सामाजिक मनोविज्ञान: प्रत्यक्षण, प्रभाव, अभिवृत्तियाँ व समूह
2. प्रभाव-निर्माण, वर्गीकरण व अंतर्निहित व्यक्तित्व सिद्धांत
प्रभाव-निर्माण (impression formation) वह है जिसमें जानकारी के बिखरे टुकड़े किसी व्यक्ति के एकीकृत चित्र में जोड़े जाते हैं। Solomon Asch ने दिखाया कि यह प्रक्रिया संरूपात्मक (configural) है, कोई सरल योग नहीं: कुछ गुण केंद्रीय (central) होते हैं और शेष का अर्थ पुनर्गठित कर देते हैं। अन्यथा समान गुण-सूची में एक ही शब्द को “गर्म (warm)” से “ठंडा (cold)” बदलने से पूरा प्रभाव रूपांतरित हो गया, जबकि “विनम्र” को “रूखा” बदलने से थोड़ा ही असर हुआ। दो और नियमितताएँ: प्राथमिकता प्रभाव (primacy effect), जिसमें पहले प्रस्तुत जानकारी बाद की जानकारी से अधिक तौली जाती है, तथा प्रभामंडल प्रभाव (halo effect), जिसमें एक प्रमुख अच्छा (या बुरा) गुण असंबंधित गुणों के निर्णयों को रंग देता है।
जटिल सामाजिक जगत को सँभालने हेतु मन लोगों को समूहों में वर्गीकृत (categorise) करता है — आयु, लिंग, व्यवसाय, राष्ट्रीयता से — जो श्रम बचाता है पर रूढ़िबद्धता तथा अंतःसमूह बनाम बहिःसमूह सीमाओं के तीक्ष्णन का आधार है। अंतर्निहित व्यक्तित्व सिद्धांत (implicit personality theory) प्रत्येक व्यक्ति का यह निजी जाल है कि कौन-से गुण साथ चलते हैं (उदाहरणार्थ, यह अपरीक्षित विश्वास कि शांत व्यक्ति अमित्र भी होता है)। ऐसे सिद्धांत हमें “दी गई जानकारी से आगे जाने” देते हैं, रिक्तियों को अपेक्षाओं से भरते हैं, जो निर्णय को तेज़ करता है पर त्रुटि को जमा सकता है।
3. सामाजिक प्रभाव: अनुरूपता, अनुपालन व आज्ञापालन
अनुरूपता (conformity) अपने व्यवहार या विश्वास को किसी समूह से मिलाने हेतु समायोजित करना है। Muzafer Sherif ने स्वचालित-गति प्रभाव (autokinetic effect) (एक अस्पष्ट कार्य, जहाँ स्थिर प्रकाश-बिंदु हिलता प्रतीत होता है) का उपयोग किया और पाया कि वैयक्तिक अनुमान एक साझा समूह-मानक पर अभिसरित हो गए। Solomon Asch ने एक असंदिग्ध (unambiguous) कार्य — किसी रेखा को तीन तुलना-रेखाओं में से एक से मिलाना — का उपयोग किया और फिर भी पाया कि प्रतिभागी एक सर्वसम्मत पर स्पष्ट रूप से गलत बहुमत के साथ निर्णायक (critical) परीक्षणों के पर्याप्त अंश पर चले गए, और अधिकांश ने कम-से-कम एक बार अनुरूपता की। Deutsch व Gerard ने दो अभिप्रेरण अलग किए: सूचनात्मक प्रभाव (informational influence) (समूह को वास्तविकता के साक्ष्य के रूप में स्वीकारना) तथा मानकीय प्रभाव (normative influence) (पसंद या स्वीकार किए जाने हेतु साथ चलना)।
अनुपालन (compliance) किसी प्रत्यक्ष अनुरोध पर सहमत होना है, और कई तकनीकें इसे बढ़ाती हैं। फुट-इन-द-डोर (foot-in-the-door) तकनीक पहले एक छोटा अनुरोध मनवाती है, ताकि बाद का बड़ा अनुरोध व्यक्ति की सहायक के रूप में नई आत्म-छवि से मेल खाए। डोर-इन-द-फ़ेस (door-in-the-face) तकनीक इसका उलटा करती है: एक बड़ा अनुरोध अस्वीकृत होता है, और उसके बाद आने वाला छोटा वास्तविक अनुरोध विषमता (contrast) से तथा प्रत्युपकार की अनुभूति से लाभ उठाता है। लो-बॉलिंग (low-balling) आकर्षक मूल्य पर प्रतिबद्धता जीतती है, फिर जोड़ी गई लागतें प्रकट करती है। आज्ञापालन (obedience) किसी प्राधिकारी के प्रत्यक्ष आदेश पर कार्य करना है। Stanley Milgram के प्रयोगों ने दिखाया कि अधिकांश सामान्य लोग प्रयोगकर्ता के उकसाने पर एक विरोध करते अधिगमकर्ता को वे झटके देंगे जिन्हें वे ख़तरनाक विद्युत झटके मानते थे; आज्ञापालन तब घटा जब पीड़ित निकट था, प्राधिकारी अधिक दूर या कम वैध था, या किसी सहकर्मी ने इनकार कर दिया।
4. अभिवृत्तियाँ, अनुनय व संज्ञानात्मक असंगति
अभिवृत्ति (attitude) किसी वस्तु का मूल्यांकन है, जिसे प्रायः तीन घटकों में विश्लेषित किया जाता है (ABC मॉडल): भावात्मक (affective) (भावनाएँ), व्यवहारात्मक (behavioural) (क्रिया-प्रवृत्तियाँ) तथा संज्ञानात्मक (cognitive) (विश्वास)। विश्वास (belief) इस बारे में संज्ञान है कि क्या सत्य है; मूल्य (value) एक अमूर्त, स्थायी मार्गदर्शक सिद्धांत है (Rokeach ने साध्य अंतिम-अवस्थाओं को साधनगत आचरण-रीतियों से अलग किया)। अभिवृत्तियाँ चिरसम्मत व नैमित्तिक अनुबंधन, प्रेक्षणात्मक अधिगम, तथा मात्र-अनावरण (mere exposure) से बनती हैं, जिससे केवल बारंबार संपर्क ही पसंद बढ़ा देता है।
अनुनय किसी संदेश के माध्यम से अभिवृत्ति-परिवर्तन है। विस्तारण-संभाव्यता मॉडल (Elaboration Likelihood Model) (Petty व Cacioppo) दो मार्ग प्रस्तावित करता है। केंद्रीय मार्ग (central route) तब चलता है जब श्रोता अभिप्रेरित व ध्यानपूर्वक सोचने में सक्षम हो, अतः तर्कों की गुणवत्ता परिणाम तय करती है और परिवर्तन टिकाऊ होता है। परिधीय मार्ग (peripheral route) तब चलता है जब अभिप्रेरण या सामर्थ्य निम्न हो, अतः लोग संकेतों — स्रोत की आकर्षकता या विशेषज्ञता, तर्कों की मात्र संख्या — पर निर्भर रहते हैं और परिवर्तन उथला होता है।
संज्ञानात्मक असंगति (cognitive dissonance) (Leon Festinger) असंगत संज्ञानों को धारण करने की असुविधा है, जो व्यक्ति को संगति पुनः स्थापित करने, प्रायः किसी अभिवृत्ति को बदलकर, प्रेरित करती है। Festinger व Carlsmith ने पाया कि जिन प्रतिभागियों को किसी नीरस कार्य को रोचक बताने हेतु केवल तुच्छ राशि दी गई उन्होंने बाद में इसे उनसे अधिक माना जिन्हें अच्छी राशि दी गई: झुकने हेतु थोड़े बाह्य औचित्य के साथ उन्होंने अपनी अभिवृत्ति बदलकर असंगति घटाई।
5. पूर्वाग्रह, आक्रामकता, शक्ति व समाजोन्मुखी व्यवहार
पूर्वाग्रह (prejudice) किसी समूह व उसके सदस्यों के प्रति एक (प्रायः नकारात्मक) अभिवृत्ति है; विभेद (discrimination) वह अनुचित व्यवहार है जो इसे अभिव्यक्त करता है; रूढ़िधारणा (stereotype) समूह के गुणों के बारे में संज्ञानात्मक विश्वास है। ये तीनों अलग हो सकते हैं: पूर्वाग्रह बिना क्रियान्वित विभेद के रह सकता है, और विभेद बिना वैयक्तिक पूर्वाग्रह के मानकों से चल सकता है। आक्रामकता (aggression) — हानि पहुँचाने के आशय वाला व्यवहार — को कुंठा-आक्रामकता विवरण, सामाजिक-अधिगम सिद्धांत (Bandura के वे अध्ययन जिनमें बच्चों ने देखी गई आक्रामकता का अनुकरण किया), तथा जैविक व स्थितिजन्य संकेतों के मिलने से समझाया जाता है।
शक्ति (power) दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता है। French व Raven ने पाँच आधार बताए: पुरस्कार (reward) शक्ति (लाभ देना), दंडात्मक (coercive) शक्ति (दंड की धमकी), वैध (legitimate) शक्ति (निर्देश देने का स्वीकृत अधिकार), संदर्भ (referent) शक्ति (प्रभावक से तादात्म्य व प्रशंसा) तथा विशेषज्ञ (expert) शक्ति (श्रेष्ठ ज्ञान)। समाजोन्मुखी व्यवहार (prosocial behaviour) दूसरों को लाभ पहुँचाता है। Latane व Darley के दर्शक-प्रभाव (bystander effect) पर कार्य ने दिखाया कि जैसे-जैसे दर्शकों की संख्या बढ़ती है, ज़रूरतमंद व्यक्ति को प्रायः सहायता मिलने की संभावना घटती है, जो उत्तरदायित्व-विसरण (diffusion of responsibility) (प्रत्येक साक्षी मानता है कि कोई और कार्य करेगा) तथा बहुलवादी अज्ञान (pluralistic ignorance) (प्रत्येक दूसरों की निष्क्रियता को इस संकेत के रूप में पढ़ता है कि कुछ गलत नहीं है) से होता है।
6. समूह गतिकी व अंतरसमूह संबंध
- सामाजिक सुकरण (social facilitation): दूसरों की उपस्थिति सरल, सुसीखे कार्यों पर निष्पादन सुधारती है पर जटिल, नए कार्यों पर बिगाड़ती है, क्योंकि दूसरे उत्तेजन बढ़ाते हैं और उत्तेजन प्रभावी अनुक्रिया को प्रबल करता है (Triplett की आरंभिक खोज का Zajonc का विवरण)।
- सामाजिक शैथिल्य (social loafing): जब वैयक्तिक योगदान पहचाने नहीं जा सकते तो लोग प्रायः किसी सामूहिक कार्य पर कम प्रयास लगाते हैं (Ringelmann प्रभाव), जो सुकरण का उलटा है।
- समूह-चिंतन (groupthink) (Janis): सर्वसम्मति के दबाव में एक संसक्त समूह असहमति व यथार्थ मूल्यांकन दबा देता है, जिससे दोषपूर्ण निर्णय बनते हैं; समूह-ध्रुवीकरण (group polarization) समूह के औसत मत को सदस्यों के आरंभिक निजी मतों से अधिक चरम बना देता है।
अंतरसमूह संबंधों पर दो सिद्धांत प्रमुख हैं। यथार्थ संघर्ष सिद्धांत (realistic conflict theory) (Sherif, Robbers Cave अध्ययन से) मानता है कि शत्रुता दुर्लभ संसाधनों पर वास्तविक प्रतिस्पर्धा से उपजती है और उन अधिस्थ लक्ष्यों (superordinate goals) से घटती है जिन्हें पाने हेतु दोनों समूहों को एक-दूसरे की आवश्यकता हो। सामाजिक पहचान सिद्धांत (social identity theory) (Tajfel व Turner) मानता है कि लोगों को केवल “हम” व “वे” में वर्गीकृत कर देना — किसी तुच्छ आधार पर भी, जैसा न्यूनतम-समूह अध्ययनों ने दिखाया — अंतःसमूह पक्षधरता उत्पन्न करने हेतु पर्याप्त है, क्योंकि लोग अपने समूहों से आत्म-सम्मान खींचते हैं। Gordon Allport की संपर्क परिकल्पना (contact hypothesis) कहती है कि संपर्क पूर्वाग्रह केवल कुछ शर्तों पर घटाता है: समान प्रतिष्ठा, साझा लक्ष्य, अंतरसमूह सहयोग तथा प्राधिकारियों या मानकों का समर्थन।
मुख्य बिंदु
- आरोपण व्यवहार को प्रवृत्ति या स्थिति से समझाता है; Kelley का सहप्रसरण मॉडल सर्वसम्मति, विशिष्टता व संगति पढ़ता है (उच्च-उच्च-उच्च बाह्य की ओर, निम्न-निम्न-उच्च आंतरिक की ओर)। मूलभूत आरोपण त्रुटि दूसरों के कृत्यों का कारण अधिकतर उनके चरित्र को मानती है; स्व-सेवी पक्षपात अपने आत्म-सम्मान की रक्षा करता है।
- प्रभाव-निर्माण संरूपात्मक है: केंद्रीय गुण (गर्म-ठंडा) पूरे प्रभाव को पुनर्गठित करते हैं, और प्राथमिकता व प्रभामंडल प्रभाव इसे पक्षपाती करते हैं। वर्गीकरण रूढ़िबद्धता का आधार है, और अंतर्निहित व्यक्तित्व सिद्धांत यह मान्यता देता है कि कौन-से गुण साथ चलते हैं।
- अनुरूपता: Sherif का अस्पष्ट कार्य सूचनात्मक प्रभाव दिखाता है, Asch का असंदिग्ध कार्य मुख्यतः मानकीय दबाव। अनुपालन फुट-इन-द-डोर (पहले छोटा फिर बड़ा) व डोर-इन-द-फ़ेस (पहले बड़ा फिर छोटा) उपयोग करता है; Milgram द्वारा दिखाया आज्ञापालन पीड़ित की निकटता व कमज़ोर या अधिक दूर प्राधिकारी से घटता है।
- अभिवृत्तियों के भावात्मक, व्यवहारात्मक व संज्ञानात्मक घटक होते हैं। विस्तारण-संभाव्यता मॉडल का केंद्रीय मार्ग (प्रबल तर्क, ध्यानपूर्वक सोच) टिकाऊ परिवर्तन देता है, परिधीय मार्ग (संकेत) उथला। Festinger की संज्ञानात्मक असंगति बाह्य औचित्य कम होने पर अभिवृत्ति-परिवर्तन चलाती है।
- पूर्वाग्रह एक अभिवृत्ति है, विभेद व्यवहार, रूढ़िधारणा विश्वास। French व Raven के शक्ति के पाँच आधार हैं पुरस्कार, दंडात्मक, वैध, संदर्भ व विशेषज्ञ। दर्शक-प्रभाव उत्तरदायित्व-विसरण व बहुलवादी अज्ञान से उत्पन्न होता है।
- समूहों में दूसरों की उपस्थिति सरल कार्यों को सुकर व जटिल को बाधित करती है; सामाजिक शैथिल्य योगदान गुमनाम होने पर प्रयास घटाता है; समूह-चिंतन निर्णयों को हानि पहुँचाता है। यथार्थ संघर्ष सिद्धांत शत्रुता को संसाधन-प्रतिस्पर्धा से जोड़ता है (अधिस्थ लक्ष्यों से शांत); सामाजिक पहचान सिद्धांत उसे मात्र वर्गीकरण से जोड़ता है; Allport की संपर्क परिकल्पना वे शर्तें तय करती है जिन पर संपर्क पूर्वाग्रह घटाता है।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।