने वाहन की दुर्घटना, आग, चोरी जैसे संकटों से स्वयं की क्षति (OD) जुड़ जाती है। स्वयं की क्षति बीमित घोषित मूल्य (IDV) पर बेची जाती है, जो मोटे तौर पर आयु के अनुसार मूल्यह्रास के बाद वाहन का बाज़ार मूल्य होता है, और मालिक को हर दावा-मुक्त वर्ष पर नो-क्लेम बोनस (NCB) मिलता है, जो केवल स्वयं की क्षति के प्रीमियम पर छूट है; दावा करने पर वह समाप्त हो जाता है। यह तृतीय-पक्ष प्रीमियम कभी घटाता नहीं।

हल उदाहरण (NCB)। स्वयं की क्षति का प्रीमियम ₹12,000, तृतीय-पक्ष प्रीमियम ₹3,000, NCB 35%। छूट = 12,000 का 35% = ₹4,200, अतः देय OD = ₹7,800 और कुल = 7,800 + 3,000 = ₹10,800। पूरे ₹15,000 पर 35% काटना (₹9,750) क्लासिक भूल है।

स्वास्थ्य बीमा दो रूपों में आता है। क्षतिपूर्ति योजनाएँ बीमित राशि तक अस्पताल का वास्तविक व्यय लौटाती हैं। निश्चित-लाभ योजनाएँ (अस्पताल नकद, गंभीर बीमारी) घटना होने पर तय राशि देती हैं, बिल जो भी हो। दावे कैशलेस होते हैं जब बीमाकर्ता या उसका तृतीय-पक्ष प्रशासक (TPA) नेटवर्क अस्पताल को सीधे भुगतान करे, या प्रतिपूर्ति से, जब बीमित पहले भुगतान करे और बाद में दावा करे। जानने योग्य पद: प्रतीक्षा अवधि (आरंभिक अवधि, प्रायः 30 दिन, दुर्घटना को छोड़कर; और पूर्व-विद्यमान व निर्दिष्ट रोगों के लिए लंबी अवधियाँ); उप-सीमा (कमरे के किराये या विशेष उपचार पर सीमा); सह-भुगतान (हर दावे का तय हिस्सा बीमित वहन करे); फ़्लोटर (परिवार में साझा एक बीमित राशि); और पोर्टेबिलिटी, यानी नवीकरण पर दूसरे बीमाकर्ता या योजना में जाने का अधिकार, जिसमें पूरी हो चुकी प्रतीक्षा अवधि का श्रेय मिलता है।

IRDAI के स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय पर मास्टर परिपत्र (29 मई 2024) के नियम: पूर्व-विद्यमान रोग की प्रतीक्षा अवधि 36 माह से अधिक नहीं हो सकती (पहले 48), और लगातार 60 माह (स्थगन अवधि, पहले 96) बाद अप्रकटीकरण के आधार पर दावा अस्वीकार नहीं हो सकता, सिद्ध धोखाधड़ी को छोड़कर। रिपोर्टों में स्वास्थ्य पॉलिसियों के लिए 30 दिन की फ़्री-लुक अवधि बताई गई है। हल उदाहरण (सह-भुगतान): ₹90,000 का स्वीकार्य दावा, 20% सह-भुगतान: बीमित ₹18,000 वहन करता है और बीमाकर्ता ₹72,000 देता है (बीमित राशि के भीतर)।

⚠️ परीक्षा का जाल
उप-सीमा और सह-भुगतान अलग हैं। उप-सीमा किसी एक मद (जैसे कमरे का किराया) पर बीमाकर्ता के भुगतान की ऊपरी सीमा है; सह-भुगतान दावे का प्रतिशत-विभाजन है। प्रतीक्षा अवधि (कुछ रोगों के लिए कवर अभी सक्रिय नहीं) स्थगन अवधि से भी भिन्न है (जिसके बाद बीमाकर्ता अप्रकटीकरण पर दावे को चुनौती नहीं दे सकता)।

अग्नि, समुद्री, फ़सल, दुर्घटना और दायित्व बीमा

अग्नि बीमा मानक अग्नि एवं विशेष संकट पॉलिसी पर बेचा जाता है: वह आग, बिजली गिरने और विस्फोट को कवर करती है, जिसमें तूफ़ान, बाढ़, दंगा और टक्कर जैसे विशेष संकट जोड़े जा सकते हैं। यह भौतिक क्षति का भुगतान करती है; कारखाना बंद रहने पर खोए लाभ के लिए अलग परिणामी हानि (लाभ-हानि) कवर चाहिए। औसत खंड लागू होता है: यदि बीमित राशि जोखिम-मूल्य से कम हो तो आंशिक हानि का भुगतान अनुपात में होता है। हल उदाहरण: ₹20 लाख का स्टॉक ₹10 लाख में बीमित है और आग से ₹4 लाख की हानि होती है। भुगतान = 4 × (10 ÷ 20) = ₹2 लाख।

समुद्री बीमा (भारत में समुद्री बीमा अधिनियम, 1963 द्वारा शासित) के तीन परंपरागत विषय हैं: पोत-ढाँचा (hull), माल (cargo) और भाड़ा (freight), यानी वाहक की परिवहन से कमाई। यात्रा पॉलिसी नामित यात्रा को, समय पॉलिसी एक अवधि को और खुली पॉलिसी व्यापारी की अवधि भर की सभी खेपों को कवर करती है। समुद्री बीमा में बीमा-योग्य हित हानि के समय होना चाहिए, आरंभ में आवश्यक नहीं।

अन्य सामान्य बीमा एक नज़र में
कवरकिसका भुगतानमुख्य बिंदु
फ़सल बीमाअधिसूचित फ़सलों की उपज या मौसम से हानिक्षेत्र-आधारित आकलन; मुख्य योजना PMFBY (खंड 6)
व्यक्तिगत दुर्घटनादुर्घटना में मृत्यु या विकलांगता पर तय राशिलाभ (निश्चित राशि) कवर, क्षतिपूर्ति नहीं
सार्वजनिक दायित्वतृतीय पक्षों के प्रति विधिक दायित्वसार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991 खतरनाक पदार्थ सँभालने वाले मालिकों के लिए इसे अनिवार्य करता है
व्यावसायिक क्षतिपूर्तिव्यावसायिक सेवा में लापरवाही से उपजे दावे (डॉक्टर, लेखा-परीक्षक)पेशेवर की अपनी त्रुटियों पर दायित्व कवर
नियोक्ता दायित्वकार्य में घायल कर्मचारियों को देय मुआवज़ाकर्मचारी-मुआवज़ा कानून से जुड़ा
🎯 यह क्यों मायने रखता है
दायित्व बीमा क्यों महत्वपूर्ण है? खतरनाक उद्योग की दुर्घटना अनुबंध से बाहर के तृतीय पक्षों को बरबाद कर सकती है। कवर अनिवार्य करने से पीड़ितों को मुआवज़े के लिए धन उपलब्ध रहता है, उन्हें दिवालिया मालिक के पीछे नहीं भागना पड़ता।

GIC Re और कृषि बीमा कंपनी

पुनर्बीमा बीमाकर्ताओं का बीमा है: कंपनी अपने लिखे जोखिमों का एक हिस्सा पुनर्बीमाकर्ता को सौंप देती है। GIC Re (भारतीय साधारण बीमा निगम) भारत का राष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ता है। 1972 के पुनर्गठन के बाद वह होल्डिंग कंपनी और पुनर्बीमाकर्ता दोनों था; GIC को नवंबर 2000 में भारतीय पुनर्बीमाकर्ता पुनः अधिसूचित किया गया, और 21 मार्च 2003 से वह स्वतंत्र, सरकारी स्वामित्व वाला पुनर्बीमाकर्ता है। सामान्य बीमाकर्ताओं के कारोबार का अनिवार्य हस्तांतरण समय-समय पर अलग-अलग प्रतिशतों में रहा है, इसलिए कोई प्रतिशत याद न करें।

कृषि बीमा कंपनी (AIC) कृषि जोखिमों की विशेषीकृत बीमाकर्ता है। यह 20 दिसंबर 2002 को निगमित हुई और 1 अप्रैल 2003 से कारोबार आरंभ किया। गठन के समय स्वामित्व था: GIC Re 35%, NABARD 30%, और चारों सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के 8.75% प्रत्येक। जाँच: 35 + 30 + 4 × 8.75 = 100। AIC, PMFBY की एक प्रमुख बीमाकर्ता है, जिसमें अनेक बीमाकर्ता भाग लेते हैं।

संस्थाओं की झलक
संस्थाभूमिकायाद रखने योग्य तिथियाँ
GIC (1972)2003 तक चारों बीमाकर्ताओं की होल्डिंग कंपनीनिगमित 22 नवं. 1972; होल्डिंग कंपनी की भूमिका समाप्त 21 मार्च 2003
GIC Reराष्ट्रीय (भारतीय) पुनर्बीमाकर्ताभारतीय पुनर्बीमाकर्ता के रूप में पुनः अधिसूचित, नवं. 2000
AICकृषि जोखिम की विशेषीकृत बीमाकर्तानिगमित 20 दिसं. 2002; आरंभ 1 अप्रैल 2003
💡 उपमा
पुनर्बीमा सिंडिकेटेड ऋण की तरह चलता है: कोई एक ऋणदाता बड़े उधारकर्ता का पूरा जोखिम नहीं लेना चाहता, इसलिए जोखिम बाँटा जाता है। बड़ी रिफ़ाइनरी की आग कई पुनर्बीमाकर्ताओं में बँट जाती है।

IRDAI और विधिक ढाँचा

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) IRDA अधिनियम, 1999 के अंतर्गत बीमा का वैधानिक विनियामक है, जो मल्होत्रा समिति (1994) की सुधार-दिशा पर बना। यह 2000 में विनियामक बना और इसका मुख्यालय हैदराबाद में है। IRDAI का अपना पृष्ठ प्राधिकरण को एक अध्यक्ष, पाँच पूर्णकालिक सदस्य और चार अंशकालिक सदस्य, सभी भारत सरकार द्वारा नियुक्त बताता है; अजय सेठ ने 1 सितंबर 2025 को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष का पदभार सँभाला (यह पदधारी का मामला है, इसलिए वर्तमान स्थिति देखें)। इसका वैधानिक कर्तव्य पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा और उद्योग की व्यवस्थित वृद्धि को बढ़ावा देना है।

  • बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं का पंजीकरण व पर्यवेक्षण; शोधन-क्षमता व निवेश मानदंड तय करना।
  • मध्यस्थों को लाइसेंस: एजेंट, ब्रोकर, सर्वेयर व हानि-निर्धारक आदि।
  • उत्पादों, पॉलिसीधारक संरक्षण और प्रकटीकरण पर विनियम बनाना; अपनी प्रणालियों से शिकायतें देखना।
  • यह हर दावे पर अदालत की तरह नहीं बैठता: व्यक्तिगत विवाद बीमा लोकपाल (बीमा लोकपाल नियम, 2017 के अंतर्गत), उपभोक्ता आयोग या अदालतों में जाते हैं।
विधिक ढाँचा संक्षेप में
कानूनक्या किया
बीमा अधिनियम, 1938पंजीकरण, शोधन-क्षमता, निवेश और मध्यस्थों पर मुख्य कानून; इसमें धारा 64VB (अग्रिम प्रीमियम) है
LIC अधिनियम, 1956जीवन बीमा का LIC में राष्ट्रीयकरण
GIBNA, 1972सामान्य बीमा का राष्ट्रीयकरण, प्रभावी 1 जनवरी 1973
IRDA अधिनियम, 1999IRDAI का गठन; बाज़ार निजी क्षेत्र के लिए खुला (तब विदेशी हिस्सेदारी की सीमा 26%)
बीमा विधि (संशोधन) अधिनियम, 2015विदेशी निवेश सीमा 26% से 49% की, भारतीय स्वामित्व व नियंत्रण सहित
बीमा (संशोधन) अधिनियम, 2021सीमा 49% से 74% की
सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधि संशोधन) अधिनियम, 2025दिसंबर 2025 में पारित; 1938, LIC व IRDA अधिनियमों में संशोधन; सीमा 100% तथा पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण कोष (दिसं. 2025 की रिपोर्टें; प्रवर्तन की स्थिति देखें)
🧠 याद रखने की युक्ति
एफ़डीआई की सीढ़ी: 26 - 49 - 74 - 100, वर्ष 2000 (IRDA अधिनियम का दौर), 2015, 2021, 2025।

सरकार से जुड़ी बीमा योजनाएँ

परीक्षाओं में चार योजनाएँ बार-बार आती हैं। हर एक को वह क्या कवर करती है, उसके आरंभ-वर्ष और मुख्य आँकड़े से मिलाएँ। नीचे के आँकड़े घोषित योजना-शर्तें हैं; प्रीमियम व नामांकन की संख्याएँ बदलती रहती हैं, इसलिए तिथि-सहित दी गई हैं।

योजना सारांश
योजनाकवर और आरंभशर्तें
PMJJBYकिसी भी कारण से मृत्यु पर सावधि जीवन कवर; आरंभ 9 मई 2015₹2 लाख, एक वर्ष नवीकरणीय, आयु 18 से 50; प्रीमियम ₹436 वार्षिक (PTI, 9 मई 2026; पहले ₹330)
PMSBYदुर्घटना में मृत्यु व विकलांगता; आरंभ 9 मई 2015मृत्यु या पूर्ण विकलांगता पर ₹2 लाख, आंशिक पर ₹1 लाख; आयु 18 से 70; प्रीमियम ₹20 वार्षिक (PTI, 9 मई 2026; पहले ₹12)
PMFBYरोके न जा सकने वाले प्राकृतिक कारणों से फ़सल हानि; 13 जनवरी 2016 को स्वीकृत, खरीफ 2016 से लागूकिसान अधिकतम 2% (खरीफ), 1.5% (रबी अनाज व तिलहन), 5% (वाणिज्यिक व बागवानी फ़सलें) देता है; शेष सरकार वहन करती है
आयुष्मान भारत PM-JAYपात्र निर्धन व वंचित परिवारों के लिए अस्पताल में भर्ती; आरंभ 23 सितंबर 2018, राँचीद्वितीयक व तृतीयक देखभाल के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक, कैशलेस

पैमाना (तिथि-सहित)। 9 मई 2026 की PTI रिपोर्ट के अनुसार 2015 से PMJJBY में 27 करोड़ से अधिक और PMSBY में 58 करोड़ से अधिक नामांकन हुए। हल उदाहरण (PMFBY): किसान खरीफ फ़सल का ₹80,000 की बीमित राशि पर बीमा कराता है; 2% की सीमा पर किसान ₹1,600 देता है, शेष अंश सरकार और बीमाकर्ता की बीमांकिक दर से पूरा होता है।

⚠️ परीक्षा का जाल
PMJJBY जीवन (किसी भी कारण से मृत्यु) है; PMSBY केवल दुर्घटना। PMFBY फ़सलों को और PM-JAY अस्पताल देखभाल को कवर करती है, दुर्घटना या मृत्यु को नहीं। PMJJBY और PMSBY एक ही दिन, 9 मई 2015, शुरू हुईं, इसलिए आरंभ-वर्ष का प्रश्न उन्हें अलग नहीं कर सकता; कवर देखें।

मुख्य बिंदु

  • सामान्य बीमा प्रायः एक-वर्षीय क्षतिपूर्ति कवर है; बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 64VB के अनुसार अग्रिम प्रीमियम नियम है।
  • 1972 का अधिनियम, प्रभावी 1 जनवरी 1973: 107 बीमाकर्ता चार बने (नेशनल, न्यू इंडिया, ओरिएंटल, यूनाइटेड इंडिया); GIC ने उन्हें 21 मार्च 2003 तक रखा। जीवन बीमा 1956 और LIC से जुड़ा है।
  • मोटर बीमा में केवल तृतीय-पक्ष दायित्व अनिवार्य है; NCB केवल स्वयं की क्षति के प्रीमियम पर छूट है। स्वास्थ्य पद: प्रतीक्षा अवधि, उप-सीमा, सह-भुगतान, स्थगन अवधि, पोर्टेबिलिटी।
  • अग्नि बीमा औसत खंड सहित भौतिक क्षति देता है; समुद्री में पोत-ढाँचा, माल और भाड़ा; व्यक्तिगत दुर्घटना निश्चित राशि का लाभ है; दायित्व बीमा तृतीय पक्षों को कवर करता है।
  • GIC Re भारतीय पुनर्बीमाकर्ता है (नवंबर 2000 में पुनः अधिसूचित); AIC (2002 में गठित, अप्रैल 2003 से कार्यरत) का स्वामित्व 35% GIC Re, 30% NABARD, चारों बीमाकर्ताओं का 8.75% प्रत्येक था।
  • IRDAI (IRDA अधिनियम, 1999; हैदराबाद) पॉलिसीधारकों की रक्षा करता और विनियमन करता है। विदेशी निवेश की सीढ़ी 26, 49, 74 और 100 प्रतिशत है। PMJJBY, PMSBY, PMFBY और PM-JAY को कवर से मिलाएँ।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. भारत में 1 जनवरी 1973 से सामान्य बीमा व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण किस अधिनियम ने किया?

    1. भारतीय जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956
    2. बीमा अधिनियम, 1938
    3. साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972
    4. बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972

    1972 के अधिनियम (GIBNA) ने 1 जनवरी 1973 से सामान्य बीमा का राष्ट्रीयकरण किया। LIC अधिनियम, 1956 ने जीवन बीमा का राष्ट्रीयकरण किया, जो भ्रामक विकल्प है क्योंकि दोनों राष्ट्रीयकरण कानून हैं, पर वह केवल जीवन व्यवसाय से संबंधित था।
  2. GIC Re के अपने इतिहास के अनुसार 1972 के राष्ट्रीयकरण में कितने बीमाकर्ता अधिग्रहीत कर चार कंपनियों में समूहित किए गए?

    1. 107 (55 के शेयर और 52 के उपक्रम)
    2. 245, जैसा 1956 के जीवन बीमा विलय में था
    3. 55, केवल भारतीय कंपनियों के शेयर गिनने पर
    4. 52, केवल अधिग्रहीत उपक्रम गिनने पर
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — 107 (55 के शेयर और 52 के उपक्रम)

    जिन 55 भारतीय बीमाकर्ताओं के शेयर लिए गए और जिन 52 के उपक्रम लिए गए, वे मिलकर 107 होते हैं, जो चार में समूहित हुए। 245 1956 के जीवन बीमा की संख्या है; 55 और 52 केवल 107 के दो भाग हैं।
  3. प्रत्येक बीमाकर्ता को जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (2020-21) की सूची के अनुसार उसके मुख्यालय से मिलाइए। बीमाकर्ता: P नेशनल इंश्योरेंस, Q न्यू इंडिया एश्योरेंस, R ओरिएंटल इंश्योरेंस, S यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस। मुख्यालय: i कोलकाता, ii मुंबई, iii नई दिल्ली, iv चेन्नई।

    1. जोड़ियाँ: P-ii, Q-i, R-iii, S-iv
    2. जोड़ियाँ: P-i, Q-ii, R-iv, S-iii
    3. जोड़ियाँ: P-iii, Q-ii, R-i, S-iv
    4. जोड़ियाँ: P-i, Q-ii, R-iii, S-iv
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — जोड़ियाँ: P-i, Q-ii, R-iii, S-iv

    नेशनल कोलकाता में, न्यू इंडिया मुंबई में, ओरिएंटल नई दिल्ली में और यूनाइटेड इंडिया चेन्नई में है। पहले दो जोड़े बदलना आकर्षक है क्योंकि कोलकाता व मुंबई दोनों पुराने बीमा केंद्र हैं, पर नेशनल इंश्योरेंस का आरंभ कोलकाता में हुआ।
  4. भारतीय साधारण बीमा निगम (GIC) के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

    1. यह 22 नवंबर 1972 को चार सार्वजनिक क्षेत्र के बीमाकर्ताओं की होल्डिंग कंपनी के रूप में निगमित हुआ
    2. इसका गठन 1956 में LIC के साथ जीवन बीमा कंपनियों को सँभालने के लिए हुआ था
    3. 21 मार्च 2003 को यह चारों बीमाकर्ताओं की होल्डिंग कंपनी नहीं रहा
    4. नवंबर 2000 में इसे भारतीय पुनर्बीमाकर्ता के रूप में पुनः अधिसूचित किया गया
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — इसका गठन 1956 में LIC के साथ जीवन बीमा कंपनियों को सँभालने के लिए हुआ था

    GIC नवंबर 1972 में निगमित हुआ और सामान्य बीमा से जुड़ा था, जीवन से नहीं; 1956 का जीवन निकाय LIC है। शेष तीन GIC Re के इतिहास के तिथियुक्त तथ्य हैं। 1956 वाला कथन भ्रामक है क्योंकि 1956 राष्ट्रीयकरण का वर्ष है, पर जीवन बीमा का।
  5. मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर प्रयुक्त मोटर वाहन के लिए कौन-सा कवर अनिवार्य है?

    1. बीमित वाहन का स्वयं की क्षति कवर
    2. तृतीय-पक्ष दायित्व बीमा
    3. वाहन का चोरी कवर
    4. नो-क्लेम बोनस सुरक्षा ऐड-ऑन
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — तृतीय-पक्ष दायित्व बीमा

    अधिनियम तृतीय-पक्ष दायित्व कवर अनिवार्य करता है। स्वयं की क्षति, चोरी और ऐड-ऑन मालिक की अपनी सुरक्षा के लिए वैकल्पिक हैं। स्वयं की क्षति भ्रामक है क्योंकि पैकेज पॉलिसी आम है, पर अधिनियम उसे अनिवार्य नहीं करता।
  6. एक कार मालिक का स्वयं की क्षति का प्रीमियम ₹12,000 और तृतीय-पक्ष प्रीमियम ₹3,000 है। मालिक का 35% नो-क्लेम बोनस है, जो केवल स्वयं की क्षति के प्रीमियम पर लागू होता है। देय कुल प्रीमियम कितना है?

    1. ₹10,800
    2. ₹9,750
    3. ₹7,800
    4. ₹12,600
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — ₹10,800

    ₹12,000 का 35% ₹4,200 है, इसलिए स्वयं की क्षति का प्रीमियम ₹7,800 होता है; बिना घटाए ₹3,000 जोड़ने पर ₹10,800। ₹9,750 पूरे ₹15,000 पर 35% काटने की गलती है, और ₹7,800 में तृतीय-पक्ष प्रीमियम छूट गया है।
  7. एक स्वास्थ्य पॉलिसी में बीमित राशि ₹5 लाख है और 20% सह-भुगतान खंड है। अस्पताल का स्वीकार्य दावा ₹90,000 है। बीमाकर्ता कितना भुगतान करेगा?

    1. ₹18,000
    2. ₹90,000
    3. ₹72,000
    4. ₹70,000
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — ₹72,000

    बीमित ₹90,000 का 20%, यानी ₹18,000 वहन करता है, इसलिए बीमाकर्ता ₹72,000 देता है। ₹18,000 बीमित का हिस्सा है, जो तब चुना जाता है जब वहन किए गए हिस्से और बीमाकर्ता के भुगतान में भ्रम हो।
  8. स्वास्थ्य बीमा पर इन कथनों को परखिए। P: अस्पताल-नकद या गंभीर-बीमारी योजना बिल जो भी हो, तय राशि देती है। Q: कैशलेस दावे का अर्थ है कि बीमाकर्ता या उसका प्रशासक नेटवर्क अस्पताल को सीधे भुगतान करता है। R: IRDAI के 29 मई 2024 के मास्टर परिपत्र के अंतर्गत लगातार 60 माह बाद अप्रकटीकरण के आधार पर दावा अस्वीकार नहीं हो सकता, सिद्ध धोखाधड़ी को छोड़कर। S: पोर्टेबिलिटी का अर्थ है कि बीमित पूरी हो चुकी प्रतीक्षा अवधियों का श्रेय खो देता है। कौन-से सही हैं?

    1. केवल P और S
    2. केवल Q, R और S
    3. P, Q, R और S
    4. केवल P, Q और R
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — केवल P, Q और R

    P, Q और R सही हैं। S उल्टा है: पोर्टेबिलिटी में बीमाकर्ता या योजना बदलने पर पूरी हो चुकी प्रतीक्षा अवधि का श्रेय बीमित को मिलता रहता है। S को जोड़ना भ्रामक है क्योंकि शब्द से हानि वाले हस्तांतरण का आभास होता है, जो गलत है।
  9. एक व्यापारी का ₹20 लाख का स्टॉक अग्नि पॉलिसी में ₹10 लाख के लिए बीमित है। आग से ₹4 लाख मूल्य का स्टॉक नष्ट होता है। औसत खंड लगाने पर देय दावा कितना है?

    1. ₹4 लाख
    2. ₹2 लाख
    3. ₹1 लाख
    4. ₹10 लाख
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — ₹2 लाख

    बीमित राशि जोखिम-मूल्य की आधी है, इसलिए हानि का भुगतान 10 : 20 के अनुपात में होता है, जो ₹2 लाख देता है। ₹4 लाख पूरी हानि है, जो तभी मिलती जब स्टॉक पूरे मूल्य पर बीमित होता।
  10. एक नौवहन कंपनी अपने पोत के ढाँचे को समुद्री संकटों के विरुद्ध बीमित करना चाहती है। वह समुद्री बीमा के किस विषय का बीमा कराती है?

    1. माल (cargo)
    2. भाड़ा (freight)
    3. दायित्व (liability)
    4. पोत-ढाँचा (hull)
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — पोत-ढाँचा (hull)

    जहाज़ का ढाँचा hull है। माल ढोई गई वस्तुएँ हैं और भाड़ा वाहक की परिवहन से कमाई; पोत स्वयं इनमें से कोई नहीं, इसलिए जो जहाज़ को मूल्य ढोने वाला मानते हैं उनके लिए माल भ्रामक है।
  11. खतरनाक पदार्थ सँभालने वाले मालिकों के लिए सार्वजनिक दायित्व बीमा किस कानून के अंतर्गत अनिवार्य है?

    1. सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991
    2. समुद्री बीमा अधिनियम, 1963
    3. केवल बीमा अधिनियम, 1938
    4. मोटर वाहन अधिनियम, 1988
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991

    1991 का अधिनियम खतरनाक पदार्थ सँभालने वाले मालिकों के लिए पीड़ितों हेतु सार्वजनिक दायित्व बीमा अनिवार्य करता है। मोटर वाहन अधिनियम केवल मोटर तृतीय-पक्ष कवर अनिवार्य करता है, और समुद्री बीमा अधिनियम समुद्री अनुबंधों से संबंधित है।
  12. कृषि बीमा कंपनी (20 दिसंबर 2002 को निगमित) के गठन के समय GIC Re के पास 35% और NABARD के पास 30% था। शेष अंश चारों सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के पास बराबर था। उनका संयुक्त अंश कितना था?

    1. 30%
    2. 17.5%
    3. 35%
    4. 8.75%
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — 35%

    100 − 35 − 30 = 35%, यानी चारों में प्रत्येक का 8.75%। 8.75% एक बीमाकर्ता का अंश है, जो तब चुना जाता है जब प्रश्न को एक कंपनी का अंश समझ लिया जाए।
  13. बीमा बाज़ार खुलने के बाद GIC को किस वर्ष भारतीय पुनर्बीमाकर्ता के रूप में पुनः अधिसूचित किया गया?

    1. 1956
    2. 2000
    3. 1973
    4. 2003
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 2000

    GIC Re का इतिहास नवंबर 2000 में पुनः अधिसूचना दर्ज करता है। 2003 वह वर्ष है जब GIC होल्डिंग कंपनी नहीं रहा, जो भ्रामक उत्तर है; 1973 में राष्ट्रीयकरण प्रभावी हुआ।
  14. IRDAI पर इन कथनों को परखिए। P: यह IRDA अधिनियम, 1999 के अंतर्गत वैधानिक विनियामक है। Q: इसका मुख्यालय हैदराबाद में है। R: इसके अध्यक्ष और सदस्य भारत सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं। S: यह हर व्यक्तिगत दावा-विवाद पर बीमा लोकपाल के रूप में बैठता है। कौन-से सही हैं?

    1. केवल P, Q और R
    2. केवल P और S
    3. केवल Q और R
    4. P, Q, R और S
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — केवल P, Q और R

    P, Q और R सही हैं। S गलत है: व्यक्तिगत विवाद बीमा लोकपाल (2017 के नियमों के अंतर्गत अलग तंत्र), उपभोक्ता आयोगों या अदालतों में जाते हैं, जबकि IRDAI उद्योग का विनियमन करता है। S को जोड़ना भ्रामक त्रुटि है।
  15. भारतीय बीमाकर्ताओं में विधायित विदेशी निवेश सीमाओं को क्रम से, सबसे पहले वाली पहले, रखिए। P: 74% (बीमा (संशोधन) अधिनियम, 2021)। Q: 49% (बीमा विधि (संशोधन) अधिनियम, 2015)। R: 100% (दिसंबर 2025 का अधिनियम)। S: 26% (IRDA अधिनियम के दौर में बाज़ार खुलने के समय की सीमा)।

    1. S, P, Q, R
    2. S, Q, P, R
    3. Q, S, P, R
    4. S, Q, R, P
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — S, Q, P, R

    सीमा बाज़ार खुलने पर 26%, 2015 में 49%, 2021 में 74% और दिसंबर 2025 में 100% थी, इसी क्रम में। P और Q उलटना उसे भ्रामक लगता है जो निश्चित नहीं कि 74 पहले आया या 49; सीमाएँ केवल बढ़ती गईं।
  16. प्रत्येक योजना को उसके कवर से मिलाइए। योजनाएँ: P PMJJBY, Q PMSBY, R PMFBY, S आयुष्मान भारत PM-JAY। कवर: i किसी भी कारण से मृत्यु (सावधि जीवन), ii दुर्घटना में मृत्यु व विकलांगता, iii फ़सल हानि, iv प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक अस्पताल में भर्ती।

    1. जोड़ियाँ: P-ii, Q-i, R-iii, S-iv
    2. जोड़ियाँ: P-i, Q-ii, R-iv, S-iii
    3. जोड़ियाँ: P-i, Q-ii, R-iii, S-iv
    4. जोड़ियाँ: P-iv, Q-ii, R-iii, S-i
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — जोड़ियाँ: P-i, Q-ii, R-iii, S-iv

    PMJJBY किसी भी कारण से मृत्यु का सावधि जीवन है और PMSBY दुर्घटना कवर; PMFBY फ़सलों को और PM-JAY अस्पताल देखभाल को कवर करती है। पहले दो बदलना आम भूल है, क्योंकि दोनों 9 मई 2015 को शुरू हुईं और बहुत सस्ती हैं।
  17. 2026 में बताए अनुसार PMFBY दिशानिर्देशों में किसान खरीफ फ़सल के लिए बीमित राशि का अधिकतम 2% देता है। ₹80,000 पर बीमित खरीफ फ़सल के लिए किसान का अधिकतम अंश कितना है?

    1. ₹1,200
    2. ₹4,000
    3. ₹800
    4. ₹1,600
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — ₹1,600

    ₹80,000 का 2% ₹1,600 है। ₹1,200 रबी की 1.5% दर लेता है, और ₹4,000 वाणिज्यिक व बागवानी फ़सलों की 5% दर; शेष प्रीमियम सरकारें वहन करती हैं।
  18. दो सामाजिक सुरक्षा बीमा योजनाएँ PMJJBY और PMSBY एक साथ किस वर्ष शुरू हुईं?

    1. 2015
    2. 2014
    3. 2016
    4. 2018
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — 2015

    दोनों 9 मई 2015 को शुरू हुईं। 2016 PMFBY का वर्ष और 2018 PM-JAY का वर्ष है, जो इसी योजना-परिवार के भ्रामक विकल्प हैं।