सूक्ष्मजीवों का नियंत्रण: कीमोथेरेपी व प्रतिजैविक

यह अध्याय जीवन विज्ञान (XL) पेपर के पाँच वैकल्पिक खंडों में से एक, XL3 सूक्ष्मजीव विज्ञान, के खंड XL3.8 का उत्तर देता है: "Control of Micro-organisms: Chemotherapy/Antibiotics — रोगाणुरोधी औषधियों के सामान्य लक्षण; प्रतिजैविक: वर्गीकरण, क्रिया-विधि की आणविक क्रियाविधि व प्रतिरोध; कवकरोधी व विषाणुरोधी औषधियाँ।" यह चयनात्मक विषाक्तता व नाशी/स्तंभक तथा स्पेक्ट्रम की अवधारणाएँ, सामर्थ्य कैसे मापा जाता है (MIC, MBC, Kirby–Bauer, चिकित्सीय सूचकांक, अर्ध-आयु खुराक), लक्ष्य के आधार पर प्रतिजैविकों का वर्गीकरण उनकी आणविक क्रियाविधियों सहित, प्रतिरोध के चार मार्ग व उसका प्रसार, तथा कवकरोधी व विषाणुरोधी औषधियों के लक्ष्य पढ़ाता है। आंकिक प्रश्न तनुता-श्रेणी से MIC, चिकित्सीय सूचकांक, व प्रथम-कोटि अर्ध-आयु खुराक हैं।

1. रोगाणुरोधी औषधियों के सामान्य लक्षण

रोगाणुरोधी औषधि परपोषी के भीतर रोगाणुओं को मारती या रोकती है। सख़्त अर्थ में प्रतिजैविक (antibiotic) वह पदार्थ है जिसे एक सूक्ष्मजीव दूसरों के विरुद्ध बनाता है (Penicillium से penicillin, Streptomyces से streptomycin); संश्लेषित कारक (sulfonamide, quinolone) व अर्ध-संश्लेषित कारक (ampicillin, amoxicillin) इसी प्रकार प्रयुक्त होते हैं। नियामक सिद्धांत चयनात्मक विषाक्तता (selective toxicity) है: औषधि रोगाणु को उन सांद्रताओं पर हानि पहुँचाए जिन्हें परपोषी सह ले, जो सबसे सरल तब है जब वह ऐसे लक्ष्य पर प्रहार करे जो परपोषी में नहीं — peptidoglycan, 70S राइबोसोम, जीवाणुई DNA gyrase या folate संश्लेषण। जो औषधि मारे वह जीवाणुनाशी (bactericidal) है (β-lactam, aminoglycoside, quinolone) और जो केवल वृद्धि रोके ताकि परपोषी-रक्षा संक्रमण साफ़ करे वह जीवाणुस्तंभक (bacteriostatic) (tetracycline, sulfonamide, chloramphenicol)। स्पेक्ट्रम प्रभावित जीवों का परास है: संकीर्ण (penicillin G व vancomycin, मुख्यतः ग्राम-धनात्मक) या विस्तृत (tetracycline, carbapenem); विस्तृत-स्पेक्ट्रम उपयोग सामान्य flora को अधिक बिगाड़ता है, जिससे Clostridioides difficile या Candida द्वारा अधिसंक्रमण (superinfection) को निमंत्रण मिलता है।

सामर्थ्य प्रयोगशाला में मापा जाता है। न्यूनतम निरोधी सांद्रता (MIC) broth dilution श्रेणी (प्रायः दो-गुनी तनुता) में वह न्यूनतम औषधि-सांद्रता है जो दृश्य वृद्धि रोके। स्वच्छ नलियों को औषधि-रहित माध्यम पर उपसंवर्धित करने से न्यूनतम जीवाणुनाशी सांद्रता (MBC) मिलती है, वह न्यूनतम सांद्रता जो inoculum का कम से कम 99.9% मार दे। एक हल किया प्रकरण: 64, 32, 16, 8, 4 व 2 µg/mL की नलियों में वृद्धि केवल 4 व 2 µg/mL पर दिखे, तो MIC 8 µg/mL है। Kirby–Bauer disc-diffusion परीक्षण में Mueller–Hinton agar पर जीवाणु-परत पर औषधि-चकतियाँ रखी जाती हैं; स्वच्छ क्षेत्र का व्यास प्रकाशित व्याख्यात्मक breakpoint से मिलाकर संवेदी, मध्यवर्ती या प्रतिरोधी पढ़ा जाता है। प्रवणता पट्टी (E-test) MIC को सीधे वहाँ पढ़ती है जहाँ दीर्घवृत्ताकार क्षेत्र पट्टी को काटता है।

साथ प्रयुक्त दो औषधियाँ समन्वयी (synergistic) हो सकती हैं (संयुक्त प्रभाव योग से अधिक, जैसे β-lactam व aminoglycoside, जहाँ भित्ति-क्षति aminoglycoside को भीतर आने देती है), योगात्मक (additive), या विरोधी (antagonistic) (वृद्धि रोकने वाली जीवाणुस्तंभक औषधि, विभाजित कोशिकाओं पर निर्भर जीवाणुनाशी औषधि का प्रभाव कुंठित कर सकती है)। उपयोगी मात्रा इस पर भी निर्भर है कि संक्रमण कहाँ है: औषधि को स्थल पर MIC से ऊपर सांद्रता में पहुँचना चाहिए, अतः अस्थि, प्रमस्तिष्कमेरु द्रव या फोड़े में प्रवेश, व प्रशासन-मार्ग, अंतर्जात सामर्थ्य जितने ही महत्त्वपूर्ण हैं।

🧠 चिकित्सीय सूचकांक व अर्ध-आयु आधारित खुराक
चिकित्सीय सूचकांक (TI) = TD₅₀ / ED₅₀ (50% के लिए विषैली मात्रा ÷ 50% के लिए प्रभावी मात्रा); बड़ा TI अधिक सुरक्षा-सीमा है। Penicillin का TI बहुत ऊँचा है; वृक्क व कान को क्षति पहुँचा सकने वाले aminoglycoside व polymyxin का निम्न। उदाहरणतः TD₅₀ = 500 mg/kg व ED₅₀ = 10 mg/kg से TI = 50। प्रथम-कोटि निष्कासन में प्लाज़्मा-स्तर हर अर्ध-आयु (t½) में आधा होता है: 40 µg/mL शिखर व t½ = 2 h से स्तर 40 → 20 → 10 → 5 → 2.5 µg/mL गिरता है, अतः 2.5 µg/mL की MIC से ऊपर 4 अर्ध-आयु = 8 h रहता है, जो खुराक-अंतराल का मार्गदर्शन करता है। β-lactam समय-आश्रित ढंग से क्रिया करते हैं (MIC से ऊपर का समय महत्त्वपूर्ण); aminoglycoside व fluoroquinolone सांद्रता-आश्रित ढंग से (शिखर-से-MIC अनुपात महत्त्वपूर्ण)।

2. लक्ष्य के आधार पर प्रतिजैविकों का वर्गीकरण

प्रतिजैविकों को रासायनिक कुल से और, GATE के लिए अधिक उपयोगी रूप से, कोशिकीय लक्ष्य से वर्गीकृत किया जाता है। लक्ष्य स्पेक्ट्रम, औषधि के नाशी या स्तंभक होने, दुष्प्रभावों व संभावित प्रतिरोध-मार्ग की व्याख्या करता है।

लक्ष्य के अनुसार समूहित जीवाणुरोधी औषधियाँ
लक्ष्यऔषधि वर्ग व उदाहरणआणविक क्रिया
कोशिका-भित्तिβ-lactam वर्ग: penicillin, cephalosporin, carbapenempenicillin-बंधक प्रोटीनों (transpeptidase) को acylate करते हैं, अतः peptidoglycan तिर्यक-बंधित नहीं होता
कोशिका-भित्तिglycopeptide व bacitracin: vancomycin आदिvancomycin अग्रदूत के D-Ala–D-Ala सिरे को ढकता है; bacitracin वाहक-पुनर्चक्रण रोकता है
30S राइबोसोमaminoglycoside व tetracycline: gentamicin आदिaminoglycoside त्रुटिपूर्ण पठन कराते व नाशी हैं; tetracycline A स्थल रोकते व स्तंभक हैं
50S राइबोसोमmacrolide आदि: erythromycin, chloramphenicol, clindamycin, linezolidmacrolide स्थानांतरण रोकते; chloramphenicol peptidyl transferase रोकता; linezolid आरंभन रोकता
न्यूक्लिक अम्लfluoroquinolone व rifampicin: ciprofloxacin आदिquinolone DNA gyrase/topoisomerase IV रोकते; rifampicin जीवाणुई RNA polymerase रोकता
folate मार्गsulfonamide तथा trimethoprimsulfonamide dihydropteroate synthase रोकते; trimethoprim dihydrofolate reductase रोकता
कोशिका झिल्लीpolymyxin व daptomycin: colistin आदिpolymyxin ग्राम-ऋणात्मक बाह्य झिल्ली भंग करते; daptomycin ग्राम-धनात्मक झिल्ली विध्रुवित करता

कुछ कुल राइबोसोम-केंद्रित योजना से बाहर हैं पर जानने योग्य हैं: oxazolidinone (linezolid) पूर्णतः संश्लेषित 50S-आरंभन अवरोधक हैं जो प्रतिरोधी ग्राम-धनात्मकों के लिए आरक्षित हैं, और चक्रीय लाइपोपेप्टाइड daptomycin झिल्ली-विध्रुवण द्वारा ग्राम-धनात्मकों के विरुद्ध जीवाणुनाशी है। प्रत्येक औषधि को केवल नाम से नहीं बल्कि उसके लक्ष्य से सीखने पर आप उसका स्पेक्ट्रम व उसके लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण एक प्रतिरोध-मार्ग की भविष्यवाणी कर सकते हैं।

⚠️ 30S बनाम 50S
केवल दो प्रोटीन-संश्लेषण वर्ग 30S उपइकाई से बँधते हैं — aminoglycoside व tetracycline; उस समूह का शेष सब (macrolide, chloramphenicol, clindamycin, linezolid, streptogramin) 50S से बँधता है। किसी macrolide को 30S बता देना classic भूल है। यहाँ चयनात्मक विषाक्तता इस पर टिकी है कि जीवाणुई 70S राइबोसोम (30S + 50S) परपोषी के 80S से भिन्न है।

3. आणविक क्रियाविधियाँ

कोशिका-भित्ति संदमक peptidoglycan पर प्रहार करते हैं, जो केवल जीवाणुओं में है। β-lactam पेप्टाइड पार्श्व-शृंखला के D-Ala–D-Ala सिरे के संरचनात्मक सदृश हैं; वे transpeptidase (penicillin-बंधक प्रोटीन) के सक्रिय-स्थल serine को acylate करते हैं, अतः तिर्यक-सेतु कभी नहीं बनते और बढ़ती भित्ति स्फीति-दाब में फट जाती है — इसीलिए वे केवल विभाजित होती कोशिकाओं को मारते हैं। Vancomycin इसके बजाय D-Ala–D-Ala क्रियाधार से ही बँधकर उसे एंज़ाइम से छिपा देता है। चूँकि मनुष्यों में peptidoglycan नहीं, इन कारकों की सुरक्षा-सीमा सबसे चौड़ी है।

प्रोटीन-संश्लेषण संदमक 70S राइबोसोम का उपयोग करते हैं। Aminoglycoside 30S से बँधकर mRNA का त्रुटिपूर्ण पठन व दोषपूर्ण प्रोटीन कराते हैं; tetracycline aminoacyl-tRNA को A स्थल में घुसने से रोकते हैं; chloramphenicol 50S peptidyl-transferase रोकता है; macrolide निकास-सुरंग व स्थानांतरण रोकते हैं; linezolid आरंभन-संकुल के संयोजन को रोकता है। न्यूक्लिक-अम्ल संदमक polymerase से विभाजित होते हैं: fluoroquinolone DNA gyrase/topoisomerase IV को फँसाकर गुणसूत्र तोड़ते हैं, जबकि rifampicin जीवाणुई RNA polymerase की β उपइकाई से बँधकर अनुलेखन रोकता है। प्रतिउपापचयज (antimetabolite) folate रोकते हैं: sulfonamide PABA-सदृश हैं जो dihydropteroate synthase का प्रतिस्पर्धी संदमन करते हैं, और trimethoprim एक चरण आगे dihydrofolate reductase रोकता है; साथ देने पर वे दो क्रमिक चरण रोकते हैं व समन्वयी (synergistic) रूप से क्रिया करते हैं (co-trimoxazole)। झिल्ली-सक्रिय औषधियाँ (polymyxin, daptomycin) झिल्ली अव्यवस्थित करती हैं व नाशी हैं पर कम चयनात्मक।

4. प्रतिरोध की क्रियाविधियाँ व उसका प्रसार

प्रतिरोध अंतर्जात (intrinsic) हो सकता है (कोई जाति स्वाभाविक रूप से लक्ष्य न रखे या अपारगम्य हो — mycoplasma में भित्ति नहीं, अतः β-lactam निष्प्रभावी) या उत्परिवर्तन अथवा जीन-स्थानांतरण से अर्जित। चार जैवरासायनिक रणनीतियाँ हैं।

  • एंज़ाइमी निष्क्रियण: β-lactamase β-lactam वलय का जल-अपघटन करते हैं (penicillinase, विस्तृत-स्पेक्ट्रम β-lactamase, carbapenemase); aminoglycoside-रूपांतरक एंज़ाइम व chloramphenicol acetyltransferase ऐसे समूह जोड़ते हैं जो बंधन समाप्त कर देते हैं।
  • लक्ष्य-परिवर्तन: methicillin-प्रतिरोधी Staphylococcus aureus में mecA होता है जो PBP2a कूटबद्ध करता है, जिससे β-lactam मुश्किल से बँधते हैं; राइबोसोमी मेथिलीकरण (erm) macrolide का प्रतिरोध करता है; gyrase या RNA polymerase में बिंदु-उत्परिवर्तन quinolone व rifampicin का प्रतिरोध करते हैं; D-Ala–D-Ala को D-Ala–D-Lac से बदलना vancomycin प्रतिरोध देता है (vanA)।
  • घटा अंतर्ग्रहण व बहिःक्षेपण: बाह्य-झिल्ली porin की हानि ग्राम-ऋणात्मक औषधियों को बाहर रखती है, और सक्रिय बहिःक्षेपण पंप tetracycline, macrolide व fluoroquinolone को क्रिया से पहले बाहर निकाल देते हैं।
  • लक्ष्य-उपमार्ग या अतिउत्पादन: अतिरिक्त लक्ष्य-एंज़ाइम या वैकल्पिक मार्ग बनाना, जैसे जब जीवाणु folate संदमकों से पार पाने को PABA या dihydrofolate reductase का अतिउत्पादन करते हैं।

एक ही जीव प्रायः कई क्रियाविधियाँ एक साथ वहन करता है, इसीलिए एकल निक्षेप अनेक असंबद्ध औषधियों के प्रति प्रतिरोधी हो सकता है (बहुऔषधि प्रतिरोध)। एक integron किसी β-lactamase, एक aminoglycoside-रूपांतरक एंज़ाइम व एक sulfonamide-प्रतिरोधी लक्ष्य के कैसेट एक ही गतिशील तत्त्व पर पंक्तिबद्ध कर सकता है, जिससे किसी एक औषधि का वरण शेष का भी सह-वरण कर देता है। यही कारण है कि किसी हानिरहित पर्यावरणीय जीवाणु में पहली बार दिखा प्रतिरोध-जीन समय के साथ किसी नैदानिक रोगाणु में प्रकट हो सकता है।

🎯 प्रतिरोध इतनी तेज़ी से क्यों फैलता है
प्रतिजैविक प्रतिरोधी उत्परिवर्ती नहीं बनाते; वे संवेदी बहुमत को मारकर पहले से मौजूद उत्परिवर्तियों का वरण (select) करते हैं। फिर प्रतिरोध-जीन क्षैतिज जीन-स्थानांतरण से जीवाणुओं के बीच चलते हैं — संयुग्मन से R-plasmid, जीन-कैसेट फेरबदल करने वाले transposon व integron, phage से transduction, व transformation — अतः एक प्रतिरोध-निर्धारक आँत-समुदाय में जातियों के पार जा सकता है। इसीलिए अधूरे कोर्स व कृषि में अतिप्रयोग प्रतिरोध को तेज़ करते हैं, और संयोजन व विवेकपूर्ण उपयोग (stewardship) उसे धीमा करते हैं।

5. कवकरोधी औषधियाँ

कवक सुकेंद्रकी हैं, अतः चयनात्मक विषाक्तता जीवाणुओं की अपेक्षा कठिन है: उपयोगी लक्ष्य वे हैं जो मानव कोशिकाओं से भिन्न हों — झिल्ली-स्टेरॉल ergosterol (मनुष्य cholesterol उपयोग करते हैं) व β-1,3-glucan तथा chitin की कवकीय कोशिका-भित्ति, जो मनुष्यों में पूर्णतः अनुपस्थित है।

कवकरोधी वर्ग व उनके लक्ष्य
वर्ग (उदाहरण)लक्ष्य / क्रिया
polyene वर्ग: amphotericin B, nystatinergosterol से बँधकर झिल्ली-छिद्र बनाते, आयन रिसाते हैं; कवकनाशी पर वृक्क-विषैले
azole वर्ग: fluconazole, itraconazole, voriconazolelanosterol 14-α-demethylase (CYP51) रोकते, ergosterol संश्लेषण अवरुद्ध करते हैं
echinocandin वर्ग: caspofunginβ-1,3-glucan synthase रोकते, अतः कोशिका-भित्ति विफल होती है
allylamine वर्ग: terbinafineergosterol संश्लेषण में आरंभिक squalene epoxidase रोकते हैं
flucytosine (5-FC)कवक के भीतर 5-fluorouracil में बदलता है, जो न्यूक्लिक-अम्ल संश्लेषण रोकता है
griseofulvinसूत्री तर्कु (सूक्ष्मनलिकाएँ) भंग करता है; dermatophyte त्वचा-संक्रमणों में प्रयुक्त

6. विषाणुरोधी औषधियाँ

विषाणु परपोषी कोशिकाओं के भीतर परपोषी-तंत्र से गुणन करते हैं, अतः केवल-विषाणु लक्ष्य कम हैं; सर्वोत्तम औषधियाँ विषाणु-कूटबद्ध एंज़ाइमों या परपोषी में अनुपस्थित चरणों पर प्रहार करती हैं। अनेक न्यूक्लियोसाइड-सदृश हैं जिन्हें सक्रियण चाहिए और फिर वे विषाणुई polymerase रोकती या बढ़ती न्यूक्लिक-अम्ल शृंखला समाप्त करती हैं।

  • Acyclovir (herpesvirus) विषाणुई thymidine kinase से सक्रिय होता है, अतः संक्रमित कोशिकाओं में संकेंद्रित होकर विषाणुई DNA polymerase रोकता व शृंखला समाप्त करता है — चयनात्मक विषाणुरोधी क्रिया का एक आदर्श।
  • HIV के लिए रिवर्स-ट्रांसक्रिप्टेज़ संदमक: zidovudine (AZT) व tenofovir जैसे न्यूक्लियोसाइड-सदृश, और nevirapine जैसे गैर-न्यूक्लियोसाइड संदमक।
  • प्रोटिएज़ संदमक (ritonavir) उस HIV protease को रोकते हैं जो विषाणुई polyprotein काटती है; इंटीग्रेज़ संदमक (raltegravir) proviral एकीकरण रोकते हैं।
  • न्यूरामिनिडेज़ संदमक (oseltamivir) कोशिकाओं से influenza विषाणु का निर्मोचन रोकते हैं; M2 आयन-चैनल अवरोधक amantadine influenza A का अनावरण (uncoating) रोकता है।
  • प्रवेश/संलयन संदमक (enfuvirtide; CCR5 अवरोधक maraviroc) HIV को कोशिकाओं में घुसने से रोकते हैं; interferon परपोषी-जनित विस्तृत विषाणुरोधी हैं।
ℹ️ संयोजन चिकित्सा व प्रतिरोध
चूँकि विषाणुई polymerase त्रुटि-प्रवण हैं, एकल विषाणुरोधी प्रतिरोधी उत्परिवर्तियों का शीघ्र वरण करते हैं; अतः HIV का उपचार संयोजन प्रतिविषाणु चिकित्सा से होता है (कई औषधियाँ एक साथ भिन्न चरणों पर प्रहार), जिससे सभी के प्रति एक साथ प्रतिरोध अत्यंत असंभव हो जाता है — वही तर्क जो बहुऔषधि TB चिकित्सा का है।

मुख्य बिंदु

  • चयनात्मक विषाक्तता केंद्रीय विचार है: ऐसे लक्ष्य पर प्रहार जो परपोषी में न हो (peptidoglycan, 70S राइबोसोम, gyrase, folate संश्लेषण)। औषधियाँ जीवाणुनाशी या जीवाणुस्तंभक, संकीर्ण- या विस्तृत-स्पेक्ट्रम होती हैं।
  • MIC वह न्यूनतम सांद्रता है जो दृश्य वृद्धि रोके (दो-गुनी तनुता श्रेणी से पढ़ी); MBC ≥99.9% मारती है; Kirby–Bauer क्षेत्र-व्यास को breakpoint से मिलाकर पढ़ता है।
  • चिकित्सीय सूचकांक = TD₅₀/ED₅₀; बड़ा मान अधिक सुरक्षित। प्रथम-कोटि बलगतिकी में प्लाज़्मा-स्तर हर अर्ध-आयु में आधा होता है, जो खुराक-अंतराल तय करता है।
  • प्रतिजैविक लक्ष्य से समूहित होते हैं: कोशिका-भित्ति (β-lactam, vancomycin), 30S (aminoglycoside, tetracycline), 50S (macrolide, chloramphenicol, linezolid), न्यूक्लिक अम्ल (quinolone, rifampicin), folate (sulfonamide, trimethoprim), झिल्ली (polymyxin)।
  • प्रतिरोध एंज़ाइमी निष्क्रियण (β-lactamase), लक्ष्य-परिवर्तन (PBP2a/mecA, vanA, erm), घटे अंतर्ग्रहण/बहिःक्षेपण, या लक्ष्य-उपमार्ग से चलता है, और plasmid, transposon व integron पर क्षैतिज जीन-स्थानांतरण से फैलता है।
  • कवकरोधी ergosterol (polyene, azole, allylamine) या glucan-भित्ति (echinocandin) को लक्षित करते हैं; विषाणुरोधी विषाणु-विशिष्ट एंज़ाइमों (acyclovir, रिवर्स-ट्रांसक्रिप्टेज़/प्रोटिएज़/इंटीग्रेज़/न्यूरामिनिडेज़ संदमक) को लक्षित करते हैं व प्रतिरोध रोकने को संयोजित किए जाते हैं।

अभ्यास प्रश्न (16)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. वह सिद्धांत कि रोगाणुरोधी औषधि उन मात्राओं पर रोगाणु को क्षति पहुँचाए जिन्हें परपोषी सह सके, कहलाता है:

    1. प्रतिस्पर्धी संदमन
    2. समन्वयन (synergism)
    3. जैव-उपलब्धता
    4. चयनात्मक विषाक्तता
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — चयनात्मक विषाक्तता

    चयनात्मक विषाक्तता कीमोथेरेपी का पूरा आधार है: औषधि रोगाणु व परपोषी के बीच किसी अंतर का उपयोग करती है, जैसे जीवाणुई 70S राइबोसोम या peptidoglycan। प्रतिस्पर्धी संदमन एक आणविक क्रियाविधि है, व्यापक सिद्धांत नहीं; synergism दो औषधियों का सहयोग है; जैव-उपलब्धता यह है कि कितनी औषधि परिसंचरण तक पहुँचती है।
  2. penicillin जैसे β-lactam प्रतिजैविक जीवाणुओं को मारते हैं क्योंकि वे:

    1. 30S राइबोसोमी उपइकाई से बँधकर कोशिका से उसकी अपनी संदेशवाहक RNA का त्रुटिपूर्ण पठन कराते हैं, जिससे दोषपूर्ण, अक्रियाशील प्रोटीन बनते हैं
    2. dihydrofolate reductase एंज़ाइम रोककर कोशिका को folate से वंचित करते हैं
    3. peptidoglycan को तिर्यक-बंधित करने वाले transpeptidase रोकते हैं, अतः विभाजित कोशिकाओं में भित्ति फटती है
    4. झिल्ली में ergosterol से बँधकर छिद्र खोलते हैं जिनसे आयन रिसते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — peptidoglycan को तिर्यक-बंधित करने वाले transpeptidase रोकते हैं, अतः विभाजित कोशिकाओं में भित्ति फटती है

    β-lactam penicillin-बंधक प्रोटीनों (transpeptidase) को acylate करते हैं, अतः peptidoglycan तिर्यक-सेतु कभी नहीं बनते और बढ़ती भित्ति स्फीति-दाब में फट जाती है; इसलिए वे केवल विभाजित कोशिकाओं पर क्रिया करते हैं। 30S वाला विकल्प aminoglycoside का वर्णन है, dihydrofolate reductase trimethoprim का लक्ष्य है, और ergosterol-छिद्र कवकरोधी polyene का।
  3. कौन-सा प्रतिजैविक वर्ग 30S राइबोसोमी उपइकाई से बँधता है?

    1. Tetracycline, जो aminoacyl-tRNA को A स्थल में घुसने से रोकते हैं
    2. Macrolide, जो 50S उपइकाई से बँधकर संदेशवाहक RNA पर राइबोसोमी स्थानांतरण रोकते हैं
    3. Fluoroquinolone, जो प्रतिकृति के दौरान DNA gyrase फँसाते हैं
    4. Rifamycin, जो जीवाणुई RNA polymerase रोकते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — Tetracycline, जो aminoacyl-tRNA को A स्थल में घुसने से रोकते हैं

    प्रोटीन-संश्लेषण संदमकों में केवल aminoglycoside व tetracycline 30S उपइकाई पर क्रिया करते हैं; tetracycline A स्थल रोकते हैं। Macrolide 50S पर क्रिया करते हैं, जबकि fluoroquinolone व rifamycin न्यूक्लिक-अम्ल संदमक हैं, राइबोसोमी औषधियाँ हैं ही नहीं — जाल हर अनुवाद व अनुलेखन संदमक को एक साथ समूहित कर देना है।
  4. Staphylococcus aureus का एक प्रभेद methicillin व लगभग सभी β-lactam के प्रति प्रतिरोधी है, फिर भी कोई β-lactamase नहीं बनाता। सर्वाधिक संभावित क्रियाविधि है:

    1. एक स्रावित β-lactamase एंज़ाइम जो औषधि के लक्ष्य तक पहुँचने से पहले β-lactam वलय को जल-अपघटित कर देता है
    2. एक परिवर्तित penicillin-बंधक प्रोटीन (PBP2a, mecA द्वारा कूटबद्ध) जिससे β-lactam दुर्बलता से बँधते हैं
    3. एक बहिःक्षेपण पंप जो औषधि को कोशिकाद्रव्य से बाहर निकालता है
    4. उन बाह्य-झिल्ली porin की हानि जिनसे औषधि प्रवेश करती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — एक परिवर्तित penicillin-बंधक प्रोटीन (PBP2a, mecA द्वारा कूटबद्ध) जिससे β-lactam दुर्बलता से बँधते हैं

    S. aureus में methicillin-प्रतिरोध classic रूप से लक्ष्य-परिवर्तन है: mecA PBP2a कूटबद्ध करता है, एक transpeptidase जिससे β-lactam बहुत कम आसक्ति से बँधते हैं, अतः भित्ति-संश्लेषण चलता रहता है। β-lactamase भ्रामक उत्तर है क्योंकि एंज़ाइमी विनाश penicillin-प्रतिरोध का सर्वाधिक सामान्य मार्ग है, पर स्टेम उसे बाहर कर देता है; और porin-हानि यहाँ अप्रासंगिक है क्योंकि S. aureus ग्राम-धनात्मक है व उसमें बाह्य झिल्ली नहीं।
  5. fluconazole जैसे azole कवकरोधी किस प्रकार क्रिया करते हैं:

    1. बने-बनाए ergosterol से बँधकर कवकीय झिल्ली में छिद्र करके
    2. lanosterol 14-α-demethylase रोककर ergosterol संश्लेषण अवरुद्ध करके
    3. β-1,3-glucan synthase रोककर कोशिका-भित्ति दुर्बल करके
    4. सूत्री तर्कु भंग करके ताकि कवक विभाजित न हो सके
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — lanosterol 14-α-demethylase रोककर ergosterol संश्लेषण अवरुद्ध करके

    Azole साइटोक्रोम-P450 एंज़ाइम lanosterol 14-α-demethylase (CYP51) रोकते हैं, ergosterol संश्लेषण रोककर झिल्ली को दोषपूर्ण बनाते हैं। बने-बनाए ergosterol से बँधकर छिद्र बनाना amphotericin B जैसे polyene की क्रियाविधि है; glucan-synthase संदमन echinocandin का है; तर्कु-भंग griseofulvin का।
  6. Acyclovir herpesvirus के विरुद्ध अत्यधिक चयनात्मक है, मुख्यतः इसलिए कि:

    1. इसका पहला फॉस्फोरिलीकरण विषाणुई thymidine kinase करता है, अतः यह मुख्यतः संक्रमित कोशिकाओं के भीतर सक्रिय होता है
    2. यह उस परपोषी RNA polymerase को रोकता है जिसे विषाणु अपनी संदेशवाहक RNA बनाने को उधार लेता है
    3. यह सतही एंज़ाइम neuraminidase रोककर नवनिर्मित विषाणु के कोशिका से निर्मोचन को रोकता है
    4. यह विषाणुई कैप्सिड से बँधकर प्रवेश के बाद जीनोम के अनावरण को रोकता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — इसका पहला फॉस्फोरिलीकरण विषाणुई thymidine kinase करता है, अतः यह मुख्यतः संक्रमित कोशिकाओं के भीतर सक्रिय होता है

    Acyclovir एक prodrug है: पहला फॉस्फेट केवल विषाणुई thymidine kinase ही कुशलता से बनाता है, अतः सक्रिय ट्राइफॉस्फेट संक्रमित कोशिकाओं में संचित होकर विषाणुई DNA polymerase रोकता व शृंखला समाप्त करता है। Neuraminidase संदमन influenza के विरुद्ध oseltamivir का वर्णन है, व अनावरण-अवरोध amantadine का; acyclovir परपोषी RNA polymerase को लक्षित नहीं करता।
  7. ऐसी औषधि जो कोशिकाओं को मारे बिना जीवाणु-वृद्धि रोके और संक्रमण साफ़ करने को परपोषी-रक्षा पर निर्भर रहे, सर्वोत्तम रूप से कहलाती है:

    1. जीवाणुनाशी (bactericidal)
    2. विस्तृत-स्पेक्ट्रम
    3. जीवाणुस्तंभक (bacteriostatic)
    4. निरोधात्मक (prophylactic)
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — जीवाणुस्तंभक (bacteriostatic)

    जीवाणुस्तंभक औषधि (tetracycline, sulfonamide, chloramphenicol) केवल गुणन रोकती है; फिर सफ़ाई परपोषी के प्रतिरक्षा तंत्र पर निर्भर है, इसीलिए ऐसी औषधियाँ गंभीर प्रतिरक्षा-न्यून रोगियों में विफल हो सकती हैं। जीवाणुनाशी का अर्थ वास्तव में मारना; विस्तृत-स्पेक्ट्रम जीवों के परास को कहता है, नाशी/स्तंभक भेद को नहीं; निरोधात्मक निवारक उपयोग को।
  8. Co-trimoxazole, sulfamethoxazole को trimethoprim के साथ मिलाता है। दोनों साथ क्यों दिए जाते हैं?

    1. वे एक ही एंज़ाइम को एक ही स्थल पर बाँधकर उसका संदमन दुगुना करते हैं
    2. एक दूसरे को जीवाणुई β-lactamase द्वारा नष्ट होने से बचाता है
    3. साथ मिलकर वे 30S व 50S दोनों राइबोसोमी उपइकाइयाँ रोकते हैं
    4. वे folate संश्लेषण के दो क्रमिक चरण रोकते हैं, समन्वयी रूप से क्रिया करते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — वे folate संश्लेषण के दो क्रमिक चरण रोकते हैं, समन्वयी रूप से क्रिया करते हैं

    Sulfonamide dihydropteroate synthase रोकते हैं व trimethoprim dihydrofolate reductase, एक ही folate मार्ग के दो क्रमागत चरण, अतः दोनों को रोकना समन्वयी है व अकेले किसी से अधिक जीवाणुनाशी। वे भिन्न एंज़ाइमों पर क्रिया करते हैं, एक ही स्थल पर नहीं; कोई β-lactam नहीं, अतः β-lactamase-रक्षा अप्रासंगिक; और कोई राइबोसोमी औषधि नहीं।
  9. कवकरोधी औषधियों को जीवाणुरोधी औषधियों की अपेक्षा चयनात्मक रूप से बनाना कठिन है, मुख्यतः इसलिए कि:

    1. कवक जीवाणुओं से कहीं तेज़ बढ़ते हैं व औषधि से आगे निकल जाते हैं
    2. कवक सुकेंद्रकी हैं व अपनी कोशिका-जीवविज्ञान का बहुत कुछ मानव कोशिकाओं से साझा करते हैं
    3. कवकों में मानव ऊतक जैसी ही peptidoglycan भित्ति होती है
    4. कवकों में कोई झिल्ली-स्टेरॉल नहीं होता जिसे औषधि लक्षित कर सके
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — कवक सुकेंद्रकी हैं व अपनी कोशिका-जीवविज्ञान का बहुत कुछ मानव कोशिकाओं से साझा करते हैं

    कवक सुकेंद्रकी हैं, अतः राइबोसोम, झिल्लियाँ व अनेक एंज़ाइम मानव कोशिकाओं से साझा करते हैं, जिससे अद्वितीय लक्ष्य कम बचते हैं; उपयोगी लक्ष्य ergosterol व glucan/chitin भित्ति हैं। कवक जीवाणुओं से तेज़ नहीं बढ़ते, उनमें peptidoglycan नहीं (वह जीवाणुई है), और उनमें स्टेरॉल — ergosterol — होता है, जो वस्तुतः एक प्रमुख औषधि-लक्ष्य है।
  10. निम्न में से कौन-सी प्रतिजैविक-प्रतिरोध की वास्तविक जैवरासायनिक क्रियाविधियाँ हैं?

    1. औषधि का एंज़ाइमी निष्क्रियण, जैसे β-lactamase द्वारा
    2. कोशिका से बाहर औषधि का सक्रिय बहिःक्षेपण
    3. औषधि-लक्ष्य का रूपांतरण ताकि औषधि दुर्बलता से बँधे
    4. परपोषी द्वारा प्रतिजैविक के विरुद्ध उदासीनकारी प्रतिरक्षी बनाना
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — औषधि का एंज़ाइमी निष्क्रियण, जैसे β-lactamase द्वारा; B — कोशिका से बाहर औषधि का सक्रिय बहिःक्षेपण; C — औषधि-लक्ष्य का रूपांतरण ताकि औषधि दुर्बलता से बँधे

    एंज़ाइमी निष्क्रियण, बहिःक्षेपण व लक्ष्य-रूपांतरण चार classic प्रतिरोध-रणनीतियों में से तीन हैं (चौथी घटा अंतर्ग्रहण या लक्ष्य-उपमार्ग है)। प्रतिजैविक के विरुद्ध परपोषी-प्रतिरक्षी कोई प्रतिरोध-क्रियाविधि नहीं; प्रतिरोध जीवाणु का गुण है, और छोटे औषधि-अणु ऐसी रक्षात्मक प्रतिरक्षी-प्रतिक्रिया नहीं उकसाते जो औषधि को साफ़ कर दे।
  11. निम्न में से कौन-से प्रतिजैविक जीवाणुई न्यूक्लिक-अम्ल संश्लेषण रोककर क्रिया करते हैं?

    1. Ciprofloxacin, DNA gyrase के संदमन द्वारा
    2. Rifampicin, RNA polymerase के संदमन द्वारा
    3. Erythromycin, 50S राइबोसोमी उपइकाई से बँधकर
    4. Gentamicin, 30S राइबोसोमी उपइकाई से बँधकर
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — Ciprofloxacin, DNA gyrase के संदमन द्वारा; B — Rifampicin, RNA polymerase के संदमन द्वारा

    Ciprofloxacin जैसे fluoroquinolone DNA gyrase/topoisomerase रोकते हैं (DNA संश्लेषण) व rifampicin RNA polymerase रोकता है (अनुलेखन); दोनों न्यूक्लिक-अम्ल उपापचय पर क्रिया करते हैं। Erythromycin व gentamicin प्रोटीन-संश्लेषण संदमक हैं जो क्रमशः 50S व 30S राइबोसोमी उपइकाइयों से बँधते हैं, न्यूक्लिक-अम्ल संश्लेषण पर नहीं।
  12. प्रतिविषाणु कीमोथेरेपी के बारे में कौन-से कथन सही हैं?

    1. चयनात्मक विषाणुरोधी प्रायः परपोषी नहीं बल्कि विषाणु-कूटबद्ध एंज़ाइमों को लक्षित करते हैं
    2. Oseltamivir influenza neuraminidase रोकता है व विषाणु-निर्मोचन अवरुद्ध करता है
    3. HIV का उपचार प्रतिरोध की संभावना घटाने को एकल औषधि से किया जाता है
    4. Zidovudine एक रिवर्स-ट्रांसक्रिप्टेज़ संदमक है जो HIV के विरुद्ध प्रयुक्त होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — चयनात्मक विषाणुरोधी प्रायः परपोषी नहीं बल्कि विषाणु-कूटबद्ध एंज़ाइमों को लक्षित करते हैं; B — Oseltamivir influenza neuraminidase रोकता है व विषाणु-निर्मोचन अवरुद्ध करता है; D — Zidovudine एक रिवर्स-ट्रांसक्रिप्टेज़ संदमक है जो HIV के विरुद्ध प्रयुक्त होता है

    अच्छे विषाणुरोधी विषाणु-विशिष्ट एंज़ाइमों (रिवर्स-ट्रांसक्रिप्टेज़, protease, neuraminidase) को लक्षित करते हैं, oseltamivir influenza neuraminidase रोकता है, व zidovudine एक न्यूक्लियोसाइड रिवर्स-ट्रांसक्रिप्टेज़ संदमक है। HIV का उपचार संयोजन चिकित्सा से होता है, एकल औषधि से नहीं; एकल-औषधि चिकित्सा प्रतिरोधी उत्परिवर्तियों का शीघ्र वरण करती है क्योंकि विषाणुई polymerase त्रुटि-प्रवण है।
  13. एक broth-dilution MIC परीक्षण में दो-गुनी तनुता से 128, 64, 32, 16, 8, 4, 2 व 1 µg/mL की नलियाँ बनती हैं। दृश्य वृद्धि 8, 4, 2 व 1 µg/mL की नलियों में दिखती है; 16 µg/mL व उससे ऊपर की नलियाँ स्वच्छ हैं। MIC ____ µg/mL है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 16

    MIC वह न्यूनतम सांद्रता है जो दृश्य वृद्धि रोके। वृद्धि 8 µg/mL तक दिखती है, और सबसे कम स्वच्छ नली 16 µg/mL है, अतः MIC = 16 µg/mL। वृद्धि दिखाने वाली सर्वोच्च नली (8 µg/mL) प्रचलित गलत चयन है।
  14. एक नए रोगाणुरोधी के लिए 50% पशुओं को विषैली मात्रा TD₅₀ = 400 mg/kg है व 50% में प्रभावी मात्रा ED₅₀ = 20 mg/kg। चिकित्सीय सूचकांक = TD₅₀ / ED₅₀ का उपयोग करते हुए, चिकित्सीय सूचकांक ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 20

    चिकित्सीय सूचकांक = TD₅₀ / ED₅₀ = 400 / 20 = 20। बड़ा सूचकांक दर्शाता है कि विषैली मात्रा प्रभावी मात्रा से कहीं ऊपर है, अतः औषधि अधिक सुरक्षित है।
  15. एक औषधि प्रथम-कोटि बलगतिकी से 3 घंटे की अर्ध-आयु के साथ निष्कासित होती है। खुराक के तुरंत बाद उसकी प्लाज़्मा-सांद्रता 64 mg/L है। कोई अगली खुराक न मानते हुए, सांद्रता के 2 mg/L तक गिरने का समय ____ घंटे है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 15

    प्रत्येक अर्ध-आयु सांद्रता आधी करती है: 64 → 32 → 16 → 8 → 4 → 2 mg/L यानी 5 बार आधा होना, अर्थात 32-गुना (2⁵) गिरावट। पाँच अर्ध-आयु × 3 h = 15 h। समतुल्य रूप से, 64/2 = 32 = 2⁵, अतः n = 5 व t = 5 × 3 = 15 h।
  16. प्रथम-कोटि निष्कासन की ठीक 4 अर्ध-आयु के बाद, शरीर में अब भी शेष मूल औषधि-मात्रा का प्रतिशत ____ % है (दो दशमलव तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 6.25

    n अर्ध-आयु के बाद शेष अंश (1/2)ⁿ होता है। n = 4 के लिए (1/2)⁴ = 1/16 = 0.0625 = 6.25%। इसीलिए किसी औषधि के लगभग पूर्णतः साफ़ होने का समय मोटे तौर पर 4–5 अर्ध-आयु माना जाता है।