वस्त्र तंतु: वर्गीकरण, प्राकृतिक व उच्च-निष्पादन तंतु, पहचान व मिश्रण
2. तंतु-निर्माणी बहुलक की अनिवार्य आवश्यकताएँ
बहुत कम बहुलक अच्छे तंतु बनाते हैं, क्योंकि तंतु-उपयोग में अक्ष के अनुदिश सामर्थ्य, मध्यम विस्तार तथा धुलाई व पहनने में स्थायित्व चाहिए। तंतु-निर्माणी बहुलक को निम्न शर्तें पूरी करनी होती हैं।
- रैखिक, लंबी शृंखला जिसमें शाखाएँ या क्रॉस-लिंक कम या न हों, ताकि शृंखलाएँ तंतु-अक्ष के समांतर खिंच सकें। क्रॉस-लिंकित जाल पिघल या घुल नहीं सकता, अतः कात नहीं सकता।
- पर्याप्त आण्विक भार (बहुलकन-अंश सौ या उससे अधिक की कोटि का) ताकि उलझाव व शृंखला-अतिव्याप्ति से सामर्थ्य मिले; पर अति उच्च आण्विक भार से गलित या विलयन इतना श्यान हो जाता है कि निष्कासन कठिन होता है।
- नियमित, सममित शृंखला जो क्रिस्टलों में संकुलित हो सके और कर्षण से अभिविन्यस्त हो सके। इसीलिए समविन्यास (isotactic) पॉलिप्रोपिलीन तंतु है और असमविन्यास (atactic) मुलायम मोम-जैसा ठोस।
- अंतर-शृंखला आकर्षण: हाइड्रोजन आबंध (ऐमाइड, यूरीथेन, हाइड्रॉक्सिल) या प्रबल द्विध्रुव (नाइट्राइल, एस्टर) अभिविन्यस्त शृंखलाओं को बाँधे रखते हैं; केवल वान डर वाल्स वाले बहुलक को बहुत उच्च आण्विक भार चाहिए (पॉलिएथिलीन, पॉलिप्रोपिलीन)।
- प्रसंस्करणीयता व तापीय परिसर: उसे या तो बिना अपघटन के पिघलना चाहिए या किसी व्यावहारिक विलायक में घुलना चाहिए। उसका Tm इस्त्री-ताप से ऊपर (ताकि वस्त्र न पिघले) पर अपघटन-ताप से नीचे (ताकि गलित-कताई हो सके) हो, और Tg उपयोग-ताप से ऊपर रहे ताकि विमीय स्थायित्व रहे।
- अन्य आवश्यकताएँ: प्रकाश, रसायनों व नमी के प्रति पर्याप्त प्रतिरोध तथा स्वीकार्य लागत।
3. कपास, ऊन व रेशम की स्थूल व सूक्ष्म संरचना
कपास बीज-रोम है जिसमें लगभग 90% सेलुलोज़ (सेलुलोज़ I क्रिस्टल रूप) होता है तथा बाहरी परतों में मोम, पेक्टिन व प्रोटीन। स्थूल संरचना: चपटा, ऐंठा फीता, जिसमें कुंचन (convolutions) दिशा बदलते हैं, परिपक्व होने पर सेम-जैसा अनुप्रस्थ-काट और पिचकी केंद्रीय नलिका, ल्यूमेन। सूक्ष्म संरचना, बाहर से भीतर: क्यूटिकल (मोम व पेक्टिन), प्राथमिक भित्ति (सेलुलोज़ तंतुकों का पतला जाल), द्वितीयक भित्ति (मुख्य भाग, दैनिक वृद्धि-परतों में जमा, जिनमें तंतुक अक्ष के गिर्द कुंडलित हैं और लंबाई में कुछ बिंदुओं पर दिशा पलटते हैं) तथा ल्यूमेन। परिपक्व तंतु की द्वितीयक भित्ति मोटी होती है; अपरिपक्व तंतु की भित्ति पतली, फीता-जैसी होती है, रंग कम पकड़ता है व नेप बनाता है; मृत (dead) तंतु चरम स्थिति है। अतः सूक्ष्मता, परिपक्वता व लंबाई कताई-गुणवत्ता तय करते हैं।
ऊन प्रोटीन केराटिन है, जो सल्फ़रयुक्त अमीनो अम्ल सिस्टीन में समृद्ध है; उसके डाइसल्फ़ाइड क्रॉस-लिंक स्थायित्व व प्रत्यास्थता देते हैं। स्थूल संरचना: क्रिम्प वाला, गोल से अंडाकार तंतु जिसके बाहर परस्पर चढ़े शल्कों का क्यूटिकल है (शल्क सिरे की ओर इंगित करते हैं, जिससे दिशात्मक घर्षण-प्रभाव व इसलिए फेल्टिंग होती है), मुख्य भाग बनाता तुर्करूपी कोशिकाओं का कॉर्टेक्स, और मोटे तंतुओं में खोखला मेड्यूला। कॉर्टेक्स द्विपार्श्व है: ऑर्थो- व पैरा-कॉर्टेक्स सिस्टीन-मात्रा व फूलने में भिन्न हैं, जिससे क्रिम्प बनता है। सूक्ष्म संरचना: कॉर्टिकल कोशिकाओं में मैक्रोफ़ाइब्रिल होते हैं जो माइक्रोफ़ाइब्रिलों (α-कुंडलित कुंडली-युग्म केराटिन) से बने हैं और अक्रिस्टलीय, सल्फ़र-समृद्ध आधात्री में जड़े हैं। खींचने पर α-कुंडली विस्तृत β-रूप की ओर जाती है, इसीलिए ऊन बहुत बढ़ती है और नम होने पर लौट आती है।
Bombyx mori का रेशम प्रोटीन फ़ाइब्रोइन (ग्लाइसीन व ऐलानीन में समृद्ध, β-प्लीटेड-शीट क्रिस्टलाइट बनाता) का संतत तंतु है, जो दो त्रिकोणीय-काट वाले तंतुओं (ब्रिन) के रूप में कता है और चिपचिपे प्रोटीन सेरिसिन से जुड़े रहते हैं। गर्म साबुन या क्षार में गोंद-निष्कासन (degumming) सेरिसिन हटाता है, जो कच्चे भार का लगभग चौथाई है, और कोमल चमकीला तंतु मिलता है। जंगली (टसर) रेशम अधिक चपटा, तंतुकीय व मोटा होता है।
4. बास्ट तंतु तथा प्राकृतिक व मानव-निर्मित तंतुओं के गुण व उपयोग
बास्ट तंतु (अलसी, जूट, सन, रेमी) तने के फ़्लोएम से मिलते हैं। हर तकनीकी तंतु छोटी अंतिम कोशिकाओं (ultimate cells) का गुच्छा है जो पेक्टिन से और जूट व सन में लिग्निन से जुड़ा रहता है। रेटिंग (सूक्ष्मजैविक, जल या ओस) इस जोड़ को तोड़ती है ताकि गुच्छे अलग किए जा सकें। अलसी व रेमी सशक्त, चमकीले व कम विस्तारी हैं और लिनन व महीन कपड़ों में लगते हैं; जूट लिग्निनयुक्त, मोटा व भंगुर है, बोरे, टाट व कालीन-आधार का सस्ता तंतु; सन मोटा व टिकाऊ है (रस्सियाँ, कैनवास)। सभी मुख्यतः सेलुलोज़ हैं, अतः उनका रिगेन उच्च है और भीगने पर विस्कोस जितनी सामर्थ्य नहीं गँवाते।
| तंतु | घनत्व, g/cm³ | रिगेन, % | उल्लेखनीय गुण व उपयोग |
|---|---|---|---|
| कपास | 1.52 | लगभग 8 | आराम, भीगने पर अधिक सशक्त; परिधान, गृह-वस्त्र |
| ऊन | 1.31 | 13 से 16 | ऊष्मा, प्रत्यास्थता, ज्वाला-प्रतिरोधी; सूटिंग, ऊनी वस्त्र |
| रेशम | 1.33 | लगभग 11 | चमक, लटकाव, उच्च सामर्थ्य; विलासी परिधान |
| विस्कोस | 1.52 | 12 से 13 | कोमल, शोषक, भीगने पर दुर्बल; परिधान, स्वच्छता |
| नायलॉन 6, 66 | 1.14 | लगभग 4 | कठोरता, घर्षण-प्रतिरोध; मोज़े, कालीन, रस्सियाँ |
| पॉलिएस्टर (PET) | 1.38 | लगभग 0.4 | सिलवट-प्रतिरोध, आसान देखभाल; परिधान, मिश्रण |
| ऐक्रिलिक | 1.17 | 1 से 2 | ऊन-जैसा फूलापन, प्रकाश-स्थायी; बुनाई, कंबल |
| पॉलिप्रोपिलीन | 0.91 | लगभग 0 | सबसे हल्का, जलविरोधी; भू-वस्त्र, कालीन, अबुना |
5. कार्बन, ऐरामिड व UHMWPE तंतु
ये उच्च-निष्पादन तंतु ऐसी शृंखलाओं से जो दृढ़ या पूर्णतः विस्तृत व अत्यधिक अभिविन्यस्त हैं, परंपरागत वस्त्र तंतुओं से कहीं अधिक सामर्थ्य व मॉड्यूलस पाते हैं।
- कार्बन तंतु: पूर्ववर्ती, मुख्यतः पॉलिऐक्रिलोनाइट्राइल (PAN), को गरम कर बनता है। चरण: वायु में लगभग 200 से 300 °C पर स्थायीकरण (चक्रीकरण व ऑक्सीकरण से सीढ़ी-संरचना जो अब नहीं पिघलती), अक्रिय गैस में लगभग 1000 °C या अधिक पर कार्बनीकरण (अकार्बन परमाणु निकल जाते हैं), और वैकल्पिक रूप से उच्च मॉड्यूलस हेतु अधिक ताप पर ग्रेफ़ाइटीकरण। परिणाम: बहुत उच्च मॉड्यूलस व सामर्थ्य, कम घनत्व (लगभग 1.8 g/cm³), विद्युत चालकता, पर भंगुर व कम भंग-विस्तार। मुख्यतः संमिश्रों (वायुयान, खेल-सामग्री) में उपयोग।
- ऐरामिड (ऐरोमैटिक पॉलिएमाइड)। पैरा-ऐरामिड (पॉली-p-फ़ेनिलीन टेरेफ़्थैलेमाइड, जैसे Kevlar-प्रकार) की दृढ़-दंड शृंखलाएँ सांद्र सल्फ़्यूरिक अम्ल में द्रव-क्रिस्टलीय विलयन बनाती हैं, उसकी शुष्क-जेट-आर्द्र कताई होती है, और लगभग 1.44 g/cm³ घनत्व पर बहुत उच्च सामर्थ्य व मॉड्यूलस मिलता है; वह पिघलता नहीं, उच्च ताप पर अपघटित होता है; UV-प्रतिरोध कम। उपयोग: बैलिस्टिक कवच, टायर-कॉर्ड, रस्सियाँ, संमिश्र। मेटा-ऐरामिड (Nomex-प्रकार) की शृंखलाएँ कोणीय हैं, सामर्थ्य कम है, और ऊष्मा व ज्वाला-प्रतिरोध हेतु मूल्यवान है (रक्षात्मक वस्त्र, फ़िल्टर-फ़ेल्ट)।
- UHMWPE (अति-उच्च आण्विक भार पॉलिएथिलीन, मोलर द्रव्यमान लाखों में): जेल-कताई व अत्यधिक कर्षण से लगभग पूर्णतः विस्तृत शृंखलाएँ। बहुत उच्च विशिष्ट सामर्थ्य, घनत्व लगभग 0.97 g/cm³ (पानी पर तैरता है), उत्कृष्ट घर्षण व रासायनिक प्रतिरोध, नमी-रिगेन लगभग शून्य; पर गलनांक कम (लगभग 150 °C) व उल्लेखनीय विसर्पण (creep)। उपयोग: रस्सियाँ, बैलिस्टिक पैनल, कट-प्रतिरोधी दस्ताने, पाल।
6. तंतु-पहचान व मिश्रण-विश्लेषण
पहचान सरल से विशिष्ट परीक्षणों की ओर चलती है। भौतिक: सूक्ष्मदर्शी (अनुदैर्घ्य दृश्य व अनुप्रस्थ-काट: कपास ऐंठा फीता, ऊन शल्क, विस्कोस धारियाँ, रेशम चिकने त्रिभुज), घनत्व-प्रवणता स्तंभ में घनत्व, तथा गलनांक। रासायनिक: जलाना (सेलुलोज़ी तेज़ जलते हैं, कागज़-गंध व मुलायम राख; ऊन व रेशम जले बाल की गंध से जलते हैं व चूर्णनीय मनका छोड़ते हैं; नायलॉन व पॉलिएस्टर पिघलकर कठोर मनका छोड़ते हैं; पॉलिप्रोपिलीन पिघलकर मोमी गंध से जलता है), विलेयता तथा रंजन। संदिग्ध स्थितियों को यंत्रीय विधियाँ (IR स्पेक्ट्रम, DSC गलन) सुलझाती हैं।
| हटाया गया घटक | अभिकर्मक (विशिष्ट) | अवशेष |
|---|---|---|
| ऊन या रेशम | गर्म तनु सोडियम हाइड्रॉक्साइड (ऊन); सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (रेशम) | कपास, पॉलिएस्टर |
| कपास या विस्कोस | लगभग 70% सल्फ़्यूरिक अम्ल, कक्ष-ताप पर | पॉलिएस्टर, ऐक्रिलिक |
| नायलॉन | फ़ॉर्मिक अम्ल (लगभग 85%) | कपास, पॉलिएस्टर, ऊन |
| ऐक्रिलिक | डाइमेथिलफ़ॉर्मामाइड, गर्म | कपास, ऊन, पॉलिएस्टर |
चयनात्मक विलयन द्वारा मिश्रण-विश्लेषण। द्रव्यमान m (भट्ठी-शुष्क) का शुष्क, साफ़ किया नमूना लें। अभिकर्मक से एक घटक हटाएँ, धोएँ, सुखाएँ और अवशेष r तौलें। चूँकि अभिकर्मक अविलीन तंतु को भी थोड़ा क्षीण करता है, संशोधन-गुणक d (1 से अधिक संख्या, उस तंतु अकेले के मूल व उपचारित शुष्क द्रव्यमानों का अनुपात) से गुणा करें। तब अविलीन घटक का प्रतिशत P = 100 × r × d / m है, और शेष विलीन घटक। हल उदाहरण: 2.000 g भट्ठी-शुष्क ऊन-कपास नमूना; क्षार के साथ उबालने पर शुष्क कपास-अवशेष 1.230 g, d = 1.02। कपास = 1.230 × 1.02 = 1.2546 g = 62.73%; ऊन = 37.27%। जब मिश्रण अनुकूलित द्रव्यमान पर खरीदे जाते हैं तो प्रत्येक शुष्क अंश को उसके वाणिज्यिक रिगेन से बदलें: 67:33 पॉलिएस्टर:कपास (शुष्क) के लिए रिगेन 0.4% व 8.5% पर 100 kg शुष्क स्टॉक का वाणिज्यिक रिगेन पर भार 67 × 1.004 + 33 × 1.085 = 103.07 kg है।
मुख्य बिंदु
- तंतु प्राकृतिक (वानस्पतिक, जांतव, खनिज) या मानव-निर्मित (पुनर्जनित, संश्लिष्ट, अकार्बनिक) होते हैं; स्टेपल बनाम फिलामेंट; 1 tex = 9 denier = 10 dtex, और बड़ी संख्या मोटे तंतु की सूचक है।
- तंतु-निर्माणी बहुलक रैखिक, पर्याप्त आण्विक भार का, क्रिस्टलन व अभिविन्यास हेतु पर्याप्त नियमित होता है, उसमें अंतर-शृंखला आकर्षण होता है और Tm इस्त्री-ताप व अपघटन-ताप के बीच रहता है; PAN व सेलुलोज़ पिघलने से पहले अपघटित होते हैं, अतः विलयन-कताई होती है।
- कपास: क्यूटिकल, प्राथमिक भित्ति, कुंडलित द्वितीयक भित्ति, ल्यूमेन; गुणवत्ता परिपक्वता पर निर्भर। ऊन: डाइसल्फ़ाइड क्रॉस-लिंक वाला केराटिन, शल्कीय क्यूटिकल, द्विपार्श्व कॉर्टेक्स। रेशम: सेरिसिन से जुड़े फ़ाइब्रोइन ब्रिन, जो गोंद-निष्कासन से हटते हैं।
- बास्ट तंतु तने के तंतु हैं जो रेटिंग से मुक्त होते हैं; जूट लिग्निनयुक्त व मोटा, अलसी व रेमी महीन व सशक्त। नमी-रिगेन शुष्क द्रव्यमान पर है: M = 100R/(100 + R)।
- कार्बन (PAN, पहले स्थायीकरण फिर कार्बनीकरण, भंगुर, कठोर), पैरा-ऐरामिड (द्रव-क्रिस्टल दंड शृंखलाएँ, ऊष्मा-प्रतिरोधी, सशक्त) तथा UHMWPE (जेल-कताई, घनत्व 1 से कम, कम गलनांक, विसर्पण) तीन उच्च-निष्पादन तंतु हैं।
- मिश्रण-विश्लेषण: एक घटक घोलें, अवशेष सुखाएँ, संशोधन-गुणक लगाएँ, P = 100 r d/m; अनुकूलित द्रव्यमान पर खरीदने हेतु द्रव्यमान-भारित वाणिज्यिक रिगेन चाहिए।
अभ्यास प्रश्न (17)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा पुनर्जनित सेलुलोज़ी तंतु है, जिसमें सेलुलोज़ घोलकर पुनः तंतुओं के रूप में बनाया जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — विस्कोस, क्योंकि सेलुलोज़ ज़ैन्थेट के रूप में घुलता है और अम्ल से पुनर्जनित होता है
विस्कोस वह सेलुलोज़ है जो (सेलुलोज़ ज़ैन्थेट के रूप में) घुलकर अम्ल-स्नान द्वारा तंतुओं में पुनर्जनित होता है, अतः उत्पाद पुनः सेलुलोज़ है। नायलॉन 6 संश्लिष्ट पॉलिएमाइड है, अलसी प्राकृतिक बास्ट तंतु है, और गोंद-निष्कासन केवल प्राकृतिक रेशम को शुद्ध करता है; किसी में सेलुलोज़ घोलकर पुनः बनाना नहीं है।समान आण्विक भार का समविन्यास (isotactic) पॉलिप्रोपिलीन अच्छा तंतु-निर्माणी बहुलक है जबकि असमविन्यास (atactic) नहीं। मुख्य कारण यह है कि असमविन्यास रूप
उत्तर देखें
उत्तर: C — में पार्श्व-समूहों की स्थिति अनियमित है, अतः शृंखलाएँ क्रिस्टल में संकुलित या भली-भाँति अभिविन्यस्त नहीं हो सकतीं
टैक्टिसिटी शृंखला की नियमितता तय करती है। समविन्यास शृंखलाएँ क्रिस्टल में संकुलित होती हैं और कर्षण पर अभिविन्यस्त होती हैं, जिससे सामर्थ्य मिलता है; असमविन्यास शृंखलाएँ क्रिस्टलित नहीं हो सकतीं और मुलायम, दुर्बल पदार्थ देती हैं। दोनों रूप रैखिक हैं, केवल वान डर वाल्स बल हैं (हाइड्रोजन आबंध नहीं) और क्रॉस-लिंकित नहीं, जिससे अन्य कथन कट जाते हैं।ऊन तंतु में क्रिम्प मुख्यतः इसलिए बनता है कि कॉर्टेक्स द्विपार्श्व है। दोनों अर्धों में अंतर है
उत्तर देखें
उत्तर: A — सिस्टीन-मात्रा व फूलने के व्यवहार का (ऑर्थो- व पैरा-कॉर्टेक्स)
ऑर्थो-कॉर्टेक्स व पैरा-कॉर्टेक्स सिस्टीन-मात्रा, संकुलन व फूलने में भिन्न हैं, अतः भीगने या सूखने पर दोनों ओर की लंबाई असमान बदलती है और तंतु क्रिम्प में मुड़ता है। शल्कों की दिशा फेल्टिंग समझाती है, क्रिम्प नहीं; मेड्यूला मोटे ऊन में केंद्रीय नलिका है; सेरिसिन रेशम का है, ऊन का नहीं।कच्चे रेशम से गोंद-निष्कासन हटाता है
उत्तर देखें
उत्तर: D — सेरिसिन को, और फ़ाइब्रोइन तंतु रह जाते हैं
सेरिसिन वह चिपचिपा प्रोटीन है जो दो फ़ाइब्रोइन ब्रिनों को जोड़ता है; गर्म साबुन या क्षार उसे घोलकर कोमल, चमकीला फ़ाइब्रोइन छोड़ता है। फ़ाइब्रोइन हटाने से तंतु नष्ट हो जाता। रेशम में उल्लेखनीय डाइसल्फ़ाइड क्रॉस-लिंक नहीं हैं (वह ऊन में हैं), और मोम व पेक्टिन कपास के घटक हैं।पॉलिएस्टर-कपास कपड़े का चयनात्मक विलयन से विश्लेषण करना है ताकि पॉलिएस्टर अवशेष के रूप में तौला जाए। कौन-सा उपचार उपयुक्त है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — लगभग 70% सल्फ़्यूरिक अम्ल से कक्ष-ताप पर उपचार, जो केवल कपास को घोलता है
सेलुलोज़ कक्ष-ताप पर लगभग 70% सल्फ़्यूरिक अम्ल में घुल जाता है जबकि पॉलिएस्टर अप्रभावित रहता है, अतः पॉलिएस्टर तौलने योग्य अवशेष रहता है। तनु क्षार कपास को नहीं घोलता (वह ऊन का अभिकर्मक है), फ़ॉर्मिक अम्ल कपास नहीं नायलॉन को घोलता है, और गरम करने से दोनों तंतु अपघटित होंगे।UHMWPE तंतु के बारे में कौन-सा कथन सही है?
उत्तर देखें
उत्तर: A — यह जल पर तैरता है, लगभग 150 °C पर मृदु होता है और विसर्पित होता है
UHMWPE का घनत्व लगभग 0.97 g/cm³ (तैरता है), गलनांक लगभग 150 °C और उल्लेखनीय विसर्पण है। यह जेल-कताई से बनता है, रिगेन लगभग शून्य है, और अपघटित होने के बजाय पिघलता है; PAN का कार्बनीकरण कार्बन तंतु का मार्ग है।पैरा-ऐरामिड व मेटा-ऐरामिड दोनों ऐरोमैटिक पॉलिएमाइड हैं, फिर भी बैलिस्टिक कवच हेतु पैरा-ऐरामिड और ज्वाला-रक्षी वस्त्र हेतु मेटा-ऐरामिड चुना जाता है। कारण यह है कि
उत्तर देखें
उत्तर: D — पैरा शृंखलाएँ सीधे दृढ़ दंड हैं व बहुत उच्च सामर्थ्य तक अभिविन्यस्त होती हैं, कोणीय मेटा शृंखलाएँ नहीं
पैरा-बंधन सीधी, दृढ़, दंडवत् शृंखलाएँ देता है जो द्रव-क्रिस्टलीय डोप बनाती हैं और लगभग पूर्ण अभिविन्यस्त होती हैं, अतः बहुत उच्च सामर्थ्य व मॉड्यूलस। मेटा-बंधन शृंखला को मोड़ता है, जिससे अच्छी तापीय स्थिरता रखते हुए भी सामर्थ्य घटती है। दोनों में हाइड्रोजन आबंध वाले ऐमाइड समूह हैं और कोई भी सुविधा से नहीं पिघलता, अतः दोनों विलयन-कताई से बनते हैं।PAN से कार्बन तंतु बनाने में पूर्ववर्ती को पहले वायु में लगभग 200 से 300 °C पर गरम किया जाता है। इस स्थायीकरण चरण का उद्देश्य है
उत्तर देखें
उत्तर: A — अगलनीय चक्रीकृत सीढ़ी-संरचना बनाना
वायु में गरम करने से नाइट्राइल समूह चक्रीकृत होते हैं और ऑक्सीजन जुड़ती है, जिससे अगलनीय सीढ़ी बहुलक बनता है; इसके बिना कार्बनीकरण-ताप पर तंतु पिघलता या जुड़ जाता। ग्रेफ़ाइटीय क्रम ग्रेफ़ाइटीकरण बढ़ाता है, स्थायीकरण नहीं, और PAN में सेरिसिन नहीं होता।एक कपास-नमूने में अनेक अपरिपक्व तंतु हैं। परिपक्व कपास की तुलना में इन तंतुओं में है
उत्तर देखें
उत्तर: B — पतली भित्ति, फीता-रूप व नेप बनाने की प्रवृत्ति
अपरिपक्व कपास की द्वितीयक भित्ति पतली होती है, अतः तंतु फीते में पिचकता है, दुर्बल होता है, उलझकर नेप बनाता है और असमान रंजित होता है। मोटी भित्ति परिपक्व तंतु की पहचान है, लिग्निन बास्ट तंतु का घटक है, और शल्क ऊन के हैं।जिस बहुलक से वस्त्र तंतु बनाना है उसकी अनिवार्य आवश्यकताओं में से कौन-सी हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: A — शृंखलाएँ मूलतः रैखिक और इतनी नियमित हों कि अभिविन्यस्त तथा अधिमानतः क्रिस्टलित हो सकें; C — उसका आण्विक भार पर्याप्त हो, और वह बिना अपघटन के पिघल सके या किसी उपयोगी विलायक में घुल सके
तंतु बहुलक रैखिक व नियमित (ताकि शृंखलाएँ अभिविन्यस्त व क्रिस्टलित हों), पर्याप्त आण्विक भार का, तथा पिघलाकर या घोलकर प्रसंस्करणीय होना चाहिए। क्रॉस-लिंकित जाल न पिघल सकता है न घुल, अतः कात नहीं सकता, और अति न्यून बहुलकन-अंश का ओलिगोमर उलझाव-रहित होकर दुर्बल, भंगुर उत्पाद देता है।निम्नलिखित में से कौन-से बास्ट तंतु हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: A — अलसी; B — रेमी; D — जूट
अलसी, रेमी व जूट पौधों के तने के फ़्लोएम से मिलते हैं और रेटिंग से मुक्त होते हैं। सिसल पत्ती-तंतु है जो ऐगेव पौधे की पत्तियों से मिलता है, अतः बास्ट तंतु नहीं।चयनात्मक विलयन द्वारा मिश्रण-विश्लेषण के बारे में कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: A — अवशेष को तौलने से पहले स्थिर द्रव्यमान तक सुखाया जाता है ताकि नमी तंतु न गिनी जाए; B — 1 से अधिक संशोधन-गुणक अभिकर्मक में अविलीन तंतु की थोड़ी क्षति की क्षतिपूर्ति करता है
स्थिर शुष्क द्रव्यमान व संशोधन-गुणक d (1 से अधिक) मानक प्रथा हैं। गर्म क्षार ऊन को घोलता है, कपास को नहीं, अतः बताया अभिकर्मक उलटा है; और अनुकूलित द्रव्यमान का अनुपात चाहिए तो शुष्क-द्रव्यमान प्रतिशतों को वाणिज्यिक रिगेन से बदलना होगा।2.000 g भट्ठी-शुष्क ऊन-कपास नमूने को ऊन घोलने हेतु तनु क्षार में उबाला जाता है। सुखाया गया कपास-अवशेष 1.230 g है। अभिकर्मक में कपास की क्षति का संशोधन-गुणक d = 1.02 है। ऊन का शुष्क द्रव्यमान पर प्रतिशत, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 37.3
संशोधित कपास = 1.230 × 1.02 = 1.2546 g, अतः कपास = 1.2546/2.000 = 62.73%। ऊन = 100 − 62.73 = 37.27%, जो एक दशमलव स्थान तक 37.3% है। d छोड़ने पर 38.5% आता।पॉलिएस्टर-कपास मिश्रण भट्ठी-शुष्क द्रव्यमान पर 67% पॉलिएस्टर व 33% कपास है। वाणिज्यिक रिगेन पॉलिएस्टर हेतु 0.4% व कपास हेतु 8.5% लें। जिस खेप का भट्ठी-शुष्क द्रव्यमान 100 kg है उसका वाणिज्यिक रिगेन पर द्रव्यमान, kg में दो दशमलव स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 103.07
प्रत्येक शुष्क घटक को (1 + R/100) से गुणा किया जाता है। पॉलिएस्टर: 67 × 1.004 = 67.268 kg। कपास: 33 × 1.085 = 35.805 kg। कुल = 67.268 + 35.805 = 103.073, अर्थात् 103.07 kg। समतुल्यतः मिश्रण का रिगेन 3.07% है।वृत्ताकार अनुप्रस्थ-काट वाला एक पॉलिएस्टर फिलामेंट 1.5 denier का है। पॉलिएस्टर का घनत्व 1.38 g/cm³ लें और 1 tex = 9 denier। उसका व्यास माइक्रोमीटर में, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 12.4
रैखिक घनत्व = 1.5/9 = 0.1667 tex = 1000 m में 0.1667 g = 1.667 × 10⁻⁷ kg/m। क्षेत्रफल = (द्रव्यमान प्रति लंबाई)/घनत्व = 1.667 × 10⁻⁷ / 1380 = 1.208 × 10⁻¹⁰ m²। व्यास = √(4A/π) = 1.240 × 10⁻⁵ m = 12.4 µm।एक तंतु-नमूने का अनुकूलित भार 5.40 g और भट्ठी में सुखाने पर 4.98 g है। उसका नमी-रिगेन, भट्ठी-शुष्क द्रव्यमान के प्रतिशत के रूप में, दो दशमलव स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 8.43
रिगेन = (W − W₀)/W₀ × 100 = (5.40 − 4.98)/4.98 × 100 = 0.42/4.98 × 100 = 8.43%। नमी-अंश (अनुकूलित द्रव्यमान पर) 7.78% होता, जो प्रचलित ग़लत उत्तर है।एक संतत-फिलामेंट पॉलिएस्टर सूत्र पर 75 denier व 36 फिलामेंट अंकित हैं, सभी समान सूक्ष्मता के। एक फिलामेंट का रैखिक घनत्व dtex में (1 dtex = 10,000 m का 1 g; 1 denier = 9000 m का 1 g), दो दशमलव स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 2.31
सूत्र का dtex = 75 × 10/9 = 83.33। प्रति फिलामेंट = 83.33/36 = 2.315, अर्थात् 2.31 dtex (प्रति फिलामेंट denier 75/36 = 2.08 है)। इकाई बदले बिना भाग देना, 2.08, प्रचलित भूल है।