सिलिकॉन प्रसंस्करण, चूर्ण निर्माण तथा सिंटरन
पृथक्करण (segregation) तथा zone refining
जब कोई melt जमता है तो ठोस में विलेय की सांद्रता प्रायः द्रव से भिन्न होती है। साम्य segregation coefficient k = C_s/C_l है, अर्थात अंतरापृष्ठ पर ठोस और द्रव में विलेय सांद्रताओं का अनुपात। जो विलेय गलनांक घटाता है उसके लिए k < 1: विलेय द्रव में धकेला जाता है; जो गलनांक बढ़ाता है उसके लिए k > 1। सिलिकॉन में अधिकांश अशुद्धियों के लिए k ≪ 1 है, इसीलिए जमना उसे शुद्ध करता है। प्रारंभिक विलेय सांद्रता C₀ वाली छड़ का normal freezing, द्रव में पूर्ण मिश्रण और ठोस में विसरण-रहित मानकर, जमे हुए अंश f पर C_s = k C₀ (1 − f)^(k−1) देता है। यही नियम Czochralski melt पर भी लगता है: k < 1 के लिए क्रिस्टल खींचने पर melt अधिक सांद्र होता जाता है, इसलिए क्रिस्टल में dopant सांद्रता लंबाई के साथ बढ़ती है।
Zone refining (Pfann) में लंबाई l का एक संकरा पिघला क्षेत्र छड़ के अनुदिश चलाया जाता है। जमने वाले सिरे पर ठोस k C_l लेता है और पिघलने वाले सिरे पर क्षेत्र छड़ से विलेय उठा लेता है, इसलिए k < 1 के लिए विलेय छड़ के दूर वाले सिरे तक बह जाता है। पहले पास में, एकसमान प्रारंभिक सांद्रता C₀ के साथ, आरंभ से दूरी x पर ठोस की सांद्रता (अंतिम zone-लंबाई तक मान्य) C(x) = C₀ [1 − (1 − k) exp(−k x/l)] है। x = 0 पर यह k C₀ देता है (पहला ठोस सबसे शुद्ध है); x बढ़ने पर यह C₀ की ओर चढ़ता है। हर बार आरंभ से नया zone शुरू करते हुए कई पास शुद्ध क्षेत्र को आगे बढ़ाते हैं और अंत में अति-शुद्ध छड़ मिलती है। हल: k = 0.1 और x/l = 5 पर C/C₀ = 1 − 0.9 e^(−0.5) = 1 − 0.9 × 0.6065 = 0.454।
एकल-क्रिस्टल वृद्धि: Czochralski तथा float zone
Czochralski (CZ) विधि में polysilicon और वांछित dopant को अक्रिय आर्गन के अंतर्गत fused-silica क्रूसिबल में पिघलाया जाता है (सिलिकॉन 1414 °C पर पिघलता है)। चुने हुए अभिविन्यास का एक छोटा seed crystal melt में डुबोकर ऊपर खींचा जाता है, जबकि seed और क्रूसिबल विपरीत दिशाओं में घूमते हैं। Melt seed पर जमता है और उसका अभिविन्यास दोहराता है। पहले एक संकरा neck उगाया जाता है ताकि तापीय आघात से बने dislocation बाहर निकल जाएँ; फिर व्यास को shoulder तक चौड़ा करते हैं और pull rate तथा heater power समायोजित कर body में स्थिर रखते हैं। इसके बाद ingot को घिसा, wafer में काटा, lap किया, etch किया और पॉलिश किया जाता है।
क्वार्ट्ज़ क्रूसिबल थोड़ा घुलता है, इसलिए CZ सिलिकॉन में ऑक्सीजन (लगभग 10¹⁸ परमाणु/cm³) होती है, जो हमेशा हानिकारक नहीं है: ऊष्मा उपचार में यह अवक्षेपित होकर धात्विक अशुद्धियों को फँसा सकती है (gettering)। Float-zone (FZ) विधि में polysilicon छड़ ऊर्ध्वाधर पकड़ी जाती है; रेडियो-आवृत्ति induction कुंडली एक छोटा क्षेत्र पिघलाती है, जो नीचे seed को छूता है, और क्षेत्र छड़ के ऊपर चलाया जाता है। Melt पृष्ठ तनाव से टिका रहता है, इसलिए क्रूसिबल नहीं होता और ऑक्सीजन नहीं आती; वृद्धि के दौरान ही zone refining भी हो जाता है। अतः FZ सिलिकॉन अधिक शुद्ध और उच्च प्रतिरोधकता वाला होता है, और power devices तथा detectors के लिए उपयुक्त है, पर व्यास सीमित और लागत अधिक होती है। अधिकांश wafer CZ से बनते हैं, क्योंकि यह बड़े व्यास देता है, सस्ता है और melt से एकसमान डोपिंग संभव करता है।
| विशेषता | Czochralski | Float zone |
|---|---|---|
| पात्र | Fused-silica क्रूसिबल | कोई नहीं; क्षेत्र पृष्ठ तनाव से टिका |
| ऑक्सीजन मात्रा | अधिक | बहुत कम |
| व्यास व लागत | बड़ा, कम लागत | छोटा, अधिक लागत |
| ingot के अनुदिश dopant एकरूपता | k के साथ बदलती है, जैसे normal freezing में | यहाँ भी segregation का असर होता है; डोपिंग गैस-प्रावस्था से या न्यूट्रॉन विकिरण (रूपांतरण) से होती है, जिससे बहुत एकसमान n-टाइप पदार्थ मिलता है |
सिलिकॉन ऑक्सीकरण: Deal–Grove मॉडल
सिलिकॉन शुष्क O₂ (Si + O₂ → SiO₂) या भाप (Si + 2H₂O → SiO₂ + 2H₂) में सामान्यतः 900 से 1200 °C पर SiO₂ में ऑक्सीकृत होता है। ऑक्साइड गेट-विद्युतरोधी, dopant के विरुद्ध मास्क और विलगन परत है। ऑक्सीकरण Si–SiO₂ अंतरापृष्ठ पर होता है: ऑक्सीकारक को पहले से बने ऑक्साइड से विसरित होना पड़ता है, इसलिए ऑक्साइड बढ़ने पर उसकी मोटाई और धीरे बढ़ती है। Deal–Grove मॉडल ऑक्साइड में ऑक्सीकारक के विसरण और अंतरापृष्ठ अभिक्रिया को मिलाकर, t समय बाद ऑक्साइड मोटाई x के लिए x² + A x = B (t + τ) देता है, जहाँ τ प्रारंभिक ऑक्साइड को दर्शाता है। हल करने पर x = (A/2)[√(1 + 4B(t + τ)/A²) − 1]।
- पतला ऑक्साइड, कम समय (t + τ ≪ A²/4B): रैखिक क्षेत्र। अंतरापृष्ठ अभिक्रिया बाधक है और x ≈ (B/A)(t + τ)। B/A रैखिक दर स्थिरांक है।
- मोटा ऑक्साइड, लंबा समय (t ≫ A²/4B): परवलयिक क्षेत्र। ऑक्साइड में विसरण नियंत्रक है और x ≈ √(B t)। B परवलयिक दर स्थिरांक है; समय दुगुना करने पर x केवल √2 गुना बढ़ता है।
हल उदाहरण (A = 0.20 µm, B = 0.050 µm²/h, τ = 0, t = 4 h; स्थिरांक उदाहरणार्थ माने गए): x² + 0.20x − 0.20 = 0, अतः x = [−0.20 + √(0.04 + 0.80)]/2 = (−0.20 + 0.9165)/2 = 0.358 µm। केवल परवलयिक नियम √(0.050 × 4) = 0.447 µm देता, जो 25 % अधिक अनुमान है, क्योंकि ऑक्साइड अभी विसरण-सीमा के लिए पर्याप्त मोटा नहीं है। सिलिकॉन खपता है: SiO₂ अपने द्वारा बदले गए सिलिकॉन का लगभग 2.27 गुना आयतन घेरता है, इसलिए मोटाई x के ऑक्साइड में 0.44 x सिलिकॉन खर्च होता है, यहाँ 0.158 µm। गीला ऑक्सीकरण शुष्क से तेज़ है क्योंकि SiO₂ में H₂O, O₂ से कहीं अधिक घुलनशील है (बड़ा B); शुष्क ऑक्साइड सघन होता है और पतले गेट-ऑक्साइड के लिए चुना जाता है।
डोपिंग तथा photolithographic प्रक्रिया
विसरण द्वारा डोपिंग में D = D₀ exp(−E_a/kT) लगता है, इसलिए गहराई √(Dt) से तय होती है और ताप के साथ तेज़ी से बढ़ती है। स्थिर सतही सांद्रता C_s (गैस या glass स्रोत से predeposition) के साथ प्रोफ़ाइल C(x, t) = C_s erfc[x/(2√(Dt))] है। Junction वहाँ है जहाँ C विपरीत प्रकार की पृष्ठभूमि सांद्रता C_b के बराबर हो, अतः x_j = 2z√(Dt), जहाँ erfc(z) = C_b/C_s। प्रति इकाई क्षेत्र निश्चित मात्रा Q और आगे आपूर्ति के बिना (drive-in) प्रोफ़ाइल गाउसीय है, C = [Q/√(πDt)] exp(−x²/4Dt)। हल: C_b/C_s = 0.01 पर z = 1.82 (erfc(1.82) ≈ 0.01); D = 2 × 10⁻¹³ cm²/s और t = 1800 s के लिए √(Dt) = 1.90 × 10⁻⁵ cm, अतः x_j = 2 × 1.82 × 0.190 µm = 0.69 µm। विसरण सर्वदिशिक है: dopant मास्क के किनारे के नीचे भी तुलनीय दूरी तक फैलता है।
आयन-रोपण (implantation) में dopant आयनों को (keV से MeV तक) wafer में त्वरित किया जाता है। मात्रा (dose) Q = It/(qA) (प्रति इकाई क्षेत्र आयन) है और प्रोफ़ाइल लगभग गाउसीय है, जिसका केंद्र प्रक्षेपित परास (projected range) R_p पर तथा विचलन ΔR_p है, और शिखर सांद्रता C_max = Q/(√(2π) ΔR_p) है। शिखर सतह के नीचे होता है, गहराई आयन-ऊर्जा से और dose धारा व समय से तय होती है, और प्रक्रिया निम्न ताप पर होती है, इसलिए पतला ऑक्साइड या resist इसे मास्क कर देता है। यह जालक को क्षतिग्रस्त करता है, इसलिए anneal क्रिस्टलता लौटाता है और dopant को प्रतिस्थापी स्थलों पर बैठाता है। विसरण में निर्वात नहीं चाहिए और यह सस्ता है, पर सर्वदिशिक है और उथले junction के लिए नियंत्रण कठिन है; implantation में dose और गहराई पर सटीक नियंत्रण मिलता है।
Photolithography wafer में पैटर्न स्थानांतरित करती है:
(1) फ़िल्म (जैसे SiO₂) उगाएँ या जमाएँ;
(2) साफ़ करके photoresist spin-coat करें, फिर soft-bake;
(3) मास्क संरेखित कर पराबैंगनी प्रकाश से expose करें;
(4) develop: positive resist उजागर भाग में घुलनशील हो जाता है, अतः पैटर्न मास्क जैसा ही रहता है; negative resist उजागर भाग में crosslink होता है, इसलिए अनुजागर भाग घुल जाता है और पैटर्न उलट जाता है;
(5) hard-bake;
(6) असुरक्षित फ़िल्म को etch करें, गीले रासायनिक etch (सर्वदिशिक, resist के नीचे कटाव) या शुष्क plasma etch (reactive-ion etching, विषमदैशिक) से;
(7) resist strip करें। सबसे छोटी छापी जा सकने वाली विशेषता k₁λ/NA के अनुपात में होती है, इसलिए छोटी तरंगदैर्ध्य और बड़ा numerical aperture विभेदन सुधारते हैं।
चूर्ण निर्माण तथा संहनन
| विधि | सिद्धांत | उत्पन्न चूर्ण |
|---|---|---|
| गैस ऐटमीकरण | द्रव धारा को उच्च-दाब अक्रिय गैस जेट से तोड़ा जाता है | गोलाकार, स्वच्छ, महीन; कम ऑक्सीजन |
| जल ऐटमीकरण | वही, जल जेट के साथ | अनियमित, सस्ता, अधिक ऑक्साइड; अच्छा संहनन |
| यांत्रिक मिलिंग | गेंद के आघात भंगुर कणों को तोड़ते हैं; तन्य कण बार-बार जुड़ते और टूटते हैं | महीन, कोणीय; यांत्रिक मिश्रधातुकरण और नैनो-संरचनाएँ |
| रासायनिक विधियाँ | H₂ या C से ऑक्साइड का अपचयन; वैद्युत-अपघटन; carbonyl का अपघटन; अवक्षेपण या sol–gel | स्पंजी या महीन चूर्ण; उच्च शुद्धता, नैनो-स्तर संभव |
चूर्ण का वर्णन आकार-वितरण, कण-आकृति, आभासी घनत्व और प्रवाह से होता है। शुद्ध चूर्ण को कठोर डाई में (प्रायः कुछ सौ MPa पर) स्नेहक के साथ संहनित करके green compact बनाया जाता है; स्नेहक डाई-दीवार घर्षण घटाता है। दाब से घनत्व पहले कणों की पुनर्व्यवस्था से, फिर प्लास्टिक विरूपण से बढ़ता है; घर्षण के कारण घनत्व असमान होता है, इसलिए दोनों सिरों से दबाना और cold isostatic pressing (सब ओर से द्रव दाब) अधिक एकसमान green घनत्व देते हैं। Green compact कमज़ोर होता है, जो शीत-वेल्डन और यांत्रिक अंतर्ग्रथन से टिका रहता है; मजबूती सिंटरन से आती है।
सिंटरन: प्रेरक बल, चरण, क्रियाविधियाँ तथा चर
सिंटरन में संहत को गलनांक से नीचे, प्रायः परम गलनांक के 0.7 से 0.9 गुना ताप तक गर्म किया जाता है, ताकि कण जुड़ें और संहत मजबूत हो तथा प्रायः सघन हो। प्रेरक बल कुल पृष्ठ (ठोस–वाष्प) मुक्त ऊर्जा में कमी है: चूर्ण का पृष्ठीय क्षेत्रफल बहुत बड़ा होता है, और पृष्ठ को कम ऊर्जा वाली कण-सीमा से बदलना मुक्त ऊर्जा घटाता है। पदार्थ परिवहन परमाण्विक विसरण से होता है। आरंभिक चरण में संपर्क बिंदुओं पर neck बढ़ते हैं (neck-से-कण त्रिज्या अनुपात x/a लगभग 0.3 तक बढ़ता है), संकुचन बहुत कम होता है। मध्यवर्ती चरण में छिद्र नलिकाओं का संयोजित जाल बनाते हैं और अधिकांश सघनीकरण होता है। अंतिम चरण में छिद्र पृथक गोले हैं; ये धीरे बंद होते हैं, और कण-वृद्धि, जो छिद्रों को कणों के भीतर फँसा सकती है, सघनीकरण से प्रतिस्पर्धा करती है।
क्रियाविधियाँ इस बात में भिन्न हैं कि वे सघन करती हैं या नहीं। पृष्ठीय विसरण, पृष्ठ से जालक विसरण और वाष्पन–संघनन पदार्थ को कण-पृष्ठ से neck तक ले जाते हैं: neck बढ़ता है पर कणों के केंद्र पास नहीं आते, अतः संकुचन नहीं होता। कण-सीमा विसरण, सीमा से जालक विसरण और प्लास्टिक प्रवाह संपर्क-क्षेत्र से पदार्थ लेते हैं, इसलिए केंद्र पास आते हैं और संहत सिकुड़ता है। दो गोलों के लिए neck त्रिज्या x^n ∝ t (आकार-गुणांक सहित) का पालन करती है, अतः x ∝ t^(1/n); जालक विसरण के लिए n = 5, कण-सीमा विसरण के लिए 6, पृष्ठीय विसरण के लिए 7, वाष्पन–संघनन के लिए 3 और श्यान प्रवाह के लिए 2। अतः neck वृद्धि समय के साथ धीमी होती है, और दर ताप पर विसरणशीलता (Arrhenius) से निर्भर करती है, इसलिए ताप में मामूली वृद्धि समय को बहुत घटा देती है।
कण आकार: महीन चूर्ण में प्रति इकाई द्रव्यमान पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक और विसरण पथ छोटे होते हैं, इसलिए यह तेज़ी से और कम ताप पर सिंटर होता है; समान neck अनुपात के लिए Herring का scaling नियम जालक विसरण के लिए समय ∝ a³ और पृष्ठीय व कण-सीमा विसरण के लिए ∝ a⁴ देता है (a कण त्रिज्या है)। संकुचन: समदैशिक संकुचन और द्रव्यमान-हानि रहित स्थिति में सापेक्ष घनत्व ρ/ρ_g = (1 − ΔL/L₀)⁻³ गुणा green सापेक्ष घनत्व ρ_g। हल: 60 % सापेक्ष घनत्व का संहत रैखिक रूप से 5 % सिकुड़े तो 0.60/0.95³ = 0.70 अर्थात 70 % तक पहुँचता है। फँसी गैस और कण-वृद्धि अंतिम घनत्व सीमित करती हैं; sintering aids, द्रव प्रावस्था, दाब (hot pressing) और महीन चूर्ण इसे बढ़ाते हैं।
मुख्य बिंदु
- MG-Si लगभग 1800 °C पर SiO₂ + 2C → Si + 2CO से बनता है (98 से 99 %); EG-Si Siemens मार्ग से: HCl से लगभग 300 °C पर SiHCl₃ बनता है, distill होता है और लगभग 1100 °C पर गर्म सिलिकॉन छड़ों पर H₂ से अपचयित होता है।
- k = C_s/C_l। Normal freezing: C_s = kC₀(1 − f)^(k−1)। पहले पास का zone refining: C = C₀[1 − (1 − k)e^(−kx/l)]; k < 1 के लिए अशुद्धि उस सिरे पर जाती है जहाँ zone समाप्त होता है, और k के 1 के निकट होने पर zone refining विफल है।
- CZ में silica क्रूसिबल के melt से क्रिस्टल खींचा जाता है (ऑक्सीजन उपस्थित, बड़े व्यास, सस्ता); FZ में बिना क्रूसिबल RF zone होता है (अति शुद्ध, छोटा, महँगा)।
- Deal–Grove: x² + Ax = B(t + τ); पतला हो तो रैखिक x ≈ (B/A)(t + τ), मोटा हो तो परवलयिक x ≈ √(Bt); ऑक्साइड 0.44 x सिलिकॉन खपाता है; गीला, शुष्क से तेज़ है।
- विसरण डोपिंग erfc (स्थिर स्रोत) या गाउसीय (निश्चित dose) प्रोफ़ाइल देती है, x_j = 2z√(Dt); implantation सतह के नीचे गाउसीय शिखर C_max = Q/(√(2π)ΔR_p) देता है और anneal माँगता है। Lithography है coat, expose, develop, etch, strip।
- चूर्ण: ऐटमीकरण, मिलिंग, रासायनिक विधियाँ; green compact कमज़ोर होते हैं। सिंटरन विसरण से पृष्ठ ऊर्जा घटाता है; neck x ∝ t^(1/n); केवल कण-सीमा मार्ग संहत को सिकोड़ते हैं; महीन चूर्ण और उच्च ताप इसे तेज़ करते हैं।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
Metallurgical-grade सिलिकॉन से Siemens मार्ग द्वारा semiconductor-grade polysilicon के उत्पादन का कौन-सा क्रम सही है?
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उत्तर: A — HCl से अभिक्रिया कराकर द्रव SiHCl₃ बनाएँ, उसे fractional distillation से शुद्ध करें, फिर गर्म सिलिकॉन छड़ों पर H₂ से अपचयित करें
Siemens मार्ग सिलिकॉन को वाष्पशील द्रव यौगिक SiHCl₃ में बदलता है (HCl से लगभग 300 °C पर), बार-बार distill करके Fe, B व P के क्लोराइड हटाता है और लगभग 1100 °C पर छड़ों पर हाइड्रोजन अपचयन से सिलिकॉन जमाता है। केवल कार्बोथर्मिक अपचयन से 98 से 99 % Si ही मिलता है, जो आकर्षक पर अपर्याप्त मार्ग है। ऑक्सीकरण और फिर हटाना अशुद्धियों को नहीं, स्वयं सिलिकॉन को हटाता।एक सिलिकॉन छड़ में अशुद्धि है जिसका segregation coefficient k = 0.05 (अंतरापृष्ठ पर C_s/C_l) है। एक पिघला क्षेत्र छड़ के अनुदिश एक ही दिशा में कई बार चलाया जाता है। कई पास के बाद अशुद्धि सबसे अधिक सांद्र है:
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उत्तर: C — छड़ के उस सिरे पर जहाँ zone समाप्त होता है, क्योंकि जमता ठोस जिस विलेय को ठुकराता है उसे द्रव अपने पास रखता है
k < 1 के लिए जमता ठोस द्रव सांद्रता का केवल k भाग लेता है, इसलिए द्रव zone चलते हुए अधिक सांद्र होता जाता है और अपना भार उस सिरे पर छोड़ता है जहाँ वह अंत में जमता है। पहला ठोस सबसे शुद्ध होता है, क्योंकि वह k C₀ लेता है। k > 1 के लिए परिणाम उलटा होता।Float-zone (FZ) सिलिकॉन में Czochralski (CZ) सिलिकॉन की तुलना में बहुत कम ऑक्सीजन क्यों होती है?
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उत्तर: B — पिघला क्षेत्र किसी क्रूसिबल को नहीं छूता, जबकि CZ में fused-silica क्रूसिबल melt में थोड़ा घुल जाता है
CZ वृद्धि में silica क्रूसिबल ऑक्सीजन का मुख्य स्रोत है। FZ में क्षेत्र पृष्ठ तनाव से टिका रहता है, इसलिए क्रूसिबल नहीं है और ऑक्सीजन नहीं आती। FZ तीव्र-शीतलन प्रक्रिया नहीं है, और सिलिकॉन में ऑक्सीजन का k लगभग 1.25 है, इसलिए zone पास उसे बाहर नहीं बहाते, और कुंडली केवल गलनांक के निकट एक छोटा क्षेत्र गर्म करती है, सिलिकॉन के क्वथनांक से ऊपर नहीं।सिलिकॉन का ऑक्सीकरण ऐसे किया जाता है कि ऑक्साइड पहले से मोटा है और वृद्धि परवलयिक Deal–Grove नियम x ≈ √(Bt) का पालन करती है। 3 h बाद ऑक्साइड 0.30 µm मोटा है। τ = 0 और ताप अपरिवर्तित मानकर, कुल 12 h बाद मोटाई है:
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उत्तर: D — 0.60 µm, क्योंकि मोटाई समय के वर्गमूल के अनुसार बदलती है और समय चार गुना बढ़ा है
परवलयिक क्षेत्र में x² = Bt, अतः x₂/x₁ = √(t₂/t₁) = √4 = 2, यानी 0.60 µm। समय के रैखिक विकल्प, 0.90 और 1.20 µm, पतले-ऑक्साइड रैखिक क्षेत्र का वर्णन करते हैं, जो यहाँ लागू नहीं। समय चौगुना करने पर मोटाई दुगुनी होती है, चौगुनी नहीं।आयन-रोपण द्वारा डोपिंग की तापीय विसरण द्वारा डोपिंग से तुलना करने वाला कौन-सा कथन सही है?
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उत्तर: C — Implantation में dose को बीम धारा और समय से तथा गहराई को आयन ऊर्जा से तय किया जा सकता है, वह भी निम्न wafer ताप पर
Dose Q = It/(qA) है और गहराई आयन ऊर्जा (projected range) से तय होती है। Wafer को गर्म नहीं करना पड़ता, इसलिए पतला resist या ऑक्साइड मास्क कर सकता है। प्रोफ़ाइल सतह के नीचे R_p पर शिखर बनाती है, और क्षतिग्रस्त जालक को anneal करना पड़ता है। तापीय विसरण सर्वदिशिक है और पार्श्व में फैलता है।Photolithography में positive photoresist वह है जिसमें:
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उत्तर: B — उजागर क्षेत्र developer में घुलनशील हो जाते हैं और हट जाते हैं, इसलिए wafer पर पैटर्न मास्क जैसा ही होता है
Positive resist उजागर होने पर घुलनशील हो जाता है, इसलिए developing उजागर क्षेत्र हटाती है और पैटर्न मास्क जैसा रहता है। Negative resist उलटा व्यवहार करता है, उजागर होने पर crosslink होता है। Positive शब्द का आवेश या आयनों के प्रयोग से कोई संबंध नहीं।धातु चूर्ण के ढीले संहत के सिंटरन का ऊष्मागतिक प्रेरक बल क्या है?
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उत्तर: A — कुल पृष्ठ मुक्त ऊर्जा में कमी, जब ठोस–वाष्प पृष्ठ की जगह कम ऊर्जा वाली कण-सीमा आती है
चूर्ण का पृष्ठ क्षेत्रफल बहुत बड़ा होता है, और पृष्ठ को कण-सीमा से बदलने पर मुक्त ऊर्जा घटती है; परम गलनांक के 0.7 से 0.9 गुना ताप पर परमाण्विक विसरण परिवहन देता है। सिंटरन ठोस-अवस्था प्रक्रिया है, इसलिए संपर्कों पर पिघलना क्रियाविधि नहीं है। संचित विकृति का शमन अलग प्रभाव है, और हर चूर्ण में बहुरूपी रूपांतरण नहीं होता।एक ही चूर्ण के दो समान संहत सिंटर किए जाते हैं। एक में कणों के बीच neck बढ़ता है और मजबूती बढ़ती है, पर घनत्व और विमाएँ बिल्कुल नहीं बदलतीं। मुख्यतः कौन-सी क्रियाविधि काम कर रही है?
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उत्तर: D — पृष्ठीय विसरण, क्योंकि यह परमाणुओं को कण-पृष्ठ से neck तक ले जाता है बिना केंद्रों को पास लाए
मुक्त पृष्ठ से लेकर neck पर रखा गया पदार्थ कणों के केंद्र जहाँ थे वहीं रहने देता है, इसलिए neck बिना संकुचन के बढ़ता है। पृष्ठीय विसरण ऐसा एक असघनकारी मार्ग है (वाष्पन–संघनन दूसरा है)। कण-सीमा विसरण और सीमा से जालक विसरण दोनों संपर्क-क्षेत्र से पदार्थ लेते हैं, अतः सघन करते हैं; प्लास्टिक प्रवाह भी सघन करता है।जालक विसरण द्वारा दिए गए neck-से-कण त्रिज्या अनुपात तक पहुँचने के लिए आवश्यक सिंटरन समय कण त्रिज्या a के साथ a³ के रूप में बदलता है (Herring का scaling नियम, समान आकृति व पदार्थ के कणों के लिए, समान ताप पर)। 20 µm कणों वाले चूर्ण को 16 h चाहिए। 10 µm कणों वाले चूर्ण के लिए समय है:
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उत्तर: C — 2 h, क्योंकि समय कण आकार के घन के अनुसार बदलता है
t ∝ a³ होने पर a आधा करने से t = 16 × (1/2)³ = 2 h। रैखिक और वर्ग वाले विकल्प गलत घातांक लेते हैं, और अधिक समय वाला विकल्प प्रवृत्ति उलट देता है: महीन चूर्ण में प्रति इकाई द्रव्यमान प्रेरक बल अधिक और विसरण दूरी कम होती है, इसलिए वह तेज़ सिंटर होता है।जल-ऐटमीकृत धातु चूर्ण की तुलना में गैस-ऐटमीकृत चूर्ण में प्रायः होता है:
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उत्तर: C — गोलाकार आकृति और कम ऑक्सीजन, क्योंकि melt को अक्रिय-गैस जेट से तोड़ा जाता है
अक्रिय-गैस जेट द्रव धारा को बूँदों में तोड़ता है जो जमने से पहले गोलाकार हो जाती हैं और जिन्हें ऑक्सीजन कम मिलती है। अनियमित, ऑक्साइड-समृद्ध आकृति जल ऐटमीकरण की है, पत्तीनुमा आकृति तन्य धातुओं की मिलिंग की और स्पंज संरचना ठोस-अवस्था ऑक्साइड अपचयन की।सिलिकॉन के segregation व क्रिस्टल वृद्धि के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं? k = C_s/C_l लें।
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उत्तर: A — k < 1 वाली अशुद्धि के लिए, normal freezing वाली छड़ का सबसे पहले जमने वाला भाग प्रारंभिक पदार्थ से अधिक शुद्ध होता है; B — k < 1 वाले dopant के साथ Czochralski वृद्धि में क्रिस्टल में dopant सांद्रता seed सिरे से पूँछ सिरे तक बढ़ती है; D — Czochralski खिंचाई के आरंभ में neck इसलिए उगाया जाता है कि तापीय आघात से बने dislocation क्रिस्टल से बाहर निकल जाएँ
पहला ठोस k C₀ < C₀ लेता है, अतः अधिक शुद्ध है; k < 1 होने पर क्रिस्टल बढ़ने के साथ melt समृद्ध होता जाता है, इसलिए क्रिस्टल में dopant स्तर लंबाई के अनुदिश बढ़ता है (C_s = kC₀(1 − f)^(k−1)); और पतला neck dislocation को अपने किनारों से निकलने देता है। Zone refining विलेय के निष्कासन पर निर्भर है, इसलिए k के 1 के निकट होने पर यह विफल रहता है; इसी कारण k के 1 के निकट वाला कथन गलत है।सिलिकॉन के तापीय ऑक्सीकरण के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — नया ऑक्साइड Si–SiO₂ अंतरापृष्ठ पर बनता है, क्योंकि ऑक्सीकारक पहले से बने ऑक्साइड से विसरित होता है; C — x मोटाई का ऑक्साइड लगभग 0.44 x सिलिकॉन खपाता है, क्योंकि ऑक्साइड बदले गए सिलिकॉन का लगभग 2.27 गुना आयतन घेरता है
वृद्धि भीतरी अंतरापृष्ठ पर होती है, और आयतन अनुपात खपे सिलिकॉन के लिए 1/2.27 = 0.44 देता है। क्षेत्र इसके उलट हैं: पतला ऑक्साइड अभिक्रिया-सीमित (रैखिक) और मोटा ऑक्साइड विसरण-सीमित (परवलयिक) होता है। गीला ऑक्सीकरण धीमा नहीं, तेज़ होता है, क्योंकि SiO₂ में H₂O, O₂ से कहीं अधिक घुलनशील है।धातु चूर्ण संहतों के सिंटरन के बारे में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — सिंटरन ताप बढ़ाने से हर विसरण क्रियाविधि तेज़ होती है, क्योंकि विसरणशीलता Arrhenius नियम का पालन करती है; B — अंतिम चरण में छिद्र पृथक होते हैं, और उनके पास से गुज़रने वाली कण-वृद्धि उन्हें कणों के भीतर फँसा छोड़ सकती है
विसरण ताप-सक्रियित है, इसलिए अधिक गर्म संहत तेज़ सिंटर होता है; और कण-वृद्धि कण-सीमाओं को छिद्रों से अलग कर सकती है, जिससे छिद्र कणों के भीतर रह जाते हैं और हटाने कठिन होते हैं। पारंपरिक सिंटरन गलनांक से नीचे रहता है। पृष्ठीय विसरण संहत को बिल्कुल नहीं सिकोड़ता, इसलिए वह कण-सीमा विसरण से तेज़ नहीं सिकोड़ सकता।एकसमान अशुद्धि सांद्रता C₀ वाली सिलिकॉन छड़ को लंबाई l के पिघले क्षेत्र से एक पास में zone refine किया जाता है। पहले पास में आरंभ से दूरी x पर ठोस की सांद्रता C(x) = C₀[1 − (1 − k) exp(−kx/l)] है। अशुद्धि का k = 0.2 है। x = 4l पर अनुपात C/C₀ है ____ (उत्तर दो दशमलव स्थानों तक)।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
उत्तर देखें
उत्तर: 0.64
kx/l = 0.2 × 4 = 0.8। exp(−0.8) = 0.4493। C/C₀ = 1 − 0.8 × 0.4493 = 1 − 0.3595 = 0.6405, अर्थात 0.64। जाँच: x = 0 पर सूत्र k = 0.2 देता है और बड़े x पर 1 की ओर जाता है, इसलिए 0.64 बीच में है, जैसा होना चाहिए।सिलिकॉन का ऑक्सीकरण ऐसे स्थिर ताप पर किया जाता है जिसके लिए Deal–Grove समीकरण x² + Ax = B(t + τ) में A = 0.10 µm, B = 0.020 µm²/h और τ = 0 है। ऑक्साइड नंगे सिलिकॉन से 5 h तक उगाया जाता है। द्विघात को ठीक-ठीक हल करें (परवलयिक सन्निकटन का प्रयोग न करें)। ऑक्साइड की मोटाई है ____ nm (उत्तर पूर्णांक में)।
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उत्तर: 270
x² + 0.10x − 0.10 = 0 (क्योंकि B t = 0.020 × 5 = 0.10)। x = [−0.10 + √(0.01 + 0.40)]/2 = (−0.10 + 0.6403)/2 = 0.2702 µm = 270 nm। परवलयिक सन्निकटन √(Bt) = 0.316 µm = 316 nm अधिक अनुमान देता, क्योंकि ऑक्साइड अभी A/2 से बहुत आगे नहीं है।Boron को n-प्रकार सिलिकॉन में ऐसे स्रोत से predeposit किया जाता है जो सतही सांद्रता स्थिर रखता है, ताकि C(x, t) = C_s erfc[x/(2√(Dt))]। आधार सांद्रता C_b = 0.05 C_s है, और erfc(z) = 0.05 पर z = 1.39 है (यही मान लें)। D = 4 × 10⁻¹⁴ cm²/s और t = 3600 s लें। Junction गहराई है ____ µm (उत्तर दो दशमलव स्थानों तक)।
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उत्तर: 0.33
Junction वहाँ है जहाँ C = C_b, अर्थात erfc(z) = 0.05, अतः x_j = 2z√(Dt)। Dt = 4 × 10⁻¹⁴ × 3600 = 1.44 × 10⁻¹⁰ cm², इसलिए √(Dt) = 1.2 × 10⁻⁵ cm = 0.12 µm। x_j = 2 × 1.39 × 0.12 = 0.3336 µm, अर्थात 0.33 µm। इकाई-चूक से बचें: 1 cm = 10⁴ µm।दो ताँबे के गोले जालक विसरण से सिंटर होते हैं, जिसके लिए स्थिर ताप व कण आकार पर neck त्रिज्या x, x⁵ ∝ t का पालन करती है। 2 h बाद neck त्रिज्या 3 µm है। इस scaling के अलावा ज्यामिति में किसी परिवर्तन की उपेक्षा करें। जिस समय neck त्रिज्या 6 µm पहुँचती है वह है ____ h (उत्तर पूर्णांक में)।
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उत्तर: 64
x⁵ ∝ t से t₂/t₁ = (x₂/x₁)⁵ = 2⁵ = 32। अतः t₂ = 2 × 32 = 64 h। neck त्रिज्या दुगुनी करने में 32 गुना अधिक समय लगता है, जो दिखाता है कि neck वृद्धि कितनी तेज़ी से धीमी होती है। x ∝ t मानने पर गलत रूप से 4 h आता।एक चूर्ण संहत का green सापेक्ष घनत्व सैद्धांतिक घनत्व का 55 % है। सिंटरन पर यह समदैशिक रूप से सिकुड़ता है, रैखिक संकुचन ΔL/L₀ = 8 %, और कोई द्रव्यमान नहीं खोता। सिंटरन के बाद सापेक्ष घनत्व, प्रतिशत में, है ____ (उत्तर एक दशमलव स्थान तक)।
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उत्तर: 70.6
द्रव्यमान संरक्षित है और आयतन रैखिक गुणक के घन से घटता है: V/V₀ = (1 − 0.08)³ = 0.7787। अतः घनत्व 1/0.7787 = 1.2842 गुना बढ़ता है, इसलिए सापेक्ष घनत्व 55 × 1.2842 = 70.6 % है। 8 % को आयतन संकुचन मानने पर 59.8 % आता, जो गलत है।