पोषक तत्त्वों का जैव-भू-रासायनिक चक्रण, जैविक पंप, उत्पादकता व समुद्री पारिस्थितिकी
2. प्रकाश, प्रकाश-संश्लेषण, euphotic व compensation गहराइयाँ
प्रकाश-संश्लेषण-प्रकाश (P–I) वक्र निम्न विकिरण पर ढाल α के साथ रैखिक बढ़ता है (प्रकाश-सीमित), अधिकतम P_max पर समतल हो जाता है (प्रकाश-संतृप्त, एन्ज़ाइम व पोषक आपूर्ति से सीमित) और अत्यधिक प्रकाश पर घट सकता है (photoinhibition)। प्रकाश गहराई के साथ Beer–Lambert नियम से घटता है: I(z) = I₀ e^(−K_d z), जहाँ K_d विसरित क्षीणन गुणांक है (सबसे स्वच्छ महासागरीय जल में लगभग 0.03 से 0.05 m⁻¹, गँदले तटीय जल में 0.2 m⁻¹ या अधिक)। euphotic गहराई वह है जहाँ प्रकाश सतही मान का 1 % रह जाता है: z_eu = ln(100)/K_d = 4.6/K_d। K_d = 0.05 m⁻¹ के लिए यह 92 m है; 0.2 m⁻¹ के लिए 23 m।
compensation गहराई वह है जहाँ प्रकाश-संश्लेषण पादप के अपने श्वसन के ठीक बराबर होता है, अतः शुद्ध वृद्धि शून्य है; उसका प्रकाश-स्तर compensation तीव्रता I_c है। हल उदाहरण। I₀ = 400 W m⁻², I_c = 5 W m⁻² व K_d = 0.10 m⁻¹: z_c = ln(I₀/I_c)/K_d = ln 80/0.10 = 43.8 m। दिन भर में उथल-पुथल द्वारा मिश्रित परत में घुमाई जाती कोशिकाएँ प्रकाश के पूरे परास का नमूना लेती हैं। Sverdrup की क्रांतिक गहराई (critical depth) वह मिश्रित-परत गहराई है जिस पर जल-स्तंभ उत्पादन जल-स्तंभ श्वसन के बराबर है; मिश्रण इससे गहरा हो तो bloom शुरू नहीं हो सकता, इसीलिए शीतोष्ण सागरों का वसंत bloom तब शुरू होता है जब स्तरीकरण मिश्रित परत को उथला करता है। क्रांतिक गहराई compensation गहराई से अधिक होती है।
3. प्राथमिक व द्वितीयक उत्पादन, नवीन व पुनर्जनित उत्पादन
सकल प्राथमिक उत्पादन (GPP) स्थिरीकृत कुल कार्बन है; शुद्ध प्राथमिक उत्पादन (NPP) = GPP − स्वपोषी श्वसन। इसे ¹⁴C अंतर्ग्रहण इनक्यूबेशन, प्रकाश-अंधकार बोतल से ऑक्सीजन परिवर्तन तथा मॉडल के साथ उपग्रह क्लोरोफिल से मापा जाता है। वैश्विक महासागरीय NPP लगभग 50 Pg C प्रति वर्ष है, जो पृथ्वी के कुल का लगभग आधा है। पोषक-निर्धन गायरों में जैवभार नन्ही कोशिकाओं (Prochlorococcus, Synechococcus जैसे picoplankton) का तथा पोषक-समृद्ध upwelling व वसंत-bloom जल में बड़े diatoms का होता है। द्वितीयक उत्पादन उन विषमपोषियों (zooplankton, जीवाणु, मछली) की वृद्धि है जो कार्बनिक पदार्थ खाते हैं।
नवीन उत्पादन (new production) वह उत्पादन है जो euphotic क्षेत्र में नवीन रूप से आपूर्त नाइट्रोजन (नीचे से मिश्रित या उत्थित नाइट्रेट, N₂ स्थिरीकरण, वायुमंडलीय निक्षेपण) से चलता है; पुनर्जनित उत्पादन क्षेत्र के भीतर पुनःचक्रित नाइट्रोजन (अमोनियम, यूरिया) का उपयोग करता है। स्थायी अवस्था में नवीन उत्पादन क्षेत्र से निर्यातित कार्बनिक पदार्थ के बराबर होता है। f-अनुपात = नवीन/(नवीन + पुनर्जनित) ≈ नाइट्रेट अंतर्ग्रहण/(नाइट्रेट + अमोनियम अंतर्ग्रहण)। यह upwelling व bloom में अधिक (0.5 से 0.8) और oligotrophic गायरों में, जहाँ पुनःचक्रण प्रमुख है, कम (0.1 से 0.2) होता है। हल उदाहरण। नाइट्रेट अंतर्ग्रहण 0.30 व अमोनियम अंतर्ग्रहण 0.90 µmol N L⁻¹ d⁻¹ से f = 0.30/1.20 = 0.25।
4. जैविक पंप (biological pump)
जैविक पंप उन प्रक्रियाओं का समूह है जो सतही परत में स्थिरीकृत कार्बन को गहरे महासागर में पहुँचाती हैं: फाइटोप्लैंकटन CO₂ स्थिर करते हैं, एक अंश aggregate (marine snow), मल-गोलियों और मृत कोशिकाओं के रूप में डूबता है, और अधिकांश गहराई पर श्वसित हो जाता है, जिससे CO₂ सतही परत के नीचे जल में लौटती है और सदियों तक वहीं रहती है जब तक जल सतह पर न लौटे। इससे सतही DIC व pCO₂ घटते हैं और गहरा महासागर कार्बन व पोषक तत्त्वों से समृद्ध रहता है। यह तीन पंपों में से एक है: soft-tissue पंप (कार्बनिक पदार्थ), carbonate पंप (CaCO₃ कवच; कवच बनाने से प्रति कार्बन 2 इकाई क्षारकता घटती है और सतही pCO₂ बढ़ता है, जो soft-tissue पंप का विरोध करता है) तथा भौतिक विलेयता पंप (ठंडा जल अधिक CO₂ लेता है और डूबता है)।
डूबता फ्लक्स गहराई के साथ घटता है क्योंकि कण खाए व पुनःखनिजित होते हैं, जिसे Martin वक्र बताता है: F(z) = F₁₀₀ (z/100)^(−b), जहाँ z मीटर में और b प्रारूपिक महासागर में लगभग 0.86। हल उदाहरण। F₁₀₀ = 10 mg C m⁻² d⁻¹ पर 1000 m पर फ्लक्स 10 × 10^(−0.86) = 1.4 mg C m⁻² d⁻¹ है, अतः 100 m के पार निर्यातित कार्बन का केवल लगभग 14 % ही 1000 m तक पहुँचता है। गहरा पुनःखनिजीकरण अधिक लंबे भंडारण का अर्थ है; ballast खनिज (opal, CaCO₃, धूल) डूबना तेज़ करते हैं। पंप वायुमंडलीय CO₂ को अन्यथा से कम रखता है; HNLC क्षेत्रों में पंप दुर्बल है क्योंकि लोहा उत्पादन सीमित करता है।
5. Zooplankton, आहार-जाल, upwelling व HNLC क्षेत्र
Zooplankton बहते हुए जंतु हैं: microzooplankton (ciliates, flagellates) छोटे फाइटोप्लैंकटन चरते हैं, और mesozooplankton (copepods प्रमुख) बड़ी कोशिकाएँ चरते हैं तथा मछली के लार्वा व प्लवक-भक्षी मछलियों का भोजन हैं। परंपरागत शृंखला (diatom से copepod से मछली से परभक्षी) के साथ सूक्ष्मजीवी लूप (microbial loop) चलता है: जीवाणु कोशिकाओं से मुक्त घुले कार्बनिक कार्बन का उपयोग करते हैं और flagellates द्वारा चरे जाते हैं, जिससे सतही परत में पोषक तत्त्वों का पुनःचक्रण होता है। पोषण-स्तरों के बीच ऊर्जा का स्थानांतरण अकुशल है, प्रायः लगभग 10 % (परास लगभग 10 से 20 %) बताया जाता है; शेष श्वसन में जाता या अपरद बनता है। हल उदाहरण। 15 % स्थानांतरण दक्षता व तीन स्थानांतरणों (उत्पादक से चौथे पोषण-स्तर तक) के साथ, आधार पर 2000 इकाई उत्पादन से शीर्ष पर 2000 × 0.15³ = 6.75 इकाई मिलती है। अतः अनेक स्तरों की लंबी शृंखलाएँ छोटा शीर्ष-परभक्षी जैवभार पालती हैं, और छोटी शृंखलाएँ (diatom से anchovy) बड़ी मत्स्य-पालन।
Upwelling क्षेत्र पोषक-समृद्ध जल को सूर्य-प्रकाशित क्षेत्र में लाते हैं और सर्वाधिक उत्पादक हैं: पूर्वी-सीमा धाराएँ (Peru व Chile के तट पर Humboldt, California, Canary, Benguela), विषुवतीय अपसरण, और अरब सागर, जहाँ ग्रीष्म में दक्षिण-पश्चिम मानसूनी पवनें तटीय व खुले-महासागर upwelling चलाती हैं। ये महासागर के छोटे अंश को ढकते हैं पर मछली-पकड़ का बड़ा भाग देते हैं। HNLC क्षेत्रों (उच्च नाइट्रेट, निम्न क्लोरोफिल: उपआर्कटिक उत्तरी प्रशांत, पूर्वी विषुवतीय प्रशांत व दक्षिणी महासागर) में नाइट्रेट अप्रयुक्त रहता है क्योंकि लोहा अत्यंत दुर्लभ है; यही Martin की iron परिकल्पना का आधार है, जिसे लोहा मिलाने के सुनियोजित प्रयोगों ने समर्थन दिया जिनसे bloom उत्पन्न हुए।
6. समुद्री पारिस्थितिकी: पारितंत्र, प्रवाल भित्तियाँ व ऑक्सीजन न्यूनतम क्षेत्र
महासागर गहराई व दूरी के अनुसार विभाजित है: neritic (shelf) व oceanic (खुला) प्रांत; सूर्य-प्रकाशित epipelagic (लगभग 200 m तक), mesopelagic (लगभग 1000 m तक) और नीचे अंधकारमय bathypelagic; तथा benthic (समुद्र-तल) क्षेत्र। तटीय तंत्र (मुहाने, mangroves, लवणीय दलदल, seagrass) में प्रति इकाई क्षेत्रफल उत्पादन अधिक है, वे मछलियों की नर्सरी हैं और तट की रक्षा करते हैं। खुले महासागर में प्रति इकाई क्षेत्रफल उत्पादन कम है पर वह पृथ्वी के अधिकांश भाग को ढकता है, अतः उसका कुल बड़ा है; oligotrophic गायर सूक्ष्मजीवी हैं और f-अनुपात केवल वहीं अधिक है जहाँ पोषक आपूर्त हों। गहरे समुद्र के जलतापीय छिद्र प्रकाश से नहीं, रसायन-संश्लेषण (chemosynthesis) से चलते हैं।
प्रवाल भित्तियाँ उन प्रवालों से बनती हैं जिनके ऊतकों में सहजीवी शैवाल (zooxanthellae) रहते हैं, जो प्रवाल की अधिकांश ऊर्जा देते हैं और aragonite कंकाल बनाने में सहायक हैं। ये स्वच्छ, उथले, गर्म (लगभग 23 से 29 °C), पोषक-निर्धन, अधिक प्रकाश वाले जल में पनपती हैं और अत्यंत उत्पादक व जैव-विविध हैं। bleaching तब होती है जब सामान्य ग्रीष्म-अधिकतम से लगभग एक डिग्री ऊपर दीर्घ तापन शैवाल को बाहर निकाल देता है, और अम्लीकरण Ω घटाकर कैल्सीकरण दुर्बल करता है। भारत के प्रमुख भित्ति क्षेत्र मन्नार की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी, लक्षद्वीप तथा अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह हैं। ऑक्सीजन न्यूनतम क्षेत्र (OMZ) मध्य-गहराई पर बनते हैं जहाँ श्वसन वायु-संचार से अधिक है, उत्पादक upwelling के नीचे सबसे प्रबल, पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत व उत्तरी हिंद महासागर (अरब सागर, और कम मात्रा में बंगाल की खाड़ी) में। ऑक्सीजन इतनी कम है कि denitrification स्थिरीकृत नाइट्रोजन हटाता है, और hypoxia (सामान्यतः लगभग 2 mL L⁻¹ माना जाता) अधिकांश जंतुओं को सीमित करती है। तापन व स्तरीकरण से निम्न-ऑक्सीजन जल के फैलने की अपेक्षा है।
मुख्य बिंदु
- Redfield C : N : P = 106 : 16 : 1 बताता है कि प्रति स्थिरीकृत कार्बन कितना नाइट्रेट खर्च होता है; सीमित पोषक अधिकांश जलों में N और HNLC क्षेत्रों में Fe हैं।
- नाइट्रेट व फॉस्फेट सतह पर रिक्त और लगभग 1000 m पर अधिकतम; सिलिकेट और गहराई तक बढ़ता है।
- प्रकाश I₀e^(−K_d z) के अनुसार घटता है; euphotic गहराई ln(100)/K_d है और compensation गहराई वहाँ है जहाँ प्रकाश I_c के बराबर है।
- f-अनुपात = नवीन/(नवीन + पुनर्जनित), upwelling व bloom में अधिक और oligotrophic गायरों में कम; स्थायी अवस्था में नवीन उत्पादन निर्यात के बराबर।
- जैविक पंप कार्बन निर्यात करता है; फ्लक्स F₁₀₀(z/100)^(−0.86) से घटता है, और carbonate पंप soft-tissue पंप का विरोध करता है।
- पोषण-स्थानांतरण लगभग 10 से 20 %; प्रवाल सहजीवी शैवाल रखते हैं, और OMZ denitrification चलाते हैं।
अभ्यास प्रश्न (16)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
समुद्री प्लवकों व गहरे जल के पोषक तत्त्वों का Redfield अनुपात C : N : P, परमाणुओं के आधार पर, लगभग है
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उत्तर: B — 106 : 16 : 1
मान्य अनुपात 106 कार्बन : 16 नाइट्रोजन : 1 फॉस्फोरस है। अन्य क्रम संख्याएँ गलत तत्त्वों पर रखते हैं।नाइट्रेट अधिकतम के नीचे सिलिकेट सांद्रता गहराई के साथ बढ़ती क्यों रहती है?
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उत्तर: C — Diatom opal कार्बनिक पदार्थ के क्षय से अधिक धीमे घुलता है
opal कार्बनिक पदार्थ के पुनःखनिजीकरण से अधिक धीमे घुलता है, अतः सिलिकेट मुक्त होना नाइट्रेट व फॉस्फेट से गहरा है। सिलिकेट diatoms द्वारा लिया जाता है, अतः अप्रयुक्त नहीं।किसी प्लवक समुदाय का f-अनुपात 0.7 है। यह दर्शाता है कि
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उत्तर: D — अधिकांश उत्पादन नवीन नाइट्रोजन का उपयोग करता है, जैसे upwelling या bloom में
f = नवीन/(नवीन + पुनर्जनित), अतः f = 0.7 का अर्थ 70 % नाइट्रेट-आधारित नवीन उत्पादन है, जो upwelling या bloom का प्रारूप है। निम्न f, 0.1 से 0.2, oligotrophic गायर की स्थिति है।euphotic गहराई की परंपरागत परिभाषा वह गहराई है जिस पर प्रकाश है
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उत्तर: A — सतही मान का 1 %
परंपरा सतही विकिरण का 1 % है, z_eu = 4.6/K_d। उस गहराई पर प्रकाश ठीक शून्य नहीं होता, और 50 % अनेक जलों में सतह से कुछ मीटर में ही आ जाता है।HNLC क्षेत्रों के बारे में कौन-सा कथन सही है?
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उत्तर: B — नाइट्रेट प्रचुर है पर क्लोरोफिल कम, क्योंकि लोहा दुर्लभ है
HNLC का अर्थ है उच्च पोषक (नाइट्रेट), निम्न क्लोरोफिल, जिसमें उपआर्कटिक प्रशांत, विषुवतीय प्रशांत व दक्षिणी महासागर में लोहा सीमित कारक है।कार्बोनेट-कवच बनाने वाले फाइटोप्लैंकटन समूह का bloom होता है और उसके कवचों का एक अंश सतही परत से बाहर डूबता है। केवल कार्बनिक-पदार्थ निर्यात की तुलना में सतही जल के pCO₂ पर शुद्ध प्रभाव है
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उत्तर: A — इसे बढ़ाना, क्योंकि कवच-निर्माण क्षारकता घटाता है
CaCO₃ बनने पर 1 DIC पर 2 क्षारकता घटती है, और क्षारकता की हानि प्रबल है, अतः सतही pCO₂ बढ़ता है: carbonate पंप soft-tissue पंप का विरोध करता है। क्षारकता घटती है, बढ़ती नहीं।उत्तरी हिंद महासागर के ऑक्सीजन न्यूनतम क्षेत्र मुख्यतः इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं कि
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उत्तर: D — वहाँ denitrification स्थिरीकृत N हटाता है और कम ऑक्सीजन जंतुओं को सीमित करती है
उत्पादक upwelling के नीचे मध्य-गहराई पर श्वसन ऑक्सीजन समाप्त कर देता है, और अल्पऑक्सीक क्रोड में ऑक्सीजन की जगह नाइट्रेट प्रयुक्त होता है, यही denitrification है। वहाँ ऑक्सीजन खर्च होती है, बनती नहीं।समान धूप में दो जलों के K_d = 0.04 m⁻¹ (खुला महासागर) व 0.20 m⁻¹ (तटीय) हैं। उनकी euphotic गहराइयों का अनुपात, खुला : तटीय, है
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उत्तर: C — 5
z_eu = 4.6/K_d, अतः अनुपात K_d के व्युत्क्रम अनुपात के बराबर है: 0.20/0.04 = 5। स्वच्छ जल में euphotic क्षेत्र गहरा है।उत्पादन के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — NPP = GPP − स्वपोषी श्वसन; B — नवीन उत्पादन euphotic क्षेत्र के बाहर की नाइट्रोजन से पोषित होता है; C — स्थायी अवस्था में नवीन उत्पादन निर्यात उत्पादन के बराबर होता है
पहले तीन मानक हैं। f-अनुपात नाइट्रोजन अंतर्ग्रहण से संबंधित है, zooplankton श्वसन से नहीं।निम्न में से कौन-सी प्रक्रियाएँ महासागर से स्थिरीकृत नाइट्रोजन हटाती हैं या उसमें जोड़ती हैं?
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उत्तर: A — Denitrification इसे हटाता है, N₂ बनाते हुए; B — नाइट्रोजन स्थिरीकरण इसे जोड़ता है, N₂ को कार्बनिक नाइट्रोजन में बदलकर; C — Nitrification, NH₄⁺ को NO₃⁻ में बदलता है, स्थिरीकृत नाइट्रोजन की मात्रा बदले बिना
पहले तीन सही हैं। श्वसन महासागर के भीतर पोषक तत्त्व पुनर्जनित करता है और वायु से नाइट्रोजन नहीं जोड़ता।निम्न में से कौन-से सही मेल हैं?
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उत्तर: A — Peru व Chile के तट पर upwelling: Humboldt धारा; B — प्रवाल भित्ति: प्रवाल में सहजीवी शैवाल (zooxanthellae); C — जलतापीय छिद्र समुदाय: रसायन-संश्लेषण
पहले तीन सही हैं। Oligotrophic गायरों में f-अनुपात कम है, क्योंकि उत्पादन अधिकांशतः पुनर्जनित है।परमाणुओं के आधार पर C : N : P = 106 : 16 : 1 लें। bloom के दौरान सतही नाइट्रेट 4.8 µmol kg⁻¹ घटता है। बना कार्बनिक कार्बन ____ µmol kg⁻¹ है (एक दशमलव स्थान)।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 31.8
C = 4.8 × 106/16 = 508.8/16 = 31.8 µmol kg⁻¹। N की जगह P का प्रयोग (4.8 × 106) भूल होती।प्रकाश I = I₀ exp(−K_d z) का पालन करता है, K_d = 0.05 m⁻¹। euphotic गहराई, जहाँ I = 0.01 I₀, ____ m है (एक दशमलव स्थान)।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 92.1
0.01 = exp(−0.05 z), अतः z = ln(100)/0.05 = 4.605/0.05 = 92.1 m।सतही जल के नमूने में नाइट्रेट अंतर्ग्रहण 0.30 µmol N L⁻¹ d⁻¹ व अमोनियम अंतर्ग्रहण 0.90 µmol N L⁻¹ d⁻¹ है। f-अनुपात ____ है (दो दशमलव स्थान)।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 0.25
f = 0.30/(0.30 + 0.90) = 0.25। केवल नाइट्रेट को अमोनियम से भाग देने पर 0.33 आता है, जो गलत है।डूबता कार्बन फ्लक्स F(z) = F₁₀₀ (z/100)^(−0.86) का पालन करता है, z मीटर में। यदि F₁₀₀ = 10 mg C m⁻² d⁻¹ तो 1000 m पर फ्लक्स ____ mg C m⁻² d⁻¹ है (दो दशमलव स्थान)।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 1.38
F = 10 × (1000/100)^(−0.86) = 10 × 10^(−0.86) = 10 × 0.1380 = 1.38।किसी आहार-शृंखला के आधार पर उत्पादन 2000 इकाई है और पोषण-स्तरों के बीच प्रत्येक स्थानांतरण की दक्षता 0.15 है। चौथे पोषण-स्तर (तीन स्थानांतरण) पर उपलब्ध उत्पादन ____ इकाई है (दो दशमलव स्थान)।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 6.75
उत्पादन = 2000 × 0.15³ = 2000 × 0.003375 = 6.75 इकाई। चार स्थानांतरण लेने पर 1.01 आता।