ध्वनियाँ और शब्द: ध्वनिविज्ञान, स्वनिमविज्ञान व रूपविज्ञान
2. IPA: ध्वनियों का लिप्यंतरण
अंतर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला (IPA) प्रत्येक विशिष्ट वाक्-ध्वनि के लिए एक प्रतीक देती है, अतः लिप्यंतरण वर्तनी से स्वतंत्र होता है: अंग्रेज़ी cat का [kæt], thought का [θɔːt], ship का [ʃɪp]। एक व्यंजन (घोषत्व, स्थान, रीति) त्रिक से नियत होता है: [t] अघोष वर्त्स्य स्पर्श है, [z] घोष वर्त्स्य संघर्षी, [m] (घोष) ओष्ठ्य नासिक्य, [ŋ] कोमलतालव्य नासिक्य। वर्गाकार कोष्ठक [ ] सूक्ष्म ध्वन्यात्मक लिप्यंतरण (वास्तविक ध्वनियाँ) चिह्नित करते हैं; तिर्यक रेखाएँ / / स्वनिमिक लिप्यंतरण (अमूर्त विरोधात्मक इकाइयाँ) चिह्नित करती हैं। यह भेद महत्वपूर्ण है: अंग्रेज़ी /p/ pin में महाप्राण [pʰ] के रूप में पर spin में अल्पप्राण [p] के रूप में साकार होता है।
| प्रतीक | घोषत्व | स्थान | रीति |
|---|---|---|---|
| [p] | अघोष | ओष्ठ्य | स्पर्श |
| [z] | घोष | वर्त्स्य | संघर्षी |
| [ŋ] | घोष | कोमलतालव्य | नासिक्य |
| [tʃ] | अघोष | पश्च-वर्त्स्य | स्पर्श-संघर्षी |
3. स्वनिम, संस्वन, वितरण व विभेदक लक्षण
स्वनिम (phoneme) किसी भाषा की अमूर्त विरोधात्मक ध्वनि-इकाई है; उसके भौतिक रूप से भिन्न साकार रूप उसके संस्वन (allophones) हैं। दो ध्वनियाँ विरोधात्मक (contrastive) (अलग स्वनिम) हैं यदि एक को दूसरे से बदलने पर अर्थ बदल सके — जिसे न्यूनतम युग्म (minimal pair) दिखाता है, वे दो शब्द जो केवल एक ध्वनि में भिन्न हों: अंग्रेज़ी pin /pɪn/ बनाम bin /bɪn/ सिद्ध करता है कि /p/ व /b/ भिन्न स्वनिम हैं। दो ध्वनियाँ पूरक वितरण (complementary distribution) में (एक ही स्वनिम के संस्वन) हैं यदि प्रत्येक केवल वहीं आए जहाँ दूसरी नहीं आ सकती, अतः वे कभी विरोध नहीं करतीं: अंग्रेज़ी में महाप्राण [pʰ] बलाघातयुक्त अक्षर के आरंभ में व अल्पप्राण [p] /s/ के बाद आता है, अतः वे /p/ के संस्वन हैं। जहाँ ध्वनियाँ एक ही स्थान पर बिना अर्थ-परिवर्तन के आएँ, वे स्वच्छंद विचरण (free variation) में होती हैं।
विभेदक लक्षण (distinctive features) ध्वनियों को उन छोटे द्विआधारी गुणों ([±घोष], [±नासिक्य], [±सतत/continuant], [±स्वरिल/sonorant], व स्थान-लक्षण) में तोड़ते हैं जिन पर विरोध व प्राकृतिक वर्ग कथित होते हैं। प्राकृतिक वर्ग (natural class) उन ध्वनियों का समूह है जो साझा लक्षणों के कारण नियमों में एक साथ व्यवहार करती हैं। लक्षण-प्रणाली हमें ठीक-ठीक कहने देती है कि दो ध्वनियाँ कैसे भिन्न हैं: [p] व [b] केवल [±घोष] में भिन्न हैं — एकमात्र लक्षण — जबकि [p] व [n] एक साथ कई लक्षणों में भिन्न हैं (जिनमें [±घोष], [±नासिक्य] व स्थान सम्मिलित हैं)। यह द्विआधारी, ध्वानिक आधार वाली लक्षण-प्रणाली Roman Jakobson (Fant व Halle के साथ, 1952) से आती है; Chomsky व Halle ने The Sound Pattern of English (1968) में इसे उच्चारणात्मक रूप में पुनर्गठित किया।
4. स्वनिमिक प्रक्रियाएँ व आधुनिक सिद्धांत
- खंडिक प्रक्रियाएँ अलग-अलग ध्वनियों को बदलती हैं: सादृश्यीकरण/assimilation (कोई ध्वनि पड़ोसी के लक्षण ग्रहण कर ले, जैसे अंग्रेज़ी in- का impossible में ओष्ठ्य से पूर्व [ɪm] हो जाना), विसादृश्यीकरण/dissimilation, लोप/deletion, आगम/epenthesis (प्रक्षेप), व वर्ण-विपर्यय/metathesis (पुनःक्रमण)।
- खंडेतर (छांदसिक) लक्षण एक से अधिक खंड तक फैलते हैं: बलाघात/stress, दीर्घता/length, स्वराघात/intonation (वाक्य-स्तरीय तारत्व) व सुर/tone (शाब्दिक तारत्व जो शब्द-अर्थ भेदता है, जैसे मंदारिन में)। सुर-संबंधी प्रक्रियाएँ जैसे सुर-प्रसार व अवरोहण इन्हीं पर संक्रिया करती हैं; उदाहरणार्थ मंदारिन में तृतीय सुर दूसरे तृतीय सुर से पूर्व आरोही (द्वितीय) सुर बन जाता है, जिसे सुर-संधि (tone sandhi) कहते हैं।
| सिद्धांत | मूल विचार | सम्बद्ध विद्वान |
|---|---|---|
| जनक स्वनिमविज्ञान (SPE) | क्रमबद्ध पुनर्लेखन नियम अंतर्निहित से सतही रूप बनाते हैं; रैखिक लक्षण-आव्यूह | Chomsky व Halle (1968) |
| स्वतःखंडिक स्वनिमविज्ञान | सुर व लक्षण अलग स्तरों पर, संयोजन-रेखाओं से जुड़े (अरैखिक) | John Goldsmith (1976) |
| लेक्सिकल स्वनिमविज्ञान | रूपविज्ञान व स्वनिमविज्ञान क्रमबद्ध स्तरों में अंतर्गुंथित; लेक्सिकल बनाम उत्तर-लेक्सिकल नियम | Kiparsky, Mohanan (1982) |
| Optimality Theory (OT) | श्रेणीबद्ध, उल्लंघनीय बाधाएँ; GEN उम्मीदवार बनाता है, EVAL इष्टतम चुनता है | Prince व Smolensky (1993) |
5. रूपिम, संरूपिम, विभक्ति व व्युत्पत्ति
रूपिम (morpheme) वह सबसे छोटी इकाई है जो अर्थ या व्याकरणिक प्रकार्य वहन करती है; cats में दो हैं, {cat} + {बहुवचन -s}, और unhappiness में तीन, {un-} + {happy} + {-ness}। रूपिम के संदर्भ-निर्भर विचलित रूप उसके संरूपिम (allomorphs) हैं: अंग्रेज़ी बहुवचन अघोष ध्वनियों के बाद /s/ (cats), घोष के बाद /z/ (dogs) व ऊष्म/सिबिलेंट के बाद /ɪz/ (horses) है — एक रूपिम, तीन स्वनिमिक रूप से नियमित संरूपिम। रूपिम मुक्त (free) होते हैं (अकेले खड़े हो सकें: dog, run) या बद्ध (bound) (केवल जुड़ें: un-, -ness, -ed), और शब्द में एक मूल (root) व प्रत्यय (उपसर्ग, प्रत्यय, तथा कुछ भाषाओं में मूल के भीतर मध्यसर्ग व उसे घेरने वाले परिसर्ग) होते हैं। क्लिटिक (clitic) स्वनिमिक रूप से किसी आश्रय-शब्द पर निर्भर पर वाक्यविन्यासी रूप से शब्द-जैसा होता है (John's gone में 's), और शून्य रूपिम (zero morph) बिना प्रकट रूप के कोई कोटि चिह्नित करता है (बहुवचन के रूप में sheep)।
विभक्ति (inflection) बनाम व्युत्पत्ति (derivation) शब्द-संरचना का केंद्रीय विभाजन है। विभक्तिक प्रत्यय शब्द का पद-वर्ग या मूल अर्थ बदले बिना व्याकरणिक कोटियाँ चिह्नित करते हैं: अंग्रेज़ी में एक छोटा, बंद समुच्चय है (बहुवचन -s, भूत -ed, अन्य-पुरुष-एकवचन -s, तुलनात्मक -er, आदि)। व्युत्पादक प्रत्यय नए पदिम (lexemes) बनाते हैं, प्रायः पद-वर्ग बदलते या पर्याप्त अर्थ जोड़ते हुए: -ness विशेषण से संज्ञा बनाता है (happy → happiness), -ize क्रिया बनाता है, un- अर्थ उलटता है। अन्य शब्द-निर्माण प्रक्रियाओं में समास/compounding (blackboard), रूपांतरण/conversion (संज्ञा google → क्रिया to google), कर्तन/clipping, मिश्रण/blending व संक्षेपाक्षरण/acronymy सम्मिलित हैं।
| गुण | विभक्ति | व्युत्पत्ति |
|---|---|---|
| पद-वर्ग | कभी नहीं बदलता | प्रायः बदलता है |
| उत्पादकता | पूर्णतः नियमित, व्यापक रूप से लागू | प्रायः सीमित, रिक्तियों सहित |
| स्थिति | व्युत्पत्ति के बाहर (परिधीय) | मूल के निकट |
6. द्व्यर्थता, अंतराफलक, मानसिक शब्दकोश व आधुनिक सिद्धांत
शब्द दो प्रकार से द्व्यर्थ (ambiguous) हो सकते हैं। शाब्दिक द्व्यर्थता (lexical ambiguity) एक रूप के असम्बद्ध अर्थ हैं (bank = नदी-तट या वित्तीय संस्था)। संरचनात्मक (रूपिमिक) द्व्यर्थता एक श्रृंखला की दो आंतरिक संरचनाएँ हैं: unlockable या तो [[un+lock]+able] 'जिसे खोला जा सके' है या [un+[lock+able]] 'जिसे बंद न किया जा सके'। बाधाएँ शब्द-निर्माण को सीमित करती हैं: प्रत्यय किसी दिए गए वर्ग के आधार का चयन करते हैं (-ness विशेषणों से जुड़ता है), और अवरोधन (blocking) तब नियमित रूप रोकता है जब कोई संचित शब्द पहले से उसका स्थान भर दे (सम्बद्ध अर्थ में stealer को thief अवरुद्ध करता है)।
रूप-स्वनिम अंतराफलक वह स्थान है जहाँ शब्द-संरचना व ध्वनि मिलते हैं: उपर्युक्त बहुवचन संरूपिम स्वनिमविज्ञान द्वारा चुने जाते हैं, और कुछ स्वनिमिक नियम केवल निश्चित रूपिमिक क्षेत्रों के भीतर लागू होते हैं। मानसिक शब्दकोश (mental lexicon) वक्ता की संचित शाब्दिक मदों की सूची है; एक केंद्रीय विवाद संचयन बनाम संगणन है — कि जटिल व विशेषकर अनियमित शब्द (went, mice) सम्पूर्ण रूप से संचित होते हैं जबकि नियमित (walked) नियम से तत्क्षण बनते हैं, यह द्वि-मार्ग दृष्टि मनोभाषाविज्ञान में बहु-अध्ययित है।
- Distributed Morphology (Halle व Marantz, 1993): कोई अलग शब्द-निर्माण घटक नहीं है; वाक्यविन्यास अमूर्त रूपिम जोड़ता है और स्वनिमिक सामग्री Vocabulary Insertion द्वारा विलंब से प्रविष्ट होती है — एक गैर-लेक्सिकलवादी, 'पूरी तरह वाक्यविन्यास' दृष्टि।
- लेक्सिकलवादी बनाम प्रतिमान-आधारित उपागम: लेक्सिकलवाद शब्द-निर्माण को वाक्यविन्यास से अलग, शब्दकोश में रखता है; प्रतिमान-आधारित (word-and-paradigm) सिद्धांत विभक्ति को रूपिम-संयोजन के बजाय साकारीकरण-नियमों से प्रतिमान की कोष्ठिकाएँ भरना मानते हैं।
- Construction Morphology (Booij): शब्द व शब्द-निर्माण-योजनाएँ संरचनाएँ (constructions) हैं — शब्द-स्तर पर रूप व अर्थ के रूढ़िगत युग्म, वाक्यविन्यासी संरचनाओं के समानांतर।
मुख्य बिंदु
- वाणी फुफ्फुसीय बहिर्गामी वायुधारा का प्रयोग करती है; स्वरोच्चारण (वाक्-तंतु कंपन) घोषत्व तय करता है, और व्यंजन घोषत्व, स्थान व रीति से नियत होते हैं। ध्वनिविज्ञान ध्वनि का भौतिक अध्ययन है (उच्चारणात्मक, ध्वानिक, श्रवण); स्वनिमविज्ञान यह है कि कोई एक भाषा ध्वनि को विरोधात्मक तंत्र में कैसे संगठित करती है।
- न्यूनतम युग्म सिद्ध करता है कि दो ध्वनियाँ विरोधात्मक स्वनिम हैं; पूरक वितरण (अनतिव्यापी परिवेश, कोई न्यूनतम युग्म नहीं) का अर्थ वे एक स्वनिम के संस्वन हैं; स्वच्छंद विचरण वही स्थान, बिना अर्थ-परिवर्तन। विभेदक लक्षण विरोध व प्राकृतिक वर्ग कहते हैं: [p] व [b] केवल [±घोष] में भिन्न हैं।
- प्रक्रियाएँ खंडिक (सादृश्यीकरण, लोप, आगम, वर्ण-विपर्यय) या खंडेतर (बलाघात, दीर्घता, स्वराघात, सुर) हैं। सिद्धांत: जनक SPE (क्रमबद्ध नियम, रैखिक) — Chomsky व Halle; स्वतःखंडिक (स्तर) — Goldsmith; लेक्सिकल स्वनिमविज्ञान (स्तर) — Kiparsky/Mohanan; Optimality Theory (श्रेणीबद्ध उल्लंघनीय बाधाएँ) — Prince व Smolensky।
- रूपिम सबसे छोटी सार्थक इकाई है; संरूपिम उसके नियमित विचलित रूप हैं (अंग्रेज़ी बहुवचन /s/, /z/, /ɪz/)। विभक्ति शब्द-वर्ग बदले बिना व्याकरण चिह्नित करती है और नियमित व परिधीय है; व्युत्पत्ति नए पदिम बनाती है, प्रायः वर्ग बदलते हुए, और मूल के निकट बैठती है।
- शाब्दिक द्व्यर्थता एक रूप के असम्बद्ध अर्थ; संरचनात्मक द्व्यर्थता एक श्रृंखला की दो संरचनाएँ (unlockable)। अवरोधन व वर्ग-चयन शब्द-निर्माण को सीमित करते हैं; मानसिक शब्दकोश संचयन-बनाम-संगणन विवाद उठाता है (अनियमित संचित, नियमित निर्मित)।
- आधुनिक रूपविज्ञान: Distributed Morphology (Halle व Marantz) विलंबित Vocabulary Insertion सहित गैर-लेक्सिकलवादी है; लेक्सिकलवादी व प्रतिमान-आधारित सिद्धांत इस पर भिन्न हैं कि शब्द-निर्माण शब्दकोश में है या प्रतिमान-कोष्ठिकाओं को साकार करता है; Construction Morphology (Booij) शब्दों को रूप-अर्थ संरचनाएँ मानता है।
अभ्यास प्रश्न (17)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
IPA की दृष्टि से ध्वनि [p] को निम्न में से किस रूप में सर्वोत्तम वर्णित किया जाता है?
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उत्तर: B — एक अघोष ओष्ठ्य स्पर्श
[p] ओष्ठों से (ओष्ठ्य), पूर्ण अवरोध फिर विमोचन सहित (स्पर्श), व वाक्-तंतु अलग रखकर (अघोष) बनता है। घोष ओष्ठ्य स्पर्श [b] है; अघोष वर्त्स्य संघर्षी [s] है; घोष कोमलतालव्य नासिक्य [ŋ] है।ध्वनियाँ [p] व [b] उच्चारण-स्थान व रीति में समान हैं। उन्हें अलग करने वाला एकमात्र लक्षण निम्न में से कौन-सा है?
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उत्तर: C — घोषत्व, क्योंकि [p] अघोष है और [b] घोष
दोनों ओष्ठ्य स्पर्श हैं, अतः स्थान व रीति समान हैं; वे केवल [±घोष] में भिन्न हैं — [p] अघोष, [b] घोष। भ्रामक विकल्प स्थान, नासिक्यता या रीति में अंतर का मिथ्या दावा करते हैं, पर इन तीनों लक्षणों में [p] व [b] एकमत हैं।ध्वनिविज्ञान में स्वरोच्चारण (phonation) निम्न में से किसको संदर्भित करता है?
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उत्तर: A — ग्लॉटिस पर वाक्-तंतुओं का व्यापार, जो घोषत्व उत्पन्न करता है
स्वरोच्चारण ग्लॉटिस पर वाक्-तंतुओं का व्यवहार है: कंपन घोषत्व देता है, खुला ग्लॉटिस अघोषत्व। लैरिंक्स के ऊपर आकारण उच्चारण है; फेफड़ों से वायु वायुधारा-तंत्र है; कान व मस्तिष्क द्वारा पुनर्ग्रहण श्रवण/प्रत्यक्षण ध्वनिविज्ञान है।वाक्-उत्पादन के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।
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उत्तर: A — अधिकांश वाक्-ध्वनियाँ फेफड़ों से बाहर धकेली गई फुफ्फुसीय बहिर्गामी वायुधारा का प्रयोग करती हैं; B — घोषत्व लैरिंक्स में वाक्-तंतुओं के कंपन से उत्पन्न होता है; C — उच्चारण-स्थान बताता है कि वाक्-मार्ग में कहाँ वायु-प्रवाह अवरुद्ध होता है
वायुधारा, घोषत्व व स्थान वाले कथन सभी मानक हैं। असत्य कथन स्वरों के बारे में है: स्वरों का वर्गीकरण जिह्वा की ऊँचाई, पश्चता व ओष्ठ-वर्तुलता से होता है, व्यंजनों वाले स्थान व रीति-लेबलों (ओष्ठ्य, वर्त्स्य, स्पर्श आदि) से नहीं, अतः वह सम्मिलित नहीं है।अंग्रेज़ी शब्द thought का उच्चारण /θɔːt/ है। इस लिप्यंतरण के प्रत्येक खंड (स्वनिम) को गिनते हुए, इसमें कितने स्वनिम हैं? अपना उत्तर एक पूर्ण संख्या में दें।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 3
लिप्यंतरण /θɔːt/ में तीन खंड हैं: व्यंजन /θ/, दीर्घ स्वर /ɔː/ (एक ही स्वर-स्वनिम, दीर्घता-चिह्न अलग खंड नहीं है), व व्यंजन /t/। वर्तनी में सात अक्षर हैं, यही जाल है: स्वनिम ध्वनियों से गिने जाते हैं, अक्षरों से नहीं, अतः उत्तर 3 है।अंग्रेज़ी में महाप्राण [pʰ] बलाघातयुक्त अक्षर के आरंभ में (जैसे pin में) आता है जबकि अल्पप्राण [p] /s/ के बाद (जैसे spin में), और दोनों कभी एक ही स्थान पर नहीं आते। यह दर्शाता है कि [pʰ] व [p] निम्न में से क्या हैं?
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उत्तर: D — एकल स्वनिम /p/ के संस्वन, क्योंकि वे पूरक वितरण में हैं
क्योंकि प्रत्येक ध्वनि केवल वहीं आती है जहाँ दूसरी नहीं आ सकती, कोई न्यूनतम युग्म व अर्थ-विरोध नहीं है: वे पूरक वितरण में हैं और /p/ के संस्वन हैं। केवल ध्वन्यात्मक भिन्नता अलग स्वनिम नहीं बनाती, अंग्रेज़ी में महाप्राणता अर्थ नहीं बदलती, और वितरण कड़ाई से नियमित है, स्वच्छंद नहीं।एक भाषावैज्ञानिक को न्यूनतम युग्म [tak] 'X' व [dak] 'Y' मिलता है, और अलग से यह मिलता है कि अनुनासिक स्वर [ã] केवल नासिक्य व्यंजनों से पूर्व आता है जबकि मौखिक [a] अन्यत्र। कौन-से निष्कर्ष सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।
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उत्तर: A — /t/ व /d/ विरोधात्मक हैं और अतः अलग स्वनिम हैं; B — [ã] व [a] पूरक वितरण में हैं और एक ही स्वर-स्वनिम के संस्वन हैं; D — अनुनासिक स्वर के वितरण को एक परिवेश के रूप में कहा जा सकता है: नासिक्य व्यंजनों से पूर्व
न्यूनतम युग्म सिद्ध करता है कि /t/ व /d/ विरोध करते हैं। अनुनासिक व मौखिक स्वर कभी एक परिवेश साझा नहीं करते, अतः वे पूरक वितरण में हैं — एक ही स्वनिम के संस्वन, जिनमें अनुनासिक नासिक्य व्यंजनों से पूर्व नियमित है। यह दावा कि वे केवल ध्वन्यात्मक भिन्नता के कारण अलग स्वनिम होने चाहिए, ठीक वही भूल है जिसे पूरक वितरण निरस्त करता है।न्यूनतम युग्म (minimal pair) निम्न में से क्या है?
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उत्तर: A — दो शब्द जो अर्थ में भिन्न हों और एक ही स्थान पर ठीक एक ध्वनि में भिन्न हों
न्यूनतम युग्म वे दो शब्द हैं जो अर्थ में और एक ही स्थान पर एकमात्र ध्वनि में भिन्न हों (pin/bin), जो सिद्ध करता है कि दोनों ध्वनियाँ विरोधात्मक स्वनिम हैं। एक ही अर्थ के रूप न्यूनतम युग्म नहीं हैं; एक ही परिवेश में संस्वन स्वच्छंद विचरण वर्णित करते हैं; कभी साथ न आने वाली ध्वनियाँ पूरक वितरण में हैं।खंडेतर लक्षणों व स्वनिमिक प्रक्रियाओं के बारे में कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।
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उत्तर: A — सुर तारत्व का शाब्दिक प्रयोग है जो शब्द-अर्थ भेद सकता है, जैसे मंदारिन में; B — सादृश्यीकरण किसी ध्वनि को पड़ोसी ध्वनि का लक्षण ग्रहण करवाता है; C — बलाघात, दीर्घता व स्वराघात खंडेतर हैं क्योंकि वे एक से अधिक खंड तक फैलते हैं
सुर (शाब्दिक तारत्व), सादृश्यीकरण (पड़ोसी से लक्षण की नकल) व बलाघात, दीर्घता तथा स्वराघात का खंडेतर होना — सभी सही हैं। असत्य कथन वर्ण-विपर्यय की ग़लत परिभाषा देता है, जो ध्वनियों का पुनःक्रमण है, लोप नहीं।किसी स्वनिम-सिद्धांत का उसके मूल विचार के साथ कौन-सा युग्म सही है?
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उत्तर: B — स्वतःखंडिक स्वनिमविज्ञान — अलग स्तरों पर सुर व लक्षण, संयोजन-रेखाओं से जुड़े
स्वतःखंडिक स्वनिमविज्ञान की पहचान अलग स्तरों पर सुर/लक्षण हैं जो संयोजन-रेखाओं से जुड़े हों। अन्य तीन जान-बूझकर परिभाषाएँ बदलते हैं: श्रेणीबद्ध उल्लंघनीय बाधाएँ Optimality Theory की हैं, क्रमबद्ध पुनर्लेखन नियम जनक स्वनिमविज्ञान (SPE) के, और स्तरों में रूप-स्वनिम अंतर्गुंथन लेक्सिकल स्वनिमविज्ञान का।एक सिद्धांत क्रमबद्ध व्युत्पादक नियमों को पूरी तरह हटा देता है, उन्हें श्रेणीबद्ध, उल्लंघनीय बाधाओं के समुच्चय से बदलते हुए; व्याकरण उम्मीदवार निर्गत बनाता है और उसे चुनता है जो श्रेणीक्रम को सर्वोत्तम रूप से संतुष्ट करे। यह किस सिद्धांत का वर्णन है?
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उत्तर: C — Optimality Theory, जिसे Prince व Smolensky ने विकसित किया
क्रमबद्ध नियमों को उम्मीदवार निर्गतों पर मूल्यांकित श्रेणीबद्ध, उल्लंघनीय बाधाओं से बदलना Optimality Theory (Prince व Smolensky, 1993) का परिभाषक कदम है। SPE ठीक वही नियम-आधारित प्रणाली है जिसके विरुद्ध OT प्रतिक्रिया करता है; स्वतःखंडिक व लेक्सिकल स्वनिमविज्ञान व्युत्पादक नियम बनाए रखते हैं।शब्द unhappiness में कितने रूपिम हैं, happy को एक ही मूल मानते हुए? अपना उत्तर एक पूर्ण संख्या में दें।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 3
शब्द un- + happy + -ness में विभाजित होता है: उपसर्ग {un-}, मुक्त मूल {happy}, व प्रत्यय {-ness}, जिससे तीन रूपिम बनते हैं। -ness को दो टुकड़ों में बाँटना, या un- छोड़ देना प्रचलित भूलें हैं; उत्तर 3 है।कौन-सा कथन विभक्ति को व्युत्पत्ति से सही ढंग से अलग करता है?
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उत्तर: D — विभक्ति पद-वर्ग बदले बिना व्याकरणिक कोटियाँ चिह्नित करती है, जबकि व्युत्पत्ति नए पदिम बनाती है और उसे बदल सकती है
विभक्ति पद-वर्ग बदले बिना व्याकरणिक कोटियाँ (बहुवचन, काल) चिह्नित करती है; व्युत्पत्ति नए पदिम बनाती है और प्रायः वर्ग बदलती है। भ्रामक विकल्प दोनों को उलट देते हैं या ग़लत दावा करते हैं कि दोनों सदैव पद-वर्ग बदलती हैं, जो विभक्ति कभी नहीं करती।शब्दों taller व teacher में -er वर्तनी वाले प्रत्यय के दो भिन्न प्रकार्य हैं। कौन-सा विश्लेषण सही है?
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उत्तर: B — taller में यह विभक्तिक है (विशेषण का तुलनात्मक), जबकि teacher में यह व्युत्पादक है (क्रिया से संज्ञा बनाते हुए)
विशेषण पर तुलनात्मक -er (tall → taller) विभक्तिक है: वही पद-वर्ग, एक व्याकरणिक कोटि। क्रिया पर कर्तृवाचक -er (teach → teacher) व्युत्पादक है: यह क्रिया से नई संज्ञा बनाता है। दोनों -er प्रत्यय समध्वनिक हैं पर प्रकार्य में भिन्न, अतः एकल-प्रकार्य वाले उत्तर ग़लत हैं।रूपिमों व संरूपिमों के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं? सभी लागू विकल्प चुनें।
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उत्तर: A — अंग्रेज़ी बहुवचन रूपिम के संरूपिम /s/, /z/ व /ɪz/ हैं, जो पूर्ववर्ती ध्वनि से चुने जाते हैं; B — मुक्त रूपिम अकेला शब्द बन सकता है, जबकि बद्ध रूपिम को किसी से जुड़ना ही पड़ता है; C — संरूपिम एक ही रूपिम के विचलित साकार रूप हैं, अलग रूपिम नहीं
बहुवचन संरूपता, मुक्त/बद्ध भेद व संरूपिम की परिभाषा सभी सही हैं। असत्य दावा यह है कि रूपिम एक अक्षर के बराबर होता है: रूपिम अक्षर से छोटे (बहुवचन -s) या बड़े (दो-अक्षरीय मूल water) हो सकते हैं, अतः कोई एक-से-एक मेल नहीं है।किसी आधुनिक रूपिमिक ढाँचे का कौन-सा आरोपण सही है?
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उत्तर: C — Distributed Morphology (Halle व Marantz) गैर-लेक्सिकलवादी है, अमूर्त रूपिम वाक्यविन्यास में बनाते हुए और स्वनिमिक रूप विलंब से प्रविष्ट करते हुए
Distributed Morphology (Halle व Marantz, 1993) गैर-लेक्सिकलवादी है: वाक्यविन्यास अमूर्त रूपिम संचालित करता है और स्वनिमिक सामग्री Vocabulary Insertion द्वारा विलंब से प्रविष्ट होती है। अन्य विकल्प उस विलंबित-प्रवेश विचार को Construction Morphology पर आरोपित करते हैं, Distributed Morphology को ग़लती से लेक्सिकलवादी कहते हैं, या Construction Morphology की अपनी रूप-अर्थ दृष्टि से इनकार करते हैं।स्पेक्ट्रोग्राम पर कौन-सा ध्वानिक गुण स्वर की ऊँचाई से सही ढंग से जुड़ा है?
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उत्तर: A — F1, प्रथम संरचकस्वर, जो स्वर की ऊँचाई का व्युत्क्रमी है, अतः उच्च स्वरों का F1 निम्न होता है
F1 स्वर की ऊँचाई का व्युत्क्रमी है: [i] व [u] जैसे उच्च स्वरों का F1 निम्न और [a] जैसे निम्न स्वरों का F1 उच्च होता है। भ्रामक विकल्प इस सम्बन्ध की दिशा उलट देता है। F2 ऊँचाई नहीं बल्कि अग्रता को दर्शाता है, और स्वर-आरंभ-काल स्पर्श-ध्वनियों के घोषत्व का संकेत है, स्वर-गुणवत्ता का नहीं।