महासागर का स्तरीकरण: प्रोफ़ाइल, स्थायित्व, द्वि-विसरण, अवस्था समीकरण व संरक्षण समीकरण

यह अध्याय पेपर की महासागर भौतिकी का आरंभ करता है। यह अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर के नौ वैकल्पिक खंडों में से एक, XE7 वायुमंडलीय एवं महासागरीय विज्ञान के खंड XE7.2 का उत्तर देता है, जिनमें से परीक्षा में अभ्यर्थी कोई भी दो चुनता है। उस शीर्षक का पहला भाग है: “तापमान व लवणता के ऊर्ध्वाधर प्रोफ़ाइल; स्थायित्व व द्वि-विसरण; अवस्था समीकरण, द्रव्यमान, संवेग, ऊष्मा व लवण के संरक्षण समीकरण”। अध्याय महासागर की परतदार संरचना (मिश्रित परत, thermocline, halocline, pycnocline), समुद्री जल का अवस्था समीकरण व उसका रैखिकीकृत रूप, स्थैतिक स्थायित्व व उत्प्लावन आवृत्ति N, लवण-अंगुलियाँ (salt fingers) व विसरणी संवहन, तथा द्रव्यमान, संवेग, ऊष्मा व लवण के संरक्षण समीकरण पढ़ाता है। संख्यात्मक प्रश्न रैखिकीकृत अवस्था समीकरण से घनत्व, प्रोफ़ाइल से N² व उसका दोलन-काल, द्वि-विसरणी व्यवस्था तय करने वाला घनत्व-अनुपात, तथा ऊष्मा-बजट से मिश्रित परत का तापन हैं। प्रत्येक नियतांक प्रश्न में दिया गया है।

1. ऊर्ध्वाधर प्रोफ़ाइल: मिश्रित परत, thermocline, halocline व pycnocline

तटों व ध्रुवों से दूर महासागर परतदार होता है। सबसे ऊपर मिश्रित परत (mixed layer) है, जहाँ पवन-विक्षोभ, तरंगें व शीतलन-जनित उथल-पुथल तापमान, लवणता व घनत्व को गहराई के साथ लगभग एकसमान रखती हैं। यह उष्णकटिबंध में व गर्मियों में दसियों मीटर तथा मध्य-अक्षांशों की सर्दियों में सैकड़ों मीटर मोटी होती है। इसके नीचे thermocline वह परत है जिसमें गहराई के साथ तापमान तेज़ी से घटता है, उष्णकटिबंध व उपोष्णकटिबंध में प्रायः कुछ सौ मीटर में 10 से 20 K, उस ठंडे गहरे जल तक (लगभग 1 से 4 °C) जो महासागर के अधिकांश आयतन को भरता है। halocline लवणता के तीव्र परिवर्तन की तथा pycnocline घनत्व के तीव्र परिवर्तन की परत है।

कौन-सा कारक स्तरीकरण तय करता है, यह क्षेत्र पर निर्भर है। उष्णकटिबंध व उपोष्णकटिबंध में घनत्व तापमान के अनुसार चलता है, अतः thermocline ही pycnocline है। उपध्रुवीय व ध्रुवीय समुद्रों में, और जहाँ नदी-प्रवाह या भारी वर्षा खारे जल पर मीठा जल बिछा दे, वहाँ लवणता हावी होती है: halocline ही pycnocline है और तापमान गहराई के साथ बढ़ भी सकता है। सतही लवणता वाष्पन घटा वर्षण (E − P) व नदी-प्रवाह का अनुसरण करती है: जहाँ E, P से अधिक है वहाँ, उपोष्णकटिबंधीय गायरों व अरब सागर में, अधिकतम लगभग 36 से 37; वर्षा-युक्त विषुवतीय पट्टी, उच्च अक्षांशों व बंगाल की खाड़ी में न्यूनतम, जहाँ नदी का जल सतह को मीठा करता है। thermocline के शीर्ष के ऊपर मीठी टोपी हो सकती है, जिससे लवणता-स्तरीकृत अवरोध परत (barrier layer) बनती है जो समतापी है पर समलवणी नहीं।

क्षेत्र के अनुसार विशिष्ट स्तरीकरण
क्षेत्रमिश्रित परतpycnocline किससे तय होती हैटिप्पणी
उष्णकटिबंधउथली, गर्मतापमान (प्रबल thermocline)ठंडे गहरे जल पर गर्म परत
मध्य-अक्षांशगर्मी में पतली, सर्दी में गहरीतापमान; स्थायी के ऊपर मौसमी thermoclineशीतकालीन शीतलन मौसमी को मिटा देता है
ध्रुवीय व उपध्रुवीयठंडी, मीठीलवणता (halocline)दुर्बल तापीय स्तरीकरण
बंगाल की खाड़ीमीठी टोपीसतह के पास लवणताअवरोध परत संभव
ℹ️ स्थान-स्थित बनाम विभव तापमान
गहराई तक डूबता जल संपीडित होकर रुद्धोष्म संपीडन से थोड़ा गर्म हो जाता है, अतः गहरे महासागर में मापा (in situ) तापमान विभव तापमान (potential temperature) से अधिक होता है; विभव तापमान वह तापमान है जो कण को ऊष्मा या लवण के आदान-प्रदान के बिना सतह पर लाने पर मिलता। 4000 m पर यह अंतर कुछ दशमांश अंश है। जल-राशियों की तुलना विभव तापमान व विभव घनत्व पर करें, अलग-अलग गहराइयों के in situ मानों पर कभी नहीं।

2. घनत्व व अवस्था समीकरण

समुद्री जल का घनत्व तीन चरों का फलन है, ρ = ρ(S, T, p), जो प्रयोगशाला-आँकड़ों पर बैठाए गए अनुभवजन्य अवस्था समीकरण से मिलता है (सिद्धांत से व्युत्पन्न नहीं)। सतही मान लगभग 1020 से 1029 kg m⁻³ के बीच रहते हैं। घनत्व लवणता के साथ बढ़ता है, तापमान के साथ घटता है, और दाब के साथ बढ़ता है, क्योंकि समुद्री जल थोड़ा संपीड्य है (लगभग 0.4 % प्रति किलोमीटर गहराई)। σ_t = ρ(S, T, 0) − 1000 kg m⁻³ उद्धृत करना सुविधाजनक है। संपीडन के कारण गहराई के साथ घनत्व बदलता है, अतः विभिन्न गहराइयों के कणों की तुलना विभव घनत्व (potential density) से की जाती है, जो उनका वह घनत्व है जो एक साझा संदर्भ दाब पर होता।

छोटे परासों में अवस्था समीकरण को संदर्भ-अवस्था (ρ₀, T₀, S₀) के निकट रैखिकीकृत किया जाता है: ρ = ρ₀ [ 1 − α (T − T₀) + β (S − S₀) ], जहाँ α = −(1/ρ) ∂ρ/∂T ≈ 2 × 10⁻⁴ K⁻¹ (ऊष्मीय प्रसार) तथा β = (1/ρ) ∂ρ/∂S ≈ 7.6 × 10⁻⁴ प्रति इकाई लवणता (लवणता-संकुचन) है।

हल किया उदाहरण। ρ₀ = 1027.0 kg m⁻³ (T₀ = 10 °C, S₀ = 35), α = 2.0 × 10⁻⁴ K⁻¹, β = 7.6 × 10⁻⁴ लें। T = 20 °C व S = 34.0 के लिए: ρ = 1027.0 [1 − 2.0 × 10⁻⁴ (10) + 7.6 × 10⁻⁴ (−1)] = 1027.0 × 0.99724 = 1024.2 kg m⁻³। तुल्यता α/β ≈ 0.26 ध्यान दें: 1 K तापन घनत्व उतना घटाता है जितना लवणता में लगभग 0.26 की गिरावट।

⚠️ गुणांक नियतांक नहीं हैं
α, 0 °C के निकट लगभग 0.5 × 10⁻⁴ K⁻¹ है पर 25 °C पर लगभग 2.5 × 10⁻⁴ K⁻¹, और वह दाब के साथ भी बढ़ता है, जबकि β बहुत कम बदलता है। अतः गर्म जल में घनत्व तापमान से तथा ठंडे जल में लवणता से नियंत्रित होता है। इस अरैखिकता से cabbeling होती है: समान घनत्व पर भिन्न (T, S) वाले दो कणों के मिश्रण से ऐसा मिश्रण बनता है जो दोनों से सघन है। मीठे जल का घनत्व-अधिकतम लगभग 4 °C पर होता है, पर लगभग 24.7 से अधिक S वाले समुद्री जल का हिमांक से ऊपर कोई अधिकतम नहीं होता (S = 35 पर हिमांक लगभग −1.9 °C), अतः शीतलन उसे सघन बनाता रहता है और संवहन हिमांक तक चलता है।

3. स्थैतिक स्थायित्व व उत्प्लावन आवृत्ति

किसी कण को बिना मिश्रण के ऊपर δz विस्थापित करें ताकि वह अपना (विभव) घनत्व बनाए रखे। वहाँ परिवेश का घनत्व ρ(z) + (dρ/dz) δz है, अतः कुल ऊर्ध्व त्वरण (g/ρ₀)(dρ/dz) δz है। यह सरल आवर्त गति d²(δz)/dt² = −N² δz है, जिसमें उत्प्लावन (Brunt–Väisälä) आवृत्ति N² = −(g/ρ₀) ∂ρ/∂z है (z ऊपर की ओर, ρ विभव घनत्व)। रैखिक अवस्था समीकरण के साथ यह N² = g (α ∂T/∂z − β ∂S/∂z) बन जाता है। N² > 0 स्थायी, N² = 0 उदासीन तथा N² < 0 स्थैतिक रूप से अस्थायी है: स्तंभ उलट-पलट कर मिश्रित हो जाता है। दोलन-काल 2π/N है, प्रबल thermocline में लगभग 10 मिनट (N ≈ 10⁻² s⁻¹) और गहरे महासागर में एक-दो घंटे (N ≈ 10⁻³ s⁻¹)। आंतरिक गुरुत्व तरंगें f से N के बीच की आवृत्तियों पर मौजूद रह सकती हैं, अतः प्रबल pycnocline उन्हें सहारा देती व निर्देशित करती है।

हल किया उदाहरण। 50 m से 150 m के बीच तापमान 24 °C से 12 °C तथा लवणता 35.2 से 35.0 तक घटती है (α = 2.0 × 10⁻⁴ K⁻¹, β = 7.6 × 10⁻⁴, g = 9.81 m s⁻²)। z ऊपर की ओर लेने पर ∂T/∂z = +12/100 = 0.12 K m⁻¹ तथा ∂S/∂z = +0.2/100 = 0.002 m⁻¹। N² = 9.81 (2.0 × 10⁻⁴ × 0.12 − 7.6 × 10⁻⁴ × 0.002) = 9.81 × 2.248 × 10⁻⁵ = 2.2 × 10⁻⁴ s⁻²। N = 1.49 × 10⁻² s⁻¹ व काल 2π/N ≈ 423 s ≈ 7 मिनट। ऊष्मीय पद धनात्मक है (नीचे ठंडा) और लवणता-पद ऋणात्मक (ऊपर अधिक खारा), अतः यहाँ लवणता स्थायित्व को थोड़ा घटाती है।

⚠️ चिह्न व अक्ष की परिपाटी
N² = −(g/ρ₀) ∂ρ/∂z तब सही है जब z ऊपर की ओर हो। यदि गहराई नीचे की ओर नापी जाए तो चिह्न पलट जाता है: N² = +(g/ρ₀) ∂ρ/∂(गहराई)। गहराई के साथ तापमान का घटना स्थायित्वकारी है, पर गहराई के साथ लवणता का घटना अस्थायित्वकारी। “तापमान गहराई के साथ घटता है, अतः स्तंभ स्थायी है” लवणता-पद जाँचे बिना सुरक्षित कथन नहीं है।

4. द्वि-विसरण: salt fingers व विसरणी संवहन

ऊष्मा लवण से लगभग सौ गुना तेज़ विसरित होती है (κ_T ≈ 1.4 × 10⁻⁷ m² s⁻¹, κ_S ≈ 1.1 × 10⁻⁹ m² s⁻¹)। जब तापमान व लवणता की प्रवणताएँ घनत्व को विपरीत दिशाओं में धकेलें, तो कुल मिलाकर स्थैतिक रूप से स्थायी (N² > 0) स्तंभ भी द्वि-विसरण (double diffusion) के प्रति अस्थायी हो सकता है, क्योंकि तेज़ विसरित होने वाला गुण परिवेश से संतुलित हो जाता है जबकि धीमा नहीं होता। घनत्व-अनुपात R_ρ को स्थायित्वकारी घनत्व-योगदान को अस्थायित्वकारी से भाग देकर परिभाषित करें, जैसे तापमान स्थायित्वकारी हो तो αΔT/(βΔS)।

द्वि-विसरण की दो व्यवस्थाएँ
विशेषताSalt fingersविसरणी संवहन
व्यवस्थागर्म, खारा जल ठंडे, कम खारे जल के ऊपर; T व S दोनों गहराई के साथ घटते हैंठंडा, मीठा जल गर्म, अधिक खारे जल के ऊपर; T व S दोनों गहराई के साथ बढ़ते हैं
स्थायित्वकारी प्रवणतातापमानलवणता
क्रियाविधिनीचे विस्थापित खारा कण ऊष्मा शीघ्र खोता है पर लवण रखता है, अतः परिवेश से सघन रहकर डूबता जाता है: संकरी, सेंटीमीटर-पैमाने की अंगुलियाँऊष्मा अंतरापृष्ठ के पार लवण से तेज़ ऊपर रिसती है, अतः निचली परत गर्म होकर संवहित होती है: तीक्ष्ण अंतरापृष्ठों से अलग अच्छी तरह मिश्रित परतें (सीढ़ीनुमा)
शर्त1 < R_ρ < κ_T/κ_S ≈ 100कुल मिलाकर स्थायी (R_ρ > 1), लवणता स्थायित्वकारी
कहाँ दिखता हैउपोष्णकटिबंधीय thermocline, गर्म लवणीय जल के बहिर्वाह के नीचेआर्कटिक की ठंडी मीठी सतही परत के नीचे, जहाँ गर्म लवणीय अटलांटिक जल स्थित है

हल किया उदाहरण। एक सोपान में गहराई के साथ तापमान 3.0 K व लवणता 0.5 घटती है (α = 2.0 × 10⁻⁴ K⁻¹, β = 7.6 × 10⁻⁴)। तापमान αΔT = 6.0 × 10⁻⁴ से स्थायित्व देता है और लवणता βΔS = 3.8 × 10⁻⁴ से अस्थायित्व। स्तंभ स्थायी (N² > 0) है और R_ρ = 6.0/3.8 = 1.58, जो 1 व 100 के बीच है: वह salt fingers के प्रति प्रवण है।

🧠 याद रखने का एक नियम
दोनों गुण गहराई के साथ घटें: fingers (गर्म खारी परत ऊपर)। दोनों गहराई के साथ बढ़ें: विसरणी (ठंडी मीठी परत ऊपर)। दोनों ही स्थितियों में कुल घनत्व को फिर भी नीचे की ओर बढ़ना चाहिए; द्वि-विसरण अधिक मिश्रण व परतें जोड़ता है, यह सामान्य संवहनी उथल-पुथल नहीं है।

5. द्रव्यमान, संवेग, ऊष्मा व लवण का संरक्षण

महासागर संरक्षण नियमों व अवस्था समीकरण से संचालित होता है। D/Dt = ∂/∂t + u ∂/∂x + v ∂/∂y + w ∂/∂z मानें। समुद्री जल का घनत्व केवल कुछ प्रतिशत बदलता है, अतः Boussinesq सन्निकटन घनत्व-विचलन को केवल वहाँ रखता है जहाँ वह g से गुणित होता है।

  • द्रव्यमान: ∂ρ/∂t + ∇·(ρu) = 0, जो Boussinesq के अंतर्गत ∂u/∂x + ∂v/∂y + ∂w/∂z = 0 बनता है। क्षैतिज अपसरण को ऊर्ध्वाधर गति से संतुलित होना पड़ता है।
  • घूर्णी पृथ्वी पर संवेग (f = 2Ω sin φ, Ω = 7.292 × 10⁻⁵ rad s⁻¹): Du/Dt − f v = −(1/ρ₀) ∂p/∂x + F_x तथा Dv/Dt + f u = −(1/ρ₀) ∂p/∂y + F_y। ऊर्ध्वाधर में, बड़े पैमाने के प्रवाह हेतु, द्रवस्थैतिक संतुलन ∂p/∂z = −ρ g लागू होता है, अतः p = p_atm + g ∫ρ dz और डेसिबार में दाब मीटर में गहराई के लगभग बराबर होता है।
  • ऊष्मा: DT/Dt = κ_T ∇²T + (1/ρ₀ c_p) ∂Q/∂z, जहाँ Q जल में अवशोषित विकिरणी फ्लक्स है और c_p ≈ 4.0 × 10³ J kg⁻¹ K⁻¹। सतही ऊष्मा-फ्लक्स सीमा-प्रतिबंध के रूप में आता है। लवण: DS/Dt = κ_S ∇²S। लवण उत्पन्न नहीं होता, अतः आंतरिक लवणता केवल मिश्रण से बदलती है, और सतह पर वाष्पन, वर्षण, नदी-प्रवाह व बर्फ-निर्माण से।

गणना: u, v, w, p, ρ, T, S सात अज्ञात हैं, और तीन संवेग समीकरण, सांतत्य, ऊष्मा, लवण व अवस्था समीकरण सात समीकरण हैं। व्यवहार में विक्षोभ प्रभावी (eddy) विसरणशीलताओं व श्यानताओं को आणविक से बहुत बड़ा बना देता है, thermocline में ऊर्ध्वाधर लगभग 10⁻⁵ m² s⁻¹, और समान-घनत्व सतहों के अनुदिश मिश्रण उनके आर-पार से कहीं सरल है। हल किया उदाहरण (ऊष्मा-बजट)। 40 m मोटी मिश्रित परत में 10 दिन तक 200 W m⁻² का शुद्ध ऊष्मा-फ्लक्स, ρ = 1025 kg m⁻³ व c_p = 3990 J kg⁻¹ K⁻¹ के साथ: ΔT = Q t/(ρ c_p h) = 200 × 8.64 × 10⁵/(1025 × 3990 × 40) = 1.06 K।

🎯 द्रवस्थैतिक संतुलन क्यों चलता है
महासागरीय प्रवाह हज़ारों किलोमीटर चौड़े पर केवल कुछ किलोमीटर गहरे हैं, अतः ऊर्ध्वाधर त्वरण g की तुलना में नगण्य हैं और ऊर्ध्वाधर संवेग समीकरण दाब-प्रवणता व भार के संतुलन में सिमट जाता है। इसी से घनत्व का मानचित्र दाब का मानचित्र निर्धारित कर पाता है, जो अगले अध्याय की भूविक्षेपी गणनाओं का आधार है।

मुख्य बिंदु

  • महासागर में मिश्रित परत, thermocline, halocline व pycnocline होती हैं; उष्णकटिबंध में तापमान घनत्व तय करता है तथा ध्रुवीय व नदी-पोषित क्षेत्रों में लवणता। जल-राशियों की तुलना विभव तापमान व विभव घनत्व पर करें।
  • रैखिकीकृत अवस्था समीकरण: ρ = ρ₀[1 − α(T − T₀) + β(S − S₀)], α ≈ 2 × 10⁻⁴ K⁻¹ व β ≈ 7.6 × 10⁻⁴; वास्तविक α तापमान व दाब के साथ बढ़ता है, जिससे cabbeling होती है।
  • N² = −(g/ρ₀) ∂ρ/∂z = g(α ∂T/∂z − β ∂S/∂z), z ऊपर की ओर; N² > 0 स्थायी, N² < 0 उथल-पुथल, और उत्प्लावन-काल 2π/N है।
  • द्वि-विसरण के लिए स्थैतिक रूप से स्थायी स्तंभ चाहिए: दोनों के गहराई के साथ घटने पर salt fingers (1 < R_ρ < लगभग 100), दोनों के बढ़ने पर विसरणी संवहन।
  • संचालक समुच्चय है: सांतत्य (Boussinesq में ∇·u = 0), कोरिओलिस बल व द्रवस्थैतिक संतुलन सहित संवेग, ऊष्मा, लवण तथा अवस्था समीकरण: u, v, w, p, ρ, T, S हेतु सात समीकरण।
  • सतही ऊष्मा-फ्लक्स मिश्रित परत को ΔT = Q t/(ρ c_p h) से गर्म करता है; लवणता केवल मिश्रण व सतही मीठे-जल आदान-प्रदान से बदलती है।

अभ्यास प्रश्न (16)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. किसी उपध्रुवीय समुद्र में ठंडे, मीठे सतही जल की परत गर्म, अधिक खारे जल के ऊपर स्थित है। वहाँ घनत्व-स्तरीकरण को मुख्यतः कौन-सी विशेषता नियंत्रित करती है?

    1. thermocline, क्योंकि प्रत्येक महासागरीय क्षेत्र में गहराई के साथ समुद्री जल के घनत्व-परिवर्तन में तापमान सदैव हावी रहता है
    2. halocline, क्योंकि गहराई के साथ लवणता की वृद्धि गर्म जल के घनत्व-प्रभाव से अधिक पड़ती है
    3. मिश्रित परत, क्योंकि उसका एकसमान घनत्व व भली-भाँति मिश्रित गुण पूरे स्तंभ को स्थायित्व देते हैं
    4. अधस्तलीय परत, क्योंकि गहरे जल का दाब-संपीडन ध्रुवीय समुद्रों में स्तरीकरण तय करता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — halocline, क्योंकि गहराई के साथ लवणता की वृद्धि गर्म जल के घनत्व-प्रभाव से अधिक पड़ती है

    ठंडा मीठा जल गर्म खारे जल के ऊपर तभी स्थायी रहता है जब गहराई के साथ घनत्व बढ़ाने वाली लवणता नीचे के गर्म जल के अस्थायित्वकारी प्रभाव से अधिक पड़े। अतः लवणता-प्रवणता (halocline) pycnocline तय करती है और तापमान गहराई के साथ बढ़ भी सकता है। लुभावना उत्तर इसलिए ग़लत है कि thermocline वहीं हावी होती है जहाँ घनत्व तापमान के अनुसार चलता है, जैसे उष्णकटिबंध में। मिश्रित परत परिभाषा से लगभग एकसमान है और स्तरीकरण नहीं देती।
  2. कौन-सा युग्म महासागरीय मिश्रित परत को गहरा करता है?

    1. पवन-विक्षोभ तथा सतही शीतलन जो संवहनी उथल-पुथल चलाता है
    2. सतही परत का प्रबल सौर तापन तथा समुद्र पर भारी वर्षा
    3. मंद पवन तथा समुद्री सतह पर नदी-जल की परत का फैलना
    4. सतही तापन तथा लवणता-स्तरीकृत अवरोध परत का बनना
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — पवन-विक्षोभ तथा सतही शीतलन जो संवहनी उथल-पुथल चलाता है

    मिश्रण-ऊर्जा पवन-प्रतिबल व तरंगों से, तथा शीतलन या वाष्पन से आती है जो सतही जल को नीचे के जल से सघन बनाकर संवहन चलाते हैं; दोनों परत के तल को नीचे धकेलते हैं। तापन व वर्षा सतह को हल्का व अधिक स्थायी बनाकर परत को उथला करते हैं, और अवरोध परत स्वयं एक स्थायित्वकारी मीठी टोपी है, अतः अन्य सभी युग्म गहराई बढ़ने के विरुद्ध काम करते हैं।
  3. लवणता 35 वाले समुद्री जल को स्थिर दाब पर 5 °C से उसके हिमांक तक लगातार ठंडा किया जाता है। उसका घनत्व कैसे व्यवहार करता है?

    1. वह मीठे जल की भाँति लगभग 4 °C पर अधिकतम तक बढ़ता है और आगे शीतलन पर फिर घटता है
    2. वह पूरे समय स्थिर रहता है, क्योंकि घुला लवण ऊष्मीय प्रसार को ठीक निरस्त कर देता है
    3. वह हिमांक तक लगातार बढ़ता है, अतः शीतलन संवहन चलाता रहता है
    4. वह लगातार घटता है, क्योंकि शीतलन पर जल उतना नहीं सिकुड़ता जितना घुला लवण फैलता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — वह हिमांक तक लगातार बढ़ता है, अतः शीतलन संवहन चलाता रहता है

    लगभग 24.7 से अधिक लवणता के लिए अधिकतम-घनत्व का तापमान हिमांक से नीचे (S = 35 पर लगभग −1.9 °C) होता है, अतः द्रव-परास में शीतलन से घनत्व एकदिश बढ़ता है और ठंडा सतही जल डूबता रहता है। 4 °C का अधिकतम मीठे जल का है और यही लुभावना उत्तर है। शेष दोनों कथन इस परास में समुद्री जल के धनात्मक ऊष्मीय प्रसार के विपरीत हैं।
  4. गहरे महासागर में स्थायित्व आँकते समय भिन्न गहराइयों के जल-कणों की तुलना in situ घनत्व के बजाय विभव घनत्व से क्यों की जाती है?

    1. विभव घनत्व तुलना से लवणता का प्रभाव हटा देता है ताकि गहराइयों के बीच केवल तापमान की तुलना हो
    2. विभव घनत्व जाँच-यंत्र से सीधे नापा जाता है, जबकि in situ घनत्व के लिए अतिरिक्त लवणता-संवेदक चाहिए
    3. गहराई पर in situ घनत्व सदैव विभव घनत्व से कम होता है, अतः उसे स्थायित्व हेतु प्रयोग नहीं किया जा सकता
    4. यह केवल संपीडन से हुई घनत्व-वृद्धि हटा देता है, जो गहरे जल को भारी दिखाती भले ही वह उदासीन रूप से स्थायी हो
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — यह केवल संपीडन से हुई घनत्व-वृद्धि हटा देता है, जो गहरे जल को भारी दिखाती भले ही वह उदासीन रूप से स्थायी हो

    दाब जल को संपीडित करता है, अतः पूर्णतः उदासीन स्तंभ में भी in situ घनत्व गहराई के साथ बढ़ता है। प्रत्येक कण को साझा दाब पर संदर्भित करने से यह मामूली वृद्धि हट जाती है और केवल वही भाग बचता है जो T व S के वास्तविक स्तरीकरण को दर्शाता है। विभव घनत्व लवणता का प्रभाव रखता है, वह नापा नहीं जाता बल्कि गणना से निकलता है, और गहराई पर in situ घनत्व विभव मान से अधिक होता है, कम नहीं।
  5. रैखिकीकृत अवस्था समीकरण में α ऊष्मीय प्रसार गुणांक है, जो तापमान के साथ बढ़ता है, और β लवणता-संकुचन गुणांक है, जो कम बदलता है। किस जल में घनत्व तापमान की तुलना में लवणता के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील है?

    1. लगभग 28 °C का गर्म उष्णकटिबंधीय सतही जल, जहाँ α सर्वाधिक है
    2. लगभग 0 °C का ठंडा ध्रुवीय जल, जहाँ α छोटा है अतः लवणता घनत्व नियंत्रित करती है
    3. 4000 m का गहरा जल, जहाँ दाब तापमान पर निर्भरता मिटा देता है
    4. 36 से अधिक लवणता का जल, जहाँ β शून्य हो जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — लगभग 0 °C का ठंडा ध्रुवीय जल, जहाँ α छोटा है अतः लवणता घनत्व नियंत्रित करती है

    लवणता का सापेक्ष महत्त्व β ΔS की α ΔT से तुलना द्वारा मापा जाता है। ठंडे जल में α छोटा है (0 °C के निकट लगभग 5 × 10⁻⁵ K⁻¹) और β लगभग स्थिर है, अतः ध्रुवीय जल में लवणता-पद हावी रहता है। गर्म जल में बड़ा α तापमान को नियंत्रक बनाता है। दाब तापमान-निर्भरता नहीं मिटाता (वस्तुतः α दाब के साथ बढ़ता है), और उच्च लवणता पर β शून्य नहीं होता।
  6. किसी परत में गहराई बढ़ने के साथ तापमान 2.0 K और लवणता 0.90 घटती है। α = 2.0 × 10⁻⁴ K⁻¹ तथा β = 7.6 × 10⁻⁴ प्रति इकाई लवणता लीजिए। कौन-सा कथन सही है?

    1. परत स्थैतिक रूप से अस्थायी (N² < 0) है और सामान्य संवहन से उलट-पलट जाएगी
    2. परत स्थायी है और salt fingers के प्रति प्रवण है, क्योंकि दोनों गुण गहराई के साथ घटते हैं
    3. परत स्थायी है और विसरणी संवहन के प्रति प्रवण है
    4. परत उदासीन रूप से स्थायी है, N² = 0
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — परत स्थैतिक रूप से अस्थायी (N² < 0) है और सामान्य संवहन से उलट-पलट जाएगी

    स्थायित्वकारी तापमान-पद αΔT = 4.0 × 10⁻⁴ है और अस्थायित्वकारी लवणता-पद βΔS = 6.84 × 10⁻⁴। अस्थायित्वकारी पद बड़ा होने से घनत्व गहराई के साथ घटता है (R_ρ = 0.58 < 1) और N² < 0, अतः परत उलट-पलट जाती है। Salt fingers के लिए स्तंभ का कुल मिलाकर स्थायी (R_ρ > 1) होना आवश्यक है, यही यहाँ लुभावना पर ग़लत उत्तर है; विसरणी व्यवस्था में दोनों गुणों का गहराई के साथ बढ़ना आवश्यक है।
  7. दो जल-कणों का घनत्व समान है पर तापमान व लवणता भिन्न हैं। मिश्रित होने पर मिश्रण दोनों मूल कणों से सघन बनता है। अवस्था समीकरण का कौन-सा गुण इसे (cabbeling) समझाता है?

    1. लवणता-संकुचन गुणांक β दाब के साथ प्रबल रूप से बढ़ता है, अतः मिश्रण पर गहरे कण अधिक सिकुड़ते हैं
    2. मिश्रण परिवेश को बहुत ऊष्मा मुक्त करता है, जो फिर मिश्रण को ठंडा करके सघन बनाती है
    3. α तापमान के साथ बढ़ता है, अतः घनत्व T व S का वक्र फलन है और मिश्रण सीधी-रेखा औसत से सघन होता है
    4. भिन्न तापमान के दो जलों के मिश्रण पर लवणता संरक्षित नहीं रहती, अतः मिश्रण अधिक खारा हो जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — α तापमान के साथ बढ़ता है, अतः घनत्व T व S का वक्र फलन है और मिश्रण सीधी-रेखा औसत से सघन होता है

    तापमान व लवणता रैखिक रूप से मिश्रित होते हैं (वे संरक्षित हैं), अतः मिश्रण T–S तल में मूल कणों को जोड़ने वाली सीधी रेखा पर पड़ता है। समघनत्व-वक्र मुड़े होने से (गर्म जल में α अधिक है) यह सीधी रेखा सघन पक्ष में चली जाती है और मिश्रण सिकुड़ता है। इसका कारण β की दाब-निर्भरता नहीं है, समुद्री जल के मिश्रण के साथ इस प्रभाव को समझाने लायक ऊष्मा-मुक्ति नहीं होती, और मिश्रण में लवणता संरक्षित रहती है।
  8. महासागर के समीकरणों में प्रयुक्त Boussinesq सन्निकटन का सही वर्णन कौन-सा कथन करता है?

    1. समीकरणों में घनत्व को हर जगह ठीक स्थिर माना जाता है, उत्प्लावन बल में भी
    2. श्यान व विसरण पद छोड़ दिए जाते हैं ताकि प्रवाह अश्यान व अविसरणी माना जाए
    3. दाब को क्षैतिज में एकसमान माना जाता है, ताकि कोई दाब-चालित धारा न बने
    4. घनत्व-अंतर केवल वहाँ रखे जाते हैं जहाँ वे g से गुणित हों, अतः सांतत्य ∇·u = 0 हो जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — घनत्व-अंतर केवल वहाँ रखे जाते हैं जहाँ वे g से गुणित हों, अतः सांतत्य ∇·u = 0 हो जाता है

    समुद्री जल का घनत्व केवल कुछ प्रतिशत बदलता है, अतः जड़त्व-पदों व सांतत्य में उसे ρ₀ से बदल दिया जाता है, जिससे ∇·u = 0 मिलता है, जबकि छोटे विचलन उत्प्लावन-पद ρg में रखे जाते हैं क्योंकि g उन्हें गतिकीय रूप से महत्त्वपूर्ण बनाता है। उत्प्लावन बल में भी घनत्व स्थिर कर देने से स्तरीकरण ही मिट जाता, और न श्यान पद छूटते हैं न क्षैतिज दाब-प्रवणताएँ।
  9. बड़े पैमाने के महासागरीय परिसंचरण को द्रवस्थैतिक संतुलन में क्यों माना जा सकता है?

    1. समुद्री जल पूर्णतः असंपीड्य है, अतः दाब गहराई के साथ ऊपर के जल के भार के अतिरिक्त किसी कारण से नहीं बदल सकता
    2. हज़ारों किलोमीटर के क्षैतिज पैमाने गहराई से बहुत अधिक हैं, अतः ऊर्ध्वाधर त्वरण g की तुलना में नगण्य हैं
    3. कोरिओलिस बल ऊर्ध्वाधर दिशा में शून्य हो जाता है, जिससे अन्य सभी ऊर्ध्वाधर बल मिट जाते हैं
    4. महासागरीय धाराएँ हर जगह 1 mm s⁻¹ से धीमी होती हैं, अतः कोई त्वरण उत्पन्न ही नहीं हो सकता
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    उत्तर: B — हज़ारों किलोमीटर के क्षैतिज पैमाने गहराई से बहुत अधिक हैं, अतः ऊर्ध्वाधर त्वरण g की तुलना में नगण्य हैं

    क्षैतिज पैमाने गहराई से बहुत अधिक होने के कारण ऊर्ध्वाधर वेग व उनके त्वरण बहुत छोटे हैं, और ऊर्ध्वाधर संवेग समीकरण ∂p/∂z = −ρg में सिमट जाता है। समुद्री जल थोड़ा संपीड्य है, अतः पूर्ण असंपीड्यता कारण नहीं है; ऊर्ध्वाधर गति पर कोरिओलिस प्रभाव एक अलग छोटा पद है; और महासागरीय धाराएँ अनेक स्थानों पर 1 mm s⁻¹ से कहीं तेज़ हैं।
  10. स्थैतिक स्थायित्व व उत्प्लावन आवृत्ति N (z ऊपर की ओर, विभव घनत्व प्रयुक्त) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. P: N² > 0 का अर्थ है कि ऊर्ध्वाधर विस्थापित कण अपने स्तर के इर्द-गिर्द 2π/N काल से दोलन करता है
    2. Q: N प्रायः मुख्य thermocline में गहरे महासागर की अपेक्षा बड़ा होता है
    3. R: गहराई के साथ घटता तापमान तथा गहराई के साथ बढ़ती लवणता, दोनों N² में धनात्मक योगदान देते हैं
    4. S: N² < 0 किसी अन्यथा स्थायी स्तंभ में salt fingers की शर्त है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P: N² > 0 का अर्थ है कि ऊर्ध्वाधर विस्थापित कण अपने स्तर के इर्द-गिर्द 2π/N काल से दोलन करता है; B — Q: N प्रायः मुख्य thermocline में गहरे महासागर की अपेक्षा बड़ा होता है; C — R: गहराई के साथ घटता तापमान तथा गहराई के साथ बढ़ती लवणता, दोनों N² में धनात्मक योगदान देते हैं

    P उत्प्लावन-दोलन की परिभाषा है। Q इसलिए सही है कि घनत्व-प्रवणता pycnocline में सर्वाधिक तीव्र है (N ≈ 10⁻² s⁻¹) और गहरे महासागर में दुर्बल (लगभग 10⁻³ s⁻¹)। R, N² = g(α ∂T/∂z − β ∂S/∂z) से निकलता है: नीचे ठंडा जल (∂T/∂z > 0) और नीचे अधिक खारा जल (∂S/∂z < 0) दोनों स्थायित्व देते हैं। S ग़लत है: salt fingers N² > 0 पर होती हैं, अर्थात स्तंभ कुल मिलाकर स्थैतिक रूप से स्थायी रहता है।
  11. द्वि-विसरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. P: यह ऊष्मा के लवण से बहुत तेज़ विसरित होने पर निर्भर है
    2. Q: Salt fingers वहाँ बनती हैं जहाँ गर्म, खारा जल ठंडे, कम खारे जल के ऊपर हो
    3. R: विसरणी संवहन तीक्ष्ण अंतरापृष्ठों से अलग अच्छी तरह मिश्रित परतों की सीढ़ियाँ बना सकता है
    4. S: Salt fingers के लिए घनत्व-अनुपात R_ρ का 1 से कम होना आवश्यक है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P: यह ऊष्मा के लवण से बहुत तेज़ विसरित होने पर निर्भर है; B — Q: Salt fingers वहाँ बनती हैं जहाँ गर्म, खारा जल ठंडे, कम खारे जल के ऊपर हो; C — R: विसरणी संवहन तीक्ष्ण अंतरापृष्ठों से अलग अच्छी तरह मिश्रित परतों की सीढ़ियाँ बना सकता है

    κ_T ≈ 100 κ_S का अंतर ही दोनों व्यवस्थाओं को संभव बनाता है, अतः P सही है। Q अंगुली-विन्यास का वर्णन करता है, जिसमें तापमान स्थायित्व व लवणता अस्थायित्व देती है। R विसरणी व्यवस्था का वर्णन करता है, जिसमें ठंडा मीठा जल गर्म खारे जल के ऊपर होता है। S ग़लत है: fingers के लिए 1 < R_ρ < लगभग 100 चाहिए; 1 से कम अनुपात का अर्थ स्थैतिक अस्थायित्व व सामान्य उथल-पुथल है।
  12. महासागर के संरक्षण समीकरणों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. P: Boussinesq सन्निकटन के अंतर्गत सांतत्य समीकरण ∂u/∂x + ∂v/∂y + ∂w/∂z = 0 बन जाता है
    2. Q: आंतरिक लवणता केवल अभिवहन व मिश्रण से बदलती है, क्योंकि लवण न उत्पन्न होता है न नष्ट
    3. R: द्रवस्थैतिक संतुलन में गहराई पर दाब सतही दाब जमा गहराई पर घनत्व के समाकल का g गुना होता है
    4. S: बड़े पैमाने के प्रवाह में ऊर्ध्वाधर संवेग समीकरण पर ऊर्ध्वाधर त्वरण Dw/Dt हावी रहता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P: Boussinesq सन्निकटन के अंतर्गत सांतत्य समीकरण ∂u/∂x + ∂v/∂y + ∂w/∂z = 0 बन जाता है; B — Q: आंतरिक लवणता केवल अभिवहन व मिश्रण से बदलती है, क्योंकि लवण न उत्पन्न होता है न नष्ट; C — R: द्रवस्थैतिक संतुलन में गहराई पर दाब सतही दाब जमा गहराई पर घनत्व के समाकल का g गुना होता है

    P, Q व R मानक हैं: Boussinesq के अंतर्गत सांतत्य; लवण एक संरक्षित अनुरेखक है जिसका सतही आदान-प्रदान (वाष्पन, वर्षा, नदी-प्रवाह) केवल सीमा-प्रतिबंध के रूप में आता है; तथा p = p_atm + g∫ρ dz। S ग़लत है, क्योंकि बड़े पैमाने के प्रवाह में Dw/Dt नगण्य है और ऊर्ध्वाधर संतुलन दाब-प्रवणता व जल के भार के बीच होता है।
  13. रैखिकीकृत अवस्था समीकरण ρ = ρ₀[1 − α(T − T₀) + β(S − S₀)] का उपयोग कीजिए, जहाँ ρ₀ = 1026.0 kg m⁻³ (T₀ = 15 °C, S₀ = 35.0 पर), α = 2.0 × 10⁻⁴ K⁻¹ व β = 7.6 × 10⁻⁴ प्रति इकाई लवणता। T = 27 °C व S = 33.5 वाले सतही जल का घनत्व kg m⁻³ में, दशमलव के एक स्थान तक, ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 1022.4

    T − T₀ = 12 K तथा S − S₀ = −1.5। कोष्ठक का मान 1 − 2.0 × 10⁻⁴ × 12 + 7.6 × 10⁻⁴ × (−1.5) = 1 − 0.0024 − 0.00114 = 0.99646। ρ = 1026.0 × 0.99646 = 1022.37, अर्थात दशमलव के एक स्थान तक 1022.4 kg m⁻³। लवणता-पद छोड़ देने पर 1023.5 और उसे ग़लत चिह्न से लेने पर 1024.7 मिलता है।
  14. किसी thermocline में 100 m पर तापमान 20.0 °C तथा 200 m पर 8.0 °C है, और लवणता 100 m पर 35.3 तथा 200 m पर 35.0 है। g = 9.81 m s⁻², α = 2.0 × 10⁻⁴ K⁻¹ व β = 7.6 × 10⁻⁴ प्रति इकाई लवणता लीजिए, और दोनों गहराइयों के बीच प्रवणताएँ एकसमान मानिए। उत्प्लावन आवृत्ति का वर्ग N² ____ × 10⁻⁴ s⁻² है (दशमलव के दो स्थान)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 2.13

    z ऊपर की ओर लेने पर तापमान-प्रवणता ∂T/∂z = (20.0 − 8.0)/100 = +0.12 K m⁻¹ तथा लवणता-प्रवणता ∂S/∂z = (35.3 − 35.0)/100 = +0.003 m⁻¹। N² = g(α ∂T/∂z − β ∂S/∂z) = 9.81 × (2.0 × 10⁻⁴ × 0.12 − 7.6 × 10⁻⁴ × 0.003) = 9.81 × (2.4 × 10⁻⁵ − 2.28 × 10⁻⁶) = 9.81 × 2.172 × 10⁻⁵ = 2.13 × 10⁻⁴ s⁻²। लवणता-पद छोड़ देने पर 2.35 मिलता है, और नीचे की ओर अक्ष लेकर चिह्न न पलटने पर ऋणात्मक मान आता है।
  15. किसी परत में नीचे जाने पर तापमान 4.0 K और लवणता 0.40 घटती है। α = 2.0 × 10⁻⁴ K⁻¹ व β = 7.6 × 10⁻⁴ प्रति इकाई लवणता के साथ घनत्व-अनुपात R_ρ = αΔT/(βΔS) परिभाषित कीजिए, जो स्थायित्वकारी ऊष्मीय योगदान को अस्थायित्वकारी लवणीय योगदान से भाग देने पर मिलता है। R_ρ दशमलव के दो स्थानों तक ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 2.63

    ऊष्मीय योगदान αΔT = 2.0 × 10⁻⁴ × 4.0 = 8.0 × 10⁻⁴ तथा लवणीय योगदान βΔS = 7.6 × 10⁻⁴ × 0.40 = 3.04 × 10⁻⁴ है। R_ρ = 8.0/3.04 = 2.63। चूँकि R_ρ, 1 व लगभग 100 के बीच है और दोनों गुण गहराई के साथ घटते हैं, परत स्थैतिक रूप से स्थायी होते हुए भी salt fingers के प्रति प्रवण है।
  16. 25 m मोटी मिश्रित परत (ρ = 1025 kg m⁻³, c_p = 3990 J kg⁻¹ K⁻¹) 230 W m⁻² सौर विकिरण पाती है, जिसमें से 12 % परत के तल से पार होकर नीचे के जल को गर्म करता है। परत दीर्घतरंग विकिरण व संवेद्य तथा गुप्त ऊष्मा-फ्लक्स द्वारा वायुमंडल को 70 W m⁻² और खोती है। फ्लक्स 12 दिन (1 दिन = 86 400 s) स्थिर मानते हुए तथा तल के आर-पार मिश्रण की उपेक्षा करते हुए, परत का तापन ____ K है (दशमलव के दो स्थान)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 1.34

    परत द्वारा रखी गई ऊष्मा = 0.88 × 230 − 70 = 202.4 − 70 = 132.4 W m⁻²। 12 दिन में प्रति इकाई क्षेत्रफल ऊर्जा = 132.4 × 12 × 86 400 = 1.373 × 10⁸ J m⁻²। ΔT = Q t/(ρ c_p h) = 1.373 × 10⁸/(1025 × 3990 × 25) = 1.373 × 10⁸/1.0224 × 10⁸ = 1.34 K। भेदन के बिना पूरे 230 W m⁻² लेने, या 70 W m⁻² की क्षति भूल जाने से कहीं बड़ा उत्तर आता है।