प्राणी पारिस्थितिकी: पारितंत्र, समष्टियाँ, विविधता, प्राणी-भूगोल व संरक्षण

यह अध्याय जीवन विज्ञान (XL) पेपर के पाँच वैकल्पिक खंडों में से एक, XL4 प्राणी विज्ञान, के खंड XL4.10 “Ecology” का उत्तर है: “The ecosystem, Animal distribution, ecological niche and its contribution to ecological diversity, the food chain, population dynamics, species diversity, zoogeography, biogeochemical cycles, conservation biology, ecotoxicology, biodiversity hotspots in India.” यह पारिस्थितिकी को जंतु की दृष्टि से देखता है: ऊर्जा-प्रवाह व खाद्य शृंखलाएँ, वे पोषक चक्र जिनमें जंतु भाग लेते हैं, निकेत और वे कारक जो तय करते हैं कि जाति कहाँ रहे, समष्टियाँ कैसे बढ़ती और गिनी जाती हैं, विविधता कैसे मापी जाती है, प्राणिभौगोलिक प्रदेश, भारत के हॉटस्पॉट सहित संरक्षण, और प्रदूषक खाद्य शृंखला में ऊपर कैसे चढ़ते हैं। आंकिक प्रश्न हैं: पोषी स्थानांतरण, घातांकी व लॉजिस्टिक वृद्धि, Lincoln–Petersen आकलन, जीवन-सारणी गणना, Shannon व Simpson सूचकांक, प्रभावी समष्टि आकार और जैव-आवर्धन।

1. पारितंत्र, ऊर्जा-प्रवाह व खाद्य शृंखलाएँ

पारितंत्र एक समुदाय व उसका भौतिक पर्यावरण है, जो एकदिशीय ऊर्जा-प्रवाह और चक्रीय पोषक-प्रवाह से जुड़े हैं। उत्पादक ऊर्जा को सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) के रूप में स्थिर करते हैं; उनके अपने श्वसन के बाद जो बचता है वह निवल प्राथमिक उत्पादकता (NPP = GPP − R) है, जो जंतुओं के लिए उपलब्ध भोजन है। अगले पोषी स्तर तक प्रत्येक स्थानांतरण में अधिकांश ऊर्जा श्वसन-ऊष्मा व अनअवशोषित मल के रूप में खो जाती है, अतः केवल लगभग 10% आगे जाती है (Lindeman की पोषी दक्षता; वास्तविक मान मोटे तौर पर 5–20%)। यही हानि खाद्य शृंखला को चार-पाँच कड़ियों तक सीमित रखती है: NPP 10,000 kJ हो तो शाकाहारियों को लगभग 1,000 kJ, प्राथमिक मांसाहारियों को 100 और द्वितीयक मांसाहारियों को 10 kJ मिलते हैं।

  • चारण खाद्य शृंखला: पादप → शाकाहारी → मांसाहारी। अपरद खाद्य शृंखला: मृत पदार्थ → अपरदभक्षी (केंचुए, दीमक, सूक्ष्मजीव) → उनके परभक्षी; वनों में अधिकांश NPP इसी मार्ग से बहती है। वास्तविक शृंखलाएँ खाद्य जाल के रूप में गुँथी होती हैं, जो किसी एक शिकार की हानि का प्रभाव कम करता है।
  • अवशोषण दक्षता (अवशोषित ÷ अंतर्ग्रहीत) मांसाहारियों में शाकाहारियों से अधिक है; उत्पादन दक्षता (नया जैवभार ÷ अवशोषित) अंतरतापियों (पक्षी, स्तनधारी) में, जो अधिकांश अवशोषित ऊर्जा गर्म बने रहने में जलाते हैं, बाह्यतापियों से बहुत कम है।
  • पारिस्थितिक पिरामिड: ऊर्जा का पिरामिड सदा सीधा होता है। खुले समुद्र में जैवभार का पिरामिड उलटा हो सकता है (तेज़ी से विभाजित पादपप्लवक की छोटी स्थायी फ़सल अधिक प्राणिप्लवक पालती है), और जब एक वृक्ष हज़ारों कीटों को खिलाए तो संख्या का पिरामिड उलटा हो सकता है।

2. जैवभूरासायनिक चक्र

पोषक तत्व सजीव व निर्जीव भंडारों के बीच चक्रित होते हैं। गैसीय चक्रों (कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन) का बड़ा वायुमंडलीय भंडार होता है और वे शीघ्र संतुलित होते हैं; अवसादी चक्रों (फ़ॉस्फ़ोरस; सल्फ़र अधिकतर अवसादी) का भंडार चट्टानों में होता है और वे धीमे हैं। जंतु भोजन, उत्सर्जन (अमोनिया, यूरिया, यूरिक अम्ल) व प्रवास द्वारा पोषक तत्व ढोते हैं: समुद्री पक्षियों की गुआनो और अंडे देने आई सैल्मन मछलियाँ समुद्री नाइट्रोजन व फ़ॉस्फ़ोरस को स्थल पर लाती हैं।

मुख्य चरण व कारक
चक्रचरणकारक व टिप्पणी
कार्बनCO₂ का प्रकाश-संश्लेषण से स्थिरीकरण, श्वसन, अपघटन व दहन से वापसीमहासागर CO₂ घोलते हैं और कार्बोनेट अवसादों व कवचों में संचित करते हैं
नाइट्रोजनस्थिरीकरण N₂ → NH₃Rhizobium, Azotobacter, सायनोबैक्टीरिया में नाइट्रोजिनेज़ (O₂-संवेदी); बिजली व औद्योगिक Haber–Bosch प्रक्रम भी
नाइट्रोजनअमोनीकरण, फिर नाइट्रीकरण NH₄⁺ → NO₂⁻ → NO₃⁻अपघटक NH₄⁺ मुक्त करते हैं; Nitrosomonas उसे नाइट्राइट में, Nitrobacter नाइट्राइट को नाइट्रेट में ऑक्सीकृत करता है
नाइट्रोजनविनाइट्रीकरण NO₃⁻ → N₂अवायवीय मृदा व अवसाद (Pseudomonas, Paracoccus)
फ़ॉस्फ़ोरसचट्टानों का अपक्षय → PO₄³⁻ → जीव → अवसादकोई उल्लेखनीय गैसीय प्रावस्था नहीं; प्रायः मीठे जल की उत्पादकता सीमित करता है, अतः P का बहाव सुपोषण कराता है
सल्फ़रSO₄²⁻ ⇄ H₂SDesulfovibrio अवायवीय रूप से सल्फ़ेट अपचयित करता है; Thiobacillus व Beggiatoa सल्फ़ाइड ऑक्सीकृत करते हैं

3. निकेत, प्रतिस्पर्धा व प्राणी-वितरण

निकेत के तीन क्लासिकी अर्थ हैं: Grinnell का आवास-निकेत (जाति कहाँ रहती है), Elton का कार्यात्मक निकेत (खाद्य जाल में उसकी भूमिका) और Hutchinson का उन सभी परिस्थितियों व संसाधनों का n-विमीय अतिआयतन (hypervolume) जिनमें वह बनी रह सके। Hutchinson ने मौलिक निकेत (शत्रुओं या प्रतिस्पर्धियों के बिना संभव) को संकरे वास्तविक निकेत (जो वास्तव में घेरा गया) से अलग किया। स्कॉटलैंड के तट पर Connell ने पाया कि Balanus हटाने पर बार्नेकल Chthamalus नीचे भी जीवित रहता है, अतः उसकी निचली सीमा प्रतिस्पर्धा तय करती है, जबकि Balanus की ऊपरी सीमा शुष्कन तय करता है।

Gause का प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत: दो जातियाँ एक ही सीमाकारी संसाधन पर अनिश्चित काल तक सहअस्तित्व नहीं रख सकतीं; उनके संवर्धनों में Paramecium aurelia ने P. caudatum को बाहर कर दिया। अतः सहअस्तित्व के लिए निकेत-विभेदन चाहिए: संसाधन विभाजन (MacArthur के वार्बलर एक ही स्प्रूस वृक्ष के भिन्न क्षेत्रों में भोजन करते हैं) और लक्षण विस्थापन (जहाँ दो जातियाँ मिलती हैं वहाँ गैलापागोस भू-फ़िंचों की चोंच के आकार अलग हो जाते हैं)। निकेत इसी प्रकार विविधता में योगदान देता है: संसाधन जितनी बारीकी से बँटें, समुदाय में उतनी अधिक जातियाँ समा सकती हैं।

  • वितरण की सीमाएँ: Liebig का न्यूनतम का नियम (सबसे दुर्लभ कारक सीमित करता है) और Shelford का सहनशीलता का नियम (बहुत कम व बहुत अधिक दोनों सीमित करते हैं); साथ में प्रकीर्णन-अवरोध, प्रतिस्पर्धी, परभक्षी व इतिहास।
  • परिसर के भीतर विक्षेपण गुच्छित, यादृच्छिक या समरूप होता है; क्वाड्रेट गिनती में प्रसरण ÷ माध्य क्रमशः > 1, = 1 या < 1 होता है।
  • अंतरतापियों में पारिभौगोलिक नियम: Bergmann (ठंडी जलवायु में बड़ा शरीर), Allen (ठंडी जलवायु में छोटे कान, पूँछ व पाद), Gloger (गर्म, आर्द्र क्षेत्रों में गहरी वर्णकता)।

4. समष्टि गतिकी

समष्टि जन्म, मृत्यु, आप्रवास व उत्प्रवास से बदलती है। असीमित संसाधनों में वह घातांकी रूप से बढ़ती है: dN/dt = rN, अतः Nₜ = N₀e^(rt) और द्विगुणन काल = ln 2 ÷ r (r = 0.07 प्रति वर्ष लगभग 10 वर्ष में दोगुनी)। वहन क्षमता K होने पर वृद्धि लॉजिस्टिक है: dN/dt = rN(1 − N/K), एक S-आकार वक्र जिसकी वृद्धि-दर N = K/2 पर अधिकतम, rK/4, होती है। घनत्व-आश्रित कारक (भोजन, रोग, परभक्षण) N बढ़ने पर अधिक प्रभावी होकर नियंत्रण करते हैं; घनत्व-स्वतंत्र कारक (पाला, बाढ़) नहीं। Lotka–Volterra परभक्षी–शिकार समीकरण युग्मित चक्र देते हैं जिनमें परभक्षी शिकार से पीछे चलता है, जैसे स्नोशू खरगोश व लिंक्स के फ़र-अभिलेखों में।

जीवन-सारणी एक समूह (cohort) का अनुसरण करती है: आयु x पर जीवित nₓ, lₓ = nₓ/n₀ (उत्तरजीविता), dₓ = nₓ − nₓ₊₁, qₓ = dₓ/nₓ (आयु-विशिष्ट मृत्यु-दर) और mₓ (प्रति मादा पुत्रियाँ)। निवल जनन दर R₀ = Σ lₓmₓ; R₀ > 1 का अर्थ वृद्धि है। उत्तरजीविता वक्र: प्रकार I (वृद्धावस्था तक कम मृत्यु: मनुष्य, बड़े स्तनधारी), प्रकार II (स्थिर मृत्यु: अनेक पक्षी), प्रकार III (आरंभ में भारी मृत्यु: ऑयस्टर, अधिकांश मछलियाँ)। ये r-चयनित जातियों (अनेक छोटी संतानें, अल्प देखभाल, अस्थिर आवास) और K-चयनित जातियों (कम बड़ी संतानें, अधिक देखभाल, K के निकट समष्टि) से मेल खाते हैं।

🧠 चिह्नन–पुनर्ग्रहण एक पंक्ति में
Lincoln–Petersen: M जंतुओं को चिह्नित कर छोड़ें, बाद में n पकड़ें जिनमें m चिह्नित हों; तब M/N = m/n, अतः N = Mn/m। 100 मछलियाँ चिह्नित करें, फिर 80 पकड़ें जिनमें 20 चिह्नित हों: N = 100 × 80 ÷ 20 = 400। यह बंद समष्टि, चिह्न न खोने और समान पकड़-योग्यता मानता है; जाल से डरने वाले जंतु N बढ़ा देते हैं, जाल-प्रिय जंतु घटा देते हैं।

5. जाति विविधता

विविधता के दो भाग हैं: समृद्धि (जातियों की संख्या, S) और समता (व्यष्टियाँ कितनी बराबरी से बँटी हैं)। Whittaker के स्तर: α (एक आवास के भीतर), β (आवासों के बीच परिवर्तन) और γ (पूरा क्षेत्र)। जाति i में व्यष्टियों का अनुपात pᵢ हो तो Shannon सूचकांक H′ = −Σ pᵢ ln pᵢ (अन्यथा न कहा हो तो प्राकृतिक लघुगणक) एक जाति पर 0 और सभी के समान रूप से सामान्य होने पर अधिकतम, ln S, होता है; समता J = H′/ln S। Simpson सूचकांक D = Σ pᵢ² यह प्रायिकता है कि यादृच्छिक रूप से (प्रतिस्थापन सहित) चुनी दो व्यष्टियाँ एक ही जाति की हों, अतः यह प्रभाविता मापता है; विविधता 1 − D या 1/D के रूप में दी जाती है। सदा जाँचें कि प्रश्न कौन-सा रूप और कौन-सा लघुगणक-आधार प्रयोग करता है।

🧠 हल किया उदाहरण
100 में से 50, 30 व 20 व्यष्टियों वाली तीन जातियाँ: H′ = −(0.5 ln 0.5 + 0.3 ln 0.3 + 0.2 ln 0.2) = 0.347 + 0.361 + 0.322 = 1.03 (अधिकतम ln 3 = 1.10, अतः J = 0.94)। D = 0.25 + 0.09 + 0.04 = 0.38, अतः 1 − D = 0.62 और 1/D = 2.63।

प्रतिरूप: क्षेत्रफल के साथ जाति-संख्या S = cA^z के रूप में बढ़ती है (पृथक द्वीपों पर z बड़ा); MacArthur व Wilson का द्वीप जैवभूगोल आप्रवास (द्वीप भरने पर घटता, दूर के द्वीपों पर कम) व विलोपन (S के साथ बढ़ता, छोटे द्वीपों पर अधिक) को संतुलित करता है, अतः बड़े व निकट द्वीपों पर सबसे अधिक जातियाँ होती हैं। विविधता सामान्यतः उष्णकटिबंध की ओर बढ़ती है। कीस्टोन जाति का प्रभाव उसकी प्रचुरता से कहीं अधिक होता है: चट्टानी तटों से तारामीन Pisaster हटाने पर मसल्स ने स्थान पर एकाधिकार कर लिया और विविधता घट गई (Paine)।

6. प्राणी-भूगोल

वितरण की व्याख्या अवरोधों के पार प्रकीर्णन और विभाजनवाद (vicariance), यानी भूवैज्ञानिक घटनाओं से कभी सतत रहे परिसर के बँटने, से होती है: दक्षिण अमेरिका, अफ़्रीका व ऑस्ट्रेलिया की फुफ्फुस-मछलियाँ गोंडवाना के अवशेष हैं। Wallace (1876) ने स्थल को छह प्राणिभौगोलिक प्रदेशों में बाँटा। Wallace रेखा, बाली व लोम्बोक के बीच तथा बोर्नियो व सुलावेसी के बीच, एक गहरे जल-मार्ग के साथ चलती है जो अनेक ओरिएंटल स्तनधारियों की पूर्वी सीमा है; Weber रेखा, और पूर्व में, वह स्थान है जहाँ ओरिएंटल व ऑस्ट्रेलियाई जीवजात संतुलित होते हैं।

Wallace के प्रदेश व विशिष्ट जंतु
प्रदेशक्षेत्रविशिष्ट जंतु
पेलिआर्कटिकयूरोप, उत्तरी अफ़्रीका, हिमालय के उत्तर का एशियाकम स्थानिक कुल; नियार्कटिक से बहुत साझा (मिलकर होलार्कटिक)
नियार्कटिकउत्तरी अमेरिका से मेक्सिको के उच्चभूमि तकप्रॉन्गहॉर्न, पर्वतीय बीवर
नियोट्रॉपिकलदक्षिण व मध्य अमेरिकास्लॉथ, आर्मडिलो, चींटीखोर, नई दुनिया के बंदर, रिया
इथियोपियन (एफ़्रोट्रॉपिकल)सहारा के दक्षिण का अफ़्रीका, मेडागास्करजिराफ़, दरियाई घोड़ा, आर्डवार्क, मेडागास्कर के लीमर
ओरिएंटलभारत, दक्षिण-पूर्व एशिया से Wallace रेखा तकगिबन, ट्री श्रू, कोलुगो
ऑस्ट्रेलियाईऑस्ट्रेलिया, न्यू गिनी, निकटवर्ती द्वीपमोनोट्रीम, अधिकांश मार्सुपियल, एमू, कैसोवरी; चमगादड़ों व कृंतकों के अतिरिक्त कम देशज अपरास्तनी

भारत मुख्यतः ओरिएंटल प्रदेश में है, ट्रांस-हिमालय व हिमालय में पेलिआर्कटिक तत्व और शुष्क पश्चिम में कुछ अफ़्रीकी समानताएँ हैं। भारत के भीतर Rodgers व Panwar (1988) ने दस जैवभौगोलिक क्षेत्र माने: ट्रांस-हिमालय, हिमालय, मरुस्थल, अर्ध-शुष्क, पश्चिमी घाट, दक्कन प्रायद्वीप, गंगा का मैदान, उत्तर-पूर्व, तट और द्वीप।

7. संरक्षण जीवविज्ञान व भारत के जैवविविधता हॉटस्पॉट

मुख्य ख़तरे हैं: आवास-हानि व विखंडन, आक्रामक जातियाँ, प्रदूषण, अति-दोहन और जलवायु परिवर्तन। छोटी समष्टियों में आनुवंशिक जोखिम भी जुड़ते हैं: अपवाह व अंतःप्रजनन अवसाद प्रभावी समष्टि आकार पर निर्भर हैं, जो असमान लिंगों के लिए Nₑ = 4NₘN_f/(Nₘ + N_f) है; 10 प्रजनक नर व 40 मादाएँ Nₑ = 1,600/50 = 32 देते हैं, 50 नहीं। जनसांख्यिकीय व आनुवंशिक समस्याएँ एक-दूसरे को विलोपन भँवर में बढ़ाती हैं। IUCN रेड लिस्ट जोखिम को विलुप्त, वन्य में विलुप्त, गंभीर रूप से संकटग्रस्त, संकटग्रस्त, सुभेद्य (अंतिम तीन “संकटापन्न”), निकट संकटापन्न, न्यूनतम चिंता और आँकड़ा-अपर्याप्त में बाँटती है। संरक्षण स्वस्थाने (in situ) (राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, कोर, बफ़र व संक्रमण क्षेत्रों वाले जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, गलियारे) या बहिःस्थाने (ex situ) (चिड़ियाघर, बंदी प्रजनन, जीन व युग्मक बैंक) होता है। भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972, प्रोजेक्ट टाइगर (1973) और जैविक विविधता अधिनियम 2002 इस कार्य का ढाँचा हैं।

जैवविविधता हॉटस्पॉट (Norman Myers की संकल्पना, Conservation International की परिभाषा अनुसार) वह क्षेत्र है जिसमें कम-से-कम 1,500 स्थानिक संवहनी पादप जातियाँ हों और जो अपने मूल आवास का कम-से-कम 70% खो चुका हो। संशोधनों के साथ वैश्विक संख्या बढ़ी है, 25 (2000) से 34 (2004–05 का संशोधन) और वर्तमान योजना में 36। भारत में चार के भाग हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा (उत्तर-पूर्व), पश्चिमी घाट व श्रीलंका, और सुंडालैंड (निकोबार द्वीपों के माध्यम से)। पश्चिमी घाट स्थानिक उभयचरों में विशेष रूप से समृद्ध हैं।

⚠️ योजना बताएँ
हॉटस्पॉट की संख्या संस्करण पर निर्भर है (2000 में 25, 2004–05 के संशोधन के बाद 34, अब 36), और पुरानी पुस्तकें पुरानी सूचियों के कारण भारत में दो या तीन हॉटस्पॉट बताती हैं। वर्तमान योजना में अंडमान द्वीप इंडो-बर्मा में आते हैं जबकि निकोबार द्वीप सुंडालैंड में। उत्तर उसी योजना से दें जो प्रश्न बताता है।

8. पारिविषविज्ञान

पारिविषविज्ञान अध्ययन करता है कि प्रदूषक जीवों, समष्टियों व पारितंत्रों को कैसे प्रभावित करते हैं। विषाक्तता मात्रा–प्रतिक्रिया परीक्षणों से मापी जाती है: LD₅₀/LC₅₀ (वह मात्रा या सांद्रता जो निश्चित समय में आधे परीक्षण-जंतु मार दे; कम मान अधिक विषैला), उप-घातक प्रभाव हेतु EC₅₀, और दीर्घकालिक अनावरण हेतु NOEC (कोई प्रभाव न दिखाने वाली उच्चतम सांद्रता)। तीन पद अलग रखने चाहिए: जैवसांद्रण (bioconcentration) केवल जल से ग्रहण है (BCF = C_जीव ÷ C_जल); जैवसंचयन (bioaccumulation) सभी स्रोतों से जीवनभर जीव में जमाव है; जैव-आवर्धन (biomagnification) शिकार से परभक्षी तक सांद्रता में वृद्धि है (BMF = C_परभक्षी ÷ C_शिकार)। आवर्धन के लिए रसायन स्थायी, वसारागी (उच्च ऑक्टेनॉल–जल विभाजन गुणांक) और कठिनाई से उत्सर्जित होना चाहिए: DDT व उसका उपापचयज DDE, PCB और मिथाइलमर्करी ऐसे हैं; जल-विलेय, शीघ्र उपापचयित रसायन नहीं।

  • DDE ने पेरेग्रीन बाज़ जैसे मछली- व पक्षी-भक्षी शिकारी पक्षियों के अंडकवच पतले कर दिए, जिससे अंडे सेने के दौरान टूटे और समष्टियाँ ढह गईं।
  • मछलियों में जैव-आवर्धित मिथाइलमर्करी से मिनामाटा रोग हुआ, जो जापान की मिनामाटा खाड़ी की मछली खाने वाले लोगों में तंत्रिकीय विषाक्तता थी।
  • पशुओं के शवों में बची पशु-चिकित्सीय सूजनरोधी औषधि डाइक्लोफ़ेनाक Gyps गिद्धों में वृक्क-विफलता व आंतरांगी गाउट करती है; इसी से भारतीय गिद्ध-समष्टियाँ ढहीं और 2006 में भारत में इसका पशु-चिकित्सीय उपयोग प्रतिबंधित हुआ, गिद्ध-सुरक्षित विकल्प मेलॉक्सिकैम के साथ।
  • जैवचिह्नक अनावरण को जल्दी प्रकट करते हैं: ऑर्गेनोफ़ॉस्फ़ेट व कार्बामेट कीटनाशकों द्वारा ऐसिटिलकोलीनएस्टरेज़ का संदमन, और अंतःस्रावी विघटक ट्राइब्यूटिलटिन प्रतिदूषण पेंट से इम्पोसेक्स (मादा घोंघों में नर अंग बनना)।

मुख्य बिंदु

  • ऊर्जा एकदिशीय बहती है और प्रत्येक पोषी कड़ी से केवल लगभग 10% आगे जाती है, अतः ऊर्जा पिरामिड सदा सीधा और शृंखलाएँ छोटी होती हैं; पोषक चक्रित होते हैं, फ़ॉस्फ़ोरस की गैसीय प्रावस्था नहीं और नाइट्रोजन स्थिरीकारकों, नाइट्रीकारकों (Nitrosomonas, Nitrobacter) व विनाइट्रीकारकों से चलती है।
  • वास्तविक निकेत मौलिक निकेत से संकरा है; प्रतिस्पर्धी अपवर्जन निकेत-विभेदन को बाध्य करता है, और इसी से निकेत विविधता बढ़ाते हैं।
  • Nₜ = N₀e^(rt); लॉजिस्टिक वृद्धि dN/dt = rN(1 − N/K) K/2 पर अधिकतम; Lincoln–Petersen N = Mn/m; R₀ = Σ lₓmₓ।
  • Shannon H′ = −Σ pᵢ ln pᵢ समृद्धि व समता के साथ बढ़ता है; Simpson D = Σ pᵢ² प्रभाविता मापता है, अतः विविधता 1 − D या 1/D है।
  • Wallace के छह प्रदेश; भारत मुख्यतः ओरिएंटल है और इसके दस जैवभौगोलिक क्षेत्र हैं। वर्तमान योजना के 36 हॉटस्पॉट में से भारत चार में भागीदार है: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट व श्रीलंका, सुंडालैंड (निकोबार)।
  • स्थायी वसारागी रसायन जैव-आवर्धित होते हैं (BMF = C_परभक्षी ÷ C_शिकार) और शीर्ष परभक्षियों पर चोट करते हैं: DDE व अंडकवच, मिथाइलमर्करी व मिनामाटा, डाइक्लोफ़ेनाक व गिद्ध।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. एक घास-स्थल की निवल प्राथमिक उत्पादकता 25,000 kJ m⁻² yr⁻¹ है। क्रमागत पोषी स्तरों के बीच 10% स्थानांतरण दक्षता मानें तो तृतीयक उपभोक्ताओं को कितनी ऊर्जा (kJ m⁻² yr⁻¹) उपलब्ध है?

    1. 2,500
    2. 250
    3. 25
    4. 2.5
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — 25

    NPP उत्पादकों का उत्पादन है। प्राथमिक उपभोक्ताओं (शाकाहारियों) को 10% = 2,500; द्वितीयक उपभोक्ताओं को 250; तृतीयक उपभोक्ताओं को 25 kJ m⁻² yr⁻¹ मिलते हैं। उत्पादकों व तृतीयक उपभोक्ताओं के बीच तीन स्थानांतरण हैं। भ्रामक 250 केवल दो स्थानांतरण गिनता है, मानो तृतीयक उपभोक्ता चौथे के बजाय तीसरे पोषी स्तर पर हों; 2.5 एक चौथा स्थानांतरण जोड़ देता है।
  2. खुले महासागर में प्राणिप्लवकों का स्थायी जैवभार प्रायः उन पादपप्लवकों से अधिक होता है जिन पर वे पलते हैं। कौन-सी व्याख्या सही है?

    1. वहाँ ऊर्जा का पिरामिड भी उलटा है, क्योंकि उपभोक्ता उत्पादकों द्वारा स्थिर ऊर्जा से अधिक अवशोषित करते हैं
    2. पादपप्लवकों की स्थायी फ़सल छोटी है पर वे इतनी तेज़ी से विभाजित होते हैं कि उनका वार्षिक उत्पादन उपभोक्ताओं की आवश्यकता से अधिक है
    3. प्राणिप्लवक मुख्यतः घुले कार्बनिक पदार्थ पर जीते हैं, अतः उनका जैवभार पादपप्लवक उत्पादन पर निर्भर नहीं
    4. अधिकांश पादपप्लवक जैवभार प्रकाशी क्षेत्र के नीचे है, अतः सतह के पास का नमूना उसे कम आँकता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — पादपप्लवकों की स्थायी फ़सल छोटी है पर वे इतनी तेज़ी से विभाजित होते हैं कि उनका वार्षिक उत्पादन उपभोक्ताओं की आवश्यकता से अधिक है

    जैवभार पिरामिड किसी एक क्षण की स्थायी फ़सल दिखाता है, समय के साथ उत्पादन नहीं। पादपप्लवक लगभग उतनी ही तेज़ी से खाए जाते हैं जितनी तेज़ी से बढ़ते हैं, अतः उनकी स्थायी फ़सल छोटी है, पर उच्च आवर्त उनका वार्षिक उत्पादन प्राणिप्लवकों से अधिक कर देता है। अतः ऊर्जा का पिरामिड (प्रति वर्ष उत्पादन) सीधा रहता है; उलटा ऊर्जा पिरामिड, जो भ्रामक विकल्प है, ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम का उल्लंघन होगा। प्रकाश-संश्लेषी पादपप्लवक प्रकाशी क्षेत्र के नीचे नहीं जी सकते।
  3. जैवभूरासायनिक चक्रों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. फ़ॉस्फ़ोरस का कोई उल्लेखनीय वायुमंडलीय भंडार नहीं है, अतः वह मुख्यतः चट्टानों के अपक्षय से खाद्य शृंखलाओं में आता है
    2. विनाइट्रीकरण, जो N₂ को वायुमंडल में लौटाता है, मुख्यतः अवायवीय परिस्थितियों में होता है
    3. Nitrobacter अमोनियम को सीधे नाइट्रेट में ऑक्सीकृत करता है, अतः नाइट्रीकरण हेतु Nitrosomonas आवश्यक नहीं
    4. नाइट्रोजिनेज़ ऑक्सीजन के प्रति असंवेदी है, अतः वायवीय परिवेश में नाइट्रोजन-स्थिरीकारकों को किसी विशेष सुरक्षा की आवश्यकता नहीं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — फ़ॉस्फ़ोरस का कोई उल्लेखनीय वायुमंडलीय भंडार नहीं है, अतः वह मुख्यतः चट्टानों के अपक्षय से खाद्य शृंखलाओं में आता है; B — विनाइट्रीकरण, जो N₂ को वायुमंडल में लौटाता है, मुख्यतः अवायवीय परिस्थितियों में होता है

    फ़ॉस्फ़ोरस बिना किसी महत्त्वपूर्ण गैसीय रूप के चट्टानों, मृदा, जल व जीवों में चक्रित होता है, और विनाइट्रीकारी जीवाणु ऑक्सीजन न होने पर नाइट्रेट को इलेक्ट्रॉन-ग्राही के रूप में प्रयोग कर N₂ मुक्त करते हैं। नाइट्रीकरण दो-चरणीय है: Nitrosomonas NH₄⁺ को NO₂⁻ में और Nitrobacter NO₂⁻ को NO₃⁻ में ऑक्सीकृत करता है। नाइट्रोजिनेज़ O₂ से अपरिवर्तनीय रूप से क्षतिग्रस्त होता है, इसीलिए हेटेरोसिस्ट, लेगहीमोग्लोबिन व उच्च श्वसन-दर उसकी रक्षा करते हैं।
  4. 200 जंतुओं की एक समष्टि r = 0.2 प्रति सप्ताह की आंतरिक वृद्धि-दर से घातांकी रूप से बढ़ती है (सतत वृद्धि, Nₜ = N₀e^(rt))। 15 सप्ताह बाद उसका आकार, निकटतम पूर्ण संख्या तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 4017

    rt = 0.2 × 15 = 3। Nₜ = 200 × e³ = 200 × 20.0855 = 4017.1, जो पूर्णांकित होकर 4017 है। e^(rt) के स्थान पर (1 + r)ᵗ = 1.2¹⁵ = 15.41 लेने पर लगभग 3081 मिलता है, जो प्रचलित भूल है।
  5. एक समष्टि लॉजिस्टिक वृद्धि dN/dt = rN(1 − N/K) का पालन करती है, जहाँ r = 0.4 प्रति वर्ष और वहन क्षमता K = 5,000 है। N = 1,000 पर उसकी वृद्धि-दर, प्रति वर्ष व्यष्टियों में, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 320

    dN/dt = 0.4 × 1000 × (1 − 1000/5000) = 400 × 0.8 = 320 व्यष्टि प्रति वर्ष। अवरोधी पद भूलने पर 400 मिलता है (शुद्ध घातांकी वृद्धि)। तुलना हेतु, अधिकतम दर N = K/2 = 2,500 पर होती है और rK/4 = 500 प्रति वर्ष के बराबर है।
  6. एक तालाब की मेंढक-समष्टि आँकने हेतु 120 मेंढक पकड़कर, चिह्नित कर छोड़े जाते हैं। एक सप्ताह बाद 150 मेंढक पकड़े जाते हैं, जिनमें 18 चिह्नित हैं। बंद समष्टि व समान पकड़-योग्यता मानते हुए समष्टि का सरल Lincoln–Petersen आकलन (N = Mn/m) ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 1000

    दूसरे नमूने में चिह्नित अंश पूरी समष्टि के चिह्नित अंश का आकलन है: 18/150 = 120/N, अतः N = 120 × 150 ÷ 18 = 18,000 ÷ 18 = 1000। यदि चिह्नित मेंढक जाल से डरने लगें तो कम पुनः पकड़े जाएँगे और N अधिक आँका जाएगा।
  7. एक कीट की 500 नवजात मादाओं के समूह का अनुसरण किया जाता है। आयु-वर्ग 0, 1, 2, 3 व 4 के आरंभ में जीवित संख्याएँ 500, 300, 150, 50 व 0 हैं। आयु-वर्ग 0, 1, 2 व 3 में प्रति मादा औसत मादा संतानें (mₓ) 0, 1.0, 2.0 व 1.5 हैं। निवल जनन दर R₀ = Σ lₓmₓ, दो दशमलव स्थानों तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 1.35

    lₓ = nₓ/n₀: l₀ = 1.0, l₁ = 300/500 = 0.6, l₂ = 150/500 = 0.3, l₃ = 50/500 = 0.1। गुणनफल lₓmₓ: 0, 0.6 × 1.0 = 0.6, 0.3 × 2.0 = 0.6, 0.1 × 1.5 = 0.15। R₀ = 0 + 0.6 + 0.6 + 0.15 = 1.35, अतः प्रत्येक मादा स्वयं को 1.35 बार प्रतिस्थापित करती है और समष्टि बढ़ती है। केवल mₓ जोड़ना (4.5) यह भूलना है कि अधिकांश मादाएँ प्रजनन से पहले मर जाती हैं।
  8. आयु के विरुद्ध log lₓ के रूप में आलेखित करने पर एक जाति की उत्तरजीविता आरंभिक जीवन में बहुत तेज़ी से गिरती है और फिर समतल हो जाती है, अतः आरंभिक अवस्था से बचे थोड़े सदस्य लंबा जीते हैं। ऐसा प्रकार III वक्र सबसे विशिष्ट रूप से कौन-सा जीव दिखाता है?

    1. हाथी, जो लंबे गर्भकाल के बाद एक बच्चा जनता है और वर्षों उसकी रक्षा करता है
    2. छोटा गायक पक्षी, जो प्रति वर्ष अपने वयस्कों का लगभग स्थिर अंश खोता है
    3. अच्छी स्वास्थ्य-सेवा व कम शिशु-मृत्यु वाले देश के मनुष्य
    4. ऑयस्टर, जो लाखों प्लवकीय लार्वा छोड़ता है और कोई पैतृक देखभाल नहीं करता
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    उत्तर: D — ऑयस्टर, जो लाखों प्लवकीय लार्वा छोड़ता है और कोई पैतृक देखभाल नहीं करता

    प्रकार III उत्तरजीविता बहुत अधिक छोटी संतानों व देखभाल के अभाव से जुड़ी है, अतः लगभग सभी लार्वा अवस्था में मर जाते हैं: ऑयस्टर व अधिकांश समुद्री मछलियाँ मानक उदाहरण हैं। हाथी व अच्छी देखभाल वाली मानव समष्टियाँ प्रकार I दिखाती हैं (अधिकांश वृद्धावस्था तक जीते हैं); प्रति वर्ष स्थिर अंश खोने वाला गायक पक्षी प्रकार II है, जो सबसे भ्रामक विकल्प है क्योंकि उसका वक्र भी आरंभ से गिरता है, पर लघुगणकीय पैमाने पर सीधी रेखा में।
  9. एक चट्टानी तट पर बार्नेकल Chthamalus ऊपरी अंतर्ज्वारीय क्षेत्र और Balanus निचला क्षेत्र घेरता है। निचले क्षेत्र से Balanus हटाने पर Chthamalus वहाँ बसकर जीवित रहता है; ऊपरी क्षेत्र से Chthamalus हटाने पर भी Balanus वहाँ सूखने के कारण विफल रहता है। कौन-सा निष्कर्ष निकलता है?

    1. Balanus से प्रतिस्पर्धा Chthamalus को उसके मौलिक निकेत से संकरे वास्तविक निकेत तक सीमित करती है
    2. Chthamalus से प्रतिस्पर्धा Balanus को ऊपरी तट से दूर रखती है, अतः Balanus का वास्तविक निकेत संकरा है
    3. दोनों बार्नेकल अपने मौलिक निकेत भरते हैं, और क्षेत्रीकरण केवल यह दिखाता है कि लार्वा कहाँ बसते हैं
    4. Chthamalus निचले तट से शुष्कन के कारण बाहर है, जो नीचे अधिक तीव्र होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — *Balanus* से प्रतिस्पर्धा *Chthamalus* को उसके मौलिक निकेत से संकरे वास्तविक निकेत तक सीमित करती है

    Chthamalus निचले क्षेत्र में जी सकता है (उसका मौलिक निकेत उसे शामिल करता है) पर केवल Balanus की अनुपस्थिति में, अतः अंतर्जातीय प्रतिस्पर्धा उसका वास्तविक निकेत सिकोड़ती है, जैसा Gause का अपवर्जन सिद्धांत बताता है। उलटा भ्रामक दावा इसलिए गलत है कि Chthamalus हटाने पर भी Balanus ऊपर जीवित नहीं रहता: Balanus की ऊपरी सीमा भौतिक तनाव तय करता है, प्रतिस्पर्धा नहीं। शुष्कन तट पर ऊपर अधिक होता है, नीचे नहीं, और Balanus हटने पर नीचे बसे लार्वा स्पष्टतः जीवित रहते हैं।
  10. 100 भृंगों के एक नमूने में चार जातियाँ हैं जिनमें 40, 30, 20 व 10 व्यष्टियाँ हैं। Shannon सूचकांक H′ = −Σ pᵢ ln pᵢ (प्राकृतिक लघुगणक) का प्रयोग करते हुए H′, दो दशमलव स्थानों तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 1.28

    pᵢ = 0.4, 0.3, 0.2, 0.1। पद −pᵢ ln pᵢ: 0.4 × 0.9163 = 0.3665; 0.3 × 1.2040 = 0.3612; 0.2 × 1.6094 = 0.3219; 0.1 × 2.3026 = 0.2303। योग H′ = 1.2799 ≈ 1.28। चार जातियों हेतु अधिकतम ln 4 = 1.386 है, अतः समता J = 0.92। ln के स्थान पर log₁₀ लेने पर 0.56 मिलता।
  11. दो समुदायों में प्रत्येक में चार जातियाँ व 100 व्यष्टियाँ हैं: X में 25, 25, 25 व 25; Y में 70, 10, 10 व 10। Simpson विविधता 1 − D, जहाँ D = Σ pᵢ², का प्रयोग करते हुए कौन-सा कथन सही है?

    1. X का मान 0.25 व Y का 0.52 है, अतः Y अधिक विविध है क्योंकि उसका मान बड़ा है
    2. X व Y दोनों का मान 0.75 है, क्योंकि दोनों समुदायों की जाति-समृद्धि बराबर है
    3. X का मान 0.75 व Y का 0.48 है, अतः X अधिक विविध है क्योंकि वह अधिक सम है
    4. X का मान 0.75 व Y का 0.52 है, अतः X अधिक विविध है यद्यपि दोनों में चार जातियाँ हैं
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    उत्तर: C — X का मान 0.75 व Y का 0.48 है, अतः X अधिक विविध है क्योंकि वह अधिक सम है

    X: D = 4 × 0.25² = 0.25, अतः 1 − D = 0.75। Y: D = 0.7² + 3 × 0.1² = 0.49 + 0.03 = 0.52, अतः 1 − D = 0.48। समृद्धि बराबर है, अतः अंतर समता का है, और X अधिक विविध है। भ्रामक 0.25 बनाम 0.52 स्वयं D बताता है, जो प्रभाविता मापता है और विविधता घटने पर बढ़ता है; शेष गलत विकल्प में Y का 0.52 भी D है, 1 − D नहीं।
  12. Wallace रेखा, एक क्लासिकी प्राणिभौगोलिक सीमा, किनके बीच चलती है?

    1. श्रीलंका व प्रायद्वीपीय भारत, पेलिआर्कटिक स्तनधारियों की दक्षिणी सीमा के रूप में
    2. बाली व लोम्बोक, तथा बोर्नियो व सुलावेसी, अनेक ओरिएंटल स्तनधारियों की पूर्वी सीमा के रूप में
    3. मेडागास्कर व मुख्य अफ़्रीका, लीमरों व उनके संबंधियों की सीमा के रूप में
    4. न्यू गिनी व ऑस्ट्रेलिया, मार्सुपियल स्तनधारियों की उत्तरी सीमा के रूप में
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    उत्तर: B — बाली व लोम्बोक, तथा बोर्नियो व सुलावेसी, अनेक ओरिएंटल स्तनधारियों की पूर्वी सीमा के रूप में

    Wallace ने बाली व लोम्बोक के बीच, और आगे बोर्नियो व सुलावेसी के बीच, गहरे जलडमरूमध्य के पार जीवजात का अचानक परिवर्तन देखा: एशियाई प्रकार के अपरास्तनी (जैसे अनेक प्राइमेट, बिल्लियाँ व खुरधारी) वहीं प्रायः रुक जाते हैं। न्यू गिनी गलत है क्योंकि वह उथले महाद्वीपीय मग्नतट के पार ऑस्ट्रेलिया से मार्सुपियल साझा करता है; दोनों रेखा के पूर्व में ऑस्ट्रेलियाई प्रदेश में हैं। मेडागास्कर का पृथक्करण वास्तविक है पर वह Wallace रेखा नहीं है।
  13. प्राणिभौगोलिक प्रदेश (Wallace की योजना) व उसके विशिष्ट जंतुओं के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-से सही हैं?

    1. नियोट्रॉपिकल प्रदेश: स्लॉथ, आर्मडिलो व चींटीखोर
    2. ऑस्ट्रेलियाई प्रदेश: मोनोट्रीम व अधिकांश जीवित मार्सुपियल
    3. इथियोपियन प्रदेश: गिबन व ट्री श्रू
    4. नियार्कटिक प्रदेश: लीमर व आर्डवार्क
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — नियोट्रॉपिकल प्रदेश: स्लॉथ, आर्मडिलो व चींटीखोर; B — ऑस्ट्रेलियाई प्रदेश: मोनोट्रीम व अधिकांश जीवित मार्सुपियल

    स्लॉथ, आर्मडिलो व चींटीखोर (Xenarthra) नियोट्रॉपिकल के पहचान-स्तनधारी हैं, और प्लैटिपस, एकिडना व अधिकांश मार्सुपियल ऑस्ट्रेलियाई प्रदेश के हैं। गिबन व ट्री श्रू ओरिएंटल (दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया) हैं, और लीमर (मेडागास्कर) व आर्डवार्क (उप-सहारा अफ़्रीका) इथियोपियन हैं, नियार्कटिक नहीं।
  14. एक व्यापक स्तनधारी जाति के परिसर में ठंडे क्षेत्रों की समष्टियों के कान, पूँछ व पाद गर्म क्षेत्रों की समष्टियों से छोटे होते हैं। यह प्रतिरूप किसके द्वारा वर्णित है?

    1. Bergmann का नियम, जो बड़े शरीर-आकार को ठंडी जलवायु से जोड़ता है
    2. Gloger का नियम, जो गहरे रंग को गर्म, आर्द्र जलवायु से जोड़ता है
    3. Liebig का नियम, जो परिसर-सीमाओं को सबसे दुर्लभ आवश्यक कारक से जोड़ता है
    4. Allen का नियम, जो छोटे बाह्यांगों को ठंडी जलवायु से जोड़ता है
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    उत्तर: D — Allen का नियम, जो छोटे बाह्यांगों को ठंडी जलवायु से जोड़ता है

    Allen का नियम उपांगों से संबंधित है: छोटे बाह्यांग ठंड में पृष्ठ-क्षेत्रफल व ऊष्मा-हानि घटाते हैं, जबकि लंबे कान व पाद गर्म जलवायु में ऊष्मा निकालने में सहायक हैं। Bergmann का नियम भ्रामक विकल्प है क्योंकि वह भी ठंडी जलवायु में ऊष्मा-संतुलन से जुड़ा है, पर वह समग्र शरीर-आकार के बारे में है, उपांगों की लंबाई के बारे में नहीं।
  15. Conservation International की 36 वैश्विक जैवविविधता हॉटस्पॉट वाली वर्तमान योजना के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. कोई क्षेत्र तब योग्य है जब उसमें कम-से-कम 1,500 स्थानिक संवहनी पादप जातियाँ हों और वह अपने मूल आवास का कम-से-कम 70% खो चुका हो
    2. भारत में चार हॉटस्पॉट के भाग हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट व श्रीलंका, और सुंडालैंड
    3. निकोबार द्वीप, अंडमान द्वीपों के साथ, इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट के भाग हैं
    4. कोई क्षेत्र केवल उच्च कशेरुकी जाति-समृद्धि से योग्य हो जाता है, आवास-हानि चाहे जितनी हो
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — कोई क्षेत्र तब योग्य है जब उसमें कम-से-कम 1,500 स्थानिक संवहनी पादप जातियाँ हों और वह अपने मूल आवास का कम-से-कम 70% खो चुका हो; B — भारत में चार हॉटस्पॉट के भाग हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट व श्रीलंका, और सुंडालैंड

    हॉटस्पॉट दो सीमाओं से एक साथ परिभाषित होते हैं, पादप-स्थानिकता (कम-से-कम 1,500 स्थानिक संवहनी पादप) और ख़तरा (मूल आवास का कम-से-कम 70% नष्ट), अतः केवल समृद्धि पर्याप्त नहीं। इस योजना में भारत चार हॉटस्पॉट में भागीदार है। निकोबार द्वीप सुंडालैंड में हैं; इंडो-बर्मा में अंडमान द्वीप आते हैं।
  16. एक तीतर के बंदी-प्रजनन कार्यक्रम में 8 प्रजनक नर और 24 प्रजनक मादाएँ हैं। Nₑ = 4NₘN_f/(Nₘ + N_f) का प्रयोग करते हुए उसका प्रभावी समष्टि आकार कितना है?

    1. 24
    2. 32
    3. 16
    4. 48
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — 24

    Nₑ = 4 × 8 × 24 ÷ (8 + 24) = 768 ÷ 32 = 24। 32 प्रजनकों की गणना-संख्या भ्रामक उत्तर है, पर असंतुलित लिंगानुपात में नर एक छोटे समूह से अगली पीढ़ी के आधे जीन देते हैं, अतः समष्टि उतनी ही तेज़ी से आनुवंशिक विविधता खोती है जितनी केवल 24 की आदर्श समष्टि।
  17. एक स्थायी ऑर्गेनोक्लोरीन किसी झील में 0.002 µg L⁻¹ पर घुला है। पादपप्लवक इसे जल से 2,000 L kg⁻¹ के जैवसांद्रण गुणांक से ग्रहण करते हैं, और अगले तीन परभक्षी–शिकार चरणों (पादपप्लवक → प्राणिप्लवक → छोटी मछली → बड़ी मछली) में से प्रत्येक पर जैव-आवर्धन गुणांक 6 है। बड़ी मछली में सांद्रता, µg kg⁻¹ में, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 864

    पादपप्लवक: 2,000 L kg⁻¹ × 0.002 µg L⁻¹ = 4 µg kg⁻¹। तीन आवर्धन चरण: 4 × 6 × 6 × 6 = 4 × 216 = 864 µg kg⁻¹। गुणांक 6 को चार बार (5,184) या केवल दो बार (144) लगाना प्रचलित भूलें हैं; उत्पादक के बाद के तीर गिनें।
  18. 1990 के दशक से भारत में Gyps गिद्ध-समष्टियों के ढहने का मुख्य कारण किसे पाया गया?

    1. शिकार में DDT अवशेष, जिन्होंने गिद्धों के अंडकवच पतले कर दिए जिससे अंडे घोंसले में टूटे
    2. शिकार किए गए शवों में सीसे के छर्रे, जिनसे दीर्घकालिक सीसा-विषाक्तता व पक्षाघात हुआ
    3. पशुओं के शवों में डाइक्लोफ़ेनाक अवशेष, जिनसे वृक्क-विफलता व आंतरांगी गाउट हुआ
    4. ऑर्गेनोफ़ॉस्फ़ेट चारे, जिन्होंने ऐसिटिलकोलीनएस्टरेज़ का संदमन कर घातक पक्षाघात किया
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — पशुओं के शवों में डाइक्लोफ़ेनाक अवशेष, जिनसे वृक्क-विफलता व आंतरांगी गाउट हुआ

    सूजनरोधी औषधि डाइक्लोफ़ेनाक से उपचारित पशुओं के शव खाने वाले गिद्धों में तीव्र वृक्क-विफलता हुई, जो शव-परीक्षा में आंतरांगी गाउट (यूरेट जमाव) के रूप में दिखी; भारत ने 2006 में इसका पशु-चिकित्सीय उपयोग प्रतिबंधित किया। DDT से अंडकवच पतला होना भ्रामक विकल्प है क्योंकि वह शिकारी पक्षियों का क्लासिकी उदाहरण है, पर उसने पेरेग्रीन जैसे मछली- व पक्षी-भक्षी शिकारी पक्षियों को प्रभावित किया, और गिद्धों की मृत्यु वयस्कों में वृक्क-विफलता से हुई, प्रजनन-विफलता से नहीं।