यूकैरियोटों में जीन अभिव्यक्ति: जीनोम संगठन, नियमन के स्तर व स्थानांतरणीय तत्व

यह अध्याय जीवन विज्ञान (XL) पेपर के पाँच वैकल्पिक खंडों में से एक, XL4 प्राणी विज्ञान, के खंड XL4.6 का उत्तर देता है: “यूकैरियोटी जीनोम संगठन व जीन अभिव्यक्ति का नियमन, स्थानांतरणीय तत्व।” यह पहले प्राणी जीनोम की रूपरेखा रखता है: जीनोम आकार व C-मान विरोधाभास, खंडित जीन, जीन कुल व छद्मजीन (pseudogene), पुनरावर्ती DNA तथा माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम। फिर यह एक जीन को उन सभी स्तरों से होकर देखता है जिन पर उसका उत्पाद नियंत्रित हो सकता है, क्रोमैटिन व अनुलेखन से लेकर RNA संसाधन, निर्यात व क्षय तक, और अनुवादन व स्वयं प्रोटीन तक; और अंत में स्थानांतरणीय तत्वों पर आता है: वे कैसे चलते हैं, जीनोमों पर क्या प्रभाव डालते हैं और परपोषी उन्हें कैसे रोकते हैं। संख्यात्मक प्रश्न जीनोम का कूटलेखी अंश, एक्सॉन संरचना से प्रोटीन लंबाई, वैकल्पिक स्प्लाइसिंग से समरूप (isoform) गणना तथा लक्ष्य-स्थल द्विगुणन का गणित हैं।

1. यूकैरियोटी जीनोम का संगठन

जीनोम आकार C-मान से मापा जाता है, अर्थात एक अगुणित समुच्चय का DNA, पिकोग्राम या क्षार-युग्मों में (1 pg, 10⁹ bp से कुछ ही कम है)। यह अत्यधिक बदलता है और जीव की जटिलता का अनुसरण नहीं करता: कुछ सैलामैंडर व फुफ्फुस-मछलियाँ मानव जीनोम के लगभग 3.1 × 10⁹ bp से कई गुना DNA रखती हैं। यह C-मान विरोधाभास अतिरिक्त जीनों से नहीं, अकूटलेखी DNA, मुख्यतः पुनरावर्तों, से समझ में आता है। मानव जीनोम में लगभग 20,000 प्रोटीन-कूटलेखी जीन हैं, फिर भी कूटलेखी एक्सॉन उसका केवल लगभग 1 से 2% हैं; शेष इंट्रॉन, नियामक अनुक्रम व पुनरावर्त हैं, और लगभग आधा स्थानांतरणीय तत्वों से व्युत्पन्न है।

अधिकांश प्राणी जीन खंडित हैं: एक्सॉनों के बीच इंट्रॉन होते हैं जो अनुलेखित होकर फिर स्प्लाइस होकर निकल जाते हैं, और इंट्रॉन प्रायः एक्सॉनों से कहीं लंबे होते हैं, अतः 100 kb का जीन कुछ किलोबेस का mRNA दे सकता है। अनेक जीन द्विगुणन व अपसरण से बने जीन कुलों के सदस्य हैं, जैसे α-सदृश व β-सदृश ग्लोबिन गुच्छ, जिनके जीन भ्रूण से वयस्क तक क्रम से सक्रिय होते हैं। कार्य खो चुकी प्रतियाँ छद्मजीन (pseudogene) हैं; संसाधित छद्मजीनों में इंट्रॉन नहीं होते, वे A-समृद्ध पथ पर समाप्त होते हैं और छोटी प्रत्यक्ष पुनरावृत्तियों से घिरे होते हैं, जो रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन होकर निविष्ट हुए mRNA के चिह्न हैं। अधिक मात्रा में चाहिए जीन, जैसे rRNA जीन, अग्रानुक्रमी पंक्तियों में होते हैं।

प्राणी जीनोम में DNA के वर्ग
DNA वर्गइकाई व व्यवस्थाउदाहरण
एकल-प्रतिप्रति अगुणित जीनोम एक या कुछ प्रतियाँअधिकांश प्रोटीन-कूटलेखी जीन
उपग्रह DNAलंबी अग्रानुक्रमी पंक्तियों में आवृत्त इकाइयाँ, प्रायः भिन्न प्लवन घनत्व वालीप्राइमेटों का गुणसूत्रबिंदु अल्फ़ा उपग्रह (171 bp इकाई)
मिनीसैटेलाइट (VNTR)लगभग 10 से 100 bp की इकाइयाँ; प्रति संख्या व्यक्तियों में भिन्नपारंपरिक DNA अंगुलि-छापन
माइक्रोसैटेलाइट (STR)1 से 6 bp की इकाइयाँ(CA)n चिह्नक; हंटिंगटन रोग में CAG प्रसार
विकीर्ण पुनरावर्तजीनोम भर में बिखरी प्रतियाँLINE (L1), SINE (Alu), LTR तत्व, DNA ट्रांसपोज़ॉन

पुनःप्रकृतीकरण (Cot) विश्लेषण में अनेक प्रतियों वाले अनुक्रम सबसे तेज़ी से साथी पाते हैं, अतः अति-पुनरावर्ती DNA न्यूनतम Cot मानों पर पुनः युग्मित होता है, मध्यम-पुनरावर्ती उसके बाद और एकल-प्रति DNA अंत में। प्राणियों का माइटोकॉन्ड्रियल DNA एक छोटा वृत्त है, मनुष्य में लगभग 16.6 kb, जिसमें 37 जीन (13 श्वसन-शृंखला पॉलिपेप्टाइड, 2 rRNA, 22 tRNA) हैं, इंट्रॉन नहीं हैं और नियंत्रण क्षेत्र के अतिरिक्त अकूटलेखी DNA बहुत कम है; यह अनेक प्रतियों में होता है, मातृवंशी है और थोड़े भिन्न आनुवंशिक कूट से पढ़ा जाता है।

2. क्रोमैटिन के स्तर पर नियमन

न्यूक्लियोसोम DNA तक पहुँच सीमित करते हैं, अतः क्रोमैटिन नियंत्रण का पहला स्तर है। हिस्टोन ऐसीटिलट्रांसफ़रेज़ (HAT), जिनमें से अनेक सक्रियकों द्वारा बुलाए जाते हैं, हिस्टोन पूँछों के लाइसीनों का ऐसीटिलीकरण करते हैं; इससे उनका धनात्मक आवेश उदासीन होता है, हिस्टोन–DNA व न्यूक्लियोसोम–न्यूक्लियोसोम संपर्क ढीले होते हैं और ब्रोमोडोमेन प्रोटीनों हेतु बंधन-स्थल बनते हैं। दमनकों द्वारा बुलाए गए हिस्टोन डीऐसीटिलेज़ (HDAC) इसे उलटते हैं। हिस्टोन मेथिलीकरण अवशेष के अनुसार सक्रिय या दमित करता है: H3K4me3 सक्रिय प्रमोटरों को चिह्नित करता है; H3K9me3 से HP1 का क्रोमोडोमेन बंधकर हेटरोक्रोमैटिन बनाता है; और पॉलीकॉम्ब दमनकारी संकुल 2 द्वारा लगाया गया H3K27me3 Hox जैसे विकासीय जीनों को वहाँ बंद रखता है जहाँ उनकी आवश्यकता नहीं। SWI/SNF जैसे ATP-निर्भर पुनर्संरचक न्यूक्लियोसोमों को खिसकाकर या हटाकर प्रमोटरों को खोलते हैं।

स्तनधारियों में DNA मेथिलीकरण CpG द्विन्यूक्लियोटाइडों के साइटोसीन पर मेथिल समूह जोड़ता है। DNMT3A व DNMT3B नए सिरे से (de novo) मेथिलीकरण करते हैं; DNMT1 प्रतिकृतीयन के बाद अर्ध-मेथिलित CpG पहचानकर प्रतिरूप को नए रज्जुक पर उतार देता है, अतः वह कोशिका-विभाजनों में वंशागत होता है। प्रमोटरों पर मेथिलित CpG द्वीप निष्क्रिय रहते हैं, आंशिक रूप से इसलिए कि MeCP2 जैसे मेथिल-CpG-बंधक प्रोटीन HDAC बुलाते हैं। मेथिलीकरण जीनोमी अंकन (genomic imprinting) का आधार है, जिसमें एक जनक का युग्मविकल्पी निष्क्रिय रहता है: चूहे का Igf2 केवल पितृ युग्मविकल्पी से और पड़ोसी H19 केवल मातृ युग्मविकल्पी से अभिव्यक्त होता है। X निष्क्रियण में Xist RNA मादा स्तनधारियों के एक X को ढक कर निष्क्रियकारी संकुल बुलाता है और उसे वैकल्पिक हेटरोक्रोमैटिन, बार काय, बना देता है। स्थिति भी मायने रखती है: ड्रोसोफ़िला में हेटरोक्रोमैटिन के पास ले जाया गया जीन कुछ कोशिकाओं में निष्क्रिय होता है और कुछ में नहीं, अतः white⁺ को स्थानांतरित करने पर चितकबरी आँखें बनती हैं, जिसे स्थिति-प्रभाव विविधवर्णता (position-effect variegation) कहते हैं।

3. अनुलेखन का नियमन

अधिकांश यूकैरियोटी जीनों का नियमन मुख्यतः अनुलेखन आरंभन पर होता है। Pol II के मूल प्रमोटर में प्रायः आरंभ-स्थल से लगभग 25 से 30 bp ऊपर TATA बॉक्स और आरंभ पर एक इनिशिएटर तत्व होता है; CAAT व GC बॉक्स जैसे समीपस्थ तत्व लगभग 200 bp के भीतर रहते हैं। Pol II अपने आप प्रमोटर नहीं पहचान सकता: पहले सामान्य अनुलेखन कारक जुड़ते हैं। TFIID का TATA-बंधक प्रोटीन (TBP) TATA बॉक्स से बंधकर उसे मोड़ता है; फिर TFIIB, TFIIF सहित Pol II, TFIIE व TFIIH आते हैं। TFIIH अपनी हेलिकेज़ सक्रियता से प्रमोटर खोलता है और Pol II के C-सिरे वाले डोमेन (CTD) के सेरीन 5 का फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण कर उसे दीर्घीकरण में छोड़ देता है; फ़ॉस्फ़ोरिलित CTD कैपिंग व स्प्लाइसिंग तंत्र को भी बुलाता है।

एन्हांसर सक्रियकों को बाँधते हैं और दूरी से काम करते हैं, ऊपर, नीचे या इंट्रॉनों के भीतर, किसी भी अभिविन्यास में; मीडिएटर संकुल व कोहेसिन की सहायता से DNA का लूप बनना उन्हें प्रमोटर तक लाता है। साइलेंसर दमनकों को बाँधते हैं, और CTCF-बंधित इंसुलेटर किसी एन्हांसर को अपने पार के जीनों पर काम करने से रोकते हैं। अनुलेखन कारक मॉड्यूलर हैं: एक DNA-बंधक डोमेन (ज़िंक फ़िंगर, होमियोडोमेन या अन्य हेलिक्स-टर्न-हेलिक्स, क्षारीय ल्यूसीन ज़िपर, क्षारीय हेलिक्स-लूप-हेलिक्स) स्थल चुनता है, और एक अलग सक्रियण डोमेन मीडिएटर, HAT व पुनर्संरचकों को बुलाता है। डोमेन-अदला-बदली इसे सिद्ध करती है: यीस्ट Gal4 का DNA-बंधक डोमेन हर्पीसवायरस प्रोटीन VP16 के सक्रियण डोमेन से जोड़ने पर Gal4 स्थलों वाले किसी भी जीन को सक्रिय करता है, और यही यीस्ट टू-हाइब्रिड परख का तर्क है। नियंत्रण संयोजी है, सीमित कारक विभिन्न संयोजनों में प्रत्येक कोशिका-प्रकार को अपना प्रतिरूप देते हैं, और संकेत-निर्भर भी: स्टेरॉयड ग्राही अपने हार्मोनों से सक्रिय होते हैं, और cAMP बढ़ने पर प्रोटीन काइनेज़ A CREB का फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण करता है।

4. RNA संसाधन, निर्यात व क्षय

पूर्व-mRNA बनते-बनते ही संसाधित होता है। पहले 20 से 30 न्यूक्लियोटाइडों के बाद 5′ कैप, ट्राइफ़ॉस्फ़ेट द्वारा 5′ से 5′ जुड़ा 7-मेथिलग्वानोसीन, जोड़ा जाता है; यह RNA को 5′ एक्सोन्यूक्लिएज़ों से बचाता है और निर्यात व अनुवादन हेतु कैप-बंधक प्रोटीनों से बंधता है। स्प्लाइसिंग इंट्रॉन हटाती है, जो लगभग सदा GU से आरंभ व AG पर समाप्त होते हैं, और 3′ स्प्लाइस स्थल से ऊपर एक शाखा-बिंदु A होता है। स्प्लाइसोसोम (snRNP U1, U2, U4, U5 व U6 तथा अनेक प्रोटीन) दो ट्रांसएस्टरीकरण करता है: शाखा A का 2′-OH 5′ स्प्लाइस स्थल पर आक्रमण कर लैरियट बनाता है, फिर ऊपरी एक्सॉन का मुक्त 3′-OH 3′ स्प्लाइस स्थल पर आक्रमण कर एक्सॉनों को जोड़ता है। U1, 5′ स्प्लाइस स्थल से और U2 शाखा-बिंदु से युग्मित होता है। 3′ सिरे पर AAUAAA संकेत व उसके नीचे का GU-समृद्ध तत्व विदलन व पॉलीऐडेनिलीकरण निर्देशित करते हैं: poly(A) पॉलिमरेज़ बिना साँचे के लगभग 200 A की पूँछ जोड़ता है।

वैकल्पिक स्प्लाइसिंग एक जीन से अनेक प्रोटीन बनवाती है: एक्सॉन छोड़े जा सकते हैं (कैसेट एक्सॉन) या जोड़े में से एक चुना जा सकता है (परस्पर-अपवर्जी एक्सॉन), स्प्लाइस स्थल खिसक सकते हैं, और वैकल्पिक प्रमोटर व poly(A) स्थल सिरे बदलते हैं; अधिकांश मानव बहु-एक्सॉन जीन वैकल्पिक रूप से स्प्लाइस होते हैं। ड्रोसोफ़िला में लिंग एक स्प्लाइसिंग शृंखला से तय होता है: केवल मादाओं में बना Sex-lethal प्रोटीन transformer पूर्व-mRNA को क्रियाशील रूप में स्प्लाइस कराता है, और Transformer-2 सहित Transformer, doublesex को उसके मादा समरूप में स्प्लाइस कराता है, जबकि नर डिफ़ॉल्ट नर समरूप बनाते हैं। RNA संपादन अनुलेखन के बाद अनुक्रम बदलता है: मानव छोटी आंत में एक साइटिडीन डीऐमिनेज़ ऐपोलाइपोप्रोटीन B mRNA में एक C को U बनाकर UAA समापन कोडॉन रचता है, अतः एक ही जीन से आंत छोटा apoB-48 और यकृत पूरा apoB-100 बनाता है; ADAR एंज़ाइम अनेक तंत्रिका अनुलेखों में A को इनोसीन बनाते हैं, जो G की तरह पढ़ा जाता है।

🧠 कोडॉन गणित
mRNA से प्रोटीन लंबाई: AUG के पहले क्षार से समापन कोडॉन के अंतिम क्षार तक न्यूक्लियोटाइड गिनें, 3 से भाग दें और समापन कोडॉन हेतु 1 घटाएँ। उदाहरण: 750 nt (कैप व पूँछ छोड़कर) के परिपक्व mRNA में 75 nt का 5′ UTR व 135 nt का 3′ UTR हो तो AUG से समापन तक 540 nt, 180 कोडॉन व 179 ऐमीनो अम्ल हैं। जिस एक्सॉन की लंबाई 3 का गुणज हो उसे छोड़ने पर पठन-ढाँचा बना रहता है; अन्य किसी लंबाई पर वह खिसक जाता है।

केवल पूर्णतः संसाधित mRNA, जो कैप, स्प्लाइसिंग से बचे एक्सॉन-संधि संकुलों व poly(A) पूँछ से चिह्नित हों, केंद्रकीय छिद्रों से निर्यात होते हैं। कोशिकाद्रव्य में उनका जीवनकाल नियंत्रित होता है: 3′ UTR के AU-समृद्ध तत्व साइटोकाइन mRNA जैसे अल्पजीवी संदेशों का डीऐडेनिलीकरण व क्षय तेज़ करते हैं, और निरर्थक-मध्यस्थ क्षय (nonsense-mediated decay) उस mRNA को नष्ट करता है जिसका समापन कोडॉन किसी एक्सॉन-संधि से काफ़ी पहले हो, जिससे कोशिका छोटे-कटे प्रोटीनों से बचती है।

5. अनुवादनी व अनुवादनोत्तर नियंत्रण

वैश्विक नियंत्रण आरंभन कारकों पर क्रिया करता है। तनाव-सक्रिय काइनेज़ों द्वारा eIF2α का फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण eIF2·GDP के पुनर्चक्रण को रोककर लगभग सारा आरंभन धीमा कर देता है; रेटिकुलोसाइटों में हीम की कमी पर हीम-नियंत्रित संदमक यही करता है, ताकि हीम के बिना ग्लोबिन न बने। वृद्धि व पोषक संकेत mTOR द्वारा क्रिया करते हैं, जो 4E-BP का फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण करता है ताकि वे कैप-निर्भर अनुवादन हेतु eIF4E छोड़ दें। विशिष्ट नियंत्रण UTR के अनुक्रमों का प्रयोग करता है, और लौह इसका क्लासिक उदाहरण है। लौह कम होने पर लौह-नियामक प्रोटीन (IRP) mRNA के तना-लूप लौह-अनुक्रियाशील तत्वों (IRE) से बंधते हैं। फ़ेरिटिन mRNA के 5′ UTR का IRE बंधने पर राइबोसोम का स्कैन करना रोक देता है, अतः संचय प्रोटीन नहीं बनता; ट्रांसफ़ेरिन ग्राही mRNA के 3′ UTR के IRE बंधने पर उसे विघटन से बचाते हैं, अतः अधिक ग्राही लौह भीतर लाते हैं। लौह अधिक होने पर IRP हट जाते हैं और उलटा होता है। अंडक छोटी poly(A) पूँछ वाले आवृत मातृ mRNA संचित रखते हैं, जो परिपक्वन या निषेचन पर कोशिकाद्रव्यी पॉलीऐडेनिलीकरण के बाद ही अनूदित होते हैं।

माइक्रो-RNA लगभग 22 न्यूक्लियोटाइड लंबे होते हैं। Pol II का प्राथमिक अनुलेख (pri-miRNA) केंद्रक में Drosha द्वारा केश-पिन पूर्व-miRNA में काटा जाता है, exportin-5 द्वारा निर्यात होता है और कोशिकाद्रव्य में Dicer द्वारा काटा जाता है; एक रज्जुक Argonaute प्रोटीन पर लदकर RNA-प्रेरित निष्क्रियकारी संकुल (RISC) बनाता है। प्राणी miRNA 3′ UTR से अपूर्ण युग्मन करते हैं, मुख्यतः न्यूक्लियोटाइड 2 से 8 के बीज (seed) क्षेत्र से, और अनुवादन दमित कर डीऐडेनिलीकरण व क्षय बढ़ाते हैं; एक miRNA सैकड़ों mRNA नियंत्रित कर सकता है। लंबे द्विरज्जुकी RNA से Dicer द्वारा काटे गए siRNA पूर्ण युग्मन करते हैं और Argonaute से लक्ष्य को कटवाते हैं, जो प्रायोगिक RNA व्यतिकरण (RNA interference) का आधार है।

नियंत्रण अनुवादन के बाद भी चलता है। प्रोटीन-अपघटनी संसाधन अनेक प्रोटीनों को सक्रिय करता है: प्रीप्रोइंसुलिन ER में अपना संकेत पेप्टाइड खोता है, और प्रोइंसुलिन स्रावी कणिकाओं में इंसुलिन व C-पेप्टाइड में कटता है, जो बराबर मात्रा में मुक्त होते हैं। फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण, ऐसीटिलीकरण व ग्लाइकोसिलीकरण जैसे सहसंयोजी रूपांतरण सक्रियता या स्थान बदलते हैं, और नियंत्रित विघटन प्रोटीन का जीवन समाप्त करता है: लाइसीन 48 से जुड़ी यूबिक्विटिन शृंखलाएँ उसे 26S प्रोटिएसोम तक भेजती हैं, और इसी प्रकार साइक्लिन, सिक्योरिन व p53 समय पर हटाए जाते हैं।

6. स्थानांतरणीय तत्व

स्थानांतरणीय तत्व (transposable elements) वे DNA अनुक्रम हैं जो जीनोम में नए स्थलों पर चले जाते हैं। बारबरा मैक्क्लिंटॉक ने 1940 के दशक में मक्का में Ac/Ds तंत्र से इन्हें खोजा, जिसमें स्वायत्त Activator तत्व वह ट्रांसपोज़ेज़ देता है जिससे अस्वायत्त Dissociation तत्व चल पाता है। तत्वों का वर्गीकरण क्रिया-विधि से होता है।

स्थानांतरणीय तत्वों के दो वर्ग
वर्गक्रिया-विधिसंरचनाप्राणी उदाहरण
वर्ग I: LTR रेट्रोट्रांसपोज़ॉनRNA द्वारा प्रतिलिपि-व-चिपकाव: रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ cDNA बनाता है, इंटीग्रेज़ उसे निविष्ट करता हैदोनों सिरों पर लंबी अंत्य पुनरावृत्तियाँ; gag व pol जीन, env-रहित रेट्रोवायरस जैसेड्रोसोफ़िला copia; स्तनधारियों के अंतर्जात रेट्रोवायरस
वर्ग I: LINEतत्व के अपने एंडोन्यूक्लिएज़ व रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ द्वारा कटे लक्ष्य-स्थल पर ही RNA का रिवर्स ट्रांसक्रिप्शनपूर्ण होने पर लगभग 6 kb, 3′ poly(A); अधिकांश प्रतियाँ 5′ से कटी व निष्क्रियL1, मानव जीनोम का लगभग 17%
वर्ग I: SINEअस्वायत्त; LINE के एंज़ाइम उधार लेते हैंलगभग 300 bp, 7SL RNA या tRNA जीनों से व्युत्पन्नAlu, दस लाख से अधिक प्रतियाँ, मानव जीनोम का लगभग 10%
वर्ग II: DNA ट्रांसपोज़ॉनकाटो-व-चिपकाओ: ट्रांसपोज़ेज़ तत्व को उसके सिरों से काटकर अन्यत्र निविष्ट करता हैट्रांसपोज़ेज़ जीन के दोनों ओर अंत्य उलटी पुनरावृत्तियाँड्रोसोफ़िला P तत्व, mariner, C. elegans का Tc1

निवेशन छोटे लक्ष्य-स्थल द्विगुणनों से घिरे होते हैं। ट्रांसपोज़ेज़ या इंटीग्रेज़ लक्ष्य के दोनों रज्जुकों को कुछ क्षार-युग्मों की दूरी पर काटता है, तत्व आगे निकले एकरज्जुकी सिरों से जुड़ता है, और मरम्मत रिक्तियों को भरती है, अतः कटानों के बीच का छोटा भाग अब दो बार, तत्व के दोनों ओर प्रत्यक्ष पुनरावृत्तियों के रूप में, आता है। प्रत्येक तत्व एक विशिष्ट लंबाई के द्विगुणन बनाता है, उदाहरणतः P तत्व 8 bp के। DNA ट्रांसपोज़ॉन का बाहर निकलना प्रायः एक छोटा पदचिह्न छोड़ता है, अतः जा चुका तत्व भी पीछे उत्परिवर्तन छोड़ सकता है।

ट्रांसपोज़ॉन उत्परिवर्तजन हैं और जीनोम-परिवर्तन के इंजन भी। हीमोफ़ीलिया A के एक रोगी में कारक VIII जीन में नया L1 निवेशन पाया गया; बिखरी प्रतियों के बीच पुनर्संयोजन विलोपन व पुनर्व्यवस्थाएँ करता है; निवेशन पास के जीनों को प्रमोटर व एन्हांसर दे सकते हैं; और कुछ ट्रांसपोज़ॉन एंज़ाइम पालतू बना लिए गए हैं, जैसे कशेरुकी V(D)J पुनर्संयोजन का RAG1 पुनर्संयोजक। परपोषी इन्हें रोकते हैं। प्राणी जनन-रेखा में Piwi प्रोटीनों पर लदे piRNA ट्रांसपोज़ॉन RNA काटते हैं और उनकी प्रतियों पर दमनकारी क्रोमैटिन लाते हैं, और कायिक कोशिकाओं में DNA मेथिलीकरण अधिकांश प्रतियों को निष्क्रिय रखता है। ड्रोसोफ़िला में संकर दुर्जननता (hybrid dysgenesis) इस रक्षा की विफलता दिखाती है: P स्ट्रेन (P तत्व वाले) के नरों का M स्ट्रेन (P तत्व-रहित) की मादाओं से संकरण बंध्य, अनेक जनन-रेखा उत्परिवर्तनों वाली संतति देता है, क्योंकि M अंडा P-तत्व piRNA नहीं देता, जबकि व्युत्क्रम संकरण सामान्य रहता है। वश में किया गया P तत्व पारजीनी मक्खियाँ बनाने का मानक वाहक बन गया।

मुख्य बिंदु

  • अकूटलेखी DNA के कारण जीनोम आकार जटिलता का अनुसरण नहीं करता (C-मान विरोधाभास): लगभग 3.1 × 10⁹ bp के मानव जीनोम में लगभग 20,000 प्रोटीन-कूटलेखी जीन, केवल 1 से 2% कूटलेखी अनुक्रम और लगभग आधा ट्रांसपोज़ॉन-व्युत्पन्न DNA है। उपग्रह गुणसूत्रबिंदुओं पर गुच्छित हैं, VNTR व STR व्यक्तियों में भिन्न होते हैं, और संसाधित छद्मजीनों में इंट्रॉन नहीं होते।
  • ऐसीटिलीकरण (HAT) क्रोमैटिन खोलता है और HDAC बंद करते हैं; H3K4me3 सक्रिय प्रमोटर चिह्नित करता है, H3K9me3 (HP1) व H3K27me3 (पॉलीकॉम्ब) दमन करते हैं। DNMT3 द्वारा स्थापित व DNMT1 द्वारा बनाए रखा गया CpG मेथिलीकरण प्रमोटरों को निष्क्रिय करता है और अंकन (Igf2 पितृ, H19 मातृ) व X निष्क्रियण (Xist) का आधार है।
  • Pol II को सामान्य कारक चाहिए: TFIID का TBP TATA बॉक्स से बंधता है और TFIIH DNA खोलकर CTD सेरीन 5 का फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण करता है। एन्हांसर मीडिएटर द्वारा लूप बनाकर दूरी से किसी भी अभिविन्यास में काम करते हैं; अनुलेखन कारक मॉड्यूलर (DNA-बंधक व सक्रियण डोमेन) हैं और संयोजी रूप से काम करते हैं।
  • संसाधन 5′ कैप जोड़ता है, लैरियट द्वारा GU…AG इंट्रॉन हटाता है और AAUAAA के बाद poly(A) पूँछ जोड़ता है। वैकल्पिक स्प्लाइसिंग (ड्रोसोफ़िला Sxl → tra → dsx) व संपादन (आंत्र apoB-48) उत्पादों को बढ़ाते हैं; ऐमीनो अम्ल = (AUG से समापन तक न्यूक्लियोटाइड)/3 − 1।
  • eIF2α फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण व mTOR–4E-BP वैश्विक अनुवादन तय करते हैं; लौह कम होने पर IRE से IRP का बंधन फ़ेरिटिन अनुवादन रोकता है (5′ UTR) और ट्रांसफ़ेरिन ग्राही mRNA स्थिर करता है (3′ UTR)। miRNA (Drosha, Dicer, Argonaute, बीज 2–8) अनेक mRNA दमित करते हैं; प्रोटीन-अपघटनी संसाधन व K48-यूबिक्विटिन विघटन अनुवादन के बाद प्रोटीनों को नियंत्रित करते हैं।
  • वर्ग I रेट्रोट्रांसपोज़ॉन RNA द्वारा प्रतिलिपि-व-चिपकाव करते हैं (LTR तत्व, LINE L1 मानव जीनोम का लगभग 17%, SINE Alu लगभग 10%); वर्ग II DNA ट्रांसपोज़ॉन अंत्य उलटी पुनरावृत्तियों पर काम करने वाले ट्रांसपोज़ेज़ से काटो-व-चिपकाओ करते हैं। निवेशनों के साथ लक्ष्य-स्थल द्विगुणन होते हैं; piRNA जनन-रेखा की रक्षा करते हैं, और M स्ट्रेन के अंडों में उनका अभाव संकर दुर्जननता लाता है।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. प्राणियों में अगुणित जीनोम आकार बहुत बदलता है और जीव की जटिलता का अनुसरण नहीं करता; उदाहरणतः कुछ सैलामैंडरों में प्रति अगुणित जीनोम मनुष्य से कई गुना DNA है। यह C-मान विरोधाभास मुख्यतः किनके अंतर से समझ में आता है?

    1. प्रोटीन-कूटलेखी जीनों की संख्या, जो जीनोम आकार के साथ लगभग समान रूप से बढ़ती है
    2. अकूटलेखी DNA की मात्रा, विशेषकर पुनरावर्तों व ट्रांसपोज़ॉन-व्युत्पन्न अनुक्रमों की
    3. गुणसूत्रों की संख्या, क्योंकि बड़ा जीनोम अधिक गुणसूत्रों में बँटा होता है
    4. प्रत्येक कोडॉन की लंबाई, क्योंकि बड़े जीनोम वाली जातियाँ mRNA को लंबी इकाइयों में पढ़ती हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — अकूटलेखी DNA की मात्रा, विशेषकर पुनरावर्तों व ट्रांसपोज़ॉन-व्युत्पन्न अनुक्रमों की

    बड़े जीनोम मुख्यतः इसलिए बड़े हैं कि उनमें अधिक अकूटलेखी DNA है: इंट्रॉन, अंतराजीनी अनुक्रम और सबसे बढ़कर पुनरावर्त, जिनमें से अनेक स्थानांतरणीय तत्वों से व्युत्पन्न हैं। जीन संख्या बहुत कम बदलती है (कशेरुकियों में कुछ दसियों हज़ार), गुणसूत्र संख्या DNA मात्रा का अनुसरण नहीं करती, और इन सभी प्राणियों में त्रिक कूट एक ही है।
  2. 3.0 × 10⁹ bp के एक अगुणित प्राणी जीनोम में 20,000 प्रोटीन-कूटलेखी जीन हैं जिनके कूटलेखी अनुक्रम (आरंभ कोडॉन से समापन कोडॉन तक) औसतन 1,350 bp के हैं। जीनोम का प्रोटीन-कूटलेखी अनुक्रम वाला प्रतिशत ____ % है (एक दशमलव स्थान तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.9

    कुल कूटलेखी अनुक्रम = 20,000 × 1,350 = 2.7 × 10⁷ bp। अंश = 2.7 × 10⁷/3.0 × 10⁹ = 0.009 = 0.9%। प्रश्न कूटलेखी लंबाई सीधे देता है, अतः इंट्रॉन या UTR हेतु कोई सुधार नहीं चाहिए; मुख्य बात यह है कि ऐसे जीनोम का 99% से अधिक भाग प्रोटीन का कूट नहीं है। अंश को प्रतिशत में न बदलने से 0.009 आता है।
  3. किसी प्राणी जीनोम का एक अनुक्रम अन्यत्र स्थित एक क्रियाशील जीन के mRNA से बहुत मिलता है: उसमें उस जीन का कोई इंट्रॉन नहीं है, वह A अवशेषों की शृंखला पर समाप्त होता है, छोटी प्रत्यक्ष पुनरावृत्तियों से घिरा है और उसका कोई प्रमोटर नहीं है। यह सबसे संभवतः किस प्रकार उत्पन्न हुआ?

    1. जीन की अग्रानुक्रमी प्रतियों के बीच असमान जीन-विनिमय, उसके बाद बिंदु उत्परिवर्तन
    2. पूरे जीन का अग्रानुक्रमी द्विगुणन, उसके बाद प्रत्येक इंट्रॉन का सटीक विलोपन
    3. संसाधित mRNA का रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन और cDNA का नए स्थल पर निवेशन
    4. उलटी पुनरावृत्तियों पर क्रिया करने वाले ट्रांसपोज़ेज़ द्वारा जीन का काटो-व-चिपकाओ स्थानांतरण
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — संसाधित mRNA का रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन और cDNA का नए स्थल पर निवेशन

    प्रत्येक लक्षण DNA में वापस प्रतिलिपित mRNA की ओर संकेत करता है: इंट्रॉन पहले ही स्प्लाइस हो चुके, poly(A) अवशेष, कोई प्रमोटर नहीं (प्रमोटर mRNA में अनुलेखित नहीं होते) और निवेशन से बने लक्ष्य-स्थल द्विगुणन, प्रायः LINE-कूटित रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ द्वारा। यह संसाधित छद्मजीन है। असमान जीन-विनिमय व अग्रानुक्रमी द्विगुणन इंट्रॉन व प्रमोटर बनाए रखते और प्रति को मूल के पास रखते; DNA-ट्रांसपोज़ॉन गति अंत्य उलटी पुनरावृत्तियाँ छोड़ती, poly(A) पथ नहीं।
  4. स्तनधारी कोशिकाओं में क्रोमैटिन-स्तरीय नियमन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. हिस्टोन पूँछों के लाइसीनों का ऐसीटिलीकरण उनका धनात्मक आवेश उदासीन कर क्रोमैटिन को ढीला करता है
    2. DNMT1 वह मुख्य एंज़ाइम है जो आरंभिक भ्रूण में पहले से अमेथिलित CpG का नए सिरे से मेथिलीकरण करता है
    3. पॉलीकॉम्ब दमनकारी संकुल 2 द्वारा लगाया गया H3K27 त्रिमेथिलीकरण Hox जैसे लक्ष्य जीनों को निष्क्रिय रखता है
    4. हिस्टोन डीऐसीटिलेज़ों के संदमक से कोशिकाओं का उपचार हिस्टोन ऐसीटिलीकरण का समग्र स्तर घटाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — हिस्टोन पूँछों के लाइसीनों का ऐसीटिलीकरण उनका धनात्मक आवेश उदासीन कर क्रोमैटिन को ढीला करता है; C — पॉलीकॉम्ब दमनकारी संकुल 2 द्वारा लगाया गया H3K27 त्रिमेथिलीकरण Hox जैसे लक्ष्य जीनों को निष्क्रिय रखता है

    लाइसीन ऐसीटिलीकरण वह धनात्मक आवेश हटाता है जो पूँछों को DNA पर टिकाता है और ब्रोमोडोमेन प्रोटीन बुलाता है, और PRC2 द्वारा लिखा H3K27me3 वह पॉलीकॉम्ब चिह्न है जो विकासीय जीनों को बंद रखता है। DNMT1 अनुरक्षण मेथिलट्रांसफ़रेज़ है जो प्रतिकृतीयन के बाद अर्ध-मेथिलित DNA पर विद्यमान प्रतिरूप उतारता है; नए सिरे से मेथिलीकरण DNMT3A व DNMT3B करते हैं। HDAC रोकने से ऐसीटिल समूह बने रहते हैं, अतः समग्र ऐसीटिलीकरण घटता नहीं, बढ़ता है।
  5. चूहों में वृद्धि-कारक जीन Igf2 इस प्रकार अंकित (imprinted) है कि केवल पिता से प्राप्त युग्मविकल्पी अभिव्यक्त होता है। शून्य (null) Igf2 युग्मविकल्पी के लिए विषमयुग्मजी एक नर का वन्य-प्रकार मादा से संकरण होता है; अलग से, उसी शून्य युग्मविकल्पी के लिए विषमयुग्मजी एक मादा का वन्य-प्रकार नर से संकरण होता है। कौन-सा परिणाम अपेक्षित है?

    1. विषमयुग्मजी माता की आधी संतति वृद्धि-न्यून होगी, और विषमयुग्मजी पिता की सारी संतति सामान्य बढ़ेगी
    2. प्रत्येक संकरण की आधी संतति वृद्धि-न्यून होगी, क्योंकि एक शून्य युग्मविकल्पी बनने वाले Igf2 को आधा कर देता है
    3. किसी भी संकरण की कोई संतति प्रभावित नहीं होगी, क्योंकि वन्य-प्रकार युग्मविकल्पी सदा शून्य युग्मविकल्पी की पूर्ति कर देता है
    4. विषमयुग्मजी पिता की आधी संतति वृद्धि-न्यून होगी, और विषमयुग्मजी माता की सारी संतति सामान्य बढ़ेगी
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — विषमयुग्मजी पिता की आधी संतति वृद्धि-न्यून होगी, और विषमयुग्मजी माता की सारी संतति सामान्य बढ़ेगी

    प्रत्येक शिशु केवल पिता से मिला Igf2 युग्मविकल्पी अभिव्यक्त करता है। विषमयुग्मजी पिता से आधे शिशुओं को शून्य युग्मविकल्पी अपनी एकमात्र सक्रिय प्रति के रूप में मिलता है और वे वृद्धि-न्यून होते हैं। विषमयुग्मजी माता से शून्य युग्मविकल्पी, यदि मिले, तो निष्क्रिय मातृ प्रति पर रहता है, जबकि प्रत्येक शिशु को वन्य-प्रकार पिता से सक्रिय युग्मविकल्पी मिलता है, अतः सभी सामान्य बढ़ते हैं। उलटा प्रतिरूप H19 जैसे मातृ-अभिव्यक्त जीन पर लागू होता; साधारण मात्रा-प्रभाव या पूर्ण-पूर्ति मॉडल अंकन की उपेक्षा करता है।
  6. ड्रोसोफ़िला में एक गुणसूत्री प्रतिलोमन white⁺ जीन को उसके सामान्य यूक्रोमैटिनी स्थल से गुणसूत्रबिंदु-हेटरोक्रोमैटिन के पास ले जाता है। प्रतिलोमन वाली मक्खियों की आँखों में लाल व सफ़ेद नेत्रांशकों के धब्बे होते हैं। सबसे उचित व्याख्या है कि

    1. हेटरोक्रोमैटिन कुछ नेत्र पूर्वगामी कोशिकाओं में white⁺ को निष्क्रिय करता है और कुछ में नहीं, और संतति कोशिकाएँ वह अवस्था पाती हैं
    2. प्रतिलोमन के विच्छेद-बिंदु ने केवल कुछ नेत्र कोशिकाओं में white⁺ को उत्परिवर्तित किया, जबकि जनन-रेखा में सामान्य युग्मविकल्पी रहा
    3. स्थानांतरित जीन अब अंकित है, अतः केवल उन नेत्र कोशिकाओं में अभिव्यक्त होता है जिन्हें पितृ गुणसूत्र मिला
    4. प्रत्येक मक्खी की विभाजित होती लगभग आधी नेत्र कोशिकाओं में प्रतिलोमित गुणसूत्र अवियोजन से खो जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — हेटरोक्रोमैटिन कुछ नेत्र पूर्वगामी कोशिकाओं में white⁺ को निष्क्रिय करता है और कुछ में नहीं, और संतति कोशिकाएँ वह अवस्था पाती हैं

    यह स्थिति-प्रभाव विविधवर्णता है। हेटरोक्रोमैटिन स्थानांतरित जीन पर परिवर्ती मात्रा में फैलता है; एक बार कोशिका का चयन हो जाने पर वह वंशागत होता है, अतः निष्क्रिय (सफ़ेद) व अभिव्यक्त करने वाली (लाल) कोशिकाओं के क्लोन धब्बे बनाते हैं। मक्खी की सभी कोशिकाओं में समान गुणसूत्र हैं, अतः जनक-मूल पर आधारित अंकन मोज़ेक नहीं बना सकता, और विच्छेद-बिंदु से हुआ उत्परिवर्तन प्रत्येक कोशिका में होता। आधी कोशिकाओं में गुणसूत्र-ह्रास इन मक्खियों में नहीं होता और जीन की नई स्थिति पर निर्भर भी नहीं होता।
  7. रिपोर्टर जीन से 8 kb नीचे रखा गया 300 bp का एक DNA तत्व उसका अनुलेखन 50 गुना बढ़ा देता है, और उसका अभिविन्यास उलटने पर भी उतना ही काम करता है। इस तत्व का सबसे उचित वर्णन है

    1. मूल प्रमोटर, क्योंकि वह तय करता है कि RNA पॉलिमरेज़ II अनुलेखन कहाँ से आरंभ करे
    2. इंसुलेटर, क्योंकि वह रिपोर्टर जीन को आसपास के क्रोमैटिन से बचाता है
    3. एन्हांसर, क्योंकि वह सक्रियकों को बाँधता है और किसी भी अभिविन्यास में दूरी से काम करता है
    4. साइलेंसर, क्योंकि किसी जीन के नीचे स्थित नियामक तत्व प्रायः उसे दमित करते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — एन्हांसर, क्योंकि वह सक्रियकों को बाँधता है और किसी भी अभिविन्यास में दूरी से काम करता है

    किलोबेस दूर से, अभिविन्यास व जीन के सापेक्ष स्थिति से स्वतंत्र, सक्रियण एन्हांसर का परिभाषक व्यवहार है, जो सक्रियकों को बाँधकर मीडिएटर द्वारा DNA लूप बनाकर प्रमोटर से संपर्क करता है। मूल प्रमोटर को आरंभ-स्थल पर निश्चित अभिविन्यास में होना चाहिए। इंसुलेटर अनुलेखन को 50 गुना बढ़ाने के बजाय एन्हांसर-क्रिया या हेटरोक्रोमैटिन-प्रसार रोकता है, और साइलेंसर दमन करता है; नीचे स्थित होना किसी तत्व को साइलेंसर नहीं बनाता।
  8. कारक X DNA अनुक्रम स्थल-X से बंधता है पर एक विलोपन से अपना सक्रियण डोमेन खो चुका है। कारक Y का सक्रियण डोमेन प्रबल है और वह स्थल-Y से बंधता है। X के DNA-बंधक डोमेन व Y के सक्रियण डोमेन का संलयन ऐसी कोशिकाओं में अभिव्यक्त किया जाता है जिनमें दो रिपोर्टर जीन हैं, एक स्थल-X से चालित और दूसरा स्थल-Y से, और अक्षत Y उपस्थित नहीं है। क्या अपेक्षित है?

    1. केवल स्थल-Y रिपोर्टर सक्रिय होगा, क्योंकि सक्रियण डोमेन तय करता है कि कौन-सा प्रमोटर प्रयुक्त हो
    2. केवल स्थल-X रिपोर्टर सक्रिय होगा, क्योंकि DNA-बंधक डोमेन लक्ष्य चुनता है और सक्रियण डोमेन जहाँ लाया जाए वहीं काम करता है
    3. दोनों रिपोर्टर सक्रिय होंगे, क्योंकि संलयन में दोनों कारकों के क्रियाशील भाग हैं और इसलिए वह दोनों प्रकार के स्थलों से बंधता है
    4. कोई रिपोर्टर सक्रिय नहीं होगा, क्योंकि भिन्न कारकों से लिए गए डोमेन एक प्रोटीन में वलित होकर साथ काम नहीं कर सकते
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — केवल स्थल-X रिपोर्टर सक्रिय होगा, क्योंकि DNA-बंधक डोमेन लक्ष्य चुनता है और सक्रियण डोमेन जहाँ लाया जाए वहीं काम करता है

    अनुलेखन कारक मॉड्यूलर हैं। संलयन DNA से केवल X के DNA-बंधक डोमेन द्वारा बंधता है, अतः केवल स्थल-X तक पहुँचता है, और वहाँ बँधा Y का सक्रियण डोमेन मीडिएटर व सह-सक्रियकों को बुलाकर जीन चालू करता है। वह स्थल-Y से नहीं बंध सकता, क्योंकि उसमें Y का DNA-बंधक डोमेन नहीं है। Gal4–VP16 जैसे डोमेन-अदला-बदली संलयन भली-भाँति काम करते हैं, जो इस दावे को खारिज करता है कि पराए डोमेन साथ काम नहीं कर सकते।
  9. RNA पॉलिमरेज़ II द्वारा अनुलेखन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. Pol II स्वयं TATA बॉक्स पहचानता है और उसे सामान्य अनुलेखन कारक केवल दीर्घीकरण के दौरान चाहिए
    2. TFIID की उप-इकाई TBP, TATA बॉक्स से बंधकर DNA को मोड़ती है
    3. TFIIH प्रमोटर DNA खोलता है और Pol II के C-सिरे वाले डोमेन के सेरीन 5 का फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण करता है
    4. एन्हांसर तभी काम करता है जब वह अपने मूल अभिविन्यास में TATA बॉक्स से 100 bp ऊपर के भीतर हो
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — TFIID की उप-इकाई TBP, TATA बॉक्स से बंधकर DNA को मोड़ती है; C — TFIIH प्रमोटर DNA खोलता है और Pol II के C-सिरे वाले डोमेन के सेरीन 5 का फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण करता है

    प्रमोटर-पहचान TFIID के TBP द्वारा TATA बॉक्स से बंधकर उसे तीव्रता से मोड़ने से आरंभ होती है, और TFIIH प्रमोटर खोलने वाला हेलिकेज़ तथा प्रमोटर-निकास हेतु CTD सेरीन 5 का फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण करने वाला काइनेज़ दोनों देता है। Pol II स्वयं प्रमोटर नहीं पहचान सकता; आरंभन हेतु सामान्य कारक आवश्यक हैं। एन्हांसर किलोबेस दूर से, ऊपर या नीचे और किसी भी अभिविन्यास में काम करते हैं।
  10. एक जीन में तीन एक्सॉन हैं जिनकी परिपक्व mRNA में लंबाइयाँ 250, 180 व 300 न्यूक्लियोटाइड हैं (एक्सॉन 1, 2 व 3; कैप व poly(A) पूँछ नहीं गिनी गई)। AUG आरंभ कोडॉन एक्सॉन 1 के न्यूक्लियोटाइड 101 से आरंभ होता है, और समापन कोडॉन एक्सॉन 3 के अंत से 120 न्यूक्लियोटाइड पहले समाप्त होता है। एक ऊतक में एक्सॉन 2 छोड़ दिया जाता है; इससे पठन-ढाँचा बना रहता है और कोई नया समापन कोडॉन नहीं बनता। आरंभक मेथियोनीन को गिनते हुए, एक्सॉन-2-रहित mRNA से अनूदित प्रोटीन में ऐमीनो अम्लों की संख्या ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 109

    एक्सॉन 2 के बिना mRNA 250 + 300 = 550 nt है। 100 nt का 5′ UTR व 120 nt का 3′ UTR हटाने पर AUG के A से समापन कोडॉन तक 330 nt बचते हैं, अर्थात 110 कोडॉन; समापन कोडॉन कोई ऐमीनो अम्ल नहीं जोड़ता, अतः प्रोटीन में 109 हैं। पूर्ण mRNA (730 nt) 510/3 − 1 = 169 देता है, और 180 nt छोड़ने से ठीक 60 ऐमीनो अम्ल हटते हैं। समापन कोडॉन न घटाने से 110 आता है।
  11. एक जीन में परस्पर-अपवर्जी एक्सॉनों का एक जोड़ा है (प्रत्येक परिपक्व mRNA दोनों में से ठीक एक को रखता है) और, अन्यत्र, चार कैसेट एक्सॉन हैं, जिनमें से प्रत्येक बाक़ी सबसे स्वतंत्र रूप से रखा या छोड़ा जाता है। शेष सभी एक्सॉन स्थायी हैं। यह जीन जितने भिन्न परिपक्व mRNA समरूप बना सकता है, उनकी संख्या ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 32

    परस्पर-अपवर्जी जोड़ा 2 विकल्प देता है, और चारों कैसेट एक्सॉनों में से प्रत्येक 2 (रखा या छोड़ा), अतः समरूपों की संख्या 2 × 2⁴ = 2 × 16 = 32 है। परस्पर-अपवर्जी जोड़े को दो और स्वतंत्र कैसेट मानने से 2⁶ = 64 आता, जिसमें गलती से जोड़े के दोनों या कोई नहीं वाले mRNA भी गिन लिए जाते।
  12. यकृत व छोटी आंत दोनों एक ही ऐपोलाइपोप्रोटीन B जीन अभिव्यक्त करते हैं, फिर भी यकृत apoB-100 स्रावित करता है जबकि आंत apoB-48, जिसका अनुक्रम apoB-100 के N-सिरे वाले 48% से मेल खाता है। आंत्र प्रोटीन इसलिए बनता है क्योंकि

    1. जीन के भीतर एक आंत-विशिष्ट प्रमोटर कूटलेखी क्षेत्र के आधे रास्ते से अनुलेखन आरंभ करता है
    2. आंत्र ER का एक प्रोटिएज़ apoB-100 को दो भागों में काटता है और केवल N-सिरे वाला आधा स्रावित करता है
    3. आंत में वैकल्पिक स्प्लाइसिंग प्रोटीन के C-सिरे वाले आधे भाग के कूटलेखी एक्सॉन छोड़ देती है
    4. एक साइटिडीन डीऐमिनेज़ आंत्र mRNA में एक C को U बनाकर CAA कोडॉन को UAA में बदल देता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — एक साइटिडीन डीऐमिनेज़ आंत्र mRNA में एक C को U बनाकर CAA कोडॉन को UAA में बदल देता है

    ApoB-48 mRNA संपादन का क्लासिक उदाहरण है। एक आंत्र साइटिडीन डीऐमिनेज़ apoB mRNA के एक C का डीऐमिनीकरण कर ग्लूटामीन कोडॉन (CAA) को समापन कोडॉन (UAA) बना देता है, अतः अनुवादन लगभग आधे पर रुक जाता है। आंतरिक प्रमोटर N-सिरे वाला नहीं, C-सिरे वाला खंड देता, और प्रोटीन apoB-100 को काटकर नहीं बनता। एक्सॉन छोड़ना विश्वसनीय लगने वाली क्रिया-विधि है, पर आंत्र व यकृत mRNA में एक्सॉन समान हैं और वे केवल संपादित क्षार पर भिन्न हैं।
  13. एक कोशिका-वंश ऐसा उत्परिवर्ती लौह-नियामक प्रोटीन अभिव्यक्त करता है जो लौह स्तर कुछ भी हो, लौह-अनुक्रियाशील तत्वों से दृढ़ता से बंधता है। लौह-समृद्ध माध्यम में उगाने पर, उसी माध्यम की सामान्य कोशिकाओं की तुलना में, ये कोशिकाएँ दिखाएँगी

    1. निम्न फ़ेरिटिन संश्लेषण व उच्च ट्रांसफ़ेरिन ग्राही स्तर, जो प्रतिरूप सामान्य कोशिकाएँ लौह की कमी में दिखाती हैं
    2. उच्च फ़ेरिटिन संश्लेषण व निम्न ट्रांसफ़ेरिन ग्राही स्तर, जो प्रचुर लौह के प्रति कोशिकाओं की सामान्य अनुक्रिया है
    3. उच्च फ़ेरिटिन संश्लेषण व उच्च ट्रांसफ़ेरिन ग्राही स्तर, क्योंकि IRP बंधन दोनों mRNA के उपयोग को उद्दीप्त करता है
    4. निम्न फ़ेरिटिन संश्लेषण व निम्न ट्रांसफ़ेरिन ग्राही स्तर, क्योंकि IRP बंधन दोनों mRNA का अनुवादन रोकता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — निम्न फ़ेरिटिन संश्लेषण व उच्च ट्रांसफ़ेरिन ग्राही स्तर, जो प्रतिरूप सामान्य कोशिकाएँ लौह की कमी में दिखाती हैं

    IRP बंधन का प्रभाव इस पर निर्भर है कि IRE कहाँ है। फ़ेरिटिन mRNA के 5′ UTR के IRE से बंधकर IRP स्कैन करते राइबोसोमों को रोकता है, अतः फ़ेरिटिन संश्लेषण घटता है; ट्रांसफ़ेरिन ग्राही mRNA के 3′ UTR के IRE से बंधकर वह mRNA को विघटन से बचाता है, अतः ग्राही स्तर बढ़ता है। लौह की परवाह किए बिना बंधने वाला उत्परिवर्ती कोशिका को लौह-समृद्ध माध्यम में भी लौह-अभाव वाले प्रतिरूप में जकड़ देता है। अन्य विकल्प या तो लौह के प्रति सामान्य अनुक्रिया बताते हैं या IRP को दोनों mRNA पर एक-सा प्रभाव देते हैं, जो गलत है।
  14. प्राणियों के माइक्रो-RNA मार्ग में, कोशिकाद्रव्य में निर्यातित पूर्व-miRNA केश-पिन को काटकर लगभग 22 न्यूक्लियोटाइड का द्विरज्जुक मुक्त करने वाला एंज़ाइम है

    1. Drosha, जो केंद्रक के भीतर प्राथमिक अनुलेख का संसाधन करता है
    2. Argonaute, जो मार्गदर्शक से पूर्ण युग्मित लक्ष्य mRNA को काटता है
    3. Dicer, एक RNase III एंज़ाइम जो द्विरज्जुकी तने को मापकर काटता है
    4. Exportin-5, जो केश-पिन को केंद्रकीय छिद्र से बाहर ले जाते हुए छाँटता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — Dicer, एक RNase III एंज़ाइम जो द्विरज्जुकी तने को मापकर काटता है

    Dicer कोशिकाद्रव्य में पूर्व-miRNA केश-पिन को लगभग 22 nt के द्विरज्जुक में काटता है, जिसका एक रज्जुक Argonaute पर लदता है। Drosha पहले, केंद्रक में, pri-miRNA पर काम करता है; exportin-5 केवल पूर्व-miRNA का परिवहन करता है, उसे काटता नहीं; Argonaute परिपक्व मार्गदर्शक को वहन करता है और लक्ष्य काट सकता है, पर केश-पिन का संसाधन नहीं करता।
  15. मधुमेह के रोगी का अपना अग्न्याशय अब भी कितना इंसुलिन स्रावित करता है, यह आँकने हेतु प्लाज़्मा C-पेप्टाइड मापा जाता है, भले ही रोगी इंसुलिन इंजेक्शन ले रहा हो। यह इसलिए संभव है क्योंकि C-पेप्टाइड

    1. ER में हटाया गया संकेत पेप्टाइड है, अतः उसका स्तर दर्शाता है कि इंसुलिन जीन कितनी तेज़ी से अनुलेखित होता है
    2. β-कोशिका कणिकाओं में प्रोइंसुलिन से कटता है और इंसुलिन के साथ बराबर मात्रा में मुक्त होता है, पर इंजेक्ट किए इंसुलिन में नहीं होता
    3. यकृत द्वारा परिसंचारी इंसुलिन के विघटन पर मुक्त होता है, अतः इंजेक्ट किए व प्राकृतिक इंसुलिन की कुल आवर्त-दर दर्शाता है
    4. इंसुलिन का फ़ॉस्फ़ोरिलित, सक्रिय रूप है जिसे केवल अग्न्याशय पूर्ववर्ती से बना सकता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — β-कोशिका कणिकाओं में प्रोइंसुलिन से कटता है और इंसुलिन के साथ बराबर मात्रा में मुक्त होता है, पर इंजेक्ट किए इंसुलिन में नहीं होता

    प्रोइंसुलिन अपनी A व B शृंखलाओं को C-पेप्टाइड से जोड़े हुए वलित होता है; स्रावी कणिकाओं के प्रोहार्मोन कनवर्टेज़ C-पेप्टाइड को काट निकालते हैं, और इंसुलिन व C-पेप्टाइड साथ-साथ, मोल-प्रति-मोल, स्रावित होते हैं। उपचारी इंसुलिन में C-पेप्टाइड नहीं होता, अतः प्लाज़्मा C-पेप्टाइड केवल रोगी का अपना स्राव बताता है। संकेत पेप्टाइड ER में हटकर नष्ट हो जाता है, C-पेप्टाइड परिसंचारी इंसुलिन का विघटन-उत्पाद नहीं है, और वह एक अलग पेप्टाइड है, रूपांतरित इंसुलिन नहीं।
  16. अपनी अंत्य उलटी पुनरावृत्तियों सहित 1,250 bp लंबा एक DNA ट्रांसपोज़ॉन ऐसे ट्रांसपोज़ेज़ द्वारा एक गुणसूत्र में निविष्ट होता है जो लक्ष्य के दोनों रज्जुकों को 9 bp की दूरी पर काटता है। एकरज्जुकी रिक्तियाँ भरकर जोड़ दिए जाने के बाद गुणसूत्र पहले से ____ bp लंबा हो जाता है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 1259

    क्रमांतरित कटान निविष्ट तत्व के दोनों ओर 9-nt के एकरज्जुकी उभार छोड़ते हैं। इन्हें भरने से 9 bp का लक्ष्य अनुक्रम एक बार और प्रतिलिपित होता है, अतः वह अब दो बार, दोनों ओर एक-एक, लक्ष्य-स्थल द्विगुणन के रूप में आता है। शुद्ध वृद्धि तत्व तथा लक्ष्य-भाग की एक अतिरिक्त प्रति है: 1,250 + 9 = 1,259 bp। 2 × 9 = 18 जोड़ना (1,268) दोहरी गिनती है, क्योंकि दोनों पार्श्व प्रतियों में से एक पहले से थी; 1,250 द्विगुणन की उपेक्षा करता है।
  17. प्राणियों में स्थानांतरणीय तत्वों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. Alu तत्व अपना रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ व एंडोन्यूक्लिएज़ स्वयं कूटित करते हैं और इसलिए बिना सहायता के चलते हैं
    2. LTR रेट्रोट्रांसपोज़ॉन एक RNA मध्यवर्ती द्वारा चलते हैं जिसका निवेशन से पहले DNA में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन होता है
    3. जनन-रेखा में Piwi प्रोटीनों से बंधे piRNA ट्रांसपोज़ॉनों को निष्क्रिय करते हैं
    4. P तत्व जैसे DNA ट्रांसपोज़ॉन अंत्य उलटी पुनरावृत्तियों पर काम करने वाले ट्रांसपोज़ेज़ से काटो-व-चिपकाओ द्वारा चलते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — LTR रेट्रोट्रांसपोज़ॉन एक RNA मध्यवर्ती द्वारा चलते हैं जिसका निवेशन से पहले DNA में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन होता है; C — जनन-रेखा में Piwi प्रोटीनों से बंधे piRNA ट्रांसपोज़ॉनों को निष्क्रिय करते हैं; D — P तत्व जैसे DNA ट्रांसपोज़ॉन अंत्य उलटी पुनरावृत्तियों पर काम करने वाले ट्रांसपोज़ेज़ से काटो-व-चिपकाओ द्वारा चलते हैं

    LTR रेट्रोट्रांसपोज़ॉन रेट्रोवायरस जैसे हैं: उनका RNA रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ द्वारा cDNA में प्रतिलिपित होकर निविष्ट होता है। Piwi-कुल के Argonaute पर लदे piRNA जनन-रेखा में ट्रांसपोज़ॉन अनुलेखों को काटते हैं और दमनकारी क्रोमैटिन लाते हैं। P तत्व व अन्य वर्ग II तत्व अपनी अंत्य उलटी पुनरावृत्तियों पर काम करने वाले ट्रांसपोज़ेज़ से निकाले व पुनः निविष्ट किए जाते हैं। Alu लगभग 300 bp का अस्वायत्त SINE है जो कोई एंज़ाइम कूटित नहीं करता और L1 तंत्र द्वारा चलाया जाता है।
  18. ड्रोसोफ़िला में P स्ट्रेन (जिनके जीनोम में P तत्व हैं) के नरों का M स्ट्रेन (जिनमें ये नहीं हैं) की मादाओं से संकरण बंध्य जननग्रंथियों व बार-बार जनन-रेखा उत्परिवर्तनों वाली संतति देता है, जबकि व्युत्क्रम संकरण, M नर व P मादा, सामान्य संतति देता है। सबसे उचित व्याख्या है कि

    1. P तत्व केवल Y गुणसूत्र पर होते हैं, अतः केवल P स्ट्रेन पिताओं के पुत्रों को ही मिलते हैं
    2. P-तत्व ट्रांसपोज़ेज़ माइटोकॉन्ड्रियल DNA में कूटित है, जो संतति को माता से मिलता है
    3. M स्ट्रेन के अंडों में ट्रांसपोज़ेज़ संदमक होता है, अतः P तत्व तभी चल सकते हैं जब माता P मादा हो
    4. P स्ट्रेन माताएँ अंडे में P-तत्व piRNA डालती हैं जो स्थानांतरण रोकते हैं, और M स्ट्रेन के अंडों में ये नहीं होते
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — P स्ट्रेन माताएँ अंडे में P-तत्व piRNA डालती हैं जो स्थानांतरण रोकते हैं, और M स्ट्रेन के अंडों में ये नहीं होते

    जब P तत्व शुक्राणु द्वारा M अंडे में प्रवेश करते हैं, तो अंडे में उनके विरुद्ध मातृ-निक्षेपित piRNA नहीं होते, अतः तत्व जनन-रेखा में मुक्त रूप से स्थानांतरित होते हैं और बंध्यता, उत्परिवर्तन व गुणसूत्र-विच्छेद लाते हैं। P स्ट्रेन का अंडा वे piRNA रखता है और तत्वों को निष्क्रिय रखता है, अतः व्युत्क्रम संकरण सामान्य है। P तत्व अलिंगसूत्रों व X पर फैले हैं और दुर्जनित संकरण की पुत्रियाँ भी प्रभावित होती हैं; ट्रांसपोज़ेज़ स्वयं तत्व द्वारा केंद्रक में कूटित है; और M अंडों में संदमक होता तो वह दुर्जनित संकरण की रक्षा करता, हानि नहीं।