ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम: संवृत तंत्र, विशिष्ट ऊष्माएँ और स्थिर-प्रवाह युक्तियाँ
2. एन्थैल्पी, विशिष्ट ऊष्माएँ और मेयर संबंध
एन्थैल्पी को H = U + pV, या प्रति इकाई द्रव्यमान h = u + pv, से परिभाषित किया जाता है; यह गुणधर्म है। संवृत तंत्र में, अन्य कार्य के बिना, स्थिर-दाब अर्ध-स्थैतिक प्रक्रम में W = p ΔV और Q = ΔU + pΔV = ΔH। विशिष्ट ऊष्माएँ c_v = (∂u/∂T)_v और c_p = (∂h/∂T)_p हैं। आदर्श गैस के लिए u और h केवल ताप पर निर्भर करती हैं (जूल का मुक्त-प्रसार प्रयोग निम्न घनत्व गैस में ताप-परिवर्तन नहीं दिखाता), इसलिए उस गैस के किसी भी प्रक्रम में पथ चाहे जो हो, du = c_v dT और dh = c_p dT।
आदर्श गैस के लिए h = u + RT, अतः dh/dT − du/dT से मेयर संबंध c_p − c_v = R मिलता है (प्रति इकाई द्रव्यमान; मोलर रूप में C_p − C_v = R_u)। γ = c_p/c_v लेने पर c_v = R/(γ − 1) और c_p = γR/(γ − 1)। चूँकि c_p, c_v से अधिक है (स्थिर-दाब तापन में प्रसार-कार्य भी होता है), γ > 1। वायु के लिए R = 287 J/kg·K और γ = 1.4 लें, तो c_v = 717.5 और c_p = 1004.5 J/kg·K। एकपरमाणुक गैसों में γ ≈ 1.67 और द्विपरमाणुक गैसों में कक्ष-ताप के निकट γ ≈ 1.4 होता है; ताप बढ़ने पर आंतरिक विधाएँ उत्तेजित होने से γ घटता है। द्रवों व ठोसों के लिए c_p ≈ c_v ≈ c और एक ही c प्रयुक्त होता है।
3. आदर्श गैस के प्राथमिक प्रक्रम
m kg आदर्श गैस के संवृत तंत्र के लिए, अर्ध-स्थैतिक, जिसमें W गैस द्वारा किया कार्य और Q जोड़ी गई ऊष्मा है, Q − W = ΔU लगाइए, जहाँ ΔU = m c_v (T₂ − T₁)।
| प्रक्रम | गैस द्वारा कार्य W | जोड़ी गई ऊष्मा Q |
|---|---|---|
| समआयतनिक | 0 | m c_v (T₂ − T₁) |
| समदाबी | p (V₂ − V₁) = mR (T₂ − T₁) | m c_p (T₂ − T₁) |
| समतापी | mRT ln(V₂/V₁) = mRT ln(p₁/p₂) | Q = W (ΔU = 0) |
| उत्क्रमणीय रुद्धोष्म, pVᵞ = C | mR (T₁ − T₂)/(γ − 1) = −ΔU | 0 |
| पॉलीट्रॉपिक, pVⁿ = C | mR (T₁ − T₂)/(n − 1) | ΔU + W = W (γ − n)/(γ − 1) |
पॉलीट्रॉपिक परिणाम के लिए Q = m c_v (T₂ − T₁) + mR (T₁ − T₂)/(n − 1) = mR (T₁ − T₂)[1/(n − 1) − 1/(γ − 1)] = W (γ − n)/(γ − 1)। अतः जब 1 < n < γ हो, तो प्रसारित होती गैस (W > 0) ताप गिरने पर भी ऊष्मा ग्रहण करती है, क्योंकि वह अपनी आंतरिक ऊर्जा के ह्रास से अधिक कार्य करती है। हल किया उदाहरण। 2 kg वायु (R = 0.287 kJ/kg·K, γ = 1.4) n = 1.25 से पॉलीट्रॉपिक रूप में 600 K से 500 K तक फैलती है। W = 2 × 0.287 × 100/0.25 = 229.6 kJ; ΔU = 2 × 0.7175 × (−100) = −143.5 kJ; Q = 229.6 − 143.5 = +86.1 kJ, जो 229.6 × 0.15/0.4 = 86.1 kJ से मेल खाता है।
4. संवृत तंत्र के प्रक्रम और चक्र
संवृत तंत्र में प्रथम नियम तीन अज्ञातों Q, W और ΔU का संतुलन है, जिनमें से सामान्यतः दो दिए होते हैं। R = 0.287 kJ/kg·K और γ = 1.4 वाली आदर्श गैस के 0.5 kg को स्थिर दाब पर गरम करना, 300 K से 450 K तक: c_v = 0.7175, c_p = 1.0045 kJ/kg·K; ΔU = 0.5 × 0.7175 × 150 = 53.8 kJ; W = mRΔT = 0.5 × 0.287 × 150 = 21.5 kJ; Q = ΔU + W = 75.3 kJ, जो m c_p ΔT = 0.5 × 1.0045 × 150 = 75.3 kJ के बराबर है। ऊष्मा का लगभग 29% कार्य में जाता है, जो 1 − 1/γ = R/c_p है।
चक्र के लिए पूरे चक्र में ΔU = 0, अतः नेट ऊष्मा नेट कार्य के बराबर होती है: ΣQ = ΣW। जो चक्र 900 kJ ऊष्मा लेता और 600 kJ त्यागता है, वह 300 kJ नेट कार्य देता है और, यदि वह इंजन है, तो तापीय दक्षता 300/900 = 33.3% होती है। प्रक्रमों की श्रेणी में प्रत्येक चरण के ΔU का योग चक्र में शून्य होता है, जो छूटा पद ढूँढने की उपयोगी जाँच है।
5. नियंत्रण आयतन और स्थिर-प्रवाह ऊर्जा समीकरण
नियंत्रण आयतन के लिए द्रव्यमान संरक्षित रहता है: dm_cv/dt = Σṁ_निवेश − Σṁ_निर्गम। प्रवेश करती या निकलती इकाई द्रव्यमान को दाब के विरुद्ध धकेलना भी पड़ता है, जिसके लिए प्रवाह कार्य pv चाहिए, अतः परिसीमा पार प्रति इकाई द्रव्यमान ऊर्जा u + pv + V²/2 + gz = h + V²/2 + gz होती है। इसीलिए आंतरिक ऊर्जा नहीं, एन्थैल्पी आती है। स्थिर प्रवाह (नियंत्रण आयतन के भीतर समय के साथ परिवर्तन नहीं, अतः ṁ_निवेश = ṁ_निर्गम और E_cv स्थिर) के लिए, Q̇ जोड़ी गई ऊष्मा की दर और Ẇ तरल द्वारा किया शाफ़्ट शक्ति हो तो:
Q̇ − Ẇ = ṁ [ (h₂ − h₁) + (V₂² − V₁²)/2 + g (z₂ − z₁) ], अथवा प्रति इकाई द्रव्यमान q − w = Δh + ΔV²/2 + gΔz। h kJ/kg में और V m/s में हो तो V²/2 को kJ/kg में बदलने के लिए 1000 से भाग दें। यह समीकरण प्रथम नियम ही है, उसी चिह्न-परिपाटी के साथ; यह घर्षण सहित या रहित, किसी भी तरल के लिए सत्य है।
| युक्ति | सामान्य सरलीकरण | परिणाम |
|---|---|---|
| नोज़ल | w = 0, q ≈ 0, Δz ≈ 0 | V₂² = V₁² + 2 (h₁ − h₂) |
| डिफ्यूज़र | नोज़ल जैसा, V घटता है | h₂ = h₁ + (V₁² − V₂²)/2 > h₁ |
| टरबाइन | q छोटा, Δz = 0 | w = (h₁ − h₂) + (V₁² − V₂²)/2 − q |
| कंप्रेसर, पंप | q छोटा या हानि | −w = (h₂ − h₁) + ΔV²/2 − q |
| थ्रॉटल | q = w = 0, ΔV²/2 छोटा | h₂ = h₁ (आदर्श गैस में T अपरिवर्तित) |
| ऊष्मा विनिमायक (बाहर रोधित) | w = 0, दोनों धाराओं पर योग | Σṁh निवेश = Σṁh निर्गम |
| मिश्रण कक्ष | w = q = 0 | ṁ₁h₁ + ṁ₂h₂ = (ṁ₁ + ṁ₂) h₃ |
6. हल किए उदाहरण और भरा जाता टैंक
नोज़ल। वायु (c_p = 1.005 kJ/kg·K) रुद्धोष्म नोज़ल में 600 K और 50 m/s पर प्रवेश करती है और 500 K पर निकलती है: V₂² = V₁² + 2 c_p (T₁ − T₂) × 1000 = 2500 + 2 × 1005 × 100 = 203 500 m²/s², अतः V₂ = 451 m/s। टरबाइन। 5 kg/s भाप h₁ = 3230 kJ/kg और V₁ = 50 m/s पर प्रवेश करती है, h₂ = 2550 kJ/kg और V₂ = 150 m/s पर निकलती है, और 40 kW ऊष्मा खोती है: Ẇ = ṁ[(h₁ − h₂) + (V₁² − V₂²)/2000] + Q̇ = 5 × [680 − 10] − 40 = 3310 kW, जहाँ Q̇ = −40 kW। गतिज पद Δh के सामने छोटा है, जो सामान्य जाँच है।
कंप्रेसर। 2 kg/s वायु 300 K से 440 K तक संपीडित होती है, c_p = 1.005 kJ/kg·K, गतिज ऊर्जा नगण्य, और 30 kW ऊष्मा परिवेश को खोती है: −Ẇ = ṁ c_p ΔT − Q̇ = 2 × 1.005 × 140 + 30 = 311.4 kW कार्य-निवेश, जहाँ Q̇ = −30 kW। ऊष्मा-हानि आवश्यक कार्य को बढ़ाती है।
अस्थिर भराव। दृढ़, रुद्धोष्म, आरंभ में निर्वात टैंक आदर्श गैस की आपूर्ति लाइन से जुड़ा है, जिसका ताप स्थिर T_in है। टैंक को नियंत्रण आयतन मानें: Q = W = 0, गतिज व स्थितिज ऊर्जाएँ उपेक्षणीय, कोई निर्गम नहीं, और आरंभिक ऊर्जा शून्य, अतः ऊर्जा संतुलन m₂u₂ = m_in h_in है जहाँ m₂ = m_in, जिससे c_v T₂ = c_p T_in, अर्थात T₂ = γ T_in। T_in = 300 K और γ = 1.4 पर T₂ = 420 K: गैस लाइन से अधिक गरम है, क्योंकि टैंक में धकेला गया प्रवाह कार्य p v आंतरिक ऊर्जा बन जाता है।
मुख्य बिंदु
- Q तंत्र में प्रवेश पर और W तंत्र द्वारा धनात्मक लेने पर संवृत तंत्र का प्रथम नियम Q − W = ΔU + ΔKE + ΔPE है; चक्र में ΣQ = ΣW।
- आदर्श गैस के लिए u और h केवल T पर निर्भर हैं, अतः प्रत्येक प्रक्रम में ΔU = m c_v ΔT और ΔH = m c_p ΔT; c_p − c_v = R, c_v = R/(γ − 1), c_p = γR/(γ − 1)।
- पॉलीट्रॉपिक pVⁿ = C: W = mR(T₁ − T₂)/(n − 1) और Q = W(γ − n)/(γ − 1); 1 < n < γ पर प्रसारित गैस ठंडी होते हुए ऊष्मा ग्रहण करती है।
- स्थिर-प्रवाह ऊर्जा समीकरण Q̇ − Ẇ = ṁ[Δh + ΔV²/2 + gΔz] है; एन्थैल्पी इसलिए आती है क्योंकि उसमें प्रवाह कार्य pv सम्मिलित है।
- मानक युक्तियाँ: नोज़ल V₂² = V₁² + 2 × h-ह्रास; टरबाइन व कंप्रेसर में w, Δh से; थ्रॉटल h₂ = h₁; मिश्रण में Σṁh निवेश = Σṁh निर्गम। kJ/kg के लिए V²/2 को 1000 से भाग दें।
- आरंभ में निर्वात रुद्धोष्म दृढ़ टैंक, आदर्श गैस लाइन (ताप T_in) से भरने पर T = γ T_in पर पहुँचता है, क्योंकि प्रवाह कार्य आंतरिक ऊर्जा बन जाता है।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
आदर्श गैस की आंतरिक ऊर्जा निर्भर करती है
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उत्तर: A — केवल ताप पर, दाब व आयतन चाहे जो हों
अंतराण्विक बलों के अभाव में आदर्श गैस की ऊर्जा केवल अणुओं की गतिज ऊर्जा है, जो T से निर्धारित होती है। इसीलिए प्रत्येक प्रक्रम में du = c_v dT सत्य है, और आदर्श गैस के मुक्त प्रसार में T नहीं बदलता।किसी आदर्श गैस का R = 287 J/kg·K और γ = c_p/c_v = 1.4 है। उसकी स्थिर दाब पर विशिष्ट ऊष्मा, J/kg·K में, है
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उत्तर: D — 1004.5
c_v = R/(γ − 1) = 287/0.4 = 717.5 और c_p = c_v + R = 1004.5 J/kg·K, जो γR/(γ − 1) = 1.4 × 287/0.4 के बराबर है। मान 717.5 c_v है, और 287 अंतर c_p − c_v है।इस परिपाटी का प्रयोग कीजिए कि Q तंत्र में प्रवेश पर और W तंत्र द्वारा कार्य पर धनात्मक है। नगण्य गतिज व स्थितिज ऊर्जा वाली संवृत गैस 200 kJ ऊष्मा ग्रहण करती है और परिवेश पर 120 kJ कार्य करती है। उसकी आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन है
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उत्तर: B — +80 kJ
ΔU = Q − W = 200 − 120 = +80 kJ। परिमाणों को जोड़ना (+320 kJ) कार्य को गैस पर किया मानता है, जो विपरीत परिपाटी होगी।एक ऊष्मा इंजन चक्र (संवृत तंत्र) अपने चार प्रक्रमों में 900 kJ व 300 kJ ऊष्मा ग्रहण करता है और 400 kJ व 500 kJ ऊष्मा त्यागता है। चक्र का नेट कार्य है
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उत्तर: C — 300 kJ
चक्र में ΔU = 0, अतः W_net = ΣQ = 900 + 300 − 400 − 500 = 300 kJ। 1200 kJ कुल ग्रहण की गई ऊष्मा है, 900 kJ कुल त्यागी गई ऊष्मा है, और 600 kJ 900 kJ में से 300 kJ घटाने से आता है।एक आदर्श गैस (γ = 1.4) 1 < n < 1.4 के साथ पॉलीट्रॉपिक रूप में उच्च ताप से निम्न ताप तक फैलती है। कौन-सा कथन सही है?
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उत्तर: D — गैस ऊष्मा ग्रहण करती है, क्योंकि किया गया कार्य उसकी आंतरिक ऊर्जा के ह्रास से अधिक है
Q = W (γ − n)/(γ − 1) धनात्मक है जब W > 0 और n < γ। यहाँ W = −ΔU + Q, −ΔU से अधिक है, अतः T गिरने पर भी ऊष्मा अंदर आती है। ताप का गिरना ऊष्मा त्यागने का सूचक नहीं; Q = 0 के लिए n = γ चाहिए।एक रुद्धोष्म डिफ्यूज़र स्थिर गैस धारा को 200 m/s से 50 m/s तक मंद करता है, शाफ़्ट कार्य नहीं है और ऊँचाई-परिवर्तन नगण्य है। निवेश की तुलना में निर्गम की विशिष्ट एन्थैल्पी है
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उत्तर: A — अधिक, प्रति इकाई द्रव्यमान (V₁² − V₂²)/2 से
q = w = 0 पर स्थिर-प्रवाह ऊर्जा समीकरण से h₂ = h₁ + (V₁² − V₂²)/2, अतः एन्थैल्पी खोई गतिज ऊर्जा से बढ़ती है। बराबर एन्थैल्पी थ्रॉटल में होती है, डिफ्यूज़र में नहीं, क्योंकि यहाँ गतिज ऊर्जा काफ़ी बदलती है। दीवारें गैस पर कार्य नहीं करतीं।एक वास्तविक गैस (आदर्श नहीं मानी गई) रुद्धोष्म थ्रॉटल वाल्व से स्थिर प्रवाह में गुज़रती है, शाफ़्ट कार्य नहीं है और गतिज व स्थितिज ऊर्जाओं के परिवर्तन नगण्य हैं। किस गुणधर्म का मान ऊपर और नीचे की ओर समान है?
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उत्तर: C — विशिष्ट एन्थैल्पी, स्थिर-प्रवाह ऊर्जा समीकरण से
q = w = 0 और नगण्य ΔV²/2 व Δz पर स्थिर-प्रवाह ऊर्जा समीकरण से h₂ = h₁। दाब घटता है और विशिष्ट आयतन बढ़ता है। आंतरिक ऊर्जा संरक्षित नहीं है, क्योंकि प्रवाह कार्य pv में (p₂v₂ − p₁v₁) का परिवर्तन होता है, अतः वास्तविक गैस के लिए u₂ − u₁ उस परिवर्तन का ऋणात्मक होता है।एक ही आदर्श गैस की, समान दाब व स्थिर c_p वाली, दो धाराएँ रुद्धोष्म मिश्रण कक्ष में प्रवेश करती हैं जो कोई कार्य नहीं करता: 2 kg/s 300 K पर और 1 kg/s 450 K पर। मिश्रित धारा निकलती है
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उत्तर: B — 350 K
h = c_pT के साथ ṁ₁h₁ + ṁ₂h₂ = (ṁ₁ + ṁ₂)h₃ से T₃ = (2 × 300 + 1 × 450)/3 = 1050/3 = 350 K, जो द्रव्यमान-प्रवाह-भारित माध्य है। सरल औसत 375 K असमान प्रवाहों की उपेक्षा करता है।स्थिर-प्रवाह ऊर्जा समीकरण में आंतरिक ऊर्जा u के स्थान पर एन्थैल्पी h = u + pv आती है, क्योंकि
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उत्तर: C — प्रत्येक इकाई द्रव्यमान को परिसीमा पार धकेलने में प्रवाह कार्य pv लगता है
नियंत्रण आयतन में प्रवेश करते तरल को वहाँ के दाब के विरुद्ध धकेलना पड़ता है, और निकलता तरल अपने आगे के तरल पर कार्य करता है। प्रति इकाई द्रव्यमान यह प्रवाह कार्य pv, u के साथ मिलकर h देता है। दाब का स्थिर होना आवश्यक नहीं।आदर्श गैस की विशिष्ट ऊष्माओं के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — c_p − c_v = R, जहाँ R विशिष्ट गैस स्थिरांक है।; B — c_p, c_v से अधिक है क्योंकि स्थिर-दाब तापन में प्रसार-कार्य भी होता है।
h = u + RT से मेयर संबंध c_p − c_v = R मिलता है, और c_p का अतिरिक्त भाग प्रति डिग्री किया गया प्रसार-कार्य है। आदर्श गैस के लिए c_v केवल ताप पर निर्भर है, और γ गैसों में भिन्न है (एकपरमाणुक गैसों के लिए लगभग 1.67)।इस परिपाटी का प्रयोग कीजिए कि Q तंत्र में प्रवेश पर और W तंत्र द्वारा धनात्मक है। संवृत तंत्र के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — दो अवस्थाओं के बीच परिवर्तन Q − W उन्हें जोड़ने वाले प्रत्येक पथ के लिए समान है।; B — Q और W अलग-अलग लेने पर दो अवस्थाओं के बीच के पथ पर निर्भर हो सकते हैं।; C — आदर्श गैस के समतापी प्रक्रम में Q, W के बराबर होता है।
Q − W = ΔE पथ-स्वतंत्र है यद्यपि Q और W नहीं हैं; आदर्श गैस के समतापी प्रक्रम में ΔU = 0, अतः Q = W। रुद्धोष्म प्रक्रम में Q = 0 होता है, W नहीं: कार्य −ΔU के बराबर है।स्थिर-प्रवाह युक्तियों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं (टरबाइन में गतिज ऊर्जा परिवर्तन उपेक्षित हैं)?
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उत्तर: A — रुद्धोष्म टरबाइन में विशिष्ट कार्य h₁ − h₂ के बराबर है।; B — नगण्य गतिज ऊर्जा परिवर्तन वाले रुद्धोष्म थ्रॉटल में निर्गम व निवेश एन्थैल्पियाँ बराबर होती हैं।; D — रोधित ऊष्मा विनिमायक में गरम धारा द्वारा खोई एन्थैल्पी ठंडी धारा द्वारा पाई एन्थैल्पी के बराबर होती है।
स्थिर-प्रवाह ऊर्जा समीकरण से रुद्धोष्म टरबाइन के लिए w = h₁ − h₂, थ्रॉटल के लिए h₂ = h₁, और ऊष्मा विनिमायक के लिए ṁ_hΔh_h = −ṁ_cΔh_c मिलता है। नोज़ल में शाफ़्ट नहीं होता; उसका एन्थैल्पी-ह्रास धारा की गतिज ऊर्जा बनता है।एक संवृत पिस्टन–सिलिंडर में R = 0.287 kJ/kg·K और γ = 1.4 वाली आदर्श गैस का 0.5 kg है। इसे स्थिर दाब पर 300 K से 450 K तक गरम किया जाता है। Q को गैस में प्रवेश पर धनात्मक लीजिए। जोड़ी गई ऊष्मा, kJ में, दशमलव के एक स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 75.3
c_p = γR/(γ − 1) = 1.4 × 0.287/0.4 = 1.0045 kJ/kg·K। Q = m c_p ΔT = 0.5 × 1.0045 × 150 = 75.34 kJ ≈ 75.3 kJ। जाँच: ΔU = 0.5 × 0.7175 × 150 = 53.81 kJ और W = 0.5 × 0.287 × 150 = 21.53 kJ का योग 75.34 kJ है। c_v लेने पर 53.8 kJ आता।वायु को R = 0.287 kJ/kg·K और γ = 1.4 वाली आदर्श गैस मानिए। 2 kg वायु n = 1.25 से पॉलीट्रॉपिक (pVⁿ = स्थिरांक) रूप में फैलती है और उसका ताप 600 K से 500 K तक गिरता है। Q को गैस में प्रवेश पर धनात्मक लेते हुए ऊष्मा अंतरण, kJ में, दशमलव के एक स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 86.1
W = mR(T₁ − T₂)/(n − 1) = 2 × 0.287 × 100/0.25 = 229.6 kJ। ΔU = m c_v ΔT = 2 × 0.7175 × (−100) = −143.5 kJ। Q = ΔU + W = 86.1 kJ। जाँच: W(γ − n)/(γ − 1) = 229.6 × 0.15/0.4 = 86.1 kJ। प्रक्रम को रुद्धोष्म मानने पर Q = 0 आता।वायु (c_p = 1.005 kJ/kg·K, आदर्श गैस) रुद्धोष्म नोज़ल में 600 K पर 50 m/s वेग से प्रवेश करती है और 500 K पर निकलती है। शाफ़्ट कार्य नहीं है और ऊँचाई-परिवर्तन नगण्य है। निर्गम वेग, m/s में, निकटतम पूर्ण संख्या तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 451
स्थिर-प्रवाह ऊर्जा समीकरण से V₂²/2 = V₁²/2 + c_p(T₁ − T₂)। J/kg में: V₂² = 50² + 2 × 1005 × 100 = 2500 + 201 000 = 203 500 m²/s², अतः V₂ = 451.1 m/s ≈ 451 m/s। kJ और J के बीच 1000 का गुणक भूलने पर वेग बहुत छोटा आता।एक टरबाइन से 5 kg/s भाप स्थिर प्रवाह में गुज़रती है। निवेश पर h₁ = 3230 kJ/kg और V₁ = 50 m/s; निर्गम पर h₂ = 2550 kJ/kg और V₂ = 150 m/s। टरबाइन परिवेश को 40 kW की दर से ऊष्मा खोता है। ऊँचाई-परिवर्तन उपेक्षित हैं। टरबाइन की शक्ति, kW में, निकटतम पूर्ण संख्या तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 3310
तरल में प्रवेश पर Q̇ = −40 kW धनात्मक लेते हुए: Ẇ = Q̇ − ṁ[(h₂ − h₁) + (V₂² − V₁²)/2000] = −40 − 5 × [−680 + (22 500 − 2500)/2000] = −40 − 5 × (−680 + 10) = −40 + 3350 = 3310 kW। ऊष्मा-हानि छोड़ने पर 3350 kW और गतिज ऊर्जा छोड़ने पर 3360 kW आता।वायु 2 kg/s की दर से कंप्रेसर से स्थिर प्रवाह में गुज़रती है और संपीडन से 300 K से 440 K तक गरम होती है। वायु को c_p = 1.005 kJ/kg·K वाली आदर्श गैस मानिए, गतिज व स्थितिज ऊर्जा परिवर्तन उपेक्षित हैं, और कंप्रेसर परिवेश को 30 kW ऊष्मा खोता है। शाफ़्ट शक्ति निवेश, kW में, दशमलव के एक स्थान तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 311.4
Ẇ = Q̇ − ṁ c_p ΔT = −30 − 2 × 1.005 × 140 = −30 − 281.4 = −311.4 kW, अतः निवेश 311.4 kW है। ऊष्मा-हानि आवश्यक कार्य बढ़ाती है; उसे घटाने पर 251.4 kW आता।एक दृढ़, रुद्धोष्म टैंक आरंभ में निर्वात है और वाल्व द्वारा ऐसी लाइन से जुड़ा है जिसमें आदर्श गैस स्थिर 300 K पर है, γ = 1.4 और विशिष्ट ऊष्माएँ स्थिर हैं। वाल्व तब तक खुला रहता है जब तक प्रवाह रुक न जाए। गतिज व स्थितिज ऊर्जाएँ उपेक्षित हैं। टैंक में गैस का अंतिम ताप, K में, निकटतम पूर्ण संख्या तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 420
टैंक का ऊर्जा संतुलन m₂u₂ = m_in h_in है जहाँ m₂ = m_in, अतः c_v T₂ = c_p T_in और T₂ = γ T_in = 1.4 × 300 = 420 K। T₂ = 300 K की अपेक्षा टैंक में प्रवेश करती गैस पर किए प्रवाह कार्य की उपेक्षा करती है।