ऊर्जा प्रबंधन: अंकेक्षण, विद्युत प्रणालियाँ, मोटर, प्रकाश तथा ऊष्मीय व यांत्रिक प्रणालियाँ

यह अध्याय अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर के XE8 ऊर्जा विज्ञान के खंड XE8.2 की उप-शीर्षिका “ऊर्जा प्रबंधन” का उत्तर देता है: “ऊर्जा अंकेक्षण (कार्यविधि, संयंत्र के पिछले आँकड़ों के रुझान का विश्लेषण), विद्युत प्रणालियाँ (माँग-पक्ष प्रबंधन, शक्ति गुणांक सुधार), मोटर दक्षता परीक्षण, ऊर्जा-दक्ष मोटर, प्रकाश (प्रकाश स्तर, दक्ष विकल्प, फ़िक्स्चर, दिन-प्रकाश, टाइमर), ऊष्मीय व यांत्रिक प्रणालियाँ (रोधन, संपीडक, पंप, बॉयलर, तापन व शीतलन प्रणालियाँ)।” यह XE8 ऊर्जा विज्ञान का खंड XE8.2 है, नौ वैकल्पिक खंडों में से एक, जिनमें से कोई दो परीक्षा में परीक्षार्थी चुनता है। अध्याय अंकेक्षण-विधि व रुझान-विश्लेषण, लोड फ़ैक्टर, माँग-पक्ष प्रबंधन व शक्ति गुणांक सुधार, मोटर की हानियाँ, परीक्षण व दक्ष मोटर, ल्यूमेन विधि व दिन-प्रकाश, तथा रोधन, बॉयलर, चिलर, संपीडक व पंप में ऊर्जा-बचत के मार्ग पढ़ाता है। संख्यात्मक प्रश्न आधार-रेखा से विशिष्ट ऊर्जा, संधारित्र kvar, मोटर-प्रतिस्थापन से बचत, ल्यूमिनेयर संख्या, और एफ़िनिटी नियमों के अंतर्गत पंप शक्ति हैं, सारा आँकड़ा दिया हुआ।

1. ऊर्जा अंकेक्षण: विधि और रुझान-विश्लेषण

ऊर्जा अंकेक्षण वह व्यवस्थित सर्वेक्षण है जो पता लगाता है कि ऊर्जा सुविधा में कहाँ आती है, कहाँ जाती है, और कौन-सी बचतें खरीदने योग्य हैं। प्रारंभिक (वॉक-थ्रू) अंकेक्षण बिलों और संयंत्र-भ्रमण से स्पष्ट अवसरों को क्रमित करता है; विस्तृत अंकेक्षण मापन व पूर्ण ऊर्जा संतुलन जोड़ता है। सामान्य क्रम: योजना बनाना व पिछले बिल तथा उत्पादन-आँकड़े एकत्र करना; सर्वेक्षण व मापन (पावर एनालाइज़र, फ़्लू-गैस विश्लेषक, लक्समीटर, प्रवाह व ताप उपकरण, ऊष्मीय इमेजर); ऊर्जा संतुलन बनाना (निवेश बनाम उपयोगी निर्गत व हानियाँ, जो मिलना चाहिए); उपाय पहचानना; अर्थशास्त्र (प्रतिदाय, NPV, संरक्षित ऊर्जा की लागत) से क्रमित करना; प्रतिवेदन; क्रियान्वयन; और बचत का आधार-रेखा से सत्यापन।

पिछले आँकड़ों का विश्लेषण विशिष्ट ऊर्जा खपत SEC = ऊर्जा/उत्पादन (kWh प्रति टन, प्रति इकाई) से आरंभ होता है। अकेली SEC भ्रामक है, क्योंकि ऊर्जा का कुछ भाग स्थिर है (प्रकाश, स्टैंडबाय, उपयोगिताएँ) और कुछ उत्पादन के साथ बदलता है। मासिक ऊर्जा को उत्पादन पर समाश्रयण से आधार-रेखा E = E₀ + k P फ़िट करें: E₀ स्थिर भार और k प्रति इकाई सीमांत ऊर्जा है। तब SEC = E₀/P + k उत्पादन बढ़ने पर घटती है, क्योंकि स्थिर भाग अधिक इकाइयों में बँटता है। E₀ = 140 MWh और k = 1.0 MWh/t पर 400 t में SEC 540/400 = 1.35 MWh/t है, 200 t में 1.70। जिस माह की वास्तविक ऊर्जा रेखा से ऊपर हो, वह जाँच का माह है।

  • CUSUM (संचयी योग) माह-दर-माह (वास्तविक − अपेक्षित) ऊर्जा का चालू योग है; ऊपर की ओर बहती रेखा का अर्थ स्थायी आधिक्य, नीचे की ओर बहाव का अर्थ बचत, और ढाल का परिवर्तन बताता है कि निष्पादन कब बदला।
  • तुलना से पहले सामान्यीकरण करें: उत्पादन, मौसम (तापन व शीतलन हेतु डिग्री-दिन) और उत्पाद-मिश्रण हेतु समायोजन करें, अन्यथा दो वर्षों के बिल कुछ नहीं तुलते।
⚠️ घटती SEC सदैव बचत नहीं
यदि उत्पादन बढ़े और E₀ बड़ा हो तो कुछ सुधारे बिना भी SEC घटती है। समान उत्पादन पर वास्तविक ऊर्जा की आधार-रेखा से तुलना करें, भिन्न निर्गतों पर SEC की नहीं।

2. विद्युत प्रणालियाँ: माँग-पक्ष प्रबंधन और शक्ति गुणांक सुधार

औद्योगिक आपूर्ति के बिल में ऊर्जा-शुल्क (kWh) और बिलिंग अंतराल की उच्चतम औसत kW (या kVA) पर अधिकतम माँग का शुल्क होता है। लोड फ़ैक्टर = (औसत माँग)/(अधिकतम माँग) = kWh/(MD × घंटे)। 720 h के माह में 360 000 kWh और MD = 1000 kW पर 360 000/(1000 × 720) = 0.5। उच्च लोड फ़ैक्टर का अर्थ है कि जिस क्षमता का भुगतान हुआ वह भली-भाँति प्रयुक्त है; तीखे उतार-चढ़ाव वाला भार उस माँग का बहुत भुगतान करता है जो वह कम ही प्रयोग करता है। माँग-पक्ष प्रबंधन (DSM) भार को नया आकार देने हेतु उपभोक्ता की ओर कार्य करता है: शिखर-कर्तन (शिखर घटाना), घाटी-पूरण (शिखर-इतर भार बढ़ाना), भार-स्थानांतरण (भार को शिखर से शिखर-इतर में ले जाना, समय-आधारित शुल्क व ऊष्मीय भंडारण की सहायता से), और रणनीतिक संरक्षण (दक्षता से पूरा वक्र नीचे लाना)।

शक्ति गुणांक cos φ = kW/kVA। प्रेरकीय भार (मोटर, ट्रांसफ़ॉर्मर) पश्चगामी अभिक्रियात्मक शक्ति kvar खींचते हैं, जो उपयोगी कार्य नहीं करती पर केबल, ट्रांसफ़ॉर्मर व जनित्र को भारित करती है और I²R हानि बढ़ाती है। शंट संधारित्र स्थानीय रूप से kvar देता है। भार P का शक्ति गुणांक स्थिर kW पर cos φ₁ से cos φ₂ करने हेतु: Q_c = P (tan φ₁ − tan φ₂)। 0.80 पर 500 kW को 0.95 करने हेतु: tan φ₁ = 0.75, tan φ₂ = 0.3287, अतः Q_c = 500 × 0.4213 = 210.7 kvar। kVA 625 से घटकर 526 होता है, धारा अपने मान की 0.80/0.95 = 0.842 रह जाती है, और I²R हानि (0.842)² = 0.709, यानी 29 % की कमी। भार द्वारा खींची kW नहीं बदलती।

⚠️ अति-सुधार और वास्तविक लाभ
आवश्यक पश्चगामी kvar से बड़े संधारित्र शक्ति गुणांक को अग्रगामी कर देते हैं और वोल्टता बढ़ा सकते हैं, अतः बैंक चरणों में जोड़े जाते हैं। बचत आपूर्ति-पक्ष में है (कम kVA माँग, कम लाइन-हानि, मुक्त क्षमता, निम्न शक्ति गुणांक का दंड टलना), भार स्वयं की प्रयुक्त kWh में नहीं।

3. मोटर की हानियाँ, दक्षता परीक्षण और ऊर्जा-दक्ष मोटर

प्रेरण मोटर की दक्षता η = निर्गत/निवेश = 1 − हानि/निवेश है। इसकी हानियाँ स्थिर (लोहे में क्रोड हानि, घर्षण व वातन, शून्य से पूर्ण भार तक लगभग स्थिर) और परिवर्ती (स्टेटर व रोटर ताँबा, I² से बढ़ती, साथ में आवारा भार हानि) हैं। दक्षता लगभग आधे से पूर्ण भार तक सपाट रहती है और हल्के भार पर तेज़ी से गिरती है, क्योंकि तब स्थिर हानि छोटे निवेश का बड़ा अंश होती है; हल्के भार पर शक्ति गुणांक भी गिरता है।

  • प्रत्यक्ष (निवेश-निर्गत) परीक्षण विद्युत निवेश व शाफ़्ट निर्गत (डायनेमोमीटर से) मापकर भाग देता है; यह उपकरण-त्रुटि के प्रति संवेदी है क्योंकि दोनों संख्याएँ पास-पास हैं। अप्रत्यक्ष (हानि-पृथक्करण) परीक्षण हानियाँ अलग-अलग मापकर निवेश से घटाता है; शून्य-भार परीक्षण स्थिर हानियाँ (क्रोड, घर्षण व वातन) देता है, अवरुद्ध-रोटर परीक्षण व स्टेटर प्रतिरोध परीक्षण-धारा पर ताँबे की हानियाँ देते हैं, और आवारा भार हानि परीक्षण-विधि की प्रक्रिया से आकलित होती है। स्वीकृत परीक्षण मानक इन प्रक्रियाओं को परिभाषित करते हैं, अतः भिन्न विधियों के परिणाम परस्पर बदले नहीं जा सकते।
  • क्षेत्र में स्लिप से भार-आकलन: भार % ≈ (N_s − N)/(N_s − N_रेटेड) × 100, N_s तुल्यकालिक चाल। N_s = 1500 rpm, रेटेड 1440 rpm और मापी 1455 rpm पर भार = 45/60 = 75 %। यह आसन्न है और आपूर्ति वोल्टता से प्रभावित होता है।
  • ऊर्जा-दक्ष मोटर हानियाँ घटाते हैं: अधिक व बेहतर ताँबा (कम I²R), निम्न-हानि पतली पटलित इस्पात और अधिक मात्रा में (कम क्रोड हानि), छोटा वायु-अंतराल, बेहतर पंखा व बेयरिंग। ये महँगे हैं और कम स्लिप से चलते हैं, जो पंखों व पंपों पर जाल है: चाल थोड़ी अधिक होने से भार शक्ति N³ से बढ़ती है, जो बचत खा सकती है।

हल: प्रतिवर्ष 6000 h तक 30 kW शाफ़्ट निर्गत देने वाली मोटर बदली जाती है, दक्षता 90 % से 94 %। निवेश 30/0.90 = 33.33 kW से घटकर 30/0.94 = 31.91 kW होता है। बचत = 1.4184 kW × 6000 h = 8511 kWh, या ₹8/kWh पर प्रतिवर्ष ₹68 085।

4. प्रकाश: स्तर, ल्यूमेन विधि, दक्ष विकल्प और दिन-प्रकाश

प्रदीप्ति E सतह की प्रति इकाई क्षेत्रफल पर पड़ने वाला ज्योति-फ़्लक्स है, लक्स में (1 लक्स = 1 lm/m²); अनुशंसित स्तर कार्य पर निर्भर हैं (गलियारे को परिशुद्ध कार्य से बहुत कम चाहिए)। स्रोत की ज्योति-दक्षता = ल्यूमेन/वाट (निवेश शक्ति, तंत्र-दक्षता हेतु बैलास्ट या ड्राइवर सहित)। ल्यूमेन विधि में ल्यूमिनेयर संख्या N = E A/(F × UF × MF) है: A कार्य-तल का क्षेत्रफल, F ल्यूमिनेयर का फ़्लक्स, UF उपयोग गुणांक (लैंप ल्यूमेन का वह अंश जो कार्य-तल तक पहुँचे, कक्ष-आकार, परावर्तकता व ल्यूमिनेयर से तय) और MF अनुरक्षण गुणांक (लैंप की जीर्णता व धूल हेतु)। 300 लक्स पर 20 m × 10 m कक्ष में, 3000 lm ल्यूमिनेयर, UF = 0.6, MF = 0.8 पर: N = 300 × 200/(3000 × 0.6 × 0.8) = 41.7, अतः कम से कम 42।

  • दक्ष विकल्प: कम ज्योति-दक्षता के तापदीप्त लैंप को LED या फ़्लोरोसेंट स्रोतों से बदलें; चुंबकीय बैलास्ट की जगह इलेक्ट्रॉनिक बैलास्ट या ड्राइवर प्रयोग करें (कम बैलास्ट-हानि, कंपन-रहित); उत्तम परावर्तकों व प्रकाशिकी वाले दक्ष ल्यूमिनेयर लें ताकि अधिक ल्यूमेन कार्य तक पहुँचें; टास्क-लाइटिंग व निम्न सामान्य स्तर अपनाएँ; लैंप व फ़िक्स्चर स्वच्छ और सतहें हल्के रंग की रखें।
  • नियंत्रण: निश्चित समय-सारणी हेतु टाइमर, आंतरायिक स्थानों हेतु अधिभोग संवेदक, और दिन-प्रकाश उपलब्ध होने पर बिजली-प्रकाश घटाने वाला फ़ोटोसेल मंदन। 4000 h चालू रहने वाला प्रकाश-भार 3000 h किया जाए तो बिना पूँजी लागत के उसकी एक-चौथाई ऊर्जा बचती है।

दिन-प्रकाश प्राकृतिक प्रकाश से बिजली-प्रकाश को विस्थापित करता है। दिन-प्रकाश गुणांक DF = (किसी बिंदु पर आंतरिक क्षैतिज प्रदीप्ति)/(अबाधित आकाश से उसी क्षण बाह्य क्षैतिज प्रदीप्ति) × 100 %, अतः 5000 लक्स बाहर के सामने भीतर 150 लक्स 3 % है। कक्ष में गहराई के साथ DF घटता है, अतः पार्श्व खिड़कियाँ पहले कुछ मीटर प्रकाशित करती हैं; छत-प्रकाशक व प्रकाश-पटल अधिक गहराई तक पहुँचते हैं। अभिकल्प को चकाचौंध और दिन-प्रकाश से आने वाले ऊष्मा-लाभ में संतुलन रखना होता है, जो शीतलन भार बढ़ाता है।

5. ऊष्मीय प्रणालियाँ: रोधन, बॉयलर, तापन व शीतलन

रोधन श्रेणी में ऊष्मीय प्रतिरोध जोड़ता है। क्षेत्रफल A की समतल दीवार से q = ΔT/ΣR″, प्रत्येक परत हेतु R″ = L/k (m²K/W), पृष्ठ-परतें नगण्य मानकर। 0.2 m मोटाई और k = 0.8 W/m·K की दीवार का R″ = 0.25; k = 0.04 का 0.05 m रोधन 1.25 जोड़ता है, अतः ΔT = 20 K पर फ़्लक्स 20/0.25 = 80 W/m² से घटकर 20/1.5 = 13.3 W/m² हो जाता है। आर्थिक मोटाई वह है जहाँ एक और वृद्धि की बचत उसकी लागत के बराबर हो, अतः वह ईंधन-मूल्य व बट्टा दर से तय होती है। छोटे पाइप या तार पर जाल है: बाहरी गुणांक h वाले बेलन हेतु क्रांतिक त्रिज्या r_c = k_ins/h तक रोधन ऊष्मा-हानि बढ़ाता है, क्योंकि बड़ा क्षेत्रफल जुड़े प्रतिरोध पर भारी पड़ता है।

प्रत्यक्ष विधि से बॉयलर दक्षता (भाप-प्रवाह × एन्थैल्पी-वृद्धि)/(ईंधन-प्रवाह × ऊष्मीय मान) है: 0.8 t/h, 40 000 kJ/kg ईंधन से 2400 kJ/kg पाने वाली 10 t/h भाप 24 × 10⁶/32 × 10⁶ = 75 % है। अप्रत्यक्ष विधि हानियाँ घटाती है: चिमनी (शुष्क फ़्लू-गैस) हानि, जो चिमनी-ताप व अतिरिक्त वायु से बढ़ती है; ईंधन-नमी व हाइड्रोजन-दहन हानि; अदहित कार्बन; विकिरण; और ब्लोडाउन। बचत के मार्ग इससे निकलते हैं: वायु को उस न्यूनतम अतिरिक्त वायु पर समस्वरित करें जो CO कम रखे, इकोनॉमाइज़र या वायु पूर्वतापक जोड़ें, ऊष्मा-अंतरण सतहें स्वच्छ रखें (मैल चिमनी-ताप बढ़ाता है), रोधन करें, संघनित लौटाएँ, और ब्लोडाउन से ऊष्मा पुनः प्राप्त करें।

शीतलन। चिलर का निष्पादन COP = प्रशीतन प्रभाव/संपीडक शक्ति है, या kW/TR में; 1 TR (प्रशीतन टन) = 3.517 kW, अतः kW/TR = 3.517/COP, और COP 4.0 का अर्थ 0.88 kW/TR है। वाष्पित्र ताप बढ़ाकर, संघनित्र ताप घटाकर (स्वच्छ संघनित्र, उत्तम कूलिंग-टावर अप्रोच), शीत लाइनों के रोधन से, और गरम व ठंडी वायु के मिश्रण से बचकर दक्षता सुधरती है। तापन की बचत गरम अपशिष्ट धाराओं व ठंडे निवेशों के बीच ऊष्मा-पुनर्प्राप्ति से, और न्यूनतम उपयोगी ताप पर ऊष्मा देने से आती है।

6. यांत्रिक प्रणालियाँ: संपीडक और पंप

संपीडित वायु महँगी उपयोगिता है, और सामान्य संयंत्र में बिजली का बड़ा भाग ऊष्मा के रूप में खो जाता है। निष्पादन-मापक विशिष्ट शक्ति है, प्रति इकाई प्रदत्त मुक्त वायु kW (kW प्रति m³/min)। बचत के मार्ग: रिसाव सुधारें (रिसाव सदैव बहता है और संपीडक की शक्ति लगातार लेता है); प्रदाय दाब घटाकर उपयोगकर्ताओं की आवश्यकता पर लाएँ (दाब-अनुपात के साथ प्रति kg कार्य बढ़ता है); ठंडी अंतः-वायु लें (समान दाब-अनुपात पर प्रति kg कार्य अंतः ताप T₁ के अनुपात में है); अभारित चलाने से बचें; मशीनों की संख्या माँग से मिलाएँ; खुले निकास की जगह ड्रेन-ट्रैप प्रयोग करें; संपीडन की ऊष्मा पुनः प्राप्त करें; और जहाँ ब्लोअर या विद्युत औज़ार चले वहाँ संपीडित वायु न प्रयोग करें।

पंप व पंखे। द्रवचालित शक्ति = ρ g Q H, और शाफ़्ट शक्ति = ρ g Q H/η। Q = 0.05 m³/s, H = 30 m और η = 0.70 पर शाफ़्ट शक्ति = 1000 × 9.81 × 0.05 × 30/0.70 = 21.0 kW। नियत तंत्र हेतु आदर्श समरूपता पर एफ़िनिटी नियम Q ∝ N, H ∝ N², P ∝ N³ हैं। चाल 20 % घटाने पर शक्ति 0.8³ = 0.512 रह जाती है, यानी 48.8 % बचत, जबकि उसी प्रवाह हेतु वाल्व अवरुद्ध करने पर चाल वही रहती है और पंप अपने वक्र पर चढ़ता है तथा हानि वाल्व पर होती है, बचत बहुत कम। अतः परिवर्ती-चाल ड्राइव परिवर्ती प्रवाह हेतु उपयुक्त है, और बड़े मार्जिन से चुना व अवरुद्ध किया पंप ऊर्जा गँवाता है; नियत कार्य हेतु इम्पेलर ट्रिम करना या छोटा पंप लगाना विकल्प है।

⚠️ एफ़िनिटी नियम नियत तंत्र-वक्र हेतु हैं
P ∝ N³ मानता है कि तंत्र-प्रतिरोध शुद्ध गतिक (घर्षण) है, ताकि शीर्ष N² का अनुसरण करे। यदि शीर्ष का बड़ा भाग स्थैतिक उत्थापन हो तो उसी शीर्ष पर प्रवाह चाल के अनुपात में नहीं घटता, और घनीय बचत नहीं मिलती; पहले तंत्र-वक्र जाँचें।

मुख्य बिंदु

  • अंकेक्षण मापता, संतुलित करता और क्रमित करता है: आधार-रेखा E = E₀ + kP स्थिर व परिवर्ती ऊर्जा अलग करती है, SEC = E₀/P + k निर्गत के साथ घटती है, और CUSUM बहाव उजागर करता है; तुलना से पहले सामान्यीकरण करें।
  • लोड फ़ैक्टर = kWh/(MD × h); DSM शिखर-कर्तन, घाटी-पूरण, भार-स्थानांतरण व संरक्षण से भार को नया आकार देता है; MD व शुल्क प्रत्येक का मूल्य तय करते हैं।
  • शक्ति गुणांक सुधार हेतु Q_c = P (tan φ₁ − tan φ₂) चाहिए; यह kVA, धारा व I²R हानि घटाता है, भार की अपनी kW नहीं, और अति-सुधार से बचना चाहिए।
  • मोटर की हानियाँ स्थिर (क्रोड, घर्षण) व परिवर्ती (ताँबा) हैं; अप्रत्यक्ष परीक्षण उन्हें अलग करता है (शून्य-भार, अवरुद्ध-रोटर), और दक्ष मोटर उन्हें घटाते हैं पर कम स्लिप से चलते हैं, जो पंखों व पंपों पर महत्त्वपूर्ण है।
  • प्रकाश: N = E A/(F × UF × MF); ज्योति-दक्षता, इलेक्ट्रॉनिक बैलास्ट, उत्तम फ़िक्स्चर, टाइमर, संवेदक और दिन-प्रकाश (दिन-प्रकाश गुणांक = आंतरिक/बाह्य प्रदीप्ति) प्रकाश-ऊर्जा घटाते हैं।
  • ऊष्मीय व यांत्रिक प्रणालियाँ: रोधन (आर्थिक मोटाई, क्रांतिक त्रिज्या), बॉयलर चिमनी-हानि व इकोनॉमाइज़र, चिलर COP (1 TR = 3.517 kW), संपीडक रिसाव व दाब, और पंप शक्ति ∝ N³ जिसमें चाल-नियंत्रण अवरोधन से श्रेष्ठ है।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. एक संयंत्र का (वास्तविक − अपेक्षित) ऊर्जा का मासिक CUSUM, उत्पादन-आधारित आधार-रेखा के सापेक्ष आलेखित, पिछले छह माह से लगातार बढ़ती रेखा दिखाता है। इससे संकेत मिलता है कि

    1. उन सभी छह महीनों में ऊर्जा-उपयोग आधार-रेखा की अपेक्षा से कम रहा है, अतः संयंत्र ऊर्जा बचा रहा है
    2. उन महीनों में उत्पादन बढ़ रहा है, और आलेख से दक्षता के बारे में कुछ निष्कर्ष नहीं निकल सकता
    3. आधार-रेखा समाश्रयण रेखा का उत्पादन के सापेक्ष ढाल ऋणात्मक है
    4. उन महीनों में ऊर्जा-उपयोग आधार-रेखा की अपेक्षा से अधिक रहा है, अतः कारण की जाँच होनी चाहिए
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — उन महीनों में ऊर्जा-उपयोग आधार-रेखा की अपेक्षा से अधिक रहा है, अतः कारण की जाँच होनी चाहिए

    CUSUM माह-दर-माह (वास्तविक − अपेक्षित) जोड़ता है, अतः लगातार बढ़ना हर माह के अपेक्षा से ऊपर होने का अर्थ है। उत्पादन-परिवर्तन अपेक्षित मान में पहले से सम्मिलित हैं, अतः वे वृद्धि की व्याख्या नहीं करते।
  2. एक कारख़ाना 720 h के बिलिंग माह में 360 000 kWh उपयोग करता है, और इसकी अधिकतम माँग 1000 kW है। इसका लोड फ़ैक्टर है

    1. 0.36, मासिक ऊर्जा को kW में अधिकतम माँग से भाग देने से
    2. 0.50, औसत माँग को अधिकतम माँग से भाग देने से
    3. 2.00, अधिकतम माँग को औसत माँग से भाग देने से
    4. 0.72, घंटों को 1000 से भाग देने से
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 0.50, औसत माँग को अधिकतम माँग से भाग देने से

    औसत माँग = 360 000/720 = 500 kW, अतः लोड फ़ैक्टर = 500/1000 = 0.5। व्युत्क्रम (2.0) लोड फ़ैक्टर हेतु असंभव है, जो 1 से अधिक नहीं हो सकता।
  3. एक शंट संधारित्र बैंक किसी प्रेरकीय भार का शक्ति गुणांक 0.80 से 0.95 पश्चगामी करता है, भार की kW अपरिवर्तित रहती है। निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

    1. भार द्वारा खींची kW शक्ति गुणांक के अनुपात में घटती है
    2. आपूर्ति धारा बढ़ती है, क्योंकि संधारित्र एक भार जोड़ता है
    3. आपूर्ति धारा और फ़ीडर में I²R हानि घटती है
    4. भार द्वारा स्वयं खींची अभिक्रियात्मक शक्ति सदा शून्य हो जाती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — आपूर्ति धारा और फ़ीडर में I²R हानि घटती है

    स्थिर kW व वोल्टता पर I ∝ 1/cos φ, अतः धारा अपने मान की 0.80/0.95 रह जाती है और I²R लगभग 29 % घटती है। भार की kW और उसकी अपनी अभिक्रियात्मक माँग अपरिवर्तित रहती हैं; संधारित्र kvar स्थानीय रूप से देता है ताकि आपूर्ति से कम खिंचे।
  4. लोड के पश्चगामी kvar से काफ़ी अधिक रेटिंग का संधारित्र बैंक, हल्के भार पर भी, स्थायी रूप से जुड़ा रहता है। सर्वाधिक संभावित परिणाम है

    1. शक्ति गुणांक अग्रगामी हो जाता है और भार पर आपूर्ति वोल्टता बढ़ सकती है
    2. भार की kW माँग अतिरिक्त kvar के अनुपात में बढ़ती है
    3. kW में अधिकतम माँग-शुल्क शून्य हो जाता है
    4. सभी भारों पर लाइन धारा शून्य हो जाती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — शक्ति गुणांक अग्रगामी हो जाता है और भार पर आपूर्ति वोल्टता बढ़ सकती है

    अतिरिक्त धारितीय kvar अति-सुधार करता है, अतः निवल अभिक्रियात्मक शक्ति अग्रगामी, शक्ति गुणांक अग्रगामी, और वोल्टता बढ़ सकती है; इसीलिए बैंक भार के साथ चरणों में जोड़े जाते हैं। भार की kW अप्रभावित है और भार वास्तविक शक्ति खींचते रहने पर लाइन धारा शून्य नहीं हो सकती।
  5. प्रेरण मोटर के हानि-पृथक्करण (अप्रत्यक्ष) परीक्षण में शून्य-भार परीक्षण मुख्यतः किसे निर्धारित करने हेतु प्रयुक्त होता है

    1. पूर्ण भार पर रोटर ताँबे की हानि, स्लिप से
    2. रेटेड धारा व रेटेड भार पर स्टेटर ताँबे की हानि
    3. स्थिर हानियाँ, क्रोड हानि व घर्षण एवं वातन
    4. रेटेड भार पर आवारा भार हानि, शून्य-भार निवेश से
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — स्थिर हानियाँ, क्रोड हानि व घर्षण एवं वातन

    शाफ़्ट भार न होने पर धारा छोटी होती है, अतः ताँबे की हानि छोटी होती है और निवेश लगभग पूरी तरह क्रोड तथा घर्षण-वातन हानि है। रेटेड धारा पर ताँबे की हानियाँ अवरुद्ध-रोटर परीक्षण व कुंडली प्रतिरोधों से आती हैं।
  6. अपकेंद्री पंखे को चलाने वाली मानक प्रेरण मोटर को समान रेटिंग की ऊर्जा-दक्ष मोटर से बदला जाता है, जो कम स्लिप के कारण कुछ अधिक चाल पर चलती है। पंखा अन्यथा नहीं बदला जाता। कौन-सा कथन सही है?

    1. बचत निश्चित है और दक्षता-लाभ के बराबर है, क्योंकि पंखे की शक्ति शाफ़्ट की चाल पर निर्भर नहीं करती
    2. पंखे की शक्ति घटती है, क्योंकि अधिक चाल का अर्थ कम भार है
    3. मोटर की हानियाँ बढ़ती हैं, क्योंकि कम स्लिप का अर्थ अधिक रोटर ताँबे की हानि है
    4. पंखे की शक्ति चाल-अनुपात के घन के लगभग अनुसार बढ़ती है और दक्षता-लाभ को निरस्त कर सकती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — पंखे की शक्ति चाल-अनुपात के घन के लगभग अनुसार बढ़ती है और दक्षता-लाभ को निरस्त कर सकती है

    अपकेंद्री पंखे हेतु P ∝ N³, अतः चाल में 1.5 % वृद्धि शक्ति को लगभग 4.6 % बढ़ाती है, जो कुछ प्रतिशत के दक्षता-लाभ के तुल्य है। चाल-नियामक ड्राइव या पुनः समायोजित पुली बचत लौटाती है। स्लिप कम इसलिए है कि रोटर ताँबे की हानि कम है, अधिक नहीं।
  7. एक कक्ष में किसी बिंदु पर उसी क्षण भीतर मापी प्रदीप्ति 150 लक्स है, जबकि अबाधित आकाश से बाहर क्षैतिज प्रदीप्ति 5000 लक्स है। उस बिंदु पर दिन-प्रकाश गुणांक है

    1. 3 %, 150/5000 × 100 से
    2. 33 %, 5000/150 से
    3. 97 %, (5000 − 150)/5000 × 100 से
    4. 30 %, 150/500 से
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — 3 %, 150/5000 × 100 से

    DF = (आंतरिक प्रदीप्ति/बाह्य प्रदीप्ति) × 100 = 150/5000 × 100 = 3 %। व्युत्क्रम और बाहर खोया अंश परिभाषा नहीं हैं।
  8. बाहरी त्रिज्या 3 mm का अति पतला नग्न चालक, बाहरी गुणांक h = 8 W/m²K वाली स्थिर वायु में ऊष्मा खोता है। उस पर k = 0.05 W/m·K का पतला रोधन चढ़ाया जाता है। जोड़े गए रोधन के पहले कुछ मिलीमीटर के लिए प्रति इकाई लंबाई ऊष्मा-हानि

    1. घटेगी, क्योंकि कोई भी जोड़ा गया रोधन सदैव चालन-प्रतिरोध बढ़ाता है और अतः हानि घटानी ही होगी
    2. अपरिवर्तित रहेगी, क्योंकि रोधन की परत बाह्य पृष्ठ-क्षेत्रफल नहीं बदलती
    3. बढ़ेगी, क्योंकि क्रांतिक त्रिज्या k/h = 6.25 mm वर्तमान बाह्य त्रिज्या से अधिक है
    4. बाह्य त्रिज्या 3 mm पार करते ही शून्य हो जाएगी
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — बढ़ेगी, क्योंकि क्रांतिक त्रिज्या k/h = 6.25 mm वर्तमान बाह्य त्रिज्या से अधिक है

    बेलन पर रोधन की क्रांतिक त्रिज्या r_c = k/h = 0.05/8 = 6.25 mm है। त्रिज्या r_c से कम हो तो बाह्य पृष्ठ की वृद्धि जुड़े चालन-प्रतिरोध पर भारी पड़ती है, अतः हानि पहले बढ़ती है, r_c पर उच्चतम होती है, फिर घटती है।
  9. स्थिर प्रदाय दाब और प्रदत्त मुक्त वायु के स्थिर आयतन-प्रवाह पर वायु संपीडक हेतु, कम ताप की अंतः-वायु लेना लाभकारी है क्योंकि

    1. दिए दाब-अनुपात पर प्रति kg कार्य अंतः परम ताप के अनुपात में है
    2. ठंडी वायु की विशिष्ट ऊष्मा कहीं अधिक है, अतः वह संपीडन की अधिक ऊष्मा ले जाती है
    3. तब संपीडक का दाब-अनुपात सभी भारों पर इकाई हो जाता है
    4. अंतः-वायु ठंडी होने पर प्रदाय लाइन के रिसाव रुक जाते हैं
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    उत्तर: A — दिए दाब-अनुपात पर प्रति kg कार्य अंतः परम ताप के अनुपात में है

    आदर्श गैस का प्रति इकाई द्रव्यमान संपीडन कार्य स्थिर दाब-अनुपात व प्रक्रम हेतु T₁ के अनुपात में है, अतः ठंडी अंतः-वायु प्रति kg ऊर्जा घटाती है। विशिष्ट ऊष्मा ताप से अल्प बदलती है, और ठंडी अंतः-वायु दाब-अनुपात नहीं बदलती न रिसाव रोकती है।
  10. निम्नलिखित में से कौन-से उपाय बॉयलर की चिमनी (शुष्क फ़्लू-गैस) हानि घटाते हैं?

    1. CO कम रखने के अनुरूप न्यूनतम अतिरिक्त वायु पर वायु-आपूर्ति समस्वरित करना
    2. इकोनॉमाइज़र लगाना जो फ़ीडवाटर तपाकर फ़्लू-गैस को ठंडा करे
    3. ऊष्मा-अंतरण सतहों से कालिख व शल्क साफ़ करना
    4. पूर्ण दहन सुनिश्चित करने हेतु अतिरिक्त वायु को इष्टतम से काफ़ी ऊपर बढ़ाना
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    उत्तर: A — CO कम रखने के अनुरूप न्यूनतम अतिरिक्त वायु पर वायु-आपूर्ति समस्वरित करना; B — इकोनॉमाइज़र लगाना जो फ़ीडवाटर तपाकर फ़्लू-गैस को ठंडा करे; C — ऊष्मा-अंतरण सतहों से कालिख व शल्क साफ़ करना

    कम अतिरिक्त वायु का अर्थ ऊष्मा बाहर ले जाने वाली कम गैस, इकोनॉमाइज़र चिमनी-ताप घटाता है, और स्वच्छ सतहें अधिक ऊष्मा अंतरित कर चिमनी-ताप घटाती हैं। इष्टतम से बहुत ऊपर अतिरिक्त वायु फ़्लू-गैस प्रवाह बढ़ाकर चिमनी-हानि बढ़ाती है।
  11. शुद्ध-घर्षण तंत्र पर अपकेंद्री पंप के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. एफ़िनिटी नियमों में शाफ़्ट शक्ति चाल के घन के अनुसार बदलती है
    2. प्रवाह घटाने हेतु वाल्व अवरुद्ध करना उतनी ही ऊर्जा बचाता है जितनी उसी प्रवाह हेतु चाल घटाना
    3. द्रवचालित शक्ति ρ g Q H के बराबर है
    4. आवश्यक प्रवाह तक अवरुद्ध किया बड़ा पंप वाल्व में ऊर्जा गँवाता है
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    उत्तर: A — एफ़िनिटी नियमों में शाफ़्ट शक्ति चाल के घन के अनुसार बदलती है; C — द्रवचालित शक्ति ρ g Q H के बराबर है; D — आवश्यक प्रवाह तक अवरुद्ध किया बड़ा पंप वाल्व में ऊर्जा गँवाता है

    P ∝ N³ और द्रवचालित शक्ति ρ g Q H है; अवरुद्ध बड़ा पंप वाल्व पर शीर्ष क्षय करता है। चाल-नियंत्रण वह हानि हटाता है, अतः अवरोधन के चाल घटाने जितना बचाने का दावा गलत है।
  12. निम्नलिखित में से कौन-से माँग-पक्ष प्रबंधन की रणनीतियाँ हैं?

    1. भार-स्थानांतरण, किसी प्रक्रम को शिखर से शिखर-इतर घंटों में ले जाना
    2. शिखर-कर्तन, शिखर-काल में भार घटाना
    3. घाटी-पूरण, शिखर-इतर घंटों में भार बनाना
    4. शिखर बढ़ाना ताकि अधिकतम माँग यथासंभव बड़ी हो
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    उत्तर: A — भार-स्थानांतरण, किसी प्रक्रम को शिखर से शिखर-इतर घंटों में ले जाना; B — शिखर-कर्तन, शिखर-काल में भार घटाना; C — घाटी-पूरण, शिखर-इतर घंटों में भार बनाना

    भार-स्थानांतरण, शिखर-कर्तन और घाटी-पूरण मानक भार-आकृति रणनीतियाँ हैं। अधिकतम माँग बढ़ाना उद्देश्य का उलटा है, क्योंकि माँग-शुल्क व क्षमता-लागत शिखर के साथ बढ़ती हैं।
  13. एक संयंत्र की मासिक आँकड़ों के समाश्रयण से आधार-रेखा E = E₀ + kP है, जहाँ E MWh में और P टन में है। रेखा पर दो बिंदु 120 t पर 260 MWh और 200 t पर 340 MWh हैं। 400 t उत्पादन पर विशिष्ट ऊर्जा खपत ____ MWh/t है (दो दशमलव स्थान)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 1.35

    k = (340 − 260)/(200 − 120) = 1.0 MWh/t; E₀ = 340 − 1.0 × 200 = 140 MWh। 400 t पर E = 140 + 400 = 540 MWh, अतः SEC = 540/400 = 1.35 MWh/t। 200 t पर SEC 1.70 होती, जो दर्शाती है कि स्थिर ऊर्जा कैसे बँटती है।
  14. 500 kW का भार 0.80 पश्चगामी शक्ति गुणांक पर चलता है। kW अपरिवर्तित रखते हुए इसे 0.95 पश्चगामी करने हेतु संधारित्र बैंक लगाया जाता है। आवश्यक बैंक की kvar रेटिंग ____ kvar है (एक दशमलव स्थान)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 210.7

    tan φ₁ = tan(cos⁻¹ 0.80) = 0.75; tan φ₂ = tan(cos⁻¹ 0.95) = 0.32868। Q_c = 500 × (0.75 − 0.32868) = 210.66 = 210.7 kvar। kVA का अंतर 625 − 526 = 99 लेना गलत है, क्योंकि kVA अभिक्रियात्मक शक्ति नहीं है।
  15. एक मोटर प्रतिवर्ष 6000 घंटे शाफ़्ट पर नियत 30 kW देती है। इसे वर्तमान 90 % के स्थान पर 94 % दक्षता वाली मोटर से बदला जाता है, शाफ़्ट भार अपरिवर्तित रहता है। बिजली ₹8 प्रति kWh है। वार्षिक बचत ₹ ____ है (निकटतम पूर्णांक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 68085

    पूर्व निवेश = 30/0.90 = 33.333 kW; पश्चात = 30/0.94 = 31.915 kW; अंतर = 1.4184 kW। बचाई ऊर्जा = 1.4184 × 6000 = 8510.6 kWh; बचत = 8510.6 × 8 = ₹68 085। 30 × 0.04 × 6000 × 8 = ₹57 600 लेना गलत है, क्योंकि दक्षता-अंतर शाफ़्ट निर्गत पर लागू नहीं होता।
  16. 20 m × 10 m फ़र्श-क्षेत्रफल के हॉल में कार्य-तल पर औसत 300 लक्स प्रदीप्ति चाहिए। प्रत्येक ल्यूमिनेयर 3000 lm देता है। उपयोग गुणांक 0.6 और अनुरक्षण गुणांक 0.8 है। ल्यूमेन विधि से आवश्यक न्यूनतम पूर्ण संख्या में ल्यूमिनेयर ____ हैं।

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    उत्तर: 42

    N = E A/(F × UF × MF) = 300 × 200/(3000 × 0.6 × 0.8) = 60 000/1440 = 41.67। ल्यूमिनेयर का अंश नहीं लगाया जा सकता, अतः न्यूनतम पूर्ण संख्या 42 है।
  17. शुद्ध-घर्षण तंत्र पर एक अपकेंद्री पंप की चाल 20 % घटाकर मूल चाल की 80 % की जाती है, तंत्र-वक्र अपरिवर्तित और एफ़िनिटी नियम वैध। शाफ़्ट शक्ति में कमी ____ % है (एक दशमलव स्थान)।

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    उत्तर: 48.8

    P ∝ N³, अतः P₂/P₁ = 0.8³ = 0.512। कमी = 1 − 0.512 = 0.488 = 48.8 %। कमी 20 % (चाल में रैखिक) या 36 % (वर्ग) लेना सामान्य त्रुटियाँ हैं।