भूकंपीय विधियाँ I: प्रत्यास्थ तरंगें, रव, अधिग्रहण, यात्रा-काल, CMP स्टैकिंग व स्टैटिक्स

यह भूविज्ञान एवं भूभौतिकी (GG) पेपर के भाग B2 के शीर्षक “भूकंपीय विधियाँ” के दो अध्यायों में पहला है। यह उस शीर्षक के पूर्वार्ध का उत्तर देता है: “पृथ्वी के पदार्थों के प्रत्यास्थ गुण; प्रत्यास्थ तरंगों का परावर्तन, अपवर्तन, उत्पादन व संचरण, वेग-गहराई मॉडल, भूकंपीय रव व रव-प्रोफ़ाइल विश्लेषण, … CDP स्टैकिंग चार्ट, बिनिंग, … स्थैतिक व गतिक संशोधन”। इसमें तरंग-वेग, स्रोत, रव व रव-परीक्षण, फ़ोल्ड व बिनिंग, अपवर्तन व परावर्तन यात्रा-काल, वेग-गहराई मॉडल तथा स्टैटिक्स पढ़ाए गए हैं। संख्यात्मक प्रश्न तरंग-वेग, फ़ोल्ड, अपवर्तन-गहराई, क्रॉसओवर दूरी, NMO, Dix वेग, स्थैतिक विस्थापन तथा परावर्तन गुणांक हैं। अध्याय 2 प्रसंस्करण व प्रतिबिंबन लेता है।

1. प्रत्यास्थ गुण, तरंग-वेग व भूकंपीय स्रोत

भूकंपीय तरंग चट्टान में चलने वाला छोटा, उत्क्रमणीय विकृति-संचार है, अतः उसका वेग प्रत्यास्थ मापांकों व घनत्व से तय होता है। आयतन-मापांक K, अपरूपण-मापांक μ (दृढ़ता का लामे स्थिरांक) व घनत्व ρ के लिए: संपीडनात्मक (P) तरंग, जिसमें कण-गति किरण के अनुदिश होती है, का वेग Vp = √[(K + 4μ/3)/ρ] है, और अपरूपण (S) तरंग, जिसमें कण-गति किरण के आर-पार होती है, का Vs = √(μ/ρ)। K धनात्मक होने से Vp सदैव Vs से बड़ा होता है, और प्वासाँ अनुपात ν के पदों में Vp/Vs = √[2(1 − ν)/(1 − 2ν)]; ν = 0.25 के लिए यह √3 ≈ 1.73 है। तरल में μ = 0 होता है, अतः Vs = 0: अपरूपण तरंगें द्रव या गैस-भरी गुहा से नहीं गुज़रतीं, और गैस K घटाकर Vp घटाती है।

  • वेग क्या बढ़ाता है: संघनन व प्रभावी दाब (अतः गहराई व आयु), सीमेंटन और कम सरंध्रता। सरंध्रता φ वाली द्रव-भरी चट्टान के लिए समय-औसत (Wyllie) नियम 1/V = φ/Vfluid + (1 − φ)/Vmatrix है। वेग क्या घटाता है: सरंध्रता, विभंग, गैस, और असंपीडित अपक्षयित पदार्थ (कुछ सौ m/s)।
  • संचरण व परावर्तन: अंतरापृष्ठ पर sinθ/V संरक्षित रहता है (स्नेल का नियम, किरण-प्राचल p), आयाम ज्यामितीय प्रसार व अवशोषण से घटते हैं, और अभिलंब आपतन पर परावर्तन गुणांक R = (Z2 − Z1)/(Z2 + Z1) है, जहाँ ध्वनिक प्रतिबाधा Z = ρ·V है।
  • स्थलीय स्रोत: अपक्षयित परत के नीचे खोदे शॉट-होलों में डायनामाइट, उथले कार्य हेतु भार-पात या हथौड़ा, और Vibroseis ट्रक, जो लंबा आवृत्ति-स्वीप संकेत (कई सेकंड का स्वीप, जैसे 8 से 80 Hz) भेजता है। अभिलेखित ट्रेस का स्वीप से प्रति-सहसंबंध (cross-correlation) उसे छोटी, शून्य-कला (Klauder) तरंगिका में संपीडित कर देता है जिसकी बैंडविड्थ स्वीप की बैंडविड्थ होती है।
  • समुद्री स्रोत व ग्राही: एयर गन संपीडित वायु छोड़ती है जिसका बुलबुला फिर दोलन करता है (बबल पल्स), इसलिए गनें समस्वरित ऐरे में चलाई जाती हैं। स्थलीय ग्राही जियोफ़ोन हैं (कण-वेग); समुद्री ग्राही कर्षित स्ट्रीमर में हाइड्रोफ़ोन हैं (दाब)।
⚠️ Vp व Vs दोनों दृढ़ता के साथ बढ़ते हैं, पर द्रव का असर केवल Vp पर पड़ता है
ब्राइन की जगह गैस आने पर K व घनत्व घटते हैं। Vp तेज़ी से गिरता है, जबकि Vs, जो केवल μ व ρ पर निर्भर है, लगभग अपरिवर्तित रहता है (ρ घटने से थोड़ा बढ़ता है)। अतः Vs बदले बिना Vp का गिरना द्रव का संकेत है, शैल-प्रकार का परिवर्तन नहीं।

2. भूकंपीय रव व रव-प्रोफ़ाइल विश्लेषण

संकेत वह प्राथमिक परावर्तन-ऊर्जा है जो भूगर्भ का प्रतिबिंब बनाती है; शेष सब रव है। रव संसक्त (ट्रेस-दर-ट्रेस दोहराने योग्य, अतः पहचाने जाने योग्य घटनाएँ बनाता है) या यादृच्छिक (असंसक्त, पवन, यातायात, यंत्रों व विद्युत-लाइनों से) होता है। दोनों से निपटने के ढंग भिन्न हैं: संसक्त रव से ऐरे, फ़िल्टर व मूवआउट-विभेदन द्वारा, यादृच्छिक रव से स्टैकिंग द्वारा।

स्थलीय या समुद्री शॉट-अभिलेख पर प्रचलित रव-प्रकार
रवलक्षणसामान्य उपाय
ग्राउंड रोल (रेले तरंगें)मंद, निम्न-आवृत्ति, प्रबल, परिक्षेपी; तीव्र रैखिक घटनाओं का पंखाजियोफ़ोन ऐरे, लो-कट फ़िल्टर, f-k फ़िल्टर
प्रत्यक्ष तरंग, अपवर्तन, निर्देशित तरंगेंस्थिर आभासी वेग वाली रैखिक घटनाएँम्यूट, f-k फ़िल्टर
वायु-तरंगवायु में लगभग 330 m/s पर ध्वनि; रैखिक व संकीर्ण-बैंडम्यूट, अधिक गहरे विस्फोटक
बहुपरावर्तन (जल-तल अनुगूँज, पेग-लेग)प्राथमिक की आवर्ती पुनरावृत्तियाँ; समान आगमन-काल पर प्राथमिक से कम वेगपूर्वानुमानी विसंवलन, वेग-फ़िल्टरन, रेडॉन रूपांतरण
विद्युत-लाइन, पवन, यातायात, यंत्र रवयादृच्छिक, या भारत में 50 Hz की एकल रेखानॉच फ़िल्टर, स्टैकिंग, शांत अभिलेखन-काल

रव-प्रोफ़ाइल विश्लेषण उत्पादन से पहले किया जाता है। रव-परीक्षण (वॉकअवे या रव-स्प्रेड) में कुछ शॉट, भिन्न विस्फोटक-मात्रा, छिद्र-गहराई व ऐरे-प्रकार के साथ, निकट-अंतरित एकल जियोफ़ोनों की लंबी रेखा में अभिलेखित किए जाते हैं। प्रत्येक रव-श्रेणी का वेग व आवृत्ति-पट्टी अभिलेख या उसके f-k स्पेक्ट्रम से पढ़ी जाती है, और उसे दबाने हेतु ग्रुप-अंतराल, ऐरे-लंबाई, स्रोत-प्रकार व फ़िल्टर-पट्टियाँ चुनी जाती हैं। अलियासिंग का केंद्रीय नियम यह है कि आभासी वेग V व आवृत्ति f की श्रेणी का आभासी तरंगदैर्ध्य λa = V/f होता है, और वह स्थानिक अलियासिंग के बिना तभी प्रतिचयित होती है जब ग्रुप-अंतराल अधिकतम λa/2 हो। 20 Hz पर 300 m/s का ग्राउंड रोल λa = 15 m रखता है, अतः वह सामान्य 25 m अंतराल पर अलियास हो जाता है और प्रतिचयन से पहले ऐरे को उसे हटाना होता है।

ऐरे N जियोफ़ोनों को अंतराल d पर जोड़कर एक ट्रेस बनाते हैं। परावर्तन लगभग ऊर्ध्वाधर आते हैं, उनका आभासी तरंगदैर्ध्य बहुत लंबा होता है और वे समकला में जुड़ते हैं; छोटे आभासी तरंगदैर्ध्य वाली रव-श्रेणी निरस्त हो जाती है, पहला शून्य λa = N·d पर। स्टैकिंग यही कार्य CMP गैदर पर करती है: समान संकेत व स्वतंत्र रव वाले N ट्रेस संकेत-रव अनुपात को √N से सुधारते हैं, अतः 36-फ़ोल्ड स्टैक 6 गुना लाभ देता है।

3. अधिग्रहण ज्यामिति, CMP फ़ोल्ड, स्टैकिंग चार्ट व बिनिंग

2D स्थलीय कार्य में ग्रुप-अंतराल Δg पर ग्राही-समूहों की रेखा प्रत्येक शॉट अभिलेखित करती है, और शॉट-बिंदु शॉट-अंतराल Δs से रेखा के अनुदिश बढ़ता है। स्प्रेड विभक्त (शॉट मध्य में) या अंतिम-सिरा (शॉट एक सिरे पर) होता है। उभयनिष्ठ मध्य-बिंदु (CMP) गैदर उन ट्रेसों का समुच्चय है जिनके स्रोत व ग्राही का मध्य-बिंदु एक ही है; NMO संशोधन के बाद वे जुड़कर एक स्टैक-ट्रेस बनते हैं। मध्य-बिंदु ग्रुप-अंतराल के आधे पर पड़ते हैं, अतः CMP अंतराल Δg/2 होता है। समतल परावर्तक के लिए उभयनिष्ठ मध्य-बिंदु उभयनिष्ठ परावर्तन-बिंदु (पुराने प्रयोग का CDP) भी होता है; ढलवाँ परावर्तक के लिए गैदर के परावर्तन-बिंदु ऊर्ध्व-ढाल की ओर बिखर जाते हैं (डिप स्मियर), इसलिए “CMP” ही सही नाम है।

फ़ोल्ड CMP गैदर में ट्रेसों की संख्या है। N चैनल, ग्रुप-अंतराल Δg व शॉट-अंतराल Δs के लिए फ़ोल्ड = N·Δg/(2·Δs)। हर बार शॉट को एक ग्रुप-अंतराल आगे बढ़ाने पर N/2 मिलता है; हर दूसरे स्टेशन पर N/4। हल उदाहरण: 96 चैनल, Δg = 25 m, Δs = 50 m से फ़ोल्ड = 96 × 25/(2 × 50) = 24, CMP अंतराल 12.5 m के साथ। रेखा के सिरों पर फ़ोल्ड लगभग आधे स्प्रेड की लंबाई में चढ़ता है, इसलिए रेखाएँ लक्ष्य से आगे बढ़ाई जाती हैं।

स्टैकिंग चार्ट (CDP चार्ट) ऑफ़सेट को मध्य-बिंदु के विरुद्ध आलेखित करता है। प्रत्येक शॉट बिंदुओं की तिरछी रेखा है, प्रत्येक CMP गैदर एक मध्य-बिंदु पर ऊर्ध्वाधर स्तंभ है, और फ़ोल्ड स्तंभ में बिंदुओं की संख्या है। 3D सर्वेक्षणों में सभी शॉट-ग्राही युग्मों के मध्य-बिंदु आयताकार बिनों में छाँटे जाते हैं, और बिन के ट्रेस गैदर बनाते हैं। लंबवत ज्यामिति (ग्राही-रेखाएँ स्रोत-रेखाओं के आर-पार) में बिन ग्राही-अंतराल का आधा गुणा स्रोत-अंतराल का आधा होता है, और फ़ोल्ड उसमें ट्रेसों की संख्या है। बिन इतना छोटा भी होना चाहिए कि ढलवाँ घटनाएँ स्टैक-खंड पर अलियास न हों: Δx ≤ V/(4·fmax·sinθ), क्योंकि θ कोण के ढाल का समय-ढाल 2·sinθ/V होता है।

⚠️ फ़ोल्ड सामान्यतः चैनल-संख्या का आधा नहीं होता
N/2 तभी सही है जब शॉट ठीक एक ग्रुप-अंतराल से बढ़े। सामान्य नियम शॉट-अंतराल व ग्रुप-अंतराल के अनुपात से भाग देता है: Δs दुगुना करने से फ़ोल्ड आधा और Δg दुगुना करने से दुगुना हो जाता है।

4. अपवर्तन यात्रा-काल: शीर्ष तरंगें, अंतःखंड समय व क्रांतिक दूरी

V1 वेग की मंद परत ऊपर और V2 वेग की तीव्र परत नीचे के बीच h गहराई पर समतल अंतरापृष्ठ लीजिए। क्रांतिक कोण θc = sin⁻¹(V1/V2) पर संचरित किरण अंतरापृष्ठ के अनुदिश V2 से चलती है, और θc पर ऊर्जा ऊपर की ओर छोड़ती रहती है, शीर्ष तरंग (head wave) के रूप में। ऑफ़सेट x पर आगमन: प्रत्यक्ष तरंग T = x/V1; शीर्ष तरंग T = x/V2 + ti, जहाँ अंतःखंड समय ti = 2h·cosθc/V1 शीर्ष-तरंग रेखा को x = 0 तक बढ़ाने पर मिला मान है। समय-दूरी आलेख पर शीर्ष-तरंग रेखा की प्रवणता 1/V2 होती है, अतः V2 उसकी प्रतिलोम प्रवणता से और h ti से पढ़ा जाता है: h = ti·V1/(2·cosθc) = ti·V1·V2/(2·√(V2² − V1²))।

दो दूरियाँ महत्त्वपूर्ण हैं। क्रांतिक दूरी xc = 2h·tanθc वह निकटतम ऑफ़सेट है जहाँ शीर्ष तरंग का अस्तित्व ही बनता है, क्योंकि उससे कम पर किरण अंतरापृष्ठ पर θc से कम कोण पर टकराती है। क्रॉसओवर दूरी xco = 2h·√[(V2 + V1)/(V2 − V1)] वह है जहाँ शीर्ष तरंग समय में पहली बार प्रत्यक्ष तरंग से आगे निकलती है, अतः xco के आगे ही वह प्रथम-आगमन के रूप में दिखती है। क्रॉसओवर सदैव क्रांतिक दूरी से अधिक दूर होता है। हल उदाहरण: V1 = 1500 m/s, V2 = 2500 m/s, h = 60 m। तब sinθc = 0.6, cosθc = 0.8, tanθc = 0.75; ti = 2 × 60 × 0.8/1500 = 64 ms; xc = 2 × 60 × 0.75 = 90 m; xco = 2 × 60 × √(4000/1000) = 240 m। 240 m पर जाँच: प्रत्यक्ष तरंग 240/1500 = 0.160 s लेती है, और शीर्ष तरंग 240/2500 + 0.064 = 0.160 s।

ढलवाँ अंतरापृष्ठ। नीचे-ढाल की ओर शॉट से कम आभासी वेग Vd = V1/sin(θc + δ) और ऊपर-ढाल की ओर अधिक वेग Vu = V1/sin(θc − δ) मिलता है। वास्तविक वेग V2 = 2·cosδ/(1/Vd + 1/Vu) है, छोटे ढाल पर हरात्मक माध्य, और व्युत्क्रम समय (A से B व B से A) बराबर होने चाहिए, जो चुनाई की जाँच है। अनियमित अपवर्तकों हेतु विलंब-काल, प्लस-माइनस या सामान्यीकृत व्युत्क्रम विधियाँ, अथवा अपवर्तन टोमोग्राफ़ी चाहिए।

⚠️ अपवर्तन हेतु वेग का गहराई के साथ बढ़ना आवश्यक है
अपने ऊपर की परत से मंद परत शीर्ष तरंग नहीं भेजती, अतः अदृश्य रहती है (ब्लाइंड ज़ोन), और जिस पतली परत की शीर्ष तरंग कभी प्रथम-आगमन नहीं बनती वह छिपी परत है। दोनों स्थितियों में चुनी परतों से गणित गहराइयाँ बिना किसी संकेत के गलत हो जाती हैं। परावर्तन भूकंपिकी पर ऐसा प्रतिबंध नहीं है, इसीलिए गहरी संरचना हेतु उसका उपयोग होता है।

5. परावर्तन यात्रा-काल, NMO, Dix समीकरण व वेग-गहराई मॉडल

V वेग के माध्यम में h गहराई पर समतल परावर्तक के लिए स्रोत से ऑफ़सेट x पर ग्राही तक परावर्तित पथ की लंबाई √(x² + 4h²) है, अतः T² = T0² + x²/V², जहाँ T0 = 2h/V शून्य-ऑफ़सेट पर द्वि-पथ समय है। अभिलेख पर यह अतिपरवलय है। दूर के ट्रेस का शून्य-ऑफ़सेट समय के सापेक्ष विलंब सामान्य मूवआउट (NMO) है: x के गहराई से बहुत छोटे होने पर ΔT = T − T0 ≈ x²/(2·V²·T0)। यह ऑफ़सेट के वर्ग से बढ़ता है और उथले (छोटा T0) व मंद परावर्तकों के लिए अधिक होता है। NMO संशोधन सही वेग से ट्रेस-दर-ट्रेस ΔT घटाता है, अतिपरवलय को समतल करता है ताकि ट्रेस जोड़े जा सकें। हल उदाहरण: T0 = 0.8 s, x = 1200 m, V = 2000 m/s से T = √(0.64 + 0.36) = 1.0 s, अतः ΔT = 0.2 s।

ढलवाँ परावर्तक (ढाल δ) के लिए मूवआउट T² = T0² + x²·cos²δ/V² है, जहाँ T0 मध्य-बिंदु पर शून्य-ऑफ़सेट समय है, अतः स्टैकिंग-वेग V/cosδ वास्तविक वेग से अधिक होता है। क्षैतिज परतों के ढेर के लिए छोटे ऑफ़सेट पर वही रूप RMS वेग के साथ मान्य है, V²rms = Σ Vi²·ti / Σ ti, जहाँ ti अंतराल-काल हैं। दो शून्य-ऑफ़सेट समयों पर RMS वेग दिए हों तो Dix समीकरण उनके बीच की परत का अंतराल वेग निकालता है: V²int = (V²n·Tn − V²n−1·Tn−1)/(Tn − Tn−1)। हल उदाहरण: T = 0.5 s पर Vrms = 2000 m/s और T = 1.0 s पर 2400 m/s से V²int = (2400² × 1.0 − 2000² × 0.5)/0.5 = 7.52 × 10⁶, अतः Vint ≈ 2742 m/s, दोनों RMS मानों से अधिक, जैसा RMS वेग बढ़ाने वाली परत के लिए होना ही चाहिए।

परतित पृथ्वी के वेग
वेगपरिभाषास्रोत
अंतरालपरत की मोटाई ÷ उसमें एक-पथ समयसॉनिक लॉग, VSP, Dix रूपांतरण
औसतकुल गहराई ÷ कुल एक-पथ समयचेक-शॉट या VSP; समय-से-गहराई रूपांतरण
RMSअंतराल वेगों का समय-भारित वर्ग-माध्य-मूल; औसत वेग से कम नहींछोटे ऑफ़सेट पर स्टैकिंग-वेग

वेग-गहराई मॉडल समय को गहराई में बदलता है। सरलतम परत-केक (स्थिर अंतराल वेग) है, जो रैखिक प्रवणता V = V0 + k·z से सुधरता है, जिसमें किरणें वृत्तीय चाप होती हैं और गहराई z तक एक-पथ समय t = (1/k)·ln(1 + k·z/V0) है। मॉडल अपवर्तन-चुनाइयों, स्टैकिंग-वेगों के Dix रूपांतरण, कूप-लॉग, चेक-शॉटों व टोमोग्राफ़ी से बनते हैं और कूप के समय-गहराई वक्र से बाँधे जाते हैं।

⚠️ RMS औसत वेग नहीं है, और Dix साधारण औसत नहीं है
RMS वेग तीव्र परतों को अधिक भार देता है, अतः पृथ्वी एकसमान न हो तो वह औसत वेग से अधिक होता है। Dix समीकरण भार को उलटता है: RMS मानों के अंतर को समय-अंतर से भाग देने वाला सरल हल कभी न लें। पतली परतों में चुनाई की छोटी त्रुटियाँ भी बहुत बढ़ जाती हैं, अतः Dix से मिले अंतराल वेग रव-युक्त होते हैं।

6. स्थैतिक व गतिक संशोधन

गतिक संशोधन (NMO) ऑफ़सेट व आगमन-काल के साथ बदलते हैं। स्थैतिक संशोधन पूरे ट्रेस पर लगा एकल समय-विस्थापन है, जो केवल स्रोत या ग्राही की सतही स्थिति पर निर्भर करता है। वे सतही उन्नयन तथा मंद, परिवर्ती अपक्षयित परत का प्रभाव हटाते हैं, जिससे प्रत्येक ट्रेस ऐसा दिखे मानो एक समतल डेटम पर शॉट व अभिलेखित हुआ हो। असंशोधित रहने पर स्टैटिक्स परावर्तनों को ट्रेस-दर-ट्रेस हिलाते हैं, स्टैक बिगाड़ते हैं और झूठी संरचना बनाते हैं।

वह स्टेशन जिसका उन्नयन E, अपक्षयित परत की मोटाई h व वेग Vw है, और जिसके लिए अपक्षयण-तल के नीचे उन्नयन Ed के डेटम तक अधो-अपक्षयण वेग Vb प्रयुक्त है, उसमें डेटम तक एक-पथ ऊर्ध्वाधर समय t = h/Vw + (E − h − Ed)/Vb है, और लगाया गया स्थैतिक विस्थापन इस समय का ऋण है (आँकड़े पहले खिसकते हैं)। स्रोत व ग्राही के पद जोड़े जाते हैं। हल उदाहरण: h = 6 m, Vw = 500 m/s, E = 116 m, Ed = 100 m, Vb = 2000 m/s से t = 12 ms + 10/2000 s = 12 + 5 = 17 ms, अतः विस्थापन −17 ms है। अपक्षयण की मोटाई व वेग अपहोल सर्वेक्षणों (दबे स्रोत का सतह पर समय लेना) तथा प्रथम-आगमनों के अपवर्तन-विश्लेषण से मिलते हैं।

  • उन्नयन व अपवर्तन स्टैटिक्स: उन्नयन स्टैटिक्स ज्ञात अपक्षयण-मॉडल प्रयोग करते हैं; अपवर्तन स्टैटिक्स (विलंब-काल या सामान्यीकृत रैखिक प्रतिलोमन) रेखा के अनुदिश प्रथम-आगमनों से अपक्षयण आँकते हैं।
  • अवशिष्ट स्टैटिक्स: जो बचता है वह आँकड़ों से ही, पृष्ठ-संगत रूप में (प्रत्येक स्रोत व प्रत्येक ग्राही स्टेशन का एक मान), प्रत्येक ट्रेस को पायलट ट्रेस से सहसंबंधित कर या स्टैक-शक्ति अधिकतम कर आँका जाता है। उसके बाद वेग पुनः चुने जाते हैं।
  • दीर्घ व लघु तरंगदैर्ध्य: रेखा के अनुदिश धीरे बदलने वाले स्टैटिक्स (स्प्रेड से लंबे) झूठी संरचना बनाते हैं; तेज़ बदलने वाले (स्प्रेड से छोटे) स्टैक-संसक्ति नष्ट करते हैं। प्रमुख आवर्तकाल के आधे से बड़ा विस्थापन चक्र-छोड़ (cycle skipping) कराता है, और सहसंबंध तब गलत चक्र पर बैठ जाता है।

मुख्य बिंदु

  • Vp = √[(K + 4μ/3)/ρ] व Vs = √(μ/ρ), अतः Vp > Vs और तरल में Vs = 0; Vp/Vs = √[2(1 − ν)/(1 − 2ν)]। गैस Vp को तेज़ी से घटाती और Vs लगभग अपरिवर्तित रखती है। अभिलंब-आपतन R = (Z2 − Z1)/(Z2 + Z1)।
  • संसक्त रव से ऐरे, फ़िल्टर व मूवआउट द्वारा, यादृच्छिक रव से स्टैकिंग द्वारा (लाभ √N) निपटा जाता है। स्थानिक अलियासिंग न हो इसके लिए Δx ≤ λa/2, और रव-परीक्षण ग्रुप-अंतराल व ऐरे-लंबाई तय करता है।
  • फ़ोल्ड = N·Δg/(2·Δs) और CMP अंतराल = Δg/2। स्टैकिंग चार्ट ऑफ़सेट को मध्य-बिंदु के विरुद्ध आलेखित करता है; 3D में मध्य-बिंदु बिन किए जाते हैं, लंबवत ज्यामिति में ग्राही-अंतराल का आधा गुणा स्रोत-अंतराल का आधा।
  • अपवर्तन: h = ti·V1/(2·cosθc), xc = 2h·tanθc, xco = 2h·√[(V2 + V1)/(V2 − V1)]। वेग का गहराई के साथ बढ़ना आवश्यक है; ब्लाइंड व छिपी परतें इसकी अंधी जगहें हैं।
  • परावर्तन: T² = T0² + x²/V², ΔT ≈ x²/(2·V²·T0), ढाल δ पर V_NMO = V/cosδ, और Dix V²int = (V²n·Tn − V²n−1·Tn−1)/(Tn − Tn−1)। RMS वेग औसत वेग से कभी कम नहीं होता।
  • स्टैटिक प्रति ट्रेस एक समय-विस्थापन है, डेटम तक t = h/Vw + (E − h − Ed)/Vb, जबकि NMO ऑफ़सेट व समय पर निर्भर है। दीर्घ-तरंगदैर्ध्य स्टैटिक्स झूठी संरचना बनाते हैं।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. एक चट्टान का आयतन-मापांक K = 20 GPa, अपरूपण-मापांक μ = 9 GPa और घनत्व 2400 kg/m³ है। निकटतम 10 m/s तक उसका P-तरंग वेग क्या है?

    1. लगभग 2890 m/s, K को घनत्व से भाग देकर वर्गमूल लेने पर
    2. लगभग 3480 m/s, (K + μ) को घनत्व से भाग देकर वर्गमूल लेने पर, पूरा अपरूपण-मापांक जोड़कर
    3. लगभग 3650 m/s, (K + 4μ/3) को घनत्व से भाग देकर वर्गमूल लेने पर
    4. लगभग 1940 m/s, μ को घनत्व से भाग देकर वर्गमूल लेने पर
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — लगभग 3650 m/s, (K + 4μ/3) को घनत्व से भाग देकर वर्गमूल लेने पर

    P-तरंग मापांक K + 4μ/3 = 20 + 12 = 32 GPa है, अतः Vp = √(32 × 10⁹/2400) = √(1.333 × 10⁷) ≈ 3651 m/s। भ्रामक 2890 m/s समान K वाले तरल का वेग है (दृढ़ता का पद नहीं), और 1940 m/s S-तरंग वेग √(μ/ρ) है। 4μ/3 के स्थान पर μ जोड़ना भी गलत है।
  2. एक Vibroseis अभिलेख का प्रेषित स्वीप से प्रति-सहसंबंध किया जाता है। यह आँकड़ों के साथ क्या करता है?

    1. यह प्रत्येक लंबी स्वीप-प्रतिक्रिया को स्वीप की बैंडविड्थ वाली छोटी शून्य-कला तरंगिका में संपीडित करता है
    2. यह पृथ्वी द्वारा अवशोषित आवृत्तियों को लौटाकर प्रयोज्य बैंडविड्थ को स्वीप-पट्टी से आगे तक बढ़ा देता है
    3. यह स्रोत-हस्ताक्षर को न्यूनतम-कला तरंगिका में बदलता है ताकि पूर्वानुमानी विसंवलन उसके बाद चल सके
    4. यह बहुपरावर्तन हटाता है, क्योंकि स्वीप में एक अंतर्निहित पुनरावृत्ति-काल होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — यह प्रत्येक लंबी स्वीप-प्रतिक्रिया को स्वीप की बैंडविड्थ वाली छोटी शून्य-कला तरंगिका में संपीडित करता है

    अभिलेख का स्वीप से सहसंबंध लंबी, फैली प्रतिक्रिया को छोटी, सममित, शून्य-कला (Klauder) तरंगिका में संपीडित करता है जिसका स्पेक्ट्रम स्वीप का ही है। वह ऐसी आवृत्तियाँ नहीं बना सकता जो स्वीप में थीं ही नहीं, और बहुपरावर्तन को नहीं छूता। न्यूनतम-कला निर्गत का भ्रामक दावा गलत है, क्योंकि सहसंबंध-तरंगिका शून्य-काल के सापेक्ष सममित होती है।
  3. भूकंपीय रव के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. समान संकेत व स्वतंत्र यादृच्छिक रव वाले N ट्रेस स्टैक करने से संकेत-रव अनुपात आयाम में √N से सुधरता है
    2. समान शून्य-ऑफ़सेट समय पर आने वाले प्राथमिक की तुलना में बहुपरावर्तन का स्टैकिंग-वेग अधिक होता है
    3. रव-श्रेणी बिना स्थानिक अलियासिंग के तभी प्रतिचयित होती है जब ग्रुप-अंतराल उसके आभासी तरंगदैर्ध्य के आधे से अधिक न हो
    4. जियोफ़ोन ऐरे ग्राउंड रोल घटा नहीं सकता, क्योंकि ग्राउंड रोल ऊर्ध्वाधर चलता है और ऐरे में समकला में जुड़ता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — समान संकेत व स्वतंत्र यादृच्छिक रव वाले N ट्रेस स्टैक करने से संकेत-रव अनुपात आयाम में √N से सुधरता है; C — रव-श्रेणी बिना स्थानिक अलियासिंग के तभी प्रतिचयित होती है जब ग्रुप-अंतराल उसके आभासी तरंगदैर्ध्य के आधे से अधिक न हो

    स्वतंत्र रव शक्ति में जुड़ता है जबकि संकेत आयाम में जुड़ता है, जिससे √N लाभ मिलता है, और नाइक्विस्ट-प्रकार का नियम Δx ≤ λa/2 स्थानिक अलियासिंग की सीमा है। बहुपरावर्तन उथली परतों में लंबा, मंद पथ तय करता है, अतः समान समय पर उसका स्टैकिंग-वेग प्राथमिक से कम होता है, जिससे स्टैकिंग व रेडॉन फ़िल्टर उसे अलग करते हैं। ग्राउंड रोल का सतह के अनुदिश आभासी तरंगदैर्ध्य छोटा होता है, अतः उपयुक्त लंबाई का ऐरे उसे निरस्त करता है जबकि बहुत लंबे आभासी तरंगदैर्ध्य वाले परावर्तन जुड़ते हैं।
  4. एक रव-परीक्षण में ग्राउंड रोल का आभासी वेग 400 m/s और आवृत्तियाँ 40 Hz तक मिलती हैं। इस नियम का प्रयोग करते हुए कि श्रेणी तभी स्थानिक अलियासिंग से मुक्त रहती है जब प्रतिचयन-अंतराल उसके आभासी तरंगदैर्ध्य के आधे से अधिक न हो, सबसे बड़ा कौन-सा ग्रुप-अंतराल उसे बिना अलियासिंग के प्रतिचयित करता है?

    1. 10 m, क्योंकि अंतराल एक आभासी तरंगदैर्ध्य होना चाहिए
    2. 5 m, क्योंकि आभासी तरंगदैर्ध्य 10 m है और उसका आधा अनुमेय है
    3. 20 m, क्योंकि श्रेणी की केवल निम्नतम आवृत्ति प्रतिचयित करनी होती है
    4. 2.5 m, क्योंकि अंतराल आभासी तरंगदैर्ध्य का चौथाई होना चाहिए
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 5 m, क्योंकि आभासी तरंगदैर्ध्य 10 m है और उसका आधा अनुमेय है

    सबसे छोटा आभासी तरंगदैर्ध्य λa = V/f = 400/40 = 10 m है, और दिया नियम अधिकतम λa/2 = 5 m का अंतराल अनुमत करता है। 10 m वाला विकल्प एक-तरंगदैर्ध्य की भ्रामक भूल है, और सीमा निम्नतम नहीं, उच्चतम आवृत्ति तय करती है क्योंकि उसका तरंगदैर्ध्य सबसे छोटा है। 2.5 m नियम की आवश्यकता से अधिक कड़ा है।
  5. एक 2D रेखा 120 चैनलों के साथ 20 m ग्रुप-अंतराल पर, हर 40 m पर शॉट देकर अभिलेखित की जाती है। फिर शॉट-अंतराल 80 m कर दिया जाता है और शेष सब अपरिवर्तित रहता है। क्या होता है?

    1. फ़ोल्ड व CMP अंतराल दोनों आधे हो जाते हैं, क्योंकि सर्वेक्षण मोटा हो जाता है
    2. फ़ोल्ड दुगुना होकर 60 हो जाता है, क्योंकि कम शॉट का अर्थ स्प्रेडों का कम अतिव्यापन व साफ़ गैदर है
    3. फ़ोल्ड 30 पर अपरिवर्तित रहता है, क्योंकि वह केवल चैनलों की संख्या पर निर्भर है
    4. फ़ोल्ड 30 से घटकर 15 हो जाता है, और CMP अंतराल 10 m ही रहता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — फ़ोल्ड 30 से घटकर 15 हो जाता है, और CMP अंतराल 10 m ही रहता है

    फ़ोल्ड = N·Δg/(2·Δs) = 120 × 20/(2 × 40) = 30 पहले, और 120 × 20/(2 × 80) = 15 बाद में। CMP अंतराल Δg/2 = 10 m है और उसमें शॉट-अंतराल नहीं आता। फ़ोल्ड चैनल-संख्या के साथ शॉट-अंतराल पर भी निर्भर है, अतः केवल चैनल मायने रखने का दावा गलत है, और कम शॉट का अर्थ प्रति मध्य-बिंदु कम ट्रेस है, अधिक नहीं।
  6. एक 2D स्थलीय सर्वेक्षण में 12.5 m ग्रुप-अंतराल पर 240 चैनल अभिलेखित होते हैं और हर 50 m पर शॉट दिया जाता है। फ़ोल्ड = (चैनलों की संख्या × ग्रुप-अंतराल)/(2 × शॉट-अंतराल) का प्रयोग करते हुए नाममात्र CMP फ़ोल्ड ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 30

    फ़ोल्ड = 240 × 12.5/(2 × 50) = 3000/100 = 30। प्रचलित भूल N/2 = 120 बताना है, जो तभी सही है जब हर बार शॉट एक ग्रुप-अंतराल बढ़े।
  7. V1 = 1500 m/s, V2 = 2500 m/s व h = 60 m वाली समतल द्वि-परत पृथ्वी के लिए शीर्ष तरंग के बारे में कौन-सा कथन सही है?

    1. वह पहली बार 240 m पर अस्तित्व में आती है, जहाँ वह प्रथम-आगमन भी बन जाती है
    2. वह पहली बार 90 m पर अस्तित्व में आती है पर प्रथम-आगमन केवल 240 m के आगे बनती है
    3. वह पहली बार 240 m पर अस्तित्व में आती है पर प्रथम-आगमन 90 m से बनती है
    4. वह सभी ऑफ़सेट पर अस्तित्व में रहती है, क्योंकि अंतरापृष्ठ समतल है, और 90 m के आगे पहले आती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — वह पहली बार 90 m पर अस्तित्व में आती है पर प्रथम-आगमन केवल 240 m के आगे बनती है

    sinθc = 1500/2500 = 0.6, अतः tanθc = 0.75 और क्रांतिक दूरी 2 × 60 × 0.75 = 90 m है, वह निकटतम ऑफ़सेट जहाँ शीर्ष तरंग होती है। क्रॉसओवर दूरी 2h√[(V2 + V1)/(V2 − V1)] = 120 × √4 = 240 m है; उसके आगे ही शीर्ष तरंग प्रत्यक्ष तरंग को हराकर प्रथम-आगमन दिखती है। क्रॉसओवर को शीर्ष तरंग का आरंभ मानना, या क्रांतिक दूरी को प्रथम-आगमन बिंदु मानना, दोनों दूरियाँ आपस में बदल देता है।
  8. समतल द्वि-परत अपवर्तन सर्वेक्षण में शीर्ष-तरंग रेखा का अंतःखंड समय 80 ms है। ऊपरी परत में V1 = 1800 m/s और निचली में V2 = 3000 m/s है। अंतरापृष्ठ की गहराई ____ m है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 90

    cosθc = √(1 − (1800/3000)²) = √(1 − 0.36) = 0.8, अतः h = ti·V1/(2·cosθc) = 0.080 × 1800/(2 × 0.8) = 144/1.6 = 90 m। ti·V1/2 = 72 m लेना (cosθc भूल जाना) प्रचलित त्रुटि है।
  9. मंद ढाल वाले अंतरापृष्ठ पर अग्र व पश्च अपवर्तन शॉटिंग से शीर्ष-तरंग के आभासी वेग नीचे-ढाल दिशा में 2400 m/s और ऊपर-ढाल दिशा में 3600 m/s मिलते हैं। cosδ ≈ 1 लेकर अपवर्तक का वास्तविक वेग क्या है?

    1. 3000 m/s, दोनों आभासी वेगों का समांतर माध्य
    2. 2940 m/s, गुणोत्तर माध्य निकटतम दस तक पूर्णांकित
    3. 2880 m/s, दोनों आभासी वेगों का हरात्मक माध्य
    4. 3600 m/s, क्योंकि ऊपर-ढाल का मान ही वास्तविक वेग है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — 2880 m/s, दोनों आभासी वेगों का हरात्मक माध्य

    cosδ ≈ 1 के साथ V2 = 2·cosδ/(1/Vd + 1/Vu) हरात्मक माध्य है: 2 × 2400 × 3600/(2400 + 3600) = 2880 m/s। 3000 m/s का समांतर माध्य भ्रामक त्रुटि है, क्योंकि औसत मंदता (1/V) का होता है, वेगों का नहीं। समतल अंतरापृष्ठ को छोड़कर कोई भी आभासी वेग वास्तविक वेग नहीं होता।
  10. 2000 m/s के स्थिर वेग वाले माध्यम में एक समतल परावर्तक शून्य ऑफ़सेट पर T0 = 0.8 s देता है। सटीक संबंध T² = T0² + x²/V² का प्रयोग करते हुए 1200 m ऑफ़सेट पर सामान्य मूवआउट क्या है?

    1. 100 ms
    2. 200 ms
    3. 225 ms
    4. 400 ms
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 200 ms

    T = √(0.8² + (1200/2000)²) = √(0.64 + 0.36) = 1.0 s, अतः ΔT = 1.0 − 0.8 = 0.2 s = 200 ms। छोटे-ऑफ़सेट सूत्र x²/(2V²T0) से 225 ms मिलता है, जो भ्रामक मान है, पर प्रश्न सटीक संबंध माँगता है, और यहाँ ऑफ़सेट 800 m की गहराई की तुलना में छोटा नहीं है।
  11. स्टैकिंग विश्लेषण से 0.6 s द्वि-पथ समय पर RMS वेग 2100 m/s और 1.4 s पर 2500 m/s मिलते हैं। Dix समीकरण से दोनों समयों के बीच की परत का अंतराल वेग, निकटतम m/s तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 2762

    V²int = (2500² × 1.4 − 2100² × 0.6)/(1.4 − 0.6) = (8.75 × 10⁶ − 2.646 × 10⁶)/0.8 = 7.63 × 10⁶, अतः Vint = 2762 m/s। RMS अंतर को समय-अंतर से भाग देना (500 m/s) या दोनों RMS मानों का औसत लेना Dix समीकरण नहीं है।
  12. एक समतल परावर्तक 3000 m/s के वास्तविक वेग वाले माध्यम में 30° ढलवाँ है। छोटे ऑफ़सेट के CMP गैदर के लिए इस परावर्तक का NMO (स्टैकिंग) वेग निकटतम किसके है?

    1. 2600 m/s, क्योंकि ढाल आभासी वेग को cosδ से घटाता है
    2. 3000 m/s, क्योंकि स्टैकिंग-वेग ढाल से स्वतंत्र है
    3. 6000 m/s, क्योंकि ढलवाँ अंतरापृष्ठ पर परावर्तन-पथ दुगुना हो जाता है
    4. 3460 m/s, क्योंकि स्टैकिंग-वेग V/cosδ है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 3460 m/s, क्योंकि स्टैकिंग-वेग V/cosδ है

    ढलवाँ परावर्तक के लिए T² = T0² + x²cos²δ/V² है, अतः NMO वेग V/cosδ = 3000/0.866 ≈ 3464 m/s है, जो वास्तविक वेग से अधिक है। cosδ से गुणा करना (2600 m/s) संबंध उलट देता है, और स्टैकिंग-वेग ढाल-मुक्त नहीं है।
  13. परावर्तन यात्रा-काल व वेगों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. परतित पृथ्वी में किसी समय तक का RMS वेग उस समय तक के औसत वेग से कभी कम नहीं होता
    2. समान वेग व ऑफ़सेट के लिए उथले परावर्तक का सामान्य मूवआउट अधिक होता है
    3. किसी परत का अंतराल वेग दो RMS वेगों के अंतर को उनके समयों के अंतर से भाग देने पर मिलता है
    4. ढलवाँ परावर्तक पर स्टैकिंग-वेग वास्तविक माध्यम-वेग से कम होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — परतित पृथ्वी में किसी समय तक का RMS वेग उस समय तक के औसत वेग से कभी कम नहीं होता; B — समान वेग व ऑफ़सेट के लिए उथले परावर्तक का सामान्य मूवआउट अधिक होता है

    अंतराल वेगों का समय-भारित RMS उनके समय-भारित माध्य, अर्थात् औसत वेग, से नीचे नहीं जा सकता, और ΔT ≈ x²/(2V²T0) T0 घटने पर बढ़ता है, अतः उथली घटनाएँ अधिक मुड़ती हैं। Dix समीकरण V न होकर V²·T पर चलता है, अतः सरल अंतर-भागफल गलत है, और ढाल स्टैकिंग-वेग को घटाने के बजाय V/cosδ तक बढ़ाता है।
  14. किसी रेखा के 6 km खंड में अपक्षयित परत चिकनाई से मोटी होती जाती है और स्टैटिक्स असंशोधित छोड़े जाते हैं। जियोफ़ोन स्प्रेड 2.4 km लंबा है। स्टैक-खंड पर सबसे संभावित प्रभाव क्या है?

    1. झूठा संरचनात्मक उच्च या निम्न, क्योंकि प्रत्येक गैदर लगभग एकसमान खिसकता है और फिर भी संसक्त स्टैक होता है
    2. स्टैक-संसक्ति की हानि व टूटी घटनाएँ, क्योंकि एक ही गैदर का प्रत्येक ट्रेस भिन्न मात्रा से खिसकता है
    3. केवल स्टैकिंग-वेग में त्रुटि, परावर्तक-समय अपरिवर्तित रहते हुए
    4. कोई दृश्य प्रभाव नहीं, क्योंकि NMO संशोधन सतह-संबंधी समय-विस्थापन हटा देता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — झूठा संरचनात्मक उच्च या निम्न, क्योंकि प्रत्येक गैदर लगभग एकसमान खिसकता है और फिर भी संसक्त स्टैक होता है

    स्प्रेड से बहुत लंबा परिवर्तन एक CMP गैदर के सभी ट्रेसों को लगभग समान मात्रा में खिसकाता है, अतः स्टैक संसक्त रहता है पर पूरी घटना हिल जाती है और संरचना की नक़ल बनती है। संसक्ति नष्ट करने वाले लघु-तरंगदैर्ध्य स्टैटिक्स (स्प्रेड से छोटे) होते हैं। NMO ऑफ़सेट व समय पर निर्भर है, सतही स्थिति पर नहीं, और स्टैटिक को सोख नहीं सकता; यहाँ वह आभासी वेग को भी केवल थोड़ा बदलता है।
  15. एक ग्राही स्टेशन 125 m सतही उन्नयन पर है, और वह 600 m/s वेग की 9 m मोटी अपक्षयित परत पर टिका है। अधो-अपक्षयण वेग 2000 m/s है और डेटम 100 m उन्नयन पर, अपक्षयण-तल के नीचे, है। t = h/Vw + (E − h − Ed)/Vb का प्रयोग करते हुए इस स्टेशन के स्थैतिक संशोधन का परिमाण ____ ms है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 23

    अपक्षयण: 9/600 = 0.015 s = 15 ms। उसके नीचे: E − h − Ed = 125 − 9 − 100 = 16 m, और 16/2000 = 0.008 s = 8 ms। कुल = 15 + 8 = 23 ms, जो −23 ms के विस्थापन के रूप में लगता है। पूरे 25 m के लिए Vb लेना (12.5 ms) मंद परत की उपेक्षा करता है।
  16. एक शेल (ρ = 2.2 g/cm³, Vp = 2500 m/s) एक बलुआ पत्थर (ρ = 2.5 g/cm³, Vp = 3500 m/s) के ऊपर है। अंतरापृष्ठ का अभिलंब-आपतन P-तरंग परावर्तन गुणांक निकटतम किसके है?

    1. 0.17, केवल वेग-विषमता से, घनत्व की उपेक्षा करके
    2. 0.06, केवल घनत्व-विषमता से
    3. 0.23, ध्वनिक प्रतिबाधाओं 5500 व 8750 से
    4. 0.59, प्रतिबाधाओं के अनुपात में से एक घटाने पर
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — 0.23, ध्वनिक प्रतिबाधाओं 5500 व 8750 से

    Z = ρV के साथ R = (Z2 − Z1)/(Z2 + Z1): Z1 = 2.2 × 2500 = 5500 व Z2 = 2.5 × 3500 = 8750, अतः R = 3250/14250 = 0.228। केवल वेग (0.17) या केवल घनत्व (0.06) लेने से प्रतिबाधा का एक गुणक छूट जाता है, और अनुपात में से एक घटाना परावर्तन गुणांक नहीं है। R धनात्मक है क्योंकि प्रतिबाधा नीचे की ओर बढ़ती है।
  17. स्थैतिक संशोधनों व CMP ज्यामिति के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. स्थैतिक संशोधन पूरे ट्रेस का एक समय-विस्थापन है जो स्रोत या ग्राही की सतही स्थिति पर निर्भर करता है
    2. अवशिष्ट स्टैटिक्स आँकड़ों से ही पृष्ठ-संगत रूप में आँके जाते हैं, उदाहरणतः ट्रेसों को पायलट ट्रेस से सहसंबंधित करके
    3. CMP गैदर में NMO संशोधन सभी ट्रेसों के लिए समान होता है, जिससे वे जोड़े जा सकें
    4. 2D रेखा का CMP अंतराल शॉट-अंतराल के बराबर होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — स्थैतिक संशोधन पूरे ट्रेस का एक समय-विस्थापन है जो स्रोत या ग्राही की सतही स्थिति पर निर्भर करता है; B — अवशिष्ट स्टैटिक्स आँकड़ों से ही पृष्ठ-संगत रूप में आँके जाते हैं, उदाहरणतः ट्रेसों को पायलट ट्रेस से सहसंबंधित करके

    स्टैटिक केवल इस पर निर्भर है कि स्रोत या ग्राही कहाँ स्थित है, और अवशिष्ट स्टैटिक्स आँकड़ों से स्रोत व ग्राही पदों में वियोजित किए जाते हैं। NMO ऑफ़सेट व समय पर निर्भर है, इसीलिए वह अतिपरवलय को ट्रेस-दर-ट्रेस समतल करता है; वह गैदर के प्रत्येक ट्रेस के लिए भिन्न होता है। CMP अंतराल ग्रुप-अंतराल का आधा है और शॉट-अंतराल से स्वतंत्र है।