वाक्य और अर्थ: वाक्यविन्यास, अर्थविज्ञान व प्रयोगविज्ञान

यह अध्याय मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान (XH) पेपर में XH3 भाषाविज्ञान के खंड XH3.2, "व्याकरणिक विश्लेषण के स्तर", को पूर्ण करता है, उसके अंतिम दो घटकों को समेटते हुए, C. वाक्यविन्यास (वाक्य) व D. अर्थविज्ञान तथा प्रयोगविज्ञान (अर्थ)। यह पढ़ाता है कि शब्द कैसे पदबंध-संरचना नियमों व X-bar सिद्धांत द्वारा पदबंधों व उपवाक्यों में संयोजित होते हैं; वाक्यविन्यास के उप-मॉड्यूल — थीटा सिद्धांत, कारक (case) सिद्धांत, बंधन (binding) सिद्धांत, तर्क-संरचना (argument structure) व संयोजकता-विकल्प (valency alternations) — संघटक-निदान (constituency diagnostics) व संरचनात्मक द्व्यर्थता सहित; जनक व्याकरण व Minimalist Programme, LFG व HPSG के मूल सिद्धांत, तथा सार्वभौमिक व्याकरण (Universal Grammar), दक्षता, व केंद्रीय बनाम परिधीय व्याकरण की धारणा; भाषाओं के आर-पार वाक्यविन्यासी विश्लेषण (शब्द-क्रम, संरेखण, wh-प्रश्न, शून्य कर्ता) तथा वाक्यविन्यास-स्वनिमविज्ञान व अर्थविज्ञान-प्रयोगविज्ञान अंतराफलक; फिर शाब्दिक अर्थ (संघटनात्मकता/compositionality, सत्य-शर्तें, प्रतिज्ञप्तियाँ/propositions, परिमाणक/quantifiers, पर्यायता व विलोमता जैसे शाब्दिक सम्बन्ध, तथा संनिहितार्थ/entailment, विरोध व पर्याय-वाक्य जैसे प्रतिज्ञप्ति-सम्बन्ध); और अंततः संदर्भगत अर्थ (वाक्-कृत्य/speech acts, Grice के सूत्र व ध्वन्यार्थ/implicature, पूर्वधारणा/presupposition, निर्देश/deixis व विमर्श)। विश्लेष्य प्रश्न आपसे बंधन के अधीन सह-संदर्भ का निर्णय करने, क्रिया के तर्क गिनने, संरचनात्मक द्व्यर्थता सुलझाने और ध्वन्यार्थ पहचानने को कहते हैं।

1. शब्द, पदबंध, उपवाक्य, पदबंध-संरचना नियम व संघटकता

वाक्य शब्दों की सपाट श्रृंखलाएँ नहीं, संघटकों (constituents) की सोपानिक संरचनाएँ हैं: शब्द पदबंधों (NP, VP, PP, AP) में समूहित होते हैं, पदबंध उपवाक्यों में, उपवाक्य वाक्यों में। पदबंध-संरचना (पुनर्लेखन) नियम इसे कहते हैं, उदाहरणार्थ S → NP VP, NP → (Det) (AP) N (PP), VP → V (NP) (PP)। संघटक निदानों (diagnostics) से पहचाने जाते हैं: एक संघटक को प्रायः हटाया-खिसकाया जा सकता है (It was [the old book] that she read), सर्वनाम-रूप से प्रतिस्थापित (she read [it]), समान इकाई से समुच्चयित, या किसी प्रश्न के उत्तर के रूप में अकेला खड़ा किया जा सकता है। ये परीक्षण वह संरचना प्रकट करते हैं जिसे रैखिक क्रम छिपाता है।

संरचनात्मक द्व्यर्थता तब उत्पन्न होती है जब एक श्रृंखला की दो संघटक-संरचनाएँ हों। I saw the man with the telescope द्व्यर्थ है: PP with the telescope VP से जुड़ सकता है (मैंने दूरबीन का प्रयोग किया) या NP the man से (वह व्यक्ति जिसके पास दूरबीन थी)। Old men and women [old [men and women]] व [[old men] and women] के बीच द्व्यर्थ है। ऐसी द्व्यर्थता संरचना का गुण है, शाब्दिक द्व्यर्थता (एक शब्द, कई अर्थ) से भिन्न।

🧠 संरचनात्मक अर्थ गिनना
किसी द्व्यर्थ श्रृंखला के अर्थ गिनने हेतु, शब्दों को संघटकों में कोष्ठकित करने के प्रत्येक भिन्न ढंग को खोजें। प्रत्येक वैध कोष्ठकन एक अर्थ है। किसी उपपद (modifier) सहित समुच्चयन में उपपद संकीर्ण या व्यापक परिधि ले सकता है, जिससे दो अर्थ; एक छिटका PP ऊँचा या नीचा जुड़ सकता है, पुनः दो।

2. X-bar सिद्धांत व उप-मॉड्यूल: थीटा, कारक व बंधन

X-bar सिद्धांत पदबंध-संरचना का सामान्यीकरण करता है: प्रत्येक पदबंध किसी शीर्ष (head) X का प्रक्षेप है, योजना X′ → X (संपूरक/Complement), XP → (विनिर्देशक/Specifier) X′ के साथ। अतः क्रिया का कर्म उसका संपूरक है, निर्धारक या कर्ता विनिर्देशक में बैठ सकता है, और अनुबंध (adjuncts) X′ स्तर पर जुड़ते हैं। यह उस अंतःकेंद्री (endocentric) तथ्य को पकड़ता है कि प्रत्येक पदबंध का शीर्ष उसी वर्ग का होता है (NP का शीर्ष N, VP का V)।

  • थीटा सिद्धांत: कोई विधेय अपने तर्कों को अर्थ-भूमिकाएँ (थीटा-भूमिकाएँ जैसे कर्ता/Agent, कर्म-विषय/Theme, लक्ष्य/Goal, अनुभवकर्ता/Experiencer) सौंपता है। थीटा मानदंड अपेक्षा करता है कि प्रत्येक तर्क ठीक एक थीटा-भूमिका धारण करे और प्रत्येक थीटा-भूमिका ठीक एक तर्क को सौंपी जाए।
  • कारक सिद्धांत: संज्ञापदों को अमूर्त कारक (Case) मिलना चाहिए (परिमित काल से कर्ता-कारक, सकर्मक क्रिया से कर्म-कारक); कारक-निस्यंदक (Case Filter) बिना कारक वाले प्रकट NP को निरस्त करता है, जो समझाता है कि अपरिमित उपवाक्यों के कर्ता विशेष व्यवहार क्यों करते हैं।
  • बंधन सिद्धांत सह-संदर्भ का नियमन करता है: सिद्धांत A — निजवाचक/प्रतिक्रियावाचक (anaphor) अपने स्थानीय क्षेत्र में बद्ध होना चाहिए (John saw himself); सिद्धांत B — सर्वनाम उस क्षेत्र में मुक्त होना चाहिए (John saw him, him ≠ John); सिद्धांत C — R-अभिव्यक्ति (नाम) सर्वत्र मुक्त होना चाहिए।
⚠️ बंधन c-command का है, रैखिक क्रम का नहीं
बंधन के लिए पूर्ववर्ती (antecedent) को सम्बद्ध क्षेत्र में बद्ध तत्व पर c-command करना होता है, मात्र उससे पहले आना नहीं। He admires John's paintings में कर्ता he John पर c-command करता है, अतः सिद्धांत C से वे सह-संदर्भित नहीं हो सकते। John thinks that Mary likes him में him अपने उपवाक्य में मुक्त है, अतः वह John को संदर्भित कर सकता है (जो उस स्थानीय क्षेत्र के बाहर है)।

3. तर्क-संरचना व संयोजकता-विकल्प

किसी विधेय की तर्क-संरचना (argument structure) उन तर्कों व उनकी भूमिकाओं को सूचीबद्ध करती है जिनकी उसे आवश्यकता है। संयोजकता (valency) किसी क्रिया द्वारा लिए गए तर्कों की संख्या है: sleep अकर्मक है (एक तर्क, सोने वाला), read सकर्मक (दो: पाठक व पढ़ी वस्तु), give द्विकर्मक (तीन: देने वाला, प्राप्तकर्ता, दी वस्तु)। संयोजकता-विकल्प इसे व्यवस्थित रूप से बदलते हैं: कर्मवाच्य (passive) कर्ता को अवनत व कर्म को उन्नत करता है (The meal was cooked); प्रेरणार्थक (causative) एक कर्ता जोड़ता है (melt → make something melt); सम्प्रदान-विकल्प (dative alternation) द्विकर्मक को पुनराकार देता है (give Mary a book ↔ give a book to Mary); स्वतःकारक/अकारक (inchoative) कारक को हटाता है (The vase broke)।

यहाँ वाक्यविन्यास-रूप अंतराफलक दिखता है: अनेक भाषाओं में प्रेरणार्थक व कर्मवाच्य क्रिया पर रूपिम से चिह्नित हो सकते हैं, और समानरूपता (agreement) वाक्यविन्यासी लक्षणों को रूपिमिक रूप से साकार करती है। वाक्यविन्यास-अर्थ अंतराफलक संरचना को अर्थ से जोड़ता है — तर्क-स्थान थीटा-भूमिकाओं से मानचित्रित होते हैं, और परिमाणक व निषेध की परिधि संरचनात्मक ऊँचाई पर निर्भर करती है।

4. वाक्यविन्यासी सिद्धांत, सार्वभौमिक व्याकरण व दक्षता

तीन प्रमुख वाक्यविन्यासी ढाँचे
ढाँचामूल विचारसम्बद्ध विद्वान
जनक / Minimalist ProgrammeMerge से संरचना; LF व PF पर मितव्ययिता व अंतराफलक-शर्तेंNoam Chomsky
LFG (लेक्सिकल फ़ंक्शनल ग्रामर)समानांतर c-structure (संघटकता) व f-structure (व्याकरणिक प्रकार्य)Bresnan व Kaplan
HPSG (हेड-ड्रिवेन फ़्रेज़ स्ट्रक्चर ग्रामर)चिह्न (signs) प्ररूपित लक्षण-संरचनाएँ, एकीकरण (unification) से संयोजित; शब्दकोश-चालितPollard व Sag

सार्वभौमिक व्याकरण (UG) यह परिकल्पना है कि मनुष्य भाषा हेतु एक जन्मजात रूपरेखा के साथ जन्म लेते हैं — वे साझा सिद्धांत जो सभी भाषाओं के अंतर्निहित हैं — जो भाषा-अर्जन की तार्किक समस्या सुलझाती है: बच्चे सीमित, अपूर्ण निवेश से शीघ्र ही समृद्ध व्याकरण अर्जित कर लेते हैं (उद्दीपन की दरिद्रता / poverty of the stimulus)। सिद्धांत-व-प्राचल (principles-and-parameters) संस्करण में सार्वभौमिक सिद्धांत नियत हैं जबकि प्राचल अनावरण से निर्धारित होते हैं। Chomsky केंद्रीय व्याकरण (core grammar) (UG-निर्धारित तंत्र) को मुहावरों, उधार व अपवादों की परिधि (periphery) से, तथा व्याकरण के अन्तर्निहित (tacit) ज्ञान को उसके बारे में व्यक्त (explicit) ज्ञान से अलग करते हैं। इस कार्यक्रम में भाषा-सिद्धांत का लक्ष्य दक्षता व व्याख्यात्मक पर्याप्तता है।

5. अर्थविज्ञान: संघटनात्मकता, सत्य, सम्बन्ध व परिमाणक

संघटनात्मकता का सिद्धांत (सामान्यतः Frege से सम्बद्ध) कहता है कि किसी जटिल अभिव्यक्ति का अर्थ उसके भागों के अर्थों तथा उनके संयोजन के ढंग से निर्धारित होता है — इसीलिए हम ऐसे वाक्य समझ लेते हैं जो कभी नहीं सुने। सत्य-शर्तीय अर्थविज्ञान में किसी कथनात्मक वाक्य का अर्थ जानना उसकी सत्य-शर्तें (truth conditions) जानना है (उसके सत्य होने के लिए संसार कैसा होना चाहिए); वाक्य एक प्रतिज्ञप्ति (proposition) अभिव्यक्त करता है, जो सत्यता या असत्यता की वाहक है। मूल तर्कशास्त्र परिमाणक (quantifiers) (all, some, no) जोड़ता है, जिनकी परिधि निषेध व परस्पर से अंतःक्रिया करती है।

  • शाब्दिक सम्बन्ध: पर्यायता (synonymy) (निकट-समान अर्थ, big/large); अनेक प्रकार की विलोमता (antonymy) — श्रेणीगत (gradable) (hot/cold, बीच में एक पैमाना सहित), पूरक/द्विआधारी (complementary) (alive/dead, जहाँ एक का निषेध दूसरे को निहित करता है), व प्रतिलोम/सम्बन्धपरक (converse) (buy/sell, parent/child); अधःसत्ता (hyponymy) (rose, flower का अधःशब्द); अवयवता (meronymy) (अंश-पूर्ण, finger/hand)।
  • प्रतिज्ञप्ति-सम्बन्ध: संनिहितार्थ (entailment) — यदि A सत्य हो तो B सत्य होना ही चाहिए (John killed the wasp से The wasp died निहित); पर्याय-वाक्य (paraphrase) — पारस्परिक संनिहितार्थ (समान सत्य-शर्तें); विरोध (contradiction) — A व B दोनों सत्य नहीं हो सकते; ये सत्य-शर्तों से जाँचे जाते हैं, संदर्भ से नहीं।
⚠️ निषेध संनिहितार्थ को समाप्त करता है, पूर्वधारणा को नहीं
निषेध से अंतर जाँचें। John stopped smoking से John is not smoking now निहित है — John didn't stop smoking में निषेध करने पर वह संनिहितार्थ समाप्त हो जाता है। पर सकारात्मक व नकारात्मक दोनों John used to smoke की पूर्वधारणा करते हैं: पूर्वधारणा निषेध सहती है, यही मानक निदान उसे संनिहितार्थ से अलग करता है।

6. प्रयोगविज्ञान: वाक्-कृत्य, ध्वन्यार्थ, पूर्वधारणा व निर्देश

प्रयोगविज्ञान संदर्भ में अर्थ का अध्ययन करता है — वक्ता शाब्दिक अंतर्वस्तु से परे क्या करते व निहित करते हैं। वाक्-कृत्य सिद्धांत (speech act theory) में J. L. Austin ने उक्तिपरक (locutionary) कृत्य (कुछ कहना), उक्तिप्रयोजक (illocutionary) कृत्य (बल: वचन देना, आदेश, कथन) व उक्तिफलक (perlocutionary) कृत्य (श्रोता पर प्रभाव) को अलग किया; John Searle ने उक्तिप्रयोजक कृत्यों का वर्गीकरण व समुचितता-शर्तें (felicity conditions) विकसित कीं। निर्देश (deixis) वह संदर्भन है जो उच्चारण-संदर्भ पर निर्भर करता है: पुरुष (I, you), स्थान (here, there), काल (now, tomorrow), तथा विमर्श व सामाजिक निर्देश। विमर्श-विश्लेषण (discourse analysis) अध्ययन करता है कि वाक्य कैसे बड़े सुसंबद्ध पाठों में संगत होते हैं।

H. P. Grice का सहयोग सिद्धांत (Cooperative Principle) व उसके चार सूत्र (maxims) — परिमाण (Quantity) (आवश्यकतानुसार सूचनापूर्ण हों, अधिक नहीं), गुण (Quality) (सत्यनिष्ठ हों), सम्बन्ध/प्रासंगिकता (Relation) (प्रासंगिक हों) व रीति (Manner) (स्पष्ट, संक्षिप्त, क्रमबद्ध हों) — संवादात्मक ध्वन्यार्थ (conversational implicature) समझाते हैं: वह अर्थ जो तब अनुमित होता है जब वक्ता किसी सूत्र का पालन करे या जान-बूझकर उसका उल्लंघन/अवज्ञा (flout) करे। किसी सहकर्मी के अच्छे दार्शनिक होने पर पूछे जाने पर "He has very neat handwriting" कहना परिमाण/सम्बन्ध का उल्लंघन करता है और निहित करता है कि वह अच्छा नहीं है। पूर्वधारणा (presupposition) वह पृष्ठभूमि है जिसे कोई उच्चारण स्वतःसिद्ध मानता है (the King of France ऐसे राजा के अस्तित्व की पूर्वधारणा करता है) और, ध्वन्यार्थ के विपरीत, विशिष्ट शब्दों से उद्दीप्त होती है व निषेध सहती है।

ℹ️ ध्वन्यार्थ बनाम संनिहितार्थ बनाम पूर्वधारणा
संनिहितार्थ अर्थगत (semantic) है और निरस्त नहीं किया जा सकता। संवादात्मक ध्वन्यार्थ प्रयोगपरक (pragmatic) है और बिना विरोध निरस्तनीय है ("कुछ उत्तीर्ण हुए — वस्तुतः सभी हुए")। पूर्वधारणा वह पृष्ठभूमि है जो निषेध व प्रश्न सहती है। इन तीनों को अलग रखना एक प्रिय परीक्षा-बिंदु है।

7. भाषाओं के आर-पार वाक्यविन्यास-विश्लेषण व अंतराफलक

भाषाओं के आर-पार वाक्यविन्यासी विश्लेषण पूछता है कि भिन्न भाषाएँ समान व्याकरणिक सम्बन्धों को कैसे साकार करती हैं, और वह सार्वभौमिक सिद्धांतों को प्राचलिक चयनों से अलग करता है। प्रत्येक भाषा पर वही निदान (खिसकाव, प्रतिस्थापन, समानरूपता, बंधन) लगाए जाते हैं, और भेद फिर प्राचल-निर्धारणों के रूप में कहे जाते हैं।

  • मूल शब्द-क्रम: अंग्रेज़ी SVO है, जबकि हिन्दी–उर्दू, जापानी व तमिल SOV हैं और वेल्श VSO।
  • संरेखण (alignment): कर्ता-कर्म (nominative–accusative) भाषा में अकर्मक क्रिया का कर्ता सकर्मक कर्ता के साथ व्यवहार करता है; कर्तृ-निरपेक्ष (ergative–absolutive) भाषा में वह सकर्मक कर्म के साथ। हिन्दी विभाजित-कर्तृवाची (split-ergative) है: सकर्मक क्रिया के पूर्ण (perfective) रूप में कर्ता ने चिह्न लेता है और क्रिया (अचिह्नित) कर्म से समानरूप होती है, जैसे राम ने किताब पढ़ी।
  • Wh-प्रश्न: अंग्रेज़ी प्रश्नवाचक शब्द को आरंभ में खिसकाती है (What did you read?), जबकि हिन्दी प्रायः उसे यथास्थान रखती है (तुमने क्या पढ़ा?), अतः wh-पदबंध प्रकट रूप से खिसकते हैं या नहीं, यह एक प्राचल है।
  • शून्य कर्ता (null subjects): हिन्दी, स्पैनिश व इतालवी में कर्ता-सर्वनाम छोड़ा जा सकता है क्योंकि क्रिया-समानरूपता या संदर्भ उसे पहचान लेता है, जबकि अंग्रेज़ी में प्रकट कर्ता अनिवार्य है।

दो अंतराफलक चित्र को पूर्ण करते हैं। वाक्यविन्यास-स्वनिमविज्ञान अंतराफलक पर छांदसिक पदबंधन व स्वराघात वाक्यविन्यासी संघटकों से संरेखित होते हैं, यद्यपि उनके समरूप नहीं, अतः कोई विराम या तारत्व-विच्छेद old men and women जैसी द्व्यर्थ श्रृंखला के कोष्ठकन का संकेत दे सकता है। अर्थविज्ञान-प्रयोगविज्ञान अंतराफलक पर some की शाब्दिक (अर्थगत) अंतर्वस्तु 'कम से कम एक' है, पर श्रोता प्रायः उसे 'कुछ पर सब नहीं' समझते हैं। यह सोपानी ध्वन्यार्थ (scalar implicature) परिमाण-सूत्र से उत्पन्न होता है, और प्रयोगपरक होने के कारण निरस्त किया जा सकता है: Some of the students passed, in fact all did।

मुख्य बिंदु

  • वाक्य संघटकों के सोपान हैं जिन्हें पदबंध-संरचना नियम कहते हैं और खिसकाव, सर्वनाम-प्रतिस्थापन, समुच्चयन व एकल-उत्तर परीक्षण पहचानते हैं। संरचनात्मक द्व्यर्थता एक श्रृंखला की दो कोष्ठकन (old men and women; PP जुड़ाव), शाब्दिक द्व्यर्थता से भिन्न।
  • X-bar: प्रत्येक पदबंध किसी शीर्ष से प्रक्षेपित (XP → Spec X′, X′ → X Comp)। उप-मॉड्यूल: थीटा सिद्धांत (थीटा मानदंड, प्रति तर्क एक भूमिका), कारक सिद्धांत (Case Filter), बंधन (A: anaphor स्थानीय बद्ध; B: सर्वनाम स्थानीय मुक्त; C: नाम मुक्त), सभी c-command पर कथित।
  • संयोजकता तर्क-संख्या है: sleep 1, read 2, give 3। संयोजकता-विकल्प: कर्मवाच्य (कर्ता अवनत), प्रेरणार्थक (कर्ता जोड़ें), सम्प्रदान-विकल्प, स्वतःकारक (कारक हटाएँ)। तर्क-स्थान वाक्यविन्यास-अर्थ अंतराफलक पर थीटा-भूमिकाओं से मानचित्रित।
  • ढाँचे: जनक/Minimalist (Merge, अंतराफलक) — Chomsky; LFG (c-structure + f-structure) — Bresnan व Kaplan; HPSG (एकीकृत लक्षण-संरचनाएँ) — Pollard व Sag। सार्वभौमिक व्याकरण उद्दीपन की दरिद्रता का उत्तर; केंद्रीय बनाम परिधीय व्याकरण, अन्तर्निहित बनाम व्यक्त ज्ञान, दक्षता लक्ष्य के रूप में। प्ररूपविज्ञान: अंग्रेज़ी SVO व हिन्दी SOV; हिन्दी विभाजित-कर्तृवाची (ने); wh-खिसकाव व शून्य कर्ता प्राचल हैं।
  • संघटनात्मकता (Frege): पूर्ण का अर्थ भागों व उनके संयोजन से। सत्य-शर्तें प्रतिज्ञप्ति-अर्थ परिभाषित करती हैं; शाब्दिक सम्बन्धों में पर्यायता, श्रेणीगत/पूरक/प्रतिलोम विलोमता, अधःसत्ता, अवयवता; प्रतिज्ञप्ति-सम्बन्धों में संनिहितार्थ, पर्याय-वाक्य (पारस्परिक संनिहितार्थ) व विरोध।
  • प्रयोगविज्ञान: Austin के उक्तिपरक/उक्तिप्रयोजक/उक्तिफलक कृत्य व Searle का वर्गीकरण; Grice का सहयोग सिद्धांत परिमाण, गुण, सम्बन्ध व रीति सूत्रों सहित, उल्लंघन से उठता ध्वन्यार्थ; पूर्वधारणा निषेध सहती है; निर्देश (पुरुष, स्थान, काल) संदर्भ-निर्भर संदर्भन है। सोपानी ध्वन्यार्थ ('some' से 'सब नहीं') प्रयोगपरक है, अतः निरस्तनीय है।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. S → NP VP जैसा पदबंध-संरचना नियम मुख्यतः निम्न में से क्या कहता है?

    1. कि वाक्य एक संज्ञा-पदबंध और उसके बाद एक क्रिया-पदबंध से बनता है, जो उसके निकटस्थ संघटक (immediate constituents) हैं
    2. कि वाक्य के शब्द एक पूर्णतः सपाट सूची में सजे होते हैं, जिसमें पदबंधों में कोई आंतरिक समूहन होता ही नहीं
    3. कि प्रत्येक सुगठित वाक्य में कम से कम एक पूर्वसर्गीय पदबंध होना चाहिए
    4. कि अर्थ पहले गणित होता है और वाक्यविन्यास कोई संरचना देता ही नहीं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — कि वाक्य एक संज्ञा-पदबंध और उसके बाद एक क्रिया-पदबंध से बनता है, जो उसके निकटस्थ संघटक (immediate constituents) हैं

    नियम कहता है कि S के दो निकटस्थ संघटक (immediate constituents) हैं, एक NP व एक VP, जो सपाट सूची नहीं बल्कि सोपान पकड़ता है। वाक्यों में PP होना आवश्यक नहीं, और वाक्यविन्यास संरचना देता ही है; नियम संघटकता के बारे में है, पहले अर्थ गणित करने के बारे में नहीं।
  2. कौन-सा परीक्षण-परिणाम सही ढंग से दर्शाता है कि 'She read the old book' में 'the old book' एक ही संघटक है?

    1. शब्दों के भीतर के अक्षर वाक्य का अर्थ बदले बिना पुनर्व्यवस्थित किए जा सकते हैं
    2. अकेला शब्द 'old' वाक्य के आरंभ में स्वयं खिसकाया जा सकता है
    3. केवल शब्द 'book' को सर्वनाम 'it' से बदला जा सकता है, शेष यथावत रखते हुए
    4. इसे सर्वनाम-रूप 'it' से बदला जा सकता है और यह 'What did she read?' के उत्तर के रूप में अकेला खड़ा हो सकता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — इसे सर्वनाम-रूप 'it' से बदला जा सकता है और यह 'What did she read?' के उत्तर के रूप में अकेला खड़ा हो सकता है

    सर्वनाम-प्रतिस्थापन (it = the old book) व उत्तर के रूप में अकेला खड़ा होना शास्त्रीय संघटक-निदान हैं, और दोनों पूरे NP को चुनते हैं। अक्षर पुनर्व्यवस्था वाक्यविन्यासी परीक्षण नहीं है; यहाँ अकेला 'old' संघटक नहीं है; केवल 'book' को 'it' से बदलना पदबंध को एक इकाई के रूप में लक्षित नहीं करता।
  3. X-bar सिद्धांत में किसी क्रिया का कर्म किस स्थान पर होता है?

    1. क्रिया-पदबंध का विनिर्देशक स्थान, बार-स्तर के ऊपर
    2. संपूरक स्थान, शीर्ष क्रिया की सहोदर (sister) के रूप में
    3. क्रिया के अधिकतम प्रक्षेप के बाहर एक अनुबंध-स्थान
    4. स्वयं शीर्ष-स्थान, क्रिया का स्थान लेते हुए
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — संपूरक स्थान, शीर्ष क्रिया की सहोदर (sister) के रूप में

    योजना X′ → X संपूरक के अंतर्गत कर्म संपूरक है, V′ के भीतर शीर्ष क्रिया की सहोदर। विनिर्देशक कर्ता या निर्धारक जैसे तत्व रखता है, अनुबंध X′ स्तर पर जुड़ते हैं, और शीर्ष-स्थान स्वयं क्रिया है।
  4. वाक्यविन्यास के उप-मॉड्यूलों के बारे में कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।

    1. थीटा मानदंड अपेक्षा करता है कि प्रत्येक तर्क ठीक एक थीटा-भूमिका धारण करे
    2. बंधन सिद्धांत A अपेक्षा करता है कि निजवाचक जैसा anaphor अपने स्थानीय क्षेत्र में बद्ध हो
    3. कारक सिद्धांत का Case Filter बिना कारक वाले प्रकट संज्ञा-पदबंध को निरस्त करता है
    4. बंधन सिद्धांत C किसी नाम को c-command करने वाले सर्वनाम द्वारा बद्ध होने की अनुमति देता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — थीटा मानदंड अपेक्षा करता है कि प्रत्येक तर्क ठीक एक थीटा-भूमिका धारण करे; B — बंधन सिद्धांत A अपेक्षा करता है कि निजवाचक जैसा anaphor अपने स्थानीय क्षेत्र में बद्ध हो; C — कारक सिद्धांत का Case Filter बिना कारक वाले प्रकट संज्ञा-पदबंध को निरस्त करता है

    थीटा मानदंड, सिद्धांत A व Case Filter सभी सही कथित हैं। सिद्धांत C असत्य विकल्प का उलटा है: R-अभिव्यक्ति (नाम) मुक्त होना चाहिए, अतः उसे c-command करने वाले सर्वनाम द्वारा बद्ध नहीं किया जा सकता।
  5. वाक्य 'He admires John's paintings' में क्या 'he' व 'John' एक ही व्यक्ति को संदर्भित कर सकते हैं, और क्यों?

    1. हाँ, क्योंकि वाक्य के रैखिक क्रम में 'he' 'John' से पहले आता है
    2. हाँ, क्योंकि कोई सर्वनाम बाद में आने वाले किसी भी नाम से सदैव सह-संदर्भित हो सकता है
    3. नहीं, क्योंकि 'he' 'John' पर c-command करता है, और सिद्धांत C नाम के मुक्त होने की अपेक्षा करता है
    4. नहीं, क्योंकि इस स्थान पर सह-संदर्भ हेतु एक निजवाचक सर्वनाम की आवश्यकता होती
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — नहीं, क्योंकि 'he' 'John' पर c-command करता है, और सिद्धांत C नाम के मुक्त होने की अपेक्षा करता है

    कर्ता 'he' 'John' पर (कर्म NP के भीतर) c-command करता है, और सिद्धांत C 'John' जैसी R-अभिव्यक्ति के मुक्त होने की अपेक्षा करता है, अतः वे सह-संदर्भित नहीं हो सकते। सह-संदर्भ c-command से शासित है, रैखिक पूर्वता से नहीं, अतः 'पहले आता है' वाला तर्क ग़लत है; और यहाँ कर्ता के रूप में निजवाचक अव्याकरणिक होता।
  6. वाक्य 'She gave him a book' में क्रिया give कितने तर्क (arguments) लेती है, कर्ता को भी गिनते हुए? अपना उत्तर एक पूर्ण संख्या में दें।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 3

    Give द्विकर्मक है, तीन तर्कों सहित: देने वाला ('she', कर्ता), प्राप्तकर्ता ('him', लक्ष्य) व दी वस्तु ('a book', कर्म-विषय)। केवल दो कर्म गिनकर कर्ता भूल जाना ग़लत उत्तर 2 देता है; सही गणना 3 है।
  7. पदबंध 'old men and women' संरचनात्मक रूप से द्व्यर्थ है। इसके कितने भिन्न संरचनात्मक अर्थ हैं? अपना उत्तर एक पूर्ण संख्या में दें।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 2

    दो कोष्ठकन हैं: [old [men and women]], जहाँ 'old' पूरे समुच्चय का उपपद है अतः दोनों समूह वृद्ध हैं, और [[old men] and women], जहाँ 'old' केवल 'men' का उपपद है अतः स्त्रियों का वृद्ध होना आवश्यक नहीं। दो संरचनाओं का अर्थ दो अर्थ।
  8. किसी वाक्यविन्यासी ढाँचे का उससे सर्वाधिक सम्बद्ध विद्वानों के साथ कौन-सा युग्म सही है?

    1. Lexical Functional Grammar (LFG) — Joan Bresnan व Ronald Kaplan
    2. Head-driven Phrase Structure Grammar (HPSG) — Joan Bresnan व Ronald Kaplan
    3. Minimalist Programme — Carl Pollard व Ivan Sag
    4. Lexical Functional Grammar (LFG) — Noam Chomsky अकेले
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — Lexical Functional Grammar (LFG) — Joan Bresnan व Ronald Kaplan

    LFG को Joan Bresnan व Ronald Kaplan ने विकसित किया। HPSG Pollard व Sag का है, Minimalist Programme Chomsky का है, और LFG निश्चय ही अकेले Chomsky का कार्य नहीं है, अतः अन्य विकल्प नाम बदल देते हैं।
  9. कोई बच्चा सीमित व अपूर्ण डेटा सुनकर भी, जो वयस्क तंत्र को अधोनिर्धारित करता है, शीघ्र ही जटिल व्याकरण अर्जित कर लेता है। जनक परम्परा में इस अवलोकन को ___ कहा जाता है, और इसे ___ का आधार माना जाता है।

    1. सहयोग सिद्धांत ... संवादात्मक सूत्र
    2. Case Filter ... अमूर्त कारक-निर्धारण
    3. संघटनात्मकता का सिद्धांत ... सत्य-शर्तीय अर्थविज्ञान
    4. उद्दीपन की दरिद्रता ... सार्वभौमिक व्याकरण
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — उद्दीपन की दरिद्रता ... सार्वभौमिक व्याकरण

    समृद्ध वयस्क दक्षता व सीमित निवेश के बीच की दूरी उद्दीपन की दरिद्रता है, जिसका प्रयोग एक जन्मजात सार्वभौमिक व्याकरण के पक्ष में तर्क हेतु होता है। सहयोग सिद्धांत व संघटनात्मकता प्रयोगविज्ञान व अर्थविज्ञान के हैं, और Case Filter वाक्यविन्यास का उप-मॉड्यूल है, अर्जन-तर्क नहीं।
  10. सार्वभौमिक व्याकरण व दक्षता के बारे में कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।

    1. सार्वभौमिक व्याकरण को सभी मानव भाषाओं द्वारा साझा एक जन्मजात आधार के रूप में प्रस्तावित किया गया है
    2. Chomsky व्याकरण के अन्तर्निहित (tacit) ज्ञान को उसके बारे में व्यक्त ज्ञान से अलग करते हैं
    3. केंद्रीय व्याकरण UG-निर्धारित तंत्र है, जबकि परिधि मुहावरों, उधार व अपवादों को समेटती है
    4. दक्षता उस त्रुटि-भरे अभिलेख को संदर्भित करती है जो वक्ता वास्तविक समय में उत्पन्न करते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — सार्वभौमिक व्याकरण को सभी मानव भाषाओं द्वारा साझा एक जन्मजात आधार के रूप में प्रस्तावित किया गया है; B — Chomsky व्याकरण के अन्तर्निहित (tacit) ज्ञान को उसके बारे में व्यक्त ज्ञान से अलग करते हैं; C — केंद्रीय व्याकरण UG-निर्धारित तंत्र है, जबकि परिधि मुहावरों, उधार व अपवादों को समेटती है

    जन्मजात UG, अन्तर्निहित/व्यक्त भेद व केंद्रीय/परिधि विभाजन सभी सही हैं। असत्य विकल्प निष्पादन का वर्णन करता है, दक्षता का नहीं: दक्षता वक्ता का आंतरिकीकृत ज्ञान है, जबकि वास्तविक-समय, त्रुटि-प्रवण अभिलेख निष्पादन है।
  11. संघटनात्मकता का सिद्धांत, जो सामान्यतः Frege से सम्बद्ध है, निम्न में से क्या कहता है?

    1. किसी जटिल अभिव्यक्ति का अर्थ उसके भागों के अर्थों तथा उनके संयोजन के ढंग से निर्धारित होता है
    2. किसी वाक्य का अर्थ पूर्णतः उस विशेष स्थिति व संदर्भ से नियत होता है जिसमें वह संयोगवश बोला जाता है
    3. प्रत्येक शब्द ठीक एक अर्थ वहन करता है, आसपास के शब्दों से स्वतंत्र
    4. किसी ऐसे वाक्य को अर्थ नहीं दिया जा सकता जो पहले कभी नहीं सुना गया
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — किसी जटिल अभिव्यक्ति का अर्थ उसके भागों के अर्थों तथा उनके संयोजन के ढंग से निर्धारित होता है

    संघटनात्मकता पूर्ण का अर्थ उसके भागों के अर्थों व उनके संयोजन-ढंग से निकालती है, जो ठीक वही है जो हमें नए वाक्य समझने देता है। संदर्भ-निर्भरता प्रयोगविज्ञान है, प्रति-शब्द-एक-अर्थ बहुअर्थता की उपेक्षा करता है, और यह दावा कि अनसुने वाक्यों की व्याख्या नहीं हो सकती उसी सृजनात्मकता का खंडन करता है जिसे संघटनात्मकता समझाती है।
  12. युग्म alive / dead और युग्म hot / cold दो प्रकार की विलोमता दर्शाते हैं। कौन-सा वर्णन सही है?

    1. दोनों युग्म श्रेणीगत विलोम हैं जो दोनों छोरों के बीच मध्यवर्ती मात्राएँ स्वीकार करते हैं
    2. alive/dead पूरक (द्विआधारी) विलोम हैं, जबकि hot/cold श्रेणीगत विलोम हैं
    3. alive/dead प्रतिलोम विलोम हैं, जबकि hot/cold पूरक विलोम हैं
    4. दोनों युग्म उसी प्रकार प्रतिलोम (सम्बन्धपरक) विलोम हैं जैसे buy / sell
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — alive/dead पूरक (द्विआधारी) विलोम हैं, जबकि hot/cold श्रेणीगत विलोम हैं

    alive/dead पूरक हैं: एक का निषेध दूसरे को निहित करता है, कोई मध्य नहीं। hot/cold श्रेणीगत हैं: उनके बीच एक पैमाना (गुनगुना, हल्का ठंडा) है। buy/sell जैसे प्रतिलोम विलोम एक ही सम्बन्ध को दो ओर से वर्णित करते हैं, जो कोई युग्म नहीं करता, अतः अन्य विकल्प उन्हें ग़लत वर्गीकृत करते हैं।
  13. वाक्य 'John stopped smoking' का सम्बन्ध 'John used to smoke' से है। यह सम्बन्ध मात्र संनिहितार्थ नहीं, बल्कि पूर्वधारणा के रूप में वर्गीकृत है क्योंकि:

    1. यह केवल तभी बनता है जब 'John stopped smoking' किसी अपरिचित श्रोता से विनम्र शैली में बोला जाए
    2. यह उसी क्षण निरस्त हो जाता है जब 'John stopped smoking' वस्तुतः कहा जाता है
    3. यह निषेध सहता है: 'John did not stop smoking' फिर भी बताता है कि वह पहले धूम्रपान करता था
    4. यह केवल किसी पूर्णतः सहयोगी संवाद में परिमाण-सूत्र से निकलता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — यह निषेध सहता है: 'John did not stop smoking' फिर भी बताता है कि वह पहले धूम्रपान करता था

    पूर्वधारणा की पहचान यह है कि वह निषेध सहती है: 'John stopped smoking' व 'John did not stop smoking' दोनों पूर्वधारणा करते हैं कि वह पहले धूम्रपान करता था। संनिहितार्थ निषेध में लुप्त हो जाता। विनम्रता व परिमाण-सूत्र अप्रासंगिक हैं, और पूर्वधारणा केवल वाक्य कहने भर से निरस्त नहीं होती।
  14. अर्थ-सम्बन्धों के बारे में कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।

    1. 'John killed the wasp' से 'The wasp died' निहित होता है
    2. पर्याय-वाक्य पारस्परिक संनिहितार्थ है: समान सत्य-शर्तों वाले दो वाक्य
    3. दो वाक्य एक-दूसरे का विरोध करते हैं (परस्पर असंगत हैं) जब वे एक साथ दोनों सत्य नहीं हो सकते
    4. संनिहितार्थ, संवादात्मक ध्वन्यार्थ के विपरीत, बिना विरोध निरस्त किया जा सकता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — 'John killed the wasp' से 'The wasp died' निहित होता है; B — पर्याय-वाक्य पारस्परिक संनिहितार्थ है: समान सत्य-शर्तों वाले दो वाक्य; C — दो वाक्य एक-दूसरे का विरोध करते हैं (परस्पर असंगत हैं) जब वे एक साथ दोनों सत्य नहीं हो सकते

    संनिहितार्थ (kill से die निहित), पर्याय-वाक्य पारस्परिक संनिहितार्थ के रूप में, व विरोध संयुक्त सत्यता की असंभवता के रूप में — सभी सही हैं। असत्य कथन तथ्य उलट देता है: निरस्तनीय संवादात्मक ध्वन्यार्थ होता है, जबकि संनिहितार्थ बिना विरोध निरस्त नहीं किया जा सकता।
  15. 'क्या आपका नया सहकर्मी शोध में अच्छा है?' पूछे जाने पर वक्ता उत्तर देता है 'ख़ैर, वह बैठकों में सदैव समय पर आती है।' सर्वाधिक संभावित संवादात्मक ध्वन्यार्थ, व उल्लंघित सूत्र, निम्न में से क्या हैं?

    1. कि सहकर्मी एक उत्कृष्ट शोधकर्ता है; गुण-सूत्र का उल्लंघन होता है
    2. कि समय पर आना अपने आप उच्च-गुणवत्ता शोध-क्षमता की पूरी गारंटी देता है; रीति-सूत्र ही वह है जिसका उल्लंघन होता है
    3. कि वक्ता की कोई राय ही नहीं है; यहाँ कोई संवादात्मक सूत्र सम्मिलित नहीं
    4. कि सहकर्मी शोध में विशेष अच्छी नहीं है; सम्बन्ध-सूत्र (व परिमाण) का उल्लंघन होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — कि सहकर्मी शोध में विशेष अच्छी नहीं है; सम्बन्ध-सूत्र (व परिमाण) का उल्लंघन होता है

    शोध से असंगत व पूछे गए से कम सूचनापूर्ण उत्तर देकर वक्ता सम्बन्ध (व परिमाण) का उल्लंघन करता है, यह निहित करते हुए कि सहकर्मी शोध में अच्छी नहीं है। उत्तर यह नहीं कहता कि वह उत्कृष्ट है, समयनिष्ठा शोध-गुणवत्ता की गारंटी नहीं देती, और ध्वन्यार्थ ठीक वही राय है जो अप्रत्यक्ष रूप से दी जाती है, न कि कोई राय न होना।
  16. प्रयोगविज्ञान के बारे में कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।

    1. Austin ने उक्तिपरक, उक्तिप्रयोजक व उक्तिफलक कृत्यों को अलग किया
    2. संवादात्मक ध्वन्यार्थ, संनिहितार्थ के विपरीत, बिना विरोध निरस्तनीय है
    3. 'here' व 'now' जैसी निर्देशक अभिव्यक्तियों का संदर्भ से स्वतंत्र एक नियत संदर्भन होता है
    4. Grice के सूत्र एक व्यापक सहयोग सिद्धांत के अंतर्गत आते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — Austin ने उक्तिपरक, उक्तिप्रयोजक व उक्तिफलक कृत्यों को अलग किया; B — संवादात्मक ध्वन्यार्थ, संनिहितार्थ के विपरीत, बिना विरोध निरस्तनीय है; D — Grice के सूत्र एक व्यापक सहयोग सिद्धांत के अंतर्गत आते हैं

    Austin का त्रि-विध कृत्य-भेद, ध्वन्यार्थ की निरस्तनीयता (संनिहितार्थ की अनिरस्तनीयता के विरुद्ध) व सूत्रों को शासित करता सहयोग सिद्धांत सभी सही हैं। असत्य कथन निर्देश की ग़लत व्याख्या करता है: निर्देशक अभिव्यक्तियाँ उच्चारण-संदर्भ के साथ अपना संदर्भन बदलती हैं, यही उन्हें निर्देशक बनाता है।
  17. एक वक्ता कहता है 'Some of the students passed the exam' और फिर जोड़ता है 'in fact, all of them did', और यह जोड़ विरोधी नहीं है। यह 'some' के सामान्य 'सब नहीं' अर्थ के बारे में क्या दर्शाता है?

    1. यह 'some' के निहित शाब्दिक अर्थ का भाग है, अतः इस प्रकार इसे निरस्त करने पर दोनों वाक्यों के बीच सीधा विरोध उत्पन्न होना चाहिए
    2. यह परिमाण-सूत्र का एक सोपानी संवादात्मक ध्वन्यार्थ है, अतः इसे बिना किसी विरोध के निरस्त किया जा सकता है
    3. यह 'some' की शाब्दिक द्व्यर्थता है, जिसके दो असम्बद्ध अर्थ हैं, 'सब नहीं' व 'सब', जो उच्चारण के संदर्भ से चुने जाते हैं
    4. यह 'some' से उद्दीप्त पूर्वधारणा है, अतः पूरे वाक्य का निषेध करने या उसे प्रश्न बनाने पर भी इसे बने रहना चाहिए
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — यह परिमाण-सूत्र का एक सोपानी संवादात्मक ध्वन्यार्थ है, अतः इसे बिना किसी विरोध के निरस्त किया जा सकता है

    'some' की शाब्दिक अंतर्वस्तु 'कम से कम एक' है; 'सब नहीं' का अर्थ परिमाण-सूत्र से उत्पन्न सोपानी ध्वन्यार्थ है, और ध्वन्यार्थ, संनिहितार्थ के विपरीत, बिना विरोध निरस्त हो सकता है, जो ठीक वही है जो यह जोड़ करता है। यदि 'सब नहीं' निहित होता तो उसे निरस्त करना विरोधी होता। शाब्दिक द्व्यर्थता या पूर्वधारणा ऐसा व्यवहार नहीं करती, क्योंकि यहाँ निरस्तीकरण से वाक्य पूर्णतः संगत रहता है।
  18. अंग्रेज़ी में प्रश्नवाचक शब्द आरंभ में खिसकाया जाता है (What did you read?), जबकि हिन्दी में वह प्रायः वहीं रहता है जहाँ संगत तर्क होता (तुमने क्या पढ़ा?)। सिद्धांत-व-प्राचल दृष्टि से इस अंतर का सर्वोत्तम वर्णन निम्न में से क्या है?

    1. क्रिया read की थीटा-भूमिकाओं का अंतर, जो अंग्रेज़ी में कर्ता व कर्म-विषय होनी चाहिए पर हिन्दी में नहीं
    2. हिन्दी में बंधन सिद्धांत C का उल्लंघन, क्योंकि उसका प्रश्नवाचक शब्द कर्ता के ऊपर नहीं खिसकाया जाता
    3. एक प्राचल में विचलन जो यह नियमित करता है कि wh-पदबंध प्रकट रूप से खिसकते हैं या नहीं, दोनों भाषाओं के साझा सिद्धांतों के भीतर
    4. इसका प्रमाण कि हिन्दी में सार्वभौमिक व्याकरण नहीं है, क्योंकि उसके प्रश्नवाचक शब्द किसी वाक्यविन्यासी सिद्धांत का पालन ही नहीं करते
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — एक प्राचल में विचलन जो यह नियमित करता है कि wh-पदबंध प्रकट रूप से खिसकते हैं या नहीं, दोनों भाषाओं के साझा सिद्धांतों के भीतर

    सार्वभौमिक सिद्धांत साझा हैं और भाषाएँ प्राचल-निर्धारणों में भिन्न होती हैं; wh-पदबंध प्रकट रूप से खिसकता है या नहीं, ऐसे प्राचल का मानक उदाहरण है। क्रिया दोनों भाषाओं में वही भूमिकाएँ सौंपती है, सिद्धांत C नामों व सर्वनामों से सम्बद्ध है, प्रश्नवाचक शब्दों से नहीं, और हिन्दी के प्रश्नवाचक शब्द पूर्णतः नियम-शासित हैं, अतः यह दावा कि हिन्दी में सार्वभौमिक व्याकरण नहीं है, ग़लत है।