स्तरिकी: सिद्धांत, सहसंबंध, मात्रात्मक व समस्थानिक विधियाँ, अनुक्रम स्तरिकी तथा भारत में सीमा-समस्याएँ
2. स्तरिकीय इकाइयाँ, सहसंबंध व समय-मापनी
| इकाई का प्रकार | परिभाषा का आधार | औपचारिक श्रेणियाँ |
|---|---|---|
| शैल-स्तरिकीय | शैल-प्रकार व अनुक्रम में स्थिति | समूह, शैल-समूह (formation; मूल इकाई), सदस्य, परत |
| जैव-स्तरिकीय | जीवाश्म-सामग्री | जैव-ज़ोन: परास, अंतराल, समुच्चय, एक्मी व वंश-ज़ोन |
| काल-स्तरिकीय | समय-अवधि में बने शैल | ईओनोथेम, इराथेम, तंत्र, श्रेणी, स्टेज (संगत समय-इकाइयाँ: ईऑन, महाकल्प, कल्प, युग, काल) |
| चुंबकीय-स्तरिकीय | भू-चुंबकीय क्षेत्र के ध्रुवता-उत्क्रमण | ध्रुवता-क्रोन व उप-क्रोन |
काल-स्तरिकीय सीमा किसी निर्दिष्ट खंड के निर्दिष्ट स्तर पर GSSP (Global Boundary Stratotype Section and Point, “गोल्डन स्पाइक”) से परिभाषित होती है: कैम्ब्रियन का आधार फ़ॉर्च्यून हेड, न्यूफ़ाउंडलैंड में चिह्न-जीवाश्म Treptichnus pedum के प्रथम प्रकटन पर रखा गया है। अधिकांश प्रीकैम्ब्रियन में सीमाएँ इसके बजाय सहमत संख्यात्मक आयु (GSSA) हैं; एडियाकरन वह प्रीकैम्ब्रियन कल्प है जिसका GSSP है।
सहसंबंध (correlation) दर्शाता है कि स्तर आयु या स्थिति में समतुल्य हैं। शैल-सहसंबंध (सूचक परतों का अनुरेखण, अनुक्रम व लॉग-आकृतियों का मिलान) शैल-इकाइयों को सहसंबद्ध करता है; जैव-सहसंबंध जीवाश्मों का, और काल-सहसंबंध समस्थानिक आयु, राख-परतों (टेफ़्रा), चुंबकीय उत्क्रमणों, समस्थानिक वक्रों व अनुक्रम-सतहों का उपयोग करता है। केवल सचमुच समय-समतुल्य क्षितिज, जैसे राख-परत या घटना-परत, समकालिक होते हैं, इसलिए अन्य हर सहसंबंध परखी जाने वाली परिकल्पना है।
3. भारतीय स्तरिकी में सहसंबंध का अनुप्रयोग
भारत में वही उपकरण आवरण, बेसिन-किनारों या विवर्तनिकी से अलग हुए अनुक्रमों को जोड़ते हैं। गोंडवाना सुपरग्रुप, जो दामोदर, सोन, महानदी व गोदावरी घाटियों के भ्रंश-बेसिनों का महाद्वीपीय पर्मियन से आरंभिक क्रिटेशियस भराव है, मुख्यतः पादपों से सहसंबद्ध होता है: Glossopteris वनस्पति (पर्मियन), Dicroidium वनस्पति (ट्राइऐसिक) और Ptilophyllum वनस्पति (जुरैसिक से आरंभिक क्रिटेशियस), तथा सरीसृप Lystrosaurus (आरंभिक ट्राइऐसिक पंचेत शैल-समूह) अन्य गोंडवाना भूखंडों से कड़ी का काम करता है।
| दामोदर घाटी गोंडवाना (आरोही क्रम) | लक्षण |
|---|---|
| तलचर | आधारी हिमनदीय टिलाइट व गुटिका-परत, फिर महीन शेल (आरंभिक पर्मियन) |
| करहरबारी व बराकर | बलुआ पत्थर, शेल और निम्न गोंडवाना की मोटी कोयला-स्तरियाँ |
| बैरन मेज़र्स | कार्य-योग्य कोयले रहित आयरनस्टोन शेल |
| रानीगंज | कोयला-युक्त बलुआ पत्थर व शेल (उत्तर पर्मियन) |
| पंचेत | Lystrosaurus सहित लाल व हरिताभ बलुआ पत्थर व मडस्टोन (आरंभिक ट्राइऐसिक) |
प्रोटेरोज़ोइक विंध्यन सुपरग्रुप (सेमरी, कैमूर, रेवा व भांडेर समूह, आरोही क्रम) में सूचक जीवाश्म कम हैं, इसलिए वह शैल-प्रकार, स्ट्रोमैटोलाइट और अंतर्स्तरित टफ़ों की रेडियोधर्मी आयु से सहसंबद्ध होता है। हिमालयी अग्रदेश का शिवालिक समूह (मायोसीन से प्लाइस्टोसीन; निम्न, मध्य व उच्च शिवालिक) स्तनपायियों व चुंबकीय-स्तरिकी से सहसंबद्ध होता है। डेक्कन ट्रैप बाढ़-बैसाल्ट प्रवाह-रसायन व आयु से, तथा प्रवाहों के बीच के जीवाश्म-युक्त इंटरट्रैपियन परतों से सहसंबद्ध होते हैं, जिनके नीचे लमेटा शैल-समूह जैसी इन्फ़्राट्रैपियन परतें हैं।
4. मात्रात्मक स्तरिकी: सांख्यिकीय व प्रायिकतात्मक उपागम
अवसादन दर (sedimentation rate) = मोटाई ÷ समय। दो आयु-निर्धारित क्षितिजों के बीच अंतर्वेशन में स्थिर दर मानी जाती है, अतः आयु एक मॉडल है, प्रेक्षण नहीं। संपीडन से प्राचीन, गहरे दबे स्तर निक्षेपण के समय से पतले हो जाते हैं जब तक विसंपीडन न किया जाए। छोटी अवधियों पर मापी दरें लंबी अवधियों की दरों से अधिक होती हैं (सैडलर प्रभाव) क्योंकि लंबी अवधियों में अधिक अंतराल होते हैं। उदाहरण: 3.00 व 2.40 Ma की 18 m दूर राख-परतें 18 / 0.60 = 30 m/Myr देती हैं, अतः निचली राख से 4.5 m ऊपर का जीवाश्म 4.5 / 30 = 0.15 Myr नवीन, यानी 2.85 Ma का है।
चक्रीय अनुक्रमों को सांख्यिकीय रूप से परखा जाता है। मार्कोव शृंखला (Markov chain) विश्लेषण प्रेक्षित ऊर्ध्व फ़ेसीज़ संक्रमणों की तुलना उनसे करता है जो फ़ेसीज़ के एक-दूसरे का स्वतंत्र रूप से अनुसरण करने पर अपेक्षित होते, और मोटाई या लॉग-श्रेणी का वर्णक्रमीय (फ़ूरिये) विश्लेषण चक्रों की अवधियाँ खोजता है। यदि लगभग 20 kyr के पुरस्सरण चक्र को दर्ज करने वाली परतों का औसत 0.8 m हो, तो दर 0.8 m / 20 kyr = 40 m/Myr है, जो चक्रीय-स्तरिकीय समय-मापनियों का आधार है।
आलेखी सहसंबंध (graphic correlation) (शॉ) खंड X के सापेक्ष खंड Y में समान जीवाश्म-डेटमों के स्तर आलेखित करता है। बिंदु सहसंबंध-रेखा पर गिरते हैं जिसकी ढाल समान समय में Y व X में संचित मोटाइयों का अनुपात है; किसी एक अक्ष के समांतर खंड दूसरे अक्ष पर आलेखित खंड में अंतराल या संघनित अंतराल दर्शाता है, और डेटम संयुक्त मानक पर ले जाए जाते हैं। जब गामा-किरण गणना, δ¹³C या चुंबकीय प्रवृत्ति जैसा कोई सूचकांक दो खंडों में समान प्रतिरूप में बदले, तो शिखर व गर्त मिलाए जाते हैं और मिलान को सहसंबंध गुणांक r से परखा जाता है; उच्च r समय-समतुल्यता का समर्थन करता है, सिद्ध नहीं करता।
परास-चार्ट केवल मिले प्रथम व अंतिम जीवाश्म दर्ज करता है, अतः सच्चा परास लंबा होता है। यदि कोई टैक्सॉन अपने सच्चे परास में यादृच्छिक रूप से फैले H क्षितिजों से ज्ञात हो, तो प्रेक्षित परास R के भिन्न a से अधिक उसका सच्चा छोर प्रेक्षित छोर से आगे होने की प्रायिकता (1 + a)^−(H − 1) है। अतः विश्वास्यता C पर विश्वास्यता अंतराल प्रेक्षित छोर से a × R आगे तक फैलता है, जहाँ a = (1 − C)^(−1/(H − 1)) − 1। उदाहरण: H = 6, R = 40 m व C = 90% से a = 0.1^(−1/5) − 1 = 0.585, अतः अंतराल 23.4 m है। अधिक क्षितिज इसे घटाते हैं, और दुर्लभ टैक्सॉन का अंतराल लंबा होता है, इसलिए उसके आभासी विलोपन का अर्थ कम है। अनेक खंडों के अनेक डेटमों को बहुचर विधियों (यूनिटरी असोसिएशन, बाधित इष्टतमीकरण, श्रेणीकरण व मापन) से क्रमित किया जाता है।
5. समस्थानिक स्तरिकी
समस्थानिक स्तरिकी मापे गए समस्थानिक संकेत का अंशांकित वक्र से मिलान करती है। यह तब काम करती है जब महासागर, जो लगभग एक हज़ार वर्ष में मिश्रित होता है, उस संकेत हेतु समांगी हो, जैसा स्ट्रॉन्शियम (अधिवास काल कई Myr) और कार्बन (लगभग एक लाख वर्ष) के लिए है। नमूने अपरिवर्तित होने चाहिए: ब्रैकियोपोड, बेलेम्नाइट या फ़ोरैमिनिफ़ेरा का निम्न-Mn, निम्न-Fe, सुसंरक्षित कैल्साइट वरीय है, और पुनःक्रिस्टलित माइक्राइट अस्वीकार किया जाता है क्योंकि डायाजेनेटिक तरल भिन्न संकेत वहन करते हैं।
स्ट्रॉन्शियम। समुद्री जल का ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr रेडियोजनित महाद्वीपीय नदी-Sr (उच्च अनुपात) और मैंटल-जनित हाइड्रोथर्मल Sr (निम्न अनुपात) का संतुलन है। यह जुरैसिक में निम्न था और लगभग 40 Ma से आज के 0.7092 तक लगभग लगातार बढ़ा है, जिसे प्रायः आंशिक रूप से उठे हिमालय व तिब्बत के अपक्षय से जोड़ा जाता है। Sr द्वारा काल-निर्धारण वहाँ सटीक है जहाँ वक्र तीव्र ढाल वाला है (ईओसीन से वर्तमान) और वहाँ कमज़ोर जहाँ वह सपाट है या पलटता है। नमूना-अनुपात को पहले मापे गए संदर्भ मानक के ऑफ़सेट से संशोधित किया जाता है, फिर वक्र से पढ़ा जाता है। उदाहरण: जिस खंड पर अनुपात 20 Ma पर 0.708200 से 10 Ma पर 0.708800 तक रैखिक बढ़ता है, वहाँ संशोधित 0.708500 ठीक मध्य में, 15 Ma पर है।
ऑक्सीजन। δ¹⁸O = [(¹⁸O/¹⁶O)नमूना / (¹⁸O/¹⁶O)मानक − 1] × 1000 ‰, कार्बोनेट हेतु VPDB और जल हेतु VSMOW के सापेक्ष। जल गर्म होने पर कैल्साइट का δ¹⁸O घटता है (लगभग 0.2‰ प्रति °C) और हिमचादरें स्थल पर ¹⁶O रोक लें तो बढ़ता है, इसलिए नितलस्थ अभिलेख ताप व हिम-आयतन को मिलाता है। समुद्री समस्थानिक अवस्थाएँ (MIS): विषम संख्याएँ (MIS 1, 5, 7) निम्न δ¹⁸O वाली गर्म हैं, सम संख्याएँ (MIS 2, 4, 6) उच्च δ¹⁸O वाली हिमनदीय; MIS 1 होलोसीन है और MIS 5e अंतिम अंतरहिमनदीय, लगभग 125 ka, जो कक्षीय चक्रों से नियंत्रित है।
कार्बन। समुद्री कार्बोनेट लगभग 0‰ (VPDB) और कार्बनिक पदार्थ लगभग −25 से −30‰ होता है। ऋणात्मक विचलन हल्के कार्बन के निर्मोचन (पैलियोसीन–ईओसीन ताप-उच्चिष्ठ, अंत-पर्मियन) और धनात्मक विचलन कार्बनिक कार्बन के बढ़े निक्षेपण (सीनोमैनियन–टूरोनियन महासागरीय ऑक्सीजन-अभाव घटना) को चिह्नित कर सकता है। चूँकि एक विचलन-आकृति दोहरा सकती है, विचलन सहसंबंध हेतु केवल स्वतंत्र आयु-नियंत्रण के साथ प्रयुक्त होते हैं।
6. अनुक्रम स्तरिकी के सिद्धांत व अनुप्रयोग
अनुक्रम स्तरिकी (sequence stratigraphy) स्तरों को अपरदन या अनिक्षेपण की सतहों और उनके संगत अनुरूप तलों से घिरे, उत्पत्ति में संबद्ध पैकेटों में बाँटती है। ऐकोमोडेशन (accommodation), अवसाद हेतु उपलब्ध स्थान, आपेक्षिक समुद्र-तल वृद्धि से बनता है: यूस्टैटिक परिवर्तन जमा अवतलन घटा उत्थान। उसे क्या भरता है, यह अवसाद-आपूर्ति से नियंत्रित होता है। तटरेखा ऐकोमोडेशन दर A व आपूर्ति दर S के अनुपात का अनुसरण करती है: A/S, 1 से अधिक हो तो प्रतिवर्धन (retrogradation) (स्थल की ओर, अतिक्रमण), 1 के निकट उपचयन (aggradation), 1 से कम हो तो अग्रवर्धन (progradation) (समुद्र की ओर, समुद्र-निवर्तन)। जब आपेक्षिक समुद्र-तल पर्याप्त गिरे, तो वायवीय असंगति, अनुक्रम-सीमा, बनती है और नदियाँ गहरा काटती हैं।
| सिस्टम्स ट्रैक्ट | आपेक्षिक समुद्र-तल व संचयन | विशिष्ट निक्षेप |
|---|---|---|
| निम्न-स्तर (LST) | न्यूनतम, फिर मंद वृद्धि; अग्रवर्धी से उपचयी | बेसिन-तल व ढाल पंखे, कटी घाटियों के भराव |
| अतिक्रमी (TST) | तीव्र वृद्धि; प्रतिवर्धी, ऊपर की ओर गहराता; अधिकतम बाढ़-सतह पर समाप्त | पीछे हटती पैरासीक्वेंस, व्यापक शेल |
| उच्च-स्तर (HST) | अधिकतम के निकट, वृद्धि मंद; उपचयी फिर अग्रवर्धी | ऊपर की ओर छिछले होते क्लिनोफ़ॉर्म, डेल्टा |
| अवरोही-चरण (FSST) | गिरता; बलात् समुद्र-निवर्तन | तीक्ष्ण-आधार वाले तटीय बलुआ पत्थर |
पैरासीक्वेंस (parasequence) समुद्री बाढ़-सतहों से घिरा ऊपर की ओर छिछला होता अनुक्रम है। अधिकतम बाढ़-सतह पर संघनित खंड (condensed section) (मंद निक्षेपण, ग्लौकोनाइट, फ़ॉस्फ़ेट, कार्बनिक-समृद्ध पंक, उच्च गामा-किरण शिखर, प्रचुर सूक्ष्मजीवाश्म) सर्वोत्तम प्रादेशिक सहसंबंध-सूचक है। तृतीय-क्रम अनुक्रम लगभग 0.5 से 3 Myr चलते हैं, और चतुर्थ व पंचम क्रम के चक्र दसियों से सैकड़ों kyr, जो कक्षीय चक्रों से बँधे हैं। भूकंपीय स्तरिकी परावर्तन-समापनों से अनुक्रम पहचानती है: ऑनलैप, डाउनलैप, टॉपलैप व ट्रंकेशन। अनुप्रयोग हैं: भंडार-बलुआ पत्थरों (निम्न-स्तर पंखे, कटी घाटियाँ), स्रोत-शैलों (संघनित खंड) व सीलों (अतिक्रमी शेल) का पूर्वानुमान, और बेसिन-भर का सहसंबंध जो शैल-स्तरिकीय नामों पर निर्भर नहीं।
7. भारतीय स्तरिकी में सीमा-समस्याएँ
सीमा-समस्या तब उठती है जब किसी प्रादेशिक सीमा को वैश्विक सीमा से बाँधा न जा सके। कारण सिद्धांत के विषय हैं: शैलिक सीमाएँ कालांतरित होती हैं; अ-समुद्री स्तरों में वे ज़ोन-जीवाश्म नहीं होते जिन पर समुद्री परिभाषाएँ टिकी हैं; प्रीकैम्ब्रियन शैलों में जीवाश्म नहीं होते, अतः सीमाएँ रेडियोधर्मी आयु पर टिकी हैं; आग्नेय या विवर्तनिक संपर्क खंडों को तोड़ते हैं; और GSSP को ऐसा सूचक (जीवाश्म, समस्थानिक विचलन, राख-परत) चाहिए जिसे भारतीय खंड संरक्षित न रख पाए।
- प्रीकैम्ब्रियन–कैम्ब्रियन। वैश्विक आधार Treptichnus pedum का प्रथम प्रकटन है। लघु हिमालय (क्रोल–ताल अनुक्रम) व स्पीति में सूचक व आयु-नियंत्रण पाना कठिन है, और विंध्यन सुपरग्रुप की आयु व ऊपरी सीमा, कि उसका शीर्ष कैम्ब्रियन तक पहुँचता है या नहीं, विवादित रही है।
- पर्मियन–ट्राइऐसिक। गोंडवाना बेसिनों में रानीगंज–पंचेत संक्रमण महाद्वीपीय है, इसलिए उसे ज़ोन-जीवाश्मों से समुद्री वैश्विक खंड से नहीं बाँधा जा सकता; स्पीति व कश्मीर के गुर्यूल रैविन जैसे समुद्री खंड समस्थानिक व कोनोडॉन्ट प्रमाणों सहित प्रयुक्त होते हैं।
- क्रिटेशियस–पैलियोजीन। डेक्कन विस्फोट वैश्विक सीमा के आर-पार फैले हैं, अतः लावा-ढेर में कोई एकल स्तर सर्वसम्मत नहीं है; इंटरट्रैपियन व इन्फ़्राट्रैपियन परतें जीवाश्म-सीमाएँ देती हैं।
- प्लायोसीन–प्लाइस्टोसीन (चतुर्थक का आधार, लगभग 2.6 Ma)। शिवालिक मोलास महाद्वीपीय है, इसलिए सीमा समुद्री ज़ोन-जीवाश्मों के बजाय चुंबकीय-स्तरिकी से अंशांकित स्तनपायी-ज़ोनों से स्थित की जाती है।
समाधान की विधि सदैव एक ही है: शैलिक सीमा के स्थान पर समकालिक सूचक लें, उसे रेडियोधर्मी या चुंबकीय आयु से बाँधें, और अनिश्चितता बताएँ।
मुख्य बिंदु
- अध्यारोपण, मूल क्षैतिजता, पार्श्विक निरंतरता, अनुप्रस्थ-कर्तन, अंतर्विष्ट व जीव-अनुक्रम स्तरों को क्रमित करते हैं; वाल्थर का नियम ऊर्ध्वाधर को पार्श्विक फ़ेसीज़ परिवर्तन से जोड़ता है। पहले ऊर्ध्व-दिशा जाँचें। असंगतियाँ कोणीय, डिसकन्फ़ॉर्मिटी, नॉनकन्फ़ॉर्मिटी या पैराकन्फ़ॉर्मिटी हैं, प्रत्येक एक समय-अंतराल।
- शैल-समूह शैल-इकाई है और प्रायः कालांतरित होता है; केवल समकालिक क्षितिज (राख, घटना-परतें, GSSP-परिभाषित स्तर) समय-रेखाएँ देते हैं। भारतीय उदाहरण: गोंडवाना Glossopteris, Dicroidium व Ptilophyllum वनस्पतियों से (तलचर से पंचेत), विंध्यन रेडियोधर्मी आयु से, शिवालिक स्तनपायियों व चुंबकीय-स्तरिकी से।
- अवसादन दर मोटाई बटा समय है, अंतर्वेशित आयु स्थिर दर मानती हैं, और अल्प-अवधि दरें दीर्घ-अवधि दरों से अधिक होती हैं (सैडलर प्रभाव)। आलेखी सहसंबंध में ढाल Y की X से मोटाई-अनुपात है। परास-छोर अंतराल a·R तक फैलता है, a = (1 − C)^(−1/(H − 1)) − 1।
- Sr समस्थानिक समुद्री कार्बोनेट का काल-निर्धारण वहाँ करते हैं जहाँ वक्र तीव्र है (ईओसीन से वर्तमान, आज लगभग 0.7092); ऑक्सीजन समस्थानिक ताप जमा हिम-आयतन दर्ज करते हैं (विषम MIS गर्म, सम MIS हिमनदीय); कार्बन विचलन घटनाओं को सहसंबद्ध करते हैं। अपरिवर्तित कैल्साइट व स्वतंत्र आयु-नियंत्रण का उपयोग करें।
- ऐकोमोडेशन आपेक्षिक समुद्र-तल वृद्धि है (यूस्टैसी जमा अवतलन घटा उत्थान); A/S, 1 से अधिक हो तो प्रतिवर्धन और 1 से कम हो तो अग्रवर्धन। ट्रैक्ट LST, TST, HST व FSST हैं, और अधिकतम बाढ़-सतह व उसका संघनित खंड सर्वोत्तम सूचक है। भंडार निम्न-स्तर पंखों व कटी घाटियों में, स्रोत संघनित खंडों में होते हैं।
- भारतीय सीमा-समस्याएँ (प्रीकैम्ब्रियन–कैम्ब्रियन, पर्मियन–ट्राइऐसिक, डेक्कन में क्रिटेशियस–पैलियोजीन, शिवालिक में प्लायोसीन–प्लाइस्टोसीन) कालांतरित शैल-इकाइयों, अ-समुद्री व जीवाश्म-विरल खंडों और लुप्त GSSP-सूचकों से उठती हैं, और रेडियोधर्मी या चुंबकीय आयु से बँधे समकालिक सूचकों से सुलझती हैं।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
एक समतल पड़ा संगुटिकाश्म अपरदन-सतह के आर-पार तीव्र झुकी, वलित बलुआ पत्थर व शेल परतों पर टिका है। यह संपर्क है
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उत्तर: B — कोणीय असंगति, क्योंकि पुरानी परतें नवीन परतों के सापेक्ष झुकी या वलित हैं
जब नवीन परतें अपरदन-सतह के आर-पार झुकी या वलित पुरानी परतों पर टिकी हों, तो संपर्क कोणीय असंगति होता है। डिसकन्फ़ॉर्मिटी में दोनों ओर परतें समांतर चाहिए। नॉनकन्फ़ॉर्मिटी में नीचे आग्नेय या कायांतरित शैल चाहिए, जबकि यहाँ पुराने शैल परतदार अवसादी हैं। पैराकन्फ़ॉर्मिटी में परतें समांतर होती हैं और दृश्य अपरदन नहीं होता, इसलिए उसमें नति का अंतर नहीं हो सकता।एक बोरहोल अनुरूप अनुक्रम (अपरदन-सतह नहीं) को काटता है। आधार से ऊपर की ओर वह नदीय बलुआ पत्थर से ज्वारनदमुखी पंकिल बालू और फिर छिछले-समुद्री शेल तक जाता है। वाल्थर का नियम क्या निहित करता है?
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उत्तर: D — पर्यावरण पास-पास थे, नदीय स्थल की ओर, ज्वारनदमुखी बीच में व समुद्री समुद्र की ओर, और निक्षेपण के दौरान तटरेखा स्थल की ओर खिसकी, यानी अतिक्रमण
वाल्थर का नियम कहता है कि अनुरूप ऊर्ध्वाधर खंड में जो फ़ेसीज़ एक-दूसरे के बाद आएँ, वे निक्षेपण के समय पास-पास थे। नदीय, ज्वारनदमुखी व समुद्री पर्यावरण स्थल से समुद्र की ओर व्यवस्थित हैं, अतः आधार से शीर्ष तक नदीय से समुद्री में परिवर्तन का अर्थ है कि समुद्री पर्यावरण स्थल पर आगे बढ़ा: तटरेखा का स्थल-ओर खिसकाव, यानी अतिक्रमण। भ्रामक उत्तर इसे उलट देता है, क्योंकि शीर्ष का पर्यावरण आधार के पर्यावरण से समुद्र की ओर तभी होता है जब तटरेखा स्थल की ओर खिसक चुकी हो। नियम अनुरूप ऊर्ध्वाधर परिवर्तनों की अनुमति देता है और असंगतियों की माँग नहीं करता।शैल-प्रकार में एकसमान बलुआ पत्थर शैल-समूह का समुद्र से स्थल की ओर 150 km अनुरेखण किया जाता है। उसके ऊपर व नीचे की ज्वालामुखीय राख-परतें दिखाती हैं कि शैल-समूह स्थल-छोर पर 1.5 Myr नवीन है। सही निष्कर्ष क्या है?
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उत्तर: A — शैल-समूह कालांतरित है, संभवतः अतिक्रमी बलुआ पत्थर, अतः उसका आधार व शीर्ष समय-रेखाएँ नहीं हैं
शैल-समूह शैल-प्रकार से परिभाषित शैल-स्तरिकीय इकाइयाँ हैं, आयु से नहीं, और अग्रसर तटरेखा वही बलुआ पत्थर स्थल की ओर क्रमशः नवीन जमाती है। राख-परतें समकालिक सूचक हैं और आयु का अधिक विश्वसनीय प्रमाण हैं। निश्चित आयु काल-स्तरिकीय इकाइयों की होती है, शैल-समूहों की नहीं, और शैल-समूह सैकड़ों किलोमीटर तक फैल सकता है।प्रायद्वीपीय भारत के पर्मियन निम्न गोंडवाना स्तरों (तलचर से रानीगंज) की विशेषता कौन-सा जीवाश्म पादप-समुच्चय है?
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उत्तर: C — Glossopteris वनस्पति, Gangamopteris सहित, गोंडवाना भूखंडों का बीज-फ़र्न समुच्चय
Glossopteris वनस्पति, Gangamopteris सहित, गोंडवाना का विशिष्ट पर्मियन पादप-समुच्चय है, जिसमें भारत की तलचर से रानीगंज परतें शामिल हैं। Dicroidium वनस्पति ट्राइऐसिक की है, Ptilophyllum वनस्पति जुरैसिक से आरंभिक क्रिटेशियस की, और Archaeopteris भिन्न समय व क्षेत्र का डेवोनियन पादप है।एक आलेखी-सहसंबंध आलेख में, जिसमें खंड X क्षैतिज अक्ष पर और खंड Y ऊर्ध्वाधर अक्ष पर है, जीवाश्म-डेटम पहले ढाल 2.0 की सरल रेखा पर, फिर एक ऊर्ध्वाधर खंड पर, फिर पुनः ढाल 2.0 की रेखा पर गिरते हैं। कौन-सा निर्वचन सही है?
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उत्तर: B — Y ने समान समय में X की दोगुनी मोटाई संचित की, और ऊर्ध्वाधर खंड वह समय है जो Y में है पर X में लुप्त या संघनित है
सहसंबंध-रेखा की ढाल समान समय में X की प्रति इकाई मोटाई पर Y की मोटाई है, अतः ढाल 2.0 का अर्थ है कि Y में दोगुना शैल संचित हुआ। ऊर्ध्वाधर खंड पर Y की मोटाई बढ़ती है जबकि X की नहीं: वह समय Y में उपस्थित है पर X में लुप्त (अंतराल) या अत्यंत संघनित है। जो विकल्प X को तेज़ खंड बताता है वह दरों और अंतराल वाले खंड दोनों को उलट देता है; अन्य ढाल को आयु या पूर्ण सहसंबंध से भ्रमित करते हैं।एक गहरे-समुद्री नितलस्थ फ़ोरैमिनिफ़ेरा δ¹⁸O अभिलेख में लगभग 20 ka पर उच्च और लगभग 125 ka पर निम्न मान हैं। कौन-सा पाठ सही है?
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उत्तर: C — 20 ka का अंतराल हिमनदीय था, जब हिमचादरें स्थल पर हल्की ऑक्सीजन-16 जमा किए थीं, और लगभग 125 ka गर्म अंतरहिमनदीय था
वाष्पन-अवक्षेपण विभाजन हल्की ¹⁶O को हिमचादरों में जमा करता है, इसलिए हिमनदीय महासागर, और उनमें बना कैल्साइट, ¹⁸O से समृद्ध होते हैं और उच्च δ¹⁸O दिखाते हैं; ठंडा जल प्रभाव बढ़ाता है। लगभग 20 ka के उच्च मान अंतिम हिमनद उच्चिष्ठ (MIS 2) से और लगभग 125 ka के निम्न मान अंतिम अंतरहिमनदीय (MIS 5e) से मेल खाते हैं। जो विकल्प कहता है कि बढ़ती हिमचादरें ऑक्सीजन-18 हटाती हैं, वह विभाजन को उलट देता है: हिम हल्का समस्थानिक हटाता है, भारी नहीं।एक मायोसीन परत के दो नमूनों का आयु हेतु ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr विश्लेषण किया जाता है। नमूना P उच्च Mn/Sr अनुपात वाला पुनःक्रिस्टलित माइक्राइट है। नमूना R निम्न Mn व Fe वाला अपुनःक्रिस्टलित कैल्साइट ब्रैकियोपोड कवच है। P का अनुपात R से काफ़ी अधिक आता है। कौन-सी प्रक्रिया सही है?
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उत्तर: A — नमूना R का उपयोग करें, क्योंकि भिन्न Sr संघटन वाले डायाजेनेटिक तरलों ने संभवतः परिवर्तित माइक्राइट का अनुपात बदल दिया है
उच्च Mn/Sr अनुपात व पुनःक्रिस्टलित गठन डायाजेनेटिक परिवर्तन का संकेत हैं, जिसमें भिन्न, प्रायः अधिक रेडियोजनित, Sr संघटन वाले तरल मूल अनुपात को बदल देते हैं। ब्रैकियोपोड का सुसंरक्षित निम्न-Mn, निम्न-Fe कैल्साइट समुद्री जल का मान बनाए रखता है और उपयोग हेतु सही नमूना है। बाद के तरलों से साम्य मायोसीन समुद्री जल से साम्य नहीं है, औसत लेना अच्छे मान को बुरे से मिलाता है, और Sr की मात्रा परिवर्तित अनुपात को अधिक सटीक नहीं बनाती।किसी कूप-खंड में अधिकतम बाढ़-सतह की सर्वोत्तम पहचान कौन-सा संयोजन कराता है?
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उत्तर: D — ग्लौकोनाइटी, कार्बनिक-समृद्ध मडस्टोन का पतला संघनित अंतराल, गामा-किरण शिखर सहित, जिसके नीचे प्रतिवर्धी और ऊपर अग्रवर्धी परतें हैं
अधिकतम बाढ़-सतह प्रतिवर्धन से अग्रवर्धन के मोड़ पर होती है, जहाँ शेल्फ़ को अवसाद-आपूर्ति न्यूनतम होती है। उसे संघनित खंड चिह्नित करता है: मंद निक्षेपण, ग्लौकोनाइट, कार्बनिक-समृद्ध पंक, गामा-किरण शिखर व प्रचुर सूक्ष्मजीवाश्म। तीक्ष्ण आधार वाला ऊपर की ओर स्थूल होता बलुआ पत्थर अवरोही-चरण ट्रैक्ट का है, अपरदन-सतह पर स्थूल अवशिष्ट अनुक्रम-सीमा या रेविनमेंट को दर्शाता है, और ब्लॉकनुमा निम्न-गामा बलुआ पत्थर निम्न-स्तर निक्षेप है।प्रायद्वीपीय भारत के गोंडवाना बेसिनों में पर्मियन–ट्राइऐसिक सीमा को वैश्विक समुद्री परिभाषा से बाँधना कठिन क्यों है?
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उत्तर: B — अनुक्रम महाद्वीपीय है और उसमें वे समुद्री ज़ोन-जीवाश्म नहीं हैं जो वैश्विक सीमा परिभाषित करते हैं, इसलिए अन्य प्रमाण चाहिए
वैश्विक सीमा समुद्री खंडों में कोनोडॉन्ट व समस्थानिक प्रमाणों से परिभाषित है। रानीगंज–पंचेत संक्रमण महाद्वीपीय है, इसलिए समुद्री सूचक लुप्त है और सहसंबंध पादपों, Lystrosaurus जैसे कशेरुकियों व आयु पर, तथा स्पीति व कश्मीर के गुर्यूल रैविन जैसे समुद्री खंडों पर निर्भर है। गोंडवाना शैल प्रबल रूप से कायांतरित नहीं हैं, दोनों शैल-समूह शैल-प्रकार व जीवाश्मों में भिन्न हैं, और गोंडवाना भारत उच्च दक्षिणी अक्षांशों में था।स्तरिकीय सिद्धांतों व इकाइयों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — GSSP किसी निर्दिष्ट खंड के निर्दिष्ट बिंदु पर काल-स्तरिकीय सीमा परिभाषित करता है; B — अधिकांश प्रीकैम्ब्रियन में सीमाएँ GSSP के बजाय सहमत संख्यात्मक आयु से परिभाषित होती हैं
GSSP किसी खंड के एक बिंदु पर सीमा तय करता है, और प्रीकैम्ब्रियन सीमाएँ अधिकांशतः सहमत संख्यात्मक आयु (GSSA) हैं। शैल-समूह मूल शैल-स्तरिकीय इकाई है, जो शैल-प्रकार से परिभाषित है, समय से नहीं। एकरूपतावाद कहता है कि वही भौतिक नियम व प्रक्रियाएँ समय में कार्य करती हैं, पर दरें भिन्न हो सकती हैं, इसलिए समान-दर वाला कथन उसे बढ़ा-चढ़ाकर कहता है।भारत की स्तरिकी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — दामोदर घाटी में तलचर शैल-समूह, जो हिमनदीय टिलाइट से आरंभ होता है, कोयला-युक्त बराकर शैल-समूह के नीचे स्थित है; C — विंध्यन सुपरग्रुप के समूह, आरोही क्रम में, सेमरी, कैमूर, रेवा व भांडेर हैं; D — शिवालिक समूह मायोसीन से प्लाइस्टोसीन का महाद्वीपीय अग्रदेश अनुक्रम है, जिसकी आयु स्तनपायियों व चुंबकीय-स्तरिकी से निर्धारित होती है
तलचर (आधार पर टिलाइट) कोयला-युक्त बराकर के नीचे है; विंध्यन समूह सेमरी, कैमूर, रेवा, भांडेर के क्रम में आरोही हैं; और शिवालिक महाद्वीपीय अग्रदेश मोलास है जिसकी आयु स्तनपायियों व चुंबकीय ध्रुवता से निर्धारित होती है। पंचेत (आरंभिक ट्राइऐसिक) रानीगंज (उत्तर पर्मियन) के ऊपर है, अतः उन्हें उलटने वाला कथन गलत है।समस्थानिक स्तरिकी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — समुद्री जल ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr द्वारा काल-निर्धारण वहाँ सर्वाधिक सटीक है जहाँ वक्र तीव्र ढाल वाला व एकदिष्ट हो, जैसा सीनोज़ोइक के अधिकांश भाग में है; B — ऋणात्मक δ¹³C विचलन समस्थानिक रूप से हल्के कार्बन के निर्मोचन को चिह्नित कर सकता है, जैसा पैलियोसीन–ईओसीन ताप-उच्चिष्ठ पर; D — चूँकि महासागर लगभग एक हज़ार वर्ष में मिश्रित होता है जबकि Sr का अधिवास काल कई Myr है, किसी एक समय पर Sr अनुपात विश्वभर में एक समान होता है
Sr द्वारा काल-निर्धारण को तीव्र एकदिष्ट वक्र चाहिए; ऋणात्मक δ¹³C विचलन PETM जैसे हल्के कार्बन के निर्मोचन को चिह्नित करते हैं; और Sr अनुपात विश्वव्यापी रूप से एक समान है क्योंकि अधिवास काल मिश्रण-काल से कहीं अधिक है। सम-संख्या वाली समुद्री समस्थानिक अवस्थाएँ उच्च δ¹⁸O वाली हिमनदीय हैं, और विषम-संख्या वाली अंतरहिमनदीय, अतः वह कथन उलटा है।अनुक्रम स्तरिकी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: C — जहाँ यूस्टैटिक समुद्र-तल 25 m/Myr गिरता है पर शेल्फ़ 40 m/Myr धँसता है, वहाँ आपेक्षिक समुद्र-तल फिर भी बढ़ता है और ऐकोमोडेशन बनता रहता है; D — अधिकतम बाढ़-सतह प्रतिवर्धी अतिक्रमी सिस्टम्स ट्रैक्ट को अग्रवर्धी उच्च-स्तर सिस्टम्स ट्रैक्ट से अलग करती है
आपेक्षिक समुद्र-तल परिवर्तन यूस्टैसी जमा अवतलन है, अतः 25 m/Myr की यूस्टैटिक गिरावट व 40 m/Myr का अवतलन 15 m/Myr की निवल वृद्धि है, और अधिकतम बाढ़-सतह प्रतिवर्धी TST व अग्रवर्धी HST के बीच का मोड़ है। A/S, 1 से अधिक होने पर प्रतिवर्धन होता है, अग्रवर्धन नहीं, और मॉडल अनुक्रम-सीमा को भिन्न स्थान पर रखते हैं।एक खंड में दो आयु-निर्धारित राख-परतें हैं: निचली, 20 m पर, 6.00 Ma की और ऊपरी, 56 m पर, 4.50 Ma की है। 6 m मोटी एक टर्बिडाइट, जो भूवैज्ञानिक दृष्टि से तात्कालिक रूप से निक्षेपित हुई, 25 m व 31 m के बीच स्थित है। टर्बिडाइट को छोड़कर निक्षेपण स्थिर दर से हुआ, और सभी मोटाइयाँ विसंपीडित हैं। एक जीवाश्म-क्षितिज 39 m पर है। इस क्षितिज की आयु ____ Ma है (उत्तर दशमलव के दो स्थानों तक दें)।
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उत्तर: 5.35
राख-परतों के बीच मोटाई 36 m है, जिसमें 6 m तात्कालिक टर्बिडाइट है, अतः 30 m का निक्षेपण 6.00 − 4.50 = 1.50 Myr में हुआ, यानी 20 m/Myr की दर। जीवाश्म निचली राख से 39 − 20 = 19 m ऊपर है, जिसके नीचे 6 m टर्बिडाइट है, अतः राख से उसे अलग करने वाला समय-धारक शैल 13 m है। यह 13 / 20 = 0.65 Myr है, और आयु 6.00 − 0.65 = 5.35 Ma है। टर्बिडाइट को अनदेखा करने पर 5.21 Ma आता है।एक ट्राइलोबाइट प्रजाति अपने सच्चे परास में यादृच्छिक रूप से फैले H = 9 क्षितिजों से ज्ञात है, और प्रेक्षित परास खंड का R = 30 m है। सच्चे छोर के प्रेक्षित छोर से R के भिन्न a से अधिक आगे होने की प्रायिकता (1 + a)^−(H − 1) है। सच्ची अंतिम उपस्थिति की स्थिति हेतु एकपक्षीय 95% विश्वास्यता अंतराल सबसे ऊँची ज्ञात उपस्थिति से आगे ____ m तक फैलता है (उत्तर दशमलव के एक स्थान तक दें)।
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उत्तर: 13.6
95% विश्वास्यता हेतु अतिक्रमण-प्रायिकता 0.05 है, अतः (1 + a)^−8 = 0.05 और 1 + a = 0.05^(−1/8) = 1.4542, जिससे a = 0.4542। अंतराल अतः a × R = 0.4542 × 30 = 13.63, यानी सबसे ऊँची ज्ञात उपस्थिति से 13.6 m आगे तक फैलता है। घातांक H − 1 के स्थान पर H लेने से छोटा, गलत मान आता है।मान लें कि समुद्री जल ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr 20 Ma पर 0.708200 से 10 Ma पर 0.708800 तक रैखिक रूप से बढ़ता है। एक सुसंरक्षित ब्रैकियोपोड कैल्साइट का मान उस विश्लेषण-रन में 0.708520 आता है जिसमें संदर्भ मानक, जिसका स्वीकृत मान 0.710250 है, 0.710270 मापा गया। नमूने को उसी ऑफ़सेट से संशोधित करने के बाद उसकी आयु ____ Ma है।
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उत्तर: 15
मानक ने स्वीकृत 0.710250 के सापेक्ष 0.710270 पढ़ा, यानी +0.000020 का ऑफ़सेट, अतः संशोधित नमूना-अनुपात 0.708520 − 0.000020 = 0.708500। रैखिक खंड पर अनुपात 10 Myr में 0.000600 बढ़ता है, अतः 0.708500, 20 Ma से 10 Ma की ओर (0.708500 − 0.708200) / 0.000600 = 0.5 के अंश पर है, यानी 15 Ma की आयु। संशोधन के बिना आयु 20 − 5.33 = 14.7 Ma आती।एक नितलस्थ फ़ोरैमिनिफ़ेरा δ¹⁸O अभिलेख अंतरहिमनदीय में 3.4‰ से हिमनदीय में 4.6‰ तक बढ़ता है। मान लें कि समुद्र-तल 70 m गिरा, समुद्र-तल की प्रत्येक 10 m गिरावट समुद्री जल, और अतः कैल्साइट, का δ¹⁸O 0.10‰ बढ़ाती है, और शेष परिवर्तन ताप के कारण है, जिसमें कैल्साइट का δ¹⁸O प्रति °C 0.25‰ बदलता है। गहरे जल का शीतलन ____ °C है।
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उत्तर: 2
कुल परिवर्तन 4.6 − 3.4 = 1.2‰ है। हिम-आयतन भाग 7 × 0.10 = 0.70‰ है, जिससे ताप हेतु 1.2 − 0.70 = 0.50‰ बचता है। 0.25‰ प्रति °C पर यह 0.50 / 0.25 = 2.0 °C शीतलन है। पूरे 1.2‰ को ताप का मानने पर 4.8 °C आता, जो प्रचलित अतिआकलन है।150 m मोटा एक तृतीय-क्रम अनुक्रम 2.4 Myr में संचित हुआ और केवल निम्न-स्तर, अतिक्रमी व उच्च-स्तर सिस्टम्स ट्रैक्टों से बना है। निम्न-स्तर ट्रैक्ट 0.4 Myr चला और 15 m/Myr की दर से संचित हुआ; अतिक्रमी ट्रैक्ट 0.6 Myr चला और 30 m/Myr की दर से संचित हुआ; उच्च-स्तर ट्रैक्ट शेष समय घेरता है। उच्च-स्तर ट्रैक्ट की औसत संचयन दर ____ m/Myr है।
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उत्तर: 90
निम्न-स्तर ट्रैक्ट 0.4 × 15 = 6 m मोटा है और अतिक्रमी ट्रैक्ट 0.6 × 30 = 18 m। अतः उच्च-स्तर ट्रैक्ट में 150 − 6 − 18 = 126 m है। उसकी अवधि 2.4 − 0.4 − 0.6 = 1.4 Myr है, अतः उसकी औसत दर 126 / 1.4 = 90 m/Myr है, जो तीनों में सर्वाधिक है, जैसा अग्रवर्धी उच्च-स्तर पाटन से अपेक्षित है।