भूभौतिकीय वेल-लॉगिंग: SP, प्रतिरोधकता, रेडियोधर्मिता, ध्वनिक, NMR व सीमेंट-बंध लॉग, तथा संरचना का मात्रात्मक मूल्यांकन

भूविज्ञान एवं भूभौतिकी (GG) पेपर के भाग B2 का यह अध्याय शीर्षक “Geophysical Well Logging” का उत्तर देता है: “भूभौतिकीय वेल-लॉगिंग के सिद्धांत व तकनीकें, SP, प्रतिरोधकता, प्रेरण, गामा किरण, न्यूट्रॉन, घनत्व, ध्वनिक, ताप, डिपमीटर, कैलिपर, नाभिकीय चुंबकीय अनुनाद - अनुदैर्ध्य व अनुप्रस्थ विश्रांति, CPMG अनुक्रम, सरंध्रता लक्षण-निर्धारण, सीमेंट-बंध लॉगिंग, माइक्रो-लॉग, वेल-लॉगों से संरचनाओं का मात्रात्मक मूल्यांकन।” इसमें बोरहोल-परिवेश व अंतःप्रवेश-प्रोफ़ाइल, SP, गामा-किरण, कैलिपर, ताप व डिपमीटर लॉग, आर्ची नियम सहित प्रतिरोधकता, प्रेरण व माइक्रो-लॉग, घनत्व, न्यूट्रॉन व ध्वनिक सरंध्रता लॉग, NMR लॉगिंग, सीमेंट-बंध लॉगिंग, तथा मात्रात्मक मूल्यांकन की कार्य-विधि पढ़ाई गई हैं। संख्यात्मक प्रश्न हैं: आर्ची जल-संतृप्ति, घनत्व व ध्वनिक सरंध्रता, गामा-किरण सूचकांक से शेल आयतन, SP से Rw, NMR आबद्ध-द्रव अंकगणित तथा बल्क-आयतन जल।

1. सिद्धांत: बोरहोल-परिवेश व लॉगों का परिवार

वेल लॉग वायर-लाइन पर सोंड उतारकर गहराई के सापेक्ष किसी भौतिक गुण का सतत अभिलेख है। वेधन-मड का दाब रंध्रों के दाब से अधिक रखा जाता है (अतिसंतुलन), अतः पारगम्य संस्तर में मड-निस्यंद चट्टान में प्रवेश करता है और ठोस कण दीवार पर मड-केक बनाते हैं। फलस्वरूप तीन क्षेत्र बनते हैं: छिद्र से लगा प्रक्षालित क्षेत्र (flushed zone) (प्रतिरोधकता Rxo, जल-संतृप्ति Sxo), संक्रमण क्षेत्र, तथा अंतःप्रवेश-रहित क्षेत्र जिसकी वास्तविक प्रतिरोधकता Rt व संतृप्ति Sw है। मड (Rm), निस्यंद (Rmf), केक (Rmc) व संरचना-जल (Rw) की प्रतिरोधकताएँ ताप बढ़ने पर घटती हैं, और प्रत्येक उपकरण की अपनी अन्वेषण-गहराई होती है, अतः उथले व गहरे पाठ्यांकों की तुलना अंतःप्रवेश और इसलिए पारगम्यता प्रकट करती है।

लॉग व प्रत्येक का उपयोग
लॉगक्या मापता हैमुख्य उपयोग
SPप्राकृतिक विभव, mVपारगम्य संस्तर, Rw, शेल आयतन
गामा किरणप्राकृतिक रेडियोधर्मिता, APIशेल आयतन, सहसंबंधन
कैलिपरछिद्र-व्यासधुलाई, मड-केक, संशोधन
प्रतिरोधकता, प्रेरण, माइक्रोप्रतिरोधकताएँ Rt, Ri, Rxoसंतृप्ति, अंतःप्रवेश, पतले संस्तर
घनत्व, न्यूट्रॉन, ध्वनिकबल्क घनत्व, हाइड्रोजन सूचकांक, पारगमन कालसरंध्रता, शैल-प्रकार, गैस
ताप, डिपमीटरद्रव-ताप; संस्तर-नतिसीमेंट-शिखर, गैस-प्रवेश; संरचना
NMR, सीमेंट-बंधहाइड्रोजन विश्रांति; आवरण-आयामरंध्र-आकार, आबद्ध द्रव; सीमेंट-गुणवत्ता

2. SP, गामा किरण, कैलिपर, ताप व डिपमीटर लॉग

SP लॉग छिद्र के भीतर के इलेक्ट्रोड व पृष्ठ के इलेक्ट्रोड के बीच प्राकृतिक विभव अभिलेखित करता है। यह विद्युत-रासायनिक प्रभाव (शेल पर झिल्ली-विभव तथा द्रव-संधि विभव) व छोटे विद्युत-गतिक अंश से उत्पन्न होता है। मोटे स्वच्छ पारगम्य संस्तर में शेल आधार-रेखा से विक्षेप स्थैतिक SP तक पहुँचता है, SSP = −K log₁₀(Rmf/Rw), जहाँ K लगभग 65 + 0.24·T है (T °C में, mV प्रति दशक; 25 °C पर लगभग 71 mV)। ताज़े मड (Rmf > Rw) में रेत ऋणात्मक (बाईं ओर) विक्षेप दिखाती है; Rmf < Rw हो तो धनात्मक; Rmf = Rw हो तो कोई नहीं। SP पारगम्य संस्तर व उनकी सीमाएँ (नति-परिवर्तन बिंदुओं पर) खोजता है और Rw देता है, पर पारगम्यता का परिमाण नहीं, और उसे चालक मड चाहिए, अतः वह तेल-आधारित मड व आवरित (cased) छिद्रों में विफल होता है।

गामा-किरण लॉग पोटैशियम-40 व यूरेनियम तथा थोरियम श्रेणियों की प्राकृतिक रेडियोधर्मिता API इकाइयों में, प्रस्फुरण (scintillation) संसूचक से मापता है। शेल में मान ऊँचा, तथा स्वच्छ बलुआ पत्थर, चूना-पत्थर, एनहाइड्राइट व लवण में नीचा होता है। गामा-किरण सूचकांक I_GR = (GR − GR_min)/(GR_max − GR_min) है; रैखिक आकलन V_sh = I_GR ऊपरी सीमा है, और लैरियोनोव के अरैखिक संशोधन युवा (तृतीयक) चट्टानों हेतु V_sh = 0.083(23.7·I_GR − 1) तथा प्राचीन चट्टानों हेतु 0.33(22·I_GR − 1) हैं। आर्कोज़ी (K-फ़ेल्डस्पार) या अभ्रकी रेत, ग्लौकोनाइट व पोटाश शेली न होकर भी ऊँचा पाठ्यांक दे सकते हैं, अतः K, Th व U को अलग करने वाला वर्णक्रमीय लॉग अधिक सुरक्षित है। यह लॉग आवरित छिद्रों व किसी भी मड में चलता है।

कैलिपर लॉग कमानीदार भुजाओं से छिद्र-व्यास देता है: वह पारगम्य संस्तरों (मड-केक) के सामने बिट-माप से कम और शेल, लवण या कोयले की धुलाई के सामने अधिक पढ़ता है; वह अन्य लॉगों का संशोधन करता है और सीमेंट-आयतन देता है। ताप लॉग भूतापीय प्रवणता (सामान्यतः 25 से 30 °C प्रति km) व स्थानीय विसंगतियाँ दिखाता है: जहाँ गैस प्रवेश करती है वहाँ शीतलन, जलयोजित होते सीमेंट के शिखर पर उष्ण विसंगति, छिद्र में या छिद्र से बाहर प्रवाह। परिसंचरण के तुरंत बाद चला लॉग मड से विक्षुब्ध मान देता है। द्रव-प्रतिरोधकताएँ आर्प्स संबंध R₂ = R₁(T₁ + 21.5)/(T₂ + 21.5) (T °C में) से संरचना-ताप पर लाई जाती हैं। डिपमीटर में 90° के अंतर पर माइक्रो-प्रतिरोधकता बटनों वाले पैड व अभिविन्यास-पैकेज (नतिमापी व दिक्सूचक) होते हैं। d व्यास के ऊर्ध्वाधर छिद्र में, सम-तल सीमा विपरीत पैडों पर Δz गहराई-अंतर से दिखे तो tan(नति) = Δz/d होता है, और संस्तर उस पैड की ओर झुकता है जो उसे अधिक गहराई पर देखे।

⚠️ उच्च गामा-किरण सदा शेल नहीं, और SP पारगम्यता नहीं
रैखिक रूप V_sh = I_GR अधिकांश चट्टानों में शेल आयतन का अतिआकलन करता है, और रेडियोधर्मी पर स्वच्छ रेत (आर्कोज़, अभ्रक, ग्लौकोनाइट) में आकलन और ऊँचा हो जाता है क्योंकि लॉग बिना मृत्तिका के भी ऊँचा पढ़ता है। SP का आकार लवणता-अंतर व शेल-मात्रा पर निर्भर है, इस पर नहीं कि रेत कितनी पारगम्य है: सघन रेत व अत्यंत पारगम्य रेत एक-सा विक्षेप दिखा सकती हैं।

3. प्रतिरोधकता, प्रेरण व माइक्रो-लॉग; आर्ची नियम

शुष्क चट्टान विद्युत-रोधी है, अतः धारा रंध्रों के लवण-जल से चलती है। आर्ची नियम पूर्णतः जल-संतृप्त चट्टान को उसके जल से जोड़ता है: संरचना-गुणक F = Ro/Rw = a/φ^m, जहाँ φ सरंध्रता, m सीमेंटन घातांक (संगठित बलुआ पत्थर हेतु लगभग 2, ढीली रेत में कम), और a लगभग 1 का अचर है। हाइड्रोकार्बन उपस्थित होने पर प्रतिरोधकता-सूचकांक I = Rt/Ro = Sw^(−n) है, जहाँ संतृप्ति-घातांक n लगभग 2, अतः Sw = [a·Rw/(φ^m·Rt)]^(1/n)। हाइड्रोकार्बन चालन नहीं करते, इसलिए Sw घटने पर Rt बढ़ता है। आर्ची स्वच्छ संरचना मानता है: मृत्तिका भी चालक है, अतः शेली रेत में आर्ची Sw को अधिक देता है।

सामान्य (normal) व पार्श्विक (lateral) उपकरण इलेक्ट्रोडों के बीच धारा प्रवाहित कर विभव पढ़ते हैं और मड व संस्तर-मोटाई प्रभावों से सीमित हैं। लेटरोलॉग रक्षक इलेक्ट्रोडों से धारा को पतली क्षैतिज चादर में बाध्य करता है, अतः वह लवणीय मड व उच्च संरचना-प्रतिरोधकता में भली-भाँति चलता है, और उसे चालक मड चाहिए। प्रेरण (induction) उपकरण को मड से धारा-पथ नहीं चाहिए: लगभग 20 kHz की प्रेषी कुंडली संरचना में भँवर-धारा के लूप प्रेरित करती है, जिनका चुंबकीय क्षेत्र ग्राही में संरचना की चालकता (σ = 1/R) के अनुपाती संकेत प्रेरित करता है। वह ताज़े, तेल-आधारित मड व वायु-भरे छिद्रों हेतु उपयुक्त है, और निम्न से मध्यम प्रतिरोधकता पर सर्वोत्तम। द्वि-उपकरण उथले, मध्यम व गहरे पाठ्यांक (Rxo, Ri, Rt) देते हैं।

माइक्रो-लॉग दीवार से दबे पैड पर निकटस्थ इलेक्ट्रोड प्रयोग करते हैं। माइक्रो-नॉर्मल (2 इंच) माइक्रो-इन्वर्स (1 × 1 इंच) से कुछ अधिक गहरा अन्वेषण करता है। जहाँ निम्न प्रतिरोधकता का मड-केक दीवार पर चढ़ा हो, वहाँ माइक्रो-इन्वर्स उससे अधिक प्रभावित होकर कम पढ़ता है, अतः धनात्मक पृथक्करण (माइक्रो-नॉर्मल, माइक्रो-इन्वर्स से ऊपर) पारगम्य संस्तर का सूचक है, जबकि शेल में पृथक्करण कम या ऋणात्मक होता है। माइक्रो-लॉग Rxo, पतले संस्तरों का विवरण व छिद्र-दीवार की गुणवत्ता भी देते हैं।

⚠️ उपकरण को मड से मिलाएँ
लेटरोलॉग को चालक पथ चाहिए, अतः वे नमकीन मड हेतु उपयुक्त हैं; प्रेरण लॉग को नहीं चाहिए, अतः वे ताज़े या तेल-आधारित मड हेतु। जो प्रश्न मड का प्रकार बताता है वह वस्तुतः पूछ रहा है कि कौन-सा उपकरण चल भी सकता है।

4. घनत्व, न्यूट्रॉन व ध्वनिक सरंध्रता लॉग

घनत्व उपकरण गामा-किरण स्रोत (सीज़ियम-137) वाला पैड दीवार से दबाता है। गामा किरणें कॉम्पटन प्रकीर्णन में इलेक्ट्रॉन-घनत्व के अनुपात में ऊर्जा खोती हैं, जो बल्क घनत्व ρb के साथ चलता है; दो संसूचक मड-केक का संशोधन करते हैं। द्रव-भरी चट्टान हेतु φ_D = (ρma − ρb)/(ρma − ρf)। प्रारूपिक आधात्री घनत्व क्वार्ट्ज़ बलुआ पत्थर हेतु लगभग 2.65 g/cm³, चूना-पत्थर हेतु 2.71 व डोलोमाइट हेतु 2.87 हैं, और ताज़े निस्यंद हेतु ρf लगभग 1.0। गैस का घनत्व कम है, अतः ρb अत्यल्प व φ_D अत्यधिक आता है। प्रकाश-विद्युत गुणक Pe शैल-प्रकार अलग करता है (क्वार्ट्ज़ लगभग 1.8, कैल्साइट 5.1, डोलोमाइट 3.1)।

न्यूट्रॉन उपकरण अमेरिशियम–बेरिलियम स्रोत से तीव्र न्यूट्रॉन छोड़ता है। हाइड्रोजन, जिसका द्रव्यमान न्यूट्रॉन के लगभग बराबर है, उन्हें सर्वाधिक मंद करता है, अतः गणन-दर हाइड्रोजन सूचकांक मापती है, जो स्वच्छ चट्टान में द्रव-भरी सरंध्रता है; लॉग चूना-पत्थर सरंध्रता इकाइयों में अंकित होता है। गैस का हाइड्रोजन सूचकांक कम है, अतः न्यूट्रॉन सरंध्रता अत्यल्प पढ़ती है, जबकि शेल का आबद्ध जल उसे अधिक पढ़वाता है। संगत मापनियों पर आलेखित करने पर स्वच्छ गैस-रेत क्रॉसओवर दिखाती है, जिसमें न्यूट्रॉन सरंध्रता घनत्व सरंध्रता से नीचे होती है, जबकि शेल में न्यूट्रॉन घनत्व से ऊपर रहता है। न्यूट्रॉन व घनत्व साथ मिलकर सरंध्रता व शैल-प्रकार तय करते हैं।

ध्वनिक उपकरण ग्राही-अंतराल पर संपीडन-तरंग का पारगमन काल Δt (μs/ft) मापता है; दो प्रेषी व ग्राही (बोरहोल-संशोधन) छिद्र-माप के प्रभाव को समाप्त करते हैं। वायली समय-औसत समीकरण, Δt = φ·Δt_f + (1 − φ)·Δt_ma, φ_S = (Δt − Δt_ma)/(Δt_f − Δt_ma) देता है, जहाँ Δt_ma बलुआ पत्थर हेतु लगभग 55 μs/ft, चूना-पत्थर हेतु 47 व डोलोमाइट हेतु 43 और जल हेतु Δt_f लगभग 189 है। यह संगठित, स्वच्छ, द्रव-भरी चट्टान हेतु मान्य है; ढीली रेत में उत्तर को संहनन-गुणक से भाग दिया जाता है, और गैस Δt बढ़ाती है। प्रथम आगमन पृथक कोटरों (vugs) व भ्रंशों के चारों ओर आधात्री के तीव्र पथ से चलता है, अतः ध्वनिक सरंध्रता प्राथमिक सरंध्रता है, और न्यूट्रॉन–घनत्व सरंध्रता में से φ_S घटाने पर द्वितीयक सरंध्रता का आकलन मिलता है। चक्र-लंघन (cycle skipping) नकली उच्च Δt स्पाइक देता है। ध्वनिक लॉग कूपों को भूकंपी से जोड़ता है और प्रत्यास्थ स्थिरांक देता है।

5. नाभिकीय चुंबकीय अनुनाद लॉगिंग: T1, T2, CPMG व सरंध्रता

रंध्र-द्रवों के हाइड्रोजन नाभिक छोटे चुंबकों की भाँति व्यवहार करते हैं। स्थिर क्षेत्र B₀ में वे संरेखित होकर लार्मर आवृत्ति f = (γ/2π)B₀ पर प्रीसेशन करते हैं, जो हाइड्रोजन हेतु 42.58 MHz प्रति टेस्ला है। उपकरण प्रतीक्षा-काल में प्रोटॉनों का ध्रुवण करता है, और चुंबकन अनुदैर्ध्य (प्रचक्रण–जालक) विश्रांति-काल T₁ से बढ़ता है: M_z = M₀(1 − e^(−t/T₁)), 3T₁ के बाद लगभग 95%। फिर 90° रेडियो-आवृत्ति स्पंद चुंबकन को अनुप्रस्थ तल में गिराता है, जहाँ वह अनुप्रस्थ (प्रचक्रण–प्रचक्रण) विश्रांति-काल T₂ से क्षीण होता है; T₂ ≤ T₁। केवल द्रव का हाइड्रोजन दिखता है, अतः संकेत चट्टान की आधात्री से स्वतंत्र है।

स्थिर क्षेत्र की असमांगता प्रचक्रणों को केवल T₂ की तुलना में तेज़ी से विकला (dephase) करती है। CPMG अनुक्रम (कार, पर्सेल, मेईबूम, गिल) 90° स्पंद के बाद प्रतिध्वनि-अंतराल TE पर 180° स्पंदों की शृंखला लगाता है; प्रत्येक स्पंद प्रचक्रणों को पुनः केंद्रित कर स्पिन-प्रतिध्वनि बनाता है, और प्रतिध्वनि-आयाम e^(−t/T₂) से घटते हैं। यह क्षय चरघातांकियों का योग है, और प्रतिलोमन उसे T₂ वितरण में बदलता है, जिसका कुल क्षेत्रफल NMR सरंध्रता है और जिसके बिन प्रत्येक रंध्र-आकार की सरंध्रता हैं। विश्रांति मुख्यतः रंध्र-पृष्ठ पर होती है, 1/T₂ ≈ 1/T₂,bulk + ρ₂(S/V), अतः छोटे रंध्रों (मृत्तिका-आबद्ध व केशिका-आबद्ध जल) का T₂ छोटा और बड़े रंध्रों का लंबा होता है।

T₂ कट-ऑफ वितरण को बाँटता है: उससे नीचे की सरंध्रता आबद्ध द्रव, BVI (अपरिवर्तनीय बल्क आयतन), और ऊपर मुक्त द्रव, FFI, है, अतः MPHI = BVI + FFI। प्रचलित डिफ़ॉल्ट बलुआ पत्थर हेतु लगभग 33 ms व कार्बोनेट हेतु लगभग 92 ms हैं, जिन्हें आदर्शतः कोर पर अंशशोधित करना चाहिए। तब Swirr = BVI/MPHI। मृत्तिका-आबद्ध जल (T₂ लगभग 3 ms से कम) कुल NMR सरंध्रता में आता है पर अनेक लॉगों द्वारा बताई जाने वाली प्रभावी सरंध्रता में नहीं गिना जाता, अतः स्पष्ट करें कि MPHI से कौन-सी सरंध्रता अभिप्रेत है। पारगम्यता का आकलन टिमूर–कोट्स (k ∝ φ⁴(FFI/BVI)²) व SDR (k ∝ φ⁴·T₂,lm²) मॉडलों से होता है, और हाइड्रोकार्बनों को जल से उनके भिन्न T₁, T₂ व विसरण-विषमताओं से पहचाना जाता है।

🎯 NMR अन्य सरंध्रता लॉगों से भिन्न क्यों है
घनत्व, न्यूट्रॉन व ध्वनिक सरंध्रताओं को आधात्री मान (ρma, Δt_ma या चूना-पत्थर मापनी) चाहिए, और गलत शैल-प्रकार उन्हें विचलित करता है। NMR केवल द्रवों के हाइड्रोजन पर प्रतिक्रिया करता है और उसे आधात्री नहीं चाहिए, और विशिष्ट रूप से उसका T₂ वर्णक्रम यह भी बताता है कि सरंध्रता छोटे व बड़े रंध्रों में कैसे बँटी है।

6. सीमेंट-बंध लॉगिंग

आवरण (casing) की सीमेंटिंग के बाद सीमेंट को प्रत्येक क्षेत्र को अगले से सील करना चाहिए (क्षेत्रीय पृथक्करण)। सीमेंट-बंध लॉग (CBL) आवरित छिद्र में चलने वाला ध्वनिक उपकरण है: लगभग 20 kHz का प्रेषी व 3 ft तथा 5 ft दूर दो ग्राही। CBL आयाम 3 ft ग्राही पर प्रथम आवरण-आगमन की ऊँचाई है (mV में)। जहाँ आवरण मुक्त है, वह झंकृत होता है और आयाम ऊँचा रहता है; जहाँ सीमेंट आवरण से बँधा है, ऊर्जा सीमेंट में रिस जाती है और आयाम नीचा रहता है। क्षीणन को dB में 20·log₁₀(A_free/A) लिखा जा सकता है, जिसे dB/ft हेतु 3 ft अंतराल से भाग दिया जाता है, और बंध-सूचकांक क्षेत्र का क्षीणन भागे पूर्णतः बँधे खंड का क्षीणन है।

VDL (परिवर्ती-घनत्व लॉग) 5 ft ग्राही पर पूर्ण तरंगरूप को हल्की व गहरी पट्टियों के रूप में दिखाता है। मुक्त पाइप प्रबल, सीधे, समांतर आवरण-आगमन व दुर्बल संरचना-संकेत देता है। आवरण व संरचना दोनों से अच्छा बंध दुर्बल आवरण-आगमन व प्रबल, लहरदार संरचना-आगमन देता है। जाल: पतला सूक्ष्म-वलय (microannulus) (दाब या ताप-परिवर्तन से आवरण व सीमेंट के बीच दरार) अच्छे सीमेंट के बावजूद आयाम बढ़ाता है, और दाब में लॉग पुनः चलाने से वह प्रायः घट जाता है; केंद्र से हटा उपकरण आयाम घटाता है; अत्यंत तीव्र संरचनाएँ आवरण-संकेत से पहले पहुँचती हैं; और हल्का या फेनिल सीमेंट कम क्षीण करता है। पराश्रव्य स्पंद-प्रतिध्वनि उपकरण आवरण के चारों ओर सीमेंट का मानचित्र बनाते हैं और वे वाहिकाएँ दिखाते हैं जिन्हें औसत CBL चूक जाता है।

⚠️ उच्च CBL आयाम का अर्थ सदा सीमेंट-अभाव नहीं
आयाम को VDL व पारगमन काल के साथ पढ़ें। सूक्ष्म-वलय सुदृढ़ सीमेंट-आवरण के पीछे भी आयाम बढ़ा सकता है, केंद्र से हटा उपकरण उसे झूठे ढंग से घटा सकता है, और तीव्र संरचना आवरण-संकेत से पहले पहुँच सकती है, अतः कार्य को विफल मानने से पहले लॉग केंद्रित करके चलाया जाता है और सूक्ष्म-वलय की आशंका हो तो दाब में दोहराया जाता है।

7. लॉगों से संरचनाओं का मात्रात्मक मूल्यांकन

मानक कार्य-विधि यह है:
(1) पारगम्य संस्तर खोजें (SP, गामा किरण, कैलिपर, माइक्रो-लॉग);
(2) गामा किरण से V_sh आँकें;
(3) घनत्व, ध्वनिक या न्यूट्रॉन–घनत्व से सरंध्रता लें, शेल व गैस हेतु संशोधित करके;
(4) SP से (Rw = Rmf·10^(SSP/K)), पास के जल-क्षेत्र से (Rw = Ro·φ^m/a) या सूची से Rw लें;
(5) गहरे वक्र से Rt पढ़ें;
(6) आर्ची से Sw निकालें;
(7) हाइड्रोकार्बन संतृप्ति Sh = 1 − Sw, बल्क-आयतन जल BVW = φ·Sw, और प्रति इकाई बल्क आयतन हाइड्रोकार्बन रंध्र-आयतन φ(1 − Sw) बताएँ।

हल उदाहरण। एक रेत में ρb = 2.40 g/cm³ पढ़ा जाता है, ρma = 2.65 व ρf = 1.00 के साथ, अतः φ = 0.25/1.65 = 0.152। Rt = 30 Ω·m, Rw = 0.04 Ω·m तथा a = 1, m = n = 2 के साथ: Sw = [0.04/(0.152² × 30)]^(1/2) = 0.24, अतः Sh = 0.76, BVW = 0.152 × 0.24 ≈ 0.0365 और हाइड्रोकार्बन रंध्र-आयतन 0.152 × 0.76 ≈ 0.1155 है। m = n = 2 हेतु BVW घटकर (a·Rw/Rt)^(1/2) रह जाता है, जो सरंध्रता से स्वतंत्र है, इसीलिए किसी अंतराल में अचर BVW अपरिवर्तनीय जल-संतृप्ति पर स्थित क्षेत्र का संकेत है।

Sxo (उसी आर्ची रूप से Rxo व Rmf द्वारा) की Sw से तुलना चलायमान हाइड्रोकार्बन, Sxo − Sw, देती है, क्योंकि बड़ा अंतर बताता है कि निस्यंद ने तेल को बाहर धकेल दिया है। शेली-रेत मॉडल (सिमांडो, इंडोनेशियन, द्वि-जल) आर्ची की तुलना में Sw घटाते हैं। शुद्ध उत्पादक मोटाई (net pay) वह मोटाई है जो सरंध्रता, शेल आयतन व Sw के कट-ऑफ पार करे। आवरित-छिद्र लॉगों (सीमेंट-बंध, ताप) के साथ मूल्यांकन पूर्णता-अखंडता भी जाँचता है।

मुख्य बिंदु

  • मड-निस्यंद पारगम्य संस्तरों में प्रवेश कर मड-केक छोड़ता है; प्रक्षालित क्षेत्र में Rxo व अंतःप्रवेश-रहित क्षेत्र में Rt होता है। SP से SSP = −K log(Rmf/Rw) मिलता है (Rmf > Rw हो तो रेत के सामने ऋणात्मक), वह पारगम्य संस्तर खोजता है और Rw देता है, पर उसे चालक मड चाहिए और वह पारगम्यता नहीं देता।
  • गामा किरण से I_GR व V_sh मिलता है (रैखिक ऊपरी सीमा है; लैरियोनोव संशोधित करता है), पर K-फ़ेल्डस्पार, अभ्रक व ग्लौकोनाइट भ्रमित करते हैं। कैलिपर, ताप व डिपमीटर (tan नति = Δz/d) छिद्र-माप, ताप-विसंगतियाँ व संस्तर-नति देते हैं।
  • आर्ची: F = a/φ^m व Sw = [aRw/(φ^m Rt)]^(1/n)। लेटरोलॉग को चालक मड चाहिए; प्रेरण ताज़े या तेल-आधारित मड हेतु उपयुक्त है; धनात्मक माइक्रो-लॉग पृथक्करण पारगम्य संस्तर दर्शाता है।
  • φ_D = (ρma − ρb)/(ρma − ρf); वायली φ_S = (Δt − Δt_ma)/(Δt_f − Δt_ma)। गैस घनत्व सरंध्रता को अधिक व न्यूट्रॉन सरंध्रता को कम करती है (क्रॉसओवर); ध्वनिक केवल प्राथमिक सरंध्रता देखता है।
  • NMR: T₁ चुंबकन बनाता है, T₂ CPMG प्रतिध्वनि-शृंखला में क्षीण होता है, छोटा T₂ यानी छोटे रंध्र; T₂ कट-ऑफ (बलुआ पत्थर में लगभग 33 ms) BVI को FFI से अलग करता है, और NMR को आधात्री मान नहीं चाहिए।
  • CBL आयाम बँधे सीमेंट में कम और मुक्त पाइप में अधिक होता है, VDL (आवरण बनाम संरचना आगमन) के साथ पढ़ा जाता है; सूक्ष्म-वलय उत्कृष्ट जाल है। मूल्यांकन φ, Rw, Sw, फिर Sh = 1 − Sw, BVW = φ·Sw तथा चलायमान हाइड्रोकार्बन हेतु Sxo − Sw चलाता है।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. एक पारगम्य जल-वाही रेत को जल-आधारित मड से वेधित किया जाता है जिसका दाब रंध्र-दाब से ऊपर रखा गया है। मड-केक के ठीक आगे कौन-सा क्षेत्र है जिसके अधिकांश मूल रंध्र-द्रव को मड-निस्यंद ने विस्थापित कर दिया है?

    1. अंतःप्रवेश-रहित क्षेत्र, जिसकी वास्तविक प्रतिरोधकता Rt है
    2. प्रक्षालित क्षेत्र, जिसकी प्रतिरोधकता Rxo है
    3. संक्रमण क्षेत्र, जिसके रंध्रों में केवल मूल संरचना-जल रहता है
    4. स्वयं मड-केक, जिसकी प्रतिरोधकता Rmc है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — प्रक्षालित क्षेत्र, जिसकी प्रतिरोधकता Rxo है

    छिद्र से लगा जो क्षेत्र निस्यंद से बहुत हद तक धुल गया है वह प्रक्षालित क्षेत्र है, जिसकी प्रतिरोधकता Rxo व जल-संतृप्ति Sxo है। अंतःप्रवेश-रहित क्षेत्र अंतःप्रवेश-अग्र के आगे है और अपने मूल द्रव (Rt, Sw) रखता है। संक्रमण क्षेत्र केवल आंशिक अंतःप्रवेशित है, अतः उसके रंध्रों में मिश्रण होता है, केवल संरचना-जल नहीं, और मड-केक दीवार पर जमे ठोस हैं, चट्टान का कोई क्षेत्र नहीं।
  2. एक मोटी स्वच्छ पारगम्य रेत में 0.08 Ω·m प्रतिरोधकता का संरचना-जल है और उसे उस मड से वेधित किया गया है जिसके निस्यंद की प्रतिरोधकता 0.8 Ω·m है। शेल आधार-रेखा के सापेक्ष रेत के सामने SP है:

    1. लगभग K mV का ऋणात्मक (बाईं ओर) विक्षेप, क्योंकि Rmf, Rw से दस गुना अधिक है
    2. लगभग K mV का धनात्मक (दाईं ओर) विक्षेप, क्योंकि लवणीय संरचना-जल निस्यंद से बेहतर चालन करता है
    3. कोई विक्षेप नहीं, क्योंकि SP पारगम्यता पर प्रतिक्रिया करता है और लवणता-अंतर से अप्रभावित रहता है
    4. ऐसा विक्षेप जिसका चिह्न रेत की पारगम्यता पर निर्भर है और जिसका आकार मड-दाब से तय होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — लगभग K mV का ऋणात्मक (बाईं ओर) विक्षेप, क्योंकि Rmf, Rw से दस गुना अधिक है

    SSP = −K log₁₀(Rmf/Rw) = −K log₁₀(0.8/0.08) = −K होने से विक्षेप ऋणात्मक व लगभग K mV है (K, 25 °C के निकट लगभग 70 mV प्रति दशक है)। चिह्न इससे तय होता है कि Rmf व Rw में कौन बड़ा है, पारगम्यता या मड-दाब से नहीं, और धनात्मक विक्षेप के लिए Rmf < Rw चाहिए, जो दिए गए प्रकरण का उलटा है।
  3. गामा-किरण लॉग के बारे में कौन-सा कथन सही है?

    1. स्वच्छ चूना-पत्थर शेल से ऊँचा पढ़ता है क्योंकि कार्बोनेट चट्टान अपनी जालक में यूरेनियम व थोरियम को सांद्रित करती है
    2. लॉग आवरित छिद्रों में नहीं चल सकता, क्योंकि संरचना से आने वाली गामा किरणें इस्पात-आवरण को बिल्कुल भेद नहीं पातीं
    3. तेल-वाही रेत उसी मृत्तिका-मात्रा की जल-वाही रेत से नीचा पढ़ती है, क्योंकि तेल में पोटैशियम-40 या अन्य रेडियोधर्मी परमाणु नहीं होते
    4. K-फ़ेल्डस्पार से समृद्ध आर्कोज़ी रेत शेली न होकर भी ऊँचा पढ़ सकती है, अतः गामा-किरण शेल आयतन उसकी मृत्तिका का अतिआकलन करता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — K-फ़ेल्डस्पार से समृद्ध आर्कोज़ी रेत शेली न होकर भी ऊँचा पढ़ सकती है, अतः गामा-किरण शेल आयतन उसकी मृत्तिका का अतिआकलन करता है

    K-फ़ेल्डस्पार (तथा अभ्रक या ग्लौकोनाइट) का पोटैशियम-40 स्वच्छ किंतु रेडियोधर्मी रेत को शेल-सा पढ़वाता है, अतः वहाँ I_GR शेल आयतन को बढ़ाकर बताता है; K, Th व U को अलग करने वाला वर्णक्रमीय लॉग कारण उजागर करता है। कार्बोनेट प्रायः गामा किरण में नीचे होते हैं, लॉग आवरित छिद्रों में चलता है क्योंकि उच्च-ऊर्जा गामा किरणें इस्पात से केवल कुछ क्षीण होकर निकलती हैं, और रंध्रों का द्रव संरचना की रेडियोधर्मिता को उल्लेखनीय रूप से नहीं बदलता।
  4. एक कूप को अचालक तेल-आधारित मड से वेधित किया गया है। गहरी संरचना-प्रतिरोधकता मापने हेतु कौन-सा उपकरण उपयुक्त है, और क्यों?

    1. लेटरोलॉग, क्योंकि उसकी फ़ोकसित धाराएँ प्रतिरोधी मड से चट्टान में सबसे सरलता से जाती हैं
    2. सामान्य (normal) उपकरण, क्योंकि उसके धारा-इलेक्ट्रोडों को छिद्र के चालक द्रव से संपर्क नहीं चाहिए
    3. प्रेरण उपकरण, क्योंकि उसकी कुंडलियाँ चुंबकीय रूप से भँवर-धाराएँ प्रेरित करती हैं और मड से चालक पथ नहीं चाहिए
    4. SP उपकरण, क्योंकि अपने दो इलेक्ट्रोडों के बीच जो विभव वह अभिलेखित करता है वह संरचना-प्रतिरोधकता के सीधे अनुपाती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — प्रेरण उपकरण, क्योंकि उसकी कुंडलियाँ चुंबकीय रूप से भँवर-धाराएँ प्रेरित करती हैं और मड से चालक पथ नहीं चाहिए

    इलेक्ट्रोड-उपकरणों (सामान्य, पार्श्विक, लेटरोलॉग) को मड से धारा प्रवाहित करनी पड़ती है, जिसे अचालक तेल-आधारित मड रोक देता है। प्रेरण उपकरण की प्रेषी कुंडली संरचना में भँवर-धारा के लूप प्रेरित करती है और उसका ग्राही उनका चुंबकीय क्षेत्र संसूचित करता है, जो चालकता के अनुपाती है, अतः चालक पथ की आवश्यकता नहीं रहती। SP प्राकृतिक विभव है जिसे भी चालक मड चाहिए और जो प्रतिरोधकता नहीं देता।
  5. एक संस्तर के सामने माइक्रो-नॉर्मल वक्र माइक्रो-इन्वर्स वक्र से लगातार ऊँचा पढ़ता है (धनात्मक पृथक्करण)। यह क्या दर्शाता है?

    1. शेल संस्तर, क्योंकि मृत्तिका मड-केक से अधिक चालक होती है
    2. मड-केक वाला पारगम्य संस्तर, जिसमें माइक्रो-इन्वर्स निम्न-प्रतिरोधकता वाले केक से अधिक प्रभावित है
    3. हाइड्रोकार्बन-वाही क्षेत्र, क्योंकि तेल उथले माइक्रो-इन्वर्स वक्र द्वारा देखी गई प्रतिरोधकता बढ़ाता है
    4. छिद्र की धुलाई, क्योंकि बड़ा व्यास माइक्रो-नॉर्मल को मड-प्रतिरोधकता पढ़वाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — मड-केक वाला पारगम्य संस्तर, जिसमें माइक्रो-इन्वर्स निम्न-प्रतिरोधकता वाले केक से अधिक प्रभावित है

    माइक्रो-इन्वर्स (1 × 1 इंच) उथला है, अतः निम्न प्रतिरोधकता का पतला मड-केक उसके पाठ्यांक को माइक्रो-नॉर्मल (2 इंच) की तुलना में अधिक नीचे खींचता है, जो अंतःप्रवेशित चट्टान में कुछ अधिक गहरा देखता है। मड-केक केवल पारगम्य संस्तरों के सामने बनता है, अतः धनात्मक पृथक्करण पारगम्यता का सूचक है; शेल में पृथक्करण कम या ऋणात्मक रहता है। इस पृथक्करण को हाइड्रोकार्बन-मात्रा नहीं चलाती, और धुलाई दोनों वक्रों को मड-मान की ओर खींचती।
  6. एक स्वच्छ बलुआ पत्थर में ρma = 2.65 g/cm³ व ρf = 1.0 g/cm³ से गणित घनत्व सरंध्रता 24% है, और बलुआ पत्थर हेतु सही मापनी वाली न्यूट्रॉन सरंध्रता 11% है। कौन-सा स्पष्टीकरण सर्वाधिक संभावित है?

    1. गैस रंध्रों के एक भाग को भरती है: उसका कम घनत्व घनत्व सरंध्रता को बढ़ाता है और उसका कम हाइड्रोजन सूचकांक न्यूट्रॉन सरंध्रता को घटाता है
    2. मृत्तिका-आबद्ध जल वाली पतली शेल-परतें, जो न्यूट्रॉन उपकरण द्वारा देखे गए हाइड्रोजन सूचकांक को घटाती हैं और इस प्रकार उसका पाठ्यांक नीचे लाती हैं
    3. पाइराइट व अन्य भारी खनिज बल्क घनत्व बढ़ाते हैं, जिससे घनत्व सरंध्रता वास्तविक सरंध्रता से काफ़ी ऊपर पढ़ती है
    4. रंध्र ताज़े मड-निस्यंद से पूर्णतः धुल चुके हैं, अतः दोनों उपकरण वास्तविक सरंध्रता पढ़ते हैं और केवल यादृच्छिक रव से भिन्न होते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — गैस रंध्रों के एक भाग को भरती है: उसका कम घनत्व घनत्व सरंध्रता को बढ़ाता है और उसका कम हाइड्रोजन सूचकांक न्यूट्रॉन सरंध्रता को घटाता है

    यहाँ घनत्व सरंध्रता न्यूट्रॉन सरंध्रता से बड़े अंतर से अधिक है, जो गैस का क्रॉसओवर-हस्ताक्षर है: गैस ρb घटाती है, अतः द्रव ρf से गणित φ_D अत्यधिक आता है, और उसका कम हाइड्रोजन सूचकांक φ_N को अत्यल्प बनाता है। मृत्तिका-आबद्ध जल में हाइड्रोजन होता है और वह न्यूट्रॉन पाठ्यांक बढ़ाता है, घटाता नहीं, अतः शेल-परतें न्यूट्रॉन को घनत्व से ऊपर धकेलती हैं, नीचे नहीं। भारी खनिज ρb बढ़ाकर φ_D घटाते हैं, यह भी उलटी दिशा है, और पूर्ण प्रक्षालन दोनों सरंध्रताओं को समान कर देता।
  7. बड़े पृथक कोटरों (vugs) वाले कार्बोनेट में घनत्व–न्यूट्रॉन सरंध्रता 18% है जबकि सही आधात्री व द्रव पारगमन काल के साथ वायली ध्वनिक सरंध्रता 11% है। अंतर को कौन-सा कथन सर्वोत्तम समझाता है?

    1. प्रत्येक कोटर प्रथम आगमन तरंग को मंद करता है, अतः ध्वनिक मान वास्तविक कुल सरंध्रता है और घनत्व–न्यूट्रॉन मान अतिआकलन है
    2. वायली का समीकरण कार्बोनेटों में सरंध्रता का सदा अल्पआकलन करता है क्योंकि चूना-पत्थर हेतु मान लिया गया आधात्री पारगमन काल बहुत ही ऊँचा रखा गया है
    3. प्रथम आगमन पृथक कोटरों के चारों ओर आधात्री के तीव्र पथ से जाता है, अतः ध्वनिक सरंध्रता मुख्यतः प्राथमिक है; अंतर कोटरीय सरंध्रता का आकलन देता है
    4. पृथक कोटरों में कोई द्रव नहीं होता, अतः केवल घनत्व व न्यूट्रॉन उपकरण उन्हें संसूचित कर सकते हैं, जबकि ध्वनिक उपकरण उन पर बिल्कुल प्रतिक्रिया नहीं कर सकता
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — प्रथम आगमन पृथक कोटरों के चारों ओर आधात्री के तीव्र पथ से जाता है, अतः ध्वनिक सरंध्रता मुख्यतः प्राथमिक है; अंतर कोटरीय सरंध्रता का आकलन देता है

    संपीडन प्रथम आगमन सबसे तीव्र मार्ग लेता है, जो पृथक कोटरों वाली चट्टान में उनके चारों ओर की संयोजित आधात्री है, अतः ध्वनिक सरंध्रता प्राथमिक (अंतर-कणीय) सरंध्रता दर्ज करती है। घनत्व व न्यूट्रॉन कुल रंध्र-आयतन पर प्रतिक्रिया करते हैं, अतः (φ_DN − φ_S) = 18 − 11 = 7 सरंध्रता-इकाइयाँ द्वितीयक कोटरीय सरंध्रता का आकलन देती हैं। कोटर अन्य रंध्रों की भाँति द्रव रखते हैं, और प्रश्न में आधात्री व द्रव पारगमन काल सही बताए गए हैं, अतः चूना-पत्थर का गलत आधात्री मान इस अंतर का कारण नहीं हो सकता।
  8. CPMG अनुक्रम में आरंभिक 90° स्पंद के बाद लगने वाली 180° स्पंदों की शृंखला का क्या प्रयोजन है?

    1. प्रतिध्वनियों के बीच प्रोटॉनों का पुनर्ध्रुवण करना, ताकि अनुदैर्ध्य विश्रांति-काल T₁ सीधे मापा जाए
    2. लार्मर आवृत्ति बढ़ाना, ताकि अधिक हाइड्रोजन नाभिक उपकरण के संवेदी आयतन में आ जाएँ
    3. चट्टान-आधात्री के हाइड्रोजन को संतृप्त करना, ताकि मापे गए संकेत में केवल रंध्र-द्रव का हाइड्रोजन योगदान दे
    4. स्थिर क्षेत्र की असमांगता से विकला हुए प्रचक्रणों को पुनः केंद्रित कर स्पिन-प्रतिध्वनियाँ बनाना, ताकि प्रतिध्वनि-आयाम T₂ से घटें
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    उत्तर: D — स्थिर क्षेत्र की असमांगता से विकला हुए प्रचक्रणों को पुनः केंद्रित कर स्पिन-प्रतिध्वनियाँ बनाना, ताकि प्रतिध्वनि-आयाम T₂ से घटें

    90° स्पंद के बाद अनुप्रस्थ चुंबकन तेज़ी से घटता है क्योंकि थोड़े भिन्न क्षेत्रों के प्रचक्रण विकला हो जाते हैं। प्रत्येक 180° स्पंद उस विकलन को उलट देता है और स्पिन-प्रतिध्वनि बनाता है, अतः प्रतिध्वनि-आयामों की शृंखला केवल वास्तविक अनुप्रस्थ विश्रांति, e^(−t/T₂), से घटती है। स्पंद T₁ नहीं मापते, जिसके लिए पुनर्प्राप्ति या पृथक ध्रुवण-अनुक्रम चाहिए, वे लार्मर आवृत्ति नहीं बदलते (जो B₀ से तय है), और आधात्री में संतृप्त करने योग्य गतिशील हाइड्रोजन नहीं है।
  9. CBL व VDL प्रेक्षणों का कौन-सा संयोजन आवरण व संरचना दोनों से अच्छे बँधे सीमेंट को दर्शाता है?

    1. उच्च CBL आयाम, प्रबल सीधे समांतर आवरण-आगमन व दुर्बल संरचना-आगमन के साथ
    2. मध्यम CBL आयाम, प्रबल आवरण-आगमन व संरचना-आगमन के अभाव के साथ
    3. निम्न CBL आयाम, दुर्बल आवरण-आगमन व प्रबल लहरदार संरचना-आगमन के साथ
    4. उच्च CBL आयाम, दुर्बल आवरण-आगमन व दुर्बल संरचना-आगमन के साथ
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    उत्तर: C — निम्न CBL आयाम, दुर्बल आवरण-आगमन व प्रबल लहरदार संरचना-आगमन के साथ

    आवरण से अच्छा बंध पाइप की ऊर्जा सोख लेता है, जिससे CBL आयाम कम व आवरण-आगमन दुर्बल रहते हैं, और संरचना से अच्छा बंध ऊर्जा को आगे पहुँचाता है, अतः VDL पर संरचना-आगमन प्रबल व लहरदार होते हैं। सीधी आवरण-पट्टियों के साथ उच्च आयाम मुक्त पाइप है। प्रबल आवरण-आगमन व संरचना-संकेत-अभाव के साथ मध्यम आयाम का अर्थ है कि सीमेंट संरचना से नहीं बँधा, और उच्च आयाम दुर्बल आवरण-आगमन के साथ नहीं हो सकता।
  10. SP, कैलिपर, ताप व डिपमीटर लॉगों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. SP तेल-आधारित मड में अभिलेखित नहीं हो सकता, क्योंकि इलेक्ट्रोड को संरचना से जोड़ने वाला कोई चालक पथ नहीं होता
    2. मड-केक वाले पारगम्य संस्तर के सामने कैलिपर बिट-माप से छोटा व्यास पढ़ता है
    3. परिसंचरण रुकने के एक घंटे बाद चलाया ताप लॉग अविक्षुब्ध भूतापीय प्रवणता दर्ज करता है
    4. ऊर्ध्वाधर छिद्र में डिपमीटर पर नति-दिगंश उस पैड की ओर होता है जो संस्तर-सीमा को अधिक गहराई पर दर्ज करता है
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    उत्तर: A — SP तेल-आधारित मड में अभिलेखित नहीं हो सकता, क्योंकि इलेक्ट्रोड को संरचना से जोड़ने वाला कोई चालक पथ नहीं होता; B — मड-केक वाले पारगम्य संस्तर के सामने कैलिपर बिट-माप से छोटा व्यास पढ़ता है; D — ऊर्ध्वाधर छिद्र में डिपमीटर पर नति-दिगंश उस पैड की ओर होता है जो संस्तर-सीमा को अधिक गहराई पर दर्ज करता है

    चालक मड के बिना SP इलेक्ट्रोड का चट्टान से विद्युत संपर्क नहीं होता, अतः लॉग विफल होता है। मड-केक पारगम्य संस्तरों के सामने जमता है, और वहाँ कैलिपर बिट-माप से कम पढ़ता है। अधोनति की ओर का पैड नत सीमा को अधिक गहराई पर मिलता है, अतः नति अधिक गहरे पढ़ने वाले पैड की ओर होती है। परिसंचरण के तुरंत बाद चला लॉग अब भी मड का शीतलन दिखाता है, अविक्षुब्ध प्रवणता नहीं, जिसके लिए लंबी बंदी चाहिए।
  11. NMR लॉगिंग के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. छोटे रंध्रों के जल का T₂ बड़े रंध्रों के जल से छोटा होता है, क्योंकि छोटे रंध्रों में पृष्ठ-विश्रांति प्रभावी है
    2. NMR सरंध्रता को आधात्री घनत्व या आधात्री पारगमन काल नहीं चाहिए, क्योंकि केवल रंध्र-द्रवों का हाइड्रोजन योगदान देता है
    3. चट्टान के द्रवों हेतु T₂ सदा T₁ से लंबा या उसके बराबर होता है
    4. T₂ वितरण का कट-ऑफ से ऊपर पड़ने वाला भाग आबद्ध द्रव, BVI, है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — छोटे रंध्रों के जल का T₂ बड़े रंध्रों के जल से छोटा होता है, क्योंकि छोटे रंध्रों में पृष्ठ-विश्रांति प्रभावी है; B — NMR सरंध्रता को आधात्री घनत्व या आधात्री पारगमन काल नहीं चाहिए, क्योंकि केवल रंध्र-द्रवों का हाइड्रोजन योगदान देता है

    छोटे रंध्रों में द्रव कण-पृष्ठ के निकट रहता है जहाँ विश्रांति तेज़ है, अतः T₂ छोटा होता है; बड़े रंध्र लंबा T₂ देते हैं। केवल द्रव का हाइड्रोजन दिखता है, अतः आधात्री-मान नहीं चाहिए। वस्तुतः T₂ कभी T₁ से लंबा नहीं होता, और कट-ऑफ से ऊपर का वितरण-भाग मुक्त द्रव FFI है, जबकि उससे नीचे का भाग आबद्ध द्रव।
  12. सीमेंट-बंध लॉगिंग के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. CBL आयाम 3 ft ग्राही पर पढ़ा जाता है, जबकि VDL तरंगरूप 5 ft ग्राही से प्रदर्शित होता है
    2. सूक्ष्म-वलय सुदृढ़ सीमेंट के सामने भी उच्च CBL आयाम दे सकता है, और दाब में लॉगिंग से वह प्रायः घट जाता है
    3. हल्का फेनिल सीमेंट सामान्य सीमेंट की तुलना में आवरण-संकेत को अधिक क्षीण करता है, अतः वह सदा निम्न आयाम दिखाता है
    4. केंद्र से हटा उपकरण CBL आयाम बढ़ाता है, अतः सुबद्ध खंड को मुक्त पाइप समझा जा सकता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — CBL आयाम 3 ft ग्राही पर पढ़ा जाता है, जबकि VDL तरंगरूप 5 ft ग्राही से प्रदर्शित होता है; B — सूक्ष्म-वलय सुदृढ़ सीमेंट के सामने भी उच्च CBL आयाम दे सकता है, और दाब में लॉगिंग से वह प्रायः घट जाता है

    3 ft ग्राही CBL आयाम और 5 ft ग्राही VDL तरंगरूप देता है। सूक्ष्म-वलय अच्छे सीमेंट के बावजूद पाइप को झंकृत होने देता है और दाबित पास दरार बंद कर देता है। फेनिल या हल्का सीमेंट कम क्षीण करता है (निम्न ध्वनिक प्रतिबाधा), अतः वह अपनी गुणवत्ता से अधिक आयाम दिखाता है, और केंद्र से हटा उपकरण आयाम घटाता है, जिससे मुक्त पाइप बेहतर बँधा दिखता है, बदतर नहीं।
  13. एक स्वच्छ जल-आर्द्र बलुआ पत्थर की सरंध्रता 0.20, वास्तविक प्रतिरोधकता Rt = 20 Ω·m तथा संरचना-जल प्रतिरोधकता Rw = 0.05 Ω·m है। आर्ची के स्थिरांक a = 1, m = 2 व n = 2 लें, Sw = [a·Rw/(φ^m·Rt)]^(1/n) के साथ। जल-संतृप्ति Sw, भिन्न के रूप में, दशमलव के दो स्थानों तक ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.25

    φ^m = 0.20² = 0.04, अतः φ^m·Rt = 0.04 × 20 = 0.8 और a·Rw = 0.05। अनुपात 0.05/0.8 = 0.0625 है, और Sw = 0.0625^(1/2) = 0.25। संरचना-गुणक से जाँच: F = 1/0.04 = 25, Ro = 25 × 0.05 = 1.25 Ω·m, I = Rt/Ro = 16, और Sw = I^(−1/2) = 0.25।
  14. एक स्वच्छ बलुआ पत्थर में घनत्व लॉग ρb = 2.32 g/cm³ पढ़ता है; ρma = 2.65 g/cm³ व ρf = 1.00 g/cm³ लें। गहरी प्रतिरोधकता Rt = 40 Ω·m व Rw = 0.05 Ω·m है, आर्ची के a = 1, m = 2, n = 2 के साथ। बल्क-आयतन जल BVW = φ·Sw, बल्क आयतन के प्रतिशत में, दशमलव के एक स्थान तक ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 3.5

    घनत्व सरंध्रता φ = (2.65 − 2.32)/(2.65 − 1.00) = 0.33/1.65 = 0.20। तब Sw = [0.05/(0.20² × 40)]^(1/2) = [0.05/1.6]^(1/2) = (0.03125)^(1/2) = 0.1768। BVW = 0.20 × 0.1768 = 0.03536, जो बल्क आयतन का 3.5% है। जाँच: m = n = 2 हेतु BVW = (a·Rw/Rt)^(1/2) = (0.05/40)^(1/2) = 0.03536, वही।
  15. एक स्वच्छ, संगठित, जल-भरे बलुआ पत्थर में ध्वनिक लॉग Δt = 94 μs/ft पढ़ता है। Δt_ma = 55 μs/ft व Δt_f = 185 μs/ft लें और वायली समय-औसत समीकरण प्रयोग करें। सरंध्रता, प्रतिशत में, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 30

    Δt = φ·Δt_f + (1 − φ)·Δt_ma से φ = (Δt − Δt_ma)/(Δt_f − Δt_ma) = (94 − 55)/(185 − 55) = 39/130 = 0.30, यानी 30%। जाँच: 0.30 × 185 + 0.70 × 55 = 55.5 + 38.5 = 94 μs/ft।
  16. एक प्राचीन संगठित चट्टान में एक संस्तर में गामा-किरण लॉग GR = 70 API पढ़ता है, स्वच्छ रेत में GR_min = 20 API व शेल में GR_max = 120 API के साथ। प्राचीन चट्टानों हेतु लैरियोनोव संबंध V_sh = 0.33(2^(2·I_GR) − 1) प्रयोग करें। शेल आयतन V_sh, भिन्न के रूप में, दशमलव के दो स्थानों तक ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.33

    I_GR = (70 − 20)/(120 − 20) = 0.5। तब V_sh = 0.33(2^(2 × 0.5) − 1) = 0.33(2 − 1) = 0.33। रैखिक आकलन V_sh = I_GR = 0.50 भ्रामक गलत उत्तर है: वह ऊपरी सीमा है, और लैरियोनोव का अरैखिक संबंध उससे छोटा मान देता है।
  17. एक बलुआ पत्थर में NMR T₂ वितरण की आंशिक सरंध्रताएँ हैं: T₂ 3 ms से कम पर 3 सरंध्रता-इकाइयाँ (pu), T₂ 3 से 33 ms के बीच 5 pu, और T₂ 33 ms से ऊपर 10 pu। 33 ms कट-ऑफ से नीचे के T₂ वाली सारी सरंध्रता को, मृत्तिका-आबद्ध जल सहित, आबद्ध द्रव (BVI) मानें और MPHI को तीनों आंशिक सरंध्रताओं का कुल योग लें। अपरिवर्तनीय जल-संतृप्ति Swirr = BVI/MPHI, निकटतम पूर्ण संख्या तक प्रतिशत में, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 44

    MPHI = 3 + 5 + 10 = 18 pu। BVI कट-ऑफ से नीचे के T₂ वाली सरंध्रता है: 3 + 5 = 8 pu, और FFI = 10 pu (जाँच: 8 + 10 = 18)। अतः Swirr = 8/18 = 0.444, यानी 44%। केवल 3–33 ms बिन को आबद्ध मानना (5/18 = 28%) उस मृत्तिका-आबद्ध जल को भूल जाना है जो कट-ऑफ से नीचे ही है।
  18. स्थैतिक SP, SSP = −K·log₁₀(Rmf/Rw) से दिया जाता है, K = 70 mV प्रति दशक के साथ। एक मोटी स्वच्छ जल-रेत शेल आधार-रेखा से −35 mV का विक्षेप दिखाती है, और संरचना-ताप पर मड-निस्यंद की प्रतिरोधकता Rmf = 0.40 Ω·m है। संरचना-जल प्रतिरोधकता Rw ____ Ω·m है, दशमलव के दो स्थानों तक।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.13

    −35 = −70·log₁₀(0.40/Rw) से log₁₀(0.40/Rw) = 0.5, अतः 0.40/Rw = 10^0.5 = 3.162 और Rw = 0.40/3.162 = 0.1265, जो दो दशमलव तक 0.13 Ω·m है। समतुल्यतः Rw = Rmf·10^(SSP/K) = 0.40 × 10^(−0.5)। Rw, Rmf से छोटा आता है, जैसा ऋणात्मक विक्षेप हेतु होना ही चाहिए।