बुनाई की तैयारी, लूम की गतियाँ, शटल-रहित बुनाई व बुनी संरचनाएँ
2. साइज़िंग, ड्रॉइंग-इन व पिर्न वाइंडिंग
ताने के सूत हील्ड-आँख, रीड व पड़ोसी सूतों से हज़ारों बार रगड़ खाते हैं, अतः साइज़िंग (sizing) उन पर फ़िल्म बनाने वाले चिपकाने वाले पदार्थ व स्नेहक की परत चढ़ाती है। यह बाहर निकले तंतुओं (रोएँपन) को बाँधती है, घर्षण-प्रतिरोध व सामर्थ्य बढ़ाती है और टूटन घटाती है। घटक हैं: चिपकाने वाला पदार्थ (स्टार्च व उसके व्युत्पन्न, पॉलीविनाइल ऐल्कोहॉल, CMC, ऐक्रिलिक), साथ में मृदुकारी या स्नेहक, तथा परिरक्षक। साइज़ प्रसंस्करण-सहायक है और रंगाई से पहले बाद में हटाया जाता है (डीसाइज़िंग)। साइज़ ऐड-ऑन सूत पर सूखे साइज़ का द्रव्यमान है, जो अन-साइज़ किए ओवन-शुष्क सूत के द्रव्यमान का प्रतिशत है: उसी शुष्क आधार पर पिक-अप दिया हो तो ऐड-ऑन % = आर्द्र पिक-अप % × (ठोस सांद्रता) ÷ 100।
| पहलू | काता सूत (कपास, मिश्रण) | फ़िलामेंट सूत |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | बाहर निकले तंतु बाँधना व सामर्थ्य जोड़ना | फ़िलामेंट एक साथ रखना व चिकनी, स्नेहित, स्थैतिक-रोधी फ़िल्म देना |
| साइज़ मात्रा | पर्याप्त ऐड-ऑन | कहीं कम ऐड-ऑन |
| विशिष्ट मशीन | बहु-सिलिंडर स्लैशर, कई बीमों की चादर | प्रायः सेक्शनल या बीम-से-बीम साइज़िंग, मृदु शुष्कन के साथ |
ड्रॉइंग-इन (drawing-in) हर ताना-सिरे को हील्ड-आँख व रीड-दाँत में से, ड्राफ़्ट व रीड-योजना के क्रम में, हाथ या स्वचालित मशीन से पिरोती है। जब वही बुनाई नए ताने से चलानी हो तो इसके स्थान पर टाइंग-इन नए सिरों को पुराने से गाँठ देती है। पिर्न वाइंडिंग (pirn winding) शटल हेतु बाना-पैकेज बनाती है: कोन का सूत छोटी शंक्वाकार पिर्न पर बिल्डर-गति से लपेटा जाता है, जो बढ़ती लंबाई की शंक्वाकार परतें बिछाती है, जिससे दृढ़ पैकेज बनता है जो सिरे पर से बिना उलझे खुलता है। शटल में पिर्न की सीमित क्षमता के कारण ही बाना-पुनर्भरण आवश्यक है।
3. प्राथमिक गतियाँ: शेडिंग, पिकिंग व बीट-अप; स्ले-गतिकी व लूम-टाइमिंग
प्राथमिक गतियाँ हैं शेडिंग (ताने को ऊपरी व निचली पंक्ति में अलग करना), पिकिंग (बाना डालना) तथा बीट-अप (रीड पिक को फ़ेल में धकेलती है)। द्वितीयक गतियाँ टेक-अप व लेट-ऑफ हैं, और सहायक गतियाँ स्टॉप मोशन, ताना-सुरक्षा व बाना-पुनर्भरण हैं। ऋणात्मक शेडिंग में हील्ड कैम से एक दिशा में चलती है और स्प्रिंग या लीवर से लौटती है; धनात्मक शेडिंग में दोनों गतियाँ चालित होती हैं। टैपेट (कैम) शेडिंग प्लेन व सरल ट्विल हेतु थोड़ी शाफ़्टों पर उपयुक्त है; डॉबी अनेक शाफ़्टें नियंत्रित करती है (लैग पर खूँटियाँ या इलेक्ट्रॉनिक चयन); जैकार्ड बड़ी आकृति-डिज़ाइनों हेतु हुक व हार्नेस-डोरियों से सिरों को अलग-अलग उठाता है।
शेड के प्रकार: बंद (निचला-बंद) शेड में पिकों के बीच सभी सिरे एक तल पर मिलते हैं और फिर अलग होते हैं; अर्ध-खुले (मध्य-बंद) शेड में सिरे मध्य तल पर मिलते हैं; खुले शेड में जिन सिरों को अगली पिक हेतु उसी पंक्ति में रहना है वे हिलते नहीं, अतः हील्ड कम चलती है और चाल पर अधिक मृदु चलती है, जबकि बंद शेड महीन सूत हेतु अधिक स्वच्छ व विश्वसनीय शेड देता है। टैपेट कैम को निचला शाफ़्ट लूम rpm ÷ (बुनाई-पुनरावृत्ति में पिकों की संख्या) की चाल से घुमाता है: प्लेन हेतु आधी, 3/1 ट्विल हेतु चौथाई, 5-सिरा साटन हेतु पाँचवाँ भाग। इसकी रूपरेखा में उठान, शीर्ष पर विराम, गिरावट और तल पर विराम होता है; विराम शटल या बाना-वाहक को निकलने देता है, और चिकना (जैसे सरल-आवर्त) उठान व गिरावट हील्ड का त्वरण सीमित करती है।
शटल से पिकिंग पिकर के अचानक प्रहार (कोन-ओवर या साइड-लीवर तंत्र) से शटल को गतिज ऊर्जा ½mv² देती है; शटल शेड से उड़ती है और विपरीत बॉक्स में चेक-स्ट्रैप या ब्रेक से रोकी (check) जाती है। रोक-दूरी s पर औसत मंदन v²/(2s) है। अधिक तेज़ पिक शक्ति नष्ट करती है व पुर्ज़े घिसाती है; कमज़ोर पिक में शटल शेड में फँस जाती है। बीट-अप क्रैंक व कनेक्टिंग-रॉड से चलता है, जो स्ले को झुलाती है। क्रैंक-त्रिज्या r व चाल ω पर स्ले का वेग लगभग v = ω r sin θ है, जहाँ θ अग्र-केंद्र (बीट-अप) स्थिति से क्रैंक-कोण है, अतः शीर्ष वेग ω r और शीर्ष त्वरण ω² r है (सरल-आवर्त सन्निकटन, कनेक्टिंग-रॉड लंबी होने पर वैध)। लूम की चाल दुगुनी करने पर शीर्ष वेग दुगुना व शीर्ष त्वरण चौगुना, अतः जड़त्व-बल चौगुना हो जाता है।
लूम टाइमिंग आरेख घटनाओं को क्रैंक-कोण के सापेक्ष आलेखित करता है, 0° बीट-अप (स्ले फ़ेल पर) है। स्ले 180° पर सबसे पीछे होती है, शेड पश्च-केंद्र के पास सबसे चौड़ा होता है, और शटल को तब निकलना होता है जब शेड खुला हो व स्ले पीछे हो। उड़ान-काल = (अनुमत क्रैंक-कोण ÷ 360°) × (60 ÷ rpm)। स्ले सेटिंग बीट-अप के सापेक्ष वह क्रैंक-कोण है जिस पर शेड बंद होता है (ताना-पंक्तियाँ क्रॉस करती हैं)। शेड जल्दी बंद करने पर बीट-अप पर ताना अधिक कसा व पूर्ण बंद होता है और कपड़ा अधिक दृढ़ व सघन बनता है, ताना-तनाव व सिरा-टूटन अधिक होती है; देर से बंद करना मृदु है। कैम की रूपरेखा व सेटिंग मिलकर ताना-तनाव व पिक-अंतराल तय करते हैं।
4. टेक-अप, लेट-ऑफ, स्टॉप मोशन, ताना-सुरक्षा व बाना-पुनर्भरण
टेक-अप तैयार कपड़े को प्रति पिक एक पिक-अंतराल आगे खींचता है, अतः यह प्रति cm पिक तय करता है। धनात्मक टेक-अप में प्रति पिक एक (या कुछ) दाँत आगे बढ़ने वाला रैचेट-पहिया गियर-ट्रेन से टेक-अप रोलर को चलाता है, अतः प्रति पिक कपड़े की प्रगति = π D ÷ (T × R), जहाँ D रोलर का व्यास, T रैचेट-पहिये के दाँत और R रैचेट-पहिये से रोलर तक चाल-ह्रास है। प्रति cm पिक = T R ÷ (π D) (D cm में)। चेंज-व्हील बदलने से R बदलता है और पिक-घनत्व भी। लेट-ऑफ बीम से ताना उसी दर पर छोड़ता है जिस दर पर कपड़ा खिंचता है और बीम खाली होने पर भी ताना-तनाव स्थिर रखता है। ऋणात्मक लेट-ऑफ में ताने का खिंचाव बीम को घर्षण-ब्रेक (भारित रस्सी या लीवर) के विरुद्ध घुमाता है, जिसे बीम का व्यास घटने पर पुनः समायोजित करना पड़ता है; धनात्मक लेट-ऑफ में संवेदक ताना-तनाव मापता है और ड्राइव बीम को घुमाकर उसे बनाए रखती है।
ताना स्टॉप मोशन: ड्रॉप-वायरें सिरों पर लटकती हैं और सिरा टूटने पर गिरकर विद्युत परिपथ बंद करती हैं (या यांत्रिक छड़ को ट्रिप करती हैं), जिससे लूम रुक जाता है। बाना स्टॉप मोशन: वेफ़्ट फ़ोर्क (साइड या सेंटर) या इलेक्ट्रॉनिक फ़ीलर हर पिक की जाँच करता है और बाना न होने पर लूम रोक देता है। ताना-सुरक्षा शटल के शेड में फँसने पर ताने की रक्षा करती है: लूज़-रीड प्रणाली में रीड संपर्क होने पर पीछे हट सकती है और नॉक-ऑफ ट्रिप करती है, ताकि स्ले ताने को कुचल न दे। बाना-पुनर्भरण लूम रोके बिना खाली पिर्न बदलता है, या तो चलती शटल में नई पिर्न स्थानांतरित करके (पिर्न-बदल) या पूरी शटल बदलकर (शटल-बदल); शटल-रहित लूम बड़े स्थिर पैकेजों से बाना खींचकर इससे बचते हैं।
5. शटल-रहित बाना-प्रवेश, बहुफ़ेज़ व वृत्ताकार लूम
शटल-रहित लूम बड़े स्थिर पैकेज से नापी हुई बाना-लंबाई डालते हैं, अतः न पिर्न, न पिर्न वाइंडिंग और न शटल का आघात होता है, और चाल व चौड़ाई बढ़ जाती है। बाना-प्रवेश दर (m/min) = प्रति मिनट पिक × रीड-चौड़ाई (m)।
| प्रणाली | बाना कैसे ले जाया जाता है | टिप्पणियाँ |
|---|---|---|
| प्रोजेक्टाइल | छोटा ग्रिपर प्रोजेक्टाइल, मरोड़-छड़ के प्रहार से छोड़ा गया, बाना-सिरे को दबाकर पार ले जाता है; कन्वेयर प्रोजेक्टाइल लौटाता है | प्रति पिक एक प्रोजेक्टाइल; चौड़े कपड़े, अनेक सूत-प्रकार |
| रैपियर | कठोर छड़ें या लचीली पट्टियाँ बाना एक ओर से ले जाती हैं, या दो रैपियर केंद्र पर मिलकर उसे स्थानांतरित करते हैं (लूप या टिप ट्रांसफ़र) | सूत पर मृदु; रंग-परिवर्तन सरल |
| वॉटर-जेट | नोज़ल से पंप किया गया जल-जेट बाने को शेड में खींचता है | अवशोषक न होने वाले (जल-विकर्षी) फ़िलामेंट सूत चाहिए; कपड़ा सुखाना पड़ता है |
| एयर-जेट | एक मुख्य नोज़ल व प्रोफ़ाइल्ड रीड के साथ रिले नोज़ल संपीडित वायु पर बाना पार फेंकते हैं | बहुत उच्च प्रवेश दर; बाना फ़ीडर से मापा जाता है; वायु-खपत अधिक |
बहुफ़ेज़ लूम ताने के अनुदिश एक साथ कई शेड बनाते हैं, अतः अनेक बाने तरंग की भाँति साथ-साथ डाले जाते हैं और प्रभावी प्रवेश दर कई गुनी हो जाती है। वृत्ताकार लूम बोरों व नलियों जैसे नलिकाकार कपड़े बुनते हैं: वृत्ताकार ताने में बने वलयाकार शेड में शटलें चक्कर लगाती हैं, अतः नलिका को काटने या सिलने की आवश्यकता नहीं रहती।
6. सेल्वेज, बुनी संरचनाएँ, ड्रॉइंग व लिफ़्टिंग प्लान
सेल्वेज (selvedge) स्वयं-समाप्त किनारा है जो बाना-सिरों को उधड़ने से रोकता है। शटल लूम साधारण सेल्वेज बनाता है क्योंकि बाना हर किनारे पर लौटता है। शटल-रहित लूम बाना काट देते हैं, इसलिए उन्हें टक्ड-इन सेल्वेज (कटे सिरे टकिंग सुइयों या वायु से अगले शेड में मोड़ दिए जाते हैं), लेनो सेल्वेज (डोप से दो सिरे बाना-सिरों पर ऐंठे जाते हैं), या ताप-सुघट्य सूत हेतु संगलित सेल्वेज चाहिए। कुछ कपड़ों में बाना-झालर जानबूझकर छोड़ी जाती है।
| संरचना | सिद्धांत |
|---|---|
| प्लेन, ट्विल, साटन | प्रत्येक पिक पर अंतर्ग्रथन; कदम 1 सहित विकर्ण रेखा; लंबे फ़्लोट सहित बिखरे प्रतिच्छेदन (n सिरों की साटन-पुनरावृत्ति को n शाफ़्टें व n के साथ सह-अभाज्य चाल-संख्या चाहिए) |
| क्रेप, कॉर्ड | कंकड़ीली सतह हेतु अनियमित छोटे अंतर्ग्रथन; कॉर्ड में ताना-दिशा या बाना-दिशा की पसलियाँ सूतों या फ़्लोटों को समूहित करके बनती हैं |
| टेरी | दो ताने: कसा ज़मीनी ताना व ढीला पाइल ताना; पाइल ताने को पिकों के साथ आगे धकेलने पर पाइल-लूप बनते हैं |
| गॉज़, लेनो | डोप सिरा पिकों के बीच पड़ोसी के ऊपर से गुज़रता है, जिससे बाना खुली, फिसलन-रोधी संरचना में बँध जाता है |
| डबल क्लॉथ | अलग ताने व बाने से एक के ऊपर एक दो कपड़े बुने जाते हैं, जो सिलने वाले सिरों या परतों की अदला-बदली से जुड़ते हैं |
डिज़ाइन (बुनाई-आरेख) वर्गाकार कागज़ पर अंतर्ग्रथन दिखाता है। ड्राफ़्ट (ड्रॉइंग-इन योजना) हर सिरे को शाफ़्ट से जोड़ता है: सीधा, नुकीला या टूटा। लिफ़्टिंग प्लान (पेग प्लान) बताता है कि हर पिक पर कौन-सी शाफ़्टें उठती हैं, पुनरावृत्ति की प्रति पिक एक पंक्ति (ये पंक्तियाँ डॉबी के लैग हैं)। रीड-योजना प्रति दाँत सिरे देती है। शाफ़्टों की न्यूनतम संख्या पुनरावृत्ति के भिन्न सिरा-पैटर्नों की संख्या के बराबर होती है। जैकार्ड को ड्राफ़्ट नहीं चाहिए: हुकों की संख्या एक पैटर्न-पुनरावृत्ति के सिरों को ढकनी चाहिए, और प्रत्येक हुक k सिरों से बँधा हो तो सिरे = हुक × k।
मुख्य बिंदु
- ड्रम वाइंडिंग में सूत-चाल ≈ π D n में से फिसलन घटाकर; परिशुद्ध वाइंडिंग में वाइंड अनुपात स्थिर रहता है। रिबनिंग पूर्णांक या सरल-भिन्न वाइंड अनुपात पर होती है और पैटर्निंग-निरोधी तंत्र से टूटती है। स्प्लाइसिंग गाँठ से श्रेष्ठ है; क्लीयरर दोष हटाते हैं।
- बीम वार्पिंग लंबे उत्पादन हेतु और सेक्शनल पैटर्न व छोटे लॉट हेतु है। ताने का द्रव्यमान = सिरे × लंबाई × tex ÷ 10⁶ kg, तथा ताना-लंबाई = कपड़े की लंबाई × (1 + क्रिम्प) जब क्रिम्प कपड़े-लंबाई आधार पर हो। ऐड-ऑन = पिक-अप × ठोस सांद्रता।
- ऋणात्मक शेडिंग हील्ड को स्प्रिंग से लौटाती है; धनात्मक दोनों दिशाओं में चलाती है। टैपेट-शाफ़्ट की चाल = लूम rpm ÷ प्रति पुनरावृत्ति पिक। डॉबी अनेक शाफ़्टें, जैकार्ड अलग-अलग सिरे सँभालता है। खुले शेड में हील्ड बंद शेड से कम चलती हैं।
- स्ले की गति क्रैंक-रॉड की है, लगभग सरल-आवर्त: शीर्ष वेग ω r, शीर्ष त्वरण ω² r; चाल दुगुनी करने से जड़त्व-बल चौगुना। शटल की ऊर्जा ½mv² बॉक्स में रोक-दूरी s पर औसत मंदन v²/(2s) से खपती है।
- रैचेट टेक-अप में प्रति cm पिक = T R ÷ (π D); चेंज-व्हील से बड़ी प्रगति पर प्रति cm पिक कम। ऋणात्मक लेट-ऑफ घर्षण-ब्रेक वाला, धनात्मक तनाव-संवेदी है। बाना फ़ोर्क या फ़ीलर से, ताना ड्रॉप-वायर से रुकता है।
- प्रोजेक्टाइल, रैपियर, वॉटर-जेट व एयर-जेट स्थिर पैकेज से बाना डालते हैं; प्रवेश दर = ppm × रीड-चौड़ाई। शटल-रहित किनारे टक्ड-इन, लेनो या संगलित होते हैं। लिफ़्टिंग प्लान प्रति पिक उठने वाली शाफ़्टें बताता है; आवश्यक शाफ़्टें = भिन्न सिरा-पैटर्न।
अभ्यास प्रश्न (16)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
शंकु की परिशुद्ध (स्पिंडल-चालित) वाइंडिंग में पैकेज का व्यास बढ़ने पर क्या होता है?
उत्तर देखें
उत्तर: B — वाइंड अनुपात स्थिर रहता है और पैकेज की सतह से सूत का लेट-कोण घटता है
परिशुद्ध वाइंडिंग में पैकेज-स्पिंडल चालित है और ट्रैवर्स से गियरबद्ध है, अतः प्रति दोहरे ट्रैवर्स पैकेज के चक्कर (वाइंड अनुपात) स्थिर हैं; परिधि बढ़ने पर प्रति चक्कर वही ट्रैवर्स-प्रगति छोटा लेट-कोण देती है। वाइंड अनुपात का भटकना व फिसलन पर निर्भरता ड्रम-चालित वाइंडिंग का वर्णन है, जो भ्रामक गलत विकल्प है। ट्रैवर्स की स्ट्रोक-लंबाई व्यास के साथ नहीं बदली जाती।एक मिल को बहुत लंबे उत्पादन हेतु एक ही सादे ताने के 6,000 सिरे वार्प करने हैं, और बाद में एक छोटा उत्पादन धारीदार शर्टिंग का करना है जिसमें चौड़ाई पर रंग-क्रम बदलता है। वार्पिंग विधियों का कौन-सा युग्म उचित है?
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उत्तर: C — लंबे सादे उत्पादन हेतु बीम वार्पिंग और धारीदार शर्टिंग हेतु सेक्शनल वार्पिंग
बीम वार्पिंग एक ही ताने के लंबे उत्पादन हेतु तेज़ व किफ़ायती है, जबकि सेक्शनल वार्पिंग सिरों को पट्टियों में किसी भी रंग-क्रम में बिछाती है, जो छोटे उत्पादन व धारियों हेतु उपयुक्त है। उलटा युग्म दोनों तरह से गलत है, और सेक्शनल वार्पिंग धीमी है, तेज़ नहीं। रंग-क्रम साइज़िंग मशीन पर नहीं बन सकता, वह केवल बीमों को मिलाती है।ताने के सूतों की साइज़िंग के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — साइज़ ऐड-ऑन अन-साइज़ किए सूत के ओवन-शुष्क द्रव्यमान पर व्यक्त किया जाता है; B — साइज़िंग बाहर निकले तंतुओं को बाँधती है और ताने का घर्षण-प्रतिरोध बढ़ाती है
ऐड-ऑन शुष्क अन-साइज़ सूत पर परिभाषित है, और रोएँपन को बाँधना व घर्षण-प्रतिरोध बढ़ाना साइज़िंग का प्रयोजन है। फ़िलामेंट सूत में बाहर निकले तंतु-सिरे नहीं होते, अतः उनका ऐड-ऑन कहीं कम होता है, अधिक नहीं। स्टार्च पौधों से प्राप्त प्राकृतिक बहुलक है, पेट्रोलियम से बना संश्लेषित नहीं।खुले शेड में, बंद शेड की तुलना में, जब अगली पिक हेतु किसी सिरे को पहले जैसी ही पंक्ति में रहना है तब क्या सही है?
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उत्तर: D — सिरा नहीं हिलता, अतः हील्ड कम चलती है और शेड मृदुतर गति से बनता है
खुले शेड में जो सिरा क्रमागत पिकों हेतु उसी पंक्ति में चाहिए वह स्थिर रहता है, जिससे हील्ड की गति घटती है। सिरे को बंद करने के तल तक लाकर फिर उठाना बंद शेड का वर्णन है, जिसमें पिकों के बीच सभी सिरे एक तल पर मिलते हैं, और मध्य-तल पर मिलना अर्ध-खुला शेड है। डॉबी व जैकार्ड ठीक वही तंत्र हैं जो खुले शेड सरल बनाते हैं।एक मिल 100% पॉलिएस्टर फ़िलामेंट सूत को बहुत उच्च चाल पर जल को बाना-वाहक माध्यम बनाकर बुनना चाहती है। कौन-सा कथन सही है?
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उत्तर: A — वॉटर-जेट लूम उपयुक्त है क्योंकि सूत जल-विकर्षी है और जल को न सोखता है न फूलता है
वॉटर-जेट प्रवेश चिकने, अवशोषक न होने वाले फ़िलामेंट सूतों, जैसे पॉलिएस्टर या नायलॉन, के साथ सर्वोत्तम चलता है, क्योंकि वे न फूलते हैं न जल सोखते हैं। यह कथन कि पॉलिएस्टर बहुत जल सोखता है, गलत है, और कपड़े पर सतही जल रहता ही है व बाद में सुखाया जाता है। शटल-रहित लूम में न शटल होती है न पिर्न।एक लूम की स्ले लंबी कनेक्टिंग-रॉड से चलती है, अतः उसकी गति सरल-आवर्त मानी जाती है और क्रैंक-त्रिज्या वही रहती है। प्रति क्रैंक-चक्कर एक पिक के साथ लूम की चाल 200 से बढ़ाकर 300 पिक प्रति मिनट की जाती है। शीर्ष स्ले-त्वरण, और इसलिए शीर्ष स्ले जड़त्व-बल, किस गुणक से बदलता है?
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उत्तर: C — 2.25, क्योंकि शीर्ष त्वरण ω² r चाल के वर्ग के अनुसार बदलता है
शीर्ष त्वरण ω² r है, और ω का अनुपात 300/200 = 1.5 से बढ़ता है, अतः r अपरिवर्तित रहने पर त्वरण 1.5² = 2.25 गुना बढ़ता है। 1.5 गुणक शीर्ष वेग का परिवर्तन है, जो भ्रामक भूल है। स्ट्रोक नहीं बदला, पर त्वरण केवल स्ट्रोक पर नहीं, चाल पर निर्भर है।रैचेट टेक-अप वाले लूम पर चेंज-व्हील ऐसे बदला जाता है कि कपड़ा प्रति पिक अधिक आगे बढ़े, जबकि बाना-आपूर्ति व लूम की चाल अपरिवर्तित हैं। कपड़े पर क्या प्रभाव होता है?
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उत्तर: D — प्रति cm पिक घटती हैं, अतः कपड़ा हल्का व बाना-दिशा में अधिक खुला हो जाता है
प्रति cm पिक = खींचे गए कपड़े की प्रति इकाई लंबाई में डाली गई पिकें, अतः प्रति पिक बड़ी प्रगति उतनी ही पिकों को अधिक लंबाई में फैलाती है और पिक-घनत्व घटाती है। प्रति इकाई क्षेत्रफल भार घटता है, जो इस दावे के विपरीत है कि पिक प्रति cm बढ़ती हैं और कपड़ा भारी होता है। प्रति cm सिरे रीड व ताने की चौड़ाई से तय हैं, टेक-अप से नहीं।टेरी (तौलिया) संरचना का कौन-सा वर्णन उपयुक्त है?
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उत्तर: A — कसकर तनाव में रखा ज़मीनी ताना और ढीला पाइल ताना, जिसमें पाइल सूत पिकों के साथ ऊपर धकेले जाकर लूप बनाते हैं
टेरी को भिन्न तनावों पर दो ताना-तंत्र चाहिए, जिनमें ढीला पाइल ताना पिकें पास आने पर लूप बनाता है। सिलने वाले सिरों से जुड़े दो कपड़े डबल क्लॉथ हैं, और डोप का क्रॉसिंग लेनो या गॉज़ है। सभी सिरों के लिए एक ही हील्ड-शाफ़्ट कोई शेड ही नहीं बनने देगी।5-सिरा ताना-मुख साटन बुना जाता है जिसमें पुनरावृत्ति की पाँच पिकों में से हर सिरा चार पर बाने के ऊपर उठा और एक पर नीचे रहता है। पाँच शाफ़्टों पर सीधे ड्राफ़्ट के साथ उसके लिफ़्टिंग प्लान की हर पिक पर कितनी शाफ़्टें उठती हैं?
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उत्तर: A — 4 शाफ़्टें
प्रत्येक सिरा पाँच में से ठीक एक पिक पर नीचे रहता है और अंतर्ग्रथन ऐसे बिखरे हैं कि हर पिक पर एक भिन्न सिरा नीचे रहता है, अतः हर पिक पर पाँच में चार सिरे, यानी चार शाफ़्टें, उठती हैं। प्रति पिक एक शाफ़्ट उठना बाना-मुख साटन का वर्णन होता। पाँचों उठाने पर कोई अंतर्ग्रथन ही नहीं बनेगा।शटल-रहित बाना-प्रवेश के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — एयर-जेट लूम बाना ले जाने हेतु प्रोफ़ाइल्ड रीड के साथ रिले नोज़लों सहित मुख्य नोज़ल का उपयोग करता है; B — वॉटर-जेट लूम कपास की अपेक्षा जल न सोखने वाले फ़िलामेंट सूतों हेतु उपयुक्त है; C — प्रोजेक्टाइल लूम ग्रिपर प्रोजेक्टाइल छोड़ता है जो बाना-सिरे को शेड के पार ले जाता है
एयर-जेट, वॉटर-जेट व प्रोजेक्टाइल के वर्णन उन प्रणालियों के मानक सिद्धांत हैं। रैपियर लूम बड़े स्थिर पैकेज से बाना लेकर उसे छड़ों या पट्टियों से ले जाता है, अतः उसमें न शटल है न पिर्न।शेडिंग व कैम के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — टैपेट लूम पर बुने जाने वाले 3/1 ट्विल हेतु कैम-शाफ़्ट लूम क्रैंक-चाल के चौथाई पर घूमता है; B — ऋणात्मक शेडिंग हील्ड को कैम से एक दिशा में चलाती है और स्प्रिंग या लीवर से लौटाती है; D — जैकार्ड प्रत्येक ताना-सिरे, या सिरों के छोटे समूह, को स्वतंत्र रूप से उठा सकता है
कैम प्रति पुनरावृत्ति एक चक्कर लगाता है, यहाँ 4 पिक, अतः उसकी चाल क्रैंक-चाल का चौथाई है। ऋणात्मक शेडिंग में हील्ड स्प्रिंग या लीवर से लौटती है, और जैकार्ड का हार्नेस अलग-अलग नियंत्रण देता है। डॉबियाँ धनात्मक (द्वि-दिशीय) चालन से बनती हैं, अतः उन्हें वर्जित करने वाला कथन असत्य है।एक धनात्मक टेक-अप में 30 दाँतों का रैचेट-पहिया प्रति पिक एक दाँत आगे बढ़ता है। गियर-ट्रेन चाल-ह्रास R = 20 देती है (रैचेट-पहिये के 20 चक्करों में टेक-अप रोलर एक चक्कर लगाता है)। आवरण सहित रोलर का प्रभावी व्यास 10.0 cm है। प्रति cm पिक = T R ÷ (π D) लेते हुए प्रति cm पिक, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 19.1
प्रति पिक रोलर के चक्कर = 1 ÷ (T R) = 1 ÷ 600। प्रति पिक कपड़े की प्रगति = π × 10.0 ÷ 600 = 0.05236 cm। प्रति cm पिक = 1 ÷ 0.05236 = 600 ÷ (π × 10) = 19.10, अतः 19.1। R को ह्रास न मानना, या व्यास की जगह त्रिज्या लेना, 20 गुना या दुगुना अंतर वाले उत्तर देता है।एक ड्रम-चालित वाइंडर में 10.0 cm व्यास का खाँचेदार ड्रम 1200 rev/min पर घूमता है। ड्रम व पैकेज के बीच फिसलन के कारण सूत ड्रम की पृष्ठीय चाल के 97% पर लपेटा जाता है। सूत की वाइंडिंग चाल, निकटतम पूर्ण संख्या m/min में, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 366
ड्रम की पृष्ठीय चाल = π D n = π × 0.100 m × 1200 = 376.99 m/min। सूत की चाल = 0.97 × 376.99 = 365.68 m/min, जो निकटतम पूर्ण संख्या में 366 है। परिधि को व्यास मान लेना, या फिसलन अनदेखी करना (377), प्रचलित भूलें हैं।एक लूम की स्ले 60 mm त्रिज्या के क्रैंक से चलती है, जो 220 पिक/min पर प्रति पिक एक चक्कर लगाता है। स्ले की गति सरल-आवर्त, v = ω r sin θ, मानते हुए शीर्ष स्ले-वेग m/s में, दो दशमलव स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 1.38
ω = 2π × 220 ÷ 60 = 23.04 rad/s। शीर्ष वेग = ω r = 23.04 × 0.060 = 1.382 m/s, अतः 1.38। r के स्थान पर स्ट्रोक 2r लेना, या औसत चाल 4 r rpm/60 = 0.88 m/s लेना गलत होगा।100 m लंबा कपड़ा 30 tex सूत के 3000 सिरों से बुनना है। ताना-क्रिम्प 7% है, जो (सूत की लंबाई − कपड़े की लंबाई) ÷ कपड़े की लंबाई से परिभाषित है। साइज़, अपशिष्ट व सिरों की हानि अनदेखी करते हुए, आवश्यक ताना-सूत का द्रव्यमान kg में, दो दशमलव स्थान तक, ____ है। (tex = mg प्रति m)
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 9.63
प्रति सिरा सूत की लंबाई = 100 × (1 + 0.07) = 107 m। कुल लंबाई = 3000 × 107 = 3,21,000 m। द्रव्यमान = 3,21,000 m × 30 mg/m = 9.63 × 10⁶ mg = 9.63 kg। क्रिम्प के बिना 100 m लेने पर 9.00 kg आता है, जो प्रचलित चूक है।एक साइज़िंग मशीन 82% आर्द्र पिक-अप देती है (सोखा गया द्रव-द्रव्यमान, अन-साइज़ सूत के ओवन-शुष्क द्रव्यमान के प्रतिशत के रूप में)। साइज़ द्रव में द्रव्यमान से 9% ठोस हैं। शुष्क अन-साइज़ सूत पर साइज़ ऐड-ऑन, प्रतिशत में दो दशमलव स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 7.38
100 g शुष्क सूत प्रति सूत 82 g द्रव सोखता है। शुष्क साइज़ ठोस = 0.09 × 82 = 7.38 g। ऐड-ऑन = 7.38 ÷ 100 × 100 = 7.38%। 82% आर्द्र पिक-अप स्वयं ऐड-ऑन नहीं है, क्योंकि द्रव का 91% जल है जो सुखा दिया जाता है।