प्राणी विविधता: सिस्टमैटिक्स, वर्गीकरण तथा जातिवृत्तीय संबंध

यह अध्याय जीवन विज्ञान (XL) पेपर के पाँच वैकल्पिक खंडों में से एक, XL4 प्राणी विज्ञान, के खंड XL4.1 का उत्तर है: “Systematics and classification of animals, phylogenetic relationships (based on classical and molecular phylogenetic tools)” (प्राणियों की सिस्टमैटिक्स व वर्गीकरण, तथा शास्त्रीय व आण्विक जातिवृत्तीय उपकरणों पर आधारित जातिवृत्तीय संबंध)। यह सिखाता है कि सिस्टमैटिक्स, वर्गिकी (टैक्सोनॉमी) और नामपद्धति अलग-अलग क्या करती हैं, वे शास्त्रीय लक्षण जिन पर प्राणी-संघ अलग किए जाते हैं (संगठन-स्तर, सममिति, भ्रूण-स्तर, देहगुहा, परिवर्धन, खंडीभवन), प्रमुख संघ व रज्जुकी देह-योजना, समजातता व एकस्रोतोद्भवता की क्लेडिस्टिक शब्दावली, आकारिकी व DNA से दूरी, पार्सिमनी, संभाविता व बेज़ियन विधियों द्वारा वृक्ष कैसे बनते हैं, और प्राणियों का आधुनिक आण्विक वृक्ष। संख्यात्मक प्रश्न हैं: संभव वृक्षों की गिनती, पार्सिमनी चरणों व सूचनाप्रद स्थलों का आकलन, और p-दूरी को जूक्स–कैंटर दूरी में बदलना।

1. सिस्टमैटिक्स, वर्गिकी व नामपद्धति

सिस्टमैटिक्स जीवों की विविधता और उनके बीच के विकासीय संबंधों का अध्ययन है; इसका अंतिम उत्पाद जातिवृत्त (phylogeny) है। वर्गिकी (taxonomy) इसका वह भाग है जो वर्णन, नामकरण व वर्गीकरण करता है, और वर्गीकरण जीवों को एक-दूसरे में समाहित श्रेणियों के पदानुक्रम में रखता है: जगत, संघ, वर्ग, गण, कुल, वंश और जाति। वर्गीकरण की विधि पर तीन विचारधाराएँ रही हैं। फ़ीनेटिक्स (संख्यात्मक वर्गिकी) अनेक समान भार वाले लक्षणों की समग्र समानता से समूह बनाती है। विली हेनिग द्वारा स्थापित क्लेडिस्टिक्स केवल साझा व्युत्पन्न लक्षणों से समूह बनाती है, ताकि प्रत्येक नामित समूह एक क्लेड हो। विकासीय सिस्टमैटिक्स वंश-परंपरा और विचलन की मात्रा दोनों को तौलती है, इसीलिए वह Reptilia जैसे समूह रखती है जिन्हें क्लेडिस्ट अस्वीकार करते हैं।

प्राणि-नामपद्धति अंतर्राष्ट्रीय प्राणि-नामपद्धति संहिता (ICZN) का पालन करती है, जिसका आरंभ-बिंदु लिनियस की Systema Naturae का 10वाँ संस्करण (1758) है। जाति का नाम एक द्विनाम होता है: बड़े अक्षर से आरंभ होने वाला वंश-नाम और छोटे अक्षर वाला जाति-नाम, दोनों तिरछे अक्षरों में, प्रायः लेखक व वर्ष सहित, जैसे Panthera tigris (Linnaeus, 1758); कोष्ठक दर्शाता है कि वह जाति अब उस वंश में नहीं है जिसमें उसका मूल वर्णन हुआ था। प्राथमिकता के सिद्धांत के अनुसार सबसे पुराना उपलब्ध नाम मान्य होता है और उसी टैक्सॉन के बाद वाले नाम कनिष्ठ पर्याय बन जाते हैं। Naja naja और Gorilla gorilla जैसे टॉटोनिम प्राणि-विज्ञान में मान्य हैं, यद्यपि वनस्पति-विज्ञान में नहीं। कुल-समूह के नामों के अंत निश्चित हैं: अधिकुल -oidea, कुल -idae, उपकुल -inae, ट्राइब -ini (Felidae, Felinae)।

  • होलोटाइप: मूल वर्णन में नाम-धारक के रूप में नामित एकल नमूना; उस प्ररूप-श्रृंखला के शेष नमूने पैराटाइप हैं।
  • सिनटाइप व लेक्टोटाइप: जब कोई होलोटाइप तय न हुआ हो तो श्रृंखला के सभी नमूने सिनटाइप होते हैं, और बाद में उनमें से एक को लेक्टोटाइप नामित किया जा सकता है।
  • नियोटाइप: नाम-धारक प्ररूप के खो जाने या नष्ट हो जाने पर नामित किया जाता है।
⚠️ केवल जाति एक जैविक इकाई है
जैविक जाति-अवधारणा (मेयर) के अनुसार जाति परस्पर प्रजनन करने वाली प्राकृतिक समष्टियों का वह समूह है जो अन्य समूहों से जननिक रूप से पृथक है; यह अलैंगिक या जीवाश्म रूपों पर लागू नहीं होती, जिनके लिए आकारिकीय या जातिवृत्तीय अवधारणा (सबसे छोटा पहचाना जा सकने वाला एकस्रोतोद्भवी समूह) प्रयुक्त होती है। जाति से ऊपर की श्रेणियाँ परिपाटी मात्र हैं: भृंगों का एक कुल आयु या विविधता में स्तनधारियों के एक कुल के बराबर नहीं है।

2. शास्त्रीय लक्षण: संगठन, सममिति, भ्रूण-स्तर व देहगुहा

शास्त्रीय वर्गीकरण प्राणियों को देह-योजना के कुछ गहरे लक्षणों से छाँटता है, जिन्हें वयस्क शारीरिकी व भ्रूणविज्ञान से पढ़ा जाता है। ये सूचनाप्रद हैं क्योंकि ये जटिल हैं, धीरे बदलते हैं और परिवर्धन से बँधे हैं; इनकी कमज़ोरी, जैसा खंड 6 दिखाता है, यह है कि इनमें से कुछ एक से अधिक बार विकसित या लुप्त हुए।

प्राणी देह-योजनाओं के शास्त्रीय लक्षण
लक्षणअवस्थाएँउदाहरण
संगठन-स्तरकोशिकीय (वास्तविक ऊतक नहीं); ऊतक; अंग-तंत्रPorifera; Cnidaria व Ctenophora; Bilateria
सममितिअसममित; अरीय; द्विअरीय; द्विपार्श्व; केवल वयस्क में पंचअरीयअधिकांश स्पंज; निडेरियन; टीनोफ़ोर; Bilateria; एकाइनोडर्म (लार्वा द्विपार्श्व)
भ्रूण-स्तरद्विस्तरी (एक्टोडर्म व एंडोडर्म, बीच में जेली-जैसा मीसोग्लिया); त्रिस्तरी (मीसोडर्म भी)निडेरिया, टीनोफ़ोरा; द्विपार्श्वी (Bilateria)
देहगुहाअगुहीय; कूटगुहीय (ब्लास्टोसील से बनी गुहा, मीसोडर्म केवल देहभित्ति की ओर); सत्य गुहीय (मीसोडर्म से घिरी गुहा)Platyhelminthes; Nematoda, Rotifera; ऐनेलिड, मोलस्क, आर्थ्रोपोड, एकाइनोडर्म, कॉर्डेट
देहगुहा की उत्पत्तिदीर्णगुहिकता (मीसोडर्मी पट्टियों में दरार); आंत्रगुहिकता (आद्यांत्र से निकली थैलियाँ)ऐनेलिड, मोलस्क; एकाइनोडर्म, हेमीकॉर्डेट, ऐम्फ़ियॉक्सस
खंडीभवनविखंडता: देह-इकाइयों की क्रमिक पुनरावृत्तिAnnelida, Arthropoda, Chordata (सोमाइट)

भ्रूणविज्ञान ने त्रिस्तरी प्राणियों को दो वंशों में बाँटा। प्रोटोस्टोम (आद्यमुखी) प्राणियों में ब्लास्टोपोर सामान्यतः मुख बनता है, विदलन सर्पिल व निर्धारित होता है (प्रत्येक प्रारंभिक ब्लास्टोमियर का भाग्य निश्चित होता है) और देहगुहा दीर्णगुहिकता से बनती है; अनेक में ट्रोकोफ़ोर लार्वा होता है। ड्यूटेरोस्टोम (द्वितीयमुखी) प्राणियों में ब्लास्टोपोर गुदा बनता है और मुख नए सिरे से बनता है, विदलन अरीय व अनिर्धारित होता है (पृथक किया गया प्रारंभिक ब्लास्टोमियर भी पूरा लार्वा बना सकता है) और देहगुहा आंत्रगुहिकता से बनती है।

⚠️ परीक्षा जाल
ये प्रवृत्तियाँ हैं, नियम नहीं। आर्थ्रोपोडों में सर्पिल नहीं बल्कि सतही विदलन होता है, और कशेरुकियों की देहगुहा आंत्रगुहिकता से नहीं, पार्श्व-पट्ट मीसोडर्म के विभाजन से बनती है। अब स्वयं ये क्लेड आण्विक आँकड़ों से परिभाषित होते हैं।

3. प्रमुख संघ तथा रज्जुकी देह-योजना

प्रमुख प्राणी-संघों के नैदानिक लक्षण
संघस्तरनैदानिक लक्षण
Poriferaकोशिकीय; ऊतक नहीं; अधिकतर असममितकीपकोशिकाएँ (choanocytes) जल को ऑस्टिया से भीतर और ऑस्कुलम से बाहर चलाती हैं; कंटिकाओं या स्पंजिन का कंकाल
Cnidariaऊतक; द्विस्तरी; अरीयनेमैटोसिस्ट युक्त दंश-कोशिकाएँ; एक छिद्र वाली जठरवाहिनी गुहा; पॉलिप व मेड्यूसा रूप
Ctenophoraऊतक; द्विस्तरी; द्विअरीयपक्ष्माभी कंकत-पट्टिकाओं की आठ पंक्तियाँ; चिपचिपी कोलोब्लास्ट कोशिकाएँ
Platyhelminthesत्रिस्तरी; अगुहीयपृष्ठ-अधरतः चपटे; ज्वाला-कोशिकाएँ (प्रोटोनेफ़्रिडिया); आहारनाल अंधी या अनुपस्थित
Nematodaकूटगुहीयअनुप्रस्थ काट में गोल; क्यूटिकल का निर्मोचन; देहभित्ति में केवल अनुदैर्ध्य पेशियाँ; पूर्ण आहारनाल
Annelidaगुहीय; विखंडितपटों से अलग खंड; सीटी या पैरापोडिया; नेफ़्रिडिया; केंचुए में बंद परिसंचरण
Molluscaगुहीय; देहगुहा परिहृद् गुहा तक सीमितप्रावार (mantle), पेशीय पाद, रेडुला (द्विकपाटियों में अनुपस्थित); सेफ़ैलोपोडों को छोड़ खुला परिसंचरण
Arthropodaगुहीय; विखंडितसंधियुक्त उपांग; काइटिनी बाह्यकंकाल जिसका निर्मोचन होता है; रुधिरगुहा व खुला परिसंचरण
Echinodermataगुहीय ड्यूटेरोस्टोमनाल-पादों युक्त जल-संवहन तंत्र; मीसोडर्मी उत्पत्ति की कैल्शियमी अस्थिकाएँ; वयस्क पंचअरीय
Hemichordataगुहीय ड्यूटेरोस्टोमशुंड, कॉलर व धड़; ग्रसनी दरारें; स्टोमोकॉर्ड, नोटोकॉर्ड नहीं
Chordataगुहीय ड्यूटेरोस्टोमनोटोकॉर्ड, पृष्ठीय खोखली तंत्रिका-रज्जु, ग्रसनी दरारें, गुदापश्च पूँछ, एंडोस्टाइल या थायरॉइड

रज्जुकी लक्षणों का केवल भ्रूण में प्रकट होना पर्याप्त है। Urochordata (ट्यूनिकेट) में नोटोकॉर्ड टैडपोल-लार्वा की पूँछ में होता है और कायांतरण पर लुप्त हो जाता है; Cephalochordata (ऐम्फ़ियॉक्सस) में यह जीवनभर सिर से पूँछ तक फैला रहता है; Vertebrata में यह अधिकांशतः कशेरुक-दंड से प्रतिस्थापित हो जाता है। कशेरुकियों में जबड़ा-रहित लैम्प्रे व हैगफ़िश तथा जबड़े वाले ग्नैथोस्टोम आते हैं: उपास्थिल मछलियाँ, अस्थिल मछलियाँ और चतुष्पाद। चतुष्पादों में ऐम्नियोट (सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी) ऐम्नियॉन, कोरियॉन व ऐलैंटॉइस युक्त अंडा साझा करते हैं, एक साझा व्युत्पन्न लक्षण जिसने जनन को जल से मुक्त किया।

⚠️ परीक्षा जाल
प्रचलित भूलें: स्पंज में कोशिकाएँ हैं पर वास्तविक ऊतक नहीं; टीनोफ़ोर शिकार को दंश-कोशिकाओं से नहीं, कोलोब्लास्ट से पकड़ते हैं; हेमीकॉर्डेट का स्टोमोकॉर्ड नोटोकॉर्ड नहीं है; एकाइनोडर्मों की अरीय सममिति द्वितीयक है, क्योंकि उनके लार्वा द्विपार्श्व होते हैं।

4. लक्षणों का पठन: समजातता, ध्रुवता व एकस्रोतोद्भवता

जातिवृत्त समजात लक्षणों से निकाला जाता है, अर्थात सामान्य पूर्वज से वंशागत समानताएँ (चमगादड़, व्हेल व मनुष्य के अग्रपाद की अस्थियाँ)। समाभासता (homoplasy) वह समानता है जो सामान्य वंश के कारण नहीं है: अभिसरण (पक्षियों व कीटों के पंख, ऑक्टोपस व कशेरुकियों की कैमरा-आँख), समांतरता, या उत्क्रमण (साँपों में पादों का लोप)। लक्षण की ध्रुवता, अर्थात कौन-सी अवस्था पूर्वज है, बहिःसमूह तुलना से तय होती है: अध्ययन-समूह के बाहर के संबंधित समूह के साथ साझा अवस्था को पूर्वज माना जाता है।

  • प्लीसियोमॉर्फ़ी: पूर्वज अवस्था। एपोमॉर्फ़ी: व्युत्पन्न अवस्था।
  • सिनएपोमॉर्फ़ी: दो या अधिक टैक्सा द्वारा साझा व्युत्पन्न अवस्था, क्लेड का एकमात्र प्रमाण (Mammalia के लिए बाल व स्तन-ग्रंथियाँ)।
  • सिमप्लीसियोमॉर्फ़ी: साझा पूर्वज अवस्था, जो कोई समूह नहीं बनाती (मछलियों व चतुष्पादों में साझा मेरुदंड “मछलियों” को क्लेड नहीं बनाता)।
  • ऑटएपोमॉर्फ़ी: केवल एक अंतिम टैक्सॉन में पाई जाने वाली व्युत्पन्न अवस्था; यह उस टैक्सॉन की पहचान है पर उसके संबंधियों के बारे में कुछ नहीं बताती।

एकस्रोतोद्भवी (monophyletic) समूह (क्लेड) में एक पूर्वज और उसके सभी वंशज होते हैं: Mammalia, या Archosauria (मगरमच्छ-वर्गी व पक्षी)। पैराफ़ाइलेटिक समूह में एक पूर्वज और उसके केवल कुछ वंशज होते हैं: पक्षियों के बिना “सरीसृप”, चतुष्पादों के बिना “मछलियाँ”, “अकशेरुकी”। बहुस्रोतोद्भवी (polyphyletic) समूह किसी अभिसारी लक्षण के आधार पर अलग-अलग पूर्वजों के वंशों को एकत्र करता है: “उष्णरक्ती प्राणी” (पक्षी व स्तनधारी)। दो टैक्सा सहोदर समूह हैं यदि उनका निकटतम सामान्य पूर्वज एक ही हो। वृक्ष को उसके नोडों से पढ़ा जाता है, सिरों के बाएँ-से-दाएँ क्रम से नहीं, अतः किसी नोड पर शाखाओं को घुमाने से कुछ नहीं बदलता। क्लेडोग्राम में शाखा-लंबाई का कोई अर्थ नहीं; फ़ाइलोग्राम में यह परिवर्तन के समानुपाती है; क्रोनोग्राम में समय के। मूलयुक्त वृक्ष समय की दिशा दिखाता है; मूलरहित वृक्ष केवल संबंध दिखाता है।

⚠️ परीक्षा जाल
मगरमच्छ छिपकलियों की अपेक्षा पक्षियों के अधिक निकट हैं, क्योंकि मगरमच्छ-वर्गी और पक्षी अधिक हाल का सामान्य पूर्वज साझा करते हैं। कोई जीवित जाति दूसरी से “अधिक आदिम” नहीं है: अपने विभाजन के बाद से सभी समान अवधि तक विकसित हुई हैं।

5. आण्विक उपकरण व वृक्ष-निर्माण विधियाँ

आण्विक लक्षण असंख्य, वंशागत, दूरस्थ समूहों के बीच तुलनीय और गिनने योग्य होते हैं। मार्कर प्रश्न की गहराई के अनुरूप चुना जाता है। धीरे विकसित होने वाला केंद्रकीय 18S rRNA, और अब सैकड़ों जीन या संपूर्ण जीनोम (फ़ाइलोजीनोमिक्स), संघों के बीच के विभाजन सुलझाते हैं; तेज़ी से बदलने वाले माइटोकॉन्ड्रियल जीन (साइटोक्रोम b, 12S व 16S rRNA) जातियों व समष्टियों को सुलझाते हैं। DNA बारकोडिंग माइटोकॉन्ड्रियल साइटोक्रोम c ऑक्सीडेज़ उप-इकाई I (COI) के लगभग 650 bp के मानक क्षेत्र से प्राणी जातियों की पहचान करती है। पुराने आण्विक उपकरण प्रोटीन वैद्युतकणसंचलन, प्रतिरक्षात्मक दूरी और DNA–DNA संकरण थे। दुर्लभ जीनोमिक परिवर्तन, जैसे रेट्रोपोज़ॉन का निवेशन या माइटोकॉन्ड्रियल जीन-क्रम का पुनर्विन्यास, लगभग समाभासता-मुक्त होते हैं और सशक्त लक्षण बनते हैं।

वृक्ष-निर्माण की विधियाँ
विधिसिद्धांतशक्ति व सीमा
UPGMA (दूरी)बार-बार निकटतम युग्म को जोड़ता और दूरियों का औसत लेता हैसभी वंशों में समान दर (घड़ी) मानता है और मूलयुक्त, अल्ट्रामेट्रिक वृक्ष देता है; दरें भिन्न हों तो भ्रामक
नेबर-जॉइनिंग (दूरी)असमान दरों के लिए संशोधन करते हुए चरणबद्ध जोड़ना (न्यूनतम विकास)तेज़ व दर-भिन्नता सहने वाला; मूलरहित वृक्ष; दूरियों में अनुक्रम का विवरण खो जाता है
अधिकतम पार्सिमनी (लक्षण)वह वृक्ष जिसमें न्यूनतम लक्षण-परिवर्तन चाहिएकोई स्पष्ट मॉडल नहीं; दीर्घ-शाखा आकर्षण की प्रवृत्ति
अधिकतम संभाविता (लक्षण)वह वृक्ष व शाखा-लंबाइयाँ जिनके अंतर्गत प्रतिस्थापन-मॉडल में आँकड़े सर्वाधिक संभाव्य होंमॉडल उपयुक्त हो तो सांख्यिकीय रूप से संगत; अभिकलन में भारी
बेज़ियन अनुमान (लक्षण)आँकड़ों, मॉडल व पूर्व-प्रायिकताओं के आधार पर वृक्षों की पश्च-प्रायिकता, MCMC से प्रतिचयितक्लेडों की पश्च-प्रायिकताएँ देता है; मॉडल व पूर्व-प्रायिकताओं के प्रति संवेदनशील

सबसे सरल दूरी p-दूरी है, अर्थात संरेखित स्थलों का वह अनुपात जो भिन्न हैं। चूँकि एक स्थल एक से अधिक बार बदल सकता है (बहु-आघात), p प्रतिस्थापनों की वास्तविक संख्या को कम आँकता है और विचलन बढ़ने पर संतृप्त हो जाता है। सभी प्रतिस्थापनों को समान संभाव्य मानने वाला जूक्स–कैंटर संशोधन प्रति स्थल d = −(3/4) ln(1 − 4p/3) प्रतिस्थापन देता है। हल किया उदाहरण: 200 स्थलों वाले दो अनुक्रम 50 स्थलों पर भिन्न हैं, अतः p = 0.25 और d = −0.75 ln(0.667) = 0.304, जो p से लगभग पाँचवाँ भाग अधिक है। किसी क्लेड का समर्थन बूटस्ट्रैप से मापा जाता है: स्थलों को प्रतिस्थापन सहित पुनः प्रतिचयित कर अनेक कृत्रिम आँकड़ा-समुच्चय बनाए जाते हैं, और परिणामी वृक्षों में से जितने प्रतिशत में वह क्लेड आता है, वही उसका बूटस्ट्रैप मान है।

🎯 दो जोखिम
दीर्घ-शाखा आकर्षण में दो असंबंधित, तेज़ी से विकसित होने वाले वंश संयोगवश समांतर प्रतिस्थापन संचित करते हैं जिन्हें पार्सिमनी साझा व्युत्पन्न लक्षण मान लेती है, अतः वे गलत ढंग से जुड़ जाते हैं; मॉडल-आधारित विधियाँ और अधिक टैक्सा का प्रतिचयन इसे घटाते हैं। तथा जीन-वृक्ष का जाति-वृक्ष से मेल खाना आवश्यक नहीं: अपूर्ण वंश-छँटाई, जीन-द्विगुणन के बाद पैरालॉगों की तुलना और क्षैतिज स्थानांतरण, सभी असंगत जीन-वृक्ष देते हैं, इसीलिए फ़ाइलोजीनोमिक्स अनेक जीनों को मिलाती है।

6. शास्त्रीय बनाम आण्विक: प्राणियों का आधुनिक वृक्ष

आण्विक जातिवृत्तों ने, पहले 18S rRNA से और अब जीनोम-स्तर के आँकड़ों से, Bilateria, Protostomia और Deuterostomia को बनाए रखा, पर प्रोटोस्टोमों को दो क्लेडों में नए सिरे से बाँटा। Ecdysozoa वे प्राणी हैं जो क्यूटिकल का निर्मोचन करते हैं: आर्थ्रोपोड, नेमाटोड, टार्डिग्रेड और ओनिकोफ़ोर। Lophotrochozoa (Spiralia के अंतर्गत) में ऐनेलिड, मोलस्क, चपटे कृमि, ब्रैकियोपोड, ब्रायोज़ोआ और रोटिफ़र आते हैं, जिनमें से अनेक में सर्पिल विदलन, ट्रोकोफ़ोर लार्वा या लोफ़ोफ़ोर होता है। Deuterostomia में Ambulacraria (एकाइनोडर्म व हेमीकॉर्डेट) और Chordata आते हैं। स्पंज या टीनोफ़ोर में से कौन शेष सभी प्राणियों का सहोदर समूह है, यह अभी विवादित है।

आण्विक वृक्ष ने क्या बनाए रखा और क्या पलटा
शास्त्रीय समूहनशास्त्रीय आधारआण्विक निर्णय
Bilateria के आधार पर अगुहीय चपटे कृमिदेहगुहा नहीं, सरल संगठनचपटे कृमि लोफ़ोट्रोकोज़ोआ हैं; उनकी सरलता अंशतः द्वितीयक है
एक समूह के रूप में Pseudocoelomataब्लास्टोसील से बनी गुहाक्लेड नहीं: नेमाटोड एक्डाइसोज़ोआ हैं, रोटिफ़र लोफ़ोट्रोकोज़ोआ
Articulata (ऐनेलिड व आर्थ्रोपोड)विखंडताअस्वीकृत: खंडीभवन एक से अधिक बार उत्पन्न हुआ या अनेक वंशों में लुप्त हुआ
कशेरुकियों के सहोदर के रूप में सेफ़ैलोकॉर्डेटपूरी लंबाई का नोटोकॉर्ड, खंडित पेशियाँट्यूनिकेट कशेरुकियों के सहोदर समूह हैं (Olfactores)
Protostomia व Deuterostomiaब्लास्टोपोर का भाग्य, विदलन-प्रतिरूपदोनों क्लेड के रूप में मान्य

7. संख्यात्मक: वृक्षों की गिनती व पार्सिमनी का आकलन

कितने वृक्ष? प्रत्येक नया टैक्सॉन वर्तमान वृक्ष की किसी भी शाखा से जोड़ा जा सकता है, और n टैक्सा वाले मूलरहित द्विशाखी वृक्ष में 2n − 3 शाखाएँ होती हैं। अतः मूलरहित वृक्षों की संख्या (2n − 5)!! = 1 × 3 × 5 × … × (2n − 5) है और मूलयुक्त वृक्षों की (2n − 3)!!, यानी n टैक्सा के मूलयुक्त वृक्ष n + 1 टैक्सा के मूलरहित वृक्षों के बराबर हैं। 4 टैक्सा के लिए 3 मूलरहित व 15 मूलयुक्त वृक्ष हैं; 5 के लिए 15 व 105; 10 के लिए लगभग 20 लाख व 3.45 करोड़। लगभग एक दर्जन टैक्सा से आगे सभी वृक्षों की खोज असंभव है, अतः प्रोग्राम अनुमानी (heuristic) खोज करते हैं।

पार्सिमनी का आकलन (फ़िच)। एक स्थल के लिए सिरों से भीतर की ओर चलें: कोई नोड अपनी दोनों संतति-शाखाओं के अवस्था-समुच्चयों का सर्वनिष्ठ लेता है यदि वह रिक्त न हो; अन्यथा वह उनका सम्मिलन लेता है और एक चरण गिना जाता है। वृक्ष-लंबाई सभी स्थलों के चरणों का योग है, और सबसे छोटा वृक्ष अधिकतम पार्सिमनी वृक्ष है। कोई स्थल पार्सिमनी-सूचनाप्रद तभी है जब कम-से-कम दो अवस्थाएँ, प्रत्येक कम-से-कम दो टैक्सा में, पाई जाएँ। टैक्सा W, X, Y व Z (क्षारक इसी क्रम में) के लिए हल किया उदाहरण:

चार टैक्सा के तीन मूलरहित वृक्षों पर प्रत्येक स्थल के फ़िच चरण
स्थल (W X Y Z)W+X | Y+ZW+Y | X+ZW+Z | X+Y
1: AAAA000
2: GGCC122
3: CTTT111
4: TTCC122
5: AGGA221
6: AAGG122
वृक्ष-लंबाई698
🧠 चार टैक्सा का शॉर्टकट
स्थिर स्थल हर वृक्ष पर 0 चरण लेता है; एकल-भिन्न स्थल (AAAG) हर वृक्ष पर 1; 2 + 2 स्थल (AAGG) अपनी अवस्थाओं को जोड़ने वाले वृक्ष पर 1 और शेष दो पर 2; तीन-अवस्था स्थल (AAGC) हर वृक्ष पर 2; चार-अवस्था स्थल हर वृक्ष पर 3। केवल 2 + 2 स्थल वृक्षों में चुनाव करते हैं, अतः ऊपर स्थल 2, 4 व 6, W+X का और केवल स्थल 5, W+Z का समर्थन करता है।

मुख्य बिंदु

  • सिस्टमैटिक्स संबंधों का पुनर्निर्माण करती है; वर्गिकी वर्णन, नामकरण व वर्गीकरण करती है। ICZN 1758 से आरंभ होती है, प्राथमिकता लागू करती है, टॉटोनिम की अनुमति देती है और -oidea, -idae व -inae अंत तय करती है; प्रत्येक नाम एक प्ररूप (होलोटाइप, लेक्टोटाइप, नियोटाइप) पर टिका है।
  • शास्त्रीय लक्षण संगठन-स्तर, सममिति, भ्रूण-स्तर, देहगुहा व उसकी उत्पत्ति, खंडीभवन और प्रोटोस्टोम–ड्यूटेरोस्टोम भ्रूणविज्ञान हैं; ये ज्ञात अपवादों वाली प्रवृत्तियाँ हैं।
  • कॉर्डेट कम-से-कम भ्रूण में नोटोकॉर्ड, पृष्ठीय खोखली तंत्रिका-रज्जु, ग्रसनी दरारें व गुदापश्च पूँछ साझा करते हैं; हेमीकॉर्डेट का स्टोमोकॉर्ड नोटोकॉर्ड नहीं है, और ट्यूनिकेट कशेरुकियों के सहोदर समूह हैं।
  • केवल सिनएपोमॉर्फ़ी क्लेड परिभाषित करती हैं; सिमप्लीसियोमॉर्फ़ी व समाभासता भ्रमित करती हैं। पक्षियों के बिना सरीसृप और चतुष्पादों के बिना मछलियाँ पैराफ़ाइलेटिक हैं; उष्णरक्ती प्राणी बहुस्रोतोद्भवी हैं।
  • आण्विक वृक्ष प्रोटोस्टोमों को Ecdysozoa व Lophotrochozoa में बाँटते हैं, जिससे Articulata व Pseudocoelomata विघटित हो जाते हैं। UPGMA घड़ी मानता है, नेबर-जॉइनिंग नहीं; पार्सिमनी परिवर्तन न्यूनतम करती है और दीर्घ-शाखा आकर्षण से ग्रस्त है; संभाविता व बेज़ियन विधियाँ प्रतिस्थापन-मॉडल प्रयुक्त करती हैं।
  • मूलरहित वृक्षों की संख्या (2n − 5)!! और मूलयुक्त की (2n − 3)!! है; वृक्ष-लंबाई फ़िच चरणों का योग है; जूक्स–कैंटर दूरी d = −(3/4) ln(1 − 4p/3) बहु-आघात के लिए p-दूरी को संशोधित करती है।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. एक प्राणि-विज्ञानी प्ररूप-वंश Testudo के आधार पर कुल की श्रेणी का एक नया टैक्सॉन स्थापित करता है। अंतर्राष्ट्रीय प्राणि-नामपद्धति संहिता के अनुसार कुल के लिए किस नाम का रूप सही है?

    1. Testudinoidea
    2. Testudininae
    3. Testudinidae
    4. Testudinaceae
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — Testudinidae

    प्राणि-विज्ञान में कुल-नाम -idae पर समाप्त होते हैं, अतः कुल Testudinidae है। Testudinoidea में अधिकुल का अंत -oidea और Testudininae में उपकुल का अंत -inae है; दोनों भ्रामक हैं क्योंकि ये मान्य प्राणि-विज्ञानी अंत हैं, पर अन्य श्रेणियों के लिए। -aceae अंत वानस्पतिक नामपद्धति में कुल दर्शाता है, प्राणि-विज्ञान में नहीं।
  2. एक पतंगा-जाति का एकमात्र नाम-धारक नमूना, जो मूल वर्णन में नामित था, संग्रहालय की आग में नष्ट हो गया, और मूल प्ररूप-श्रृंखला का कोई अन्य नमूना नहीं बचा। एक विशेषज्ञ नए एकत्र किए गए नमूने को नाम-धारक नामित करता है। इस नमूने को क्या कहते हैं?

    1. लेक्टोटाइप
    2. नियोटाइप
    3. पैराटाइप
    4. सिनटाइप
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — नियोटाइप

    नाम-धारक प्ररूप के खो जाने या नष्ट होने पर नियोटाइप नामित किया जाता है। लेक्टोटाइप भ्रामक उत्तर है, पर वह मूल श्रृंखला के बचे हुए सिनटाइपों में से चुना जाता है, और यहाँ कोई नहीं बचा। पैराटाइप व सिनटाइप मूल प्ररूप-श्रृंखला के नमूने होते हैं, अतः नया एकत्र किया गया नमूना इनमें से कोई नहीं हो सकता।
  3. एक द्विपार्श्व सममित, त्रिस्तरी प्राणी में पूर्ण आहारनाल है, ब्लास्टोसील से बनी देहगुहा है जिसमें मीसोडर्म केवल देहभित्ति को आस्तरित करता है, देहभित्ति में केवल अनुदैर्ध्य पेशियाँ हैं, और वृद्धि के साथ वह अपने क्यूटिकल का निर्मोचन करता है। यह किस संघ का है?

    1. Annelida
    2. Platyhelminthes
    3. Arthropoda
    4. Nematoda
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — Nematoda

    ब्लास्टोसील से बनी कूटगुहा, केवल अनुदैर्ध्य पेशियाँ और क्यूटिकल का निर्मोचन मिलकर Nematoda की पहचान कराते हैं। Arthropoda भ्रामक विकल्प है क्योंकि आर्थ्रोपोड भी निर्मोचन करते हैं (दोनों एक्डाइसोज़ोआ हैं), पर आर्थ्रोपोड रुधिरगुहा व संधियुक्त उपांगों वाले गुहीय प्राणी हैं। ऐनेलिडों में वृत्ताकार व अनुदैर्ध्य पेशियों सहित सत्य देहगुहा होती है, और चपटे कृमि अंधी आहारनाल वाले अगुहीय प्राणी हैं।
  4. शास्त्रीय भ्रूणवैज्ञानिक योजना में, निम्नलिखित में से कौन-से लक्षण प्रोटोस्टोमों के विपरीत ड्यूटेरोस्टोमों की विशेषता हैं?

    1. ब्लास्टोपोर गुदा बनता है और मुख बाद में नए सिरे से बनता है
    2. प्रारंभिक विदलन अरीय व अनिर्धारित होता है
    3. देहगुहा ठोस मीसोडर्मी पट्टियों में दरार पड़ने से बनती है (दीर्णगुहिकता)
    4. जीवन-चक्र में ट्रोकोफ़ोर लार्वा होता है
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    उत्तर: A — ब्लास्टोपोर गुदा बनता है और मुख बाद में नए सिरे से बनता है; B — प्रारंभिक विदलन अरीय व अनिर्धारित होता है

    ड्यूटेरोस्टोमों (एकाइनोडर्म, हेमीकॉर्डेट, कॉर्डेट) में शास्त्रीय रूप से ब्लास्टोपोर गुदा बनता है और विदलन अरीय व अनिर्धारित होता है। दीर्णगुहिकता और ट्रोकोफ़ोर लार्वा प्रोटोस्टोमों के लक्षण हैं, जो ऐनेलिडों व मोलस्कों में विशिष्ट हैं।
  5. दो समुद्री अकशेरुकियों के भ्रूणों में चार-कोशिका अवस्था पर ब्लास्टोमियर अलग किए जाते हैं। जाति X में प्रत्येक पृथक ब्लास्टोमियर एक पूर्ण, यद्यपि छोटा, लार्वा बनाता है; जाति Y में प्रत्येक लार्वा का केवल एक भाग बनाता है जिसमें विशिष्ट संरचनाएँ अनुपस्थित होती हैं। इन परिणामों से कौन-सी व्याख्या सर्वाधिक संगत है?

    1. X में समुद्री अर्चिन की भाँति अरीय, अनिर्धारित विदलन है, और Y में समुद्री घोंघे की भाँति सर्पिल, निर्धारित विदलन
    2. X में समुद्री घोंघे की भाँति सर्पिल, निर्धारित विदलन है, और Y में समुद्री अर्चिन की भाँति अरीय, अनिर्धारित विदलन
    3. दोनों में सर्पिल विदलन है, और अंतर इसलिए है कि केवल X अपनी देहगुहा आंत्रगुहिकता से बनाता है
    4. दोनों ड्यूटेरोस्टोम हैं, और अंतर इसलिए है कि केवल Y में कूटगुहा विकसित होती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — X में समुद्री अर्चिन की भाँति अरीय, अनिर्धारित विदलन है, और Y में समुद्री घोंघे की भाँति सर्पिल, निर्धारित विदलन

    अनिर्धारित विदलन का अर्थ है कि प्रारंभिक ब्लास्टोमियर अपनी पूर्ण परिवर्धन-क्षमता बनाए रखते हैं, अतः प्रत्येक पूरा लार्वा बना सकता है, जैसे समुद्री अर्चिनों (ड्यूटेरोस्टोम) में। घोंघों जैसे प्रोटोस्टोमों का निर्धारित सर्पिल विदलन प्रत्येक ब्लास्टोमियर का भाग्य जल्दी तय कर देता है, अतः पृथक कोशिका केवल अपना निर्धारित भाग बनाती है। उलटी जोड़ी भ्रामक विकल्प है; देहगुहा बनने की विधि और कूटगुहा का प्रारंभिक ब्लास्टोमियरों की क्षमता से कोई संबंध नहीं है।
  6. कौन-सी संरचना उस संघ के साथ सही सुमेलित है जिसमें वह विशिष्ट रूप से पाई जाती है?

    1. ज्वाला-कोशिकाएँ (प्रोटोनेफ़्रिडिया) — Annelida
    2. स्पर्शकों पर कोलोब्लास्ट — Cnidaria
    3. मुख-गुहा में रेडुला — Arthropoda
    4. जल-संवहन तंत्र — Echinodermata
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    उत्तर: D — जल-संवहन तंत्र — Echinodermata

    नाल-पादों युक्त जल-संवहन तंत्र केवल एकाइनोडर्मों में होता है। ज्वाला-कोशिकाएँ चपटे कृमियों के प्रोटोनेफ़्रिडिया हैं (ऐनेलिडों में मेटानेफ़्रिडिया होते हैं), कोलोब्लास्ट टीनोफ़ोरों के हैं (निडेरियनों में दंश-कोशिकाएँ होती हैं), और रेडुला मोलस्कों का भोजन-अंग है।
  7. निम्नलिखित में से कौन-सा समूह एकस्रोतोद्भवी (monophyletic) है?

    1. पारंपरिक रूप से परिभाषित सरीसृप: कछुए, छिपकलियाँ, साँप व मगरमच्छ-वर्गी, पर पक्षी नहीं
    2. पारंपरिक रूप से परिभाषित मछलियाँ: जबड़ा-रहित, उपास्थिल व अस्थिल मछलियाँ, पर चतुष्पाद नहीं
    3. उष्णरक्ती कशेरुकी: अंतःतापिता के आधार पर एक साथ रखे गए पक्षी व स्तनधारी
    4. Archosauria: मगरमच्छ-वर्गी, पक्षी और उनके निकटतम सामान्य पूर्वज के अन्य सभी वंशज
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    उत्तर: D — Archosauria: मगरमच्छ-वर्गी, पक्षी और उनके निकटतम सामान्य पूर्वज के अन्य सभी वंशज

    Archosauria में एक सामान्य पूर्वज और उसके सभी वंशज हैं, अतः यह एक क्लेड है। पारंपरिक सरीसृप व मछलियाँ पैराफ़ाइलेटिक हैं क्योंकि वे कुछ वंशजों (पक्षी; चतुष्पाद) को छोड़ देते हैं। अंतःतापिता के आधार पर पक्षियों को स्तनधारियों के साथ रखना बहुस्रोतोद्भवी है: अंतःतापिता दोनों वंशों में स्वतंत्र रूप से विकसित हुई, अतः समूह एक अभिसारी लक्षण पर टिका है।
  8. बिल्ली-कुल की पाँच जातियों के संबंधों के एक अध्ययन में कुत्ता-कुल की एक जाति बहिःसमूह है। आँका गया एक लक्षण “स्तन-ग्रंथियों की उपस्थिति” है, जो कुत्ते और पाँचों बिल्लियों में है। पाँच बिल्लियों के आपसी संबंध सुलझाने के लिए यह लक्षण सबसे उपयुक्त रूप से क्या है?

    1. एक सिनएपोमॉर्फ़ी जो पाँचों बिल्लियों को कुत्ते से अलग एक क्लेड में जोड़ती है
    2. एक सिमप्लीसियोमॉर्फ़ी जो पाँच बिल्लियों के आपसी संबंधों के बारे में कुछ नहीं बताती
    3. बिल्ली-कुल की एक ऑटएपोमॉर्फ़ी जो पाँचों जातियों में से प्रत्येक की अलग पहचान कराती है
    4. एक समाभासता, क्योंकि स्तन-ग्रंथियाँ बिल्लियों और कुत्ते में स्वतंत्र रूप से उत्पन्न हुईं
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    उत्तर: B — एक सिमप्लीसियोमॉर्फ़ी जो पाँच बिल्लियों के आपसी संबंधों के बारे में कुछ नहीं बताती

    यह अवस्था बहिःसमूह और अंतःसमूह की प्रत्येक जाति में है, अतः बहिःसमूह तुलना इसे बिल्लियों के लिए पूर्वज (प्लीसियोमॉर्फ़िक) अवस्था ठहराती है, और साझा पूर्वज अवस्था कोई समूह नहीं बनाती। यह केवल संपूर्ण Mammalia के स्तर पर सिनएपोमॉर्फ़ी है, जो भ्रामक व्याख्या है। यह किसी एक जाति तक सीमित नहीं, अतः ऑटएपोमॉर्फ़ी नहीं है, और बिल्लियों व कुत्तों की स्तन-ग्रंथियाँ समजात हैं, अभिसारी नहीं।
  9. जातिवृत्त वृक्षों को पढ़ने के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. किसी नोड से निकलने वाली दो शाखाओं को घुमाने से दर्शाए गए संबंध नहीं बदलते
    2. फ़ाइलोग्राम में शाखा-लंबाइयाँ लक्षण-परिवर्तन की मात्रा के समानुपाती होती हैं
    3. मूलरहित वृक्ष दिखाता है कि उसका कौन-सा टैक्सॉन अन्य सबका पूर्वज है
    4. दो सिरे तभी सहोदर समूह हैं जब वे एक-दूसरे के बगल में छपे हों
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — किसी नोड से निकलने वाली दो शाखाओं को घुमाने से दर्शाए गए संबंध नहीं बदलते; B — फ़ाइलोग्राम में शाखा-लंबाइयाँ लक्षण-परिवर्तन की मात्रा के समानुपाती होती हैं

    संबंध नोडों में निहित होते हैं, अतः किसी नोड पर शाखाओं की अदला-बदली से वृक्ष नहीं बदलता, और फ़ाइलोग्राम की शाखा-लंबाइयाँ परिवर्तन के अनुपात में होती हैं। मूलरहित वृक्ष वंश की कोई दिशा नहीं दिखाता, और जीवित सिरे वैसे भी एक-दूसरे के पूर्वज नहीं होते। पृष्ठ पर सिरों का बगल में होना अर्थहीन है क्योंकि शाखाएँ स्वतंत्र रूप से घूम सकती हैं; सहोदर समूह निकटतम सामान्य पूर्वज से परिभाषित होते हैं।
  10. 500 मिलियन वर्ष से भी पहले अलग हुए प्राणी-संघों के संबंध सुलझाने के लिए कौन-सा मार्कर सर्वाधिक उपयुक्त है?

    1. माइटोकॉन्ड्रियल COI बारकोड क्षेत्र, क्योंकि यह निकट संबंधी जातियों के बीच भिन्न होता है
    2. माइक्रोसैटेलाइट लोकस, क्योंकि उनकी उच्च उत्परिवर्तन-दर प्रति लोकस अनेक एलील देती है
    3. केंद्रकीय 18S rRNA जीन, क्योंकि इसकी धीमी परिवर्तन-दर संतृप्ति से बचाती है
    4. माइटोकॉन्ड्रियल नियंत्रण क्षेत्र, क्योंकि यह माइटोकॉन्ड्रियल जीनोम का सबसे तेज़ी से विकसित होने वाला भाग है
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    उत्तर: C — केंद्रकीय 18S rRNA जीन, क्योंकि इसकी धीमी परिवर्तन-दर संतृप्ति से बचाती है

    गहरे विचलनों के लिए धीरे विकसित होने वाले अनुक्रम चाहिए; अन्यथा एक ही स्थलों पर बार-बार के प्रतिस्थापन संकेत मिटा देते हैं (संतृप्ति)। 18S rRNA वही मार्कर था जिसने पहली बार प्राणियों का आधुनिक वृक्ष परिभाषित किया। COI भ्रामक है क्योंकि वह प्राणियों का मानक बारकोड है, पर उसकी तेज़ दर जाति-पहचान के लिए उपयुक्त है, संघों के लिए नहीं; माइक्रोसैटेलाइट व नियंत्रण क्षेत्र और भी तेज़ी से विकसित होते हैं और समष्टियों के लिए उपयुक्त हैं।
  11. चार जातियों के लिए दूरी-आव्यूह बनाया जाता है जिनके वंश बहुत भिन्न दरों से विकसित हुए हैं, एक वंश अन्य की तुलना में लगभग तीन गुना तेज़। इस आव्यूह से गलत संस्थिति (topology) मिलने की सर्वाधिक संभावना किस विधि से है, और क्यों?

    1. UPGMA, क्योंकि यह मानता है कि सभी वंश समान दर से विकसित होते हैं और अल्ट्रामेट्रिक वृक्ष बनाता है
    2. नेबर-जॉइनिंग, क्योंकि यह घड़ी मानता है और प्रत्येक सिरे को मूल से समदूरस्थ होने के लिए बाध्य करता है
    3. अधिकतम संभाविता, क्योंकि यह भिन्न वंशों में भिन्न शाखा-लंबाइयों को समायोजित नहीं कर सकती
    4. बूटस्ट्रैप, क्योंकि स्थलों का प्रतिस्थापन सहित पुनः प्रतिचयन वंशों के बीच दर-अंतर उत्पन्न करता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — UPGMA, क्योंकि यह मानता है कि सभी वंश समान दर से विकसित होते हैं और अल्ट्रामेट्रिक वृक्ष बनाता है

    UPGMA कठोर घड़ी की मान्यता के अंतर्गत औसत दूरियों से गुच्छ बनाता है, अतः तेज़ वंश अपने वास्तविक सहोदर से दूर दिखता है और गलत स्थान पर रखा जाता है। नेबर-जॉइनिंग भ्रामक विकल्प है, पर इसे ठीक असमान दरों के संशोधन के लिए ही बनाया गया था और यह मूलरहित वृक्ष देता है। अधिकतम संभाविता प्रत्येक शाखा की अलग लंबाई आँकती है, और बूटस्ट्रैप समर्थन मापता है; यह वृक्ष-निर्माण विधि नहीं है।
  12. पार्सिमनी दो दूर के संबंधी, तेज़ी से विकसित होने वाली जातियों को प्रबल बूटस्ट्रैप समर्थन के साथ एक साथ रखती है। उपयुक्त प्रतिस्थापन-मॉडल के साथ अधिकतम संभाविता, प्रत्येक जाति के धीमे विकसित होने वाले संबंधियों को जोड़ने के बाद, उन्हें अलग-अलग क्लेडों में रखती है। सर्वाधिक संभावित व्याख्या क्या है?

    1. दोनों जातियाँ वास्तविक सहोदर हैं, और अधिकतम संभाविता उनके साझा प्रतिस्थापनों को कम गिनती है
    2. दीर्घ-शाखा आकर्षण: दो लंबी शाखाओं पर हुए समांतर परिवर्तनों को पार्सिमनी ने सिनएपोमॉर्फ़ी मान लिया
    3. प्रबल बूटस्ट्रैप समर्थन सही क्लेड की गारंटी देता है, अतः पार्सिमनी का परिणाम ही वरीय होना चाहिए
    4. एक स्थल पर बार-बार के प्रतिस्थापनों के लिए पार्सिमनी संभाविता से बेहतर संशोधन करती है, अतः वही सही है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — दीर्घ-शाखा आकर्षण: दो लंबी शाखाओं पर हुए समांतर परिवर्तनों को पार्सिमनी ने सिनएपोमॉर्फ़ी मान लिया

    लंबी शाखाओं पर अनेक स्थल संयोगवश एक ही अवस्था में बदल जाते हैं; पार्सिमनी, जिसमें बहु-आघात का कोई मॉडल नहीं है, इन समांतर परिवर्तनों को साझा व्युत्पन्न अवस्थाएँ गिनकर लंबी शाखाओं को जोड़ देती है। मॉडल-आधारित संभाविता विश्लेषण और लंबी शाखाओं को तोड़ने वाले अतिरिक्त टैक्सा इस कृत्रिम परिणाम को हटा देते हैं। बूटस्ट्रैप आँकड़ों के भीतर संगति मापता है, सत्यता नहीं, अतः वह किसी कृत्रिम परिणाम का भी प्रबल समर्थन कर सकता है, और पार्सिमनी में बहु-आघात का कोई संशोधन होता ही नहीं।
  13. प्राणियों के आण्विक जातिवृत्त निम्नलिखित में से किन निष्कर्षों का समर्थन करते हैं?

    1. आर्थ्रोपोड और नेमाटोड दोनों निर्मोचन करने वाले क्लेड Ecdysozoa के सदस्य हैं
    2. ऐनेलिड और आर्थ्रोपोड मिलकर खंडीभवन से जुड़ा एक क्लेड, Articulata, बनाते हैं
    3. सेफ़ैलोकॉर्डेट नहीं, बल्कि ट्यूनिकेट कशेरुकियों के सहोदर समूह हैं
    4. चपटे कृमि अन्य सभी द्विपार्श्वियों के सहोदर समूह हैं, जैसा उनकी अगुहीय योजना सुझाती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — आर्थ्रोपोड और नेमाटोड दोनों निर्मोचन करने वाले क्लेड Ecdysozoa के सदस्य हैं; C — सेफ़ैलोकॉर्डेट नहीं, बल्कि ट्यूनिकेट कशेरुकियों के सहोदर समूह हैं

    Ecdysozoa (आर्थ्रोपोड, नेमाटोड व अन्य निर्मोची प्राणी) और ट्यूनिकेट–कशेरुकी जोड़ी आण्विक आँकड़ों से भली-भाँति समर्थित हैं। Articulata अस्वीकृत है: ऐनेलिड लोफ़ोट्रोकोज़ोआ हैं और आर्थ्रोपोड एक्डाइसोज़ोआ, अतः खंडीभवन एक से अधिक बार उत्पन्न हुआ या लुप्त हुआ। चपटे कृमि Lophotrochozoa के भीतर आते हैं, अतः उनकी अगुहीय अवस्था आधारी स्थिति का प्रमाण नहीं है।
  14. 6 टैक्सा के लिए कितने भिन्न मूलयुक्त, पूर्णतः द्विशाखी वृक्ष संभव हैं?

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 945

    n टैक्सा के मूलयुक्त वृक्ष = (2n − 3)!! = 1 × 3 × 5 × … × (2n − 3)। n = 6 के लिए यह 9!! = 1 × 3 × 5 × 7 × 9 = 945 है। मूलरहित सूत्र (2n − 5)!! लगाने पर 105 मिलता है, जो प्रचलित भूल है; समतुल्य रूप से, 6 टैक्सा के मूलयुक्त वृक्ष 7 टैक्सा के मूलरहित वृक्षों के बराबर हैं।
  15. चार टैक्सा W, X, Y व Z के आठ संरेखित स्थल हैं; प्रत्येक शब्द W, X, Y व Z के क्षारक इसी क्रम में देता है: स्थल 1 AAAA, स्थल 2 GGAA, स्थल 3 CCTT, स्थल 4 TCTC, स्थल 5 AAAG, स्थल 6 TTGG, स्थल 7 CTTC, स्थल 8 AGCT। फ़िच पार्सिमनी से अधिकतम पार्सिमनी वाले मूलरहित वृक्ष की लंबाई (चरणों की कुल संख्या) ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 11

    W+X | Y+Z पर प्रति स्थल चरण: 0, 1, 1, 2, 1, 1, 2, 3 = 11। W+Y | X+Z पर: 0, 2, 2, 1, 1, 2, 2, 3 = 13। W+Z | X+Y पर: 0, 2, 2, 2, 1, 2, 1, 3 = 13। स्थल 2, 3 व 6, W+X का, स्थल 4, W+Y का और स्थल 7, W+Z का समर्थन करते हैं; स्थल 5 (एकल-भिन्न) हर वृक्ष पर 1 और स्थल 8 (चार अवस्थाएँ) हर वृक्ष पर 3 चरण लेता है। सबसे छोटे वृक्ष की लंबाई 11 है। असूचनाप्रद स्थलों को छोड़ देने पर 7 मिलता है, जो वृक्ष-लंबाई नहीं है।
  16. 400 स्थलों वाले दो संरेखित माइटोकॉन्ड्रियल अनुक्रम 60 स्थलों पर भिन्न हैं। जूक्स–कैंटर संशोधन d = −(3/4) ln(1 − 4p/3), जहाँ p भिन्न स्थलों का अनुपात है, से प्रति स्थल प्रतिस्थापनों की आकलित संख्या ____ है (तीन दशमलव स्थानों तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.167

    p = 60/400 = 0.15। 4p/3 = 0.2, अतः 1 − 4p/3 = 0.8 और ln 0.8 = −0.2231। d = −0.75 × (−0.2231) = 0.1674, यानी प्रति स्थल 0.167 प्रतिस्थापन। संशोधित मान p (0.150) से अधिक है क्योंकि कुछ स्थल एक से अधिक बार बदले हैं; स्वयं p लिख देना प्रचलित भूल है।
  17. चार टैक्सा W, X, Y व Z के लिए कौन-सा संरेखित स्थल (क्षारक W, X, Y व Z के इसी क्रम में) पार्सिमनी-सूचनाप्रद है?

    1. AAAA
    2. AAAG
    3. AGAG
    4. AGCT
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — AGAG

    कोई स्थल तभी सूचनाप्रद है जब कम-से-कम दो अवस्थाएँ, प्रत्येक कम-से-कम दो टैक्सा में, हों। AGAG (W व Y में A, X व Z में G) W को Y से जोड़ने वाले वृक्ष पर 1 और शेष दो पर 2 चरण लेता है, अतः वह भेद करता है। स्थिर स्थल हर जगह 0, एकल-भिन्न स्थल (AAAG) हर जगह 1 और चार भिन्न क्षारकों वाला स्थल हर जगह 3 चरण लेता है, अतः इनमें से कोई किसी वृक्ष को वरीयता नहीं देता।