वाक्य और अर्थ: वाक्यविन्यास, अर्थविज्ञान व प्रयोगविज्ञान
2. X-bar सिद्धांत व उप-मॉड्यूल: थीटा, कारक व बंधन
X-bar सिद्धांत पदबंध-संरचना का सामान्यीकरण करता है: प्रत्येक पदबंध किसी शीर्ष (head) X का प्रक्षेप है, योजना X′ → X (संपूरक/Complement), XP → (विनिर्देशक/Specifier) X′ के साथ। अतः क्रिया का कर्म उसका संपूरक है, निर्धारक या कर्ता विनिर्देशक में बैठ सकता है, और अनुबंध (adjuncts) X′ स्तर पर जुड़ते हैं। यह उस अंतःकेंद्री (endocentric) तथ्य को पकड़ता है कि प्रत्येक पदबंध का शीर्ष उसी वर्ग का होता है (NP का शीर्ष N, VP का V)।
- थीटा सिद्धांत: कोई विधेय अपने तर्कों को अर्थ-भूमिकाएँ (थीटा-भूमिकाएँ जैसे कर्ता/Agent, कर्म-विषय/Theme, लक्ष्य/Goal, अनुभवकर्ता/Experiencer) सौंपता है। थीटा मानदंड अपेक्षा करता है कि प्रत्येक तर्क ठीक एक थीटा-भूमिका धारण करे और प्रत्येक थीटा-भूमिका ठीक एक तर्क को सौंपी जाए।
- कारक सिद्धांत: संज्ञापदों को अमूर्त कारक (Case) मिलना चाहिए (परिमित काल से कर्ता-कारक, सकर्मक क्रिया से कर्म-कारक); कारक-निस्यंदक (Case Filter) बिना कारक वाले प्रकट NP को निरस्त करता है, जो समझाता है कि अपरिमित उपवाक्यों के कर्ता विशेष व्यवहार क्यों करते हैं।
- बंधन सिद्धांत सह-संदर्भ का नियमन करता है: सिद्धांत A — निजवाचक/प्रतिक्रियावाचक (anaphor) अपने स्थानीय क्षेत्र में बद्ध होना चाहिए (John saw himself); सिद्धांत B — सर्वनाम उस क्षेत्र में मुक्त होना चाहिए (John saw him, him ≠ John); सिद्धांत C — R-अभिव्यक्ति (नाम) सर्वत्र मुक्त होना चाहिए।
3. तर्क-संरचना व संयोजकता-विकल्प
किसी विधेय की तर्क-संरचना (argument structure) उन तर्कों व उनकी भूमिकाओं को सूचीबद्ध करती है जिनकी उसे आवश्यकता है। संयोजकता (valency) किसी क्रिया द्वारा लिए गए तर्कों की संख्या है: sleep अकर्मक है (एक तर्क, सोने वाला), read सकर्मक (दो: पाठक व पढ़ी वस्तु), give द्विकर्मक (तीन: देने वाला, प्राप्तकर्ता, दी वस्तु)। संयोजकता-विकल्प इसे व्यवस्थित रूप से बदलते हैं: कर्मवाच्य (passive) कर्ता को अवनत व कर्म को उन्नत करता है (The meal was cooked); प्रेरणार्थक (causative) एक कर्ता जोड़ता है (melt → make something melt); सम्प्रदान-विकल्प (dative alternation) द्विकर्मक को पुनराकार देता है (give Mary a book ↔ give a book to Mary); स्वतःकारक/अकारक (inchoative) कारक को हटाता है (The vase broke)।
यहाँ वाक्यविन्यास-रूप अंतराफलक दिखता है: अनेक भाषाओं में प्रेरणार्थक व कर्मवाच्य क्रिया पर रूपिम से चिह्नित हो सकते हैं, और समानरूपता (agreement) वाक्यविन्यासी लक्षणों को रूपिमिक रूप से साकार करती है। वाक्यविन्यास-अर्थ अंतराफलक संरचना को अर्थ से जोड़ता है — तर्क-स्थान थीटा-भूमिकाओं से मानचित्रित होते हैं, और परिमाणक व निषेध की परिधि संरचनात्मक ऊँचाई पर निर्भर करती है।
4. वाक्यविन्यासी सिद्धांत, सार्वभौमिक व्याकरण व दक्षता
| ढाँचा | मूल विचार | सम्बद्ध विद्वान |
|---|---|---|
| जनक / Minimalist Programme | Merge से संरचना; LF व PF पर मितव्ययिता व अंतराफलक-शर्तें | Noam Chomsky |
| LFG (लेक्सिकल फ़ंक्शनल ग्रामर) | समानांतर c-structure (संघटकता) व f-structure (व्याकरणिक प्रकार्य) | Bresnan व Kaplan |
| HPSG (हेड-ड्रिवेन फ़्रेज़ स्ट्रक्चर ग्रामर) | चिह्न (signs) प्ररूपित लक्षण-संरचनाएँ, एकीकरण (unification) से संयोजित; शब्दकोश-चालित | Pollard व Sag |
सार्वभौमिक व्याकरण (UG) यह परिकल्पना है कि मनुष्य भाषा हेतु एक जन्मजात रूपरेखा के साथ जन्म लेते हैं — वे साझा सिद्धांत जो सभी भाषाओं के अंतर्निहित हैं — जो भाषा-अर्जन की तार्किक समस्या सुलझाती है: बच्चे सीमित, अपूर्ण निवेश से शीघ्र ही समृद्ध व्याकरण अर्जित कर लेते हैं (उद्दीपन की दरिद्रता / poverty of the stimulus)। सिद्धांत-व-प्राचल (principles-and-parameters) संस्करण में सार्वभौमिक सिद्धांत नियत हैं जबकि प्राचल अनावरण से निर्धारित होते हैं। Chomsky केंद्रीय व्याकरण (core grammar) (UG-निर्धारित तंत्र) को मुहावरों, उधार व अपवादों की परिधि (periphery) से, तथा व्याकरण के अन्तर्निहित (tacit) ज्ञान को उसके बारे में व्यक्त (explicit) ज्ञान से अलग करते हैं। इस कार्यक्रम में भाषा-सिद्धांत का लक्ष्य दक्षता व व्याख्यात्मक पर्याप्तता है।
5. अर्थविज्ञान: संघटनात्मकता, सत्य, सम्बन्ध व परिमाणक
संघटनात्मकता का सिद्धांत (सामान्यतः Frege से सम्बद्ध) कहता है कि किसी जटिल अभिव्यक्ति का अर्थ उसके भागों के अर्थों तथा उनके संयोजन के ढंग से निर्धारित होता है — इसीलिए हम ऐसे वाक्य समझ लेते हैं जो कभी नहीं सुने। सत्य-शर्तीय अर्थविज्ञान में किसी कथनात्मक वाक्य का अर्थ जानना उसकी सत्य-शर्तें (truth conditions) जानना है (उसके सत्य होने के लिए संसार कैसा होना चाहिए); वाक्य एक प्रतिज्ञप्ति (proposition) अभिव्यक्त करता है, जो सत्यता या असत्यता की वाहक है। मूल तर्कशास्त्र परिमाणक (quantifiers) (all, some, no) जोड़ता है, जिनकी परिधि निषेध व परस्पर से अंतःक्रिया करती है।
- शाब्दिक सम्बन्ध: पर्यायता (synonymy) (निकट-समान अर्थ, big/large); अनेक प्रकार की विलोमता (antonymy) — श्रेणीगत (gradable) (hot/cold, बीच में एक पैमाना सहित), पूरक/द्विआधारी (complementary) (alive/dead, जहाँ एक का निषेध दूसरे को निहित करता है), व प्रतिलोम/सम्बन्धपरक (converse) (buy/sell, parent/child); अधःसत्ता (hyponymy) (rose, flower का अधःशब्द); अवयवता (meronymy) (अंश-पूर्ण, finger/hand)।
- प्रतिज्ञप्ति-सम्बन्ध: संनिहितार्थ (entailment) — यदि A सत्य हो तो B सत्य होना ही चाहिए (John killed the wasp से The wasp died निहित); पर्याय-वाक्य (paraphrase) — पारस्परिक संनिहितार्थ (समान सत्य-शर्तें); विरोध (contradiction) — A व B दोनों सत्य नहीं हो सकते; ये सत्य-शर्तों से जाँचे जाते हैं, संदर्भ से नहीं।
6. प्रयोगविज्ञान: वाक्-कृत्य, ध्वन्यार्थ, पूर्वधारणा व निर्देश
प्रयोगविज्ञान संदर्भ में अर्थ का अध्ययन करता है — वक्ता शाब्दिक अंतर्वस्तु से परे क्या करते व निहित करते हैं। वाक्-कृत्य सिद्धांत (speech act theory) में J. L. Austin ने उक्तिपरक (locutionary) कृत्य (कुछ कहना), उक्तिप्रयोजक (illocutionary) कृत्य (बल: वचन देना, आदेश, कथन) व उक्तिफलक (perlocutionary) कृत्य (श्रोता पर प्रभाव) को अलग किया; John Searle ने उक्तिप्रयोजक कृत्यों का वर्गीकरण व समुचितता-शर्तें (felicity conditions) विकसित कीं। निर्देश (deixis) वह संदर्भन है जो उच्चारण-संदर्भ पर निर्भर करता है: पुरुष (I, you), स्थान (here, there), काल (now, tomorrow), तथा विमर्श व सामाजिक निर्देश। विमर्श-विश्लेषण (discourse analysis) अध्ययन करता है कि वाक्य कैसे बड़े सुसंबद्ध पाठों में संगत होते हैं।
H. P. Grice का सहयोग सिद्धांत (Cooperative Principle) व उसके चार सूत्र (maxims) — परिमाण (Quantity) (आवश्यकतानुसार सूचनापूर्ण हों, अधिक नहीं), गुण (Quality) (सत्यनिष्ठ हों), सम्बन्ध/प्रासंगिकता (Relation) (प्रासंगिक हों) व रीति (Manner) (स्पष्ट, संक्षिप्त, क्रमबद्ध हों) — संवादात्मक ध्वन्यार्थ (conversational implicature) समझाते हैं: वह अर्थ जो तब अनुमित होता है जब वक्ता किसी सूत्र का पालन करे या जान-बूझकर उसका उल्लंघन/अवज्ञा (flout) करे। किसी सहकर्मी के अच्छे दार्शनिक होने पर पूछे जाने पर "He has very neat handwriting" कहना परिमाण/सम्बन्ध का उल्लंघन करता है और निहित करता है कि वह अच्छा नहीं है। पूर्वधारणा (presupposition) वह पृष्ठभूमि है जिसे कोई उच्चारण स्वतःसिद्ध मानता है (the King of France ऐसे राजा के अस्तित्व की पूर्वधारणा करता है) और, ध्वन्यार्थ के विपरीत, विशिष्ट शब्दों से उद्दीप्त होती है व निषेध सहती है।
7. भाषाओं के आर-पार वाक्यविन्यास-विश्लेषण व अंतराफलक
भाषाओं के आर-पार वाक्यविन्यासी विश्लेषण पूछता है कि भिन्न भाषाएँ समान व्याकरणिक सम्बन्धों को कैसे साकार करती हैं, और वह सार्वभौमिक सिद्धांतों को प्राचलिक चयनों से अलग करता है। प्रत्येक भाषा पर वही निदान (खिसकाव, प्रतिस्थापन, समानरूपता, बंधन) लगाए जाते हैं, और भेद फिर प्राचल-निर्धारणों के रूप में कहे जाते हैं।
- मूल शब्द-क्रम: अंग्रेज़ी SVO है, जबकि हिन्दी–उर्दू, जापानी व तमिल SOV हैं और वेल्श VSO।
- संरेखण (alignment): कर्ता-कर्म (nominative–accusative) भाषा में अकर्मक क्रिया का कर्ता सकर्मक कर्ता के साथ व्यवहार करता है; कर्तृ-निरपेक्ष (ergative–absolutive) भाषा में वह सकर्मक कर्म के साथ। हिन्दी विभाजित-कर्तृवाची (split-ergative) है: सकर्मक क्रिया के पूर्ण (perfective) रूप में कर्ता ने चिह्न लेता है और क्रिया (अचिह्नित) कर्म से समानरूप होती है, जैसे राम ने किताब पढ़ी।
- Wh-प्रश्न: अंग्रेज़ी प्रश्नवाचक शब्द को आरंभ में खिसकाती है (What did you read?), जबकि हिन्दी प्रायः उसे यथास्थान रखती है (तुमने क्या पढ़ा?), अतः wh-पदबंध प्रकट रूप से खिसकते हैं या नहीं, यह एक प्राचल है।
- शून्य कर्ता (null subjects): हिन्दी, स्पैनिश व इतालवी में कर्ता-सर्वनाम छोड़ा जा सकता है क्योंकि क्रिया-समानरूपता या संदर्भ उसे पहचान लेता है, जबकि अंग्रेज़ी में प्रकट कर्ता अनिवार्य है।
दो अंतराफलक चित्र को पूर्ण करते हैं। वाक्यविन्यास-स्वनिमविज्ञान अंतराफलक पर छांदसिक पदबंधन व स्वराघात वाक्यविन्यासी संघटकों से संरेखित होते हैं, यद्यपि उनके समरूप नहीं, अतः कोई विराम या तारत्व-विच्छेद old men and women जैसी द्व्यर्थ श्रृंखला के कोष्ठकन का संकेत दे सकता है। अर्थविज्ञान-प्रयोगविज्ञान अंतराफलक पर some की शाब्दिक (अर्थगत) अंतर्वस्तु 'कम से कम एक' है, पर श्रोता प्रायः उसे 'कुछ पर सब नहीं' समझते हैं। यह सोपानी ध्वन्यार्थ (scalar implicature) परिमाण-सूत्र से उत्पन्न होता है, और प्रयोगपरक होने के कारण निरस्त किया जा सकता है: Some of the students passed, in fact all did।
मुख्य बिंदु
- वाक्य संघटकों के सोपान हैं जिन्हें पदबंध-संरचना नियम कहते हैं और खिसकाव, सर्वनाम-प्रतिस्थापन, समुच्चयन व एकल-उत्तर परीक्षण पहचानते हैं। संरचनात्मक द्व्यर्थता एक श्रृंखला की दो कोष्ठकन (old men and women; PP जुड़ाव), शाब्दिक द्व्यर्थता से भिन्न।
- X-bar: प्रत्येक पदबंध किसी शीर्ष से प्रक्षेपित (XP → Spec X′, X′ → X Comp)। उप-मॉड्यूल: थीटा सिद्धांत (थीटा मानदंड, प्रति तर्क एक भूमिका), कारक सिद्धांत (Case Filter), बंधन (A: anaphor स्थानीय बद्ध; B: सर्वनाम स्थानीय मुक्त; C: नाम मुक्त), सभी c-command पर कथित।
- संयोजकता तर्क-संख्या है: sleep 1, read 2, give 3। संयोजकता-विकल्प: कर्मवाच्य (कर्ता अवनत), प्रेरणार्थक (कर्ता जोड़ें), सम्प्रदान-विकल्प, स्वतःकारक (कारक हटाएँ)। तर्क-स्थान वाक्यविन्यास-अर्थ अंतराफलक पर थीटा-भूमिकाओं से मानचित्रित।
- ढाँचे: जनक/Minimalist (Merge, अंतराफलक) — Chomsky; LFG (c-structure + f-structure) — Bresnan व Kaplan; HPSG (एकीकृत लक्षण-संरचनाएँ) — Pollard व Sag। सार्वभौमिक व्याकरण उद्दीपन की दरिद्रता का उत्तर; केंद्रीय बनाम परिधीय व्याकरण, अन्तर्निहित बनाम व्यक्त ज्ञान, दक्षता लक्ष्य के रूप में। प्ररूपविज्ञान: अंग्रेज़ी SVO व हिन्दी SOV; हिन्दी विभाजित-कर्तृवाची (ने); wh-खिसकाव व शून्य कर्ता प्राचल हैं।
- संघटनात्मकता (Frege): पूर्ण का अर्थ भागों व उनके संयोजन से। सत्य-शर्तें प्रतिज्ञप्ति-अर्थ परिभाषित करती हैं; शाब्दिक सम्बन्धों में पर्यायता, श्रेणीगत/पूरक/प्रतिलोम विलोमता, अधःसत्ता, अवयवता; प्रतिज्ञप्ति-सम्बन्धों में संनिहितार्थ, पर्याय-वाक्य (पारस्परिक संनिहितार्थ) व विरोध।
- प्रयोगविज्ञान: Austin के उक्तिपरक/उक्तिप्रयोजक/उक्तिफलक कृत्य व Searle का वर्गीकरण; Grice का सहयोग सिद्धांत परिमाण, गुण, सम्बन्ध व रीति सूत्रों सहित, उल्लंघन से उठता ध्वन्यार्थ; पूर्वधारणा निषेध सहती है; निर्देश (पुरुष, स्थान, काल) संदर्भ-निर्भर संदर्भन है। सोपानी ध्वन्यार्थ ('some' से 'सब नहीं') प्रयोगपरक है, अतः निरस्तनीय है।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
S → NP VP जैसा पदबंध-संरचना नियम मुख्यतः निम्न में से क्या कहता है?
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उत्तर: A — कि वाक्य एक संज्ञा-पदबंध और उसके बाद एक क्रिया-पदबंध से बनता है, जो उसके निकटस्थ संघटक (immediate constituents) हैं
नियम कहता है कि S के दो निकटस्थ संघटक (immediate constituents) हैं, एक NP व एक VP, जो सपाट सूची नहीं बल्कि सोपान पकड़ता है। वाक्यों में PP होना आवश्यक नहीं, और वाक्यविन्यास संरचना देता ही है; नियम संघटकता के बारे में है, पहले अर्थ गणित करने के बारे में नहीं।कौन-सा परीक्षण-परिणाम सही ढंग से दर्शाता है कि 'She read the old book' में 'the old book' एक ही संघटक है?
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उत्तर: D — इसे सर्वनाम-रूप 'it' से बदला जा सकता है और यह 'What did she read?' के उत्तर के रूप में अकेला खड़ा हो सकता है
सर्वनाम-प्रतिस्थापन (it = the old book) व उत्तर के रूप में अकेला खड़ा होना शास्त्रीय संघटक-निदान हैं, और दोनों पूरे NP को चुनते हैं। अक्षर पुनर्व्यवस्था वाक्यविन्यासी परीक्षण नहीं है; यहाँ अकेला 'old' संघटक नहीं है; केवल 'book' को 'it' से बदलना पदबंध को एक इकाई के रूप में लक्षित नहीं करता।X-bar सिद्धांत में किसी क्रिया का कर्म किस स्थान पर होता है?
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उत्तर: B — संपूरक स्थान, शीर्ष क्रिया की सहोदर (sister) के रूप में
योजना X′ → X संपूरक के अंतर्गत कर्म संपूरक है, V′ के भीतर शीर्ष क्रिया की सहोदर। विनिर्देशक कर्ता या निर्धारक जैसे तत्व रखता है, अनुबंध X′ स्तर पर जुड़ते हैं, और शीर्ष-स्थान स्वयं क्रिया है।वाक्यविन्यास के उप-मॉड्यूलों के बारे में कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।
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उत्तर: A — थीटा मानदंड अपेक्षा करता है कि प्रत्येक तर्क ठीक एक थीटा-भूमिका धारण करे; B — बंधन सिद्धांत A अपेक्षा करता है कि निजवाचक जैसा anaphor अपने स्थानीय क्षेत्र में बद्ध हो; C — कारक सिद्धांत का Case Filter बिना कारक वाले प्रकट संज्ञा-पदबंध को निरस्त करता है
थीटा मानदंड, सिद्धांत A व Case Filter सभी सही कथित हैं। सिद्धांत C असत्य विकल्प का उलटा है: R-अभिव्यक्ति (नाम) मुक्त होना चाहिए, अतः उसे c-command करने वाले सर्वनाम द्वारा बद्ध नहीं किया जा सकता।वाक्य 'He admires John's paintings' में क्या 'he' व 'John' एक ही व्यक्ति को संदर्भित कर सकते हैं, और क्यों?
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उत्तर: C — नहीं, क्योंकि 'he' 'John' पर c-command करता है, और सिद्धांत C नाम के मुक्त होने की अपेक्षा करता है
कर्ता 'he' 'John' पर (कर्म NP के भीतर) c-command करता है, और सिद्धांत C 'John' जैसी R-अभिव्यक्ति के मुक्त होने की अपेक्षा करता है, अतः वे सह-संदर्भित नहीं हो सकते। सह-संदर्भ c-command से शासित है, रैखिक पूर्वता से नहीं, अतः 'पहले आता है' वाला तर्क ग़लत है; और यहाँ कर्ता के रूप में निजवाचक अव्याकरणिक होता।वाक्य 'She gave him a book' में क्रिया give कितने तर्क (arguments) लेती है, कर्ता को भी गिनते हुए? अपना उत्तर एक पूर्ण संख्या में दें।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 3
Give द्विकर्मक है, तीन तर्कों सहित: देने वाला ('she', कर्ता), प्राप्तकर्ता ('him', लक्ष्य) व दी वस्तु ('a book', कर्म-विषय)। केवल दो कर्म गिनकर कर्ता भूल जाना ग़लत उत्तर 2 देता है; सही गणना 3 है।पदबंध 'old men and women' संरचनात्मक रूप से द्व्यर्थ है। इसके कितने भिन्न संरचनात्मक अर्थ हैं? अपना उत्तर एक पूर्ण संख्या में दें।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 2
दो कोष्ठकन हैं: [old [men and women]], जहाँ 'old' पूरे समुच्चय का उपपद है अतः दोनों समूह वृद्ध हैं, और [[old men] and women], जहाँ 'old' केवल 'men' का उपपद है अतः स्त्रियों का वृद्ध होना आवश्यक नहीं। दो संरचनाओं का अर्थ दो अर्थ।किसी वाक्यविन्यासी ढाँचे का उससे सर्वाधिक सम्बद्ध विद्वानों के साथ कौन-सा युग्म सही है?
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उत्तर: A — Lexical Functional Grammar (LFG) — Joan Bresnan व Ronald Kaplan
LFG को Joan Bresnan व Ronald Kaplan ने विकसित किया। HPSG Pollard व Sag का है, Minimalist Programme Chomsky का है, और LFG निश्चय ही अकेले Chomsky का कार्य नहीं है, अतः अन्य विकल्प नाम बदल देते हैं।कोई बच्चा सीमित व अपूर्ण डेटा सुनकर भी, जो वयस्क तंत्र को अधोनिर्धारित करता है, शीघ्र ही जटिल व्याकरण अर्जित कर लेता है। जनक परम्परा में इस अवलोकन को ___ कहा जाता है, और इसे ___ का आधार माना जाता है।
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उत्तर: D — उद्दीपन की दरिद्रता ... सार्वभौमिक व्याकरण
समृद्ध वयस्क दक्षता व सीमित निवेश के बीच की दूरी उद्दीपन की दरिद्रता है, जिसका प्रयोग एक जन्मजात सार्वभौमिक व्याकरण के पक्ष में तर्क हेतु होता है। सहयोग सिद्धांत व संघटनात्मकता प्रयोगविज्ञान व अर्थविज्ञान के हैं, और Case Filter वाक्यविन्यास का उप-मॉड्यूल है, अर्जन-तर्क नहीं।सार्वभौमिक व्याकरण व दक्षता के बारे में कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।
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उत्तर: A — सार्वभौमिक व्याकरण को सभी मानव भाषाओं द्वारा साझा एक जन्मजात आधार के रूप में प्रस्तावित किया गया है; B — Chomsky व्याकरण के अन्तर्निहित (tacit) ज्ञान को उसके बारे में व्यक्त ज्ञान से अलग करते हैं; C — केंद्रीय व्याकरण UG-निर्धारित तंत्र है, जबकि परिधि मुहावरों, उधार व अपवादों को समेटती है
जन्मजात UG, अन्तर्निहित/व्यक्त भेद व केंद्रीय/परिधि विभाजन सभी सही हैं। असत्य विकल्प निष्पादन का वर्णन करता है, दक्षता का नहीं: दक्षता वक्ता का आंतरिकीकृत ज्ञान है, जबकि वास्तविक-समय, त्रुटि-प्रवण अभिलेख निष्पादन है।संघटनात्मकता का सिद्धांत, जो सामान्यतः Frege से सम्बद्ध है, निम्न में से क्या कहता है?
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उत्तर: A — किसी जटिल अभिव्यक्ति का अर्थ उसके भागों के अर्थों तथा उनके संयोजन के ढंग से निर्धारित होता है
संघटनात्मकता पूर्ण का अर्थ उसके भागों के अर्थों व उनके संयोजन-ढंग से निकालती है, जो ठीक वही है जो हमें नए वाक्य समझने देता है। संदर्भ-निर्भरता प्रयोगविज्ञान है, प्रति-शब्द-एक-अर्थ बहुअर्थता की उपेक्षा करता है, और यह दावा कि अनसुने वाक्यों की व्याख्या नहीं हो सकती उसी सृजनात्मकता का खंडन करता है जिसे संघटनात्मकता समझाती है।युग्म alive / dead और युग्म hot / cold दो प्रकार की विलोमता दर्शाते हैं। कौन-सा वर्णन सही है?
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उत्तर: B — alive/dead पूरक (द्विआधारी) विलोम हैं, जबकि hot/cold श्रेणीगत विलोम हैं
alive/dead पूरक हैं: एक का निषेध दूसरे को निहित करता है, कोई मध्य नहीं। hot/cold श्रेणीगत हैं: उनके बीच एक पैमाना (गुनगुना, हल्का ठंडा) है। buy/sell जैसे प्रतिलोम विलोम एक ही सम्बन्ध को दो ओर से वर्णित करते हैं, जो कोई युग्म नहीं करता, अतः अन्य विकल्प उन्हें ग़लत वर्गीकृत करते हैं।वाक्य 'John stopped smoking' का सम्बन्ध 'John used to smoke' से है। यह सम्बन्ध मात्र संनिहितार्थ नहीं, बल्कि पूर्वधारणा के रूप में वर्गीकृत है क्योंकि:
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उत्तर: C — यह निषेध सहता है: 'John did not stop smoking' फिर भी बताता है कि वह पहले धूम्रपान करता था
पूर्वधारणा की पहचान यह है कि वह निषेध सहती है: 'John stopped smoking' व 'John did not stop smoking' दोनों पूर्वधारणा करते हैं कि वह पहले धूम्रपान करता था। संनिहितार्थ निषेध में लुप्त हो जाता। विनम्रता व परिमाण-सूत्र अप्रासंगिक हैं, और पूर्वधारणा केवल वाक्य कहने भर से निरस्त नहीं होती।अर्थ-सम्बन्धों के बारे में कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।
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उत्तर: A — 'John killed the wasp' से 'The wasp died' निहित होता है; B — पर्याय-वाक्य पारस्परिक संनिहितार्थ है: समान सत्य-शर्तों वाले दो वाक्य; C — दो वाक्य एक-दूसरे का विरोध करते हैं (परस्पर असंगत हैं) जब वे एक साथ दोनों सत्य नहीं हो सकते
संनिहितार्थ (kill से die निहित), पर्याय-वाक्य पारस्परिक संनिहितार्थ के रूप में, व विरोध संयुक्त सत्यता की असंभवता के रूप में — सभी सही हैं। असत्य कथन तथ्य उलट देता है: निरस्तनीय संवादात्मक ध्वन्यार्थ होता है, जबकि संनिहितार्थ बिना विरोध निरस्त नहीं किया जा सकता।'क्या आपका नया सहकर्मी शोध में अच्छा है?' पूछे जाने पर वक्ता उत्तर देता है 'ख़ैर, वह बैठकों में सदैव समय पर आती है।' सर्वाधिक संभावित संवादात्मक ध्वन्यार्थ, व उल्लंघित सूत्र, निम्न में से क्या हैं?
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उत्तर: D — कि सहकर्मी शोध में विशेष अच्छी नहीं है; सम्बन्ध-सूत्र (व परिमाण) का उल्लंघन होता है
शोध से असंगत व पूछे गए से कम सूचनापूर्ण उत्तर देकर वक्ता सम्बन्ध (व परिमाण) का उल्लंघन करता है, यह निहित करते हुए कि सहकर्मी शोध में अच्छी नहीं है। उत्तर यह नहीं कहता कि वह उत्कृष्ट है, समयनिष्ठा शोध-गुणवत्ता की गारंटी नहीं देती, और ध्वन्यार्थ ठीक वही राय है जो अप्रत्यक्ष रूप से दी जाती है, न कि कोई राय न होना।प्रयोगविज्ञान के बारे में कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।
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उत्तर: A — Austin ने उक्तिपरक, उक्तिप्रयोजक व उक्तिफलक कृत्यों को अलग किया; B — संवादात्मक ध्वन्यार्थ, संनिहितार्थ के विपरीत, बिना विरोध निरस्तनीय है; D — Grice के सूत्र एक व्यापक सहयोग सिद्धांत के अंतर्गत आते हैं
Austin का त्रि-विध कृत्य-भेद, ध्वन्यार्थ की निरस्तनीयता (संनिहितार्थ की अनिरस्तनीयता के विरुद्ध) व सूत्रों को शासित करता सहयोग सिद्धांत सभी सही हैं। असत्य कथन निर्देश की ग़लत व्याख्या करता है: निर्देशक अभिव्यक्तियाँ उच्चारण-संदर्भ के साथ अपना संदर्भन बदलती हैं, यही उन्हें निर्देशक बनाता है।एक वक्ता कहता है 'Some of the students passed the exam' और फिर जोड़ता है 'in fact, all of them did', और यह जोड़ विरोधी नहीं है। यह 'some' के सामान्य 'सब नहीं' अर्थ के बारे में क्या दर्शाता है?
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उत्तर: B — यह परिमाण-सूत्र का एक सोपानी संवादात्मक ध्वन्यार्थ है, अतः इसे बिना किसी विरोध के निरस्त किया जा सकता है
'some' की शाब्दिक अंतर्वस्तु 'कम से कम एक' है; 'सब नहीं' का अर्थ परिमाण-सूत्र से उत्पन्न सोपानी ध्वन्यार्थ है, और ध्वन्यार्थ, संनिहितार्थ के विपरीत, बिना विरोध निरस्त हो सकता है, जो ठीक वही है जो यह जोड़ करता है। यदि 'सब नहीं' निहित होता तो उसे निरस्त करना विरोधी होता। शाब्दिक द्व्यर्थता या पूर्वधारणा ऐसा व्यवहार नहीं करती, क्योंकि यहाँ निरस्तीकरण से वाक्य पूर्णतः संगत रहता है।अंग्रेज़ी में प्रश्नवाचक शब्द आरंभ में खिसकाया जाता है (What did you read?), जबकि हिन्दी में वह प्रायः वहीं रहता है जहाँ संगत तर्क होता (तुमने क्या पढ़ा?)। सिद्धांत-व-प्राचल दृष्टि से इस अंतर का सर्वोत्तम वर्णन निम्न में से क्या है?
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उत्तर: C — एक प्राचल में विचलन जो यह नियमित करता है कि wh-पदबंध प्रकट रूप से खिसकते हैं या नहीं, दोनों भाषाओं के साझा सिद्धांतों के भीतर
सार्वभौमिक सिद्धांत साझा हैं और भाषाएँ प्राचल-निर्धारणों में भिन्न होती हैं; wh-पदबंध प्रकट रूप से खिसकता है या नहीं, ऐसे प्राचल का मानक उदाहरण है। क्रिया दोनों भाषाओं में वही भूमिकाएँ सौंपती है, सिद्धांत C नामों व सर्वनामों से सम्बद्ध है, प्रश्नवाचक शब्दों से नहीं, और हिन्दी के प्रश्नवाचक शब्द पूर्णतः नियम-शासित हैं, अतः यह दावा कि हिन्दी में सार्वभौमिक व्याकरण नहीं है, ग़लत है।