पादप प्रजनन, आनुवंशिक रूपांतरण व जीनोम संपादन: चयन, संकर ओज, चिह्नक, ऊतक संवर्धन, पारजीनी पौधे व CRISPR
2. संकरण, संकर ओज व नर बंध्यता
संकर ओज किसी F1 की अपने जनकों पर श्रेष्ठता है, जिसे तीन प्रकार से मापा जाता है: मध्य-जनक संकर ओज = (F1 − MP)/MP × 100, जहाँ MP जनकों का माध्य है; श्रेष्ठ-जनक संकर ओज (हेटेरोबेल्टिओसिस) = (F1 − BP)/BP × 100; तथा सर्वोत्तम व्यावसायिक जाँच-किस्म के सापेक्ष मानक संकर ओज, जो तय करता है कि संकर विमोचन योग्य है या नहीं। हल किया उदाहरण: जनकों की उपज 40 व 50 q/ha और F1 की 63 q/ha है। MP = 45, अतः मध्य-जनक संकर ओज = 18/45 × 100 = 40%, जबकि श्रेष्ठ-जनक संकर ओज = 13/50 × 100 = 26%। प्रभाविता परिकल्पना के अनुसार प्रत्येक जनक के अनुकूल प्रभावी एलील दूसरे जनक के हानिकारक अप्रभावी एलीलों को ढक लेते हैं; अतिप्रभाविता परिकल्पना इसका श्रेय स्वयं विषमयुग्मज को देती है (Aa, AA से श्रेष्ठ); प्रबलता (epistasis) दोनों में योगदान करती है। F2 में जीनोटाइपों के पृथक्करण से ओज घटता है, इसलिए संकर बीज हर मौसम नए सिरे से बनाना पड़ता है।
| प्रकार | आधार | उपयोग कैसे होता है |
|---|---|---|
| आनुवंशिक (GMS) | अप्रभावी केंद्रकीय ms एलील | msms × Msms से 1 बंध्य : 1 जनन-क्षम मिलते हैं, अतः मादा पंक्तियों से जनन-क्षम पौधे उखाड़ने पड़ते हैं |
| कोशिकाद्रव्यी (CMS) | माइटोकॉन्ड्रियाई जीनोम के काइमेरी खुले पठन-ढाँचे, जो अंड-कोशिका से वंशागत होते हैं | अकेले केवल वहीं उपयोगी जहाँ काटी जाने वाली उपज बीज न हो |
| कोशिकाद्रव्यी-आनुवंशिक (CGMS) | बंध्य कोशिकाद्रव्य (S) तथा केंद्रकीय उर्वरता-पुनःस्थापक (Rf) | तीन वंशक्रम: A (S, rf rf) बंध्य; B (N, rf rf) अनुरक्षक; R (Rf Rf) पुनःस्थापक |
| पर्यावरण-संवेदी GMS | ऐसे केंद्रकीय जीन जिनका प्रभाव ताप (TGMS) या दिन की लंबाई (PGMS) पर निर्भर है | एक मौसम में बंध्य और दूसरे में स्व-उर्वर: द्वि-वंशक्रम संकर, जैसे धान में |
| पारजीनी | टेपीटम में व्यक्त बारनेज़ (एक राइबोन्यूक्लिएज़) पराग-विकास रोक देता है | बारस्टार वंशक्रम, जिसका प्रोटीन बारनेज़ को संदमित करता है, F1 में उर्वरता लौटाता है |
त्रि-वंशक्रम तंत्र में A × B से फिर A-वंशक्रम का बीज बनता है (माता से S कोशिकाद्रव्य, दोनों जनकों से rf rf केंद्रक), और A × R से जनन-क्षम व्यावसायिक संकर (S, Rf rf) बनता है, जो वहाँ आवश्यक है जहाँ उपज दाना ही है।
3. आनुवंशिक मानचित्र, आणविक चिह्नक व चिह्नक-सहायित चयन
सहलग्नता मानचित्र लोकसों को पुनर्योजन आवृत्ति के आधार पर क्रमबद्ध करता है: छोटे अंतरालों में 1% पुनर्योजन लगभग 1 सेंटीमॉर्गन (cM) है। लंबे अंतरालों में दोहरे विनिमय पुनर्योजकों को छिपा लेते हैं, अतः मानचित्रण फलन पुनर्योजन आवृत्ति को दूरी में बदलते हैं (हाल्डेन का फलन व्यतिकरण शून्य मानता है, कोसाम्बी का कुछ व्यतिकरण स्वीकारता है)। भौतिक मानचित्र क्षार-युग्म गिनता है, और प्रति मेगाबेस cM गुणसूत्र पर बदलता रहता है, गुणसूत्रबिंदु के पास कम होता है।
| चिह्नक | आधार | वंशागति | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| RFLP | प्रतिबंधन पाचन, सदर्न ब्लॉट व चिह्नित प्रोब | सहप्रभावी | विश्वसनीय पर धीमा; अधिक DNA चाहिए |
| RAPD | एकल छोटे यादृच्छिक प्राइमरों (प्रायः 10-मर) से PCR | प्रभावी | त्वरित, पुनरुत्पादनीयता कम |
| AFLP | प्रतिबंधन, एडैप्टर संयोजन व चयनात्मक PCR | अधिकतर प्रभावी | एक अभिक्रिया में अनेक लोकस |
| SSR (माइक्रोसैटेलाइट) | (CA)n जैसी अग्रानुक्रमी पुनरावृत्तियों के पार PCR, जिनकी लंबाई बदलती है | सहप्रभावी | बहु-एलीली व लोकस-विशिष्ट; चयन का मुख्य साधन |
| SNP | एकल-क्षार भिन्नताएँ, ऐरे या अनुक्रमण से पढ़ी जाती हैं | सहप्रभावी | सबसे प्रचुर; द्वि-एलीली; उच्च क्षमता |
प्रभावी चिह्नक केवल उपस्थिति या अनुपस्थिति दिखाता है, अतः F2 में 3:1 मिलता है और विषमयुग्मज, बैंड-धारी समयुग्मज जैसा दिखता है; सहप्रभावी चिह्नक दोनों एलील दिखाता है और 1:2:1 देता है। चिह्नक-सहायित चयन (MAS) जीनोटाइप का चयन करता है, अतः यह नवोद्भिदों पर, बेमौसम, अप्रभावी एलीलों पर तथा महँगी जाँच वाले लक्षणों पर काम करता है। प्रतीप संकरण कार्यक्रम में अग्रभूमि चयन लक्ष्य जीन का पता रखता है, पार्श्ववर्ती चिह्नकों से पुनर्योजक चयन उसके आसपास के दाता खंड को छाँटता है (सहलग्नता-भार), और पृष्ठभूमि चयन सर्वाधिक आवर्ती-जनक चिह्नकों वाले पौधे चुनता है, जिससे दो-तीन प्रतीप संकरणों में वह मिल जाता है जिसमें अन्यथा छह लगते। पिरामिडन जीनों को एक साथ जोड़ता है: इम्प्रूव्ड सांबा मसूरी धान में जीवाणु अंगमारी प्रतिरोधी जीन Xa21, xa13 व xa5 हैं, और स्वर्णा-Sub1 में जलमग्नता-सहिष्णुता हेतु SUB1A है।
चिह्नक का अंकगणित। यदि चिह्नक जीन से पुनर्योजन अंश r पर है, तो विषमयुग्मजी जनक से दाता चिह्नक-एलील पाने के आधार पर चुना गया पौधा r प्रायिकता से दाता जीन-एलील से वंचित होगा: 4 cM पर प्रत्येक 100 चयनित पौधों में 4 मिथ्या-धनात्मक हैं। दोनों ओर r₁ व r₂ पर चिह्नक हों तो केवल दोहरा विनिमय दोनों को जीन से अलग करता है, जो व्यतिकरण न होने पर लगभग r₁ × r₂ है: 0.04 × 0.05 = 0.002, अर्थात 1,000 में 2।
4. अगुणित, द्विगुणित अगुणित व भ्रूण बचाव
अगुणित बीजाणुद्भिद में युग्मकी गुणसूत्र संख्या होती है। इसके मार्ग: परागकोश या पृथक लघुबीजाणु संवर्धन द्वारा पुंजनन (परागकोशों से अगुणित भ्रूण पहली बार गुहा व माहेश्वरी ने 1964 में Datura innoxia में उगाए); अनिषेचित बीजांड या अंडाशय से स्त्रीजनन (प्याज, चुकंदर); दूरस्थ संकरणों के बाद गुणसूत्र विलोपन, जिसमें विजातीय गुणसूत्र आरंभिक भ्रूण से निकल जाते हैं (जौ × Hordeum bulbosum से अगुणित जौ, गेहूँ × मक्का से अगुणित गेहूँ); तथा इन विवो प्रेरक वंशक्रम, जैसे Stock 6 से निकले मक्का वंशक्रम या परिवर्तित गुणसूत्रबिंदु हिस्टोन CENH3 वाले Arabidopsis वंशक्रम। कॉल्चिसीन ट्यूबुलिन से बँधकर तर्कु बनने से रोकता है और गुणसूत्र संख्या दोगुनी कर देता है, जिससे जनन-क्षम द्विगुणित अगुणित (DH) मिलता है जो छह या अधिक पीढ़ियों के स्वनिषेचन के बजाय एक ही चरण में हर लोकस पर समयुग्मजी है।
DH का अंकगणित। n असहलग्न लोकसों पर विषमयुग्मजी F1 से 2ⁿ DH जीनोटाइप समान आवृत्ति में बनते हैं, अतः वांछित समयुग्मज (1/2)ⁿ पर मिलता है, जबकि F2 में (1/4)ⁿ पर। 4 लोकसों के लिए यह 1/16 बनाम 1/256 है, यानी सोलह गुना कम पौधे उगाने होंगे। पुनर्योजन अंश r वाले दो सहलग्न लोकसों में प्रत्येक पुनर्योजक DH वर्ग r/2 और प्रत्येक पैतृक वर्ग (1 − r)/2 होता है। हर वंशक्रम शुद्ध प्रजनन करता है और दोहराया जा सकता है, इसलिए DH समष्टियाँ मानचित्रण के लिए भी आदर्श हैं।
भ्रूण बचाव उन संकर भ्रूणों को बचाता है जो बनकर फिर नष्ट हो जाते हैं, प्रायः इसलिए कि दूरस्थ संकरण में भ्रूणपोष विफल होता है। अपरिपक्व भ्रूण निकालकर पोषक माध्यम पर उगाया जाता है, और कम आयु के भ्रूणों को अधिक सुक्रोज़ व उच्च परासरणी सांद्रता चाहिए। इससे अंतरजातीय संकर तथा जल्दी पकने वाले और बीजरहित (स्टेनोस्पर्मोकार्पी) अंगूर प्राप्त होते हैं, और बीज-प्रसुप्ति लाँघकर प्रजनन-चक्र छोटा होता है। परिपक्व भ्रूणों का संवर्धन इससे जुड़ी सरल तकनीक है।
5. पादप ऊतक संवर्धन
ऊतक संवर्धन पूर्णशक्तता पर टिका है, अर्थात जीवित पादप कोशिका की पूरा पौधा पुनर्जनित करने की क्षमता। मानक माध्यम मुराशिगे व स्कूग (MS, 1962) का है: खनिज लवण, विटामिन, कार्बन स्रोत के रूप में सुक्रोज़ और अगार। स्कूग व मिलर के तंबाकू मज्जा प्रयोगों (1957) ने पुनर्जनन का नियम तय किया: ऑक्सिन:साइटोकाइनिन का उच्च अनुपात जड़ें देता है, साइटोकाइनिन:ऑक्सिन का उच्च अनुपात प्ररोह देता है, और संतुलन अविभेदित कैलस देता है। पुनर्जनन अंगजनन (पहले प्ररोह, फिर जड़) या कायिक भ्रूणजनन से होता है, सीधे कर्तोतक से या अप्रत्यक्ष रूप से कैलस के माध्यम से।
| तकनीक | क्या किया जाता है | उपयोग या सिद्धांत |
|---|---|---|
| सूक्ष्मप्रवर्धन | स्टॉक-पादप तैयारी, स्थापना, गुणन, मूलन और अनुकूलन के चरणों से कक्षस्थ या अपस्थानिक प्ररोहों का गुणन | बड़ी संख्या में मूल-समान क्लोन (केला, गन्ना, ऑर्किड) |
| विभज्योतक संवर्धन | मिलीमीटर के कुछ दशांश आकार का शीर्षस्थ गुंबद, प्रायः ताप-उपचार के बाद, संवर्धित किया जाता है | विषाणु-मुक्त पौधे: गुंबद में विभेदित संवहन ऊतक नहीं होता और उसमें विषाणु बहुत कम या नहीं होता |
| कायिक भ्रूणजनन | कायिक कोशिकाओं से द्विध्रुवीय भ्रूण (प्ररोह व मूल ध्रुव), कर्तोतक से कोई संवहन संबंध नहीं; गाजर में 2,4-D इन्हें प्रेरित करता है और ऑक्सिन-रहित माध्यम में ये परिपक्व होते हैं | बड़े पैमाने पर क्लोनी प्रवर्धन; कृत्रिम बीज का स्रोत |
| कृत्रिम बीज | सोडियम एल्जिनेट में मिलाया कायिक भ्रूण या प्ररोह-कलिका कैल्सियम क्लोराइड में टपकाई जाती है, जिससे कैल्सियम एल्जिनेट मनका बनता है | बोने व भंडारण योग्य क्लोनी प्रवर्ध्य |
| निम्नताप परिरक्षण | निम्नताप-रक्षकों (DMSO, ग्लिसरॉल, सुक्रोज़), काचन या संपुटन-निर्जलीकरण के बाद द्रव नाइट्रोजन में −196 °C पर भंडारण | दीर्घकालिक जननद्रव्य भंडारण, दुराग्राही बीज वाली जातियों सहित; मुख्य शत्रु अंतःकोशिकी बर्फ़ है |
| सोमाक्लोनल विभिन्नता | पुनर्जनित पौधों में वंशागत विभिन्नता, जो गुणसूत्र परिवर्तनों, ट्रांसपोज़ॉन सक्रियण और परिवर्तित DNA मेथिलीकरण से आती है; कैलस में बिताए समय के साथ बढ़ती है | नए रूपों का स्रोत, और क्लोनी एकरूपता के लिए ख़तरा |
| कायिक संकरण | मैनिटॉल जैसे परासरक में सेलुलेज़ व पेक्टिनेज़ से जीवद्रव्यक मुक्त किए जाते हैं, PEG या विद्युत स्पंद से संलयित होते हैं, और पूरकता से संकर चुने जाते हैं | लैंगिक रूप से असंगत जातियों को जोड़ता है; साइब्रिड (एक जनक का केंद्रक, मिश्रित कोशिकाद्रव्य) CMS व हरितलवक लक्षण स्थानांतरित करते हैं |
6. जीन स्थानांतरण व पारजीनी पौधों का निर्माण
वाहक-माध्यमित स्थानांतरण Agrobacterium tumefaciens का उपयोग करता है, जो स्वाभाविक रूप से अपने Ti प्लाज़्मिड का T-DNA पादप केंद्रकीय DNA में डाल देता है। घायल कोशिकाओं से निकले फ़ीनॉलिक यौगिक, जैसे एसिटोसिरिंगोन, VirA द्वारा पहचाने जाते हैं, जो VirG को फ़ॉस्फ़ोरिलित करता है; VirG शेष vir जीनों का सक्रियक है। VirD1 व VirD2 25-bp सीमा-पुनरावृत्तियों पर कटाव (nick) बनाते हैं; VirD2 एकल-रज्जुकी T-रज्जुक के 5′ सिरे से सहसंयोजी रूप से जुड़ा रहता है, VirE2 उसे ढकता है, और प्रकार IV स्रावण तंत्र उसे पादप कोशिका में पहुँचाता है। केवल सीमाएँ cis में काम करती हैं, अतः द्विअंगी वाहक में अभीष्ट जीन व चयन-योग्य चिह्नक सीमाओं के बीच एक छोटे प्लाज़्मिड पर रहते हैं जो E. coli व Agrobacterium दोनों में प्रतिकृत होता है, जबकि अर्बुद-जीन हटाया गया निरस्त्र सहायक Ti प्लाज़्मिड vir प्रोटीन trans में देता है।
प्रत्यक्ष स्थानांतरण में जीवाणु नहीं चाहिए: कण-प्रक्षेपण (DNA-लेपित स्वर्ण या टंगस्टन कण, किसी भी ऊतक व लवकों पर उपयोगी), जीवद्रव्यकों में PEG-माध्यमित या विद्युत-छिद्रण द्वारा अंतर्ग्रहण, सूक्ष्म-अंतःक्षेपण और सिलिकॉन कार्बाइड तंतु। प्रत्यक्ष विधियाँ अधिकतर अनेक व पुनर्व्यवस्थित प्रतियाँ देती हैं।
पारजीनी पौधा बनाना: कर्तोतकों को Agrobacterium के साथ सह-संवर्धित करें (या उन पर कण-प्रक्षेपण करें); सेफ़ोटैक्सिम या कार्बेनिसिलिन से जीवाणु नष्ट करें; चिह्नक से रूपांतरित कोशिकाएँ चुनें (कैनामाइसिन हेतु nptII, हाइग्रोमाइसिन हेतु hpt, फ़ॉस्फ़िनोथ्रिसिन हेतु bar); T0 पौधे पुनर्जनित करें; PCR से, प्रति-संख्या हेतु सदर्न ब्लॉटिंग से और अभिव्यक्ति हेतु RT-qPCR या वेस्टर्न ब्लॉटिंग से पुष्टि करें, GUS या GFP सूचक के रूप में। T0 पौधा अर्धयुग्मजी होता है, अतः एक प्रविष्टि के स्वनिषेचन से T1 में 3 प्रतिरोधी : 1 संवेदी, और दो असहलग्न प्रविष्टियों से 15 : 1 मिलता है। समयुग्मजी वंशक्रम T2 में पहचाना जाता है, जिसकी संतति में पृथक्करण नहीं होता। सामान्य संरचनात्मक प्रमोटर द्विबीजपत्रियों में CaMV 35S और एकबीजपत्रियों में मक्का यूबिक्विटिन हैं।
7. जीनोम संपादन, Cre-lox काइमेरा, लवक रूपांतरण व रासायनिक उत्परिवर्तजनन
CRISPR/Cas9 में Streptococcus pyogenes का Cas9 न्यूक्लिएज़ एकल गाइड RNA से निर्देशित होता है, जिसका 20-न्यूक्लियोटाइड स्पेसर लक्ष्य DNA से युग्मित होता है। काटने के लिए PAM चाहिए, 5′-NGG-3′, जो अलक्ष्य रज्जुक पर प्रोटोस्पेसर के ठीक 3′ में हो; HNH डोमेन गाइड से युग्मित रज्जुक को और RuvC दूसरे रज्जुक को काटता है, जिससे PAM से 3 bp पहले कुंठित द्वि-रज्जुकी विच्छेद बनता है। त्रुटि-प्रवण असमजात सिरा संयोजन छोटे निवेशन या विलोपन छोड़ता है जो प्रायः पठन-ढाँचा खिसकाकर जीन निष्क्रिय कर देते हैं; दाता साँचे से समजातता-निर्देशित मरम्मत सटीक परिवर्तन करती है; क्षार संपादक (डीएमिनेज़ से जुड़ा Cas9 निकेज़, C•G से T•A या A•T से G•C हेतु) और प्राइम संपादक बिना द्वि-रज्जुकी विच्छेद के क्षार बदलते हैं। इसके बाद Cas9 पारजीन को पृथक्करण द्वारा हटाया जा सकता है, जिससे बिना विदेशी DNA का संपादित पौधा बचता है। संपादन SDN-1 (बिना साँचे), SDN-2 (छोटा साँचा) और SDN-3 (पूरा जीन प्रविष्ट) में बाँटे जाते हैं।
Cre-lox। जीवाणुभोजी P1 से प्राप्त Cre रिकॉम्बिनेज़ दो 34-bp loxP स्थलों का पुनर्योजन करता है (8-bp असममित स्पेसर के दोनों ओर दो 13-bp प्रतिलोम पुनरावृत्तियाँ; स्पेसर स्थल को दिशा देता है)। एक ही अणु पर समान दिशा वाले स्थल बीच के DNA का उच्छेदन करते हैं; विपरीत दिशा वाले उसे प्रतिलोमित करते हैं; दो अणुओं पर स्थित स्थल समाकलन या विनिमय कराते हैं। काइमेरा बनाने के लिए Cre को ताप-आघात या ऊतक-विशिष्ट प्रमोटर से केवल कुछ कोशिकाओं में व्यक्त किया जाता है, और प्रमोटर–loxP–stop–loxP–GUS के रूप में बना सूचक केवल वहीं चालू होता है जहाँ stop का उच्छेदन हुआ। उच्छेदन स्थायी है और हर संतति कोशिका में जाता है, अतः प्रत्येक घटना अन्यथा अपरिवर्तित पौधे में एक क्लोनी खंड चिह्नित करती है: इसी से विभज्योतकों में कोशिका-वंश का अनुरेखण होता है। यही तंत्र चयन-योग्य चिह्नक हटाता है; यीस्ट के 2-माइक्रॉन प्लाज़्मिड का FLP/FRT इसका समतुल्य है।
लवक रूपांतरण। प्रायः कण-प्रक्षेपण से पहुँचाया गया DNA जीन को लवक अनुक्रमों के बीच रखता है और चुने हुए स्थल पर समजात पुनर्योजन द्वारा प्लास्टोम में प्रवेश करता है। चिह्नक aadA स्पेक्टिनोमाइसिन व स्ट्रेप्टोमाइसिन प्रतिरोध देता है, और चूँकि एक पर्ण कोशिका में प्लास्टोम की हज़ारों प्रतियाँ होती हैं, होमोप्लाज़्मी तक पहुँचने के लिए चयन-माध्यम पर पुनर्जनन के अनेक चक्र चाहिए। लाभ: अत्यधिक अभिव्यक्ति, बहुसिस्ट्रॉनी ऑपेरॉन, स्थिति-प्रभाव या मौनन का अभाव, और अधिकांश आवृतबीजियों में लवकों की मातृ-वंशागति, जो पराग से पारजीन के पलायन को सीमित करती है। सीमाएँ: यूकैरियोटी ग्लाइकोसिलीकरण नहीं होता, और नियमित सफलता कुछ ही जातियों में है, जिनमें तंबाकू पहली थी।
रासायनिक उत्परिवर्तजनन। EMS (एथिल मेथेनसल्फ़ोनेट) ग्वानिन के O6 पर एथिल समूह जोड़ता है; O6-एथिलग्वानिन थाइमिन से युग्मित होता है, जिससे मुख्यतः G:C से A:T संक्रमण होते हैं। सोडियम एज़ाइड (जौ में बहुप्रयुक्त) व MNU अन्य उत्परिवर्तजन हैं। उपचारित बीज से M1 पौधा बनता है, जो काइमेरी होता है क्योंकि बीज का भ्रूण बहुकोशिकीय है, और जिसमें अप्रभावी उत्परिवर्तन छिपे रहते हैं; अप्रभावी उत्परिवर्ती M2 में छाँटे जाते हैं। TILLING एक EMS समष्टि को चुने हुए जीन में बिंदु-उत्परिवर्तनों की जाँच से जोड़ता है, जो विपरीत आनुवंशिकी का अपारजीनी मार्ग है।
मुख्य बिंदु
- विधि संगम तंत्र के अनुसार चुनी जाती है: स्वपरागितों हेतु शुद्ध वंशक्रम, वंशावली व प्रतीप संकरण; परपरागितों हेतु आवर्ती चयन व संकर। प्रत्येक स्वनिषेचन से विषमयुग्मजता आधी होती है, Fn में (1/2)ⁿ⁻¹, और BCn आवर्ती जनक का 1 − (1/2)ⁿ⁺¹ भाग लौटाता है।
- संकर ओज मध्य-जनक, श्रेष्ठ जनक या मानक जाँच-किस्म के सापेक्ष मापा जाता है। CGMS में A × B बंध्य वंशक्रम बनाए रखता है और A × R जनन-क्षम संकर बनाता है।
- सहप्रभावी चिह्नक (RFLP, SSR, SNP) विषमयुग्मज पहचानते हैं, प्रभावी चिह्नक (RAPD, अधिकतर AFLP) नहीं। पुनर्योजन अंश r पर स्थित चिह्नक r प्रायिकता से जीन चूकता है; पार्श्ववर्ती चिह्नक केवल दोहरे विनिमय पर विफल होते हैं, लगभग r₁r₂।
- द्विगुणित अगुणित एक ही चरण में पूर्ण समयुग्मता देते हैं, और वांछित जीनोटाइप F2 के (1/4)ⁿ के बजाय (1/2)ⁿ पर मिलता है। भ्रूण बचाव उन दूरस्थ-संकर भ्रूणों को बचाता है जिनका भ्रूणपोष विफल होता है।
- ऑक्सिन:साइटोकाइनिन का उच्च अनुपात जड़ें और उलटा अनुपात प्ररोह देता है; कायिक भ्रूण द्विध्रुवीय व क्लोनी हैं; कृत्रिम बीज कैल्सियम एल्जिनेट मनके हैं; सोमाक्लोनल विभिन्नता वंशागत है।
- द्विअंगी वाहकों को cis में केवल T-DNA सीमाएँ चाहिए, और एकल प्रविष्टि T1 में 3:1 में पृथक्कृत होती है। Cas9 को NGG PAM चाहिए; समान दिशा वाले loxP स्थलों पर Cre उच्छेदन करता है और क्लोनी खंड चिह्नित करता है; लवक पारजीन समजात पुनर्योजन से समाकलित होते हैं; EMS G:C से A:T संक्रमण देता है, जिनकी छँटाई M2 में होती है।
अभ्यास प्रश्न (17)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
जोहानसन के सेम-प्रयोगों में भारी बीजों के लिए चयन ने मिश्रित समष्टि का माध्य तो बदला, पर एकल शुद्ध वंशक्रम के भीतर करने पर उसका कोई प्रभाव नहीं हुआ। क्यों?
उत्तर देखें
उत्तर: C — शुद्ध वंशक्रम के सभी पौधों का एक ही जीनोटाइप है, अतः उनमें बीज-भार के अंतर पर्यावरणीय हैं
शुद्ध वंशक्रम एक समयुग्मजी, स्वपरागित पौधे की संतति है, अतः उसके सभी सदस्यों का जीनोटाइप एक है; उसके भीतर बीज-भार के अंतर पर्यावरणीय हैं और संतति में नहीं जाते, इसलिए उनमें चयन कुछ नहीं बदलता। सेम स्वपरागित है, अतः परसंकरण ने चयन को निष्फल नहीं किया। नमूने का आकार कारण नहीं था, क्योंकि आनुवंशिक रूप से भिन्न वंशक्रमों वाली मिश्रित समष्टि ने चयन पर प्रतिक्रिया दी।कोशिकाद्रव्यी-आनुवंशिक नर बंध्यता तंत्र में A वंशक्रम में बंध्य (S) कोशिकाद्रव्य व rf rf केंद्रक, B वंशक्रम में सामान्य (N) कोशिकाद्रव्य व rf rf केंद्रक हैं, और R वंशक्रम Rf Rf है। स्वयं A वंशक्रम का बीज बढ़ाने के लिए हर मौसम कौन-सा संकरण किया जाता है?
उत्तर देखें
उत्तर: A — मादा जनक के रूप में A वंशक्रम, जिसे B वंशक्रम परागित करे
A × B की संतति में A-वंशक्रम माता से S कोशिकाद्रव्य और दोनों जनकों से rf rf केंद्रक आता है, जो फिर नर-बंध्य A वंशक्रम है। A × R से S Rf rf पौधे बनते हैं जो जनन-क्षम हैं: यह व्यावसायिक संकर है, A-वंशक्रम का बीज नहीं। A वंशक्रम जीवनक्षम पराग नहीं छोड़ता, अतः वह पराग-जनक नहीं हो सकता, और R-वंशक्रम माता S के बजाय अपना कोशिकाद्रव्य देगी।एक नर-बंध्य मक्का पौधे को जनन-क्षम अंतःप्रजात वंशक्रम Q से परागित किया जाता है, और प्रत्येक F1 पौधा नर-बंध्य है। F1 और हर अगली पीढ़ी को फिर Q से परागित किया जाता है। ऐसे छह प्रतीप संकरणों के बाद, जब केंद्रकीय जीनोम लगभग पूरा Q का हो चुका है, हर पौधा अब भी नर-बंध्य है। कौन-सी व्याख्या इन परिणामों से मेल खाती है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — अंड-कोशिका से जाने वाला बंध्यता-कारक कोशिकाद्रव्य, जिसमें Q में केंद्रकीय पुनःस्थापक एलील नहीं है
बार-बार का प्रतीप संकरण केंद्रक को Q के केंद्रक से बदल देता है पर मूल माता का कोशिकाद्रव्य बनाए रखता है, क्योंकि कोशिकाद्रव्य अंड-कोशिका से जाता है। केंद्रक के Q का हो जाने पर भी बनी रहने वाली बंध्यता इसलिए कोशिकाद्रव्य में है, और Q में पुनःस्थापक नहीं होना चाहिए (वह अनुरक्षक है)। अप्रभावी केंद्रकीय एलील होता तो प्रभावी उर्वर एलील वाले Q से F1 जनन-क्षम होता, और Q में पुनःस्थापक होने पर भी F1 जनन-क्षम होता। विषमयुग्मजी प्रभावी बंध्यता एलील से लगभग आधी संतति जनन-क्षम होती, पूरी F1 बंध्य नहीं।बाजरे के दो अंतःप्रजात वंशक्रम प्रति पौधा 60 g व 80 g दाना देते हैं, और उनका F1 प्रति पौधा 91 g देता है। F1 का श्रेष्ठ-जनक संकर ओज (हेटेरोबेल्टिओसिस) प्रतिशत में, दो दशमलव स्थानों तक, ज्ञात कीजिए।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 13.75
श्रेष्ठ जनक BP = 80 g। हेटेरोबेल्टिओसिस = (F1 − BP)/BP × 100 = (91 − 80)/80 × 100 = 11/80 × 100 = 13.75%। इसके स्थान पर मध्य-जनक मान (60 + 80)/2 = 70 g लेने से (91 − 70)/70 × 100 = 30% मिलता है, जो मध्य-जनक संकर ओज है, पूछी गई राशि नहीं।गेहूँ का एक F1 पौधा तीन असहलग्न लोकसों पर विषमयुग्मजी है। उसकी संतति को एकल-बीज अवरोहण (स्वनिषेचन, बिना चयन) द्वारा F5 पीढ़ी तक बढ़ाया जाता है, F1 को पहली पीढ़ी गिनते हुए। F5 के कितने प्रतिशत पौधों के तीनों लोकसों पर समयुग्मजी होने की अपेक्षा है? उत्तर एक दशमलव स्थान तक दीजिए।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 82.4
F5 तक चार बार स्वनिषेचन हुआ है (F1 से F2, F2 से F3, F3 से F4, F4 से F5), अतः प्रत्येक लोकस पर विषमयुग्मजता (1/2)⁴ = 1/16 और समयुग्मता 15/16 है। तीन स्वतंत्र लोकसों के लिए (15/16)³ = 3375/4096 = 0.8240, अर्थात 82.4%। पाँच बार का स्वनिषेचन गिनने से (31/32)³ = 90.9% मिलता है, जो एक पीढ़ी की प्रचलित भूल है।आणविक चिह्नकों व चिह्नक-सहायित चयन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: A — F2 समष्टि में अंकित SSR चिह्नक विषमयुग्मज को दोनों समयुग्मजों से अलग पहचानता है और 1:2:1 अनुपात देता है; C — जीनोम भर में फैले चिह्नकों से पृष्ठभूमि चयन प्रतीप संकरण कार्यक्रम में आवर्ती-जनक जीनोम की पुनःप्राप्ति तेज़ करता है
SSR सहप्रभावी हैं: दोनों एलील-आकार दिखते हैं, अतः F2 में 1:2:1 मिलता है। पृष्ठभूमि चयन सर्वाधिक आवर्ती-जनक एलीलों वाले प्रतीप-संकर पौधे चुनता है और कई पीढ़ियाँ बचाता है। RAPD बैंड प्रभावी चिह्नक है: विषमयुग्मज व बैंड-धारी समयुग्मज एक जैसे दिखते हैं। दूरी के साथ विश्वसनीयता घटती है, क्योंकि 25 cM दूर चिह्नक लगभग एक-चौथाई अर्धसूत्रणों में (दोहरे विनिमय का सुधार करने पर कुछ कम) जीन से पुनर्योजन द्वारा अलग हो जाता है, जबकि 1 cM पर लगभग 1% में।एक प्रतीप संकरण कार्यक्रम में रोग-प्रतिरोधी जीन का दाता एलील 6 cM दूर स्थित SSR चिह्नक-एलील से युग्मन (coupling) में सहलग्न है। F1 का संवेदी आवर्ती जनक से प्रतीप संकरण किया जाता है, और दाता चिह्नक-एलील वाले 400 BC1 पौधे बिना किसी रोग-परीक्षण के चुने जाते हैं। मानचित्र दूरी को पुनर्योजन प्रतिशत के बराबर मानते हुए, इन 400 में से कितने पौधों में दाता प्रतिरोधी एलील न होने की अपेक्षा है?
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 24
प्रत्येक चयनित BC1 पौधे को दाता चिह्नक-एलील F1 के एक युग्मक से मिला है। वह सहलग्न दाता प्रतिरोधी एलील से केवल तब वंचित होगा जब उस अर्धसूत्रण में चिह्नक व जीन के बीच विनिमय हुआ हो, जिसकी प्रायिकता r = 0.06 है। अपेक्षित मिथ्या-धनात्मक = 0.06 × 400 = 24। यह सोचकर r को आधा करना कि केवल आधे BC1 में चिह्नक है, प्रचलित भूल है: 400 पौधे पहले ही चिह्नक के आधार पर चुने जा चुके हैं।धान का एक F1 पौधा पाँच असहलग्न लोकसों पर विषमयुग्मजी है, जिनमें से प्रत्येक पर एक अनुकूल एलील है। एक प्रजनक उसके परागकोशों से 640 द्विगुणित-अगुणित वंशक्रम उगाता है। इनमें से कितने वंशक्रमों के पाँचों लोकसों पर अनुकूल एलील के लिए समयुग्मजी होने की अपेक्षा है?
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 20
प्रत्येक DH वंशक्रम हर लोकस पर समयुग्मजी है और हर लोकस पर किसी भी एलील को 1/2 प्रायिकता से रखता है। पाँचों अनुकूल एलीलों की प्रायिकता (1/2)⁵ = 1/32 है, अतः 640/32 = 20 वंशक्रम। 640 F2 पौधों से अपेक्षा 640 × (1/4)⁵ = 0.625 पौधा होती, इसीलिए द्विगुणित अगुणित दुर्लभ संयोजनों को सुलभ बनाते हैं।Hordeum bulbosum से परागित जौ (Hordeum vulgare) ऐसे भ्रूण बनाता है जो बचाए व संवर्धित किए जाने पर अगुणित जौ पौधों में विकसित होते हैं। ये पौधे अगुणित क्यों होते हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: B — आरंभिक कोशिका-विभाजनों के दौरान भ्रूण से bulbosum के गुणसूत्र विलुप्त हो जाते हैं
निषेचन होता है और संकर युग्मनज बनता है, पर आरंभिक विभाजनों में युवा भ्रूण से H. bulbosum के गुणसूत्र निकल जाते हैं और केवल जौ का समुच्चय बचता है; भ्रूणपोष विफल होने के कारण भ्रूण बचाव आवश्यक है। अतः अगुणित गुणसूत्र विलोपन से बनते हैं, निषेचन की विफलता से नहीं। युग्मनज में अर्धसूत्रण नहीं होता, और कॉल्चिसीन गुणसूत्र संख्या दोगुनी करता है, कोई समुच्चय हटाता नहीं।तंबाकू मज्जा के कर्तोतक ऐसे माध्यमों पर संवर्धित किए जाते हैं जो केवल ऑक्सिन व साइटोकाइनिन के अनुपात में भिन्न हैं। उच्च साइटोकाइनिन:ऑक्सिन अनुपात वाले माध्यम पर क्या अपेक्षित है?
उत्तर देखें
उत्तर: D — कर्तोतक पर प्ररोह-कलिकाएँ बनती हैं जबकि जड़ों का बनना दब जाता है
स्कूग व मिलर ने दिखाया कि ऑक्सिन:साइटोकाइनिन संतुलन अंग तय करता है: ऑक्सिन की तुलना में अधिक साइटोकाइनिन प्ररोह देता है, साइटोकाइनिन की तुलना में अधिक ऑक्सिन जड़ें देता है, और मध्यवर्ती संतुलन कैलस देता है। जड़ बनना उलटे अनुपात का परिणाम है, और यही सबसे सामान्य भ्रम है। कायिक भ्रूणों को भिन्न व्यवस्था चाहिए, प्रायः 2,4-D से प्रेरण और फिर ऑक्सिन-रहित माध्यम।पादप ऊतक संवर्धन तकनीकों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: B — संवर्धित शीर्षस्थ गुंबद से पुनर्जनित पौधे प्रायः मातृ पौधे में उपस्थित विषाणुओं से मुक्त होते हैं; D — कृत्रिम बीज कायिक भ्रूणों को सोडियम एल्जिनेट में संपुटित कर और मनकों को कैल्सियम क्लोराइड में कठोर करके बनाए जाते हैं
शीर्षस्थ गुंबद में विभेदित संवहन ऊतक नहीं होता और विषाणु बहुत कम या नहीं होता, अतः विभज्योतक संवर्धन (प्रायः ताप-उपचार के बाद) विषाणु-मुक्त पौधे देता है। कैल्सियम आयन भ्रूण के चारों ओर एल्जिनेट को जेल मनके में तिर्यक-बंधित करते हैं, जिससे कृत्रिम बीज बनता है। कायिक भ्रूण द्विध्रुवीय है और कर्तोतक से उसका कोई संवहन संबंध नहीं होता, यही उसे अपस्थानिक प्ररोह से अलग करता है। सोमाक्लोनल विभिन्नता वंशागत है, जो गुणसूत्री, ट्रांसपोज़ॉन व मेथिलीकरण परिवर्तनों से उत्पन्न होती है।Agrobacterium-माध्यमित रूपांतरण के द्विअंगी-वाहक तंत्र में कौन-सा घटक स्थानांतरित किए जाने वाले जीन के साथ उसी प्लाज़्मिड पर होना चाहिए, न कि सहायक Ti प्लाज़्मिड द्वारा trans में दिया जाए?
उत्तर देखें
उत्तर: D — बाएँ व दाएँ 25-bp सीमा-पुनरावृत्ति, जो स्थानांतरित DNA के दोनों सिरे चिह्नित करती हैं
केवल सीमा-पुनरावृत्तियाँ cis में काम करती हैं: VirD1/VirD2 संकुल उन्हें जहाँ भी हों पहचानकर काटता है, अतः अभीष्ट जीन द्विअंगी प्लाज़्मिड पर सीमाओं के बीच होना चाहिए। VirD1 व VirD2 सहित सभी vir प्रोटीन trans में काम करते हैं और निरस्त्र सहायक Ti प्लाज़्मिड से आ सकते हैं। ओपाइन अपचय जीन स्थानांतरण के लिए आवश्यक ही नहीं हैं।एक T0 तंबाकू पौधे में दो असहलग्न, एकल-प्रति T-DNA प्रविष्टियाँ हैं, प्रत्येक में कार्यशील कैनामाइसिन-प्रतिरोधी जीन है। इसका स्वनिषेचन कर 480 T1 नवोद्भिद कैनामाइसिन पर उगाए जाते हैं। कितने नवोद्भिदों के कैनामाइसिन-संवेदी होने की अपेक्षा है?
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 30
T0 में प्रत्येक प्रविष्टि अर्धयुग्मजी है, अतः किसी नवोद्भिद में कोई एक प्रविष्टि न होने की प्रायिकता 1/4 है। वह केवल तब संवेदी होगा जब दोनों न हों: 1/4 × 1/4 = 1/16। संवेदी नवोद्भिद = 480/16 = 30, अर्थात 15 प्रतिरोधी : 1 संवेदी अनुपात। एकल प्रविष्टि होने पर अनुपात 3:1 होता, जिससे 120 मिलते।तंबाकू में किए जाने वाले लवक (हरितलवक) रूपांतरण की निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषताएँ हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: A — पारजीन वाहक में उसके दोनों ओर स्थित लवक अनुक्रमों के बीच समजात पुनर्योजन द्वारा प्लास्टोम में समाकलित होता है; B — प्रत्येक वन्य-प्रकार प्लास्टोम प्रति को बदलकर होमोप्लाज़्मी तक पहुँचने के लिए स्पेक्टिनोमाइसिन पर पुनर्जनन के अनेक चक्र चाहिए
लवक वाहकों में पारजीन के दोनों ओर लवक DNA होता है, जो निश्चित स्थल पर समजात पुनर्योजन से समाकलित होता है, और चूँकि कोशिका में प्लास्टोम की हज़ारों प्रतियाँ होती हैं, होमोप्लाज़्मी के लिए स्पेक्टिनोमाइसिन पर aadA द्वारा बार-बार चयन चाहिए। लवकों में प्रोकैरियोट-सदृश अभिव्यक्ति तंत्र है और ER-प्रकार का N-ग्लाइकोसिलीकरण नहीं होता। अधिकांश आवृतबीजियों में लवक मातृ-वंशागत हैं, अतः पराग में पारजीन विरले ही जाता है; यही नियंत्रण इस विधि का एक लाभ है।एक sgRNA का 20-न्यूक्लियोटाइड स्पेसर किसी जीन के चुने हुए 20-bp प्रोटोस्पेसर से पूर्णतः मेल खाता है। प्रोटोस्पेसर-धारी रज्जुक पर, प्रोटोस्पेसर के ठीक 3′ में तीन न्यूक्लियोटाइड 5′-TCA-3′ हैं। जब यह गाइड Streptococcus pyogenes के Cas9 (SpCas9), जो 5′-NGG-3′ PAM पहचानता है, के साथ प्रयुक्त होता है, तो इस स्थल पर क्या अपेक्षित है और क्यों?
उत्तर देखें
उत्तर: A — कोई द्वि-रज्जुकी विच्छेद नहीं बनता, क्योंकि प्रोटोस्पेसर से लगा अनुक्रम 5′-NGG-3′ PAM नहीं है, जो काटने से पहले SpCas9 को चाहिए
SpCas9 पहले DNA में अपना PAM खोजता है और तभी DNA खोलकर गाइड को युग्मित करता है; प्रोटोस्पेसर से लगे 5′-TCA-3′ के कारण कोई 5′-NGG-3′ PAM नहीं है, अतः स्पेसर चाहे कितना भी मेल खाए, विच्छेदन नहीं होता। इसलिए अकेला पूर्ण स्पेसर-युग्मन पर्याप्त नहीं है। Cas9 PAM से लगभग 3 bp पर कुंठित विच्छेद बनाता है (HNH व RuvC दोनों सक्रिय), न कि दूर कोई एकल-रज्जुक कटाव।एक संरचना में promoter–loxP–stop–loxP–GUS क्रम है, जहाँ stop कैसेट GUS अभिव्यक्ति रोकता है। Cre रिकॉम्बिनेज़ ताप-आघात प्रमोटर से व्यक्त होता है, जिससे केवल बिखरी हुई कोशिकाएँ stop का उच्छेदन करती हैं। प्रत्येक GUS-धनात्मक क्षेत्र एकल पृथक कोशिकाओं के बजाय नीली कोशिकाओं के क्लोनी खंड के रूप में क्यों दिखता है?
उत्तर देखें
उत्तर: C — किसी कोशिका में stop का उच्छेदन हो जाने पर परिवर्तन स्थायी होता है और उसके सभी समसूत्री वंशजों को वंशागत होता है
समान दिशा में दोहराए loxP स्थलों के बीच Cre का उच्छेदन stop को अनुत्क्रमणीय रूप से हटाता है (उत्पाद में एकल loxP बचता है जो पुनः पुनर्योजन नहीं कर सकता), अतः जिस कोशिका में GUS चालू हुआ वह चालू जीन समसूत्रण द्वारा हर संतति कोशिका को देती है और क्लोनी खंड बनता है। Cre उसी कोशिका में काम करता है जो उसे बनाती है और पड़ोसियों में विसरित नहीं होता, और ताप-आघात विभाजन को समकालित करने के बजाय अभिव्यक्ति प्रेरित करता है; यही स्थायित्व इस तंत्र को वंश-अनुरेखक बनाता है।बीजों को एथिल मेथेनसल्फ़ोनेट (EMS) से उपचारित कर M1 तक उगाया जाता है, और M1 पौधों का स्वनिषेचन कर M2 उगाई जाती है। अप्रभावी बिंदु-उत्परिवर्तन M1 के बजाय M2 में क्यों छाँटे जाते हैं?
उत्तर देखें
उत्तर: A — नया अप्रभावी उत्परिवर्तन M1 में विषमयुग्मजी या काइमेरी होता है और स्वनिषेचन के बाद, M2 में ही समयुग्मजी होता है
बहुकोशिकीय बीज-भ्रूण की एक कोशिका के एक रज्जुक में प्रेरित उत्परिवर्तन ऐसा M1 पौधा देता है जो उसके लिए विषमयुग्मजी और प्रायः काइमेरी होता है; अप्रभावी एलील वन्य-प्रकार एलील से ढका रहता है और कोई समलक्षण नहीं दिखाता। M1 के स्वनिषेचन से एलील M2 के एक-चौथाई भाग में समयुग्मजी होकर अंततः दिखता है। EMS पीढ़ियों भर क्रिया नहीं करता रहता, M1 पौधे प्रायः उर्वर होते हैं, और अप्रभावी एलील M1 में छिपे रहते हैं, दिखते नहीं।