खाद्य प्रसंस्करण के सिद्धांत: गुणवत्ता विश्लेषण, तापीय व अतापीय परिरक्षण, पैकेजिंग तथा भंडारण

यह अध्याय जीवन विज्ञान (XL) पेपर के पाँच वैकल्पिक खंडों में से एक, XL5 खाद्य प्रौद्योगिकी (अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर यही चार शीर्षक अपने नौ में से एक खंड XE6 खाद्य प्रौद्योगिकी के रूप में रखता है, अतः यह अध्याय दोनों पेपरों में से किसी के भी अभ्यर्थी के काम आता है), के खंड XL5.3 “खाद्य उत्पाद प्रौद्योगिकी” का आरंभ करता है। यह उस शीर्षक के पहले तीन मदों का उत्तर देता है: “प्रसंस्करण सिद्धांत”, यानी खाद्य अभिलक्षणन व गुणवत्ता विश्लेषण से लेकर तापीय प्रसंस्करण, शीतलन, हिमीकरण, निर्जलीकरण, परिरक्षक व योजक, माइक्रोवेव, रेडियो-तरंग व अवरक्त प्रसंस्करण, किरणन, किण्वन व बाधा प्रौद्योगिकी होते हुए मध्यवर्ती-नमी खाद्यों तक; “अतापीय प्रौद्योगिकियाँ: अल्ट्रासोनिकेशन, HPP, पल्स्ड इलेक्ट्रिक फ़ील्ड, कोल्ड प्लाज़्मा”; तथा “खाद्य पैकेजिंग व भंडारण”, जिसमें सक्रिय, बुद्धिमान व ऐसेप्टिक पैकेजिंग, नियंत्रित व संशोधित वायुमंडल भंडारण और खाद्य में माइक्रोप्लास्टिक शामिल हैं। संख्यात्मक प्रश्न आर्द्र व शुष्क आधार पर नमी, कैल्डाल प्रोटीन, F-मान का संचय, किरणन मात्रा व समय, तथा Q₁₀ से निधानी आयु पर हैं।

1. खाद्य पदार्थों का अभिलक्षणन व गुणवत्ता विश्लेषण

सन्निकट विश्लेषण (proximate analysis) किसी खाद्य को नमी, प्रोटीन, वसा, राख, अपरिष्कृत रेशे व कार्बोहाइड्रेट में बाँटता है। नमी वह द्रव्यमान है जो लगभग 105 °C के गर्म-वायु ओवन में स्थिर भार तक सुखाने पर घटता है; शर्करा-प्रचुर या ताप-संवेदी खाद्य कम ताप पर निर्वात ओवन में, अत्यंत शुष्क खाद्य कार्ल फ़िशर अनुमापन से, और मसाले टॉलूईन के साथ आसवन से जाँचे जाते हैं ताकि वाष्पशील तेल जल न गिना जाए। प्रोटीन कैल्डाल (Kjeldahl) विधि से ज्ञात होता है: उत्प्रेरक सहित सांद्र H₂SO₄ में पाचन कार्बनिक नाइट्रोजन को (NH₄)₂SO₄ में बदलता है, NaOH से मुक्त NH₃ बोरिक अम्ल में आसवित होकर मानक अम्ल से अनुमापित की जाती है। प्रोटीन = N × 6.25, क्योंकि प्रोटीनों में औसतन 16% नाइट्रोजन होता है (दूध के लिए 6.38, गेहूँ के लिए 5.7)। वसा सॉक्सलेट उपकरण में पेट्रोलियम ईथर या हेक्सेन से निष्कर्षित होती है (दुग्ध-वसा गर्बर विधि से)। राख लगभग 550 °C की मफ़ल भट्टी में जलाने के बाद का अवशेष है, अपरिष्कृत रेशा तनु अम्ल और फिर तनु क्षार में उबालने के बाद का अवशेष, और कार्बोहाइड्रेट अंतर द्वारा निकाला जाता है, अतः उसमें शेष सभी अंशों की त्रुटियाँ समा जाती हैं।

उपकरण एकल घटकों का परिमाणन करते हैं (शर्कराओं व विटामिनों के लिए HPLC, वसा-अम्लों व वाष्पशीलों के लिए गैस क्रोमैटोग्राफ़ी, खनिजों के लिए परमाणु अवशोषण)। कच्चे व प्रसंस्कृत खाद्यों का गुणवत्ता विश्लेषण वह मापता है जिसे क्रेता परखता है। भौतिक: CIE Lab* के रूप में रंग (L* दीप्ति, a* लाल–हरा, b* पीला–नीला), टेक्सचर प्रोफ़ाइल विश्लेषण से बनावट (दो बार का संपीडन जो कठोरता, संसंजकता, लचीलापन व चबाने-योग्यता देता है), श्यानता, तथा अपवर्तनमापी से °Brix में कुल घुलनशील ठोस। रासायनिक: pH, अनुमापनीय अम्लता, पेरॉक्साइड मान व मुक्त वसा-अम्ल। सूक्ष्मजैविक: कुल प्लेट गणना, कोलिफ़ॉर्म, यीस्ट व फफूँद। संवेदी: त्रिकोण परीक्षण जैसे अंतर-परीक्षण तथा 9-बिंदु हेडोनिक पैमाने पर पसंद।

⚠️ परीक्षा जाल
कैल्डाल कुल नाइट्रोजन मापता है, प्रोटीन नहीं। दूध या पशु-आहार में मिलाया गया यूरिया या मेलामीन जैसा अप्रोटीन नाइट्रोजन आभासी “प्रोटीन” बढ़ा देता है; ऐसी मिलावट ठीक इसी तरह नाइट्रोजन-आधारित परीक्षण को धोखा देती है।

2. तापीय प्रसंस्करण: ब्लांचिंग, पाश्चुरीकरण व निर्जर्मीकरण

ताप को रंग, स्वाद व पोषक तत्वों की न्यूनतम हानि के साथ पर्याप्त घातकता देनी होती है। ब्लांचिंग सब्ज़ियों को हिमीकरण, शुष्कन या डिब्बाबंदी से पहले गर्म पानी या भाप में दिया जाने वाला अल्पकालिक उपचार है। यह उन एंज़ाइमों (पेरॉक्सिडेज़, कैटालेज़, लाइपॉक्सीजिनेज़, पॉलीफ़ीनॉल ऑक्सिडेज़) को निष्क्रिय करता है जो भंडारण में दुर्गंध व रंग-परिवर्तन लाते, ऊतक की वायु निकालता है, पत्तों को भराई हेतु नरम करता है और सतही सूक्ष्मजीव घटाता है। पेरॉक्सिडेज़ पर्याप्त ब्लांचिंग का सामान्य सूचक है क्योंकि वह सब्ज़ियों के सर्वाधिक ताप-स्थायी एंज़ाइमों में है: वह नष्ट हो गया तो शेष भी हो चुके। पानी में ब्लांचिंग भाप की तुलना में अधिक विटामिन C व खनिज बहा ले जाती है।

पाश्चुरीकरण एक मृदु ताप-उपचार है जो कायिक रोगजनकों को नष्ट करता व विकारी जीवों को घटाता है, अतः उत्पाद को फिर भी प्रशीतन या अम्लता चाहिए। दूध को 63 °C पर 30 मिनट (LTLT, बैच) या 72 °C पर 15 s (HTST, सतत प्लेट ऊष्मा-विनिमयित्र) रखा जाता है; यह अनुसूची दूध के सर्वाधिक ताप-प्रतिरोधी अबीजाणुजनक रोगजनक Coxiella burnetii को ध्यान में रखकर तय है। ऋणात्मक क्षारीय फ़ॉस्फ़ेटेज़ परीक्षण इसकी पुष्टि करता है, क्योंकि यह एंज़ाइम उन रोगजनकों से थोड़ा अधिक ताप-प्रतिरोधी है। खाद्य के संदर्भ में निर्जर्मीकरण का अर्थ व्यावसायिक निर्जर्मता है: सामान्य भंडारण में पनप सकने वाला कुछ न बचे, यद्यपि सुप्त तापरागी बीजाणु रह सकते हैं। अल्प-अम्ल खाद्यों (pH 4.6 से ऊपर, aw 0.85 से ऊपर) का प्रसंस्करण Clostridium botulinum के बीजाणुओं के विरुद्ध होना चाहिए, जो pH 4.6 या उससे नीचे न पनप पाते हैं न आविष बना पाते हैं; अधिकांश फलों जैसे अम्लीय खाद्यों को केवल उबलते पानी या गर्म-भराई (hot fill) का प्रक्रम चाहिए।

सूक्ष्मजीवों की मृत्यु प्रथम कोटि की होती है, अतः log N समय के साथ रैखिक रूप से घटता है। D-मान किसी निर्दिष्ट ताप पर एक-log (90%) कमी का समय है; z-मान वह ताप-वृद्धि है जो D को दस गुना घटा दे। प्रक्रम को उसके F-मान, अर्थात संदर्भ ताप पर तुल्य मिनटों, में व्यक्त करते हैं; F₀ में 121.1 °C व z = 10 °C लिए जाते हैं। चूँकि पात्र का शीत बिंदु धीरे-धीरे गर्म व ठंडा होता है, F संचित किया जाता है: F₀ = Σ 10^((T − 121.1)/10) Δt, जहाँ T पर बिताया प्रत्येक मिनट अपनी घातक दर 10^((T − 121.1)/10) के बराबर गिना जाता है। अतः 111.1 °C पर 5 मिनट (घातक दर 0.1) केवल 0.5 मिनट जोड़ते हैं। 12D या बोटुलिनम कुक C. botulinum बीजाणुओं की बारह दशमलव कमियाँ माँगता है; D₁₂₁.₁ ≈ 0.21 मिनट लेने पर यह लगभग 2.5 मिनट है, और व्यावसायिक अल्प-अम्ल प्रक्रम सामान्यतः 3 मिनट या अधिक F₀ देते हैं।

🎯 UHT व HTST क्यों सफल हैं
बीजाणुओं की मृत्यु लगभग प्रत्येक 10 °C पर दस गुना तेज़ होती है (z ≈ 10 °C), पर भूरापन व विटामिन-हानि का z लगभग 25 °C या अधिक है। अतः ऊँचा ताप निर्जर्मता का आवश्यक समय गुणवत्ता-हानि की गति से कहीं अधिक घटाता है, और UHT (लगभग 135–150 °C पर कुछ सेकंड) बोतल-भीतर निर्जर्मीकरण से कहीं कम पके-स्वाद वाला निर्जर्म दूध देता है।

3. शीतलन, हिमीकरण, निर्जलीकरण व जल सक्रियता

शीतलन (लगभग 0–5 °C) सूक्ष्मजीवी वृद्धि, श्वसन व एंज़ाइम-क्रिया को धीमा करता है पर रोकता नहीं; केला, आम व अन्य उष्णकटिबंधीय उपज लगभग 10–13 °C से नीचे शीत-क्षति (गड्ढे, भूरापन, न पक पाना) झेलती है, अतः उसे अधिक ताप पर रखा जाता है। निधानी आयु (shelf life) की ताप-संवेदिता Q₁₀ से व्यक्त होती है, वह गुणक जिससे 10 °C वृद्धि पर क्षरण-दर बढ़ती है: T₂ पर निधानी आयु = T₁ पर निधानी आयु ÷ Q₁₀^((T₂ − T₁)/10)। Q₁₀ = 2 हो तो 20 °C पर 12 माह टिकने वाला स्नैक 30 °C पर 6 माह टिकेगा; अधिक ताप पर चलाए त्वरित परीक्षण इसी प्रकार वापस बाह्यगणित किए जाते हैं। हिमीकरण में बर्फ़ बनने के साथ विलेय सांद्र होते जाते हैं, अतः −18 °C पर भी कुछ जल अहिमीकृत रहता है। धीमा हिमीकरण कोशिकाओं के बाहर कुछ बड़े क्रिस्टल बनाता है जो कोशिकाओं से जल खींचते व भित्तियाँ फाड़ते हैं, जिससे पिघलाने पर ड्रिप-हानि होती है; त्वरित हिमीकरण (वायु-झोंका, प्लेट, IQF, द्रव नाइट्रोजन) अधिकतम क्रिस्टल-निर्माण क्षेत्र (लगभग −1 से −5 °C) को शीघ्र पार कर अनेक छोटे क्रिस्टल बनाता है। भंडारण-ताप के उतार-चढ़ाव से पुनःक्रिस्टलन होता है; खुली सतहों से ऊर्ध्वपातन फ़्रीज़र बर्न लाता है।

निर्जलीकरण जल सक्रियता घटाकर परिरक्षण करता है: aw = p/p₀, यानी खाद्य के ऊपर जलवाष्प-दाब बटा उसी ताप पर शुद्ध जल का वाष्प-दाब (= साम्य सापेक्ष आर्द्रता ÷ 100)। वृद्धि की अनुमानित निचली सीमाएँ हैं: अधिकांश जीवाणु 0.91, अधिकांश यीस्ट 0.88, अधिकांश फफूँद 0.80, लवणरागी जीवाणु 0.75, तथा शुष्करागी फफूँद व परासरणरागी यीस्ट लगभग 0.6। वसा-ऑक्सीकरण एकल-परत (monolayer) नमी के निकट (aw लगभग 0.2–0.3) सबसे धीमा और भूरापन मध्यवर्ती aw पर सबसे तेज़ होता है। गर्म-वायु शुष्कन में स्थिर-दर काल गीले बल्ब की भाँति सतही जल हटाता है; आंतरिक विसरण से नियंत्रित ह्रासमान-दर काल क्रांतिक नमी पर आरंभ होता है, और आरंभ में बहुत तेज़ सुखाने से केस हार्डनिंग, अर्थात सूखी अभेद्य परत, बनती है। हिम-शुष्कन (freeze drying) जल के त्रिक बिंदु (611 Pa, 0.01 °C) से नीचे निर्वात में बर्फ़ का ऊर्ध्वपातन करता है और आकार, सुगंध व पुनर्जलयोजन को सर्वोत्तम बचाता है।

🧠 आर्द्र आधार या शुष्क आधार?
आर्द्र-आधार नमी = जल ÷ कुल द्रव्यमान (कभी 100% से अधिक नहीं); शुष्क-आधार नमी = जल ÷ शुष्क ठोस (प्रायः 100% से अधिक), और M_db = M_wb/(1 − M_wb)। शुष्कन के द्रव्यमान-संतुलन शुष्क ठोसों पर करें, जो नहीं बदलते: 88% (wb) नमी वाली 100 kg गाजर में 12 kg ठोस हैं, अतः 6% (wb) तक सुखाने पर उसका भार 12/0.94 = 12.77 kg रहता है और 87.2 kg जल निकल चुका होता है।

4. परिरक्षक, योजक, किण्वन, बाधाएँ व मध्यवर्ती-नमी खाद्य

दुर्बल-अम्ल परिरक्षक मुख्यतः अवियोजित रूप में कार्य करते हैं, जो कोशिका-झिल्ली पार कर भीतर प्रोटॉन मुक्त करता है। अतः बेंज़ोइक अम्ल (सोडियम बेंज़ोएट के रूप में, pKa लगभग 4.2) स्क्वैश, रस व केचप जैसे अम्लीय खाद्यों में कारगर है पर उदासीन pH पर दुर्बल; सॉर्बिक अम्ल (पोटैशियम सॉर्बेट के रूप में, pKa लगभग 4.8) मुख्यतः फफूँदरोधी है, चीज़ व बेकरी उत्पादों हेतु; प्रोपियोनेट ब्रेड में फफूँद व ‘रोप’ रोकते हैं। सल्फ़र डाइऑक्साइड, प्रायः पोटैशियम मेटाबाइसल्फ़ाइट (KMS) से, सूक्ष्मजीवरोधी, प्रतिऑक्सीकारक व भूरापन-रोधी है, पर एंथोसायनिनों को विरंजित करता है, अतः प्राकृतिक लाल या बैंगनी उत्पादों में नहीं डाला जाता, और थायमिन नष्ट करता है। नाइट्राइट क्योर किए मांस का रंग स्थिर करता और C. botulinum को रोकता है। भारतीय नियम लंबे समय से नमक, चीनी, सिरका, मसाले, शहद व खाद्य तेल को वर्ग I परिरक्षक तथा बेंज़ोएट व SO₂ जैसे रासायनिक परिरक्षकों को वर्ग II में रखते आए हैं। अन्य योजकों में प्रतिऑक्सीकारक (BHA, BHT, टोकोफ़ेरॉल), पायसीकारक (लेसिथिन, मोनोग्लिसराइड), स्थायीकारक (पेक्टिन, गोंद, CMC), आर्द्रताग्राही, अम्लीकारक, रंग व मधुरक आते हैं, प्रत्येक केवल सूचीबद्ध खाद्यों में सूचीबद्ध स्तरों पर अनुमत।

किण्वन शर्कराओं को अम्ल या ऐल्कोहॉल में बदलकर परिरक्षण करता है: लैक्टिक अम्ल जीवाणु दही, सॉकरक्राउट व लवण-जल अचार का pH घटाते हैं, यीस्ट एथेनॉल और ऐसीटिक अम्ल जीवाणु सिरका बनाते हैं। बाधा प्रौद्योगिकी (hurdle technology), लाइस्टनर (Leistner) द्वारा विकसित अवधारणा, कई मृदु बाधाओं (घटा aw, निम्न pH, मृदु ताप, परिरक्षक, निम्न रेडॉक्स विभव, प्रतिस्पर्धी सूक्ष्मजीव) को जोड़ती है, जिनमें कोई अकेले घातक नहीं, ताकि मिलकर वे सूक्ष्मजीवों की समस्थिति (homeostasis) तोड़ दें और खाद्य ताज़े के निकट बना रहे। मध्यवर्ती-नमी खाद्य (IMF) इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं: aw लगभग 0.6–0.85 (ऊपरी सीमा पर पुस्तकें भिन्न हैं) और लगभग 20–50% नमी के साथ वे नरम हैं और बिना पुनर्जलयोजन खाए जाते हैं, फिर भी कमरे के ताप पर टिकते हैं क्योंकि आर्द्रताग्राही (चीनी, नमक, ग्लिसरॉल, सॉर्बिटॉल) aw को जीवाणु-सीमा से नीचे रखते हैं, जबकि सॉर्बेट जैसा फफूँदरोधी व घटा pH उन फफूँदों व यीस्टों को सँभालते हैं जो तब भी पनप सकते हैं।

5. माइक्रोवेव, रेडियो-आवृत्ति, अवरक्त व आयनकारी विकिरण

माइक्रोवेव (घरेलू ओवन 2450 MHz पर; उद्योग 915 MHz के आसपास की निम्न आवृत्तियाँ भी लेता है) व रेडियो-आवृत्ति (RF) तापन (13.56, 27.12 व 40.68 MHz) खाद्य के भीतर ही ऊष्मा बनाते हैं: ध्रुवीय जल-अणु प्रत्यावर्ती क्षेत्र का अनुसरण करने के प्रयास में घूमते हैं (द्विध्रुवीय घूर्णन) और घुले आयन दोलन करते हैं (आयनी चालन)। तापन आयतनिक होता है, और आवृत्ति घटने पर प्रवेश-गहराई बढ़ती है, अतः RF मोटे खंडों को अधिक समान गर्म करता है (पिघलाना, अनाज का कीट-निवारण, बेकिंग-पश्चात शुष्कन)। माइक्रोवेव तापन तेज़ पर असमान है: कोने अति-तप्त होते हैं, नमक तापन को सतह तक सीमित कर देता है, और जमे खाद्य में पिघला जल बर्फ़ से कहीं अधिक अवशोषित करता है, अतः पिघले स्थल बेलगाम गर्म होते हैं जबकि बर्फ़ जमी रहती है; इसीलिए डीफ़्रॉस्ट चक्र शक्ति रुक-रुक कर देते हैं। अवरक्त विकिरण (लगभग 0.75–1000 µm) सतह के निकट ही अवशोषित होता है और भूनने, सेंकने, छिलका उतारने, पतली परतें सुखाने व पपड़ी भूरी करने के उपयुक्त है।

किरणन खाद्य को आयनकारी विकिरण के संपर्क में लाता है: कोबाल्ट-60 (या सीज़ियम-137) की गामा किरणें, अधिकतम 10 MeV के इलेक्ट्रॉन-पुंज या अधिकतम 5 MeV की X-किरणें (कोडेक्स सीमाएँ); ये ऊर्जाएँ खाद्य को रेडियोधर्मी बनाने के लिए बहुत कम हैं। मुख्य लक्ष्य DNA है, जिस पर सीधा आघात होता है या जल के विकिरण-अपघटन से बने मुक्त मूलकों के माध्यम से, अतः बड़े, जटिल जीवों के लिए कम मात्रा पर्याप्त है: कीट व परजीवी निम्न मात्रा पर मरते हैं, कायिक जीवाणुओं को अधिक चाहिए, बीजाणुओं को और अधिक, जबकि विषाणु व पूर्वनिर्मित आविष लगभग अप्रभावित रहते हैं। मात्रा ग्रे (gray) में मापी जाती है (1 Gy = प्रति kg 1 J अवशोषित)। निम्न मात्राएँ (1 kGy से कम) आलू व प्याज़ का अंकुरण रोकती हैं, अनाज को कीट-मुक्त करती हैं और पकना टालती हैं; मध्यम मात्राएँ (1–10 kGy) रैड्यूराइज़ेशन (विकारी जीवों में कमी) व रेडिसिडेशन (मसालों व जमे समुद्री खाद्य में Salmonella जैसे अबीजाणुजनक रोगजनकों का उन्मूलन) देती हैं; 10 kGy से ऊपर की मात्राएँ रेडऐपर्टाइज़ेशन, अर्थात विशेष आहारों हेतु व्यावसायिक निर्जर्मता, देती हैं। सूक्ष्मजीव-विनाश D₁₀, यानी एक-log कमी की मात्रा, का अनुसरण करता है। चूँकि 1 kGy प्रति kg केवल 1 kJ जमा करता है, 3 kGy भी जल-सदृश खाद्य को 1 °C से कम गर्म करता है, इसीलिए इसे “शीत प्रक्रम” कहते हैं। किरणित खाद्य पर रेड्यूरा (Radura) चिह्न लगता है।

6. अतापीय प्रौद्योगिकियाँ: HPP, PEF, अल्ट्रासोनिकेशन व कोल्ड प्लाज़्मा

अतापीय विधियाँ कायिक सूक्ष्मजीवों व कुछ एंज़ाइमों को निष्क्रिय करती हैं जबकि खाद्य कमरे या प्रशीतन ताप के निकट रहता है, ताकि ताज़ा स्वाद, रंग व ताप-अस्थिर विटामिन बचे रहें। इनमें से कोई अकेले जीवाणु-बीजाणुओं को भरोसे से नहीं मारता, अतः उपचारित अल्प-अम्ल उत्पादों को फिर भी प्रशीतन या ताप के साथ संयोजन चाहिए।

चार अतापीय प्रौद्योगिकियों की तुलना
प्रौद्योगिकीसिद्धांतविशिष्ट उपयोगसीमाएँ
उच्च-दाब प्रसंस्करण (HPP)मिनटों तक 300–600 MPa, समदाबी रूप से संचरित (पैक के आकार-प्रकार से स्वतंत्र, समान व तत्क्षण); झिल्लियों व अ-सहसंयोजी बंधों को तोड़ता है, सहसंयोजी बंधों को नहींपैक किए रस, एवोकाडो उत्पाद, तैयार भोजन, सीपों का खोल खोलनाबीजाणु व कुछ एंज़ाइम प्रतिरोधी; बैच प्रक्रम; पैक लचीले व जलरोधी होने चाहिए
स्पंदित विद्युत क्षेत्र (PEF)पंप-योग्य खाद्य पर माइक्रोसेकंड के उच्च-वोल्टता स्पंद कोशिका-झिल्लियों में छिद्र खोलते हैं (इलेक्ट्रोपोरेशन); सूक्ष्मजीव मारने हेतु लगभग 20–80 kV/cmरस, दूध, द्रव अंडा; लगभग 1 kV/cm पर फ़्राइज़ हेतु आलू नरम करना व निष्कर्षण में सहायतावायु-बुलबुले व बड़े कण आर्किंग कराते हैं; बीजाणु प्रतिरोधी
अल्ट्रासोनिकेशनशक्ति-पराध्वनि (20–100 kHz) कोटरन (cavitation) लाती है: फूटते बुलबुले स्थानीय तप्त-बिंदु, अपरूपण व मुक्त मूलक बनाते हैंनिष्कर्षण, पायसीकरण, सफ़ाई; ताप (थर्मोसोनिकेशन) या ताप व दाब (मैनोथर्मोसोनिकेशन) के साथ सर्वाधिक घातकअकेले धीमा घातक; मुक्त मूलक दुर्गंध ला सकते हैं
कोल्ड प्लाज़्माविद्युत विसर्जन से कमरे के ताप के निकट आंशिक आयनित गैस; अभिक्रियाशील ऑक्सीजन व नाइट्रोजन स्पीशीज़, UV व आवेशित कण कोशिका-सतहों पर आक्रमण करते हैंबीजों, मसालों, ताज़ी उपज व पैकेजिंग का विसंदूषण, सीलबंद पैक के भीतर भी; कीटनाशी अवशेषों का अपघटनकेवल सतह पर प्रभावी; वसा व वर्णकों का ऑक्सीकरण कर सकता है

7. पैकेजिंग, भंडारण वायुमंडल व माइक्रोप्लास्टिक

सामान्य पैकेजिंग सामग्री
सामग्रीगुणदुर्बलताएँ
काँचनिष्क्रिय, पारदर्शी, गैस व नमी का पूर्ण अवरोधभारी, भंगुर, तापीय आघात-संवेदी
धातु (टिनप्लेट, ऐलुमिनियम)मज़बूत, प्रकाश, गैस व नमी का पूर्ण अवरोध, रिटॉर्ट सहती हैसंक्षारण से बचाने हेतु भीतरी लैकर चाहिए
कागज़ व पेपरबोर्डसस्ता, मुद्रण-योग्य, नवीकरणीयलेपन या परत के बिना दुर्बल अवरोध
पॉलीओलिफ़िन (PE, PP)अच्छा जलवाष्प अवरोध, ताप-सील योग्य; PP रिटॉर्ट सहता हैदुर्बल ऑक्सीजन अवरोध
पॉलीएथिलीन टेरेफ़्थैलेट (PET)पारदर्शी, मज़बूत, अच्छा गैस अवरोध; बोतलेंकाँच से कम ताप-सहिष्णु
EVOH, PVDCउत्कृष्ट ऑक्सीजन अवरोधEVOH गीला होने पर अवरोध खो देता है, अतः पॉलीओलिफ़िन परतों के बीच दबाया जाता है

कोई एक प्लास्टिक सब कुछ नहीं करता, अतः फ़िल्में परतदार या सह-बहिर्वेधित बनाई जाती हैं (रिटॉर्ट पाउच प्रायः PET / ऐलुमिनियम पन्नी / पॉलीप्रोपिलीन होता है)। ऐसेप्टिक पैकेजिंग में उत्पाद व पैकेज अलग-अलग निर्जर्मित होकर निर्जर्म क्षेत्र में मिलते हैं: द्रव को UHT-उपचार देकर ठंडा किया जाता है, पैकेजिंग सामग्री (प्रायः गर्म हाइड्रोजन पेरॉक्साइड से) निर्जर्मित होती है और भराई व सीलिंग निर्जर्म वायु में होती है, अतः हल्के पेपरबोर्ड–पॉलीएथिलीन–पन्नी कार्टन दूध या रस को महीनों बिना प्रशीतन रखते हैं। सक्रिय पैकेजिंग पैक के भीतर की दशाएँ बदलती है: ऑक्सीजन-अवशोषक (लौह-चूर्ण पोटलियाँ), CO₂ उत्सर्जक या अवशोषक, एथिलीन-अवशोषक (सरंध्र वाहक पर पोटैशियम परमैंगनेट), नमी-अवशोषक, सूक्ष्मजीवरोधी फ़िल्में। बुद्धिमान पैकेजिंग केवल निगरानी व सूचना देती है: समय–ताप सूचक, विकार से बने ऐमीन या CO₂ पर प्रतिक्रिया देने वाले ताज़गी-सूचक, रिसाव-सूचक, RFID टैग।

नियंत्रित-वायुमंडल भंडारण उपज को ऐसे गैस-रोधी भंडार में रखता है जिसकी O₂ व CO₂ लगातार मापी व सुधारी जाती है; कम O₂ (कुछ प्रतिशत) व बढ़ी CO₂ श्वसन, एथिलीन-क्रिया व पकने को धीमा करती है, और इसी से सेब महीनों टिकते हैं। संशोधित-वायुमंडल पैकेजिंग (MAP) गैस केवल एक बार, सील करते समय, भरती है, जिसके बाद श्वसन व पारगमन उसे बदलते हैं: CO₂ जीवाणुस्थैतिक है पर नम खाद्य में घुल जाती है, N₂ निष्क्रिय भराव है जो पैक को पिचकने से रोकती है, और लाल मांस को चटक लाल ऑक्सीमायोग्लोबिन बनाए रखने हेतु उच्च O₂ दी जाती है। श्वसनशील उपज के लिए फ़िल्म ऐसी चुनी जाती है कि भीतर आती O₂ व बाहर जाती CO₂ श्वसन से संतुलित रहें; O₂ बहुत गिरने पर अवायवीय श्वसन एथेनॉल व दुर्गंध देता है।

माइक्रोप्लास्टिक 5 mm से छोटे प्लास्टिक कण हैं (लगभग 1 µm से छोटे कणों को प्रायः नैनोप्लास्टिक कहते हैं)। वे पर्यावरण से (समुद्री खाद्य, विशेषकर पूरे खाए जाने वाले द्विकपाटी, समुद्री नमक, पेयजल) और प्रसंस्करण व पैकेजिंग से (प्लास्टिक उपकरणों व चॉपिंग बोर्ड का घिसाव, बोतलों, टी-बैग व पात्रों से निकलना, विशेषकर गर्म करने पर) खाद्य में पहुँचते हैं। FTIR या रामन स्पेक्ट्रोस्कोपी युक्त सूक्ष्मदर्शिकी उनकी पहचान और पायरोलिसिस–GC–MS उनका मात्रा-निर्धारण करती है। चिंता भौतिक (कणों का अवशोषण), रासायनिक (थैलेट व बिस्फ़ीनॉल जैसे योजक, तथा कणों पर अधिशोषित प्रदूषक) व सूक्ष्मजैविक (बायोफ़िल्म) है; स्वास्थ्य-प्रभाव व सुरक्षित स्तर अभी शोधाधीन हैं।

मुख्य बिंदु

  • सन्निकट विश्लेषण: ओवन से नमी, कैल्डाल प्रोटीन (N × 6.25), सॉक्सलेट वसा, लगभग 550 °C पर राख, अम्ल फिर क्षार से अपरिष्कृत रेशा, अंतर द्वारा कार्बोहाइड्रेट। कैल्डाल कुल नाइट्रोजन देखता है, अतः अप्रोटीन नाइट्रोजन नकली प्रोटीन दिखाता है।
  • पेरॉक्सिडेज़ ब्लांचिंग का, क्षारीय फ़ॉस्फ़ेटेज़ दुग्ध-पाश्चुरीकरण (63 °C/30 मिनट या 72 °C/15 s) का सूचक है। अल्प-अम्ल खाद्यों (pH > 4.6, aw > 0.85) को कम-से-कम 12D बोटुलिनम कुक चाहिए; F₀ = Σ 10^((T − 121.1)/10) Δt।
  • प्रत्येक 10 °C वृद्धि पर निधानी आयु Q₁₀ गुना घटती है; त्वरित हिमीकरण छोटे क्रिस्टल व कम ड्रिप देता है; aw सीमाएँ लगभग जीवाणु 0.91, यीस्ट 0.88, फफूँद 0.80, शुष्करागी 0.6 हैं। शुष्कन-संतुलन शुष्क ठोसों पर करें।
  • दुर्बल-अम्ल परिरक्षक अवियोजित अम्ल के रूप में कार्य करते हैं, अतः बेंज़ोएट को अम्लीय खाद्य चाहिए। बाधा प्रौद्योगिकी अघातक बाधाओं को जोड़ती है; मध्यवर्ती-नमी खाद्य आर्द्रताग्राहियों व फफूँदरोधी पर टिके हैं।
  • माइक्रोवेव व RF आयतनिक तापन करते हैं, अवरक्त सतह गर्म करता है। किरणन मात्रा ग्रे (J/kg) में: अंकुरण व कीटों हेतु 1 kGy से कम, रैड्यूराइज़ेशन व रेडिसिडेशन हेतु 1–10 kGy, रेडऐपर्टाइज़ेशन हेतु 10 kGy से अधिक; मात्रा = log कमियाँ × D₁₀।
  • HPP, PEF, पराध्वनि व कोल्ड प्लाज़्मा कायिक कोशिकाएँ मारते हैं, बीजाणु नहीं। सक्रिय पैक क्रिया करते हैं, बुद्धिमान पैक सूचना देते हैं; नियंत्रित वायुमंडल लगातार सुधारा जाता है, MAP एक बार भरा जाता है; माइक्रोप्लास्टिक पर्यावरण व पैकेजिंग से आते हैं।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. कैल्डाल विधि में अपरिष्कृत प्रोटीन प्रायः नाइट्रोजन मात्रा को 6.25 से गुणा करके निकाला जाता है। इस गुणक का आधार क्या है?

    1. खाद्य प्रोटीनों में द्रव्यमान से औसतन लगभग 16% नाइट्रोजन होता है, और 100/16 = 6.25
    2. कैल्डाल पाचन केवल लगभग 16% नाइट्रोजन ही प्राप्त करता है, अतः परिणाम को 6.25 से बढ़ाया जाता है
    3. अंतिम अनुमापन में आसवित अमोनिया मानक अम्ल से 1 : 6.25 अनुपात में अभिक्रिया करती है
    4. यह गुणक पाचन में बने अमोनियम सल्फ़ेट के द्रव्यमान को अमोनिया के द्रव्यमान में बदलता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — खाद्य प्रोटीनों में द्रव्यमान से औसतन लगभग 16% नाइट्रोजन होता है, और 100/16 = 6.25

    औसत खाद्य प्रोटीनों में प्रति 100 g लगभग 16 g N होता है, अतः प्रोटीन ≈ N × 100/16 = N × 6.25; भिन्न प्रोटीनों वाले खाद्यों के लिए अन्य गुणक हैं (दूध 6.38, गेहूँ 5.7)। पाचन लगभग समस्त कार्बनिक नाइट्रोजन प्राप्त करने हेतु बना है, उसका 16% नहीं, और अनुमापन अमोनिया (बोरेट रूप) का अम्ल द्वारा सरल 1 : 1 उदासीनीकरण है, अतः इनमें से कोई गुणक को नहीं समझाता।
  2. निम्नलिखित में से कौन-सा सक्रिय नहीं, बल्कि बुद्धिमान पैकेजिंग का उदाहरण है?

    1. नमकीन मेवों के सीलबंद पैकेट में रखी लौह-चूर्ण की पोटली जो उसके शीर्ष-स्थान में बची अवशिष्ट ऑक्सीजन सोख लेती है
    2. सरंध्र वाहक पर पोटैशियम परमैंगनेट की पोटली जो आमों के डिब्बे से एथिलीन हटाती है
    3. ऐसा लेबल जो किसी प्रशीतित पैक द्वारा झेले गए संचयी समय व ताप के साथ क्रमशः रंग बदलता है
    4. लपेटने की ऐसी फ़िल्म जो कटे चीज़ की सतह पर धीरे-धीरे सूक्ष्मजीवरोधी पदार्थ छोड़ती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — ऐसा लेबल जो किसी प्रशीतित पैक द्वारा झेले गए संचयी समय व ताप के साथ क्रमशः रंग बदलता है

    समय–ताप सूचक खाद्य या शीर्ष-स्थान को बदले बिना उत्पाद के इतिहास की निगरानी व सूचना देता है, और यही बुद्धिमान पैकेजिंग की परिभाषा है। ऑक्सीजन-अवशोषक, एथिलीन-अवशोषक व सूक्ष्मजीवरोधी छोड़ने वाली फ़िल्में पैक की दशाएँ बदलती हैं, अतः सक्रिय पैकेजिंग हैं; ऑक्सीजन-अवशोषक पोटली भ्रामक है क्योंकि वह सूचक जैसी दिखती है, पर वह एक गैस हटाती है।
  3. किसी दाल के आटे के 0.500 g नमूने का कैल्डाल विधि से विश्लेषण किया जाता है। बोरिक अम्ल में आसवित अमोनिया के लिए 0.100 N HCl के 8.40 mL लगते हैं, और अभिकर्मक ब्लैंक के लिए 0.20 mL। नाइट्रोजन का परमाणु द्रव्यमान 14.0 व प्रोटीन गुणक 6.25 लेकर नमूने की अपरिष्कृत प्रोटीन मात्रा (%, दो दशमलव स्थानों तक) ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 14.35

    शुद्ध अनुमापन = 8.40 − 0.20 = 8.20 mL। नाइट्रोजन = 8.20 mL × 0.100 meq/mL × 14.0 mg/meq = 11.48 mg। N = 11.48/500 × 100 = 2.296%। प्रोटीन = 2.296 × 6.25 = 14.35%। ब्लैंक भूलने पर 14.70% आता है।
  4. हिमीकरण से पहले सब्ज़ियों की ब्लांचिंग पर्याप्त हुई या नहीं, यह परखने हेतु सामान्यतः किस एंज़ाइम का प्रयोग होता है, और क्यों?

    1. क्षारीय फ़ॉस्फ़ेटेज़, क्योंकि उसका निष्क्रिय होना सब्ज़ियों में Coxiella burnetii के नष्ट होने के साथ होता है
    2. पेरॉक्सिडेज़, क्योंकि वह सब्ज़ियों के सर्वाधिक ताप-स्थायी एंज़ाइमों में है, अतः उसका नष्ट होना बताता है कि शेष भी नष्ट हैं
    3. पॉलीफ़ीनॉल ऑक्सिडेज़, क्योंकि वह उपस्थित सबसे ताप-अस्थिर एंज़ाइम है और इसलिए गर्म करने पर सबसे पहले नष्ट होता है
    4. एमाइलेज़, क्योंकि उसकी सक्रियता लंबे भंडारण में जमी सब्ज़ियों की मिठास घटने का मुख्य कारण है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — पेरॉक्सिडेज़, क्योंकि वह सब्ज़ियों के सर्वाधिक ताप-स्थायी एंज़ाइमों में है, अतः उसका नष्ट होना बताता है कि शेष भी नष्ट हैं

    पेरॉक्सिडेज़ सब्ज़ियों के सर्वाधिक ताप-प्रतिरोधी एंज़ाइमों में है, अतः ऋणात्मक पेरॉक्सिडेज़ परीक्षण दिखाता है कि ब्लांचिंग ने कम स्थायी एंज़ाइमों को भी निष्क्रिय कर दिया। क्षारीय फ़ॉस्फ़ेटेज़ दुग्ध-पाश्चुरीकरण का सूचक है, ब्लांचिंग का नहीं, और ताप-अस्थिर एंज़ाइम दुर्बल सूचक होगा क्योंकि उसका नष्ट होना अधिक सहनशील एंज़ाइमों के बारे में कुछ नहीं बताता।
  5. डिब्बाबंद खाद्यों के तापीय प्रसंस्करण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. 4.6 से अधिक pH व 0.85 से अधिक जल सक्रियता वाले खाद्य को Clostridium botulinum के बीजाणुओं के विरुद्ध रचा गया प्रक्रम मिलना चाहिए
    2. व्यावसायिक रूप से निर्जर्म डिब्बे में किसी भी प्रकार की कोई जीवित सूक्ष्मजीवी कोशिका या बीजाणु नहीं होता
    3. किसी ताप पर 12D प्रक्रम की अवधि उस ताप पर लक्ष्य बीजाणुओं के D-मान की बारह गुनी होती है
    4. pH 4.2 तक अम्लीकृत टमाटरों को बिना अम्लीकृत हरी मटर जितना ही F₀ चाहिए, क्योंकि दोनों सब्ज़ियाँ हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — 4.6 से अधिक pH व 0.85 से अधिक जल सक्रियता वाले खाद्य को Clostridium botulinum के बीजाणुओं के विरुद्ध रचा गया प्रक्रम मिलना चाहिए; C — किसी ताप पर 12D प्रक्रम की अवधि उस ताप पर लक्ष्य बीजाणुओं के D-मान की बारह गुनी होती है

    अल्प-अम्ल खाद्य (pH > 4.6, aw > 0.85) C. botulinum की वृद्धि व आविष-निर्माण सह सकते हैं, अतः उन्हें कम-से-कम 12D बोटुलिनम कुक दिया जाता है, जो परिभाषा से प्रक्रम-ताप पर बारह D-मानों जितना लंबा होता है। व्यावसायिक निर्जर्मता उन सुप्त (प्रायः तापरागी) बीजाणुओं को सहती है जो सामान्य भंडारण में नहीं पनप सकते, अतः “किसी भी प्रकार की कोई जीवित कोशिका नहीं” गलत है। pH 4.2 वाले टमाटर अम्लीय खाद्य हैं जिनमें C. botulinum नहीं पनपता, अतः उन्हें अल्प-अम्ल मटर से कहीं मृदु प्रक्रम चाहिए।
  6. प्रसंस्करण के दौरान किसी डिब्बे के शीत बिंदु का ताप अनुमानतः 113.1 °C पर 6 मिनट, फिर 118.1 °C पर 10 मिनट, फिर 120.1 °C पर 4 मिनट माना जाता है; इन अवधियों के बाहर की घातकता नगण्य है। Tref = 121.1 °C व z = 10 °C लेकर दिया गया F₀ मान (मिनट, एक दशमलव स्थान तक) ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 9.1

    घातक दर L = 10^((T − 121.1)/10)। 113.1 °C पर L = 10^(−0.8) = 0.1585, योगदान 6 × 0.1585 = 0.951 मिनट। 118.1 °C पर L = 10^(−0.3) = 0.5012, योगदान 5.012 मिनट। 120.1 °C पर L = 10^(−0.1) = 0.7943, योगदान 3.177 मिनट। F₀ = 0.951 + 5.012 + 3.177 = 9.14 ≈ 9.1 मिनट। तापन के 20 मिनट सीधे जोड़ देना घातकता को बहुत बढ़ाकर आँकना होगा।
  7. लगभग 140 °C पर कुछ सेकंड प्रसंस्कृत UHT दूध, लगभग 115 °C पर 15–20 मिनट बोतल में निर्जर्मित दूध की तुलना में बहुत कम पका-स्वाद देता है, यद्यपि दोनों व्यावसायिक रूप से निर्जर्म हैं। कौन-सी व्याख्या सही है?

    1. UHT संयंत्रों में बीजाणु मुख्यतः ताप से नहीं बल्कि भाप के ऊँचे दाब से नष्ट होते हैं, अतः कुल मिलाकर दूध तक बहुत कम ऊष्मा पहुँचती है
    2. भूरापन व स्वाद-अभिक्रियाओं का z-मान बीजाणु-विनाश से बहुत छोटा है, अतः ऊँचे ताप पर वे स्पष्टतः धीमी पड़ती हैं जबकि बीजाणु 115 °C की तुलना में कहीं तेज़ी से मरते हैं
    3. 140 °C पर मायार अभिक्रिया हो ही नहीं सकती, क्योंकि दुग्ध प्रोटीनों से अभिक्रिया से पहले ही समस्त लैक्टोज़ लैक्टुलोज़ में बदल जाता है
    4. बीजाणु-विनाश का z-मान (लगभग 10 °C) भूरापन व स्वाद-अभिक्रियाओं (25 °C या अधिक) से बहुत छोटा है, अतः ऊँचा ताप आवश्यक समय को गुणवत्ता-हानि की गति से कहीं अधिक घटाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — बीजाणु-विनाश का z-मान (लगभग 10 °C) भूरापन व स्वाद-अभिक्रियाओं (25 °C या अधिक) से बहुत छोटा है, अतः ऊँचा ताप आवश्यक समय को गुणवत्ता-हानि की गति से कहीं अधिक घटाता है

    बीजाणु-घातकता लगभग प्रत्येक 10 °C पर दस गुनी बढ़ती है, जबकि पका-स्वाद, भूरापन व विटामिन-हानि लगभग 25 °C या अधिक पर ही दस गुनी बढ़ते हैं। ऊँचे ताप पर समान F₀ हेतु आवश्यक समय गुणवत्ता-अभिक्रियाओं के तेज़ होने से कहीं अधिक घटता है, अतः उनकी कुल मात्रा घटती है। उलटा कथन z-मानों को उलट देता है (गर्म करने पर कोई अभिक्रिया धीमी नहीं होती); UHT संयंत्र में दाब केवल जल को द्रव रखता है, और UHT दूध में मायार भूरापन होता है, बस कम मात्रा में।
  8. किसी सब्ज़ी प्यूरी में आर्द्र आधार पर 80% नमी है। उसे तब तक सुखाया जाता है जब तक नमी प्रति kg शुष्क ठोस 0.10 kg जल न रह जाए। प्रति 100 kg प्यूरी से हटाए गए जल का द्रव्यमान (kg) ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 78

    100 kg प्यूरी में 20 kg शुष्क ठोस व 80 kg जल है। सूखे उत्पाद में 0.10 × 20 = 2 kg जल रहता है (नमी शुष्क आधार पर, अर्थात प्रति kg ठोस है)। हटाया गया जल = 80 − 2 = 78 kg। 0.10 को आर्द्र-आधार अंश मानने पर उत्पाद 20/0.90 = 22.2 kg और हटाया जल 77.8 kg आता।
  9. त्वरित निधानी-आयु परीक्षण में एक पैक स्नैक 40 °C पर 30 दिन बाद अस्वीकृति-बिंदु पर पहुँचता है। यदि क्षरण-अभिक्रिया का Q₁₀ 2.5 है और स्थिर रहता है, तो 25 °C पर उसकी अपेक्षित निधानी आयु (दिन, निकटतम पूर्ण संख्या तक) ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 119

    निधानी आयु दर के व्युत्क्रमानुपाती है: θ(25 °C) = θ(40 °C) × Q₁₀^((40 − 25)/10) = 30 × 2.5^1.5 = 30 × 3.953 = 118.6 ≈ 119 दिन। घात 1.5 लेने के बजाय 2.5 × 1.5 से गुणा करने पर 112.5 दिन आता है, जो प्रचलित भूल है।
  10. 0.70 जल सक्रियता वाली नरम सूखी खुबानियों का एक बैच सीलबंद पैक में कमरे के ताप पर रखा है। अंततः विकार का सबसे संभावित कारण कौन-सा जीव-समूह है?

    1. Clostridium botulinum, क्योंकि सीलबंद पैक अवायवीय दशाएँ बनाता है जिनमें बीजाणु अंकुरित होते हैं
    2. Pseudomonas प्रजातियाँ, जो कमरे के ताप पर रखे नम खाद्यों के मुख्य विकारी जीवाणु हैं
    3. लैक्टिक अम्ल जीवाणु, जिन्हें भंडारण में फल से रिसती शर्कराओं से बढ़ावा मिलता है
    4. शुष्करागी फफूँद व परासरणरागी यीस्ट, जो लगभग 0.6–0.7 जल सक्रियता पर पनप सकते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — शुष्करागी फफूँद व परासरणरागी यीस्ट, जो लगभग 0.6–0.7 जल सक्रियता पर पनप सकते हैं

    अधिकांश जीवाणुओं को लगभग 0.91 और अधिकांश यीस्टों को लगभग 0.88 aw चाहिए, अतः 0.70 पर केवल शुष्करागी फफूँद व परासरणरागी यीस्ट (सीमा लगभग 0.6) पनप सकते हैं। सीलबंद पैक के कारण C. botulinum भ्रामक है, पर उसे 0.9 से काफ़ी ऊपर aw चाहिए, जिसकी भरपाई अवायवीयता नहीं कर सकती; Pseudomonas व लैक्टिक अम्ल जीवाणु भी निम्न aw से बाहर हो जाते हैं।
  11. घरेलू फ़्रीज़र में धीरे-धीरे जमाई स्ट्रॉबेरी पिघलने पर, द्रव-नाइट्रोजन सुरंग में जमाई स्ट्रॉबेरी से कहीं अधिक ड्रिप छोड़ती हैं। मुख्य कारण क्या है?

    1. धीमा हिमीकरण जल का बड़ा अंश स्थायी रूप से अहिमीकृत छोड़ता है, और यही जल ड्रिप के रूप में बह जाता है
    2. धीमा हिमीकरण कोशिकाओं के बाहर कुछ बड़े बर्फ़-क्रिस्टल बनाता है जो जल बाहर खींचते और कोशिका-भित्तियाँ फाड़ते हैं
    3. धीमा हिमीकरण उस पेक्टिन मेथिलएस्टरेज़ को निष्क्रिय करता है जो अन्यथा पिघलते समय फल को कसा रखता
    4. तेज़ हिमीकरण ऊर्ध्वपातन द्वारा बेरी से जल हटा देता है, अतः बाद में ड्रिप बनाने को कम जल बचता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — धीमा हिमीकरण कोशिकाओं के बाहर कुछ बड़े बर्फ़-क्रिस्टल बनाता है जो जल बाहर खींचते और कोशिका-भित्तियाँ फाड़ते हैं

    अधिकतम क्रिस्टल-निर्माण क्षेत्र से धीमा गुज़रना कोशिकाओं के बाहर कुछ बड़े क्रिस्टल देता है; जल कोशिकाओं से निकलकर उन तक जाता है और क्रिस्टल भित्तियाँ व झिल्लियाँ क्षतिग्रस्त करते हैं, अतः पिघलने पर कोशिका-जल ड्रिप बनकर निकलता है। किसी भंडारण-ताप पर अहिमीकृत अंश विलेय-सांद्रता व ताप पर निर्भर है, हिमीकरण-दर पर नहीं, और तेज़ हिमीकरण ऊर्ध्वपातन से फल को नहीं सुखाता।
  12. सोडियम बेंज़ोएट pH 2.8 वाले नींबू स्क्वैश को प्रभावी ढंग से परिरक्षित करता है पर उसी सांद्रता पर pH 6.5 वाली सॉस को दुर्बल सुरक्षा देता है। बेंज़ोइक अम्ल का pKa 4.2 लेकर इसका कारण क्या है?

    1. pH 2.8 पर उसका अधिकांश भाग अवियोजित बेंज़ोइक अम्ल है, वह अनावेशित रूप जो सूक्ष्मजीवी झिल्लियाँ पार कर कोशिकाद्रव्य को अम्लीय करता है
    2. pH 6.5 पर बेंज़ोएट आयन सॉस की शर्कराओं से अभिक्रिया कर एक निष्क्रिय एस्टर में बदल जाता है
    3. उदासीन pH पर सॉस की गर्म-भराई में बेंज़ोइक अम्ल ताप से नष्ट हो जाता है, पर अम्लीय pH पर वह ताप-स्थायी रहता है
    4. pH 2.8 पर बेंज़ोएट आयन स्क्वैश के कैल्शियम से बँधता है, और यही कैल्शियम संकुल वास्तविक सूक्ष्मजीवरोधी है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — pH 2.8 पर उसका अधिकांश भाग अवियोजित बेंज़ोइक अम्ल है, वह अनावेशित रूप जो सूक्ष्मजीवी झिल्लियाँ पार कर कोशिकाद्रव्य को अम्लीय करता है

    हेंडरसन–हैसलबाल्क से pH 2.8 पर बेंज़ोएट आयन : अम्ल अनुपात 10^(2.8 − 4.2) ≈ 0.04 है, अतः लगभग 96% अवियोजित है; pH 6.5 पर अनुपात 10^2.3 ≈ 200 है और 1% से कम अवियोजित। केवल अनावेशित अम्ल झिल्ली से विसरित होकर कोशिका के भीतर प्रोटॉन छोड़ता है। शर्कराओं से कोई एस्टर या कैल्शियम संकुल इसमें शामिल नहीं, और गर्म-भराई बेंज़ोइक अम्ल को नष्ट नहीं करती।
  13. मध्यवर्ती-नमी खाद्यों व बाधा प्रौद्योगिकी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. ग्लिसरॉल व सॉर्बिटॉल जैसे आर्द्रताग्राही जल सक्रियता घटाते हैं जबकि खाद्य छूने में नरम व नम बना रहता है
    2. 0.80 जल सक्रियता पर भी फफूँदरोधी उपयोगी है, क्योंकि उस स्तर पर अनेक फफूँद पनप सकती हैं
    3. बाधा-परिरक्षित खाद्य में प्रत्येक बाधा ऐसे स्तर पर रखी जाती है जो अकेले ही लक्ष्य सूक्ष्मजीवों के लिए घातक हो
    4. मध्यवर्ती-नमी खाद्यों को खाने से पहले सूखी सब्ज़ियों की तरह पुनर्जलित करना पड़ता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — ग्लिसरॉल व सॉर्बिटॉल जैसे आर्द्रताग्राही जल सक्रियता घटाते हैं जबकि खाद्य छूने में नरम व नम बना रहता है; B — 0.80 जल सक्रियता पर भी फफूँदरोधी उपयोगी है, क्योंकि उस स्तर पर अनेक फफूँद पनप सकती हैं

    आर्द्रताग्राही जल बाँधकर उत्पाद को कठोर व सूखा बनाए बिना aw घटाते हैं, और यही IMF का आधार है। अधिकांश फफूँद लगभग 0.80 aw तक (शुष्करागी इससे नीचे) पनपती हैं, अतः IMF को सॉर्बेट जैसा फफूँदरोधी चाहिए। बाधाएँ जान-बूझकर अकेले-अकेले अघातक रखी जाती हैं और संयोजन में कार्य करती हैं, और IMF बिना पुनर्जलयोजन वैसे ही खाए जाते हैं।
  14. जमे झींगों का किरणन Salmonella की 5-log कमी हेतु करना है, जिसका इस उत्पाद में D₁₀ 0.70 kGy है। यदि लदान के न्यूनतम-मात्रा बिंदु को प्रति घंटा 6.0 kGy मिलता है, तो न्यूनतम अनावरण समय (मिनट) ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 35

    आवश्यक मात्रा = 5 × D₁₀ = 5 × 0.70 = 3.5 kGy। समय = 3.5 kGy ÷ 6.0 kGy h⁻¹ = 0.583 h = 35 मिनट। समय न्यूनतम-मात्रा बिंदु से तय होता है; स्रोत के निकट के बिंदुओं को अधिक मात्रा मिलती है।
  15. कीमे के जमे खंड को माइक्रोवेव ओवन में पूर्ण शक्ति पर पिघलाने पर किनारे पकने लगते हैं जबकि केंद्र अभी जमा रहता है। कौन-सी व्याख्या सही है?

    1. द्रव जल का परावैद्युत हानि-गुणांक बर्फ़ से कहीं अधिक है, अतः पहले पिघले क्षेत्र अधिकांश ऊर्जा सोखते और लगातार तेज़ी से गर्म होते हैं
    2. बर्फ़ का परावैद्युत हानि-गुणांक द्रव जल से कहीं अधिक है, अतः जमा केंद्र ऊर्जा सोखकर उसे किनारों की ओर परावर्तित करता है
    3. माइक्रोवेव अवरक्त की भाँति केवल बाहरी सतह गर्म करती हैं, अतः केंद्र केवल किनारों से धीमे चालन द्वारा गर्म होता है
    4. माइक्रोवेव ऊर्जा मुख्यतः मांस की वसा द्वारा सोखी जाती है, और कीमे के खंड में वसा किनारों पर इकट्ठी होती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — द्रव जल का परावैद्युत हानि-गुणांक बर्फ़ से कहीं अधिक है, अतः पहले पिघले क्षेत्र अधिकांश ऊर्जा सोखते और लगातार तेज़ी से गर्म होते हैं

    कोई क्षेत्र पिघलते ही उसका द्रव जल क्षेत्र से प्रबलता से युग्मित होकर तेज़ी से गर्म होता है, जो वहाँ अवशोषण और बढ़ा देता है (बेलगाम तापन); शेष बर्फ़ दुर्बल रूप से सोखती और जमी रहती है। उलटा हानि-गुणांक कथन गलत है, और माइक्रोवेव अवरक्त के विपरीत कुछ सेंटीमीटर तक प्रवेश करती हैं। डीफ़्रॉस्ट सेटिंग कम शक्ति रुक-रुक कर देती है ताकि बीच के अंतरालों में ऊष्मा बर्फ़ में चालित हो सके।
  16. अतापीय प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. उच्च-दाब प्रसंस्करण में दाब पैक खाद्य में, उसके आकार-प्रकार से स्वतंत्र, समान रूप से व लगभग तत्क्षण कार्य करता है
    2. स्पंदित विद्युत क्षेत्र उपचार वायु-कोटरों सहित पैक ठोस खाद्यों के उपयुक्त है, क्योंकि फँसी वायु स्पंदों का चालन करती है
    3. कोल्ड प्लाज़्मा अभिक्रियाशील ऑक्सीजन व नाइट्रोजन स्पीशीज़ और पराबैंगनी प्रकाश द्वारा मुख्यतः सतहों पर सूक्ष्मजीव निष्क्रिय करता है
    4. कमरे के ताप पर 600 MPa दाब जीवाणु-बीजाणुओं को भरोसे से नष्ट करता है, अतः उपचारित अल्प-अम्ल खाद्यों को प्रशीतन नहीं चाहिए
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — उच्च-दाब प्रसंस्करण में दाब पैक खाद्य में, उसके आकार-प्रकार से स्वतंत्र, समान रूप से व लगभग तत्क्षण कार्य करता है; C — कोल्ड प्लाज़्मा अभिक्रियाशील ऑक्सीजन व नाइट्रोजन स्पीशीज़ और पराबैंगनी प्रकाश द्वारा मुख्यतः सतहों पर सूक्ष्मजीव निष्क्रिय करता है

    दाब समदाबी रूप से संचरित होता है, अतः HPP पैक के प्रत्येक भाग को समान उपचार देता है। कोल्ड प्लाज़्मा की अभिक्रियाशील स्पीशीज़ व UV सतहों पर कार्य करती हैं, इसीलिए वह बीजों, उपज व पैकेजिंग हेतु प्रयुक्त होता है। PEF को वायु-बुलबुलों से मुक्त पंप-योग्य द्रव चाहिए, क्योंकि बुलबुले परावैद्युत भंग व आर्किंग कराते हैं, और जीवाणु-बीजाणु कमरे के ताप पर HPP झेल जाते हैं, अतः अल्प-अम्ल HPP खाद्य ठंडे रखने पड़ते हैं।
  17. केचप की बहुपरती निचोड़ने-योग्य बोतल में एथिलीन–विनाइल ऐल्कोहॉल (EVOH) परत भीतरी या बाहरी सतह पर नहीं, बल्कि पॉलीप्रोपिलीन परतों के बीच रखी जाती है। क्यों?

    1. EVOH दुर्बल ऑक्सीजन अवरोध है, और बोतल का ऑक्सीजन-प्रतिरोध वास्तव में पॉलीप्रोपिलीन परतें देती हैं
    2. EVOH ऐसीटिक अम्ल में घुल जाता है, अतः उसे केचप के सिरके से सदा दूर रखना पड़ता है
    3. EVOH केवल सूखा रहने पर उत्कृष्ट ऑक्सीजन अवरोध है, और पॉलीप्रोपिलीन परतें नमी को उससे दूर रखती हैं
    4. EVOH पर छपाई नहीं हो सकती, अतः उसे भीतर छिपाया जाता है जबकि बाहरी पॉलीप्रोपिलीन परत लेबल धारण करती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — EVOH केवल सूखा रहने पर उत्कृष्ट ऑक्सीजन अवरोध है, और पॉलीप्रोपिलीन परतें नमी को उससे दूर रखती हैं

    EVOH की ऑक्सीजन-पारगम्यता खाद्य प्लास्टिकों में न्यूनतम में है, पर वह जलरागी है: सोखी नमी उसे सुघट्य बनाती है और उसका अवरोध तेज़ी से गिरता है। नमी-रोधी पॉलीओलिफ़िन परतों के बीच दबाने से वह सूखा रहता है। संरचना का ऑक्सीजन अवरोध EVOH ही है, अतः यह दावा कि ऑक्सीजन-प्रतिरोध पॉलीप्रोपिलीन देती है, उलटा है; पॉलीप्रोपिलीन दुर्बल ऑक्सीजन अवरोध है।
  18. ताज़े चिकन के टुकड़ों की एक ट्रे में 100% CO₂ भरकर उच्च-अवरोधी फ़िल्म से सील किया जाता है। प्रशीतन में एक दिन बाद फ़िल्म मांस पर कसकर चिपक जाती है। रोगाणुरोधी प्रभाव बनाए रखते हुए इसे रोकने हेतु गैस-मिश्रण में कौन-सा परिवर्तन सर्वोत्तम है?

    1. CO₂ का कुछ भाग ऑक्सीजन से बदलें, जो कम विलेय है और चिकन का रंग भी चटक करती है
    2. बहुत अधिक CO₂-पारगम्य फ़िल्म लें, ताकि CO₂ मांस में घुलने से पहले बाहर निकल जाए
    3. समस्त CO₂ को नाइट्रोजन से बदलें, जो ठीक CO₂ जितनी ही जीवाणुस्थैतिक है और मांस में नहीं घुलती
    4. CO₂ का कुछ भाग नाइट्रोजन से बदलें, जो निष्क्रिय व अल्प-विलेय भराव है और पैक का आयतन बनाए रखता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — CO₂ का कुछ भाग नाइट्रोजन से बदलें, जो निष्क्रिय व अल्प-विलेय भराव है और पैक का आयतन बनाए रखता है

    CO₂ जीवाणुस्थैतिक है पर मांस के जल व वसा में अत्यधिक विलेय है, अतः घुलने के साथ शीर्ष-स्थान सिकुड़ता है और पैक पिचक जाता है। नाइट्रोजन निष्क्रिय व अल्प-विलेय है, अतः CO₂/N₂ मिश्रण आयतन बनाए रखता है और विकारी जीवाणुओं को रोकने लायक CO₂ भी रखता है। नाइट्रोजन स्वयं जीवाणुस्थैतिक नहीं, अतः समस्त CO₂ बदलने से रोगाणुरोधी प्रभाव खो जाता है; उच्च ऑक्सीजन लाल मांस के ऑक्सीमायोग्लोबिन रंग हेतु दी जाती है, जिसकी कुक्कुट को आवश्यकता नहीं, और वह वायवीय विकार बढ़ाती है; पारगम्य फ़िल्म तो CO₂ ही खो देती है।