उत्तर प्रदेश: संवैधानिक राजव्यवस्था एवं स्थानीय शासन
2. मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद
राज्यपाल मुख्यमंत्री को और उसकी सलाह पर अन्य मंत्रियों को नियुक्त करता है। मंत्रिपरिषद विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है (अनुच्छेद 164(2)), विधान परिषद के प्रति नहीं। जो मंत्री लगातार छह माह विधानमंडल का सदस्य नहीं रहता, वह मंत्री नहीं रहता (अनुच्छेद 164(4))। 91वें संशोधन (2003) ने मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद को विधान सभा की सदस्य-संख्या के 15 प्रतिशत तक सीमित किया, न्यूनतम बारह के साथ (अनुच्छेद 164(1A))। 403 सदस्यीय विधान सभा में 15 प्रतिशत 60.45 है, अतः उच्चतम सीमा 60। दसवीं अनुसूची के अंतर्गत दल-बदल के कारण अयोग्य ठहराया गया सदस्य मंत्री नहीं बन सकता (अनुच्छेद 164(1B))।
3. विधान सभा एवं विधान परिषद
| विशेषता | विधान सभा | विधान परिषद |
|---|---|---|
| संख्या | 2000 के पुनर्गठन के बाद 403 (अनुच्छेद 170) | 2000 से 100 (पहले 108) |
| संरचना | प्रत्यक्ष निर्वाचित; 84 अनुसूचित जाति व 2 अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षित | 38 विधायकों, 36 स्थानीय निकायों, 8 स्नातकों, 8 शिक्षकों द्वारा; 10 राज्यपाल द्वारा नामनिर्दिष्ट |
| कार्यकाल | पाँच वर्ष, जब तक विघटित न हो (अनुच्छेद 172) | स्थायी सदन; प्रत्येक दो वर्ष में एक-तिहाई सेवानिवृत्त |
| पीठासीन अधिकारी | अध्यक्ष (अनुच्छेद 178) | सभापति (अनुच्छेद 182) |
साधारण विधेयक किसी भी सदन में आरंभ हो सकता है (अनुच्छेद 196)। परिषद उसे अस्वीकार करे, तीन माह रोके या संशोधित करे, तो विधान सभा उसे पुनः पारित कर सकती है; यदि परिषद एक माह में उसे पारित न करे तो वह दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है (अनुच्छेद 197)। धन विधेयक केवल विधान सभा में राज्यपाल की सिफ़ारिश पर पेश होता है; परिषद 14 दिन में संशोधन सुझा सकती है, जिन्हें विधान सभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है (अनुच्छेद 198)। विधेयक के धन विधेयक होने का अध्यक्ष का प्रमाण-पत्र अंतिम है (अनुच्छेद 199)। परिषद का सृजन या उत्सादन विधान सभा के विशेष बहुमत के संकल्प पर संसद कर सकती है (अनुच्छेद 169)।
4. केंद्र-राज्य संबंध एवं राज्य का धन
सातवीं अनुसूची के अंतर्गत समवर्ती विषय पर राज्य की विधि, संघ की विधि से विरोध में होने पर, उत्तर प्रदेश में तभी प्रभावी रहती है जब उसे राष्ट्रपति की अनुमति मिली हो (अनुच्छेद 254(2))। राज्य संघ की विधियों का निष्पादन करता है और संघ के निदेश मानता है (अनुच्छेद 256 व 257)। कर-हस्तांतरण की सिफ़ारिश वित्त आयोग प्रत्येक पाँच वर्ष में करता है (अनुच्छेद 280); समन्वय अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263) तथा मध्य क्षेत्रीय परिषद से होता है, जो राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत वैधानिक सलाहकारी निकाय है और उत्तर प्रदेश को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व उत्तराखंड के साथ रखती है। उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 ने 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड बनाया और उत्तर प्रदेश की लोक सभा सीटें 85 से 80 तथा राज्य सभा सीटें 34 से 31 कीं।
| निधि | अनुच्छेद | इसमें क्या है |
|---|---|---|
| संचित निधि | 266(1) | सभी राजस्व व ऋण; विनियोग-विधि के बिना धन इससे नहीं निकलता |
| लोक लेखा | 266(2) | अन्य सार्वजनिक धन, जैसे जमा; विनियोग-विधि के बिना भुगतान |
| आकस्मिकता निधि | 267(2) | अग्रदाय; राज्यपाल इससे अत्यावश्यक, अप्रत्याशित व्यय हेतु अग्रिम देता है |
राज्यपाल वार्षिक वित्तीय विवरण विधान सभा के समक्ष रखवाता है (अनुच्छेद 202)। भारित व्यय, जैसे अध्यक्ष का वेतन और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, पर चर्चा होती है पर मतदान नहीं; शेष हर मद की अनुदान-माँग पर केवल विधान सभा मतदान करती है (अनुच्छेद 203)। नियंत्रक-महालेखापरीक्षक राज्य के लेखों की लेखा-परीक्षा करता है (अनुच्छेद 149); उसका प्रतिवेदन राज्यपाल को जाता है, जो उसे विधानमंडल के समक्ष रखवाता है (अनुच्छेद 151(2))।
5. उच्च न्यायालय एवं महाधिवक्ता
यह न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रूप में बैठता है। 17 मार्च 1866 की लेटर्स पेटेंट से यह उत्तर-पश्चिमी प्रांतों के लिए आगरा में बना; 1869 में यह इलाहाबाद गया और 1919 की पूरक लेटर्स पेटेंट ने वर्तमान नाम दिया। पृथक रूप से, लखनऊ में अवध चीफ़ कोर्ट 1925 में अवध सिविल कोर्ट्स अधिनियम से गठित हुआ। संयुक्त प्रांत उच्च न्यायालय (समामेलन) आदेश, 1948 ने दोनों का विलय किया और न्यायाधीशों से लखनऊ में बैठने की अपेक्षा की; अतः लखनऊ पीठ उसी न्यायालय की स्थायी पीठ है, पृथक उच्च न्यायालय नहीं। न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्त होते हैं (अनुच्छेद 217)।
- रिट (अनुच्छेद 226): सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति से व्यापक, क्योंकि उच्च न्यायालय किसी भी मूल अधिकार और “किसी अन्य प्रयोजन” के लिए रिट जारी कर सकता है।
- पर्यवेक्षण (अनुच्छेद 227 व 235): राज्य के सभी न्यायालयों व अधिकरणों पर अधीक्षण। जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय से परामर्श कर करता है (अनुच्छेद 233)।
महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल उन व्यक्तियों में से करता है जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होने योग्य हों; वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और किसी भी सदन व उसकी समितियों में बोल सकता है, मतदान नहीं (अनुच्छेद 165 व 177)।
6. राज्य के निकाय एवं राजभाषा
| निकाय | आधार | स्मरणीय बिंदु |
|---|---|---|
| लोक सेवा आयोग (यू.पी.पी.एस.सी.) | अनुच्छेद 315-323 | इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में 1 अप्रैल 1937 को भारत शासन अधिनियम, 1935 के अंतर्गत स्थापित; सदस्य छह वर्ष या 62 वर्ष तक |
| राज्य निर्वाचन आयोग | अनुच्छेद 243K व 243ZA | पंचायत व नगरीय चुनाव; विधान सभा व परिषद के चुनाव भारत निर्वाचन आयोग के |
| राज्य मानवाधिकार आयोग | धारा 21, मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 | वैधानिक, संवैधानिक नहीं |
राजभाषा। अनुच्छेद 345 राज्य विधानमंडल को राज्यभाषा अपनाने देता है। उत्तर प्रदेश राजभाषा अधिनियम, 1951 ने देवनागरी लिपि में हिंदी को राजभाषा बनाया। 1989 के संशोधन ने नई धारा 3 जोड़कर उर्दू को सरकार द्वारा अधिसूचित प्रयोजनों के लिए द्वितीय राजभाषा बनाया। यू.पी. हिंदी साहित्य सम्मेलन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (4 सितंबर 2014) में पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने इसे वैध ठहराया और कहा कि अनुच्छेद 345 की शक्ति समय-समय पर प्रयुक्त हो सकती है।
राजनीतिक दल। दलों का पंजीकरण और मान्यता भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के अंतर्गत करता है। 2022 के विधान सभा चुनाव में, जो सभी 403 स्थानों पर हुआ, भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 10 मार्च 2022 को घोषित परिणामों के अनुसार भाजपा ने 255 और समाजवादी पार्टी ने 111 स्थान जीते।
7. पंचायती राज एवं नगरीय स्थानीय शासन
73वें संशोधन ने भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243O) और ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी; 74वें संशोधन ने भाग IXA (अनुच्छेद 243P से 243ZG) और बारहवीं अनुसूची जोड़ी। दोनों 1993 में प्रभावी हुए। मुख्य नियम: पंचायत या नगरपालिका का कार्यकाल पाँच वर्ष है; सीटें व पद अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए जनसंख्या-अनुपात में और कम से कम एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित हैं (अनुच्छेद 243D)। मध्यवर्ती या जिला पंचायत का अध्यक्ष निर्वाचित सदस्यों में से और उन्हीं द्वारा चुना जाता है (अनुच्छेद 243C(5)); ग्राम स्तर पर राज्य की विधि निर्णय करती है। वित्त की समीक्षा राज्य वित्त आयोग प्रत्येक पाँच वर्ष में करता है (अनुच्छेद 243I व 243Y)।
| निकाय | विधि | प्रमुख और चयन |
|---|---|---|
| ग्राम पंचायत | उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 | प्रधान, गाँव के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचित |
| क्षेत्र पंचायत (विकास खंड) | उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत अधिनियम, 1961 | प्रमुख, निर्वाचित सदस्यों द्वारा (धारा 7) |
| जिला पंचायत | वही 1961 अधिनियम | अध्यक्ष, निर्वाचित सदस्यों द्वारा (धारा 19) |
| नगर निगम | नगर निगम विधि, 1959 | महापौर, प्रत्यक्ष निर्वाचित; नगर आयुक्त कार्यकारी प्रमुख |
मई 2023 के नगरीय चुनावों में मतदाताओं ने 17 नगर निगमों के महापौर प्रत्यक्ष रूप से चुने। चूँकि अनुच्छेद 243C(5) मध्यवर्ती और जिला पंचायत के प्रमुखों का अप्रत्यक्ष चुनाव तय करता है, इसलिए क्षेत्र प्रमुख या जिला अध्यक्ष के प्रत्यक्ष चुनाव हेतु पहले संवैधानिक संशोधन चाहिए।
8. लोकनीति एवं अधिकार
राज्य की लोक-सेवा आरक्षण व्यवस्था अनुच्छेद 15(4), 16(4) व 16(6) तथा उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 पर टिकी है, जिसकी धारा 3 सीधी भर्ती में अनुसूचित जाति के लिए 21, अनुसूचित जनजाति के लिए 2 और अन्य पिछड़े वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षित करती है। यह अधिनियम (उ.प्र. अधिनियम 4/1994) 11 दिसंबर 1993 से प्रवृत्त माना गया है; धारा 3(1) का वर्तमान रूप 2001 और 2002 के संशोधनों (अधिनियम 21/2001 और 1/2002) से प्रतिस्थापित है, और 2013 में एक और संशोधन (अधिनियम 1/2013) हुआ। आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों का 10 प्रतिशत कोटा 103वें संशोधन (2019) से और 50 प्रतिशत की सीमा इंद्रा साहनी (1992) से है। अधिकार का उल्लंघन हो तो व्यक्ति अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय जा सकता है, और लोक सेवकों के दुरुपयोग पर राज्य मानवाधिकार आयोग।
मुख्य बिंदु
- राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है, शपथ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति दिलाते हैं और वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है; राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपतिता वैधानिक है।
- मंत्रिपरिषद केवल 403 सदस्यीय विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है; 91वाँ संशोधन उसे विधान सभा के 15 प्रतिशत, अर्थात उत्तर प्रदेश में 60 तक सीमित करता है।
- 100 सदस्यीय विधान परिषद साधारण विधेयक को तीन और फिर एक माह तक विलंबित कर सकती है, और धन विधेयक पर केवल सिफ़ारिश करती है।
- उच्च न्यायालय की उत्पत्ति 17 मार्च 1866 की लेटर्स पेटेंट से है; अवध चीफ़ कोर्ट 1948 में उसमें मिला, जिससे लखनऊ पीठ बनी।
- पंचायत व नगरीय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग के हैं; क्षेत्र प्रमुख और जिला अध्यक्ष अनुच्छेद 243C(5) के अंतर्गत अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।
- 1994 के अधिनियम के अंतर्गत राज्य की सेवाओं में अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी के लिए 21, 2 और 27 प्रतिशत आरक्षण है।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
संविधान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को पद की शपथ कौन दिलाता है?
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उत्तर: B — इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति
अनुच्छेद 159 के अनुसार राज्यपाल की शपथ राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति दिलाते हैं, अतः उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति। भारत के मुख्य न्यायमूर्ति भ्रामक उत्तर हैं, क्योंकि यह पद राष्ट्रपति की शपथ दिलाता है, पर राज्यपाल की शपथ राज्य के अपने उच्च न्यायालय की जिम्मेदारी है।संविधान के अनुसार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 100 सदस्यों में से कितने राज्यपाल द्वारा नामनिर्दिष्ट होते हैं?
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उत्तर: D — दस
राज्यपाल 10 सदस्य नामनिर्दिष्ट करता है, जो साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा में विशेष ज्ञान रखते हों। स्नातकों और शिक्षकों की आठ-आठ सीटें निर्वाचित होती हैं और छत्तीस सीटें स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा, इसलिए वे भ्रामक उत्तर हैं।उत्तर प्रदेश विधानमंडल के एक धन विधेयक के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। P. इसे राज्यपाल की सिफ़ारिश पर विधान परिषद में पेश किया जा सकता है। Q. परिषद इसे प्राप्त होने के चौदह दिनों के भीतर संशोधन सुझा सकती है। R. विधान सभा परिषद के सुझाए संशोधनों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। S. यह प्रमाणित करने वाला अध्यक्ष का प्रमाण-पत्र कि विधेयक धन विधेयक है, परिषद द्वारा पुनर्विचार का विषय हो सकता है। कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — केवल Q और R
केवल Q और R सही हैं। धन विधेयक केवल विधान सभा में पेश होता है, परिषद में नहीं (अनुच्छेद 198), अतः P गलत है। अध्यक्ष का प्रमाण-पत्र अंतिम है (अनुच्छेद 199), अतः S गलत है। परिषद के सुझावों हेतु चौदह दिन और विधान सभा का उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार सही हैं।91वें संशोधन के अंतर्गत, विधान सभा की पूर्ण सदस्य-संख्या 403 होने पर, उत्तर प्रदेश की मंत्रिपरिषद, मुख्यमंत्री सहित, अधिकतम कितने सदस्यों की हो सकती है?
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उत्तर: C — साठ
403 का 15 प्रतिशत 60.45 है, और संविधान मंत्रिपरिषद को इस संख्या से अधिक न होने की सीमा देता है, अतः अधिकतम 60। 61 भ्रामक है क्योंकि वह ऊपर पूर्णांकित करता है, जिसकी अनुमति सीमा नहीं देती। चालीस और पचास सीमा से मेल नहीं खाते।1963 से 1967 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं प्रथम महिला कौन थीं?
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उत्तर: A — सुचेता कृपलानी
सुचेता कृपलानी 1963 से 1967 तक राज्य की मुख्यमंत्री रहीं और भारत में किसी राज्य सरकार की प्रथम महिला प्रमुख थीं। सरोजिनी नायडू 1947 से 1949 तक संयुक्त प्रांत की राज्यपाल थीं, मुख्यमंत्री नहीं; दोनों पदों को मिलाने वाला उन्हें चुनेगा।संविधान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की निम्नलिखित में से कौन-सी शक्ति नहीं है?
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उत्तर: B — विधान परिषद का विघटन करना, जो एक स्थायी सदन है
विधान परिषद एक स्थायी सदन है, जिसका विघटन नहीं होता (अनुच्छेद 172(2)), इसलिए राज्यपाल उसका विघटन नहीं कर सकता। शेष तीन वास्तविक राज्यपाल-शक्तियाँ हैं: विधान सभा का आहूत व सत्रावसान (अनुच्छेद 174), सदन सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी करना (अनुच्छेद 213) और वार्षिक वित्तीय विवरण रखवाना (अनुच्छेद 202)। भ्रम यह है कि राज्यपाल अनुच्छेद 174 के अंतर्गत विधान सभा का विघटन कर सकता है, इसलिए परिषद के लिए भी वही मान लेने का प्रलोभन होता है।विधान सभा द्वारा पारित एक गैर-धन विधेयक विधान परिषद को भेजा जाता है, जो उसे अस्वीकार कर देती है। विधान सभा उसी रूप में विधेयक को पुनः पारित कर देती है। परिषद पुनः पारित विधेयक को एक माह में पारित नहीं करती। इसके बाद क्या होता है?
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उत्तर: D — यह विधान सभा द्वारा दूसरी बार पारित रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है
अनुच्छेद 197 के अंतर्गत, जब विधान सभा विधेयक को पुनः पारित करे और परिषद एक माह में उसे पारित न करे, तो विधेयक विधान सभा द्वारा दूसरी बार पारित रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है। संयुक्त बैठक का प्रावधान (अनुच्छेद 108) केवल संसद के लिए है, राज्य विधानमंडल के लिए नहीं।इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के बारे में कौन-सा वर्णन सही है?
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उत्तर: C — वही उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ, जो 1948 के समामेलन आदेश से बनी
लखनऊ पीठ उसी उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ है, और 1948 के समामेलन आदेश ने अवध चीफ़ कोर्ट को उसमें मिला दिया। अवध चीफ़ कोर्ट अपने पुराने नाम से अब अस्तित्व में नहीं है, और पीठ केवल एक माह नहीं बैठती; इसलिए पृथक न्यायालय और सर्किट पीठ वाले विकल्प गलत हैं।इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इतिहास की निम्नलिखित घटनाओं को उनके घटित होने के क्रम में व्यवस्थित कीजिए। P. आगरा में न्यायालय की स्थापना करने वाली लेटर्स पेटेंट। Q. इसका शीर्षक इलाहाबाद में उच्च न्यायालय ऑफ़ जुडिकेचर बदलने वाली पूरक लेटर्स पेटेंट। R. लखनऊ में अवध चीफ़ कोर्ट का गठन। S. संयुक्त प्रांत उच्च न्यायालय (समामेलन) आदेश।
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उत्तर: B — P, Q, R, S
क्रम है P (लेटर्स पेटेंट, 17 मार्च 1866), Q (पूरक लेटर्स पेटेंट, 1919), R (अवध चीफ़ कोर्ट, 1925) और S (समामेलन आदेश, 1948)। 1919 का नामकरण अवध न्यायालय से पहले है, इसलिए R, Q से पहले नहीं आ सकता।संविधान के अनुसार उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सदस्य को कौन हटा सकता है?
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उत्तर: A — राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय की जाँच द्वारा कदाचार की रिपोर्ट के बाद
अनुच्छेद 317 हटाने की शक्ति राष्ट्रपति को देता है, और वह भी कदाचार के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय की जाँच और रिपोर्ट के बाद। राज्यपाल नियुक्ति करता है पर हटा नहीं सकता, इसलिए राज्यपाल वाला विकल्प गलत है, भले ही वह नियुक्ति प्राधिकारी हो।उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। P. इसके सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करता है। Q. सदस्य 65 वर्ष की आयु तक पद पर रहता है। R. दिवालिया घोषित होने पर राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय की जाँच के बिना सदस्य को हटा सकता है। S. पूर्व सदस्य कार्यकाल समाप्त होने के बाद उसी आयोग में पुनर्नियुक्त हो सकता है। कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: D — केवल P और R
केवल P और R सही हैं। Q गलत है, क्योंकि राज्य आयोग का सदस्य 62 वर्ष तक रहता है, 65 तक नहीं; और S गलत है, क्योंकि कार्यकाल पूरा होने के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं होती। R अनुच्छेद 317 का वह अपवाद है जहाँ दिवालियापन के लिए जाँच आवश्यक नहीं।किस संशोधन ने उत्तर प्रदेश राजभाषा अधिनियम, 1951 में नई धारा 3 जोड़ी, जिससे राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित प्रयोजनों के लिए उर्दू द्वितीय राजभाषा बनी?
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उत्तर: C — उत्तर प्रदेश राजभाषा (संशोधन) अधिनियम, 1989
1989 का संशोधन 7 अक्टूबर 1989 से प्रभावी हुआ और उसने 1951 के अधिनियम में धारा 3 जोड़ी। मूल अधिनियम केवल हिंदी को राजभाषा बनाता था, अतः वह उत्तर नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने 4 सितंबर 2014 को इस संशोधन को वैध ठहराया।संविधान के अनुसार क्षेत्र पंचायत (मध्यवर्ती स्तर) का अध्यक्ष कैसे चुना जाता है?
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उत्तर: B — क्षेत्र पंचायत के निर्वाचित सदस्यों द्वारा और उन्हीं में से निर्वाचित
अनुच्छेद 243C(5) मध्यवर्ती या जिला पंचायत के अध्यक्ष को निर्वाचित सदस्यों में से और उन्हीं द्वारा चुनने की अपेक्षा करता है। उत्तर प्रदेश में 1961 के अधिनियम की धारा 7 इसे प्रमुख पर लागू करती है। गाँव का प्रधान इसके विपरीत प्रत्यक्ष निर्वाचित होता है, इसलिए प्रत्यक्ष चुनाव वाला विकल्प भ्रामक है।उत्तर प्रदेश के स्थानीय स्वशासन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। P. अनुच्छेद 243D के अनुसार प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों का कम से कम एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होना चाहिए। Q. राज्य वित्त आयोग का गठन राज्यपाल द्वारा प्रत्येक पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर होता है। R. गाँव का प्रधान उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के अंतर्गत निर्वाचित होता है। S. 2023 के नगरीय चुनावों में नगर निगमों के महापौर पार्षदों द्वारा चुने गए। कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — केवल P और Q
केवल P और Q सही हैं। महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण और पाँच-वर्षीय राज्य वित्त आयोग संवैधानिक प्रावधान हैं (अनुच्छेद 243D और 243I)। R गलत है, क्योंकि गाँव प्रधान का चुनाव 1947 के अधिनियम से शासित है, 1961 से नहीं। S गलत है, क्योंकि 2023 में मतदाताओं ने महापौर प्रत्यक्ष रूप से चुने।उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 के अंतर्गत सीधी भर्ती का कितना प्रतिशत अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित है?
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उत्तर: C — 27 प्रतिशत
अधिनियम की धारा 3 अनुसूचित जाति के लिए 21, अनुसूचित जनजाति के लिए 2 और अन्य पिछड़े वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षित करती है। 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति का हिस्सा है, और 50 प्रतिशत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इंद्रा साहनी (1992) में सभी आरक्षणों पर कुल सीमा है।उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग किस केंद्रीय अधिनियम के अंतर्गत गठित है?
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उत्तर: B — मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
राज्य मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 21 के अंतर्गत वैधानिक निकाय है। अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को रिट शक्ति देता है, आयोग को नहीं। लोकायुक्त अधिनियम राज्य की विधि है, और सूचना आयोगों को RTI अधिनियम शासित करता है।मध्य क्षेत्रीय परिषद के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जिसमें उत्तर प्रदेश सम्मिलित है। P. इसका गठन राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत हुआ। Q. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इसकी बारी-बारी से अध्यक्षता करते हैं। R. इसका आधार संविधान का अनुच्छेद 263 है। S. उत्तराखंड इसके सदस्य राज्यों में से एक है। कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: D — केवल P और S
केवल P और S सही हैं। मध्य क्षेत्रीय परिषद राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत बनी और उत्तराखंड उसका सदस्य राज्य है। Q गलत है, क्योंकि उसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं, और R गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 263 अंतर-राज्य परिषद से संबंधित है, जो एक अलग निकाय है।9 नवंबर 2000 से उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से पृथक होने के बाद, उत्तर प्रदेश की लोक सभा सीटें कितनी रह गईं?
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उत्तर: C — 80
अविभाजित उत्तर प्रदेश की 85 लोक सभा सीटें थीं, जिनमें से उत्तराखंड को पाँच मिलीं और 80 शेष रहीं। इसी पुनर्गठन से राज्य सभा सीटें 34 से 31 हुईं। 85 वर्ष 2000 से पहले की कुल संख्या है, इसलिए वह भ्रामक है।