गतिकी: कण, समतलीय दृढ़ पिंड, ऊर्जा तथा संवेग
2. कण बलगतिकी: न्यूटन, कार्य-ऊर्जा व आवेग-संवेग
न्यूटन का द्वितीय नियम ΣF = ma सुविधाजनक अक्षों पर लिखा जाता है: वृत्त पर कण के लिए ΣF_n = mv²/ρ और ΣF_t = m dv/dt। इसके दो समाकल समय-इतिहास हल करने से बचाते हैं। कार्य-ऊर्जा: अवस्था 1 से 2 तक सभी बलों का कार्य गतिज ऊर्जा के परिवर्तन के बराबर है, W₁₋₂ = ½mv₂² − ½mv₁²। बल का कार्य ∫F·dr है; भार mg·(ऊँचाई में गिरावट) करता है, स्प्रिंग −½k(δ₂² − δ₁²) करती है, और सतह या चाप पर चलते पिंड पर अभिलंब बल या तनी डोरी का तनाव कोई कार्य नहीं करता। यदि केवल भार व स्प्रिंग कार्य करें तो ऊर्जा संरक्षित है: ½mv² + mgh + ½kδ² नियत रहता है। घर्षण व आघात ऊर्जा का क्षय करते हैं। आवेग-संवेग: ∫ΣF dt = mv₂ − mv₁, एक सदिश समीकरण; जिस निकाय पर कुल बाह्य बल शून्य हो उसका कुल संवेग नियत रहता है।
हल किया उदाहरण (वक्र पर मनका)। 0.2 kg द्रव्यमान का मनका ऊर्ध्वाधर वृत्ताकार तार (R = 1 m) के निम्नतम बिंदु B से 1.5 m ऊपर A से विरामावस्था से बिना घर्षण फिसलता है। ऊर्जा: ½v² = 9.81(1.5), अतः v_B = 5.42 m/s। B पर तार ऊपर धकेलता है, N − mg = mv²/R, अतः N = 0.2(9.81) + 0.2(29.43)/1 = 7.85 N। चाल केवल ऊँचाई की गिरावट पर निर्भर है, तार के आकार पर नहीं।
3. समतलीय दृढ़ पिंड शुद्धगतिकी: सापेक्ष वेग, तात्क्षणिक केंद्र, लुढ़कना
समतलीय गति में एक ही दृढ़ पिंड के दो बिंदुओं A व B के लिए v_B = v_A + ω × r_B/A, अतः v_B/A = ω·AB और यह AB के लंबवत होता है। त्वरण a_B = a_A + α × r_B/A − ω² r_B/A है: स्पर्शरेखीय भाग αr और A की ओर ω²r वाला भाग। तात्क्षणिक केंद्र (IC) पिंड (या उसके विस्तार) का वह बिंदु है जिसका उस क्षण वेग शून्य हो; प्रत्येक बिंदु उस बिंदु की IC से दूरी का ω गुना चाल से, IC की ओर जाती रेखा के लंबवत चलता है। इसे दो ज्ञात वेग-दिशाओं पर लंबों के प्रतिच्छेदन से पाते हैं। शुद्ध स्थानांतरण करते पिंड का IC अनंत पर होता है (ω = 0)। IC केवल वेग की संकल्पना है: उसका त्वरण शून्य नहीं होता।
बिना फिसले लुढ़कना। स्थिर सतह पर लुढ़कते R त्रिज्या के पहिये का संपर्क-बिंदु विराम में रहता है, अतः v_G = ωR और a_G = αR (केंद्र सरल रेखा में चलता हो)। शीर्ष बिंदु 2v_G से चलता है, और संपर्क-बिंदु ही IC है। संपर्क पर घर्षण स्थैतिक होता है, कार्य नहीं करता और उतना ही होता है जितना गति माँगे। पहिया फिसले तो v_G ≠ ωR होता है और गतिज घर्षण μ_k N लगकर कार्य करता है।
4. समतलीय बलगतिकी: जड़त्व आघूर्ण, जुड़े पिंडों के लिए F = ma व M = Iα
किसी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण I = ∫r² dm है, और I = mk² से घूर्णन-त्रिज्या k परिभाषित होती है। समांतर-अक्ष प्रमेय I = I_G + md² है, जहाँ d द्रव्यमान-केंद्र G से जाते अक्ष और समांतर अक्ष के बीच की दूरी है; यह तभी लागू है जब दोनों में से एक अक्ष G से गुज़रे। मानक मान (एकसमान पिंड, जब तक न कहा जाए अक्ष G से): L लंबाई की पतली छड़ में I_G = mL²/12 और सिरे के सापेक्ष mL²/3; चकती या ठोस बेलन mR²/2; पतला वलय mR²; ठोस गोला 2mR²/5; पतला गोलीय कोश 2mR²/3।
समतलीय गति में m द्रव्यमान के दृढ़ पिंड के गति-समीकरण ΣF_x = ma_Gx, ΣF_y = ma_Gy और ΣM_G = I_Gα हैं। नियत कीलक O के सापेक्ष ΣM_O = I_O α। तात्क्षणिक केंद्र या किसी अन्य गतिशील बिंदु के सापेक्ष आघूर्ण केवल विशेष स्थितियों में मान्य हैं, इसलिए G या नियत बिंदु के सापेक्ष लें। जुड़े पिंडों के लिए प्रत्येक पिंड का अलग मुक्त-पिंड आरेख बनाएँ, प्रत्येक स्वातंत्र्य-कोटि के लिए एक समीकरण लिखें और शुद्धगतिक प्रतिबंध जोड़ें (अवितान्य डोरी अपने अनुदिश समान चाल व त्वरण देती है; चरखी पर बिना फिसली रस्सी a = αR देती है)।
हल किया उदाहरण (लुढ़कना)। एकसमान ठोस गोला (k² = 2R²/5) θ कोण की ढलान पर बिना फिसले लुढ़कता है। ढलान के अनुदिश mg sin θ − F = ma, और G के सापेक्ष FR = I α = (2/5)mR²(a/R), अतः F = (2/5)ma। इसलिए a = g sin θ/(1 + 2/5) = (5/7)g sin θ, जो द्रव्यमान व त्रिज्या से स्वतंत्र है, और F = (2/7)mg sin θ। सतह को μ_s ≥ F/N = (2/7)tan θ देना होगा। ठोस बेलन के लिए a = (2/3)g sin θ और μ_s ≥ tan θ/3; θ = 30° पर बेलन का a = 3.27 m/s² है और उसे μ_s ≥ 0.19 चाहिए।
हल किया उदाहरण (द्रव्यमान वाली चरखी)। 5 kg और 3 kg के गुटके 4 kg द्रव्यमान व R त्रिज्या की एकसमान चकती-चरखी पर लटके हैं, रस्सी फिसलती नहीं। चकती का I = ½MR² है, अतः Iα/R = ½Ma = 2a। तीनों पिंडों को साथ लेने पर (5 − 3)(9.81) = (5 + 3 + 2)a, अतः a = 1.96 m/s²। तनाव अलग-अलग हैं: T₁ = 5(9.81 − 1.962) = 39.2 N और T₂ = 3(9.81 + 1.962) = 35.3 N, और उनका अंतर गुणा R चरखी को घुमाता है। एटवुड का परिणाम a = (m₁ − m₂)g/(m₁ + m₂) केवल द्रव्यमानहीन चरखी पर लागू है।
5. ऊर्जा व संवेग संरक्षित रखने वाले निकाय: टक्कर व कोणीय संवेग
दृढ़ पिंड की गतिज ऊर्जा T = ½mv_G² + ½I_Gω² है (या नियत बिंदु O के सापेक्ष ½I_Oω²), अतः लुढ़कते पिंड की ऊर्जा स्थानांतरण व घूर्णन में बँटती है: विरामावस्था से h गिरावट पर छोड़े ठोस गोले के लिए mgh = ½mv²(1 + 2/5) और v = √(2gh/1.4) = √(10gh/7)। O के सापेक्ष कोणीय संवेग नियत O के गिर्द घूमते पिंड के लिए H_O = I_O ω तथा कण के लिए r × mv है। O के सापेक्ष कुल बाह्य आघूर्ण शून्य हो तो यह नियत रहता है, चाहे ऊर्जा नष्ट हो, इसलिए कीलकित पिंड पर आघात में यही साधन है।
सीधी केंद्रीय टक्कर में आघात-रेखा उभयनिष्ठ अभिलंब है। उसके अनुदिश संवेग संरक्षित है, m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁ + m₂v₂। प्रत्यावस्थान गुणांक e = (v₂ − v₁)/(u₁ − u₂) है, अर्थात् पृथक्करण की चाल व निकट आने की चाल का अनुपात; e = 1 प्रत्यास्थ (गतिज ऊर्जा संरक्षित) और e = 0 पूर्णतः अप्रत्यास्थ (पिंड साथ चलते हैं) है। चिकने पिंडों के लिए आघात-रेखा के लंबवत घटक अपरिवर्तित रहते हैं। स्थिर फ़र्श पर h ऊँचाई से गिराई गेंद e²h तक उछलती है।
हल किया उदाहरण (टक्कर)। 6 m/s पर चलता 2 kg गुटका विरामावस्था के 1 kg गुटके से टकराता है, e = 0.5। संवेग: 2v₁ + v₂ = 12, प्रत्यावस्थान: v₂ − v₁ = 0.5(6) = 3। अतः v₁ = 3 m/s और v₂ = 6 m/s। गतिज ऊर्जा 36 J से घटकर 9 + 18 = 27 J हो जाती है, यानी 9 J की हानि। हल किया उदाहरण (छड़ पर आघात)। 3 kg द्रव्यमान व 1.2 m लंबाई की एकसमान छड़ एक सिरे पर घर्षणरहित कीलक से लटकी है। क्षैतिज 8 m/s से चलता 0.5 kg का मिट्टी का पिंड मुक्त सिरे से टकराकर चिपक जाता है। कीलक के सापेक्ष कोणीय संवेग संरक्षित है (कीलक-बल का उसके सापेक्ष आघूर्ण नहीं): 0.5(8)(1.2) = [3(1.2)²/3 + 0.5(1.2)²]ω = 2.16ω, अतः ω = 2.22 rad/s। रैखिक संवेग संरक्षित नहीं है, क्योंकि कीलक आवेग देती है।
मुख्य बिंदु
- ऋजुरेखीय: a = v dv/dx। प्रक्षेप्य: समान तल पर R = u² sin 2α/g और H = u² sin²α/(2g)। वक्र पथ: a_n = v²/ρ व a_t = dv/dt; ध्रुवीय a_r = r̈ − rθ̇², a_θ = rθ̈ + 2ṙθ̇।
- विस्थापन के बाद चाल के लिए कार्य-ऊर्जा, आघात व समय के लिए आवेग-संवेग, और तात्क्षणिक बलों के लिए F = ma चुनें। सतह पर चलते पिंड पर अभिलंब बल व तनी डोरी कार्य नहीं करते।
- तात्क्षणिक केंद्र का वेग शून्य होता है, त्वरण नहीं। बिना फिसले लुढ़कने में v_G = ωR, a_G = αR, और स्थैतिक घर्षण कार्य नहीं करता; ठोस गोले का a = (5/7)g sin θ और ठोस बेलन का (2/3)g sin θ है।
- I = I_G + md² (एक अक्ष G से); छड़ केंद्र पर mL²/12, सिरे पर mL²/3; चकती mR²/2; वलय mR²; गोला 2mR²/5। जुड़े पिंडों के लिए प्रत्येक का मुक्त-पिंड आरेख बनाकर प्रतिबंध जोड़ें; द्रव्यमान वाली चरखी के दोनों ओर तनाव भिन्न होते हैं।
- टक्कर: आघात-रेखा के अनुदिश संवेग संरक्षित; e = पृथक्करण चाल/निकटता चाल; e = 1 न हो तो गतिज ऊर्जा नष्ट होती है; h से गिराई गेंद e²h तक उछलती है। कीलक या नियत बिंदु के सापेक्ष कोणीय संवेग तब भी बचता है जब रैखिक संवेग नहीं बचता।
- परीक्षा के जाल: a_r में −rθ̇² छोड़ना, द्रव्यमान वाली चरखी पर एटवुड सूत्र लगाना, अप्रत्यास्थ आघात के आर-पार ऊर्जा लगाना, गतिशील बिंदु के सापेक्ष आघूर्ण लेना, और त्वरण के लिए IC प्रयोग करना।
अभ्यास प्रश्न (17)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
एक कण ρ त्रिज्या के वृत्तीय चाप पर नियत चाल v से चलता है। उसके त्वरण के बारे में कौन-सा कथन सही है?
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उत्तर: C — स्पर्शरेखीय घटक शून्य है और अभिलंब घटक वक्रता-केंद्र की ओर v²/ρ है
स्पर्शरेखीय घटक dv/dt शून्य है क्योंकि चाल नियत है, पर वेग की दिशा बदलती रहती है, जिसके लिए वक्रता-केंद्र की ओर अभिलंब त्वरण v²/ρ चाहिए। चाल नियत होने से त्वरण शून्य कहना लुभावनी गलती है; त्वरण वेग-सदिश के परिवर्तन की दर है, चाल की नहीं। v²/ρ पद पथ के अभिलंब है, स्पर्शरेखीय नहीं।एक गेंद समतल भूमि से क्षैतिज से 45° ऊपर 20 m/s पर फेंकी जाती है। वायु-प्रतिरोध नगण्य मानें और g = 9.81 m/s² लें। पथ के उच्चतम बिंदु पर:
उत्तर देखें
उत्तर: A — इसका वेग क्षैतिज, 20 cos 45° = 14.1 m/s है और त्वरण 9.81 m/s² नीचे की ओर है
शीर्ष पर केवल ऊर्ध्वाधर वेग-घटक शून्य होता है; क्षैतिज घटक u cos α = 14.1 m/s अपरिवर्तित रहता है क्योंकि a_x = 0 है। गुरुत्व सदा लगता है, अतः त्वरण 9.81 m/s² नीचे ही रहता है। शून्य वेग व शून्य त्वरण वाला उत्तर ऊर्ध्वाधर घटक को पूरा वेग समझ लेता है, और शून्य त्वरण वाला उत्तर भूल जाता है कि गुरुत्व शीर्ष पर बंद नहीं होता।एक पत्थर समतल भूमि से 20 m ऊँची चट्टान के शीर्ष से क्षैतिज 15 m/s पर फेंका जाता है। वायु-प्रतिरोध नगण्य मानें और g = 9.81 m/s² लें। चट्टान के पाद से अवतरण-बिंदु तक क्षैतिज दूरी ____ m है, दो दशमलव स्थानों तक।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 30.29
ऊर्ध्वाधर गति विरामावस्था से: 20 = ½(9.81)t², अतः t = √(2 × 20/9.81) = 2.0193 s। क्षैतिज वेग 15 m/s बना रहता है, इसलिए दूरी 15 × 2.0193 = 30.29 m है। प्रक्षेपण-चाल गिरने के समय को प्रभावित नहीं करती।m द्रव्यमान का छोटा गुटका दो चिकने स्थिर पथों पर एक ही ऊँचाई h से विरामावस्था से छोड़ा जाता है: एक सीधा आनत तल और एक गड्ढेदार वक्र पथ, दोनों समान निचले स्तर पर समाप्त होते हैं। वायु-प्रतिरोध नगण्य मानें; प्रत्येक पथ के अंत पर गुटके के बारे में कौन-सा कथन सही है?
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उत्तर: D — चालें समान हैं, √(2gh), पर लगे समय सामान्यतः भिन्न हैं
चिकने स्थिर पथ का अभिलंब बल कार्य नहीं करता, अतः केवल गुरुत्व कार्य करता है और दोनों पथों पर ½mv² = mgh है: अंतिम चाल आकार चाहे जो हो √(2gh) है। समय हर मध्यवर्ती बिंदु की चाल पर निर्भर है, अतः सामान्यतः भिन्न होते हैं। छोटे पथ से अधिक चाल मानना दूरी को ऊँचाई की गिरावट से गड्डमड्ड करना है, और समान चाल का अर्थ समान समय नहीं है।एक कार 30 m त्रिज्या के वृत्ताकार मोड़ पर चल रही है। विचाराधीन क्षण पर उसकी चाल 12 m/s है और 2 m/s² की दर से बढ़ रही है। उसके कुल त्वरण का परिमाण ____ m/s² है, दो दशमलव स्थानों तक।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 5.20
a_n = v²/ρ = 144/30 = 4.8 m/s² और a_t = 2 m/s², जो परस्पर लंबवत हैं, अतः |a| = √(4.8² + 2²) = √27.04 = 5.20 m/s²।कण की गतिकी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — भार द्वारा किया गया कार्य केवल कण की ऊर्ध्वाधर गिरावट पर निर्भर है, अपनाए गए पथ पर नहीं; B — चिकनी स्थिर सतह पर सरकते कण पर उसका अभिलंब बल कोई कार्य नहीं करता; C — किसी समयांतराल में कुल बल का आवेग कण के रैखिक संवेग के परिवर्तन के बराबर है, जो एक सदिश समीकरण है
भार संरक्षी बल है, अतः उसका कार्य mg गुणा गिरावट है। चिकनी सतह पर अभिलंब बल विस्थापन के लंबवत होता है और कार्य नहीं करता। आवेग-संवेग संबंध ∫ΣF dt = mv₂ − mv₁ सदिश समीकरण है। नियत चाल से गतिज ऊर्जा नियत रहती है, पर वक्र पथ पर कुल बल शून्य नहीं होता: वेग को मोड़ने के लिए अभिलंब घटक mv²/ρ चाहिए, और वह कार्य नहीं करता।एक पहिया क्षैतिज सड़क पर बिना फिसले लुढ़कता है और उसका केंद्र 4 m/s से चलता है। सड़क के सापेक्ष पहिये के उच्चतम बिंदु की चाल है:
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उत्तर: B — 8 m/s, केंद्र की चाल का दुगुना
संपर्क-बिंदु तात्क्षणिक केंद्र है, अतः किसी बिंदु की चाल उसकी IC से दूरी का ω गुना है। केंद्र दूरी R पर है, जिससे v_G = ωR = 4 m/s, और शीर्ष 2R पर है, जिससे 2ωR = 8 m/s। शून्य केवल संपर्क-बिंदु का है, और 5.66 m/s (4√2) क्षैतिज व्यास के सिरे की चाल है, जो संपर्क-बिंदु से √2 R दूरी पर है।समान त्रिज्या व द्रव्यमान वाले एक पतले एकसमान वलय और एक एकसमान ठोस बेलन, जिनकी सतह समान है, एक ही रूखे θ कोण के आनत तल पर विरामावस्था से बिना फिसले लुढ़कते हैं। उनके केंद्र-त्वरणों का अनुपात a_बेलन/a_वलय है:
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उत्तर: C — 4/3, क्योंकि बेलन के लिए a = (2/3)g sin θ और वलय के लिए a = (1/2)g sin θ है
बिना फिसले लुढ़कने के लिए a = g sin θ/(1 + k²/R²)। वलय में k² = R², अतः a = ½g sin θ; ठोस बेलन में k² = R²/2, अतः a = (2/3)g sin θ। अनुपात (2/3)/(1/2) = 4/3 है। दोनों त्वरण द्रव्यमान व त्रिज्या से स्वतंत्र हैं, पर k²/R² के माध्यम से द्रव्यमान-वितरण पर निर्भर हैं, इसलिए अनुपात 1 नहीं है। जड़त्व आघूर्ण आधा होने से a दुगुना नहीं होता, क्योंकि हर में स्थानांतरीय जड़त्व m भी आता है।एक एकसमान ठोस गोला विरामावस्था से रूखी ढलान पर बिना फिसले लुढ़कता है और 2 m ऊर्ध्वाधर ऊँचाई उतरता है। g = 9.81 m/s² तथा केंद्र के सापेक्ष I = (2/5)mR² लें। अंत में उसकी केंद्र-चाल ____ m/s है, दो दशमलव स्थानों तक।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 5.29
स्थैतिक घर्षण कार्य नहीं करता, अतः mgh = ½mv² + ½Iω² = ½mv²(1 + 2/5), जहाँ ω = v/R। तब v = √(2gh/1.4) = √(2 × 9.81 × 2/1.4) = √28.03 = 5.29 m/s। घर्षणरहित गुटका √(2gh) = 6.26 m/s तक पहुँचता।3 kg द्रव्यमान व 2 m लंबाई की एकसमान पतली छड़ एक समतल में, छड़ के लंबवत नियत अक्ष के गिर्द घूमती है जो छड़ के केंद्र से 0.5 m दूर के बिंदु से गुज़रता है। इस अक्ष के सापेक्ष उसका जड़त्व आघूर्ण है:
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उत्तर: B — 1.75 kg·m², केंद्र मान में md² जोड़ने से
I_G = mL²/12 = 3(4)/12 = 1.00 kg·m²। समांतर-अक्ष प्रमेय md² = 3(0.25) = 0.75 जोड़ता है, अतः I = 1.75 kg·m²। केवल केंद्र का मान अक्ष के विस्थापन को अनदेखा करता है, केवल md² छड़ का अपना I_G छोड़ देता है, और 4.00 kg·m² (mL²/3) सिरे का मान है, जो केवल सिरे से जाते अक्ष के लिए सही है।6 kg व 2 kg द्रव्यमान के दो गुटके एक हल्की अवितान्य रस्सी के सिरों से लटके हैं, जो 8 kg द्रव्यमान व R त्रिज्या की एकसमान चकती-चरखी पर से गुज़रती है; चरखी चिकने नियत धुरे पर लगी है। रस्सी चरखी पर फिसलती नहीं। g = 9.81 m/s² लें। गुटकों का त्वरण ____ m/s² है, दो दशमलव स्थानों तक।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 3.27
चरखी का I = ½MR² है, और a = αR के साथ रैखिक समीकरण में उसका प्रभावी जड़त्व I/R² = 4 kg है। पूरे निकाय के लिए (6 − 2)(9.81) = (6 + 2 + 4)a, अतः a = 39.24/12 = 3.27 m/s²। द्रव्यमानहीन चरखी का सूत्र (4/8)(9.81) = 4.91 m/s² देता, जो अधिक है।एक पहिया स्थिर क्षैतिज सतह पर किसी क्षण बिना फिसले लुढ़क रहा है, उसका केंद्र सरल रेखा में चाल v_G से चल रहा है, त्रिज्या R। निम्नलिखित में से कौन-से सही हैं?
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उत्तर: A — संपर्क-बिंदु पर स्थैतिक घर्षण पहिये पर कोई कार्य नहीं करता; C — उच्चतम बिंदु की चाल 2v_G है; D — पहिये की कोणीय चाल ω = v_G/R है
संपर्क-बिंदु का वेग शून्य है, अतः वहाँ का घर्षण कार्य नहीं करता; v_G = ωR से ω = v_G/R; तात्क्षणिक केंद्र से 2R दूरी पर शीर्ष बिंदु 2ωR = 2v_G से चलता है। संपर्क-बिंदु का वेग शून्य है पर त्वरण नहीं: स्थिर लुढ़कते पहिये पर वह पहिये के केंद्र की ओर v²/R से त्वरित होता है, इसलिए शून्य त्वरण वाला कथन गलत है।m द्रव्यमान व L लंबाई की एकसमान छड़ एक सिरे पर घर्षणरहित कीलक से जुड़ी है और क्षैतिज स्थिति में विरामावस्था से छोड़ी जाती है। छोड़ने के क्षण पर कीलक की ऊर्ध्वाधर प्रतिक्रिया है:
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उत्तर: D — mg/4 ऊपर की ओर, क्योंकि केंद्र 3g/4 से नीचे की ओर त्वरित होता है
छोड़ते समय ω = 0 है, अतः केवल भार का कीलक के सापेक्ष आघूर्ण कार्य करता है: mg(L/2) = (mL²/3)α, जिससे α = 3g/(2L)। तब द्रव्यमान-केंद्र αL/2 = 3g/4 से नीचे त्वरित होता है। ऊर्ध्वाधर बल-संतुलन mg − R = m(3g/4) से R = mg/4। केवल वेग शून्य होने से छड़ साम्य में नहीं हो जाती; उसका त्वरण शून्य नहीं है। मुक्त पतन के लिए α = 2g/L चाहिए, जिसे कीलक रोकती है।दो पिंडों की सीधी केंद्रीय टक्कर में प्रत्यावस्थान गुणांक e = 0 है। परिणाम का कौन-सा वर्णन सही है?
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उत्तर: A — पिंड एक उभयनिष्ठ वेग से साथ चल पड़ते हैं; संवेग संरक्षित रहता है
e पृथक्करण की चाल और निकटता की चाल का अनुपात है, अतः e = 0 का अर्थ टक्कर के बाद सापेक्ष वेग शून्य है: पिंड एक ही वेग साझा करते हैं, और कोई बाह्य आवेग न होने से संवेग संरक्षित रहता है। वेगों की अदला-बदली व निकटता की चाल से पृथक्करण e = 1 का वर्णन हैं। हल्के पिंड का रुकना e के किसी मान से नहीं निकलता।6 m/s से चलता 2 kg का गुटका चिकनी क्षैतिज सतह पर विरामावस्था के 1 kg के गुटके से आमने-सामने टकराता है, और दोनों चिपक जाते हैं। आघात में नष्ट गतिज ऊर्जा है:
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उत्तर: D — 12 J, आघात से पहले व बाद की ऊर्जा का अंतर
संवेग: 2(6) = 3v, अतः v = 4 m/s। पहले गतिज ऊर्जा ½(2)(36) = 36 J और बाद में ½(3)(16) = 24 J है, अतः हानि 36 − 24 = 12 J है। 24 J लेना नष्ट ऊर्जा के बजाय शेष ऊर्जा बताना है, और 36 J के लिए संयुक्त द्रव्यमान का रुकना चाहिए, जो संवेग संरक्षण का उल्लंघन होगा।2 kg द्रव्यमान व 1 m लंबाई की एकसमान छड़ अपने ऊपरी सिरे पर घर्षणरहित कीलक से विरामावस्था में लटकी है। 0.05 kg की गोली, जिसे कण मानें, निचले सिरे से क्षैतिज 100 m/s पर टकराकर वहीं धँस जाती है। कीलक के सापेक्ष छड़ का I = mL²/3 लें। आघात के ठीक बाद गोली सहित छड़ की कोणीय चाल ____ rad/s है, दो दशमलव स्थानों तक।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 6.98
कीलक-बल का कीलक के सापेक्ष कोई आघूर्ण नहीं, अतः उसके सापेक्ष कोणीय संवेग संरक्षित है: m_b v L = (ML²/3 + m_b L²)ω। तब 0.05(100)(1) = (2/3 + 0.05)ω, अतः ω = 5/0.71667 = 6.98 rad/s। रैखिक संवेग संरक्षण लगाना गलत होता, क्योंकि आघात के दौरान कीलक आवेग लगाती है।टक्कर व संरक्षित राशियों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — e प्रत्यावस्थान गुणांक वाले स्थिर फ़र्श पर h ऊँचाई से गिराई गेंद e²h ऊँचाई तक उछलती है; B — बिना बाह्य आवेग के दो मुक्त पिंडों की टक्कर में e का मान जो भी हो, कुल रैखिक संवेग संरक्षित रहता है; C — मिट्टी का पिंड कीलकित छड़ से चिपके तो आघात के आर-पार कीलक के सापेक्ष कोणीय संवेग संरक्षित रहता है
फ़र्श से आघात के बाद चाल, पहले की चाल की e गुना होती है, और उठने की ऊँचाई चाल के वर्ग के अनुसार चलती है, जिससे e²h। मुक्त टक्करों में किसी भी e के लिए संवेग संरक्षित है। कीलक-बल का कीलक के सापेक्ष कोई आघूर्ण नहीं, अतः उसके सापेक्ष कोणीय संवेग संरक्षित है। कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है, पर अप्रत्यास्थ आघात में नष्ट गतिज ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि व विरूपण में जाती है, अतः e = 1 न हो तो अकेली गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती।