भूकंप विज्ञान (Earthquake Seismology): स्रोत, परिमाण, क्रियाविधि, सांख्यिकी व स्रोत-सिद्धांत

यह अध्याय भूविज्ञान एवं भूभौतिकी (GG) पेपर के भाग B2 के “भूकंप विज्ञान (Earthquake Seismology)” शीर्षक का उत्तर देता है: “भूकंप: कारण व मापन, परिमाण व तीव्रता, फ़ोकल क्रियाविधि; भूकंप का परिमाणन, स्रोत के अभिलक्षण, भूकंपविवर्तनिकी व भूकंपीय संकट; डिजिटल सीस्मोग्राफ, भूकंप सांख्यिकी, भूकंपीय आँकड़ों से भूकंप-स्रोत का परिमाणन; अद्वितीयता प्रमेय, सहसंबंध व संवलन प्रकार के निरूपण प्रमेय, व्युत्क्रमता।” यह पढ़ाता है कि भूकंप कैसे उत्पन्न होते हैं व कैसे स्थित किए जाते हैं, परिमाण तीव्रता से कैसे भिन्न है व ऊर्जा परिमाण पर कैसे निर्भर है, भूकंपीय आघूर्ण व आघूर्ण परिमाण, कॉर्नर आवृत्ति से स्रोत का आकार, बीच-बॉल कैसे पढ़ा जाता है, डिजिटल सीस्मोग्राफ भूमि-गति कैसे अभिलिखित करता है, पुनरावृत्ति व संकट सहित गुटेनबर्ग–रिक्टर नियम, तथा अद्वितीयता, निरूपण व व्युत्क्रमता प्रमेयों के कथन व परिणाम। संख्यात्मक प्रश्न S−P समय से अधिकेंद्रीय दूरी, आयाम-अनुपात से परिमाण-अंतर, M0 = μAD व Mw, गुटेनबर्ग–रिक्टर पुनरावृत्ति, प्वासों प्रायिकता तथा प्रतिबल-ह्रास हैं।

1. भूकंप के कारण, भूकंपीय तरंगें व स्रोत का स्थान-निर्धारण

अधिकांश भूकंप विवर्तनिक होते हैं। प्लेट-गति दशकों से सदियों तक किसी बंद (locked) भ्रंश पर प्रत्यास्थ विकृति चढ़ाती है; जब अपरूपण प्रतिबल भ्रंश की सामर्थ्य से अधिक हो जाता है तो दोनों पार्श्व सरक जाते हैं और संचित विकृति भूकंपीय तरंगों के रूप में मुक्त होती है। यह H. F. Reid का प्रत्यास्थ प्रतिक्षेप (elastic rebound) मॉडल है, जो 1906 के सैन फ़्रांसिस्को भूकंप के अध्ययन से निकला। जहाँ सर्पण आरंभ होता है वह फ़ोकस (हाइपोसेंटर) है और उसके ठीक ऊपर का पृष्ठ-बिंदु अधिकेंद्र (epicentre)। ज्वालामुखी क्रिया, जलाशय-भार, खनन व विस्फोट छोटी, प्रायः उथली घटनाएँ देते हैं। फ़ोकस की गहराई के अनुसार भूकंप उथले (लगभग 70 km तक), मध्यवर्ती (लगभग 70 से 300 km) या गहरे (लगभग 300 से 700 km) होते हैं; लगभग 700 km से नीचे कोई नहीं होता।

भूकंप-लेख (seismogram) में पहले P तरंगें (संपीडनात्मक, सबसे तेज़) दिखती हैं, फिर S तरंगें (अपरूपण, धीमी, द्रव को पार नहीं कर सकतीं), फिर बड़ी व धीमी पृष्ठीय तरंगें (Love व Rayleigh)। प्वासों ठोस (λ = μ) में Vp/Vs = √3 ≈ 1.73 होता है। एकसमान माध्यम में दूरी d पर स्थित स्टेशन के लिए tP = d/Vp और tS = d/Vs, अतः d = (tS − tP) · Vp·Vs/(Vp − Vs)। Vp = 6.0 व Vs = 3.0 km/s पर गुणक 6 km प्रति सेकंड है, इसलिए S−P समय 12 s से d = 72 km आता है। एक स्टेशन केवल दूरी देता है; तीन स्टेशनों के वृत्त अधिकेंद्र पर मिलते हैं (त्रिकोणन), और उद्गम-समय tP − d/Vp है। वाडाटी आरेख (Wadati diagram) tS − tP को tP के सापेक्ष आलेखित करता है: बिंदु ढाल Vp/Vs − 1 की रेखा पर रहते हैं जो उद्गम-समय पर शून्य को काटती है।

⚠️ S−P फ़ोकस से दूरी देता है
यह सूत्र फ़ोकस से स्टेशन तक की सीधी दूरी (फ़ोकसी दूरी) देता है। फ़ोकस की गहराई h ज्ञात हो तो अधिकेंद्रीय दूरी √(d² − h²) है। जो प्रश्न अधिकेंद्रीय दूरी माँगे और गहराई दे, वह यह दूसरा चरण चाहता है।

2. परिमाण, तीव्रता व ऊर्जा

परिमाण (magnitude) स्रोत के आकार का यंत्र-आधारित, लघुगणकीय माप है: प्रति भूकंप एक मान। तीव्रता (intensity) किसी स्थान पर कंपन व क्षति का प्रेक्षण-आधारित अभिलेख है (संशोधित मरकैली, I से XII, या EMS-98), इसलिए यह दूरी, स्थानीय मृदा व निर्माण के साथ बदलती है; समान तीव्रता के बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएँ समभूकंपी रेखाएँ (isoseismals) हैं। रिक्टर का स्थानीय परिमाण ML = log10 A − log10 A0(Δ) है, जिसमें A वुड–एंडरसन सीस्मोग्राफ पर अधिकतम आयाम है और A0 उस दूरी पर शून्य-परिमाण के संदर्भ झटके का आयाम (100 km पर 1 mm का अर्थ ML 3)। परिमाण लघुगणक होने से, एक ही दूरी पर एक ही यंत्र पर अभिलिखित दो घटनाओं का अंतर ΔM = log10(A1/A2) है: आयाम-अनुपात 10 का अर्थ एक इकाई और 100 का अर्थ दो।

प्रचलित परिमाण पैमाने
पैमानाआधारसबसे बड़ी घटनाओं में व्यवहार
MLस्थानीय दूरियों पर वुड–एंडरसन सीस्मोग्राफ का अधिकतम आयामसंतृप्त हो जाता है
mbP तरंग का आयाम व आवर्तकाल (लगभग 1 s)लगभग 6 पर संतृप्त
Msलगभग 20 s आवर्तकाल पर Rayleigh तरंग का आयामलगभग 8 पर संतृप्त
Mwभूकंपीय आघूर्ण M0संतृप्त नहीं होता

ऊर्जा। गुटेनबर्ग–रिक्टर संबंध log10 E = 1.5 M + 4.8 है (E जूल में)। अतः परिमाण की एक इकाई विकिरित ऊर्जा को 10^1.5 ≈ 31.6 गुना और आयाम को 10 गुना करती है; दो इकाइयाँ ऊर्जा को 1000 गुना और आयाम को 100 गुना करती हैं। M 6.0 की घटना 10^13.8 ≈ 6 × 10¹³ J विकिरित करती है।

⚠️ आयाम-अनुपात ऊर्जा-अनुपात नहीं है
परिमाण की 2 इकाइयों का अंतर 100 गुना आयाम पर 1000 गुना ऊर्जा है। तीव्रता में ऐसा कोई अंकगणित नहीं: तीव्रता VIII, तीव्रता IV की दुगुनी नहीं है। संतृप्ति का अर्थ है कि बहुत बड़ी घटनाओं में पैमाना बढ़ना रोक देता है क्योंकि उसमें प्रयुक्त लघु-आवर्त तरंगें बढ़ना बंद कर देती हैं, यह नहीं कि भूकंप बढ़ना बंद कर देता है।

3. स्रोत का परिमाणन: भूकंपीय आघूर्ण, आघूर्ण परिमाण व स्पेक्ट्रम

विवर्तनिक भूकंप को भ्रंश पर अपरूपण सर्पण के रूप में मॉडल किया जाता है। उसका आकार भूकंपीय आघूर्ण M0 = μ A D है, जिसमें μ दृढ़ता (rigidity; भूपर्पटी में लगभग 3 × 10¹⁰ Pa), A विभंग क्षेत्रफल और D औसत सर्पण है; इकाई N·m है (1 N·m = 10⁷ dyne·cm)। आघूर्ण परिमाण Mw = (2/3)(log10 M0 − 9.1) है, M0 N·m में (पुरानी पुस्तकों में 9.05 है; अंतर 0.03 का है, और प्रश्न में स्थिरांक दिया जाता है)। Mw संतृप्त नहीं होता, और परिमाण की एक इकाई का अर्थ है M0 का 10^1.5 ≈ 31.6 गुना होना। उदाहरण: 40 km लंबे व 15 km चौड़े विभंग में D = 2.0 m, μ = 3.0 × 10¹⁰ Pa हो तो A = 6.0 × 10⁸ m², M0 = 3.6 × 10¹⁹ N·m, log10 M0 = 19.56 और Mw = (2/3)(19.56 − 9.1) = 6.97।

स्रोत स्पेक्ट्रम। पिंड तरंगों का दूर-क्षेत्र विस्थापन स्पेक्ट्रम निम्न आवृत्ति पर समतल होता है, जिसका पठार M0 के अनुपाती है, और कॉर्नर आवृत्ति (corner frequency) fc से ऊपर f⁻² की भाँति गिरता है (Brune का ω² मॉडल); बड़ी घटनाओं में fc कम होती है। Brune के वृत्ताकार-दरार मॉडल में स्रोत-त्रिज्या r = 2.34β/(2π fc) ≈ 0.37 β/fc है (β S-तरंग वेग), और स्थैतिक प्रतिबल-ह्रास (stress drop) Δσ = 7 M0/(16 r³) है। उदाहरण: β = 3.5 km/s व fc = 0.40 Hz से r ≈ 3.2 km आता है; M0 = 5 × 10¹⁷ N·m पर Δσ ≈ 6 MPa, जो भूकंपों के लिए विशिष्ट है।

  • अनेक स्टेशनों की प्रथम-गति ध्रुवणताएँ भ्रंश-तल हल देती हैं: अभिविन्यास व सर्पण की दिशा, पर आकार नहीं।
  • तरंगरूप (आघूर्ण-प्रदिश) प्रतिलोमन प्रेक्षित भूकंप-लेखों को ग्रीन फलनों से बने संश्लेषित लेखों से मिलाता है। भूकंप-लेख छह स्वतंत्र आघूर्ण-प्रदिश घटकों में रैखिक हैं, इसलिए क्रियाविधि व M0 साथ-साथ मिलते हैं।
  • P या S तरंगों का स्पेक्ट्रमी विश्लेषण, पथ व यंत्र के प्रभाव हटाने पर, M0 (पठार), fc, r व Δσ देता है।
  • परिमित-भ्रंश प्रतिलोमन भ्रंश-तल पर सर्पण का मानचित्र बनाता है, जिससे A व D सीधे मिलते हैं।
⚠️ M0 ऊर्जा नहीं है
M0 = μAD भ्रंश के आर-पार स्थायी विस्थापन को मापता है, विकिरित ऊर्जा को नहीं। समान M0 वाले दो भूकंप भिन्न प्रतिबल-ह्रास होने पर भिन्न ऊर्जा विकिरित कर सकते हैं। संबंध log10 E = 1.5 M + 4.8 औसत अनुभवजन्य प्रवृत्ति है, तत्समक नहीं।

4. फ़ोकल क्रियाविधियाँ (भ्रंश-तल हल)

प्रत्येक स्टेशन अभिलिखित करता है कि प्रथम P गति संपीडन है (भूमि फ़ोकस से दूर जाती है, ऊर्ध्वाधर सीस्मोमीटर पर ऊपर की ओर प्रथम गति) या विस्तार (dilatation) (फ़ोकस की ओर, नीचे की ओर)। फ़ोकस-गोले के निम्न-गोलार्ध प्रक्षेप पर आलेखित करने से संपीडन व विस्तार चार चतुर्थांशों में आते हैं, जिन्हें दो लंबवत महावृत्त, निस्पंद तल (nodal planes), अलग करते हैं: एक भ्रंश तल है, दूसरा सहायक तल। आरेख में संपीडन काला व विस्तार सफ़ेद भरा जाता है (“बीच-बॉल”)। P अक्ष विस्तारी चतुर्थांशों के मध्य में और T अक्ष संपीडी चतुर्थांशों के मध्य में होता है, दोनों निस्पंद तलों से 45° पर।

भ्रंशन-शैली व उसका बीच-बॉल (45° नति वाले नति-सर्पण तलों के लिए आदर्श रूप)
शैलीरेक (Aki–Richards)P अक्षT अक्षगेंद का केंद्र
स्ट्राइक-स्लिप (strike-slip)0° या 180°क्षैतिजक्षैतिजनिस्पंद तल कटते हैं: चारों चतुर्थांश मिलते हैं
सामान्य (normal)−90°ऊर्ध्वाधरक्षैतिजसफ़ेद (विस्तारी)
क्षेप (उत्क्रम)+90°क्षैतिजऊर्ध्वाधरकाला (संपीडी)

द्वि-युग्म (double couple) का कोई अधिमान्य तल नहीं होता, इसलिए केवल प्रथम गतियाँ नहीं बता सकतीं कि कौन-सा निस्पंद तल भ्रंश है; सतही विभंग, पश्च-आघातों (aftershocks) की रेखा, विवर्तनिक परिवेश या विभंग-दिशिकता निर्णय करती है। आघूर्ण-प्रदिश की भाषा में शुद्ध द्वि-युग्म का अनुरेख शून्य होता है और आइगेनमान +M0, 0 व −M0 होते हैं। विस्फोट या अंतःस्फोट समदैशिक अंश (बराबर आइगेनमान) जोड़ता है, और कुछ ज्वालामुखीय व गहरी घटनाओं में प्रतिपूरित रैखिक सदिश द्विध्रुव (CLVD) अंश दिखता है।

⚠️ P व T प्रतिबल-अक्ष नहीं हैं
P व T शुद्ध-गतिकीय अक्ष हैं जो निस्पंद तलों को समद्विभाजित करते हैं। वे मुख्य प्रतिबल-अक्षों से केवल नव-निर्मित भंग के लिए संपाती होते हैं; पुनर्सक्रिय भ्रंश ऐसे प्रतिबल-क्षेत्र में सरकता है जिसके अक्ष इनसे भिन्न हो सकते हैं।

5. डिजिटल सीस्मोग्राफ

सीस्मोमीटर भूमि से जुड़े फ़्रेम में कमानी पर लगा अवमंदित द्रव्यमान है। अपने प्राकृतिक आवर्तकाल T0 से बहुत छोटे आवर्तकालों पर द्रव्यमान लगभग स्थिर रहता है और फ़्रेम उसके सापेक्ष चलता है, इसलिए सापेक्ष गति भूमि की गति अभिलिखित करती है। क्रांतिक का लगभग 0.7 अवमंदन समतल अनुक्रिया देता है। चल-कुंडली ट्रांसड्यूसर प्राकृतिक आवृत्ति से ऊपर भूमि के वेग के अनुपाती निर्गत देता है, जबकि बल-संतुलन (force-balance) संवेदक द्रव्यमान को लगभग स्थिर रखता है और त्वरण अभिलिखित करता है, जो बहुत निम्न आवृत्तियों तक समतल रहता है। ब्रॉडबैंड संवेदकों (वेग-अनुक्रिया लगभग 0.01 से 50 Hz या अधिक तक समतल) ने अलग-अलग लघु-आवर्त (T0 लगभग 1 s) व दीर्घ-आवर्त यंत्रों को हटा दिया है।

  • ऐनालॉग-से-डिजिटल परिवर्तक। N-बिट परिवर्तक के 2^N स्तर होते हैं और गतिक परास 20 log10(2^N) ≈ 6.02 N dB है, अतः 24 बिट लगभग 144 dB देते हैं (वास्तविक प्रणालियाँ शोर के कारण कम पाती हैं)।
  • प्रतिचयन। दर fs से नाइक्विस्ट आवृत्ति fN = fs/2 मिलती है। fN से ऊपर की ऊर्जा निम्न आवृत्ति पर अलियासिंग से आ जाती है: fs = 40 प्रतिदर्श/s पर 25 Hz का संकेत (fN = 20 Hz) 40 − 25 = 15 Hz पर दिखता है। प्रतिचयन से पहले ऐंटी-अलियास फ़िल्टर उसे हटाए।
  • समय-निर्धारण। GPS घड़ियाँ मिलीसेकंड से बेहतर निरपेक्ष समय देती हैं, जो आवश्यक है क्योंकि स्थान-निर्धारण आगमन-समयों पर निर्भर है।
  • यंत्र-अनुक्रिया। अभिलिखित गणनाएँ भूमि-गति का संवेदक, फ़िल्टर व परिवर्तक की अनुक्रिया (ध्रुव व शून्य तथा counts प्रति m/s में सुग्राहिता) के साथ संवलन हैं। परिमाण, स्पेक्ट्रम व आघूर्ण के लिए पहले यह अनुक्रिया हटानी पड़ती है।
ℹ️ स्रोत के निकट परास महत्वपूर्ण है
बड़े भूकंप के निकट संवेदनशील ब्रॉडबैंड संवेदक संतृप्त (क्लिप) हो जाता है। प्रबल-गति त्वरणमापी, जो सुग्राहिता के बदले परास लेता है, वह कंपन अभिलिखित करता है जो इंजीनियरों को चाहिए।

6. भूकंप सांख्यिकी, भूकंपविवर्तनिकी व भूकंपीय संकट

गुटेनबर्ग–रिक्टर नियम log10 N = a − bM है, जिसमें N किसी क्षेत्र व अवधि में परिमाण ≥ M की घटनाओं की संख्या है। b मान (वैश्विक रूप से लगभग 1) ढाल है: b = 1 पर परिमाण की प्रत्येक इकाई पर घटनाएँ दस गुना कम होती हैं। a मान समग्र सक्रियता मापता है और क्षेत्र व अवधि पर निर्भर है। परिमाण ≥ M की घटनाओं का माध्य पुनरावृत्ति-अंतराल T = 1/N है। उदाहरण: log10 N = 4.0 − 1.0 M प्रति वर्ष से N(≥6) = 10⁻² प्रति वर्ष व T = 100 वर्ष आता है; M ≥ 7 का T = 1000 वर्ष है। Mmin से ऊपर पूर्ण सूची के लिए Aki का अधिकतम-संभाविता आकलन b = log10 e/(M̄ − Mmin) = 0.434/(M̄ − Mmin) है। ऊर्जा प्रति इकाई 31.6 गुना बढ़ती है जबकि संख्या 10 गुना घटती है, इसलिए अधिकांश भूकंपीय ऊर्जा सबसे बड़ी घटनाओं से आती है।

समय में घटित होना प्वासों प्रक्रम से मॉडल होता है: t वर्षों में कम-से-कम एक घटना की संभावना P = 1 − exp(−t/T) है। T = 475 वर्ष व t = 50 वर्ष पर P = 0.10, जो “50 वर्ष में 10%” का प्रचलित अभिकल्प-स्तर है। पश्च-आघात (aftershock) दर ओमोरी नियम n(t) = K/(c + t)^p का अनुसरण करती है जिसमें p लगभग 1 है, और बाथ नियम के अनुसार सबसे बड़ा पश्च-आघात मुख्य झटके से लगभग 1.2 परिमाण-इकाई नीचे होता है।

भूकंपविवर्तनिक परिवेश
परिवेशविशिष्ट क्रियाविधिगहराई व आकार
सबडक्शन क्षेत्र (वाडाटी–बेनिऑफ़ क्षेत्र)महाक्षेप पर क्षेप; पट्टिका के भीतर सामान्य व क्षेप दोनोंउथले से लगभग 700 km तक; सबसे बड़ी घटनाएँ (चिली 1960, लगभग Mw 9.5)
मध्य-महासागरीय कटकसामान्य भ्रंशनउथले; छोटे से मध्यम
महासागरीय रूपांतर भ्रंशस्ट्राइक-स्लिपउथले; मध्यम से बड़े
महाद्वीपीय संघट्टन (हिमालय)क्षेपउथले; लगभग Mw 8 के महा-भूकंप
स्थिर महाद्वीपीय अंतःभाग (लातूर 1993, भुज 2001)प्राचीन संरचनाओं पर उत्क्रम भ्रंशनउथले; विरल पर क्षतिकारक

भूकंपीय संकट (seismic hazard) किसी स्थल पर भूमि-कंपन के एक स्तर के अतिक्रमण की संभावना है; जोखिम (risk) संकट को एक्सपोज़र (exposure) व सुभेद्यता के साथ जोड़ता है। प्रायिकतावादी भूकंपीय संकट विश्लेषण (PSHA) स्रोत-क्षेत्र निर्धारित करता है, प्रत्येक को अधिकतम परिमाण सहित गुटेनबर्ग–रिक्टर पुनरावृत्ति-संबंध देता है, भूमि-गति पूर्वानुमान समीकरण (परिमाण व दूरी के सापेक्ष कंपन) जोड़ता है और सभी स्रोतों का योग कर प्रत्येक स्तर के अतिक्रमण की वार्षिक दर, यानी संकट-वक्र, देता है। नियतिवादी विश्लेषण इसके बजाय एक परिदृश्य-भूकंप लेता है। भारत का संहिता-मानचित्र (IS 1893) देश को क्षेत्र II से V में बाँटता है; क्षेत्र V, सबसे प्रचंड, में हिमालयी चाप, उत्तर-पूर्व व कच्छ के भाग आते हैं।

7. अद्वितीयता, निरूपण व व्युत्क्रमता प्रमेय

प्रत्यास्थ पिंड में भूकंपीय विस्थापन u समीकरण ρ ∂²uᵢ/∂t² = ∂ⱼ(cᵢⱼₖₗ ∂ₗuₖ) + fᵢ का पालन करता है, जहाँ f पिंड-बल है। ग्रीन फलन (Green's function) Gᵢⱼ(x, t; ξ, τ), (ξ, τ) पर दिशा j में इकाई आवेगी बल से (x, t) पर विस्थापन का i-घटक है; काल-अपरिवर्ती माध्यम में वह t − τ पर निर्भर करता है। नीचे के चार प्रमेय कथनों व परिणामों सहित जानने योग्य हैं।

प्रत्यास्थगतिकी के प्रमेय व उनके परिणाम
प्रमेयकथनपरिणाम
अद्वितीयतादिए गए माध्यम, पिंड-बल तथा आरंभिक विस्थापन व वेग के लिए, सीमा पर सभी परवर्ती समयों हेतु विस्थापन या कर्षण दिया हो तो विस्थापन-क्षेत्र अद्वितीय है।जैसे भी मिले, कोई भी हल ही हल है, इसलिए समतुल्य बल-निकाय वास्तविक स्रोत की जगह ले सकते हैं। यह प्रतिलोम समस्या को अद्वितीय नहीं बनाता।
निरूपण, संवलन प्रकारकिसी भी बिंदु का विस्थापन बल का G के साथ काल में संवलन के आयतन-समाकल तथा सीमा विस्थापन व कर्षण के G के साथ पृष्ठ-समाकल का योग है।भूकंप-लेख = स्रोत-समय फलन ∗ ग्रीन फलन ∗ यंत्र। विस्थापन-असांतत्य (dislocation) द्वि-युग्म की तरह कार्य करती है, uₙ = M_pq(t) ∗ Gₙp,q, जो M_pq में रैखिक है: आघूर्ण-प्रदिश प्रतिलोमन व अपसंवलन का आधार।
निरूपण, सहसंबंध प्रकारवही संबंध, एक तरंग-क्षेत्र के काल-व्युत्क्रम के साथ, जिससे गुणनफल परस्पर-सहसंबंध बन जाते हैं; इसके लिए ह्रास-रहित (काल-व्युत्क्रम-अपरिवर्ती) माध्यम चाहिए।दो ग्राही-स्थलों के अभिलेखों का परस्पर-सहसंबंध उनके बीच का ग्रीन फलन लौटाता है (भूकंपीय व्यतिकरणमिति, परिवेशी-शोर विधियाँ); साथ ही काल-व्युत्क्रम फ़ोकसन।
व्युत्क्रमताGᵢⱼ(x, t; ξ, 0) = Gⱼᵢ(ξ, t; x, 0): स्रोत व ग्राही की स्थितियाँ बल व घटक की दिशाओं के साथ आपस में बदलती हैं, सीमा-प्रतिबंध वही रहने पर।एक ग्राही पर अनेक स्रोतों का क्षेत्र ग्राही से चलाई एक गणना से निकल सकता है; यह संख्यात्मक ग्रीन फलनों की जाँच करती है और सहायक (adjoint) विधियों का आधार है।
⚠️ व्युत्क्रमता दिशाएँ भी बदलती है
A पर दिशा j का बल, B पर घटक i में अभिलिखित हो, तो वह B पर दिशा i के बल का A पर घटक j में अभिलेख के बराबर है। केवल स्थितियाँ बदलना तभी सही है जब i = j हो, जैसे ऊर्ध्वाधर बल व ऊर्ध्वाधर घटक। अद्वितीयता भी अग्र समस्या के बारे में है: भिन्न स्रोत ऐसे क्षेत्र विकिरित कर सकते हैं जिन्हें कोई स्टेशन-जाल अलग नहीं कर सकता।

मुख्य बिंदु

  • विवर्तनिक भूकंप भ्रंशों पर प्रत्यास्थ प्रतिक्षेप हैं। S−P समय से दूरी d = Δt · Vp·Vs/(Vp − Vs) है, जो फ़ोकस से दूरी है; अधिकेंद्र के लिए गहराई को वर्ग-योग में घटाएँ, √(d² − h²)। प्वासों ठोस: Vp/Vs = √3।
  • परिमाण प्रति घटना एक लघुगणकीय मान है; तीव्रता स्थानीय, प्रेक्षित है और दूरी व स्थल के साथ बदलती है। ΔM = log10(A1/A2); log10 E = 1.5 M + 4.8 से प्रति इकाई ऊर्जा 31.6 गुना व आयाम 10 गुना होता है।
  • M0 = μAD (N·m में) व Mw = (2/3)(log10 M0 − 9.1) संतृप्त नहीं होते। स्पेक्ट्रम में पठार ∝ M0 होता है और fc से ऊपर f⁻² से गिरता है; Brune मॉडल में r ≈ 0.37 β/fc व Δσ = 7M0/(16r³)।
  • बीच-बॉल में काला संपीडन व सफ़ेद विस्तार है; P अक्ष सफ़ेद में व T अक्ष काले चतुर्थांशों में है। क्षेप का केंद्र काला, सामान्य भ्रंशन का सफ़ेद, स्ट्राइक-स्लिप में चार चतुर्थांश मिलते हैं। दो निस्पंद तलों को केवल प्रथम गतियों से अलग नहीं किया जा सकता।
  • डिजिटल सीस्मोग्राफ संवेदक, परिवर्तक, घड़ी व अनुक्रिया है। नाइक्विस्ट fN = fs/2, और उससे ऊपर की ऊर्जा अलियास होती है; N बिट से लगभग 6.02 N dB। गुटेनबर्ग–रिक्टर log10 N = a − bM से T = 1/N, Aki का b = 0.434/(M̄ − Mmin) व प्वासों P = 1 − exp(−t/T)।
  • अद्वितीयता अग्र हल को निश्चित करती है; संवलन-प्रकार निरूपण से भूकंप-लेख = स्रोत ∗ ग्रीन फलन ∗ यंत्र; सहसंबंध प्रकार को ह्रास-रहित माध्यम चाहिए व वह व्यतिकरणमिति देता है; व्युत्क्रमता Gᵢⱼ(x;ξ) = Gⱼᵢ(ξ;x) स्थितियों के साथ दिशाएँ भी बदलती है।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. प्वासों ठोस (लामे स्थिरांक λ = μ) के लिए P-तरंग वेग का S-तरंग वेग से अनुपात क्या है?

    1. लगभग 1.41 (√2), क्योंकि प्रत्येक प्रत्यास्थ ठोस में P-तरंग वेग S-तरंग वेग का √2 गुना होता है
    2. लगभग 1.73 (√3), क्योंकि λ = μ होने पर Vp² = (λ + 2μ)/ρ = 3μ/ρ है जबकि Vs² = μ/ρ
    3. लगभग 2.00, क्योंकि किसी भी संघटन की प्रत्येक भूपर्पटीय शैल में P तरंगें S तरंगों से दुगुनी तेज़ चलती हैं
    4. लगभग 3.00, क्योंकि Vp², Vs² का तीन गुना है और इसलिए वेग स्वयं तीन के अनुपात में हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — लगभग 1.73 (√3), क्योंकि λ = μ होने पर Vp² = (λ + 2μ)/ρ = 3μ/ρ है जबकि Vs² = μ/ρ

    λ = μ पर Vp² = (λ + 2μ)/ρ = 3μ/ρ और Vs² = μ/ρ, अतः Vp/Vs = √3 ≈ 1.73। अनुपात 3.00 भ्रामक भूल है: वह वर्गों का अनुपात है, वेगों का नहीं। √2 केवल λ = 0 पर लागू होता है, और शैलों के लिए अनुपात 2 पर निश्चित नहीं है।
  2. एक भूकंप को अधिकेंद्र से 15 km दूर एक नगर में संशोधित मरकैली तीव्रता VII पर और 150 km दूर दूसरे नगर में तीव्रता IV पर अनुभव किया जाता है। कौन-सा कथन सही है?

    1. भूकंप का एक ही परिमाण है, जबकि तीव्रता स्थानीय, प्रेक्षित माप है जो दूरी के साथ घटती है और स्थल पर निर्भर है
    2. भूकंप के दो परिमाण हैं, क्योंकि परिमाण प्रत्येक नगर में अनुभव किए गए कंपन-आयाम का लघुगणक है
    3. तीव्रता विकिरित ऊर्जा का लघुगणक है, अतः निकट के नगर को दूर के नगर से हज़ार गुना ऊर्जा मिली
    4. निकट के नगर ने बड़ा भूकंपीय आघूर्ण अभिलिखित किया होगा, क्योंकि भूकंपीय आघूर्ण वहीं मापा जाता है जहाँ क्षति सर्वाधिक हो
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — भूकंप का एक ही परिमाण है, जबकि तीव्रता स्थानीय, प्रेक्षित माप है जो दूरी के साथ घटती है और स्थल पर निर्भर है

    परिमाण व भूकंपीय आघूर्ण स्रोत का वर्णन करते हैं और घटना के एकल मान हैं। तीव्रता प्रत्येक स्थान के प्रेक्षित प्रभावों से निर्धारित होती है, इसलिए दूरी, मृदा व निर्माण के कारण नगरों में भिन्न होती है। तीव्रता को ऊर्जा का लघुगणक मानना भ्रामक भूल है: यह पैमाना प्रभावों का क्रमसूचक वर्णन है और इसमें ऊर्जा का कोई अंकगणित नहीं।
  3. एक डिजिटल सीस्मोग्राफ 50 प्रतिदर्श प्रति सेकंड पर प्रतिचयन करता है। उसका ऐंटी-अलियास फ़िल्टर दोषपूर्ण है और भूमि-गति के 32 Hz घटक को निकल जाने देता है। यह घटक डिजिटल अभिलेख में किस आवृत्ति पर दिखेगा?

    1. 32 Hz पर, क्योंकि प्रतिचयन आवृत्ति से कम की किसी घटक की आवृत्ति को अंकीयकरण कभी नहीं बदलता
    2. 25 Hz पर, नाइक्विस्ट आवृत्ति, जहाँ नाइक्विस्ट आवृत्ति से ऊपर की समस्त ऊर्जा अभिलेख में जमा हो जाती है
    3. 18 Hz पर, क्योंकि 50 − 32 घटक को नाइक्विस्ट आवृत्ति के सापेक्ष मोड़कर 25 Hz से नीचे के बैंड में ले आता है
    4. 7 Hz पर, क्योंकि घटक का नाइक्विस्ट आवृत्ति से आधिक्य, 32 − 25, ही अभिलिखित होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — 18 Hz पर, क्योंकि 50 − 32 घटक को नाइक्विस्ट आवृत्ति के सापेक्ष मोड़कर 25 Hz से नीचे के बैंड में ले आता है

    नाइक्विस्ट आवृत्ति 50/2 = 25 Hz है। इससे ऊपर की f वाला घटक |f − k·fs| पर अलियास होता है, यहाँ 50 − 32 = 18 Hz, जो 32 Hz का 25 Hz के सापेक्ष दर्पण-प्रतिबिंब है। अभिलेख में तब 18 Hz का संकेत दिखता है जो भूमि में कभी था ही नहीं। 7 Hz का उत्तर नाइक्विस्ट से आधिक्य को अलियास मान लेता है, जो दर्पण-दूरी है, आवृत्ति नहीं।
  4. 45° नति वाले भ्रंश-तल पर शुद्ध क्षेप (उत्क्रम) भूकंप के निम्न-गोलार्ध बीच-बॉल का कौन-सा वर्णन सही है, जहाँ संपीडी प्रथम गति काली भरी जाती है?

    1. सफ़ेद (विस्तारी) केंद्रीय क्षेत्र, क्योंकि P अक्ष ऊर्ध्वाधर है और आरेख के केंद्र पर आलेखित होता है
    2. केंद्र पर मिलने वाले चार समान चतुर्थांश, क्योंकि क्षेप के दोनों निस्पंद तल ऊर्ध्वाधर होते हैं
    3. पूरी तरह काली गेंद, क्योंकि ऊपरी पार्श्व के ऊपर जाने पर प्रत्येक स्टेशन ऊपर की ओर प्रथम गति देखता है
    4. काला (संपीडी) केंद्रीय क्षेत्र, क्योंकि T अक्ष ऊर्ध्वाधर है और इसलिए केंद्र पर आलेखित होता है
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    उत्तर: D — काला (संपीडी) केंद्रीय क्षेत्र, क्योंकि T अक्ष ऊर्ध्वाधर है और इसलिए केंद्र पर आलेखित होता है

    क्षेप भ्रंशन में न्यूनतम संपीडी (तनाव) अक्ष ऊर्ध्वाधर और P अक्ष क्षैतिज होता है। T अक्ष संपीडी चतुर्थांश में है और उसकी ऊर्ध्वाधर दिशा निम्न-गोलार्ध आरेख के केंद्र पर आलेखित होती है, इसलिए केंद्र काला है। सफ़ेद केंद्र सामान्य भ्रंशन का है, जहाँ P ऊर्ध्वाधर होता है, और मिलते हुए चार चतुर्थांश स्ट्राइक-स्लिप भ्रंशन के हैं। द्वि-युग्म में विस्तारी चतुर्थांश भी सदा होते हैं, अतः गेंद कभी पूरी काली नहीं होती।
  5. P प्रथम गतियों से प्राप्त भ्रंश-तल हल दो लंबवत निस्पंद तल देता है। कौन-सा अतिरिक्त प्रेक्षण पहचान सकता है कि उनमें से कौन-सा वास्तविक भ्रंश-तल है?

    1. स्पष्ट ध्रुवणता वाले और स्टेशन जोड़ना, क्योंकि द्वि-युग्म का ध्रुवणता-प्रतिरूप दोनों तलों में भिन्न होता है
    2. सुनिर्धारित पश्च-आघातों की, या मानचित्रित सतही विभंग की, दोनों तलों में से एक के अनुदिश संरेखता
    3. यह पता लगाना कि किस तल का भूकंपीय आघूर्ण बड़ा है, क्योंकि सहायक तल पर आघूर्ण बिल्कुल नहीं होता
    4. दोनों P-तरंग पालियों के आयामों की तुलना, क्योंकि भ्रंश-तल सदा छोटी पाली वाला तल होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — सुनिर्धारित पश्च-आघातों की, या मानचित्रित सतही विभंग की, दोनों तलों में से एक के अनुदिश संरेखता

    एक तल पर सर्पण से बना द्वि-युग्म ठीक वही दूर-क्षेत्र विकिरित करता है जो सहायक तल पर सर्पण से होता, इसलिए कितनी भी प्रथम-गति ध्रुवणताएँ उन्हें अलग नहीं कर सकतीं। स्वतंत्र ज्यामिति कर सकती है: पश्च-आघातों की रेखा, सतही विभंग, विवर्तनिक परिवेश या विभंग-दिशिकता। अन्य सुझाव दोनों तलों में ऐसी असममिति मानते हैं जो द्वि-युग्म में नहीं होती।
  6. किसी क्षेत्र में log10 N = a − bM, b = 1.0 के साथ लागू होता है, जहाँ N परिमाण ≥ M की घटनाओं की संख्या है। M ≥ 5 व M ≥ 7 की घटनाओं की संख्या की तुलना कैसे होगी?

    1. M ≥ 5 की घटनाएँ M ≥ 7 की घटनाओं से लगभग 10 गुना अधिक हैं, पूरे परास के लिए दस का एक गुणक
    2. लगभग 31.6 गुना अधिक हैं, जो प्रत्येक परिमाण-इकाई पर विकिरित ऊर्जा के बदलने का गुणक है
    3. M ≥ 5 की घटनाएँ लगभग 100 गुना अधिक हैं, क्योंकि दोनों परिमाण-इकाइयों में से प्रत्येक दस का गुणक देती है
    4. लगभग 1000 गुना अधिक हैं, जो दो परिमाण-इकाइयों पर विकिरित ऊर्जा के बदलने का गुणक है
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    उत्तर: C — M ≥ 5 की घटनाएँ लगभग 100 गुना अधिक हैं, क्योंकि दोनों परिमाण-इकाइयों में से प्रत्येक दस का गुणक देती है

    N(≥5)/N(≥7) = 10^(b·2) = 10² = 100, b = 1 पर। गुणक 31.6 व 1000 क्रमशः एक व दो परिमाण-इकाइयों के ऊर्जा-अनुपात हैं और वे गणना-अनुपात में नहीं आते। दस केवल एक इकाई का अनुपात है।
  7. किसी स्थल पर भूमि-कंपन के एक स्तर का माध्य प्रत्यावर्तन-काल 475 वर्ष है और उसके अतिक्रमण प्वासों प्रक्रम का अनुसरण करते हैं। 475 वर्ष की अवधि में कम-से-कम एक अतिक्रमण की प्रायिकता किस मान के निकटतम है?

    1. 63%, क्योंकि t = T पर P = 1 − exp(−t/T) से 1 − e⁻¹ मिलता है
    2. 100%, क्योंकि जो स्तर औसतन 475 वर्ष में एक बार अतिक्रमित होता है, वह 475 वर्ष में निश्चित रूप से अतिक्रमित होगा
    3. 50%, क्योंकि आधी घटनाएँ माध्य प्रत्यावर्तन-काल से पहले और आधी उसके बाद आनी चाहिए
    4. 10%, क्योंकि 475 वर्ष के प्रत्यावर्तन-काल से जुड़ी यही अभिकल्प अतिक्रमण-प्रायिकता प्रचलित है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — 63%, क्योंकि t = T पर P = 1 − exp(−t/T) से 1 − e⁻¹ मिलता है

    प्वासों प्रक्रम के लिए P = 1 − exp(−t/T), अतः t = T पर P = 1 − 1/e = 0.632। 10% का आँकड़ा 50 वर्ष की अवधि (1 − exp(−50/475) ≈ 0.10) का है, 475 वर्ष का नहीं। माध्य प्रत्यावर्तन-काल कोई गारंटी नहीं है, और माध्यिका प्रतीक्षा-काल T ln 2 ≈ 329 वर्ष माध्य से छोटा है, अतः 50% भी गलत है।
  8. ग्रीन फलन Gᵢⱼ(x, t; ξ, 0) के लिए प्रत्यास्थगतिकी व्युत्क्रमता प्रमेय का कौन-सा कथन सही है, जब दोनों विन्यासों में सीमा-प्रतिबंध समान हों?

    1. Gᵢⱼ(x, t; ξ, 0) = Gᵢⱼ(ξ, t; x, 0): स्थितियाँ बदलती हैं जबकि बल व घटक की दिशाएँ अपरिवर्तित रहती हैं
    2. Gᵢⱼ(x, t; ξ, 0) = −Gⱼᵢ(ξ, t; x, 0): स्रोत व ग्राही की भूमिकाएँ बदलने पर तरंगरूप का चिह्न बदल जाता है
    3. Gᵢⱼ(x, t; ξ, 0) = Gⱼᵢ(ξ, −t; x, 0): भूमिकाएँ काल-अक्ष के उत्क्रमण के साथ बदलती हैं
    4. Gᵢⱼ(x, t; ξ, 0) = Gⱼᵢ(ξ, t; x, 0): स्रोत व ग्राही बल व घटक की दिशाओं के साथ स्थितियाँ बदलते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — Gᵢⱼ(x, t; ξ, 0) = Gⱼᵢ(ξ, t; x, 0): स्रोत व ग्राही बल व घटक की दिशाओं के साथ स्थितियाँ बदलते हैं

    व्युत्क्रमता कहती है Gᵢⱼ(x, t; ξ, 0) = Gⱼᵢ(ξ, t; x, 0): ξ पर दिशा j का बल, x पर घटक i में अभिलिखित हो, तो वह x पर दिशा i के बल का ξ पर घटक j में अभिलेख के बराबर है। केवल स्थितियाँ बदलना, जो भ्रामक रूप है, तभी सत्य है जब i = j हो। कथन में न चिह्न-परिवर्तन है, न काल-उत्क्रमण।
  9. प्रत्यास्थगतिकी के सहसंबंध-प्रकार व संवलन-प्रकार निरूपण प्रमेयों में सही अंतर कौन-सा कथन करता है?

    1. संवलन प्रकार को ह्रास-रहित माध्यम चाहिए, जबकि सहसंबंध प्रकार क्षीणन वाले माध्यम में भी वैध रहता है
    2. सहसंबंध प्रकार केवल समांगी अर्ध-आकाश में समतल तरंगों के लिए यथार्थ है, इसलिए उसे अभिलिखित शोर पर लागू नहीं किया जा सकता
    3. सहसंबंध प्रकार एक काल-व्युत्क्रमित तरंग-क्षेत्र लेता है और ह्रास-रहित माध्यम माँगता है; वह परस्पर-सहसंबंध से ग्रीन फलन देता है
    4. संवलन प्रकार केवल समांगी माध्यम में P तरंगों के लिए मान्य है, जबकि सहसंबंध प्रकार सभी तरंग-प्रकारों व संरचनाओं के लिए मान्य है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — सहसंबंध प्रकार एक काल-व्युत्क्रमित तरंग-क्षेत्र लेता है और ह्रास-रहित माध्यम माँगता है; वह परस्पर-सहसंबंध से ग्रीन फलन देता है

    संवलन-प्रकार प्रमेय काल-अपरिवर्ती माध्यमों में, क्षीणन सहित या रहित, मान्य है और भूकंप-लेख = स्रोत ∗ ग्रीन फलन देता है। सहसंबंध-प्रकार प्रमेय में एक तरंग-क्षेत्र काल-व्युत्क्रमित होता है, जो तभी मान्य है जब माध्यम ह्रास-रहित (काल-व्युत्क्रम-अपरिवर्ती) हो; यही भूकंपीय व्यतिकरणमिति का आधार है, जिसमें दो ग्राहियों के अभिलेखों का परस्पर-सहसंबंध उनके बीच का ग्रीन फलन देता है। ह्रास-रहित शर्त को उलटने वाला कथन भ्रामक जाल है।
  10. परिमाण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. आघूर्ण परिमाण भूकंपीय आघूर्ण M0 = μAD से व्युत्पन्न होता है और सबसे बड़े भूकंपों के लिए संतृप्त नहीं होता
    2. एक ही दूरी पर समान यंत्रों पर अभिलिखित दो घटनाएँ, जिनके अधिकतम आयामों का अनुपात 100 है, दो परिमाण-इकाई से भिन्न हैं
    3. दो परिमाण-इकाइयों का अंतर दोनों भूकंपों द्वारा विकिरित भूकंपीय ऊर्जा में 100 गुना अंतर के अनुरूप है
    4. संशोधित मरकैली तीव्रता एक ऐसी एकल संख्या है जो पूरे भूकंप को चिह्नित करती है, जैसे परिमाण करता है, चाहे वह किसी भी स्थान पर प्रेक्षित हो
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    उत्तर: A — आघूर्ण परिमाण भूकंपीय आघूर्ण M0 = μAD से व्युत्पन्न होता है और सबसे बड़े भूकंपों के लिए संतृप्त नहीं होता; B — एक ही दूरी पर समान यंत्रों पर अभिलिखित दो घटनाएँ, जिनके अधिकतम आयामों का अनुपात 100 है, दो परिमाण-इकाई से भिन्न हैं

    Mw, M0 से आता है और संतृप्त नहीं होता, और समान यंत्र व दूरी के लिए ΔM = log10(A1/A2) = log10(100) = 2। दो इकाइयों पर ऊर्जा 10^(1.5 × 2) = 1000 गुना बदलती है, 100 गुना नहीं। तीव्रता स्थानीय व प्रेक्षित है, इसलिए एक भूकंप के अनेक तीव्रता-मान होते हैं पर परिमाण एक।
  11. भूकंपविवर्तनिक परिवेशों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. मध्य-महासागरीय कटकों के अक्षों के अनुदिश भूकंप उथले होते हैं और मुख्यतः सामान्य भ्रंशन दिखाते हैं
    2. महासागरीय रूपांतर भ्रंश मुख्यतः स्ट्राइक-स्लिप भूकंप उत्पन्न करते हैं
    3. सबडक्शन क्षेत्रों में सबसे गहरे भूकंप आते हैं, जो लगभग 700 km तक फैले हैं
    4. 300 से 700 km गहराई के गहरे-फ़ोकस भूकंप मध्य-महासागरीय कटक-अक्षों के नीचे सामान्य हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — मध्य-महासागरीय कटकों के अक्षों के अनुदिश भूकंप उथले होते हैं और मुख्यतः सामान्य भ्रंशन दिखाते हैं; B — महासागरीय रूपांतर भ्रंश मुख्यतः स्ट्राइक-स्लिप भूकंप उत्पन्न करते हैं; C — सबडक्शन क्षेत्रों में सबसे गहरे भूकंप आते हैं, जो लगभग 700 km तक फैले हैं

    कटक-अक्ष विस्तारी व उथले हैं (सामान्य भ्रंशन), रूपांतर क्षैतिज सरकते हैं (स्ट्राइक-स्लिप), और अवरोही पट्टिका का वाडाटी–बेनिऑफ़ क्षेत्र भूकंपों को लगभग 700 km तक ले जाता है। कटक के नीचे स्थलमंडल पतला व गर्म है, इसलिए वहाँ 300 से 700 km पर भूकंप नहीं आते; गहरी घटनाओं को ठंडी, धँसती पट्टिकाएँ चाहिए।
  12. प्रत्यास्थगतिकी के प्रमेयों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. दिए गए पिंड-बल, आरंभिक प्रतिबंध व सीमा-आँकड़ों (विस्थापन या कर्षण) के लिए पिंड में विस्थापन-क्षेत्र अद्वितीय है
    2. व्युत्क्रमता से, A पर दिशा j का बल B पर घटक i में अभिलिखित हो तो वह B पर दिशा i के बल के A पर घटक j में अभिलेख के बराबर है
    3. अद्वितीयता प्रमेय सिद्ध करता है कि भूकंप-लेखों का दिया गया समुच्चय केवल एक ही स्रोत से उत्पन्न हो सकता था, स्टेशन चाहे जैसे बिछे हों
    4. संवलन-प्रकार निरूपण प्रमेय तभी मान्य है जब माध्यम ह्रास-रहित हो, किसी भी प्रकार का क्षीणन न हो
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    उत्तर: A — दिए गए पिंड-बल, आरंभिक प्रतिबंध व सीमा-आँकड़ों (विस्थापन या कर्षण) के लिए पिंड में विस्थापन-क्षेत्र अद्वितीय है; B — व्युत्क्रमता से, A पर दिशा j का बल B पर घटक i में अभिलिखित हो तो वह B पर दिशा i के बल के A पर घटक j में अभिलेख के बराबर है

    अद्वितीयता व व्युत्क्रमता सही कही गई हैं। अद्वितीयता अग्र समस्या के बारे में है (स्रोत दिए हों तो क्षेत्र अद्वितीय); वह क्षेत्र से स्रोत पाने के बारे में कुछ नहीं कहती, जहाँ भिन्न स्रोत अविभेद्य अभिलेख दे सकते हैं। संवलन-प्रकार प्रमेय क्षीणन में भी मान्य है; ह्रास-रहित होने की शर्त सहसंबंध प्रकार की है।
  13. एक स्टेशन S आगमन को P आगमन के 10.0 s बाद अभिलिखित करता है। एकसमान वेग Vp = 6.0 km/s व Vs = 3.5 km/s तथा फ़ोकस की गहराई 36 km लीजिए। स्टेशन की अधिकेंद्रीय दूरी, km में एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 75.9

    फ़ोकसी दूरी d = Δt · Vp·Vs/(Vp − Vs) = 10 × (6.0 × 3.5)/2.5 = 10 × 8.4 = 84 km। अधिकेंद्रीय दूरी में गहराई हटाते हैं: √(84² − 36²) = √(7056 − 1296) = √5760 = 75.9 km। 84 km बताना गहराई वाला चरण भूल जाना है।
  14. एक विभंग 20 km लंबा व 10 km चौड़ा है, औसत सर्पण 1.5 m व दृढ़ता 3.0 × 10¹⁰ Pa है। Mw = (2/3)(log10 M0 − 9.1), M0 N·m में, का उपयोग करने पर आघूर्ण परिमाण एक दशमलव स्थान तक ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 6.6

    A = 20 000 × 10 000 = 2.0 × 10⁸ m²। M0 = μAD = 3.0 × 10¹⁰ × 2.0 × 10⁸ × 1.5 = 9.0 × 10¹⁸ N·m, अतः log10 M0 = 18.954 और Mw = (2/3)(18.954 − 9.1) = 6.57, यानी 6.6। लंबाइयों को मीटर में बदले बिना km में रखना प्रचलित भूल है।
  15. किसी क्षेत्र में परिमाण ≥ M के भूकंपों की वार्षिक संख्या log10 N = 4.5 − 0.9 M का अनुसरण करती है। M ≥ 6.5 के भूकंपों का माध्य पुनरावृत्ति-अंतराल, निकटतम पूर्ण वर्ष में, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 22

    log10 N = 4.5 − 0.9 × 6.5 = 4.5 − 5.85 = −1.35, अतः N = 10^−1.35 = 0.0447 प्रति वर्ष। पुनरावृत्ति-अंतराल T = 1/N = 10^1.35 = 22.4 वर्ष है, जो निकटतम वर्ष में 22 वर्ष है। N (0.045) को ही अंतराल मान लेना प्रचलित भूल है।
  16. दो भूकंप एक ही दूरी पर समान वुड–एंडरसन सीस्मोग्राफ़ों पर अभिलिखित होते हैं। बड़ी घटना का अधिकतम अभिलेख-आयाम छोटी घटना का 250 गुना है। स्थानीय परिमाण ML का अंतर, दो दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 2.40

    समान यंत्र व दूरी पर दूरी-पद कट जाता है, अतः ΔML = log10(A1/A2) = log10 250 = 2.398, यानी 2.40। आयाम-अनुपात की जगह ऊर्जा-संबंध (प्रति इकाई 10^1.5 गुणक) लगाने पर भिन्न, गलत संख्या आती।
  17. किसी भूकंप में S-तरंग वेग β = 3.5 km/s, कॉर्नर आवृत्ति fc = 0.20 Hz और भूकंपीय आघूर्ण M0 = 5.0 × 10¹⁸ N·m है। स्रोत-त्रिज्या हेतु r = 0.37 β/fc और प्रतिबल-ह्रास हेतु Δσ = 7 M0/(16 r³) का उपयोग कीजिए। प्रतिबल-ह्रास MPa में, निकटतम पूर्ण संख्या तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 8

    r = 0.37 × 3500/0.20 = 6475 m। तब Δσ = 7 × 5.0 × 10¹⁸/(16 × 6475³) = 3.5 × 10¹⁹/(16 × 2.715 × 10¹¹) = 8.06 × 10⁶ Pa, यानी 8 MPa। M0 N·m में हो और r km में छोड़ दें तो परिणाम 10⁹ के गुणक से गलत आता है।