सौर PV सेल व मॉड्यूल: I-V अभिलक्षण, दक्षता, फ़िल फ़ैक्टर, श्रेणी-समांतर संयोजन तथा MPPT

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर के सौर प्रकाशवोल्टीय (PV) तंत्र वाले भाग का आरंभ है। यह XE8 ऊर्जा विज्ञान के खंड XE8.1 (ऊर्जा संसाधन एवं रूपांतरण प्रौद्योगिकियाँ) का अंग है, जो नौ वैकल्पिक खंडों में से एक है; परीक्षा में अभ्यर्थी इनमें से कोई दो चुनता है। यह शीर्षक “Solar photovoltaic (PV) systems: I-V characteristics, efficiency, fill factor, series and parallel connections, sizing of PV systems (load factor, days of autonomy, battery size, inverter size, PV array size), maximum power point tracking” के पहले अर्द्ध का उत्तर देता है: सेल की भौतिकी, I-V वक्र, दक्षता व फ़िल फ़ैक्टर, श्रेणी व समांतर संयोजन तथा अधिकतम शक्ति बिंदु अनुसरण (साइज़िंग अगले अध्याय में है)। संख्यात्मक प्रश्न मॉड्यूल-आँकड़ों से फ़िल फ़ैक्टर व दक्षता, डायोड समीकरण से खुला-परिपथ वोल्टता, कम ताप पर स्ट्रिंग वोल्टता, ऐरे की धारा व शक्ति, कटऑफ़ तरंगदैर्घ्य तथा अधिकतम शक्ति अंतरण हेतु कन्वर्टर का ड्यूटी चक्र हैं।

1. सौर सेल कैसे कार्य करता है: आवश्यक भौतिकी

सौर सेल एक बड़े क्षेत्रफल वाला p-n संधि डायोड है। जिस फ़ोटॉन की ऊर्जा E = hc/λ बैंड-अंतराल Eg के बराबर या अधिक हो, वह इलेक्ट्रॉन को संयोजी बैंड से चालन बैंड में उठाकर इलेक्ट्रॉन-होल युग्म बनाता है। संधि का अंतर्निहित विद्युत क्षेत्र इलेक्ट्रॉनों को n ओर तथा होलों को p ओर बहा देता है, अतः बिना बाह्य वोल्टता लगाए बाह्य परिपथ में प्रकाश-धारा IL बहती है। hc ≈ 1240 eV·nm लेने पर अवशोषित हो सकने वाली अधिकतम तरंगदैर्घ्य λc = 1240/Eg (nm, Eg eV में) है। क्रिस्टलीय सिलिकॉन का Eg ≈ 1.12 eV है, अतः λc ≈ 1107 nm (निकट अवरक्त); गैलियम आर्सेनाइड का Eg ≈ 1.42 eV है.

एकल संधि की सीमा दो अपरिहार्य हानियाँ तय करती हैं। उप-बैंड-अंतराल फ़ोटॉन (E < Eg) अवशोषित ही नहीं होते। ऊष्मीकरण (thermalisation): E > Eg वाला फ़ोटॉन वाहक को केवल Eg की उपयोगी ऊर्जा देता है और अधिशेष ऊष्मा बनकर नष्ट होता है। कम Eg उच्च-ऊर्जा फ़ोटॉनों को तथा अधिक Eg निम्न-ऊर्जा फ़ोटॉनों को व्यर्थ करता है, इसलिए श्रेष्ठ एकल-संधि अंतराल लगभग 1.1 से 1.5 eV के बीच है और सैद्धांतिक दक्षता-सीमा (Shockley-Queisser सीमा) लगभग एक-तिहाई है। व्यावहारिक हानियों में परावर्तन, संपर्क-अँगुलियों की छाया तथा संग्रहण से पहले वाहकों का पुनर्संयोजन जुड़ते हैं।

सेल मुख्यतः क्रिस्टलीय सिलिकॉन (एकल-क्रिस्टल या बहु-क्रिस्टल) के बनते हैं, जिसमें p ओर बोरॉन तथा n ओर फ़ॉस्फ़ोरस मिलाकर संधि बनती है। पतली-फ़िल्म सेल (अक्रिस्टलीय सिलिकॉन, CdTe, CIGS) बहुत कम पदार्थ लेते हैं पर वाणिज्यिक मॉड्यूल में उनकी दक्षता कम होती है। सिलिकॉन अप्रत्यक्ष-अंतराल अवशोषक है और अधिकांश प्रकाश सोखने के लिए उसे सौ माइक्रोमीटर कोटि की मोटाई चाहिए; प्रत्यक्ष-अंतराल पतली फ़िल्म वही प्रकाश कुछ माइक्रोमीटर में सोख लेती है। बहु-संधि सेल भिन्न Eg वाली संधियाँ ऊपर-नीचे रखता है ताकि प्रत्येक स्पेक्ट्रम का अपना भाग सोखे; इससे ऊष्मीकरण हानि घटती है और अधिक लागत पर एकल-संधि सीमा पार हो जाती है।

⚠️ अवशोषण फ़ोटॉन की ऊर्जा तय करती है, तीव्रता नहीं
λc से अधिक तरंगदैर्घ्य का तेज़ प्रकाश भी उस सेल में इलेक्ट्रॉन-होल युग्म नहीं बनाता। तीव्रता केवल फ़ोटॉनों की संख्या, अर्थात् प्रकाश-धारा, बदलती है; यह नहीं कि फ़ोटॉन वाहक को उत्तेजित कर सकता है या नहीं।

2. I-V अभिलक्षण

आदर्श एकल-डायोड मॉडल में प्रकाश-धारा स्रोत IL एक डायोड के समांतर है: I = IL − I₀[exp(qV/nkT) − 1], जहाँ I₀ डायोड की संतृप्ति धारा, n आदर्शता गुणांक तथा 300 K पर kT/q ≈ 25.85 mV है। वास्तविक सेल में श्रेणी प्रतिरोध Rs (संपर्क, पिंड) व शंट प्रतिरोध Rsh (रिसाव) जुड़ते हैं। वक्र के दो छोर लघु-परिपथ धारा Isc ≈ IL (V = 0) तथा खुला-परिपथ वोल्टता Voc = (nkT/q) ln(IL/I₀ + 1) (I = 0) हैं। शक्ति P = VI दोनों छोरों पर शून्य है और घुटने पर अधिकतम होती है, यही अधिकतम शक्ति बिंदु (Vmp, Imp) है।

संचालन-दशाओं का I-V वक्र पर प्रभाव
परिवर्तनIscVocPmax
विकिरण G बढ़ता हैG के अनुपात में बढ़ती हैकेवल लघुगणकीय रूप से बढ़ती हैलगभग G के अनुपात में बढ़ती है
सेल ताप बढ़ता हैथोड़ी बढ़ती हैघटती है (सिलिकॉन हेतु लगभग 2 mV प्रति सेल प्रति °C)घटती है (क्रिस्टलीय Si: कोटि −0.4 % प्रति °C)
श्रेणी प्रतिरोध Rs बढ़ता हैलगभग अपरिवर्तितलगभग अपरिवर्तितघटती है, घुटना गोल हो जाता है

मॉड्यूल की रेटिंग मानक परीक्षण दशाओं (STC) पर दी जाती है: विकिरण 1000 W/m², सेल ताप 25 °C, वायु-द्रव्यमान 1.5 स्पेक्ट्रम। क्षेत्र में सेल 25 °C से अधिक गर्म चलते हैं, इसलिए पूर्ण धूप में भी वास्तविक उत्पादन नेमप्लेट से कम रहता है।

हल उदाहरण (Voc)। n = 1.2, kT/q = 25.85 mV, IL = 8 A, I₀ = 1.0 × 10⁻⁹ A। Voc = 1.2 × 0.02585 × ln(8/10⁻⁹ + 1) = 0.03102 × ln(8 × 10⁹) = 0.03102 × 22.80 = 0.707 V। IL आधी करने पर Voc केवल 0.03102 × ln 2 = 21.5 mV घटती है: प्रकाश में बड़ा परिवर्तन, वोल्टता में छोटा।

3. दक्षता व फ़िल फ़ैक्टर

फ़िल फ़ैक्टर FF = Vmp Imp / (Voc Isc) बताता है कि I-V वक्र कितना वर्गाकार है; यह वक्र के नीचे के सबसे बड़े आयत और आयत Voc × Isc का अनुपात है और सदैव 1 से कम होता है (अच्छे सिलिकॉन सेल लगभग 0.75 से 0.85 तक पहुँचते हैं)। अतः Pmax = FF · Voc · Isc तथा दक्षता η = Pmax/(G·A) = FF · Voc · Isc/(G · A) है, जहाँ A वह क्षेत्रफल है जिस पर विकिरण G पड़ता है। जब तक सेल-क्षेत्रफल न दिया हो, दक्षता मॉड्यूल के कुल क्षेत्रफल पर कही जाती है।

हल उदाहरण। 1.6 m² क्षेत्रफल के मॉड्यूल के STC पर Voc = 38 V, Isc = 9.0 A, Vmp = 31 V, Imp = 8.3 A हैं। Pmax = 31 × 8.3 = 257.3 W। FF = 257.3/(38 × 9.0) = 257.3/342 = 0.752। η = 257.3/(1000 × 1.6) = 0.1608, अर्थात् 16.1 %।

ताप का शक्ति पर प्रभाव। यदि शक्ति का ताप-गुणांक γ प्रति °C है (सिलिकॉन हेतु ऋणात्मक), तो सेल ताप Tc पर शक्ति Pmax(Tc) = Pmax,STC [1 + γ(Tc − 25)] होती है। γ = −0.004 प्रति °C लेने पर 55 °C पर 257.3 W मॉड्यूल 257.3 × [1 − 0.004 × 30] = 226.4 W देता है, यानी पूर्ण STC विकिरण पर भी 12 % हानि। सेल-ताप परिवेश से उस अंतर जितना अधिक होता है जो विकिरण के साथ बढ़ता है, इसीलिए गर्म, धूप वाला दिन दक्षता हेतु सर्वश्रेष्ठ दिन नहीं है।

⚠️ Voc × Isc को शक्ति न मान लें
Voc × Isc दो ऐसे छोरों का गुणनफल है जो एक साथ कभी नहीं होते, इसलिए यह शक्ति नहीं है। शक्ति को Voc × Isc से भाग देने पर FF मिलता है, दक्षता नहीं; दक्षता के हर में सदैव आपतित शक्ति G·A चाहिए।

4. सेल व मॉड्यूल का श्रेणी व समांतर संयोजन

एक सेल अधिकतम शक्ति पर लगभग 0.5 से 0.6 V देता है, जो किसी उपयोग के लिए कम है; इसलिए वोल्टता बढ़ाने हेतु सेल श्रेणी में (36 सेल के मॉड्यूल का Voc लगभग 21 V) और धारा बढ़ाने हेतु स्ट्रिंग समांतर में जोड़ी जाती हैं। नियम किसी भी स्रोत जैसे हैं: श्रेणी में धाराएँ समान तथा वोल्टताएँ जुड़ती हैं; समांतर में वोल्टताएँ समान तथा धाराएँ जुड़ती हैं। श्रेणी में Ns मॉड्यूल और समांतर में Np स्ट्रिंग वाले ऐरे में, सर्वसम मॉड्यूल के लिए, Voc = Ns·Voc,module, Isc = Np·Isc,module तथा Pmax = Ns·Np·Pmax,module होता है।

श्रेणी बनाम समांतर तारण
संयोजनवोल्टताधाराबेमेल की समस्या
श्रेणी स्ट्रिंगसेल-वोल्टताओं का योगसबमें समान; सबसे कमज़ोर या छायित सेल से सीमितछायित सेल स्ट्रिंग को रोकता है और उलटी बायस में गर्म हो सकता है (हॉट स्पॉट)
समांतर स्ट्रिंगसब पर समान; कमज़ोर स्ट्रिंग वोल्टता को अपनी ओर खींचती हैस्ट्रिंग-धाराओं का योगकमज़ोर स्ट्रिंग को अन्य उलटी दिशा में चला सकती हैं

दो प्रकार के डायोड ऐरे की रक्षा करते हैं। श्रेणी में जुड़े सेल-समूह के आर-पार बाईपास डायोड स्ट्रिंग-धारा को छायित समूह के चारों ओर मार्ग देता है, कीमत यह कि उस समूह की वोल्टता खो जाती है। प्रत्येक स्ट्रिंग के श्रेणी में ब्लॉकिंग डायोड कमज़ोर स्ट्रिंग में, या बैटरी-तंत्र में रात को ऐरे में, उलटी धारा बहने से रोकता है।

हल उदाहरण। श्रेणी में दस मॉड्यूल हैं, प्रत्येक का 25 °C पर Voc = 37.5 V है और ताप में प्रति °C वृद्धि पर Voc प्रति मॉड्यूल 0.12 V घटता है (ठंडा करने पर प्रति °C 0.12 V बढ़ता है)। 5 °C सेल ताप पर प्रत्येक मॉड्यूल 37.5 + 0.12 × 20 = 39.9 V तथा स्ट्रिंग 399 V देती है। इन्वर्टर या चार्ज कंट्रोलर को यही ठंडी सुबह की चरम वोल्टता सहनी होगी, नेमप्लेट की 375 V नहीं।

5. अधिकतम शक्ति बिंदु अनुसरण (MPPT)

मॉड्यूल अपनी अधिकतम शक्ति केवल एक संचालन-बिंदु पर देता है, जहाँ भार-रेखा वक्र को घुटने पर काटती है। प्रतिरोध R वाला भार V = IR पर चलता है; मॉड्यूल तब मेल में है जब R = Vmp/Imp हो। घुटना विकिरण व ताप के साथ खिसकता है, इसलिए स्थिर भार प्रायः मेल में नहीं होता। MPPT नियंत्रक मॉड्यूल व भार के बीच DC-DC कन्वर्टर रखकर उसका ड्यूटी चक्र D इस तरह बदलता है कि भार चाहे जो हो, मॉड्यूल को मिलान वाला प्रतिरोध दिखे।

MPPT में प्रयुक्त DC-DC कन्वर्टर संबंध
कन्वर्टर (हानि-रहित, सतत चालन)निर्गत वोल्टतास्रोत को दिखता प्रतिरोध
बक (अपचायी)Vo = D·ViRL/D²
बूस्ट (उच्चायी)Vo = Vi/(1 − D)RL(1 − D)²
  • विक्षोभ व प्रेक्षण (P&O): वोल्टता को थोड़ा हिलाइए; शक्ति बढ़े तो वही दिशा, घटे तो उलटी। सरल है, पर शिखर के आसपास दोलन करता है और तेज़ बदलते प्रकाश में भटक सकता है।
  • वर्धी चालकता (incremental conductance): शिखर पर dP/dV = 0, अर्थात् dI/dV = −I/V; दिशा तय करने हेतु वर्धी व तात्क्षणिक चालकता की तुलना होती है, और यह शिखर पर रुक सकता है।
  • स्थिर-वोल्टता विधि: वोल्टता को Voc के निश्चित अंश पर रखें; सस्ती पर केवल सन्निकट।

हल उदाहरण। मॉड्यूल का Vmp = 30 V, Imp = 8 A है, अतः Rmpp = 3.75 Ω। यह हानि-रहित बक कन्वर्टर से 0.6 Ω भार को चलाता है। मिलान शर्त RL/D² = 3.75 से D² = 0.6/3.75 = 0.16, D = 0.40। जाँच: निर्गत 0.4 × 30 = 12 V तथा 12/0.6 = 20 A, और 12 V × 20 A = 240 W = 30 V × 8 A। 48 V बस को चार्ज करने के लिए 30 V मॉड्यूल को बूस्ट कन्वर्टर चाहिए, 48 = 30/(1 − D) से D = 0.375।

🎯 MPPT ऊर्जा बढ़ाता है, Pmax नहीं
MPPT मौजूदा धूप व ताप पर मॉड्यूल की Pmax नहीं बढ़ा सकता। वह संचालन-बिंदु को घुटने से दूर बैठने से रोकता है, जो उस बैटरी के साथ सबसे अधिक मायने रखता है जिसकी वोल्टता Vmp से भिन्न हो, और ठंडे मौसम में जब Vmp ऊँची होती है।

मुख्य बिंदु

  • फ़ोटॉन तभी अवशोषित होता है जब hc/λ ≥ Eg हो; ऊष्मीकरण व उप-बैंड-अंतराल हानि एकल संधि को लगभग एक-तिहाई दक्षता तक सीमित करती हैं। सिलिकॉन: Eg ≈ 1.12 eV, λc ≈ 1107 nm।
  • I = IL − I₀[exp(qV/nkT) − 1]; Isc ≈ IL, Voc = (nkT/q) ln(IL/I₀ + 1)। Isc ∝ विकिरण, जबकि Voc केवल लघुगणकीय बढ़ती है और ताप बढ़ने पर घटती है।
  • FF = Vmp Imp/(Voc Isc) तथा η = Pmax/(G·A) = FF·Voc·Isc/(G·A)। STC: 1000 W/m², सेल ताप 25 °C, AM1.5।
  • श्रेणी: धारा समान, वोल्टताएँ जुड़ती हैं; समांतर: वोल्टता समान, धाराएँ जुड़ती हैं। छायित सेल श्रेणी स्ट्रिंग को सीमित करता है; बाईपास डायोड उसके चारों ओर मार्ग देते हैं, ब्लॉकिंग डायोड उलटी धारा रोकते हैं।
  • MPPT, DC-DC कन्वर्टर द्वारा भार को Rmpp = Vmp/Imp से मिलाता है: बक Vo = D·Vi (स्रोत को RL/D² दिखता है), बूस्ट Vo = Vi/(1 − D) (स्रोत को RL(1 − D)² दिखता है)। P&O दोलन करता है; वर्धी चालकता dI/dV = −I/V प्रयोग करती है।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. सिलिकॉन सेल की कटऑफ़ तरंगदैर्घ्य से अधिक तरंगदैर्घ्य का प्रकाश बहुत तेज़ तीव्रता से उस पर पड़ता है। परिणाम क्या होगा?

    1. बहुत बड़ी प्रकाश-धारा बनती है, क्योंकि तरंगदैर्घ्य जो भी हो, तीव्रता ही प्रकाश-धारा तय करती है
    2. कोई इलेक्ट्रॉन-होल युग्म नहीं बनता, क्योंकि प्रत्येक फ़ोटॉन की ऊर्जा बैंड-अंतराल से कम है
    3. युग्म बनते हैं, पर केवल संधि पर, इसलिए बाह्य धारा नहीं बहती
    4. सेल को बैंड-अंतराल से ऊपर गर्म करके खुला-परिपथ वोल्टता बढ़ा देता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — कोई इलेक्ट्रॉन-होल युग्म नहीं बनता, क्योंकि प्रत्येक फ़ोटॉन की ऊर्जा बैंड-अंतराल से कम है

    अवशोषण हेतु E = hc/λ ≥ Eg चाहिए; ऐसे फ़ोटॉन Eg से कम ऊर्जा के होते हैं, अतः कितने भी आएँ युग्म नहीं बनते। तीव्रता केवल उन फ़ोटॉनों की संख्या बढ़ाती है जो वाहक उत्तेजित कर सकते हैं। ऊष्मन वाला विचार भी गलत है: ऊँचा ताप Voc घटाता है।
  2. hc = 1240 eV·nm लेकर, 1.12 eV बैंड-अंतराल वाले सेल पदार्थ द्वारा अवशोषित अधिकतम तरंगदैर्घ्य निकटतम है

    1. 554 nm
    2. 887 nm
    3. 1389 nm
    4. 1107 nm
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 1107 nm

    λc = 1240/1.12 = 1107 nm। 1389 nm गुणा करने (1240 × 1.12) की भूल से और 554 nm दोगुने अंतराल 2.24 से भाग देने से आता है।
  3. क्रिस्टलीय सिलिकॉन मॉड्यूल में स्थिर विकिरण पर सेल ताप 25 °C से 60 °C हो जाता है। परिवर्तनों का कौन-सा समुच्चय सही है?

    1. Voc स्पष्ट घटती है, Isc थोड़ी बढ़ती है, Pmax घटती है
    2. Voc बढ़ती है और Isc घटती है, इसलिए Pmax बढ़ती है क्योंकि वाहक अधिक ऊर्जावान हैं
    3. Voc अपरिवर्तित रहती है, Isc ताप के साथ तेज़ बढ़ती है, इसलिए Pmax भी बढ़ती है
    4. Voc स्पष्ट घटती है, Isc घटती है, Pmax अपरिवर्तित रहती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — Voc स्पष्ट घटती है, Isc थोड़ी बढ़ती है, Pmax घटती है

    ऊँचा ताप संतृप्ति धारा I₀ को चरघातांकी बढ़ाता है, इसलिए Voc = (nkT/q) ln(IL/I₀ + 1) घटती है; अंतराल संकरा होने से Isc थोड़ी बढ़ती है। वोल्टता-हानि छोटे धारा-लाभ से भारी पड़ती है, अतः Pmax घटती है। अधिक ऊष्मा से अधिक शक्ति का विचार ताप-प्रभाव को विकिरण-प्रभाव से मिला देता है।
  4. संपर्कों के संक्षारण से सेल का श्रेणी प्रतिरोध बढ़ जाता है, विकिरण व ताप अपरिवर्तित हैं। I-V वक्र पर सबसे सटीक प्रभाव कौन-सा है?

    1. Isc व Voc दोनों समान अनुपात में घटती हैं, अतः वक्र मूल बिंदु की ओर एकसमान सिकुड़ता है
    2. संपर्कों में अतिरिक्त वोल्टता-पात के कारण Voc बढ़ती है, जबकि Isc वही रहती है
    3. फ़िल फ़ैक्टर व घुटने की शक्ति घटते हैं, जबकि Voc व Isc लगभग अपरिवर्तित रहती हैं
    4. वक्र अधिक वर्गाकार होता है और फ़िल फ़ैक्टर बढ़ता है, अतः घुटने पर अधिक शक्ति मिलती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — फ़िल फ़ैक्टर व घुटने की शक्ति घटते हैं, जबकि Voc व Isc लगभग अपरिवर्तित रहती हैं

    खुले परिपथ पर Rs में धारा नहीं बहती, अतः Voc अपरिवर्तित रहती है; लघु परिपथ पर Rs पर वोल्टता-पात कम होता है, अतः Isc लगभग अपरिवर्तित रहती है। इनके बीच Rs घुटने को गोल करता है और FF व Pmax घटाता है। अधिक वर्गाकार वक्र के लिए श्रेणी प्रतिरोध कम चाहिए, अधिक नहीं।
  5. दो सर्वसम मॉड्यूल, प्रत्येक के Voc = 22 V व Isc = 5 A, समांतर जोड़े गए हैं। संयोजन के होंगे

    1. Voc = 44 V व Isc = 5 A
    2. Voc = 44 V व Isc = 10 A
    3. Voc = 22 V व Isc = 5 A
    4. Voc = 22 V व Isc = 10 A
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — Voc = 22 V व Isc = 10 A

    समांतर में वोल्टता उभयनिष्ठ और धाराएँ जुड़ती हैं: 22 V व 10 A। 44 V व 5 A का युग्म श्रेणी संयोजन का है।
  6. श्रेणी स्ट्रिंग में एक सेल पूर्णतः छायित है और स्ट्रिंग में बाईपास डायोड नहीं है। स्ट्रिंग जितनी धारा वहन कर सकती है, उसका क्या होता है?

    1. यह उतनी ही रह जाती है जितनी छायित सेल दे सके, और वह सेल उलटी बायस में जाकर गर्म हो सकता है
    2. यह सेलों की प्रकाश-धाराओं का औसत होती है, क्योंकि सेल भार को बराबर बाँटते हैं
    3. यह लगभग अप्रभावित रहती है, क्योंकि छायित सेल केवल अपनी वोल्टता खोता है और अन्य पहले की तरह चलते रहते हैं
    4. यह सबसे अच्छे प्रकाशित सेल से तय होती है, क्योंकि अन्य अपनी वोल्टता समायोजित कर लेते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — यह उतनी ही रह जाती है जितनी छायित सेल दे सके, और वह सेल उलटी बायस में जाकर गर्म हो सकता है

    श्रेणी के सेलों में धारा समान होती है, इसलिए सबसे कमज़ोर सेल उसे तय करता है; अन्य अपनी धारा छायित सेल से बलपूर्वक निकालते हैं, उसे उलटी बायस में डालते हैं, जिससे वह हॉट स्पॉट बनकर शक्ति क्षय करता है। बाईपास डायोड धारा को दूसरा मार्ग देकर समस्या हटाता है।
  7. 36 सेल का मॉड्यूल 1.2 m² का है और STC पर 16 % दक्ष है। 800 W/m² विकिरण व 45 °C सेल ताप पर क्षेत्र में इसके उत्पादन के बारे में सबसे युक्तिसंगत कथन कौन-सा है?

    1. उत्पादन 0.16 × 800 × 1.2 W से अधिक है क्योंकि ताप के साथ धारा बढ़ती है
    2. उत्पादन ठीक 0.16 × 800 × 1.2 W है, क्योंकि दक्षता मॉड्यूल का नियतांक है
    3. उत्पादन 0.16 × 800 × 1.2 W से कम है, क्योंकि ऊँचा ताप दक्षता घटाता है
    4. उत्पादन 0.16 × 1000 × 1.2 W है क्योंकि केवल STC विकिरण मायने रखता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — उत्पादन 0.16 × 800 × 1.2 W से कम है, क्योंकि ऊँचा ताप दक्षता घटाता है

    16 % का मान 25 °C पर लागू है। 45 °C पर Voc व Pmax कम होती हैं, अतः उत्पादन STC दक्षता से मिलने वाले 153.6 W से कम होता है। शक्ति लगभग विकिरण (1000 नहीं, 800) के अनुपात में बदलती है, जिससे 1000 W/m² वाला विचार कट जाता है।
  8. एक हानि-रहित बूस्ट कन्वर्टर अधिकतम शक्ति बिंदु (Vmp = 30 V) पर मॉड्यूल को 48 V पर टिकी बैटरी बस से जोड़ता है। ड्यूटी चक्र है

    1. 0.625
    2. 0.375
    3. 0.600
    4. 0.250
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 0.375

    बूस्ट: Vo = Vi/(1 − D), अतः 1 − D = 30/48 = 0.625 और D = 0.375। 0.625 तो 1 − D है, और 0.600 = 30/50 संबंध नहीं है। बक-प्रकार का नियम (D = Vo/Vi) उच्चायन दे ही नहीं सकता।
  9. वर्धी चालकता MPPT एल्गोरिद्म V व I मापता है। अधिकतम शक्ति बिंदु पर वह जो शर्त पहचानता है, वह है

    1. dI/dV = −I/V
    2. dI/dV = +I/V
    3. dI/dV = 0
    4. dV/dI = −I/V
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — dI/dV = −I/V

    P = VI, अतः dP/dV = I + V dI/dV, जो dI/dV = −I/V पर शून्य होता है। dI/dV = 0 लघु परिपथ (वक्र के समतल भाग) पर होता है, घुटने पर नहीं, और चिह्न ऋणात्मक होना चाहिए क्योंकि V बढ़ने पर I घटती है।
  10. एक सेल का 1000 W/m² (अर्थात् 100 mW/cm²) पर Voc = 0.62 V तथा Isc = 35 mA/cm² है। इसकी दक्षता 17 % है। इसका फ़िल फ़ैक्टर निकटतम है

    1. 0.55
    2. 0.93
    3. 0.86
    4. 0.78
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 0.78

    Pmax = 0.17 × 100 = 17 mW/cm²। Voc × Isc = 0.62 × 35 = 21.7 mW/cm²। FF = 17/21.7 = 0.783। 0.55 बहुत खराब सेल का मान होता, और 0.9 से ऊपर का फ़िल फ़ैक्टर लगभग आदर्श होता है जिसे सिलिकॉन नहीं पाता।
  11. प्रकाशित सौर सेल के I-V अभिलक्षणों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. Isc लगभग विकिरण के अनुपात में होती है
    2. Voc विकिरण के साथ लगभग लघुगणकीय बढ़ती है
    3. बहुत अच्छे सेल का फ़िल फ़ैक्टर 1 से अधिक हो सकता है
    4. खुला-परिपथ बिंदु पर प्रदत्त शक्ति सर्वाधिक होती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — Isc लगभग विकिरण के अनुपात में होती है; B — Voc विकिरण के साथ लगभग लघुगणकीय बढ़ती है

    Isc ≈ IL फ़ोटॉन-अभिवाह के साथ चलती है, जबकि Voc = (nkT/q) ln(IL/I₀ + 1) केवल लघुगणकीय बढ़ती है। FF घुटने वाले आयत व Voc × Isc आयत का अनुपात है और रचना से ही 1 से कम है। खुले परिपथ पर I = 0 है, अतः शक्ति शून्य है।
  12. Ns श्रेणी में प्रति स्ट्रिंग और Np स्ट्रिंग समांतर जुड़े सर्वसम मॉड्यूलों के लिए निम्नलिखित में से कौन-से सही हैं?

    1. ऐरे का Voc, मॉड्यूल के Voc का Ns गुना है
    2. ऐरे का Isc, मॉड्यूल के Isc का Np गुना है
    3. ऐरे का Voc, मॉड्यूल के Voc का Np गुना है
    4. ऐरे की अधिकतम शक्ति, मॉड्यूल की अधिकतम शक्ति को Ns·Np से भाग देने पर मिलती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — ऐरे का Voc, मॉड्यूल के Voc का Ns गुना है; B — ऐरे का Isc, मॉड्यूल के Isc का Np गुना है

    श्रेणी गणना वोल्टता को और समांतर गणना धारा को गुणा करती है, इसलिए Pmax Ns·Np से गुणा होती है, भाग नहीं। वोल्टता के लिए Np लेना दोनों नियम आपस में बदल देता है।
  13. अधिकतम शक्ति बिंदु अनुसरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. अधिकतम शक्ति बिंदु विकिरण व सेल ताप के साथ खिसकता है
    2. ड्यूटी चक्र बदलकर कन्वर्टर मॉड्यूल को दिखने वाला प्रतिरोध बदलता है
    3. MPPT मौजूदा विकिरण व ताप पर मॉड्यूल की Pmax को उसके मान से ऊपर ले जाता है
    4. विक्षोभ व प्रेक्षण शिखर पर बिना किसी दोलन के टिक जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — अधिकतम शक्ति बिंदु विकिरण व सेल ताप के साथ खिसकता है; B — ड्यूटी चक्र बदलकर कन्वर्टर मॉड्यूल को दिखने वाला प्रतिरोध बदलता है

    घुटना दशाओं के साथ खिसकता है, और कन्वर्टर स्रोत-पक्ष का प्रतीत प्रतिरोध बदलता है (बक हेतु RL/D²)। MPPT केवल मॉड्यूल को उसकी मौजूदा Pmax पर रखता है; उससे अधिक नहीं कर सकता। P&O निरंतर विक्षोभ देता रहता है, इसलिए शिखर के चारों ओर दोलन करता है।
  14. 1.6 m² क्षेत्रफल का एक मॉड्यूल STC (1000 W/m²) पर Vmp = 31 V व Imp = 8.3 A देता है। मॉड्यूल-क्षेत्रफल पर आधारित इसकी दक्षता प्रतिशत में, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 16.1

    Pmax = 31 × 8.3 = 257.3 W; आपतित शक्ति = 1000 × 1.6 = 1600 W; η = 257.3/1600 = 0.1608 = 16.1 %। दो बार हाथ से व Python से सत्यापित।
  15. दस मॉड्यूल श्रेणी में जुड़े हैं। प्रत्येक का 25 °C सेल ताप पर Voc = 37.5 V है और प्रत्येक मॉड्यूल का Voc प्रति °C 0.12 V बदलता है (ताप बढ़ने पर घटता है)। 5 °C सेल ताप की ठंडी सुबह में स्ट्रिंग का Voc वोल्ट में ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 399

    20 °C ठंडा होने पर प्रत्येक मॉड्यूल 0.12 × 20 = 2.4 V बढ़कर 39.9 V हो जाता है; श्रेणी में दस का योग 399 V है। 25 °C के आँकड़े लेने पर जाल-मान 375 V आता है।
  16. एक सेल का आदर्शता गुणांक n = 1.2, kT/q = 25.85 mV, प्रकाश-धारा IL = 8 A तथा संतृप्ति धारा I₀ = 1.0 × 10⁻⁹ A है। आदर्श एकल-डायोड समीकरण से खुला-परिपथ वोल्टता वोल्ट में, दो दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 0.71

    Voc = nkT/q × ln(IL/I₀ + 1) = 1.2 × 0.02585 × ln(8 × 10⁹) = 0.03102 × 22.80 = 0.7074 V, अर्थात् 0.71 V। Python से जाँचा (0.7074)।
  17. अधिकतम शक्ति बिंदु पर एक मॉड्यूल का Vmp = 30 V व Imp = 8 A है। वह हानि-रहित बक कन्वर्टर के माध्यम से 0.6 Ω के विशुद्ध प्रतिरोधी भार को चलाता है। अधिकतम शक्ति अंतरण हेतु ड्यूटी चक्र, दो दशमलव स्थान तक, ____ होना चाहिए।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 0.40

    Rmpp = 30/8 = 3.75 Ω। बक कन्वर्टर स्रोत को RL/D² दिखाता है, अतः D² = 0.6/3.75 = 0.16 और D = 0.40। जाँच: Vo = 12 V, Io = 20 A, निवेश व निर्गत 240 W।