विद्युत विधियाँ: शैलों में चालन, DC प्रतिरोधकता, आभासी आवेश्यता, स्तरित-पृथ्वी ध्वनन व व्याख्या

यह अध्याय भूविज्ञान एवं भूभौतिकी (GG) पेपर के भाग B2 के शीर्षक “विद्युत विधियाँ” का उत्तर देता है: “शैलों में विद्युत का चालन, धातुओं, अधातुओं, शैल-निर्माता खनिजों व विभिन्न शैलों की विद्युत चालकताएँ, D.C. प्रतिरोधकता मापन की संकल्पनाएँ व अन्वेषण-गहराई; आभासी प्रतिरोधकता व आभासी आवेश्यता, व्युत्क्रमता का सिद्धांत, ध्वनन व प्रोफ़ाइलन, विभिन्न इलेक्ट्रोड-विन्यास, रैखिक फ़िल्टर सिद्धांत का अनुप्रयोग, बहु-स्तरित पृथ्वी पर ध्वनन वक्र, प्रतिरोधकता क्षेत्र-आँकड़ों की व्याख्या, तुल्यता व दमन के सिद्धांत।” यह चालन-क्रियाविधियाँ व आर्ची का नियम, बिंदु-स्रोत विभव व ज्यामितीय गुणक K, अन्वेषण-गहराई, ध्वनन बनाम प्रोफ़ाइलन, व्युत्क्रमता, प्रेरित ध्रुवण, डार ज़रूक प्राचल व वक्र-प्रकार, फ़िल्टर विधि, तथा तुल्यता व दमन पढ़ाता है। संख्यात्मक प्रश्न वेनर, श्लमबर्जर व द्विध्रुव-द्विध्रुव विन्यासों हेतु ρa = K ΔV/I, आर्ची प्रतिरोधकता, परतों के ढेर की अनुदैर्घ्य प्रतिरोधकता तथा आवेश्यता हैं।

1. शैलों में चालन, भू-पदार्थों की प्रतिरोधकताएँ व आर्ची का नियम

प्रतिरोधकता ρ (Ω·m) चालकता σ (S/m) का व्युत्क्रम है। धारा तीन क्रियाविधियों से बहती है। इलेक्ट्रॉनिक चालन धातुओं, ग्रेफ़ाइट व अनेक सल्फ़ाइड-ऑक्साइडों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों से होता है। धातुओं में ताप बढ़ने पर चालकता घटती है। धातुएँ व ग्रेफ़ाइट सर्वोत्तम चालक हैं, जबकि पाइराइट, चाल्कोपाइराइट, गैलेना व मैग्नेटाइट जैसे अयस्क-खनिज अर्धचालक हैं जिनके मानों का परास विस्तृत है। वैद्युत-अपघटनी चालन रंध्र-जल के आयनों से होता है, और ताप के साथ चालकता बढ़ती है, लगभग 2 प्रतिशत प्रति °C। विद्युतरोधियों में परावैद्युत विस्थापन केवल उच्च आवृत्ति पर मायने रखता है। शैल-निर्माता खनिज (क्वार्ट्ज़, फ़ेल्स्पार, अभ्रक, कैल्साइट, पाइरॉक्सीन, ऑलिवीन) व गंधक शुष्क होने पर विद्युतरोधी हैं, अतः शैल मुख्यतः अपने रंध्रों व दरारों के जल से चालन करती है: प्रतिरोधकता रंध्रता, संतृप्ति व लवणता बढ़ने पर घटती है और संपीडन व सीमेंटीकरण से बढ़ती है।

अनुमानित प्रतिरोधकताएँ (परास परस्पर व्याप्त हैं और जल, मृदा व गठन पर निर्भर)
पदार्थप्रतिरोधकता (Ω·m)क्या नियंत्रित करता है
देशज ताँबालगभग 2 × 10⁻⁸मुक्त इलेक्ट्रॉन
ठोस सल्फ़ाइड, ग्रेफ़ाइटलगभग 10⁻⁵ से 1संबद्ध चालक कण
समुद्री जललगभग 0.2घुले लवण
आर्द्र मृत्तिकालगभग 1 से 30जल व मृदा-सतह चालन
मीठा भूजल, संतृप्त बालू व बजरीदहाई से कुछ सौरंध्रता, जल की गुणवत्ता
शुष्क क्रिस्टलीय शैल (ग्रेनाइट, नाइस)10³ से 10⁶दरारें व उनका जल
शुष्क क्वार्ट्ज़10¹⁰ से ऊपरविद्युतरोधी

स्वच्छ, जल-संतृप्त शैल हेतु आर्ची का नियम: ρ₀ = a ρw φ^(−m), अतः गठन गुणक (formation factor) F = ρ₀/ρw = a φ^(−m), जहाँ a ≈ 1 और सीमेंटन घातांक m ≈ 2 (ढीली बालू हेतु लगभग 1.3 से कठोर शैल हेतु 2.5)। आंशिक संतृप्ति Sw पर ρt = ρ₀ Sw^(−n), n ≈ 2। उदाहरण: ρw = 0.5 Ω·m, φ = 0.2, a = 1, m = 2 से ρ₀ = 0.5/0.04 = 12.5 Ω·m; Sw = 0.5 पर शैल ρt = 12.5/0.25 = 50 Ω·m दर्शाती है, अतः जल निकलने से प्रतिरोधकता बढ़ती है।

⚠️ आर्ची मृण्मय शैल में विफल है
मृदा खनिज रंध्र-जल के समांतर सतह-चालन जोड़ते हैं, अतः मृण्मय शैल आर्ची के पूर्वानुमान से अधिक चालक होती है और कम प्रतिरोधकता का अर्थ जल नहीं, मृत्तिका हो सकता है। यह भी याद रखें कि ताप का नियम धातुओं व वैद्युत-अपघटकों हेतु उलटा है।

2. DC प्रतिरोधकता: बिंदु-स्रोत, ज्यामितीय गुणक, आभासी प्रतिरोधकता व अन्वेषण-गहराई

एकसमान अर्ध-अंतरिक्ष की सतह पर धारा I प्रविष्ट कराता बिंदु इलेक्ट्रोड उसे क्षेत्रफल 2πr² के गोलार्धों में फैलाता है, अतः विभव V = ρ I/(2π r) है (पूर्ण अंतरिक्ष में 4π r²)। धारा-इलेक्ट्रोड A, B व विभव-इलेक्ट्रोड M, N के साथ अध्यारोपण से ΔV = (ρ I/2π)(1/AM − 1/BM − 1/AN + 1/BN), अतः ρ = K ΔV/I, जहाँ ज्यामितीय गुणक K = 2π/(1/AM − 1/BM − 1/AN + 1/BN)। वास्तविक पृथ्वी पर यही सूत्र आभासी प्रतिरोधकता ρa परिभाषित करता है: उस एकसमान अर्ध-अंतरिक्ष की प्रतिरोधकता जो उसी विन्यास से वही ΔV/I देता। यह संवेदित आयतन पर भारित औसत है, परतों की प्रतिरोधकताओं का माध्य नहीं।

प्रचलित विन्यास व उनके ज्यामितीय गुणक
विन्यासव्यवस्थाK
वेनरA M N B बराबर अंतर a पर2π a
श्लमबर्जरAB = 2L, MN = 2l, MN, AB/5 से अधिक नहीं, केंद्रितπ (L² − l²)/(2l), लगभग π L²/(2l)
द्विध्रुव–द्विध्रुवAB = MN = a, निकटतम इलेक्ट्रोड B व M, n a से पृथक्π n (n + 1)(n + 2) a

व्युत्पत्ति जाँच, वेनर: AM = a, BM = 2a, AN = 2a, BN = a, अतः कोष्ठक 1/a − 1/2a − 1/2a + 1/a = 1/a है और K = 2π a। हल उदाहरण: a = 20 m, ΔV = 50 mV, I = 0.5 A से K = 125.7 m और ρa = 125.7 × 0.05/0.5 = 12.57 Ω·m।

अन्वेषण-गहराई का कोई तीक्ष्ण मान नहीं है, क्योंकि धारा सभी गहराइयों पर बहती है; वह इलेक्ट्रोड-अंतर के साथ बढ़ती है। प्रचलित माप वह माध्य गहराई है जिससे ऊपर आधा संकेत उत्पन्न होता है, वेनर विन्यास हेतु लगभग 0.5a (उसकी कुल लंबाई 3a का 0.17)। श्लमबर्जर में यह AB/2 के साथ और द्विध्रुव–द्विध्रुव में n के साथ बढ़ती है। z गहराई की परत देखने हेतु अंतर z का कुछ गुना होना चाहिए, और अधिक गहराई की पतली परत को बड़ा विषमता चाहिए।

3. ध्वनन, प्रोफ़ाइलन, इलेक्ट्रोड-विन्यास व व्युत्क्रमता का सिद्धांत

  • ध्वनन (VES): विन्यास का केंद्र स्थिर रहता है और अंतर बढ़ाया जाता है, तथा ρa को अंतर के विरुद्ध लघुगणकीय आलेख पर खींचा जाता है। यह ऊर्ध्वाधर परिवर्तन दर्शाता है और क्षैतिज परतें (1D) मानता है। श्लमबर्जर में अधिकांश पाठ्यांकों हेतु केवल A व B चलते हैं, और ΔV बहुत छोटा होने पर M व N को यदा-कदा चौड़ा किया जाता है; अतिव्याप्त खंडों के बीच छोटा पाद MN के पास पार्श्विक असमांगता का संकेत देता है। वेनर में प्रत्येक पाठ्यांक पर चारों इलेक्ट्रोड चलते हैं, जो धीमा है और निकट-सतही पार्श्विक रव पकड़ता है।
  • प्रोफ़ाइलन (स्थिर-अंतर संचरण): स्थिर विन्यास एक रेखा पर चलाया जाता है, अतः ρa लगभग स्थिर गहराई पर पार्श्विक परिवर्तन आलेखित करता है: डाइक, भ्रंश, गुहाएँ, दबी नालियाँ। वेनर, श्लमबर्जर व द्विध्रुव–द्विध्रुव सभी प्रयुक्त होते हैं।
  • प्रतिबिंबन (ERT): अनेक स्थिर इलेक्ट्रोड, अंतर व स्थिति के अनेक संयोजनों में पढ़े जाकर 2D या 3D में प्रतिलोमित होते हैं, जो दोनों विचारों को जोड़ता है।

व्युत्क्रमता। धारा-युग्म व विभव-युग्म की अदला-बदली मापे प्रतिरोध ΔV/I को अपरिवर्तित छोड़ती है: R(AB; MN) = R(MN; AB)। ज्यामितीय गुणक भी सममित है, अतः ρa अपरिवर्तित रहती है। युग्मों की अदला-बदली कर पाठ्यांक दोहराना इसलिए आँकड़ों की गुणवत्ता की जाँच है (व्युत्क्रम त्रुटि), और व्युत्क्रमता सर्वेक्षण-अभिकल्पक को वह विन्यास चुनने देती है जो बिछाने में सरल हो तथा प्रतिबिंबन में प्रयुक्त संवेदनशीलता-परिकलन का आधार है।

⚠️ ध्वनन प्रोफ़ाइलन नहीं है
ध्वनन स्थिर केंद्र पर अंतर बदलकर गहराई पढ़ता है; प्रोफ़ाइल स्थिर अंतर पर स्थिति बदलकर पार्श्विक परिवर्तन पढ़ती है। 1D परतों के रूप में व्याख्यायित ध्वनन ऊर्ध्वाधर संस्पर्श या भ्रंश के पास गलत होता है, जहाँ पार्श्विक परिवर्तन को गहराई-परिवर्तन समझ लिया जाता है।

4. आभासी आवेश्यता व प्रेरित ध्रुवण

धारा बंद करने पर M व N के बीच विभव तुरंत शून्य नहीं होता, बल्कि सेकंडों में क्षीण होता है: भूमि ने आवेश संचित किया है, और यही प्रेरित ध्रुवण (IP) है। दो कारण प्रमुख हैं। इलेक्ट्रोड ध्रुवण तब होता है जब रंध्र-पथ के आयन धात्विक कण (विकीर्ण सल्फ़ाइड, ग्रेफ़ाइट, कुछ ऑक्साइड) पर जमा हो जाते हैं। झिल्ली ध्रुवण मृदा-कणों व संकरी रंध्र-ग्रीवाओं पर होता है जो आयन-गति रोकते हैं। अतः IP ध्रुवणीय खनिज की मात्रा के प्रति संवेदी है, जबकि प्रतिरोधकता रंध्र-जल के प्रति।

काल-प्रक्षेत्र में क्षय विभव Vs(t) की तुलना स्थिर विभव Vp से होती है: आवेश्यता M = (1/Vp) ∫ Vs(t) dt, निर्धारित खिड़की पर (ms में), या केवल धारा बंद होने के ठीक बाद Vs/Vp, mV/V में। असमान पृथ्वी पर मापा मान आभासी आवेश्यता ma है, उस एकसमान पृथ्वी की आवेश्यता जो उसी विन्यास से वही पाठ्यांक देती। उदाहरण: Vp = 800 mV व Vs = 24 mV से ma = 24/800 = 0.03 = 30 mV/V। आवृत्ति-प्रक्षेत्र में ρa निम्न व उच्चतर आवृत्ति पर मापी जाती है, और प्रतिशत आवृत्ति प्रभाव PFE = 100 (ρनिम्न − ρउच्च)/ρउच्च है, जो धनात्मक है क्योंकि आवृत्ति बढ़ने पर ρa घटती है।

5. स्तरित पृथ्वी: डार ज़रूक प्राचल व ध्वनन-वक्र प्रकार

hᵢ मोटाई व ρᵢ प्रतिरोधकता वाली परतों हेतु अनुदैर्घ्य चालकत्व S = Σ hᵢ/ρᵢ (सीमेंस) और अनुप्रस्थ प्रतिरोध T = Σ hᵢ ρᵢ (Ω·m²) है। परतों के अनुदिश बहती धारा उन्हें समांतर पाती है, जिससे अनुदैर्घ्य प्रतिरोधकता ρL = H/S; उन्हें पार करती धारा श्रेणी में पाती है, जिससे अनुप्रस्थ प्रतिरोधकता ρT = T/H, जहाँ H = Σ hᵢ। सदैव ρT ≥ ρL, अतः ढेर विद्युतीय रूप से विषमदैशिक है, विषमदैशिकता गुणांक λ = √(ρT/ρL) ≥ 1। उदाहरण: 20 Ω·m की 10 m परत के नीचे 5 Ω·m की 30 m परत से S = 0.5 + 6 = 6.5 S, T = 200 + 150 = 350 Ω·m², ρL = 40/6.5 = 6.15 Ω·m, ρT = 8.75 Ω·m और λ = 1.19।

त्रि-स्तरीय ध्वनन-वक्र प्रकार
प्रकारप्रतिरोधकताएँवक्र का आकार
Hρ1 > ρ2 < ρ3न्यूनतम तक गिरता है, फिर बढ़ता है
Kρ1 < ρ2 > ρ3उच्चिष्ठ तक बढ़ता है, फिर गिरता है
Aρ1 < ρ2 < ρ3पूरे समय बढ़ता है
Qρ1 > ρ2 > ρ3पूरे समय गिरता है

छोटे अंतर पर ρa प्रथम परत की ρ1 की ओर जाती है, और बहुत बड़े अंतर पर अंतिम परत की प्रतिरोधकता की ओर। अति प्रतिरोधी आधार के ऊपर पश्च शाखा लघुगणकीय आलेख पर 45° पर बढ़ती है: विद्युतरोधी के ऊपर अनुदैर्घ्य चालकत्व S1 की परत हेतु श्लमबर्जर विन्यास में ρa = (AB/2)/S1, जो सीधे S1 देता है। आलेखित वक्र समतल होते हैं, क्योंकि प्रत्येक पाठ्यांक एक आयतन पर औसत है, अतः सीमा क्रमिक परिवर्तन के रूप में दिखती है, जो सीमा की गहराई से बड़े अंतर पर मुड़ता है।

6. रैखिक फ़िल्टर सिद्धांत, क्षेत्र-आँकड़ों की व्याख्या, तुल्यता व दमन

स्तरित पृथ्वी हेतु प्रतिरोधकता रूपांतर T(λ) नीचे से ऊपर बनता है: Tₙ = ρₙ, और Tᵢ = (Tᵢ₊₁ + ρᵢ tanh(λ hᵢ))/(1 + Tᵢ₊₁ tanh(λ hᵢ)/ρᵢ)। तब श्लमबर्जर वक्र ρa(s) = s² ∫ T(λ) J1(λ s) λ dλ है, जहाँ s = AB/2। s = e^x व λ = e^(−y) लिखने पर यह लघुगणकीय चरों में संवलन बन जाता है, ρa(x) = ∫ T(y) f(x − y) dy, अतः इसे प्रति दशक कुछ बिंदुओं पर T के स्थिर फ़िल्टर गुणांकों वाले छोटे भारित योग से परिकलित किया जा सकता है। यही रैखिक फ़िल्टर सिद्धांत है: अग्र-मॉडल धीमे बेसल समाकल के बजाय मिलीसेकंड में बनता है, और वही फ़िल्टर उलटा चलाने पर प्रेक्षित वक्र को T(λ) में बदलता है, जिससे परतें उतारी जाती हैं।

क्षेत्र-आँकड़ों की व्याख्या एक नियमित क्रम में चलती है: ρa को अंतर के विरुद्ध लघुगणकीय आलेख पर खींचें, वक्र-प्रकार व परतों की संख्या पहचानें, मास्टर वक्रों व सहायक चार्टों से आंशिक वक्र-मिलान द्वारा आरंभिक मॉडल बनाएँ, फिर न्यूनतम-वर्ग प्रतिलोमन से उसे परिष्कृत करें जो ρᵢ व hᵢ तब तक समायोजित करता है जब तक फ़िल्टर-परिकलित वक्र आँकड़ों से न मिल जाए। परिणाम को बोरहोल, शैल-प्रकार व जल-स्तर से जाँचें, और याद रखें कि पार्श्विक संस्पर्शों के पास 1D धारणा विफल होती है।

तुल्यता व दमन
सिद्धांतकब उत्पन्न होता हैक्या निर्धारित रहता है
तुल्यताऐसी मध्य परत जो दोनों पड़ोसियों से अधिक चालक है (H प्रकार)केवल S2 = h2/ρ2; मोटाई व प्रतिरोधकता में समझौता
तुल्यताऐसी मध्य परत जो दोनों पड़ोसियों से अधिक प्रतिरोधी है (K प्रकार)केवल T2 = ρ2 h2
दमनऐसी पतली परत जिसकी प्रतिरोधकता ऊपर व नीचे की परतों के बीच है (A व Q प्रकार)कुछ नहीं: वह पृथक् मोड़ नहीं छोड़ती और छूट जाती है

क्यों। धारा पतली चालक परत के अनुदिश बहती है, अतः केवल उसका चालकत्व S मायने रखता है; धारा को पतली प्रतिरोधी परत पार करनी पड़ती है, अतः केवल उसका प्रतिरोध T मायने रखता है। उदाहरण: 100 Ω·m की 10 m परत के नीचे व 500 Ω·m आधार के ऊपर 10 Ω·m व 5 m (S = 0.5 S) की मध्य परत लगभग वही वक्र देती है, कुछ प्रतिशत के भीतर, जो 20 Ω·m व 10 m (वही S = 0.5 S) की परत देती है, पर 10 Ω·m व 10 m (S = 1 S) की परत वह वक्र नहीं देती। तुल्यता दिखाई दे रही परत में अस्पष्टता है; दमन परत को बिल्कुल न देख पाना है, जिससे छिपी परत किसी पड़ोसी में मिल जाती है और दिखाई देने वाली परतों की व्याख्यायित गहराइयाँ व प्रतिरोधकताएँ गलत आती हैं।

मुख्य बिंदु

  • शैलें मुख्यतः रंध्र-जल (वैद्युत-अपघटनी) से चालन करती हैं, अतः प्रतिरोधकता रंध्रता, संतृप्ति व लवणता बढ़ने पर घटती है। आर्ची: ρ₀ = a ρw φ^(−m) तथा ρt = ρ₀ Sw^(−n), a ≈ 1, m ≈ n ≈ 2। धातुएँ गरम होने पर चालकता खोती हैं; वैद्युत-अपघटक पाते हैं।
  • ρ = K ΔV/I, K = 2π/(1/AM − 1/BM − 1/AN + 1/BN) के साथ: वेनर 2π a; श्लमबर्जर π(L² − l²)/(2l); द्विध्रुव–द्विध्रुव π n(n + 1)(n + 2) a। आभासी प्रतिरोधकता भारित औसत है, और अन्वेषण-गहराई अंतर के साथ बढ़ती है (वेनर हेतु लगभग 0.5a)।
  • ध्वनन स्थिर केंद्र पर अंतर बदलता है (ऊर्ध्वाधर परिवर्तन, 1D); प्रोफ़ाइलन स्थिर विन्यास चलाता है (पार्श्विक परिवर्तन)। व्युत्क्रमता, R(AB; MN) = R(MN; AB), आँकड़ों की गुणवत्ता-जाँच व अभिकल्प-स्वतंत्रता देती है।
  • IP धारा बंद करने के बाद विभव का क्षय है, जो इलेक्ट्रोड ध्रुवण (धात्विक कण) व झिल्ली ध्रुवण (मृदा) से होता है। आभासी आवेश्यता Vs/Vp (mV/V) है; आवृत्ति-प्रक्षेत्र में PFE = 100 (ρनिम्न − ρउच्च)/ρउच्च।
  • S = Σ h/ρ तथा T = Σ hρ; ρL = H/S ≤ ρT = T/H। त्रि-स्तरीय वक्र-प्रकार: H (ρ1 > ρ2 < ρ3), K, A, Q। वक्र ρ1 से आरंभ होकर अंतिम परत की प्रतिरोधकता पर समाप्त होता है।
  • फ़िल्टर विधि बेसल समाकल को लघुगणकीय चरों में संवलन बनाती है, अतः अग्र-मॉडल तीव्र हैं। तुल्यता: चालक मध्य परत S तय करती है, प्रतिरोधी मध्य परत T। दमन: मध्यवर्ती प्रतिरोधकता की पतली परत छूट जाती है।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. एक धातु-तार और एक जल-संतृप्त बलुआ पत्थर दोनों को 30 °C गरम किया जाता है। उनकी विद्युत चालकताएँ कैसे बदलती हैं?

    1. दोनों घटती हैं, क्योंकि अधिक तापीय विक्षोभ उनमें से प्रत्येक में आवेश-वाहकों को प्रकीर्णित करता है
    2. दोनों बढ़ती हैं, क्योंकि गरम करने से उनमें से प्रत्येक में अधिक आवेश-वाहक मुक्त होते हैं और चालन-पथ चौड़े होते हैं
    3. धातु की घटती है जबकि बलुआ पत्थर की बढ़ती है, क्योंकि गरम होने पर रंध्र-जल के आयन सरलता से चलते हैं
    4. धातु की बढ़ती है जबकि बलुआ पत्थर की घटती है, क्योंकि रंध्र-जल फैलकर अपने आयनों को तनु करता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — धातु की घटती है जबकि बलुआ पत्थर की बढ़ती है, क्योंकि गरम होने पर रंध्र-जल के आयन सरलता से चलते हैं

    धातु में गरम करने से मुक्त इलेक्ट्रॉनों का प्रकीर्णन बढ़ता है, अतः चालकता घटती है। जल-संतृप्त शैल अपने रंध्र-जल के आयनों से चालन करती है, जिनकी गतिशीलता ताप के साथ बढ़ती है (लगभग 2 प्रतिशत प्रति °C), अतः उसकी चालकता बढ़ती है। शैल को धातु जैसा मान लेना भ्रामक भूल है।
  2. विशिष्ट प्रतिरोधकताओं का कौन-सा क्रम, निम्नतम से उच्चतम, सही है?

    1. समुद्री जल, आर्द्र मृत्तिका, जल-संतृप्त बालू, शुष्क ग्रेनाइट
    2. आर्द्र मृत्तिका, समुद्री जल, शुष्क ग्रेनाइट, जल-संतृप्त बालू
    3. समुद्री जल, जल-संतृप्त बालू, आर्द्र मृत्तिका, शुष्क ग्रेनाइट
    4. जल-संतृप्त बालू, समुद्री जल, शुष्क ग्रेनाइट, आर्द्र मृत्तिका
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — समुद्री जल, आर्द्र मृत्तिका, जल-संतृप्त बालू, शुष्क ग्रेनाइट

    समुद्री जल सर्वाधिक चालक है (लगभग 0.2 Ω·m), आर्द्र मृत्तिका अपने जल व मृदा-सतह चालन से कुछ से कुछ दहाई Ω·m की है, संतृप्त बालू दहाई से सैकड़ों की, और शुष्क क्रिस्टलीय शैल 10³ Ω·m या अधिक की। बालू को मृत्तिका से नीचे रखना मृदा-खनिजों के सतह-चालन की उपेक्षा है।
  3. DC प्रतिरोधकता सर्वेक्षण में धारा M व N से प्रवाहित की जाती है और विभवांतर A व B के बीच मापा जाता है, जो उसी भूमि पर मूल व्यवस्था का उलटा है। व्युत्क्रमता प्रमेय के अनुसार:

    1. ΔV/I का चिह्न बदलता है परिमाण नहीं, क्योंकि रेखा के सापेक्ष धारा की दिशा उलट जाती है
    2. ΔV/I, AB व MN की लंबाइयों के अनुपात में बदलता है, क्योंकि संवेदित आयतन भिन्न है
    3. ΔV/I तभी अपरिवर्तित रहता है जब भूमि समांगी हो, क्योंकि दोनों स्थितियों में धारा-पथ भिन्न हैं
    4. ΔV/I अपरिवर्तित रहता है, अतः ρa अपरिवर्तित रहती है और दोहराया पाठ्यांक गुणवत्ता की जाँच है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — ΔV/I अपरिवर्तित रहता है, अतः ρa अपरिवर्तित रहती है और दोहराया पाठ्यांक गुणवत्ता की जाँच है

    व्युत्क्रमता कहती है कि स्रोत व ग्राही युग्म बदलने पर अंतरण-प्रतिरोध समान रहता है, किसी भी पृथ्वी हेतु, एकसमान हो या नहीं। ज्यामितीय गुणक भी सममित है, अतः ρa अपरिवर्तित है। इसलिए व्युत्क्रम त्रुटि आँकड़ों की गुणवत्ता की मानक जाँच है। धारा-पथ वास्तव में भिन्न होते हैं, पर प्रतिरोध फिर भी मेल खाता है।
  4. एक दबी ऊर्ध्वाधर डाइक को एक संचरण-रेखा पर उसके पार्श्विक प्रतिरोधकता-विषमता से खोजना है। कौन-सी क्षेत्र-प्रक्रिया सर्वाधिक उपयुक्त है?

    1. एक स्थिर केंद्र के परितः अंतर बढ़ाते हुए ऊर्ध्वाधर विद्युत ध्वनन
    2. स्थिर-अंतर संचरण, जिसमें स्थिर विन्यास को रेखा पर चरण-दर-चरण चलाया जाता है
    3. संचरण-रेखा के मध्य एक दीर्घ-अंतर पाठ्यांक, जिसकी व्याख्या क्षैतिज परतों के रूप में की जाए
    4. संचरण-रेखा के केवल दोनों सिरों पर एक-एक ध्वनन, जिनकी व्याख्या क्षैतिज परतों के रूप में की जाए
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — स्थिर-अंतर संचरण, जिसमें स्थिर विन्यास को रेखा पर चरण-दर-चरण चलाया जाता है

    लगभग स्थिर गहराई पर पार्श्विक परिवर्तन प्रोफ़ाइलन से आलेखित होता है: स्थिर विन्यास रेखा पर चलाया जाता है और ρa को स्थिति के विरुद्ध खींचा जाता है। ध्वनन एक केंद्र पर अंतर बदलता है और क्षैतिज परतें मानता है, अतः वह ऊर्ध्वाधर संस्पर्श नहीं खोज सकता, और पार्श्विक परिवर्तन को गहराई-परिवर्तन समझ सकता है।
  5. एक त्रि-स्तरीय पृथ्वी में ρ1 = 100 Ω·m, ρ2 = 10 Ω·m व ρ3 = 500 Ω·m है, और परत 2 न अत्यंत पतली है न अत्यंत मोटी। उसके श्लमबर्जर ध्वनन-वक्र का कौन-सा वर्णन सही है?

    1. A प्रकार, जिसमें ρa लगभग 100 Ω·m से लगभग 500 Ω·m तक बिना न्यूनतम के सहजता से लगातार बढ़ती है
    2. K प्रकार, जिसमें ρa लगभग 500 Ω·m के पास उच्चिष्ठ तक बढ़कर बड़े अंतर पर लगभग 10 Ω·m तक गिरती है
    3. H प्रकार, जिसमें ρa लगभग 100 Ω·m से आरंभ होकर 10 Ω·m से ऊपर के न्यूनतम से गुज़रती है और 500 Ω·m की ओर बढ़ती है
    4. Q प्रकार, जिसमें ρa लगभग 100 Ω·m से लगभग 10 Ω·m के न्यूनतम तक गिरकर सभी बड़े अंतरों पर वहीं रहती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — H प्रकार, जिसमें ρa लगभग 100 Ω·m से आरंभ होकर 10 Ω·m से ऊपर के न्यूनतम से गुज़रती है और 500 Ω·m की ओर बढ़ती है

    ρ1 > ρ2 < ρ3 H प्रकार है। वक्र ρ1 से आरंभ होकर ρ3 पर समाप्त होता है, और सीमित परत का पड़ोसियों के साथ औसत होने से न्यूनतम ρ2 से ऊपर रहता है। Q प्रकार हेतु ρ1 > ρ2 > ρ3 चाहिए, और K प्रकार हेतु मध्य परत सर्वाधिक प्रतिरोधी होनी चाहिए।
  6. 50 Ω·m भूमि पर एक ध्वनन में 500 Ω·m व 5 m मोटाई की प्रतिरोधी मध्य परत (K प्रकार) दिखती है, जो 50 Ω·m की 10 m ऊपरी परत के नीचे और फिर 50 Ω·m के आधार के ऊपर है। कौन-सी वैकल्पिक मध्य परत ध्वनन-वक्र को सर्वाधिक निकटता से पुनः उत्पन्न करेगी?

    1. 500 Ω·m व 10 m, जो प्रतिरोधकता रखती है और परत को बेहतर विभेदित बनाती है
    2. 250 Ω·m व 10 m, जो अनुप्रस्थ प्रतिरोध ρh को 2500 Ω·m² पर रखती है
    3. 1000 Ω·m व 10 m, जो अनुदैर्घ्य चालकत्व h/ρ को 0.01 S पर रखती है
    4. 250 Ω·m व 5 m, जो प्रतिरोधकता आधी करती है पर मोटाई रखती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 250 Ω·m व 10 m, जो अनुप्रस्थ प्रतिरोध ρh को 2500 Ω·m² पर रखती है

    प्रतिरोधी मध्य परत को धारा को पार करना पड़ता है, अतः वक्र मुख्यतः उसके अनुप्रस्थ प्रतिरोध T = ρh पर निर्भर करता है। यहाँ T = 500 × 5 = 2500 Ω·m² है, जिससे 250 Ω·m व 10 m मेल खाती है, जिसका वक्र केवल कुछ प्रतिशत भिन्न है। 1000 Ω·m व 10 m का मॉडल h/ρ = 0.01 S रखता है, जो चालक परत का अपरिवर्तनीय है, इसलिए वह भ्रामक विकल्प है, पर उसका T 10,000 Ω·m² है और उसका वक्र बहुत भिन्न है।
  7. प्रतिरोधकता ध्वनन में कौन-सी परत सर्वाधिक संभावित रूप से दमित होती है, अर्थात वक्र पर कोई पहचानने योग्य मोड़ नहीं छोड़ती?

    1. ऐसी मोटी परत जो अपने ऊपर व नीचे की परतों से कहीं अधिक प्रतिरोधी है और स्पष्ट उच्चिष्ठ देती है
    2. ऐसी मोटी परत जो अपने दोनों पड़ोसियों से कहीं अधिक चालक है और स्पष्ट न्यूनतम देती है
    3. सबसे ऊपरी परत, क्योंकि सबसे छोटे अंतर पर ρa, ρ1 की ओर जाती है और इसलिए उसे छिपा देती है
    4. ऐसी पतली परत जिसकी प्रतिरोधकता उसके ऊपर व नीचे की परतों के बीच है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — ऐसी पतली परत जिसकी प्रतिरोधकता उसके ऊपर व नीचे की परतों के बीच है

    मध्यवर्ती प्रतिरोधकता की पतली परत (A व Q प्रकार) केवल समतल परिवर्तन देती है जो द्वि-स्तरीय वक्र से अविभेद्य है, अतः वह दमित हो जाती है। मोटी विषम परत, प्रतिरोधी या चालक, स्पष्ट उच्चिष्ठ या न्यूनतम बनाती है, और ऊपरी परत छोटे अंतर पर सदा दिखती है।
  8. श्लमबर्जर ध्वनन हेतु रैखिक फ़िल्टर विधि में आभासी प्रतिरोधकता प्रतिरोधकता रूपांतर T(λ) से कैसे प्राप्त होती है?

    1. लघुगणकीय चरों में संवलन से, जो स्थिर फ़िल्टर गुणांकों के छोटे भारित योग के रूप में परिकलित होता है
    2. धारा बंद होने के बाद अंकित विभव-क्षय के समय में फूरिए रूपांतर से
    3. लघुगणकीय ध्वनन-वक्र के खंडों पर न्यूनतम-वर्ग सरल-रेखा संगति से
    4. निश्चित मोटाई व प्रतिरोधकता अनुपातों के मुद्रित मास्टर वक्रों पर प्रेक्षित वक्र के आलेखी अधिरोपण से
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — लघुगणकीय चरों में संवलन से, जो स्थिर फ़िल्टर गुणांकों के छोटे भारित योग के रूप में परिकलित होता है

    s = e^x व λ = e^(−y) लिखने पर ρa(s) = s² ∫ T(λ) J1(λ s) λ dλ संवलन बन जाता है, जिसे प्रति दशक कुछ बिंदुओं पर स्थिर गुणांकों वाले T के छोटे योग से परिकलित किया जाता है। समय-प्रक्षेत्र क्षय IP का विषय है, और वक्र-मिलान व रेखा-संगति भिन्न, गैर-फ़िल्टर प्रक्रियाएँ हैं।
  9. प्रेरित ध्रुवण (IP) के बारे में कौन-सा कथन सही है?

    1. धारा बंद होने के बाद का क्षय-विभव उन भँवर-धाराओं से होता है जो भूमि में कुछ समय तक बहती रहती हैं
    2. इलेक्ट्रोड ध्रुवण धात्विक कणों पर होता है, अतः IP उन सल्फ़ाइडों को खोज सकता है जो प्रतिरोधकता को मुश्किल से बदलते हैं
    3. आभासी आवेश्यता Ω·m में मापी जाती है, आभासी प्रतिरोधकता की भाँति, क्योंकि दोनों ΔV/I व K से परिकलित होती हैं
    4. झिल्ली ध्रुवण केवल चौड़े रंध्रों वाली स्वच्छ शैलों में होता है, जहाँ आयन स्वतंत्र चलते हैं और अवरुद्ध नहीं हो सकते
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — इलेक्ट्रोड ध्रुवण धात्विक कणों पर होता है, अतः IP उन सल्फ़ाइडों को खोज सकता है जो प्रतिरोधकता को मुश्किल से बदलते हैं

    धात्विक कणों पर इलेक्ट्रोड ध्रुवण विकीर्ण अयस्क हेतु IP की मुख्य क्रियाविधि है, और वह रंध्र-जल की प्रतिरोधकता के बजाय ध्रुवणीय खनिज की मात्रा के प्रति प्रतिक्रिया करती है। IP क्षय संचित-आवेश प्रभाव है, भँवर-धाराएँ नहीं, जो EM विधियों की हैं। आवेश्यता mV/V या ms में है, और झिल्ली ध्रुवण को मृदा या संकरी रंध्र-ग्रीवाएँ चाहिए।
  10. इलेक्ट्रोड विन्यासों व आभासी प्रतिरोधकता के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. अंतर a वाले वेनर विन्यास हेतु ρa = 2π a ΔV/I
    2. श्लमबर्जर ध्वनन में प्रत्येक पाठ्यांक पर चारों इलेक्ट्रोड चलाए जाते हैं
    3. विन्यास की अन्वेषण-गहराई उसके इलेक्ट्रोड-अंतर के बढ़ने पर बढ़ती है
    4. आभासी प्रतिरोधकता उपस्थित परतों की सत्य प्रतिरोधकताओं का अंकगणितीय माध्य है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — अंतर a वाले वेनर विन्यास हेतु ρa = 2π a ΔV/I; C — विन्यास की अन्वेषण-गहराई उसके इलेक्ट्रोड-अंतर के बढ़ने पर बढ़ती है

    वेनर का ज्यामितीय गुणक 2π a है, और बड़ा अंतर अधिक गहराई का प्रतिचयन करता है। श्लमबर्जर ध्वनन में मुख्यतः A व B फैलाए जाते हैं, M व N केवल यदा-कदा चौड़े किए जाते हैं। आभासी प्रतिरोधकता संवेदित आयतन पर भारित औसत है जो विन्यास पर निर्भर है, परत-मानों का सरल अंकगणितीय माध्य नहीं।
  11. क्षैतिज परतों के ढेर के डार ज़रूक प्राचलों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. अनुदैर्घ्य चालकत्व S परतों पर गुणनफलों h × ρ का योग है
    2. ढेर की अनुदैर्घ्य प्रतिरोधकता कभी उसकी अनुप्रस्थ प्रतिरोधकता से अधिक नहीं होती
    3. 5 Ω·m की 30 m परत के ऊपर 20 Ω·m की 10 m परत के ढेर का कुल अनुदैर्घ्य चालकत्व 6.5 S है
    4. भिन्न प्रतिरोधकताओं वाली परतों का ढेर पूरे ढेर के पैमाने पर विद्युतीय रूप से समदैशिक है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — ढेर की अनुदैर्घ्य प्रतिरोधकता कभी उसकी अनुप्रस्थ प्रतिरोधकता से अधिक नहीं होती; C — 5 Ω·m की 30 m परत के ऊपर 20 Ω·m की 10 m परत के ढेर का कुल अनुदैर्घ्य चालकत्व 6.5 S है

    S, h/ρ का योग है (hρ का नहीं, जो अनुप्रस्थ प्रतिरोध T देता है)। परतों के अनुदिश धारा उन्हें समांतर व आर-पार श्रेणी में पाती है, अतः ρL = H/S कभी ρT = T/H से अधिक नहीं होती और ढेर विषमदैशिक है। संख्यात्मक रूप में S = 10/20 + 30/5 = 0.5 + 6 = 6.5 S।
  12. स्वच्छ, मृदा-रहित शैल हेतु आर्ची के नियम के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. गठन गुणक F = ρ₀/ρw रंध्रता व सीमेंटन पर निर्भर है, जल की प्रतिरोधकता पर नहीं
    2. नियम मृदा-समृद्ध शैल पर अपरिवर्तित लागू होता है, क्योंकि मृदा खनिज अपना कोई चालन नहीं जोड़ते
    3. रंध्र-जल को गरम करने से उसकी प्रतिरोधकता बढ़ती है, अतः पूरी शैल की प्रतिरोधकता भी बढ़ती है
    4. जल-संतृप्ति Sw घटाने पर प्रतिरोधकता अपने संतृप्त मान से ऊपर गुणक Sw^(−n) से बढ़ती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — गठन गुणक F = ρ₀/ρw रंध्रता व सीमेंटन पर निर्भर है, जल की प्रतिरोधकता पर नहीं; D — जल-संतृप्ति Sw घटाने पर प्रतिरोधकता अपने संतृप्त मान से ऊपर गुणक Sw^(−n) से बढ़ती है

    F = a φ^(−m) में केवल रंध्र-तंत्र है, और ρt = ρ₀ Sw^(−n) दर्शाता है कि जल निकलने से प्रतिरोधकता बढ़ती है। मृदा समांतर सतह-चालन जोड़ती है, अतः मृदा-रहित नियम वहाँ विफल होता है, और रंध्र-जल गरम करने से उसकी प्रतिरोधकता घटती है।
  13. अंतर a = 20 m वाला वेनर विन्यास धारा I = 0.5 A हेतु ΔV = 50 mV मापता है। आभासी प्रतिरोधकता, Ω·m में दो दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 12.57

    K = 2π a = 2π × 20 = 125.66 m। ρa = K ΔV/I = 125.66 × 0.050/0.5 = 12.566, जो 12.57 Ω·m है। प्रचलित भूल mV को V में न बदलना है।
  14. एक श्लमबर्जर विन्यास में AB = 200 m व MN = 10 m है, और ज्यामितीय गुणक K = π (L² − l²)/(2l), जहाँ L = AB/2 तथा l = MN/2। 0.8 A धारा हेतु मापा विभवांतर 20 mV है। आभासी प्रतिरोधकता, Ω·m में एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 78.3

    L = 100 m व l = 5 m, अतः K = π (10000 − 25)/(2 × 5) = π × 997.5 = 3133.7 m। ρa = K ΔV/I = 3133.7 × 0.020/0.8 = 78.34 Ω·m, जो 78.3 है। L = 200 (पूरा AB) लेना प्रचलित भूल है।
  15. द्विध्रुव–द्विध्रुव विन्यास में AB = MN = a = 10 m है, और निकटतम इलेक्ट्रोड B व M, n a दूर हैं, n = 2। ज्यामितीय गुणक K = π n (n + 1)(n + 2) a लेने पर K, मीटर में, निकटतम पूर्णांक तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 754

    K = π × 2 × 3 × 4 × 10 = 240π = 753.98 m, अतः 754। गुणक n(n + 1)(n + 2) n के साथ तेज़ी से बढ़ता है, इसीलिए बड़े n हेतु ΔV मापने योग्य रखने के लिए बड़ी धारा चाहिए।
  16. स्वच्छ जल-संतृप्त शैल हेतु आर्ची का नियम ρ₀ = a ρw φ^(−m) है, और आंशिक संतृप्ति पर ρt = ρ₀ Sw^(−n)। a = 1, m = 2, n = 2, ρw = 0.5 Ω·m, रंध्रता φ = 0.2 व Sw = 0.5 लीजिए। शैल की प्रतिरोधकता ρt, Ω·m में, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 50

    ρ₀ = 1 × 0.5 × 0.2⁻² = 0.5/0.04 = 12.5 Ω·m। तब ρt = 12.5 × 0.5⁻² = 12.5 × 4 = 50 Ω·m। n = 2 हेतु आधा जल निकलने से प्रतिरोधकता चौगुनी हो जाती है।
  17. एक ढेर में 5 Ω·m की 30 m परत के ऊपर 20 Ω·m की 10 m परत है। ढेर की अनुदैर्घ्य प्रतिरोधकता, ρL = H/S, जहाँ H कुल मोटाई व S कुल अनुदैर्घ्य चालकत्व है, Ω·m में दो दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 6.15

    H = 40 m व S = 10/20 + 30/5 = 0.5 + 6 = 6.5 S, अतः ρL = 40/6.5 = 6.154, जो 6.15 Ω·m है। अंकगणितीय माध्य (12.5) और ρ का मोटाई-भारित माध्य (8.75, जो ρT है) परतों के अनुदिश बहती धारा हेतु गलत औसत हैं।
  18. काल-प्रक्षेत्र IP मापन में स्थिर प्राथमिक विभव Vp = 1250 mV है और धारा बंद होने के ठीक बाद पढ़ा द्वितीयक विभव Vs = 50 mV है। आभासी आवेश्यता Vs/Vp, mV/V में, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 40

    Vs/Vp = 50/1250 = 0.04, जो 40 mV प्रति V है (समतुल्य रूप में 4 प्रतिशत)। अनुपात विमाहीन है, अतः mV/mV को mV/V में मापकर 40 मिलता है, 0.04 mV/V नहीं।