विश्लेषण की विधियाँ: डेटा-संग्रह, मात्रात्मक व गुणात्मक विश्लेषण, नैतिकता तथा कॉर्पस

यह अध्याय मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान (XH) पेपर के खंड XH3.6, “Methods of Analysis (विश्लेषण की विधियाँ)”, का उत्तर देता है, जो XH3 भाषाविज्ञान का एक भाग है — छह वैकल्पिक खंडों में से एक, जिसे आवेदन के समय चुना जाता है। यह पढ़ाता है कि भाषाविद डेटा कैसे जुटाते हैं — क्षेत्रकार्य (fieldwork), वक्ताओं से उद्भावन (elicitation), नियंत्रित प्रयोग व प्रतिचयन (sampling) — उसका विश्लेषण मात्रात्मक रूप से (आवृत्ति, type-token अनुपात व सार्थकता-परीक्षण जैसी मूल सांख्यिकी) तथा गुणात्मक रूप से (अनुलेखन, कोडिंग, विमर्श- व वार्तालाप-विश्लेषण) कैसे करते हैं, डेटा देने वाले वक्ताओं के प्रति नैतिक दायित्व क्या हैं, तथा कॉर्पस (corpora) का विकास, एनोटेशन, प्रकार व विश्लेषण कैसे होता है। यहाँ के थोड़े-से संख्यात्मक प्रश्न कॉर्पस-गणनाएँ हैं: type-token अनुपात, सामान्यीकृत आवृत्तियाँ व प्रकार-गणना।

1. डेटा-संग्रह: क्षेत्रकार्य व उद्भावन

भाषावैज्ञानिक क्षेत्रकार्य (fieldwork) किसी भाषा का उसके अपने भाषा-समुदाय में अध्ययन है, प्रायः मातृभाषी परामर्शदाताओं (consultants) के साथ काम करके (पुराना शब्द “informant” अब टाला जाता है क्योंकि वह उनकी विशेषज्ञता को कम आँकता है)। क्षेत्रकर्मी स्वाभाविक डेटा (सहज वार्तालाप, कथाएँ, पाठ) तथा किसी विशिष्ट रूप को उद्दीप्त करके जुटाया गया उद्भावित (elicited) डेटा दोनों अभिलेखित करता है। स्वाभाविक डेटा दिखाता है कि वक्ता वस्तुतः क्या करते हैं पर उसमें वह दुर्लभ रूप कभी न आए जिसकी व्याकरण को आवश्यकता है; उद्भावित डेटा उस रूप को लक्ष्य करता है पर कार्य (task) से विकृत हो सकता है। Labov के प्रेक्षक-विरोधाभास (observer’s paradox) में यही केंद्रीय तनाव है: लक्ष्य यह जानना है कि लोग बिना देखे जाने पर कैसे बोलते हैं, पर भाषण जुटाने का एकमात्र उपाय उसे देखना ही है।

  • अनुवाद / प्रत्यक्ष उद्भावन: शोधकर्ता संपर्क-भाषा में कोई शब्द या वाक्य देकर समतुल्य माँगता है। तेज़, पर यह संपर्क-भाषा की संरचना आयात कर देता है और जिनका सुथरा अनुवाद न हो उन रूपों को चूक जाता है।
  • प्रतिस्थापन ढाँचे (substitution frames): एक स्थिर वाक्य-ढाँचा अपरिवर्तित रखकर उसका एक रिक्त स्थान बदला जाता है, ताकि कोई प्रतिमान (जैसे किसी क्रिया के समस्त पुरुष–वचन रूप) क्रमबद्ध रूप से मानचित्रित हो।
  • व्याकरणिकता (स्वीकार्यता) निर्णय: परामर्शदाता से पूछा जाता है कि गढ़ा गया वाक्य भाषा में संभव है या नहीं। ये ज्ञान की सीधी जाँच करते हैं पर वक्ता के परा-भाषिक अंतर्बोध और कार्य के प्रस्तुतीकरण पर निर्भर रहते हैं।
  • उद्दीपन-आधारित उद्भावन: चित्र, वीडियो या बिना-शब्दों की कहानी-पुस्तकें (जैसे “frog story” कथा-कार्य) अनुवाद-संकेत के बिना संबद्ध भाषण उत्पन्न करती हैं; रंग-पट्टियाँ, नातेदारी-ग्रिड आदि उपकरण अर्थ-क्षेत्रों का उद्भावन करते हैं।
⚠️ उद्भावित और स्वाभाविक एक नहीं
व्याकरणिकता-निर्णय या अनुवाद बताता है कि वक्ता ध्यानपूर्वक क्या स्वीकारेगा या गढ़ेगा, जो हमेशा वह नहीं होता जो वह बहते भाषण में उत्पन्न करता है। सावधान शोध त्रिकोणन (triangulation) करता है: उद्भावित रूप को सहज डेटा से जाँचता है, और सामान्य प्रयोग का कोई दावा केवल निर्णय-डेटा पर नहीं टिकाता।

2. प्रयोग व प्रतिचयन

प्रयोग (experiment) एक स्वतंत्र चर (independent variable) में फेरबदल करके किसी आश्रित चर (dependent variable) पर उसका प्रभाव मापता है, अन्य कारकों (confounds) को स्थिर रखते हुए, ताकि परिणाम का अंतर उस फेरबदल को आरोपित किया जा सके। सामान्य मनोभाषावैज्ञानिक प्रतिमानों में शाब्दिक निर्णय (lexical decision) व स्व-गति वाचन (self-paced reading) (प्रतिक्रिया-समय मापते हुए), वाचन के दौरान नेत्र-अनुवर्तन (eye-tracking), तथा रेटिंग-स्केल पर श्रेणीबद्ध स्वीकार्यता-निर्णय शामिल हैं। प्रयोग की शक्ति नियंत्रण है; जोखिम यह कि नियंत्रित, कृत्रिम परिवेश स्वाभाविक भाषा-प्रयोग को न दर्शाए, अतः परिणामों को कॉर्पस या क्षेत्र-डेटा से जाँचना पड़ता है।

कोई अध्ययन पूरी समष्टि (population) अभिलेखित नहीं कर सकता, अतः वह एक प्रतिदर्श (sample) से काम करता है, और प्रतिदर्श की गुणवत्ता तय करती है कि निष्कर्ष कितनी दूर तक सामान्यीकृत होंगे। प्रायिकता-प्रतिचयन (probability sampling) प्रत्येक सदस्य को चयन का ज्ञात, शून्येतर अवसर देता है और अकेला ही सांख्यिकीय सामान्यीकरण का आधार बनता है; अप्रायिकता-प्रतिचयन ऐसा नहीं करता और पक्षपात का जोखिम रखता है।

  • यादृच्छिक (सरल प्रायिकता) प्रतिचयन: प्रत्येक सदस्य का अवसर समान; व्यवस्थित (systematic) प्रतिचयन सूची से प्रत्येक k-वें सदस्य को लेता है।
  • स्तरित (stratified) प्रतिचयन: समष्टि को स्तरों (आयु, लिंग, सामाजिक वर्ग, क्षेत्र) में बाँटकर प्रत्येक के भीतर से प्रतिदर्श लिया जाता है, जिससे समाजभाषावैज्ञानिक अध्ययन समूहों की न्यायसंगत तुलना कर सके।
  • सुविधा (convenience) प्रतिचयन जो सामने हो उसे लेता है (प्रायः छात्र-प्रतिभागियों के साथ समस्या); हिमगोलक (snowball) प्रतिचयन प्रत्येक प्रतिभागी से औरों का परिचय कराने को कहकर छिपे या घनिष्ठ समुदायों तक पहुँचता है। दोनों अप्रायिकता-विधियाँ हैं, सुविधाजनक पर प्रतिनिधिक नहीं।
🎯 प्रतिनिधित्व क्यों महत्त्वपूर्ण है
किसी एक समूह का अति-प्रतिनिधित्व करने वाला प्रतिदर्श इच्छित से संकरे प्रश्न का उत्तर देता है: एक विद्यालय से “किशोर-भाषा” का अध्ययन उसी विद्यालय का वर्णन करता है, सभी किशोरों का नहीं। बड़े प्रतिदर्श संयोग-त्रुटि घटाते हैं पर पक्षपाती चयन-ढाँचा नहीं सुधार सकते, अतः कौन छूट गया यह उतना ही मायने रखता है जितना कितने सम्मिलित हैं।

3. मात्रात्मक विश्लेषण: मूल सांख्यिकी

मात्रात्मक विश्लेषण आवृत्ति (frequency) से आरंभ होता है। बहता हुआ शब्द एक टोकन (token) है; एक विशिष्ट शब्द-रूप एक प्रकार (type) है, अतः “the cat saw the dog” में 5 टोकन पर 4 प्रकार हैं (“the” दोहराया गया)। चूँकि बड़े पाठ में अधिक टोकन होते हैं, भिन्न आकारों के पाठों की कच्ची गणनाएँ तुलनीय नहीं; हम सामान्यीकृत आवृत्ति (normalized frequency) = (कच्ची गणना ÷ कुल टोकन) × आधार, प्रायः प्रति दस लाख शब्द (per million), बताते हैं। type-token अनुपात (TTR) = प्रकार ÷ टोकन शाब्दिक विविधता आँकता है, पर यह पाठ बढ़ने पर घटता है (सामान्य शब्द बार-बार आते हैं), अतः TTR केवल समान-लंबाई के पाठों के बीच या मानकीकरण के बाद तुलनीय है।

गणनाओं से आगे, वर्णनात्मक सांख्यिकी डेटा का सार देती है: माध्य (mean), माध्यिका (median) व बहुलक (mode) केंद्र बताते हैं, जबकि परिसर (range) व मानक विचलन (standard deviation) फैलाव का वर्णन करते हैं। फिर आगमनात्मक/निष्कर्षात्मक सांख्यिकी पूछती है कि कोई देखा गया प्रतिरूप वास्तविक है या संयोग का परिणाम। दो श्रेणीगत (categorical) चरों के बीच संबंध हेतु (मान लें, लिंग के अनुसार किसी रूपांतर का प्रयोग) काई-वर्ग (chi-square) परीक्षण मानक है; दो समूहों के माध्यों के अंतर हेतु t-परीक्षण। परिणाम तब सांख्यिकीय रूप से सार्थक कहलाता है जब उसका p-मान किसी घोषित सीमा (प्रायः α = 0.05) से नीचे गिरे, इसीलिए सार्थकता-स्तर सदैव बताना आवश्यक है।

भाषाविज्ञान में सामान्य मात्रात्मक माप
मापक्या पकड़ता हैविशिष्ट उपयोग
सामान्यीकृत आवृत्ति (प्रति दस लाख)पाठ-आकार से स्वतंत्र, किसी रूप की दरकॉर्पसों में शब्द-आवृत्ति की तुलना
type-token अनुपातशाब्दिक विविधता (लंबाई-संवेदी)समान प्रतिदर्शों में शब्दावली की समृद्धि
माध्य व मानक विचलनकिसी माप का केंद्र व फैलावऔसत वाक्य-लंबाई, प्रतिक्रिया-समय
काई-वर्गश्रेणीगत चरों के बीच संबंधसामाजिक समूह के अनुसार रूपांतर-चयन
⚠️ सहसंबंध कारण नहीं, और लंबे पाठ का TTR अधिक विविधता नहीं
साथ बढ़ते दो चर किसी तीसरे का अनुसरण कर सकते हैं। और चूँकि TTR लंबाई के साथ घटता है, छोटा पाठ प्रायः लंबे पाठ से ऊँचा TTR दिखाएगा, चाहे लंबा पाठ शाब्दिक रूप से अधिक समृद्ध ही क्यों न हो; केवल समान लंबाइयाँ तुलना करें, या मानकीकृत TTR का उपयोग करें।

4. गुणात्मक विश्लेषण

गुणात्मक विश्लेषण गणनाओं के बजाय संदर्भ में भाषा का अर्थ व संरचना खोजता है। यह अनुलेखन (transcription) से आरंभ होता है, जो स्वयं एक सिद्धांत-भरित चयन है: सादा वर्तनी-आधारित (orthographic) अनुलेख शब्द पकड़ता है, ध्वन्यात्मक (phonetic) अनुलेख उच्चारण, और वार्तालाप-विश्लेषणात्मक अनुलेख (Jefferson परिपाटियाँ) अतिव्यापन, विराम, बलाघात व स्वराघात अभिलेखित करता है क्योंकि वे अंतःक्रियात्मक अर्थ वहन करते हैं। फिर अनुलेख को कोडित (coded) किया जाता है — अंशों पर आवर्ती कोटियों के लेबल लगते हैं जिन्हें विश्लेषक बनाता व परिष्कृत करता है।

  • विषयगत / अंतर्वस्तु विश्लेषण (thematic / content analysis): पाठों या साक्षात्कारों के समूह में आवर्ती विषयों की पहचान, कभी-कभी उनकी आवृत्ति गिनते हुए।
  • आधारित सिद्धांत (grounded theory): पूर्वनिर्धारित परिकल्पना जाँचने के बजाय क्रमिक कोडिंग द्वारा डेटा से ही सिद्धांत खड़ा करना।
  • विमर्श-विश्लेषण (discourse analysis) अध्ययन करता है कि पाठ के विस्तारों में अर्थ, पक्ष व शक्ति कैसे रचे जाते हैं; वार्तालाप-विश्लेषण (CA) बातचीत की सूक्ष्म-प्रणाली की पड़ताल करता है — बारी-लेना (turn-taking), सन्निकट-युग्म (जैसे प्रश्न–उत्तर), व मरम्मत (repair)।
🎯 गहराई, त्रिकोणन व आत्म-परावर्तन
गुणात्मक शोध सांख्यिकीय सामान्यीकरण के बदले गहराई व संदर्भ लेता है। यह अपने दावों की रक्षा त्रिकोणन (triangulation) (अनेक विधियों या डेटा-स्रोतों को मिलाना ताकि निष्कर्ष अभिसरित हों) व आत्म-परावर्तन (reflexivity) (विश्लेषक का यह लेखा रखना कि उसकी अपनी उपस्थिति व मान्यताओं ने डेटा को कैसे आकार दिया) से करता है। मात्रात्मक व गुणात्मक विधियाँ प्रायः मिश्रित-विधि (mixed-methods) अभिकल्प में संयुक्त होती हैं, प्रत्येक वह उत्तर देती जो दूसरी नहीं दे सकती।

5. वक्ताओं के साथ कार्य की नैतिकता

चूँकि भाषावैज्ञानिक डेटा लोगों से आता है, शोध उनके प्रति दायित्व वहन करता है। सूचित सहमति (informed consent) का अर्थ है कि प्रतिभागी अध्ययन का उद्देश्य, प्रक्रिया व उपयोग समझें और स्वतंत्र रूप से सहमत हों, तथा किसी भी समय हट जाने का अधिकार रखें। गुमनामी व गोपनीयता (anonymity and confidentiality) पहचान की रक्षा करती हैं: नाम व पहचान-सूचक ब्यौरे हटाए या छद्मनामित किए जाते हैं और अभिलेख सुरक्षित रखे जाते हैं। अधिकांश संस्थान डेटा-संग्रह आरंभ होने से पहले अध्ययन को नैतिकता-समीक्षा (ethics review) से उत्तीर्ण होना अनिवार्य करते हैं।

  • बौद्धिक संपदा व स्वामित्व: भाषा व अभिलेख नैतिक रूप से और प्रायः विधिक रूप से भी समुदाय व वक्ताओं के हैं, शोधकर्ता के नहीं; पहुँच व पुनःप्रयोग मान लिए नहीं, तय किए जाने चाहिए।
  • लाभ व पारस्परिकता: शोध को केवल डेटा निकालने के बजाय लौटाना चाहिए — प्रशिक्षण, सामग्री, ऐसा प्रलेखन जो समुदाय काम में ला सके; सहभागी मॉडल वक्ताओं को साझेदार बनाते हैं।
  • संवेदनशील वक्ताओं व संकटग्रस्त भाषाओं में सावधानी: अंतिम वक्ता, बच्चे व हाशिए के समुदाय विशेष संवेदनशीलता माँगते हैं, और परामर्शदाता उचित स्वीकृति तथा यथासंभव श्रेय व प्रतिपूर्ति के पात्र हैं।

6. कॉर्पस: विकास, एनोटेशन, प्रकार व विश्लेषण

कॉर्पस (corpus) किसी भाषा या रूपभेद का प्रतिनिधित्व करने हेतु जुटाया गया पाठों का बड़ा, सिद्धांत-सम्मत, मशीन-पठनीय संग्रह है। विकास एक प्रतिचयन-ढाँचे (sampling frame) पर टिकता है: कौन-से पाठ-प्रकार (रजिस्टर, विधाएँ, भाषण बनाम लेखन) और किस अनुपात में सम्मिलित हों, ताकि कॉर्पस केवल बड़ा नहीं, संतुलित व प्रतिनिधिक हो। प्रत्येक पाठ मेटाडेटा (लेखक, तिथि, रजिस्टर, स्रोत) वहन करता है, और उसे जुटाने में कॉपीराइट व अनुमति का ध्यान आवश्यक है। Brown Corpus (लगभग दस लाख शब्दों की लिखित अमेरिकी अंग्रेज़ी) एक आरंभिक मील का पत्थर था; British National Corpus लगभग 10 करोड़ शब्दों की लिखित व मौखिक अंग्रेज़ी तक फैला है।

  • माध्यम व परिधि के अनुसार: लिखित बनाम मौखिक (मौखिक को अनुलेखन चाहिए); सामान्य / संदर्भ (reference) कॉर्पस (समूची भाषा का प्रतिनिधि) बनाम विशेषीकृत कॉर्पस (एकल रजिस्टर या क्षेत्र)।
  • काल के अनुसार: समकालिक (synchronic) (एक अवधि) बनाम ऐतिहासिक / कालक्रमिक (diachronic) (विभिन्न अवधियों में); मॉनिटर कॉर्पस निरंतर बढ़ता रहता है ताकि नए शब्द व परिवर्तन अनुसरित हो सकें।
  • भाषा-संबंध के अनुसार: समानांतर (parallel) कॉर्पस वही पाठ दो या अधिक भाषाओं में रखता है, अनुवाद के रूप में संरेखित; तुलनीय (comparable) कॉर्पस विभिन्न भाषाओं में मिलते-जुलते पाठ रखता है जो परस्पर अनुवाद नहीं हैं। शिक्षार्थी (learner) कॉर्पस द्वितीय-भाषा शिक्षार्थियों का उत्पादन संकलित करता है।

एनोटेशन (annotation) कच्चे पाठ पर व्याख्यात्मक परतें जोड़ता है। टोकनीकरण (tokenization) (टोकनों में विभाजन) व लेमीकरण (lemmatization) (शब्द-रूपों को आधार-लेमा से मिलाना) के बाद सबसे सामान्य परत शब्द-भेद (POS) टैगिंग है; पूर्ण वाक्यविन्यास-एनोटेशन एक ट्रीबैंक (treebank) बनाता है। एनोटेशन हस्तचालित, स्वचालित या अर्ध-स्वचालित हो सकता है, और उसकी गुणवत्ता अंतर-एनोटेटर सहमति (inter-annotator agreement) से जाँची जाती है। चूँकि प्रत्येक टैग किसी विश्लेषणात्मक निर्णय को दर्शाता है, एनोटेशन व्याख्या है, तटस्थ तथ्य नहीं।

विश्लेषण कॉर्पस को उपकरणों से पढ़ता है। कॉनकॉर्डेंस (concordance) किसी खोज-शब्द की प्रत्येक उपस्थिति उसके संदर्भ सहित दिखाता है — संदर्भ-सहित-कीवर्ड (KWIC) प्रदर्शन — जो प्रयोग के प्रतिरूप उजागर करता है। आवृत्ति व शब्द-सूचियाँ रूपों को क्रमित करती हैं; सहप्रयुक्ति (collocation) उन शब्दों को खोजती है जो संयोग से अधिक साथ आते हैं (जैसे “strong tea” पर “powerful tea” नहीं); कीवर्ड-विश्लेषण किसी पाठ की आवृत्तियों की तुलना संदर्भ-कॉर्पस से करके विशिष्ट रूप खोजता है। n-ग्राम (n टोकनों के आवर्ती अनुक्रम) निश्चित वाक्यांश उभारते हैं।

⚠️ समानांतर बनाम तुलनीय
समानांतर कॉर्पस एक ही अंतर्वस्तु के अनुवादों से बना होता है, वाक्य-दर-वाक्य संरेखित — अनुवाद व मशीनी-अनुवाद कार्य का आधार। तुलनीय कॉर्पस विभिन्न भाषाओं में मिलते-जुलते विषयों के स्वतंत्र पाठों से बना होता है; वह न संरेखित है न अनुवाद। एक को दूसरा मान लेना उससे निकाली किसी भी अंतर-भाषिक समतुल्यता को अमान्य कर देता है।

मुख्य बिंदु

  • क्षेत्रकार्य मातृभाषी परामर्शदाताओं का उपयोग करता है और स्वाभाविक डेटा को उद्भावित डेटा (अनुवाद, प्रतिस्थापन ढाँचे, व्याकरणिकता-निर्णय, उद्दीपन-कार्य) से मिलाता है। Labov का प्रेक्षक-विरोधाभास यह है कि भाषण देखने से वह बदल जाता है; उद्भावित रूपों को सहज डेटा से जाँचना चाहिए।
  • प्रयोग स्वतंत्र चर में फेरबदल कर confounds को नियंत्रित करते हैं; प्रतिचयन प्रायिकता (यादृच्छिक, व्यवस्थित, स्तरित) या अप्रायिकता (सुविधा, हिमगोलक) हो सकता है। केवल प्रायिकता-प्रतिचयन सांख्यिकीय सामान्यीकरण का आधार बनता है, और प्रतिनिधित्व केवल आकार से अधिक मायने रखता है।
  • टोकन बहते शब्द हैं, प्रकार विशिष्ट रूप; सामान्यीकृत आवृत्ति = (कच्ची ÷ कुल टोकन) × आधार, और TTR = प्रकार ÷ टोकन पर यह लंबाई के साथ घटता है। काई-वर्ग श्रेणीगत संबंध जाँचता है, t-परीक्षण माध्यों की तुलना करता है, और सार्थकता हेतु α = 0.05 जैसा घोषित स्तर चाहिए।
  • गुणात्मक विश्लेषण संदर्भ में अनुलेखन, कोडिंग व व्याख्या करता है — विषयगत विश्लेषण, आधारित सिद्धांत, विमर्श-विश्लेषण व वार्तालाप-विश्लेषण द्वारा — जिसे त्रिकोणन व आत्म-परावर्तन सुरक्षित रखते हैं; मिश्रित-विधि अभिकल्प मात्रात्मक व गुणात्मक को जोड़ते हैं।
  • नैतिकता में हटने के अधिकार सहित सूचित सहमति, गुमनामी व सुरक्षित भंडारण, तथा नैतिकता-समीक्षा आवश्यक है; डेटा व अभिलेख समुदाय के हैं, शोध को लाभ व पारस्परिकता से लौटाना चाहिए, और संवेदनशील वक्ताओं को विशेष देखभाल चाहिए।
  • कॉर्पस एक संतुलित, प्रतिनिधिक, मशीन-पठनीय पाठ-संग्रह है; प्रकारों में लिखित/मौखिक, संदर्भ/विशेषीकृत, समकालिक/कालक्रमिक व मॉनिटर, समानांतर बनाम तुलनीय, तथा शिक्षार्थी शामिल हैं। एनोटेशन (टोकनीकरण, लेमीकरण, POS टैगिंग, ट्रीबैंक) व्याख्या है; विश्लेषण कॉनकॉर्डेंस/KWIC, आवृत्ति व शब्द-सूची, सहप्रयुक्ति व कीवर्ड-विश्लेषण का उपयोग करता है।

अभ्यास प्रश्न (16)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. समाजभाषावैज्ञानिक क्षेत्रकार्य में “प्रेक्षक-विरोधाभास (observer’s paradox)” किस कठिनाई को कहते हैं?

    1. दो प्रशिक्षित प्रेक्षक एक ही अभिलेख को सदैव ठीक एक जैसा अनुलेखित करेंगे, बिना किसी भिन्नता के
    2. सांख्यिकी हेतु पर्याप्त बड़ा प्रतिदर्श हाथ से शुद्धतापूर्वक अनुलेखित करने के लिए सदैव बहुत बड़ा होता है
    3. हम जानना चाहते हैं कि लोग बिना देखे जाने पर कैसे बोलते हैं, पर भाषण केवल देखकर ही जुटा सकते हैं
    4. वक्ता अपने व्याकरणिकता-निर्णय किसी भी विश्वसनीयता से बता ही नहीं सकते
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — हम जानना चाहते हैं कि लोग बिना देखे जाने पर कैसे बोलते हैं, पर भाषण केवल देखकर ही जुटा सकते हैं

    Labov द्वारा नामित प्रेक्षक-विरोधाभास यह है कि लक्ष्य असंकोची, स्वाभाविक भाषण अभिलेखित करना है, पर अभिलेखन का कृत्य वक्ताओं को आत्म-सचेत बना देता है और उनकी शैली बदल सकता है। शेष कथन असत्य या असंबद्ध हैं: प्रशिक्षित अनुलेखक वस्तुतः भिन्न होते हैं, प्रतिदर्श-आकार अलग मुद्दा है, और वक्ता उपयोगी निर्णय दे सकते हैं।
  2. एक क्षेत्र-भाषाविद परामर्शदाता को एक गढ़ा वाक्य दिखाकर पूछता है, “क्या आप यह अपनी भाषा में कह सकते हैं, या यह ग़लत लगता है?” यह कौन-सी डेटा-संग्रह विधि है?

    1. व्यापक समुदाय में स्वाभाविक रूप से उभरते पूर्णतः सहज वार्तालाप का सहभागी प्रेक्षण
    2. व्याकरणिकता (स्वीकार्यता) निर्णय, जो वक्ता के इस ज्ञान की जाँच करता है कि क्या संभव है
    3. संबद्ध भाषण उत्पन्न करने हेतु बिना-शब्दों की चित्र-कहानी का उपयोग करने वाला उद्दीपन-आधारित कथा-कार्य
    4. विभिन्न सामाजिक समूहों में से लिए गए वक्ताओं का स्तरित प्रायिकता-प्रतिचयन
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — व्याकरणिकता (स्वीकार्यता) निर्णय, जो वक्ता के इस ज्ञान की जाँच करता है कि क्या संभव है

    यह पूछना कि कोई दिया वाक्य संभव है या ग़लत लगता है, व्याकरणिकता-निर्णय है, जो परा-भाषिक ज्ञान को सीधे छूता है। सहभागी प्रेक्षण व कथा-कार्य दोनों निर्णय के बजाय उत्पादन जुटाते हैं, और स्तरित प्रतिचयन वक्ता चुनने का तरीका है, किसी रूप के उद्भावन का नहीं।
  3. एक छोटे, घनिष्ठ प्रवासी समुदाय का अध्ययन करता शोधकर्ता कुछ वक्ता जुटाता है, फिर प्रत्येक से ऐसे मित्र-संबंधी परिचित कराने को कहता है जो भी भाग लें। कौन-सी प्रतिचयन विधि प्रयुक्त है?

    1. सरल यादृच्छिक प्रतिचयन, जो समुदाय के प्रत्येक सदस्य को चयन का समान व स्वतंत्र अवसर देता है
    2. व्यवस्थित प्रतिचयन, जो समष्टि की पूर्ण क्रमांकित सूची से प्रत्येक k-वें व्यक्ति का चयन करता है
    3. स्तरित प्रतिचयन, जो समुदाय को स्तरों में बाँटकर फिर प्रत्येक के भीतर से प्रतिदर्श लेता है
    4. हिमगोलक (snowball) प्रतिचयन, जो प्रतिभागियों के अपने संजालों से छिपे या घनिष्ठ समूहों तक पहुँचता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — हिमगोलक (snowball) प्रतिचयन, जो प्रतिभागियों के अपने संजालों से छिपे या घनिष्ठ समूहों तक पहुँचता है

    प्रतिभागियों के अपने संपर्कों से जुटाना हिमगोलक प्रतिचयन है, एक अप्रायिकता-विधि जो कठिनता से पहुँच योग्य समूहों हेतु उपयुक्त है। यादृच्छिक व व्यवस्थित प्रतिचयन दोनों को समष्टि की पूर्ण सूची चाहिए, जो ऐसे समुदाय विरले ही देते हैं; स्तरित प्रतिचयन हेतु पहले ज्ञात समष्टि को स्तरों में बाँटना पड़ता है।
  4. भिन्न आकारों के दो कॉर्पसों में किसी शब्द की तुलना करते समय कॉर्पस-भाषाविद प्रायः कच्ची गणना के बजाय सामान्यीकृत आवृत्ति (जैसे प्रति दस लाख शब्द) क्यों बताते हैं?

    1. क्योंकि बड़े कॉर्पस में कुल मिलाकर अधिक टोकन होते हैं, अतः कच्ची गणनाएँ भिन्न आकारों में तुलनीय नहीं
    2. क्योंकि सामान्यीकरण स्वयं ही स्वतः सिद्ध कर देता है कि आवृत्ति-अंतर सांख्यिकीय रूप से सार्थक है
    3. क्योंकि किसी कॉर्पस के पूरी तरह शब्द-भेद-टैग हो जाने के बाद कच्ची गणनाएँ निकाली ही नहीं जा सकतीं
    4. क्योंकि सामान्यीकृत आवृत्ति पाठों को गिनने से पहले टोकनीकृत करने की कोई भी आवश्यकता समाप्त कर देती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — क्योंकि बड़े कॉर्पस में कुल मिलाकर अधिक टोकन होते हैं, अतः कच्ची गणनाएँ भिन्न आकारों में तुलनीय नहीं

    कोई शब्द बड़े कॉर्पस में केवल इसलिए अधिक कच्ची उपस्थितियाँ दिखाएगा कि वहाँ पाठ अधिक है, अतः भिन्न आकार के कॉर्पसों की कच्ची गणनाएँ तुलनीय नहीं; कुल टोकन से भाग देकर साझा आधार पर मापन इसे ठीक करता है। सामान्यीकरण सार्थकता-परीक्षण नहीं है, कच्ची गणनाएँ सदैव उपलब्ध रहती हैं, और आवृत्ति स्वयं टोकन गिनकर ही मिलती है।
  5. एक विद्यार्थी एक ही लेखक के 500-शब्द व 5,000-शब्द निबंधों का type-token अनुपात निकालता है और पाता है कि छोटे निबंध का अनुपात अधिक है। सबसे ठोस निष्कर्ष क्या है?

    1. छोटे निबंध की शब्दावली निश्चित व निर्णायक रूप से लंबे निबंध की तुलना में कहीं अधिक समृद्ध व विविध है
    2. लंबा निबंध लिखते समय लेखक की सक्रिय शब्दावली अवश्य मापनीय रूप से सिकुड़ गई होगी
    3. बहुत कम निष्कर्ष निकलता है, क्योंकि पाठ लंबा होने पर TTR घटता है, अतः असमान-लंबाई के पाठ सीधे तुलनीय नहीं
    4. परिणाम अवश्य गणना-त्रुटि है, क्योंकि TTR पाठ-लंबाई पर बिलकुल भी निर्भर नहीं करता
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — बहुत कम निष्कर्ष निकलता है, क्योंकि पाठ लंबा होने पर TTR घटता है, अतः असमान-लंबाई के पाठ सीधे तुलनीय नहीं

    TTR पाठ-लंबाई के साथ क्रमबद्ध रूप से घटता है क्योंकि उच्च-आवृत्ति शब्द बार-बार आकर टोकन जोड़ते हैं पर प्रकार नहीं; अतः छोटा पाठ सच्ची शाब्दिक समृद्धि की परवाह किए बिना लगभग सदैव ऊँचा TTR दिखाता है। सही कदम समान-लंबाई के प्रतिदर्श तुलना करना या मानकीकृत TTR उपयोग करना है, अतः अधिक-समृद्ध व सिकुड़ती शब्दावली दोनों पाठ अनुचित हैं, और गिरावट अपेक्षित है, त्रुटि नहीं।
  6. वार्तालाप-विश्लेषण प्रायः बातचीत की किन विशेषताओं का अध्ययन करता है?

    1. भाषण के दस करोड़-शब्द संदर्भ-कॉर्पस पर औसत की गई प्रत्येक स्वनिम की आवृत्ति
    2. रोज़मर्रा की अंतःक्रिया की संगठित प्रणाली के रूप में बारी-लेना, सन्निकट-युग्म व मरम्मत
    3. किसी आद्य-भाषा का उसकी अनेक अपत्य भाषाओं के साक्ष्य से पुनर्निर्माण
    4. प्रयोगशाला-परिवेश में मापे गए उद्यान-पथ वाक्यों पर पाठकों के प्रतिक्रिया-समय
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — रोज़मर्रा की अंतःक्रिया की संगठित प्रणाली के रूप में बारी-लेना, सन्निकट-युग्म व मरम्मत

    वार्तालाप-विश्लेषण बातचीत के अनुक्रमिक संगठन की पड़ताल करता है — बारी कैसे ली जाती है, कथन कैसे युग्मित होते हैं (प्रश्न–उत्तर), और वक्ता गड़बड़ी की मरम्मत कैसे करते हैं। शेष विकल्प क्रमशः कॉर्पस ध्वन्यात्मक सांख्यिकी, तुलनात्मक पुनर्निर्माण, व मनोभाषावैज्ञानिक वाचन-प्रयोग का वर्णन करते हैं।
  7. शोध-पद्धति में “त्रिकोणन (triangulation)” का सबसे सटीक अर्थ है:

    1. कोई भी विश्लेषण किए जाने से पहले प्रत्येक प्रतिदर्श को ठीक तीन समान स्तरों में बाँटना
    2. किसी एकल प्रयोग को ठीक तीन बार दोहराकर फिर तीनों परिणामों का औसत निकालना
    3. प्रत्येक प्रतिभागी का हर बार ठीक तीन अलग-अलग साक्षात्कारकर्ताओं से बने मंडल द्वारा साक्षात्कार
    4. एक से अधिक विधि या डेटा-स्रोत का उपयोग, ताकि स्वतंत्र निष्कर्ष परस्पर पुष्टि कर सकें
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — एक से अधिक विधि या डेटा-स्रोत का उपयोग, ताकि स्वतंत्र निष्कर्ष परस्पर पुष्टि कर सकें

    त्रिकोणन अनेक विधियों, डेटा-स्रोतों या दृष्टिकोणों को मिलाता है ताकि अभिसारी साक्ष्य निष्कर्ष को सुदृढ़ करें; “त्रि-” रूपकात्मक है और तीन की कोई शाब्दिक गणना नहीं दर्शाता। शेष विकल्प शब्द को ग़लती से तीन स्तरों, तीन दोहरावों या तीन साक्षात्कारकर्ताओं का आदेश मान लेते हैं।
  8. एक शोधकर्ता किसी संकटग्रस्त भाषा के वक्ताओं को अभिलेखित करता है। कौन-सा आचरण सूचित सहमति की नैतिक अपेक्षा को सर्वोत्तम रूप से पूरा करता है?

    1. अभिलेखों का उद्देश्य व उपयोग वक्ताओं की समझ में आने वाले रूप में समझाना, और उनके हटने के अधिकार का सम्मान करना
    2. पहले सभी वक्ताओं को अभिलेखित करना और फिर अनुमति केवल तब माँगना यदि उनमें से कोई बाद में किसी रूप में आपत्ति करे
    3. सहमति को अनावश्यक मानना क्योंकि संकटग्रस्त भाषा का प्रलेखन किसी भी मूल्य पर बस आवश्यक है
    4. वक्ताओं के पूरे नाम प्रकाशित करना ताकि उनका मूल्यवान योगदान स्थायी सार्वजनिक अभिलेख में रहे
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — अभिलेखों का उद्देश्य व उपयोग वक्ताओं की समझ में आने वाले रूप में समझाना, और उनके हटने के अधिकार का सम्मान करना

    सूचित सहमति के लिए आवश्यक है कि प्रतिभागी कार्य का उद्देश्य व उपयोग पहले से सचमुच समझें और स्वतंत्र रूप से सहमत हों, तथा हटने का अधिकार रखें। बिना पूर्व-अनुमति अभिलेखन इसका उल्लंघन है, प्रलेखन की तात्कालिकता कभी सहमति पर भारी नहीं पड़ती, और पूरे नाम प्रकाशित करना सहमति पूरी करने के बजाय गोपनीयता भंग करता है।
  9. एक कॉनकॉर्डेंस उपकरण परिणाम KWIC प्रदर्शन में दिखाता है। KWIC क्या दर्शाता है?

    1. पूरे कॉर्पस में ठीक कितने शब्द हैं, इसकी एकमात्र समग्र गणना
    2. वह वंश-वृक्ष आरेख जो दिखाए कि कॉर्पस की भाषाएँ परस्पर आनुवंशिक रूप से कैसे संबंधित हैं
    3. खोज-शब्द की प्रत्येक उपस्थिति, उसके ठीक आसपास के पाठ के साथ पंक्तिबद्ध
    4. कॉर्पस में निहित प्रत्येक वाक्य का पूर्ण ध्वन्यात्मक अनुलेखन
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — खोज-शब्द की प्रत्येक उपस्थिति, उसके ठीक आसपास के पाठ के साथ पंक्तिबद्ध

    KWIC (संदर्भ-सहित-कीवर्ड) खोज-पद की प्रत्येक उपस्थिति को आसपास के पाठ की खिड़की सहित सूचीबद्ध करता है, प्रायः पद को केंद्र में रखकर, जिससे प्रयोग व सहप्रयुक्ति के प्रतिरूप उभर आते हैं। यह न कोई एकमात्र योग है, न वंश-वृक्ष, न ध्वन्यात्मक अनुलेख।
  10. एक दल अध्ययन करना चाहता है कि एक ही समाचार-रिपोर्ट अंग्रेज़ी व हिंदी में, वाक्य-दर-वाक्य, कैसे प्रस्तुत होती है। उन्हें कौन-सा संसाधन चाहिए?

    1. तुलनीय कॉर्पस, जो प्रत्येक भाषा में एक ही विषय के स्वतंत्र पाठ रखे जो अनुवाद नहीं हैं
    2. समानांतर कॉर्पस, जो वही पाठ दोनों भाषाओं में अनुवाद के रूप में संरेखित रखे
    3. केवल अंग्रेज़ी का मॉनिटर कॉर्पस जो समय के साथ बस बड़ा-से-बड़ा होता रहे
    4. हिंदीभाषियों की लिखित अंग्रेज़ी में विशिष्ट त्रुटियों को अभिलेखित करने वाला शिक्षार्थी कॉर्पस
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — समानांतर कॉर्पस, जो वही पाठ दोनों भाषाओं में अनुवाद के रूप में संरेखित रखे

    विभिन्न भाषाओं में अनूदित एक ही पाठ का, वाक्य-दर-वाक्य संरेखित, अध्ययन समानांतर कॉर्पस माँगता है। तुलनीय कॉर्पस एक ही विषय के पाठ रखता है जो अनुवाद नहीं और संरेखित नहीं हो सकते; एकभाषी मॉनिटर कॉर्पस व शिक्षार्थी कॉर्पस दोनों प्रस्तुतियों को युग्मित ही नहीं करते।
  11. भाषाविज्ञान में डेटा-संग्रह के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. सुविधा-प्रतिचयन के विपरीत प्रायिकता-प्रतिचयन समष्टि तक सांख्यिकीय सामान्यीकरण का आधार बनता है
    2. उद्भावित निर्णय व सहज उत्पादन भिन्न हो सकते हैं, अतः एक को दूसरे की जगह बिना परीक्षण नहीं रखना चाहिए
    3. अनुवाद-कार्य संपर्क-भाषा की संरचना अभिलेखित डेटा में आयात कर सकता है
    4. प्रतिदर्श-आकार बढ़ाना प्रतिदर्श-चयन के ढंग का कोई भी पक्षपात सदैव हटा देता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — सुविधा-प्रतिचयन के विपरीत प्रायिकता-प्रतिचयन समष्टि तक सांख्यिकीय सामान्यीकरण का आधार बनता है; B — उद्भावित निर्णय व सहज उत्पादन भिन्न हो सकते हैं, अतः एक को दूसरे की जगह बिना परीक्षण नहीं रखना चाहिए; C — अनुवाद-कार्य संपर्क-भाषा की संरचना अभिलेखित डेटा में आयात कर सकता है

    प्रायिकता-प्रतिचयन ही सामान्यीकरण को अनुमति देता है, उद्भावित व सहज डेटा सचमुच भिन्न हो सकते हैं, और अनुवाद-संकेत संपर्क-भाषा की संरचना ले आ सकते हैं। अंतिम दावा असत्य है: बड़ा प्रतिदर्श यादृच्छिक त्रुटि घटाता है पर पक्षपाती चयन-ढाँचा नहीं सुधार सकता।
  12. कॉर्पस व उसके एनोटेशन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. संतुलित, प्रतिनिधिक कॉर्पस पाठ-प्रकारों के प्रतिचयन-ढाँचे के आसपास अभिकल्पित होता है, केवल अधिकतम बड़ा नहीं बनाया जाता
    2. शब्द-भेद टैगिंग व ट्रीबैंकिंग व्याख्यात्मक परतें जोड़ते हैं और विश्लेषणात्मक निर्णय समाविष्ट करते हैं
    3. मॉनिटर कॉर्पस निरंतर विस्तारित किया जाता है ताकि शाब्दिक परिवर्तन समय के साथ अनुसरित हो सके
    4. समानांतर कॉर्पस बस कोई भी दो कॉर्पस हैं जो संयोगवश समान शब्द-संख्या के हों
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — संतुलित, प्रतिनिधिक कॉर्पस पाठ-प्रकारों के प्रतिचयन-ढाँचे के आसपास अभिकल्पित होता है, केवल अधिकतम बड़ा नहीं बनाया जाता; B — शब्द-भेद टैगिंग व ट्रीबैंकिंग व्याख्यात्मक परतें जोड़ते हैं और विश्लेषणात्मक निर्णय समाविष्ट करते हैं; C — मॉनिटर कॉर्पस निरंतर विस्तारित किया जाता है ताकि शाब्दिक परिवर्तन समय के साथ अनुसरित हो सके

    अच्छा कॉर्पस-अभिकल्प संतुलन व प्रतिनिधित्व हेतु प्रतिचयन-ढाँचे पर टिकता है; POS टैगिंग व ट्रीबैंक व्याख्यात्मक एनोटेशन-परतें हैं; और मॉनिटर कॉर्पस परिवर्तन अनुसरण हेतु समय के साथ बढ़ता है। अंतिम ग़लत है: समानांतर कॉर्पस की परिभाषा वही पाठ भाषाओं में अनुवाद-रूप में संरेखित रखना है, शब्द-संख्या मिलाना नहीं।
  13. वक्ताओं के साथ कार्य करते समय निम्नलिखित में से कौन-से वास्तविक नैतिक दायित्व हैं?

    1. सूचित सहमति प्राप्त करना और प्रतिभागियों को हटने देना
    2. गुमनामी व सुरक्षित डेटा-भंडारण से प्रतिभागियों की पहचान की रक्षा
    3. यह मानना कि डेटा व अभिलेख समुदाय के हैं, और कुछ लौटाना
    4. प्रत्येक वक्ता के अभिलेखों के साथ उसका असली नाम व पता प्रकाशित करना
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — सूचित सहमति प्राप्त करना और प्रतिभागियों को हटने देना; B — गुमनामी व सुरक्षित डेटा-भंडारण से प्रतिभागियों की पहचान की रक्षा; C — यह मानना कि डेटा व अभिलेख समुदाय के हैं, और कुछ लौटाना

    हटने के अधिकार सहित सहमति, पहचान की रक्षा, तथा पारस्परिकता के साथ समुदाय-स्वामित्व को मानना — सभी मूल दायित्व हैं। असली नाम व पते प्रकाशित करना इसका उलटा है — यह उस गोपनीयता को भंग करता है जिसकी रक्षा नैतिक शोध के लिए बाध्यकारी है।
  14. पाठ “the big dog saw the small dog and the cat” का type-token अनुपात निकालिए, प्रत्येक शब्द-रूप को एक प्रकार गिनते हुए। उत्तर दो दशमलव स्थानों तक दशमलव में दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.70

    टोकन हैं: the, big, dog, saw, the, small, dog, and, the, cat — 10 टोकन। विशिष्ट प्रकार हैं: the, big, dog, saw, small, and, cat — 7 प्रकार (“the” 3 बार, “dog” 2 बार)। TTR = प्रकार ÷ टोकन = 7 ÷ 10 = 0.70। सामान्य भूल दोहराए शब्दों को अलग प्रकार गिनना है।
  15. एक शब्द 3,00,000 टोकन के कॉर्पस में 48 बार आता है। प्रति दस लाख शब्द उसकी सामान्यीकृत आवृत्ति क्या है? उत्तर पूर्ण संख्या में दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 160

    प्रति दस लाख सामान्यीकृत आवृत्ति = (कच्ची गणना ÷ कुल टोकन) × 10,00,000 = (48 ÷ 300000) × 1000000 = 0.00016 × 1000000 = 160। अतः शब्द प्रति दस लाख शब्द 160 की दर से आता है।
  16. एक पाठ में 1,200 टोकन हैं और उसका type-token अनुपात 0.35 है। उसमें कितने विशिष्ट प्रकार हैं? उत्तर पूर्ण संख्या में दीजिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 420

    TTR = प्रकार ÷ टोकन, अतः प्रकार = TTR × टोकन = 0.35 × 1200 = 420 विशिष्ट प्रकार। जाल अनुपात के व्युत्क्रम से गुणा करना या प्रकार को टोकन से भ्रमित करना है।