ऊष्मागतिकी व प्रावस्था साम्यावस्था: नियम, प्रावस्था नियम, द्वि-घटक आरेख तथा मुक्त ऊर्जा से रचना

यह अध्याय खंड XE2.2, “ऊष्मागतिकी, बलगतिकी एवं प्रावस्था रूपांतरण”, के पहले अनुच्छेद का उत्तर देता है: “विस्तारी व गहन ऊष्मागतिक गुण, ऊष्मागतिकी के नियम, प्रावस्था साम्यावस्था, प्रावस्था नियम, प्रावस्था आरेख - एक-घटक दाब-ताप आरेख, द्वि-घटक ताप-संघटन आरेख, मुक्त ऊर्जा से ताप-संघटन आरेखों की रचना, मुक्त ऊर्जा-संघटन आरेखों में उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा की रचना, निश्चर अभिक्रियाएँ।” यह XE2 पदार्थ विज्ञान के खंड XE2.2 का भाग है, जो अभियांत्रिकी विज्ञान (XE) पेपर के नौ वैकल्पिक खंडों में से एक है; परीक्षा में अभ्यर्थी इनमें से कोई दो चुनता है। अध्याय वे नियम उसी रूप में पढ़ाता है जिसमें पदार्थ-वैज्ञानिक उनका उपयोग करते हैं (गिब्स ऊर्जा, रासायनिक विभव, मिश्रण), साथ में गिब्स प्रावस्था नियम, एक-घटक दाब-ताप आरेख, उत्तोलक नियम सहित द्वि-घटक आरेख व सभी निश्चर अभिक्रियाएँ, और यह कि उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा से मुक्त ऊर्जा-संघटन वक्रों द्वारा आरेख कैसे बनता है। संख्यात्मक प्रश्न स्वातंत्र्य कोटि, उत्तोलक नियम से प्रावस्था व सूक्ष्म-संघटक अंश, मिश्रण एन्ट्रॉपी व गिब्स ऊर्जा, तथा नियमित विलयन का क्रांतिक ताप हैं।

1. गुण तथा पदार्थों में प्रयुक्त ऊष्मागतिकी के नियम

विस्तारी (extensive) गुण पदार्थ की मात्रा के अनुपात में बदलता है (द्रव्यमान, आयतन, U, H, S, G, पूरे प्रतिदर्श की ऊष्मा-धारिता); गहन (intensive) गुण नहीं बदलता (T, P, घनत्व, रासायनिक विभव μ, प्रत्येक मोलर या विशिष्ट राशि)। दो विस्तारी गुणों का अनुपात गहन होता है। अवस्था फलन केवल वर्तमान अवस्था पर निर्भर करता है, पथ पर नहीं: U, H, S व G अवस्था फलन हैं, जबकि ऊष्मा q व कार्य w नहीं।

प्रथम नियम (यहाँ परिपाटी: w तंत्र द्वारा किया गया कार्य है): dU = δq − δw; स्थिर दाब पर q = ΔH, जहाँ H = U + PV। द्वितीय नियम: dS ≥ δq/T, उत्क्रमणीय पथ में समता, अतः विलगित तंत्र की एन्ट्रॉपी कभी नहीं घटती। तृतीय नियम: साम्य में पूर्ण क्रिस्टल हेतु T → 0 पर S → 0, इसलिए निरपेक्ष एन्ट्रॉपी का अस्तित्व है (काँच में अवशिष्ट एन्ट्रॉपी रह जाती है)। ये नियम गिब्स ऊर्जा G = H − TS में संयुक्त होते हैं, जहाँ dG = V dP − S dT। स्थिर T व P पर संवृत तंत्र ΔG < 0 होने पर स्वतः बदलता है और G न्यूनतम होने पर साम्य में होता है। पदार्थ विज्ञान का कार्यकारी विभव G है क्योंकि T व P ही वे चर हैं जिन्हें हम नियंत्रित करते हैं।

  • T_tr पर α → β परिवर्तन हेतु ΔG = ΔH − TΔS = 0 से ΔS = ΔH/T_tr मिलता है। गलनांक से नीचे ठोस की G कम होती है, ऊपर द्रव की; दोनों G(T) वक्र T_m पर काटते हैं।
  • आदर्श विलयन: ΔH_mix = 0 तथा प्रति मोल ΔS_mix = −R(x_A ln x_A + x_B ln x_B), अतः प्रत्येक संघटन पर ΔG_mix = RT(x_A ln x_A + x_B ln x_B) < 0। नियमित विलयन: ΔS_mix वही, पर ΔH_mix = Ω x_A x_B। Ω > 0 का अर्थ है सजातीय परमाणु पसंद हैं (गुच्छन, अमिश्रणीयता अंतराल); Ω < 0 का अर्थ है विजातीय परमाणु पसंद हैं (क्रमण)।
  • रासायनिक विभव μ_i = (∂G/∂n_i), स्थिर T, P व अन्य n_j पर। किसी मिश्रण की प्रावस्थाएँ α व β साम्य में तब होती हैं जब प्रत्येक घटक i हेतु μ_i^α = μ_i^β हो। आगे की उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा इसी एक प्रतिबंध से निकलती है।
ℹ️ हल: समपरमाणुक आदर्श विलयन का मिश्रण
x_A = x_B = 0.5 हेतु: ΔS_mix = −R(0.5 ln 0.5 + 0.5 ln 0.5) = R ln 2 = 8.314 × 0.6931 = 5.76 J mol⁻¹ K⁻¹। 1000 K पर ΔG_mix = −TΔS_mix = −5.76 kJ mol⁻¹। विन्यासी एन्ट्रॉपी प्रत्येक ताप पर समान है, पर G में उसका भार T के साथ बढ़ता है, इसीलिए उच्च ताप मिश्रण के अनुकूल है।

2. प्रावस्थाएँ, घटक, गिब्स प्रावस्था नियम तथा एक-घटक P–T आरेख

प्रावस्था तंत्र का भौतिक रूप से विशिष्ट, समांगी व यांत्रिक रूप से पृथक्करणीय भाग है जिसकी संरचना व संघटन एकसमान हो: बर्फ़, द्रव जल व वाष्प तीन प्रावस्थाएँ हैं, जबकि एक ही क्रिस्टल संरचना व संघटन के अनेक कण एक प्रावस्था हैं। घटक स्वतंत्र रूप से बदलने वाली रासायनिक स्पीशीज़ है; Fe₃C होने पर भी Fe–C द्वि-घटक तंत्र है क्योंकि Fe₃C, Fe व C से बनता है। स्थिर T व P पर साम्यावस्था का अर्थ न्यूनतम G है.

गिब्स प्रावस्था नियम: F = C − P + 2। F उन गहन चरों (T, P, संघटन) की संख्या है जिन्हें प्रावस्थाओं की संख्या बदले बिना स्वतंत्र रूप से बदला जा सकता है। गणना द्वारा व्युत्पत्ति: प्रत्येक प्रावस्था में C − 1 स्वतंत्र संघटन हैं, अतः P प्रावस्थाओं में P(C − 1), साथ में T व P, कुल P(C − 1) + 2 चर। साम्यावस्था रासायनिक विभवों की C(P − 1) समताएँ थोपती है। अतः F = P(C − 1) + 2 − C(P − 1) = C − P + 2। 1 atm के स्थिर दाब पर पढ़े जाने वाले संघनित तंत्रों में एक चर पहले ही प्रयुक्त है, इसलिए F = C − P + 1।

प्रारूपी क्षेत्रों में स्वातंत्र्य कोटि F
तंत्र व क्षेत्रप्रयुक्त नियमFअर्थ
एक-घटक P–T, एकल प्रावस्थाC − P + 2 = 1 − 1 + 22T व P दोनों स्वतंत्र
एक-घटक, सीमा-रेखा पर1 − 2 + 21T चुनने पर P निश्चित
एक-घटक, त्रि-बिंदु1 − 3 + 20T व P निश्चित
द्वि-घटक, स्थिर P, एक प्रावस्थाC − P + 1 = 2 − 1 + 12T व संघटन स्वतंत्र
द्वि-घटक, स्थिर P, दो प्रावस्थाएँ2 − 2 + 11संघटन T से निश्चित
द्वि-घटक, स्थिर P, तीन प्रावस्थाएँ2 − 3 + 10निश्चर बिंदु

एक-घटक P–T आरेख में एकल प्रावस्थाओं के क्षेत्र (F = 2), दो प्रावस्थाओं के सह-अस्तित्व की रेखाएँ (F = 1) तथा त्रि-बिंदु (F = 0) होते हैं। प्रत्येक रेखा क्लैपेयरॉन समीकरण dP/dT = ΔH/(TΔV) का पालन करती है। ठोस-द्रव रेखा तीव्र ढाल की होती है और, अधिकांश पदार्थों में गलन पर ΔV धनात्मक होने से, ऊपर की ओर झुकती है; जल, Ga, Si व Bi में द्रव सघन है (ΔV < 0) और रेखा पीछे की ओर झुकती है। वाष्प साम्य हेतु ΔV ≈ RT/P से क्लॉज़ियस-क्लैपेयरॉन संबंध d ln P/dT = ΔH_vap/(RT²) मिलता है। अपररूप वाले ठोस के कई ठोस क्षेत्र होते हैं: 1 atm पर लोहा 912 °C तक bcc, 912 से 1394 °C तक fcc और फिर गलनांक 1538 °C तक bcc है।

⚠️ घटक गिनिए, यौगिक नहीं
दो प्रचलित भूलें हैं: Fe₃C को Fe–C का तीसरा घटक गिनना (C = 2 ही रहता है) तथा प्रश्न में नियम का कौन-सा रूप चाहिए यह भूलना। दाब 1 atm पर स्थिर हो, या आरेख T–C परिच्छेद हो, तो F = C − P + 1 लें। T व P दोनों स्वतंत्र हों तो F = C − P + 2 लें।

3. द्वि-घटक T–C आरेख, टाई-लाइन व उत्तोलक नियम

द्वि-घटक आरेख स्थिर दाब पर बनता है और प्रत्येक ताप व समग्र संघटन C₀ पर उपस्थित प्रावस्थाएँ दर्शाता है। एकल-प्रावस्था क्षेत्र में प्रावस्था का संघटन C₀ होता है। द्वि-प्रावस्था क्षेत्र में (C₀, T) से होकर दोनों प्रावस्था-सीमाओं तक क्षैतिज टाई-लाइन खींचिए: उसके सिरे दोनों प्रावस्थाओं के संघटन C_α व C_β देते हैं। ये केवल T पर निर्भर हैं (F = 1), C₀ पर नहीं। द्रव्यमान संतुलन उत्तोलक नियम देता है:

W_α = (C_β − C₀)/(C_β − C_α), W_β = (C₀ − C_α)/(C_β − C_α), W_α + W_β = 1।

इसे यों पढ़िए: किसी प्रावस्था का अंश उसकी विपरीत उत्तोलक-भुजा को पूरी टाई-लाइन से भाग देने पर मिलता है; C₀ जिस प्रावस्था के जितना निकट हो, उसकी मात्रा उतनी अधिक। wt% संघटन से द्रव्यमान अंश तथा at% संघटन से मोल अंश मिलते हैं। समरूपी (isomorphous) तंत्र (Cu–Ni, पूर्ण ठोस विलेयता) में ऊपर द्रवरेखा (liquidus), नीचे ठोसरेखा (solidus) और एक α क्षेत्र होता है। द्रव से साम्य शीतलन में पहला ठोस द्रवरेखा ताप पर बनता है और मिश्रधातु से अधिक उच्च-गलनांक घटक से समृद्ध होता है; फिर द्रव व ठोस के संघटन द्रवरेखा व ठोसरेखा पर खिसकते हैं और अंतिम द्रव ठोसरेखा ताप पर जमता है, जब ठोस का संघटन पुनः C₀ हो जाता है।

⚠️ उत्तोलक नियम की भूलें
पूछे गए ताप की ही टाई-लाइन लें, किसी अन्य ताप की नहीं। एकल-प्रावस्था क्षेत्र में नियम कभी न लगाएँ। हर में पूरी टाई-लाइन की लंबाई (C_β − C_α) रखें और अंश में दूर वाली भुजा लें: गलत खंड से भाग देकर दूसरी प्रावस्था का अंश पा लेना सबसे आम भूल है।

4. निश्चर अभिक्रियाएँ व सूक्ष्म-संघटक

स्थिर दाब पर द्वि-घटक में तीन प्रावस्थाएँ F = 0 देती हैं: अभिक्रिया एक ही ताप पर तीन निश्चित संघटनों के साथ होती है, जिसे क्षैतिज रेखा से दिखाते हैं। रेखा के पास आरेख का आकार अभिक्रिया पहचानता है: रेखा के ऊपर एक प्रावस्था और नीचे दो विभाजन-अभिक्रिया है (एकल प्रावस्था द्रव हो तो यूटेक्टिक, ठोस हो तो यूटेक्टॉइड); ऊपर दो और नीचे एक संयोजन-अभिक्रिया है (उनमें एक द्रव हो तो पेरिटेक्टिक, दोनों ठोस हों तो पेरिटेक्टॉइड)।

शीतलन पर निश्चर अभिक्रियाएँ
नामअभिक्रियाउदाहरण
यूटेक्टिकL → α + βPb–Sn; Fe–C में 4.3 wt% C, 1147 °C: L → γ + Fe₃C
यूटेक्टॉइडγ → α + βFe–C में 0.76 wt% C, 727 °C: γ → α + Fe₃C (परलाइट)
पेरिटेक्टिकL + α → βFe–C, लोहा-समृद्ध सिरा: L + δ → γ
पेरिटेक्टॉइडα + β → γअपेक्षाकृत दुर्लभ; दो ठोस संयुक्त होते हैं
मोनोटेक्टिकL₁ → L₂ + αCu–Pb (द्रव अमिश्रणीयता अंतराल)
सिनटेक्टिकL₁ + L₂ → βदुर्लभ; दो द्रव संयुक्त होते हैं

सूक्ष्म-संघटक सूक्ष्म-संरचना का पहचाना जा सकने वाला लक्षण है, प्रावस्था नहीं। यूटेक्टिक संघटन के बाईं ओर का मिश्रधातु (हाइपोयूटेक्टिक) प्राथमिक (प्रोयूटेक्टिक) α तथा यूटेक्टिक मिश्रण (α + β) बनाता है, जो यूटेक्टिक ताप पर बचे द्रव से बनता है। अतः यूटेक्टिक सूक्ष्म-संघटक का द्रव्यमान अंश यूटेक्टिक ताप के ठीक ऊपर के द्रव के अंश के बराबर है, जो उत्तोलक नियम से, द्रव सिरे पर यूटेक्टिक संघटन लेकर, मिलता है। Fe–Fe₃C में यूटेक्टॉइड उत्पाद पटलित परलाइट है; हाइपोयूटेक्टॉइड स्टील प्रोयूटेक्टॉइड फेराइट व परलाइट देता है, और हाइपरयूटेक्टॉइड स्टील ऑस्टेनाइट कण-सीमाओं पर प्रोयूटेक्टॉइड सीमेंटाइट व परलाइट देता है।

ℹ️ हल: 0.40 wt% C स्टील, धीमे शीतलन, 727 °C से ठीक नीचे
फेराइट 0.022 wt% C, यूटेक्टॉइड ऑस्टेनाइट 0.76 wt% C तथा Fe₃C 6.67 wt% C लें। प्रोयूटेक्टॉइड फेराइट = (0.76 − 0.40)/(0.76 − 0.022) = 0.488; परलाइट = 0.512। कुल फेराइट (प्रोयूटेक्टॉइड तथा फेराइट पटलिकाएँ) = (6.67 − 0.40)/(6.67 − 0.022) = 0.943 और Fe₃C = 0.057। अतः परलाइट (51 %) सीमेंटाइट (5.7 %) के बराबर नहीं है: परलाइट फेराइट व सीमेंटाइट का मिश्रण है।

5. मुक्त ऊर्जा-संघटन वक्र व उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा

स्थिर T व P पर प्रत्येक प्रावस्था की मोलर गिब्स ऊर्जा G को x_B के सापेक्ष खींचिए। विलयन हेतु G = x_A μ_A + x_B μ_B, अतः किसी भी संघटन पर वक्र की स्पर्श-रेखा x_B = 0 अक्ष को μ_A पर और x_B = 1 अक्ष को μ_B पर काटती है। दो प्रावस्थाएँ α व β साम्य में तब होती हैं जब μ_A^α = μ_A^β व μ_B^α = μ_B^β हों, यानी जब उनकी स्पर्श-रेखाओं के दोनों अक्षों पर अंतःखंड समान हों। तब दोनों स्पर्श-रेखाएँ एक ही रेखा बन जाती हैं, उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा, और उसके स्पर्श-बिंदु साम्य संघटन x^α व x^β देते हैं।

  • दोनों स्पर्श-बिंदुओं के बीच सीधा स्पर्श-खंड α + β मिश्रण की गिब्स ऊर्जा है (G पैमाने पर उत्तोलक नियम)। वह दोनों वक्रों के नीचे रहता है, अतः वहाँ मिश्रण किसी एकल प्रावस्था से अधिक स्थायी है।
  • स्पर्श-बिंदुओं के बाहर एकल-प्रावस्था वक्र स्पर्श-रेखा के नीचे रहता है, अतः वह एकल प्रावस्था स्थायी है।
  • प्रावस्था आरेख में ताप T की क्षैतिज टाई-लाइन किसी एक उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा का प्रक्षेप है; T बदलने पर स्पर्श-बिंदु खिसकते हैं और इस प्रकार प्रावस्था-सीमाएँ खिंचती हैं।
🎯 प्रत्येक प्रावस्था हर घटक की कुछ मात्रा क्यों घोलती है
मिश्रण पद RT x ln x की ढाल RT(ln x + 1) है, जो x → 0 पर −∞ की ओर जाती है। अतः किसी भी विलयन का G वक्र दोनों किनारों पर ऊर्ध्वाधर गिरता है, वहाँ स्पर्श-रेखा के अंतःखंड −∞ की ओर जाते हैं, और उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा सदा किसी छोटे अशून्य x पर छूती है। विलेयताएँ अत्यल्प हो सकती हैं, पर T > 0 पर ठीक शून्य कभी नहीं होतीं।

6. मुक्त ऊर्जा वक्रों से आरेख की रचना

अनेक तापों हेतु G_L(x) व G_S(x) खींचिए और उभयनिष्ठ स्पर्श-बिंदु अंकित कीजिए; इन बिंदुओं को T के सापेक्ष आलेखित करने पर आरेख बनता है। समरूपी तंत्र: दोनों घटकों के गलनांकों से ऊपर G_L सर्वत्र G_S के नीचे रहता है, अतः मिश्रधातु द्रव है। T घटने पर ठोस वक्र पहले उच्च-गलनांक घटक के पास द्रव वक्र के नीचे उतरता है; अब उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा द्रव व ठोस के संघटन देती है (द्रवरेखा व ठोसरेखा के बिंदु); और कम T पर दोनों वक्र पूरे परास में क्रॉस हो जाते हैं तथा मिश्रधातु पूर्णतः ठोस है। यूटेक्टिक तंत्र: तीन वक्र G_L, G_α व G_β होते हैं। यूटेक्टिक ताप पर एक ही सीधी रेखा तीनों को छूती है और निश्चर अभिक्रिया के तीन संघटन देती है; उससे ऊपर द्रव वक्र दोनों ठोसों के बीच नीचे उतरता है और उससे नीचे उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा α व β को जोड़ती है।

अमिश्रणीयता अंतराल। नियमित विलयन हेतु G(x) = Ωx(1 − x) + RT[x ln x + (1 − x) ln(1 − x)] और d²G/dx² = −2Ω + RT/[x(1 − x)]। x = 0.5 पर यह −2Ω + 4RT है, जो क्रांतिक ताप T_c = Ω/(2R) पर शून्य होता है। T_c से ऊपर वक्र का एक न्यूनतम होता है और विलयन प्रत्येक संघटन पर एकल-प्रावस्था है। T_c से नीचे, Ω > 0 होने पर, दो न्यूनतम होते हैं और सममित उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा क्षैतिज होकर दोनों न्यूनतमों को छूती है। स्पाइनोडल (d²G/dx² < 0) के भीतर संघटन का कोई भी उतार-चढ़ाव G घटाता है, अतः वह स्वतः विघटित होता है; स्पर्श-बिंदुओं व स्पाइनोडल के बीच संघटन मेटास्थायी है और उसे नाभिकन चाहिए।

ℹ️ हल: क्रांतिक ताप
Ω = 20 kJ mol⁻¹ हेतु: T_c = 20 000/(2 × 8.314) = 1203 K। 900 K पर विलयन T_c से नीचे है और दो ठोस विलयनों में पृथक होता है; 1300 K पर वह प्रत्येक x पर एकल प्रावस्था है। बड़ा Ω (सजातीय परमाणुओं की प्रबल पसंद) T_c बढ़ाता है।

मुख्य बिंदु

  • विस्तारी गुण मात्रा के साथ बदलते हैं, गहन नहीं; स्थिर T व P पर विभव G = H − TS है, और साम्यावस्था का अर्थ न्यूनतम G तथा प्रत्येक प्रावस्था में μ_i समान होना है।
  • गिब्स प्रावस्था नियम: F = C − P + 2, या स्थिर दाब पर C − P + 1। स्थिर दाब पर द्वि-घटक तीन प्रावस्थाओं के साथ निश्चर (F = 0) है; यौगिक नहीं, घटक गिनिए।
  • एक-घटक P–T रेखाएँ dP/dT = ΔH/(TΔV) का पालन करती हैं; वाष्प रेखा से d ln P/dT = ΔH/(RT²) मिलता है, और द्रव सघन होने पर (जल) गलन रेखा पीछे की ओर झुकती है।
  • उत्तोलक नियम किसी प्रावस्था का अंश विपरीत भुजा ÷ पूरी टाई-लाइन देता है, संघटन की ही इकाई (wt% या at%) में, और केवल द्वि-प्रावस्था क्षेत्रों में।
  • निश्चर अभिक्रियाएँ: शीतलन पर एक प्रावस्था का दो में विभाजन यूटेक्टिक (द्रव से) या यूटेक्टॉइड (ठोस से) है; दो का एक में संयोजन पेरिटेक्टिक या पेरिटेक्टॉइड है; यूटेक्टिक सूक्ष्म-संघटक का अंश यूटेक्टिक रेखा के ठीक ऊपर के द्रव के अंश के बराबर है।
  • दो G(x) वक्रों की उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा का अर्थ दोनों घटकों के रासायनिक विभव समान होना है; उसके स्पर्श-बिंदु प्रावस्था-सीमाएँ हैं, और Ω > 0 वाले नियमित विलयन में T_c = Ω/(2R) से नीचे अमिश्रणीयता अंतराल होता है।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक गहन गुण है?

    1. 300 K पर धातु के 1 kg प्रतिदर्श की एन्थैल्पी H
    2. धातु के दिए गए एकल क्रिस्टल की एन्ट्रॉपी S
    3. किसी विलयन में एक घटक का रासायनिक विभव
    4. मिश्रधातु की पूरी ढलाई की ऊष्मा-धारिता
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — किसी विलयन में एक घटक का रासायनिक विभव

    रासायनिक विभव, यानी आंशिक मोलर गिब्स ऊर्जा, स्थिर T, P व संघटन पर पदार्थ की मात्रा बदलने से नहीं बदलता, अतः गहन है। किसी प्रतिदर्श की H व S तथा पूरी ढलाई की ऊष्मा-धारिता, सभी मात्रा के अनुपात में बदलती हैं और विस्तारी हैं। भ्रामक भूल एन्थैल्पी को प्रति किलोग्राम व्यक्त होने से गहन मान लेना है; प्रति किलोग्राम मान गहन है, पर प्रतिदर्श की एन्थैल्पी नहीं।
  2. शुद्ध जल के दाब-ताप आरेख में ठोस-द्रव सीमा अधिकांश पदार्थों के विपरीत पीछे की ओर झुकती है (dP/dT < 0)। गलन हेतु क्लैपेयरॉन समीकरण dP/dT = ΔH/(TΔV) के अनुसार इसका कारण यह है कि

    1. बर्फ़ की गलन-एन्थैल्पी ऋणात्मक है क्योंकि बर्फ़ पिघलने पर ऊष्मा मुक्त होती है
    2. गलन पर आयतन घटता है, क्योंकि बर्फ़ द्रव जल से कम सघन है
    3. गलन बिंदु पर द्रव जल की एन्ट्रॉपी बर्फ़ से कम है
    4. 0 °C पर बर्फ़ का वाष्प दाब द्रव जल से अधिक है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — गलन पर आयतन घटता है, क्योंकि बर्फ़ द्रव जल से कम सघन है

    गलन सदा ऊष्मा अवशोषित करता है (ΔH > 0) और एन्ट्रॉपी बढ़ाता है, अतः ढाल का चिह्न ΔV का चिह्न है। बर्फ़ जल से कम सघन है, इसलिए गलन पर ΔV < 0 और dP/dT ऋणात्मक होता है। गलन-एन्थैल्पी ऋणात्मक या द्रव की एन्ट्रॉपी कम मानना भौतिक रूप से गलत होगा: गलन हेतु गुप्त ऊष्मा चाहिए और द्रव अधिक अव्यवस्थित प्रावस्था है।
  3. ताप T पर द्वि-घटक α + β क्षेत्र में किसी मिश्रधातु से होकर जाने वाली टाई-लाइन के सिरे 20 wt% B (α) व 80 wt% B (β) पर हैं। मिश्रधातु में 35 wt% B है। α व β के द्रव्यमान अंश हैं

    1. α = 0.25 तथा β = 0.75
    2. α = 0.35 तथा β = 0.65
    3. α = 0.56 तथा β = 0.44
    4. α = 0.75 तथा β = 0.25
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — α = 0.75 तथा β = 0.25

    उत्तोलक नियम: W_α = (80 − 35)/(80 − 20) = 45/60 = 0.75 तथा W_β = (35 − 20)/60 = 0.25। मिश्रधातु α के निकट है, अतः α प्रमुख है। उलटा उत्तर निकट वाली भुजा (15) को दूर वाली भुजा (45) की जगह टाई-लाइन से भाग देने से आता है; 35 व 65 सीधे लेना समग्र संघटन को प्रावस्था-अंश से भ्रमित करना है; और 0.56 टाई-लाइन की लंबाई की जगह 80 से भाग देने का परिणाम है।
  4. शीतलन पर एक द्रव और एक प्राथमिक ठोस प्रावस्था एक निश्चित ताप पर अभिक्रिया करके एक भिन्न एकल ठोस प्रावस्था बनाते हैं। यह निश्चर अभिक्रिया कहलाती है

    1. यूटेक्टिक
    2. यूटेक्टॉइड
    3. मोनोटेक्टिक
    4. पेरिटेक्टिक
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — पेरिटेक्टिक

    द्रव + ठोस → भिन्न ठोस पेरिटेक्टिक अभिक्रिया है (L + α → β)। यूटेक्टिक एक द्रव को दो ठोसों में, यूटेक्टॉइड एक ठोस को दो ठोसों में, और मोनोटेक्टिक एक द्रव को दूसरे द्रव व एक ठोस में विभाजित करता है। संयोजन-अभिक्रियाओं हेतु स्मरणीय रूप है: रेखा के ऊपर दो प्रावस्थाएँ और नीचे एक।
  5. द्वि-घटक A–B तंत्र की दो प्रावस्थाएँ α व β स्थिर T व P पर साम्य में हैं। मोलर गिब्स ऊर्जा-संघटन आलेख में α व β के साम्य संघटन इस प्रतिबंध से निर्धारित होते हैं कि

    1. दोनों संघटनों पर दोनों वक्रों की गिब्स ऊर्जाएँ समान हैं, अतः संघटन एक क्षैतिज रेखा पर हैं
    2. एक सीधी रेखा दोनों वक्रों की स्पर्श-रेखा है, अतः μ_A व μ_B दोनों α तथा β में अलग-अलग समान हैं
    3. प्रत्येक वक्र की स्पर्श-बिंदु पर ढाल शून्य है, अतः प्रत्येक प्रावस्था अपने G के न्यूनतम पर है
    4. दोनों वक्रों की स्पर्श-रेखाएँ समानांतर हैं, यद्यपि वे संघटन अक्षों को भिन्न मानों पर काटती हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — एक सीधी रेखा दोनों वक्रों की स्पर्श-रेखा है, अतः μ_A व μ_B दोनों α तथा β में अलग-अलग समान हैं

    साम्य हेतु μ_A^α = μ_A^β व μ_B^α = μ_B^β चाहिए। स्पर्श-रेखा के x_B = 0 व x_B = 1 अक्षों पर अंतःखंड μ_A व μ_B हैं, अतः दोनों अंतःखंड मिलने चाहिए, जिससे दोनों स्पर्श-रेखाएँ एक उभयनिष्ठ रेखा बन जाती हैं। दोनों संघटनों पर समान G क्षैतिज रेखा होगी, जो सामान्यतः स्पर्श-रेखा नहीं होती। समानांतर स्पर्श-रेखाएँ केवल समान ढाल, यानी μ_B − μ_A, पूरा करती हैं, प्रत्येक विभव को अलग-अलग नहीं।
  6. एक नियमित विलयन में ΔH_mix = Ωx(1 − x), Ω > 0, तथा आदर्श मिश्रण एन्ट्रॉपी है। T_c = Ω/(2R) से नीचे के ताप पर इसके मोलर गिब्स ऊर्जा वक्र के बारे में कौन-सा कथन सही है?

    1. वक्र का x = 0.5 पर दो न्यूनतमों के बीच स्थानीय अधिकतम है, अतः x = 0.5 पर साम्य द्वि-प्रावस्था मिश्रण है
    2. वक्र का x = 0.5 पर एक ही न्यूनतम है, अतः विलयन तंत्र के प्रत्येक संघटन पर एक प्रावस्था है
    3. वक्र के दो न्यूनतम हैं, फिर भी x = 0.5 का मिश्रधातु मिश्रण एन्ट्रॉपी के कारण एक समांगी प्रावस्था के रूप में स्थायी रहता है
    4. x = 0.5 पर d²G/dx² धनात्मक तथा दोनों शुद्ध घटकों के निकट ऋणात्मक है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — वक्र का x = 0.5 पर दो न्यूनतमों के बीच स्थानीय अधिकतम है, अतः x = 0.5 पर साम्य द्वि-प्रावस्था मिश्रण है

    d²G/dx² = −2Ω + RT/[x(1 − x)]। x = 0.5 पर यह −2Ω + 4RT है, जो T < Ω/(2R) हो तो ऋणात्मक है; अतः x = 0.5 दो न्यूनतमों के बीच स्थानीय अधिकतम है, उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा क्षैतिज है और साम्य अवस्था द्वि-प्रावस्था मिश्रण है। एक न्यूनतम T_c से ऊपर की स्थिति है। शुद्ध घटकों के निकट पद RT/[x(1 − x)] बड़ा व धनात्मक हो जाता है, अतः वहाँ वक्रता धनात्मक है, जो शुद्ध घटकों के निकट ऋणात्मक वक्रता के दावे के विपरीत है।
  7. लेड-टिन तंत्र में यूटेक्टिक 61.9 wt% Sn व 183 °C पर है, और उस ताप पर लेड-समृद्ध α में Sn की अधिकतम विलेयता 18.3 wt% Sn है। 30 wt% Sn का मिश्रधातु द्रव से 183 °C से ठीक नीचे तक धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। उसकी सूक्ष्म-संरचना है

    1. एकल-प्रावस्था α, क्योंकि मिश्रधातु में यूटेक्टिक से कम टिन है
    2. प्राथमिक β कण जो (α + β) यूटेक्टिक मिश्रण से घिरे हैं
    3. पूर्णतः पटलित (α + β) यूटेक्टिक, कोई प्राथमिक प्रावस्था नहीं
    4. प्राथमिक α कण जो (α + β) यूटेक्टिक मिश्रण से घिरे हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — प्राथमिक α कण जो (α + β) यूटेक्टिक मिश्रण से घिरे हैं

    30 wt% Sn यूटेक्टिक संघटन से कम (हाइपोयूटेक्टिक) पर 18.3 wt% विलेयता-सीमा से अधिक है, अतः मिश्रधातु पहले प्राथमिक α जमाता है और शेष द्रव, जो 183 °C पर 61.9 wt% Sn पहुँचता है, (α + β) यूटेक्टिक के रूप में जमता है। एकल-प्रावस्था α हेतु संघटन 18.3 wt% Sn से कम चाहिए; यूटेक्टिक संघटन से कम होना पर्याप्त नहीं। पूर्णतः यूटेक्टिक संरचना केवल 61.9 wt% Sn पर बनती है, और प्राथमिक β टिन-समृद्ध पक्ष के मिश्रधातुओं का लक्षण है।
  8. Fe–Fe₃C तंत्र में यूटेक्टॉइड 0.76 wt% C व 727 °C पर है। 1.0 wt% C के स्टील को एकल-प्रावस्था ऑस्टेनाइट क्षेत्र से बहुत धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। जिस ताप पर पहली नई प्रावस्था प्रकट होती है उससे 727 °C तक, बनने वाली नई प्रावस्था है

    1. प्रोयूटेक्टॉइड फेराइट, जो स्टील के ठंडा होने पर ऑस्टेनाइट कण-सीमाओं पर बनता है
    2. मार्टेन्साइट, क्योंकि स्टील की कार्बन मात्रा यूटेक्टॉइड मान से अधिक है
    3. प्रोयूटेक्टॉइड सीमेंटाइट, जो मुख्यतः ऑस्टेनाइट कण-सीमाओं पर बनता है
    4. केवल परलाइट कॉलोनियाँ, कोई पृथक प्रोयूटेक्टॉइड प्रावस्था नहीं
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — प्रोयूटेक्टॉइड सीमेंटाइट, जो मुख्यतः ऑस्टेनाइट कण-सीमाओं पर बनता है

    1.0 wt% C पर स्टील हाइपरयूटेक्टॉइड है: ठंडा होने पर वह γ + Fe₃C क्षेत्र में प्रवेश करता है, जहाँ अतिरिक्त कार्बन ऑस्टेनाइट से प्रोयूटेक्टॉइड सीमेंटाइट के रूप में निकलता है, जो कण-सीमाओं पर नाभिकित होता है। 727 °C पर बचा ऑस्टेनाइट 0.76 wt% C का होता है और परलाइट बनता है। प्रोयूटेक्टॉइड फेराइट हाइपोयूटेक्टॉइड स्टील का लक्षण है, मार्टेन्साइट को द्रुत शमन चाहिए और वह साम्य उत्पाद नहीं है, और केवल परलाइट 0.76 wt% C का मामला है।
  9. A व B के यूटेक्टिक तंत्र में यूटेक्टिक ताप T_E पर L, α व β साम्य में हैं। T_E पर खींचे गए मोलर गिब्स ऊर्जा-संघटन आलेख में,

    1. द्रव वक्र प्रत्येक संघटन पर दोनों ठोस वक्रों के ऊपर है, अतः कोई द्रव प्रकट नहीं हो सकता
    2. एक ही सीधी रेखा तीनों वक्रों की स्पर्श-रेखा है, निश्चर अभिक्रिया के तीनों संघटनों पर
    3. तीन पृथक उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखाएँ हैं, प्रत्येक प्रावस्था-युग्म की एक, जो तीन भिन्न ऊँचाइयों पर हैं
    4. α–β उभयनिष्ठ स्पर्श-रेखा द्रव वक्र के ऊपर से गुज़रती है, अतः अपने संघटन पर द्रव अधिक स्थायी प्रावस्था है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — एक ही सीधी रेखा तीनों वक्रों की स्पर्श-रेखा है, निश्चर अभिक्रिया के तीनों संघटनों पर

    तीन-प्रावस्था साम्य में तीनों प्रावस्थाओं में μ_A व μ_B समान चाहिए, अतः एक ही रेखा G_α, G_L व G_β को छूनी चाहिए; यही F = 0 का प्रतिबंध है। T_E से थोड़ा ऊपर α–β स्पर्श-रेखा द्रव वक्र के ऊपर से निकलेगी (द्रव स्थायी) और थोड़ा नीचे द्रव वक्र उस स्पर्श-रेखा से ऊपर उठ जाएगा। α–β स्पर्श-रेखा के द्रव वक्र के ऊपर से गुज़रने वाला कथन T_E से ऊपर के ताप का वर्णन है, और तीन पृथक स्पर्श-रेखाओं वाला कथन भिन्न तापों का है, यूटेक्टिक का नहीं।
  10. ऊष्मागतिक फलनों व साम्यावस्था के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. तृतीय नियम प्रत्येक पदार्थ की, काँच सहित, एन्ट्रॉपी 0 K पर ठीक शून्य निर्धारित करता है
    2. केवल दाब-आयतन कार्य करने वाले संवृत तंत्र हेतु स्थिर T व P पर साम्यावस्था गिब्स ऊर्जा के न्यूनतम के संगत है
    3. गिब्स ऊर्जा G विस्तारी है, जबकि रासायनिक विभव μ_i गहन है
    4. आदर्श विलयन हेतु ΔH_mix = 0, अतः मिश्रण पूर्णतः विन्यासी एन्ट्रॉपी की वृद्धि से प्रेरित होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — केवल दाब-आयतन कार्य करने वाले संवृत तंत्र हेतु स्थिर T व P पर साम्यावस्था गिब्स ऊर्जा के न्यूनतम के संगत है; C — गिब्स ऊर्जा G विस्तारी है, जबकि रासायनिक विभव μ_i गहन है; D — आदर्श विलयन हेतु ΔH_mix = 0, अतः मिश्रण पूर्णतः विन्यासी एन्ट्रॉपी की वृद्धि से प्रेरित होता है

    स्थिर T व P पर साम्यावस्था की कसौटी न्यूनतम G है। G पदार्थ की मात्रा के साथ बदलती है जबकि μ_i नहीं। आदर्श विलयन में मिश्रण की ऊष्मा नहीं होती, अतः ΔG_mix = −TΔS_mix। तृतीय नियम साम्य में पूर्ण क्रिस्टल पर लागू होता है; काँच, या कोई भी अव्यवस्थित ठोस, 0 K पर अवशिष्ट (विन्यासी) एन्ट्रॉपी रखता है, अतः काँच की एन्ट्रॉपी ठीक शून्य होने का दावा गलत है।
  11. गिब्स प्रावस्था नियम के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? (स्थिर दाब पर द्वि-घटक तंत्र हेतु F = C − P + 1 तथा T व P दोनों के बदलने पर F = C − P + 2 लें।)

    1. स्थिर दाब पर द्वि-घटक द्वि-प्रावस्था क्षेत्र में ताप निश्चित करने से दोनों प्रावस्थाओं के संघटन निश्चित हो जाते हैं
    2. स्थिर दाब पर द्वि-घटक के यूटेक्टिक बिंदु पर F = 1 है, अतः L, α व β के सह-अस्तित्व में ताप थोड़ा बदल सकता है
    3. स्थिर दाब पर द्वि-घटक के एकल-प्रावस्था क्षेत्र में ताप व संघटन दोनों स्वतंत्र रूप से बदले जा सकते हैं
    4. शुद्ध पदार्थ का त्रि-बिंदु पर, जहाँ ठोस, द्रव व वाष्प सह-अस्तित्व में हैं, F = 0 है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — स्थिर दाब पर द्वि-घटक द्वि-प्रावस्था क्षेत्र में ताप निश्चित करने से दोनों प्रावस्थाओं के संघटन निश्चित हो जाते हैं; C — स्थिर दाब पर द्वि-घटक के एकल-प्रावस्था क्षेत्र में ताप व संघटन दोनों स्वतंत्र रूप से बदले जा सकते हैं; D — शुद्ध पदार्थ का त्रि-बिंदु पर, जहाँ ठोस, द्रव व वाष्प सह-अस्तित्व में हैं, F = 0 है

    द्वि-घटक, दो प्रावस्थाएँ: F = 2 − 2 + 1 = 1, अतः एक चर (T) शेष सब निश्चित कर देता है। एकल प्रावस्था: F = 2, अतः T व संघटन स्वतंत्र हैं। एक-घटक त्रि-बिंदु: F = 1 − 3 + 2 = 0। स्थिर दाब पर द्वि-घटक में तीन प्रावस्थाओं हेतु F = 2 − 3 + 1 = 0, अतः यूटेक्टिक निश्चर है और उसका ताप खिसक नहीं सकता; वहाँ F = 1 वाला कथन गलत है।
  12. टाई-लाइन, उत्तोलक नियम व सूक्ष्म-संघटकों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. द्वि-प्रावस्था क्षेत्र के भीतर निश्चित ताप पर दोनों प्रावस्थाओं के संघटन मिश्रधातु के समग्र संघटन पर निर्भर नहीं करते
    2. संघटन at% में हों तो उत्तोलक नियम मोल अंश देता है, द्रव्यमान अंश नहीं
    3. हाइपोयूटेक्टिक मिश्रधातु में यूटेक्टिक ताप से ठीक नीचे यूटेक्टिक सूक्ष्म-संघटक का द्रव्यमान अंश उससे ठीक ऊपर के द्रव के द्रव्यमान अंश के बराबर है
    4. किसी प्रावस्था का अंश उसी ओर का टाई-लाइन खंड भाग पूरी टाई-लाइन है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — द्वि-प्रावस्था क्षेत्र के भीतर निश्चित ताप पर दोनों प्रावस्थाओं के संघटन मिश्रधातु के समग्र संघटन पर निर्भर नहीं करते; B — संघटन at% में हों तो उत्तोलक नियम मोल अंश देता है, द्रव्यमान अंश नहीं; C — हाइपोयूटेक्टिक मिश्रधातु में यूटेक्टिक ताप से ठीक नीचे यूटेक्टिक सूक्ष्म-संघटक का द्रव्यमान अंश उससे ठीक ऊपर के द्रव के द्रव्यमान अंश के बराबर है

    टाई-लाइन के सिरे केवल ताप पर निर्भर हैं (द्वि-प्रावस्था क्षेत्र में F = 1)। उत्तोलक-नियम अनुपात संघटन की ही इकाई रखता है, अतः at% से मोल अंश मिलते हैं। यूटेक्टिक ताप के ठीक ऊपर उपस्थित सारा द्रव यूटेक्टिक बन जाता है, अतः दोनों अंश बराबर हैं। उसी ओर का खंड गलत भुजा है: प्रावस्था का अंश विपरीत खंड से निकलता है, क्योंकि मिश्रधातु जिस प्रावस्था के जितना निकट हो, उसकी मात्रा उतनी अधिक होती है।
  13. Fe–Fe₃C तंत्र में फेराइट में कार्बन की विलेयता 0.022 wt% तथा यूटेक्टॉइड संघटन 0.76 wt% C लीजिए। 0.40 wt% C के स्टील को ऑस्टेनाइट क्षेत्र से 727 °C के ठीक नीचे तक बहुत धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। प्रोयूटेक्टॉइड फेराइट का द्रव्यमान प्रतिशत ____ है (उत्तर एक दशमलव स्थान तक दीजिए)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 48.8

    प्रोयूटेक्टॉइड फेराइट वह है जो यूटेक्टॉइड अभिक्रिया से पहले बनता है, अतः उत्तोलक नियम में दूर सिरे पर यूटेक्टॉइड ऑस्टेनाइट संघटन लिया जाता है: W = (0.76 − 0.40)/(0.76 − 0.022) = 0.36/0.738 = 0.4878, अर्थात 48.8 %। दूर सिरे पर 6.67 wt% C लेने से कुल फेराइट (94.3 %) मिलता, जिसमें परलाइट की फेराइट पटलिकाएँ भी शामिल हैं।
  14. एक त्रि-घटक तंत्र (तीन घटक) का 1 atm के स्थिर दाब पर अध्ययन किया जाता है। किसी संघटन-परास में तीन प्रावस्थाएँ साम्य में सह-अस्तित्व रखती हैं। स्वातंत्र्य कोटियों की संख्या ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 1

    स्थिर दाब पर F = C − P + 1 = 3 − 3 + 1 = 1। एक चर, जैसे ताप, स्वतंत्र रूप से चुना जा सकता है और वही शेष को निश्चित कर देता है। F = C − P + 2 लेने पर गलत रूप से 2 मिलता, क्योंकि दाब पहले से स्थिर है।
  15. एक नियमित विलयन में प्रति मोल ΔH_mix = Ωx(1 − x), Ω = 24 kJ mol⁻¹, तथा मिश्रण एन्ट्रॉपी आदर्श है। R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ लीजिए। T_c = Ω/(2R) से अमिश्रणीयता अंतराल का क्रांतिक ताप ____ K है (निकटतम पूर्णांक)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 1443

    x = 0.5 पर G की वक्रता −2Ω + 4RT है, जो T_c = Ω/(2R) = 24 000/(2 × 8.314) = 24 000/16.628 = 1443.3 K पर शून्य होती है, अर्थात 1443 K। हर में गुणक 2 भूल जाने पर 2887 K मिलता है।
  16. लेड-टिन तंत्र में यूटेक्टिक ताप पर α में Sn की अधिकतम विलेयता 18.3 wt% तथा यूटेक्टिक संघटन 61.9 wt% Sn लीजिए। 40 wt% Sn के मिश्रधातु को यूटेक्टिक ताप से ठीक नीचे तक धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। यूटेक्टिक सूक्ष्म-संघटक (द्रव से बना α + β मिश्रण) का द्रव्यमान प्रतिशत ____ है (उत्तर एक दशमलव स्थान तक दीजिए)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 49.8

    यूटेक्टिक सूक्ष्म-संघटक यूटेक्टिक ताप पर बचे द्रव से बनता है, अतः उसका अंश उसके ठीक ऊपर के द्रव का अंश है: W_L = (40 − 18.3)/(61.9 − 18.3) = 21.7/43.6 = 0.4977, अर्थात 49.8 %। शेष 50.2 % प्राथमिक α है। दूसरी भुजा लेने पर, (61.9 − 40)/43.6, 50.2 % मिलता है, जो प्राथमिक α का अंश है, यूटेक्टिक का नहीं।
  17. एक आदर्श विलयन में तीन घटक A, B व C समान मोल अंशों (प्रत्येक 1/3) में हैं। R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ लीजिए। 800 K पर प्रति मोल विलयन के ΔG_mix का परिमाण ____ kJ mol⁻¹ है (उत्तर दो दशमलव स्थान तक दीजिए)।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 7.31

    आदर्श विलयन हेतु ΔH_mix = 0 तथा ΔS_mix = −R Σ x_i ln x_i = R ln 3 = 8.314 × 1.0986 = 9.134 J mol⁻¹ K⁻¹। तब |ΔG_mix| = TΔS_mix = 800 × 9.134 = 7307 J mol⁻¹ = 7.31 kJ mol⁻¹ (ΔG_mix स्वयं ऋणात्मक है)। द्वि-घटक मिश्रण का ln 2 लेने पर 4.61 kJ mol⁻¹ मिलता।