तंतु-संरचना व गुण: अन्वेषण-विधियाँ, आकारिकी, यांत्रिकी, नमी व संरचना–गुण संबंध

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर के खंड XE9.1 “वस्त्र तंतु” के अंतिम भाग का उत्तर देता है: “Methods of investigating fibre structure such as density, x-ray diffraction, birefringence, optical and electron microscopy such as SEM and TEM, I.R. spectroscopy, thermal methods such as DSC, DMA, TMA and TGA; Structure and morphology of man-made fibres; Mechanical properties of fibres; Moisture sorption of fibres; Fibre structure-property correlation.” यह पढ़ाता है कि प्रत्येक अन्वेषण-विधि क्या मापती है और उसका नियामक संबंध क्या है, प्रत्येक कताई-मार्ग कौन-सी आकारिकी बनाता है, तंतु के प्रतिबल–विकृति प्राचल, नमी-अवशोषण, तथा संरचना गुणों को कैसे नियंत्रित करती है। संख्यात्मक प्रश्न घनत्व से क्रिस्टलनता, ब्रैग दूरी व शेरर क्रिस्टलाइट-आकार, द्विअपवर्तन व अभिविन्यास, DSC क्रिस्टलनता, तथा टेनेसिटी से प्रतिबल में परिवर्तन हैं।

1. घनत्व व क्रिस्टलनता का द्विप्रावस्था आकलन

तंतु-संरचना का अध्ययन ऐसी विधियों से होता है जिनमें प्रत्येक भिन्न विशेषता जाँचती है: घनत्व व्यवस्थित पदार्थ की मात्रा देता है, X-किरण विवर्तन क्रिस्टलों का जालक व अभिविन्यास, द्विअपवर्तन समग्र अभिविन्यास, सूक्ष्मदर्शिकी आकार व सतह, अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी रासायनिक समूह व उनका अभिविन्यास, और तापीय विधियाँ संक्रमण। कोई एक विधि पूरा चित्र नहीं देती, और “क्रिस्टलनता” हेतु उनकी संख्याएँ भिन्न होती हैं क्योंकि प्रत्येक उसे अलग परिभाषित करती है।

घनत्व घनत्व-प्रवणता स्तंभ में मापा जाता है: दो मिश्रणीय द्रव (उदाहरण, टॉलूईन व कार्बन टेट्राक्लोराइड) मिलाए जाते हैं ताकि घनत्व गहराई के साथ सुचारु बढ़े और काँच के तैरकों से अंशांकित हो; तंतु का छोटा नमूना तब तक डूबता है जब तक उस स्तर पर तैर न जाए जहाँ द्रव का घनत्व उसके अपने घनत्व के बराबर है। क्रिस्टल अक्रिस्टलीय प्रावस्था से सघन संकुलित होते हैं, अतः क्रिस्टलनता के साथ घनत्व बढ़ता है। द्विप्रावस्था मॉडल में क्रिस्टलीय आयतन-अंश φc = (ρ − ρa)/(ρc − ρa) और द्रव्यमान-अंश xc = ρc(ρ − ρa)/[ρ(ρc − ρa)] है, जहाँ ρ नमूने का घनत्व, ρc पूर्ण क्रिस्टल का घनत्व (एकक कोष्ठिका से, ρc = Z·M/(NA·V)) और ρa पूर्णतः अक्रिस्टलीय बहुलक का (शीघ्र-ठंडे नमूने से) है।

हल उदाहरण। PET तंतु का घनत्व 1.385 g/cm³; ρc = 1.455 व ρa = 1.335 g/cm³ लें। आयतन-अंश = (1.385 − 1.335)/(1.455 − 1.335) = 0.05/0.12 = 0.417। द्रव्यमान-अंश = 1.455 × 0.05/(1.385 × 0.12) = 0.0728/0.1662 = 0.438। द्रव्यमान-अंश आयतन-अंश से अधिक है क्योंकि क्रिस्टल सघन प्रावस्था हैं। सदैव बताएँ कि कौन-सा अंश अभिप्रेत है।

⚠️ घनत्व, XRD व DSC की क्रिस्टलनताएँ क्यों भिन्न हैं
घनत्व दो पूर्ण प्रावस्थाएँ निश्चित घनत्वों वाली मानता है। वास्तविक तंतुओं में अपूर्ण क्रिस्टल, अभिविन्यस्त अक्रिस्टलीय शृंखलाएँ और मध्यवर्ती, आंशिक व्यवस्थित अंश होते हैं, अतः ρc व ρa स्थिरांक नहीं हैं। XRD केवल कला-संगत विवर्तन करते क्षेत्र गिनता है और DSC एन्थैल्पी, अतः प्रत्येक भिन्न संख्या देता है। संख्या के साथ विधि बताएँ।

2. X-किरण विवर्तन व द्विअपवर्तन: जालक, क्रिस्टल-आकार व अभिविन्यास

वृहत्-कोण X-किरण विवर्तन (WAXD) ब्रैग नियम nλ = 2d sinθ का पालन करता है, जहाँ λ तरंगदैर्घ्य (Cu Kα विकिरण का λ = 0.154 nm), d जालक-तल की दूरी और θ चरण-कोण है, अतः बड़े 2θ पर शिखर छोटी दूरियों से आते हैं। तंतु का चूर्ण-जैसा विषुवतीय स्कैन चौड़े अक्रिस्टलीय प्रभामंडल पर तीक्ष्ण क्रिस्टलीय शिखर देता है; XRD से क्रिस्टलनता = क्रिस्टलीय शिखर-क्षेत्रफल ÷ कुल क्षेत्रफल। क्रिस्टलाइट-आकार का आकलन शिखर-चौड़ाई से शेरर समीकरण L = Kλ/(β cosθ) द्वारा होता है, जहाँ β अर्ध-अधिकतम पर पूर्ण चौड़ाई रेडियन में (यंत्र-चौड़ाई हटाकर), θ शिखर के 2θ का आधा, और K ≈ 0.9। हल उदाहरण: 2θ = 25.6° का शिखर d = 0.154/(2 sin 12.8°) = 0.348 nm देता है; यदि β = 0.80° = 0.01396 rad तो L = 0.9 × 0.154/(0.01396 × cos 12.8°) = 10.2 nm। चौड़े शिखर का अर्थ छोटे या अधिक अपूर्ण क्रिस्टल।

XRD से अभिविन्यास क्रिस्टलीय परावर्तन के दिगंशी तीव्रता-फैलाव से मिलता है। संकरी चाप का अर्थ भली-भाँति अभिविन्यस्त क्रिस्टल; हर्मन फलन f = (3⟨cos²φ⟩ − 1)/2 तंतु-अक्ष से पूर्ण संरेखण पर 1, यादृच्छिक पर 0 व लंबवत् पर −0.5 होता है। शीघ्र आकलन f = (180° − H)/180° है, H दिगंशी अर्ध-चौड़ाई अंशों में। लघु-कोण X-किरण प्रकीर्णन (SAXS) कहीं बड़ी दूरियाँ देखता है: याम्योत्तरीय शिखर क्रिस्टलीय व अक्रिस्टलीय परतों का दीर्घ आवर्त (long period) बताता है (दसियों नैनोमीटर)।

द्विअपवर्तन Δn = n∥ − n⊥ तंतु-अक्ष के समांतर व लंबवत् ध्रुवित प्रकाश के अपवर्तनांकों का अंतर है, और क्रिस्टलीय व अक्रिस्टलीय शृंखलाओं के समग्र अभिविन्यास को मापता है। ध्रुवण सूक्ष्मदर्शी में प्रतिकारक मोटाई t के तंतु का मंदन Γ (पथांतर) मापता है, और Δn = Γ/t। औसत अभिविन्यास-फलन f = Δn/Δn_max है, जहाँ Δn_max उस बहुलक की पूर्ण अभिविन्यस्त शृंखलाओं का द्विअपवर्तन है। हल उदाहरण: Γ = 1.30 µm, t = 18 µm, Δn_max = 0.22: Δn = 0.0722 व f = 0.0722/0.22 = 0.33। ध्वनिक मॉड्यूलस (तंतु में ध्वनि-चाल) तृतीय अभिविन्यास-माप है, जो समग्र (औसत) अभिविन्यास दर्शाता है।

⚠️ XRD अभिविन्यास क्रिस्टलीय है, द्विअपवर्तन समग्र
तंतु में क्रिस्टल भली-भाँति अभिविन्यस्त पर अक्रिस्टलीय शृंखलाएँ अल्प अभिविन्यस्त हो सकती हैं (या उलटा), अतः XRD मान व द्विअपवर्तन मान का मेल होना आवश्यक नहीं। ऊष्मा-स्थायीकरण प्रायः क्रिस्टल-अभिविन्यास सुधारता है पर अक्रिस्टलीय अभिविन्यास शिथिल करता है, और उबलते जल का संकोचन अक्रिस्टलीय अभिविन्यास का अनुसरण करता है।

3. प्रकाशीय व इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शिकी तथा अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी

  • प्रकाशीय सूक्ष्मदर्शिकी अनुदैर्घ्य रूप (शल्क, कुंचन, धारियाँ, क्रिम्प) देती है, और माइक्रोटोम या हार्डी की प्लेट-तकनीक से काटे अनुभागों पर अनुप्रस्थ-काट आकार व तंतु-व्यास देती है। ध्रुवित प्रकाश द्विअपवर्तन व अभिविन्यास जोड़ता है; इसका विभेदन तरंगदैर्घ्य से लगभग 0.2 µm तक सीमित है।
  • स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शिकी (SEM) फ़ोकस किरण-पुंज को सतह पर घुमाती है और द्वितीयक इलेक्ट्रॉन प्रयुक्त करती है: बहुत अधिक क्षेत्र-गहराई, हज़ारों गुना आवर्धन, सतह-स्थलाकृति, क्षति, भंग-सिरों व फ़िनिश-निक्षेपों हेतु आदर्श। अचालक तंतुओं पर आवेशन रोकने हेतु (सोने या कार्बन की) परत चढ़ाई जाती है।
  • संचरण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शिकी (TEM) अति-पतले अनुभागों (दसियों नैनोमीटर, कंट्रास्ट हेतु भारी-धातु अभिकर्मक से रंजित) से इलेक्ट्रॉन भेजती है और आंतरिक तंतुक, पटलिकाएँ तथा क्रिस्टलीय व अक्रिस्टलीय क्षेत्रों की व्यवस्था प्रकट करती है, नैनोमीटर विभेदन व इलेक्ट्रॉन विवर्तन सहित। किरण-पुंज कार्बनिक बहुलकों को क्षति पहुँचाता है, अतः अल्प मात्रा पर चित्रण होता है।
  • अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी प्रकार्यात्मक समूहों को उनके अवशोषण-बैंडों से पहचानती है: एस्टर C=O लगभग 1720 cm⁻¹ (PET), ऐमाइड I लगभग 1640 cm⁻¹ व N–H तनन लगभग 3300 cm⁻¹ (नायलॉन, ऊन, रेशम), नाइट्राइल C≡N लगभग 2240 cm⁻¹ (ऐक्रिलिक), चौड़ा O–H लगभग 3300 cm⁻¹ (सेलुलोज़)। कुछ बैंड संरूपण-संवेदी हैं, अतः बैंड-अनुपात क्रिस्टलनता का अनुसरण करते हैं। ध्रुवित IR से द्विवर्णी अनुपात (dichroic ratio) R = A∥/A⊥ उस समूह का अभिविन्यास देता है जिसका संक्रमण-आघूर्ण शृंखला के समांतर या लंबवत् है। बीयर–लैम्बर्ट: A = εcl। क्षीणित पूर्ण परावर्तन (ATR) से फ़िल्म बनाए बिना तंतु की सतह जाँची जा सकती है।

4. तापीय विधियाँ: DSC, DMA, TMA व TGA

प्रत्येक तापीय विधि क्या मापती है
विधिमापती हैतंतु से क्या पढ़ती है
DSC (अवकल स्कैनिंग कैलोरीमिति)ताप के विरुद्ध ऊष्मा-प्रवाहTg ऊष्मा-धारिता में सोपान के रूप में, शीत-क्रिस्टलन ऊष्माक्षेपी, गलन ऊष्माशोषी (Tm व ΔHm), क्रिस्टलनता
DMA (गतिक यांत्रिक विश्लेषण)दोलनी विकृति में संग्रह मॉड्यूलस E′, हानि मॉड्यूलस E″, tan δ = E″/E′Tg (tan δ शिखर या E′ में गिरावट), द्वितीयक संक्रमण, ताप व आवृत्ति के विरुद्ध मॉड्यूलस
TMA (तापयांत्रिक विश्लेषण)स्थिर अल्प भार पर ताप के विरुद्ध विमा-परिवर्तनतापीय प्रसार, संकोचन व संकोचन-बल, मृदुकरण
TGA (तापभारमितीय विश्लेषण)नाइट्रोजन या वायु में ताप के विरुद्ध द्रव्यमाननमी व वाष्पशील क्षति, अपघटन का आरंभ, अवशेष (चार), तापीय स्थायित्व

DSC से क्रिस्टलनता Xc = (ΔHm − ΔHcc)/ΔHm° है, जहाँ ΔHm मापी गई गलन-एन्थैल्पी, ΔHcc उसी रन के किसी शीत-क्रिस्टलन ऊष्माक्षेपी की एन्थैल्पी (स्कैन में बने क्रिस्टल, मूलतः उपस्थित नहीं), और ΔHm° 100% क्रिस्टलीय बहुलक की गलन-एन्थैल्पी। हल उदाहरण: ΔHm = 48 J/g, ΔHcc = 10 J/g, ΔHm° = 140 J/g: Xc = 38/140 = 0.271, अर्थात् 27.1%। अतः जो तंतु गरम करते समय क्रिस्टलित हुआ उसकी वास्तविक आरंभिक क्रिस्टलनता केवल ΔHm से सूचित मान से कम है।

⚠️ प्रथम तापन इतिहास दर्ज करता है, DMA व DSC के Tg मेल नहीं खाते
खींचे, ऊष्मा-स्थायित तंतु का प्रथम DSC तापन उसका प्रसंस्करण-इतिहास (अभिविन्यास, तापानुशीतन) दर्शाता है, जबकि नियंत्रित शीतन के बाद द्वितीय तापन बहुलक को। Tg दर-निर्भर संक्रमण है: DMA मान परीक्षण-आवृत्ति पर निर्भर हैं और tan δ शिखर DSC सोपान से ऊपर रहता है। Tg के साथ विधि, तापन-दर व आवृत्ति बताएँ।

5. मानव-निर्मित तंतुओं की संरचना व आकारिकी

मानव-निर्मित तंतु तंतुकीय चित्र साझा करते हैं: अभिविन्यस्त माइक्रोफ़ाइब्रिल जिनमें अक्ष के अनुदिश क्रिस्टलीय खंड अक्रिस्टलीय खंडों के साथ एकांतर हैं, संबंधक अणुओं से जुड़े। कताई-मार्ग व कर्षण अनुप्रस्थ-काट व अरीय संरचना तय करते हैं।

तंतु-वार आकारिकी
तंतुअनुप्रस्थ-काट व संरचनाकारण
PET, नायलॉन (गलित कताई)गोल, चिकना, लगभग एकसमान; स्पिनरेट-आकार बदला जा सकता है (चमक व फूलेपन हेतु त्रिपालि)ठंडा होकर जमता है, विलायक-क्षति नहीं
विस्कोसदंतुर, त्वचा-कोर संरचना; त्वचा अभिविन्यस्त व सघन, कोर दुर्बलत्वचा शीघ्र बनती है, फिर कोर सिकुड़ता है
पॉलिनोसिक, लायोसेलगोल, अल्प या कोई त्वचा नहीं, विस्कोस से अधिक एकसमान, अधिक क्रिस्टलीय व अभिविन्यस्तधीमा पुनर्जनन व खिंचाव
ऐक्रिलिकशुष्क कताई: कुत्ते-की-हड्डी; आर्द्र कताई: गोल या सेम-जैसा; केवल पार्श्विक क्रम, वास्तविक 3-D क्रिस्टल नहींस्थूल नाइट्राइल द्विध्रुव व सहएकलक संकुलन बिगाड़ते हैं
पैरा-ऐरामिडत्वचा-कोर, अरीय वलित पट्टिकाएँ; अति-अभिविन्यस्त, विस्तृत शृंखलाएँवायु-अंतराल में द्रव-क्रिस्टलीय डोप संरेखित
UHMWPE, कार्बनUHMWPE: लगभग पूर्ण विस्तृत-शृंखला क्रिस्टल; कार्बन: ग्रेफ़ाइट-जैसी परतें अक्ष के अनुदिश संरेखितअति-कर्षण; कार्बनीकरण

6. यांत्रिक गुण व नमी-अवशोषण

तंतु का प्रतिबल–विकृति वक्र रैखिक घनत्व पर बल (विशिष्ट प्रतिबल) बनाम विस्तार के रूप में खींचा जाता है। टेनेसिटी भंग-बल ÷ रैखिक घनत्व है, N/tex, cN/tex या gf/den में; प्रारंभिक मॉड्यूलस मूल के निकट की ढाल है; भंग-विस्तार भंग पर विकृति है; भंग-कार्य (work of rupture) वक्र के नीचे का क्षेत्रफल है। प्रत्यास्थ पुनर्प्राप्ति, विसर्पण (स्थिर भार में विस्तार बढ़ना) और प्रतिबल-शिथिलन (निश्चित विस्तार पर प्रतिबल घटना) समय-निर्भरता बताते हैं। परिवर्तन: 1 gf/den = 8.83 cN/tex, और प्रतिबल = टेनेसिटी × घनत्व होने से 1 N/tex × 1 g/cm³ = 1 GPa। हल उदाहरण: 2.0 dtex (0.2 tex) के पॉलिएस्टर तंतु का, घनत्व 1.38 g/cm³, भंग-बल 9.0 cN: टेनेसिटी = 9.0/0.2 = 45 cN/tex = 0.45 N/tex; प्रतिबल = 0.45 × 1.38 = 0.621 GPa = 621 MPa। टेनेसिटी बताने का कारण यह है कि तंतु पूर्ण बेलन नहीं होते और क्षेत्रफल मापना कठिन है।

नमी-अवशोषण। जल अक्रिस्टलीय क्षेत्रों के ध्रुवीय समूहों (हाइड्रॉक्सिल, ऐमाइड) द्वारा लिया जाता है; क्रिस्टल प्रायः अगम्य हैं। रिगेन–आर्द्रता समतापी S-आकार का है: निम्न आर्द्रता पर तीव्र (जल स्थलों से आबद्ध), मध्य में चपटा, और संतृप्ति के निकट पुनः उठता (बहुपरत व संघनित जल)। निरवशोषण वक्र अवशोषण वक्र से ऊपर होता है (शैथिल्य, hysteresis), अतः दी आर्द्रता पर रिगेन आर्द्र ओर से पहुँचने पर अधिक होता है। अवशोषण अवशोषण-ऊष्मा मुक्त करता है, तंतु को मुख्यतः व्यास के आर-पार फुलाता है, और बहुलक को प्लास्टिकित कर Tg घटाता है। वस्त्र 20 °C पर 65% सापेक्ष आर्द्रता के मानक वातावरण में परखे जाते हैं (उष्णकटिबंधीय प्रथा में 27 °C)। रिगेन क्रिस्टलनता से घटता है और जलप्रेमी समूहों की संख्या से बढ़ता है; इसीलिए कपास, ऊन व विस्कोस सहज सोखते हैं और पॉलिएस्टर व पॉलिप्रोपिलीन नगण्य।

⚠️ गीली सामर्थ्य बढ़ या घट सकती है
जल अक्रिस्टलीय क्षेत्रों का हाइड्रोजन आबंधन दुर्बल करता है, अतः अधिकांश तंतु भीगने पर कुछ सामर्थ्य खोते व विस्तार पाते हैं (विस्कोस बहुत, ऊन व नायलॉन मध्यम)। कपास अपवाद है: वह भीगने पर सामर्थ्य पाता है क्योंकि गीला फूलना उसके अत्यधिक अभिविन्यस्त क्रिस्टलीय सेलुलोज़ तंतुकों में भार-साझेदारी सुधारता है। “पानी सोखता है, अतः गीला दुर्बल” का सामान्यीकरण न करें।

7. तंतु संरचना–गुण सहसंबंध

संरचना बदलने पर क्या बदलता है
संरचनात्मक परिवर्तनगुणों पर प्रभाव
उच्चतर अभिविन्यास (अधिक कर्षण)टेनेसिटी व प्रारंभिक मॉड्यूलस अधिक, भंग-विस्तार कम, द्विअपवर्तन अधिक
उच्चतर क्रिस्टलनताघनत्व, मॉड्यूलस व विमीय स्थायित्व अधिक; नमी-रिगेन, रंजक-ग्रहण व फूलना कम
उच्चतर आण्विक भारसामर्थ्य, कठोरता व श्रांति-प्रतिरोध अधिक (एक सीमा तक); गलित-श्यानता अधिक
अभिविन्यस्त अक्रिस्टलीय क्षेत्रगर्म-जल संकोचन व संकोचन-बल अधिक; ऊष्मा-स्थायीकरण से हटते हैं
मोटा तंतु (उच्चतर tex)बंकन-दृढ़ता लगभग tex² से बढ़ती है, अतः वस्त्र का स्पर्श कठोर होता है
जलप्रेमी समूह, त्वचा–कोर, क्रिम्परिगेन, आराम व स्थैतिक व्यवहार; संसंजन, फूलापन व प्रत्यास्थता

मॉड्यूलस का प्रथम मॉडल समांतर (समविकृति) मिश्रण-नियम E = xcEc + (1 − xc)Ea है, जहाँ Ec व Ea क्रिस्टलीय व अक्रिस्टलीय मॉड्यूलस और xc आयतन-अंश हैं; यह ऊपरी सीमा है, क्योंकि वास्तविक तंतुओं में क्रिस्टल व अक्रिस्टलीय शृंखलाएँ आंशिक रूप से श्रेणी में होती हैं। ऐरामिड, UHMWPE व कार्बन की उच्च सामर्थ्य उन्हीं विचारों से आती है: शृंखलाएँ विस्तृत व संरेखित, दोष कम, अतः सामर्थ्य सहसंयोजी आबंधों के सैद्धांतिक मान के एक अंश तक पहुँचती है, जबकि परंपरागत वस्त्र तंतु उसके छोटे अंश तक ही पहुँचते हैं।

मुख्य बिंदु

  • घनत्व-प्रवणता स्तंभ घनत्व देता है; द्विप्रावस्था क्रिस्टलनता: आयतन-अंश (ρ − ρa)/(ρc − ρa), द्रव्यमान-अंश ρc(ρ − ρa)/[ρ(ρc − ρa)]। घनत्व, XRD व DSC की क्रिस्टलनताएँ भिन्न होती हैं क्योंकि वे व्यवस्था को भिन्न परिभाषित करती हैं।
  • XRD: ब्रैग nλ = 2d sinθ, शेरर L = Kλ/(β cosθ) जहाँ K ≈ 0.9, दिगंशी चौड़ाई क्रिस्टल-अभिविन्यास देती है (हर्मन f); द्विअपवर्तन Δn = Γ/t व f = Δn/Δn_max समग्र अभिविन्यास देते हैं।
  • प्रकाशीय सूक्ष्मदर्शिकी आकार व अनुभाग दिखाती है, SEM सतह व भंग, TEM रंजित पतले अनुभागों पर आंतरिक तंतुक; IR समूह पहचानता है और ध्रुवण से द्विवर्णी अनुपात द्वारा अभिविन्यास।
  • DSC Tg, शीत-क्रिस्टलन व गलन पढ़ता है, Xc = (ΔHm − ΔHcc)/ΔHm° से; DMA E′, E″, tan δ देता है; TMA प्रसार व संकोचन; TGA द्रव्यमान-ह्रास व अपघटन।
  • टेनेसिटी = बल/tex; 1 N/tex × 1 g/cm³ = 1 GPa; 1 gf/den = 8.83 cN/tex। नमी अक्रिस्टलीय ध्रुवीय स्थलों द्वारा ली जाती है, S-आकार समतापी, शैथिल्य, अवशोषण-ऊष्मा व प्लास्टिकरण सहित।
  • अभिविन्यास सामर्थ्य व मॉड्यूलस बढ़ाता और विस्तार घटाता है; क्रिस्टलनता घनत्व व स्थायित्व बढ़ाती पर रिगेन व रंजक-ग्रहण घटाती है; कताई-मार्ग अनुप्रस्थ-काट तय करता है (विस्कोस त्वचा-कोर, शुष्क-काता ऐक्रिलिक कुत्ते-की-हड्डी, पॉलिनोसिक व लायोसेल गोल)।

अभ्यास प्रश्न (16)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. तंतु-घनत्व हेतु प्रयुक्त घनत्व-प्रवणता स्तंभ में तंतु का नमूना एक विशेष ऊँचाई पर इसलिए ठहरता है कि

    1. पृष्ठ-तनाव उसे उस स्तर पर थामता है जहाँ प्रवणता सबसे तीव्र है
    2. तंतु तब तक घुलता है जब तक उदासीन उत्प्लावन न मिले
    3. उस स्तर पर द्रव का घनत्व तंतु के घनत्व के बराबर है
    4. स्तंभ ऐसे अंशांकित है कि तंतु की क्रिस्टलनता सीधे मिल जाए
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — उस स्तर पर द्रव का घनत्व तंतु के घनत्व के बराबर है

    तंतु तब तक डूबता या उठता है जब तक उसके स्तर के द्रव का घनत्व तंतु के बराबर न हो जाए, जहाँ उत्प्लावन भार को संतुलित करता है; ऊँचाई ज्ञात घनत्व के काँच-तैरकों से पढ़ी जाती है। तंतु को द्रवों में घुलना या फूलना नहीं चाहिए, और क्रिस्टलनता फिर द्विप्रावस्था मॉडल से घनत्व द्वारा गणना की जाती है, सीधे नहीं पढ़ी जाती।
  2. एक ही पॉलिएस्टर तंतु की क्रिस्टलनता घनत्व से (द्विप्रावस्था मॉडल) 44% और DSC से स्पष्टतः कम मिलती है। सर्वाधिक सुसंगत व्याख्या यह है कि

    1. DSC केवल अक्रिस्टलीय प्रावस्था मापता है, अतः उसे अन्य किसी विधि से सदा कम पढ़ना ही है
    2. घनत्व निश्चित प्रावस्था-घनत्व मानता है जबकि DSC गलन-एन्थैल्पी गिनता है, अतः अपूर्ण क्रिस्टल व मध्यवर्ती क्रम भिन्न गिने जाते हैं
    3. दोनों में से एक यंत्र दोषपूर्ण होगा क्योंकि तंतु हेतु क्रिस्टलनता एक अद्वितीय संख्या है
    4. घनत्व विधि केवल उन क्रिस्टलों को गिनती है जो स्कैन में पिघलते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — घनत्व निश्चित प्रावस्था-घनत्व मानता है जबकि DSC गलन-एन्थैल्पी गिनता है, अतः अपूर्ण क्रिस्टल व मध्यवर्ती क्रम भिन्न गिने जाते हैं

    प्रत्येक विधि क्रिस्टलनता को प्रचालनात्मक रूप से परिभाषित करती है: घनत्व मानित ρc व ρa से, DSC 100% क्रिस्टलीय संदर्भ के सापेक्ष एन्थैल्पी से (और स्कैन में शीत-क्रिस्टलन या पुनःक्रिस्टलन से प्रभावित)। अपूर्ण क्रिस्टल व मध्यवर्ती क्रम वाले वास्तविक तंतुओं में अंतर अपेक्षित है। DSC क्रिस्टलों का गलन मापता है, अक्रिस्टलीय प्रावस्था नहीं, और यंत्र-दोष आवश्यक नहीं।
  3. अभिविन्यास हेतु द्विअपवर्तन व दिगंशी X-किरण विधि की तुलना करने वाला कौन-सा कथन सही है?

    1. X-किरण दिगंशी फैलाव क्रिस्टल-अभिविन्यास देता है, द्विअपवर्तन सभी शृंखलाओं का औसत
    2. द्विअपवर्तन केवल क्रिस्टल मापता है और X-किरण विधि केवल अक्रिस्टलीय शृंखलाएँ
    3. दोनों प्रत्येक तंतु हेतु सदा ठीक समान f देते हैं
    4. कर्षित तंतुओं पर द्विअपवर्तन मापा ही नहीं जा सकता
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — X-किरण दिगंशी फैलाव क्रिस्टल-अभिविन्यास देता है, द्विअपवर्तन सभी शृंखलाओं का औसत

    क्रिस्टलीय परावर्तन केवल क्रिस्टलों के जालक-तल देखता है, अतः दिगंशी चौड़ाई क्रिस्टल-अभिविन्यास बताती है; द्विअपवर्तन सभी शृंखला-खंडों पर प्रतिक्रिया करता है और इसलिए औसत बताता है। दोनों भिन्न हो सकते हैं, विशेषतः ऊष्मा-स्थायीकरण के बाद। वास्तव में द्विअपवर्तन कर्षित तंतुओं पर ही सर्वाधिक मापा जाता है।
  4. ध्रुवित अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी में तंतु के किसी अवशोषण-बैंड का द्विवर्णी अनुपात R = A∥/A⊥ किसे जानने हेतु प्रयुक्त होता है

    1. बहुलक का संख्या-माध्य आण्विक भार
    2. तंतु का काँच-संक्रमण ताप
    3. पूर्ण क्रिस्टल-जालक का घनत्व
    4. समूह को वहन करने वाले शृंखला-खंडों का संरेखण
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — समूह को वहन करने वाले शृंखला-खंडों का संरेखण

    बैंड सर्वाधिक तब अवशोषित करता है जब विद्युत सदिश समूह के संक्रमण-आघूर्ण के अनुदिश हो, अतः तंतु-अक्ष के समांतर व लंबवत् अवशोषणों का अनुपात बताता है कि वे समूह, और इसलिए शृंखला-खंड, कितने संरेखित हैं। आण्विक भार, Tg व क्रिस्टल-घनत्व द्विवर्णता से नहीं मिलते।
  5. नाइट्रोजन में कपास तंतु पर तापभारमितीय रन 120 °C तक लगभग 7% द्रव्यमान-ह्रास दिखाता है, फिर बहुत उच्च ताप पर तीव्र ह्रास तक लगभग कोई परिवर्तन नहीं। प्रथम ह्रास मुख्यतः है

    1. सेलुलोज़ का क्रिस्टलन
    2. अवशोषित नमी की क्षति
    3. मोम का काँच-संक्रमण
    4. सेलुलोज़ शृंखलाओं का अपघटन
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — अवशोषित नमी की क्षति

    100 से 120 °C के निकट व नीचे गई द्रव्यमान-क्षति जलप्रेमी तंतु से निकाला गया जल है (लगभग 7 से 8% रिगेन कपास के अनुरूप है)। सेलुलोज़ अपघटन कहीं उच्च ताप पर होता है, जो बाद का तीव्र ह्रास है; क्रिस्टलन व काँच-संक्रमण में द्रव्यमान-परिवर्तन नहीं होता।
  6. तंतु व विशिष्ट आकारिकी की कौन-सी जोड़ी सही है?

    1. गलित-काता नायलॉन: दंतुर त्वचा-कोर
    2. पॉलिनोसिक: प्रबल त्वचा व दुर्बल कोर, साधारण विस्कोस की तरह
    3. शुष्क-काता ऐक्रिलिक: कुत्ते-की-हड्डी अनुप्रस्थ-काट
    4. लायोसेल: मोटी त्वचा सहित प्रबल दंतुर अनुप्रस्थ-काट
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — शुष्क-काता ऐक्रिलिक: कुत्ते-की-हड्डी अनुप्रस्थ-काट

    शुष्क कताई में विलायक वाष्पित होने से पहले त्वचा बनती है, फिर शेष विलायक निकलने पर कोर सिकुड़ता है और कुत्ते-की-हड्डी का आकार बनता है। गलित कताई चिकने गोल काट देती है, पॉलिनोसिक में त्वचा अल्प या नहीं होती, और लायोसेल गोल व एकसमान है।
  7. एक पॉलिएस्टर तंतु को उच्चतर कर्षण-अनुपात तक खींचा जाता है। परिवर्तनों का कौन-सा समुच्चय अपेक्षित है?

    1. अपरिवर्तित द्विअपवर्तन, अधिक मॉड्यूलस, अपरिवर्तित विस्तार
    2. कम द्विअपवर्तन, अधिक टेनेसिटी, अधिक भंग-विस्तार
    3. अधिक द्विअपवर्तन, कम टेनेसिटी, अधिक भंग-विस्तार
    4. अधिक द्विअपवर्तन, अधिक टेनेसिटी व मॉड्यूलस, कम भंग-विस्तार
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — अधिक द्विअपवर्तन, अधिक टेनेसिटी व मॉड्यूलस, कम भंग-विस्तार

    कर्षण शृंखलाओं को अक्ष के अनुदिश संरेखित करता है, जिससे द्विअपवर्तन, टेनेसिटी व मॉड्यूलस बढ़ते हैं और विस्तार देने वाली ढील हटती है। अन्य संयोजन इसके विरुद्ध हैं, जैसे अधिक अभिविन्यास के साथ अधिक विस्तार।
  8. एक तंतु को 65% सापेक्ष आर्द्रता पर एक बार शुष्क अवस्था से (अवशोषण) और एक बार आर्द्र अवस्था से (निरवशोषण) लाया जाता है। 65% सापेक्ष आर्द्रता पर नमी-रिगेन है

    1. निरवशोषण के बाद अवशोषण से अधिक (शैथिल्य)
    2. दोनों में समान, क्योंकि साम्य की कोई स्मृति नहीं होती
    3. निरवशोषण के बाद अवशोषण से कम, क्योंकि सूखने में जल निकल जाता है
    4. अवशोषण में शून्य और निरवशोषण में अधिकतम
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    उत्तर: A — निरवशोषण के बाद अवशोषण से अधिक (शैथिल्य)

    आर्द्रताग्राही तंतुओं के अवशोषण समतापी शैथिल्य दिखाते हैं: निरवशोषण शाखा अवशोषण शाखा से ऊपर होती है, अतः आर्द्र ओर से पहुँचने पर रिगेन अधिक होता है। इसीलिए परीक्षण-नमूनों को शुष्क ओर से परिभाषित अवस्था तक पूर्व-अनुकूलित किया जाता है। यहाँ साम्य स्मृति-रहित नहीं है क्योंकि आंतरिक आबंध सूखने व भीगने में भिन्न रूप से बनते हैं।
  9. तंतुओं के X-किरण विवर्तन के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. ब्रैग नियम nλ = 2d sinθ चरण-कोण को जालक-दूरी से जोड़ता है
    2. चौड़े विवर्तन शिखर छोटे या अधिक अपूर्ण क्रिस्टलाइट सूचित करते हैं
    3. संकरी दिगंशी चाप अल्पतर क्रिस्टल-अभिविन्यास सूचित करती है
    4. बड़े 2θ पर शिखर बड़ी जालक-दूरी के संगत है
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    उत्तर: A — ब्रैग नियम nλ = 2d sinθ चरण-कोण को जालक-दूरी से जोड़ता है; B — चौड़े विवर्तन शिखर छोटे या अधिक अपूर्ण क्रिस्टलाइट सूचित करते हैं

    ब्रैग नियम व शेरर चौड़ाई मानक परिणाम हैं। संकरी चाप का अर्थ क्रिस्टल भली-भाँति संरेखित हैं, अल्प नहीं; और निश्चित तरंगदैर्घ्य पर d = λ/(2 sinθ), अतः बड़ा कोण छोटी दूरी का संकेत है।
  10. अन्य कारक समान रहने पर, तंतु की क्रिस्टलनता बढ़ने से निम्नलिखित में से क्या अपेक्षित है?

    1. घनत्व में वृद्धि
    2. नमी-रिगेन में कमी
    3. रंजक-ग्रहण की दर में कमी
    4. उबलते जल संकोचन में वृद्धि
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — घनत्व में वृद्धि; B — नमी-रिगेन में कमी; C — रंजक-ग्रहण की दर में कमी

    क्रिस्टल सघन होते हैं, जल व रंजक अणुओं को बाहर रखते हैं और शृंखलाएँ बाँधे रखते हैं, अतः घनत्व बढ़ता है जबकि रिगेन व रंजक-ग्रहण दर घटते हैं और संकोचन घटने की प्रवृत्ति रखता है। अधिक संकोचन मुक्त शिथिल हो सकने वाले अभिविन्यस्त अक्रिस्टलीय क्षेत्रों से जुड़ा है, अधिक क्रिस्टलों से नहीं।
  11. वस्त्र तंतुओं द्वारा नमी-अवशोषण के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. जल मुख्यतः अक्रिस्टलीय क्षेत्रों के ध्रुवीय स्थलों पर धारित होता है
    2. शुष्क तंतु के नमी सोखने पर ऊष्मा मुक्त होती है
    3. अवशोषित जल तंतु को प्लास्टिकित करता है और उसका Tg घटाता है
    4. पॉलिएस्टर का रिगेन विस्कोस से अधिक है क्योंकि उसके एस्टर समूह प्रबल जलप्रेमी हैं
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    उत्तर: A — जल मुख्यतः अक्रिस्टलीय क्षेत्रों के ध्रुवीय स्थलों पर धारित होता है; B — शुष्क तंतु के नमी सोखने पर ऊष्मा मुक्त होती है; C — अवशोषित जल तंतु को प्लास्टिकित करता है और उसका Tg घटाता है

    अवशोषण अक्रिस्टलीय प्रावस्था के जलप्रेमी स्थलों पर होता है, ऊष्माक्षेपी है (अवशोषण-ऊष्मा), और बहुलक को प्लास्टिकित करता है। पॉलिएस्टर में सुलभ ध्रुवीय समूह कम हैं और रिगेन 1% से बहुत कम है, जो अनेक सुलभ हाइड्रॉक्सिल वाले विस्कोस से कहीं कम है।
  12. एक PET तंतु का घनत्व 1.385 g/cm³ है। द्विप्रावस्था संरचना मानें, क्रिस्टलीय घनत्व 1.455 g/cm³ व अक्रिस्टलीय घनत्व 1.335 g/cm³। क्रिस्टलीय द्रव्यमान-अंश, प्रतिशत में एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 43.8

    द्रव्यमान-अंश xc = ρc(ρ − ρa)/[ρ(ρc − ρa)] = 1.455 × (1.385 − 1.335)/[1.385 × (1.455 − 1.335)] = 1.455 × 0.050/(1.385 × 0.120) = 0.07275/0.1662 = 0.4377, अर्थात् 43.8%। द्रव्यमान-अंश पूछे जाने पर आयतन-अंश (0.05/0.12 = 41.7%) प्रचलित ग़लत उत्तर है।
  13. एक बहुलक तंतु का विवर्तन शिखर 2θ = 25.6° पर है, अर्ध-अधिकतम पर पूर्ण चौड़ाई 0.80° (यंत्र-चौड़ाई पहले हटाई जा चुकी)। शेरर समीकरण L = Kλ/(β cosθ) से, K = 0.9, λ = 0.154 nm तथा β रेडियन में लेकर, आभासी क्रिस्टलाइट-आकार nm में, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 10.2

    θ = 12.8°, cos θ = 0.9751। β = 0.80 × π/180 = 0.013963 rad। L = 0.9 × 0.154/(0.013963 × 0.9751) = 0.1386/0.013615 = 10.18 nm, अतः 10.2 nm। cosine में θ के स्थान पर पूरा 2θ लेना या β अंशों में लेना प्रचलित भूलें हैं।
  14. 18 µm मोटाई का एक कर्षित तंतु ध्रुवण सूक्ष्मदर्शी में 1.30 µm मंदन देता है। इस बहुलक के पूर्ण अभिविन्यास हेतु अधिकतम द्विअपवर्तन 0.22 है। औसत अभिविन्यास-फलन f = Δn/Δn_max, दो दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 0.33

    Δn = Γ/t = 1.30/18 = 0.0722 (दोनों µm में)। f = 0.0722/0.22 = 0.328, अतः 0.33।
  15. एक पॉलिएस्टर तंतु पर DSC रन में गलन ऊष्माशोषी 48 J/g है और उसी रन में शीत-क्रिस्टलन ऊष्माक्षेपी 10 J/g। 100% क्रिस्टलीय बहुलक की गलन-एन्थैल्पी 140 J/g ली गई है। आरंभिक क्रिस्टलनता Xc = (ΔHm − ΔHcc)/ΔHm°, प्रतिशत में एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 27.1

    Xc = (48 − 10)/140 = 38/140 = 0.2714, अर्थात् 27.1%। शीत-क्रिस्टलन ऊष्माक्षेपी की उपेक्षा से 48/140 = 34.3% आता, जो गरम करने से पहले तंतु की क्रिस्टलनता को बढ़ाकर बताता है।
  16. 2.0 dtex सूक्ष्मता का एक पॉलिएस्टर तंतु 9.0 cN बल पर टूटता है। तंतु का घनत्व 1.38 g/cm³ तथा अनुप्रस्थ-काट एकसमान लें। भंग-प्रतिबल MPa में, निकटतम पूर्णांक में, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 621

    2.0 dtex = 0.20 tex = 1000 m में 0.20 g = 2.0 × 10⁻⁷ kg/m। क्षेत्रफल = (2.0 × 10⁻⁷)/1380 = 1.449 × 10⁻¹⁰ m²। बल = 9.0 cN = 0.090 N। प्रतिबल = 0.090/1.449 × 10⁻¹⁰ = 6.21 × 10⁸ Pa = 621 MPa। जाँच: टेनेसिटी 45 cN/tex = 0.45 N/tex, और 0.45 × 1.38 = 0.621 GPa।