भूकंपीय विधियाँ II: प्रसंस्करण, विसंवलन, माइग्रेशन, व्यतिकरणमिति, एट्रिब्यूट, AVO, VSP व बहुघटक भूकंपिकी
2. भूकंपीय विसंवलन
विसंवलन तरंगिका के परावर्तिता से संवलन को पूर्ववत् करता है, ट्रेस को तीक्ष्ण कर पृथ्वी की परावर्तिता-श्रेणी के निकट लाने के लिए। वीनर विधि में n बिंदुओं का फ़िल्टर f ऐसा खोजा जाता है जो फ़िल्टर किए ट्रेस को न्यूनतम-वर्ग अर्थ में वांछित निर्गत d के यथासंभव निकट कर दे। सामान्य समीकरणों में ट्रेस का स्वसहसंबंध, जो टोप्लिट्ज़ है, और वांछित निर्गत का ट्रेस से प्रति-सहसंबंध आता है। स्पाइक विसंवलन में वांछित निर्गत स्पाइक है, अतः निर्गत संकेत-पट्टी के भीतर समतल (श्वेत) स्पेक्ट्रम है। स्वसहसंबंध के शून्य-विलंब में श्वेत रव का छोटा प्रतिशत जोड़ा जाता है (पूर्व-श्वेतन) ताकि स्पेक्ट्रमी छिद्र असीमित रूप से प्रवर्धित न हों।
पूर्वानुमानी विसंवलन ट्रेस को अपने पिछले n प्रतिदर्शों से दूरी α (पूर्वानुमान-विलंब) आगे तक पूर्वानुमानित करता है, और पूर्वानुमान-त्रुटि निर्गत होती है। एक प्रतिदर्श का विलंब स्पाइक विसंवलन है; अधिक विलंब हर तरंगिका का पहला α भाग रखता है और केवल उससे लंबी पुनरावृत्तियाँ हटाता है। लघु-आवर्त बहुपरावर्तनों पर प्रहार हेतु विलंब बहुपरावर्तन के आवर्तकाल पर रखा जाता है: गहराई z व वेग Vw की जल-परत 2z/Vw का पुनरावृत्ति-काल देती है, अतः z = 150 m व Vw = 1500 m/s से 0.2 s। दीर्घ-आवर्त बहुपरावर्तन इस विधि से नहीं हटते और रेडॉन या पृष्ठ-संबंधी बहुपरावर्तन-निराकरण माँगते हैं।
3. माइग्रेशन: ढाल-संबंध व Kirchhoff माइग्रेशन
स्टैक-खंड प्रत्येक घटना को मध्य-बिंदु पर आलेखित करता है, मानो परावर्तन ठीक नीचे से आया हो। अतः ढलवाँ परावर्तक ढाल-दिशा में बहुत नीचे, बहुत मंद ढाल पर खिंचता है, बिंदु-प्रकीर्णक या भ्रंश-किनारा विवर्तन अतिपरवलय बनाता है, और तंग अभिनति से बो-टाई बनती है। माइग्रेशन ऊर्जा को उसकी वास्तविक स्थिति पर ले जाता है, विवर्तनों को समेटता है और ढाल तीखे करता है। शून्य-ऑफ़सेट (विस्फोटी-परावर्तक) चित्र में, स्थिर वेग V पर, वास्तविक ढाल ξ व खंड पर समय-प्रवणता dT/dx sin ξ = (V/2)·(dT/dx) का पालन करते हैं, और घटना Δx = (V²·T/4)·(dT/dx) से ऊर्ध्व-ढाल की ओर सरकती है। हल उदाहरण: V = 2000 m/s, T = 1.0 s, dT/dx = 0.4 ms/m से sinξ = 1000 × 0.0004 = 0.4 (ξ ≈ 23.6°), Δx = 400 m, और माइग्रेटेड गहराई (VT/2)·cosξ = 1000 × 0.9165 ≈ 917 m है, जो अमाइग्रेटेड 1000 m से कम है।
Kirchhoff माइग्रेशन प्रत्येक निर्गत बिंदु को विवर्तन अतिपरवलय का शीर्ष मानता है और उस वक्र के अनुदिश निवेश आयाम जोड़ता है, तिर्यकता व गोलीय विस्तार के भारों तथा तरंगिका-आकार फ़िल्टर के साथ। इसे वेग-मॉडल चाहिए, चुने एपर्चर (जोड़े गए आँकड़ों की चौड़ाई) के भीतर तीव्र ढाल सँभालता है, अनियमित ज्यामिति स्वीकारता है, और स्टैक-पूर्व या स्टैक-पश्चात् चलता है। बहुत चौड़ा एपर्चर रव ले आता है, बहुत संकीर्ण तीव्र ढाल खो देता है। अन्य विधियाँ फेज़-शिफ़्ट व Stolt f-k (द्रुत, स्थिर या केवल-गहराई-वेग हेतु) तथा परिमित-अंतर तरंग-समीकरण माइग्रेशन (ढाल-शुद्धता सन्निकटन से सीमित, जैसे 15° या 45°) हैं।
- समय बनाम गहराई माइग्रेशन: समय माइग्रेशन मृदु पार्श्विक वेग-परिवर्तन के अनुकूल है; प्रबल पार्श्विक विचलन (लवण, प्रणोद-पट्टियाँ) में सटीक वेग-गहराई मॉडल सहित गहराई माइग्रेशन चाहिए, प्रायः स्टैक-पूर्व।
- गलत वेग: बहुत कम वेग अल्प-माइग्रेट करता है (विवर्तन नहीं समेटे जाते), बहुत अधिक अति-माइग्रेट कर ऊपर मुड़ी “स्माइल” खींचता है। स्टैक-पश्चात् माइग्रेशन यह भी मानता है कि स्टैक शून्य-ऑफ़सेट खंड है, जो परस्पर विरोधी ढालों में विफल होता है, अतः ऐसे आँकड़े स्टैक-पूर्व माइग्रेशन में जाते हैं।
4. प्रतिलोम-काल माइग्रेशन, समय-प्रतिलोमन व समय-प्रतिलोम प्रतिबिंबन
प्रतिलोम-काल माइग्रेशन (RTM) पूर्ण द्वि-मार्गी तरंग-समीकरण को संख्यात्मक रूप से हल करता है, अतः उसकी कोई ढाल-सीमा नहीं और वह उलटती, प्रिज़्मी व मुड़ती तरंगों का प्रतिबिंब बना सकता है, जो एक-मार्गी विधियाँ नहीं बना सकतीं। चरण:
(1) स्रोत-तरंग-क्षेत्र S(x, t) को वेग-मॉडल में आगे बढ़ाइए;
(2) अभिलेखित ट्रेसों को ग्राहियों पर डालकर उन्हें समय में पीछे अंतिम प्रतिदर्श से पहले तक संचरित कीजिए, जिससे R(x, t) मिलता है;
(3) प्रतिबिंबन-शर्त, शून्य-विलंब प्रति-सहसंबंध I(x) = Σt S(x, t)·R(x, t), लगाइए, जो वहाँ बड़ा होता है जहाँ अधोगामी व पीछे-संचरित तरंग-क्षेत्र समय में संपाती हैं, यानी परावर्तक पर। यह महँगा है, वेग-मॉडल के प्रति संवेदनशील है, और प्रति-प्रकीर्णन की निम्न-आवृत्ति कृत्रिमताओं हेतु लाप्लासियन फ़िल्टर चाहिए। लवण-पार्श्वों के निकट RTM पसंदीदा उपकरण है।
समय-प्रतिलोमन एक सममिति पर टिका है: हानि-रहित माध्यम में तरंग-समीकरण में केवल द्वितीय समय-अवकलज होते हैं, अतः यदि u(x, t) हल है तो u(x, −t) भी हल है। समय-प्रतिलोम दर्पण सतह पर क्षेत्र अभिलेखित करता है, फिर अभिलेखों को उलटे क्रम में पुनः-उत्सर्जित करता है, और तरंग अपने पथ पर लौटकर, जटिल प्रकीर्णक माध्यम में भी, मूल स्रोत पर पुनः फ़ोकस हो जाती है, जिसकी चौड़ाई लगभग आधा तरंगदैर्ध्य होती है। अवशोषण प्रथम-अवकलज पद जोड़ता है, सममिति तोड़ता है और फ़ोकस धुँधला करता है। समय-प्रतिलोम प्रतिबिंबन इसका उपयोग स्रोतों, जैसे सूक्ष्म-भूकंपीय घटनाओं या भूकंपों, को खोजने हेतु करता है: उनके अभिलेखों को पीछे संचरित कर t = 0 पर फ़ोकस ढूँढ़ना; RTM यही संक्रिया परावर्तन-आँकड़ों पर स्रोत-तरंग-क्षेत्र को संदर्भ मानकर करता है।
5. भूकंपीय व्यतिकरणमिति व निरूपण प्रमेय
भूकंपीय व्यतिकरणमिति दो ग्राहियों के बीच की प्रतिक्रिया ऐसे बनाती है मानो एक स्रोत हो, उन अभिलेखों से जिनमें वहाँ कभी कोई स्रोत था ही नहीं। दो ग्राही A व B लीजिए। उनके एक ही तरंग-क्षेत्र के अभिलेखों का प्रति-सहसंबंध ऐसा ट्रेस देता है जिसका शिखर स्रोत से दोनों यात्रा-कालों के अंतर पर होता है, जो उनसे गुज़रने वाली रेखा पर स्थित स्रोतों हेतु A व B के बीच का यात्रा-काल है। अनेक स्रोतों पर, या यादृच्छिक परिवेशी रव की लंबी अवधियों पर, सहसंबंधों को जोड़ने से A व B के बीच ग्रीन-फ़ंक्शन का आकलन मिलता है, जिसमें कारणात्मक भाग (धनात्मक विलंब) व अकारणात्मक (acausal) भाग (ऋणात्मक विलंब) दोनों होते हैं। उदाहरण: 30 km दूर दो स्टेशन, सतही-तरंग समूह-वेग 3 km/s पर, ±30/3 = ±10 s पर शिखर दिखाते हैं।
सिद्धांत निरूपण प्रमेयों का युग्म है। दोनों एक माध्यम की दो तरंग-अवस्थाएँ लेते हैं, जिनके ग्रीन-फ़ंक्शन xA व xB पर स्रोतों हेतु G(x, xA) व G(x, xB) हैं, और बंद सतह S के भीतर क्षेत्र को S पर समाकलों से जोड़ते हैं। सहसंबंध-प्रकार एक अवस्था का सम्मिश्र संयुग्मी (समय-उलटा क्षेत्र) लाता है: कारणात्मक (causal) ग्रीन-फ़ंक्शन और उसका समय-प्रतिलोम, G(xB, xA, t) + G(xB, xA, −t), G(x, xA) व G(x, xB) तथा उनके अभिलंब-अवकलजों के प्रति-सहसंबंधों के पृष्ठ-समाकल के बराबर है, घनत्व व आवृत्ति के गुणकों तक। इसे हानि-रहित माध्यम चाहिए, क्योंकि तभी समय-प्रतिलोमन सममिति है। संवलन-प्रकार में संयुग्मी नहीं होता, वह दोनों क्षेत्रों का संवलन करता है, हानियुक्त माध्यम में भी मान्य है, तरंग-क्षेत्र एक्स्ट्रापोलेशन (Kirchhoff-Helmholtz व रेले समाकल) का आधार है, और व्यतिकरणमिति में यात्रा-काल जोड़ता है जहाँ सहसंबंध घटाता है। स्रोत-ग्राही व्युत्क्रमता, G(xB, xA) = G(xA, xB), ही ग्राहियों को स्रोत की भूमिका निभाने देती है।
- व्यावहारिक सीमाएँ: प्रमेय मानता है कि स्रोत ग्राहियों के चारों ओर हैं। एक-ओर या असमान रव में आगमन-काल अच्छे रहते हैं, पर आयाम पक्षपाती होते हैं और कृत्रिम घटनाएँ आती हैं। मुख्य योगदान दोनों ग्राहियों से गुज़रने वाली रेखा के निकट के स्रोतों (स्थिर-कला क्षेत्र) से आता है।
- उपयोग: भूपर्पटी की परिवेशी-रव सतही-तरंग टोमोग्राफ़ी, आभासी-स्रोत विधि जिसमें बोरहोल ग्राही जटिल अधिभार के नीचे स्रोत का काम करते हैं, और निष्क्रिय प्रतिबिंबन।
6. एट्रिब्यूट, ब्राइट व डिम स्पॉट तथा AVO
भूकंपीय एट्रिब्यूट आँकड़ों से व्युत्पन्न वह राशि है जो किसी गुण को उभारती है। सम्मिश्र ट्रेस z(t) = x(t) + i·y(t), जिसमें y, x का हिल्बर्ट रूपांतरण है, तीन देता है: आवरण (परावर्तन-प्रबलता) A = √(x² + y²), जो कला से अप्रभावित है और प्रतिबाधा-विषमता से जुड़ा है; तात्क्षणिक कला φ, जो सांतत्य व अनुक्रम-सीमाएँ दर्शाती है; और तात्क्षणिक आवृत्ति (1/2π)·dφ/dt, जो अवशोषण से गैस की छाया में गिरती है और पतली परतों पर अनियमित रहती है। कोहेरेंस (पड़ोसी ट्रेसों की समानता) जैसे ज्यामितीय एट्रिब्यूट भ्रंश व वाहिकाएँ और वक्रता संरचना आलेखित करते हैं। एट्रिब्यूट उतना ही अच्छा है जितना उसके पीछे का प्रसंस्करण, अतः उसे कूपों से अंशांकित कीजिए; सहसंबंध कारण नहीं है।
ब्राइट स्पॉट स्थानीय आयाम-विसंगति है, पारंपरिक रूप से शेल के नीचे गैस-बलुआ पत्थर से, जहाँ प्रतिबाधा गिरती है और R बड़ा व ऋणात्मक होता है, अतः घटना समुद्र-तल या जल-बलुआ शिखर के सापेक्ष ध्रुवता भी पलट सकती है। समर्थक संकेत हैं समतल घटना (गैस-जल संपर्क, जो गहराई-खंड पर क्षैतिज होता है), ऑफ़सेट के साथ बढ़ता आयाम, नीचे निम्न-आवृत्ति छाया और वेग-अवनमन। डिम स्पॉट आयाम में कमी है, जैसे उच्च-प्रतिबाधा बलुआ पत्थर जिसका धनात्मक R तब घटता है जब गैस उसकी प्रतिबाधा को ऊपर के शेल की ओर घटाती है। ब्राइट स्पॉट गैस का प्रमाण नहीं है: कोयला, आग्नेय सिल, समस्वरित पतली परतें व कठोर कार्बोनेट पट्टियाँ भी उन्हें देती हैं।
AVO (ऑफ़सेट के साथ आयाम-परिवर्तन) ज़ोएप्रिट्ज़ समीकरणों या उनके सन्निकटनों से, कोण के साथ परावर्तन-आयाम के बदलाव द्वारा, तरल व शैल-प्रकार पढ़ता है। द्वि-पद Shuey रूप, लगभग 30° तक मान्य, R(θ) ≈ A + B·sin²θ है, जिसमें अंतःखंड A अभिलंब-आपतन R और प्रवणता B है। हल उदाहरण: A = −0.12, B = −0.20 से R(30°) = −0.12 − 0.20 × 0.25 = −0.17, एक ब्राइट, बढ़ते-आयाम वाली घटना। गैस-बलुआ पत्थरों को ऊपर के शेल के सापेक्ष उनकी प्रतिबाधा से वर्गों में रखा जाता है।
| वर्ग | शेल के सापेक्ष बलुआ पत्थर की प्रतिबाधा | अभिलंब-आपतन R | ऑफ़सेट के साथ परिवर्तन |
|---|---|---|---|
| I | अधिक | बड़ा धनात्मक | आयाम घटता है, ध्रुवता पलट सकती है |
| II | लगभग बराबर | शून्य के निकट | आयाम छोटे मान से बढ़ता है; ध्रुवता पलट सकती है |
| III | कम | बड़ा ऋणात्मक | अधिक ऋणात्मक होता है, ब्राइट स्पॉट |
| IV | कम, ऊपर कठोर शेल सहित | ऋणात्मक | परिमाण ऑफ़सेट के साथ घटता है |
7. भूकंपीय स्तरिकी, विभेदन, उच्च-विभेदन भूकंपिकी, VSP व बहुघटक भूकंपिकी
भूकंपीय स्तरिकी निक्षेपण अनुक्रमों, अर्थात् असंगतियों व उनके सहसंबद्ध अनुरूप तलों से घिरी शृंखलाओं, को परावर्तन-समापनों से पढ़ती है: आधार पर ओनलैप व डाउनलैप (बेसलैप), शीर्ष पर टॉपलैप व अपरदनी छेदन। परावर्तन स्तरण-तलों का अनुसरण करते हैं, जो समय-रेखाएँ हैं, फ़ेशीज़-सीमाओं का नहीं। भूकंपीय फ़ेशीज़ का वर्णन परावर्तन-विन्यास (समानांतर, अपसारी, क्लाइनोफ़ॉर्म, टीलेदार, अस्तव्यस्त, मुक्त), सांतत्य, आयाम, आवृत्ति व अंतराल वेग से होता है, और उनका निर्वचन परिवेश व सापेक्ष समुद्र-तल परिवर्तन के रूप में होता है।
विभेदन के दो भाग हैं। ऊर्ध्वाधर रूप में, प्रमुख तरंगदैर्ध्य λ = V/f के साथ, दो अंतरापृष्ठ तब विभेदित होते हैं जब परत लगभग λ/4 (ट्यूनिंग मोटाई, जहाँ विशिष्ट पतली परत के शीर्ष व आधार के परावर्तन रचनात्मक व्यतिकरण करते हैं) से मोटी हो; उससे कम पर मोटाई आयाम से आँकी जाती है, पृथक्करण से नहीं। क्षैतिज रूप में, अमाइग्रेटेड विभेदन प्रथम फ़्रेनेल क्षेत्र है, जिसकी त्रिज्या r = √(z·λ/2) = (V/2)·√(T0/f) है, जिसे माइग्रेशन अधिक से अधिक लगभग आधे तरंगदैर्ध्य की ओर घटाता है। हल उदाहरण: V = 3000 m/s, f = 30 Hz, T0 = 1.2 s से λ = 100 m, z = 1800 m, r = √(1800 × 100/2) = 300 m। अवशोषण, A = A0·exp(−π·f·t/Q), उच्च आवृत्तियाँ काटता है, अतः विभेदन का विनिमय भेदन से होता है। उच्च-विभेदन भूकंपिकी उस विनिमय के उथले छोर पर काम करती है: उच्च-आवृत्ति स्रोत (स्पार्कर, बूमर, चर्प, हथौड़ा, मिनी-वाइब्रेटर), निकट-अंतरित समूह, मिलीसेकंड से कम प्रतिचयन-अंतराल व छोटे बिन, अभियांत्रिकी, भूजल, कोयला व उथली-गैस लक्ष्यों हेतु, सावधान स्टैटिक्स व स्थिति-निर्धारण सहित।
VSP में ग्राही कूप में अनेक गहराइयों पर रखे जाते हैं और स्रोत सतह पर। शून्य-ऑफ़सेट VSP में प्रथम-आगमन समय वास्तविक ऊर्ध्वाधर यात्रा-काल देते हैं, अतः दो गहराइयों के बीच अंतराल वेग Δz/Δt है: 0.200 s (400 m) व 0.260 s (550 m) पर प्रथम-आगमन से 150/0.060 = 2500 m/s। अभिलेख में अधोगामी क्षेत्र (प्रत्यक्ष तरंग व बहुपरावर्तन) और ऊर्ध्वगामी क्षेत्र (परावर्तन) होते हैं, जिन्हें f-k या माध्यिका फ़िल्टरन से अलग किया जाता है; परावर्तक उस गहराई पर होता है जहाँ उसकी ऊर्ध्वगामी घटना प्रथम-आगमन रेखा से मिलती है, और ऊर्ध्वगामी क्षेत्र का कॉरिडोर स्टैक सतही भूकंपीय को कूप से बाँधता है। ऑफ़सेट व वॉकअवे VSP कूप से दूर और बिट के आगे प्रतिबिंब बनाते हैं।
बहुघटक भूकंपिकी त्रि-घटक ग्राहियों से पूर्ण कण-गति सदिश अभिलेखित करती है (और समुद्र में चार-घटक समुद्र-तल नोड, क्योंकि अपरूपण तरंगें जल में नहीं चलतीं)। परावर्तक पर S में रूपांतरित P तरंग PS (C) तरंग देती है, जिसका परावर्तन-बिंदु ग्राही के निकट होता है, अतः उभयनिष्ठ-रूपांतरण-बिंदु बिनिंग चाहिए। S तरंगें मुख्यतः चट्टान-ढाँचे को अनुभव करती हैं, रंध्र-द्रव को नहीं, अतः वे गैस-बादलों के पार प्रतिबिंब देती हैं, और तीव्र व मंद घटकों में अपरूपण-तरंग विभाजन विभंग-जनित असमदैशिकता दिखाता है। उसी परावर्तक तक ऊर्ध्वाधर-आपतन द्वि-पथ समय T_PP व T_PS के साथ Vp/Vs = 2·T_PS/T_PP − 1: T_PP = 1.0 s व T_PS = 1.4 s से 1.8।
मुख्य बिंदु
- नाइक्विस्ट आवृत्ति = 1/(2Δt)। प्रसंस्करण संवलन मॉडल को पूर्ववत् करता है: गेन, विसंवलन, वेग-विश्लेषण (सेम्ब्लेंस), NMO, स्टैक, माइग्रेशन। f-k तल में आभासी वेग V की घटना f = V·k पर होती है।
- स्पाइक विसंवलन स्पेक्ट्रम को श्वेत करता है; बहुपरावर्तन के आवर्तकाल (जल-परत हेतु 2z/Vw) के बराबर विलंब वाला पूर्वानुमानी विसंवलन लघु-आवर्त बहुपरावर्तन हटाता है। इसे स्थिर तरंगिका व श्वेत परावर्तिता चाहिए।
- माइग्रेशन ढलवाँ घटनाओं को ऊर्ध्व-ढाल की ओर व तीखा करता है (sinξ = (V/2)·dT/dx, Δx = (V²T/4)·dT/dx)। Kirchhoff विवर्तन अतिपरवलयों के अनुदिश जोड़ता है; RTM द्वि-मार्गी तरंग-समीकरण हल करता है और स्रोत व पीछे-संचरित क्षेत्रों के शून्य-विलंब सहसंबंध से प्रतिबिंब बनाता है।
- समय-प्रतिलोमन को हानि-रहित माध्यम चाहिए और वह लगभग आधे तरंगदैर्ध्य तक पुनः फ़ोकस करता है। सहसंबंध-प्रकार व्यतिकरणमिति को हानि-रहित माध्यम चाहिए; संवलन-प्रकार हानि में भी मान्य है और समय जोड़ता है।
- ब्राइट स्पॉट बड़ा ऋणात्मक R है (शेल के नीचे गैस) पर कोयला व सिल उसकी नक़ल करते हैं; AVO R ≈ A + B·sin²θ व वर्ग I से IV प्रयोग करता है। आवरण, कला व आवृत्ति सम्मिश्र ट्रेस से आते हैं।
- ऊर्ध्वाधर विभेदन λ/4 और अमाइग्रेटेड क्षैतिज विभेदन √(zλ/2) है। VSP वेग Δz/Δt से देता है, रूपांतरित तरंगें Vp/Vs = 2·T_PS/T_PP − 1 देती हैं, और अनुक्रम ओनलैप, डाउनलैप, टॉपलैप व छेदन से पढ़े जाते हैं।
अभ्यास प्रश्न (17)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
पारंपरिक वीनर स्पाइकिंग विसंवलन के, किसी स्टैक या स्टैक-पूर्व ट्रेस पर लगाए जाने पर, निम्नलिखित में से कौन-सी मान्यता नहीं है?
उत्तर देखें
उत्तर: D — स्रोत-हस्ताक्षर क्षेत्र में मापा गया और निवेश के रूप में दिया जाता है
स्पाइकिंग विसंवलन सांख्यिकीय है: वह तरंगिका का अनुमान ट्रेस के अपने स्वसहसंबंध से लगाता है, इसीलिए उसे श्वेत परावर्तिता, स्थिर तरंगिका और, कारणात्मक स्थिर प्रतिलोम हेतु, न्यूनतम कला चाहिए। मापा हुआ हस्ताक्षर निर्धारणात्मक विसंवलन (हस्ताक्षर-विसंवलन) प्रयोग करता है, सांख्यिकीय विधि नहीं, अतः वही एकमात्र मद है जो मान्यता नहीं है।एक समुद्री सर्वेक्षण में जल की गहराई 120 m और जल में ध्वनि-वेग 1500 m/s है। जल-तल अनुगूँज के विरुद्ध एक पूर्वानुमानी विसंवलन बनाना है, जिसमें पूर्वानुमान-विलंब उसके पुनरावृत्ति-काल के बराबर रखा जाता है। विलंब ____ ms है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 160
जल-तल बहुपरावर्तन जल-परत से द्वि-पथ समय पर दोहराता है: 2 × 120/1500 = 0.16 s = 160 ms। एक-पथ समय (80 ms) लेना प्रचलित भूल है।300 m/s आभासी वेग और 30 Hz आवृत्ति का ग्राउंड रोल 10 m ग्रुप-अंतराल के साथ अभिलेखित होता है। कौन-सा कथन सही है?
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उत्तर: A — इसकी तरंग-संख्या 0.1 चक्र/m है, जो स्थानिक नाइक्विस्ट मान 0.05 चक्र/m से ऊपर है, अतः वह अलियास है
रेखा f = V·k पर तरंग-संख्या k = f/V = 30/300 = 0.1 चक्र/m है। स्थानिक नाइक्विस्ट तरंग-संख्या 1/(2Δx) = 1/20 = 0.05 चक्र/m है, अतः घटना अलियास है और झूठी तरंग-संख्या पर मुड़ जाती है, इसीलिए f-k फ़िल्टर उसे साफ़ नहीं हटा सकता और क्षेत्र में ऐरे आवश्यक हैं। 0.2 चक्र/m 2.5 m अंतराल का नाइक्विस्ट मान होता, 0.01 चक्र/m V व f को उलट देता है, और 1/Δx वास्तविक नाइक्विस्ट तरंग-संख्या का दुगुना है।विसंवलन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — एक प्रतिदर्श के पूर्वानुमान-विलंब वाला पूर्वानुमानी विसंवलन स्पाइक विसंवलन के समतुल्य है; B — पूर्व-श्वेतन स्वसहसंबंध के शून्य-विलंब में थोड़ा श्वेत रव जोड़ता है ताकि फ़िल्टर स्थिर रहे
एक प्रतिदर्श के विलंब पर पूर्वानुमान-त्रुटि वह है जो अतीत से पूर्वानुमेय नहीं, यानी स्पाइक, अतः यह स्पाइक विसंवलन है, और पूर्व-श्वेतन मानक स्थायीकारक है। विसंवलन केवल संकेत वाली आवृत्तियों को पुनः संतुलित कर सकता है, और स्पेक्ट्रम के रिक्त भागों को बढ़ाने से रव बढ़ता है। एक बहुपरावर्तन-आवर्त से मिलाया विलंब उसी आवर्त की पुनरावृत्तियों को लक्ष्य करता है और दीर्घ-आवर्त बहुपरावर्तन छोड़ देता है, जिन्हें रेडॉन या पृष्ठ-संबंधी विधियाँ चाहिए।शून्य-ऑफ़सेट स्टैक-खंड पर ढलवाँ परावर्तक के साथ माइग्रेशन क्या करता है?
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उत्तर: C — यह घटना को ऊर्ध्व-ढाल की ओर खिसकाता और तीखा करता है; वास्तविक ढाल आभासी से अधिक है
स्थिर-वेग स्थिति में sin ξ = tan ζ होने से वास्तविक ढाल ξ खंड की आभासी ढाल ζ से अधिक है, और घटना पार्श्विक रूप से ऊर्ध्व-ढाल की ओर खिसकती है तथा उसकी गहराई घटती है। ढाल-दिशा में खिसकाना दिशा उलट देता है: स्टैक ऊर्जा को मध्य-बिंदु के नीचे आलेखित करता है, जो वास्तविक परावर्तन-बिंदु से ढाल-दिशा में पड़ता है।स्थिर-वेग (V = 3000 m/s) स्टैक-खंड पर द्वि-पथ समय T = 1.0 s की एक घटना की समय-प्रवणता dT/dx = 0.2 ms/m है। sin ξ = (V/2)·(dT/dx) और विस्फोटी-परावर्तक मॉडल की ज्यामिति का प्रयोग करते हुए माइग्रेशन पर घटना का ऊर्ध्व-ढाल की ओर पार्श्विक विस्थापन ____ m है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 450
sin ξ = (3000/2) × 0.0002 = 0.3। अमाइग्रेटेड अभिलंब दूरी VT/2 = 1500 m है, और पार्श्विक विस्थापन (VT/2)·sinξ = 1500 × 0.3 = 450 m है (समतुल्य (V²T/4)·dT/dx = 2.25 × 10⁶ × 0.0002)। 0.2 ms/m को 0.2 s/m भरने पर sin ξ का मान 1 से अधिक होता, जो असंभव है।Kirchhoff माइग्रेशन चुने हुए निर्गत बिंदु पर प्रतिबिंब कैसे बनाता है?
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उत्तर: B — यह उस बिंदु के विवर्तन वक्र के अनुदिश निवेश आयामों को, तिर्यकता व विस्तार भारों सहित, जोड़ता है और योग को उसी बिंदु पर रखता है
Kirchhoff माइग्रेशन उस विवर्तन अतिपरवलय के अनुदिश भारित योग है जिसका शीर्ष निर्गत बिंदु है; वक्र निर्धारित करने हेतु उसे वेग-मॉडल चाहिए। सहसंबंध प्रतिबिंबन-शर्त सहित पीछे-संचरण प्रतिलोम-काल माइग्रेशन का वर्णन है, और चरणबद्ध कला-खिसकाव केवल-गहराई वेग हेतु फेज़-शिफ़्ट विधि का।प्रतिलोम-काल माइग्रेशन (RTM) व समय-प्रतिलोमन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — RTM तीव्र ढाल व उलटती तरंगों का प्रतिबिंब बना सकता है क्योंकि वह द्वि-मार्गी तरंग-समीकरण हल करता है; C — हानि-रहित माध्यम का तरंग-समीकरण t को −t से बदलने पर अपरिवर्तित रहता है
हानि-रहित तरंग-समीकरण में केवल द्वितीय समय-अवकलज होते हैं, अतः वह समय में सममित है, और RTM, जो पूर्ण क्षेत्र संचरित करता है, एक-मार्गी विधियों की ढाल-सीमा से मुक्त है। अवशोषण प्रथम समय-अवकलज लाकर सममिति तोड़ता है, अतः पुनः फ़ोकस बिगड़ता है। RTM मान ली गई वेग-मॉडल से तरंगें संचरित करता है और उसकी त्रुटियों के प्रति संवेदनशील है।40 km दूर दो ब्रॉडबैंड स्टेशन चारों ओर से आने वाला परिवेशी रव अभिलेखित करते हैं। उनके अभिलेखों के प्रति-सहसंबंध का मुख्य शिखर +12.5 s विलंब पर और दर्पण-शिखर −12.5 s पर है। उनके बीच सतही तरंग का समूह-वेग क्या है?
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उत्तर: A — 3.2 km/s, स्टेशनों की दूरी को विलंब से भाग देकर
लैग τ पर प्रति-सहसंबंध शिखर दोनों स्टेशनों के बीच तरंग का यात्रा-काल है, मानो एक स्टेशन स्रोत हो, अतः V = 40 km/12.5 s = 3.2 km/s। ±τ पर शिखर ग्रीन-फ़ंक्शन के कारणात्मक व अकारणात्मक भाग हैं (दोनों दिशाओं में जाती तरंगें), द्वि-पथ यात्रा नहीं। वेग दुगुना या आधा करना विलंब को गलत पढ़ने से आता है।सहसंबंध-प्रकार व संवलन-प्रकार निरूपण प्रमेयों की तुलना में कौन-सा कथन सही है?
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उत्तर: D — सहसंबंध-प्रकार को हानि-रहित माध्यम चाहिए, और संवलन-प्रकार हानियों के साथ भी मान्य है
सहसंबंध-प्रकार प्रमेय सम्मिश्र संयुग्मी (समय-उलटा) क्षेत्र प्रयोग करता है, और समय-प्रतिलोमन तभी सममिति है जब हानि न हो; संवलन-प्रकार प्रमेय में संयुग्मी नहीं होता और वह क्षयी माध्यम में भी मान्य है। शोर से प्रति-सहसंबंध द्वारा ग्रीन-फ़ंक्शन पाना सहसंबंध-प्रकार है। दोनों केवल स्रोत में भिन्न नहीं हैं, और हानि की आवश्यकता उलटी नहीं है।एक प्रबल, पार्श्विक रूप से सीमित आयाम-विसंगति एक संरचनात्मक बंद आकार के ऊपर है। उसका एक खंड क्षैतिज है, पड़ोसी परावर्तनों की ढाल को काटता है और बंद आकार की रूपरेखा पर अचानक समाप्त होता है। सर्वोत्तम व्याख्या क्या है?
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उत्तर: B — गैस-जल जैसा द्रव-संपर्क, क्योंकि संपर्क क्षैतिज होता है जबकि स्तरण नहीं
गैस-जल (या तेल-जल) संपर्क गुरुत्व-नियंत्रित क्षैतिज सतह है, अतः पड़ोसी स्तरण को काटने वाली और संरचनात्मक रूपरेखा पर समाप्त होने वाली समतल घटना फ़्लैट स्पॉट है, जो सीधा हाइड्रोकार्बन संकेतक है। बहुपरावर्तन प्राथमिकों का आकार दोहराते हैं और संरचनात्मक समोच्च पर समाप्त नहीं होते, सिल का क्षैतिज होना अनिवार्य नहीं (अनेक तश्तरीनुमा होते हैं) और उनके समोच्च पर रुकने का कोई कारण नहीं, और माइग्रेशन स्माइल वक्र रव-कृत्रिमताएँ हैं।शेल के नीचे गैस-बलुआ पत्थर बड़ा ऋणात्मक अभिलंब-आपतन परावर्तन गुणांक देता है जिसका परिमाण ऑफ़सेट के साथ बढ़ता है, अतः ब्राइट घटना दूर-ऑफ़सेट ट्रेसों पर और चमकती है। यह कौन-सा AVO वर्ग है?
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उत्तर: C — वर्ग III, क्योंकि बलुआ पत्थर की प्रतिबाधा शेल से कम है और R ऑफ़सेट के साथ अधिक ऋणात्मक होता है
बड़ा ऋणात्मक अंतःखंड और ऋणात्मक प्रवणता (ऑफ़सेट के साथ अधिक ऋणात्मक) वर्ग III है, पारंपरिक ब्राइट-स्पॉट गैस-बलुआ पत्थर। वर्ग I का अंतःखंड धनात्मक, वर्ग II का शून्य के निकट होता है, और वर्ग IV का अंतःखंड ऋणात्मक है जिसका परिमाण ऑफ़सेट के साथ घटता है, अतः कहा गया वृद्धि-क्रम उसे अस्वीकार करता है।द्वि-पद Shuey रूप R(θ) = A + B·sin²θ में अंतःखंड A = 0.08 व प्रवणता B = −0.40 लेकर, परावर्तन गुणांक आपतन-कोण ____ डिग्री पर शून्य होता है (उत्तर एक दशमलव स्थान तक दीजिए)।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 26.6
R = 0 तब जब sin²θ = −A/B = 0.08/0.40 = 0.2, अतः sinθ = 0.4472 और θ = 26.57°, जो एक दशमलव स्थान तक 26.6° है। इससे बड़े कोणों पर R ऋणात्मक हो जाता है, अतः ध्रुवता पलट जाती है, जैसा वर्ग I या II बलुआ पत्थर में होता है।शून्य-ऑफ़सेट VSP में प्रथम-आगमन 600 m गहराई पर 0.300 s और 780 m गहराई पर 0.375 s हैं। दोनों ग्राहियों के बीच अंतराल वेग क्या है?
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उत्तर: B — 2400 m/s, गहराई-अंतर को समय-अंतर से भाग देकर
VSP का प्रथम-आगमन एक-पथ ऊर्ध्वाधर समय है, अतः Vint = Δz/Δt = (780 − 600)/(0.375 − 0.300) = 180/0.075 = 2400 m/s। 2080 m/s का विकल्प 780 m तक का औसत वेग (780/0.375) है, अंतराल मान नहीं। आधा या दुगुना करना समयों को द्वि-पथ या अंतराल को दुगुना मानता है, जिनमें से कोई लागू नहीं।एक शून्य-ऑफ़सेट परावर्तन 1.6 s द्वि-पथ समय पर आता है। औसत वेग 2000 m/s और प्रमुख आवृत्ति 40 Hz है। r = √(z·λ/2) और λ = V/f का प्रयोग करते हुए अमाइग्रेटेड खंड पर प्रथम फ़्रेनेल क्षेत्र की त्रिज्या ____ m है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 200
गहराई z = V·T/2 = 2000 × 1.6/2 = 1600 m और λ = V/f = 2000/40 = 50 m, अतः r = √(1600 × 50/2) = √40000 = 200 m। पूरा द्वि-पथ समय गहराई मानना (3200 m) 283 m देता है, जो प्रचलित भूल है।एक बहुघटक सर्वेक्षण में परावर्तक तक ऊर्ध्वाधर द्वि-पथ समय PP खंड पर 1.6 s और PS (रूपांतरित-तरंग) खंड पर 2.2 s है। Vp/Vs = 2·T_PS/T_PP − 1 का प्रयोग करते हुए परावर्तक तक औसत Vp/Vs, दो दशमलव स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 1.75
T_PS/T_PP = 2.2/1.6 = 1.375, अतः Vp/Vs = 2 × 1.375 − 1 = 1.75। समयों का अनुपात सीधे लेना (1.375) यह भूलता है कि PS समय P व S समयों का औसत है।भूकंपीय स्तरिकी व बहुघटक भूकंपिकी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — ओनलैप व डाउनलैप निक्षेपण अनुक्रम के आधार पर बेसलैप समापन हैं; B — टॉपलैप व अपरदनी छेदन अनुक्रम के शीर्ष पर दिखने वाले समापन हैं
बेसलैप (ओनलैप, डाउनलैप) अनुक्रम का आधार और टॉपलैप तथा अपरदनी छेदन उसका शीर्ष दर्शाते हैं। परावर्तन स्तरण का अनुसरण करते हैं, जो समय-रेखा है, अतः वे कालस्तरिकीय हैं। रूपांतरित तरंग का S-चरण चट्टान-ढाँचे को अनुभव करता है और रंध्र-गैस से मुश्किल से प्रभावित होता है, इसीलिए PS आँकड़े उन गैस-बादलों के पार प्रतिबिंब दे सकते हैं जो P तरंगों को उलझा देते हैं।