सूक्ष्मजीवी वर्गिकी व विविधता: जीवाणु, आर्किया, कवक, प्रोटोज़ोआ, विषाणु व आणविक जातिवृत्त
2. जीवाणुओं व आर्किया का व्यापक वर्गीकरण
पुरानी योजनाएँ जीवाणुओं को आकृति (गोलाणु, दंडाणु, वाइब्रियो, सर्पिलाणु, स्पाइरोकीट), ग्राम अभिक्रिया, ऑक्सीजन-संबंध व बीजाणु-निर्माण से समूहित करती थीं; वर्तमान वर्गीकरण जातिवृत्तीय है। अनेक संघ-नाम 2021 में औपचारिक रूप से संशोधित हुए, अतः पुस्तकों में दोनों रूप मिलते हैं।
| संघ (पुराना नाम) | पहचान-चिह्न | उदाहरण |
|---|---|---|
| Pseudomonadota (Proteobacteria) | सबसे बड़ा समूह; ग्राम-ऋणात्मक; उपापचयी रूप से विविध; परंपरागत रूप से ऐल्फ़ा से एप्सिलॉन तक वर्ग | Rhizobium, Rickettsia, Neisseria, Nitrosomonas, Escherichia, Pseudomonas व Vibrio |
| Bacillota (Firmicutes) | ग्राम-धनात्मक, निम्न G+C; कुछ अंतःबीजाणु बनाते हैं | Bacillus, Clostridium, Staphylococcus, Streptococcus, Lactobacillus व Listeria |
| Actinomycetota (Actinobacteria) | ग्राम-धनात्मक, उच्च G+C; अनेक तंतुमय | Streptomyces (अधिकांश प्राकृतिक प्रतिजैविक), Mycobacterium (माइकोलिक अम्ल), Corynebacterium |
| सायनोजीवाणु | क्लोरोफ़िल a व फ़ाइकोबिलिसोम से ऑक्सीजनी प्रकाश-संश्लेषण; हेटेरोसिस्ट N₂ स्थिर करते हैं; हरितलवकों के पूर्वज | Anabaena, Nostoc व Synechococcus |
| Bacteroidota, Chlamydiota व Spirochaetota | आँत के अवायुजीवी व सर्पी; प्रारंभिक व जालीदार पिंडों वाले अविकल्पी अंतःकोशिकी परजीवी; परिद्रव्यी कशाभिकाओं वाली सर्पिल कोशिकाएँ | Bacteroides; Chlamydia; Treponema, Borrelia व Leptospira |
आर्किया केवल चरमपसंदी नहीं हैं; वे महासागरों व मिट्टियों में प्रचुर हैं, और मनुष्यों का कोई आर्किया रोगजनक ज्ञात नहीं है। मेथेनोजन (Methanobacterium, Methanosarcina) कठोर अवायुजीवी हैं जो कोएंज़ाइम M व F₄₂₀ जैसे अद्वितीय सहएंज़ाइमों से मेथेन बनाते हैं। चरम लवणरागी (Halobacterium) को उच्च NaCl चाहिए, वे उसे आंतरिक K⁺ से संतुलित करते हैं, और बैक्टीरियोरोडॉप्सिन प्रयोग करते हैं, जो रेटिनल-युक्त प्रकाश-चालित प्रोटॉन पंप है। Sulfolobus (गर्म अम्लीय स्रोत, प्रायः सल्फ़र-ऑक्सीकारी) व Pyrolobus (100 °C से ऊपर बढ़ने वाला) जैसे अतितापरागी Crenarchaeota (Thermoproteota) में आते हैं; Thermoplasma में भित्ति नहीं है। अमोनिया-ऑक्सीकारी आर्किया (Nitrosopumilus) समुद्र में नाइट्रीकरण चलाते हैं, अति सूक्ष्म Nanoarchaeum एक अन्य आर्किया से चिपककर रहता है, और Asgard आर्किया यूकैरियोटों के सबसे निकट ज्ञात प्रोकैरियोटी संबंधी हैं।
3. यूकैरियोटी सूक्ष्मजीव: यीस्ट, फफूँद व प्रोटोज़ोआ
कवक अवशोषी रस-कार्बनिक-परपोषी हैं, जिनकी भित्तियाँ काइटिन व ग्लूकनों की होती हैं और झिल्लियों में एर्गोस्टेरॉल होता है, जो पॉलीईन व ऐज़ोल औषधियों का लक्ष्य है। यीस्ट एककोशिकीय हैं: Saccharomyces cerevisiae मुकुलन करता है, Schizosaccharomyces pombe विखंडन से विभाजित होता है, Candida albicans मुकुल, कूटकवकतंतु व वास्तविक कवकतंतु बनाता है, और Cryptococcus neoformans संपुटिकायुक्त बेसिडियोमाइसीट यीस्ट है। फफूँद शाखित कवकतंतुओं (hyphae) के रूप में बढ़ती हैं जो कवकजाल बनाते हैं; कवकतंतु पटयुक्त (अनुप्रस्थ भित्तियों वाले) या संकोशिकी (coenocytic) (अपटीय, बहुकेंद्रकी) होते हैं। Histoplasma capsulatum जैसे द्विरूपी कवक 25 °C पर फफूँद और ऊतक में 37 °C पर यीस्ट के रूप में बढ़ते हैं। अलैंगिक बीजाणु बीजाणुधानी-बीजाणु (बीजाणुधानी के भीतर) या कोनिडिया (कोनिडियमधरों पर मुक्त) होते हैं; लैंगिक बीजाणु का प्रकार प्रमुख समूह तय करता है। जिन कवकों की लैंगिक अवस्था ज्ञात नहीं थी उन्हें कभी ड्यूटेरोमाइसीट्स में डाल दिया जाता था; अब DNA अनुक्रम, विशेषतः ITS क्षेत्र, उन्हें स्थान देते हैं।
| समूह | कवकतंतु; लैंगिक बीजाणु | अलैंगिक बीजाणु; उदाहरण |
|---|---|---|
| ज़ाइगोमाइसीट्स (Mucoromycota) | संकोशिकी; मोटी भित्ति वाला युग्माणु (zygospore) | बीजाणुधानी-बीजाणु; Rhizopus, Mucor |
| ऐस्कोमाइकोटा | पटयुक्त; एक थैली, ऐस्कस, के भीतर बने ऐस्कोबीजाणु | कोनिडिया; Aspergillus, Penicillium, Neurospora, Saccharomyces |
| बेसिडियोमाइकोटा | पटयुक्त; मुग्दराकार बेसिडियम के बाहर लगे बेसिडियोबीजाणु | छत्रक, किट्ट, कंड, Cryptococcus |
| काइट्रिडियोमाइकोटा | सरल, प्रायः एककोशिकीय | कशाभिकायुक्त चलबीजाणु, कवकों में अद्वितीय |
प्रोटोज़ोआ एककोशिकीय, अधिकतर गतिशील, परपोषी यूकैरियोट हैं, जिनमें से अनेक प्रतिरोधी पुटियाँ (cysts) बनाते हैं जो संक्रमण फैलाती हैं। परंपरागत समूहन गमन के आधार पर है। अमीबीय रूप कूटपादों से चलते हैं (Entamoeba histolytica, अमीबी पेचिश)। कशाभी में Giardia lamblia (सामान्य सूत्रकणिकाएँ नहीं), Trichomonas vaginalis, Trypanosoma brucei (निद्रा रोग, सीसी मक्खी द्वारा) व Leishmania donovani (काला-अज़ार, बालू-मक्खी द्वारा) आते हैं। Paramecium जैसे पक्ष्माभी पक्ष्माभ, एक दीर्घकेंद्रक व एक लघुकेंद्रक रखते हैं और संयुग्मन द्वारा केंद्रकों का आदान-प्रदान करते हैं; Balantidium coli वह पक्ष्माभी है जो मनुष्य को संक्रमित करता है। एपिकॉम्प्लेक्सा (स्पोरोज़ोआ) में परपोषी कोशिकाओं पर आक्रमण हेतु शिखर संकुल होता है, अधिकांश अवस्थाओं में गमन-अंगक नहीं होते और जीवन-चक्र जटिल होते हैं: Plasmodium, Toxoplasma, Cryptosporidium। आणविक जातिवृत्त दिखाता है कि ये चार समूह प्राकृतिक वंशक्रम नहीं हैं; आधुनिक योजनाएँ उन्हें Excavata (Giardia, Trypanosoma), Amoebozoa (Entamoeba) व SAR समूह (पक्ष्माभी, एपिकॉम्प्लेक्सा) जैसे महासमूहों में रखती हैं।
4. विषाणु व उनका वर्गीकरण
विषाणु एक अकोशिकीय अविकल्पी अंतःकोशिकी परजीवी है। उसका कण, विरियॉन, प्रोटीन कैप्सिड के भीतर DNA या RNA का जीनोम है, कैप्सिड कैप्सोमियरों से बना होता है, और कभी-कभी उस पर परपोषी झिल्ली से लिया तथा विषाणु ग्लाइकोप्रोटीनों से जड़ा लिपिड आवरण होता है। कैप्सिड कुंडलित (तंबाकू मोज़ेक विषाणु), विंशफलकीय (20 त्रिभुजाकार फलक व 12 शीर्ष: ऐडिनोविषाणु, पोलियोविषाणु) या जटिल (फ़ेज T4 का शीर्ष-व-पुच्छ, पॉक्सविषाणु) होते हैं। अधिकांश विरियॉन 20–300 nm के होते हैं। ICTV (International Committee on Taxonomy of Viruses) जीनोम-प्रकार, कैप्सिड सममिति, आवरण, परपोषी व अनुक्रम के आधार पर गण, कुल (-viridae), वंश व प्रजातियाँ निर्धारित करती है। बाल्टीमोर योजना विषाणुओं को इस आधार पर समूहित करती है कि वे mRNA कैसे बनाते हैं, जिसे धनात्मक (+) अर्थी माना जाता है।
| वर्ग व जीनोम | mRNA तक मार्ग | उदाहरण |
|---|---|---|
| I: dsDNA | परपोषी या विषाणु के DNA-आश्रित RNA पॉलिमरेज़ द्वारा अनुलेखन | हर्पीज़विषाणु, ऐडिनोविषाणु, पॉक्सविषाणु, फ़ेज T4 व λ |
| II: ssDNA | पहले dsDNA में परिवर्तित, फिर अनुलेखित | पार्वोविषाणु, फ़ेज φX174 |
| III: dsRNA | विरियॉन का RNA-आश्रित RNA पॉलिमरेज़ जीनोम अनुलेखित करता है | रोटावायरस (खंडित) |
| IV: (+)ssRNA | जीनोम सीधे mRNA का कार्य करता है; अनावृत RNA संक्रामक है | पोलियोविषाणु, कोरोनाविषाणु, हेपेटाइटिस A विषाणु, तंबाकू मोज़ेक विषाणु |
| V: (−)ssRNA | विरियॉन का RNA-आश्रित RNA पॉलिमरेज़ जीनोम की mRNA प्रतिलिपि बनाता है | इन्फ़्लुएंज़ा (खंडित), रेबीज़, खसरा, इबोला |
| VI: व्युत्क्रम अनुलेखक सहित (+)ssRNA | व्युत्क्रम अनुलेखक द्वारा RNA → DNA; DNA समाकलित होता है | HIV व अन्य रेट्रोविषाणु |
| VII: व्युत्क्रम अनुलेखक सहित अंतरालयुक्त dsDNA | RNA में अनुलेखित, जो नए जीनोमों में व्युत्क्रम-अनुलेखित होता है | हेपेटाइटिस B विषाणु, फूलगोभी मोज़ेक विषाणु |
5. वर्गिकी व जातिवृत्त के आणविक उपागम
rRNA जीन ही क्यों? प्रोकैरियोटों का 16S rRNA जीन (यूकैरियोटों में 18S) हर कोशिका में होता है, हर जगह एक ही कार्य करता है, विरले ही क्षैतिज रूप से स्थानांतरित होता है, और लगभग 1,500 न्यूक्लियोटाइड लंबा है, जिसमें संरक्षित क्षेत्रों (जहाँ सार्वत्रिक प्राइमर बंधते हैं) और नौ परिवर्ती क्षेत्रों (V1–V9) का मिश्रण है जो वर्गकों में भेद करते हैं। यह किसी जीव को वंश या कुल में रखने हेतु उत्तम है पर निकट प्रजातियों को अलग करने हेतु अति संरक्षित है। परिपाटी से, लगभग 98.7% 16S समानता से नीचे के उपभेद भिन्न प्रजातियों के होते हैं (97% की पुरानी सीमा प्रचालनात्मक वर्गिकी इकाइयाँ परिभाषित करती थी), पर इससे अधिक समानता यह सिद्ध नहीं करती कि वे एक ही प्रजाति हैं। यह निर्णय जीनोम माप करते हैं: 70% या अधिक DNA–DNA संकरण परंपरागत प्रजाति-मानदंड था, और लगभग 95–96% का औसत न्यूक्लियोटाइड समानता (ANI) उसके तुल्य है। कवकों हेतु ITS क्षेत्र मानक बारकोड है; गृहव्यवस्था जीनों (gyrB, rpoB, recA) का MLSA निकट संबंधियों को अलग करता है; नैदानिक प्रयोगशालाओं में राइबोसोमी प्रोटीनों के MALDI-TOF द्रव्यमान-स्पेक्ट्रम पृथक्कों की पहचान करते हैं।
G+C अंश (mol%) जीवाणुओं में मोटे तौर पर 25% से 75% तक होता है। लगभग 10% से अधिक भिन्नता वाले जीवों का एक वंश में होना असंभाव्य है, पर समान G+C संबंध नहीं दर्शाता। इसे DNA गलनतापमान से निकाला जाता है, क्योंकि G·C युग्मों में तीन हाइड्रोजन बंध होते हैं और वे अधिक प्रबलता से संस्तरित होते हैं; मानक लवण-सिट्रेट में मार्मर–डोटी संबंध Tm = 69.3 + 0.41 (% G+C) है। उदाहरण: Tm = 89.8 °C से (89.8 − 69.3)/0.41 = 50.0% G+C मिलता है।
वृक्ष। जातिवृत्तीय वृक्ष वर्गकों (सिरों) को पर्वों (अनुमानित पूर्वजों) से ऐसी शाखाओं द्वारा जोड़ता है जिनकी लंबाई परिवर्तन की मात्रा दिखाती है। बाह्य-समूह (outgroup) से मूलित करने पर समय की दिशा मिलती है; अमूलित वृक्ष केवल संबंध दिखाता है। क्लेड (एकवंशी समूह) एक पूर्वज व उसके सभी वंशज हैं। वृक्ष दूरी-विधियों (UPGMA, जो स्थिर दर मानती है, और नेबर-जॉइनिंग), अधिकतम मितव्ययिता, अधिकतम संभाविता या बेज़ीय अनुमान से बनते हैं, और बूटस्ट्रैप मान हर शाखा का समर्थन बताते हैं। संभव द्विशाखी वृक्षों की संख्या विस्फोटक रूप से बढ़ती है: n वर्गकों हेतु (2n − 5)!! = 1 × 3 × 5 × … × (2n − 5) अमूलित और (2n − 3)!! मूलित वृक्ष होते हैं, अतः 4 वर्गक 3 अमूलित व 15 मूलित वृक्ष देते हैं, और 5 वर्गक 15 व 105।
मुख्य बिंदु
- वर्गिकी वर्गीकरण, नामपद्धति व पहचान है; प्रोकैरियोटी प्रजातियाँ प्ररूप उपभेद के इर्द-गिर्द बहुचरणीय ढंग से परिभाषित होती हैं, और वोज़ की rRNA तुलनाओं ने तीन डोमेन दिए: जीवाणु, आर्किया व यूकेरिया।
- आर्किया में ग्लिसरॉल-1-फ़ॉस्फ़ेट पर ईथर-बंधित आइसोप्रीनॉइड लिपिड, पेप्टिडोग्लाइकन का अभाव, यूकैरियोट-सदृश RNA पॉलिमरेज़ और मेथिओनीन आरंभक होते हैं; इनमें मेथेनोजन, बैक्टीरियोरोडॉप्सिन वाले लवणरागी, अतितापरागी, समुद्री अमोनिया-ऑक्सीकारक और यूकैरियोटों के Asgard संबंधी आते हैं।
- प्रमुख जीवाणु संघ: Pseudomonadota (ग्राम-ऋणात्मक, विविध), Bacillota (निम्न-G+C ग्राम-धनात्मक, अंतःबीजाणु), Actinomycetota (उच्च-G+C, Streptomyces, Mycobacterium), सायनोजीवाणु, Bacteroidota, Chlamydiota व Spirochaetota।
- कवकों में काइटिन भित्ति व एर्गोस्टेरॉल होते हैं; यीस्ट मुकुलन या विभाजन करते हैं, फफूँद पटयुक्त या संकोशिकी कवकतंतु बनाती हैं, और युग्माणु, ऐस्कोबीजाणु व बेसिडियोबीजाणु प्रमुख समूह तय करते हैं। प्रोटोज़ोआ गमन के आधार पर अमीबीय, कशाभी, पक्ष्माभी व एपिकॉम्प्लेक्सा रूपों में समूहित हैं, जो प्राकृतिक वंशक्रम नहीं हैं।
- विषाणु ICTV और सात बाल्टीमोर वर्गों द्वारा वर्गीकृत होते हैं; (−)RNA व dsRNA विरियॉन RNA-आश्रित RNA पॉलिमरेज़ रखते हैं, (+)RNA स्वयं संक्रामक है, और वर्ग VI व VII व्युत्क्रम अनुलेखक प्रयोग करते हैं। वाइरॉइड, अनुषंगी व प्रायॉन उपविषाणु हैं।
- 16S rRNA जीवों को स्थान देता है (परिपाटी से प्रजाति-सीमा लगभग 98.7%) पर प्रजाति का निर्णय लगभग 95–96% ANI या 70% DDH करता है; Tm = 69.3 + 0.41(% G+C); वृक्ष (2n − 5)!! अमूलित व (2n − 3)!! मूलित होते हैं, और जूक्स–कैंटर p को बहु-प्रहारों हेतु संशोधित करता है।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
आर्किया के झिल्ली लिपिडों का सबसे उपयुक्त वर्णन है
उत्तर देखें
उत्तर: B — ग्लिसरॉल-1-फ़ॉस्फ़ेट से ईथर बंधों द्वारा जुड़ी आइसोप्रीनॉइड शृंखलाएँ
आर्किया लिपिड ग्लिसरॉल-1-फ़ॉस्फ़ेट से ईथर-बंधित आइसोप्रीनॉइड (फ़ाइटैनिल व संबंधित) शृंखलाएँ हैं, जो जीवाणुओं व यूकैरियोटों के ग्लिसरॉल-3-फ़ॉस्फ़ेट की विपरीत त्रिविम-रसायन है; वे एस्टर-बंधित वसा-अम्ल प्रयोग करते हैं, जो लुभावना विकल्प है। स्टेरॉल यूकैरियोटी हैं, और माइकोलिक अम्ल माइकोबैक्टीरिया की भित्ति के हैं।85 °C के एक गर्म स्रोत से एक नया प्रोकैरियोट पृथक किया जाता है। कौन-सा एक प्रेक्षण इसे जीवाणु के बजाय आर्किया डोमेन में रखेगा?
उत्तर देखें
उत्तर: D — इसके झिल्ली लिपिड आइसोप्रीनॉइड शृंखलाओं के ग्लिसरॉल ईथर हैं, वसा-अम्ल एस्टर नहीं
ईथर-बंधित आइसोप्रीनॉइड लिपिड केवल आर्किया में मिलते हैं, अतः वे डोमेन तय करते हैं। अतितापरागिता लुभावना विकल्प है, पर Aquifex व Thermotoga जैसे जीवाणु भी 80 °C से ऊपर बढ़ते हैं। केंद्रक-हीनता व 70S राइबोसोम दोनों प्रोकैरियोटी डोमेनों पर लागू हैं, और ग्राम अभिक्रिया व दंडाकार दोनों में मिलते हैं।निम्नलिखित में से कौन-से लक्षण आर्किया यूकैरियोटों के साथ साझा करते हैं पर जीवाणुओं के साथ नहीं?
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उत्तर: A — प्रोटीन संश्लेषण फ़ॉर्मिलमेथिओनीन के बजाय मेथिओनीन से आरंभ होता है; B — TATA-बंधक प्रोटीन द्वारा प्रोमोटर-पहचान, और यूकैरियोटी RNA पॉलिमरेज़ II से निकटता से मिलता-जुलता RNA पॉलिमरेज़
आर्किया व यूकैरियोट दोनों अनुवाद अफ़ॉर्मिलित मेथिओनीन से आरंभ करते हैं और TATA-बंधक प्रोटीन द्वारा भर्ती किए गए जटिल, pol II-सदृश RNA पॉलिमरेज़ से अनुलेखन करते हैं (जीवाणु इसके बजाय सिग्मा कारक प्रयोग करते हैं), यह आंशिक कारण है कि आर्किया यूकैरियोटों के निकटतर संबंधी हैं। पेप्टिडोग्लाइकन जीवाणु-लक्षण है जो दोनों में नहीं है, और 70S कोशिकाद्रव्यी राइबोसोम जीवाणुओं व आर्किया में साझा हैं, जबकि यूकैरियोटों में 80S हैं।उच्च G+C अंश वाले DNA का एक तंतुमय, ग्राम-धनात्मक मृदा जीवाणु वायवीय बीजाणुओं की शृंखलाएँ बनाता है और स्ट्रेप्टोमाइसिन उत्पन्न करता है। यह किस संघ में आता है?
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उत्तर: C — Actinomycetota (Actinobacteria), उच्च-G+C ग्राम-धनात्मक
यह Streptomyces है: तंतुमय, उच्च G+C, ग्राम-धनात्मक, बीजाणुजनक, और अधिकांश प्राकृतिक प्रतिजैविकों का स्रोत। Bacillota लुभावना विकल्प है क्योंकि वह भी ग्राम-धनात्मक व बीजाणुजनक है, पर उसके सदस्यों में G+C निम्न है और वे वायवीय बीजाणु-शृंखलाओं के बजाय कोशिका के भीतर अंतःबीजाणु बनाते हैं। सायनोजीवाणु व Pseudomonadota ग्राम-ऋणात्मक हैं।Halobacterium salinarum प्रकाश में बिना क्लोरोफ़िल के ATP बनाता है। इसके लिए उत्तरदायी प्रकाश-संग्राही अणु है
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उत्तर: A — बैक्टीरियोरोडॉप्सिन, एक रेटिनल-युक्त प्रोटीन जो प्रोटॉनों को कोशिका से बाहर पंप करता है
प्रकाश बैक्टीरियोरोडॉप्सिन के रेटिनल का समावयवन करता है, जो H⁺ को बाहर पंप करता है; प्रोटॉन प्रेरक बल ATP सिंथेज़ चलाता है। हैलोबैक्टीरिया में क्लोरोफ़िल-आधारित अभिक्रिया केंद्र नहीं होता, अतः बैक्टीरियोक्लोरोफ़िल (बैंगनी जीवाणु) व फ़ाइकोसायनिन (सायनोजीवाणु) गलत हैं; उनके लाल कैरोटिनॉइड प्रकाश से रक्षा करते हैं पर ATP सिंथेज़ को इलेक्ट्रॉन नहीं देते, जो इलेक्ट्रॉनों से नहीं, प्रोटॉनों से चलता है।एक पटयुक्त फफूँद अपने लैंगिक बीजाणु एक थैली-जैसी कोशिका के भीतर बनाती है। यह किसमें आती है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — ऐस्कोमाइकोटा
ऐस्कोबीजाणु एक थैली, ऐस्कस, के भीतर बनते हैं, जो ऐस्कोमाइकोटा (Aspergillus, Penicillium, Neurospora) का परिभाषक लक्षण है। बेसिडियोमाइकोटा लुभावना विकल्प है, क्योंकि वह भी पटयुक्त है, पर उसके बेसिडियोबीजाणु मुग्दराकार बेसिडियम के बाहर लगते हैं। ज़ाइगोमाइसीट्स संकोशिकी हैं और युग्माणु बनाते हैं, और काइट्रिड में कशाभिकायुक्त चलबीजाणु होते हैं।कौन-सा लक्षण-युग्म Rhizopus को Aspergillus से अलग करता है?
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उत्तर: D — Rhizopus में संकोशिकी कवकतंतु व बीजाणुधानी-बीजाणु; Aspergillus में पटयुक्त कवकतंतु व कोनिडिया
ज़ाइगोमाइसीट Rhizopus में अपटीय बहुकेंद्रकी कवकतंतु होते हैं और वह बीजाणुधानियों के भीतर बीजाणुधानी-बीजाणु (और लैंगिक रूप से युग्माणु) बनाता है। ऐस्कोमाइसीट Aspergillus में पटयुक्त कवकतंतु होते हैं और वह कोनिडियमधर पर शृंखलाओं में कोनिडिया लगाता है। उलटा युग्म लुभावना विकल्प है; कोई भी बेसिडियोबीजाणु नहीं बनाता, और दोनों तंतुमय फफूँद हैं।निम्नलिखित में से किन प्रोटोज़ोआ का वर्णन सही है?
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उत्तर: A — Plasmodium: शिखर संकुल वाला एपिकॉम्प्लेक्सन, Anopheles मच्छरों द्वारा मनुष्यों में संचरित; B — Giardia lamblia: एक कशाभी जिसकी जल में पुटियाँ आंत्र संक्रमण फैलाती हैं
Plasmodium प्रतिनिधि एपिकॉम्प्लेक्सन है जिसे Anopheles ले जाता है, और Giardia दूषित जल में पुटियों से फैलने वाला कशाभी है। Paramecium पक्ष्माभी है, अमीबीय नहीं, और दीर्घकेंद्रक व लघुकेंद्रक पक्ष्माभियों में होते हैं, Entamoeba में नहीं; Entamoeba अमीबीय है।एक रोगी से पृथक कवक 25 °C पर अगार पर तंतुमय फफूँद के रूप में पर 37 °C पर व ऊतक में मुकुलित यीस्ट कोशिकाओं के रूप में बढ़ता है। कौन-सा जीव यह व्यवहार दिखाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: C — Histoplasma capsulatum, एक तापीय द्विरूपी कवक
तापीय द्विरूपता, यानी पर्यावरण में फफूँद और शरीर-तापमान पर यीस्ट, Histoplasma capsulatum व संबंधित रोगजनकों की पहचान है। Saccharomyces हर तापमान पर यीस्ट है, जबकि Rhizopus व Aspergillus तंतुमय फफूँद ही रहते हैं, Aspergillus संक्रमित फेफड़े के ऊतक में भी कवकतंतुओं के रूप में बढ़ता है।ऋणात्मक-अर्थी एकलरज्जुकी RNA विषाणु को अपने विरियॉन में RNA-आश्रित RNA पॉलिमरेज़ क्यों रखना पड़ता है?
उत्तर देखें
उत्तर: A — इसका जीनोम अनुवादित नहीं हो सकता, और परपोषी कोशिकाओं में RNA की mRNA प्रतिलिपि बनाने वाला एंज़ाइम नहीं है
(−) जीनोम mRNA का पूरक है, अतः राइबोसोम उसे नहीं पढ़ सकते, और कोशिकाओं में उससे (+) mRNA बनाने वाला RNA-आश्रित RNA पॉलिमरेज़ नहीं होता; विषाणु को अपना लाना पड़ता है। व्युत्क्रम अनुलेखन व समाकलन रेट्रोविषाणुओं (वर्ग VI) का वर्णन है, जो लुभावना विकल्प है। RNA पॉलिमरेज़ II RNA का अपघटन नहीं करता, और कैप्सिड संरचनात्मक प्रोटीनों से बनते हैं, पॉलिमरेज़ से नहीं।सभी विषाणु प्रोटीनों से मुक्त शुद्ध जीनोमी न्यूक्लिक अम्ल सुग्राही संवर्धित कोशिकाओं में डाला जाता है। किस विषाणु के लिए यह अनावृत जीनोम अकेले संक्रामक संतति उत्पन्न करेगा?
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उत्तर: D — पोलियोविषाणु, धनात्मक-अर्थी एकलरज्जुकी RNA जीनोम वाला
पोलियोविषाणु RNA स्वयं mRNA है: राइबोसोम उसे एक बहुप्रोटीन में अनुवादित करते हैं जिसमें विषाणु का RNA-आश्रित RNA पॉलिमरेज़ शामिल है, अतः पूरा चक्र चल पड़ता है। इन्फ़्लुएंज़ा, खसरा व रोटावायरस के जीनोम सीधे अनुवादित नहीं हो सकते और उन्हें विरियॉन में पैक पॉलिमरेज़ चाहिए, अतः उनका प्रोटीन-मुक्त RNA संक्रामक नहीं है। खंडन भ्रामक विकल्प है; निर्णायक गुण जीनोम का अर्थ (sense) है।निम्नलिखित में से कौन-से विषाणु–बाल्टीमोर वर्ग युग्म सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: A — HIV: वर्ग VI, DNA मध्यवर्ती के माध्यम से प्रतिकृत एकलरज्जुकी RNA; B — हेपेटाइटिस B विषाणु: वर्ग VII, RNA मध्यवर्ती के माध्यम से प्रतिकृत अंतरालयुक्त द्विरज्जुकी DNA; D — रोटावायरस: वर्ग III, खंडित द्विरज्जुकी RNA
HIV (एक रेट्रोविषाणु) वर्ग VI, हेपेटाइटिस B विषाणु वर्ग VII और रोटावायरस वर्ग III में है। इन्फ़्लुएंज़ा विषाणु का जीनोम ऋणात्मक-अर्थी खंडित RNA है और वह वर्ग V में है, IV में नहीं।आलू के पौधों का एक संक्रामक कारक केवल कुछ सौ न्यूक्लियोटाइड का एक छोटा वृत्ताकार एकलरज्जुकी RNA है जो कोई प्रोटीन कूटित नहीं करता और जिस पर कोई प्रोटीन आवरण नहीं है। यह है
उत्तर देखें
उत्तर: B — वाइरॉइड, एक अनावृत अकूटक RNA
पौधों को संक्रमित करने वाला अनावृत, अकूटक, छोटा वृत्ताकार RNA (आलू तर्कु कंद रोग प्रतिनिधि उदाहरण है) वाइरॉइड है। अनुषंगी विषाणु लुभावना विकल्प है, पर वह कैप्सिड प्रोटीन कूटित करता है और उसे सहायक विषाणु चाहिए; प्रायॉनों में न्यूक्लिक अम्ल नहीं होता, और फ़ेजों में प्रोटीन कैप्सिड होते हैं।एक जीवाणु पृथक्क का DNA मानक लवण-सिट्रेट में Tm = 94.72 °C पर पिघलता है। Tm = 69.3 + 0.41 (% G+C) प्रयोग करते हुए, इसका G+C अंश mol% में ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 62
% G+C = (Tm − 69.3)/0.41 = (94.72 − 69.3)/0.41 = 25.42/0.41 = 62। अधिक Tm का अर्थ अधिक G·C युग्म है, जिनमें A·T युग्मों से अधिक, तीन हाइड्रोजन बंध और प्रबल संस्तरण होते हैं।n वर्गकों हेतु भिन्न मूलित, पूर्णतः द्विशाखी वृक्षों की संख्या (2n − 3)!! = 1 × 3 × 5 × … × (2n − 3) है। 6 जीवाणु प्रजातियों हेतु संभव मूलित वृक्षों की संख्या ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 945
n = 6 हेतु 2n − 3 = 9, अतः संख्या 1 × 3 × 5 × 7 × 9 = 945 है। अमूलित संख्या (2n − 5)!! = 1 × 3 × 5 × 7 = 105 होती, जो सामान्य भूल है। यही तीव्र वृद्धि कारण है कि वृक्ष-निर्माण प्रोग्राम हर वृक्ष जाँचने के बजाय अनुमानी खोज करते हैं।1,500 न्यूक्लियोटाइड के दो संरेखित 16S rRNA जीन अनुक्रम 120 स्थितियों पर भिन्न हैं (कोई अंतराल नहीं)। जूक्स–कैंटर संशोधन d = −(3/4) ln(1 − 4p/3) प्रयोग करते हुए, जहाँ p भिन्न स्थलों का अनुपात है, प्रति स्थल प्रतिस्थापनों में विकासीय दूरी d ____ है (तीन दशमलव स्थानों तक)।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 0.085
p = 120/1500 = 0.080। 4p/3 = 0.10667, अतः 1 − 4p/3 = 0.89333 और ln(0.89333) = −0.11279। d = 0.75 × 0.11279 = 0.0846, जो तीन दशमलव स्थानों तक 0.085 है। संशोधित दूरी p से अधिक है क्योंकि कुछ स्थल एक से अधिक बार बदले हैं।दो मृदा पृथक्कों में 99.2% 16S rRNA जीन समानता है, और उनके जीनोम 89% औसत न्यूक्लियोटाइड समानता (ANI) देते हैं। लगभग 98.7% 16S समानता व 95–96% ANI को परंपरागत प्रजाति-सीमाएँ मानते हुए, सबसे उचित निष्कर्ष है कि वे
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उत्तर: C — भिन्न प्रजातियाँ हैं, क्योंकि उच्च 16S समानता प्रजाति-एकता सिद्ध नहीं कर सकती और ANI सीमा से कम है
16S rRNA निकट प्रजातियों को अलग करने हेतु अति संरक्षित है: 98.7% से अधिक समानता एक प्रजाति हेतु आवश्यक है पर पर्याप्त नहीं। जीनोम-व्यापी 89% ANI 95–96% से काफ़ी नीचे है, अतः वे भिन्न प्रजातियाँ हैं, और 99.2% 16S समानता देखते हुए संभवतः एक ही वंश की। प्रजाति-सीमा वंश-सीमा नहीं है, अतः अलग वंशों का निष्कर्ष अतिरंजित है; और प्रजाति का निर्णय 16S नहीं, जीनोम माप करते हैं।आणविक वर्गिकी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — 16S rRNA जीन में सार्वत्रिक प्राइमरों को बाँधने वाले संरक्षित क्षेत्र और वर्गकों में भेद करने वाले परिवर्ती क्षेत्र हैं; B — 70% या अधिक DNA–DNA संकरण उपभेदों को एक प्रजाति में रखने का परंपरागत मानदंड था
संरक्षित व परिवर्ती क्षेत्रों का मिश्रण ही 16S rRNA को उपयोगी बनाता है, और 70% DDH लंबे समय तक प्रजाति-सीमा रहा। बहुत भिन्न जीनोमों का कुल G+C समान हो सकता है, अतः समान G+C संबंध नहीं दर्शाता (यद्यपि बड़ा अंतर संबंध को नकार देता है)। अमूलित वृक्ष केवल शाखन-संबंध दिखाता है; दिशा व पूर्वजता हेतु मूल चाहिए, जो प्रायः बाह्य-समूह से मिलता है।