प्लास्टिक: कमोडिटी, इंजीनियरिंग, थर्मोसेट तथा विशिष्ट बहुलक
2. पॉलीस्टायरीन, PVC व ऐक्रिलिक
पॉलीस्टायरीन (PS) स्टायरीन से मुक्त-मूलक बल्क या निलंबन बहुलकीकरण द्वारा बनती है। शृंखला अव्यवस्थित (atactic) है, अतः क्रिस्टलित नहीं हो सकती: PS काँचीय व पारदर्शी है, Tg लगभग 100 °C, कठोर पर भंगुर, क्योंकि स्थूल फ़ेनिल वलय शृंखला को जकड़ देते हैं। सामान्य-प्रयोजन PS (GPPS) से कप, प्रयोगशाला-सामान व डिस्क-केस बनते हैं। उच्च-आघात PS (HIPS) स्टायरीन को घुले पॉलीब्यूटाडाइन के साथ बहुलकित करके बनती है, जिससे PS आव्यूह में लगभग एक माइक्रॉन के ग्राफ़्टित रबर कण बनते हैं: कहीं अधिक चिमड़ी (tough), पर अपारदर्शी, क्योंकि कण प्रकाश बिखेरते हैं। प्रसार्य (expandable) PS के मनकों में पेंटेन भरा होता है, जिन्हें भाप से फुलाकर ऊष्मारोधी व पैकिंग फ़ोम बनता है। मेटैलोसीन से बनी सिंडियोटैक्टिक PS क्रिस्टलीय है (Tm लगभग 270 °C)।
पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) विनाइल क्लोराइड से मुक्त-मूलक बहुलकीकरण द्वारा बनता है, प्रायः निलंबन विधि से (पेस्ट रेज़िन हेतु इमल्शन, तथा बल्क भी)। यह अव्यवस्थित (atactic) व अल्प क्रिस्टलीय है, Tg लगभग 80 °C। ध्रुवीय C–Cl आबंध व द्रव्यमान से 57 % क्लोरीन ज्वाला-प्रतिरोध, रासायनिक प्रतिरोध व लगभग 1.4 g/cm³ घनत्व देते हैं। अप्लास्टिकीकृत (कठोर) PVC से पाइप व खिड़की प्रोफ़ाइल बनते हैं; फ़्थैलेट जैसे उच्च-क्वथनांक एस्टर से नरम किया गया प्लास्टिकीकृत PVC केबल आवरण, फ़र्श व होज़ बनाता है। विनाइल क्लोराइड एकलक कैंसरजनक है, इसलिए अवशिष्ट एकलक निकाल दिया जाता है।
ऐक्रिलिक। पॉलीमेथिल मेथैक्रिलेट (PMMA) CH₂=C(CH₃)COOCH₃ से मुक्त-मूलक बल्क बहुलकीकरण (काँच की प्लेटों के बीच सेल-कास्टिंग से शीट) या निलंबन बहुलकीकरण (ढलाई हेतु मनके) द्वारा बनता है। यह अव्यवस्थित व अक्रिस्टलीय है, Tg लगभग 105 °C, प्रकाश-संचरण लगभग 92 % और उत्कृष्ट मौसम-प्रतिरोध; यह PC से अधिक कठोर व खरोंच-रोधी है, पर आघात-सहन में उससे बहुत कम है। उपयोग: ग्लेज़िंग, लेंस, संकेत-पट, प्रकाश-निर्देशक, अस्थि सीमेंट। प्रबल ताप पर यह वापस एकलक में “ज़िप” होकर टूटता है, जो इसके रासायनिक पुनर्चक्रण का आधार है। पॉलीऐक्रिलोनाइट्राइल (PAN) में नाइट्राइल समूहों के बीच प्रबल द्विध्रुव–द्विध्रुव आकर्षण है, इसलिए वह पिघलने से पहले अपघटित हो जाता है और विलयन-कताई (DMF या DMAc से) द्वारा ऐक्रिलिक तंतु बनता है, जो परिपाटी से कम से कम 85 % ऐक्रिलोनाइट्राइल वाला होता है; यह कार्बन तंतु का मुख्य पूर्वगामी भी है। कम Tg वाले मृदु ऐक्रिलेट एस्टर (एथिल, ब्यूटिल) चिपकाने वाले पदार्थों, पेंट व लेटेक्स लेपों में जाते हैं।
3. पॉलिएस्टर, नायलॉन व पॉलीकार्बोनेट: पदवृद्धि इंजीनियरिंग प्लास्टिक
ये पदवृद्धि अभिक्रियाओं से बनते हैं, इसलिए उच्च मोलर द्रव्यमान हेतु लगभग पूर्ण रूपांतरण, प्रकार्यात्मक समूहों का ठीक 1 : 1 संतुलन और छोटे अणु वाले उप-उत्पाद का निष्कासन चाहिए (कैरोदर्स: Xₙ = 1/(1 − p), अतः p = 0.99 पर केवल 100)। इनके ध्रुवीय, प्रायः ऐरोमैटिक मेरुदंड उच्च Tg व Tm देते हैं, इसीलिए ये क्लासिक इंजीनियरिंग प्लास्टिक हैं।
| बहुलक | एकलक | विधि | Tg, Tm | गुणधर्म व उपयोग |
|---|---|---|---|---|
| PET | टेरेफ़्थैलिक अम्ल (या डाइमेथिल टेरेफ़्थैलेट) + एथिलीन ग्लाइकॉल | द्विहाइड्रॉक्सीएथिल एस्टर तक एस्टरीकरण (जल बाहर) या एस्टर-विनिमय (मेथेनॉल बाहर), फिर निर्वात में लगभग 280 °C पर ऐंटिमनी उत्प्रेरक सहित गलित बहुसंघनन; बोतल-ग्रेड हेतु ठोस-अवस्था बहुलकीकरण | Tg 70–80 °C; Tm 255–265 °C | तंतु, बोतलें (स्ट्रेच ब्लो मोल्डिंग विकृति से क्रिस्टलित कर उसे पारदर्शी रखती है), फ़िल्म; CO₂ अवरोध अच्छा |
| PBT | टेरेफ़्थैलिक अम्ल या DMT + 1,4-ब्यूटेनडाइऑल | PET की भाँति गलित बहुसंघनन | Tg 40–50 °C; Tm लगभग 225 °C | लचीला –(CH₂)₄– योजक इसे तेज़ी से क्रिस्टलित होने देता है, अतः मोल्ड-चक्र छोटे हैं; कनेक्टर, गियर, काँच-भरे वाहन-पुर्ज़े |
| नायलॉन 6 | ε-कैप्रोलैक्टम | जलीय वलय-विवृति: थोड़ा जल कुछ वलय खोलता है, फिर ऐमीन सिरे लैक्टम जोड़ते हैं, लगभग 250 °C | Tm लगभग 220 °C | तंतु, टायर-कॉर्ड, ढलाई-पुर्ज़े; नायलॉन 6,6 से अधिक जल सोखता है |
| नायलॉन 6,6 | हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन + ऐडिपिक अम्ल | जल में समअणुक “नायलॉन लवण” (1 : 1 अनुपात निश्चित करता है), फिर 270–280 °C पर बहुसंघनन, जल निष्कासित | Tm लगभग 265 °C | तंतु, गियर, बेयरिंग, केबल टाई, काँच-भरे वाहन-पुर्ज़े |
| PC (बिसफ़ीनॉल A) | बिसफ़ीनॉल A + फ़ॉस्जीन (या डाइफ़ेनिल कार्बोनेट) | अंतरापृष्ठीय बहुसंघनन (जलीय NaOH / CH₂Cl₂, उप-उत्पाद NaCl) या गलित एस्टर-विनिमय (फ़ीनॉल बाहर) | अक्रिस्टलीय; Tg लगभग 147 °C | पारदर्शी, उत्कृष्ट आघात सामर्थ्य: हेलमेट, ग्लेज़िंग, ऑप्टिकल डिस्क; खाँचे के प्रति संवेदनशील, विलायकों में प्रतिबल-दरार |
संरचना तालिका की व्याख्या करती है। ऐरोमैटिक वलय (PET, PC) शृंखला कड़ी करते और Tg बढ़ाते हैं; PBT का ऐलिफ़ैटिक योजक Tg घटाता और क्रिस्टलन तेज़ करता है। ऐमाइड समूह हाइड्रोजन-आबंध बनाते हैं, जिससे Tm बढ़ता है पर नायलॉन नमी सोखते हैं। PC की स्थूल बिसफ़ीनॉल-A इकाई क्रिस्टलन रोकती है, इसीलिए वह पारदर्शी भी है और अत्यंत चिमड़ी भी।
4. पॉलीफ़ेनिलीन ऑक्साइड, ABS व फ़्लोरोबहुलक
पॉलीफ़ेनिलीन ऑक्साइड (PPO, जिसे PPE भी कहते हैं) पॉली(2,6-डाइमेथिल-1,4-फ़ेनिलीन ऑक्साइड) है, जो 2,6-डाइमेथिलफ़ीनॉल से O₂ व कॉपर–ऐमीन उत्प्रेरक द्वारा ऑक्सीकारी युग्मन से बनता है, उप-उत्पाद जल है। इसका Tg लगभग 210 °C है, जल बहुत कम सोखता है, परावैद्युत गुण व आयामी स्थिरता अच्छे हैं, पर शुद्ध गलित द्रव प्रसंस्करण हेतु अति श्यान है। PPO पॉलीस्टायरीन के साथ सभी अनुपातों में मिश्रणीय है, अतः PPO/HIPS ब्लेंड का एक ही Tg होता है और ताप-सहिष्णुता समायोज्य रहती है; यह जोड़ी मिश्रणीय ब्लेंड का मानक उदाहरण है (अध्याय 3)।
ABS एक शृंखला में तीन एकलकों का सहबहुलक नहीं, बल्कि द्विप्रावस्था निकाय है: काँचीय स्टायरीन–ऐक्रिलोनाइट्राइल (SAN) आव्यूह, जिसमें पॉलीब्यूटाडाइन रबर कण (लगभग 0.1–1 µm) हैं और उन पर SAN ग्राफ़्टित है। इसे पॉलीब्यूटाडाइन लेटेक्स पर स्टायरीन व ऐक्रिलोनाइट्राइल के इमल्शन ग्राफ़्टन से, या बल्क/निलंबन ग्राफ़्टन से बनाया जाता है, प्रायः अतिरिक्त SAN मिलाकर। प्रत्येक एकलक का काम निश्चित है: ऐक्रिलोनाइट्राइल रासायनिक प्रतिरोध व कड़ापन देता है, ब्यूटाडाइन चिमड़ापन (रबर कण क्रेज़िंग व अपरूपण-यील्डिंग जगाकर आघात-ऊर्जा सोखते हैं, निम्न ताप पर भी), स्टायरीन दृढ़ता, चमक व सरल प्रसंस्करण। ABS अक्रिस्टलीय है, SAN प्रावस्था का Tg लगभग 105 °C। रबर के शेष C=C आबंध उसे मौसम-सहन में कमज़ोर बनाते हैं। उपयोग: उपकरण-आवरण, वाहन-आंतरिक, पाइप, सूटकेस, खिलौना-ईंटें।
फ़्लोरोबहुलकों का व्यवहार C–F आबंध, जो कार्बनिक रसायन के सबसे प्रबल एकल आबंधों में है, तथा शृंखला के गिर्द फ़्लोरीन के कसे, निम्न-ध्रुवणीयता वाले आवरण से उपजता है।
- PTFE (टेट्राफ़्लोरोएथिलीन, जल में दाब पर मुक्त-मूलक बहुलकीकरण): अत्यधिक क्रिस्टलीय, Tm लगभग 327 °C, घनत्व लगभग 2.2 g/cm³, रासायनिक रूप से निष्क्रिय, घर्षण अति कम, उत्कृष्ट परावैद्युत, लगभग 260 °C तक प्रयोज्य। गलित श्यानता इतनी अधिक है कि वह बहता नहीं, इसलिए PTFE चूर्ण को दबाकर व सिंटर करके, सिरेमिक की भाँति, प्रसंस्कृत किया जाता है। उपयोग: सील, गैस्केट, बेयरिंग, नॉन-स्टिक लेप, केबल-रोधन।
- FEP (TFE व हेक्साफ़्लोरोप्रोपिलीन): CF₃ पार्श्व समूह क्रिस्टलीयता व गलित श्यानता घटाते हैं, अतः वह गलित-प्रसंस्करणीय है (Tm लगभग 260 °C), सेवा-ताप में कुछ हानि के साथ।
- PVDF (–CH₂–CF₂–): ध्रुवीय, गलित-प्रसंस्करणीय (Tm लगभग 170 °C), चिमड़ा, UV-रोधी व अपनी β प्रावस्था में दाब-विद्युत; रासायनिक-संयंत्र अस्तर, वास्तुशिल्पीय लेप, झिल्लियों व बैटरी बंधकों में प्रयुक्त।
5. पॉलीयूरेथेन व तापदृढ़ (थर्मोसेट) बहुलक
पॉलीयूरेथेन (PU) योगात्मक बहुलकीकरण से बनता है, बिना उप-उत्पाद के: –NCO + HO– → –NH–CO–O–। एकलक एक डाइआइसोसायनेट (TDI, MDI, या प्रकाश-स्थिर लेपों हेतु ऐलिफ़ैटिक HDI) व एक पॉलीऑल हैं (पॉलीईथर, जो जलअपघटन-रोधी व लचीला है, या पॉलिएस्टर, जो अधिक सबल व तेल-रोधी है), उत्प्रेरक ऐमीन या टिन के। शृंखला खंडित ब्लॉक सहबहुलक है: मृदु पॉलीऑल खंड, और आइसोसायनेट व 1,4-ब्यूटेनडाइऑल जैसे छोटे शृंखला-प्रसारक से बने कठोर, हाइड्रोजन-आबंधित यूरेथेन खंड। रैखिक PU थर्मोप्लास्टिक है (TPU, स्पैन्डेक्स तंतु); प्रकार्यता 2 से अधिक वाला पॉलीऑल या आइसोसायनेट अनुप्रस्थ-बद्ध थर्मोसेट देता है। फ़ोम में जल फुलाने वाले कारक का काम करता है: –NCO + H₂O → –NH₂ + CO₂, और ऐमीन आगे यूरिया आबंध बनाती है। लचीला फ़ोम (TDI, पॉलीईथर ट्राइऑल) गद्दी हेतु, कठोर फ़ोम (बहुलकीय MDI) ऊष्मारोधन हेतु है; PU से लेप, चिपकाने वाले पदार्थ व इलास्टोमर पहिए भी बनते हैं।
| रेज़िन | एकलक | रसायन व क्योर | गुणधर्म व उपयोग |
|---|---|---|---|
| PF | फ़ीनॉल + फ़ॉर्मेल्डिहाइड | रेज़ोल: क्षार उत्प्रेरक, F : P 1 से अधिक, मेथिलॉल समूह, गरम करने पर स्वतः क्योर। नोवोलैक: अम्ल उत्प्रेरक, F : P 1 से कम, मेथिलॉल नहीं, क्योर हेतु हेक्सामेथिलीनटेट्रामीन (“हेक्सा”) चाहिए। उप-उत्पाद जल है। | ताप, ज्वाला व विद्युत प्रतिरोध, भंगुर व गहरा रंग; स्विच, लैमिनेट, ब्रेक-अस्तर, फ़ाउंड्री बंधक, प्लाईवुड गोंद |
| UF | यूरिया + फ़ॉर्मेल्डिहाइड | मृदु क्षार में मोनो- व डाइमेथिलॉल यूरिया बनते हैं, फिर अम्ल में गुप्त अम्ल उत्प्रेरक (जैसे अमोनियम क्लोराइड) सहित संघनित होते हैं | रंगहीन, कठोर, सस्ता; गरम जल-प्रतिरोध कम (उत्क्रमणीय जलअपघटन); पार्टिकल बोर्ड व प्लाईवुड चिपकाने वाले पदार्थ, ढले फ़िटिंग; फ़ॉर्मेल्डिहाइड उत्सर्जन |
| MF | मेलामीन (2,4,6-ट्राइऐमीनो-1,3,5-ट्राइऐज़ीन) + फ़ॉर्मेल्डिहाइड | प्रति मेलामीन छह तक मेथिलॉल समूह, फिर संघनन से सघन जालक | UF से अधिक कठोर, ताप- व जल-रोधी; सजावटी लैमिनेट, टेबलवेयर, वाहन-पेंट का अनुप्रस्थ-बंधक |
| एपॉक्सी | बिसफ़ीनॉल A + एपिक्लोरोहाइड्रिन (NaOH) से DGEBA | हार्डनर के वलय-विवृति योग से क्योर: ऐमीन (परिवेश या ताप), ऐनहाइड्राइड (ताप), उत्प्रेरकी इमिडाज़ोल या BF₃ संकुल। कोई वाष्पशील पदार्थ नहीं निकलता। | उत्कृष्ट आसंजन (ध्रुवीय –OH व ईथर समूह), अल्प संकुचन, रासायनिक प्रतिरोध, पर भंगुर; चिपकाने वाले पदार्थ, लेप, कम्पोजिट आव्यूह, परिपथ-बोर्ड लैमिनेट |
| असंतृप्त पॉलिएस्टर | मैलिक ऐनहाइड्राइड (C=C), फ़्थैलिक ऐनहाइड्राइड, प्रोपिलीन ग्लाइकॉल; स्टायरीन में विलीन | अल्पलक तक बहुसंघनन, फिर स्टायरीन के साथ मुक्त-मूलक सहबहुलकीकरण (परॉक्साइड, कमरे के ताप पर कोबाल्ट त्वरक सहित) C=C के सहारे अनुप्रस्थ-बंधन बनाता है | सस्ता, सरल हैंड ले-अप; नौकाएँ, टंकियाँ, पाइप, ढले पैनल; संतृप्त फ़्थैलेट अधिक होने पर अनुप्रस्थ-बंधन घनत्व कम (कम कड़ा, अधिक चिमड़ा); स्टायरीन उत्सर्जन |
| ऐल्किड | पॉलीऑल (ग्लिसरॉल, पेंटाएरिथ्रिटॉल) + फ़्थैलिक ऐनहाइड्राइड + वसा अम्ल या शुष्कन तेल | तेल-रूपांतरित पॉलिएस्टर; असंतृप्त वसा शृंखलाएँ धातु शुष्ककों सहित वायु-ऑक्सीकरण (स्वतः-ऑक्सीकरण) से अनुप्रस्थ-बद्ध होती हैं | दीर्घ तेल (60 % से अधिक) लचीला व ब्रश-योग्य, अल्प तेल (40 % से कम) कठोर; पेंट, इनैमल, वार्निश |
6. विशिष्ट उच्च-निष्पादन प्लास्टिक: PEEK, PEK, PPS, PSU, PES
ये प्लास्टिक 150–250 °C पर कड़ापन व सामर्थ्य बनाए रखते हैं और रसायनों का प्रतिरोध करते हैं। सभी में छोटे योजकों (ईथर, कीटोन, सल्फ़ाइड, सल्फ़ोन) से जुड़े ऐरोमैटिक वलय हैं। वलय ऊँचा Tg देते हैं; ईथर व सल्फ़ाइड योजक गलित प्रसंस्करण हेतु बस पर्याप्त घूर्णन देते हैं; और योजक जितना प्रबल, ताप-सहिष्णुता उतनी अधिक। अधिकांश का निर्माण उच्च ताप पर द्विध्रुवीय विलायक में नाभिकस्नेही ऐरोमैटिक प्रतिस्थापन (ऐरिल क्लोराइड या फ़्लोराइड का फ़ीनॉक्साइड या सल्फ़ाइड द्वारा विस्थापन) से होता है, उप-उत्पाद एक लवण।
| बहुलक | एकलक व विधि | Tg, Tm | गुणधर्म व उपयोग |
|---|---|---|---|
| PEEK | 4,4′-डाइफ़्लोरोबेंज़ोफ़ीनोन + हाइड्रोक्विनोन, डाइफ़ेनिल सल्फ़ोन में K₂CO₃ या Na₂CO₃ सहित लगभग 300 °C या अधिक पर (HF लवण के रूप में) | Tg लगभग 143 °C; Tm लगभग 343 °C | अर्धक्रिस्टलीय; लगभग 250 °C तक प्रयोग; रसायन, जलअपघटन व घिसाव का प्रतिरोध; वैमानिकी पुर्ज़े, प्रत्यारोपण, बेयरिंग, कार्बन-तंतु कम्पोजिट |
| PEK | वही कुल, प्रति कीटोन एक ईथर योजक (PEEK से अधिक कीटोन) | दोनों PEEK से अधिक | कीटोन योजक ईथर से कड़ा है, इसलिए कीटोन-अंश के साथ Tg व Tm बढ़ते हैं, और प्रसंस्करण की कठिनाई भी |
| PPS | p-डाइक्लोरोबेंज़ीन + सोडियम सल्फ़ाइड, N-मेथिलपायरोलिडोन में, लगभग 250 °C, दाब में; उप-उत्पाद NaCl | Tg लगभग 90 °C; Tm लगभग 280 °C | अर्धक्रिस्टलीय, स्वाभाविक ज्वाला-रोधी, लगभग 200 °C से नीचे लगभग कोई विलायक नहीं, आयामी रूप से स्थिर; कनेक्टर, पंप-पुर्ज़े, तप्त-गैस छन्ना-वस्त्र |
| PSU | बिसफ़ीनॉल A का डाइसोडियम लवण + 4,4′-डाइक्लोरोडाइफ़ेनिल सल्फ़ोन, द्विध्रुवीय अप्रोटिक विलायक में; NaCl बाहर | अक्रिस्टलीय; Tg लगभग 185 °C | पारदर्शी (अंबर), भाप-निर्जर्मीकरण योग्य, जलअपघटन-स्थिर; चिकित्सा उपकरण, गरम-जल फ़िटिंग, अतिपरिस्रवण व अपोहन झिल्लियाँ |
| PES | 4,4′-डाइक्लोरोडाइफ़ेनिल सल्फ़ोन + 4,4′-डाइहाइड्रॉक्सीडाइफ़ेनिल सल्फ़ोन (या स्व-संघनी क्लोरो-हाइड्रॉक्सी एकलक); NaCl बाहर | अक्रिस्टलीय; Tg लगभग 225 °C | बिसफ़ीनॉल-A आइसोप्रोपिलिडीन इकाई नहीं, अतः PSU से अधिक ताप-सहिष्णु; झिल्लियाँ, विमान-आंतरिक, चिकित्सा ट्रे |
7. संख्यात्मक प्रश्न: एकलक द्रव्यमान, उप-उत्पाद व अनुपात
उप-उत्पाद व उपज, द्रव्यमान-आधार पर। संतुलित समीकरण लिखिए, फिर मोलर द्रव्यमान लीजिए (H 1.008, C 12.011, N 14.007, O 15.999, Na 22.990, S 32.06, Cl 35.45 g/mol)। नायलॉन 6,6 में एक पुनरावृत्त इकाई –NH(CH₂)₆NH–CO(CH₂)₄CO– में दो ऐमाइड आबंध हैं, इसलिए प्रत्येक पुनरावृत्त इकाई दो H₂O मुक्त करती है।
- नायलॉन 6,6: लवण = 116.21 + 146.14 = 262.35 g/mol; पुनरावृत्त इकाई C₁₂H₂₂N₂O₂ = 226.32 g/mol; जल = 2 × 18.015 = 36.03 g/mol। पूर्ण रूपांतरण पर 100 kg लवण से: बहुलक = 100 × 226.32/262.35 = 86.3 kg, जल = 13.7 kg।
- PPS: C₆H₄Cl₂ (147.0) + Na₂S (78.04) → [C₆H₄S]ₙ (108.16 प्रति इकाई) + 2 NaCl (116.88)। प्रति किलोग्राम बहुलक लवण = 116.88/108.16 = 1.08 kg: यह विधि द्रव्यमान में बहुलक से अधिक लवण बनाती है।
इकाइयों व शाखाओं की गणना। PET की पुनरावृत्त इकाई –OC–C₆H₄–COO–CH₂CH₂– है, C₁₀H₈O₄ = 192.2 g/mol, अतः Mₙ = 19,200 g/mol की शृंखला में लगभग 100 पुनरावृत्त इकाइयाँ हैं। LLDPE में प्रत्येक एकलक इकाई, एथिलीन हो या सहएकलक, मेरुदंड में दो कार्बन रखती है, इसलिए 1000 मेरुदंड-कार्बन 500 इकाइयाँ हैं; सहएकलक के मोल-अंश x पर प्रति 1000 मेरुदंड-कार्बन शाखाएँ 500x हैं। 6 mol % हेक्सीन पर यह 30 ब्यूटिल शाखाएँ हैं।
मुख्य बिंदु
- पॉलीएथिलीन ग्रेड केवल संरचना में भिन्न हैं: LDPE (मुक्त-मूलक, उच्च दाब, दीर्घ व लघु शाखाएँ), HDPE (ज़ीगलर–नाट्टा या फ़िलिप्स, रैखिक) और LLDPE (ब्यूटीन, हेक्सीन या ऑक्टीन से सहबहुलक, केवल लघु शाखाएँ)। शाखन क्रिस्टलीयता, घनत्व, Tm व कड़ापन घटाता है।
- समस्थानिक PP क्रिस्टलित होता है (Tm लगभग 165 °C, घनत्व लगभग 0.90); अव्यवस्थित PS, PVC व PMMA अक्रिस्टलीय हैं। PVC को स्थायीकारक चाहिए क्योंकि वह अपने प्रसंस्करण-ताप के निकट निर्हाइड्रोक्लोरीकृत होता है; HIPS व ABS रबर-चिमड़े द्विप्रावस्था निकाय हैं।
- PET, PBT, नायलॉन व PC पदवृद्धि बहुलक हैं: उन्हें सटीक रससमीकरणमिति, उप-उत्पाद निष्कासन और पिघलाने से पहले सुखाना चाहिए। ऐरोमैटिक वलय Tg बढ़ाते हैं, लचीले योजक क्रिस्टलन तेज़ करते हैं, ऐमाइड Tm बढ़ाते हैं पर जल सोखते हैं।
- थर्मोसेट: रेज़ोल (क्षार, F : P 1 से अधिक) स्वतः क्योर होता है, नोवोलैक (अम्ल, F : P 1 से कम) को हेक्सा चाहिए; UF व MF ऐमीनो रेज़िन हैं (MF अधिक टिकाऊ); एपॉक्सी बिना वाष्पशील पदार्थ के वलय-विवृति योग से क्योर होता है (हार्डनर phr = 100 × AHEW / EEW); असंतृप्त पॉलिएस्टर स्टायरीन से क्योर होता है; ऐल्किड स्वतः-ऑक्सीकरण से सूखते हैं।
- PEEK, PEK, PPS, PSU व PES नाभिकस्नेही ऐरोमैटिक प्रतिस्थापन से बने ऐरोमैटिक बहुलक हैं; कीटोन व सल्फ़ोन योजक Tg व Tm बढ़ाते हैं, ईथर व सल्फ़ाइड योजक गलित प्रसंस्करण संभव करते हैं, और उप-उत्पाद एक लवण है (या कार्बोनेट द्वारा ग्रहण किया HF)।
अभ्यास प्रश्न (16)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
उच्च-दाब मुक्त-मूलक विधि से बनी LDPE में कौन-सी संरचनात्मक विशेषता है, जो HDPE व LLDPE दोनों में लगभग अनुपस्थित है?
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उत्तर: B — दीर्घ-शृंखला शाखाएँ, जो अन्य शृंखलाओं से उलझने जितनी लंबी हों
अत्यंत उच्च दाब पर मुक्त-मूलक “बैक-बाइटिंग” व शृंखला-स्थानांतरण LDPE को लघु व दीर्घ दोनों शाखाएँ देते हैं। दीर्घ शाखाएँ ही पिघल-सामर्थ्य बढ़ाती हैं, और HDPE (ज़ीगलर–नाट्टा या फ़िलिप्स) व LLDPE (रैखिक मेरुदंड) में वे नहीं होतीं। लघु शाखाएँ भ्रामक उत्तर हैं, पर LLDPE तो जानबूझकर उन्हीं के साथ बनाई जाती है। तीनों पॉलीएथिलीन अर्धक्रिस्टलीय हैं, और पॉलीएथिलीन में कोई ऐसा पार्श्व समूह नहीं जिसकी टैक्टिसिटी परिभाषित हो।होमोपॉलिमर पॉलीप्रोपिलीन का एक बंपर सर्दी की सुबह आसानी से चटक जाता है। कौन-सा स्पष्टीकरण व उपाय सही है?
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उत्तर: A — अक्रिस्टलीय प्रावस्था लगभग 0 °C के अपने Tg के निकट काँचीय हो जाती है; एथिलीन से सहबहुलकीकरण या एथिलीन–प्रोपिलीन रबर मिलाने से निम्न-ताप चिमड़ापन लौटता है
समस्थानिक PP का Tg लगभग 0 °C है, अतः उस ताप पर या उससे नीचे अक्रिस्टलीय क्षेत्र आघात-ऊर्जा सोखना बंद कर देते हैं; एथिलीन सहएकलक या परिक्षिप्त एथिलीन–प्रोपिलीन रबर प्रावस्था इसे ठीक करती है। अव्यवस्थित वाला स्पष्टीकरण PP को PS से भ्रमित करता है: वाणिज्यिक PP समस्थानिक व अत्यधिक क्रिस्टलीय है। PP लगभग 165 °C पर पिघलता है, 60 °C पर नहीं, और PP को सुघट्यकारी से चिमड़ा नहीं बनाया जाता।बिना स्थायीकारक का कठोर PVC लगभग 190 °C पर एक्सट्रूड किया जाता है। एक्सट्रूडेट भूरा है और डाई से तीखा धुआँ उठता है। कौन-सा स्पष्टीकरण व उपाय सही है?
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उत्तर: C — शृंखला से HCl निकलकर संयुग्मित C=C अनुक्रम छोड़ता है, और HCl इस क्षय को तेज़ करता है; कैल्सियम–ज़िंक या ऑर्गैनोटिन जैसा ऊष्मा-स्थायीकारक HCl सोखता और अस्थिर क्लोरीन की जगह लेता है
PVC निर्हाइड्रोक्लोरीकरण से अपघटित होता है, जो स्वतः-उत्प्रेरित ज़िप अभिक्रिया है और रंगीन पॉलीईन अनुक्रम बनाकर HCl छोड़ती है। HCl को उदासीन करने व दोष-क्लोरीन को स्थायी बनाने वाला स्थायीकारक ही उपाय है। एकलक में ज़िप होना PMMA का व्यवहार है और वही भ्रामक गलत उत्तर है, और अकेला प्रतिऑक्सीकारक HCl-क्षय नहीं रोकता। यौगिक कठोर PVC है, अतः उसमें सुघट्यकारी नहीं है, और PVC 120 °C पर पिघलाया नहीं जा सकता।पॉलीस्टायरीन व ऐक्रिलिकों के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — उच्च-आघात पॉलीस्टायरीन अपारदर्शी है क्योंकि उसके ग्राफ़्टित रबर कण, जिनका आकार प्रकाश की तरंगदैर्घ्य के तुल्य है, प्रकाश बिखेरते हैं; C — PMMA प्रबल ताप पर विघटित होकर मेथिल मेथैक्रिलेट की उच्च उपज देता है
लगभग एक माइक्रॉन के रबर कण दृश्य प्रकाश को बिखेरते हैं, इसलिए HIPS अपारदर्शी है, और PMMA ऊष्मा से वापस एकलक में विघटित होता है। अव्यवस्थित PS में नियमित संरचना नहीं है, अतः वह अक्रिस्टलीय रहती है, और PAN नहीं पिघलता क्योंकि नाइट्राइल–नाइट्राइल द्विध्रुव अन्योन्यक्रियाएँ उसे अपघटन तक बाँधे रखती हैं, इसलिए वह विलयन से काता जाता है।नायलॉन 6,6 बनाने में पहले जल में हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन व ऐडिपिक अम्ल का 1 : 1 लवण क्यों बनाया जाता है?
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उत्तर: D — लवण का क्रिस्टलन डाइऐमीन व डाइऐसिड की समअणुक मात्रा निश्चित करता है, और पदवृद्धि में अंत्य-समूहों का कोई भी असंतुलन प्राप्य मोलर द्रव्यमान को सीमित कर देता है
दो भिन्न द्विप्रकार्यात्मक एकलकों के साथ कैरोदर्स संबंध के अनुसार NH₂ व COOH समूहों की संख्या बराबर होनी चाहिए; किसी का भी आधिक्य एक ही प्रकार के शृंखला-सिरे छोड़कर वृद्धि जल्दी रोक देता है। लवण ठीक 1 : 1 यौगिक के रूप में क्रिस्टलित होता है, अतः उसे तौलने से संतुलन तय हो जाता है। यह बहुलकीकरण कमरे के ताप की प्रक्रिया नहीं है (यह लगभग 270–280 °C पर चलता है), जल निकलता है और उसे हटाना पड़ता है, और ऐडिपिक अम्ल वलय-विवृति वाला एकलक नहीं है; वह वर्णन कैप्रोलैक्टम से बनने वाले नायलॉन 6 का है।नायलॉन 6,6 हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन (M = 116.21 g/mol) व ऐडिपिक अम्ल (M = 146.14 g/mol) के 1 : 1 लवण के गलित बहुसंघनन से बनता है। बनने वाली प्रत्येक पुनरावृत्त इकाई जल के दो अणु (M = 18.015 g/mol) मुक्त करती है। 100 kg लवण के पूर्ण रूपांतरण पर कितने किलोग्राम जल मुक्त होगा? उत्तर दशमलव के एक स्थान तक दीजिए।
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उत्तर: 13.7
प्रति मोल पुनरावृत्त इकाई लवण = 116.21 + 146.14 = 262.35 g। प्रति मोल पुनरावृत्त इकाई जल = 2 × 18.015 = 36.03 g। द्रव्यमान-क्षय का अंश = 36.03/262.35 = 0.1373, अतः 100 kg लवण से 100 × 0.1373 = 13.7 kg जल मुक्त होता है (और 86.3 kg बहुलक बचता है)।PET की बोतल लगभग अक्रिस्टलीय प्रीफ़ॉर्म को उसके Tg से ऊपर खींचकर फुलाई जाती है। बोतल अधिक सबल होने पर भी पारदर्शी क्यों रहती है?
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उत्तर: B — खिंचाव शृंखलाओं को संरेखित कर प्रकाश-प्रकीर्णन के पैमाने से भी छोटे अनेक क्रिस्टलक उत्प्रेरित करता है, जो सामर्थ्य व CO₂ अवरोध बढ़ाते हैं
खिंचाव से अभिविन्यास विकृति-प्रेरित क्रिस्टलन उत्पन्न करता है। क्रिस्टलक दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य से कहीं छोटे होते हैं, अतः उसे बिखेरते नहीं, जबकि संरेखित शृंखलाएँ व क्रिस्टल सामर्थ्य, कड़ापन व गैस-अवरोध बढ़ाते हैं। खींचे बिना PET को धीरे ठंडा करने पर बड़े गोलिकाश्म (spherulite) बनते हैं, जो अपारदर्शी होते हैं। खिंचाव न PET को अनुप्रस्थ-बद्ध करता है, न उसका Tg घटाता है, न उसके एस्टर समूह हटाता है।इंजीनियरिंग व फ़्लोरीनीकृत प्लास्टिकों के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — पॉलीफ़ेनिलीन ऑक्साइड, पॉलीस्टायरीन के साथ सभी अनुपातों में मिश्रणीय है, इसलिए PPO/PS ब्लेंडों में एक ही Tg दिखता है; B — ABS में पॉलीब्यूटाडाइन कण चिमड़ापन देते हैं जबकि काँचीय SAN आव्यूह दृढ़ता व रासायनिक प्रतिरोध देता है
PPO व PS मिश्रणीय जोड़ी हैं, और ABS रबर-चिमड़ा द्विप्रावस्था प्लास्टिक है, अतः PPO/PS तथा ABS वाले कथन सही हैं। PTFE की गलित श्यानता इतनी अधिक है कि वह 327 °C से ऊपर भी नहीं बहता, इसलिए उसे सिंटर किया जाता है, गलित द्रव के रूप में एक्सट्रूड नहीं। पॉलीसल्फ़ोन अक्रिस्टलीय है, Tg लगभग 185 °C और गलनांक कोई नहीं।एक फ़ीनॉल–फ़ॉर्मेल्डिहाइड अल्पलक अम्ल उत्प्रेरक पर 1 से कम फ़ॉर्मेल्डिहाइड : फ़ीनॉल अनुपात में बनाया गया है। यह भंगुर, गलनीय ठोस है जो केवल ताप से क्योर नहीं होता। उसे क्योर करने हेतु क्या मिलाना होगा?
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उत्तर: C — हेक्सामेथिलीनटेट्रामीन, जो गरम करने पर मेथिलीन सेतु देती है
यह नोवोलैक है: फ़ीनॉल के आधिक्य में अम्ल उत्प्रेरण से मेथिलीन-जुड़े अल्पलक बनते हैं जिनमें मेथिलॉल समूह नहीं होते, इसलिए अकेला ताप उन्हें अनुप्रस्थ-बद्ध नहीं कर सकता। हेक्सामेथिलीनटेट्रामीन (“हेक्सा”) अपघटित होकर अतिरिक्त फ़ॉर्मेल्डिहाइड-तुल्य कार्बन व अमोनिया देती है और फ़ीनॉलिक वलयों को जोड़ती है। यह कथन कि विद्यमान मेथिलॉल समूह स्वतः क्योर कर देंगे, रेज़ोल का वर्णन है, जो क्षार से F : P 1 से अधिक पर बनता है और स्वतः क्योर होता है। फ़ीनॉल, परॉक्साइड या मुक्त-मूलक मार्ग PF रेज़िन के अनुप्रस्थ-बंधन का तरीका नहीं हैं।एक DGEBA एपॉक्सी रेज़िन को पॉलीऐमीन की रससमीकरणमितीय मात्रा से क्योर किया जाता है। फिर एक निर्माता “पूर्ण क्योर सुनिश्चित करने” हेतु 30 % अतिरिक्त हार्डनर मिला देता है। सर्वाधिक संभावित परिणाम क्या है?
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उत्तर: A — अप्रतिक्रियित ऐमीन सिरे बचते हैं, जालक कम पूर्ण बनता है तथा Tg व रासायनिक प्रतिरोध घटते हैं
जब प्रत्येक एपॉक्साइड समूह प्रतिक्रिया कर चुका, तो अतिरिक्त ऐमीन के पास जुड़ने को कुछ नहीं बचता। वह लटकते ऐमीन सिरों के रूप में रहती है, जो जालक को सुघट्य कर Tg व रासायनिक प्रतिरोध घटाते हैं, और हार्डनर कम होने पर भी यही हानि होती है। अधिक अनुप्रस्थ-बंध नहीं बन सकते क्योंकि प्रत्येक के लिए एक एपॉक्साइड समूह चाहिए, और अतिरिक्त N–H समूहों के लिए कोई शेष नहीं। प्राथमिक व द्वितीयक ऐमीन रससमीकरणमितीय रूप से जुड़ती हैं, अतः उत्प्रेरक नहीं हैं, और पॉलीऐमीन इतनी वाष्पशील नहीं कि निकल जाए।एक द्रव एपॉक्सी रेज़िन का एपॉक्साइड तुल्यांकी भार EEW = 200 g/eq है। उसे डाइएथिलीनट्राइऐमीन (DETA, H₂N–CH₂CH₂–NH–CH₂CH₂–NH₂, M = 103.17 g/mol) से क्योर किया जाता है, जिसके प्रति अणु 5 अभिक्रियाशील N–H हाइड्रोजन हैं। AHEW = M/(N–H हाइड्रोजनों की संख्या) व रससमीकरणमितीय हार्डनर (phr) = 100 × AHEW/EEW लीजिए। प्रति सौ भाग रेज़िन कितने भाग DETA चाहिए? उत्तर दशमलव के एक स्थान तक दीजिए।
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उत्तर: 10.3
AHEW = 103.17/5 = 20.63 g/eq। phr = 100 × 20.63/200 = 10.3। एक प्रचलित भूल 5 (N–H गणना) की जगह 3 (नाइट्रोजन गणना) से भाग देना है, जिससे 17.2 phr आता है और उत्पाद हार्डनर-प्रचुर व अपूर्ण-क्योर रहता है।बिना किसी भौतिक फुलाने वाले कारक के लचीला पॉलीयूरेथेन फ़ोम बनाने में फ़ोम को फुलाने वाली गैस कहाँ से आती है?
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उत्तर: D — आइसोसायनेट की जल से अभिक्रिया से, जो ऐमीन व CO₂ देती है
जल –NCO से अभिक्रिया कर अस्थिर कार्बैमिक अम्ल बनाता है जो CO₂ त्यागकर ऐमीन छोड़ता है, और वह ऐमीन आगे आइसोसायनेट से अभिक्रिया कर यूरिया आबंध बनाती है। आइसोसायनेट–हाइड्रॉक्सिल अभिक्रिया योगात्मक बहुलकीकरण है जो बिना उप-उत्पाद के यूरेथेन आबंध बनाती है, और यही भ्रामक गलत विकल्प है। यूरेथेन आबंध क्योर-ताप पर स्थायी है, और शृंखला-प्रसारक इतना वाष्पशील नहीं कि फुलाने वाले कारक का काम करे।पॉली(फ़ेनिलीन सल्फ़ाइड) p-डाइक्लोरोबेंज़ीन (C₆H₄Cl₂, M = 147.0 g/mol) व सोडियम सल्फ़ाइड (Na₂S, M = 78.04 g/mol) से बनता है: n C₆H₄Cl₂ + n Na₂S → [C₆H₄S]ₙ + 2n NaCl। पुनरावृत्त इकाई C₆H₄S को 108.16 g/mol और NaCl को 58.44 g/mol लीजिए। प्रति 100 kg बहुलक कितने किलोग्राम NaCl बनता है? उत्तर निकटतम पूर्ण संख्या में दीजिए।
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उत्तर: 108
प्रत्येक पुनरावृत्त इकाई (108.16 g) के साथ 2 NaCl = 116.88 g बनता है। प्रति 100 kg बहुलक: 100 × 116.88/108.16 = 108.06, अर्थात् 108 kg। द्रव्यमान-संतुलन मिलता है: 147.0 + 78.04 = 225.04 = 108.16 + 116.88। लवण द्रव्यमान में बहुलक से अधिक है।एक पुन:प्रयोज्य, पारदर्शी चिकित्सा पात्र को लगभग 134 °C पर भाप-निर्जर्मीकरण के अनेक चक्र सहने और जलअपघटन का प्रतिरोध करना है। इनमें से सर्वोत्तम चयन कौन-सा है?
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उत्तर: A — पॉलीसल्फ़ोन: अक्रिस्टलीय, अतः पारदर्शी, Tg लगभग 185 °C और अच्छी जलअपघटन-स्थिरता
पारदर्शिता हेतु अक्रिस्टलीय बहुलक चाहिए, और 134 °C की भाप में जलअपघटन-प्रतिरोध हेतु ऊँचा Tg व जलअपघटन-स्थिर आबंध चाहिए, जो पॉलीसल्फ़ोन देता है। PC पारदर्शी है पर बार-बार गरम भाप से प्रभावित होता है और उसका Tg सीमांत है। PEEK व PPS चिमड़े व ताप-सहिष्णु हैं, पर उनकी क्रिस्टलीयता उन्हें अपारदर्शी बनाती है, अतः वे बताई गई आवश्यकता पर खरे नहीं उतरते।एक LLDPE एथिलीन व 1-ऑक्टीन से बनी है, जिसमें 4 mol % एकलक इकाइयाँ ऑक्टीन हैं। मान लीजिए प्रत्येक एकलक इकाई, एथिलीन हो या ऑक्टीन, मेरुदंड में दो कार्बन देती है, और प्रत्येक ऑक्टीन इकाई एक हेक्सिल शाखा रखती है। प्रति 1000 मेरुदंड-कार्बन कितनी हेक्सिल शाखाएँ हैं?
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उत्तर: 20
1000 मेरुदंड-कार्बन ÷ प्रति इकाई 2 कार्बन = 500 एकलक इकाइयाँ। ऑक्टीन इकाइयाँ = 0.04 × 500 = 20, और प्रत्येक एक हेक्सिल शाखा रखती है, अतः प्रति 1000 मेरुदंड-कार्बन 20 शाखाएँ हैं। प्रत्येक ऑक्टीन के शेष छह कार्बन हेक्सिल पार्श्व शृंखला बनाते हैं और 1000 मेरुदंड-कार्बनों में नहीं गिने जाते।थर्मोसेटिंग रेज़िनों के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — बेस उत्प्रेरक पर 1 से अधिक फ़ॉर्मेल्डिहाइड : फ़ीनॉल अनुपात में बना रेज़ोल मेथिलॉल समूह रखता है और अलग हार्डनर के बिना गरम करने पर क्योर होता है; C — यूरिया–फ़ॉर्मेल्डिहाइड रेज़िन का गरम-जल प्रतिरोध मेलामीन–फ़ॉर्मेल्डिहाइड रेज़िन से कम है; D — असंतृप्त पॉलिएस्टर तब क्योर होता है जब मुक्त मूलक मैलिएट या फ़्यूमरेट C=C आबंधों को स्टायरीन तनुकारक के साथ सहबहुलकित करते हैं
रेज़ोल में मेथिलॉल समूह होते हैं और वह स्वतः क्योर होता है, MF का गरम-जल प्रतिरोध UF से अधिक है, और UP मैलिएट/फ़्यूमरेट C=C के सहारे स्टायरीन के साथ मुक्त-मूलक सहबहुलकीकरण से क्योर होता है। नोवोलैक वाला कथन दोनों बातों में गलत है: नोवोलैक अम्ल उत्प्रेरक पर F : P 1 से कम में बनता है और क्योर हेतु उसे हेक्सामेथिलीनटेट्रामीन चाहिए।