मुद्रा आपूर्ति के घटक, केंद्रीय बैंक व वाणिज्यिक बैंकिंग
2. केंद्रीय बैंक
एक केंद्रीय बैंक पाँच प्रचलित कार्य करता है: यह मुद्रा-चलन का एकमात्र जारीकर्ता है (नोट-जारी एकाधिकार), सरकार का बैंकर (इसके खातों व लोक ऋण का प्रबंधन), बैंकों का बैंक व अंतिम उपाय का ऋणदाता (वाणिज्यिक बैंकों की आरक्षित निधि रखते हुए व संकट में सॉल्वेंट-पर-अतरल बैंकों को संक्रमण रोकने हेतु ऋण देते हुए), विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक, व मौद्रिक नीति व वित्तीय-तंत्र विनियमन हेतु उत्तरदायी प्राधिकरण। अंतिम-उपाय-ऋणदाता कार्य विशेष रूप से उन सॉल्वेंट बैंकों के बारे में है जो अस्थायी तरलता-कमी (एक दौड़, या अस्थायी वित्तपोषण-अंतर) का सामना करते — इसका उद्देश्य किसी दिवालिया बैंक को बचाना नहीं, व प्रचलित बेजहॉट का सिद्धांत ठीक इसी नियम को कहता है: स्वतंत्र रूप से ऋण दें, दंड-दर पर, अच्छी संपार्श्विक के विरुद्ध।
3. वाणिज्यिक बैंकिंग
वाणिज्यिक बैंक वित्तीय मध्यस्थता करते — जमा स्वीकार करते व उन्हें ऋण व निवेश में प्रवाहित करते — व ठीक वे संस्थाएँ हैं जिनके माध्यम से इकाई 2 की साख-सृजन (मुद्रा-गुणक) प्रक्रिया वास्तव में संचालित होती: आरक्षित निधि के रूप में रखे गए अंश को घटाकर एक ताज़ा जमा को पुनः उधार दिया जाता, पुनः जमा किया जाता, फिर पुनः उधार दिया जाता, व इसी प्रकार, प्रारंभिक जमा को बैंक-मुद्रा के बड़े विस्तार में गुणित करते हुए। आंशिक-आरक्षित बैंकिंग स्वाभाविक रूप से बैंक-दौड़ के प्रति संवेदनशील है — यदि जमाकर्ता एक साथ यह भय करें कि बैंक निकासी को पूरा नहीं कर सकता व एक साथ निकालने दौड़ें, तो एक मौलिक रूप से सॉल्वेंट बैंक भी विशुद्ध रूप से आत्म-पूर्ण होते विश्वास-हानि से विफलता को विवश हो सकता है, क्योंकि यह किसी भी क्षण जमा का केवल एक अंश तरल आरक्षित निधि के रूप में रखता है।
| विशेषता | केंद्रीय बैंक |
|---|---|
| नोट जारी करना | मुद्रा-चलन का एकमात्र एकाधिकार जारीकर्ता; वाणिज्यिक बैंक विधिक-निविदा नोट जारी नहीं कर सकते। |
| लाभ-उद्देश्य | लोक-नीति/मौद्रिक-स्थिरता उद्देश्यों हेतु संचालित, लाभ-अधिकतमीकरण हेतु नहीं, वाणिज्यिक बैंक के विपरीत। |
| ग्राहक संबंध | सामान्य जनता से सीधे व्यवहार नहीं करता — यह बैंकों व सरकार से व्यवहार करता, जबकि वाणिज्यिक बैंक गृहस्थों व फर्मों से सीधे व्यवहार करते। |
4. विवेकपूर्ण मानक व वित्तीय स्थिरता
- नकद आरक्षित अनुपात (CRR) व वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) — CRR बैंकों को जमा का एक अंश केंद्रीय बैंक में नकद आरक्षित निधि के रूप में रखने की माँग करता (कोई ब्याज न कमाते हुए, बढ़ाए जाने पर मुद्रा-गुणक को सीधे सिकोड़ते हुए); SLR बैंकों को जमा का एक अंश विनिर्दिष्ट तरल परिसंपत्तियों (प्रायः सरकारी प्रतिभूतियों) में अपनी बहियों में रखने की माँग करता — दोनों मुद्रा-सृजन प्रक्रिया पर प्रत्यक्ष लीवर हैं, अगले अध्याय में समेटे गए ब्याज-दर-आधारित नीति साधनों से भिन्न।
- अनर्जक परिसंपत्तियाँ (NPA) व पूँजी पर्याप्तता — एक NPA वह ऋण है जिस पर ब्याज या मूलधन भुगतान किसी विनिर्दिष्ट अवधि से आगे बकाया है, बैंक के पूँजी-आधार को सीधे क्षय करते हुए; पूँजी-पर्याप्तता मानक (जैसे बेसल-प्रकार अनुपात) बैंकों को उनकी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों के अनुपात में पूँजी रखने की माँग करते, ठीक NPA से हानि को बिना विफल हुए अवशोषित करने हेतु।
मुख्य बिंदु
- M1 से M4 तक घटती तरलता का पदानुक्रम बनाते, हर क्रमिक माप पिछले पर एक और, कम तरल, घटक जोड़ते हुए; M3 सबसे व्यापक सामान्यतः देखा जाने वाला समुच्चय है।
- केंद्रीय बैंक का अंतिम-उपाय-ऋणदाता कार्य सॉल्वेंट-पर-अतरल बैंकों को लक्षित करता, दिवालिया को नहीं — बेजहॉट का सिद्धांत: स्वतंत्र रूप से ऋण दें, दंड-दर पर, अच्छी संपार्श्विक के विरुद्ध।
- वाणिज्यिक बैंक वे संस्थाएँ हैं जिनके माध्यम से आंशिक-आरक्षित साख-सृजन वास्तव में संचालित होता, यही ठीक कारण भी है कि वे आत्म-पूर्ण बैंक-दौड़ों के प्रति संवेदनशील हैं।
- एक केंद्रीय बैंक मुद्रा-चलन जारी करता, सरकार का बैंकर बनता, बैंकों का बैंक बनता (व अंतिम-उपाय ऋण देता), विदेशी मुद्रा भंडार रखता व मौद्रिक नीति संचालित करता — इनमें से कोई भी वाणिज्यिक बैंक नहीं करता।
- CRR/SLR मुद्रा-सृजन पर प्रत्यक्ष मात्रा-लीवर हैं, ब्याज-दर साधनों से भिन्न; NPA बैंक-पूँजी को क्षय करते हैं, जिसके विरुद्ध बफ़र हेतु पूँजी-पर्याप्तता मानक अस्तित्व में हैं।
अभ्यास प्रश्न (9)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
M3, सबसे व्यापक सामान्यतः निगरानी किया जाने वाला मौद्रिक समुच्चय, M1 में क्या जोड़कर व्युत्पन्न होता है?
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उत्तर: A — बैंकों की सावधि (मीयादी) जमा
M3 = M1 + बैंकों की सावधि जमा; हर क्रमिक मौद्रिक समुच्चय पिछले पर एक और, क्रमशः कम तरल, घटक जोड़ता है।केंद्रीय बैंक की अंतिम-उपाय-ऋणदाता भूमिका पर बेजहॉट का सिद्धांत किस प्रकार ऋण देने की सलाह देता है?
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उत्तर: A — स्वतंत्र रूप से, दंड-दर पर, अच्छी संपार्श्विक के विरुद्ध
बेजहॉट का सिद्धांत सॉल्वेंट पर अतरल बैंकों को लक्षित करता, उदारता से पर दंड-दर पर सुदृढ़ संपार्श्विक के विरुद्ध ऋण देते हुए — ठीक वास्तव में दिवालिया संस्थाओं को बचाए बिना संक्रमण रोकने हेतु।केंद्रीय बैंक व वाणिज्यिक बैंक के बीच एक मुख्य कार्यात्मक भेद क्या है कि केंद्रीय बैंक क्या करता है?
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उत्तर: A — सामान्य जनता से सीधे व्यवहार नहीं करता व लाभ-अधिकतमीकरण से संचालित नहीं होता
एक केंद्रीय बैंक बैंकों व सरकार से व्यवहार करता, जनता से सीधे नहीं, व लाभ की बजाय मौद्रिक-स्थिरता उद्देश्यों का अनुसरण करता — एक वाणिज्यिक बैंक दोनों मामलों में ठीक इसका विपरीत करता है।एक बैंक-दौड़ एक मौलिक रूप से सॉल्वेंट बैंक को भी विफलता में क्यों धकेल सकती है?
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उत्तर: A — आंशिक-आरक्षित बैंकिंग का अर्थ है कि किसी भी क्षण जमा का केवल एक अंश तरल आरक्षित निधि के रूप में रखा जाता है
क्योंकि बैंक जमा के रूप में प्राप्त अधिकांश को पुनः उधार देते, केवल एक अंश आरक्षित निधि के रूप में रखते हुए, एक साथ निकासी की दौड़ उस बैंक में भी तरल आरक्षित निधि समाप्त कर सकती जिसकी अंतर्निहित ऋण-बही पूर्णतः सुदृढ़ है — एक आत्म-पूर्ण विश्वास-विफलता।नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में वृद्धि की क्या प्रवृत्ति होती है?
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उत्तर: A — मुद्रा गुणक व अतः मुद्रा आपूर्ति को सिकोड़ना
उच्च CRR बैंकों को जमा का बड़ा, गैर-ब्याज-अर्जक हिस्सा केंद्रीय बैंक में निष्क्रिय रखने हेतु विवश करता, ऋण-देने हेतु उपलब्ध आरक्षित-जमा अनुपात के पूरक को सीधे घटाते हुए व मुद्रा गुणक को सिकोड़ते हुए।अनर्जक परिसंपत्ति (NPA) को किस ऋण के रूप में परिभाषित किया जाता है?
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उत्तर: A — ब्याज या मूलधन भुगतान किसी विनिर्दिष्ट अवधि से आगे बकाया है
NPA विशेष रूप से वह ऋण है जिसका ब्याज या मूलधन किसी परिभाषित सीमा से आगे बकाया है, जो ऋणदाता बैंक के पूँजी-आधार को सीधे क्षय करता व जिसके विरुद्ध पूँजी-पर्याप्तता मानक बफ़र देने हेतु अभिकल्पित हैं।वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) बैंकों को जमा का एक अंश किसमें रखने की माँग करता है?
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उत्तर: A — अपनी बहियों में विनिर्दिष्ट तरल परिसंपत्तियाँ (प्रायः सरकारी प्रतिभूतियाँ)
SLR, CRR से भिन्न है: SLR परिसंपत्तियाँ बैंक की अपनी बहियों में रखी जातीं (सामान्यतः सरकारी प्रतिभूतियाँ), जबकि CRR विशेष रूप से केंद्रीय बैंक में रखी नकदी है — दोनों पृथक, पूरक तरलता/मात्रा लीवर हैं।निम्नलिखित में से कौन-सा केंद्रीय बैंक के प्रचलित कार्य हैं?
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उत्तर: A — मुद्रा-चलन का एकमात्र जारीकर्ता; B — सरकार का बैंकर; C — बैंकिंग तंत्र हेतु अंतिम उपाय का ऋणदाता
पहली तीन प्रचलित केंद्रीय बैंक कार्य हैं; जनता से सीधे खुदरा जमा स्वीकार करना ठीक वाणिज्यिक बैंक की भूमिका है, केंद्रीय बैंक की नहीं।मुद्रा आपूर्ति के सबसे संकीर्ण, सर्वाधिक तरल माप का नाम बताइए — जनता के पास मुद्रा-चलन के साथ बैंकों में माँग जमा व केंद्रीय बैंक में अन्य जमा।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: M1
M1 इस सबसे संकीर्ण माप का मानक नाम है; हर क्रमिक समुच्चय (M2, M3, M4) M1 के ऊपर एक क्रमशः कम तरल घटक जोड़ता है।