बहुलक रसायन I: एकलक, श्रृंखला-वृद्धि व पद-वृद्धि बहुलकन, Metallocene तथा नियंत्रित विधियाँ

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर के XE5 बहुलक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के खंड XE5.1 “Polymer Chemistry” पर दो अध्यायों में से पहला है; यह नौ वैकल्पिक खंडों में से एक है, जिनमें से परीक्षा में कोई दो चुने जाते हैं। यह शीर्षक के पहले भाग का उत्तर देता है: “Monomers; Degree of polymerization; Classification of polymers; Polymerization reactions: addition and condensation, their kinetics; Metallocene polymers and other newer methods of polymerization.” इसमें प्रकार्यता (functionality) व बहुलकन की मात्रा (DP), बहुलकों का वर्गीकरण, मुक्त-मूलक श्रृंखला बहुलकन व उसकी स्थिर-अवस्था बलगतिकी, गतिक श्रृंखला-लंबाई व Mayo समीकरण, आयनिक व समन्वय बहुलकन की रूपरेखा, Carothers समीकरण सहित पद-वृद्धि (step-growth) बहुलकन व उसकी बलगतिकी, तथा metallocene व नियंत्रित/जीवंत विधियाँ (ATRP, RAFT, वलय-विवरण, group-transfer) पढ़ाई जाती हैं। संख्यात्मक प्रश्न हैं: रूपांतरण या स्टॉइकियोमेट्रिक अनुपात से Carothers Xn, Xn से Mn, दरों से गतिक श्रृंखला-लंबाई, और जीवंत बहुलकन का Xn।

1. एकलक, प्रकार्यता, बहुलकन की मात्रा व वर्गीकरण

एकलक (monomer) वह छोटा अणु है जो दूसरों से जुड़कर बहुलक बनाता है। उसकी प्रकार्यता f उन स्थलों की संख्या है जिनसे वह बंध बना सकता है: विनाइल एकलक CH₂=CHX की f = 2 (द्विबंध खुलकर दो बंध देता है), ऐडिपिक अम्ल व हेक्सामेथिलीन डाइएमीन की f = 2, ग्लिसरॉल की f = 3। द्विप्रकार्यक एकलक रैखिक श्रृंखला देते हैं; औसत प्रकार्यता 2 से अधिक होने पर शाखन और अंततः जाल (network) बनता है। बहुलकन की मात्रा Xn (DP) एक श्रृंखला में संरचनात्मक (आवर्ती) इकाइयों की संख्या है, और Mn = Xn·M₀ + सिरे के समूह, जहाँ M₀ एक आवर्ती इकाई का द्रव्यमान है; सहबहुलक या दो एकलकों से बने पद-वृद्धि बहुलक में M₀ प्रति संरचनात्मक इकाई का माध्य द्रव्यमान है (AA–BB आवर्ती इकाई के द्रव्यमान का आधा)। पूरे अध्याय में परिपाटी: Xn संरचनात्मक इकाइयाँ गिनता है, AA–BB जोड़ी में एकलक अणु नहीं।

बहुलकों के वर्गीकरण के सामान्य आधार
आधारवर्गउदाहरण
उद्गमप्राकृतिक, अर्ध-संश्लेषित, संश्लेषितसेलुलोज़, सेलुलोज़ ऐसीटेट, पॉलिएथिलीन
ऊष्मीय व्यवहारतापसुघट्य, तापदृढ़, प्रत्यास्थलकPE, फ़ीनॉलिक रेज़िन, पॉलिआइसोप्रीन
क्रियाविधिश्रृंखला-वृद्धि (योगात्मक), पद-वृद्धि (संघनन)PS; PET, नायलॉन 66
संघटनसमबहुलक, सहबहुलकPVC; SBR
संरचनारैखिक, शाखित, क्रॉसलिंक्ड/जालकHDPE, LDPE, वल्कनित रबर
⚠️ योगात्मक और श्रृंखला-वृद्धि हर स्थिति में समान नहीं
संघनन बहुलकन की परिभाषा क्रियाविधि (पद-वृद्धि: किसी भी आकार के कोई दो अणु अभिक्रिया कर सकते हैं, प्रायः छोटा अणु निकलता है) से है, केवल उप-उत्पाद के निकलने से नहीं। पॉलियूरेथेन पद-वृद्धि से बनता है पर कोई उप-उत्पाद नहीं निकलता; कैप्रोलैक्टम का वलय-विवरण श्रृंखला-वृद्धि जैसा है यद्यपि नायलॉन 6 पॉलिएमाइड है।

2. मुक्त-मूलक योगात्मक बहुलकन व उसकी स्थिर-अवस्था बलगतिकी

श्रृंखला-वृद्धि तीन चरणों में होती है। आरंभन: आरंभक I (परॉक्साइड या AIBN जैसा ऐज़ो यौगिक) विघटित होता है, I → 2R•, वेग स्थिरांक k_d, और R• एकलक से जुड़ता है। केवल अंश f (दक्षता, लगभग 0.3–0.8) मूलक श्रृंखला आरंभ करते हैं, इसलिए आरंभन की दर Ri = 2f·k_d[I] है। वृद्धि: M• + M → M•, वेग स्थिरांक k_p, प्रति श्रृंखला लगभग एक सेकंड में 10³–10⁵ बार, Rp = k_p[M][M•]। समापन: दो मूलक संयोजन (coupling, दो से एक श्रृंखला) या असमानुपातन (H स्थानांतरण, दो श्रृंखलाएँ) से अभिक्रिया करते हैं; इस परिपाटी में कि k_t प्रति नष्ट हुए मूलक पर परिभाषित है, Rt = 2k_t[M•]²।

स्थिर-अवस्था परिकल्पना: मूलक सांद्रता अत्यल्प (10⁻⁸ से 10⁻⁷ mol/L) व स्थिर है, इसलिए Ri = Rt: 2f·k_d[I] = 2k_t[M•]², जिससे [M•] = (f·k_d[I]/k_t)^½। तब

Rp = k_p[M]·(f·k_d[I]/k_t)^½
(दीर्घ-श्रृंखला सन्निकटन: एकलक केवल वृद्धि में खर्च होता है)

Rp एकलक में प्रथम कोटि और आरंभक में अर्ध-कोटि है; [I] दोगुना करने पर Rp केवल √2 गुना बढ़ता है, अर्ध-कोटि द्विअणुक समापन की पहचान है। कुल सक्रियण ऊर्जा E = E_p + ½(E_d − E_t); E_d बड़ी (लगभग 120–150 kJ/mol) होने से ताप के साथ दर तेज़ी से बढ़ती है जबकि Xn घटता है।

⚠️ आरंभक दोगुना करना
Rp ∝ [I]^½ पर ν (अतः Xn) ∝ [I]^−½। आरंभक दोगुना करने से अभिक्रिया 1.41 गुना तेज़ होती है और श्रृंखलाएँ उसी गुणक से छोटी होती हैं। दर और आणविक भार विपरीत दिशा में चलते हैं; यह समझौता केवल नियंत्रित/जीवंत विधियाँ तोड़ती हैं।

3. गतिक श्रृंखला-लंबाई, श्रृंखला स्थानांतरण व Mayo समीकरण

गतिक श्रृंखला-लंबाई ν प्रति उत्पन्न मूलक जुड़ने वाली एकलक इकाइयों की औसत संख्या है: ν = Rp/Ri = Rp/Rt = k_p[M]/(2(f·k_d·k_t[I])^½)। स्थानांतरण न हो तो पूर्णतः संयोजन समापन में Xn = 2ν (प्रत्येक श्रृंखला पर दो आरंभक खंड) और असमानुपातन में Xn = ν। संख्यात्मक बोध: Rp = 1.0×10⁻⁴ mol L⁻¹ s⁻¹ और Ri = 2.0×10⁻⁷ mol L⁻¹ s⁻¹ से ν = 500, अतः Xn = 1000 (संयोजन) या 500 (असमानुपातन)।

श्रृंखला स्थानांतरण (एकलक, विलायक S, आरंभक, बहुलक या जान-बूझकर डाले गए स्थानांतरण-कारक को) एक श्रृंखला समाप्त करता है पर मूलक आगे बढ़ा देता है, अतः दर अपरिवर्तित रहती है और श्रृंखलाएँ छोटी होती हैं। Mayo समीकरण है 1/Xn = 1/Xn,0 + C_M + C_S[S]/[M] + C_I[I]/[M], जहाँ Xn,0 स्थानांतरण के बिना का मान है और प्रत्येक C = k_tr/k_p। 1/Xn बनाम [S]/[M] का Mayo आलेख सीधी रेखा है जिसकी प्रवणता C_S है। मर्कैप्टन (C_S बड़ा) आणविक-भार नियामक के रूप में प्रयुक्त होते हैं। बहुलक पर स्थानांतरण शाखाएँ बनाता है (LDPE में लघु व दीर्घ शाखन)।

🎯 स्वतः त्वरण (जेल या Trommsdorff प्रभाव)
संहति (bulk) बहुलकन में श्यानता बढ़ती है, बड़े मूलक धीमे विसरित होते हैं, इसलिए k_t तीव्रता से घटता है जबकि छोटा एकलक अब भी श्रृंखला-सिरों तक पहुँचता है (k_p लगभग वही)। मूलक सांद्रता व Rp में उछाल आता है और ऊष्मा-निर्गम अनियंत्रित हो सकता है। इसीलिए स्थिर-अवस्था बलगतिकी केवल निम्न रूपांतरण पर लागू है।

आयनिक व समन्वय बहुलकन (रूपरेखा)। धनायनिक: इलेक्ट्रॉन-दाता प्रतिस्थापी कार्बोधनायन को स्थायी करते हैं (आइसोब्यूटिलीन, विनाइल ईथर); लुईस अम्ल व सह-आरंभक (BF₃/H₂O) निम्न ताप पर, समापन स्थानांतरण से। ऋणायनिक: इलेक्ट्रॉन-आकर्षी समूह कार्बऋणायन को स्थायी करते हैं (स्टाइरीन, ऐक्रिलोनाइट्राइल, डाइईन); आरंभक जैसे n-ब्यूटिललिथियम; शुद्ध तंत्र में समापन नहीं होता (जीवंत), अतः पूर्ण रूपांतरण पर Xn = [M]₀/[I]₀, श्रृंखलाएँ सक्रिय रहती हैं और क्रमिक एकलक योग से ब्लॉक सहबहुलक बनते हैं। समन्वय (Ziegler–Natta): ऐल्युमिनियम ऐल्किल के साथ विषमांगी TiCl₃/TiCl₄ संक्रमण-धातु–कार्बन बंध में एकलक के निवेशन से त्रिविम-नियमित समतानी (isotactic) पॉलिप्रोपिलीन व रैखिक पॉलिएथिलीन देता है (Cossee–Arlman चित्र)।

4. पद-वृद्धि बहुलकन व Carothers समीकरण

पद-वृद्धि में एकलक पहले द्वितय (dimer), त्रितय आदि बनाते हैं; कोई भी दो स्पीशीज़ अभिक्रिया कर सकती हैं, और उच्च बहुलक केवल बहुत उच्च रूपांतरण पर बनता है। मान लें p अभिक्रिया की सीमा है (अभिक्रियित क्रियात्मक समूहों का अंश, सीमित प्रकार का)। समआण्विक AA + BB या A–B तंत्र में, प्रारंभ में N₀ अणु और p पर N अणु हों, तो Xn = N₀/N, और चूँकि N = N₀(1 − p):

Xn = 1/(1 − p)
(Carothers समीकरण, समआण्विक)। p = 0.90 → Xn = 10; p = 0.98 → 50; p = 0.99 → 100; p = 0.999 → 1000।

M₀ = 113 g/mol माध्य संरचनात्मक-इकाई द्रव्यमान वाले पॉलिएस्टर के p = 0.99 तक अभिक्रिया करने पर Xn = 100 और Mn = 100 × 113 = 11,300 g/mol (सिरे के समूह उपेक्षित)। इसलिए उपयोगी अभियांत्रिक बहुलकों का Mn पाने के लिए p का 0.99 से ऊपर होना आवश्यक है, जिसके लिए शुद्धता, पार्श्व अभिक्रिया का अभाव और साम्य खिसकाने हेतु उप-उत्पाद (पानी, या एस्टर विनिमय में मेथेनॉल) का निष्कासन चाहिए।

स्टॉइकियोमेट्रिक असंतुलन। r = N_A/N_B ≤ 1 (A व B समूहों की संख्याओं का अनुपात, A कम) हो तो Xn = (1 + r)/(1 + r − 2rp)। p → 1 पर Xn = (1 + r)/(1 − r): r = 0.98 के लिए Xn = 1.98/0.02 = 99, अर्थात् किसी एक एकलक की 2% अधिकता श्रृंखला-लंबाई को लगभग 100 पर सीमित कर देती है चाहे अभिक्रिया कितनी भी चले। एकप्रकार्यक अभिकर्मक की जान-बूझकर डाली गई अल्प मात्रा भी Mn को नियंत्रित करती व उसे आगे की वृद्धि से स्थिर करती है।

⚠️ कौन-सा p, कौन-सा r
p के लिए सीमित समूह लें और r के अंश में कम वाला समूह रखें। r > 1 लेने या p को अधिक वाले एकलक का रूपांतरण मानने से गलत मान आते हैं। A व B असमान मात्रा में मिलाने पर p = 1 पर भी Xn परिमित रहता है।

जाल-निर्माण। औसत प्रकार्यता f_avg > 2 वाले एकलकों के लिए Carothers जेलन p_c = 2/f_avg पर बताता है (यह अधिमान है, क्योंकि Flory के सांख्यिकीय सिद्धांत वाला वास्तविक जेल बिंदु पहले आता है)। ग्लिसरॉल (f = 3) व थैलिक ऐनहाइड्राइड (f = 2) के स्टॉइकियोमेट्रिक 2:3 अनुपात में f_avg = (2×3 + 3×2)/(2 + 3) = 2.4 और p_c = 0.833।

5. पद-वृद्धि बलगतिकी व श्रृंखला-लंबाई का वितरण

एस्टरीकरण अम्ल-उत्प्रेरित होता है। समआण्विक समूहों के लिए, प्रत्येक की सांद्रता C = C₀(1 − p) हो, तो ह्रास की दर −dC/dt = k[COOH][OH][उत्प्रेरक]। बाह्य उत्प्रेरित (प्रबल अम्ल मिलाया, स्थिर): −dC/dt = k′C², जिससे 1/C = 1/C₀ + k′t, अतः Xn = 1 + k′C₀t, समय में रैखिक। स्व-उत्प्रेरित (द्विअम्ल ही उत्प्रेरक): −dC/dt = kC³, जिससे Xn² = 1 + 2kC₀²t, अतः Xn केवल t^½ से बढ़ता है और अनुत्प्रेरित अभिक्रिया बहुत धीमी है। 1/(1 − p) बनाम t (उत्प्रेरित) या 1/(1 − p)² बनाम t (स्व-उत्प्रेरित) सीधी रेखाएँ हैं।

Flory की सर्वाधिक-प्रायिक वितरण। किसी समूह के अभिक्रियित होने की प्रायिकता p है, अतः x-अंशक का संख्या-अंश N_x/N = (1 − p)p^(x−1) और भार-अंश w_x = x(1 − p)²p^(x−1) है। औसत हैं Xn = 1/(1 − p), Xw = (1 + p)/(1 − p), अतः उच्च रूपांतरण पर परिक्षेपण Xw/Xn = 1 + p → 2। यह मान 2 साम्य पर बने रैखिक पद-वृद्धि बहुलकों की पहचान है।

श्रृंखला-वृद्धि बनाम पद-वृद्धि, आमने-सामने
विशेषताश्रृंखला-वृद्धि (मूलक)पद-वृद्धि
सक्रिय केंद्रकेवल बढ़ते श्रृंखला-सिरेकोई भी क्रियात्मक समूह
उच्च Mn पर शेष एकलकपर्याप्त; एकलक व बहुलक साथ रहते हैंलगभग नहीं; एकलक शीघ्र समाप्त
रूपांतरण के साथ Mnतुरंत उच्च, लगभग स्थिरधीमा बढ़ता है, p → 1 पर ही विशाल
दीर्घ अभिक्रिया-समयउपज बढ़ाता है, Mn नहींMn बढ़ाता है
💡 नृत्य-मंच बनाम कतार
श्रृंखला-वृद्धि उस मंच जैसी है जहाँ कुछ लोग एक-एक करके नए लोगों को खींचते हैं; पद-वृद्धि भीड़ भरे फ़र्श जैसी है जहाँ कोई भी जोड़ी या समूह हाथ मिला सकता है, और बड़े समूह तभी बनते हैं जब लगभग सभी को साथी मिल चुका हो।

6. Metallocene उत्प्रेरक व नई (नियंत्रित/जीवंत) विधियाँ

Metallocene उत्प्रेरक समूह-4 धातु (Zr, Ti, Hf) के साइक्लोपेंटाडाइएनिल-प्रकार के वलयों के बीच बने सैंडविच संकुल हैं, जो सह-उत्प्रेरक मेथिलऐल्युमिनॉक्सेन (MAO) से सक्रिय किए जाते हैं (Kaminsky)। क्योंकि हर धातु-केंद्र रासायनिक रूप से समान है (एकल-स्थल), बहुलक का आणविक-भार वितरण संकीर्ण होता है (परिक्षेपण लगभग 2, जबकि बहु-स्थल Ziegler–Natta में 4–10), सहएकलक समान रूप से समाविष्ट होता है (नियंत्रित लघु शाखन वाली रैखिक निम्न-घनत्व पॉलिएथिलीन), और त्रिविम-नियमितता लिगैंड की सममिति से तय होती है: सेतुबद्ध (ansa) C₂-सममित संकुल समतानी व Cs-सममित संकुल सिंडियोतानी (syndiotactic) पॉलिप्रोपिलीन देते हैं। समान घनत्व पर metallocene पॉलिओलेफ़िन अधिक पारदर्शी व दृढ़ होते हैं।

नियंत्रित/जीवंत मूलक बहुलकन श्रृंखलाओं को सुप्त अवस्था में रखता है, किसी क्षण केवल अत्यल्प अंश सक्रिय होता है, अतः समापन दबा रहता है और सभी श्रृंखलाएँ साथ बढ़ती हैं। आदर्श जीवंत तंत्र में Xn = [M]₀·p/[I]₀ (p = एकलक रूपांतरण) और परिक्षेपण 1 + 1/Xn (Poisson) की ओर जाता है। उदाहरण: [M]₀ = 2.0 M, [I]₀ = 0.020 M, p = 0.80 से Xn = 2.0 × 0.80/0.020 = 80 और श्रृंखला-लंबाई रूपांतरण के साथ रैखिक बढ़ती है, परंपरागत मूलक बहुलकन के विपरीत।

नई विधियाँ, रूपरेखा में
विधिमुख्य विचारप्रयोग
ATRPऐल्किल हैलाइड आरंभक, Cu(I)/लिगैंड हैलोजन को उत्क्रमणीय रूप से हटाकर मूलक व Cu(II)–हैलाइड देता हैस्टाइरीनिक व (मेथ)ऐक्रिलेट के ब्लॉक, तारक, ग्राफ़्ट
RAFTथायोकार्बोनिलथायो श्रृंखला-स्थानांतरण कारक; अपजनित स्थानांतरण सक्रिय व सुप्त श्रृंखलाओं का विनिमय कराता हैएकलक की व्यापक रेंज, धातु नहीं
वलय-विवरण (ROP)तनावयुक्त वलय खुलता है: लैक्टाइड, ε-कैप्रोलैक्टोन, चक्रीय ईथर, लैक्टमपॉलिलैक्टाइड, पॉलिकैप्रोलैक्टोन, नायलॉन 6
ग्रुप-ट्रांसफ़र (GTP)सिलिल कीटीन ऐसिटल आरंभक सिलिल समूह को आने वाले (मेथ)ऐक्रिलेट में स्थानांतरित करता है, नाभिकस्नेही उत्प्रेरककक्ष ताप पर जीवंत ऐक्रिलिक
ℹ️ सीलिंग तापमान
वृद्धि ऊष्माक्षेपी है पर एन्ट्रॉपी घटाती है, इसलिए ΔG_p = ΔH_p − TΔS_p सीलिंग तापमान T_c = ΔH_p/ΔS_p से ऊपर धनात्मक हो जाता है, जहाँ बहुलकन व अवबहुलकन संतुलित होते हैं। भारी 1,1-प्रतिस्थापी वाले एकलकों (α-मेथिलस्टाइरीन) का T_c कम होता है, इसलिए वे केवल ठंड में बहुलकित होते हैं।

मुख्य बिंदु

  • Xn संरचनात्मक इकाइयाँ गिनता है; Mn = Xn·M₀। औसत प्रकार्यता 2 से अधिक होने पर शाखन व जेलन p_c = 2/f_avg (Carothers) पर।
  • मुक्त-मूलक: Rp = k_p[M](f·k_d[I]/k_t)^½, ν = Rp/Ri; संयोजन में Xn = 2ν, असमानुपातन में ν; Rp ∝ [I]^½, Xn ∝ [I]^−½।
  • Mayo: 1/Xn = 1/Xn,0 + C_M + C_S[S]/[M]; स्थानांतरण दर बदले बिना श्रृंखला छोटी करता है; जेल प्रभाव (कम k_t) उच्च रूपांतरण पर दर बढ़ाता है।
  • पद-वृद्धि: Xn = 1/(1 − p), असंतुलन में (1 + r)/(1 + r − 2rp); उच्च बहुलक के लिए p > 0.99; उत्प्रेरित Xn = 1 + k′C₀t, स्व-उत्प्रेरित Xn² = 1 + 2kC₀²t; Xw/Xn = 1 + p।
  • शुद्ध तंत्र में ऋणायनिक बहुलकन जीवंत है (Xn = [M]₀/[I]₀); Ziegler–Natta बहु-स्थल व चौड़ा, metallocene एकल-स्थल व संकीर्ण, लिगैंड-नियंत्रित त्रिविम-नियमितता के साथ।
  • ATRP, RAFT, ROP व GTP पूर्व-निर्धारित Xn = [M]₀p/[I]₀, कम परिक्षेपण व ब्लॉक संरचनाएँ देते हैं।

अभ्यास प्रश्न (16)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. संघनन बहुलकन में निम्न में से किस एकलक की प्रकार्यता तीन है?

    1. ऐडिपिक अम्ल
    2. एथिलीन ग्लाइकॉल
    3. ग्लिसरॉल
    4. हेक्सामेथिलीन डाइएमीन
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — ग्लिसरॉल

    ग्लिसरॉल में तीन हाइड्रॉक्सिल समूह हैं, अतः f = 3 और यह शाखन या जाल देता है। ऐडिपिक अम्ल, एथिलीन ग्लाइकॉल व हेक्सामेथिलीन डाइएमीन में दो-दो अभिक्रियाशील समूह (f = 2) हैं और ये रैखिक श्रृंखला देते हैं।
  2. द्विअणुक समापन वाले मुक्त-मूलक बहुलकन में स्थिर ताप व एकलक सांद्रता पर, श्रृंखला स्थानांतरण के बिना, आरंभक सांद्रता दोगुनी की जाती है। क्या होता है?

    1. दर लगभग 1.41 गुना बढ़ती है और Xn उसी गुणक से घटता है
    2. दर दोगुनी होती है क्योंकि आरंभन प्रथम कोटि है, और Xn आधा रह जाता है
    3. दर 1.41 गुना बढ़ती है जबकि Xn अपरिवर्तित रहता है, क्योंकि स्थानांतरण नहीं है
    4. दर अपरिवर्तित रहती है पर Xn आधा रह जाता है, क्योंकि समापन तेज़ है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — दर लगभग 1.41 गुना बढ़ती है और Xn उसी गुणक से घटता है

    Rp ∝ [I]^½ और ν ∝ [I]^−½, अतः दोनों √2 गुणक से विपरीत दिशा में बदलते हैं। दर का दोगुना होना [I] पर प्रथम कोटि मानने से आता है, जिसे आकर्षक विकल्प मानता है; वह यह भूलता है कि समापन मूलकों में द्वितीय कोटि है।
  3. समआण्विक पद-वृद्धि बहुलकन में अभिक्रिया की सीमा p = 0.95 से बढ़ाकर p = 0.99 की जाती है। संख्या-औसत बहुलकन-मात्रा कितने गुना बढ़ती है?

    1. लगभग 1.04 गुना
    2. 2 गुना
    3. 4 गुना
    4. 5 गुना
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 5 गुना

    Xn = 1/(1 − p): 1/0.05 = 20 और 1/0.01 = 100, यानी 5 गुना। p में छोटा परिवर्तन श्रृंखला-लंबाई में बड़ा परिवर्तन छिपाता है, इसीलिए रूपांतरण के अंतिम कुछ प्रतिशत महत्त्वपूर्ण हैं; p के मानों का 1.04 अनुपात लेना आकर्षक भूल है।
  4. अत्यंत शुष्क, अशुद्धि-रहित हाइड्रोकार्बन विलायक में n-ब्यूटिललिथियम स्टाइरीन का आरंभन करता है। कौन-सा वर्णन सही है?

    1. श्रृंखलाएँ दो कार्बऋणायनों के संयोजन से समाप्त होती हैं
    2. एकलक खत्म होने के बाद भी श्रृंखलाएँ सक्रिय रहती हैं, इसलिए दूसरा एकलक जुड़कर ब्लॉक सहबहुलक बना सकता है
    3. कार्बोधनायन बनाने के लिए लुईस अम्ल सह-आरंभक आवश्यक है
    4. वर्धमान स्पीशीज़ मुक्त मूलक है जिसमें Xn = 2ν
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — एकलक खत्म होने के बाद भी श्रृंखलाएँ सक्रिय रहती हैं, इसलिए दूसरा एकलक जुड़कर ब्लॉक सहबहुलक बना सकता है

    समान आवेश वाले कार्बऋणायन सिरे प्रतिकर्षित करते हैं और शुद्ध तंत्र में स्थानांतरण या समापन नहीं होता, अतः बहुलकन जीवंत है और दूसरे एकलक से ब्लॉक सहबहुलक बनते हैं। संयोजन व Xn = 2ν मूलक बहुलकन के हैं; लुईस अम्ल सह-आरंभक धनायनिक बहुलकन का है।
  5. स्टाइरीन के मुक्त-मूलक बहुलकन में बड़े स्थानांतरण स्थिरांक वाला मर्कैप्टन श्रृंखला-स्थानांतरण कारक के रूप में मिलाया जाता है। उसके बिना की अभिक्रिया की तुलना में मुख्य प्रभाव है

    1. बहुत कम बहुलकन दर और अपरिवर्तित श्रृंखला-लंबाई
    2. उच्चतर Xn, क्योंकि हर स्थानांतरण एक नया आरंभक मूलक बनाता है
    3. निम्नतर Xn, दर लगभग अपरिवर्तित
    4. जीवंत बहुलकन जिसका परिक्षेपण 1 के निकट
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — निम्नतर Xn, दर लगभग अपरिवर्तित

    स्थानांतरण एक श्रृंखला समाप्त कर समान अभिक्रियाशीलता का नया मूलक शुरू करता है, अतः दर लगभग वही रहती है जबकि Mayo समीकरण में 1/Xn, C_S[S]/[M] से बढ़ता है। दर घटने या Xn बढ़ने के लिए नया मूलक निष्क्रिय होना या श्रृंखलाएँ न कटना आवश्यक होगा।
  6. मेथिल मेथैक्रिलेट के संहति मुक्त-मूलक बहुलकन में, आरंभक खर्च होते रहने पर भी, मध्यम रूपांतरण पर दर तीव्रता से बढ़ती है। सही स्पष्टीकरण यह है कि

    1. k_p बढ़ता है क्योंकि श्यान माध्यम में बढ़ते मूलक अधिक अभिक्रियाशील हो जाते हैं
    2. k_t घटता है क्योंकि श्यान माध्यम में बढ़ती श्रृंखलाएँ धीमे विसरित होती हैं, जबकि छोटा एकलक अब भी मूलक सिरों तक पहुँचता है
    3. k_d बढ़ता है क्योंकि श्यान माध्यम अधिक दक्ष पिंजरा-निर्गम देता है
    4. क्रियाविधि श्रृंखला-वृद्धि से हटकर ऑलिगोमरों के पद-वृद्धि युग्मन की ओर चली जाती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — k_t घटता है क्योंकि श्यान माध्यम में बढ़ती श्रृंखलाएँ धीमे विसरित होती हैं, जबकि छोटा एकलक अब भी मूलक सिरों तक पहुँचता है

    यह जेल (Trommsdorff) प्रभाव है: विसरण-नियंत्रित समापन धीमा पड़ता है, मूलक सांद्रता बढ़ती है और Rp = k_p[M][M•] उछलती है। एकलक सांद्रता वास्तव में घटती है, श्यानता k_d नहीं बढ़ाती; क्रियाविधि श्रृंखला-वृद्धि ही रहती है।
  7. एकल-स्थल metallocene उत्प्रेरक के संकीर्ण आणविक-भार वितरण वाले पॉलिओलेफ़िन देने का मुख्य कारण यह है कि

    1. समापन केवल दो बढ़ती श्रृंखलाओं के संयोजन से होता है, जो श्रृंखला-लंबाई तय करता है
    2. हर सक्रिय धातु-केंद्र रासायनिक रूप से समान है, इसलिए सभी श्रृंखलाएँ समान परिस्थिति में बढ़ती हैं
    3. उत्प्रेरक विषमांगी ठोस है जिसके स्थलों की सक्रियता व त्रिविम-वरणता में विस्तृत परास है
    4. सह-उत्प्रेरक मेथिलऐल्युमिनॉक्सेन सभी श्रृंखलाओं को एक ही लंबाई पर समाप्त कर देता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — हर सक्रिय धातु-केंद्र रासायनिक रूप से समान है, इसलिए सभी श्रृंखलाएँ समान परिस्थिति में बढ़ती हैं

    एकसमान स्थल एक सर्वाधिक-प्रायिक वितरण देते हैं जिसका परिक्षेपण लगभग 2 है, जबकि विषमांगी बहु-स्थल Ziegler–Natta उत्प्रेरक कई वितरण अध्यारोपित कर चौड़ा वितरण देते हैं। मेथिलऐल्युमिनॉक्सेन धातु को सक्रिय करता है; यह श्रृंखला-लंबाई तय नहीं करता।
  8. नियंत्रित बहुलकन विधि का उसकी विशिष्टता से कौन-सा युग्मन सही है?

    1. ATRP: Cu(I)/लिगैंड संकुल सुप्त ऐल्किल हैलाइड श्रृंखला-सिरे से हैलोजन परमाणु उत्क्रमणीय रूप से हटाता है
    2. RAFT: कॉपर उत्प्रेरक और ऐल्किल हैलाइड आरंभक हैलोजन परमाणु को उत्क्रमणीय रूप से स्थानांतरित करते हैं
    3. ग्रुप-ट्रांसफ़र: स्थायी नाइट्रॉक्साइड मूलक बढ़ते श्रृंखला-सिरे को उत्क्रमणीय रूप से ढकता है
    4. वलय-विवरण: खुलने के लिए एकलक वलय में कार्बन–कार्बन द्विबंध आवश्यक है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — ATRP: Cu(I)/लिगैंड संकुल सुप्त ऐल्किल हैलाइड श्रृंखला-सिरे से हैलोजन परमाणु उत्क्रमणीय रूप से हटाता है

    ATRP उत्क्रमणीय Cu(I)/Cu(II) हैलोजन विनिमय पर आधारित है। RAFT थायोकार्बोनिलथायो स्थानांतरण कारक प्रयोग करता है, धातु नहीं; नाइट्रॉक्साइड ढकना नाइट्रॉक्साइड-मध्यस्थ विधि है (ग्रुप-ट्रांसफ़र नहीं), और वलय-विवरण में लैक्टाइड या कैप्रोलैक्टम जैसे तनावयुक्त वलय हैं, C=C नहीं।
  9. p = 0.99 तक समआण्विक पद-वृद्धि से बने रैखिक पॉलिएस्टर के लिए Flory सर्वाधिक-प्रायिक वितरण (Xw = (1 + p)/(1 − p)) से अनुपात Xw/Xn लगभग है

    1. 1.00, क्योंकि सभी श्रृंखलाओं की लंबाई लगभग समान है
    2. 1.01, जो 1/p के बराबर है
    3. 99, जो Xn − 1 के बराबर है
    4. 1.99, जो 1 + p के बराबर है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 1.99, जो 1 + p के बराबर है

    Xn = 1/(1 − p) = 100 और Xw = 1.99/0.01 = 199, अतः Xw/Xn = 1 + p = 1.99, जो 2 के निकट परिचित मान है। उच्च रूपांतरण वितरण को संकीर्ण नहीं करता: दोनों औसत साथ बढ़ते हैं।
  10. मुक्त-मूलक श्रृंखला बहुलकन (स्थिर अवस्था, द्विअणुक समापन) के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?
    P: अभिक्रिया के आरंभ से ही उच्च-Mn श्रृंखलाएँ बनती हैं।
    Q: बहुलकन की दर आरंभक सांद्रता के वर्गमूल के समानुपाती है।
    R: Mn धीरे-धीरे बढ़ता है और रूपांतरण 100% के निकट ही बड़ा होता है।
    S: श्रृंखलाएँ केवल सक्रिय सिरे पर बढ़ती हैं, इसलिए एकलक व उच्च बहुलक पूरे समय साथ रहते हैं।

    1. P
    2. Q
    3. R
    4. S
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P; B — Q; D — S

    P, Q व S श्रृंखला-वृद्धि का वर्णन हैं: प्रत्येक श्रृंखला लगभग एक सेकंड में पूरी हो जाती है, Rp ∝ [I]^½, और अनभिक्रियित एकलक पूर्ण आकार के बहुलक के साथ रहता है। R पद-वृद्धि का वर्णन है, जहाँ Xn = 1/(1 − p) पूर्ण रूपांतरण के निकट ही बड़ा होता है।
  11. एक द्विअम्ल व एक डाइएमीन से पद-वृद्धि द्वारा कम से कम 100 के Xn वाला पॉलिएमाइड बनाना है। निम्न में से कौन-से आवश्यक हैं?
    P: सीमित समूह की अभिक्रिया-सीमा 0.99 से अधिक।
    Q: दोनों एकलकों का मोलर अनुपात इकाई के लगभग 2% के भीतर।
    R: छोटे अणु वाले उप-उत्पाद का दक्ष निष्कासन या नियंत्रण, ताकि साम्य सीमक न बने।
    S: वृद्धि तेज़ करने हेतु एकप्रकार्यक अम्ल की जान-बूझकर छोटी अधिकता।

    1. P
    2. Q
    3. R
    4. S
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P; B — Q; C — R

    Xn = 100 के लिए यथार्थ स्टॉइकियोमेट्री (r = 1) पर p ≥ 0.99 चाहिए, और (1 + r)/(1 − r) ≥ 100 का अर्थ है p = 1 पर भी r ≥ 0.98। उप-उत्पाद निष्कासन साम्य को उच्च p की ओर धकेलता है। एकप्रकार्यक अम्ल श्रृंखला को ढकता है और Xn घटाता है; वह वृद्धि कभी तेज़ नहीं करता।
  12. श्रृंखला स्थानांतरण के बिना मुक्त-मूलक बहुलकन में ν गतिक श्रृंखला-लंबाई है (ν = Rp/Ri, जहाँ Ri = Rt)। कौन-से कथन सही हैं?
    P: यदि समापन पूर्णतः संयोजन से हो तो Xn = 2ν।
    Q: यदि समापन पूर्णतः असमानुपातन से हो तो Xn = ν।
    R: एकलक सांद्रता स्थिर रखकर आरंभक सांद्रता बढ़ाने पर ν घटता है।
    S: ν एकलक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता।

    1. P
    2. Q
    3. R
    4. S
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — P; B — Q; C — R

    संयोजन दो गतिक श्रृंखलाओं को एक अणु में जोड़ता है (Xn = 2ν), असमानुपातन प्रति गतिक श्रृंखला एक अणु छोड़ता है (Xn = ν), और ν = k_p[M]/(2(f·k_d·k_t[I])^½) [I]^−½ से घटता है। यह [M] के सीधे समानुपाती है, अतः [M] से स्वतंत्रता का दावा गलत है।
  13. A–A व B–B एकलकों से पद-वृद्धि बहुलक बनाया जाता है जिसका स्टॉइकियोमेट्रिक अनुपात r = N_A/N_B = 0.98 है (B की 2% अधिकता)। अभिक्रिया A समूहों के पूर्ण रूपांतरण (p = 1) तक चलाई जाती है। Xn = (1 + r)/(1 + r − 2rp) से संख्या-औसत बहुलकन-मात्रा निकालिए। उत्तर पूर्णांक में दें।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 99

    p = 1 पर: Xn = (1 + 0.98)/(1 + 0.98 − 2 × 0.98) = 1.98/0.02 = 99। 2% असंतुलन Xn को लगभग 100 पर सीमित कर देता है।
  14. एक समआण्विक द्विअम्ल व डाइऑल को अभिक्रिया-सीमा p = 0.99 तक बहुलकित किया जाता है। एक संरचनात्मक इकाई का माध्य द्रव्यमान M₀ = 113 g/mol है; सिरे के समूह उपेक्षित करें। Xn = 1/(1 − p) से Mn (g/mol में) निकालिए। उत्तर पूर्णांक में दें।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 11300

    Xn = 1/(1 − 0.99) = 100, अतः Mn = Xn·M₀ = 100 × 113 = 11,300 g/mol।
  15. श्रृंखला स्थानांतरण के बिना एक मुक्त-मूलक बहुलकन में बहुलकन दर Rp = 1.0×10⁻⁴ mol L⁻¹ s⁻¹ और आरंभन दर Ri = 2.0×10⁻⁷ mol L⁻¹ s⁻¹ है, स्थिर अवस्था (Ri = Rt) के साथ। समापन पूर्णतः संयोजन से है। Xn निकालिए। उत्तर पूर्णांक में दें।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 1000

    ν = Rp/Ri = 1.0×10⁻⁴/2.0×10⁻⁷ = 500। संयोजन दो गतिक श्रृंखलाएँ जोड़ता है, अतः Xn = 2ν = 1000।
  16. एक आदर्श जीवंत बहुलकन में एकलक [M]₀ = 2.0 mol/L और आरंभक [I]₀ = 0.020 mol/L से शुरू होता है, प्रत्येक आरंभक अणु एक श्रृंखला शुरू करता है और समापन या स्थानांतरण नहीं है। Xn = [M]₀p/[I]₀ से एकलक रूपांतरण p = 0.80 पर Xn निकालिए। उत्तर पूर्णांक में दें।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 80

    Xn = 2.0 × 0.80/0.020 = 80। जीवंत बहुलकन में Xn रूपांतरण के साथ रैखिक बढ़ता है।