परिवर्धन जीवविज्ञान: युग्मक, भ्रूण, विभेदन, कायांतरण व स्तंभ कोशिकाएँ

यह अध्याय जीवन विज्ञान (XL) पेपर के पाँच वैकल्पिक खंडों में से एक, XL4 प्राणी विज्ञान, के खंड XL4.9 “Development Biology” का उत्तर है: “Gametogenesis, Embryonic development, cellular differentiation, organogenesis, metamorphosis, Model organisms used in developmental biology, genetic and molecular basis of development, stem cells.” यह जंतु को जनन कोशिका से वयस्क तक ले चलता है: शुक्राणु व अंड कैसे बनते और मिलते हैं, विदलन, गैस्ट्रुलाभवन व तंत्रिकाभवन शरीर-योजना कैसे रचते हैं, कोशिकाएँ कैसे प्रतिबद्ध होती हैं और प्रेरण से अंग कैसे बनते हैं, कौन-से जीन व संकेत भ्रूण का प्रतिरूपण करते हैं, उभयचरों व कीटों में हॉर्मोन कायांतरण कैसे चलाते हैं, कुछ मॉडल जीव इस विषय के आधार क्यों हैं, और स्तंभ कोशिका क्या होती है। आंकिक प्रश्न हैं: अर्धसूत्री कोशिकाओं से युग्मकों की गिनती, अर्धसूत्री विभाजन के दौरान DNA मात्रा (C-मान), समकालिक विदलन के बाद कोशिका-संख्या, और समसूत्री सूचकांक से प्रावस्था की अवधि।

1. युग्मकजनन व निषेचन

आदि जनन कोशिकाएँ (primordial germ cells) आरंभ में ही अलग हो जाती हैं (स्तनधारियों में समीपस्थ एपिब्लास्ट से; Drosophila में पोल कोशिकाओं के रूप में, जो मातृ जनन-द्रव्य पाती हैं) और जनद तक प्रवास करती हैं। वहाँ वे शुक्राणुजनी (spermatogonia) या अंडजनी (oogonia) के रूप में समसूत्री विभाजन से बढ़ती हैं, DNA प्रतिकृति करती हैं और प्राथमिक शुक्राणुकोशिका या अंडकोशिका (2n, 4C) के रूप में अर्धसूत्री विभाजन में प्रवेश करती हैं। अर्धसूत्री विभाजन I से द्वितीयक कोशिकाएँ (n, 2C) और अर्धसूत्री विभाजन II से अगुणित 1C उत्पाद बनते हैं। C-मान और प्लॉइडी अलग-अलग गिनें: द्वितीयक शुक्राणुकोशिका अगुणित हो चुकी है, पर उसके प्रत्येक गुणसूत्र में अभी दो अर्धगुणसूत्र हैं।

स्तनधारी में शुक्राणुजनन व अंडजनन
लक्षणशुक्राणुजननअंडजनन
समययौवनारंभ से, सतत, स्व-नवीकरणशील शुक्राणुजनी स्तंभ-कोशिका भंडार सेअंडजनी जन्म से पहले बढ़कर अर्धसूत्री विभाजन में प्रवेश करती हैं; भंडार नवीकृत नहीं होता
अर्धसूत्री ठहरावकोई नहींप्राथमिक अंडकोशिका LH उछाल तक प्रोफ़ेज़ I के डिप्लोटीन पर; द्वितीयक अंडकोशिका निषेचन तक मेटाफ़ेज़ II पर (अधिकांश स्तनधारी)
एक अर्धसूत्री कोशिका के उत्पादचार समान शुक्राणुप्रसू (spermatids)एक अंड तथा दो या तीन ध्रुवीय काय (असमान कोशिकाद्रव्य-विभाजन कोशिकाद्रव्य बचाए रखता है)
अर्धसूत्री विभाजन के बाद रूपणशुक्राणुजनन-पश्च रूपण (spermiogenesis): गॉल्जी से एक्रोसोम, प्रोटामिन से संकुलित क्रोमैटिन, तारककेंद्रक से कशाभ, मध्यखंड में माइटोकॉन्ड्रियाअर्धसूत्री विभाजन पुनः आरंभ होने से पहले वृद्धि, पीतक व मातृ mRNA का संचय
सहायक कोशिकाएँसर्टोली कोशिकाएँ (पोषक, रक्त–वृषण अवरोध); लेडिग कोशिकाएँ टेस्टोस्टेरोन बनाती हैंपुटक की ग्रैनुलोसा व थीका कोशिकाएँ
⚠️ युग्मक उसी अवस्था से गिनें जो दी गई है
प्राथमिक शुक्राणुकोशिका से 4 शुक्राणु, द्वितीयक से 2 और शुक्राणुप्रसू से 1 बनता है; प्राथमिक या द्वितीयक अंडकोशिका से केवल 1 अंड। अतः 100 प्राथमिक शुक्राणुकोशिकाएँ व 100 प्राथमिक अंडकोशिकाएँ 400 शुक्राणु पर केवल 100 अंड देती हैं। DNA भी इसी तर्क पर चलता है: S प्रावस्था के बाद प्राथमिक शुक्राणुकोशिका 4C है, शुक्राणुप्रसू 1C।

निषेचन (सबसे अधिक अध्ययन समुद्री अर्चिन में) का क्रम है: शुक्राणु का रसायनानुचलन, एक्रोसोम अभिक्रिया (बहिःकोशिकाक्षेपण, जो bindin जैसे जाति-विशिष्ट बंधन प्रोटीन उजागर करता है), झिल्ली-संलयन, फिर बहुशुक्राणुता के विरुद्ध दो अवरोध। तीव्र अवरोध Na⁺ अंतर्वाह से कुछ सेकंड में अंड-झिल्ली का विध्रुवण है; मंद अवरोध IP₃ द्वारा ER से मुक्त Ca²⁺ तरंग है, जो वल्कुटीय कणिका बहिःक्षेपण (cortical granule exocytosis) करवाकर निषेचन आवरण उठाती है। यही Ca²⁺ तरंग अंड को सक्रिय करती है: उपापचय बढ़ता है और ठहरा अर्धसूत्री विभाजन पूरा होता है। स्तनधारी शुक्राणुओं को पहले मादा जनन-पथ में क्षमतायन (capacitation) चाहिए, फिर वे ज़ोना पेल्यूसिडा से बँधते हैं और वल्कुटीय अभिक्रिया ज़ोना को बदलकर आगे का प्रवेश रोकती है।

2. विदलन, गैस्ट्रुलाभवन व तंत्रिकाभवन

विदलन युग्मनज को बिना वृद्धि के कोरकखंडों (blastomeres) में बाँटता है, अतः कोशिकाएँ आधी होती जाती हैं और केंद्रक-से-कोशिकाद्रव्य अनुपात बढ़ता है। मेंढक व समुद्री अर्चिन के आरंभिक चक्रों में केवल S व M प्रावस्थाएँ होती हैं, जिन्हें दोलायमान cyclin B–Cdk1 (MPF) चलाता है, अतः n समकालिक विभाजनों से 2ⁿ कोशिकाएँ बनती हैं। Xenopus में लगभग 12 ऐसे चक्र (2¹² = 4,096 कोशिकाएँ) मध्य-ब्लास्टुला संक्रमण (midblastula transition) तक ले जाते हैं: युग्मनजी अनुलेखन आरंभ होता है, अंतराल प्रावस्थाएँ जुड़ती हैं और विभाजन असमकालिक हो जाते हैं। प्रतिरूप पीतक तय करता है, क्योंकि पीतक खाँच बनने में बाधा डालता है।

अंड का प्रकार व विदलन प्रतिरूप
पीतकविदलनउदाहरण
अल्प, समान रूप से फैला (समपीतकी)पूर्णभंजी: अरीय, सर्पिल या घूर्णीसमुद्री अर्चिन (अरीय); ऐनेलिड व मोलस्क (सर्पिल); यूथीरियन स्तनधारी (घूर्णी)
मध्यम, वनस्पति ध्रुव की ओर (मध्यपीतकी)पूर्णभंजी, असमान अरीयमेंढक
अत्यधिक, एक ध्रुव पर (अंत्यपीतकी)अंशभंजी बिंबाभ: पीतक पर कोरक-बिंबपक्षी, सरीसृप, अस्थिल मछलियाँ
केंद्रीय (केंद्रपीतकी)अंशभंजी सतही: केंद्रक संकोशिका (syncytium) में बँटते हैं, फिर सतह पर कोशिकीकरण होता हैअधिकांश कीट, Drosophila

गैस्ट्रुलाभवन ब्लास्टुला को तीन जनन-स्तरों में पुनर्व्यवस्थित करता है: अंतर्वलन (invagination) (समुद्री अर्चिन का आद्यांत्र), अंतर्लोटन (involution) (मेंढक का मध्यजनस्तर पृष्ठीय ओष्ठ पर मुड़कर भीतर जाता है), अंतर्प्रवेशन (ingression) (समुद्री अर्चिन की प्राथमिक मध्योतक; चूज़े की आद्य रेखा), स्तरविभाजन (delamination) और अधिवृद्धि (epiboly) (मेंढक के प्राणि-ध्रुव या ज़ेब्राफ़िश की आवरक परत का फैलना)। बाह्यजनस्तर से अधिचर्म, तंत्रिका तंत्र व तंत्रिका शिखा; मध्यजनस्तर से पृष्ठरज्जु, पेशी, कंकाल, वृक्क, हृदय, रक्त व जनद; अंतःजनस्तर से आहारनाल का अस्तर, यकृत, अग्न्याशय, फुफ्फुस उपकला व थायरॉइड बनते हैं। प्रोटोस्टोम में ब्लास्टोपोर मुख बनता है; ड्यूटेरोस्टोम (एकाइनोडर्म, कॉर्डेट) में गुदा। स्तनधारी ब्लास्टोसिस्ट सबसे पहले ट्रोफ़ोब्लास्ट (अपरा) को आंतरिक कोशिका पुंज (भ्रूण) से अलग करता है।

तंत्रिकाभवन में पृष्ठरज्जु ऊपर के बाह्यजनस्तर को तंत्रिका पट्टिका बनाने हेतु प्रेरित करती है, जिसके वलन जुड़कर तंत्रिका नलिका (मस्तिष्क व मेरुरज्जु) बनाते हैं; बंद न होने पर स्पाइना बिफ़िडा या ऐनेनसेफ़ली होती है। वलन-सीमाओं की कोशिकाएँ तंत्रिका शिखा (neural crest) बनती हैं, एक प्रवासी समूह जो मेलानोसाइट, संवेदी, स्वायत्त व आंत्र तंत्रिकाकोशिकाएँ, श्वान कोशिकाएँ, अधिवृक्क मध्यांश और चेहरे के कंकाल का बड़ा भाग बनाता है।

3. प्रतिबद्धता, विभेदन, प्रेरण व अंगजनन

विभेदन समतुल्य जीनोम से विभेदी जीन-अभिव्यक्ति है। केंद्रक-स्थानांतरण ने जीनोमी समतुल्यता सिद्ध की: विभेदित Xenopus टैडपोल कोशिकाओं के केंद्रक केंद्रकहीन अंडों में डालने पर विकास को वयस्क मेंढक तक ले जा सके (Gurdon), और भेड़ Dolly (1996) वयस्क स्तन-कोशिका के केंद्रक से बनी। प्रतिबद्धता के दो चरण हैं: विनिर्दिष्ट (specified) कोशिका तटस्थ वातावरण में स्वतः विभेदित होती है पर अभी मोड़ी जा सकती है; निर्धारित (determined) कोशिका कहीं और प्रत्यारोपित होने पर भी अपना भाग्य बनाए रखती है।

  • स्वायत्त (मोज़ेक) विनिर्देशन: कोशिकाद्रव्यी निर्धारक विशेष कोरकखंडों में बँटते हैं; अलग किया कोरकखंड वही बनाता है जो भ्रूण में बनाता, और उसके हटने से कमी रह जाती है। उदाहरण: ट्यूनिकेट का पीत-अर्धचंद्र कोशिकाद्रव्य (macho-1 mRNA) पूँछ की पेशी बनाता है।
  • सप्रतिबंध (नियामक) विनिर्देशन: भाग्य स्थिति व पड़ोसियों पर निर्भर है, अतः भ्रूण क्षतिपूर्ति कर सकता है। दो-कोशिकीय समुद्री अर्चिन के अलग किए कोरकखंड प्रत्येक एक पूर्ण छोटा लार्वा बनाते हैं (Driesch)।
  • संकोशिकीय विनिर्देशन: आरंभिक Drosophila भ्रूण में केंद्रक एक ही कोशिकाद्रव्य साझा करते हैं और प्रतिलेखन कारकों की प्रवणताएँ सीधे पढ़ते हैं।

अंगजनन प्रेरण पर चलता है: एक ऊतक अपने सक्षम (competent) पड़ोसी का भाग्य बदलता है। कशेरुकी नेत्र आदर्श शृंखला है: दृक्-आशय (अग्रमस्तिष्क से) सिर के बाह्यजनस्तर को लेंस प्लेकोड बनाने हेतु प्रेरित करता है; लेंस-आशय दृक्-चषक को रेटिना में ढालता है; फिर लेंस कॉर्निया को प्रेरित करता है। वृक्क पारस्परिक है: मेटानेफ़्रिक मध्योतक मूत्रवाहिनी कलिका को शाखित करती है, और कलिका मध्योतक से नेफ़्रॉन बनवाती है। पाद-कलिका में शिखर बाह्यजनस्तरी कटक (AER, FGF संकेत) समीपस्थ-से-दूरस्थ वृद्धि चलाता है, अतः इसे हटाने पर पाद छोटा कट जाता है (जितना पहले हटाएँ, उतना अधिक); ध्रुवण सक्रियता क्षेत्र (ZPA, Sonic hedgehog) अग्र–पश्च अंगुलि-प्रतिरूप तय करता है, और अग्र किनारे पर ZPA प्रत्यारोपण से अंगुलियों का दर्पण-प्रतिबिंब द्विगुणन होता है; पृष्ठीय बाह्यजनस्तर (Wnt7a) पृष्ठ–अधर पहचान तय करता है। BMP-चालित ऐपॉप्टोसिस अंगुलियों के बीच का ऊतक हटाता है; बत्तख के पैर में जहाँ BMP-विरोधी अभिव्यक्त होता है, वहाँ जाल बना रहता है।

4. परिवर्धन का आनुवंशिक व आणविक आधार

Drosophila का अग्र–पश्च अक्ष एक अनुलेखी सोपान (transcriptional cascade) से बनता है, जिसमें जीनों का प्रत्येक वर्ग पिछले वर्ग के प्रतिरूप को परिष्कृत करता है। मातृ bicoid mRNA अग्र ध्रुव पर बँधा रहता है; उसका प्रोटीन विसरित होकर प्रवणता बनाता है और मॉर्फ़ोजन के रूप में उच्च सांद्रता पर युग्मनजी hunchback को सक्रिय करता है। पश्च ध्रुव पर मातृ nanos hunchback mRNA के अनुवाद का दमन करता है। ये मातृ-प्रभाव जीन हैं, अतः भ्रूण का लक्षणप्ररूप उसकी माता के जीनप्ररूप पर चलता है, अपने पर नहीं।

खंडीभवन व होमियोटिक पदानुक्रम और उत्परिवर्ती लक्षणप्ररूप
वर्गउदाहरणकार्य-हानि लक्षणप्ररूप
मातृ-प्रभाव (निर्देशांक)bicoid, nanos, torso जीनbicoid माताएँ: भ्रूणों में सिर व वक्ष नहीं, दोनों सिरों पर पश्च अंतस्थ संरचनाएँ
अंतराल (gap)hunchback, Krüppel, knirps, giant जीनलगातार कई खंड गायब
युग्म-नियम (सात पट्टियाँ)even-skipped, fushi tarazu, hairy जीनएकांतर खंड-चौड़ाई के भाग गायब: खंड आधे
खंड-ध्रुवताengrailed, wingless, hedgehog जीनप्रत्येक खंड का एक भाग शेष के दर्पण-प्रतिबिंब से प्रतिस्थापित
होमियोटिक (Hox)Antennapedia व bithorax संकुल (Antp, Ubx)खंड-पहचान बदलती है: Ubx की हानि हॉल्टियर-युक्त तीसरे वक्ष खंड को पंख-युक्त दूसरे जैसा बना देती है

Hox जीन होमियोडोमेन प्रतिलेखन कारक कोडित करते हैं (180-bp होमियोबॉक्स द्वारा कोडित 60-अमीनो-अम्ल का DNA-बंधक डोमेन) और सहरेखीयता (colinearity) दिखाते हैं: गुणसूत्र पर उनका क्रम शरीर-अक्ष पर उनकी अभिव्यक्ति के क्रम से मेल खाता है। स्तनधारियों में चार Hox संकुल (HoxA से HoxD) हैं। संकेतन पथों का एक छोटा औज़ार-समूह हर अंग में दोहराया जाता है: Wnt, Hedgehog, TGF-β/BMP, FGF (ग्राही टाइरोसिन काइनेज़), Notch–Delta (संपर्क-संकेतन जो पार्श्व संदमन से पड़ोसियों को भिन्न बनाता है) और रेटिनोइक अम्ल (केंद्रकीय ग्राही का लिगैंड)।

📖 उभयचर संगठक
Spemann व Mangold (1924) ने भिन्न वर्णकता वाले न्यूटों के बीच पृष्ठीय ब्लास्टोपोर ओष्ठ प्रत्यारोपित किया और दूसरा शरीर-अक्ष पाया, जिसकी तंत्रिका नलिका अधिकतर परपोषी कोशिकाओं से बनी थी: प्रत्यारोप ने उसे प्रेरित किया था। आणविक स्तर पर, शुक्राणु-प्रवेश के बाद वल्कुटीय घूर्णन पृष्ठ ओर β-catenin को स्थिर करता है (Nieuwkoop केंद्र), जो संगठक को प्रेरित करता है; संगठक chordin, noggin व follistatin स्रावित करता है, जो BMP को बाँधते हैं। BMP से मुक्त बाह्यजनस्तर तंत्रिकीय बनता है, अतः अधिचर्म BMP-निर्देशित भाग्य है और तंत्रिका ऊतक डिफ़ॉल्ट।

5. उभयचरों व कीटों में कायांतरण

उभयचर कायांतरण थायरॉइड हॉर्मोन से चलता है। ग्रंथि मुख्यतः T₄ छोड़ती है, जिसे लक्ष्य ऊतकों में डीआयोडिनेज़ अधिक सक्रिय T₃ में बदलते हैं; T₃ केंद्रकीय थायरॉइड हॉर्मोन ग्राहियों से बँधकर अनुलेखन नियंत्रित करता है। एक ही संकेत क्षेत्र-विशिष्ट प्रतिक्रियाएँ देता है: पूँछ व गलफड़े ऐपॉप्टोसिस व आधात्री-अपघटक एंज़ाइमों से अवशोषित होते हैं, पाद बढ़ते हैं, आहारनाल मांसाहारी भोजन हेतु पुनर्गठित होती है, लार्वा हीमोग्लोबिन का स्थान वयस्क हीमोग्लोबिन लेता है, और यकृत यूरिया-चक्र एंज़ाइम प्रेरित करता है जिससे उत्सर्जन अमोनिया से यूरिया की ओर खिसकता है। थायरॉइड को अवरुद्ध करने पर (थायरॉइडोच्छेदन या थायोयूरिया जैसे गॉइट्रोजन) विशाल टैडपोल बनते हैं जो कभी कायांतरित नहीं होते; ऐक्सोलॉटल लार्वा-रूप में रहकर भी प्रजनन करता है (पीडोमॉर्फ़ोसिस) पर थायरॉइड हॉर्मोन देने पर कायांतरित हो जाता है।

कीट अकायांतरी (सिल्वरफ़िश: कोई कायांतरण नहीं), अपूर्णकायांतरी (कॉकरोच, टिड्डा: निम्फ़ क्रमशः निर्मोचन कर वयस्क बनते हैं, प्यूपा नहीं) या पूर्णकायांतरी (मक्खियाँ, भृंग, तितलियाँ: लार्वा, प्यूपा व वयस्क, वयस्क संरचनाएँ इमेजिनल डिस्क से बनती हैं) होते हैं। मस्तिष्क का प्रोथोरेसिकोट्रॉपिक हॉर्मोन (PTTH) अग्रवक्षीय ग्रंथि से एक्डाइसोन स्रावित करवाता है, जो ऊतकों में सक्रिय 20-हाइड्रॉक्सीएक्डाइसोन में बदलकर प्रत्येक निर्मोचन आरंभ करता है। कॉर्पोरा ऐलाटा का किशोर हॉर्मोन (JH) निर्मोचन का प्रकार तय करता है: उच्च JH से लार्वा निर्मोचन, निम्न JH से प्यूपा निर्मोचन और JH न होने पर वयस्क निर्मोचन।

⚠️ JH निर्मोचन नहीं करवाता
निर्मोचन का संकेत एक्डाइस्टेरॉइड है; JH केवल यह तय करता है कि निर्मोचन से क्या बनेगा। अतः नवीन लार्वा से कॉर्पोरा ऐलाटा हटाने पर समय-पूर्व प्यूपा निर्मोचन व लघु वयस्क मिलता है, जबकि अंतिम-इन्स्टार लार्वा में सक्रिय कॉर्पोरा ऐलाटा प्रत्यारोपित करने पर एक अतिरिक्त लार्वा इन्स्टार बनता है।

6. परिवर्धन जीवविज्ञान के मॉडल जीव

मॉडल जीव व्यावहारिक गुणों (छोटी पीढ़ी, अनेक भ्रूण, सुगम पहुँच, आनुवंशिक औज़ार) के लिए चुना जाता है और इस दाँव पर अध्ययन किया जाता है कि उसकी क्रियाविधियाँ साझा हैं, एक दाँव जिसे संरक्षित Hox जीनों व संकेतन पथों ने सही सिद्ध किया है।

प्रत्येक मॉडल किस काम का है
जीवव्यावहारिक गुणप्रमुख खोजें
Drosophila melanogaster25 °C पर लगभग 10 दिन की पीढ़ी, पॉलीटीन गुणसूत्र, बैलेंसर गुणसूत्र, बड़े उत्परिवर्ती अनुवीक्षणमातृ, खंडीभवन व Hox जीन; Notch, Hedgehog व Wnt पथ
Caenorhabditis elegansपारदर्शी, स्व-निषेची उभयलिंगी जिसकी कोशिका-वंशावली अपरिवर्ती है (वयस्क में 959 कायिक केंद्रक)क्रमादेशित कोशिका-मृत्यु के जीन (131 कोशिकाएँ मरती हैं), पहला microRNA (lin-4), RNA व्यतिकरण
ज़ेब्राफ़िश, Danio rerioमाता के बाहर विकसित होने वाले पारदर्शी भ्रूण, प्रति संकरण अनेककशेरुकी अग्रगामी आनुवंशिक अनुवीक्षण, अंग-निर्माण, हृदय व पख-पुनर्जनन
Xenopus laevisहॉर्मोन-इंजेक्शन से प्राप्य बड़े अंड; सूक्ष्म-इंजेक्शन व एक्सप्लांटप्रेरण व संगठक, MPF व कोशिका चक्र, केंद्रक-स्थानांतरण
चूज़ा, Gallus gallusकवच की खिड़की से सुलभ भ्रूण; प्रत्यारोपण व बीड-प्रत्यारोपणपाद का AER व ZPA, आद्य रेखा, तंत्रिका शिखा प्रवास
चूहा, Mus musculusभ्रूणीय स्तंभ कोशिकाओं, जीन नॉकआउट व पारजीनी तकनीकों वाला स्तनधारीस्तनधारी जीन-कार्य, जीनोमी अंकन, अपरा-निर्माण
समुद्री अर्चिनबाह्य निषेचन, स्पष्ट समकालिक भ्रूणनिषेचन व बहुशुक्राणुता अवरोध, साइक्लिन, जीन नियामक जाल

7. स्तंभ कोशिकाएँ

स्तंभ कोशिका स्व-नवीकरण भी करती है और विभेदित कोशिकाएँ भी देती है, या तो असममित विभाजन से (एक संतति स्तंभ कोशिका रहती है) या समष्टि-असममिति से (कुछ विभाजन दो स्तंभ कोशिकाएँ, कुछ दो प्रतिबद्ध कोशिकाएँ देते हैं)। स्तंभ कोशिकाएँ एक निकेत (niche) में रहती हैं जो उन्हें अविभेदित रखता है: Drosophila की जनन-स्तंभ कोशिकाओं को थामने वाली हब या कैप कोशिकाएँ, रक्तकोशिकाजनक स्तंभ कोशिकाओं का अस्थिमज्जा निकेत, और आंत्र-गुहिका का आधार जहाँ Lgr5⁺ स्तंभ कोशिकाएँ Wnt देने वाली पैनेथ कोशिकाओं के पास बैठती हैं।

शक्तता (potency)
शक्तताक्या बना सकती हैउदाहरण
पूर्णशक्त (totipotent)ट्रोफ़ोब्लास्ट जैसे भ्रूणबाह्य ऊतकों सहित पूरा जीवयुग्मनज, आरंभिक स्तनधारी कोरकखंड
बहुशक्त (pluripotent)तीनों जनन-स्तर व जनन कोशिकाएँ, पर ट्रोफ़ोब्लास्ट नहींआंतरिक कोशिका पुंज, भ्रूणीय स्तंभ (ES) कोशिकाएँ, iPS कोशिकाएँ
बहुक्षम (multipotent)एक ऊतक-परिवार की अनेक कोशिका-प्रकाररक्तकोशिकाजनक स्तंभ कोशिकाएँ (सभी रक्त वंश), तंत्रिका स्तंभ कोशिकाएँ
एकशक्त (unipotent)एक विभेदित प्रकारशुक्राणुजनी स्तंभ कोशिकाएँ (केवल शुक्राणु)

ES कोशिकाएँ आंतरिक कोशिका पुंज से आती हैं (चूहा 1981, मानव 1998)। बहुशक्तता की जाँच प्रतिरक्षाहीन चूहों में टेराटोमा बनने से और, चूहे में, काइमेरा के सभी ऊतकों व जनन-वंश में योगदान से होती है। प्रेरित बहुशक्त स्तंभ (iPS) कोशिकाएँ: Takahashi व Yamanaka (2006) ने चूहे के फ़ाइब्रोब्लास्ट को चार प्रतिलेखन कारकों, Oct3/4, Sox2, Klf4 व c-Myc, से पुनःक्रमादेशित किया; Gurdon व Yamanaka ने 2012 का नोबेल पुरस्कार साझा किया। iPS कोशिकाएँ भ्रूण-उपयोग व प्रतिरक्षी असंगति से बचाती हैं, पर c-Myc एक ऑन्कोजीन है और बची अविभेदित कोशिकाएँ टेराटोमा बना सकती हैं। अस्थिमज्जा (रक्तकोशिकाजनक स्तंभ कोशिका) प्रत्यारोपण ही स्थापित नैदानिक स्तंभ-कोशिका चिकित्सा है।

मुख्य बिंदु

  • एक प्राथमिक शुक्राणुकोशिका 4 शुक्राणु, एक प्राथमिक अंडकोशिका 1 अंड व 2 या 3 ध्रुवीय काय देती है; DNA 4C (प्राथमिक) से 2C (द्वितीयक) से 1C (शुक्राणुप्रसू या अंड) होता है। स्तनधारी अंडकोशिकाएँ प्रोफ़ेज़ I के डिप्लोटीन पर और फिर मेटाफ़ेज़ II पर ठहरती हैं।
  • पीतक विदलन तय करता है: समपीतकी पूर्णभंजी, अंत्यपीतकी बिंबाभ, केंद्रपीतकी सतही। n समकालिक विदलन 2ⁿ कोशिकाएँ देते हैं; Xenopus का मध्य-ब्लास्टुला संक्रमण लगभग 12 चक्रों के बाद आता है।
  • मोज़ेक भ्रूण वह खो देते हैं जो हटाया गया कोरकखंड बनाता; नियामक भ्रूण क्षतिपूर्ति करते हैं। अंग सक्षम ऊतक के प्रेरण से बनते हैं, प्रायः पारस्परिक (नेत्र, वृक्क, पाद का AER व ZPA)।
  • Drosophila का प्रतिरूपण मातृ-प्रभाव (bicoid, nanos) से अंतराल, युग्म-नियम, खंड-ध्रुवता व Hox जीनों तक सोपानित होता है, प्रत्येक का पहचानने योग्य उत्परिवर्ती लक्षणप्ररूप है; उभयचर संगठक BMP का विरोध करके काम करता है।
  • उभयचर कायांतरण को केंद्रकीय ग्राहियों पर क्रियाशील T₃ चाहिए; कीट निर्मोचन को 20-हाइड्रॉक्सीएक्डाइसोन चाहिए, और किशोर हॉर्मोन लार्वा, प्यूपा या वयस्क परिणाम तय करता है।
  • पूर्णशक्त > बहुशक्त (ICM, ES, iPS: ट्रोफ़ोब्लास्ट नहीं) > बहुक्षम (HSC) > एकशक्त। iPS कोशिकाएँ Oct3/4, Sox2, Klf4 व c-Myc से बनीं; स्तंभ कोशिकाएँ अपने निकेत पर निर्भर हैं।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. मनुष्य सहित अधिकांश स्तनधारियों में अंडोत्सर्ग के समय मुक्त अंडकोशिका किस अवस्था पर ठहरी रहती है?

    1. प्रोफ़ेज़ I का डिप्लोटीन, वह अवस्था जिस पर वह भ्रूणावस्था से प्रतीक्षा कर रही है
    2. दूसरे अर्धसूत्री विभाजन का मेटाफ़ेज़, जो शुक्राणु-प्रवेश होने पर ही पूरा होता है
    3. पहले अर्धसूत्री विभाजन का मेटाफ़ेज़, जब कोई ध्रुवीय काय अभी नहीं बना
    4. अंतिम अंडजनी समसूत्री विभाजन के बाद की G2 प्रावस्था, अर्धसूत्री विभाजन आरंभ होने से पहले
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — दूसरे अर्धसूत्री विभाजन का मेटाफ़ेज़, जो शुक्राणु-प्रवेश होने पर ही पूरा होता है

    LH उछाल डिप्लोटीन ठहराव हटाता है, अतः अंडोत्सर्ग से पहले अर्धसूत्री विभाजन I पूरा होकर पहला ध्रुवीय काय बाहर निकल जाता है; फिर द्वितीयक अंडकोशिका मेटाफ़ेज़ II पर ठहरती है और शुक्राणु-प्रवेश के बाद ही अर्धसूत्री विभाजन II पूरा कर दूसरा ध्रुवीय काय देती है। डिप्लोटीन भ्रामक उत्तर है, पर वह ठहराव LH उछाल से पहले पुटक के भीतर की प्राथमिक अंडकोशिका का है, अंडोत्सर्जित कोशिका का नहीं।
  2. एक समुद्री अर्चिन अंड को ऐसी औषधि से उपचारित किया जाता है जो उसके IP₃ ग्राहियों को अवरुद्ध करती है, फिर उसका वीर्यसेचन किया जाता है। निषेचन की कौन-सी घटना विफल होगी?

    1. अंड-जेली के संपर्क पर शुक्राणु के एक्रोसोमी आशय का बहिःक्षेपण
    2. शुक्राणु प्रोटीन bindin का अंड-आवरण पर अपने ग्राही से बंधन
    3. शुक्राणु की प्लाज़्मा झिल्ली का अंड की प्लाज़्मा झिल्ली से संलयन
    4. वल्कुटीय कणिकाओं का बहिःक्षेपण और निषेचन आवरण का उठना
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — वल्कुटीय कणिकाओं का बहिःक्षेपण और निषेचन आवरण का उठना

    संलयन के बाद IP₃ ER के Ca²⁺ चैनल खोलता है और बनी Ca²⁺ तरंग वल्कुटीय कणिका बहिःक्षेपण करवाती है, जो निषेचन आवरण उठाता है (मंद अवरोध)। अंड के IP₃ ग्राही अवरुद्ध होने पर यही चरण विफल होता है। एक्रोसोम अभिक्रिया भ्रामक विकल्प है क्योंकि वह भी Ca²⁺-प्रेरित बहिःक्षेपण है, पर वह शुक्राणु में, संलयन से पहले, होती है और अंड के ग्राहियों का उपयोग नहीं करती; bindin बंधन व झिल्ली-संलयन भी IP₃ चरण से पहले होते हैं।
  3. एक स्तनधारी में वृषण की 250 प्राथमिक व 120 द्वितीयक शुक्राणुकोशिकाएँ, तथा अंडाशय की 80 प्राथमिक व 40 द्वितीयक अंडकोशिकाएँ, सभी सामान्य रूप से अर्धसूत्री विभाजन पूरा करती हैं (मान लें प्रत्येक द्वितीयक अंडकोशिका निषेचित होती है ताकि अर्धसूत्री विभाजन II पूरा हो)। बने कुल क्रियाशील युग्मकों (शुक्राणु व अंड) की संख्या ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 1360

    प्रत्येक प्राथमिक शुक्राणुकोशिका 4 शुक्राणु देती है: 250 × 4 = 1000। द्वितीयक शुक्राणुकोशिका में केवल अर्धसूत्री विभाजन II शेष है, अतः 2: 120 × 2 = 240। प्रत्येक अंडकोशिका, प्राथमिक हो या द्वितीयक, केवल एक अंड देती है, शेष उत्पाद ध्रुवीय काय हैं: 80 + 40 = 120। कुल = 1000 + 240 + 120 = 1360। अंडकोशिकाओं या द्वितीयक शुक्राणुकोशिकाओं को 4 से गुणा करना प्रचलित भूलें हैं।
  4. एक द्विगुणित स्तनधारी के शुक्राणुप्रसू में 3.2 pg केंद्रकीय DNA है। उसी जंतु की प्रोफ़ेज़ I में स्थित प्राथमिक शुक्राणुकोशिका की केंद्रकीय DNA मात्रा pg में ____ है (एक दशमलव स्थान तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 12.8

    शुक्राणुप्रसू अगुणित है और उसके गुणसूत्र अप्रतिकृत हैं, अतः वह 1C = 3.2 pg है। प्राथमिक शुक्राणुकोशिका द्विगुणित है और अर्धसूत्री विभाजन से पहले S प्रावस्था पूरी कर चुकी है, अतः प्रोफ़ेज़ I में वह 4C = 4 × 3.2 = 12.8 pg है। 6.4 (2C) उत्तर देना अर्धसूत्रीपूर्व S प्रावस्था भूलना है; 6.4 pg द्वितीयक शुक्राणुकोशिका की मात्रा है।
  5. एक शोधकर्ता युग्मनज से वयस्क तक प्रत्येक कायिक कोशिका-विभाजन का अनुसरण करना चाहता है और पहले से ठीक-ठीक जानना चाहता है कि कौन-सी कोशिकाएँ क्रमादेशित मृत्यु से गुज़रेंगी। इसके लिए कौन-सा मॉडल जीव सबसे उपयुक्त है?

    1. Drosophila melanogaster, क्योंकि बैलेंसर गुणसूत्रों से घातक उत्परिवर्तन बनाए रखे जा सकते हैं
    2. ज़ेब्राफ़िश, क्योंकि इसके पारदर्शी भ्रूण माता के शरीर के बाहर विकसित होते हैं
    3. Caenorhabditis elegans, क्योंकि इसकी संपूर्ण कायिक कोशिका-वंशावली अपरिवर्ती है
    4. Xenopus laevis, क्योंकि इसके बड़े अंडों में इंजेक्शन व विच्छेदन आसान है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — *Caenorhabditis elegans*, क्योंकि इसकी संपूर्ण कायिक कोशिका-वंशावली अपरिवर्ती है

    C. elegans में प्रत्येक व्यष्टि में वही विभाजन होते हैं, पूरी कायिक वंशावली अनुरेखित है, और उभयलिंगी विकास में मरने वाली 131 कोशिकाएँ नाम से ज्ञात हैं, इसी से ced कोशिका-मृत्यु जीन खोजे गए। ज़ेब्राफ़िश भ्रामक उत्तर है क्योंकि उसके भ्रूण पारदर्शी हैं, पर उसकी कोशिका-वंशावलियाँ व्यष्टियों में भिन्न होती हैं, अतः कोशिका-दर-कोशिका भाग्य का पूर्वानुमान नहीं हो सकता। बैलेंसर व इंजेक्शन-योग्य अंड अन्य दोनों की वास्तविक शक्तियाँ हैं, पर इस उद्देश्य के लिए नहीं।
  6. एक भ्रूण में आरंभिक विदलन समकालिक हैं; पहला विदलन निषेचन के 90 मिनट बाद पूरा होता है और आगे का प्रत्येक विदलन 30 मिनट लेता है। सभी विभाजन समकालिक रहें और कोई कोशिका न मरे, तो निषेचन के 250 मिनट बाद कोरकखंडों की संख्या ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 64

    विदलन 90, 120, 150, 180, 210 व 240 मिनट पर पूरे होते हैं; अगला 270 मिनट पर पूरा होगा, जो पूछे गए समय के बाद है। यानी 6 विदलन, और n समकालिक विदलन 2ⁿ कोशिकाएँ देते हैं: 2⁶ = 64। 250 को 30 से भाग देकर यह भूल जाना कि पहला विदलन 90 मिनट लेता है, या 2-कोशिका अवस्था को शून्य विदलन गिनना, प्रचलित भूलें हैं।
  7. कशेरुकियों में जनन-स्तरों व उनके व्युत्पन्नों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. त्वचा के मेलानोसाइट और अधिवृक्क मध्यांश की क्रोमैफ़िन कोशिकाएँ दोनों तंत्रिका शिखा से बनती हैं
    2. पृष्ठरज्जु मध्यजनस्तरी है और ऊपर के बाह्यजनस्तर को तंत्रिका पट्टिका बनाने हेतु प्रेरित करती है
    3. समुद्री अर्चिन व कशेरुकियों जैसे ड्यूटेरोस्टोम में ब्लास्टोपोर मुख बनता है
    4. यकृत की हेपेटोसाइट और फुफ्फुस की अस्तर उपकला मध्यजनस्तर से व्युत्पन्न हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — त्वचा के मेलानोसाइट और अधिवृक्क मध्यांश की क्रोमैफ़िन कोशिकाएँ दोनों तंत्रिका शिखा से बनती हैं; B — पृष्ठरज्जु मध्यजनस्तरी है और ऊपर के बाह्यजनस्तर को तंत्रिका पट्टिका बनाने हेतु प्रेरित करती है

    तंत्रिका शिखा कोशिकाएँ प्रवास कर वर्णक कोशिकाएँ, अधिवृक्क मध्यांश, परिधीय तंत्रिकाकोशिकाएँ व ग्लिया बनाती हैं, और पृष्ठरज्जु (कॉर्डामीसोडर्म) तंत्रिका पट्टिका-निर्माण प्रेरित करती है। ड्यूटेरोस्टोम में ब्लास्टोपोर गुदा बनता है और मुख बाद में बनता है; पहले मुख का प्रतिरूप प्रोटोस्टोम का है। हेपेटोसाइट व फुफ्फुस उपकला आहार-नलिका के अंतःजनस्तरी उभार हैं; केवल उनका संयोजी ऊतक व वाहिकाएँ मध्यजनस्तरी हैं।
  8. एक निषेचित Xenopus अंड में α-amanitin ऐसी मात्रा में इंजेक्ट किया जाता है जो RNA polymerase II को अवरुद्ध कर दे। अपेक्षित परिणाम क्या है?

    1. विदलन लगभग ब्लास्टुला अवस्था तक सामान्य चलता है, फिर भ्रूण गैस्ट्रुलाभवन में विफल रहता है
    2. पहला विदलन विफल होता है, क्योंकि प्रत्येक विभाजन को नव-अनुलेखित cyclin mRNA चाहिए
    3. विकास सामान्य रूप से टैडपोल तक चलता है, क्योंकि सभी आरंभिक अवस्थाएँ मातृ प्रोटीन नियंत्रित करते हैं
    4. केवल प्राणि-ध्रुव की कोशिकाएँ विदलित होती हैं, क्योंकि वनस्पति ध्रुव की पीतकयुक्त कोशिकाओं को विभाजन हेतु युग्मनजी अनुलेख चाहिए
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — विदलन लगभग ब्लास्टुला अवस्था तक सामान्य चलता है, फिर भ्रूण गैस्ट्रुलाभवन में विफल रहता है

    मध्य-ब्लास्टुला संक्रमण (लगभग 12 चक्र) से पहले Xenopus का विदलन अंड में संचित मातृ mRNA व प्रोटीनों पर चलता है, जिनमें cyclin mRNA भी है, अतः अनुलेखन रोकने से विदलन नहीं रुकता। मध्य-ब्लास्टुला संक्रमण पर युग्मनजी अनुलेखन अनिवार्य हो जाता है, अतः भ्रूण गैस्ट्रुलाभवन से पहले रुक जाता है। cyclin वाला भ्रामक विकल्प गलत है क्योंकि cyclin संचित मातृ mRNA से अनूदित होता है; विकास टैडपोल तक नहीं पहुँच सकता क्योंकि गैस्ट्रुलाभवन को युग्मनजी जीन चाहिए।
  9. एक ट्यूनिकेट भ्रूण में पीत-अर्धचंद्र कोशिकाद्रव्य पाने वाले कोरकखंड-युग्म को हटाने पर बिना पूँछ-पेशी का लार्वा बनता है, और वही कोरकखंड अलग से संवर्धित करने पर भी पेशी बनाते हैं। ये परिणाम दिखाते हैं कि पूँछ-पेशी का भाग्य किसके द्वारा विनिर्दिष्ट होता है?

    1. सप्रतिबंध विनिर्देशन, जिसमें गैस्ट्रुलाभवन के बाद पड़ोसी कोशिकाएँ पेशी प्रेरित करती हैं
    2. संकोशिकीय विनिर्देशन, जिसमें साझा केंद्रक प्रतिलेखन कारकों की प्रवणता पढ़ते हैं
    3. उन कोशिकाओं में बँटने वाले मातृ निर्धारकों द्वारा स्वायत्त विनिर्देशन
    4. नियामक विनिर्देशन, जिसमें शेष कोशिकाएँ खोए कोरकखंडों की पूर्ति करती हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — उन कोशिकाओं में बँटने वाले मातृ निर्धारकों द्वारा स्वायत्त विनिर्देशन

    जो कोशिका अलग किए जाने पर भी अपना सामान्य उत्पाद बनाए, और जिसके हटने से बनी कमी दूसरी कोशिकाएँ न भरें, वह स्वायत्त (मोज़ेक) रूप से विनिर्दिष्ट है; ट्यूनिकेट में निर्धारक पीत-अर्धचंद्र का मातृ macho-1 mRNA है। सप्रतिबंध विनिर्देशन भ्रामक विकल्प है, पर उससे अपेक्षा होती कि अलग किए कोरकखंड पड़ोसियों के बिना पेशी न बनाएँ। नियामक पूर्ति इसलिए नहीं क्योंकि लार्वा बिना पूँछ-पेशी ही रहता है।
  10. चूज़े की आरंभिक पंख-कलिका के अग्र किनारे पर शिखर बाह्यजनस्तरी कटक के नीचे Sonic hedgehog प्रोटीन में भीगा बीड प्रत्यारोपित किया जाता है। अपेक्षित परिणाम क्या है?

    1. दूरस्थ भागों से रहित छोटा कटा पंख, क्योंकि कटक का संकेत बाधित हो गया
    2. अग्र–पश्च अक्ष पर अंगुलियों का दर्पण-प्रतिबिंब द्विगुणन
    3. ऐसा पंख जिसकी पृष्ठ व अधर दोनों सतहों पर अधर संरचनाएँ हों
    4. सामान्य पंख, क्योंकि पश्च ZPA अंगुलि-पहचान पर नियंत्रण बनाए रखता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — अग्र–पश्च अक्ष पर अंगुलियों का दर्पण-प्रतिबिंब द्विगुणन

    Sonic hedgehog ध्रुवण सक्रियता क्षेत्र का संकेत है। अग्र ओर दूसरा स्रोत दूसरी पश्च-से-अग्र प्रवणता बनाता है, अतः अंगुलियाँ दर्पण-प्रतिबिंब में बनती हैं (जैसे 2-3-4 के स्थान पर 4-3-2-2-3-4)। कटा पंख भ्रामक विकल्प है, पर वह AER हटाने (FGF की कमी) से होता है, अतिरिक्त Shh से नहीं; पृष्ठ–अधर पहचान पृष्ठीय बाह्यजनस्तर के Wnt7a पर निर्भर है।
  11. एक पूर्णकायांतरी कीट के आरंभिक-इन्स्टार लार्वा से कॉर्पोरा ऐलाटा शल्य-क्रिया से हटा दिए जाते हैं, जबकि मस्तिष्क व अग्रवक्षीय ग्रंथियाँ अक्षत रहती हैं। अगले निर्मोचन पर लार्वा से क्या अपेक्षित है?

    1. निर्मोचन ही न करना, क्योंकि किशोर हॉर्मोन स्वयं निर्मोचन हॉर्मोन है
    2. अतिरिक्त लार्वा निर्मोचन करके ऐसा विशाल लार्वा बनना जो कभी प्यूपा न बने
    3. फिर से लार्वा में निर्मोचन करना, क्योंकि लार्वा-पहचान हेतु अकेला एक्डाइसोन पर्याप्त है
    4. समय से पहले प्यूपा में निर्मोचन करना और फिर लघु पर पूर्ण वयस्क के रूप में निकलना
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — समय से पहले प्यूपा में निर्मोचन करना और फिर लघु पर पूर्ण वयस्क के रूप में निकलना

    अग्रवक्षीय ग्रंथियाँ अब भी एक्डाइसोन बनाती हैं, अतः निर्मोचन होता रहता है, पर निर्मोचन को लार्वीय बनाए रखने वाला कॉर्पोरा ऐलाटा का किशोर हॉर्मोन है। JH के बिना अगली एक्डाइस्टेरॉइड तरंग प्यूपा निर्मोचन देती है, और छोटा कीट लघु वयस्क में कायांतरित होता है। विशाल लार्वा भ्रामक विकल्प है, पर वह तब होता है जब अंतिम-इन्स्टार लार्वा में सक्रिय कॉर्पोरा ऐलाटा जोड़े जाएँ, यानी उलटा प्रयोग।
  12. ऐन्यूरन (मेंढक) कायांतरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. लक्ष्य ऊतकों में डीआयोडिनेज़ द्वारा T₄ से बना T₃ केंद्रकीय थायरॉइड हॉर्मोन ग्राहियों के माध्यम से कार्य करता है
    2. पूँछ के अवशोषण में पूँछ-कोशिकाओं का ऐपॉप्टोसिस और आधात्री का एंज़ाइमी अपघटन होता है
    3. यकृत यूरिया-चक्र एंज़ाइम प्रेरित करता है, जिससे नाइट्रोजन उत्सर्जन अमोनिया से यूरिया की ओर खिसकता है
    4. थायोयूरिया में पाले गए टैडपोल नियंत्रण से पहले कायांतरित होकर छोटे मेंढक बनते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — लक्ष्य ऊतकों में डीआयोडिनेज़ द्वारा T₄ से बना T₃ केंद्रकीय थायरॉइड हॉर्मोन ग्राहियों के माध्यम से कार्य करता है; B — पूँछ के अवशोषण में पूँछ-कोशिकाओं का ऐपॉप्टोसिस और आधात्री का एंज़ाइमी अपघटन होता है; C — यकृत यूरिया-चक्र एंज़ाइम प्रेरित करता है, जिससे नाइट्रोजन उत्सर्जन अमोनिया से यूरिया की ओर खिसकता है

    T₃ सक्रिय हॉर्मोन है और केंद्रकीय ग्राहियों द्वारा अनुलेखन नियंत्रित करता है; यह पूँछ-कोशिकाओं की ऐपॉप्टोसिस द्वारा मृत्यु करवाता है जबकि आधात्री मेटैलोप्रोटीनेज़ आधात्री हटाते हैं, और स्थल की ओर बढ़ते जंतु में यूरिया-चक्र एंज़ाइम प्रेरित करता है। थायोयूरिया एक गॉइट्रोजन है जो थायरॉइड हॉर्मोन संश्लेषण रोकता है, अतः उपचारित टैडपोल टैडपोल के रूप में ही बढ़ते रहते हैं और कायांतरित नहीं होते; वे जल्दी कायांतरित नहीं होते।
  13. एक Drosophila मादा, जो कार्य-हानि bicoid युग्मविकल्पी के लिए समयुग्मजी है, का संगम वन्य-प्रकार नर से कराया जाता है। उसके भ्रूण कैसे होंगे?

    1. सामान्य, क्योंकि प्रत्येक भ्रूण को पिता से वन्य-प्रकार bicoid युग्मविकल्पी मिलता है
    2. प्रत्येक एकांतर खंड से रहित, क्योंकि bicoid सात पट्टियों में अभिव्यक्त होता है
    3. सिर व वक्ष से रहित, दोनों सिरों पर पश्च अंतस्थ संरचनाओं सहित
    4. दो-सिर वाले, क्योंकि पश्च Nanos प्रोटीन अब समान रूप से फैल जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — सिर व वक्ष से रहित, दोनों सिरों पर पश्च अंतस्थ संरचनाओं सहित

    bicoid मातृ-प्रभाव जीन है: उसका mRNA माता बनाती है और निषेचन से पहले अंड के अग्र ध्रुव पर रख देती है, अतः भ्रूण का लक्षणप्ररूप माता के जीनप्ररूप पर चलता है। Bicoid प्रवणता न होने पर अग्र संरचनाएँ नहीं बनतीं और दोनों सिरों पर पश्च अंतस्थ संरचनाएँ बनती हैं। पितृ युग्मविकल्पी से सामान्य भ्रूण वाला भ्रामक उत्तर यह भूलता है कि युग्मनजी अनुलेखन प्रवणता बनाने के लिए बहुत देर से आरंभ होता है। सात पट्टियाँ युग्म-नियम जीनों का वर्णन हैं, और Nanos पश्च ही रहता है।
  14. एक Drosophila लार्वा में केवल आधे खंडों की डेंटिकल पट्टियाँ हैं, और प्रत्येक एकांतर खंड-चौड़ाई का भाग गायब है। उत्परिवर्तन सबसे संभवतः किसमें है?

    1. fushi tarazu, सात पट्टियों में अभिव्यक्त एक युग्म-नियम जीन
    2. Krüppel, एक चौड़ी केंद्रीय पट्टी में अभिव्यक्त एक अंतराल जीन
    3. engrailed, 14 पट्टियों में अभिव्यक्त एक खंड-ध्रुवता जीन
    4. Ultrabithorax, bithorax संकुल का एक होमियोटिक जीन
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — *fushi tarazu*, सात पट्टियों में अभिव्यक्त एक युग्म-नियम जीन

    युग्म-नियम जीन सात पट्टियों में, प्रत्येक दो खंडों पर एक, अभिव्यक्त होते हैं, अतः किसी एक की हानि एकांतर खंड-चौड़ाई के भाग हटाकर खंड-संख्या आधी कर देती है; जापानी में fushi tarazu का अर्थ “बहुत कम खंड” है। Krüppel जैसा अंतराल उत्परिवर्ती लगातार खंडों का एक खंड-समूह खोता है; engrailed जैसा खंड-ध्रुवता उत्परिवर्ती खंड-संख्या बनाए रखता है पर प्रत्येक का भाग दर्पण-प्रतिबिंब से बदल देता है; होमियोटिक उत्परिवर्ती संख्या रखता है पर खंड-पहचान बदलता है।
  15. उभयचर (Spemann) संगठक के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. यह chordin व noggin स्रावित करता है, जो BMP को बाँधकर पास के बाह्यजनस्तर को तंत्रिकीय बनने देते हैं
    2. प्रत्यारोपित पृष्ठीय ओष्ठ दूसरा अक्ष प्रेरित करता है जिसकी तंत्रिका नलिका अधिकतर परपोषी कोशिकाओं से बनती है
    3. तंत्रिका पट्टिका वहाँ बनती है जहाँ बाह्यजनस्तर में BMP संकेतन सबसे प्रबल होता है
    4. वल्कुटीय घूर्णन के बाद भावी पृष्ठ ओर β-catenin का अपघटन होता है, जो उस ओर को संगठक चिह्नित करता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — यह chordin व noggin स्रावित करता है, जो BMP को बाँधकर पास के बाह्यजनस्तर को तंत्रिकीय बनने देते हैं; B — प्रत्यारोपित पृष्ठीय ओष्ठ दूसरा अक्ष प्रेरित करता है जिसकी तंत्रिका नलिका अधिकतर परपोषी कोशिकाओं से बनती है

    संगठक BMP-विरोधियों (chordin, noggin, follistatin) को स्रावित करके कार्य करता है; BMP से बचा बाह्यजनस्तर तंत्रिकीय बनता है। Spemann–Mangold प्रत्यारोप में वर्णक-अंतर ने दिखाया कि द्वितीयक तंत्रिका नलिका अधिकतर परपोषी ऊतक से बनी, जिससे प्रेरण सिद्ध हुआ। BMP संकेतन अधिचर्म का निर्देश देता है, अतः तंत्रिका पट्टिका वहाँ बनती है जहाँ BMP न्यूनतम हो। वल्कुटीय घूर्णन पृष्ठ ओर β-catenin को स्थिर करता है, अपघटित नहीं, जिससे Nieuwkoop केंद्र और फिर संगठक बनता है।
  16. Takahashi व Yamanaka ने 2006 में चूहे के फ़ाइब्रोब्लास्ट को प्रेरित बहुशक्त स्तंभ कोशिकाओं में पुनःक्रमादेशित करने के लिए प्रतिलेखन कारकों का कौन-सा समूह प्रयोग किया?

    1. Oct3/4, Nanog, Pax6 व MyoD
    2. Sox2, Gata1, Hnf4 व c-Myc
    3. Pdx1, Ngn3, MafA व Klf4
    4. Oct3/4, Sox2, Klf4 व c-Myc
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — Oct3/4, Sox2, Klf4 व c-Myc

    2006 के चूहा-अध्ययन ने 24 संभावित जीनों का अनुवीक्षण किया और पाया कि चार, Oct3/4, Sox2, Klf4 व c-Myc, बहुशक्त कोशिकाएँ देने के लिए पर्याप्त थे। प्रत्येक भ्रामक विकल्प किसी बहुशक्तता कारक को वंश-विनिर्देशक कारकों से मिलाता है (नेत्र व तंत्रिका हेतु Pax6, पेशी हेतु MyoD, लाल रक्त कोशिका वंश हेतु Gata1, यकृत हेतु Hnf4, अग्न्याशयी β-कोशिका हेतु Pdx1, Ngn3 व MafA), जो कोशिकाओं को बहुशक्तता की ओर लौटाने के बजाय विशेष विभेदित भाग्यों की ओर ले जाते हैं।
  17. परपोषी ब्लास्टोसिस्ट में इंजेक्ट की गई चूहे की भ्रूणीय स्तंभ कोशिकाएँ बने काइमेरा के प्रत्येक ऊतक में, जनन-वंश सहित, योगदान करती हैं, पर अपरा के ट्रोफ़ोब्लास्ट-व्युत्पन्न भागों में लगभग नहीं। इन कोशिकाओं का सर्वोत्तम वर्णन क्या है?

    1. पूर्णशक्त, क्योंकि वे जनन कोशिकाओं सहित प्रत्येक वयस्क कोशिका-प्रकार बना सकती हैं
    2. बहुशक्त, क्योंकि वे सभी भ्रूणीय वंश बनाती हैं पर ट्रोफ़ोब्लास्ट नहीं
    3. बहुक्षम, क्योंकि वे एक ही जनन-स्तर के वंशों तक सीमित हैं
    4. एकशक्त, क्योंकि काइमेरा में वे जनन-वंश स्तंभ कोशिकाओं जैसा व्यवहार करती हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — बहुशक्त, क्योंकि वे सभी भ्रूणीय वंश बनाती हैं पर ट्रोफ़ोब्लास्ट नहीं

    तीनों जनन-स्तरों व जनन-वंश में योगदान, पर ट्रोफ़ोब्लास्ट में नहीं, बहुशक्तता की परिभाषा है, जो उस आंतरिक कोशिका पुंज से मेल खाती है जिससे ES कोशिकाएँ आती हैं। पूर्णशक्त भ्रामक उत्तर है क्योंकि प्रत्येक वयस्क ऊतक बनता है, पर पूर्णशक्तता को भ्रूणबाह्य ट्रोफ़ोब्लास्ट भी चाहिए, जिसे केवल युग्मनज व आरंभिक कोरकखंड बना सकते हैं। सभी जनन-स्तरों के ऊतकों में योगदान बहुक्षम व एकशक्त को खारिज करता है।
  18. भ्रूणीय कोशिकाओं की एक असमकालिक रूप से विभाजित समष्टि का कोशिका-चक्र काल 24 h है। गिनी गई 2,000 कोशिकाओं में से 150 समसूत्री विभाजन में हैं। यह मानते हुए कि किसी प्रावस्था में कोशिकाओं का अंश चक्र में उस प्रावस्था के समय के अंश के बराबर है, M प्रावस्था की अवधि मिनटों में ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 108

    समसूत्री सूचकांक = 150 ÷ 2000 = 0.075। M की अवधि = 0.075 × 24 h = 1.8 h = 1.8 × 60 = 108 मिनट। घंटों को मिनटों में न बदलने पर 1.8 मिलता है, जो प्रचलित भूल है।