ऊष्मागतिकी: प्रथम नियम, ऊष्मारसायन, एन्ट्रॉपी व मुक्त ऊर्जा

यह अध्याय जीवन विज्ञान (XL) पेपर के XL0 रसायन विज्ञान के खंड XL0.8 का उत्तर है, वह भाग जिसे प्रत्येक XL परीक्षार्थी हल करता है: “अवस्था व पथ फलनों का गुणात्मक विवेचन, प्रथम नियम, उत्क्रमणीय व अनुत्क्रमणीय प्रक्रम, आंतरिक ऊर्जा, एन्थैल्पी, किरचॉफ़ समीकरण, अभिक्रिया ऊष्मा, हेस नियम, विरचन ऊष्मा। द्वितीय नियम, एन्ट्रॉपी व मुक्त ऊर्जा। गिब्स–हेल्महोल्त्ज़ समीकरण, मुक्त ऊर्जा परिवर्तन व स्वतःप्रवर्तिता, साम्य स्थिरांक से मुक्त ऊर्जा परिवर्तन।” यह अवस्था फलनों को पथ फलनों से अलग करता है, प्रथम नियम को उत्क्रमणीय व अनुत्क्रमणीय प्रसारों पर लगाता है, विरचन ऊष्मा, हेस नियम व किरचॉफ़ समीकरण से ऊष्मारसायन बनाता है, और फिर द्वितीय नियम व एन्ट्रॉपी से गिब्स ऊर्जा, उसकी ताप-निर्भरता और साम्य स्थिरांक से उसके संबंध तक पहुँचता है, जैवरासायनिक उदाहरणों सहित। संख्यात्मक प्रश्न प्रसार-कार्य, विरचन व दहन आँकड़ों से अभिक्रिया एन्थैल्पी, किरचॉफ़ संशोधन, एन्ट्रॉपी परिवर्तन, संक्रमण ताप, गिब्स–हेल्महोल्त्ज़ से विस्तार तथा K से ΔG° हैं।

1. निकाय, अवस्था फलन व पथ फलन

ऊष्मागतिकी संसार को निकाय और उसके परिवेश में बाँटती है। विवृत निकाय परिवेश से द्रव्य व ऊर्जा दोनों का विनिमय करता है (जीवित कोशिका), संवृत निकाय केवल ऊर्जा का (बंद फ़्लास्क), और विलगित निकाय किसी का नहीं। कुछ चर, जैसे T, P, V व पदार्थों की मात्राएँ, निकाय की अवस्था तय करते हैं। अवस्था फलन केवल उस अवस्था पर निर्भर करता है, इस पर नहीं कि वहाँ कैसे पहुँचे: T, P, V, आंतरिक ऊर्जा U, एन्थैल्पी H, एन्ट्रॉपी S व गिब्स ऊर्जा G सभी अवस्था फलन हैं। इसका परिवर्तन अंतिम घटा प्रारंभिक है, और किसी भी चक्र के बाद यह अपने आरंभिक मान पर लौट आता है। पथ फलन इसके बजाय यात्रा का वर्णन करता है: ऊष्मा q व कार्य w अपनाए गए मार्ग पर निर्भर हैं, अतः निकाय में 'निहित' ऊष्मा की बात करना निरर्थक है।

💡 ऊँचाई और पगडंडी
घाटी से शिखर तक चढ़ने पर कोई भी पगडंडी लें, ऊँचाई उतनी ही बढ़ती है: ऊँचाई अवस्था फलन जैसी है। चली गई दूरी और लगा श्रम पगडंडी पर निर्भर हैं, q व w की तरह।

चिह्न परिपाटी। यह अध्याय IUPAC परिपाटी अपनाता है: निकाय ऊष्मा अवशोषित करे तो q धनात्मक, और निकाय पर कार्य किया जाए तो w धनात्मक, अतः प्रथम नियम ΔU = q + w है। कुछ पुरानी पुस्तकें ΔU = q − w लिखती हैं, जिसमें w निकाय द्वारा किया गया कार्य है। भौतिकी वही है पर w का चिह्न उलट जाता है, अतः प्रश्न की परिपाटी पढ़ें।

2. प्रथम नियम, एन्थैल्पी तथा उत्क्रमणीय बनाम अनुत्क्रमणीय परिवर्तन

प्रथम नियम ऊर्जा का संरक्षण है: ΔU = q + w। आंतरिक ऊर्जा U कणों की कुल गतिज व स्थितिज ऊर्जा है; आदर्श गैस हेतु यह केवल ताप पर निर्भर है, अतः किसी भी समतापी आदर्श-गैस परिवर्तन में ΔU = 0। बाह्य दाब के विरुद्ध प्रसार-कार्य w = −∫P_ext dV है, जो P_ext नियत होने पर −P_ext ΔV बन जाता है। नियत आयतन पर कोई प्रसार-कार्य नहीं होता, अतः ΔU = q_V, और बम कैलोरीमीटर यही मापता है। रसायन व जीवविज्ञान अधिकतर नियत दाब पर चलते हैं, जिसके लिए हम एन्थैल्पी H = U + PV परिभाषित करते हैं, जहाँ ΔH = q_P। गैसों वाली अभिक्रियाओं में ΔH = ΔU + Δn_g RT, जहाँ Δn_g गैस के मोलों का परिवर्तन है। ग्लूकोज़ के CO₂ व द्रव जल में दहन में 6 mol O₂ खपती है और 6 mol CO₂ बनती है, अतः Δn_g = 0 और ΔH = ΔU। ऊष्मा धारिताएँ C_V = (∂U/∂T)_V व C_P = (∂H/∂T)_P हैं, और आदर्श गैस के एक मोल हेतु C_P − C_V = R।

उत्क्रमणीय प्रक्रम साम्य अवस्थाओं के सतत क्रम से गुज़रता है और किसी भी चरण पर किसी चर में अतिसूक्ष्म परिवर्तन से पलटा जा सकता है; यह एक आदर्शीकरण है जिसमें अनंत समय लगेगा। वास्तविक, अनुत्क्रमणीय प्रक्रम दाब या ताप के परिमित अंतरों के आर-पार परिमित दर से चलता है। प्रसार में उत्क्रमणीय पथ अधिकतम कार्य देता है, क्योंकि बाह्य दाब हर चरण पर गैस-दाब से ठीक कम रखा जाता है। आदर्श गैस के n mol के समतापी उत्क्रमणीय प्रसार में w = −nRT ln(V₂/V₁), और q = −w क्योंकि ΔU = 0। निर्वात में प्रसार (मुक्त प्रसार) कोई कार्य नहीं करता।

हल किया उदाहरण। 300 K पर आदर्श गैस का एक मोल समतापी रूप से अपना आयतन दुगुना करता है (R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹)। उत्क्रमणीय रूप से w = −(1)(8.314)(300) ln 2 = −1729 J। अंतिम दाब P₂ के बराबर नियत बाह्य दाब के विरुद्ध w = −P₂(V₂ − V₁) = −P₂V₂/2 = −nRT/2 = −1247 J। निर्वात में w = 0। तीनों में ΔU = 0, क्योंकि U अवस्था फलन है और T अपरिवर्तित है, पर q = −w हर बार भिन्न है: q व w के पथ फलन होने का सबसे स्पष्ट प्रमाण।

3. अभिक्रिया ऊष्मा, विरचन ऊष्मा, हेस नियम व किरचॉफ़ समीकरण

अभिक्रिया ऊष्मा (एन्थैल्पी) ΔrH लिखी गई अभिक्रिया का एन्थैल्पी परिवर्तन है, kJ प्रति मोल अभिक्रिया में: ऊष्माक्षेपी में ऋणात्मक और ऊष्माशोषी में धनात्मक। समीकरण उलटने पर इसका चिह्न उलटता है, और गुणांक दुगुने करने पर यह दुगुना होता है। किसी यौगिक की मानक विरचन एन्थैल्पी (ऊष्मा) ΔfH° उसके एक मोल को उसके तत्वों से, उनकी संदर्भ अवस्थाओं में, बनाने का ΔH है; संदर्भ अवस्था 1 bar पर सर्वाधिक स्थायी रूप है, जैसे O₂(g), C(ग्रेफ़ाइट) व Br₂(l)। इन संदर्भ रूपों हेतु परिभाषा से ΔfH° = 0, पर O₃(g), C(हीरा) या Br₂(g) हेतु नहीं।

हेस नियम: चूँकि H अवस्था फलन है, ΔrH वही रहता है चाहे अभिक्रिया एक पद में हो या अनेक में, अतः ऊष्मारासायनिक समीकरणों को बीजगणितीय समीकरणों की तरह जोड़ा-घटाया जा सकता है। इससे दो व्यावहारिक रूप निकलते हैं: ΔrH° = ΣνΔfH°(उत्पाद) − ΣνΔfH°(अभिकारक), तथा दहन एन्थैल्पियों से ΔrH° = ΣνΔcH°(अभिकारक) − ΣνΔcH°(उत्पाद)। हल किया उदाहरण: CO₂(g) हेतु ΔfH° = −393.5 kJ mol⁻¹, H₂O(l) हेतु −285.8 और ग्लूकोज़(s) हेतु −1273.3 लेकर, दहन C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O(l) का ΔcH° = 6(−393.5) + 6(−285.8) − (−1273.3) = −2802.5 kJ mol⁻¹ है। हेस नियम के अनुसार, जो कोशिका ग्लूकोज़ को ग्लाइकोलिसिस, सिट्रिक अम्ल चक्र व श्वसन द्वारा इन्हीं उत्पादों तक ऑक्सीकृत करती है, वह उतनी ही कुल एन्थैल्पी मुक्त करती है, बस अनेक छोटे पदों में।

किरचॉफ़ समीकरण ΔrH को दूसरे ताप पर ले जाता है: d(ΔrH)/dT = ΔrCp, अतः ΔrH(T₂) = ΔrH(T₁) + ΔrCp(T₂ − T₁), जब ΔrCp = ΣνCp(उत्पाद) − ΣνCp(अभिकारक) उस परास में नियत हो और बीच में कोई प्रावस्था-परिवर्तन न आए। हल किया उदाहरण: N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g) हेतु ΔrH°(298 K) = −92.2 kJ mol⁻¹। NH₃, N₂ व H₂ हेतु Cp = 35.1, 29.1 व 28.8 J K⁻¹ mol⁻¹ लेकर ΔrCp = 2(35.1) − 29.1 − 3(28.8) = −45.3 J K⁻¹ mol⁻¹, और ΔrH(398 K) = −92.2 + (−45.3 × 10⁻³)(100) = −96.7 kJ mol⁻¹। इकाइयों पर ध्यान दें: Cp जूल में है, ΔH किलोजूल में।

ℹ️ एक जैविक ΔCp
प्रोटीन के अवलन (unfolding) का ΔCp बड़ा व धनात्मक होता है, क्योंकि वलित प्रोटीन में दबे अध्रुवीय समूह जल के संपर्क में आ जाते हैं। किरचॉफ़ समीकरण से इसका ΔH ताप के साथ तेज़ी से बढ़ता है, इसीलिए प्रोटीन की स्थिरता एक ही ΔH से वर्णित नहीं हो सकती।

4. द्वितीय नियम व एन्ट्रॉपी

प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षित करने वाले किसी भी प्रक्रम की अनुमति देता है; द्वितीय नियम बताता है कि कौन-सी दिशा स्वाभाविक है। क्लॉसियस के रूप में, ऊष्मा ठंडे पिंड से गर्म पिंड की ओर स्वतः नहीं बहती; केल्विन–प्लांक रूप में, कोई चक्रीय इंजन एक ही ऊष्मा-भंडार की ऊष्मा को पूर्णतः कार्य में नहीं बदल सकता। एन्ट्रॉपी S, जो dS = dq_rev/T से परिभाषित अवस्था फलन है, के रूप में: प्रत्येक स्वतःप्रवर्तित (अनुत्क्रमणीय) प्रक्रम में निकाय व परिवेश की कुल एन्ट्रॉपी बढ़ती है और उत्क्रमणीय प्रक्रम में स्थिर रहती है: ΔS_univ = ΔS_sys + ΔS_surr ≥ 0। सांख्यिकीय रूप से S = k_B ln W प्रेक्षित अवस्था के अनुरूप सूक्ष्म विन्यासों W को गिनता है, इसीलिए गलन, वाष्पन, मिश्रण, ठोस के घुलने और गैस-मोल बढ़ाने वाली अभिक्रियाओं में एन्ट्रॉपी बढ़ती है।

चूँकि S अवस्था फलन है, अनुत्क्रमणीय परिवर्तन का ΔS_sys उन्हीं दो अवस्थाओं के बीच किसी उत्क्रमणीय पथ पर परिकलित किया जाता है। मानक परिणाम हैं: समतापी आदर्श-गैस परिवर्तन, ΔS = nR ln(V₂/V₁); नियत दाब पर तापन, ΔS = nC_P ln(T₂/T₁); तथा संक्रमण ताप पर प्रावस्था-परिवर्तन, ΔS = ΔH_trans/T_trans। ΔfusH = 6.01 kJ mol⁻¹ सहित 273.15 K पर बर्फ़ के गलन का ΔS = 6010/273.15 = 22.0 J K⁻¹ mol⁻¹ है। परिवेश, जिसे ताप T पर बड़ा भंडार माना जाता है, ΔS_surr = −q_sys/T से बदलता है।

हल किया उदाहरण। खंड 2 के 1 mol, 300 K आयतन-दुगुनाकरण हेतु ΔS_sys = R ln 2 = +5.76 J K⁻¹, कोई भी पथ लें। उत्क्रमणीय रूप से परिवेश 1729 J देता है, अतः ΔS_surr = −5.76 J K⁻¹ और ΔS_univ = 0। नियत P₂ के विरुद्ध वह केवल 1247 J देता है, अतः ΔS_surr = −4.16 J K⁻¹ और ΔS_univ = +1.61 J K⁻¹ > 0, जो अनुत्क्रमणीय प्रक्रम का चिह्न है। मुक्त प्रसार में ΔS_surr = 0 और ΔS_univ = +5.76 J K⁻¹।

⚠️ q = 0 का अर्थ ΔS = 0 नहीं
एन्ट्रॉपी dq_rev/T है, dq_वास्तविक/T नहीं। मुक्त प्रसार में कोई ऊष्मा अवशोषित नहीं होती, फिर भी गैस R ln(V₂/V₁) एन्ट्रॉपी पाती है। केवल उत्क्रमणीय रुद्धोष्म परिवर्तन समएन्ट्रॉपिक है।

5. मुक्त ऊर्जा, स्वतःप्रवर्तिता व गिब्स–हेल्महोल्त्ज़ समीकरण

परिवेश का हिसाब रखना असुविधाजनक है, अतः नियत T व P पर हम गिब्स ऊर्जा G = H − TS प्रयोग करते हैं। चूँकि ΔS_surr = −ΔH/T, शर्त ΔS_univ > 0 बन जाती है ΔG = ΔH − TΔS < 0। ΔG < 0 वाला प्रक्रम स्वतःप्रवर्तित है, ΔG = 0 वाला साम्य पर है, और ΔG > 0 वाला लिखे रूप में स्वतःप्रवर्तित नहीं (उसका उलटा स्वतःप्रवर्तित है)। −ΔG वह अधिकतम अ-प्रसार कार्य भी है, वैद्युत, रासायनिक या यांत्रिक, जो प्रक्रम दे सकता है। नियत T व V पर संगत फलन हेल्महोल्त्ज़ ऊर्जा A = U − TS है, स्वतःप्रवर्तित परिवर्तन हेतु ΔA < 0। स्वतःप्रवर्तिता गति के बारे में कुछ नहीं कहती: वायु में ग्लूकोज़ का जलना स्वतःप्रवर्तित है, फिर भी वह वर्षों टिका रहता है।

ΔH व ΔS के चिह्न और ΔG = ΔH − TΔS का चिह्न (ΔH व ΔS नियत मानकर)
ΔHΔSकब स्वतःप्रवर्तितउदाहरण
ऋणात्मकधनात्मकसभी तापों परग्लूकोज़ का दहन
धनात्मकऋणात्मककिसी ताप पर नहीं; उलटा स्वतःप्रवर्तित हैबिना ऊर्जा-निवेश के CO₂ व जल से ग्लूकोज़ व O₂ बनाना
ऋणात्मकऋणात्मकT = ΔH/ΔS से नीचे273 K से नीचे जल का जमना
धनात्मकधनात्मकT = ΔH/ΔS से ऊपर273 K से ऊपर बर्फ़ का गलन

ताप के साथ ΔG का परिवर्तन (∂G/∂T)_P = −S से निकलता है, अतः (∂ΔG/∂T)_P = −ΔS: धनात्मक ΔS वाली अभिक्रिया T बढ़ने पर अधिक अनुकूल होती है। इसे G = H − TS से जोड़ने पर गिब्स–हेल्महोल्त्ज़ समीकरण मिलता है, [∂(ΔG/T)/∂T]_P = −ΔH/T²। परास में ΔH नियत हो तो समाकलन से ΔG₂/T₂ = ΔG₁/T₁ + ΔH(1/T₂ − 1/T₁) मिलता है, अतः एक ताप पर मापी मुक्त ऊर्जा केवल ΔH से दूसरे ताप तक बढ़ाई जा सकती है। हल किया उदाहरण: किसी अभिक्रिया का 298 K पर ΔG = +20 kJ mol⁻¹ और ΔH = +200 kJ mol⁻¹ है। 310 K पर ΔG₂ = 310[20/298 + 200(1/310 − 1/298)] = 310(0.06711 − 0.02598) = +12.8 kJ mol⁻¹। यही मान ΔS = (200 − 20)/298 = 0.604 kJ K⁻¹ mol⁻¹ व ΔG = 200 − 310(0.604) से भी आता है: ΔH नियत हो तो दोनों मार्ग तुल्य हैं।

6. मुक्त ऊर्जा व साम्य स्थिरांक

किसी भी संघटन वाले अभिक्रिया-मिश्रण हेतु ΔG = ΔG° + RT ln Q, जहाँ Q अभिक्रिया भागफल है (सक्रियताएँ, जिन्हें विलेयों हेतु mol L⁻¹ में सांद्रता और गैसों हेतु bar में आंशिक दाब से अनुमानित किया जाता है) और ΔG° हर स्पीशीज़ के अपनी मानक अवस्था में होने को दर्शाता है। साम्य पर ΔG = 0 और Q = K, अतः ΔG° = −RT ln K, या K = e^(−ΔG°/RT)। इस प्रकार ΔG° < 0 का अर्थ K > 1, ΔG° = 0 का अर्थ K = 1 और ΔG° > 0 का अर्थ K < 1 है। 298 K पर RT ln 10 = 5.71 kJ mol⁻¹, अतः ΔG° का हर 5.7 kJ mol⁻¹ K को दस गुना बदलता है। गिब्स–हेल्महोल्त्ज़ समीकरण से जोड़ने पर वान्ट हॉफ़ समीकरण d ln K/dT = ΔH°/RT² मिलता है, जिसके अनुसार ऊष्माशोषी अभिक्रिया का K ताप के साथ बढ़ता है।

ΔG°, K तय करता है; ΔG, जो वास्तविक सांद्रताओं पर निर्भर है, दिशा तय करता है। चूँकि ΔG = RT ln(Q/K), अभिक्रिया तब तक आगे चलती है जब तक Q < K। जैवरसायनज्ञ ΔG°′ प्रयोग करते हैं, जो pH 7 (जहाँ [H⁺] = 10⁻⁷ M को मानक माना जाता है) व एकांक सक्रियता वाले जल पर मानक मुक्त-ऊर्जा परिवर्तन है। हल किया उदाहरण: 310 K पर ATP जल-अपघटन हेतु ΔG°′ = −30.5 kJ mol⁻¹ लेकर, [ATP] = 5.0 mM, [ADP] = 0.50 mM व [Pᵢ] = 5.0 mM पर ΔG = −30.5 + (8.314 × 10⁻³)(310) ln[(5.0 × 10⁻⁴)(5.0 × 10⁻³)/(5.0 × 10⁻³)] = −30.5 − 19.6 = −50.1 kJ mol⁻¹। कोशिकाएँ ATP को साम्य से बहुत दूर रखती हैं, और चूँकि युग्मित अभिक्रियाओं के ΔG जुड़ते हैं, इसका जल-अपघटन ग्लूकोज़ + Pᵢ → ग्लूकोज़ 6-फ़ॉस्फ़ेट (ΔG°′ = +13.8 kJ mol⁻¹) जैसे प्रतिकूल पद को चला सकता है, जिससे युग्मित अभिक्रिया का कुल ΔG°′ −16.7 kJ mol⁻¹ होता है।

⚠️ तीन अलग प्रश्न
ΔG° बताता है कि साम्य कहाँ है, ΔG बताता है कि अभिक्रिया अभी किस ओर जाएगी, और कोई भी नहीं बताता कि कितनी तेज़ी से। धनात्मक ΔG°′ वाला पद भी कोशिका में आगे चलता है यदि उसका उत्पाद इतनी तेज़ी से हटे कि Q, K′ से नीचे रहे।

मुख्य बिंदु

  • U, H, S व G अवस्था फलन हैं: उनके परिवर्तन केवल प्रारंभिक व अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर हैं। ऊष्मा व कार्य पथ फलन हैं। IUPAC परिपाटी में ΔU = q + w, जहाँ w निकाय पर किया गया कार्य है।
  • ΔU = q_V और ΔH = q_P, तथा ΔH = ΔU + Δn_g RT। आदर्श गैस का उत्क्रमणीय समतापी प्रसार अधिकतम कार्य, −nRT ln(V₂/V₁), देता है; मुक्त प्रसार कोई कार्य नहीं करता।
  • हेस नियम: ΔrH° = ΣνΔfH°(उत्पाद) − ΣνΔfH°(अभिकारक), जहाँ संदर्भ अवस्था वाले तत्वों हेतु ΔfH° = 0। किरचॉफ़: ΔrH(T₂) = ΔrH(T₁) + ΔrCp(T₂ − T₁)।
  • द्वितीय नियम: ΔS_univ ≥ 0, समता केवल उत्क्रमणीय परिवर्तन में। ΔS_sys उत्क्रमणीय पथ पर, nR ln(V₂/V₁) या ΔH_trans/T_trans से परिकलित करें, चाहे वास्तविक परिवर्तन अनुत्क्रमणीय हो।
  • नियत T व P पर ΔG = ΔH − TΔS < 0 का अर्थ स्वतःप्रवर्तित है; संक्रमण ताप ΔH/ΔS है। गिब्स–हेल्महोल्त्ज़: [∂(ΔG/T)/∂T]_P = −ΔH/T², तथा (∂ΔG/∂T)_P = −ΔS।
  • ΔG = ΔG° + RT ln Q और ΔG° = −RT ln K; 298 K पर हर 5.7 kJ mol⁻¹, K में 10 का गुणक है। जैवरसायन pH 7 पर ΔG°′ प्रयोग करता है, और युग्मित अभिक्रियाओं के ΔG जुड़ते हैं।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. निम्नलिखित में से कौन-सी राशि उस पथ पर निर्भर करती है जिससे निकाय को एक अवस्था से दूसरी में ले जाया जाता है?

    1. आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन, ΔU
    2. अवशोषित ऊष्मा, q
    3. एन्थैल्पी में परिवर्तन, ΔH
    4. गिब्स ऊर्जा में परिवर्तन, ΔG
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — अवशोषित ऊष्मा, q

    ऊष्मा पथ फलन है: अवस्था का वही परिवर्तन ऊष्मा व कार्य की भिन्न मात्राओं से पाया जा सकता है। 300 K पर 1 mol आदर्श गैस के आयतन के समतापी दुगुनाकरण में q उत्क्रमणीय रूप से 1729 J, अंतिम दाब के विरुद्ध 1247 J और निर्वात में 0 है। ΔU लुभावना विकल्प है क्योंकि ΔU = q + w, पर दोनों भाग पथ-निर्भर होते हुए भी योग पथ-स्वतंत्र है; ΔH व ΔG भी अवस्था फलनों के परिवर्तन हैं।
  2. आदर्श गैस का एक मोल समतापी रूप से एक निर्वातित पात्र में प्रसारित होता है (मुक्त प्रसार)। गैस हेतु कौन-सा मान-समूह सही है?

    1. q = 0, w = 0, ΔU = 0, ΔS = 0
    2. q > 0, w < 0, ΔU = 0, ΔS > 0
    3. q = 0, w < 0, ΔU < 0, ΔS = 0
    4. q = 0, w = 0, ΔU = 0, ΔS > 0
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — q = 0, w = 0, ΔU = 0, ΔS > 0

    शून्य बाह्य दाब के विरुद्ध w = 0; T अपरिवर्तित है, अतः आदर्श गैस हेतु ΔU = 0 और q = ΔU − w = 0। एन्ट्रॉपी उन्हीं अवस्थाओं के बीच उत्क्रमणीय समतापी पथ पर आँकी जाती है, ΔS = R ln(V₂/V₁) > 0। ΔS = 0 वाला समूह q_rev के बजाय वास्तविक q (शून्य) लगाने का जाल है; q > 0 व w < 0 उत्क्रमणीय समतापी प्रसार है, और w < 0, ΔU < 0 व ΔS = 0 उत्क्रमणीय रुद्धोष्म प्रसार।
  3. गैसों को आदर्श मानकर और ठोसों व द्रवों के आयतन की उपेक्षा करके, 298 K पर किस अभिक्रिया हेतु ΔH, ΔU के बराबर है?

    1. H₂(g) + Cl₂(g) → 2HCl(g)
    2. 2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(l)
    3. CaCO₃(s) → CaO(s) + CO₂(g)
    4. N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g)
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — H₂(g) + Cl₂(g) → 2HCl(g)

    ΔH = ΔU + Δn_g RT, अतः ΔH = ΔU केवल तब जब गैस के मोल न बदलें। H₂ + Cl₂ → 2HCl हेतु Δn_g = 2 − 2 = 0। शेष में Δn_g = −3 (जल द्रव है), +1 व −2 है, अतः उनमें ΔH व ΔU क्रमशः −3RT, +RT व −2RT से भिन्न हैं।
  4. 298 K व 1 bar पर किस पदार्थ की मानक विरचन एन्थैल्पी परिभाषा से शून्य है?

    1. O₃(g)
    2. C(हीरा)
    3. O₂(g)
    4. Br₂(g)
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — O₂(g)

    संदर्भ अवस्था वाले तत्व, अर्थात 1 bar व दिए ताप पर उसके सर्वाधिक स्थायी रूप, हेतु ΔfH° शून्य है: ऑक्सीजन हेतु O₂(g), कार्बन हेतु ग्रेफ़ाइट और 298 K पर ब्रोमीन हेतु द्रव। ओज़ोन, हीरा व गैसीय ब्रोमीन संदर्भ रूप नहीं हैं, अतः प्रत्येक का ΔfH° अशून्य है (हीरा लगभग +1.9 kJ mol⁻¹, जो शुद्ध कार्बन होने से लुभावना विकल्प है)।
  5. 300 K पर आदर्श गैस का एक मोल समतापी रूप से V से 2V तक प्रसारित किया जाता है, एक बार उत्क्रमणीय रूप से और एक बार अंतिम दाब के बराबर नियत बाह्य दाब के विरुद्ध। कौन-सी तुलना सही है?

    1. अनुत्क्रमणीय पथ हेतु गैस का ΔS अधिक है, क्योंकि अनुत्क्रमणीय परिवर्तन गैस में अधिक अव्यवस्था उत्पन्न करता है
    2. गैस का ΔS दोनों पथों हेतु समान है, पर अनुत्क्रमणीय पथ हेतु परिवेश का ΔS कम ऋणात्मक है
    3. गैस का ΔS दोनों पथों हेतु शून्य है, क्योंकि प्रत्येक स्थिति में गैस का ताप वही रहता है
    4. अनुत्क्रमणीय पथ पर गैस अधिक ऊष्मा अवशोषित करती है, अतः वहाँ परिवेश का ΔS अधिक ऋणात्मक है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — गैस का ΔS दोनों पथों हेतु समान है, पर अनुत्क्रमणीय पथ हेतु परिवेश का ΔS कम ऋणात्मक है

    S अवस्था फलन है, अतः दोनों पथों हेतु ΔS_गैस = R ln 2 = +5.76 J K⁻¹। परिवेश q = −w खोता है: उत्क्रमणीय रूप से 1729 J (ΔS_surr = −5.76 J K⁻¹, कुल 0) पर अनुत्क्रमणीय रूप से केवल RT/2 = 1247 J (ΔS_surr = −4.16 J K⁻¹, कुल +1.61 J K⁻¹)। अनुत्क्रमणीय पथ पर गैस कम ऊष्मा अवशोषित करती है, अधिक नहीं, और समतापी प्रसार का ΔS शून्य नहीं क्योंकि आयतन बदलता है।
  6. किसी अभिक्रिया का ΔH° = +40 kJ mol⁻¹ व ΔS° = +125 J K⁻¹ mol⁻¹ है, दोनों ताप से स्वतंत्र माने गए। मानक परिस्थितियों में अभिक्रिया कब स्वतःप्रवर्तित है?

    1. हर ताप पर, क्योंकि उसका एन्ट्रॉपी परिवर्तन धनात्मक है
    2. केवल 320 K से नीचे, जहाँ ΔG° पर एन्थैल्पी पद हावी है
    3. किसी ताप पर नहीं, क्योंकि उसका एन्थैल्पी परिवर्तन धनात्मक है
    4. केवल 320 K से ऊपर, जहाँ TΔS°, ΔH° से भारी पड़ता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — केवल 320 K से ऊपर, जहाँ TΔS°, ΔH° से भारी पड़ता है

    ΔG° = ΔH° − TΔS° तब ऋणात्मक है जब T > ΔH°/ΔS° = 40,000/125 = 320 K। दोनों पद धनात्मक हों तो एन्ट्रॉपी पद केवल उच्च ताप पर जीतता है। केवल धनात्मक ΔS स्वतःप्रवर्तिता की गारंटी नहीं (उसके लिए ΔH < 0 भी चाहिए), और धनात्मक ΔH उसे वर्जित नहीं करता।
  7. नियत दाब पर किसी अभिक्रिया का 300 K पर ΔG = −10.0 kJ mol⁻¹ और 330 K पर ΔG = −16.0 kJ mol⁻¹ है। इस परास में ΔH व ΔS को नियत मानकर, कौन-सा मान-युग्म सही है?

    1. ΔS = +200 J K⁻¹ mol⁻¹ और ΔH = +50 kJ mol⁻¹
    2. ΔS = −200 J K⁻¹ mol⁻¹ और ΔH = −70 kJ mol⁻¹
    3. ΔS = +200 J K⁻¹ mol⁻¹ और ΔH = −70 kJ mol⁻¹
    4. ΔS = +200 J K⁻¹ mol⁻¹ और ΔH = +60 kJ mol⁻¹
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — ΔS = +200 J K⁻¹ mol⁻¹ और ΔH = +50 kJ mol⁻¹

    (∂ΔG/∂T)_P = −ΔS, अतः ΔS = −(−16.0 − (−10.0))/(330 − 300) = +0.200 kJ K⁻¹ mol⁻¹ = +200 J K⁻¹ mol⁻¹। तब ΔH = ΔG + TΔS = −10.0 + 300(0.200) = +50.0 kJ mol⁻¹; 330 K पर जाँच: −16.0 + 330(0.200) = +50.0। −200 का ΔS ऋण चिह्न छोड़ने से, ΔH = −70, ΔH = ΔG − TΔS लिखने से, और +60, ΔG पद भूलने से आता है।
  8. किसी उपापचयी पथ के एक पद का ΔG°′ = +7.5 kJ mol⁻¹ है, फिर भी कोशिका में वह लगातार अग्र दिशा में चलता है। कौन-सी व्याख्या ऊष्मागतिकी से संगत है?

    1. पद को उत्प्रेरित करने वाला एंज़ाइम कोशिका के भीतर उसका ΔG°′ ऋणात्मक मान तक घटा देता है
    2. ΔG°′, 1 M H⁺ को दर्शाता है, और कोशिका के pH पर मानक मान का चिह्न उलट जाता है
    3. उत्पाद अगले पद द्वारा हटाया जाता है, जिससे Q, K′ से बहुत नीचे रहता है और ΔG ऋणात्मक होता है
    4. 310 K पर TΔS°′ पद सदा ΔH°′ से भारी पड़ता है, अतः कोशिका में ΔG°′ ऋणात्मक हो जाता है
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    उत्तर: C — उत्पाद अगले पद द्वारा हटाया जाता है, जिससे Q, K′ से बहुत नीचे रहता है और ΔG ऋणात्मक होता है

    दिशा ΔG = ΔG°′ + RT ln Q = RT ln(Q/K′) से तय होती है, ΔG°′ से नहीं। यदि अगला एंज़ाइम उत्पाद को पर्याप्त तेज़ी से हटाए, तो Q, K′ से नीचे रहता है और ΔG°′ > 0 होते हुए भी ΔG < 0। एंज़ाइम ΔG°′ या K′ नहीं बदल सकता; ΔG°′ पहले से pH 7 पर परिभाषित है (1 M H⁺ वाला ΔG° है); और ऐसा कोई नियम नहीं कि 310 K पर TΔS, ΔH से भारी पड़े।
  9. 298 K पर किसी अभिक्रिया-मिश्रण का अभिक्रिया भागफल साम्य स्थिरांक का सौवाँ भाग है (Q = K/100)। R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ लेकर, इस मिश्रण में अभिक्रिया का ΔG क्या है?

    1. +11.4 kJ mol⁻¹
    2. −11.4 kJ mol⁻¹
    3. −5.7 kJ mol⁻¹
    4. −5.0 kJ mol⁻¹
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    उत्तर: B — −11.4 kJ mol⁻¹

    ΔG = ΔG° + RT ln Q = −RT ln K + RT ln Q = RT ln(Q/K) = 8.314 × 298 × ln(0.01) = 2477.6 × (−4.605) = −11,410 J mol⁻¹ ≈ −11.4 kJ mol⁻¹। Q < K होने से अभिक्रिया आगे चलती है, अतः ΔG ऋणात्मक है और +11.4 में चिह्न उलटा है; −5.7 में ln 100 के बजाय ln 10 है, और −5.0 में 2.303 गुणक के बिना log₁₀ 100 है।
  10. उत्क्रमणीय व अनुत्क्रमणीय प्रक्रमों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. उत्क्रमणीय प्रक्रम में निकाय साम्य अवस्थाओं की सतत शृंखला से गुज़रता है और किसी चर में अतिसूक्ष्म परिवर्तन से पलटा जा सकता है
    2. आदर्श गैस हेतु w = −nRT ln(V₂/V₁) नियत बाह्य दाब के विरुद्ध प्रसार का कार्य भी देता है
    3. समान दो आयतनों के बीच आदर्श गैस के समतापी प्रसार में उत्क्रमणीय पथ परिवेश को सर्वाधिक कार्य देता है
    4. चूँकि q व w पथ फलन हैं, उनका योग q + w भी पथ पर निर्भर करता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — उत्क्रमणीय प्रक्रम में निकाय साम्य अवस्थाओं की सतत शृंखला से गुज़रता है और किसी चर में अतिसूक्ष्म परिवर्तन से पलटा जा सकता है; C — समान दो आयतनों के बीच आदर्श गैस के समतापी प्रसार में उत्क्रमणीय पथ परिवेश को सर्वाधिक कार्य देता है

    उत्क्रमणीय प्रक्रम साम्य अवस्थाओं का क्रम है, जो अतिसूक्ष्म परिवर्तन से पलटा जा सकता है, और प्रसार में अधिकतम कार्य निकालता है क्योंकि P_ext सदा गैस-दाब से ठीक कम रहता है। नियत बाह्य दाब के विरुद्ध कार्य −P_ext(V₂ − V₁) है, जो परिमाण में nRT ln(V₂/V₁) से छोटा है। और q + w = ΔU, एक अवस्था फलन है, यद्यपि q व w अलग-अलग पथ पर निर्भर हैं।
  11. ऊष्मारसायन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. ऊष्मारासायनिक समीकरण उलटने पर उसके ΔH का चिह्न अपरिवर्तित रहता है
    2. हेस नियम एन्थैल्पी के अवस्था फलन होने का परिणाम है
    3. किसी यौगिक की मानक विरचन एन्थैल्पी उसके एक मोल को उसके तत्वों से, उनकी संदर्भ अवस्थाओं में, बनाने को दर्शाती है
    4. किरचॉफ़ समीकरण दर्शाता है कि जब भी ΔrCp बड़ा हो, ΔrH ताप से स्वतंत्र होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — हेस नियम एन्थैल्पी के अवस्था फलन होने का परिणाम है; C — किसी यौगिक की मानक विरचन एन्थैल्पी उसके एक मोल को उसके तत्वों से, उनकी संदर्भ अवस्थाओं में, बनाने को दर्शाती है

    हेस नियम इसलिए चलता है क्योंकि ΔH केवल प्रारंभिक व अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर है, और ΔfH° संदर्भ अवस्था वाले तत्वों से प्रति मोल यौगिक परिभाषित है। समीकरण उलटने पर ΔH का चिह्न उलटता है। किरचॉफ़ समीकरण से d(ΔrH)/dT = ΔrCp, अतः ΔrH ताप से स्वतंत्र केवल तब है जब ΔrCp = 0; बड़ा ΔrCp उसे तेज़ी से बदलता है।
  12. निम्नलिखित में से किन प्रक्रमों में निकाय का एन्ट्रॉपी परिवर्तन धनात्मक है?

    1. 273 K व 1 bar पर बर्फ़ का गलन
    2. 373 K व 1 bar पर भाप का द्रव जल में संघनन
    3. 298 K पर अभिक्रिया 2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(l)
    4. नियत ताप व दाब पर दो भिन्न आदर्श गैसों का मिश्रण
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    उत्तर: A — 273 K व 1 bar पर बर्फ़ का गलन; D — नियत ताप व दाब पर दो भिन्न आदर्श गैसों का मिश्रण

    गलन सुलभ विन्यासों की संख्या बढ़ाता है (ΔS = ΔfusH/T = +22.0 J K⁻¹ mol⁻¹), और दो आदर्श गैसों का मिश्रण प्रत्येक को घेरने हेतु अधिक आयतन देता है, ΔS = −nR Σ x ln x > 0। संघनन वाष्पन का उलटा है और S घटाता है, तथा तीन मोल गैस से द्रव जल बनने का ΔS बड़ा ऋणात्मक है।
  13. नियत ताप व दाब पर गिब्स ऊर्जा के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. ΔH < 0 व ΔS < 0 वाली अभिक्रिया सभी तापों पर स्वतःप्रवर्तित है
    2. ΔG < 0 वाला प्रक्रम स्वतःप्रवर्तित है, यद्यपि ΔG यह कुछ नहीं बताता कि वह कितनी तेज़ी से चलेगा
    3. −ΔG उस अधिकतम अ-प्रसार कार्य, जैसे वैद्युत कार्य, के बराबर है जो प्रक्रम दे सकता है
    4. ΔG° = 0 का अर्थ है कि अभिक्रिया-मिश्रण अपने संघटन से निरपेक्ष साम्य पर है
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    उत्तर: B — ΔG < 0 वाला प्रक्रम स्वतःप्रवर्तित है, यद्यपि ΔG यह कुछ नहीं बताता कि वह कितनी तेज़ी से चलेगा; C — −ΔG उस अधिकतम अ-प्रसार कार्य, जैसे वैद्युत कार्य, के बराबर है जो प्रक्रम दे सकता है

    नियत T व P पर ΔG < 0 स्वतःप्रवर्तिता का मानदंड है, और बलगतिकी अलग विषय है। −ΔG अधिकतम अ-PV कार्य है, जो सेल EMF (ΔG = −nFE) का आधार है। ΔH < 0 व ΔS < 0 होने पर ΔG केवल ΔH/ΔS से नीचे ऋणात्मक है। ΔG° = 0 का अर्थ K = 1 है; कोई विशेष मिश्रण साम्य पर तभी है जब उसका Q, 1 के बराबर हो।
  14. द्रव एथेनॉल की मानक दहन एन्थैल्पी, C₂H₅OH(l) + 3O₂(g) → 2CO₂(g) + 3H₂O(l), −1367.0 kJ mol⁻¹ है। CO₂(g) व H₂O(l) की मानक विरचन एन्थैल्पियाँ −393.5 व −285.8 kJ mol⁻¹ हैं। द्रव एथेनॉल की मानक विरचन एन्थैल्पी ____ kJ mol⁻¹ है (एक दशमलव स्थान तक; चिह्न सहित)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: -277.4

    दहन समीकरण पर हेस नियम: ΔcH° = 2ΔfH°(CO₂) + 3ΔfH°(H₂O) − ΔfH°(एथेनॉल) − 3ΔfH°(O₂), जहाँ ΔfH°(O₂) = 0। अतः ΔfH°(एथेनॉल) = 2(−393.5) + 3(−285.8) − (−1367.0) = −787.0 − 857.4 + 1367.0 = −277.4 kJ mol⁻¹। दहन पद का चिह्न न उलटने पर −3011.4 आता है।
  15. एक छोटे प्रोटीन के अवलन (unfolding) का 330 K पर ΔH = +250 kJ mol⁻¹ है। अवलन का ऊष्मा-धारिता परिवर्तन ΔCp = +6.0 kJ K⁻¹ mol⁻¹ है, जो 310 K व 330 K के बीच नियत माना गया है। किरचॉफ़ समीकरण से 310 K पर अवलन का ΔH ____ kJ mol⁻¹ है (निकटतम पूर्णांक तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 130

    ΔH(T₂) = ΔH(T₁) + ΔCp(T₂ − T₁) = 250 + 6.0 × (310 − 330) = 250 − 120 = 130 kJ mol⁻¹। धनात्मक ΔCp के साथ ताप घटाने पर ΔH घटता है; 120 जोड़ देना (370) चिह्न की भूल है। बड़ा धनात्मक ΔCp अवलन पर अध्रुवीय समूहों के जल के संपर्क में आने को दर्शाता है।
  16. एक समावयवीकरण A ⇌ B, 310 K पर [B]/[A] = 0.050 के साथ साम्य पर पहुँचता है। R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ लेकर, अभिक्रिया का मानक मुक्त-ऊर्जा परिवर्तन ΔG° ____ kJ mol⁻¹ है (एक दशमलव स्थान तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 7.7

    K = [B]/[A] = 0.050। ΔG° = −RT ln K = −8.314 × 310 × ln(0.050) = −2577.3 × (−2.9957) = +7721 J mol⁻¹ = +7.7 kJ mol⁻¹। यह धनात्मक है क्योंकि K < 1: साम्य पर A प्रबल है। 2.303 के बिना log₁₀ लगाने पर 3.4 आता है।
  17. किसी अभिक्रिया का 300 K पर ΔG° = −30.0 kJ mol⁻¹ और ΔH° = −60.0 kJ mol⁻¹ है, ΔH° को ताप से स्वतंत्र मानकर। समाकलित गिब्स–हेल्महोल्त्ज़ समीकरण से 360 K पर ΔG° ____ kJ mol⁻¹ है (निकटतम पूर्णांक तक; चिह्न सहित)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: -24

    ΔG₂/T₂ = ΔG₁/T₁ + ΔH(1/T₂ − 1/T₁) = −30.0/300 + (−60.0)(1/360 − 1/300) = −0.10000 + 0.03333 = −0.06667 kJ K⁻¹ mol⁻¹। ΔG₂ = 360 × (−0.06667) = −24.0 kJ mol⁻¹। जाँच: ΔS° = (ΔH° − ΔG°)/T = (−60.0 + 30.0)/300 = −0.100 kJ K⁻¹ mol⁻¹, और −60.0 − 360(−0.100) = −24.0। ऋणात्मक ΔS वाली ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया गर्म करने पर कम अनुकूल हो जाती है।
  18. किसी आदर्श गैस के 2.00 mol, 300 K पर अपने अंतिम दाब के बराबर नियत बाह्य दाब के विरुद्ध 10.0 L से 40.0 L तक समतापी रूप से प्रसारित होते हैं। R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ लेकर, गैस का एन्ट्रॉपी परिवर्तन ____ J K⁻¹ है (एक दशमलव स्थान तक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 23.1

    S अवस्था फलन है, अतः उन्हीं अवस्थाओं के बीच उत्क्रमणीय समतापी पथ लें: ΔS = nR ln(V₂/V₁) = 2.00 × 8.314 × ln 4 = 16.628 × 1.3863 = 23.05 J K⁻¹ ≈ 23.1 J K⁻¹। वास्तविक ऊष्मा को T से भाग देना जाल है: q = P₂ΔV = nRT(1 − V₁/V₂) = 3741 J, और 3741/300 = 12.5 J K⁻¹ परिवेश द्वारा खोई एन्ट्रॉपी है, गैस द्वारा पाई गई नहीं।