रासायनिक प्रसंस्करण II: रंजक, रंगाई, मशीनें, रंजक-तंतु ऊष्मागतिकी व बलगतिकी, रंग-मापन तथा Fastness

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर के XE9 वस्त्र अभियांत्रिकी एवं तंतु विज्ञान के उपखंड XE9.5 “Chemical Processing” के दूसरे अनुच्छेद का उत्तर है: “Classification of dyes; Dyeing of cotton, wool, silk, polyester, nylon and acrylic with appropriate classes of dyes; Dyeing of polyester/cotton and polyester/wool blends; Dyeing machines; Dyeing processes and machines for cotton knitted fabrics; Dye-fibre interaction; Introduction to thermodynamics and kinetics of dyeing; Brief idea about the relation between colour and chemical constitution; Beer-Lambert’s law; Kubelka-Munk theory and its application in colour measurement; Methods for determination of wash, light and rubbing fastness.” इसमें रंजक-वर्ग व प्रत्येक के अनुकूल तंतु, प्रत्येक तंतु व मिश्रण हेतु प्रक्रम-क्रम, मशीनें, रंजक को थामने वाले बल, affinity, समतापी वक्र व रंगाई की दर, रंग व रासायनिक संरचना, Beer-Lambert व Kubelka-Munk तथा fastness परीक्षण पढ़ाए गए हैं। संख्यात्मक प्रश्न रेसिपी व नमक की मात्रा, अवशोषकता से exhaustion, Beer-Lambert से सांद्रता, Nernst विभाजन, Kubelka-Munk परावर्तन तथा Arrhenius दर-अनुपात हैं।

1. रंजकों का वर्गीकरण

रंजक अनुप्रयोग (वे तंतु तक कैसे पहुँचते व टिकते हैं) के आधार पर वर्गीकृत होते हैं, जो परीक्षा में पूछा जाता है, और रासायनिक संरचना (ऐज़ो, ऐन्थ्राक्विनोन, इंडिगॉइड, ट्राइफ़ेनिलमेथेन, थैलोसायनिन आदि) के आधार पर भी। रंजक का चुनाव तंतु से होता है: उसके आयनिक या ध्रुवीय स्वभाव का तंतु के क्रियात्मक समूहों से मेल अन्योन्यक्रिया, fastness व प्रक्रम तय करता है। सेलुलोज़ में केवल OH समूह हैं और जल में दुर्बल ऋणावेशित है; ऊन, रेशम व nylon में –NH₂ व –COOH समूह हैं और अम्ल में धनावेशित हो जाते हैं; polyester जल-विरागी एस्टर है जिसमें आयनिक समूह नहीं; acrylic में आरंभक या सह-एकलक से आए ऋणायनिक सल्फ़ोनेट या कार्बोक्सिलेट सिरे होते हैं।

रंजकों के अनुप्रयोग-वर्ग
वर्गतंतुकैसे थमता है
Directसेलुलोज़हाइड्रोजन बंध व वान डर वाल्स बल; नमक अवशोषण बढ़ाता है; मध्यम wash fastness
Reactiveसेलुलोज़ (तथा ऊन, रेशम, nylon)क्षार में सेलुलोज़ से सहसंयोजी बंध; जल-अपघटन प्रतिस्पर्धी
Vat, indigoसेलुलोज़अविलेय वर्णक अपचयित होकर विलेय leuco रूप में सोखा जाता है, भीतर पुनः ऑक्सीकृत
Sulphur, azoicसेलुलोज़Sulphur: अपचयन फिर पुनः ऑक्सीकरण; azoic: तंतु में naphthol का diazo घटक से युग्मन
DispersePolyester, acetate व nylonअल्प-विलेय अनायनिक रंजक तंतु में ठोस विलयन के रूप में घुलता है
Acid व metal-complexऊन, रेशम, nylonऋणायनिक रंजक प्रोटॉनित ऐमीनो समूहों से आयनिक बंध; 1:2 संकुल वान डर वाल्स बल भी लेते हैं
Basic (cationic)Acrylicरंजक धनायन ऋणायनिक सिरों से युग्मित होता है
⚠️ वर्ग को तंतु से मिलाएँ
सामान्य बेमेल ये हैं: रुई हेतु disperse रंजक (कोई affinity नहीं), polyester हेतु reactive रंजक (कोई अभिक्रियाशील स्थल नहीं) और acrylic हेतु acid रंजक (तंतु ऋणायनिक है, इसलिए धनायनिक रंजक चाहिए)। ऊन reactive व chrome रंजकों से भी, तथा nylon हल्के शेडों में disperse रंजकों से भी रंगे जा सकते हैं।

2. रुई, ऊन, रेशम, polyester, nylon व acrylic की रंगाई

रुई, reactive: रंजक को पहले सामान्य नमक या Glauber’s salt से exhaust करते हैं (वह गीले सेलुलोज़ का ऋणावेश छिपाता है, जो अन्यथा ऋणायनिक रंजक को प्रतिकर्षित करता), फिर क्षार (soda ash, और कम अभिक्रियाशील प्रकारों हेतु कास्टिक) सेलुलोज़ेट आयन Cell–O⁻ बनाता है जो रंजक पर प्रहार कर सहसंयोजी बंध बनाते हैं, फिर अस्थिर व जल-अपघटित रंजक soaping से धोया जाता है। Fixation 100% से कम रहता है क्योंकि पानी भी रंजक पर प्रहार करता है। Direct रंजक नमक लेते हैं, क्षार नहीं। Vat रंगाई के चार चरण हैं: vatting (सोडियम डाइथायोनाइट व NaOH से विलेय leuco ऋणायन तक अपचयन), रंगाई, अविलेय वर्णक में वापसी हेतु ऑक्सीकरण (वायु या परॉक्साइड) और soaping। डेनिम का indigo vat रंजक है जो बार-बार डुबोकर, बीच में वायु में ऑक्सीकृत कर लगाया जाता है।

ऊन व रेशम, acid व metal-complex: तंतु प्रोटॉनित होता है, –NH₃⁺ ··· ⁻O₃S–Dye। Levelling acid dye लगभग pH 2 से 4 पर सल्फ्यूरिक अम्ल व Glauber’s salt के साथ लगते हैं, जो एकसमान परिणाम हेतु अवशोषण धीमा करता है, ऊन में उबाल पर या उसके निकट; milling dye व 1:2 metal-complex रंजकों को मृदु अम्ल या लगभग उदासीन स्नान चाहिए और वे बेहतर wet fastness देते हैं। लंबे उबाल से ऊन को क्षति होती है, इसलिए समय व ताप नियंत्रित रखे जाते हैं; रेशम को उबाल से नीचे (लगभग 80 से 85 °C) मृदुतर अम्ल से रंगते हैं। Nylon को लगभग pH 4 से 6 पर उबाल के निकट acid रंजकों से रंगते हैं: उसके रंजक-स्थल सीमित हैं (ऐमीनो सिरे), इसलिए वह संतृप्त होता है, और सिरा-समूह की मात्रा या ऊष्मा-इतिहास के अंतर से धारीदार (barré) रंगाई होती है; हल्के शेडों हेतु disperse रंजक काम आते हैं।

Polyester (आयनिक समूह नहीं, सघन, काचीय) को disperse रंजकों से लगभग 130 °C पर दाब में pH 4.5 से 5.5 पर, या उबाल पर carrier से, या thermosol सतत प्रक्रम (pad, सुखाना, फिर लगभग 200 °C पर लगभग एक मिनट शुष्क ऊष्मा) से रंगते हैं। ऊष्मा तंतु को उसके काँच-संक्रमण से बहुत ऊपर ले जाती है ताकि शृंखलाएँ गतिशील हों और रंजक भीतर विसरित हो सके। अच्छी wash व rubbing fastness हेतु सतही रंजक reduction clearing (डाइथायोनाइट व कास्टिक) से हटाया जाता है। Acrylic को cationic रंजकों से pH 4 से 5.5 पर धनायनिक retarder के साथ रंगते हैं; तंतु अपने आर्द्र काँच-संक्रमण के ऊपर ही रंजक तेज़ी से लेता है, इसलिए असमानता से बचने हेतु ताप क्रांतिक परास में धीरे-धीरे (लगभग 1 °C/min) बढ़ाया जाता है, और सिलवटों से बचने हेतु धीरे ठंडा किया जाता है।

3. मिश्रण, रंगाई मशीनें व सूती निटेड कपड़ा

Polyester/cotton को दो रंजक-वर्ग चाहिए। सामान्य राह है पहले polyester हेतु disperse रंजक (अम्लीय pH, 130 °C), एक reduction clearing जो रुई पर लगे disperse दाग़ भी साफ़ करती है, फिर रुई हेतु reactive, direct या vat रंजक (क्षारीय)। क्रम महत्त्वपूर्ण है क्योंकि reactive रंजक का क्षार अनेक disperse रंजकों पर प्रहार करता है और उच्च-ताप अम्ल चरण पहले से fixed reactive रंजक को क्षति पहुँचाता। Polyester/wool को ऊन बचाने हेतु कम ताप (लगभग 100 से 105 °C) पर pH 4.5 से 5.5 पर disperse रंजक से रंगते हैं, फिर ऊन को acid या metal-complex रंजक से; क्योंकि ऊन disperse रंजक सोखकर दाग़ी हो जाती है, disperse रंजक का चुनाव व निकासी सावधानी से हो (reduction clearing सीमित है, वह ऊन को हानि पहुँचाएगी)।

रंगाई मशीनें
मशीनसिद्धांतटिप्पणियाँ
Winchकपड़े की रस्सी बाथ से उठाई व गिराई जाती हैसरल, कोमल, ऊँचा लिकर-अनुपात
Jigखुली चौड़ाई का कपड़ा दो रोलरों के बीच छोटे बाथ से गुज़रता हैतनाव चाहिए: खिंचने वाले निट हेतु अनुपयुक्त
Jet, overflow व soft-flowरस्सी लिकर-प्रवाह से परिचालितकम तनाव, कम लिकर-अनुपात; polyester हेतु HT संस्करण
Beam, package व hankलिकर लिपटी सामग्री से बलपूर्वक भेजा जाता हैसूत व कुछ कपड़े; दाब-सक्षम
Pad मशीनें (सतत)Pad, फिर batch, steam या thermosolReactive हेतु pad-batch; polyester हेतु pad-dry-thermosol

सूती निट रस्सी-रूप में jet, overflow या soft-flow मशीनों (या winch) में रंगे जाते हैं क्योंकि निट खिंचता है और सिलवटों व विकृति से बचने हेतु कम तनाव व कोमल व्यवहार चाहिए, और कम लिकर-अनुपात पानी, नमक व रसायन बचाता है। मुख्य वर्ग reactive रंजक हैं: नमक, फिर रंजक, फिर एकसमानता हेतु चरणों में क्षार का डोज़, फिर wash-off, फिर आयाम-नियंत्रण। लिकर-अनुपात स्नान व कपड़े का द्रव्यमान-आयतन अनुपात है, और सभी “% owf” व “g/L” रासायनिक मात्राएँ उसी से निकलती हैं।

4. रंजक-तंतु अन्योन्यक्रिया, रंगाई की ऊष्मागतिकी व बलगतिकी

रंजक एक या अधिक से थमता है: आयनिक बंध (ऊन व nylon पर acid, acrylic पर cationic), सहसंयोजी बंध (सेलुलोज़ पर reactive), हाइड्रोजन बंध तथा वान डर वाल्स/जल-विरागी बल (सेलुलोज़ पर direct, ऊन पर metal-complex) और ठोस विलयन (polyester में disperse, कोई विशिष्ट स्थल नहीं)। रंगाई साम्य तक बाथ से तंतु में रंजक का स्थानांतरण है, इसलिए दो प्रश्न उठते हैं: कितना (ऊष्मागतिकी: affinity व समतापी वक्र) और कितना तेज़ (बलगतिकी: विसरण)।

  • Nernst समतापी (विभाजन, संतृप्ति नहीं): [D]f = K [D]s, जहाँ [D]f तंतु में व [D]s बाथ में है। यह polyester में disperse रंजक पर लागू होता है। यदि रंजक की कुल मात्रा m₀, तंतु-द्रव्यमान w, बाथ-आयतन V और तंतु में रंजक x हो तो x/w = K (m₀ − x)/V।
  • Langmuir समतापी (सीमित स्थल S): [D]f = S K [D]s / (1 + K [D]s)। यह ऊन या nylon पर acid रंजक व acrylic पर cationic रंजक पर लागू होता है; उच्च [D]s पर तंतु [D]f = S पर संतृप्त होता है, जो संतृप्ति-मान तय करता है। Freundlich [D]f = k [D]sⁿ सेलुलोज़ पर अनेक direct रंजकों पर लागू होता है।
  • Affinity मानक रासायनिक-विभव का अंतर है: विभाजन समतापी हेतु −Δμ° = RT ln K, जहाँ K बताई गई मानक अवस्थाओं में तंतु व बाथ के रंजक का अनुपात है। बड़ा K अधिक affinity है। रंगाई की ऊष्मा van’t Hoff संबंध d ln K / d(1/T) = −ΔH°/R से आती है: ऊष्माक्षेपी रंगाई (ΔH° ऋणात्मक, सामान्य स्थिति, जैसे ऊन पर acid रंजक) T बढ़ने पर affinity खोती है, इसलिए ताप दर देता है, exhaustion नहीं, जबकि ऊष्माशोषी रंगाई affinity पाती है।
  • बलगतिकी: तंतु के भीतर विसरण मंद चरण है। Fick का नियम अर्ध-रंगाई समय t½ ∝ r²/D देता है, इसलिए तंतु-त्रिज्या r दुगुनी करने पर t½ चौगुना हो जाता है। D = D₀ exp(−Ea/RT) ताप के साथ तेज़ी से बढ़ता है, क्योंकि काचीय बहुलक में विसरण की सक्रियण-ऊर्जा ऊँची है और सुघट्यीकरण सहायक है। विलोड़न, महीन तंतु व ऊँचा ताप अवशोषण तेज़ करते हैं; अंतिम मात्रा affinity तय करती है, दर नहीं।

रेसिपी व exhaustion की गणना। “2% owf” का अर्थ है 100 kg सूखे कपड़े पर 2 kg रंजक। 25 kg कपड़े हेतु वह 0.5 kg है; 10 g/L स्टॉक विलयन से वह 50 लीटर है। बाथ-आयतन = कपड़े का द्रव्यमान × लिकर-अनुपात। अपरिवर्तित आयतन के बाथ हेतु Exhaustion E% = 100 (C₀ − C_f)/C₀, जहाँ C अवशोषकता से मापी जाती है (खंड 5)। Reactive रंजक का fixation वास्तव में बंधे रंजक का अंश है, जो exhaustion से कम होता है क्योंकि कुछ exhausted रंजक बाद में जल-अपघटित होकर धुल जाता है।

5. रंग व संरचना, Beer-Lambert व Kubelka-Munk

रंजक रंगीन इसलिए दिखता है कि वह दृश्य स्पेक्ट्रम (लगभग 400 से 700 nm) का एक भाग सोखता है और आँख पूरक प्रकाश देखती है: नीले का अवशोषण पीला, हरे का मैजेंटा, लाल का सियान दिखता है। रंग हेतु chromophore (ऐज़ो –N=N–, नाइट्रो, कार्बोनिल, क्विनॉइड, –C=C–) सहित विस्तृत संयुग्मित तंत्र चाहिए। Auxochrome (–OH, –NH₂, –NR₂) रंग को तीव्र व गहरा करता है, और –SO₃H जैसे समूह जल-विलेयता व आयनिक स्वभाव देते हैं। लंबा संयुग्मन या प्रबल दाता–ग्राही धक्का अवशोषण-उच्चिष्ठ को दीर्घ तरंगदैर्ध्य की ओर ले जाता है (bathochromic), उलटा hypsochromic है; अधिक अवशोषण-तीव्रता hyperchromic है। रंग-सिद्धांत का श्रेय Witt के chromophore–auxochrome चित्र को दिया जाता है।

Beer-Lambert नियम: A = log₁₀(I₀/I) = ε c l, जहाँ ε मोलर अवशोषकता (L mol⁻¹ cm⁻¹), c मोलर सांद्रता और l पथ-लंबाई (cm) है। पारगम्यता T = I/I₀ और A = −log₁₀ T। यह एकवर्णी प्रकाश में एक अवशोषक स्पीशीज़ के तनु विलयनों हेतु मान्य है; यह संगुणन (रंजक प्रायः द्विलक बनाते हैं), उच्च सांद्रता, प्रतिदीप्ति या अ-एकवर्णी प्रकाश से विफल होता है। बाथ की सांद्रता व अतः exhaustion λmax पर अवशोषकता से अंशांकन के विरुद्ध ज्ञात होती है, A को लगभग 1 से नीचे रखने हेतु तनुकरण करते हुए।

Kubelka-Munk सिद्धांत अपारदर्शी रंगे वस्त्र को प्रकाश-अवशोषक (गुणांक K) व प्रकाश-प्रकीर्णक (गुणांक S) परत मानता है। अपारदर्शी होने जितनी मोटी परत हेतु, अधिकतम अवशोषण की तरंगदैर्ध्य पर परावर्तन R (अंश के रूप में) हो तो: K/S = (1 − R)² / (2R)। R घटने पर K/S बढ़ता है, और दिए सब्सट्रेट हेतु निम्न से मध्यम गहराई पर K/S लगभग रंजक-सांद्रता के अनुपाती है, इसलिए K/S रंग-सामर्थ्य मापता है, रेसिपी-पूर्वानुमान से शेड मिलाने व कपड़े से exhaustion अनुसरण में सहायक है। सिद्धांत को अपारदर्शी नमूना, एकसमान प्रकीर्णन व नगण्य सतही परावर्तन चाहिए (Saunderson संशोधन इसे सँभालता है), और गहरे शेडों में यह रैखिकता से हटता है। रंग-अंतर CIELAB प्रणाली में ΔE = √(ΔL² + Δa² + Δb²) से बताया जाता है।

⚠️ प्रकाश के दो भिन्न नियम
Beer-Lambert पारदर्शी विलयन पर लागू होता है (A, c के अनुपाती, A = −log T)। Kubelka-Munk अपारदर्शी प्रकीर्णक ठोस पर लागू होता है और परावर्तन प्रयोग करता है, K/S, c के अनुपाती। कपड़े पर A = εcl लगाना, या विलयन-नियम में T की जगह R लगाना, मानक भूल है। साथ ही R घटने पर K/S बढ़ता है: गहरा यानी अधिक K/S।

6. Fastness: wash, light व rubbing

Fastness किसी रंगाई की किसी उपचार के प्रति प्रतिरोधकता है, जो नमूने के रंग-परिवर्तन व पास के सफ़ेद कपड़े पर दाग़ की grey scale से तुलना कर श्रेणीबद्ध की जाती है, जहाँ 5 का अर्थ कोई परिवर्तन या दाग़ नहीं और 1 का अर्थ गंभीर। Wash fastness (ISO 105 C शृंखला, AATCC समतुल्य) में रंगे नमूने को multifibre पट्टी से सिलकर मानक डिटर्जेंट विलयन में निश्चित ताप व समय पर घर्षण हेतु स्टील गेंदों सहित हिलाते हैं, फिर धोकर सुखाते हैं। यह रंजक–तंतु बंध की सामर्थ्य व अस्थिर रंजक कितना धुला (soaping, reduction clearing) इस पर निर्भर है।

Light fastness (ISO 105 B02) में नमूने को 1 (न्यूनतम) से 8 (अधिकतम) क्रमांकित blue wool संदर्भों के साथ दिन के प्रकाश की नकल करने वाले xenon-arc लैंप में उद्भासित किया जाता है; रेटिंग वह संदर्भ है जो उसी मात्रा में फीका पड़ता है। प्रत्येक अगला blue wool क्रमांक लगभग दुगुना टिकता है, अतः रेटिंग 6, रेटिंग 5 से लगभग दुगुनी प्रकाश-स्थायी है। Rubbing (crocking) fastness (ISO 105 X12) में नमूने को crockmeter पर सफ़ेद सूती कपड़े से, पहले शुष्क फिर आर्द्र, मानक भार व रगड़-संख्या पर रगड़ा जाता है; सफ़ेद कपड़े पर दाग़ grey scale पर श्रेणीबद्ध होता है। बहुत अस्थिर सतही रंजक वाले गहरे शेडों की rubbing fastness कमज़ोर होती है, और आर्द्र rubbing प्रायः शुष्क से बुरी होती है।

ℹ️ रेटिंग पढ़ना
Wash व rubbing परिणाम 1 से 5 grey scale पर प्रत्येक के दो रेटिंग (रंग-परिवर्तन व दाग़) हैं; light fastness 1 से 8 blue wool स्केल पर एक संख्या है। प्रत्येक में अधिक संख्या बेहतर है।

मुख्य बिंदु

  • तंतु से रंजक मिलाएँ: सेलुलोज़ हेतु direct, reactive, vat, sulphur व azoic; ऊन, रेशम व nylon हेतु acid व metal-complex; polyester हेतु disperse; acrylic हेतु cationic। Reactive रंजक को पहले नमक फिर क्षार चाहिए, और जल-अपघटन fixation घटाता है।
  • Polyester लगभग 130 °C पर (या carrier, या thermosol से) रंगा जाता है क्योंकि ऊष्मा उसे काँच-संक्रमण से ऊपर ले जाती है; acrylic को क्रांतिक परास में धीरे गरम करते हैं। Polyester/cotton में पहले disperse रंजक, फिर रुई का रंजक लगता है।
  • निट कम तनाव पर jet, overflow या soft-flow मशीनों में जाते हैं; बाथ-आयतन = कपड़े का द्रव्यमान × लिकर-अनुपात, और % owf मात्राएँ कपड़े के द्रव्यमान से निकलती हैं, बाथ-आयतन से नहीं।
  • Nernst: [D]f = K[D]s (संतृप्ति नहीं); Langmuir: [D]f = SK[D]s/(1 + K[D]s), संतृप्ति S सहित; −Δμ° = RT ln K; van’t Hoff से ΔH°; t½ ∝ r²/D और D = D₀exp(−Ea/RT)।
  • रंग हेतु chromophore व auxochrome सहित संयुग्मन चाहिए; लंबा संयुग्मन अवशोषण को दीर्घ तरंगदैर्ध्य की ओर ले जाता है। Beer-Lambert A = εcl पारदर्शी विलयनों हेतु है; Kubelka-Munk K/S = (1 − R)²/(2R) अपारदर्शी कपड़ों हेतु है और रंग-सामर्थ्य मापता है।
  • Fastness wash व rubbing परीक्षणों में परिवर्तन व दाग़ हेतु grey scale (1 से 5) पर, और प्रकाश हेतु blue wool (1 से 8, प्रत्येक पायदान लगभग दुगुना टिकाऊ) पर श्रेणीबद्ध होती है; अस्थिर सतही रंजक wash व rubbing परिणाम बिगाड़ता है।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. कौन-सा रंजक-वर्ग क्षारीय स्थितियों में सेलुलोज़ से सहसंयोजी बंध बनाता है?

    1. Direct रंजक, नमक व ताप-सहायित हाइड्रोजन बंधों से
    2. Reactive रंजक, क्षार में बने सेलुलोज़ेट आयन से अभिक्रिया द्वारा
    3. Disperse रंजक, अक्रिस्टलीय क्षेत्र में ठोस विलयन के रूप में घुलकर
    4. Basic रंजक, रुई के सल्फ़ोनेट समूहों से आयनिक युग्मन द्वारा
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — Reactive रंजक, क्षार में बने सेलुलोज़ेट आयन से अभिक्रिया द्वारा

    Reactive रंजकों में ऐसा समूह (जैसे क्लोरोट्राइएज़ीन या विनाइल सल्फ़ोन) होता है जो क्षार से बने Cell–O⁻ से अभिक्रिया कर सहसंयोजी बंध बनाता है। Direct रंजक भौतिक बलों से थमते हैं। Disperse रंजक जल-विरागी तंतुओं में घुलते हैं, और रुई में basic रंजकों हेतु सल्फ़ोनेट समूह नहीं हैं।
  2. रुई की reactive रंजक से exhaust रंगाई में क्षार से पहले नमक मिलाया जाता है। नमक की मुख्य भूमिका क्या है?

    1. वह रंजक से अभिक्रिया कर उसे अविलेय बनाता है ताकि वह तंतु की सतह पर जमे, जहाँ क्षार उसे बाद में fix करता है
    2. वह बाथ का pH बढ़ाता है ताकि सेलुलोज़ आयनित होकर रंजक से अभिक्रिया करे
    3. वह रंजक व सेलुलोज़ के बीच सहसंयोजी बंध हेतु उत्प्रेरक का कार्य करता है
    4. वह गीले सेलुलोज़ का ऋणावेश छिपाता है, जो ऋणायनिक रंजक को प्रतिकर्षित करता, और इस प्रकार exhaustion बढ़ाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — वह गीले सेलुलोज़ का ऋणावेश छिपाता है, जो ऋणायनिक रंजक को प्रतिकर्षित करता, और इस प्रकार exhaustion बढ़ाता है

    सेलुलोज़ जल में ऋणात्मक सतही आवेश पाता है और रंजक ऋणायनिक है, इसलिए नमक प्रतिकर्षण छिपाकर fixation से पहले रंजक को तंतु में धकेलता है। pH बढ़ाना क्षार का कार्य है, जो बाद में डाला जाता है। नमक रंजक को न अविलेय बनाता है न उसका उत्प्रेरण करता है।
  3. रुई पर vat रंजक लगाने के चरणों का सही क्रम है

    1. leuco रूप तक ऑक्सीकरण, रंगाई, अविलेय वर्णक तक अपचयन और soaping, प्रबल अम्लीय रखे बाथ में
    2. soaping, अविलेय वर्णक से रंगाई, फिर अम्ल से उदासीनीकरण
    3. क्षार में विलेय leuco रूप तक अपचयन, रंगाई, अविलेय वर्णक तक ऑक्सीकरण और soaping
    4. डाइएज़ोकरण, तंतु में युग्मन और फिर reduction clearing
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — क्षार में विलेय leuco रूप तक अपचयन, रंगाई, अविलेय वर्णक तक ऑक्सीकरण और soaping

    Vat रंजक अविलेय वर्णक हैं, इसलिए उन्हें (सोडियम डाइथायोनाइट व NaOH से) उस विलेय leuco ऋणायन तक अपचयित करते हैं जिसकी सेलुलोज़ के प्रति affinity है, जो तंतु के भीतर पुनः ऑक्सीकृत होकर soaped होता है। उलटा क्रम रंग नहीं सकता, और डाइएज़ोकरण-युग्मन azoic राह है।
  4. polyester 130 °C पर दाब में disperse रंजकों से क्यों रंग जाता है पर 60 °C पर बहुत धीरे रंगता है?

    1. काँच-संक्रमण के ऊपर शृंखला-खंड गतिशील हो जाते हैं, जो सघन तंतु में रंजक-विसरण हेतु मुक्त आयतन खोलता है
    2. 130 °C पर एस्टर समूह जल-अपघटित होकर आयनिक बन जाते हैं, जिससे तंतु रंजक से सहसंयोजी रूप में बंध सकता है और रंजक तंतु-संरचना में स्थायी रूप से fix हो जाता है
    3. 130 °C पर disperse रंजक पूर्णतः आयनित होकर आवेश द्वारा तंतु की ओर आकर्षित होता है
    4. 60 °C पर disperse रंजक बाथ के ऐसिटिक अम्ल से रासायनिक रूप से नष्ट हो जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — काँच-संक्रमण के ऊपर शृंखला-खंड गतिशील हो जाते हैं, जो सघन तंतु में रंजक-विसरण हेतु मुक्त आयतन खोलता है

    Polyester सघन व काचीय है; काँच-संक्रमण से बहुत ऊपर ताप शृंखला-गति मुक्त करता है और रंजक की विलेयता व विसरण भी बढ़ाता है, इसलिए अवशोषण तेज़ होता है। Disperse रंजक अनायनिक हैं और तंतु में आयनिक स्थल नहीं, इसलिए आवेश-आकर्षण व बंध वाले स्पष्टीकरण ग़लत हैं; रंजक मृदु अम्लीय बाथ में स्थायी है।
  5. acrylic को cationic रंजक से रंगते समय ताप को तंतु के आर्द्र काँच-संक्रमण के ठीक ऊपर के परास में बहुत धीरे (लगभग 1 °C/min) बढ़ाते हैं। कारण यह है कि

    1. उस परास में तंतु तेज़ी से पिघलता है और धीमी गर्मी से उसे अक्षुण्ण रखना पड़ता है, ताकि रंजक-बाथ में तंतु आपस में न चिपकें
    2. वहाँ रंजक-अवशोषण तीव्रता से बढ़ता है और तेज़ वृद्धि तेज़, असमान रंगाई देती है जिसे सुधारना कठिन है
    3. अम्लीय बाथ में उस ताप के ऊपर cationic रंजक तेज़ी से अपघटित हो जाता है
    4. तेज़ गर्म करने पर तंतु के ऋणायनिक सिरे समाप्त हो जाते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — वहाँ रंजक-अवशोषण तीव्रता से बढ़ता है और तेज़ वृद्धि तेज़, असमान रंगाई देती है जिसे सुधारना कठिन है

    Cationic रंजक ऋणायनिक स्थलों से प्रबलता से बँधता है और शृंखलाएँ गतिशील होते ही तेज़ी से सोखा जाता है व बाद में प्रवास नहीं करता, इसलिए असमानता तब तक स्थायी है जब तक क्रांतिक परास में गर्मी धीमी न हो। रंगाई-ताप पर तंतु पिघलता नहीं, और सिरे समाप्त नहीं होते।
  6. polyester/cotton को polyester हेतु disperse रंजक व रुई हेतु reactive रंजक से रंगते समय polyester सामान्यतः पहले रंगा जाता है क्योंकि

    1. अम्लीय 130 °C disperse चरण रुई पर पहले से लगे reactive रंजक को क्षति पहुँचाता, और सफ़ाई फिर disperse दाग़ हटाती है
    2. reactive रंजक सेलुलोज़ से तभी अभिक्रिया कर सकता है जब polyester पूर्णतः घुल चुका हो
    3. disperse रंजक प्रबल क्षार में लगना चाहिए, जो प्रक्रम के आरंभ में ही उपलब्ध होता है
    4. रुई रंगे जाने के बाद polyester की disperse रंजक के प्रति affinity समाप्त हो जाती है, क्योंकि रुई उस पर नमक की परत चढ़ाकर रंजक का प्रवेश रोक देती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — अम्लीय 130 °C disperse चरण रुई पर पहले से लगे reactive रंजक को क्षति पहुँचाता, और सफ़ाई फिर disperse दाग़ हटाती है

    उच्च-ताप अम्लीय disperse चरण पहले बंधे reactive रंजक को क्षति पहुँचाता, और उसके बाद की reduction clearing रुई पर लगे disperse दाग़ भी साफ़ करती है। शेष कथन असत्य हैं: disperse रंगाई अम्लीय है, प्रबल क्षारीय नहीं, और polyester कभी घुलाया नहीं जाता।
  7. एक रंजक का अवशोषण-समतापी बाथ-सांद्रता के साथ अध्ययन के पूरे परास में रैखिक बढ़ता है, कोई संतृप्ति नहीं, जबकि उसी तंतु पर दूसरा रंजक एक निश्चित सीमा पर चपटा हो जाता है। कौन-सी व्याख्या संगत है?

    1. पहला Nernst विभाजन है (विशिष्ट स्थल नहीं); दूसरा Langmuir समतापी है (सीमित स्थल)
    2. पहला सीमित स्थलों वाला Langmuir समतापी और दूसरा बिना स्थलों का Nernst विभाजन है
    3. दोनों Nernst होने चाहिए, क्योंकि प्रत्येक रंजक बिना सीमा बाथ व तंतु के बीच विभाजित होता है
    4. दोनों समतापी आयनिक बंधन दर्शाते हैं, क्योंकि केवल आयनिक बंध ही रैखिक या चपटा होता वक्र दे सकता है
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    उत्तर: A — पहला Nernst विभाजन है (विशिष्ट स्थल नहीं); दूसरा Langmuir समतापी है (सीमित स्थल)

    मूल-बिंदु से जाती सरल रेखा [D]f = K[D]s है, यानी बिना विशिष्ट स्थलों के तंतु में विभाजन (जैसे polyester में disperse रंजक); स्थल-संख्या पर पठार Langmuir रूप है (जैसे nylon पर acid रंजक)। वक्र का आकार विभाजन या स्थल-सीमित अवशोषण बताता है, बंध का प्रकार नहीं।
  8. एक ही light-fastness परीक्षण में एक रंगाई का blue wool रेटिंग 4 और भिन्न रंजक की दूसरी रंगाई का रेटिंग 6 आँका गया। कौन-सा कथन सही है?

    1. रेटिंग 6 वाली रंगाई अधिक प्रकाश-स्थायी है, लगभग चार गुना उद्भासन चाहिए, क्योंकि प्रत्येक पायदान उसे लगभग दुगुना करती है
    2. रेटिंग 4 वाली रंगाई अधिक प्रकाश-स्थायी है, क्योंकि कम blue wool क्रमांक अधिक प्रतिरोध दर्शाता है
    3. दोनों रंगाइयाँ बराबर हैं, क्योंकि blue wool रेटिंग केवल रंजक का रंग दर्ज करती हैं, फीकेपन को नहीं
    4. रेटिंग 6 वाली रंगाई अधिक प्रकाश-स्थायी है, बराबर फीकी पड़ने हेतु उसे ठीक दुगुना उद्भासन चाहिए, क्योंकि स्केल रैखिक है
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    उत्तर: A — रेटिंग 6 वाली रंगाई अधिक प्रकाश-स्थायी है, लगभग चार गुना उद्भासन चाहिए, क्योंकि प्रत्येक पायदान उसे लगभग दुगुना करती है

    Blue wool क्रमांक 1 (न्यूनतम) से 8 (अधिकतम) तक हैं और प्रत्येक पायदान लगभग दुगुना टिकती है, अतः दो पायदान लगभग चार गुना हैं। कम क्रमांक बुरी fastness है, और स्केल ज्यामितीय है, रैखिक नहीं।
  9. रंग व रासायनिक संरचना के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. जो रंजक नीला प्रकाश सोखता है वह पीला दिखता है क्योंकि आँख पारगत या परावर्तित पूरक प्रकाश देखती है
    2. संयुग्मित तंत्र को लंबा करने से अवशोषण-उच्चिष्ठ सामान्यतः दीर्घ तरंगदैर्ध्य की ओर खिसकता है (bathochromic विस्थापन)
    3. सल्फ़ोनिक अम्ल समूह वह chromophore है जो ऐज़ो रंजक का रंग उत्पन्न करता है
    4. –OH व –NH₂ जैसे auxochrome रंजक का अवशोषण नहीं बदल सकते क्योंकि वे संतृप्त समूह हैं
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    उत्तर: A — जो रंजक नीला प्रकाश सोखता है वह पीला दिखता है क्योंकि आँख पारगत या परावर्तित पूरक प्रकाश देखती है; B — संयुग्मित तंत्र को लंबा करने से अवशोषण-उच्चिष्ठ सामान्यतः दीर्घ तरंगदैर्ध्य की ओर खिसकता है (bathochromic विस्थापन)

    पूरक-रंग बोध व लंबे संयुग्मन का bathochromic प्रभाव मानक हैं। ऐज़ो समूह –N=N– chromophore है, जबकि –SO₃H मुख्यतः विलेयता देता है; –OH व –NH₂ जैसे auxochrome के एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म संयुग्मित तंत्र से अन्योन्यक्रिया कर अवशोषण को खिसकाते व तीव्र करते हैं।
  10. Beer-Lambert नियम व Kubelka-Munk सिद्धांत के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. Beer-Lambert नियम में निश्चित पथ-लंबाई व तरंगदैर्ध्य पर तनु विलयन में अवशोषकता रंजक की सांद्रता के अनुपाती है
    2. Kubelka-Munk समीकरण K/S = (1 − R)²/(2R) में कम परावर्तन उच्चतर K/S के संगत है
    3. Kubelka-Munk सिद्धांत क्यूवेट में स्थित स्वच्छ रंजक-विलयन पर लगाया जाता है
    4. सांद्र बाथ में रंजक-संगुणन का Beer-Lambert रैखिकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
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    उत्तर: A — Beer-Lambert नियम में निश्चित पथ-लंबाई व तरंगदैर्ध्य पर तनु विलयन में अवशोषकता रंजक की सांद्रता के अनुपाती है; B — Kubelka-Munk समीकरण K/S = (1 − R)²/(2R) में कम परावर्तन उच्चतर K/S के संगत है

    तनु विलयन में A का c से रैखिक संबंध मान्य है, और R घटने पर K/S बढ़ता है। Kubelka-Munk अपारदर्शी प्रकीर्णक वस्त्रों पर लगता है, स्वच्छ विलयनों पर नहीं, और संगुणन Beer-Lambert रैखिकता से विचलन का क्लासिक कारण है।
  11. fastness के परीक्षण के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. रंग-परिवर्तन व दाग़ grey scale पर श्रेणीबद्ध होते हैं जिनमें 5 सर्वश्रेष्ठ रेटिंग है
    2. wash परीक्षण में नमूने से सिली multifibre पट्टी दिखाती है कि निकले रंजक से कौन-से तंतु दाग़ी हुए
    3. light fastness grey scale पर श्रेणीबद्ध होती है, जहाँ 1 सर्वश्रेष्ठ है
    4. आर्द्र rubbing सूखे सफ़ेद कपड़े से की जाती है ताकि नमूने तक नमी न पहुँचे
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    उत्तर: A — रंग-परिवर्तन व दाग़ grey scale पर श्रेणीबद्ध होते हैं जिनमें 5 सर्वश्रेष्ठ रेटिंग है; B — wash परीक्षण में नमूने से सिली multifibre पट्टी दिखाती है कि निकले रंजक से कौन-से तंतु दाग़ी हुए

    Grey scale 1 से 5 तक हैं, 5 सर्वश्रेष्ठ, और multifibre पट्टी कई तंतु-प्रकारों पर दाग़ दर्ज करती है। Light fastness 1 से 8 blue wool स्केल प्रयोग करती है जिसमें 8 सर्वश्रेष्ठ है, और आर्द्र rubbing गीले कपड़े से होती है, इसीलिए यह नाम है।
  12. 40 kg सूती निटेड कपड़े को jet में 1:12 लिकर-अनुपात (1 kg कपड़ा, 12 लीटर लिकर) पर reactive रंजक से रंगा जाता है। रेसिपी में बाथ में 50 g/L सामान्य नमक है। आवश्यक नमक का द्रव्यमान ____ kg है।

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    उत्तर: 24

    बाथ-आयतन = 40 × 12 = 480 L। नमक = 480 L × 50 g/L = 24,000 g = 24 kg। नमक बाथ-आयतन (g/L) पर निर्भर है, जबकि रंजक व क्षार % owf में दिए जाते हैं।
  13. एक रंगाई-परीक्षण में प्रारंभिक बाथ के 5.0 mL को पानी से 100 mL तक बनाने पर λmax पर अवशोषकता 0.80 आई। रंगाई के अंत में अवशिष्ट बाथ के 10.0 mL को 100 mL तक बनाने पर समान परिस्थितियों में अवशोषकता 0.30 आई। बाथ का आयतन नहीं बदला और Beer-Lambert नियम मान्य है। प्रतिशत exhaustion, निकटतम पूर्ण संख्या तक, ____ है।

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    उत्तर: 81

    बाथ की सांद्रता A × तनुकरण-गुणक के अनुपाती है। प्रारंभिक: 0.80 × (100/5) = 16.0। अंतिम: 0.30 × (100/10) = 3.0। E = (16 − 3)/16 × 100 = 81.25%, जो 81 है। कच्ची अवशोषकताओं (0.80 व 0.30) की तुलना 62.5% देती और भिन्न तनुकरणों की उपेक्षा करती।
  14. एक रंजक-विलयन λmax पर 1.00 cm पथ-लंबाई के सेल में 0.46 अवशोषकता देता है। मोलर अवशोषकता 2.3 × 10⁴ L mol⁻¹ cm⁻¹ है और रंजक का मोलर द्रव्यमान 450 g/mol है। Beer-Lambert नियम मानकर रंजक की सांद्रता ____ mg/L है।

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    उत्तर: 9

    c = A/(ε l) = 0.46 / (2.3 × 10⁴ × 1.00) = 2.0 × 10⁻⁵ mol/L। द्रव्यमान-सांद्रता = 2.0 × 10⁻⁵ × 450 = 9.0 × 10⁻³ g/L = 9.0 mg/L।
  15. Disperse रंजक polyester व बाथ के बीच [D]f = K [D]s के अनुसार विभाजित होता है, जहाँ [D]f रंजक के g प्रति kg तंतु, [D]s रंजक के g प्रति लीटर बाथ और K = 40 L/kg है। एक रंगाई में 2 kg तंतु, 20 L बाथ व कुल 5 g रंजक है, और साम्य प्राप्त होता है। तंतु द्वारा सोखे गए रंजक का प्रतिशत ____ है।

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    उत्तर: 80

    माना तंतु में x ग्राम है। [D]f = x/2 g/kg और [D]s = (5 − x)/20 g/L। तब x/2 = 40 (5 − x)/20 = 2 (5 − x), अतः x = 4 (5 − x), 5x = 20 और x = 4 g। Exhaustion = 4/5 × 100 = 80%। जाँच: [D]f = 2, [D]s = 0.05, K = 2/0.05 = 40।
  16. रुई पर 1% owf की रंगाई का λmax पर परावर्तन 0.20 (अंश) है। मानें कि सब्सट्रेट का अपना K/S नगण्य है और K/S रंजक-सांद्रता के सीधे अनुपाती है। उसी रंजक की 3% owf रंगाई का परावर्तन, प्रतिशत में, ____ है (दो दशमलव स्थानों तक)।

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    उत्तर: 8.69

    1% पर K/S = (1 − 0.20)²/(2 × 0.20) = 0.64/0.40 = 1.60। 3% पर K/S = 4.80। हल करें (1 − R)² = 9.6 R, यानी R² − 11.6 R + 1 = 0, अतः R = [11.6 − √(11.6² − 4)]/2 = 0.08686, जो 8.69% है। सांद्रता तिगुनी करने पर R तीन से विभाजित नहीं होता, क्योंकि K/S वही R नहीं है।
  17. polyester में disperse रंजक का विसरण-गुणांक D = D₀ exp(−Ea/RT) का पालन करता है, जहाँ Ea = 90 kJ/mol और R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ (T = °C + 273.15 लें)। अनुपात D(130 °C)/D(100 °C) ____ है (दशमलव के एक स्थान तक)।

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    उत्तर: 8.7

    ln(D₂/D₁) = (Ea/R)(1/T₁ − 1/T₂), T₁ = 373.15 K और T₂ = 403.15 K। 1/T₁ − 1/T₂ = 0.0026799 − 0.0024805 = 1.994 × 10⁻⁴ K⁻¹। Ea/R = 90,000/8.314 = 10,825 K। अतः ln अनुपात = 2.159 और अनुपात = 8.66, जो 8.7 है। केल्विन की जगह °C लेना सामान्य भूल है।