बहुलक प्रवाह, मॉड्यूलस–ताप व्यवहार एवं रियोमेट्री

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर के XE5 बहुलक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के खंड XE5.6, बहुलक रियोलॉजी, के पूर्वार्ध का उत्तर देता है; यह नौ वैकल्पिक खंडों में से एक है, जिनमें से परीक्षा में परीक्षार्थी कोई दो चुनता है। पाठ्यक्रम में लिखा है: “Flow of Newtonian and non-Newtonian fluids, different flow equations, dependence of shear modulus on temperature, molecular/segmental deformations at different zones and transitions; Measurements of rheological parameters by capillary, parallel plate, cone-plate rheometer.” अध्याय न्यूटनी व अन्यूटनी प्रवाह तथा घात-नियम, बिंघम, क्रॉस व कैरो समीकरण, गलितों का अपरूपण-पतलापन, मॉड्यूलस की ताप-निर्भरता व प्रत्येक क्षेत्र की आणविक गतियाँ, WLF व अरहीनियस विस्थापन, और तीन रियोमीटर उनके कार्य-सूत्रों सहित सिखाता है। संख्यात्मक प्रश्न घात-नियम प्रवाह-दर, बैगले व रबिनोविच संशोधनों सहित केशिका भित्ति अपरूपण प्रतिबल व दर, शंकु-प्लेट श्यानता तथा WLF विस्थापन गुणांक हैं।

1. न्यूटनी व अन्यूटनी प्रवाह

रियोलॉजी विरूपण व प्रवाह का अध्ययन है। सरल अपरूपण में तरल की एक परत दूसरी के सापेक्ष चलती है, अपरूपण प्रतिबल τ = F/A (Pa) है और अपरूपण दर γ̇ = dv/dy (s⁻¹), वेग-प्रवणता। न्यूटनी तरल τ = μ γ̇ का पालन करता है जिसमें श्यानता μ γ̇ के साथ नहीं बदलती: जल, तेल, तनु विलयन। बहुलक गलित अन्यूटनी है: उसकी आभासी श्यानता η = τ/γ̇ अपरूपण दर (तथा ताप, दाब व समय) पर निर्भर है, अतः τ बनाम γ̇ का प्रवाह-वक्र मूल-बिंदु से जाती सरल रेखा नहीं है। अनुपात अब भी श्यानता कहलाता है, पर वह वक्र का एक बिंदु है, नियतांक नहीं।

समय-स्वतंत्र प्रवाह के प्रकार
व्यवहारश्यानता की प्रवृत्तिउदाहरण
न्यूटनीनियतजल, खनिज तेल
अपरूपण-पतला (छद्मसुघट्य)γ̇ के साथ घटती हैबहुलक गलित व विलयन, अधिकांश रबर
अपरूपण-गाढ़ा (प्रसारी)γ̇ के साथ बढ़ती हैसांद्र कण-निलंबन
बिंघम सुघट्यपराभव प्रतिबल से नीचे प्रवाह नहीं, फिर रैखिकपेस्ट, अति-भरित यौगिक

गलित क्यों पतले होते हैं। निम्न दरों पर उलझे कुंडल कम विक्षुब्ध होते हैं और श्यानता शून्य-अपरूपण पठार η₀ पर रहती है। उच्च दरों पर शृंखलाएँ पुनः उलझने से तेज़ सुलझती और प्रवाह की दिशा में अभिविन्यस्त होती हैं, अतः श्यानता घटती है; अति-उच्च दरों पर द्वितीय, निम्नतर पठार η∞ की ओर पहुँचती है। η₀ मोलर द्रव्यमान के साथ तीव्रता से बढ़ती है (क्रांतिक उलझन द्रव्यमान से नीचे M के अनुपात में और उससे ऊपर लगभग M^3.4 के अनुपात में), अतः चौड़ा वितरण कम दर पर पतला होने लगता है। संसाधन पतलेपन वाले क्षेत्र में होता है, एक्स्ट्रूज़न व इंजेक्शन मोल्डिंग हेतु 10 से 10⁴ s⁻¹।

2. प्रवाह समीकरण

घात नियम (ऑस्टवाल्ड–डी वेले): τ = K γ̇ⁿ, अतः आभासी श्यानता η = K γ̇^(n−1)। K संगति सूचकांक (Pa·sⁿ) और n प्रवाह सूचकांक है। n = 1 न्यूटनी है (K = μ); n < 1 अपरूपण-पतला (बहुलक गलित सामान्यतः 0.2 से 0.6); n > 1 अपरूपण-गाढ़ा। log–log आलेख पर η बनाम γ̇ ढाल n − 1 की सरल रेखा है। हल उदाहरण: K = 1.0 × 10⁴ Pa·sⁿ और n = 0.4। γ̇ = 100 s⁻¹ पर η = 10⁴ × 100^(−0.6) = 631 Pa·s; 10 s⁻¹ पर η = 2512 Pa·s। दर दसगुनी करने पर η 10^0.6 = 3.98 गुना घटती है। नियम वक्र के मध्य भाग पर ही ठीक बैठता है: γ̇ → 0 पर यह अनंत η और γ̇ → ∞ पर शून्य η बताता है।

बिंघम: τ > τ_y हेतु τ = τ_y + μ_p γ̇, और τ ≤ τ_y पर प्रवाह नहीं; τ_y पराभव प्रतिबल और μ_p सुघट्य श्यानता है। हर्शेल–बल्कले रूप τ = τ_y + K γ̇ⁿ दोनों को मिलाता है। पूर्ण गलित-वक्र हेतु क्रॉस मॉडल η = η∞ + (η₀ − η∞)/[1 + (λ γ̇)^m] तथा कैरो मॉडल, जिसका आकार वैसा ही पर फलनीय रूप भिन्न है, दोनों शून्य-अपरूपण पठार η₀, घात-नियम ह्रास और, η∞ सहित, उच्च-अपरूपण पठार देते हैं; λ अभिलाक्षणिक समय है, और 1/λ वह दर बताता है जहाँ पतलापन आरंभ होता है। गुणात्मक रूप से, बड़ा λ यानी पतलापन कम दर पर आरंभ, जो उच्च मोलर द्रव्यमान या चौड़ा वितरण करता है।

नलिका में प्रवाह। त्रिज्या R व लंबाई L की नलिका में स्थिर पटलीय प्रवाह हेतु बल-संतुलन से किसी भी तरल हेतु भित्ति अपरूपण प्रतिबल τ_w = R ΔP/(2L) मिलता है। न्यूटनी तरल हेतु Q = π R⁴ ΔP/(8 μ L) (हेगन–प्वाज़ुइ) और भित्ति अपरूपण दर 4Q/(π R³) है। घात-नियम तरल हेतु Q = [π n/(3n + 1)] R³ (τ_w/K)^(1/n) और भित्ति अपरूपण दर [(3n + 1)/(4n)] × 4Q/(π R³) है, जो न्यूटनी मान 4Q/(π R³) से अधिक है क्योंकि प्लग-जैसे प्रोफ़ाइल में भित्ति पर प्रवणता अधिक तीव्र है। हल उदाहरण: K = 1.0 × 10⁴ Pa·sⁿ, n = 0.4, R = 2 mm, L = 0.1 m व ΔP = 1.5 MPa। τ_w = 0.002 × 1.5 × 10⁶/(2 × 0.1) = 15 000 Pa; τ_w/K = 1.5, और 1.5^(1/0.4) = 1.5^2.5 = 2.756; π n/(3n + 1) = π × 0.4/2.2 = 0.5712; Q = 0.5712 × (2 × 10⁻³)³ × 2.756 = 1.259 × 10⁻⁸ m³/s = 12.6 mm³/s।

⚠️ भित्ति प्रतिबल सूत्र हर तरल हेतु सही है; दर सूत्र नहीं
τ_w = R ΔP/(2L) बल-संतुलन से आता है और किसी संघटक-नियम की अपेक्षा नहीं रखता। दर 4Q/(π R³) केवल न्यूटनी तरल हेतु यथार्थ है, अतः गलित हेतु यह आभासी अपरूपण दर कहलाती है और इसका संशोधन आवश्यक है।

3. मॉड्यूलस बनाम ताप: पाँच क्षेत्र व उनकी आणविक गतियाँ

एक अनिश्चित-रूपी (अस्फटिकी), अक्रॉसलिंकित बहुलक का अपरूपण (विश्रांति) मॉड्यूलस लगभग 10 s के स्थिर समय पर मापिए और ताप बढ़ाइए। यह अनेक दशक गिरता है, जिससे पाँच क्षेत्र बनते हैं:
(1) काँचीय, G लगभग 10⁹ Pa, शृंखलाएँ जमी हुई और केवल आबंध-नमन, तनन व स्थानीय पार्श्व-समूह गति संभव, अतः अनुक्रिया कठोर व प्रत्यास्थ;
(2) काँच संक्रमण (चर्मिल), जहाँ लगभग 20 K में G लगभग तीन दशक गिरता है क्योंकि लगभग 10 से 50 मेरुदंड परमाणुओं की सहकारी खंडीय गति चालू होती है, जो Tg को परिभाषित करता है;
(3) रबरी पठार, G लगभग 10⁵ से 10⁶ Pa, जहाँ उलझनें अस्थायी क्रॉसलिंक का कार्य करती हैं और केवल उलझनों के बीच के खंड हिलते हैं;
(4) रबरी प्रवाह, जहाँ शृंखलाएँ उलझनों से फिसलने लगती हैं और मॉड्यूलस गिरता है;
(5) द्रव प्रवाह, जहाँ पूरी शृंखलाएँ सर्पण (reptation) करके सुलझती हैं, अतः बहुलक ऐसी श्यानता से बहता है जो ताप के साथ लगातार घटती है।

क्षेत्र, गतियाँ व प्रत्येक की लंबाई किससे तय होती है
क्षेत्रआणविक गतिसंरचना का प्रभाव
काँचीयस्थानीय कंपन, पार्श्व-समूह व आबंध गतिमॉड्यूलस सभी बहुलकों हेतु लगभग समान
संक्रमणसहकारी खंडीय गति आरंभTg कठोरता से बढ़ता, सुघट्यकारी से घटता
रबरी पठारखंड हिलते हैं, उलझनें थामती हैंपठार मोलर द्रव्यमान से लंबा होता; क्रॉसलिंकन उसे अपघटन तक बढ़ाता है
प्रवाहपूरी शृंखलाओं का सर्पण व सुलझनाक्रॉसलिंकित जालक में अनुपस्थित, वह रबरी रहता है

दो परिणाम प्रायः पूछे जाते हैं। क्रॉसलिंकित रबर में प्रवाह-क्षेत्र नहीं होता: उसका पठार मॉड्यूलस G ≈ ν R T (ν प्रति इकाई आयतन जालक-शृंखलाओं के मोल) अपघटन तक समतल रहता है और क्रॉसलिंक घनत्व व ताप के साथ बढ़ता है। अर्धस्फटिकी बहुलक Tg से ऊपर उच्चतर मॉड्यूलस रखता है, क्योंकि क्रिस्टलाइट क्रॉसलिंक का कार्य करते हैं, Tm पर गलने तक।

4. काल–ताप अध्यारोपण: WLF व अरहीनियस विस्थापन

बहुलक को गर्म करने का उसकी अनुक्रिया पर वही प्रभाव है जो अधिक प्रतीक्षा या धीमे मापन का है: प्रत्येक विश्रांति-प्रक्रम ताप के साथ उसी विस्थापन गुणांक a_T = τ(T)/τ(T_ref) से तेज़ होता है (T_ref से ऊपर a_T < 1)। कई तापों पर मापे वक्रों को log-समय या log-आवृत्ति अक्ष पर सरकाकर T_ref पर एक मास्टर वक्र बनता है जो अनेक दशक ढकता है। यह केवल ऊष्मा-रियोलॉजिकी सरल पदार्थों हेतु सही है, मिश्रण के Tg या गलनांक के पार नहीं।

WLF समीकरण (विलियम्स–लैंडेल–फ़ेरी), Tg से लगभग Tg + 100 K तक वैध: log₁₀ a_T = − C₁ (T − T_ref)/(C₂ + T − T_ref)। T_ref = Tg लेने पर लगभग सार्वत्रिक नियतांक C₁ = 17.44 व C₂ = 51.6 K हैं। हल उदाहरण: T = Tg + 20 K पर log₁₀ a_T = −17.44 × 20/(51.6 + 20) = −348.8/71.6 = −4.87, अतः a_T = 1.3 × 10⁻⁵: विश्रांति Tg की तुलना में लगभग 75 000 गुना तेज़ है। Tg से बहुत ऊपर, लगभग Tg + 100 K के बाद, मुक्त-आयतन प्रभाव क्षीण होते हैं और अरहीनियस रूप ln a_T = (Ea/R)(1/T − 1/T_ref) प्रयुक्त होता है, T केल्विन में। उदाहरण: Ea = 50 kJ/mol, T_ref = 200 °C व T = 230 °C: ln a_T = (50 000/8.314)(1/503.15 − 1/473.15) = 6014 × (−1.2601 × 10⁻⁴) = −0.758, अतः a_T = 0.47।

⚠️ कौन-सा विस्थापन लें, और चिह्न
Tg से Tg + 100 K के बीच WLF लें, और उससे बहुत ऊपर अरहीनियस। T > T_ref हेतु दोनों a_T < 1 देते हैं: प्रक्रम तेज़ है, अतः मास्टर वक्र छोटे समयों की ओर खिसकता है। WLF नियतांक 17.44 व 51.6 K, T_ref = Tg के साथ लागू हैं; अन्य T_ref पर वे बदल जाते हैं।

5. केशिका रियोमीटर, बैगले व रबिनोविच संशोधन

केशिका रियोमीटर पिस्टन द्वारा निर्धारित चाल पर (अतः Q ज्ञात) बैरल से त्रिज्या R व लंबाई L के डाई में से गलित धकेलता है और दाब ΔP अभिलेखित करता है। यह लगभग 10 से 10⁵ s⁻¹ की अपरूपण दरें ढकता है, जो किसी भी घूर्णी यंत्र से संसाधन के अधिक निकट हैं। कार्य-सूत्र τ_w = ΔP R/(2L) (भित्ति अपरूपण प्रतिबल) और γ̇_a = 4Q/(π R³) (आभासी भित्ति अपरूपण दर) हैं, जिनसे आभासी श्यानता η_a = τ_w/γ̇_a मिलती है। दो संशोधन इन्हें सही मान बनाते हैं।

  • बैगले संशोधन (प्रवेश दाब)। मापित ΔP में प्रवेश-अभिसारी प्रवाह चलाने वाली दाब-हानि ΔP_ent भी सम्मिलित होती है। स्थिर आभासी दर पर अनेक लंबाइयों के डाई हेतु ΔP को L/R के विरुद्ध आलेखित किया जाता है: ΔP = ΔP_ent + 2 τ_w (L/R)। ढाल 2τ_w है और L/R = 0 पर अंतःखंड ΔP_ent। लंबा डाई (L/R लगभग 40 से ऊपर) या शून्य-लंबाई डाई से संशोधन प्रयुक्त हो सकता है।
  • रबिनोविच संशोधन (अन्यूटनी प्रोफ़ाइल)। सही भित्ति अपरूपण दर γ̇_w = [(3n′ + 1)/(4n′)] γ̇_a है, जहाँ n′ = d ln τ_w/d ln γ̇_a log–log प्रवाह-वक्र की स्थानीय ढाल है। न्यूटनी तरल हेतु n′ = 1 और गुणक 1; n′ = 0.5 वाले गलित हेतु 1.25।
  • अन्य त्रुटियाँ। श्यान तापन उच्च दरों पर गलित का ताप बढ़ाता है; दाब श्यानता बढ़ाता है; भित्ति-स्खलन व गलित-भंजन (क्रांतिक τ_w से ऊपर विकृत बहिर्वेधित) उपयोगी परास सीमित करते हैं।

हल उदाहरण (बैगले)। एक आभासी दर पर दो डाई L/R = 20 पर ΔP = 3.0 MPa और L/R = 40 पर ΔP = 4.6 MPa देते हैं। ढाल (4.6 − 3.0)/(40 − 20) = 0.08 MPa प्रति इकाई L/R है, जो 2τ_w के बराबर है, अतः τ_w = 0.04 MPa = 40 kPa, और अंतःखंड 3.0 − 20 × 0.08 = 1.4 MPa। (रबिनोविच) R = 0.5 mm व Q = 1.0 × 10⁻⁸ m³/s हेतु γ̇_a = 4Q/(π R³) = 4 × 10⁻⁸/(π × 1.25 × 10⁻¹⁰) = 101.9 s⁻¹; n′ = 0.5 के साथ γ̇_w = 1.25 × 101.9 = 127.3 s⁻¹।

6. समानांतर-प्लेट व शंकु-प्लेट रियोमीटर

घूर्णी रियोमीटर में नमूना घूमती और स्थिर सतह के बीच अपरूपित होता है, और कोणीय चाल Ω पर बलाघूर्ण T मापा जाता है। ये निम्न दरों (लगभग 10⁻³ से 10² s⁻¹) तक पहुँचते हैं, दोलनी परीक्षण संभव बनाते और अभिलंब बल मापते हैं, पर उच्च दरों पर किनारा-भंजन, नमूना-निष्कासन व जड़त्व से सीमित हैं।

कार्य-सूत्र (न्यूटनी, छोटा अंतराल या शंकु-कोण)
ज्यामितिअपरूपण दरअपरूपण प्रतिबलटिप्पणी
समानांतर प्लेट, त्रिज्या R, अंतराल hकिनारे पर γ̇_R = Ω R/h; त्रिज्या के साथ रैखिक रूप से बदलती हैτ_R = 2T/(π R³) (न्यूटनी)अंतराल समायोज्य: कठोर गलित व भरित यौगिकों हेतु अच्छा; दर असमान
शंकु व प्लेट, त्रिज्या R, शंकु-कोण θ₀ (छोटा, रेडियन में)γ̇ = Ω/θ₀, नमूने में एकसमानτ = 3T/(2π R³)श्यानता η = 3 T θ₀/(2π R³ Ω); अक्षीय बल F से N₁ = 2F/(π R²)

हल उदाहरण। R = 12.5 mm, θ₀ = 0.04 rad, Ω = 0.5 rad/s व बलाघूर्ण T = 0.020 N·m वाले शंकु-प्लेट मापन से γ̇ = 0.5/0.04 = 12.5 s⁻¹ और τ = 3 × 0.020/(2π × (0.0125)³) = 0.06/(1.227 × 10⁻² × 10⁻³) ≈ 4889 Pa मिलता है, अतः η = 4889/12.5 = 391 Pa·s। Ω = 5 rad/s, R = 12.5 mm व h = 1 mm वाली समानांतर प्लेटों हेतु किनारे की दर 5 × 12.5/1 = 62.5 s⁻¹ है। अपरूपण-पतले गलित हेतु समानांतर-प्लेट प्रतिबल को संशोधन चाहिए, τ_R = [T/(2π R³)] (3 + d ln T/d ln γ̇_R), जो d ln T/d ln γ̇_R = 1 होने पर 2T/(π R³) हो जाता है।

🎯 प्रवाह-वक्र हेतु शंकु-प्लेट क्यों पसंद है
अंतराल त्रिज्या के अनुपात में बढ़ता है, अतः स्थानीय दर Ωr/(r θ₀) = Ω/θ₀ सर्वत्र समान है: एक प्रतिबल व एक दर पूरे नमूने का वर्णन करते हैं, वक्र के आकार हेतु संशोधन के बिना। क़ीमत शंकु-शीर्ष पर छोटा अंतराल है, अतः यह बड़े कणों वाले भरित यौगिकों हेतु अनुपयुक्त है, और नमूना-आयतन यथार्थ होना चाहिए।

मुख्य बिंदु

  • न्यूटनी तरल में τ = μ γ̇ नियत μ के साथ; बहुलक गलित अपरूपण-पतले होते हैं क्योंकि शृंखलाएँ सुलझती व अभिविन्यस्त होती हैं। घात नियम τ = K γ̇ⁿ से η = K γ̇^(n−1) (n < 1 पतलापन); बिंघम में पराभव प्रतिबल τ_y है; क्रॉस व कैरो η₀ व η∞ पठार देते हैं।
  • नलिका प्रवाह में τ_w = R ΔP/(2L) सदा; घात-नियम तरल हेतु Q = [π n/(3n + 1)] R³ (τ_w/K)^(1/n), और भित्ति दर 4Q/(π R³) का [(3n + 1)/(4n)] गुना है।
  • अक्रॉसलिंकित अस्फटिकी बहुलक का मॉड्यूलस काँचीय, संक्रमण, रबरी पठार, रबरी प्रवाह व द्रव प्रवाह क्षेत्रों से गिरता है; Tg पर खंडीय गति आरंभ होती है, उलझनें पठार थामती हैं, सर्पण प्रवाह देता है, और क्रॉसलिंकन या क्रिस्टलता प्रवाह-क्षेत्र हटाते हैं।
  • काल–ताप अध्यारोपण वक्रों को a_T से खिसकाता है: Tg से Tg + 100 K तक WLF, log a_T = −17.44 (T − Tg)/(51.6 + T − Tg), और उससे बहुत ऊपर अरहीनियस ln a_T = (Ea/R)(1/T − 1/T_ref); संदर्भ से ऊपर a_T < 1।
  • केशिका रियोमीटर: τ_w = ΔP R/(2L), γ̇_a = 4Q/(π R³); बैगले आलेख (ΔP बनाम L/R) प्रवेश-हानि हटाता है, और रबिनोविच गुणक (3n′ + 1)/(4n′) सही भित्ति दर देता है तथा न्यूटनी तरल हेतु 1 है।
  • समानांतर प्लेट: किनारे पर γ̇_R = Ω R/h (असमान), न्यूटनी हेतु τ_R = 2T/(π R³); शंकु-प्लेट: γ̇ = Ω/θ₀ (एकसमान), τ = 3T/(2π R³), η = 3Tθ₀/(2π R³ Ω)।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. कौन-सा कथन न्यूटनी तरल को परिभाषित करता है?

    1. प्रतिबल अपरूपण दर के समानुपाती है, श्यानता स्थिर ताप पर दर से स्वतंत्र है
    2. इसकी श्यानता अपरूपण दर बढ़ाने पर लगातार घटती है, क्योंकि शृंखलाएँ सुलझती व अभिविन्यस्त होती हैं
    3. यह तब तक नहीं बहता जब तक आरोपित प्रतिबल पराभव प्रतिबल से अधिक न हो, जिसके ऊपर प्रतिबल रैखिक बढ़ता है
    4. इसकी श्यानता हर ताप व दाब पर, और हर अपरूपण दर व समय पर समान है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — प्रतिबल अपरूपण दर के समानुपाती है, श्यानता स्थिर ताप पर दर से स्वतंत्र है

    न्यूटनी तरल में τ = μ γ̇ होता है जिसमें किसी ताप पर μ, γ̇ से स्वतंत्र है; μ स्वयं ताप व दाब पर निर्भर रहती है, अतः अंतिम दावा ग़लत है। घटती श्यानता अपरूपण-पतलापन है, और पराभव प्रतिबल बिंघम तरल का लक्षण है।
  2. उच्च अपरूपण दरों पर बहुलक गलित की आभासी श्यानता क्यों घटती है?

    1. घर्षणी तापन सदा क्रिस्टलीय क्षेत्रों को पूर्णतः गला देता है
    2. हर स्थिति में अपरूपण से शृंखलाओं का मोलर द्रव्यमान आधा हो जाता है
    3. शृंखलाएँ पुनः उलझने से तेज़ सुलझती हैं और प्रवाह की दिशा में अभिविन्यस्त होती हैं
    4. गलित काँच बन जाता है क्योंकि अपरूपण Tg बढ़ाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — शृंखलाएँ पुनः उलझने से तेज़ सुलझती हैं और प्रवाह की दिशा में अभिविन्यस्त होती हैं

    सुलझना व शृंखला-अभिविन्यास प्रवाह-प्रतिरोध घटाते हैं; यह अपरूपण-पतलापन का आणविक मूल है, जो क्रिस्टल-रहित अस्फटिकी गलित में भी दिखता है। शृंखला-विखंडन व श्यान तापन हो सकते हैं, पर वे पार्श्व प्रभाव हैं, कारण नहीं, और अपरूपण गलित को काँच नहीं बनाता।
  3. एक घात-नियम गलित का प्रवाह सूचकांक n = 0.5 है। अपरूपण दर दुगुनी करने पर आभासी श्यानता किस गुणक से बदलती है?

    1. यह 2 से गुणा हो जाती है
    2. यह 1/√2, लगभग 0.71, से गुणा हो जाती है
    3. यह 0.5 से गुणा हो जाती है
    4. यह अपरिवर्तित रहती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — यह 1/√2, लगभग 0.71, से गुणा हो जाती है

    η = K γ̇^(n−1), अतः η₂/η₁ = 2^(n−1) = 2^(−0.5) = 0.71। 0.5 गुणक हेतु n = 0 चाहिए, और कोई परिवर्तन न होने हेतु n = 1, यानी न्यूटनी तरल।
  4. एक अति-भरित पेस्ट अपने भार से नहीं बहता, और एक देहली प्रतिबल से ऊपर वह ऐसे प्रतिबल से बहता है जो अपरूपण दर के साथ रैखिक रूप से बढ़ता है। कौन-सा मॉडल इसका सर्वोत्तम वर्णन करता है?

    1. न्यूटनी मॉडल, τ = μ γ̇
    2. n < 1 वाला घात-नियम मॉडल
    3. शून्य-अपरूपण पठार वाला क्रॉस मॉडल
    4. बिंघम मॉडल, τ = τ_y + μ_p γ̇
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — बिंघम मॉडल, τ = τ_y + μ_p γ̇

    पराभव प्रतिबल के बाद रैखिक प्रवाह बिंघम सुघट्य की परिभाषा है। घात-नियम या क्रॉस तरल किसी भी प्रतिबल पर, कितना भी छोटा, बहता है (क्रॉस मॉडल में तो सीमित शून्य-अपरूपण श्यानता भी है), अतः कोई भी देहली वाले पदार्थ का वर्णन नहीं कर सकता।
  5. दो अक्रॉसलिंकित, अस्फटिकी पॉलीस्टाइरीन नमूनों की रसायन-संरचना समान है, एक का मोलर द्रव्यमान 100 000 g/mol और दूसरे का 400 000 g/mol है। समान ताप-परास पर तुलना करने पर मॉड्यूलस–ताप वक्रों हेतु क्या अपेक्षित है?

    1. बड़े नमूने का काँचीय मॉड्यूलस व पठार मॉड्यूलस दोनों चार गुना अधिक हैं
    2. छोटे नमूने का पठार लंबा है क्योंकि छोटी शृंखलाएँ अधिक उलझती हैं
    3. पठार के अंत तक दोनों वक्र संपाती हैं, और बड़े नमूने का रबरी पठार बहुत लंबा है
    4. किसी में पठार नहीं दिखता, क्योंकि केवल क्रॉसलिंकित बहुलकों में पठार होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — पठार के अंत तक दोनों वक्र संपाती हैं, और बड़े नमूने का रबरी पठार बहुत लंबा है

    काँचीय मॉड्यूलस व उलझन पठार मॉड्यूलस रसायन पर निर्भर हैं, शृंखला-लंबाई पर नहीं, अतः वक्र काँच संक्रमण व पठार के आरंभ तक संपाती हैं। लंबी शृंखलाएँ अधिक देर उलझी रहती हैं, अतः प्रवाह से पहले पठार उच्चतर ताप तक फैलता है। अक्रॉसलिंकित उच्च-मोलर-द्रव्यमान बहुलकों में पठार होता है, उलझनों द्वारा थमा हुआ।
  6. अस्फटिकी बहुलक के काँच संक्रमण पर कौन-सा आणविक प्रक्रम चालू होता है?

    1. मेरुदंड के सहसंयोजी आबंधों का टूटना
    2. क्रिस्टलाइटों का अव्यवस्थित द्रव में गलना
    3. पूरी शृंखलाओं का अपनी उलझनों से सर्पण करना
    4. कई मेरुदंड परमाणुओं की सहकारी खंडीय गति
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — कई मेरुदंड परमाणुओं की सहकारी खंडीय गति

    Tg पर शृंखला-खंडों (दसियों परमाणुओं के क्रम के) की सहकारी सूक्ष्म-ब्राउनी गति प्रायोगिक समय में संभव हो जाती है। पूर्ण-शृंखला सर्पण बहुत ऊपर, प्रवाह-क्षेत्र में ही होता है, गलन क्रिस्टलों का प्रथम-कोटि संक्रमण है, और सहसंयोजी आबंध-भंग अपघटन है।
  7. एक विश्रांति-काल अरहीनियस विस्थापन ln a_T = (Ea/R)(1/T − 1/T_ref) का पालन करता है, Ea = 50 kJ/mol, R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹, T केल्विन में व T_ref = 200 °C। 230 °C पर a_T क्या है (0 °C = 273.15 K लें)?

    1. 0.47
    2. 2.13
    3. 0.22
    4. 0.69
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — 0.47

    T_ref = 473.15 K व T = 503.15 K। 1/T − 1/T_ref = −1.2601 × 10⁻⁴ K⁻¹ और Ea/R = 6014 K, अतः ln a_T = −0.758 और a_T = 0.47। 2.13 उसका व्युत्क्रम है, जो चिह्न उलटने से आता है: T_ref से ऊपर विश्रांति तेज़ है, अतः a_T < 1।
  8. केशिका रियोमेट्री में स्थिर आभासी अपरूपण दर पर ΔP बनाम L/R का बैगले आलेख किस प्रभाव के संशोधन हेतु बनाया जाता है?

    1. अपरूपण-पतले गलित का अपरवलयी वेग-प्रोफ़ाइल
    2. डाई के प्रवेश पर अतिरिक्त दाब-हानि, जब गलित उसमें अभिसृत होता है
    3. श्यान तापन से गलित के ताप की वृद्धि
    4. बैरल की दीवार पर गलित का फिसलना
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — डाई के प्रवेश पर अतिरिक्त दाब-हानि, जब गलित उसमें अभिसृत होता है

    मापित दाब में प्रवेश-हानि सम्मिलित है, और L/R = 0 पर अंतःखंड उसे देता है। वेग-प्रोफ़ाइल का प्रभाव रबिनोविच गुणक से संशोधित होता है, जो भ्रामक उलझन है, बैगले आलेख से नहीं।
  9. त्रिज्या 12.5 mm व अंतराल 1.0 mm वाला समानांतर-प्लेट रियोमीटर 5.0 rad/s पर घुमाया जाता है। किनारे पर अपरूपण दर क्या है, और यह प्लेट पर कैसे बदलती है?

    1. किनारे पर 12.5 s⁻¹ और हर त्रिज्या पर वही
    2. किनारे पर 62.5 s⁻¹ और हर त्रिज्या पर वही
    3. किनारे पर 62.5 s⁻¹, केंद्र पर रैखिक रूप से शून्य तक घटती
    4. सर्वत्र 5.0 s⁻¹, क्योंकि यह कोणीय चाल के बराबर है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — किनारे पर 62.5 s⁻¹, केंद्र पर रैखिक रूप से शून्य तक घटती

    γ̇(r) = Ω r/h, अतः r = R पर γ̇ = 5.0 × 12.5/1.0 = 62.5 s⁻¹, और यह केंद्र पर रैखिक रूप से शून्य तक घटती है। एकसमान दर शंकु-प्लेट ज्यामिति का गुण है, समानांतर प्लेटों का नहीं।
  10. प्रवाह समीकरणों के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. n < 1 वाला घात-नियम तरल अपरूपण-पतला है, और n = 1 पर न्यूटनी
    2. अपरूपण-गाढ़ा तरल घात-नियम सूचकांक n < 1 के संगत है
    3. क्रॉस मॉडल शून्य-अपरूपण श्यानता पठार व उच्च-अपरूपण पठार देता है
    4. बिंघम तरल किसी भी प्रतिबल पर, कितना भी छोटा, बहता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — n < 1 वाला घात-नियम तरल अपरूपण-पतला है, और n = 1 पर न्यूटनी; C — क्रॉस मॉडल शून्य-अपरूपण श्यानता पठार व उच्च-अपरूपण पठार देता है

    n < 1 का अर्थ γ̇ के साथ η घटना (पतलापन) और n = 1 का अर्थ नियत η है, अतः पहला दावा सही है; क्रॉस मॉडल में η₀ व η∞ दोनों हैं। गाढ़ेपन हेतु n > 1 चाहिए, और बिंघम तरल को बहने हेतु τ, τ_y से ऊपर चाहिए।
  11. बहुलकों के मॉड्यूलस–ताप व्यवहार के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. किसी कार्बनिक बहुलक का काँचीय मॉड्यूलस लगभग 10⁹ Pa के क्रम का होता है
    2. रबरी पठार में उलझनें अस्थायी क्रॉसलिंक का कार्य करती हैं
    3. क्रॉसलिंकित रबर में प्रवाह-क्षेत्र नहीं होता और उसका पठार अपघटन तक बना रहता है
    4. काँचीय अवस्था में मेरुदंड-खंड लंबी दूरियों तक स्वतंत्र हिलते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — किसी कार्बनिक बहुलक का काँचीय मॉड्यूलस लगभग 10⁹ Pa के क्रम का होता है; B — रबरी पठार में उलझनें अस्थायी क्रॉसलिंक का कार्य करती हैं; C — क्रॉसलिंकित रबर में प्रवाह-क्षेत्र नहीं होता और उसका पठार अपघटन तक बना रहता है

    ये तीन दावे मानक चित्र हैं: काँचीय मॉड्यूलस लगभग 1 GPa, उलझनें भौतिक क्रॉसलिंक, और स्थायी क्रॉसलिंक प्रवाह-क्षेत्र हटाते हैं। काँच में दीर्घ-परास खंडीय गति जमी होती है, अतः अंतिम दावा सत्य का उलटा है।
  12. केशिका रियोमीटर के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. आभासी भित्ति अपरूपण दर 4Q/(π R³) है
    2. बैगले आलेख में L/R = 0 पर अंतःखंड प्रवेश दाब-हानि है
    3. रबिनोविच गुणक (3n′ + 1)/(4n′) न्यूटनी तरल हेतु भी 1 से भिन्न होता है
    4. भित्ति अपरूपण प्रतिबल ΔP R/(2L) है, बशर्ते दाब-हानि पूर्ण विकसित प्रवाह की हो
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — आभासी भित्ति अपरूपण दर 4Q/(π R³) है; B — बैगले आलेख में L/R = 0 पर अंतःखंड प्रवेश दाब-हानि है; D — भित्ति अपरूपण प्रतिबल ΔP R/(2L) है, बशर्ते दाब-हानि पूर्ण विकसित प्रवाह की हो

    आभासी दर का सूत्र, बैगले अंतःखंड तथा भित्ति प्रतिबल का कथन कार्य-सूत्र व बैगले तर्क हैं। न्यूटनी तरल हेतु n′ = 1, अतः रबिनोविच गुणक ठीक (3 + 1)/4 = 1 है; यह केवल अन्यूटनी गलितों हेतु मायने रखता है।
  13. एक बहुलक गलित घात-नियम τ = K γ̇ⁿ का पालन करता है, K = 1.0 × 10⁴ Pa·sⁿ व n = 0.4। वह त्रिज्या R = 2.0 mm व लंबाई L = 0.10 m की वृत्ताकार नलिका में दाब-हानि ΔP = 1.5 MPa पर स्थिर बहता है। τ_w = R ΔP/(2L) और Q = [π n/(3n + 1)] R³ (τ_w/K)^(1/n) प्रयुक्त कर आयतन-प्रवाह दर mm³/s में एक दशमलव स्थान तक ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 12.6

    τ_w = 0.002 × 1.5 × 10⁶/(2 × 0.10) = 15 000 Pa, अतः τ_w/K = 1.5 और 1.5^2.5 = 2.756। π × 0.4/2.2 = 0.5712 और R³ = 8 × 10⁻⁹ m³, अतः Q = 0.5712 × 8 × 10⁻⁹ × 2.756 = 1.259 × 10⁻⁸ m³/s = 12.6 mm³/s। घातांक के रूप में 1/n = 2.5 के स्थान पर n = 0.4 लेना प्रचलित भूल है।
  14. एक स्थिर आभासी अपरूपण दर पर केशिका डाइयों में बहते गलित हेतु L/R = 20 वाले डाई पर दाब-हानि 3.0 MPa और L/R = 40 वाले डाई पर 4.6 MPa है। बैगले संबंध ΔP = ΔP_ent + 2 τ_w (L/R) प्रयुक्त कर भित्ति अपरूपण प्रतिबल τ_w, kPa में, ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 40

    दोनों बिंदुओं से ढाल (4.6 − 3.0)/(40 − 20) = 0.08 MPa प्रति इकाई L/R मिलती है, और यह ढाल 2τ_w के बराबर है। अतः τ_w = 0.04 MPa = 40 kPa, और प्रवेश-हानि 3.0 − 20 × 0.08 = 1.4 MPa। कच्चे 3.0 MPa के साथ सीधे ΔP R/(2L) लेने पर 75 kPa आता जिसमें प्रवेश-हानि सम्मिलित है।
  15. 0.50 mm त्रिज्या की केशिका Q = 1.0 × 10⁻⁸ m³/s पर गलित वहन करती है। आभासी भित्ति अपरूपण दर γ̇_a = 4Q/(π R³) है। log–log प्रवाह-वक्र की स्थानीय ढाल n′ = 0.5 है, और रबिनोविच संशोधन γ̇_w = [(3n′ + 1)/(4n′)] γ̇_a है। सही भित्ति अपरूपण दर, s⁻¹ में, एक दशमलव स्थान तक ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 127.3

    R³ = (0.5 × 10⁻³)³ = 1.25 × 10⁻¹⁰ m³, अतः γ̇_a = 4 × 10⁻⁸/(π × 1.25 × 10⁻¹⁰) = 101.86 s⁻¹। गुणक (1.5 + 1)/(2) = 1.25 है, अतः γ̇_w = 127.3 s⁻¹।
  16. एक शंकु-प्लेट रियोमीटर में प्लेट-त्रिज्या R = 12.5 mm और शंकु-कोण θ₀ = 0.040 rad है। Ω = 0.50 rad/s पर बलाघूर्ण T = 0.020 N·m है। न्यूटनी-प्रकार पाठ्यांक हेतु τ = 3T/(2π R³) व γ̇ = Ω/θ₀ प्रयुक्त कर श्यानता η = τ/γ̇, Pa·s में, निकटतम पूर्ण संख्या तक ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 391

    R³ = (0.0125)³ = 1.953 × 10⁻⁶ m³, अतः τ = 3 × 0.020/(2π × 1.953 × 10⁻⁶) = 4889 Pa। γ̇ = 0.50/0.040 = 12.5 s⁻¹, अतः η = 4889/12.5 = 391 Pa·s। प्लेट-प्लेट प्रतिबल 2T/(π R³) लेने पर मान ग़लत आता।
  17. WLF समीकरण log₁₀ a_T = − C₁ (T − T_ref)/(C₂ + T − T_ref) लीजिए, T_ref = Tg, C₁ = 17.44 व C₂ = 51.6 K के साथ। Tg से 20 K ऊपर ताप पर log₁₀ a_T दो दशमलव स्थान तक ज्ञात कीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: -4.87

    T − T_ref = 20 K, अतः log₁₀ a_T = −17.44 × 20/(51.6 + 20) = −348.8/71.6 = −4.87। T_ref से ऊपर ऋणात्मक चिह्न सही है: अनुक्रिया तेज़ है।