मध्यकालीन प्रशासन: सल्तनत, मुग़ल, दक्कन व मराठा प्रणालियाँ
2. मुग़ल प्रशासन: मनसबदारी व जागीरदारी
अकबर की मनसबदारी प्रणाली हर सरदार को एक संख्यात्मक रैंक (मनसब) प्रदान करती, दो संख्याओं में व्यक्त — ज़ात (व्यक्तिगत स्थिति/वेतन-श्रेणी) व सवार (मनसबदार द्वारा बनाए रखने हेतु बाध्य अश्वारोहियों की संख्या) — एक प्रणाली जान-बूझकर रैंकों को गैर-वंशानुगत व बादशाह के विवेक पर रद्द करने योग्य रखकर स्वतंत्र, वंशानुगत क्षेत्रीय शक्ति-आधारों के निर्माण को रोकने हेतु अभिकल्पित; जागीरदारी वह जुड़ा तंत्र था जिसके माध्यम से मनसबदार को वास्तव में भुगतान किया जाता, निर्दिष्ट क्षेत्र से भूमि-राजस्व संग्रह के अधिकार का नियतन (जागीर) नक़द वेतन के बदले, अकबर के वित्त मंत्री टोडरमल का सावधान भूमि-मापन व राजस्व-निपटान (ज़ब्ती/दहसाला प्रणाली, दस-वर्षीय औसत उपज पर आधारित — संकल्पना-सूची का स्वयं-नामित आइन-ए-दहसाला) पूरी संरचना के आधार हेतु निर्धारण-आधार प्रदान करते।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| दस्तूर | ज़ब्ती प्रणाली के अधीन हर इलाक़े हेतु निर्धारित फ़सल-वार मानक राजस्व-दरों की अनुसूची, वास्तविक उपज व मूल्यों को दर्शाने हेतु आवधिक रूप से अद्यतित। |
| वतन | वंशानुगत, व्यक्तिगत (हस्तांतरणीय, सेवा-संबद्ध के बजाय) नियतन के रूप में धारित भूमि — मुख्यतः राजपूतों जैसे स्वायत्त या अर्ध-स्वायत्त सरदारों हेतु प्रासंगिक, कार्यरत मनसबदार द्वारा धारित सामान्य, गैर-वंशानुगत जागीर से तुलित। |
| जज़िया व ज़कात | जज़िया, गैर-मुस्लिम प्रजा पर कर (अकबर द्वारा समाप्त, औरंगज़ेब द्वारा पुनर्लागू); ज़कात, मुस्लिम प्रजा से संग्रहीत इस्लामी अनिवार्य दान/संपत्ति-कर — दोनों एक युग्मित, धार्मिक रूप से विभेदित राजकोषीय संरचना बनाते जिसे संकल्पना-सूची अलग-अलग नामित करती। |
3. दक्कन व मराठों में प्रशासनिक प्रणालियाँ
विजयनगर अपने विशाल क्षेत्र को नायनकर प्रणाली से प्रशासित करता — प्रांतीय सैन्य शासक (नायक) सैन्य सेवा व केंद्र को प्रेषित राजस्व-हिस्से (राया-रेखो, पाठ्यक्रम का स्वयं-नामित राजमुकुट-राजस्व-हिस्सा) के बदले भूमि-नियतन (अमरम, संकल्पना-सूची का स्वयं-नामित शब्द) धारण करते — एक संरचना जिसमें अपने स्वतंत्र हिंदू-राज्य मूल के बावजूद मुग़ल मनसबदारी/जागीरदारी से वास्तविक कार्यात्मक समानताएँ, यही ठीक कारण है कि NET अभ्यर्थियों से दोनों प्रणालियों की तुलना करने हेतु कहता, उन्हें असंबद्ध विषयों के रूप में न मानने हेतु।
- बहमनी प्रशासनिक प्रणाली — क्षेत्र को शासकों के अधीन प्रांतों (तरफ़) में विभाजित किया गया, बारंबार दक्कनी-आफ़ाक़ी गुटबाज़ी (इकाई IV में पहले से परिचित) से नियुक्तियाँ व प्रांतीय निष्ठा सीधे आकारित होतीं, एक राजनीतिक तथ्य जिसके वास्तविक प्रशासनिक परिणाम, केवल दरबारी षड्यंत्र का मामला नहीं।
- मराठा प्रशासन — अष्ट प्रधान — शिवाजी की आठ-मंत्री परिषद (इकाई IV में पहले से परिचित) कार्यों को स्पष्ट रूप से विभाजित करती: पेशवा (प्रधानमंत्री, बाद में राजवंश का अपना वास्तविक शासक कार्यालय), अमात्य (वित्त/लेखा), सचिव (पत्राचार), मंत्री (गुप्तचर/गृहस्थ), सेनापति (सैन्य कमान), सुमंत (विदेश मामले), न्यायाधीश (न्याय) व पंडितराव (धार्मिक/परमार्थ मामले) — भावना में तुलनीय, यद्यपि स्वतंत्र रूप से व्युत्पन्न, सल्तनत व मुग़ल प्रणालियों के विशिष्ट केंद्रीय मंत्रालयों से।
4. सीमांत नीति व अंतर-राज्यीय संबंध
सल्तनत व मुग़ल दोनों को एक ही संरचनात्मक सीमांत समस्या का सामना था — उपमहाद्वीप में ऐतिहासिक आक्रमण-मार्ग के रूप में उत्तर-पश्चिमी दर्रे — व दोनों ने काफ़ी हद तक समान नीतियों से प्रतिक्रिया दी: अग्रिम सैन्य चौकियाँ व दर्रे नियंत्रित करने वाली अफ़गान जनजातियों के साथ बातचीत की या बलात श्रद्धांजलि/गठबंधन संबंध, मध्य एशिया से बार-बार बड़े पैमाने के आक्रमणों से विरामित (चंगेज़ ख़ान के उत्तराधिकारियों के अधीन मंगोलों ने बार-बार सल्तनत को धमकाया; नादिर शाह व अहमद शाह अब्दाली ने बाद में कमज़ोर मुग़लों को उसी दिशा से तबाह किया, जैसा इकाई IV का मुग़ल अध्याय पहले ही दर्ज कर चुका), यह दर्शाते हुए कि सीमांत समस्या किसी एक राजवंश के समाधान से कहीं आगे बनी रही।
मुख्य बिंदु
- सल्तनत प्रशासन केंद्रीय (वज़ीर, आरिज़-ए-मुमालिक, क़ाज़ी), प्रांतीय व स्थानीय (परगना) स्तरों से चलता, बिना निश्चित उत्तराधिकार नियम के; शेर शाह सूरी का राजस्व सर्वेक्षण, रुपिया मुद्रा व सराय सहित ग्रांड ट्रंक रोड बाद के मुग़ल सुधारों का आधार बने।
- मनसबदारी (ज़ात/सवार रैंक, गैर-वंशानुगत) व जागीरदारी (वेतन के बदले राजस्व-नियतन) साथ कार्य करतीं, टोडरमल के ज़ब्ती/दहसाला (आइन-ए-दहसाला) राजस्व-निपटान व उसकी दस्तूर अनुसूचियों पर टिकी; वतन वंशानुगत सरदार-भूमि नामित करता, सामान्य जागीर से भिन्न।
- विजयनगर की नायनकर प्रणाली (अमरम अनुदान, राया-रेखो राजस्व-हिस्सा) स्वतंत्र मूल के बावजूद मुग़ल मनसबदारी से कार्यात्मक रूप से समानांतर; बहमनी क्षेत्र को दक्कनी-आफ़ाक़ी गुटबाज़ी से आकारित तरफ़ों में विभाजित करते।
- शिवाजी का अष्ट प्रधान आठ कार्यों (पेशवा, अमात्य, सचिव, मंत्री, सेनापति, सुमंत, न्यायाधीश, पंडितराव) को स्पष्ट रूप से विभाजित करता, सल्तनत/मुग़ल विशिष्ट मंत्रालयों से कार्यात्मक रूप से तुलनीय यद्यपि स्वतंत्र रूप से व्युत्पन्न।
- उत्तर-पश्चिमी सीमांत समस्या किसी एक राजवंश के समाधान से कहीं आगे बनी रही; अंतर-राज्यीय संबंध (विशेष रूप से अकबर की राजपूत नीति) विवाह-गठबंधन, अधीनस्थ-श्रद्धांजलि व युद्ध को लचीले ढंग से मिश्रित करते, किसी एक निश्चित सिद्धांत के बजाय।
अभ्यास प्रश्न (9)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
सल्तनत के केंद्रीय प्रशासन में राजस्व व वित्त की देखरेख कौन करता था?
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उत्तर: A — वज़ीर
वज़ीर राजस्व/वित्त का प्रमुख था; आरिज़-ए-मुमालिक सेना की देखरेख करता, क़ाज़ी-नेतृत्व वाली व्यवस्था न्याय संभालती, व नायक विजयनगर का प्रांतीय-शासक शब्द है, सल्तनत का नहीं।दस-वर्षीय औसत उपज पर आधारित ज़ब्ती/दहसाला राजस्व-निपटान किससे संबद्ध है?
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उत्तर: A — अकबर के वित्त मंत्री टोडरमल
टोडरमल ने अकबर के अधीन ज़ब्ती/दहसाला प्रणाली (आइन-ए-दहसाला) लागू की; शेर शाह का अपना पूर्ववर्ती सुधार एक भिन्न, गैर-दशकीय मापी-उपज प्रणाली थी जिसने इसे प्रभावित किया किंतु पूर्ववर्ती थी।मनसबदारी प्रणाली में 'ज़ात' व 'सवार' क्रमशः किसे संदर्भित करते हैं?
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उत्तर: A — व्यक्तिगत स्थिति/वेतन-श्रेणी, व मनसबदार द्वारा रखे गए अश्वारोही
ज़ात व्यक्तिगत रैंक/वेतन चिह्नित करता, सवार अश्वारोही-बाध्यता — दोनों संख्याएँ साथ मिलकर मनसबदार की रैंक बनातीं, एक प्रणाली जान-बूझकर गैर-वंशानुगत रखी गई।सामान्य जागीर से भिन्न, वतन किस रूप में धारित भूमि को संदर्भित करता है?
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उत्तर: A — एक वंशानुगत, व्यक्तिगत नियतन (मुख्यतः राजपूत सरदारों में)
वतन राजपूतों जैसे सरदारों द्वारा धारित वंशानुगत, व्यक्तिगत भूमि नामित करता, कार्यरत मनसबदार द्वारा धारित सामान्य, गैर-वंशानुगत व हस्तांतरणीय जागीर से तुलित।विजयनगर की नायनकर प्रणाली मुख्यतः किसके बदले नायकों को भूमि (अमरम) नियत करती थी?
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उत्तर: A — सैन्य सेवा व राजस्व का एक हिस्सा (राया-रेखो)
अमरम अनुदान सैन्य सेवा व केंद्र को राजस्व-हिस्से (राया-रेखो) के प्रेषण की माँग करते, मुग़ल मनसबदारी/जागीरदारी से कार्यात्मक रूप से समानांतर।शिवाजी के अष्ट प्रधान में विदेश मामलों हेतु उत्तरदायी मंत्री कौन था?
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उत्तर: A — सुमंत
सुमंत विदेश मामले संभालता; अमात्य वित्त/लेखा, न्यायाधीश न्याय, व पंडितराव धार्मिक/परमार्थ मामले — आठों पदों का अपना भिन्न कार्यक्षेत्र।निम्नलिखित में से कौन-से राज्य व उसकी प्रशासनिक प्रणाली के सही युग्म हैं?
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उत्तर: A — मुग़ल — मनसबदारी/जागीरदारी; B — विजयनगर — नायनकर; C — मराठे — अष्ट प्रधान
तुर्कान-ए-चहलगानी इल्तुतमिश की सल्तनत-युगीन संस्था थी, बहमनी की नहीं — बहमनी इसके बजाय क्षेत्र को शासकों के अधीन तरफ़ों में विभाजित करते।जज़िया व ज़कात साथ मिलकर किस राजकोषीय संरचना का सर्वोत्तम वर्णन करते हैं?
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उत्तर: A — धार्मिक रूप से विभेदित — एक गैर-मुस्लिमों पर, एक मुस्लिमों पर
जज़िया (गैर-मुस्लिमों पर) व ज़कात (मुस्लिमों पर, अनिवार्य दान) एक युग्मित, धार्मिक रूप से विभेदित राजकोषीय संरचना बनाते, विष्टि जैसी श्रम-बाध्यताओं से भिन्न।अकबर की ज़ब्ती प्रणाली के अधीन हर इलाक़े हेतु निर्धारित फ़सल-वार मानक राजस्व-दरों की अनुसूची का नाम बताइए।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: Dastur
दस्तूर इलाक़ा-विशिष्ट फ़सल-वार राजस्व-दरों की अनुसूची नामित करता, ज़ब्ती प्रणाली के अधीन वास्तविक उपज व मूल्यों हेतु आवधिक रूप से अद्यतित।